देश में तीन कफ सिरप पर बैन, नें डॉक्टरों ने बच्चों की खांसी में क्या करने और क्या न करने की दी सलाह
दिल्ली : पिछले महीने कफ सिरप से हुई कम से कम 17 बच्चों की मौत के बाद पूरे देश में डर का माहौल है. बच्चों की जान जाने के बाद अब सरकार भी एक्शन में आ गई है. सरकार ने एक्शन लेते हुए देश में 3 कफ सिरप बैन कर दिए हैं.
दिल्ली : पिछले महीने कफ सिरप से हुई कम से कम 17 बच्चों की मौत के बाद पूरे देश में डर का माहौल है. बच्चों की जान जाने के बाद अब सरकार भी एक्शन में आ गई है. सरकार ने एक्शन लेते हुए देश में 3 कफ सिरप बैन कर दिए हैं. साथ ही 5 तरह के पदार्थ जो कि कफ सिरप जैसी दवाओं में आमतौर पर पाए जाते हैं उनसे बचने की हिदायत दी है. इसी बारे में जब हमने दिल्ली के जाने माने चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. तरुण सिंह से बात की तो उन्होंने कफ सिरप के बारे में विस्तार से जानकारी दी. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कफ सिरप को लेकर क्या सावधानी बरतनी चाहिए.
यह तीन कफ सिरप हुए बैन
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को सूचित किया है कि तीन कफ सिरप- कोल्ड्रिफ (Coldrif), रेस्पिफ्रेशटीआर (RespifreshTR) और रिलाइफ (ReLife)- को मेडिकल स्टोर्स से वापस मंगा लिया गया है और निर्माताओं को इनका उत्पादन रोकने का आदेश दिया गया है. इससे पहले CDSCO ने बुधवार को WHO को बताया था कि इनमें से किसी भी कफ सिरप का भारत से दूसरे देशों में निर्यात नहीं किया गया है.
बता दें कि कोल्ड्रिफ (Coldrif) का उत्पादन तमिलनाडु स्थित श्रीसन फार्मास्युटिकल निर्माता द्वारा किया गया था. प्रयोगशाला परीक्षणों से पता चला कि सिरप में डायथिलीन ग्लाइकोल की मात्रा 48.6% थी, जो भारतीय अधिकारियों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) दोनों द्वारा निर्धारित 0.1% की अनुमेय सीमा से कहीं अधिक थी. इसके अलावा गुजरात में रेडनेक्स फार्मास्यूटिकल्स द्वारा निर्मित रेस्पिफ्रेशटीआर (RespifreshTR) कफ सिरप 1.342% डीईजी से दूषित पाया गया और गुजरात में शेप फार्मा द्वारा निर्मित रिलाइफ (ReLife) कफ सिरप में भी 0.616% डीईजी पाया गया है.
कफ सिरप में पाए जाने वाले इन 5 तत्वों से बचें
डॉ. तरुण सिंह ने बताया कि कोडीन, खांसी को दबाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक ओपिओइड, दुरुपयोग होने पर लत और श्वसन विफलता का कारण बन सकता है. एफडीए (FDA) और डब्ल्यूएचओ (WHO) ने 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इसके उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया है. एफडीए (FDA) ने कहा कि जिन बच्चों ने कफ सिरप में इस पदार्थ का सेवन किया, उनमें उथली सांस लेने, कठिनाई या शोर से सांस लेने और भ्रम के लक्षण दिखाई दिए.
डेक्सट्रोमेथॉर्फ़न (डीएक्सएम) एक सामान्य खांसी दबाने वाली दवा है. छोटी खुराक में सुरक्षित लेकिन बड़ी मात्रा में खतरनाक है. यह ज्ञात है कि इसका दुरुपयोग करने पर मतिभ्रम होता है और हृदय गति बढ़ जाती है. अधिक मात्रा से कोमा या भ्रम की स्थिति भी हो सकती है. प्रोमेथाज़िन एक शामक औषधि है जिसे अक्सर कोडीन के साथ मिलाया जाता है. एफडीए ने 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में घातक श्वसन अवसाद के जोखिम के कारण इसके उपयोग के लिए एक ब्लैक बॉक्स चेतावनी जोड़ी है.
इसके अत्यधिक उपयोग से उनींदापन, धीमी गति से सांस लेना और भ्रम हो सकता है. बेनाड्रिल जैसे कई खांसी और ठंडे सिरप में पाया जाने वाला डिफेनहाइड्रामाइन, अधिक मात्रा में लेने पर हृदय ताल की समस्याएं, मतिभ्रम, दौरे और यहां तक कि मौत का कारण बन सकता है. एफडीए ने 2020 में उच्च खुराक के खिलाफ चेतावनी दी.
वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार, डायथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) एक रंगहीन, गंधहीन रसायन है जिसका उपयोग औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है और यह मानव उपभोग के लिए नहीं है. यह भ्रम, दौरे और मेटाबोलिक एसिडोसिस का कारण बन सकता है, जो इलाज न होने पर घातक हो सकता है. इसके लक्षण आमतौर पर सेवन के 24-72 घंटों के भीतर दिखाई देते हैं, जिसके लिए तत्काल इलाज की आवश्यकता होती है.(एजेंसी)
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