लाडली बहना योजना की किश्त से आत्मनिर्भरता का संदेश, मंदसौर की महिलाओं ने पेश की नई मिसाल

MP News : मध्यप्रदेश सरकार की लाडली बहना योजना को जब लागू किया गया था, तब इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक संबल देना था. सरकार को उम्मीद थी कि इससे घरेलू स्तर पर महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी और सामाजिक सुरक्षा का भाव बढ़ेगा.

लाडली बहना योजना की किश्त से आत्मनिर्भरता का संदेश, मंदसौर की महिलाओं ने पेश की नई मिसाल

MP News : मध्यप्रदेश सरकार की लाडली बहना योजना को जब लागू किया गया था, तब इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक संबल देना था. सरकार को उम्मीद थी कि इससे घरेलू स्तर पर महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी और सामाजिक सुरक्षा का भाव बढ़ेगा. लेकिन यह योजना समाज के लिए भी सामूहिक ताकत बन सकती है, इसका उदाहरण मंदसौर जिले से सामने आया है. यहां महिलाओं ने व्यक्तिगत लाभ से आगे बढ़कर योजना की एक किश्त समाजहित में समर्पित कर दी. यह पहल न केवल योजना की सार्थकता को साबित करती है, बल्कि ग्रामीण सामाजिक संरचना में महिलाओं की निर्णायक भूमिका को भी उजागर करती है.

लाडली बहना योजना का राजनीतिक और सामाजिक असर पहले ही देखा जा चुका है. चुनावी दौर में इस योजना ने सरकार को सीधा लाभ पहुंचाया. मगर मंदसौर के सुवासरा विधानसभा क्षेत्र के झांगरिया गांव की महिलाओं ने इसे सिर्फ सरकारी सहायता तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने योजना की राशि को सामूहिक विकास का माध्यम बनाया. यह कदम बताता है कि यदि योजनाओं का सही दिशा में उपयोग हो, तो वे समाज में स्थायी बदलाव की नींव रख सकती हैं.

गांव की पहल, समाज का संकल्प

सुवासरा विधानसभा के झांगरिया गांव में साहू समाज के करीब 34 परिवार रहते हैं. लंबे समय से समाज में होने वाले शादी समारोह, धार्मिक आयोजन और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए टेंट और बर्तन किराए पर मंगाने पड़ते थे. यह खर्च कई परिवारों के लिए आर्थिक बोझ बन जाता था. इसी समस्या को लेकर समाज की बैठक हुई, जिसमें बर्तन खरीदने के लिए चंदा एकत्र करने का प्रस्ताव रखा गया.

महिलाओं का फैसला बना उदाहरण

बैठक की जानकारी जब महिलाओं तक पहुंची, तो रोजाना भजन कीर्तन के लिए एकत्र होने वाली महिलाओं ने खुद पहल करने का निर्णय लिया. सभी 34 महिलाओं ने लाडली बहना योजना से मिली 1500-1500 रुपये की एक किश्त समाज को दान देने पर सहमति जताई. देखते ही देखते 51 हजार रुपये की राशि एकत्र हो गई. इस रकम से समाज के लिए बर्तन, टेंट से जुड़ा जरूरी सामान खरीदा गया.

समाज को हुआ सीधा आर्थिक लाभ

महिलाओं द्वारा खरीदे गए बर्तनों का उपयोग अब समाज के कार्यक्रमों में किया जा रहा है. हाल ही में गांव में हुए एक युवक के विवाह समारोह में इन बर्तनों का इस्तेमाल हुआ. इससे परिवार को करीब 10 हजार रुपये की सीधी बचत हुई. आगे होने वाले सभी आयोजनों में यह बचत समाज के हर परिवार को मिलेगी. इससे सामाजिक खर्च में स्थायी कमी आएगी.

समाज की युवा पीढ़ी और कलेक्‍टर भी हुईं मुरीद 

समाज के युवक कन्हैयालाल और किशोर का कहना है कि महिलाओं की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी होगी. अब समाज आत्मनिर्भर बन रहा है. मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग ने भी इस पहल की सराहना की है. उन्होंने कहा कि यह उदाहरण दिखाता है कि सरकारी योजनाएं सामूहिक सोच से समाज को नई दिशा दे सकती हैं. प्रशासन स्तर पर महिलाओं को सम्मानित करने की बात भी कही गई है.

सामाजिक संदेश और भविष्य की राह

झांगरिया गांव की महिलाओं ने यह साबित किया है कि सरकारी योजनाएं केवल व्यक्तिगत सहायता तक सीमित नहीं हैं. यदि सामूहिक सोच के साथ इनका उपयोग किया जाए, तो वे सामाजिक पूंजी में बदल सकती हैं. यह पहल अन्य गांवों और समाजों के लिए प्रेरणा बन सकती है. महिलाओं का यह कदम आत्मनिर्भर समाज की दिशा में मजबूत संदेश देता है.(एजेंसी)