स्वस्थ जीवन का सूत्र: संतुलित आहार से बनी रहती है शरीर की अग्नि स्थिर
Health News : आयु्र्वेद के अनुसार, सही मात्रा और संतुलित भोजन शरीर की अग्नि को स्थिर बनाए रखता है, जिससे पाचन तंत्र सही तरीके से काम करता है और शरीर ऊर्जा से भरपूर रहता है। हालांकि अधिकांश लोग अपनी भूख की बजाय आदत या रुचि के अनुसार भोजन करते हैं
Health News : आयु्र्वेद के अनुसार, सही मात्रा और संतुलित भोजन शरीर की अग्नि को स्थिर बनाए रखता है, जिससे पाचन तंत्र सही तरीके से काम करता है और शरीर ऊर्जा से भरपूर रहता है। हालांकि अधिकांश लोग अपनी भूख की बजाय आदत या रुचि के अनुसार भोजन करते हैं और अक्सर तय सीमा से अधिक खा लेते हैं। इस आदत के कारण शरीर बोझिल महसूस करता है, आलस और नींद का अहसास होता है, पेट भारी हो जाता है और गैस या कब्ज जैसी परेशानियां उत्पन्न होती हैं।
आयुर्वेद में भोजन की मात्रा का विशेष महत्व बताया गया है। आमाशय का आधा भाग ठोस भोजन के लिए, चौथाई भाग पेय के लिए और चौथाई भाग रिक्त रखा जाना चाहिए। ठोस भोजन में अनाज, दाल, चावल और सब्जियां शामिल होती हैं। पेय में गुनगुना पानी, छाछ या हल्का सूप लिया जा सकता है। रिक्त स्थान भोजन को पचाने, अग्नि को स्थिर रखने और शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने के लिए आवश्यक माना गया है।
संतुलित भोजन करने से न केवल शरीर स्थिर रहता है, बल्कि मन भी शांत रहता है और लगभग चार घंटे बाद प्राकृतिक रूप से भूख महसूस होती है। आयुर्वेद के अनुसार भूख लगने पर सीमित मात्रा में भोजन करना शरीर के लिए औषधि का काम करता है। यह सभी अंगों तक पोषक तत्वों को सही तरीके से पहुंचाता है और शरीर की कार्यप्रणाली को संतुलित करता है। खाने का समय और मात्रा भी शरीर के विज्ञान के अनुसार तय की जाती है, जिससे पाचन प्रणाली और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों मजबूत बने रहते हैं।
विशेष रूप से रात का भोजन हल्का होना चाहिए, क्योंकि यह समय शरीर अपनी कोशिकाओं की मरम्मत और ऊर्जा संचय में बिताता है। भारी या देर रात का भोजन पाचन तंत्र पर दबाव डालता है और शरीर सुस्त महसूस करता है। हल्का और सुपाच्य भोजन न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक ताजगी और ऊर्जा भी बनाए रखता है।
इस प्रकार, आयुर्वेद के सिद्धांत बताते हैं कि संतुलित भोजन, समय पर सेवन और शरीर की प्राकृतिक जरूरतों का सम्मान जीवन और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। यदि इन नियमों का पालन किया जाए, तो शरीर मजबूत, मन प्रसन्न और पाचन तंत्र सक्रिय रहता है। सही मात्रा में भोजन करने की यह आदत लंबी उम्र, रोग प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक शांति प्रदान करती है।
आधुनिक जीवन की तेज रफ्तार में यह प्राकृतिक और सरल तरीका हमें स्वस्थ, ऊर्जावान और स्फूर्तिदायक जीवन जीने में मदद करता है। बता दें कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लोग अक्सर भोजन को केवल पेट भरने का साधन समझ बैठते हैं, जबकि आयुर्वेद में इसे जीवन और स्वास्थ्य के लिए एक अनुशासन माना गया है।(एजेंसी)
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