2.56 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी: पूर्व शाखा प्रबंधक समेत वकील और कंपनी मालिकों पर एफआईआर

इन्दौर : एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान द्वारा एन.पी.ए. घोषित कर सीज की जा संपति के कूट-रचित दस्तावेजों का उपयोग कर कैनरा बैंक से ऋण ले 2.56 करोड़ की धोखाधड़ी की गई। मामले में जांच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि जिस व्यावसायिक प्रतिष्ठान के नाम पर ऋण लिया गया वह अस्तित्व में ही नहीं है।

2.56 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी: पूर्व शाखा प्रबंधक समेत वकील और कंपनी मालिकों पर एफआईआर

- कैनरा बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक, वकील और कंपनी मालिकों के खिलाफ एफआईआर

इन्दौर : एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान द्वारा एन.पी.ए. घोषित कर सीज की जा संपति के कूट-रचित दस्तावेजों का उपयोग कर कैनरा बैंक से ऋण ले 2.56 करोड़ की धोखाधड़ी की गई। मामले में जांच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि जिस व्यावसायिक प्रतिष्ठान के नाम पर ऋण लिया गया वह अस्तित्व में ही नहीं है। मामला कैनरा बैंक नवलखा शाखा का है जहां 2 करोड 56 लाख रूपए की धोखाधड़ी की गई।‌ मामले में शिकायत जांच के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) इंदौर ने मेसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एंड इंजीनियरिंग के प्रोपरायटर, बैंक के शाखा प्रबंधक एवं पैनल एडवोकेट के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

ईओडब्ल्यू एसपी रामेश्वर सिंह यादव के अनुसार कैनरा बैंक के साथ ऋण के नाम पर की गई इस 2.56 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में ईओडब्ल्यू ने धारा 420, 467, 468, 471,120 एवं भ्रष्टाचार निवारण संसोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 (सी) के तहत अपराध नेहा तांबी मेसर्स लक्ष्य इक्युपमेंट एण्ड इंजिनियरिंग (प्रोपराइटर), मनीष ताम्बी पिता भूपेन्द्र ताम्बी (ग्यारंटर), पवन कुमार झा (तत्कालीन मुख्य प्रबंधक) एवं विकास कुमार वर्मा (पैनल एडवोकेट) के खिलाफ पंजीबद्ध कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

ईओडब्ल्यू एसपी यादव के अनुसार मामले की शिकायत जाँच में यह तथ्य सामने आए थे कि मेसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एंड इंजीनियरिंग की प्रोपराइटर नेहा ताम्बी पति मनीष ताम्बी ने विनिर्माण इकाई प्लॉट क्रमांक 311, इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर, पीथमपुर (धार) में शीट मेटल कार्यों के विनिर्माण हेतु गारंटर मनीष ताम्बी के साथ 3 अक्टूबर 2020 को केनरा बैंक, नवलखा शाखा में 170 लाख रुपए की ओ.सी.सी. लिमिट हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया। उक्त ऋण के लिए नेहा ताम्बी एवं मनीष ताम्बी ने संयुक्त नाम से फ्लैट क्रमांक 402, क्लासिक क्राउन, प्लॉट क्रमांक 5/2, ओल्ड पलासिया, इंदौर की रजिस्ट्री 29 नवंबर 2002 को कोलेटरल बंधक के रूप में प्रस्तुत की।

ऋण स्वीकृति के क्रम में केनरा बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार झा ने संपत्ति एवं निर्माण इकाई का निरीक्षण कर 3 अक्टूबर 2020 को विजिट रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें संपत्ति विवादरहित एवं यूनिट संचालित होना दर्शाया गया। जाँच में पाया कि केनरा बैंक के तत्कालीन पैनल अधिवक्ता विकास कुमार वर्मा ने प्रस्तुत लीगल स्क्रूटनी रिपोर्ट में तथ्यों को छुपाते हुए उक्त संपत्ति को वैध एवं बंधक योग्य दर्शाया। जांच में पाया गया कि जिस फ्लैट को केनरा बैंक में कोलेटरल के रूप में बंधक बताया गया था वह संपत्ति वर्ष 2007 में ही विक्रय की जा चुकी थी तथा उक्त संपत्ति पूर्व से बैंक ऑफ इंडिया, कंचन बाग शाखा में बंधक होकर एन.पी.ए. घोषित होने पर सीज की जा चुकी थी।

इसके बावजूद उसी संपति के कूट-रचित दस्तावेजों का उपयोग कर केनरा बैंक से ऋण प्राप्त किया गया। व्यावसायिक यूनिट अस्तित्व में ही नहीं है तथा ओ.सी. सी. खाते से संदिग्ध लेन-देन कर ऋण राशि का डायवर्जन किया गया है। मेसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एंड इंजीनियरिंग के खाते से मेसर्स ब्लू चिप इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग प्रा.लि. के खाते में राशि स्थानांतरित की गई, जिसमें मनीष ताम्बी डायरेक्टर हैं तथा दोनों फर्मों का व्यवसायिक पता एक ही है। एसपी यादव के अनुसार इन तथ्यों के आधार पर उक्त आरोपियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर कार्रवाई की जा रही है।(एजेंसी)