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सोशल मीडिया से डरी सरकार?
सोशल मीडिया से डरी सरकार?
12-Jun-2021

सोशल मीडिया से डरी सरकार? 

ये अभी देश में चर्चा का विषय है साथ ही टूल किट का मामला भी तुल पकड़ता जा रहा है ,भाजपा जवाब देने से बच रही है ! इन सभी बातो से ऐसा लगता है ,भाजपा कहीं जनता को देश के असल मुद्दे से गुमराह  करने का प्रयास तो नही कर रही  है?

सोशल मीडिया एक ऐसा मीडिया है, जो बाकी सारे मीडिया (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और समानांतर मीडिया) से अलग है। सोशल मीडिया इंटरनेट के माध्यम से एक वर्चुअल वर्ल्ड बनाता है जिसके कारण आम आदमी तक हर खबर तत्काल पहुंच जाती है यही कारण है की अब मीडिया जगत और सत्ता पर बैठे सत्ता धीश, सोशल मीडिया से घबराये हुए हैं ? सोशल मीडिया का उपयोग करने वाला हर  व्यक्ति सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म (फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम) आदि का उपयोग कर लोगों तक अपनी पहुंच बनाता  जा रहा है। जिसके कारण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की TRP घटने लगी है और प्रिंट मीडिया से पहले सोशल मीडिया में सारी दुनिया की खबरे आ जाती हैं ,जिसके कारण अब अख़बार पढ़ने वाले पाठक कम होते जा रहे है, जिससे बड़े मीडिया घराने भी सोशल मीडिया को बन्द करने के समर्थन में दिखाई दे रहे है |

सोशल मीडिया के कारण बंगाल चुनाव में भा ज पा चुनाव हारी और , कोरोना महामारी के दूसरे दौर में जिस तरह की तबाही और मौतें हुई है मोदी सरकार के पास उसका कोई जवाब नहीं है अपनी इस नाकामियाबी और अव्यवस्था को छिपाने के लिए नित नए हथकण्डे इनके द्वारा अपनाये जाते  रहे है , इनकी सारी नकामियाबी की पोल सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने खोल कर रख दी, क्यों की  गोदी मीडिया तो जनता को झूठ दिखाकर  गुमराह करने का काम करने में लगी   है!
 
ऐसे में सोशल मीडिया ने कोरोना से हो रही भयानक मौतों , ऑक्सीजन की कमी  और अस्पतालों की अव्यवस्था और केन्द्रीय स्वास्थ मन्त्रालय की नाकमियाबी की पोल खोल कर रख दी , और देश की जनता सच्चाई से वाकिफ होने लगी इससे सरकार घबरा गई और शोसल मीडिया को बैन करने की ठान ली है ?
यह समाज की अभिव्यक्ति की आज़ादी पर पाबंदी लगाने कुत्सित प्रयास है , और इसे कानूनी जामा पहनाने की कोशिश की जा रही हैं।
ये जितना झूठ बोलेंगे, सच उतना ही साफ होकर सामने आता जाएगा |

भारत देश  दुनिया में वैक्सीन के लिए सबसे ज़्यादा तरस रहा वहीं इन शासको को अपनी छवि सुधारने  की अधिक चिन्ता है, इन नेताओ की प्राथमिकता केवल हेडलाइन बनवाने की है। ये एक बड़े मुद्दे की तलाश में है जिससे इनकी गिरती छवि को ये  बचा सके जिसे सोशल मीडिया ने उजागर कर दिया और  इनकी IT सेल बदनामी से बचने मुद्दे ढूंढने  में लगी है, ताकि जनता पिछले 2-3 महीने के नरसंहार को भूल जाए।“

मतलब साफ है सरकार केवल जनता का ध्यान अपनी विफलताओं से भटकाने के लिए मौके खोज रही है। कभी ट्विटर की शर्तें ना मानकर तो कभी फ़ाइजर की सभी शर्तें मानकर।

रवीश कुमार ने अपने पोस्ट में चीन के साथ संबंधों पर भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। चीन ने पिछले वर्ष गलवान घाटी में जब हमला किया तब भी सरकार ने कुछ बोला नहीं था खामोश थी और  बोला भी तो सीधा नकार दिया, कि कोई हमारी जमीन पर नहीं आया। जवाबी तौर पर बस टिकटॉक बंद कर दिया। ये तो सोशल मीडिया  पर पहला प्रहार था सरकार का जिसे जनता ने ख़ामोशी से बर्दास्त कर लिया था लेकिन वही सरकार

आज उसी चीन से पीपीई किट से लेकर ऑक्सीजन सिलेंडर तक खरीद रही है, लेकिन भाजपा के किसी नेता और प्रवक्ता या सरकार से इस प्रश्न पर कुछ भी बोला नहीं जाएगा।
सरकार की नाकामियां और अव्यवस्था ने ही कोरोना महामारी को नरसंहार का रूप दिया है। सरकार के पास करने और कहने को कुछ नहीं है। शायद इसलिए सरकार केवल जनता को मुद्दों से भटकाने के बहाने खोज रही है। 

शोसल मीडिया का बड़ा खुलासा
पीएम केयर के तहत सप्लाई किए गए वेंटिलेटर की खराब गुणवत्ता को लेकर एक साल से शोसल मीडिया इनकी पोल खोल  रही हैं. कभी मामूली खराबी तो कभी रखरखाव में कमी का बहाना बना कर इस मसले की सच्चाई छलकती रहती है. आखिर हज़ारों करोड़ रुपये से खरीदे गए इन वेंटिलेटर की दूसरी लहर में क्या भूमिका रही
बीते साल पीएम केयर्स फंड से 2000 करोड़ रुपए वेंटिलेटर्स के लिए दिए गए थे, उन वेंटिलेटर्स का क्या हुआ? बीबीसी ने अपनी पड़ताल में ये पाया -

पीएम केयर्स फंड से ऑर्डर किए गए 58 हज़ार 850 वेंटिलेटर्स में से तक़रीबन 30 हज़ार वेंटिलेटर्स ख़रीदे गए
कोरोना की पहली लहर का ज़ोर कम होने के बाद वेंटिलेटर की ख़रीद में ढील, एक ही स्पेसिफ़िकेशन वाले वेंटिलेटरों की क़ीमतों में भारी अंतर, बिहार, यूपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे राज्यों के कई अस्पतालों में पीएम केयर्स के वेंटिलेटर धूल खा रहे हैं कई जगहों से मिल रही हैं वेंटिलेटरों के ठीक से काम न करने की शिकायतें कहीं प्रशिक्षित स्टाफ़ नहीं, कहीं वायरिंग ख़राब, कहीं एडॉप्टर नहीं

कोरोना महामारी के दौरान कई अस्पतालों में खराब वेंटिलेटर्स सप्लाई किए जाने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार को फटकार लगाई है।

दरअसल बीते साल कोरोना महामारी की शुरुआत के दौरान सरकार द्वारा शुरू किए गए पीएम केयर्स फंड से मिले 150 में से 113 वेंटिलेटर्स खराब पाए गए हैं।

कई अस्पतालों ने इस मामले में वेंटिलेटर्स की खराबी की शिकायत के चलते मरीजों की मौत होने की बात कही थी।
शोसल मीडिया का बड़ा खुलासा
इस कड़ी में पत्रकार रणविजय सिंह ने ट्वीट कर मोदी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा है कि “बॉम्बे HC ने मोदी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा- सरकार को लोगों की जान की बजाय खराब वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनी की ज्यादा चिंता है.

वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनी का नाम ज्योति CNC है. ये कम्पनी सूरत के उस व्यापारी की है जिसने PM मोदी को सूट गिफ्ट किया था. इस सूट की कीमत पता कीजिए।”

दरअसल बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को मोदी सरकार से यह सवाल किया था कि खराब वेंटिलेटर्स के लिए उनके पास क्या उपाय है। जिस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जवाब में यह कहा गया कि इन 150 वेंटिलेटर्स की सप्लाई पीएम केयर्स फंड के तहत नहीं की गई थी।

दरअसल अस्पतालों को सप्लाई किए गए इन खराब वेंटिलेटर्स को गुजरात की ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड कंपनी द्वारा बनाया गया है।

आपको बता दें कि गुजरात की इस कंपनी द्वारा निर्मित किए गए वेंटीलेटर्स काफी विवादों में रह चुके हैं।

दरअसल ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड कंपनी के प्रमोटर उस बिजनेस परिवार से जुड़े हुए हैं।

जिन्होंने साल 2015 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनका नाम लिखा हुआ सूट तोहफे में दिया था। जोकि काफी महंगा भी था और सोशल मीडिया पर इसके काफी चर्चे भी हुए थे।