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भारत की आज़ादी में सिखों का योगदान
भारत की आज़ादी में सिखों का योगदान
08-Aug-2022

डॉ. अनिरुद्ध सुधांशु

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आज दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में 'भारत-विभाजन 1947 और स्वतंत्रता संग्राम में सिखों का योगदान' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्टि का आयोजन किया गया। 

 प्राचार्य प्रो. जसविंदर सिंह ने अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। 

  सरदार तरलोचन सिंह (चेयरमैन, प्रबंध समिति, श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज) ने विभाजन व स्वाधीनता दोनों विषयों का भिन्न-भिन्न दृष्टि से अवलोकन, व चिंतन करने की आवश्यकता बताई । स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के अवसर पर विशेषकर युवा पीढ़ी को दोनों ऐतिहासिक घटनाओं के सतत स्मरण व मूल्यांकन का आग्रह भी किया। 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता  डॉ. रघुवेंद्र तंवर ( अध्यक्ष, भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली) ने विभाजन की विभीषिका, उससे संबंधित विभिन्न भ्रांतियों, सामाजिक-राजनीतिक परिणामों व मानवीय मूल्यों को हुई क्षति को प्रमुखता से रेखांकित किया। भारत की सभ्यता- संस्कृति को इस राष्ट्र के स्वरूप निर्धारण में मूल तत्व बताया।  डॉ. मोहिंदर सिंह  ने स्वाधीनता में सिखों के योगदान पर डिजिटल प्रस्तुति दी व विभिन्न ऐतिहासिक पुस्तकों के उद्धरण द्वारा महाराजा रणजीत सिंह के उत्तरार्ध में सिखों की स्थिति  व उनके योगदान पर प्रकाश डाला। डॉ. जसपाल सिंह ने स्वाधीनता संग्राम में सिखों के योगदान का स्मरण करते हुए गदर आंदोलन, गदर पत्र व अनेक साहित्यिक कृतियों, समाचार-पत्रों का  उदाहरण दिया। 

 प्रो. सीमा बावा ने प्रसिद्ध चित्रकार सतीश गुजराल, एस.एल. पराशर और पी.एन. मागो की दुर्लभ चित्रों के द्वारा विभाजन की पीड़ा व विभीषिका की तथ्यों के साथ डिजिटल प्रस्तुति दी। 
 कार्यक्रम के सफल संचालन में 'गुरु अंगद देव टीचिंग लर्निंग सेंटर' ने डिजिटल प्रस्तुतिकरण व संचालन में उल्लेखनीय सहयोग दिया। इस कार्यक्रम की प्रस्तुति ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों में संपन्न हुई।  

मीडिया संयोजक
डॉ. रूपम 
प्राध्यापक 
श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज 
9818177056