संकट में पाकिस्तान: पीओके से बलूचिस्तान तक भड़की हिंसा, कई मोर्चों पर बढ़ा दबाव

इस्लामाबाद : पाकिस्तान इस वक्त एक गहरे और बहुआयामी संकट से जूझ रहा है, जहां आंतरिक अस्थिरता और सीमाई तनाव ने देश की सुरक्षा और स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को एक

संकट में पाकिस्तान: पीओके से बलूचिस्तान तक भड़की हिंसा, कई मोर्चों पर बढ़ा दबाव

इस्लामाबाद : पाकिस्तान इस वक्त एक गहरे और बहुआयामी संकट से जूझ रहा है, जहां आंतरिक अस्थिरता और सीमाई तनाव ने देश की सुरक्षा और स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को एक साथ कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उनके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके), बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ता उबाल शामिल है।

यह स्थिति पाकिस्तान के लिए एक बड़ा एंडगेम साबित हो सकती है, क्योंकि देश के सामने अब केवल एक नहीं, बल्कि कई गंभीर सुरक्षा चुनौतियाँ खड़ी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पाकिस्तान की सेना एक साथ इतने मोर्चों को संभाल पाएगी, या यह मुनीर के नेतृत्व के लिए किसी बड़े अंत की शुरुआत साबित होगा।

पीओके में भड़का आंदोलन हालिया सुप्रीम कोर्ट के 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों को बरकरार रखने के फैसले के बाद तेज हुआ। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल एक संवैधानिक विवाद नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही नाराजगी का परिणाम है। महंगी बिजली, आटे की कमी, विकास की उपेक्षा और राजनीतिक अधिकारों के अभाव ने लोगों के गुस्से को भड़काया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान प्रशासन ने नेताओं की गिरफ्तारी, संगठनों पर प्रतिबंध, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और 16,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती जैसे कड़े कदम उठाए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, झड़पों में 20 से अधिक लोगों की मौत की भी खबरें हैं, और प्रदर्शनकारियों ने मुजफ्फराबाद तक लंबे मार्च का ऐलान किया है। विश्लेषकों का कहना है कि अब यह आंदोलन केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कुछ समूह पाकिस्तान से अधिक स्वायत्तता की मांग भी उठाने लगे हैं, जो इस्लामाबाद के लिए एक नई चिंता का विषय है।बलूचिस्तान में भी हालात गंभीर हैं, जहां पानी के गंभीर संकट, कथित जबरन गुमशुदगी और बढ़ती हिंसा ने लोगों को सड़कों पर ला दिया है।

बलोच यकजेहती कमेटी (बीवायसी) लापता लोगों की बरामदगी की मांग कर रही है, जबकि सशस्त्र समूहों के हमलों में पुलिस और सुरक्षाबलों के जवानों की मौत के बाद उनके परिजन भी बेहतर सुरक्षा और न्याय की गुहार लगा रहे हैं। रणनीतिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान सरकार का नियंत्रण अब केवल बड़े शहरों तक सिमट कर रह गया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में हथियारबंद समूहों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।

बलूच विद्रोही लगातार सैन्य काफिलों, राजमार्गों और सुरक्षा इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले कर रहे हैं, जिससे पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। चीन के निवेश वाली कई परियोजनाएं, जैसे रेको डिक माइनिंग प्रोजेक्ट और सीपीईसी, भी इन सुरक्षा चिंताओं से प्रभावित हो रही हैं, जिससे पाकिस्तान की पहले से डगमगाती अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ रहा है।(एजेंसी)