अमेरिका से समझौते के बाद ईरान की परमाणु गतिविधियाँ तेज? सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता
The United States and Iran : अमेरिका और ईरान के बीच गहराते युद्ध के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने यह आशंका पैदा कर दी है कि ईरान ने जून के आखिर में अमेरिका के साथ हुए
The United States and Iran : अमेरिका और ईरान के बीच गहराते युद्ध के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने यह आशंका पैदा कर दी है कि ईरान ने जून के आखिर में अमेरिका के साथ हुए 14-सूत्रीय 'सहमति पत्र' (MoU) पर दस्तखत करने के चंद दिनों बाद ही उसका उल्लंघन करना शुरू कर दिया था। इस समझौते के तहत तेहरान ने भरोसा दिया था कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा।
CNN की एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट के मुताबिक, 'इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी' के साथ मिलकर किए गए सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चलता है कि ईरान अपने संदिग्ध परमाणु ठिकानों को फिर से बना रहा है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्धविराम समझौते को "खत्म" घोषित कर चुके हैं और इस हफ्ते की शुरुआत में ईरान पर भीषण बमबारी के आदेश दिए थे।
इन तस्वीरों के सामने आने के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या मौजूदा सैन्य टकराव से पहले ही ईरान ने समझौते की पीठ में छुरा घोंप दिया था।
सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा?
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के दो सबसे प्रमुख संदिग्ध ठिकानों पर रहस्यमयी हलचल देखी गई है:
1. पारचिन साइट
यह वही जगह है जहां परमाणु हथियारों से जुड़े विस्फोटक मटीरियल रखे होने का शक है।
इस साल की शुरुआत में जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर संयुक्त सैन्य हमला किया था, उससे ठीक पहले ईरान ने इस ठिकाने के चारों तरफ एक मजबूत कंक्रीट की ढाल खड़ी की थी।
अमेरिकी हमलों में इस ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा था। जून और जुलाई की नई सैटेलाइट तस्वीरें दिखाती हैं कि वहां दोबारा निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। जून में, जब यह समझौता लागू था, तब ईरान ने हवाई हमलों से हुए गड्ढों को अस्थाई कवर से छिपा दिया था। जुलाई आते-आते इन कवर्स की जगह पर लोहे की जालियां लगा दी गईं, जो साफ इशारा करती हैं कि वहां रिपेयरिंग का काम जोर-शोर से चल रहा था।
2. पिकैक्स माउंटेन
यह पहाड़ी इलाका भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम का एक बेहद गुप्त और अहम हिस्सा माना जाता है। पिछले महीने, यानी समझौता होने के ठीक बाद की तस्वीरों में दिख रहा है कि इस पहाड़ के भीतर बनीं सुरंगों में कई संदिग्ध गाड़ियां लगातार आ-जा रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टनल के भीतर हो रही यह गतिविधि अमेरिका के साथ किए गए वादों के बिल्कुल खिलाफ है।
मिसाइल ठिकानों पर भी काम शुरू
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के मुख्य और बड़े परमाणु रिएक्टरों- इस्फहान, फोर्डो और नतांज पर फिलहाल ऐसी कोई नई हलचल नहीं दिखी है। लेकिन, सैटेलाइट इमेजरी से यह जरूर साफ हुआ है कि ईरान ने अपने मिसाइल स्टोरेज सेंटरों को ठीक करने का काम शुरू कर दिया है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश हमेशा से ईरान की मिसाइल क्षमता पर चिंता जताते रहे हैं, और इन ठिकानों का दोबारा एक्टिव होना खतरे की घंटी है।
क्या लिखा था उस समझौते (MoU) में?
यह नई रिपोर्ट उन दावों के बीच आई है जब कुछ हफ्ते पहले दोनों देश युद्ध को खत्म करने और एक स्थाई शांति समझौते की तरफ बढ़ने के लिए राजी हुए थे। इस MoU के मुख्य बिंदु ये थे:
- स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना।
- ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाना।
- समझौते में साफ लिखा था, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान यह पुष्टि करता है कि वह परमाणु हथियार न तो हासिल करेगा और न ही विकसित करेगा।" दोनों देश अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में संवर्धित सामग्री के स्टॉक को ठिकाने लगाने पर भी सहमत हुए थे।
लेकिन, अब इन नई सैटेलाइट तस्वीरों ने यह साफ कर दिया है कि ईरान शायद कभी इस समझौते को लेकर गंभीर था ही नहीं, और अमेरिका की नई सैन्य कार्रवाई से पहले ही वह गुपचुप तरीके से अपनी परमाणु शक्ति को दोबारा जिंदा करने में जुट गया था।(एजेंसी)
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