SIT रिपोर्ट से सनसनी: राम मंदिर में 75 बार दान चोरी, CCTV डेटा भी गायब
Ram Mandir : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आ गई है। नौ पन्नों की इस रिपोर्ट में मंदिर के भीतर सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी
Ram Mandir : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आ गई है। नौ पन्नों की इस रिपोर्ट में मंदिर के भीतर सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और कैश की गिनती में हुई गंभीर लापरवाहियों का कच्चा चिट्ठा खोला गया है। जांच टीम ने साफ कहा है कि अगर समय रहते नियमों का पालन किया गया होता, तो इस बड़ी चोरी को रोका जा सकता था।
रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज की जांच में चोरी की कम से कम 70 वारदातें साफ पकड़ी गई हैं। आइए जानते हैं कि एसआईटी की जांच में मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर क्या-क्या बड़ी खामियां सामने आई हैं।
अफसरों की लापरवाही और 'अपनों' पर अंधा भरोसा
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नोटों की गिनती के काम में लगे कई कर्मचारियों और अधिकारियों ने सुरक्षा नियमों को ताक पर रख दिया। अफसरों की इसी ढिलाई की वजह से चोरों के हौसले बुलंद हुए।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दान पेटियों की चाबियां और वहां आने-जाने का जिम्मा ऐसे लोगों को सौंप दिया गया था, जिनके पास कोई लिखित आदेश या अथॉरिटी नहीं थी। इनमें इस मामले का मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू भी शामिल है, जिसे पूर्व महासचिव चंपत राय का करीबी माना जाता है। रिपोर्ट में दान पेटी खोलने और गिनती के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को भी सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है, जिन्होंने इस गैर-जिम्मेदाराना ढर्रे को आंख मूंदकर चलने दिया।
सीसीटीवी तो थे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया
जांच टीम को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और उनके बैकअप को लेकर भारी कमियां मिली हैं। गिनती वाले कमरे में कैमरे तो लगे थे, लेकिन ट्रस्ट का कोई भी कर्मचारी लाइव फुटेज पर नजर नहीं रख रहा था।
यही नहीं, नियमों के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज का 180 दिनों का बैकअप रखा जाना चाहिए था, लेकिन यहां सिर्फ 45 दिनों (27 अप्रैल से 6 जून) का ही रिकॉर्ड मिला। इसी डेढ़ महीने के फुटेज में जांच टीम को चोरी के 70 मामले मिले हैं। SIT का मानना है कि चोरी का यह खेल 27 अप्रैल से बहुत पहले से चल रहा था, लेकिन पुराना वीडियो रिकॉर्ड न होने के कारण यह पता लगाना नामुमकिन है कि कुल कितने की चोरी हुई है। कैमरे में साफ दिख रहा है कि कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां और खुले पैसे अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपा रहे हैं, और कुछ दूसरे कर्मचारी उन्हें छुपाने में मदद कर रहे हैं।
तलाशी बंद हुई और नियमों को कर दिया गया कमजोर!
रिपोर्ट बताती है कि मंदिर के भीतर सुरक्षा के बुनियादी नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया:
- गिनती के कमरे में आने-जाने वाले कर्मचारियों की ठीक से तलाशी (फ्रिस्किंग) नहीं ली जा रही थी।
- तय ड्रेस कोड का पालन नहीं हो रहा था और लोग अपना निजी सामान भी अंदर ले जा रहे थे।
- किस पेटी से कितना चढ़ावा निकला और किस साइज के कितने नोट थे, इसका कोई अलग से हिसाब-किताब नहीं रखा जा रहा था।
- हैरानी की बात यह है कि सितंबर 2024 में जो नियम बनाए गए थे, उनके तहत हर कर्मचारी की सख्त तलाशी होती थी। लेकिन 6 फरवरी 2025 को एक नई गाइडलाइन जारी करके इस सख्ती को ढीला कर दिया गया। नए नियम में कह दिया गया कि तलाशी सिर्फ कभी-कभार या शक होने पर ही होगी।
SIT ने सवाल उठाया है कि आखिर ये नियम किसके कहने पर बदले गए? रिपोर्ट में पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा की भूमिका पर भी उंगली उठाई गई है, जो इन नियमों को बनाते समय ट्रस्ट की तरफ से शामिल थे और जिनसे उम्मीद थी कि वे सुरक्षा पक्की करेंगे, लेकिन उनकी तरफ से कोई ठोस निगरानी नहीं दिखी।
गिनती का तरीका ही गलत था
चढ़ावा चाहे दान पेटी से आए, काउंटर से या सीधे गर्भगृह से- SIT को हर जगह घालमेल मिला। नियम यह था कि हर दान पेटी का पैसा अलग से गिना जाएगा और उसका रिकॉर्ड रखा जाएगा। लेकिन असलियत में, गिनती शुरू होने से पहले ही कई पेटियों का पैसा एक साथ मिला दिया जाता था।
पैसे को लाने-ले जाने वाले बॉक्स पर कोई नंबर या ट्रैकिंग सिस्टम नहीं था। इससे यह जानना असंभव था कि कौन सा बॉक्स किस दिन, किस पेटी से आया और कितने बॉक्स की गिनती अभी बाकी है। एसआईटी ने साफ कहा है कि देश-विदेश से आने वाले इतने बड़े चढ़ावे के प्रबंधन में इस तरह का ढीला रवैया ऑडिट और पारदर्शिता के लिहाज से एक बहुत बड़ी और गंभीर चूक है।(एजेंसी)
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