अमेरिका-ईरान तनाव का असर: भारत को महंगा पड़ रहा यूरिया आयात

अमेरिका-ईरान तनाव का असर: भारत को महंगा पड़ रहा यूरिया आयात

-जून-जुलाई में चावल, मक्का और सोयाबीन की होना है बुवाई, पर्याप्त स्टॉक की जरुरत

नई दिल्ली : अमेरिका-ईरान युद्ध की मार तेल और गैस ही नहीं उर्वरकों पर भी पड़ रहा है। दुनिया में यूरिया के सबसे बड़े खरीदार भारत को अब दोगुनी कीमत पर उर्वरक खरीदना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने पिछली निविदाओं के मुकाबले करीब 90फीसदी से ज्यादा कीमत पर यूरिया के आयात का फैसला किया है। जून-जुलाई से मानसून की फसलों जैसे चावल, मक्का और सोयाबीन की बुवाई होना है।

इन फसलों के लिए यूरिया अनिवार्य है। यदि समय रहते पर्याप्त स्टॉक सुरक्षित नहीं किया गया तो बुवाई के सीजन में खाद की किल्लत हो सकती है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा पर खतरा पैदा हो जाएगा। यही कारण है कि सरकार ने ऊंची कीमतों के बावजूद 25 लाख टन यूरिया की खरीद करने का फैसला किया है।

आंकड़ों के मुताबिक युद्ध से पूर्व मध्य पूर्व से भारत को मिलने वाला यूरिया 490 डॉलर प्रति टन के आसपास मिल रहा था, लेकिन मौजूदा वैश्विक तनाव और बढ़ते संघर्ष ने इस कीमत को आग लगा दी है। अब इंडियन पोटाश लिमिटेड पश्चिमी तट पर डिलीवरी के लिए 935 डॉलर और पूर्वी तट के लिए 959 डॉलर प्रति टन की भारी-भरकम कीमत पर डील कर रही है।

वैश्विक यूरिया आपूर्ति का करीब 45फीसदी हिस्सा फारस की खाड़ी से होकर गुजरता है। हाल के संघर्षों के कारण होर्मुज से होने वाले व्यापार पर बुरा असर पड़ा है। इसके प्रभावी रूप से बंद होने से सप्लाई चेन टूट गई है। यूरिया बनाने के लिए मुख्य कच्चा माल अमोनिया है, जिसे बनाने के लिए प्राकृतिक गैस की जरूरत होती है। मध्य पूर्व में गैस की सप्लाई बाधित होने से कई क्षेत्रीय उत्पादकों को अपने प्लांट बंद करने पड़े हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि मध्य पूर्व में यह तनाव लंबा खिंचता है तो यूरिया की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। फिलहाल भारत सरकार प्रमुख निर्यातकों से सीधे संपर्क के जरिए बातचीत कर रही है ताकि आपूर्ति में कोई बाधा न आए। हालांकि किसानों को सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी के कारण फिलहाल घरेलू बाजार में यूरिया का रेट नहीं बढ़ेगा।(एजेंसी)