गोल्ड ने लगाया तेज ब्रेक; कीमतों में बड़ी गिरावट, क्‍या और टूटेगा भाव?

Gold Price : इस साल सोने और चांदी के भाव में बेतहाशा वृद्धि हुई है. साल 2025 में अब तक गोल्‍ड ₹43,938 और चांदी ₹62,258 महंगी हुई. लेकिन, अब सोने और चांदी की बढोतरी पर ब्रेक लग गया है. यही वजह है कि पिछले 21 दिनों में 24 कैरेट सोना 10774 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्‍ता हो गया है.

गोल्ड ने लगाया तेज ब्रेक; कीमतों में बड़ी गिरावट, क्‍या और टूटेगा भाव?

Gold Price : इस साल सोने और चांदी के भाव में बेतहाशा वृद्धि हुई है. साल 2025 में अब तक गोल्‍ड ₹43,938 और चांदी ₹62,258 महंगी हुई. लेकिन, अब सोने और चांदी की बढोतरी पर ब्रेक लग गया है. यही वजह है कि पिछले 21 दिनों में 24 कैरेट सोना 10774 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्‍ता हो गया है. इसी तरह चांदी की कीमत 24 दिनों में 29825 रुपये गिर गई है. नई दिल्‍ली के सर्राफा बाजार में आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को 24 कैरेट सोने का भाव 1,20,100 रुपए प्रति10 ग्राम पर आ गया.

17 अक्टूबर को इसकी कीमत 1,30,874 रुपए के अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 7 नवंबर को सोने की कीमत में 570 रुपए की गिरावट हुई. इससे पहले गुरुवार को इसके दाम 1,20,670 रुपए प्रति 10 ग्राम थी. वहीं, चांदी की कीमत में 33 रुपए की मामूली बढ़त देखने को मिली और ये 1,48,010 रुपए प्रति किलो पर आ गई. 14 अक्टूबर को इसकी कीमत 1,78,100 रुपए के अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी.

क्‍यों गिर रहा है सोने-चांदी का भाव?

सोने और चांदी के भाव में आई इस गिरावट के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्‍ट्रीय कारण है. भारत में अब त्‍योहारी सीजन समाप्‍त हो गया है. इससे सोने-चांदी की खरीदारी कम हुई और डिमांड में कमी आई है. सोना-चांदी को ‘सेफ-हेवन’ माना जाता है, यानी मुश्किल वक्त में लोग इन्हें खरीदते हैं. अमेरिका और चीन के बीच व्‍यापार तनाव कम होने से वैश्कि भू-राजनीतिक टेंशन भी कम हुई है. इसका असर सोने की मांग पर पड़ा है और रेट कम हुए हैं.

सोने का भाव गिरने का एक कारण निवेशकों की ओर से की जा रही प्रॉफिट बुकिंग भी है. टेक्निकल इंडिकेटर्स जैसे रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) दिखा रहे थे कि कीमतें ओवरबॉट जोन में पहुंच चुकी थीं. इसलिए ट्रेंड फॉलोअर्स और डीलर्स ने बिकवाली शुरू कर दी है.

क्‍या और गिरेगा सोने का भाव?

इकोनॉमिक टाइम्‍स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कमोडिटी विश्‍लेशकों का मानना है कि सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट शार्ट टर्म में जरूर आ सकती है, लेकिन किसी बड़े क्रैश की संभावना बहुत कम है. कई देशों ने अपनी मुद्रा जोखिम से बचाव के लिए पिछले कुछ वर्षों में सोने के भंडार बढ़ाए हैं, लेकिन अब इनफ्लो धीमा पड़ सकता है, जिससे कीमतों पर थोड़े समय के लिए दबाव बन सकता है. लेकिन सोने की वैश्विक कीमत अभी साल 2023 के लेवल से काफी ऊपर बनी रहेंगी, क्योंकि स्ट्रक्चरल सपोर्ट अभी भी मजबूत है.

इन्वेस्टमेंट बैंक सोने को लेकर बुलिश बने हुए हैं. यूबीएस ने अगले 12 महीनों में गोल्ड का टारगेट 4,200 डॉलर प्रति औंस रखा है. बैंक का कहना है कि राजनीतिक जोखिम और बाजार में बढ़ती अस्थिरता सोने को 4,700 डॉलर तक भी पहुंचा सकती है. वहीं गोल्डमैन सॉक्‍स का अनुमान है कि 2026 के अंत तक कीमतें 4,900 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती हैं.(एजेंसी)