भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने सरकार ने नामांतरण प्रक्रिया बदला : विनोद चंद्राकर
महासमुंद : पूर्व संसदीय सचिव व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जल-जंगल को बड़े उद्योगपतियों के हवाले कर भाजपा की सरकार अब प्रदेशवासियों को उनकी जमीनों से बेदखल करने की नीयत से भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने भूमि नामांतरण प्रक्रिया को आसान कर दिया है।
प्रक्रिया आसान होने से बढ़ेगी अवैध खरीदी-बिक्री के मामले
महासमुंद : पूर्व संसदीय सचिव व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जल-जंगल को बड़े उद्योगपतियों के हवाले कर भाजपा की सरकार अब प्रदेशवासियों को उनकी जमीनों से बेदखल करने की नीयत से भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने भूमि नामांतरण प्रक्रिया को आसान कर दिया है। नए नीयम के तहत उप पंजीयक द्वारा सीधे जमीन की नामांतरण किया जाएगा। इस नियम के तहत बिना दावा आपत्ति, बिना इस्तेहार प्रकाशन तथा बिना नोटिस तामिल किए ही नामांतरण हो जाएगा। जिससे भू-माफियाओं द्वारा फर्जीवाड़ा कर जमीन हथियाने का खेल आसान हो जाएगा।
श्री चंद्राकर ने कहा कि सरकार के इस फैसले से आम जनता की जमीन पर खतरा बढ़ गया है। नामांकन की प्रक्रिया से संबंधित ग्रामसभा और तहसीलदार के अधिकारों को बाईपास करने से भू-माफियाओं के द्वारा बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जाएगा। ऐसे में नामांतरण के पश्चात ऋण पुस्तिका किसके द्वारा प्रमाणित किया जाएगा? राजस्व अभिलेख का संधारण कौन करेगा? गलत नामांतरण पर सुनवाई कौन करेगा? क्योंकि पंजीयक के न्यायिक अधिकार नहीं होते। साय सरकार का फोकस आम जनता का हित नहीं बल्कि भू-माफियाओं के अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने में है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि वर्तमान प्रक्रिया में सारे नियमों को ताक पर रखकर भू-माफियाओं द्वारा बड़े पैमाने पर जमीनों की अवैध रजिस्ट्री - बिक्री करने के अनेक मामले सामने आ चुके हैं। यदि, नामांतरण प्रक्रिया को और आसान कर उप पंजीयक को सारे अधिकार दे दिए जाते हैं तो जमीन कब्जे, अवैध खरीदी-बिक्री के मामलो में वृद्धि होगी। अनेकों मामले में माफियाओं ने जमीन क्रेता को बताएं बिना ही बैंकों में कर्ज हेतु दर्ज जमीन या बंधक भूमि को बेच दिया है।
नामांतरण के लिए मामला तहसील और संबंधित ग्राम सभा तक पहुंचता है तो इस तरह की त्रुटियां/ फर्जीवाड़े उजागर हो पाते हैं। अब जब नए आदेश के अनुसार उप पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री होते ही स्वतः नामांतरित हो जाएगा तो ऐसे फर्जीवाड़े को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा। नए आदेश के मुताबिक बिना किसी जांच के नामांतरण पूरा हो जाता है, तो असली मालिक को बिना सूचना के ही जमीन से हाथ धोना पड़ेगा।
और तो और सरकारी भूमि, पट्टे की भूमि, आदिवासी की भूमि, कोटवारी भूमि, अवैध प्लाटिंग, अहस्तांतरणी भूमि, शामिलात खाता की भूमि या मिसल से अधिक रकबे की भूमि को भी अब रजिस्ट्री करवाकर नामांतरण के दायरे में लाने का षडयंत्र रचा गया है। श्री चंद्राकर ने कहा कि भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने साय सरकार ने आसान रास्ता बना दिया है।
khulasapost@gmail.com