ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से बड़ा मुनाफा
रायपुर : छत्तीसगढ़ में कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में शासन की योजनाएं अब जमीन पर असर दिखाने लगी हैं। मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम खुटेरा के किसान श्री बसदेव राजपूत ने आधुनिक कृषि तकनीकों को
द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार
रायपुर : छत्तीसगढ़ में कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में शासन की योजनाएं अब जमीन पर असर दिखाने लगी हैं। मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम खुटेरा के किसान श्री बसदेव राजपूत ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर सीमित भूमि में उल्लेखनीय आय अर्जित कर एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
करीब 1.70 हेक्टेयर भूमि के स्वामी श्री राजपूत ने अपनी कुल जमीन में से लगभग 1 एकड़ क्षेत्र में उद्यानिकी फसल के रूप में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती की। उन्होंने परंपरागत खेती के बजाय ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और प्लास्टिक मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
शासन की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना वर्ष 2025-26 के अंतर्गत उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन के साथ लगभग 30 हजार रुपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ। इस सहायता ने खेती की लागत को कम करने और आधुनिक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया। श्री राजपूत को प्रति एकड़ लगभग 130 क्विंटल बैंगन का उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम के थोक मूल्य पर फसल की बिक्री कर उन्होंने कुल लगभग 1 लाख 95 हजार रुपये की आय अर्जित की, जबकि उनकी कुल लागत लगभग 62 हजार रुपये रही। इस प्रकार उन्हें करीब 1 लाख 33 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक है।
श्री राजपूत का कहना है कि उन्नत तकनीकों के उपयोग से न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि कीट एवं रोग नियंत्रण भी पहले की अपेक्षा अधिक प्रभावी हुआ है। वर्तमान में उनकी फसल का उत्पादन जारी है और आगामी समय में 30 से 40 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन की संभावना है, जिससे उनकी आय में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के किसान भी अब ड्रिप इरिगेशन और आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। इससे यह स्पष्ट है कि शासन की योजनाओं, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और किसान की मेहनत के समन्वय से कृषि को एक लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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