WHO की चेतावनी: 3 करोड़ बच्चों पर मंडरा रहा है 3 जानलेवा बीमारियों का खतरा, तुरंत सतर्क हों!

3 crore children at risk : विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में आगाह किया है कि दुनिया भर में 3 करोड़ बच्चों पर 3 घातक बीमरियों का खतरा मंडरा रहा है. अविकसित देशों में इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है और इस कारण हजारों बच्चों की जान भी जा रही है.

WHO की चेतावनी: 3 करोड़ बच्चों पर मंडरा रहा है 3 जानलेवा बीमारियों का खतरा, तुरंत सतर्क हों!

3 crore children at risk : विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में आगाह किया है कि दुनिया भर में 3 करोड़ बच्चों पर 3 घातक बीमरियों का खतरा मंडरा रहा है. अविकसित देशों में इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है और इस कारण हजारों बच्चों की जान भी जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक टीकाकरण अभियान में रुकावट के कारण दुनिया भर में 3 करोड़ बच्चों पर मीजल्स, मम्प्स और रूबेला बीमारी का खतरा मंडराने लगा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना महामारी के कारण दुनिया भर में जरूरी टीकाकरण अभियान में रुकावट आई है जिसके कारण नए पैदा ले रहे बच्चों में इन 3 बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.

2019 में कोरोना वायरस ने जब दस्तक दी तब वैश्विक स्वास्थ्य पर इससे काफी असर पड़ा क्योंकि कोरोना के चलते कई अन्य वैक्सीनेशन लोगों तक नहीं पहुंच पाई. बाद से यह देखने को मिल रहा है कि कई गंभीर संक्रमण लगातार लोगों के बीच फैलते जा रहे हैं. और अब विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया रिपोर्ट बेहद डराने वाली है जिसमें कहा गया है कि वैक्सीनेशन कार्यक्रम में बाधाओं के कारण 3 करोड़ बच्चों पर कई बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है.

1.43 करोड़ बच्चों को वैक्सीन की एक भी डोज नहीं

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना के कहर के बीच सारा ध्यान कोरोना वैक्सीन पर था लेकिन बच्चों को दी जाने वाली कई अहम वैक्सीन पीछे छूट गई. मीजल्स, मम्प्स और रूबेला (एमएमआर) की वैक्सीन नहीं लगाए गए. इस कारण लगभग 3 करोड़ बच्चे कई तरह की वैक्सीन से महरुम हो गए यानी इन बच्चों कई जरूरी वैक्सीन नहीं लगी.

अधिकांश बच्चों में एमएमआर की जरूरी खुराक नहीं दी गई और 1.43 करोड़ बच्चों को तो वैक्सीन की एक भी डोज नहीं लगी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि टीकाकरण बच्चों के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है. वैक्सीन नहीं लगाने के कारण खसरा जैसी बीमारियां तेज़ी से फैलती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन बीमारियों के कारण दुनिया भर के हजारों बच्चों की मृत्यु हो रही है.

भारत में कितना असर

कोरोना से पहले भारत ने बच्चों के टीकाकरण में महत्वपूर्ण सफलता हासिल कर ली थी. यहां तक कि 2017 से 2021 के बीच भारत में खसरा के मामलों में 62 प्रतिशत की कमी आ गई थी. लेकिन कोरोना काल में वैक्सीनेशन प्रोग्राम में कई तरह की बाधा आ गई. लोग अपने घरों से निकलना बंद कर दिया जिसकी वजह से बच्चों को वैक्सीनेशन सेंटर तक ले जाने में दिक्कत हुई. हालिया रिपोर्ट में चिंता जताते हुए विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि महामारी के दौरान जरूरी वैक्सीन नहीं लगाने से भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

क्या कह रहे हैं डॉक्टर्स

वैक्सीन मामलों के एक्सपर्ट डॉ. अरुण गुप्ता ने न्यूज़ 18 से बातचीत करते हुए कहा कि मीजल्स या खसरा एक जानलेवा बीमारी है. इससे ना सिर्फ बड़ी संख्या में जान जाने का डर होता है बल्कि यह बड़ी तेजी से दूसरे में भी फैलती है. यह कम्युनिकेबल डिजीज है. हमारे यहां दिक्कत यह हुई कोरोनाकाल के दौरान बच्चों का वैक्सीनेशन समय पर नहीं हुआ. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में जो चीजें कही गई है वह इसी ओर ध्यान दिलाती है. इसमें आबादी का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है. यह बहुत बड़ी चिंता की बात है.

लेकिन हमारे यहां अच्छी बात यह है कि हमारे पास वैक्सीनेशन का बड़ा प्रोग्राम है जिसके तहत देश भर के बच्चों को मुफ्त में वैक्सीन दी जाती है.बस लोगों में जागरुकता फैलाने की जरूरत है क्योंकि वैक्सीन की कीमत भी बहुत कम होती है. अगर सरकारी केंद्र पर ले जाने में दिक्कत हो रही है तो खुद भी खरीदकर वैक्सीन लगवाई जा सकती है. जिन बच्चों को यह वैक्सीन नहीं लग पाया उनको लगवाना चाहिए. अगर यह धीरे-धीरे फैलता गया तो यह हम लोगों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत होगी. इसलिए इससे बचाव जरूरी है.(एजेंसी)