टपकती छत के नीचे पढ़ाई, जोखिम में मासूमों का भविष्य

मंडीदीप : एक ओर जहाँ सरकार सीएम राइज विद्यालयों पर करोड़ों रुपए खर्च कर शिक्षा को उच्च स्तर पर ले जाने की बात करती है! वहीं दूसरी ओर शासकीय माध्यमिक शाला सिमरोदा की हालत बेहद खराब है।

टपकती छत के नीचे पढ़ाई, जोखिम में मासूमों का भविष्य

मंडीदीप : एक ओर जहाँ सरकार सीएम राइज विद्यालयों पर करोड़ों रुपए खर्च कर शिक्षा को उच्च स्तर पर ले जाने की बात करती है! वहीं दूसरी ओर शासकीय माध्यमिक शाला सिमरोदा की हालत बेहद खराब है।

यहाँ पढ़ने वाले मासूम बच्चे बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। आसपास के 6झ7 गाँवों के लगभग 110 विद्यार्थी कक्षा पहली से आठवीं तक इस विद्यालय में आते हैं। लेकिन विद्यालय की व्यवस्था इतनी जर्जर है! कि बच्चों को बरसात में टपकती छत के नीचे गीली बेंचों पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। विद्यालय में पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है!

बाउंड्री वॉल नहीं बनी है! और न ही बारिश में सुरक्षित बैठने के लिए पर्याप्त जगह है। बाउंड्री वॉल न होने से आवारा मवेशी और कुत्ते विद्यालय परिसर में आ जाते हैं और फर्श पर गोबर व गंदगी फैला देते हैं। नतीजा यह होता है कि कक्षा शुरू करने से पहले बच्चों को सफाई करनी पड़ती है ग्रामीणों का कहना है! कि सरकार एक ओर बड़े-बड़े दावे करती है!

और करोड़ों की योजनाएँ चला है! लेकिन दूसरी ओर छोटे बच्चों को मूलभूत सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं। यदि "सरकार वास्तव में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना चाहती है ! तो सबसे पहले इन ग्रामीण विद्यालयों की समस्याओं पर ध्यान देना होगा।(एजेंसी)