ट्रम्प ने ईरान पर हमले को दी मंजूरी, अफसरों से चर्चा के बाद बदला फैसला

ट्रम्प ने ईरान पर हमले को दी मंजूरी, अफसरों से चर्चा के बाद बदला फैसला

21-Jun-2019

मास्को : राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के उसके ड्रोन को मार गिराने के बाद कई ठिकानों पर हमले को मंजूरी प्रदान करने के बाद अपने फैसले को पलटते हुए अभियान को फिलहाल रोक देने का आदेश दिया है। दैनिक समाचार पत्र न्यूयाॅर्क टाइम्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। 

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी खुफिया ड्रोन विमान पर हमले के जवाब में ट्रम्प ने ईरान के रडार और मिसाइल ठिकानों पर हमले को मंजूरी प्रदान की थी , लेकिन प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ गहन चर्चा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिलहाल अभियान रोक देने का आदेश दिया । 

न्यूयाॅर्क टाइम्स ने ट्रम्प प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिकी लड़ाकू विमान और युद्धपोत ईरान पर मिसाइल से हमला करने के लिए तैयार थे लेकिन अंतिम समय पर अभियान को रोक देने का आदेश आया। 

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने गुरुवार को एक अमेरिकी खुफिया ड्रोन विमान को मार गिराया है। इस घटना के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। ट्रम्प ने अमेरिका के खुफिया ड्रोन विमान को मार गिराने के ईरान के दावे के बाद ट्वीट किया था, “ ईरान ने बहुत बड़ी गलती कर दी है।”

अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकी पर रूस ने आगाह किया है कि यदि ईरान पर हमला किया गया तो ऐसी तबाही मचेगी कि उस नुकसान की भरपाई कर पाना मुश्किल होगा। अमेरिका ने उसके ड्रोन विमान को मार गिराये जाने की ईरान की कार्रवाई को अकारण हमला करार दिया है। उधर ईरान का कहना है कि अमेरिकी ड्रोन विमान उसके वायु सीमा क्षेत्र में घुस आया था। अमेरिकी खुफिया ड्रोन की पहचान आरक्यू-4 ग्लोबल हॉक के रूप में की गयी है। आरक्यू-4 आम तौर पर अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरता है। 

ओमान की खाड़ी में तेल टैंकरों पर हुए हमले के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि ओमान की खाड़ी में पिछले गुरुवार को हाेरमुज जलडमरूमध्य के नजदीक दो तेल टैंकरों अल्टेयर और कोकुका करेजियस में विस्फोट किया गया था।

ईरान और अरब के खाड़ी देशों के जल क्षेत्र में हुए इस हादसे के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। पोम्पियो के मुताबिक अमेरिका ने खुफिया जानकारी के आधार पर ये आरोप लगाए हैं। अमेरिकी सेना ने अपने दावे के पक्ष में एक वीडियो जारी किया है जिसमें ईरानी सुरक्षाबल एक टैंकर से विस्फोटक हटाते हुए दिख रहे हैं। ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने ईरानी सेना के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स काॅर्प्स को ओमान की खाड़ी में तेल के टैंकरों पर हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया है।


शूटिंग के सेट पर शराब के नशे में लाठी-सरिया लेकर घुसे शराबियों का क्रू पर हमला, हमलावरों ने डायरेक्टर सोहम शाह को बुरी तरह पीटा

शूटिंग के सेट पर शराब के नशे में लाठी-सरिया लेकर घुसे शराबियों का क्रू पर हमला, हमलावरों ने डायरेक्टर सोहम शाह को बुरी तरह पीटा

20-Jun-2019

हाल ही में एकता कपूर के वेब सीरिज फिक्सर के शूटिंग सेट से एक ऐसा मामला सामने आया है मीडिया में आई खबर के अनुसार सीरीज का क्रू और आर्टिस्ट जब मीरा रोड पर घोडबंदर शूटिंग कर रहे थे तभी कुछ नशे में धुत 4 शराबी आए जिनके हांथ में लाठी-डंडे समेत सरिया तक थी। शराबियों ने अचानक क्रू और अर्टिस्टों पर हमला बोल दिया जिससे कई लोग बुरी तरह से जख्मी हो गए हैं।

इस मौके पर दबंग की एक्ट्रेस माही गिल भी मौजूद थीं जो तुरंत जाकर अपनी कार में बैठ गईं थीं। इस हमले मे कई लड़कियां भी घायल हुई हैं। बता दें कि इस हमले में डायरेक्टर सोहम शाह को बुरी तरह पीटा गया। 

इसकी जानकारी साकेत साहनी इस वीडियो में देते हुए नजर आ रहें जो एकता कपूर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है। ये मामला यहीं शांत नहीं बल्कि जब स्थानीय पुलिस को सूचना देकर बुलाया गया को मदद करने के बजाय पुलिस ने मेकर्स से ही 50 हजार रुपए वसूल लिए। हालांकि पुलिस पैसे लेने वाली बात को झूठा बता रही है। हमले के बाद वो सभी शराबी कहां गायब हैं किसी को नहीं पता है। इस हमले की फिल्म इंडस्ट्री के कई दिग्गजों के द्वारा निंदा की गई है। 


यूपी : सामूहिक बलात्कार पीड़िता ने  शिकायत दर्ज नहीं होने से तंग आकर कर ली आत्महत्या

यूपी : सामूहिक बलात्कार पीड़िता ने शिकायत दर्ज नहीं होने से तंग आकर कर ली आत्महत्या

18-Jun-2019

उत्तर प्रदेश के बदायूं में सामूहिक बलात्कार की एक पीड़िता ने आत्महत्या कर ली. खबर के मुताबिक पुलिस पीड़िता के साथ हुए दुष्कर्म के आरोपितों के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कर रही थी. इससे तंग आकर उसने खुद को फांसी लगा ली. रविवार को उसका शव कमरे में पंखे से लटका मिला. पुलिस ने बताया कि पीड़िता के पास से एक सूसाइड नोट बरामद हुआ है.

डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक इस मामले में बदायूं के एसपी अशोक त्रिपाठी ने स्टेशन हाउस अधिकारी (एसएचओ) को लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया है. पीड़िता बीती 15 जून को एसएचओ के पास शिकायत लेकर पहुंची थी. लेकिन उसने शिकायत दर्ज नहीं की. बाद में बरेली जोन के अतिरिक्त महानिदेशक अविनाश चंद्र के निर्देश पर एफआईआर दर्ज हो पाई. हालांकि तब तक देर हो चुकी थी. इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि पीड़िता का शव मिलने से दो घंटे पहले शिकायत दर्ज की गई.

खबर के मुताबिक पीड़िता का पति दिल्ली में दिहाड़ी मजदूर है. इसलिए वह अपने माता-पिता के यहां ही रहती थी. पुलिस के अधिकारी ने दर्ज शिकायत के हवाले से बताया कि पीड़िता से रेप करने वाले तीनों आरोपित उसके रिश्तेदार हैं. वे 15 मई के दिन महिला को यह कह कर ले गए उसका पति दिल्ली में बीमार है.

अधिकारी ने बताया, ‘पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपित उसे तेलंगाना के सिकंदराबाद शहर ले गए और एक कमरे में कैद कर उससे बलात्कार किया. एक हफ्ते बाद जब वे उसे दिल्ली ले जा रहे थे, उसी दौरान पीड़िता ने एक सहयात्री की मदद से फोन कर माता-पिता को अपनी आपबीती सुनाई. उसके पिता जब तक बाकी लोगों के साथ दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे, तब तक आरोपित भाग चुके थे.’

साभार : satyagrah से 


वडोदरा में होटल के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दम घुटने से सात की मौत

वडोदरा में होटल के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दम घुटने से सात की मौत

15-Jun-2019

गुजरात के वडोदरा में एक सेप्टिंक टैंक की सफाई के दौरान सात लोगों के मारे जाने की खबर है. न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया कि घटना जिले के एक होटल की है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक सभी की मौत कथित रूप से दम घुटने से हुई है. मृतकों में चार सफाईकर्मी बताए जा रहे हैं. बाकी तीन होटल के कर्मचारी थे.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार रात को हुई इस घटना के बाद होटल के मालिक हसन अब्बास भोरानिया पर गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है. अखबार ने बताया कि मरने वालों के नाम महेश पटनवाडिया, अशोक हरिजन, बृजेश हरिजन, महेश हरिजन, विजय चौधरी, सहदेव वसावा और अजय वसावा हैं. अशोक, महेश, बृजेश और पटनवाडिया को सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए बाहर से बुलाया गया था. जबकि चौधरी, सहदेव और अजय को चारों सफाईकर्मियों की मदद के लिए लगाया गया था.

पुलिस के मुताबिक महेश पटनवाडिया सबसे पहले टैंक में घुसे थे. लेकिन जब वे नहीं लौटे तो उनके साथी उन्हें बचाने के लिए एक के बाद एक नीचे उतरे. बाद में होटल के तीनों सहयोगी भी टैंक के नीचे गए. लेकिन उनमें से कोई भी जिंदा नहीं लौटा. एक अधिकारी ने बताया कि बाद में वडोदरा नगर पालिका के सीवर साफ करने वाले वाहन से टैंक की सफाई कर दी गई.


दिग्विजय सिंह की जीत नहीं होने पर जल समाधि लेने की बात कहने वाले मिर्ची बाबा ने डीएम से जल समाधि की इजाजत मांगी

दिग्विजय सिंह की जीत नहीं होने पर जल समाधि लेने की बात कहने वाले मिर्ची बाबा ने डीएम से जल समाधि की इजाजत मांगी

14-Jun-2019

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के दौरान मध्य प्रदेश के भोपाल से कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह की जीत का दावा करने वाला पूर्व महामंडलेश्वर बाबा वैराज्ञानंद गिरी उर्फ मिर्ची बाबा एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। दरअसल मिर्ची बाबा ने दावा किया था कि इस चुनाव में दिग्विजय सिंह की जीत जरूर होगी, अगर ऐसा नहीं होता है तो वह समाधि ले लेंगे। ऐसे में चुनाव में दिग्विजय सिंह की हार के बाद मिर्ची बाबा भोपाल के जिलाधिकारी से समाधि की इजाजत मांगी है। 

मिर्ची बाबा ने भोपाल के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इस बात की इजाजत मांगी है कि उन्हें 16 जून को दोपहर 2.11 बजे जल समाधि लेने दिया जाए। फिलहाल मिर्ची बाबा असम के कामाख्या मंदिर में तपस्या कर रहे हैं। मिर्ची बाबा ने दिग्विजय सिंह की जीत का दावा किया था, लेकिन 23 मई को चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद दिग्विजय सिंह को भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था।

चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद से मिर्ची बाबा लापता हो गए थे। जिसके बाद कई लोगों ने उनका मोबाइल नंबर तलाश किया और उन्हें फोन करके पूछा कि आप कब समाधि लेंगे। लेकिन चुनाव नतीजे आने के बाद से ही मिर्ची बाबा लापता थे। बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान मिर्ची बाबा ने दिग्विजय सिंह की जीत के लिए मिर्ची हवन किया किया था। इस हवन में 5 क्विंटल मिर्ची का इस्तेमाल किया गया था।


राजस्थान की स्कूल की किताब में से वीडी सावरकर के नाम के आगे से 'वीर' शब्द हटाया गया

राजस्थान की स्कूल की किताब में से वीडी सावरकर के नाम के आगे से 'वीर' शब्द हटाया गया

14-Jun-2019

राजस्थान बोर्ड ऑफ सेकेंडरी कि किताबों में किया गया है। जिसमे वीडी सावरकर के नाम के आगे से वीर शब्द को हटा दिया गया है। दरअसल 13 फरवरी को एक रिव्यू कमेटी का गठन किया गया था, जिसे यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह इस बात की समीक्षा करे कि बीती सरकार में किताबों में जो संशोधन किए गए क्या वह राजनीतिक वजहों से थे और उसे जारी रखा जाना चाहिए या फिर उसे फिर से बदलना चाहिए। कक्षा 12वीं की इतिहास की किताब में वीडी सावरकर के की भूमिका में संशोधन किया गया है। सावरकर के नाम के आगे से वीर शब्द को हटा लिया गया। उनका नाम स्वतंत्रता आंदोलन के चैप्टर में है। इस चैप्टर में सावरकर के योगदान कृी विस्तृत चर्चा की गई है। 

नई किताब में अब वीर सावरक का नाम विनायक दामोदर सावरकर है। जिसमे इस बात की जानकारी दी गई है कि कैसे जेल में बंद होने के दौरान अंग्रेजों को सावरकर चार बार दया याचिका के लिए पत्र लिखा। दूसरी दया याचिका में उन्होंने खुद को पुर्तगाली बताया था साथ ही लिखा गया है कि साावरकर ने देश को हिंदू देश बनाने की दिशा में काम किया। सावरकर ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया और पाकिस्तान के गठन का भी विरोध किया। 


विकिलिक्स संस्थापक जूलियन असांजे के अमेरिका प्रत्यर्पण को ब्रिटेन की मंजूरी

विकिलिक्स संस्थापक जूलियन असांजे के अमेरिका प्रत्यर्पण को ब्रिटेन की मंजूरी

13-Jun-2019

मीडिया रिपोर्ट से 

नई दिल्ली। ब्रिटिश गृह सचिव ने विकिलिक्स संस्थापक जूलियन असांजे को अमेरिका भेजने के लिए प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। ब्रिटेन के गृह सचिव साजिद जाविद के असांजे के प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद अब उनका अमेरिका प्रत्यर्पण लगभग साफ हो गया है। अदालत की कार्यवाही के बाद 47 साल के असांजे को अमेरिका प्रत्यर्पित किया जा सकता है। 

साजिद जाविद ने बताया है कि जेल में बंद असांजे के प्रत्यर्पण के लिए अमेरिका से अनुरोध मिला है। जिस पर कल अदालत में चर्चा होनी है इससे एक दिन पहले ही मैंने प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कल अदालतों के सामने भी रखा जाएगा। 

बता दें कि असांजे पर अमेरिकी कंप्यूटर्स को हैक करने और वहां के कानून को तोड़ने का आरोप है। अमेरिका ने उनपर सैन्य और राजनयिक सूत्रों के नाम उजागर करने वाले गोपनीय दस्तावेज को प्रकाशित कर जासूसी कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। सेना और कूटनीति से जुड़े हुए दस्तावेज रिलीज करने के आरोप में अमेरिका उनके प्रत्‍यार्पण की कोशिशों में था, जिसे अब सफलता मिल गई है। खुलासों के बाद 2012 से अंसाजे ने इक्‍वाडोर दूतावास में शरण ली थी। असांजे को ब्रिटेन स्थित इक्वाडोर के दूतावास से अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था। ब्रिटेन में जमानत के दौरान फरार होने के सिलसिले में वह 50 हफ्ते की सजा काट रहे हैं। वह अमेरिका प्रत्यर्पित किए जाने के खिलाफ भी मुकदमा लड़ रहे हैं। 


पतंजलि के उत्पादों की बिक्री में आई 10 फीसदी की गिरावट

पतंजलि के उत्पादों की बिक्री में आई 10 फीसदी की गिरावट

12-Jun-2019

 नई दिल्ली: तीन साल पहले तक बाबा रामदेव का कारोबार जहां बुलंदियों पर था वहीं अब इसकी हालत खस्ता होते हुए नजर आ रही है. हाल ही में आई रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 में उनकी कंपनी पतंजलि के उत्पादों की बिक्री में 10 फीसदी की कमी आई है. शुरुआत में उनके उत्पादों पर लोगों ने खूब भरोसा दिखाया था. भारत में बने नारियल तेल और आयुर्वेदिक औषधियों जैसे उनके स्वदेशी उत्पाद विदेशी कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरे थे. 

बाबा रामदेव ने साल 2017 में दावा किया था कि उनकी कंपनी के टर्नओवर के आंकड़े मल्टीनेशनल कंपनियों को कपालभाती करने को मजबूर कर देंगे.  उन्होंने कहा था कि मार्च, 2018 में वित्त वर्ष खत्म होने तक पतंजलि की बिक्री लगभग दोगुनी से ज्यादा होकर 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी. लेकिन इन सब दावों के विपरीत पतंजलि की बिक्री 10 फीसदी घटकर 8100 करोड़ रुपये रह गई है. 

कंपनी के सूत्रों और विश्लेषकों का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष में इसमें और गिरावट का अनुमान है. पतंजलि से मिली जानकारी के आधार पर केयर रेटिंग्स ने अप्रैल में कहा था कि अनुमानित आंकड़े 9 महीने में यानि 31 दिसंबर तक कंपनी की बिक्री महज 4700 करोड़ रुपये रहने का संकेत दे रहे हैं. 

कंपनी के मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों, सप्लायर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स, स्टोर मैनेजर्स और कंज्यूमर्स से बातचीत में पता चला है कि कंपनी को कुछ गलत कदमों की वजह सेनुकसान हुआ है. खास तौर पर उन्होंने उत्पादों की अस्थिर क्वालिटी की ओर इशारा किया फिर भी कंपनी का विस्तार हुआ. हालांकि कंपनी का कहना है कि इसके तेजी से विस्तार से कुछ शुरुआती समस्याएं आईं, लेकिन उन्हें अब दूर कर लिया गया. 2016 में हुई नोटबंदी से और 2017 में जीएसटी लगने के बाद से कंपनी की आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं हैं. 

साभार : NDTV से 


एटा में पेड़ से लटके मिले प्रेमी युगल के शव, ऑनर किलिंग की आशंका

एटा में पेड़ से लटके मिले प्रेमी युगल के शव, ऑनर किलिंग की आशंका

11-Jun-2019

मीडिया रिपोर्ट 

एटा। उत्तर प्रदेश के एटा जिले में मंगलवार की सुबह एक प्रेमी युगल के शव पेड़ पर लटके मिले है। दोनों के शव मिलने के बाद गांव में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक विभाग की टीम ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर मौका-ए-वारदात का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक विभाग ने घटना स्थल से साक्ष्यों को अपने कब्जे में लेकर दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के भिज दिया। 

घटना एटा के नयागांव थाना क्षेत्र की है। नयागांव क्षेत्र की रहने वाली 18 वर्षीय युवती और क्षेत्र के ही 22 वर्षीय युवक में प्रेम संबंध थे। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन लड़की के परिजन इसके खिलाफ थे। इसके चलते प्रेमी-प्रेमिका 15 दिन पहले घर छोड़कर चले गए थे। मृतक युवक के परिजनों का आरोप है कि लड़की के परिवार वालों ने शादी कराने के बहाने दोनों को वापस बुलाया था। वापस आने पर सोमवार देर रात युवक-युवती की हत्या कर दी। मंगलवार तड़के गांव दादुपुर के बाहर पेड़ पर दोनों के शव लटका दिए गए। 

पेड़ पर शव लटके होने की सूचना मिलते ही फोर्स के साथ पुलिस अफसर मौके पर पहुंचे गए। फॉरेंसिक विभाग की टीम और पुलिस ने घटना का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक विभाग की टीम ने मौका-ए-वारदात से साक्ष्यों को कब्जे में लेकर दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल पुलिस आसपास के ग्रामीणों से घटना की जानकारी जुटा रही है। दोनों मृतकों के पैर जमीन से लगे हुए थे। वहीं लड़की के परिजन फरार बताये जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। वहीं, घटना के बाद मृतक युवक के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। इस घटना ने हर किसी का दिल दहला दिया है। इलाके में तरह तरह की चर्चाएं हो रही है। 


टीवी चैनल ने लड़की के साथ डांस करने वाले व्यक्ति को RJD विधायक बताया, वीडियो गलत होने पर मांगी माफी

टीवी चैनल ने लड़की के साथ डांस करने वाले व्यक्ति को RJD विधायक बताया, वीडियो गलत होने पर मांगी माफी

11-Jun-2019

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने सोमवार को एक टीवी चैनल को उसके एक विधायक यदुवंश यादव को गलत तरीके से दिखाए जाने पर फटकार लगाई, जिसके बाद चैनल को पार्टी से माफी मांगनी पड़ी। दरअसल, चैनल ने एक वीडियो दिखाया था जिसमें दावा किया था कि विधायक यदुवंश यादव मणिपुर की लड़की के साथ अश्लील डांस कर रहे हैं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रहा है। बाद में आरजेडी ने ट्वीट कर चैनल के दावों को खारिज करते हुए जमकर अपनी भड़ास निकाली।

समाचार चैनल टीवी 9 भारतवर्ष द्वारा वीडियो के साथ ट्वीट कर लिखा गया, “RJD विधायक यदुवंश यादव मणिपुर में लड़कियों के साथ मना रहे थे रंगरेलिया, वीडियो वायरल” इस ट्वीट के साथ चैनल ने वायरल हो रहे वीडियो का बनाया गया एक पैकेज भी ट्वीट किया था।

चैनल के इस ट्वीट पर आरजेडी ने पलटवार करते हुए लिखा, “ये भेड़चाल पत्रकारिता छोड़िए। video में दिख रहा राजद विधायक नहीं है। यदुवंश जी तो बुज़ुर्ग विधायक है। @ajitanjum जी तहकीकात करवाइये। सत्यता वेरिफ़ाई करवाये बिना किसी का काल्पनिक चरित्रहनन करना कौन सी पत्रकारिता है? अगर MLA साहब ने चैनल पर मानहानि का मुक़दमा किया तो??”

आरजेडी की इस आपत्ति के बाद टीवी 9 भारतवर्ष ने ट्वीट कर खेद व्यक्त किया। चैनल ने ट्वीट किया, “कई वेबसाइट और चैनल पर चलने के बाद यह खबर हमारे यहां भी चली, लेकिन बाद में कहा गया कि RJD विधायक उस वीडियो में नहीं हैं. @tv9bharatvarsh इस भूल के लिए खेद व्यक्त करता है.” यदुवंश यादव ने भी एनडीटीवी से कहा कि हम वीडियो में मौजूद नहीं हैं, न तो मैं और न ही समिति के सदस्य जो मेरे साथ गए थे। किसी अन्य व्यक्ति के चेहरे को दिखाया गया है और वीडियो को सार्वजनिक किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने उनका नाम लिया, उन पर मुकदमा करने की धमकी दी है। दरअसल, इम्फाल टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार के भाजपा, जदयू और राजद के चुने हुए प्रतिनिधि 1 जून को मणिपुर के अध्ययन दौरे पर थे। इस रिपोर्ट के बाद ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

साभार : जनता का रिपोर्टर से 

 


किसी भी कौम की बरबादी का कारण अहंकार है

किसी भी कौम की बरबादी का कारण अहंकार है

10-Jun-2019

इंसान चाहे जितना ज्ञान हासिल कर ले अगर उसके अंदर अंहकार की चिंगारी छुपी हुई है तो वह समाज, धर्म सभी के लिए खतरनाक है।  उसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि आज इंसान ना सच बोलना चाहता है ना सुनना चाहता है। आज इंसान शोहरत का भूखा है उसे नाम और शोहरत चाहिए। समाज सेवा के नाम पर बहुत ऐसे लोग मिलेंगे जो सेवा में भी मेवा ढूंढते हैं। उन्हें आगे बैठाया जाये लोग जय जयकार करें। पीछे पीछे चलें। पेपर में कवरेज हो। नाम सबसे ऊपर हो। यह क्या है? सिवाय दिखावा, अहंकार और लालच के कुछ नहीं। ऐसे लोग बहुत नुकसानदायक साबित होते हैं।

आज के दौर में सोशल मीडिया आ जाने से लोग काबिल हो गये हैं। जो 20 सालों से पढ़ा रहा है उसे पढ़ाने का तरीका बता रहे हैं। जो 18-20 सालों से पत्रकारिता कर रहा उसे पत्रकारिता सिखा रहे हैं। यह क्या है? सिवाय चापलूसी के कुछ नहीं। 

हकीकत यह है कि लोग मदद नहीं करना चाहते क्यों कि इसमें वह फायदा ढूंढते हैं और मदद करने वाले रात के अंधेरे में मदद करते हैं किसी को पता नहीं चलता।
किताबी ज्ञान और व्हाट्सएप ज्ञान हासिल करके कोई बुद्धिजीवी नहीं होता । इंसान के अंदर ठहराव होना चाहिए। व्यक्तित्व विकास अर्थात personality development के लिए पहले अपने व्यक्तित्व को निखारें।

आज हमारा समाज क्यों बर्बाद हो रहा है क्योंकि इसमें मतलबपरस्त लोग शामिल हो गये हैं। हर काम में फायदा देखते हैं। ईमानदारी नहीं है ऐसे में कोई ईमानदार एवं एडवांस सोच वाले व्यक्ति से जब सामना होता है तो उसके प्रति नकारात्मक रवैया अपनाया जाता है। क्योंकि उससे डर रहता है।
लेकिन आज की जरूरत है कि नवजवान आगे आयें और काम को अपने हाथों में लें ताकि समाज में बदलाव आ सके।

सैय्यद एम अली तक़वी ब्यूरो चीफ (हम्दे मुल्क उर्दू) (The Revolution News)


मैच देखने पहुंचे विजय माल्या को देखकर लोगों ने लगाए ‘चोर-चोर के नारे

मैच देखने पहुंचे विजय माल्या को देखकर लोगों ने लगाए ‘चोर-चोर के नारे

10-Jun-2019

धोखाधड़ी और धन शोधन मामले में भारत में आरोपी शराब व्यवसायी विजय माल्या रविवार यानी कि 9 जून को भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जा रहे वर्ल्ड कप 2019 का मुकाबला देखने द ओवल मैदान में पहुंचे थे। जहां उन्हें खासा शर्मिंदा होना पड़ा। माल्या जब स्टेडियम से बाहर निकल रहे थे तो लोगों ने उन्हें देखकर ‘चोर है…चोर है’ चिल्लाना शुरु कर दिया। इसके बाद उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि मैं सुनिश्चित कर रहा हूं कि मेरी मां को कोई चोट न पहुंचे।

दरअसल इस दौरान उनके साथ उनकी मां ललिता भी थीं, जब भीड़ ने उन्हें घेर कर ‘चोर है…चोर है’ के नारे लगाए। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। विजय माल्या ने कहा, ‘मैं सिर्फ मैच देखने आया हूं। मैं सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मां को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। वहीं प्रत्यर्पण के सवाल पर माल्‍या ने कहा, ‘कोर्ट में अगली सुनवाई की तैयारी चल रही है, जो जुलाई में होगी।


झारखण्ड में भूख से वृद्ध की मौत 3 माह से नहीं मिलरहा था राशन

झारखण्ड में भूख से वृद्ध की मौत 3 माह से नहीं मिलरहा था राशन

09-Jun-2019

रांची : झारखंड के लातेहार में एक शख्स की भूख से मौत की बात सामने आई है. हालांकि राज्य सरकार ने भूख से मौत को नकार दिया है. राज्य की समाज कल्याण मंत्री लुइस मरांडी ने लातेहार में 65 वर्षीय रामचरण मुंडा की भूख से मौत होने की बात से इंकार किया है. मंत्री लुइस ने कहा कि सरकार कई सारी जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही है. किसी ना किसी योजना का लाभ उसे मिल रहा होगा. इसलिए इसे भूख से मौत नहीं कह सकते हैं.

मंत्री ने कहा कि मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया गया है. जांच रिपोर्ट आने के बाद मौत के असली कारणों का पता चलेगा. बताया जा रहा है कि 65 साल के रामचरण मुंडा ने तीन-चार दिनों से खाना नहीं खाया था. क्योंकि परिवार को तीन महीने से राशन नहीं मिला था. घर पर तीन दिनों से अन्न का एक दाना भी नहीं था. इतना ही नहीं कुछ दिनों से घर में चूल्हा तक नहीं जला था. हालांकि अधिकारी इस बात से इनकार कर रहे हैं कि मौत भूख से हुई है. उनका कहना है कि मामले की जांच की जा रही है.
रामचरण मुंडा की बेटी ने बताया, “तीन महीने से परिवार को राशन नहीं मिला था, इसलिए मेरे पिता ने चार दिनों से कुछ नहीं खाया था.” बताया जा रहा है कि राशन बांटने वाले स्थानीय डीलर ने नेटवर्क का बहाना बनाकर तीन महीने से राशन का वितरण नहीं किया था. जबकि सरकारी अधिकारी इसके पीछे कुछ और ही कारण बता रहे हैं. एसडीएम ने ट्वीट कर इस पूरे मामले पर सफाई दी है.

मौत की खबर मीडिया में आते ही आनन-फानन में प्रशासन मदद के लिए आगे आया. रामचरण मुंडा के परिजनों को अनाज और दाह संस्कार के लिए पैसे दिए गए. मुंडा की मौत जांच का विषय है. लेकिन अगर मुंडा की मौत भूख से हुई है तो यह सरकारी मशीनरी के कामकाज पर सवालिया निशान खड़ा करता है.

एक ओर तो सरकार अपनी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने की बात करती है. दूसरी ओर देश में भूख से मौत हो रही है. हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद मोदी की बंपर जीत पर विशेषज्ञों ने तर्क दिया था कि मोदी की योजनाओं के कारण जीत हुई है. ऐसे में अगर वाकई भूख से मौत हो रही है तो जमीनी हकीकत कुछ और ही है.

TNIIS 


यूपी में एक और बच्ची के बलात्कार और हत्या का मामला सामने आया

यूपी में एक और बच्ची के बलात्कार और हत्या का मामला सामने आया

08-Jun-2019

उत्तर प्रदेश में नाबालिग बच्ची के बलात्कार और हत्या का एक और मामला सामने आया है. यहां हमीरपुर में एक दस साल की दलित लड़की की कथित रूप से बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक घटना का आज सुबह पता चला.

खबर के मुताबिक पीड़िता के पिता ने बताया कि गायब होने से पहले वह रात में घर के बाहर अपनी मां की बगल में सो रही थी. बाद में उसका निवस्त्र शव पास के शमशान घाट में मिला. पिता का कहना है कि उनकी बेटी को रात में अगवाह कर लिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि हत्या से पहले उसका बलात्कार किया गया. इस घटना से कुरारा गांव के लोग गुस्से में है. पुलिस जब बच्ची का शव देखने मुर्दाघर पहुंची तो उन्होंने उसे घुसने नहीं दिया.

उधर, हमीरपुर के एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि मामले की जांच के लिए विशेष समूह और अन्य टीमों का गठन किया गया है. वहीं, जिला अस्पातल में डॉक्टरों का एक पैनल शव का पोस्टमॉर्टम करेगा जिसकी वीडियोग्राफी भी की जाएगी. मीणा ने कहा, ‘पुलिस ने परिवार और गांव के लोगों से कहा है कि वे शव को ले जानें दें.’

हमीरपुर के कुरारा गांव का यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अलीगढ़ में एक ढाई साल की बच्ची की निर्मम हत्या की घटना ने पूरे देश को हिला कर रखा हुआ है. उसमें भी पीड़ित परिवार का आरोप है कि हत्या से पहले उनकी बेटी का बलात्कार किया गया. हालांकि पुलिस अभी तक इस बात को खारिज कर रही है और एक और टेस्ट करा रही है.


तालीम और तरक्की के लिए बिखरे हुए विचारों को एक सूत्र में पिरोने की जरूरत

तालीम और तरक्की के लिए बिखरे हुए विचारों को एक सूत्र में पिरोने की जरूरत

08-Jun-2019

आज जहां दुनिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है और शिक्षा में तकनीकी भी शामिल हो गई है। वहीं समाज में अभी भी शिक्षा के प्रति जागरूकता लाना जरूरी है। इसी उद्देश्य के साथ गोल्डन पैलेस लखनऊ में एक मीटिंग का आयोजन किया गया। यह आयोजन अंजुमन वज़ीफा सादात व मोमेनीन एवं तंज़ीमुल मकातिब के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।  इसका विषय था "Be Employable Campaign" इस सभा में इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे शिया समुदाय के नवजवानों को शिक्षा विशेष रूप से तकनीकी और अंग्रेजी शिक्षा के प्रति जागरूक किया जाये और कैसे उनको रोजगार मुहैया कराया जाये। 

इस अवसर पर सभी सम्मानित लोगों ने अपनी अपनी राय रखी। कार्यक्रम का शुभारंभ तिलावते कुरआन से हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए अपनी इफ्तेताही तकरीर में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा सैय्यद अफ़ज़ाल  मुर्तजा रिजवी  ने कहा कि तरक़्क़ी के लिए आपसी सोच और समझ का एक होना बहुत जरूरी है। हमें आपस में सबको एक सूत्र में पिरोने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें उन कोर्सेज की तरफ ज़्यादा ज़ोर देने की जरूरत है जिसकी जरूरत भविष्य में होगी। उन्होंने तकनीकी शिक्षा पर भी जोर दिया और कहा कि आज के युग में बग़ैर तकनीकी शिक्षा के रोजगार के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करना बहुत मुश्किल है।   उन्होंने कहा कि अंग्रेजी एक ऐसी भाषा है जिससे सफलता का पैमाना तय किया जा सकता है। 

कार्यक्रम का समापन मौलाना सफ़ी हैदर साहब की तकरीर के साथ हुआ। अपनी तकरीर में मौलाना ने कहा कि क़ौम की तरक्की और कामयाबी के लिए वह हर तरह से तैयार हैं, जज़्बा, ईसार, मेहनत, ताक़त हर तरीके से वह क़ौम की तरक़्क़ी के लिए हाजिर है। अंत में यह तय पाया गया कि तंज़ीमुल मकातिब और अंजुमन वज़ीफा सादात व मोमेनीन की ज़ेरे निगरानी ऐसा इंस्टीट्यूट क़ायम किया जाये जहां अंग्रेजी, तकनीकी एवं पर्सनालिटी डेवलपमेंट की शिक्षा शिया बच्चों को दी जायेगी। साथ ही साथ इसके लिए बहुत जल्द एक और विशेष मीटिंग बुलाई जाये जिसमें कुछ चुने हुए प्रतिनिधियों को चुनें हुये कार्य सौंपे जायें। कार्य का मुख्य उद्देश्य शिया नवजवानों में अंग्रेजी और तकनीकी शिक्षा के प्रति उत्सुकता पैदा करना है।

कार्यक्रम मौलाना सफ़ी हैदर साहब की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में शिया कालेज के रसायन विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डा सरवत तक़ी साहब, जनाब जमानत अली साहब, जनाब अली रज़ा साहब, जनाब अशफाक रिज़वी साहब, यूरिट एजुकेशन इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर सैय्यद एम अली तक़वी साहब , जनाब जमाल साहब, चार्टेड एकाउंटेंट जनाब ज़िया अब्बास रिजवी साहब, एस बी आई के ए जी एम जनाब क़मर  अल्ताफ़ साहब, आई सी सी एम् आर टी के असिस्टेंट प्रोफेसर जनाब अंजुम ज़िया रिज़वी साहब, डी ए वी कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ महमूदुल हसन साहब, डेप्युटी डायरेक्टर रूरल डेवलपमेंट डॉ फ़रीद हैदर रिज़वी साहब, जनाब अख़लाक़ साहब और बहुत से क्षेत्र के विशेषज्ञ उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन जनाब ऐनुल रज़ा रिजवी साहब ने किया।


डॉक्टर के इलाज से असंतुष्ट होकर व्यक्ति ने डॉक्टर की पत्नी की हत्या की

डॉक्टर के इलाज से असंतुष्ट होकर व्यक्ति ने डॉक्टर की पत्नी की हत्या की

07-Jun-2019

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक व्यक्ति ने कथित रूप से इलाज से असंतुष्ट होने की वजह से एक डॉक्टर की पत्नी की हत्या कर दी. पुलिस ने बताया कि आरोपित ने डॉक्टर के बेटे पर भी हमला कर उसे घायल कर दिया. द ट्रिब्यून के मुताबिक आरोपित का नाम रफीक रशीद (45) है. टुकोगंज पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि रशीद को गिरफ्तार कर लिया गया है.

खबर के मुताबिक आरोपित त्वचा की एक बीमारी से ग्रस्त है. वह शहर के एक डॉक्टर रामकृष्ण वर्मा से अपना इलाज करवा रहा था और उससे संतुष्ट नहीं था. गुरुवार को वह डॉक्टर से मिलने उनके घर पहुंचा. लेकिन उस समय रामकृष्ण घर पर नहीं थे. उनकी पत्नी लता वर्मा ने रशीद से कहा कि वह बाद में उनके पति से मिलने आए.

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक इससे रशीद इतना नाराज हुआ कि उसने लता पर चाकू से हमला कर दिया. उनका बेटा अभिषेक (19) उनकी मदद के लिए दौड़ा तो रशीद ने उसे भी चाकू से घायल कर दिया. बाद में दोनों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां डॉक्टरों ने लता को मृत घोषित कर दिया. अभिषेक को खतरे से बाहर बताया गया है. इस बीच पुलिस रशीद से पूछताछ कर रही है.


ज़िन्दगी बचाने के लिए पेड़ लगाना जरूरी है

ज़िन्दगी बचाने के लिए पेड़ लगाना जरूरी है

06-Jun-2019

विश्व पर्यावरण दिवस। खूबसूरत नाम। खूब शोर शराबा। रिकॉर्ड ही रिकॉर्ड। फोटोग्राफी, अखबारों में सुर्खियां। बस यही है पर्यावरण दिवस। बढ़ती गर्मी, गिरता जल स्तर, चटखती ज़मीन, परेशान इंसान यही सब कुछ हर तरफ़ दिखाई दे रहा है। इसके पीछे कारण सबको मालूम है मगर एहसास नहीं है। पर्यावरण और स्वच्छता के स्तर में गिरावट के पीछे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई एक अहम कारण है। धरती पर बेशुमार पेड़ है, लेकिन लोग अपनी सुविधा और फायदे के लिए इन्हें जमकर काट रहे हैं। आज हालत यह हो गई है कि जंगल खत्म होने से कई इलाके बंजर हो गए हैं। पर्यावरण दिवस के अवसर पर हमें जानना होगा कि आज जंगल और पेड़ों के क्या हालात हैं.

विज्ञान पर आधारित विश्व विख्यात मैगजीन नेचर ने सितंबर 2015 में एक रिपोर्ट जारी की थी जो जंगल और पेड़ों के वर्तमान हालात पर आधारित है।

- दुनियाभर में 3 ट्रिलियन यानी 3,040,000,000,000 (एक लाख करोड़) पेड़ हैं।

- हर साल 15.3 अरब पेड़ काटे जा रहे हैं. इस तरह से 2 पेड़ प्रति व्यक्ति से भी ज्यादा का नुकसान हो रहा है।

- वैज्ञानिकों के अनुसार मानव सभ्यता की शुरुआत (करीब 12 हजार साल पहले) के समय धरती पर जितने पेड़ थे, उसमें आज की तारीख में 46 फीसदी की कमी आई है। यह चिंताजनक बात है।

- भारत के लिहाज से बात करें तो देश में प्रति व्यक्ति सिर्फ 28 पेड़ ही आते हैं। भारत में पेड़ों की संख्या करीब 35 अरब है। जबकि चीन में 139 अरब पेड़ हैं और प्रति व्यक्ति के लिहाज से 102 पेड़ आते हैं।

- वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो सबसे ज्यादा पेड़ रूस में है जहां 641 अरब पेड़ हैं तो इसके बाद कनाड़ा, ब्राजील और अमेरिका का नंबर आता है जहां क्रमशः 318, 301 और 228 अरब पेड़ हैं।

- प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सबसे घने पेड़ उत्तरी अमेरिका, स्कैंडेनविया और रूस में हैं। इन इलाकों में करीब 750 बिलियन पेड़ (750,000,000,000) हैं जो वैश्विक स्तर का करीब 24 फीसदी है।

- दुनिया के जमीनी क्षेत्र में करीब 31 फीसदी क्षेत्र जंगलों के घिरे हुए हैं, लेकिन इनमें तेजी से गिरावट आती जा रही है. 1990 से 2016 के बीच दुनिया से 502,000 स्क्ववायर मील (13 लाख स्क्वायर किलोमीटर) जंगल क्षेत्र खत्म हो गए हैं।

- इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) के अनुसार, 2017 में भारत में 708,273 स्क्वायर किलोमीटर यानी देश की कुल जमीन का 21.54% हिस्से पर ही जंगल हैं। जबकि सीआईए की वर्ल्ड फैक्ट बुक 2011 के अनुसार, दुनिया में 39,000,000 स्क्वायर किलोमीटर जमीन पर जंगल हैं।

- पेड़ों के लगातार कटाव से वन क्षेत्र लगातार खत्म होते जा रहे हैं। हम सलाना 1 करोड़ 87 लाख (1.87 मिलियन) एकड़ जंगल खोते जा रहे हैं यानी कि हर मिनट 27 फुटबॉल मैदान के बराबर जंगल नष्ट होते जा रहे हैं।

उक्त आंकड़े दिखाते हैं कि पेड़ों का कटना और जंगलों के खत्म होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अगर यही चलता रहा तो बहुत जल्द धरती का बड़ा हिस्सा बंजर हो जाएगा।  जंगल खत्म हो गए तो करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी छीन जाएगी। ऐसे में जरुरी है कि जंगल भी बचाए जाएं और धरती को हरी-भरी रखी जाए जिससे आने वाली पीढ़ियां भी खूबसूरत धरती को निहार सके।

कल पर्यावरण दिवस मनाया गया खूब तस्वीरें दिखाई दीं। मगर क्या हम वास्तविकता समझ रहे हैं। नहीं, ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है सड़कों को चौड़ा करने के नाम पर अनगिनत पेड़ों को काट डाला गया। लेकिन क्या फिर नये पेड़ लगाए गए। मैं लखनऊ और आसपास की बात करता हूं। लखनऊ फैजाबाद रोड पर एक समय था जब लखनऊ से फैजाबाद तक दोनों तरफ घने पेड़ों की लाइन थी। पेड़ की शाखाओं का एक खूबसूरत दर दिखाई देता था। मगर आज सड़कें खुली और चटयल मैदान की तरह है मुसाफ़िर अगर कहीं साये में रूकना चाहे तो साया मिलना मुश्किल है। लखनऊ सीतापुर रोड खुली सड़क पेड़ गायब। यह क्या है इससे पर्यावरण की रक्षा नहीं हो सकती। तापमान बढ़ता जायेगा। हर तरफ़ गगनचुंबी इमारतें खड़ी होती जा रही हैं। हर तरफ़ सड़कों का यही हाल है।

सरकार और नागरिकों को इस विषय पर गहराई से विचार करने की जरूरत है। आज जरूरत है कि हर तरफ़ पेड़ लगाए जायें। शहरों के अन्दर सड़क के दोनों तरफ पेड़ लगाने की जरूरत है ताकि साया रहे और तापमान कम हो। ठंडक बनी रहे। एक दो जगहों पर जहां पेड़ हैं वहां का तापमान ठंडा रहता है। हर घर के सामने दो पेड़ों का लगाना आवश्यक कर देना चाहिए अन्यथा घर का असेसमेंट रद्द कर देना चाहिए। हाईवे पर दोनों तरफ पेड़ों का लगाना बहुत जरूरी है। अन्यथा आने वाली नस्लों का जीना मुश्किल हो जाएगा।
मेरा सरकार एवं जिम्मेदार नागरिकों से अनुरोध है कि इस नेक काम के लिए आगे आयें और बहुमूल्य मानव जीवन को बचाने के लिए कदम उठाएं।
 

सैय्यद एम अली तक़वी पत्रकार (हम्दे मुल्क उर्दू)


श्रीलंका ईस्टर धमाका मामला : दो गवर्नर और 9 मुस्लिम मंत्रियों ने दिया इस्तीफा

श्रीलंका ईस्टर धमाका मामला : दो गवर्नर और 9 मुस्लिम मंत्रियों ने दिया इस्तीफा

04-Jun-2019

मीडिया रिपोर्ट 

श्रीलंका में पिछले चार दिनों से जारी प्रदर्शनों के बीच सोमवार को नौ मुस्लिम मंत्रियों और दो गवर्नर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अप्रैल में ईस्टर पर हुए आतंकी हमलों के सिलसिले में तीन मुस्लिम मंत्रियों के इस्तीफे की मांग को लेकर चार दिनों से बहुसंख्यक बौद्ध समुदाय के हजारों लोग कैंडी में प्रदर्शन कर रहे थे।

प्रदर्शनकारियों में बौद्ध समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सांसद अतुरालिए रतना थिरो भी शामिल थे, जो बौद्ध भिक्षु भी हैं। वे तीनों मंत्रियों के इस्तीफे और मामले की जांच की मांग को लेकर कैंडी में चार दिन से आमरण अनशन कर रहे थे। अतुरालिए का आरोप है कि तीनों मुस्लिम मंत्रियों के संबंध कट्टरपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) से हैं। ईस्टर धमाकों के बाद सरकार ने एनटीजे को प्रतिबंधित कर दिया था। सोमवार दोपहर को दो मुस्लिम गवर्नरों अजत सैली और हिज्बुल्ला ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 

राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेना ने गवर्नरों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। दोनों गवर्नरों के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल सभी नौ मुस्लिम मंत्रियों, उप मंत्रियों और राज्य मंत्रियों ने भी त्यागपत्र दे दिया। 225 सदस्यीय संसद में 19 मुस्लिम सांसद हैं, जिनमें नौ कैबिनेट में शामिल थे। उद्योग और वाणिज्य मंत्री रिसत बैथियूथीन पर आरोप है कि वह एनटीजे का समर्थन करते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया है।

श्रीलंका मुस्लिम कांग्रेस के सांसद रऊफ हकीम ने कहा, ‘जब तक मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती है, मुस्लिम सांसद सरकार में शामिल नहीं होंगे।’ वरिष्ठ मंत्री कबीर हाशिम ने इस्तीफा देने के बाद कहा, ‘एक जिम्मेदार समुदाय के नाते हमने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया ताकि मामले की निष्पक्ष जांच पूरी हो और देश में शांति कायम रहे। ईस्टर पर हुए धमाकों के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग खुद से एनटीजे के बार में पुलिस को सूचना देते रहे हैं। 

हालांकि, कुछ निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी से मुस्लिम समुदाय चिंतित जरूर है।’ ईस्टर पर राजधानी कोलंबो समेत तीन शहरों में पांच सितारा होटलों और चर्चों में हुए आत्मघाती हमलों में 250 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जबकि करीब 500 घायल हुए थे। इन हमलों की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने ली थी, लेकिन श्रीलंका सरकार ने इसके लिए स्थानीय कट्टरपंथी संगठन एनटीजे को जिम्मेदार ठहराया था। 


अपने आप को ऊँची जाती का  बता मुस्लिम ने कर लिया  हिंदू युवती से विवाह , दूल्हा-दुल्हन लापता !

अपने आप को ऊँची जाती का बता मुस्लिम ने कर लिया हिंदू युवती से विवाह , दूल्हा-दुल्हन लापता !

02-Jun-2019

राजस्थान पुलिस को इमरान भाटी नामक एक व्यक्ति की तलाश है, जिसने खुद को कबीर शर्मा बताकर एक हिंदू युवती से शादी की, बहुत सारा दहेज लिया और अब दोनों गायब बताया जा रहा है. इमरान भाटी के खिलाफ सीकर में एक मामला दर्ज किया गया. पता चला है कि वह पहले से ही शादीशुदा था और तीन बच्चों का पिता है.

गुमशुदा महिला के पिता ने पुलिस से कहा, “भाटी ने खुद को मेरी बेटी के लिए एक अविवाहित ब्राह्मण के रूप में पेश किया, शादी के लिए प्रस्ताव रखा और फिर अपने नकली ब्राह्मण माता-पिता व नकली रिश्तेदारों की उपस्थिति में उसने शादी की.” जयपुर में 13 मई को शादी संपन्न हुई थी. इससे पहले एक सगाई समारोह आयोजित किया गया था जहां ‘नकली रिश्तेदार’ अपने माथे पर तिलक लगाकर आए थे.
लड़की के पिता ने कहा, “उन लोगों ने अपना ‘गोत्र’ तक बताया था. जब मैं पूरी तरह से संतुष्ट हो गया तब मैंने 13 मई को उनकी शादी तय कर दी.” शादी के कुछ दिनों बाद, उस आदमी ने मेरी बेटी को अतिरिक्त दहेज के रूप में 5 लाख रुपये की मांग करते हुए वापस सीकर भेज दिया. पिता ने कहा, “किसी तरह मैंने एक दोस्त से 2.5 लाख रुपये उधार लिए और फिर मेरी बेटी 17 मई को लापता हो गई. यहां तक कि हमारे घर में रखा सोना भी गायब है.”

असलियत जान दंग रह गए पिता
जब पिता शादी की तस्वीरों के साथ जयपुर गए, तो वे वास्तविकता को देखकर दंग रह गए. उन्हें ज्ञात हुआ कि वह आदमी कबीर शर्मा नहीं, बल्कि इमरान भाटी है और वह पहले से शादीशुदा है. उसने एक बार मोटर कंपनी में काम किया था. 25 मई को जिन पुलिस अधिकारियों को मामले की विचित्र कहानी सुनाई गई, वे भी दंग रह गए.

पुलिस अधीक्षक अमनदीप सिंह कपूर ने कहा कि लापता पुरुष और महिला का पता लगाने के लिए पुलिस ने एक विशेष टीम बनाई है. लड़की के पिता ने कहा कि उनकी केवल एक बेटी है और इसलिए उन्होंने 11 लाख रुपये नकद, 5 लाख रुपये के गहने और महंगी पोशाक सहित ‘एक बहुत बड़ा दहेज’ शादी के दौरान उन्होंने लड़के वालों को दिया.

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पूरे साजिश को ‘बहुत चालाकी’ से अंजाम दिया गया. यहां तक कि वीडियोग्राफर और फोटोग्राफर्स को ‘दूल्हे’ द्वारा चुना गया था. हालांकि, लड़की के परिवार ने अपने मोबाइलों पर कुछ तस्वीरें दिखाईं, जिसमें विवाह को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित किया गया था

media in put 


सादगी और कपड़े पर मीडिया क्यूं बेताब है ?

सादगी और कपड़े पर मीडिया क्यूं बेताब है ?

01-Jun-2019

प्रताप चन्द्र सारंगी बड़े सादे हैं। उनके कपड़े, उनकी दाढ़ी की चर्चा हो रही है। उन्हें उड़ीसा का मोदी कहा जा रहा है। ये सब टीवी चैनलों से निकल रही खबरें हैं जो फेसबुक पर भी तैर रही हैं।  सादगी का पैमाना किस के कपड़ों को बनाएं, सारंगी के, योगी के, साध्वी के या मोदी के। सवाल यह है कि क्या मौजूदा राजनीति के सबसे ज़्यादा कामयाब और लोकप्रिय लोगों के लिहाज से सादगी का वाकई बड़ा महत्व है।

युवा पत्रकार प्रज्ञा श्रीवास्तव लिखती हैं, “जिस इंसान को ज्यादातर लोग जानते ही नहीं. उसके लिए सबसे ज्यादा तालियां क्यों बजीं! ओडिशा के बालासोर से सांसद और मोदी कैबिनेट में मंत्री पद का शपथ लेने वाले प्रताप सारंगी पर 7 क्रिमिनल केसेज हैं। ओडिशा में कुष्ठ रोगियों के लिए काम करने वाले ग्राहम स्टेन्स को 23 जनवरी 1999 को उनकी ही गाड़ी में जलाकर मार डाला गया था। उस वक्त गाड़ी में ग्राहम के दो मासूम बच्चे भी जलकर मर गए। ये मर्डर बजरंग दल वालों ने करवाया था। और उस वक्त ओडिशा में बजरंग दल के स्टेट को-ऑर्डिनेटर थे कल से लोकतंत्र की प्रतिमूर्ति बन गए प्रताप सारंगी। बीजेपी मीडिया मैनेजर को अच्छे से पता है कि राजनीति का खेल कैसे खेलना है।  अचानक से एक बंदे को हीरो बना दिया गया और देश की जनता बेवकूफ़ बन गई।”

 राजनीति में जो नीति शब्द है, उसका क्या महत्व है। यह नहीं कहिए कि कोई महत्व नहीं। महत्व बहुत ज्यादा है। जो क़ामयाब हो रही है, वह भी आख़िर एक नीति है। सोची-समझी नीति। भले ही वह अच्छी हो या ख़राब।
साधारण कपड़े पहन कर साम्प्रदायिकता का पाठ पढ़ाना कहां तक उचित है। सारंगी जिस पार्टी में हैं, उसके पास जितना ज्यादा धन है और जिस तरह उसने चुनाव में खर्च किया है, कोई बिकाऊ मीडिया ही कह सकती है कि उस पार्टी ने सादगी से और सीमित संसाधनों से जैसे-तैसे चुनाव लड़ा। भाजपा में प्रत्याशी से पहले भाजपा का मैनेजमेंट और संघ का काडर चुनाव लड़ता है।

गांधी, नेहरू, इंदिरा, अम्बेडकर की आलोचना यह छोटे-छोटे नेता करते हैं। उन्हें शायद नहीं मालूम कि उनके द्वारा किए गए कार्यों का फायदा आज भी भारत को मिल रहा है। दलित, अल्पसंख्यक, स्त्रियां, वो अंतिम व्यक्ति क्या वाकई आपके एजेंडे में शामिल है या एक बार फिर से सरकार जुमला फेंक रही है राहुल गांधी , ममता बनर्जी और केजरीवालकी सादगी बिकाऊ मीडिया को नहीं दिखाई देती। सारंगी की सादगी दिखाई दे रही है। सारंगी 2002 में अयोध्या मंदिर मांग को लेकर ओडिशा विधानसभा में घुसकर तोड़फोड़ मचाने के लिए 2002 में दंगा आरोपी के बतौर गिरफ्तार भी हुए थे। उन पर सात आपराधिक मामले हैं, जिनमें से दो 153A यानी मज़हबी/जातीय/भाषाई आधार पर विभाजन की कोशिश के हैं।

भाजपा और उनके समर्थकों में सादगी की मिसाल बहुत है। मोदी, योगी, साध्वी, ऊमा, गिरिराज, कटियार और रामदेव यह सब सादगी की प्रतिमूर्ति हैं। 1992, अयोध्या,  गुजरात, लिंचिंग, संसद हमला,हाफ़िज़ सईद यह सारे कांड तो नेहरू जी कर गये थे। भाजपा के राजनीतिक लिबास पर साम्प्रदायिकता का कोई दाग़ नहीं है। बहरहाल शपथ ग्रहण समारोह हो चुका है। उम्मीद है कि मोदी बदलेंगे, शाह बदलेंगे, भाजपा बदलेगी, देश बदलेगा। फिलहाल कर्नाटक निकाय चुनाव ने नीति और बदलाव दोनों तरफ इशारा कर दिया है।


सैय्यद एम अली तक़वी पत्रकार (हम्दे मुल्क उर्दू) (The Revolution News)