जोगी जी के निधन के बाद उनकी पार्टी के भविष्य को लेकर लगाई जाने लगी अटकलें

जोगी जी के निधन के बाद उनकी पार्टी के भविष्य को लेकर लगाई जाने लगी अटकलें

09-Jun-2020

कृष्ण देव (केडी) सिंह

रायपुर 9 जून 2020 : अजीत जोगी के निधन के बाद उनकी पार्टी  जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी का क्या होगा ? इस सवाल को लेकर छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में अब अटकलें लगने लगा है। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी का 29 मई 2020 को निधन हो गया है । जोगी जी के बाद पार्टी में उनके उत्तराधिकारी के तौर पर प्रमुख रूप से अमीत जोगी,डा० रेणु जोगी अथवा वरिष्ठ विधायक धर्मजीत सिंह को नेतृत्व सौंपे जाने की अटकले लगने का दौर जारी है।

अजीत जोगी ने कांग्रेस से अलग होकर 2016 में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी ( जे.सी सी. जे. ) नाम से नई पार्टी बनाई और 2018 में बसपा से तालमेल कर विधानसभा का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में जोगी कांग्रेस को पांच और बसपा को दो सीटें मिली। बड़ी बात यह रही कि जोगी कांग्रेस राज्य में साढ़े 12 फीसदी वोट हासिल कर तीसरी शक्ति के रूप में उभरी। बसपा को मात्र ढ़ाई फीसदी ही वोट मिले। 2003 में विद्याचरण शुक्ल एनसीपी के बैनर तले प्रत्याशी उतारकर सात फीसदी वोट हासिल कर पाए थे।  अजीत जोगी 2003,2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का चेहरा थे और 2018 में उसी कांग्रेस को चुनौती देते उन्होंने अपने बलबूते पार्टी का जनाधार तैयार कर उसे मान्यता प्राप्त दल का तगमा भी दिला दिया।   

 पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी से राजनेता बने अजीत जोगी  राजनीतिक दांव-पेंच में माहिर खिलाडी के साथ छत्तीसगढ़ में जनाधार वाले नेता थे। खासतौर से सतनामी समाज के वोट बैंक पर उनकी पकड़ का कोई मुकाबला नहीं था। अब इस वोट बैंक पर अमित जोगी किस तरह कब्जा बनाये रखते हैं, यह उनके लिए चुनौती है और पार्टी की मजबूती के लिए जरुरी भी है। अब तक अमित अपने पिता अजीत जोगी की छत्रछाया में  ही काम कर रहे थे, भले वे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं  और चुनावी रणनीति से लेकर दूसरे काम वही देखते हैं, लेकिन अब उन्हें अजीत जोगी के बिना अजीत जोगी जैसे फैसले लेने और काम करने होंगे। 

चार साल के भीतर जोगी कांग्रेस छोड़कर कई  नेता -कार्यकर्त्ता चले  गए।  इसके बावजूद पार्टी को साढ़े 12 फीसदी वोट मिले, तो इसके पीछे  अजीत जोगी का करामाती व्यक्तित्व ही था। पार्टी में पुराने और नए लोगों का धड़ा अलग-अलग था, लेकिन अजीत जोगी के व्यक्तित्व के नीचे सब एक थे, लेकिन अमित सबको कैसे साधेंगे , यह सवाल  पार्टी के नेता-कार्यकर्त्ता के साथ आम लोगों के दिमाग में कौंध रहा है। अमित के फैसलों से असहमत होकर पार्टी के कुछ संस्थापक सदस्य अलग हो गए तो भीतर रहने वाले कुछ पुराने लोग असहज महसूस करते रहते हैं।  ऐसे लोग अब तक अजीत जोगी के कारण चल रहे थे।  अजीत जोगी के करीबी और पत्रकार अशोक भटनागर कहते हैं- सर पर जिम्मेदारी आती है तो हर व्यक्ति में परिपक्वता आती है , ऐसे ही अमित पर पार्टी का बोझ आने से गंभीर होंगे और सबको साथ लेकर चलेंगे।  

जोगी कांग्रेस की पहली परीक्षा मरवाही विधानसभा में उपचुनाव से शुरू हो जाएगी।  अजीत जोगी के निधन के कारण मरवाही विधानसभा सीट खाली हो गई है।  अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस सीट से अमित 2013 से 2018 तक विधायक रहे। छत्तीसगढ़ गठन के बाद से यह सीट जोगी परिवार के पास ही रही है। पारिवारिक सीट से अमित का उपचुनाव लड़ना तय है, लेकिन अमित के आदिवासी होने के  जाति प्रमाणपत्र को लेकर विवाद है।  मामला कोर्ट और थाने में है। अमित जोगी कहते हैं - इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया है। अजीत जोगी के आदिवासी प्रमाण पत्र को लेकर भी तीन दशक तक विवाद चलता रहा और अंत तक नहीं निपटा। अमित मरवाही से चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें सहानुभूति लहर का लाभ मिल जायेगा , लेकिन विरोधी दल भाजपा और कांग्रेस अमित को  रोकने की कोशिश करेगी ।

अजीत जोगी के निधन के बाद ही जोगी कांग्रेस का कांग्रेस में विलय की बात चल पड़ी है।  यह बात सही है कि जोगी परिवार के कांग्रेस की नेता सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी से संबंध अच्छे है।  खासतौर से अजीत जोगी की पत्नी डॉ. रेणु जोगी की केमेस्ट्री सोनिया गाँधी से बढ़िया है, लेकिन अमित की छवि और कार्यप्रणाली न तो सोनिया गाँधी को पसंद है और न ही राहुल गाँधी को। 2018 चुनाव के पहले भी कांग्रेस में विलय की कोशिश हुई थी, लेकिन कई रोड़े आ गए। फिर प्रदेश के कांग्रेस नेता जोगी परिवार के खिलाफ हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने जोगी परिवार को बाहर कर सत्ता में धमाकेदार तरीके से कब्जा कर लिया।  पार्टी के अभी 69 विधायक है।  दो तिहाई से भी ज्यादा बहुमत। ऐसे में कांग्रेस और जोगी कांग्रेस के शेष बचे चार विधायकों को क्यों जोड़े ? सरकार अल्पमत में होती तो बात समझ में आती। जोगी कांग्रेस से खैरागढ़ के विधायक देवव्रत सिंह को छोड़कर कोई भी अभी कांग्रेस में नहीं जाना चाहता।  कहा जाता है  देवव्रत का झुकाव कांग्रेस की तरफ जरूर है। जोगी कांग्रेस विधायक दल के नेता धर्मजीत सिंह का कहना है - पार्टी का कांग्रेस में विलय का कोई सवाल नहीं है। पार्टी का अपना जनाधार है।  

इसी दौरान अमीत जोगी के सहारे सत्ता का भरपूर दोहन करने वाले एक भोपाली सत्ता के दलाल और इन्तजाम अलि के हवाले से जो खबरे आने लगी है, उससे प्रेक्षक अंदाजा लगाने लगे हैं कि अन्दर रवाने राजनीतिक चाले चलने के संकेत मिलने लगे हैं। प्रचारित किया जा रहा है कि जोगी कांग्रेस में अजित जोगी की पत्नी डॉ. रेणु जोगी और विधायक धर्मजीत सिंह वरिष्ठ होने के साथ परिपक्व और गंभीर  भी है। डॉ. रेणु जोगी अभी भले विधायक हैं, लेकिन राजनीतिक दांव पेंच से दूर रहती है ।वहीँ धर्मजीत को कमान सौंपने से सतनामी वोट बैंक पार्टी से छिटक सकता है।  इसके आलावा अजीत जोगी की करिश्माई छवि और छाप को फायदा जितना अमित उठा सकते हैं , उतना धर्मजीत नहीं। इस कारण अमित के व्यवहार और काम के तरीके पर जितने भी सवाल उठाये जायँ।  पार्टी के खेवनहार वही बन सकते हैं ?


हॉस्पिटल स्टाफ की व्हाट्सएप चैट वायरल, लिखा था- मुस्लिम मरीजों का नहीं करेंगे इलाज

हॉस्पिटल स्टाफ की व्हाट्सएप चैट वायरल, लिखा था- मुस्लिम मरीजों का नहीं करेंगे इलाज

09-Jun-2020

व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल  के बद राजस्थान के चूरू जिले के एक निजी अस्पताल के कर्मचारियों के खिलाफ जांच शुरू की गई है। पुलिस ने रविवार को कहा कि चैट में सीओवीआईडी ​​-19 से प्रभावित मुस्लिम मरीजों के नहीं आने की चर्चा है।

 

पूरे देश में कोरोना संक्रमण के खिलाफ लोग लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं राजस्थान के चुरू स्थित एक निजी अस्पताल के कर्मचारियों का वॉट्सऐप चैट इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। चैट में कर्मचारी अस्पताल में मुस्लिम मरीजों का इलाज न करने की बात कह रहे हैं। चैट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह मामला चुरू के एक प्राइवेट हॉस्पिटल श्रीचंद बारादिया रोग निदान केंद्र का है।

यह मामला सामने आने के बाद इस हॉस्पिटल को चलाने वाले डॉक्टर सुनाील चौधरी ने फेसबुक पर सफाई देते हुए आरोपों से इनकार किया है। सुनील चौधरी ने फेसबुक पर लिखा कि उनके स्टाफ का किसी खास कौम के प्रति कोई द्वेष नहीं है। अगर किसी को बुरा लगा है तो वो इसके लिए माफी मांगते हैं।

वहीं, सरदारशहर पुलिस ने कहा है कि दो दिन पहले उनको ये स्क्रीनशॉट और शिकायत मिली है। जिसके बाद मामले की जांच की जा रही है। हालांकि अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। मामले को लेकर शहर के कई संगठनों ने अस्पताल के प्रति नाराजगी जताई है और इसे दो समुदाय को बांटने वाला बताया है।

क्या लिखा था मैसेज में

पुलिस के मुताबिक, वॉट्सएप चैट में डॉक्टर चौधरी की पत्नी का भी नाम है। वो भी इसी हॉस्पिटल में डॉक्टर हैं। हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया है। BARDIA RISE ग्रुप में किसी ने लिखा है- ‘कल से मैं मुस्लिम मरीज का एक्स रे नहीं करूंगा ये मेरा शपथ है।’ इसी शख्स ने एक और मैसेज लिखा- ‘मुस्लिम मरीजों को देखना ही बंद कर दो।’ एक अन्य ने इसी ग्रुप में लिखा- ‘अगर हिंदू पॉजिटिव होते न और मुस्लिम डॉक्टर होता तो हिंदुओं को कभी नहीं देखते। मैं मुस्लिम को ओपीडी में नहीं देखूंगी। बोल देना, मैडम नहीं है।’

डॉक्टर सुनील चौधरी की पत्नी डॉक्टर चौधरी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी ने साजिश के तहत ऐसे मैसेजे को वायरल किया। डॉक्टरों का कहना है कि उनके हॉस्पिटल में बड़ी संख्या हर रोज मुस्लिम मरीजों का इलाज होता है। उन्होंने कहा कि वो फेसबुक पर भी कह चुके हैं कि उनके हॉस्पिटल ने किसी के धार्मिक भावना को ठेस नहीं पहुंचाई है।

 


आखिर इंसान इतना निष्ठुर कैसे हो सकता है? क्या हममें इन्सानियत नहीं बची है? - प्रकाशपुंज पाण्डेय

आखिर इंसान इतना निष्ठुर कैसे हो सकता है? क्या हममें इन्सानियत नहीं बची है? - प्रकाशपुंज पाण्डेय

05-Jun-2020

प्रकाशपुंज पाण्डेय 

केरल में साइलेंट वैली जंगल में हथिनी को पटाखे से भरा हुआ अन्नानास खिला दिया गया था जो उसके मुंह में फट गया और एक सप्ताह बाद 27 मई को उसकी मौत हो गई। इस दौरान वह काफी समय तक एक नज़दीकी तलाब में खड़ी रही थी। वन विभाग ने इस मामले में कहा है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए वह कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगा। विभाग ने कहा, 'हथिनी के शिकार के लिए दर्ज मामले में कई संदिग्धों से पूछताछ की गई है। इस संबंध में गठित एसआईटी को अहम सुराग मिले हैं। वन विभाग दोषियों को अधिकतम सजा दिलवाने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगा।' 

केरल में पिछले महीने के आखिर में गर्भवती हथिनी की निर्ममता पूर्वक की गई हत्या के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के मीडिया सलाहकार अमर प्रसाद रेड्डी ने यह जानकारी दी। अमर प्रसाद रेड्डी ने ट्वीट किया, 'केरल में हथिनी की हत्या के मामले में अमजद अली और तमीम शेख की गिरफ़्तारी हुई है। मैं राज्य के मुख्यमंत्री से इस मामले में बिना धर्म, जाति या पंथ के देखे पारदर्शी जांच की मांग करता हूं।' केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने ट्वीट कर हथिनी के हत्यारों को सजा दिलाए जाने की बात कही थी। उन्होंने गुरुवार को ट्वीट किया था कि जांच जारी है और तीन संदिग्धों पर फोकस है। पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से इस घटना की जांच कर रहे हैं। जिला पुलिस प्रमुख और जिला वन विभाग के अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया। हम वो हरसंभव करेंगे जिससे हत्यारों को सजा मिल सके।

इस खबर के ज्ञात होने के बाद मनुष्य का मनुष्यता पर से विश्वास उठ गया है। आखिर क्यों एक निर्दोष जानवर का दुश्मन बन जाता है इंसान? वो भी तब जब उसके गर्भ में एक और जान पल रहा हो! कई बार मानव जाति का निर्मम चेहरा सामने आया है। कभी किसी बंदर के साथ अत्याचार तो कभी किसी गधे के साथ। कभी किसी कुत्ते के साथ तो कभी किसी बिल्ली के साथ। आखिर इंसानों का जानवरों और पक्षियों के साथ ऐसा निर्मम व्यवहार करने का क्या औचित्य है? क्यों इंसान सिर्फ अपने मज़े लेने के लिए जानवरों और पक्षियों के साथ इतना क्रूर व्यवहार करता है। मैं इस घटना की भर्त्सना करता हूँ। 

मुख्यमंत्री ने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि आपमें से कई लोग हमारे पास आए। हम आपको यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आपकी चिंता व्यर्थ नहीं जाएगी। इंसाफ की जीत होगी। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग इस हादसे का इस्तेमाल कर घटिया कैंपेन कर रहे हैं। मेरे विचार में ऐसे इंसानों का समाज में रहने का कोई हक नहीं है और कानून को भी ऐसे लोगों को मौत की सज़ा देनी चाहिए ताकि उन्हें भी एहसास हो कि मौत कैसी होती है। 


क्या देश में नियम - कानून का पालन करने की ज़िम्मेदारी सिर्फ आम जनता की ही है? - प्रकाशपुंज पाण्डेय

क्या देश में नियम - कानून का पालन करने की ज़िम्मेदारी सिर्फ आम जनता की ही है? - प्रकाशपुंज पाण्डेय

03-Jun-2020

हमेशा की तरह ही जन साधारण और आम जनता से जुड़े हुए मुद्दे उठाने के लिए सदैव तत्पर समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने एक अहम मुद्दे पर एक बार फिर मीडिया के माध्यम से जनता, प्रशासन, राजनीतिक दलों और सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि, जब कोरोनोवायरस के प्रकोप के कारण केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा एडवायजरी जारी कर जनता को इसका कड़ाई से पालन करने के लिए कहा गया है तो क्या ये नियम सिर्फ जनता के लिए हैं और क्या ये नियम, राजनेताओं, मंत्रियों और विशिष्ट लोगों के लिए नहीं है। 

प्रथम दृष्ट्या तो यही प्रतीत होता है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉकडाउन की घोषणा करने के अगले ही दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहुत से लोगों के साथ अयोध्या में राम मंदिर गए थे जहाँ सोशल और फिजिकल डिस्टेन्सिंग का ख्याल नहीं रखा गया। कर्नाटक में देश के पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के घर एक विवाह समारोह में लॉकडाउन के दौरान भी कई लोग शामिल हुए जिसमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा भी थे जहाँ सोशल और फिजिकल डिस्टेन्सिंग का ख्याल नहीं रखा गया। आंध्र प्रदेश में भी एक भाजपा विधायक ने अपना जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कई लोगों को बुलाया जहाँ सोशल और फिजिकल डिस्टेन्सिंग का ख्याल नहीं रखा गया।

उसी प्रकार छत्तीसगढ़ की राजधानी स्थित बूढ़ा तालाब स्थल में भी निरीक्षण पर गए, भाजपा सांसद, विधायक और उनके कार्यकर्ताओं ने नीयमों की धज्जियाँ उड़ा दीं जहाँ सोशल और फिजिकल डिस्टेन्सिंग का ख्याल नहीं रखा गया, साथ ही छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के शंकरनगर स्थिति काँग्रेस पार्टी के कार्यालय, राजीव भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी लॉकडाउन के नियमों की अनदेखी की गई जहाँ सोशल और फिजिकल डिस्टेन्सिंग का ख्याल नहीं रखा गया। आश्चर्य की बात तो यह है कि पत्रकारों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जहाँ नेताओं, मंत्रियों के साथ पत्रकार भी मौजूद थे, उनमें से किसी ने भी इस विषय पर कोई प्रश्न ही नहीं पूछा। साथ ही छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन के बाद भी उनके अंतिम दर्शनों के लिए भी जो व्यवस्था की गई थी उसमें भी सरकारी नियमों की धज्जियाँ उड़ती दिखाई दीं जहाँ सोशल और फिजिकल डिस्टेन्सिंग का ख्याल नहीं रखा गया। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि 'मेरा उद्देश्य किसी की आस्था, धारणा या इज़्ज़त को ठेस पहुंचाना नहीं है बल्कि समाज को एक आईना दिखाना है कि जो नियम सरकारें बनाती हैं उन पर सबसे पहले सरकारों में बैठे नेताओं को और उनके सहयोगियों को अमल करना चाहिए ताकि जनता के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत हो सके।' 

वहीं दूसरी ओर अगर कोई आम नागरिक ऐसे नियमों का उल्लंघन कर दे तो पुलिस मार मार के उसे बेहाल कर देती है, कभी-कभी आम व्यक्ति मर भी जाता है जो कि हमने तमाम मीडिया चैनलों और अखबारों के माध्यम से देखा और पढ़ा भी है। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि, 'आज मैं किसी से कोई निवेदन नहीं करूंगा, केवल इतना चाहूंगा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी ज़िम्मेदारी निभाने की जरूरत है तभी बनेगा एक भारत श्रेष्ठ भारत।' 

 प्रकाशपुन्ज पाण्डेय, 
7987394898, 9111777044


"अजीत" मरते नहीं, अमर हो जाते हैं - प्रकाशपुंज पांडेय

01-Jun-2020

"अजीत प्रमोद जोगी", एक ऐसा नाम है जो कभी मर नहीं सकता, वे अमर हो गए हैं। उन्होंने तो सिर्फ़ अपनी देह त्यागी है और अनंत काल की यात्रा पर निकल चुके हैं लेकिन उनके किए हुए कार्य, उनकी कार्यकुशलता, उनकी राजनीतिक सूझबूझ, उनका दृढ़ संकल्प, उनकी वाकपटुता, लोगों से संवाद करने की उनकी कला और उनके जीवट व्यक्तित्व के लिए वह हमेशा सभी के दिलों में जिंदा रहेंगे। उन्होंने भारतीय राजनीति में जो मुकाम हासिल किया था वह सबके बस की बात नहीं है। छत्तीसगढ़ में ही नहीं, बल्कि उनके प्रशंसक समूचे भारत में और विदेशों में भी हैं। उनके साथ काम किया हुआ छोटा ही सही लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कार्यकाल को मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकता हूं। 

यह अजीत जोगी का आभामंडल ही था कि लोग परस्पर उनके प्रति आकर्षित होते रहते थे और खिंचे चले आते थे। मैंने यह लेख उनके जीवन का उल्लेख करने के लिए नहीं लिखा बल्कि उनके प्रति मेरे दिल में जो भावना और आदर है, उससे प्रेरित होकर लिखा है क्योंकि उनके जीवन पर तो ना जाने कितनी किताबें लिखी जा सकती हैं। यह लेख बहुत ही छोटा होगा उनके लिए। उनका व्यक्तित्व कई लोगों के लिए प्रेरणा था। उनके पास जो भी जाता था वे उनकी मदद जरूर करते थे। यह मैंने स्वयं देखा है और महसूस भी किया है। 2016 में जब उनकी नई क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी का गठन हुआ था तब मैंने उनकी पार्टी का मीडिया संभाला था साथ ही अजीत जोगी जी का ट्विटर हैंडल और फेसबुक भी मैं ही संभालता था। 

मुझे आज भी याद है जब प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे मैं उनके लाइब्रेरी में हाज़िर हुआ करता था और वहां से उनके साथ चर्चा करते करते सागौन बंगले में जो लोन है वहां केवल मैं और वो विचरण करने के साथ ही रोज़ के नए-नए मुद्दों पर चर्चा किया करते थे। उन्होंने मुझे कहा था कि 'प्रकाश तुम्हारी लेखनी और सोच बहुत अच्छी है इसे अपने जीवन में कभी मत छोड़ना' यह बात सोच कर आज भी मेरी आंखें नम हो जाती हैं। मुझे याद है 15 अगस्त 2016 को जब मैंने एक मोबाइल के रिमोट से उनके साथ अपनी एक सेल्फी ली थी और रिमोट उनके हाथ में था तो वो बहुत खुश हुए थे। उस सेल्फी को मैं इस लेख के साथ साझा भी कर रहा हूं। वह मेरे लिए एक अविस्मरणीय समय था। मेरे जन्मदिन पर भी उन्होंने मुझे बहुत सी बधाइयाँ दी थीं तथा आशीर्वाद भी दिया था। लिखना बहुत चाहता हूं लेकिन दिल भरा हुआ है और आंखें नम है। 

बस यही कहना चाहता हूं कि 'अजीत मरा नहीं करते अजीत अमर हो जाते हैं' 

 प्रकाशपुन्ज पाण्डेय 
7987394898, 9111777044

 

 


जन्नतुल बक़ीअ के पुनर्निर्माण तक सिर्फ विरोध नहीं मुकम्मल बायकॉट ज़रूरी। सैय्यद तक़वी

जन्नतुल बक़ीअ के पुनर्निर्माण तक सिर्फ विरोध नहीं मुकम्मल बायकॉट ज़रूरी। सैय्यद तक़वी

01-Jun-2020

आज अंतरराष्ट्रीय शोक दिवस है। इस अवसर पर हर साल पूरे संसार में जगह जगह सऊदी दूतावास के सामने सैकड़ों लोगों  विरोध प्रदर्शन में भाग लेकर आले सऊद शासन की नीतियों की निंदा की जाती रही है। मैं भी मलऊन के इस बेहूदा हरकत की निंदा करता हूं।
लाकडाउन की वजह से इस साल एहतेजाज की तस्वीर बदली है। इस वर्ष सोशल मीडिया के माध्यम से और लाइव विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
जन्नतुल बक़ीअ कि तबाही अफ़सोसनाक है। बीती हुई सदी में 8 शव्वालुलमुकर्रम ,1345 (April 21, )1925 को आले सऊद ने बनी उमय्या व बनी अब्बास के क़दम से क़दम मिलाते हुए ख़ानदाने नबुव्वत व इसमत के लाल व गोहर की क़ब्रों को वीरान करके अपनी दुश्मनी का सबूत दिया जो सदियों से उसके सीनों में थी। आज आले मुहम्मद की क़ब्रों पर साया नहीं है जबकि उनके सदके़ में मिलने वाली नेमतों से ये यहूदी नुमा सऊदी अपने महलों में मज़े उड़ा रहे हैं। 
1925 में इस्लामी कैलेंडर के शव्वाल महीने की 8 तारीख़ को मुसलमानों के दूसरे सबसे पवित्र शहर मदीने में पैग़म्बरे इस्लाम (स अ) की बेटी हज़रत फ़ातेमा ज़हरा(स अ) के पवित्र मज़ार समेत सहाबा और इस्लाम की कई विशिष्ट हस्तियों की क़ब्रों को ध्वस्त कर दिया गया था।
सऊदी शासन और कट्टरपंथी वहाबी समुदाय द्वारा अंजाम दी गई इस्लाम विरोधी इस दुःखद घटना के बाद से दुनिया भर के मुसलमान विशेष रूप से शिया मुसलमान 8 शव्वाल को शोक दिवस के रूप में मनाते हैं और विरोध प्रदर्शनों का आयोजन करके आले सऊद शासन से हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स अ) के रौज़े के पुनर्निर्माण की मांग करते हैं।

इसी सिलसिले में मौलाना यासूब अब्बास साहब की ओर से सऊदी अरब हुकूमत के विरोध में जनन्तुल बकी के कब्रिस्तान मदीने में रसूल-ए-इस्लाम की इकलौती बेटी जनाबे फातिमा और इमामों के रौजों को ध्वस्त किये जाने के विरोध में आज एक विशाल विरोध-प्रदर्शन आनलाइन किया जा रहा है।
मौलाना यासूब अब्बास ने पिछले साल अपने भाषण में कहा था कि इस्लाम धर्म किसी पर जबर्दस्ती अत्याचार नहीं करता, सऊदी अरब मुसलमानों पर जबर्दस्ती कर अपना दृष्टिकोण दूसरे मुसलमानों पर लादना चाहता है। मौलाना ने सऊदी अरब हुकूमत से मांग की थी कि या तो जन्नतुल बकी का निर्माण करायें या हमकों इजाजत दें, हम वहां जाकर पुनर्निमाण करें। आज एक बार फिर वही मांग दोहराई जा रही है।
यह विरोध प्रदर्शन जरूरी भी है। इससे पता चलता है कि क़ौम ज़िंदा है। मगर शायद सिर्फ एक दिन नहीं हर शहर में कुछ मख़्सूस जगह तलाश की जाये जहां हमेशा विरोध प्रकट करता हुआ बोर्ड लगा हो। और हर महीने की आठ तारीख को इस स्याह दिन को याद करके मजलिस का आयोजन किया जाये और प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री को ज्ञापन दिया जाये।
हमारी यही मांग है कि सऊदी अरब में जारी बड़े पैमाने पर मानव एवं धार्मिक अधिकारों के हनन को तुरंत रोका जाए। संयुक्त राष्ट्र एवं अंतरराष्ट्रीय न्यायालय मूकदर्शक ना बने रहें।
मेरी मांग है कि मुसलमानों के सबसे पवित्र शहरों मक्का और मदीना समेत पूरे अरब प्रायद्वीप में इस्लामी धरोहरों को सुरक्षित रखे जाने पर बल दिया जाए और  जन्नतुल बक़ीअ क़ब्रिस्तान समेत जिन पवित्र स्थलों को आले सऊद शासन ने ध्वस्त करके आम मुसलमानो की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, उनका तुरंत पुनर्निर्माण किया जाए।
सऊदी अरब में मानवाधिकारों की स्थिति पर पूरी दुनिया को चिंता ज़ाहिर करनी चाहिए और विशेषकर हमारी भारत सरकार को सऊदी हुकूमत की मानवता के खिलाफ जारी कार्यवाही का विरोध करना चाहिए।
आले सऊद मुर्दाबाद।

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com

 

 


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  की पहल पर अब तक 53 स्पेशल ट्रेन से अन्य राज्यों में फंसे 71 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक लौटे !

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर अब तक 53 स्पेशल ट्रेन से अन्य राज्यों में फंसे 71 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक लौटे !

31-May-2020

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 39 ट्रेनों के लिए रेल मण्डलों को 3.74 करोड़ रूपए भुगतान TNIS

नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण अन्य राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के श्रमिकों तथा अन्य लोगों को मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर वापस लाने का सिलसिला लगातार जारी है। अब तक 53 ट्रेनों के माध्यम से लगभग 71 हजार 712 श्रमिकों को एवं 453 अन्य यात्रियों को वापस लाया गया है। राज्य सरकार द्वारा अन्य प्रदेशों से श्रमिकों की सुरक्षित वापसी के लिए कुल 59 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की सहमति दी गई है, इनमें से 39 श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए 3 करोड़ 74 लाख 31 हजार 330 रूपए की राशि रेल मण्डलों को भुगतान की गई है।

    श्रम मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने बताया कि भवन एवं अन्य सन्ननिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा प्रवासी श्रमिकों को छत्तीसगढ़ वापस लाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए विभिन्न रेल मण्डलों को श्रमिकों के यात्रा व्यय के लिए आवश्यक राशि का भुगतान किया जा रहा है। डॉ. डहरिया ने बताया कि लॉकडाउन के कारण श्रमिक जो छत्तीसगढ़ राज्य की सीमाओं पर पहुंच रहे है एवं राज्य से होकर गुजरने वाले सभी श्रमिकों के लिए भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य परीक्षण, चरण पादुका वितरण एवं परिवहन की निःशुल्क व्यवस्था से श्रमिकों कोे काफी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ की सीमाओं पर पहुंचने वाले प्रवासी श्रमिकों को, चाहे वो किसी भी राज्य के हो, उन्हें छत्तीसगढ़ का मेहमान मान कर शासन-प्रशासन के लोग उनकी हरसंभव मदद कर रहे है।
    उन्होंने बताया कि श्रम विभाग के अधिकारियों का दल गठित कर विभिन्न औद्योगिक संस्थाओं, नियोजकों एवं प्रबंधकों से समन्वय कर श्रमिकों के लिए राशन एवं नगद आदि की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रदेश के 26 हजार 205 श्रमिकों को 38 करोड़ 26 लाख रूपए बकाया वेतन का भुगतान भी कराया गया है। वहीं लॉकडाउन के द्वितीय चरण में 21 अप्रैल से शासन द्वारा छूट प्रदत्त गतिविधियों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 1 लाख 4 हजार श्रमिकों को पुनः रोजगार उपलब्ध कराया गया है और छोटे-बड़े 1390 से अधिक कारखानों में पुनः कार्य प्रारंभ हो गया है।

 

 


पूर्व डीजी अंसारी ने प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी को दी श्रध्दांजली, कहा-  मेरे पास पर्याप्त शब्द नहीं

पूर्व डीजी अंसारी ने प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी को दी श्रध्दांजली, कहा- मेरे पास पर्याप्त शब्द नहीं

30-May-2020

पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस छत्तीसगढ़ 

आज मेरे पास पर्याप्त शब्द नहीं हैं................... भगवान् आपको साहस प्रदान करे जब हम अपने जीवन में इस तरह के एक विशेष व्यक्ति को खो देते हैं, समय रुकता प्रतीत होता है हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि हम आपके चेहरे पर एक मुस्कान से शुरू करें, ताकि हम उसकी आत्मा को खुश कर सकें, जैसे ही हम नहीं कर सकते हालांकि कोई शब्द वास्तव में आपको खोने में मदद नहीं कर सकता है, बस जानते हैं कि आप हर विचार और प्रार्थना में बहुत करीब हैं। मेमोरी हमें बता सकती है कि हम क्या थे, उन लोगों के साथ कंपनी में जिन्हें हम प्यार करते थे यह हमें यह जानने में मदद नहीं कर सकता कि हममें से प्रत्येक क्या है,अकेले, अब बन जाना चाहिए फिर भी, कोई भी व्यक्ति वास्तव में अकेला नहीं है;

 

एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा

आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा

यह संसार प्रकृति के नियमों के अधीन हैं
और परिवर्तन एक नियम है
शरीर तो मात्र एक साधन है
इस दुःख की घडी में हम सब आपके साथ हैं

 


कोई है जवाब देह, भारत में अलग कानून क्यों ?

कोई है जवाब देह, भारत में अलग कानून क्यों ?

29-May-2020

पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस छत्तीसगढ़ 

भोपाल के रेड जोन क्षेत्र में भाजपा की सदस्यता समारोह पर केंद्र और राज्य सरकार से पूर्व डीजेपी वजीर अंसारी ने सवाल खड़े किए 
(जावेद विन अली द्वारा )

उत्तर प्रदेश लखनऊ llपूरी दुनिया कोविड-19 के कोरोना वायरस की लड़ाई में जूझ रहा है lवहीं दूसरी तरफ दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहने वाली भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रभु राम चौधरी अपने समर्थकों के साथ भोपाल के रेड जोन क्षेत्र भारतीय जनता पार्टी की राज इकाई कार्यालय पर 23 मई को लगभग 200 लोगों का इकट्ठा होने के संबंध में जब मैंने भोपाल में मौजूद पूर्व डीजेपी मोहम्मद वजीर अंसारी से जानने का प्रयास किया तो उन्होंने स्पष्ट लफ्जों में कहा कि आदरणीय अटल बिहारी वाजपेई के जमाने की भाजपा की नैतिकता में आज के मौजूदा भारतीय जनता पार्टी मैं आसमान जमीन का अंतर आ गया हैl बिल्कुल सच बात हैl मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ,भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा ,पूर्व मंत्री रामपाल के साथ कई वीआईपी इस अवसर पर मौजूद थे !

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के जाने के बाद का दृष्य देखने के लायक था !कोई कुछ भी कहे सोशल मीडिया ने पूरा पोल खोल दिया है !और इस अवसर पर डब्लू एचओ ,केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के सभी दिशानिर्देश का माखौल उड़ाया गया है !इस समय भारतीय जनता पार्टी का मीडिया मैनेजमेंट का दुनिया में चर्चा हैl उसी का नतीजा है जिस प्रमुखता से इस खबर छपनी चाहिए थी lऔर राष्ट्रीय चैनल पर चर्चा होनी चाहिए था नहीं की गईl वहीं दूसरी तरफ शादी , श्मशान घाट और कब्रिस्तान मैं 20 से 50 व्यक्ति का आदेश होने के बावजूद भी एक शादी समारोह के 30 लोगों पर एफ आई आर दर्ज किया गया है! हद तो यह है दिल्ली प्रदेश इकाई के अध्यक्ष मनोज तिवारी द्वारा हरियाणा में जाकर क्रिकेट प्रतियोगिता का उद्घाटन कर रहे हैंl भारत की गरीब जनता के लिए डब्लू एचओ से लेकर राज तक के सभी आदेशों का पालन करना अनिवार्य हैl क्या आदरणीय प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अजीत गोयल जीके आंखों को यह सब कुछ नजर नहीं आ रहा हैl पूरी दुनिया में थू थू हो रहा हैl भारतीय मीडिया को गोदी मीडिया कहकर टीवी देखना बंद कर दिया है.  

वहीं दूसरी तरफ भारतीय मुसलमानों ने आज तक मस्जिदों में जाना बंद कर दिया है lजुमे की नमाज से लेकर ईद की नमाज तक घरों में पढ़ रहा हैl गिरजाघर ,गुरुद्वारा और मंदिर जाने पर पाबंदी रहेगी l कोविड-19 के कानून का उल्लंघन होगाl वही मात्र एक पार्टी के लिए कोई पाबंदी नहीं ।

आदरणीय डीएम महोदय और एसपी साहब से पूछने पर कहते हैं कि जांच हो रही हैl सरकार द्वारा राहत सामग्री भूखों तक नहीं पहुंचने पर कोई खाना खिला दीया और पानी पिला रहा है तो उस पर सरकार द्वारा मुकदमे कायम किए जा रहे हैं । इससे बढ़कर शर्म की बात क्या हो सकती है l मुसलमानों ने ईद की नमाज तक देश हित मे देखते हुए अपनी नमाज तक कुर्बान कर दिया और अपने खैरात, जकात और फितरा की तकरीबन एक लाख करोड़ रुपए से प्रवासी मजदूरों का बिना जात धर्म देखे हुए सिख भाइयों की तरह मदद पहुंचा कर भारत में पहली बार इस तरह काम करने का जज्बा कभी देखा नहीं गया था । यह अलग बात है भारत की गोदी मीडिया इस सराहनीय कार्य की तरफ ध्यान नहीं दीया । लेकिन सोशल मीडिया ने अपना हक अदा कर दिया हैl और सोशल मीडिया पर लोगों का विश्वास बढ़ता जा रहा हैl कानून के भेदभाव करने से लोगों में अविश्वास पैदा होगा जो देश हित के लिए बड़ा खतरा है । संविधान पर शपथ इसी बात की ली जाती है ।


17 वर्षीय छात्रा के साथ रेप, इलाज के दौरान हुई मौत घटना शहडोल जिले से !

17 वर्षीय छात्रा के साथ रेप, इलाज के दौरान हुई मौत घटना शहडोल जिले से !

29-May-2020

छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से लगे MP के शहडोल जिले के जैतपुर थाना अंतर्गत एक गांव में 17 वर्षीय छात्रा के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने के बाद गला घोंटकर उसकी हत्या करने का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

शहडोल के पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र शुक्ला ने बृहस्पतिवार को बताया कि 11वीं की छात्रा मंगलवार शाम पूजा करने के लिए घर से मंदिर की ओर निकली थी, लेकिन देर शाम तक वह घर नहीं आई। तब परिजनों ने उसकी काफी तलाश की लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला।
उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह लगभग 6 बजे घर के पास झाड़ियों में बेहोशी की हालत में वह पड़ी हुई मिली। किशोरी को उसके परिजन तत्काल जिला अस्पताल शहडोल ले आए जहां बुधवार शाम उसकी मौत हो गई।
शुक्ला ने कहा कि प्रथम दृष्टया में यह बात सामने आई कि किशोरी के साथ बलात्कार करने के बाद गला दबाकर उसकी हत्या करने की कोशिश की गई है। इसके बाद प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
उन्होंने कहा कि इस मामले में आरोपी आरिफ खान (22) को गिरफ्तार भी कर लिया गया। शुक्ला ने बताया कि आरोपी ने अपना जुल्म कबूल भी लिया है। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ भादंवि की धारा 376 (बलात्कार), 302 (हत्या) और पॉक्सो एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी ने किशोरी को जबरदस्ती ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया और फिर उसे गला दबाकर मारने की कोशिश की। किशोरी के बेहोश हो जाने पर आरोपी ने मृत समझकर उसे झाड़ियों में फेंक दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई।


मुज्तबा हुसैन   के  निधन  से साहित्य जगत को धक्का,  ,

मुज्तबा हुसैन के निधन से साहित्य जगत को धक्का, ,

28-May-2020

मशहूर उर्दू लेखक, हास्य और व्यंग्य रचनाकार मुज्तबा हुसैन का लंबी बीमारी के बाद बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, उन्होंने हैदराबाद के रेड हिल्स इलाके में अपने निवास पर अंतिम सांस ली। बुढ़ापे से संबंधित समस्याओं के कारण वह पिछले कुछ साल से अस्वस्थ चल रहे थे।

उर्दू के ‘मार्क ट्वेन’ के रूप में विख्यात मुज्तबा हुसैन अपने समय के सबसे प्रिय उर्दू हास्यकार रहे। उन्हें 2007 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनके निधन को भारतीय उप-महाद्वीप में उर्दू साहित्य के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

मुज्तबा हुसैन प्रसिद्ध लेखक इब्राहिम जलीस के भाई थे, जो पाकिस्तान चले गए थे। मुज्तबा हुसैन ने पिछले साल दिसंबर में उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने अपना पद्मश्री पुरस्कार लौटाने का ऐलान किया था। उन्होंने कथित तौर पर “मोदी सरकार द्वारा देश में डर और नफरत का माहौल पैदा किए जाने” के विरोध में यह फैसला लिया था।

उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत अपनी रचना ‘सियासत’ से की, जो हैदराबाद से प्रकाशित एक प्रमुख उर्दू दैनिक अखबार में छपती थी। पाठकों को इस अखबार में उनके संडे के कॉलम का बेसब्री से इंतजार रहता था। कहा जाता है कि मुज्तबा हुसैन की किताबें पढ़ने के लिए कई लोगों ने एक जमाने में उर्दू सीखी।

उन्होंने अपने जीवन काल में कई पुस्तकें और यात्रावृत्तांत लिखे, जिनमें ‘जापान चलो जापान’ उर्दू साहित्य में उनके सबसे बड़े योगदान में से एक माना जाता है, क्योंकि इसने जापान के बारे में एक ऐसे समय में दुर्लभ और हास्यप्रद बातें बताईं, जब उस देश की यात्रा कम ही लोग किया करते थे।उनके जीवनकाल में उन पर भारत के विभिन्न विद्वानों द्वारा कम से कम 12 शोध ग्रंथ लिखे गए। उनकी रचनाओं का उड़िया, कन्नड़, हिंदी, अंग्रेजी, रूसी और जापानी भाषाओं में अनुवाद होता रहा है।


कार में हैंड सेनिटाइजर रखना हो सकता है खतरनाक, अमेरिका के दमकल विभाग ने दी चेतावनी

कार में हैंड सेनिटाइजर रखना हो सकता है खतरनाक, अमेरिका के दमकल विभाग ने दी चेतावनी

26-May-2020

नई दिल्ली: कोरोना से बचाने वाले हैंड सेनेटाइजर की बोतल क्या आपकी जान ले सकती है? क्या हैंडसेनेटाइजर की बोतल कार के भीतर बम बन सकती है? अमेरिका से एक हैरान करने वाली कहानी और चेतावनी आई है. दरअसल फेसबुक पर एक पोस्ट में जली हुई कार का दरवाजा दिखाया गया है और कहा गया है कि हैंड सेनेटाइजर कार में रखना खतरनाक हो सकता है. जानें पूरा मामला क्या है.

अमेरिका के वेस्टर्न लेक फायर डिस्ट्रिक्ट ने फेसबुक पर एक जली हुई कार की एक फोटो शेयर कर कहा है, ‘’ज्यादातर हैंड सेनिटाइजर अल्कोहल आधारित होते हैं जो ज्वलनशील है. गर्म मौसम में कार में रखे सेनिटाइजर पर सूर्य की रोशनी पड़ने से गर्म हो जाती है. खासकर छुट्टी मनाने के दौरान गाड़ी में धूम्रपान के वक्त ये बेहद खरनाक हो सकता है.’’

हालांकि अमेरिका के वेस्टर्न लेक फायर डिस्ट्रिक्ट ने जो तस्वीर फेसबुक पर शेयर की, बाद में उसको लेकर विवाद खड़ा हो गया. पोस्ट पर विवाद बढ़ा तो वेस्टर्न लेक फायर लेक ने सफाई दी कि पोस्ट में इस्तेमाल फोटो का इस जिले से कोई रिश्ता नहीं है. जिले में कोई हादसा भी नहीं हुआ है. ये पोस्ट लोगों को सतर्क करने के लिए किया गया था और कार में रखे हैंड सेनिटाइजर के खतरे को बताने के लिए किया गया था.

अमेरिका के नेशनल फायर प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने भी इस पर बयान देते हुए कहा कि हैंड सेनिटाइजर ज्वलनशील है और इसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए. गर्म तापमान में इससे आग लगने का खतरा रहता है.

साभार : ABP NEWS


#बौद्ध्स्थल_अयोध्या

#बौद्ध्स्थल_अयोध्या

22-May-2020

“अयोध्या में हिन्दू मंदिर का दावा मुख्य मुद्दों से ध्यान बटाने का हथकंडा”- दारापुरी 
ह बात एस आर दारापुरी आईपीएस (से.नि.) राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आज प्रेस को जारी बयान में कही है. उन्होंने कहा है कि जिस तरह से कल से अयोध्या में मिले अवशेषों का विडियो प्रसारित करके वहां पर हिन्दू मंदिर होने का दावा किया जा रहा है वह वास्तव में कोरोना संकट का सामने करने में मोदी सरकार की विफलताओं से लोगों का ध्यान बटाने का हथकंडा है. यह सर्वविदित है कि मोदी सरकार प्रवासी मजदूरों, कोरोना  मरीजों का टेस्ट, क्वारंनटाईन व्यवस्था, संक्रमित लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएँ, आर्थिक व्यवस्था एवं अन्य सभी मुद्दों पर बिलकुल असफल रही है जिससे जनता में सरकार के प्रति आक्रोश उभर रहा है. लगता है इस सब से ध्यान बटाने के लिए खुदाई/समतलीकारण से मिले अवशेषों को आधार बना कर वहां पर हिन्दू मंदिर होने का पुनः दावा किया जा रहा है जिस के बारे में सुप्रीम कोर्ट पहले ही बिना किसी सुबूत के राम मंदिर के पक्ष में फैसला दे चुकी है और इसे सभी पक्षों ने किसी तरह से स्वीकार भी कर लिया है. अब फिर इसकी बात उठाना यह दर्शाता है कि शायद राम मंदिर वाली पार्टी अभी भी अन्दर ही अन्दर अपने दावे को कमज़ोर समझ रही है और इसे अभी भी पुख्ता करने में लगी है. बिहार का चुनाव जिसे हिन्दू-मुस्लमान करने की ज़रुरत है, भी एक कारक हो सकता है क्योंकि भाजपा का मंदिर मुद्दा तो अब ख़त्म हो गया है पर उसे अभी भी चुनाव हित में जीवित रखने की ज़ुरूरत है. 
जहाँ तक अवशेषों के हिन्दू मंदिर के होने का दावा है वह भी सरासर गलत है क्योंकि अब विडियो में जो कुछ दर्शाया जा रहा है वह तो पूर्णतया बौद्ध मंदिर के अवशेषों को ही प्रमाणित करता है. उदाहरणार्थ इनमे एक धम्म चक्र है जिसके ऊपर बाहरी चक्र में 29, अन्दर के चक्र में 13 तथा सबसे छोटे चक्र में 7 कमल पत्तियां हैं. यह 29 वर्ष की आयु में बुद्ध के गृह त्याग, 10 पारमित्ताओं के साथ 3 त्रिशर्ण तथा बुद्ध के जन्म के तुरंत बाद पूर्व दिशा में चले 7 क़दमों के नीचे कमल के फूलों को इंगित करती हैं  इसी तरह जिसे शिवलिंग कहा जा रहा है वह वास्तव में छोटा बौद्ध स्तूप है क्योंकि शिवलिंग गोल होता हो चोकोर नहीं. एक द्वार पट्टिका पर कलश होने का दावा भी गलत है क्योंकि वह वास्तव में बुद्ध की तराशी हुयी मूर्ती है जिन्हें सलग्न चित्रों में देखा जा सकता है. 
अतः आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट सभी लोगों से आग्रह करता है कि वे आरएसएस/विश्व हिन्दू परिषद् के इन ध्यान बटायू हथकंडों से सावधान रहें और मोदी सरकार की कोरोना संकट को हल करने की विफलताओं को जोर शोर से उठायें और उस पर ज़रूरी कदम उठाने के लिए दबाव बनाये तथा राजनितिक परिवाद संगठित करें ताकि आने वाले समय में कोरोना की सुनामी से निबटा जा सके. 
एस आर दारापुरी आईपीएस (से.नि.) 
राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट
द्वारा सै क़ासिम 


दरिन्दगी - शर्मनाक :कब्र से निकाली बच्ची की लाश, करने लगा दरिंदगी की कोशिश, आरोपी गिरफ्तार

दरिन्दगी - शर्मनाक :कब्र से निकाली बच्ची की लाश, करने लगा दरिंदगी की कोशिश, आरोपी गिरफ्तार

22-May-2020

गुवाहाटी : 14 साल की एक लड़की की लाश को कब्र से निकाल कर उसका रेप करने की कोशिश का एक  रोंगटे खड़े कर देने वाला एक मामला सामने आया है। असम के देमाजी जिले के पुलिस अधीक्षक धनंजय गानावत के मुताबिक असम की 14 साल की लड़की की 17 मई को संदिग्ध स्थिति में मौत हुई थी और उसी रात परिजानों ने उसे गांव के किनारे साइमन नदी के तट पर दफना दिया। इस दौरान गांव के कुछ लोग भी मौजूद थे।

उसके एक दिन बाद (18 मई) को 51 वर्षीय अकान साइकिया नाम का एक व्यक्ति  कब्र से लड़की की लाश को बाहर निकाल कर उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास करने लगा। तभी वहां से गुजर रहे एक मछुआरे ने उसे देखा और तुरंत बाद इसकी सूचना पुलिस को दी। उसके कुछ ही देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी अकान के हाथ बांधकर उसे हिरासत में ले लिया गया। एसपी ने बताया कि लड़की की लाश के परीक्षण के लिए परिवार की अनुमति लेकर फिर से पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट का इंतजार है। पुलिस ने आरोपी अकान साइकिया के खिलाफ पोक्सो कानून सहित भारतीय दंड संहिता की धारा 306 और 377 के तहत मामले दर्ज किए हैं।

उधर, इससे पहले दो शादियां कर चुके आरोपी अकान साइकिया के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। अकान की पहली पत्नी ने 2018 में उसके खिलाफ घरेलू हिंसा के तहत शिकायत करने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर देमोजी जेल भेज दिया था। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के मद्देनजर जेल में कैद कैदियों में भी कोरोना फैलने की आशंका से कोरोना का कहर कम होने तक कुछ कैदियों को पैरोल पर रिहा करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया।

इसी के तहत मार्च महीने के आखिर में अकान को पैरोल मिलने पर जेल से रिहा हुआ था। परंतु जेल से बाहर आने के कुछ ही दिन बाद इस तरह की घिनौनी हरकत को अंजाम देने से डॉक्टरों ने उसकी मानसिक स्थिति की जांच की।  बताया जाता है कि अकान माहिलाओं के प्रति साइको (सनकी) की तरह बर्ताव करता था।  पुलिस अधीक्षक धनंजय गानावत ने बताया कि गांव के कई लोगों का कहना है कि अकान के लड़की का यौन शोषण करने के कारण ही उसने आत्महत्या कर ली है।


'राजीव गांधी का जाना..लेकिन क्यों' : वरिष्ठ पत्रकार राजीव मित्तल

'राजीव गांधी का जाना..लेकिन क्यों' : वरिष्ठ पत्रकार राजीव मित्तल

21-May-2020

नवभारत टाइम्स में रहते की तो याद नहीं कि राजीव गांधी को अक्षम मान लिया हो..हालांकि 1986 में वीपी सिंह ने वित्तमंत्री पद से हटा कर रक्षामंत्री बनाये जाने का बदला निकालना शुरू कर दिया था.. और राजीव गांधी के सबसे कमजोर पक्ष अमिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ को निशाना बनाते हुए बोफर्स में कमीशन खाने का मुद्दा उछाल दिया था..

वीपी सिंह के राजीव के खिलाफ उछाले गए इस मुद्दे को आरएसएस और रामनाथ गोयनका ने तेजी से अपनी मुट्ठी में दबाया और अभियान छेड़ दिया..वीपी ने कॉंग्रेस छोड़ दी और मसीहाई अंदाज़ में जनमोर्चा टाइप मंच पर बैठ भजन कीर्तन करने लगे (23 साल बाद अन्ना हजारे ने बिल्कुल वीपी सिंह के नक्शे कदम पर चलते हुए मनमोहन सरकार को निशाना बनाया था..तो समझ सकते हैं कि खेल के तरीके कितने पुराने हैं और कांग्रेस ने सबक लेना नहीं सीखा)..

नवभारत टाइम्स छोड़ कर जनसत्ता चंडीगढ़ जब पहुंचा तो देखा गोयनका के दोनों पालतू अरुण शौरी और प्रभाष जोशी की तोपें राजीव गांधी पर गोले दाग रही हैं और वीपी सिंह संघियों के साथ हय्या हो हय्या हो कर रहे हैं..कुछ दिन बाद वामपंथी भी शामिल हो गए और वीपी सिंह दोनों की गोद में खेलने लगे..

अब रुकिए..यहां से एक तार 1974 के जेपी के बिहार आंदोलन से भी जुड़ा है....तब भी उस आंदोलन का संचालन इंडियन एक्सप्रेस और रामनाथ गोयनका कर रहे थे और बम्बई का एक्सप्रेस टॉवर और दिल्ली का राजघाट ये दोनों जेपी और गोयनका की रणनीतिक स्थली बने हुए थे..बाद में जब जेपी के कीन्स के पूर्ण रोजगार के सिद्धांत टाइप वाले काल्पनिक सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन से जब राजनीतिक दल जुड़ने लगे तो गोयनका संघ और जनसंघ को पूरे उत्साह के साथ जेपी से जोड़ने में जुट गए..और फिर संघ जेपी के इतना नज़दीक पहुंच गया कि जेपी खुले आम अपने को संघी कहने में कतई नहीं हिचकते थे..

अब इस खेल को समझने को थोड़ा और पीछे चलिए..1971 के युद्ध में इंदिरा गांधी ने जिस तरह अमेरिकी राष्ट्र्पति निक्सन और उनके सलाहकार किसिंजर को उनकी औकात दिखाई और पाकिस्तान को तोड़ कर बांग्लादेश बनवाया, तो अमेरिका को इंदिरा गांधी को खत्म करने के लिए सीआईए को तो उतारना ही उतारना था..इधर किसिंजर चूंकि अमेरिका की हमेशा से सबसे मजबूत रही यहूदी लॉबी के नुमाइंदे थे तो उन्हें भारत में संघ का संगठन मिल गया और बरसों से दिल में नेहरू-गांधी परिवार को लेकर ज़हर का पोषण कर रहे रामनाथ गोयनका की मार्फत संत नेता जयप्रकाश नारायण को मैदान में उतारने लायक मुद्दे तलाश लिए गए..

कुल मिलाकर देवी दुर्गा की तरह पुजती आ रहीं इंदिरा गांधी 1975 के शुरुआती महीनों में भारत माता की सबसे बड़ी दुश्मन के रूप में स्थापित कर दी गयीं.. घटनाक्रम बहुत तेजी से बदला.. इंदिरा गांधी ने अपने छोटे बेटे के कहने पर कोर्ट के आदेश को किनारे कर उसी साल जून में  देश में इमरजेंसी लगा दी..अब यहां फिर देखिए कि एक महीने बाद ही बांग्लादेश के निर्माता शेख अब्दुल्ला, उनके परिवार और उनके मंत्रिमंडल के कई सारे सदस्यों का खून कर दिया और यह क़त्लेआम बांग्लादेश में कई महीनों चला..इसके पीछे सौ फीसदी सीआईए का हाथ था..शेख मुजीब की हत्या इंदिरा गांधी की बड़ी विफलताओं में गिनी जाती है..थी भी उन पर बहुत बड़ी चोट..

कुल मिलाकर गोयनका और संघ के कई खेलों में 1977 में कई  दलों की चर्बी से बनी जनता पार्टी की सरकार बनना भी एक बहुत खेल था..चूंकि संघ को अभी देश में वो मान्यता नहीं मिली थी, इसलिए गोयनका अटल को तो नहीं, लेकिन उनसे भी ज़्यादा घातक इंसान मोरार जी देसाई को संघ की मदद से जगजीवन राम को किनारे कर प्रधानमंत्री बनवाने में सफल हुए, जबकि पूरा संसदीय दल उनके विरोध में था..लेकिन धुर दक्षिणपंथी जेबी कृपलानी के जरिये जेपी को तैयार किया गया..और उस समय जेपी की बात काटने का सवाल ही नहीं उठता था..उस समय चौधरी चरण सिंह भी जगजीवन राम को न बनवाने के लिए अड़ गए..मतलब कि पूरी जनतापार्टी की मति मारी गई थी जो मोरार जो को प्रधानमंत्री बनवा दिया..

मधु दण्डवते और मधु लिमये जैसे कुछ समाजवादी नेताओं के अलावा पूरा मंत्रिमंडल सीआईए के इशारों पर काम कर रहा था..तभी विदेश मंत्रालय अटल को और सूचना मन्त्रालय आडवाणी को मिल गए..यानी संघ के हवाले हो गए दूर तक और देर तक असर डालने वाले दो विभाग. उसके बाद नौटंकियों का अंबार लग गया.. फिर तो जनतापार्टी की सरकार का चरमरा कर गिरना, इंदिरा गांधी का सत्ता में आना और फिर सीआईए का सक्रीय होना, पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा, और स्वर्णमंदिर में सैन्य कार्रवाई, फलस्वरूप इंदिरा गाँधी की हत्या वगैरह क्या मारियो पूजो के उपन्यास गॉड फादर की याद नहीं दिलाते!!जिसमें डॉन वीटो कारलोन के जमाई की मदद से डॉन के ही बड़े बेटे सोनी की हत्या करवाने का बृहद मंच तैयार किया जाता है मात्र एक वेश्या के फोन जरिये..

अब फिर 1987 के दिनों में लौटा जाए..अब तक सबसे बड़ा बहुमत पा कर सरकार बनाने वाले राजीव गांधी किस हश्र को प्राप्त हए और किस तरह यहां वीपी सिंह के अलावा राजीव गांधी को बरबाद किया गया खुद उनके कज़िन अरुण नेहरू के हाथों..वीपी के हटते ही राजीव गांधी का सारा विश्वास अरुण नेहरु पर था, लेकिन अरुण नेहरु खेल गए संघ के हाथों में, और उन्होंने ही राजीव गांधी से शाहबानो जैसे दो कौड़ी के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदलवा दिया और तब आरिफ मोहम्मद खान जैसे छुटभैये महान क्रांतिकारी बन गए.. और दूसरे गृहमंत्री रहते अरुण नेहरु ने राजीव को फंसा कर राम मंदिर का ताला खुलवा कर कब से बंद पड़ा संघ का और संघी पत्रकारों का कारोबार खड़ा कर दिया..यानी इस बार अरुण नेहरु ने वही खेल खेला गॉड फादर के जमाई वाला..

गोयनका और देवीलाल जैसे कद्दावर नेता की मेहनत से 1989 के चुनाव में वीपी सिंह मैदान में ताल ठोंकने लायक सीटें पा गए और फिर वीपी को मिल गयीं संघ और वामपंथियों की बैसाखी.. मुराद पूरी हुई राजा साहब की, बन गए एक वर्षीय प्रधानमंत्री..लेकिन प्रधानमंत्र

द्वारा : सैय्यद क़ासिम 


क्या कांग्रेस की गुगली में फंसी भाजपा!

क्या कांग्रेस की गुगली में फंसी भाजपा!

21-May-2020

राजनीति तो बहुत देखी भारत देश नें। लेकिन जनता को बलि का बकरा बना कर जो राजनीति इस वक्त हो रही है वह ग़लत है। जनता बेकसूर है। दोष उसका है जिसने नमस्ते ट्रंम्प कार्यक्रम किया, दोष उनका है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को जारी रखा। दोष उनका है जिन्होंने पूरी तरह टेस्टिंग की व्यवस्था नहीं की, दोष उनका है जिन्होंने बग़ैर किसी प्लान के लाकडाउन लगाया, दोष उनका है जिन्होंने मरीजों को पूरे भारत में फैलाने का काम किया।
लेकिन जनता तो मर रही है। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि आदमी सड़क पर मरे जानवर खा रहा है। मध्यवर्गीय और निम्नवर्गीय जनता भूखों मर रही है। लेकिन सरकार को बस-बस खेलने में मजा आ रहा है।
कांग्रेस द्वारा एक हज़ार बसों की व्यवस्था करने के बाद प्रदेश सरकार की कुर्सी हिलने लगी और तमाम कानूनी दांवपेंच लगाये जाने लगे। बसें बार्डर पर खड़ी हैं। जनता फंसी है। और सरकार नम्बर और फिटनेस चेक करने की बात कर रही है। आखिर मजदूरों को उनके घर पहुंचाने में सरकार क्यूं डर रही? क्या कांग्रेस की गुगली में फंस गई सरकार?
सवाल बहुत हैं कि क्या सरकार की फिटनेस सही है जो उसने प्राइवेट कर्मचारियों को उनके हाल पर छोड़ दिया! क्या वह वोट नहीं देते? क्या वह इंकमटैक्स नहीं देते? क्या अर्थव्यवस्था में उनका योगदान नहीं है? क्या वह इस देश के नागरिक नहीं है? 
अब बात प्रवासी मजदूरों की जो कुआं खोद के पानी पीते हैं। और सरकार इन्हीं प्रवासी मजदूरों को सड़क पर लावारिस छोड़ कर बातों में लोगों को उलझाने का प्रयास कर रही है।
जब सरकार को रैली करनी होती है तो नियम कानून कहां चले जाते हैं? फिटनेस की बात क्यूं नहीं होती? कभी परिवहन निगम की बसों को भी चेक करले सरकार! चार दिन से बसें खड़ी हैं । सोशल मीडिया पर साफ देखा जा सकता है और तो और ड्राइवर भी कहते नजर आ रहे हैं कि बसें ठीक हैं। इस वक्त मजदूरों का पहुंचना जरूरी है। कभी चुनाव से पहले या बाद ही सही नेताओं का फिटनेस टेस्ट हुआ! उसे भी कर लेते तो आज यह दिन ना देखने पड़ते।
बहरहाल सरकार हर मोर्चे पर विफल हो रही है। शायद उसने यह मान लिया है कि वह कुछ नहीं कर सकती है इसलिए जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया है। डब्लू एचओ को खुश करने के लिए लाकडाउन तो चल रहा है मगर धज्जियां ऐसे उड़ रही हैं जैसे कांटों में रेशमी कपड़ा। डब्लू एचओ से ईनाम तो मिल ही गया डॉ हर्षवर्धन को एक्जिक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन बना दिया गया।
जनता के जागने का वक़्त आ गया है। अब तो समझ जाओ कि एकता में ही बल है। वरना जो हाल अंग्रेजी राज में हुआ वही अब होगा या यूं कहूं कि हो रहा है। Divide and Rule.
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com

 

 


आखिरकार कांग्रेस बीजेपी को अपनी पिच पर खेलने के लिए ले ही आई....

आखिरकार कांग्रेस बीजेपी को अपनी पिच पर खेलने के लिए ले ही आई....

20-May-2020

(पवन सिंह)

प्रियंका के निजी सचिव व प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर कराना सरकार का मूर्खतापूर्ण निर्णय है। कांग्रेस ने बसों को लेकर जो खेल खेला है उसमें शासन के अफसरों ने सरकार की गर्दन फंसा दी है। दरअसल कांग्रेस अपनी बनाई हुई पिच पर प्रदेश भाजपा को टास जीतकर जिस तरह से खिलवाना चाहती थी...उसी तरह से सरकार खेल रही है। सरकार को सरकार के ही अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज करा कर कांग्रेस को अच्छा माइलेज दे दिया है। पहले यह तमाशा खड़ा किया गया कि बसों की सूची ही नहीं दी गई है। कांग्रेस   जानती थी कि सूची तो मांगी ही जाएगी, उसने झट से सूची जारी कर सरकार को तगड़ा झटका दिया। फिर कनफ्यूजियाई ब्यूरोक्रेसी इस मामले में घुसी और आदेश दिया कि सभी एक हजार बसें लखनऊ लाई जाएं यहां बसों की फिटनेस टेस्ट होगा। 

यानी बसे डीजल खर्च करके पहले 400-500 किलोमीटर चलकर लखनऊ आएं फिर एक-दो दिन बाद फिटनेस सार्टिफिकेट लेकर वापस जाएं .... यानी आने-जाने पर लाखों रूपए का डीजल फूंका जाए और तब तक लेबर आसमान टापता रहे। आज फिर कनफ्यूजियाई ब्यूरोक्रेसी को फिर ज्ञान प्राप्त हुआ कि बसें जहां हैं वहीं के राज्य के सटे हुए जिले का आरटीओ फिटनेस जारी कर देगा। फिर हड़बड़ाई  भाजपा के चंद पुरोधा प्रवक्ता पांच-सात ऐसे नंबर निकाल लाए जो बसों के नहीं थे....यानी नंबर गलत थे ....ठीक है जो नंबर गलत थे उन्हें किनारे करके बसें चलवा देनी चाहिए थीं। ... लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ...

इस बीच कांग्रेस ने लेटर-लेटर खेल खेल दिया और उसके कार्यकर्ता सड़क पर उतर गये। हमेशा की तरह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया व प्रिंट इस पूरी खबर को अंडरप्ले कर गया लेकिन सोशल मीडिया पर खबर गर्म हो गई। वैसे भी मेन स्ट्रीम मीडिया को अब लोगों ने हाशिए पर धकेल रखा है। इसी बीच आज शाम हड़बड़ाई ब्यूरोक्रेसी ने एफआईआर दर्ज करने का निर्णय लेकर कांग्रेस को खेलने का पूरा मौका मुहैय्या करा लिया। प्रदेश सरकार के लिए अब यह मामला गले की हड्डी बन चुका है। बस लें तो मुसीबत न लें तो मुसीबत.....ऊपर से प्रियंका गांधी ने एक इमोशनल गुगली फिर डाल दी कि भाजपा चाहे तो राजस्थान सरकार की बसों पर अपना झंडा फहरा दे लेकिन वह मजदूरों पर दया करे। फिलहाल उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी ने राज्य सरकार को फंसा दिया है

द्वारा : सैय्यद कासिम 


 अदृश्य युद्ध के दौर में......... जंग जारी है !

अदृश्य युद्ध के दौर में......... जंग जारी है !

15-May-2020

श्री तारन प्रकाश सिन्हा IAS  के फेसबुक वाल से

निश्चित ही यह एक अकल्पनीय समय है। वह घटित हो रहा है, जो किसी ने कभी सोचा तक नहीं था। आगे बढ़ती हुई एक सदी अचानक थम गई, बीती हुई सदी अपने तमाम जख्मों के साथ फिर प्रकट हो गई। फिर वही भूख, पलायन, गरीबी और बेबसी, बेबसों का वही रेला। कश्मीर से कन्याकुमारी तक दुख और दर्द का समुंदर ठाठे मार रहा है। हर कोई आवाक् है, बदहवास है। क्या मजदूर, क्या मालिक, क्या शासन, क्या प्रशासन...हर पल एक नयी चुनौती सामने आती है, रूप बदल बदल कर नयी नयी मुश्किलें नुमाया होती हैं...लेकिन जंग जारी है। इनसान लड़ रहा है। जीत रहा है। यह समय पूरी दुनिया पर कहर बनकर टूट रहा है। पूरी दुनिया में श्रम पर जिंदा रहने वाले लोग मुश्किल में हैं। भारत में भी। कोरोना से उपजी परिस्थितियों ने प्रवासी श्रमिकों को सड़क पर ला दिया है। घर लौट रहे हजारों-हजार मजदूरों का रेला हर रोज एक राज्य से दूसरे राज्य दाखिल हो रहा है।


छत्तीसगढ़ का भूगोल ही कुछ ऐसा है कि यह भारत का चौगड्डा है। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम जाने वाले रास्ते यहीं से होकर गुजरते हैं। इसीलिए घर लौट रहे पैदल मजदूरों के सबसे बडे़ जत्थे इस राज्य को लांघते हुए आगे बढ़ रहे हैं। किस दिन, किस पल, कितनी संख्या में मजदूर छत्तीसगढ़ की सीमा में दाखिल होंगे, कुछ पता नहीं होता। कोरोना की आहट मिलने के तुरत बाद से ही छत्तीसगढ़ सरकार और समाजसेवी पीडि़तों को राहत पहुंचाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। दूसरे प्रदेशों में कमाने-खाने गये मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी के लिए ट्रेनों-बसों का इंतजाम करने, उनसे संपर्क बनाए रखने, उन्हें क्वारंटाइन करने और क्वारांटाइन की अवधि में उनकी सेहत तथा सुविधाओं का खयाल रखने में बडा़ अमला जुटा हुआ है। साथ ही छत्तीसगढ़ से होकर गुजरने वाले अन्य राज्यों के अनगिनत मजदूरों को ठहराने, उनके भोजन आदि की व्यवस्था करने, उन्हें छत्तीसगढ़ की एक सीमा से दूसरी सीमा तक पहुंचाने के लिए वाहनों का प्रबंध करने में भी सैकडो़ लोग जिसमें ज़िला प्रशासन ,स्वास्थ्य , परिवहन आदि के साथ सामाजिक संगठन लगे हुए हैं। तपती हुई दोपहरियों में, संक्रमण के तमाम खतरों के बीच, वे भी मजदूरों के पसीनों में अपना पसीना मिला रहे हैं। अपने परिवार से दूर रहकर वे भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारियां पूरी कर रहे हैं।


कोरोना के विषाणुओं की तरह चुनौतियां भी अदृश्य हमले करती हैं। चौक-चौराहों पर अपनी संवेदनाओं की ढाल लेकर तैनात योद्धा इनसे पल-पल मुकाबिल है। इस कठिन लडा़ई में कभी कभी चुनौतियां भी भारी पड़ सकती हैं। असंख्य लोगों के भोजन और वाहनों के इंतजाम में समय की ऊंच-नीच हो सकती है। लेकिन यह समय कमी निकालने का नही बल्कि काम करने वालों को प्रोत्साहित करने और उनका हौसला बढ़ाने का है ।यह एक युद्ध है और युद्ध को युद्ध की तरह ही देखना और लड़ना होगा। चुनौतियां हौसलों से ही हारा करती हैं, हर हाल में हमें अपने योद्धाओं का हौसला बनाए रखना होगा।


सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ने आरोग्य सेतु एप के उपयोग पर उठाया सवाल

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ने आरोग्य सेतु एप के उपयोग पर उठाया सवाल

13-May-2020

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी एन श्रीकृष्ण ने कोरोना वायरस (कोविड-19) के मरीजों का पता लगाने में मदद के लिए लाए गए मोबाइल एप ‘आरोग्य सेतु’ के संबंध में डाटा के संभावित उल्लंघन को लेकर सवाल खड़ा किया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि यह (एप) इस प्रकार का पैबंदकारी है जो नागरिकों को फायदा पहुंचाने के बजाय उनकी चिंता बढ़ाएगी। न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा ने कहा कि यह बिल्कुल आपत्तिजनक है कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आये लोगों का पता लगाने वाले इस एप पर ऐसा आदेश कार्यकारी स्तर पर जारी किया गया।

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व न्यायाधशीश ने सोमवार (11 मई) को दक्ष द्वारा ‘डाटा शासन एवं लोकतांत्रिक मूल्य’ पर आयोजित वेबीनार में कहा, ‘‘ऐसे आदेश को संसदीय कानून से समर्थन प्राप्त होना चाहिए जो सरकार को ऐसा आदेश जारी करने के लिए अधिकृत करेगा।’’ उन्होंने कहा कि उपयुक्त कानून के अभाव में डाटा उल्लंघन की स्थिति में व्यवस्था में कोई जवाबदेही नहीं है।

उन्होंने कहा कि, “यदि यहां डेटा का उल्लंघन होता है, तो कौन जवाबदेह है? क्या कार्रवाई की जानी चाहिए? डेटा उल्लंघन के लिए कौन जिम्मेदार होगा?” बता दें कि, न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा उस विशेषज्ञ समिति के अगुवा थे जिसने निजी डाटा सुरक्षा विधेयक का प्रारूप तैयार किया था।

गौरतलब है कि, केंद्र सरकार ने 2 अप्रैल को मोबाइल ऐप (आरोग्य सेतु) लॉन्च किया था ताकि लोगों को कोरोना वायरस और सतर्क अधिकारियों से संक्रमित होने के जोखिम का आकलन करने में मदद मिल सके अगर वे किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ संपर्क में आए हैं। लगभग 9.8 करोड़ लोगों ने इस ऐप को डाउनलोड किया है और यह 12 भाषाओं में उपलब्ध है।


भारत में अच्छे दिन की तस्वीर।

भारत में अच्छे दिन की तस्वीर।

12-May-2020

अच्छे दिन आयेंगे! यही वह मंत्र था जिसे हिंदुस्तान के जहांपनाह ने अपने भाइयों और बहनों को दिया था। और ऐसे ज़ोरदार तरीके से दिया था कि आज तक प्रत्येक व्यक्ति इस मंत्र का उच्चारण कर रहा है। मंत्र की अपनी एक विशेषता होती है यदि ग़लत उच्चारण कर दिया जाये तो असर उल्टा या दूसरा हो जाता है। यहां भी यही हुआ।
जनता अपने अच्छे दिन समझने लगी जबकि यह सेवक के खुद के लिए था।
अच्छे दिन की शुरुआत नोटबंदी से शुरू होकर घरबंदी तक पहुंच गई। इस बीच विदेशों से कालाधन लाकर पंद्रह लाख खातों में डालने के वादों से जनता मंत्र मुग्ध हो गई वह भूल गई कि जहां टैक्स अदा की गई राशि पर भी टैक्स लिया जाता है और जहां बगैर रिश्वत के कोई काम नहीं होता वहां मुफ़्त में पंद्रह लाख क्यूं और कैसे मिलेगा! जनता से मांगने वाला समय, समय-समय पर बदलता रहा। कभी पचास दिन, कभी एक साल, कभी पांच साल । काम ना करने की स्थिति में कभी चौराहा, कभी सज़ा, कभी कुछ! समय बदलता रहा और स्थिति यहां तक आ पहुंची कि भाइयों और बहनों से ही कागजात मांगे जाने लगे। 
इसी बीच सेर पर सवा सेर कोरोनावायरस ने दस्तक दी। महोदय ने समझा जैसे दुनिया में सब नेताओं को गले लगा लगा के टोपी पहनाई इसे भी पहना दूंगा मगर मामला उल्टा पड़ गया वह इन्हीं के गले पड़ गया। अब लेने के देने पड़ गये। ताली और थाली बजवाई कि शायद डर कर भाग जाये, मोमबत्ती और दिया जलवाया कि शायद रौशनी से भाग जाये मगर बेकार। उल्टा जहांपनाह कोपचे में चले गए। वैसे भी राजा और मंत्री महलों में रहकर रामायण और महाभारत देखते हैं भले ही सीखते कुछ नहीं।
खैर आइये भारत के शहरों, अस्पतालों और सड़कों पर चलते हैं और देखते हैं कि अच्छे दिन की तस्वीरें कैसी हैं!
शहर के शहर बंद हैं। दुकान, आफिस, स्कूल, कोचिंग सब अपनी किस्मत को रो रहे हैं। अस्पतालों का नामकरण हो गया अब कोविड अस्पताल हो गये। जहां सामान्य रोगी की नहीं बल्कि सिर्फ करोना की जांच होगी। ऐसा लगता है कि मरीज़ या तो गायब हो गए या मर्ज सब खत्म हो गये या फिर अस्पताल जबरदस्ती मरीज़ बना देता था। खैर कोरोना के इलाज में लगे डाक्टर, नर्स सब अपनी जिंदगी दांव पर लगा कर सेवा कर रहे हैं। ये बात अलग है कि सुविधा के अभाव में प्रदर्शन भी कर रहे हैं। 
सड़कों की हालत देखिए लाकडाउन के बावजूद जनता सड़कों पर अपने घरों को पैदल जाने के लिए मजबूर हैं। सुविधा के नाम पर डंडे खा खाकर घर जा रही है जनता।
कोविड केयर के नाम पर हर जगह से धन‌ जमा करने के बावजूद रोज जनता से भीख मांगी जा रही है। ऐसा लग रहा है कि देश को सरकार नहीं जनता चला रही है। पचास दिन हो गए यही नहीं पता कि क्या किया जाए। बड़े सरकार को यह पता है कि जनता सड़कों पर आ रही है क्योंकि वह घर जाना चाहती है मगर यह नहीं पता कि उसे पैसे की भी जरूरत है। रोजगार ठप्प हैं मगर साहब कह रहे हैं कि जंग हम जीतेंगे।
जंग आप और आपकी सरकार जीत गई। बधाई।
देश की जनता जंग हार गई। अफसोस
आपने धन इकट्ठा कर लिया। बधाई।
जनता ने रोजगार खो दिया। अफसोस
कोई बात नहीं जनता का सेमीफाइनल 2022 और फाइनल 2024 में। शाट देखना।
जयहिंद

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com