जनदर्शन : मुख्यमंत्री ने दो हजार से ज्यादा लोगों से की मुलाकात : बैगा आदिवासियों के पट्टे की समस्या पर मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को तुरंत लगाया फोन

जनदर्शन : मुख्यमंत्री ने दो हजार से ज्यादा लोगों से की मुलाकात : बैगा आदिवासियों के पट्टे की समस्या पर मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को तुरंत लगाया फोन

09-Nov-2017

रायपुर : मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां अपने निवास परिसर में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में आम जनता से मुलाकात कर लोगों की समस्याएं सुनी। डॉ. सिंह ने कबीरधाम जिले से आए बैगा आदिवासियों के प्रतिनिधि मंडल के ज्ञापन को तत्काल संज्ञान में लिया और वहां के कलेक्टर को मोबाइल फोन पर इन आदिवासियों की पट्टे से संबंधित समस्या का उचित निराकरण जल्द सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री नेे आज के जनदर्शन में राजधानी रायपुर सहित राज्य के विभिन्न जिलों के दो हजार से अधिक लोगों सेे मुलाकात की। इनमें से 928 लोग विभिन्न प्रतिनिधि मंडलों में शामिल थे, जबकि एक हजार 151 लोगों ने मुख्यमंत्री को अपनी-अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के बारे में आवेदन दिए।

मुख्यमंत्री ने पंच-सरपंचों और अन्य जनप्रतिनिधियों के आग्रह पर आज के जनदर्शन में 25 आवेदनों  में लगभग 97 लाख रूपए के निर्माण कार्यों की स्वीकृति तत्काल प्रदान कर दी, जिनमें सीसी रोड, सामुदायिक भवन तथा पुल-पुलियों के कार्य भी शामिल हैं। डॉ. सिंह ने 62 मरीजों को संजीवनी कोष से सहायता राशि की मंजूरी दी और 57 मरीजों को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अम्बेडकर अस्पताल में नि‘शुल्क इलाज  के लिए भिजवाया।

डॉ. सिंह ने कबीरधाम जिले से आए बैगा आदिवासियों के प्रतिनिधि मंडल के ज्ञापन को तत्काल संज्ञान में लिया और वहां के कलेक्टर को मोबाइल फोन पर इन आदिवासियों की समस्याओं का उचित निराकरण जल्द सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन में बताया कि कबीरधाम जिले के पंडरिया तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम दमगढ़ में बैगा आदिवासियों के लगभग 110 परिवार विगत 80 वर्षाें से निवासरत हैं और खेती भी कर रहे हैं।

न्हें वर्ष 1975 में शासन द्वारा जमीन का पट्टा दिया गया था, लेकिन वर्ष 2014 में क्षेत्र के तत्कालीन राजस्व अधिकारियों ने जांच करने के लिए उन सबके जमीन के पट्टे जमा करवा लिए और आज तक उनकों अपनी जमीनों का पट्टा वापस नहीं मिला।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधि मंडल को विश्वास दिलाया कि इस प्रकरण में बैगा आदिवासियों को न्याय दिलाया जाएगा। ग्राम पंचायत अर्जुनी, कोरगापार और देवरी (क) (विकासखंड-गुण्डरदेही) जिला बालोद के सरपंचों और अन्य प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर खपरी जलाशय से 10 गांवों के लिए पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था करवाने का आग्रह किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि इस जलाशय से नल-जल योजना के लिए सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। इसका निर्माण होने पर अर्जुनी, सकरौद, गोरकापार, खपरी, सिरसिदा, परसदा सहित दस गांवों के लोगों को पर्याप्त पानी मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री ने उनका ज्ञापन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव को आवश्यक कार्रवाई के लिए भिजवाया। ग्राम पंचायत बड़ेदेवगांव (तहसील खरसिया) जिला रायगढ़ के ग्रामीणों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की। उन्होंने डॉ. सिंह को ज्ञापन सौंपकर ग्राम बड़े देवगांव के शासकीय हाई स्कूल का उन्नयन हायर सेकेण्डरी स्कूल के रूप में करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने उनका ज्ञापन स्कूल शिक्षा मंत्री श्री केदार कश्यप को भिजवाया।

 


आप पत्रकार है तो क्या आपको सात खून माफ़ है ?

आप पत्रकार है तो क्या आपको सात खून माफ़ है ?

08-Nov-2017

( आकाश भट्ट की कलम से )

पत्रकार ‌और पत्रकारिता के अब मायने बदल चुके है, आज़ादी के बाद लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में अभिव्यक्ति की आज़ादी को बनाये रखने के लिए पत्रकारिता को एक सम्मानजनक स्थान दिया गया था जो दिन बा दिन अपनी गरिमा को खोता जा रहा है | एक समय में, और स्वतंत्रता से पूर्व छापे खाने में छपने वाले समाचार पत्रों का चलन था उस समय के पत्रकार की एक धुंधली सी छवि खादी का कुर्ता पाजामा बाज़ू में थैली लटकाये कलम लिए समाचारों के लिए जद्दोजहद करने वाला वो पत्रकार ही तो थे जिन्होंने देश की आज़ादी और अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख दिया था, तब ना इतने साधन थे न ही ऐसी सुविधएं वो प्रेस के मालिक भी होते, संपादक भी और पत्रकार भी तब के समाचारों में एक सच्चाई और क्रांति हुआ करती थी जो बड़े-बड़ो को हिलाकर रख दिया करती थी |

उस समय साधन कम थे लेकिन पत्रकारिता को साधना की तरह पत्रकार अपने जीवन का एक हिस्सा बना कर समर्पित हो कर पत्रकारिता किया करते थे | समय बदलता गया साधन बढ़ते गए समाचारों के माध्यम समाचार जगत और कार्पोरेट में तब्दील होते चले गए, प्रिंट मडिया से टी.वी. और अब इन्टरनेट से सोशल मीडिया ने पत्रकारिता के मूलभूत स्वरुप को ही बदल कर रख दिया है | एक समय में ब्लिट्ज़ के एक लेख और नागरवाला काण्ड ने उस समय ऐसा तहलका मचाया था कि सरकार की चूले हिल गई थी तब समाचारों में दूसरा माध्यम रेडियो के समाचारों का हुआ करता था विविध भारती से सरकारी समाचार और BBC रेडियो ही एक निष्पक्ष समाचार का माध्यम हुआ करते थे जिनके समाचारों की अपनी विश्वसनीयता और  ,एक सच्चाई हुआ करती थी | 

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अब  का दौर ऐसा चल रहा है, जहाँ मीडिया और पत्रकारों ने अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम अपनी दादागिरी भी बखूबी से चलाई है, चाहे अधिकारी हो या पुलिस या राज नेता  मीडिया के नाम पर धौसियाना और पत्रकार संगठन और क्लब के नाम पर डराना धमकाना और वसूली करना इनका शगल बन गया है |  ज़बकि वास्तविक में जो पत्रकारिता करते है उन्हें इन सब से कोई भी लेना देना नहीं रहता है | वास्तविकता में पत्रकारिता का सही उद्देश्य खबरों और घटनाओ को लोगो तक पहुँचाने का है लेकिन अब दौर बदल चूका है, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने इन सभी को अब किनारे लगाना शुरू कर दिया है अब हर एक व्यक्ति पत्रकार की भूमिका अदाकार कर रहा है |

अब  समय के साथ अभिव्यक्ति का माध्यम भी बदल चूका है,  कुछ विशेष लोगो ने पत्रकारिता को अपने बाप की जागीर समझ लिया था उन्हें अब बोरिया बिस्तर बाँध ही लेना चाहिए क्योंकि अति का अन्त कभी ना कभी जरूर होता है। अब समय ई-पेपर डिजिटल मैगज़ीन का होता जा रहा है प्रिन्ट मीडिया भी दैनिक समाचारों से पहले खबरे तत्काल फेसबुक और ट्विटर, व्हाट्स एप पर वायरल कर दिए जाते है इस लिए अब दैनिक समाचारों को लोग लेट न्यूज़ के नाम से पढ़ते है, अब तक अभिव्यक्ति की आज़ादी और पत्रकारिता के नाम पर कुछ विशेष लोगों का ही मीडिया में दख़ल रहा है, वो अब समाप्त होना जरुरी है |
 
आप पत्रकार है और मीडिया से जुड़े है तो, क्या आपको सात ख़ून माफ़ है ? नियम और क़ानून सभी के लिए बराबर है संवैधानिक नियमो का पालन सभी को करना अनिवार्य है, लेकिन हमारे देश की ये कितनी बड़ी विडंबना है लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के नाम पर कुछ लोगो को दादागिरी करने की खुली छूट मिली हुई है ।

चंद लोगों ने पत्रकारिता को शर्मसार किया हुआ है आये दिन ये तथाकथित पत्रकार मंत्रियों विधायकों के बंगलो के इर्दगिर्द खैरात के लिए घूमते है और होली दीवाली का लिफ़ाफ़ा माँगने वाले ये पत्रकार जिन्हें समाचार समूहों ने भी हर तरह से नकार दिया है और काम से निकाल/हटा दिए गए है ऐसे लोग  पत्रकार का लेबल लगाकर प्रेस संगठनो और क्लबो के पदाधिकारी बनकर पत्रकारिता जैसे पवित्र काम को बदनाम करने में लगें हुए है ।

आये दिन पत्रकार सुरक्षा का रोना रोने वाले ये पत्रकार हक़ीक़त में पत्रकारों के शोषण करने वाले और अपना जेब भरने वाले है जिन्हें बेनकाब किया जाना ज़रूरी है, इनकी और ये जिन संस्थाओ से जुड़े है  इनकी जाँच होनी चाहियें हम शासन और पुलिस प्रशासन से विनती करते है की इनकी गम्भीरता से जाँच होनी चाहिये और शासन से जो भी अधिमान्यता या अन्य सुविधाएं जो इनको शासन के द्वारा प्राप्त  है उन्हें वापस लिया जाना चाहियें और इनकी संस्थाओ का पंजीयन रद्द कर गंभीरता से जाँच की जानी चाहिए
 

 


लोकतंत्र में नेता मदारी और जनता मूक दर्शक बनकर रह गई !

लोकतंत्र में नेता मदारी और जनता मूक दर्शक बनकर रह गई !

17-Oct-2017

लेख : एम.एच.जकरीया (khulasapost magazine article)

आज लोकतंत्र में नेता मदारी और जनता मूक दर्शक बनकर तमाशा देख रही है, और ये मदारी बनाम नेता नित् नये-नये पैतरे दिखा कर जनता को हर दिन हसीन सपने दिखा कर बेवकूफ बना रहे है ! भारत में राजनीतिक नेता होना बड़े काम की चीज है आप जिंदगी भर भूखे नहीं मरेंगे। इसकी गारंटी कोई भी आंख बंद कर के दे सकता है। अगर आप किसी कद्दावर नेता के पोते-सोते हैं तो मानना पड़ेगा कि आप सोने का चमच्चा मुंह में लेकर पैदा हुए हैं।

आजादी के 70 वर्ष बाद भी भारत के राजनीतिक क्षितिज पर वंशवाद की बेल अमरबेल कि तरह पनप रही है और भारतीय लोकतंत्र रूपी बटवृक्ष कि जीवन रेखा को निचोड़ दे रही है। भारतीय राजनीति में ये महत्वपूर्ण है कि आप किसके बेटे है या दामाद या बेटी, भतीजे हैं।

भारत के संविधान के अंतर्गत विधायिका और भारतीय नेतृत्व आता है, जो देश के नागरिकों के वोटों  के आधार पर जन प्रतिनधियों को चुनने का अधिकार देता है और यही जन-प्रतिनिधि जब चुन लिए जाते है तब सांसद और विधायक बनकर नियम-कानून बनाने का काम करता है, लेकिन वास्तविक में क्या ऐसा हो रहा है ! भारतीय संविधान में सभी व्यक्तियों को बराबर के अधिकार प्राप्त हैं पर दलितों, पिछड़ों, उपेक्षितों के साथ ही स्त्रियों को विशेषाधिकार दिए गए हैं लेकिन क्या हक़ीक़त में उन्हें इतने अधिकार मिल रहे है ! 

नेता के लिए चित्र परिणाम

वर्तमान भारतीय समाज में साम्प्रदायिक ताकतें अपने चरम पर हैं वो भारतीय संविधान के निर्माता भीम राव अम्बेडकर के चिन्तन को सिरे से नकारने और आलोचना में व्यस्त हैं. इसका ताज़ा तरीन उदाहरण उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जातीय संघर्ष से बेहतर देखा समझा जा सकता है, जो की ठाकुर बनाम दलित था दलितों के द्वारा की गई एफआईआर में कहा गया कि  “राजपूत समुदाय के लोग जुलूस निकाल रहे थे। उनके हाथों में तलवारें थी और वो ‘जय श्री राम’ व ‘अंबेडकर मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे। जब हमने उन्हें ऐसा करने से मना किया तो उन्होंने हमें पीटना शुरू कर दिया।

उन्होंने बाबा रविदास की मूर्ती तोड़ दी  हमारे घरों को लूटा, महिलाओं को प्रताड़ित किया, शब्बीरपुर और महेशपुर गांव में जानवरों को आग लगाई व दुकानों को लूटा। ” वहीं, पत्रकार अशोक पुंडीर ने आरोप लगाया कि जब वह इस मामले को कवर कर रहे थे तो उनपर हमला किया गया। पत्रकार ने कहा, “दलितों ने मुझे मारने की धमकी दी और मुझे पीटा। मेरे सिर और सीने में चोट आई है। हमलावरों ने मुझसे 20 हजार नकदी, सोने की अंगूठी और मेरा कैमरा भी छीन लिया।

 ऐसा पहले कभी भी नहीं देखा गया है ,दलितों पर सवर्णों ने अत्याचार किया और स्वतः स्फूर्त तरीके से कुछ दलितों ने भी प्रतिरोध का साहस किया। लेकिन सहारनपुर में पहली बार 9 मई को साफ तौर पर यह दिखा कि दलित नौजवानों ने प्रतीकात्मक तरीके से पुरजोर विरोध किया। भगवा रंग का जो अंगोछा वे अपनी शान और पहचान के लिए लगाए फिरते थे, वह उनके जान का जंजाल बन गया, अधिकांश ने डर के मारे अंगोछे फेंक दिए। गाड़ियों पर ‘राणा’ या ‘दी ग्रेट’ राजपूत लिखकर तथाकथित उंची जाति का होने के जिस दंभ का प्रदर्शन वे करते थे, उस दिन उनकों यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसका वे क्या करें, अपनी-अपनी गाड़ियाँ खड़ी करके भागे।

कुछ घटनाएं तो ऐसी भी हुईं कि दलित नौजवानों के झुंड़ को देखकर अपने आप को दलित साबित करने के लिए सवर्ण, खास करके राजपूत जय भीम नारा लगाने लगे, आंबेडकर जिंदाबाद बोलने लगे। पहली बार सवर्णों के दिल में यह खौफ समाया कि दलित सीधे उन पर हमला बोल कर अपने तथा अपने समुदाय पर हुए अत्याचार का प्रतिकार कर सकते हैं, जिस तरह हजारों साल से दलितों के मान-सम्मान को सवर्ण रौंदते आए हैं,  अब उनका भी मान-सम्मान खतरे में पड़ सकता है।

अब ऐसा नहीं रह गया है कि वे जैसे चाहें दलितों के साथ बर्ताव करते रहें और दलित चुपचाप सह लेंगे, या शासन-प्रशासन से न्याय की बाट जोहेंगे। सहारनपुर और उसके बाद 21 मई को जंतर-मंतर पर जुटान ने साबित किया कि अब दलित युवा जाति के आधार पर होने वाले अत्याचारों पर चुप नहीं बैठने वाले हैं।

पिछले कई युगों से पिछड़े और दलितो का दमन किया जाता रहा है । लेकिन आज़ादी के बाद भारतीय संविधान ने इस प्रकार के जातिगत भेदभाव को ख़ारिज कर दिया था, लेकिन 2013 -14  के बाद से जात पात और धर्म की राजनीती का रंग चढ़ने लग गया जो अलग अलग तरह से कभी गौ-रक्षा के नाम पर कभी एंटी रोमियो, कभी दलितों पर अत्याचार के रूप में फैलने लगा है जिसके भयानक अमानवीय परिणाम देखने को मिल रहे है । 

भारत की राजनीति में जातिगत राजनीति सबसे अधिक होती है यहाँ यादव, ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित आदि बटें हुए है और अधिकतर अपने जाति के उमीद्वार को ही वोट देते है. भले ही उस उमीद्वार पे कितने ही आपराधिक मामले दर्ज हो. इन्ही सब कारणों से समाज में विकास कहीं पीछे छुट गया है. हम यह पूरी तरह नही कह सकते की समाज में बदलाव की उम्मीद नही है क्योंकि हमने कई बार लोगो को जाति के इतर भी वोट करते देखा है. जैसे आपातकाल के बाद देश की पूरी जनता कांग्रेस विरोधी हो गई थी और जाति से हट कर उनके विरुद्ध वोट किया था. ऐसा ही बदलाव इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुआ था जब कांग्रेस अब तक के सबसे ज्यादा सीटों के बाद सत्ता में लौटी थी. इसके बाद एक हाल ही का उदाहरण लोकसभा चुनाव 2014 है, जिसमे उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यो में लोगो ने जाति से इतर वोट किया था.

वर्तमान परोक्ष में यह तो सिद्ध है की कुछ लोग बदलाव चाहते है लेकिन या तो उनके पास कोई विकल्प नही है और है भी तो सही नही है. इसके विपरीत कुछ यह सोचते है की उनकी जाति का नेता उनके लिए अधिक सुविधाओं को उपलब्ध कराएगा जिससे की समाज में उनका दबदबा होगा. वहीँ एक कारण यह है की आज भी हम स्वर्ण, पिछड़ा, अति-पिछड़ा, दलित आदि सामाजिक व्यवस्था में उलझे हुए है और हमारी इन कमजोरियों का फायदा उठा कर राजनेता जाति की राजनीति करते है और देश और समाज के विकास की कोई चर्चा नही करते है | इसलिए मेरा मानना है की हमें जाति, धर्म आदि से ऊपर उठकर अपने समाज के विकास के लिए वोट देना चाहिए. जो भी हमें धर्म या जाति में बाँटने की कोशिश करे उसका बहिष्कार करना चाहिए और यह बता देना चाहिए की हमें जाति, धर्म नही, रोटी, कपडा, मकान और विकास चाहिए..!!

किसी ने क्या खूब कहा है - इस भारत के भीतर भी एक भारत है जिसे हम उसके बाह्य रूप से भी अधिक अच्छी तरह जानते तो हैं पर न जानने का दिखावा करते हैं. क्योंकि ये वो भारत है जो हमारी वास्तविकता है, हमारी दुखती रग है, पर हम इस असलियत से शुतुरमुर्ग की तरह मुंह चुराते फिर रहे हैं. ये हमारी पुरानी आदत है जिसे हम छोड़ना नहीं चाहते. 


छत्तीसगढ़ में राजनैतिक युद्ध का शंखनाद

छत्तीसगढ़ में राजनैतिक युद्ध का शंखनाद

16-Oct-2017

लेख : एम.एच.जकरीया (magazine cover story)

छत्तीसगढ़ में राजनैतिक युद्ध का शंखनाद हो चूका है ,वर्ष 2018 में विधानसभा का चुनाव होना है सभी राजनैतिक दलों ने अपने अपने तरीके से चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है ,मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह  ने 300 रूपया प्रति क्विंटल  के हिसाब से किसानों को 2100 करोड़ का बोनस देने की घोषणा करने के बाद बोनस तिहार के रूप में बाँटना भी प्रारम्भ कर दिया है वही छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के नेता अभी तक सिर्फ बगले झाँक रहे है ! जो कांग्रेस के कमज़ोर रणनीति को स्पष्ट तौर पर दर्शाता है | 

अभी छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस में संगठन चुनाव को लेकर जिस तरह की रस्साकशी देखि गयी है उसे जनता ने भी देखा और सुना है जब इनके आपस में ही इतने मतभेद और मनभेद है तो ये जनता के सामने किस मुँह से अपनी बातें रख पाएँगे ये सोचने वाली बात है , डॉ रमन सिंह के एक ही नहले पे दहला का  जवाब नहीं है इनके पास |

chhattisgarh congress के लिए चित्र परिणाम

अभी जिस तरह से प्रदेश कांग्रेस संगठन चुनाव में जो बातें सामने आई है ,उससे ऐसा लगने लगा है की छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व शून्य है ? संगठन के मुखिया सिर्फ एक दूसरे को निपटाने में लगे है ,जब संगठन के चुनाव में इनका ये आलम  है तो फ़िर अपने विरोधियो से विधानसभा चुनाव में ये किस तरह से सामना कर पाएंगे ये सोचने और समझने वाली बात है | कांग्रेस हाइ कमान को अभी भी समय रहते समझ जाना चाहिए नहीं तो उत्तरप्रदेश से भी बुरा हाल होने वाला है छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का , यहाँ ये तो स्पष्ट है की छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन अब ज़रूरी हो गया है |

वही छत्तीसगढ़ में भा ज पा के लिए भी रास्ता इतना आसान नहीं होगा ,क्योकि जनता का अपना मिज़ाज़ है कब बदल जाये मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने चुनाव की तैयारी शुरू करते हुए किसानों के बोनस से अपनी शुरुवात तो कर दी है लेकिन जिन्हे वर्तमान में टिकट दिया गया है  उनमे से अधिकतर जन प्रतनिधियों के प्रति उस  क्षेत्र की जनता में आक्रोश देखा जा रहा है जनता नाराज़ है उनसे इसका साफ मतलब है की जनता रमन सिंह के काम से तो संतुष्ट है लेकिन विधायकों से नाराज़ है ,खुलासा पोस्ट न्यूज़ नेटवर्क के एक सर्वे में सरायपाली ,बीजापुर , जगदलपुर  ,बस्तर , राजिम ,कवर्धा ,रायपुर उत्तर , बिलासपुर ,धरसीवा में यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो परिणाम नुकसान दायक हो सकते है |

वही पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी 2018 विधानसभा चुनाव में चौकाने वाले परिणाम देने की तैयारी में जुट गए है अभी हाल ही में उन्होंने जोगी कांग्रेस के 11 प्रत्याशियों की  घोषणा भी कर दी है जिनमे प्रेमनगर से पंकज तिवारी, रायगढ़ से विभाष ठाकुर, रायपुर ग्रामीण  से ओमप्रकाश देवागंन, भानुप्रतापपुर से मानक दरपट्टी, तखतपुर से संतोष कौशिक, प्रतापपुर से डॉक्टर नरेंद्र सिंह, चंद्रपुर से गीताजंली पटेल, मानपुर मोहला से संजीव ठाकुर, भरतपुर सोनहत से गुलाब सिंह, भाठापारा से चैतराम साहू, पत्थलगांव से एमएस पैकरा को अपने उम्मीदवार के रूप में इनके नामों पर मुहर लगा दी है ।

अब इन प्रत्यासियो से राजनैतिक समीकरण में बदलाव निश्चित है कांग्रेस के एक दिग्गज नेता का हारना यहाँ अभी से तय माना जा रहा है ये हमारा सर्वे बता रहा है और बात स्पष्ट है की वर्ष 2018 में छत्तीसगढ़ समेत मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक इन चारों राज्यों में चुनाव होने वाले हैं छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में कांग्रेस की इज्जत अब  दांव पर लगी हुई है , क्योकि लगातार 3 चुनाव में कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में हार का सामना करना पड़ा है और बार-बार हार का ठीकरा जोगी पर ही कांग्रेस के नेता फोड़ते रहे है और अब इस बार जोगी कांग्रेस से अलग हो कर जोगी कांग्रेस बनाकर अलग चुनाव लड़ेंगे  मतलब साफ है मुकाबला त्रिकोणीय होने वाला है चुनाव में उतरने से पहले सभी पार्टियाँ अलग-अलग तरीकों से सर्वेक्षण कराती है। इसके लिए वे पेशेवर सर्वेक्षण कंपनियों की सेवा भी लेती हैं।

इसके अलावा पर्यवेक्षक भी क्षेत्रों का दौरा कर स्थानीय नेताओं, समर्थकों और क्षेत्र के प्रमुख लोगों से बात कर हालात को समझने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा संगइन स्थानीय इकाईयों से भी रिपोर्ट मंगाती है। आम आदमी पार्टी ने भी छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 में उतरने का ऐलान कर दिया है लेकिन सबकी निगाहें खासकर बीजेपी, कांग्रेस और जनता कांग्रेस जोगी (जे) पर होगी |

छत्तीसगढ़ की तीनो राजनीतिक दलों में कुछ न कुछ कमजोरियां हैं, अभी हाल ही के घटनाक्रम को देखें तो सभी पार्टियों के अन्दर कुछ नेता या विधायक मंत्री कई विवादों के बीच फंसे रहें हैं हालाँकि इन राजनीतिक घटनाओं पर कुछ देर के लिए हो-हल्ला मचाया गया और बाकी चुनाव के नजदीक आने पर शोर मचाया जाएगा सभी पार्टियाँ एक-दूसरे पर हमला बोलने के लिए सभी मुद्दों और मामलों की सूची  बनाकर रखे हुए हैं अब जैसे ही नए वर्ष की शुरुआत होगी वैसे ही विपक्षी दल सत्ताधारी पार्टी के विधायकों के कारनामो को लेकर हमला बोलेंगे तो वहीँ भाजपा भी विपक्षी दलों से भिड़ने तैयार नजर आ रही है

भाजपा के कद्दावर मंत्री और कांग्रेस के मुखिया के जमीन का मामला  हालाँकि मंत्री जी अपनी सफाई देते रहे लेकिन जितने दाग उनपर लगने थे वे तब तक लग चुके थे उनकी साफ-सुधरी  छबि इस जमीन मामले के बाद धुंधली हो गई राजनीती के गलियारों में तो ऐसी भी ख़बरें थी की शायद मंत्री जी से उनका इस्तीफा लिया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ,

तो वहीँ भाजपा के बस्तर के एक युवा मंत्री की बात करते हैं उनके नाक के नीचे उनके विभाग में अधिकारी कई ऐसे घोटालों में संलिप्त रहे हैं और मंत्री जी इस मामले पर चुप्पी साधे बैठे हुए हैं जो की आने वाले चुनावो में उन पर भारी पड़ने वाला है राजनीतिक गलियारों में तो यहाँ तक कहा जा रहा है की इनके कारनामो का खुलासा होने के बाद भी इन अधिकारियो पर कार्यवाही नही करने के कारण इस बार मंत्री जी को अपनी सीट बचाने खासी मशक्कत करनी होगी.

बीजेपी और कांग्रेस के बाद प्रदेश की तीसरी बड़ी पार्टी जनता कांग्रेस की बात करते हैं जहाँ पार्टी के मुखिया और उसके बेटे श्री अजित जोगी और अमित जोगी पर अपनी जाति आदिवासी साबित करने का संकट मंडरा रहा है चुनाव के नजदीक आते ही ऐसे कई और दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिलेंगे फ़िलहाल चुनाव का समय अभी दूर है और हमारे खुलासापोस्ट न्यूज़ नेटवर्क की टीम ने छत्तीसगढ़ के वर्तमान राजनैतिक समीकरणों को आपके सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया है ।

कांग्रेस के संगठन चुनाव में जमकर चला भाई - भतीजावाद 

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस में प्रदेश प्रतिनिधियों के चुनाव में कांग्रेस कार्यकर्ताओ के साथ जमकर भेदभाव होने की बातें सामने आ रही है ,कांग्रेस संगठन चुनाव में निष्ठावान और जिम्मेदार कार्यकर्ताओ को नज़रअंदाज़ कर के प्रदेश के बड़े नेता और पदाधिकारी अपने बेटों भतीजो और परिवार के सदस्यों को प्रदेश प्रतिनिधि बना रहे है जिससे कार्यकर्ताओ में जमकर आक्रोश देखा जा रहा है 

कहा तो यहाँ तक जा रहा है की जिन्होंने कांग्रेस की सदस्यता भी नहीं ली वो प्रदेश के प्रतिनिधि होंगे तो काम करने वाले निष्ठावान  कांग्रेस के कार्यकर्त्ता अपने घर बैठ जायेगे ! ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव 2018 में इनके भाई भतीजे और परिवार के लोग ही कांग्रेस को चुनाव जिताएंगे ऐसा लग रहा है , 3 बार करारी शिकस्त के बाद भी प्रदेशकांग्रेस के ये मट्टाधीश सुधरने का नाम नहीं ले रहे है और अपनी मनमानी करने से बाज़ नहीं आ रहे है ?

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं के रिश्तेदार जिनमे मोतीलाल वोरा और उनके पुत्र अरविन्द वोरा, अरुण वोरा भतीजे राजीव वोरा बरसों से कांग्रेस से गायब रहे पारस चोपड़ा सत्यनारायण शर्मा पंकज शर्मा अमीतेश शुक्ल के पुत्र भवानी शंकर शुक्ल रविन्द्र भेड़िया उनकी पत्नी अनिला भेड़िया दुर्ग से प्रतिमा चंद्राकर उनके भाई लक्ष्मण चंद्राकर दंतेवाड़ा से देवकी कर्मा की सुपुत्री पुलिका कर्मा इन्हें प्रदेश प्रतिनिधि बनाया गया   


स्वतंत्रता दिवस पर केंद्र का निर्देश नहीं मानेगी ममता सरकार

स्वतंत्रता दिवस पर केंद्र का निर्देश नहीं मानेगी ममता सरकार

26-Aug-2017

नई दिल्ली : स्वतंत्रता दिवस से पहले केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से देशभक्ति की भावना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यू इंडिया (नया भारत) की सोच को लेकर जोश जगाने के लिए स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित करने को कहा है. हालांकि पश्चिम बंगाल की सरकार ने स्कूलों को केंद्र का सर्कुलर न मानने का निर्देश दिया है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ममता बनर्जी की अगुआई वाली तृणमूल सरकार के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है. जावड़ेकर ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री के संकल्प सिद्धि का शपथ दिलाना या स्वतंत्रता संग्राम या विभिन्न युद्धों, आतंकी हमलों में शहीदों को याद करना स्कूलों के लिए बाध्यकारी नहीं है. यह सेक्यूलर एजेंडे का हिस्सा है, राजनीति पार्टी का एजेंडा नहीं.
उन्होंने पश्चिम बंगाल सर्व शिक्षा मिशन के राज्य परियोजना निदेशक का मेमो भी दिखाया. मेमो में स्कूल शिक्षा विभाग को केंद्र के सर्कुलर के आधार पर स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाने को कहा गया है. एचआरडी मंत्रालय के संयुक्त सचिव मनीष गर्ग ने स्कूलों में कार्यक्रम आयोजन के लिए राज्यों को पत्र लिखा है.

पत्र में कहा गया है कि उम्मीद है देश भर में त्योहार और देशभक्ति की भावना जगाने के उद्देश्य से इस महत्वपूर्ण अवसर को मनाया जाएगा. यह नए भारत की सोच के मिशन में देश के हर नागरिक को शामिल करने के लिए आंदोलन है. नए भारत की सोच गरीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, सांप्रदायिकता और जातिवाद मुक्त भारत है. पत्र में सभी राज्यों से नौ से 30 अगस्त तक चलने वाले कार्यक्रम का प्रचार करने को कहा गया है ताकि मिशन को लेकर लोगों में उत्साह जागे.

गर्ग ने कहा कि सीबीएसई से संबद्ध स्कूल समेत सभी स्कूलों को शपथ ग्रहण के अलावा स्वतंत्रता संग्राम और देश के विकास पर क्विज प्रतियोगिता कराने को भी कहा गया है. इन्हीं विषयों पर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा


कैसा ये झोल, लाल किले से पीएम ने बताया कुछ और आंकड़े और नोटबंदी पर सरकार ने बताए थे कुछ और !

कैसा ये झोल, लाल किले से पीएम ने बताया कुछ और आंकड़े और नोटबंदी पर सरकार ने बताए थे कुछ और !

26-Aug-2017

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (15 अगस्त) को चौथी बार लाल किले से देश को स्वतंत्रता दिवस पर संबोधित किया। पीएम मोदी के भाषण के प्रति सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों को उनका भाषण पसंद आया तो बहुतों ने कहा कि लग रहा था जैसे पीएम आगामी लोक सभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे हैं। आरोपों-प्रत्यारोपों से इतर कुछ रिपोर्ट में पीएम मोदी के भाषण में दिए आंकड़ों की भी पड़ताल की गई। द स्क्रॉल ने अपनी खास रिपोर्ट में लाल किले से पीएम मोदी के दिए आंकड़ों को आधिकारिक आंकड़ो के बरक्स परखा है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में कालाधन, नोटबंदी और रोजगार तैयार करने से जुड़े आंकड़े दिए। आइए देखते हैं उनके दावे तथ्यों की रोशनी में कितने खरे उतरते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार बनने के बाद उन्होंने सबसे पहला कम एसआईटी (विशेष जांच दल) बनाने का किया। पीएम ने कहा कि तीन साल बाद उन्हें देशवासियों को ये बताते हुए गर्व हो रहा है कि 1.25 लाख करोड़ का कालाधन जब्त किया जा चुका है। पीएम ने ये भी कहा कि दोषियों को सजा भी दिलायी जाएगी। स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने पिछले तीन साल में इससे ज्यादा रकम बरामद की है लेकिन ये सारी रकम सरकार को नहीं मिलेगी। 

ज्यादा संभावना इस बात की है कि दोषियों पर टैक्स पेनाल्टी लगायी जाएगी। लोक सभा में सरकार ने बताया था कि 2016 तक आयकर विभाग ने कुल 1.35 लाख करोड़ रुपये की अघोषित आय बरामद की है।

पीएम मोदी ने नवंबर 2016 में लागू की गई नोटबंदी का भी अपने भाषण में जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि बाहरी विशेषज्ञों के अनुसार नोटबंदी से करीब तीन लाख करोड़ रुपये बैंकिंग सिस्टम में आए। पीएम ने बताया कि नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा की गई 1.75 लाख करोड़ रुपये की राशि जांच के दायरे में है। पीएम मोदी के अनुसार करीब दो लाख करोड़ रुपये का कालाधन बैंकों में हुआ। पीएम मोदी के इन दावों का स्रोत भी अस्पष्ट है। ये भी साफ नहीं है कि अगर दो लाख करोड़ रुपये कालाधन जमा हुआ तो केवल 1.75 लाख करोड़ की ही जांच क्यों हो रही है।

तीन लाख करोड़ रुपये अघोषित राशि के बैंकों में जमा होने के दावे पर भी स्क्रॉल ने सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। पीटीआई ने इस साल की शुरुआत में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा था कि नोटबंदी के बाद 3-4 लाख करोड़ रुपये अघोषित राशि सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार “अतिरिक्त जमा” ( न कि अघोषित आय) 2.7 लाख करोड़ रुपये से 4.3 लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है।

पीएम मोदी ने दावा किया कि नोटबंदी के बाद डाटा माइनिंग करके तीन लाख जाली कंपनियों का पता लगाया गया। ये कंपनियां हवाला का कारोबार करती थीं। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने इनमें से 1.75 लाख जाली कंपनियों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने इसी साल 12 जुलाई को लोक सभा में बताया था कि मंत्रालय ने 1.62,618 कंपनियों को कंपनीज एक्ट 2013 की धारा 248 के तहत कंपनी रजिस्ट्रार से हटा दिया है। मंत्रालय ने अपने जवाब में इन कंपनियों को हटाने के लिए नोटबंदी के बाद की गई डाटा माइनिंग को वजह नहीं बताया था। लोक सभा में ही केंद्र सरकार ने बताया था कि आयकर विभाग को पिछले तीन सालों के दौरान विभिन्न जांचों में 1155 जाली कंपनियों का पता चला है।


पीएम मोदी को पड़ोसी की चिंता ! नेपाल की बाढ़ पर ट्वीट कर हुए ट्रोल

पीएम मोदी को पड़ोसी की चिंता ! नेपाल की बाढ़ पर ट्वीट कर हुए ट्रोल

24-Aug-2017

नई दिल्ली : इन दिनों बिहार, यूपी सहित देश के कई राज्यों में बाढ़ की स्थिति भयावह होती जा रही है। राज्य के कई जिलों में तो घरों में पानी घुस गया है, जिससे लाखों लोख बेघर हो गए हैं। बता दें कि, इन दिनों नेपाल में भी बाढ़ से बड़ी तबाही मचा रखी है। बाढ़ के कारण नेपाल में अब तक करीब 130 लोगों की जान जा चुकी है।

इसी बीच पीएम मोदी ने नेपाल में बाढ़ से मची तबाही पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि इस संकट की घड़ी में भारत नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, मैंने नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से बात की और वहां इस विनाशकारी बाढ़ में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना जताई। साथ ही उन्होंने अपने अगले ट्वीट में नेपाल के हालात पर अपनी चिंता जाहिर की है। पीएम मोदी के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी आलोचना करनी शुरू कर दी। जिसके बाद पीएम मोदी सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गए और ट्रोल हो गए।

बता दें कि बिहार के सीमांचल जिलों पूर्णिया, कटिहार, अररिया, सुपौल, किशनगंज, कटिहार, सीतामढ़ी, पूर्वी चम्पारण और पछ्चिमी चंपारण जिलों के करीब दो दर्जन से ज्यादा प्रखंडों में स्थिति भयावह है। इसके अलावा अररिया, किशनगंज, कटिहार और पूर्वी चंपारण में कई जगहों पर रेल ट्रैक पर बाढ़ का पानी बह रहा है।

कुछ यूजर्स कह रहे है कि आपको नेपाल की चिंता है ये बहुत अच्छी बात है लेकिन एक बार अपने देश में बाढ़ से मर रहे लोगों के प्रति भी संवेदना व्यक्त कर देते।

नई दिल्ली : इन दिनों बिहार, यूपी सहित देश के कई राज्यों में बाढ़ की स्थिति भयावह होती जा रही है। राज्य के कई जिलों में तो घरों में पानी घुस गया है, जिससे लाखों लोख बेघर हो गए हैं। बता दें कि, इन दिनों नेपाल में भी बाढ़ से बड़ी तबाही मचा रखी है। बाढ़ के कारण नेपाल में अब तक करीब 130 लोगों की जान जा चुकी है।

इसी बीच पीएम मोदी ने नेपाल में बाढ़ से मची तबाही पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि इस संकट की घड़ी में भारत नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, मैंने नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से बात की और वहां इस विनाशकारी बाढ़ में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना जताई। साथ ही उन्होंने अपने अगले ट्वीट में नेपाल के हालात पर अपनी चिंता जाहिर की है। पीएम मोदी के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी आलोचना करनी शुरू कर दी। जिसके बाद पीएम मोदी सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गए और ट्रोल हो गए।

बता दें कि बिहार के सीमांचल जिलों पूर्णिया, कटिहार, अररिया, सुपौल, किशनगंज, कटिहार, सीतामढ़ी, पूर्वी चम्पारण और पछ्चिमी चंपारण जिलों के करीब दो दर्जन से ज्यादा प्रखंडों में स्थिति भयावह है। इसके अलावा अररिया, किशनगंज, कटिहार और पूर्वी चंपारण में कई जगहों पर रेल ट्रैक पर बाढ़ का पानी बह रहा है।

कुछ यूजर्स कह रहे है कि आपको नेपाल की चिंता है ये बहुत अच्छी बात है लेकिन एक बार अपने देश में बाढ़ से मर रहे लोगों के प्रति भी संवेदना व्यक्त कर देते।


BJP दफ्तर खोलने के लिए राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने किया जमीनों में फर्जीवाड़ा

BJP दफ्तर खोलने के लिए राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने किया जमीनों में फर्जीवाड़ा

24-Aug-2017

नई दिल्ली : राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार पर बीजेपी दफ्तरों की जमीन को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार वसुंधरा राजे सरकार पर आरोप है उसने राजस्थान के सभी जिलों में बीजेपी दफ्तर बनाने के लिए लैंड यूज बदला, जो राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले का उल्लंघन है. 

न्यूज़ चैनल आजतक की रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी राज्य के सभी 33 जिलों में अपना दफ्तर खोलना चाहती है. इसके लिए 28 जिलों में सरकार जमीनों का आवंटन कर रही है. जिसमें से 14 जिलों में जमीन आवंटित कर दी गई है. जो जमीन बीजेपी दफ्तरों के लिए दी गई है, वह आवासीय और वाणिज्यिक जमीन हैं. मगर राजस्थान सरकार ने इस जमीन का लैंड यूज ही बदल दिया और इसे संस्थानिक किया जा रहा है.

बीजेपी राजस्थान के इन जिलों में अपने दफ्तर प्राइम लोकेशन पर खुओलना चाहती है. जबकि राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश है कि जब तक कोई व्यापक जनहित का मामला न हो, तब तक लैंड यूज नहीं बदला जा सकता है. जिन शहरों में जमीन आवंटन हो चुका है, उनमें नागौर, राजसमंद, हनुमानगढ़, सिरोही, जैसलमेर, चित्तौड़गढ़, धौलपुर, बूंदी, दौसा, करौली, झुंझनूं, टोंक, किशनगढ़, डूंगरपुर शामिल हैं.

हालाँकि बीजेपी सरकार का तर्क है कि बीजेपी के दफ्तर भी जनता के हित के लिए हैं, वहां जनता से जुड़े काम होते हैं. बीजेपी यह भी मानती है कि राजस्थान भू—आवंटन नीति, 2015 के तहत राजनैतिक दलों को जमीन आवंटन का प्रावधान है. और बीजेपी को आरक्षित दर के अलावा 15 प्रतिशत दर पर जमीन आवंटन किया जा रहा है. 

INPUT : INDIASAMVAD.CO.IN