कानपुर में एक सरकारी अस्पताल की बड़ी लापरवाही, MRI मशीन में 8 साल की बच्‍ची की मौत

कानपुर में एक सरकारी अस्पताल की बड़ी लापरवाही, MRI मशीन में 8 साल की बच्‍ची की मौत

06-Sep-2019

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक सरकारी अस्पताल की बड़ी लापरवाही देखने को मिली है. यहां के लाला लाजपत राय अस्पताल में एमआरआई के दौरान 8 साल की एक बच्ची की मौत हो गई. टीवी9भारतवर्ष की खबर के अनुसार  बच्ची के परिजनों को आरोप है कि एमआरआई स्कैन से पहले दिए गए ओवरडोज़ के कारण उसकी मौत हुई है.

अस्पताल में प्राइवेट तौर पर एमआरआई की सुविधा दी जा रही थी. वहीं मामले के सामने आने के बाद अस्पताल के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. आरके मौर्य ने एमआरआई चलाने वाले सेंटर को नोटिस जारी कर दिया है और वहां से जवाब आने के बाद उचित कार्रवाई की जाने की बात कही है. इस मामले पर सेंटर की इंचार्ज पूनम पांडे का कहना है कि बच्ची की मौत ओवरडोज के कारण नहीं हुई. उन्होंने कहा कि जब बच्ची को यहां लाया गया था, तो उसकी हालत गंभीर थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्ची के पिता ने बताया कि अस्पताल में बच्ची का कार्डियोपैगिया के लिए इलाज चल रहा था. इस बीमारी में धड़ के नीचे शरीर के अंग ठीक तरह से काम नहीं करते हैं. गुरुवार को डॉ. ने बच्ची का एमआरआई कराने के लिए कहा था. परिजन बच्ची को लाइफलाइन सेंटर ले गए, जो कि अस्पताल में प्राइवेटली चल रहा था. बच्ची के पिता ने कहा, “मुझसे कहा गया कि बच्ची को परेशानी हो सकती है इसलिए उसे बेहोश किया जाएगा और हमने उनकी बात मान ली.”

तीन घंटे बाद उन्हें सूचना दी गई कि बच्ची की मौत हो गई है. वे तुरंत बच्ची को डॉ. के पास लेकर गए जहां उन्होंने बच्ची की मौत की पुष्टि की. पिता ने आरोप लगाया है कि जब उन लोगों ने विरोध किया तो सेंटर वालों ने उन्हें यह कहकर डरा दिया कि बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाएगा और उसकी आंखें निकाल ली जाएंगी.


खिड़की पर लगी लोहे की रेलिंग से फांसी पर लटकता मिला दो भाइयों का शव

खिड़की पर लगी लोहे की रेलिंग से फांसी पर लटकता मिला दो भाइयों का शव

06-Sep-2019

नई दिल्ली। देश की राजधानी में दो भाइयों का उनके घर पर खिड़की पर लगी लोहे की रेलिंग से शव लटकता हुआ पाया गया है, जिसके बाद से इलाके में दहशत का माहौल है। दरअसल जब पड़ोस के लोगों को घर से बदबू आने लगी तो इस बाबत पुलिस को जानकारी दी गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर जब पुलिस पहुंची तो उसने घर का दरवाजा तोड़कर शव को बरामद किया है। यह घटना दिल्ली के हरि नगर स्थित घर का है।

जानकारी के अनुसार दोनों भाई इस घर में पिछले चार महीने से रह रहे थे। पुलिस ने बताया कि दोनों ही शव सड़ चुके हैं, लिहाजा इसकी पहचान कर पाना मुश्किल है। मौके से किसी भी तरह का कोई सुसाईड नोट बरामद नहीं किया गया है। शव को दीन दयाल उपाध्याय हॉस्पिलट में पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया गया है। हालांकि अभी तक यह नहीं साफ हो सका है कि यह दोनों भाइयों की कब मृत्यु हुई है। फिलहाल हरिनगर थाने की पुलिस मामले की जांच कर रही है।

घटना की जानकारी मिलने पर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो दरवाजा तोड़कर घर के भीतर से शव को बाहर निकाला गया। पुलिस के अनुसार दोनों ही भाइयों की कई दिन पहले मौत हो चुकी है। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी कि यह घटना कब की है। जिस घर में यह शव बरामद किया गया है वह बाबूलाल नाम के व्यक्ति का है। दोनों भाई यहां किराए पर रहते थे। हालांकि शव के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन पुलिस को इस बात का शक है कि यह आत्महत्या का मामला हो सकता है।


डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन : राजनीति में दार्शनिकता के शिखर व्यक्तित्व

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन : राजनीति में दार्शनिकता के शिखर व्यक्तित्व

05-Sep-2019

ललित गर्ग 

महापुरुषों की कीर्ति किसी एक युग तक सीमित नहीं रहती। उनका लोकहितकारी चिन्तन, जीवन मूल्यों को लोकजीवन में संचारित करने की दृष्टि एवं गिरते सांस्कृतिक मूल्यों की प्रतिष्ठा का संकल्प कालजयी होता है और युग-युगों तक समाज का मार्गदर्शन करता है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन हमारे एक ऐसे ही प्रकाश-स्तंभ है, जिन्होंने अपनी बौद्धिकता, सूझबूझ, व्यापक सोच से भारतीय संस्कृति के संक्रमण दौर में संबल प्रदान किया। वे भारतीय संस्कृति के ज्ञानी, एक महान् शिक्षाविद, महान् दार्शनिक, महा-मनीषी अध्येता, समाज-सुधारक, राजनीतिक चिन्तक एवं भारत गणराज्य के राष्ट्रपति थे। वे समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे। उनका मानना था कि शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है और यही आदर्श समाज संरचना का आधार है।

डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितंबर को प्रतिवर्ष ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि उन्होंने अपने जीवन के 40 वर्ष एक शिक्षक के रूप में व्यतीत किए थे। वह एक आदर्श शिक्षक थे। इस दिन समस्त देश में भारत सरकार द्वारा श्रेष्ठ शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान किया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन बहुआयामी प्रतिभा के धनी होने के साथ ही देश की संस्कृति को प्यार करने वाले व्यक्ति थे। सन् 1967 तक राष्ट्रपति के रूप में वे देश की सेवा करते रहे। एक बार विख्यात दार्शनिक प्लेटो ने कहा था- राजाओं को दार्शनिक होना चाहिए और दार्शनिकों को राजा। प्लेटो के इस कथन को 1962 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने तब सच कर दिखाया, जब वह भारत के दूसरे राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। इस प्रकार एक दार्शनिक ने राजा की हैसियत प्राप्त की। बर्टेड रसेल जो विश्व के जाने-माने दार्शनिक थे, वे डाॅ. राधाकृष्णन के राष्ट्रपति बनने पर अपनी प्रतिक्रिया को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा था ‘यह विश्व के दर्शन शास्त्र का सम्मान है कि महान् भारतीय गणराज्य ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राष्ट्रपति के रूप में चुना और एक दार्शनिक होने के नाते मैं विशेषतः खुश हूँ।

डॉ. राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरूतनी ग्राम में, जो मद्रास, अब चेन्नई से लगभग 64 कि॰ मी॰ की दूरी पर स्थित है, 5 सितंबर 1888 को हुआ था। वे एक ब्राह्मण परिवार से संबंधित थे। वह बचपन से ही मेधावी थे। इन्होंने वीर सावरकर और स्वामी विवेकानन्द का गहन अध्ययन किया, दुनिया के विभिन्न धर्म एवं दर्शनों का तुलनात्मक अध्ययन किया। उन्होंने दर्शन शास्त्र में एम.ए. किया और सन् 1916 में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए। उनको बचपन से ही पुस्तकों से प्रेम था। इस कारण तभी स्पष्ट हो गया था कि यह बालक बड़ा होकर विद्वत्ता एवं महानता का वरण अवश्य करेगा।

यही हुआ, उन्होंने सत्यं, शिवं और सौन्दर्य की युगपत् उपासना की। उन्होंने अपने बौद्धिक कौशल से सम्पूर्ण भारत को धर्म एवं संस्कृति के अटूट बंधन में बांधकर विभिन्न मत-मतांतरों के माध्यम से सामंजस्य स्थापित किया। उन्होंने विज्ञान का अनादर नहीं किया, किन्तु उसके जो दोष हैं, उनकी उन्होंने भत्र्सना की। वे दर्शन को केवल मानसिक व्यायाम का साधन नहीं मानते थे। इसलिये उन्होंने जो कुछ लिखा, वह केवल बुद्धि की तुष्टि के लिये नहीं है, बल्कि उससे तात्कालिक समस्याओं का समाधान होता है, जीवन को गति मिलती है, मन को प्रेरणा एवं धार्मिक भावों को स्फूर्ति प्राप्त होती है।

कुछ लोग हिन्दुत्ववादी विचारों को हेय दृष्टि से देखते थे और उनकी आलोचना करते थे। उनकी आलोचना को डॉ. राधाकृष्णन ने चुनौती की तरह लिया और हिन्दुवादिता का गहरा अध्ययन करना आरम्भ कर दिया। वे यह जानना चाहते थे कि वस्तुतः किस संस्कृति के विचारों में चेतनता है और किस संस्कृति के विचारों में जड़ता है। तब स्वाभाविक अंतर्प्रज्ञा द्वारा इस बात पर दृढ़ता से विश्वास करना आरम्भ कर दिया कि भारत के दूरस्थ स्थानों पर रहने वाले गरीब तथा अनपढ़ व्यक्ति भी प्राचीन सत्य को जानते थे। इस कारण उन्होंने तुलनात्मक रूप से यह जान लिया कि भारतीय अध्यात्म काफी समृद्ध है और क्रिश्चियन मिशनरियों द्वारा हिन्दुत्व की आलोचनाएँ निराधार हैं। इससे इन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि भारतीय संस्कृति धर्म, ज्ञान और सत्य पर आधारित है जो प्राणी को जीवन का सच्चा संदेश देती है। भारतीय संस्कृति में सभी धर्मों का आदर करना सिखाया गया है और सभी धर्मों के लिए समता का भाव भी हिन्दू संस्कृति की विशिष्ट पहचान है। इस प्रकार उन्होंने भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान को समझा और उसके काफी नजदीक हो गए।

डाॅ. राधाकृष्णन की महात्मा गांधी से प्रथम भेंट 1915 में हुई थी। उनके विचारों से प्रभावित होकर राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय आन्दोलन के समर्थन में लेख भी लिखे। जुलाई, 1918 में मैसूर प्रवास के समय उनकी भेंट रवीन्द्रनाथ टैगोर से हुई। इस मुलाकात के बाद वह टैगोर से काफी अभिभूत हुए। उनके विचारों की अभिव्यक्ति हेतु डॉ. राधाकृष्णन ने 1918 में ‘रवीन्द्रनाथ टैगोर का दर्शन’ शीर्षक से एक पुस्तक लिखी। इसके बाद उन्होंने दूसरी पुस्तक ‘द रीन आफ रिलीजन इन कंटेंपॅररी फिलॉसफी’ लिखी। इस पुस्तक ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी।

यह डाॅ. राधाकृष्णन की ही प्रतिभा थी कि स्वतंत्रता के बाद इन्हें संविधान निर्मात्री सभा का सदस्य बनाया गया। वह 1947 से 1949 तक इसके सदस्य रहे। उन्हें एक गैर राजनीतिक व्यक्ति होते हुए भी संविधान सभा का सदस्य गया। जवाहरलाल नेहरू चाहते थे कि राधाकृष्णन के संभाषण एवं वक्तृत्व प्रतिभा का उपयोग 14 - 15 अगस्त, 1947 की रात्रि को किया जाए, जब संविधान सभा का ऐतिहासिक सत्र आयोजित हो। राधाकृष्णन को यह निर्देश दिया गया कि वह अपना सम्बोधन रात्रि के ठीक 12 बजे समाप्त करें। उसके पश्चात् संवैधानिक संसद द्वारा शपथ ली जानी थी। उन्होंने ऐसा ही किया और ठीक रात्रि 12 बजे अपने सम्बोधन को विराम दिया। आजादी के बाद उनसे आग्रह किया गया कि वह मातृभूमि की सेवा के लिए विशिष्ट राजदूत के रूप में सोवियत संघ के साथ राजनयिक कार्यों की पूर्ति करें। इस प्रकार विजयलक्ष्मी पंडित का इन्हें नया उत्तराधिकारी चुना गया।

डॉ. राधाकृष्णन को स्टालिन से भेंट करने का दुर्लभ अवसर दो बार प्राप्त हुआ। जब वे विदा होने वाले थे,  उस समय राधाकृष्णन ने स्टालिन के सिर और पीठ पर हाथ रखा। तब स्टालिन ने कहा था ‘तुम पहले व्यक्ति हो, जिसने मेरे साथ एक इंसान के रूप में व्यवहार किया हैं और मुझे अमानव अथवा दैत्य नहीं समझा है। तुम्हारे जाने से मैं दुःख का अनुभव कर रहा हूँ। मैं चाहता हूँ कि तुम दीर्घायु हो। मैं ज्यादा नहीं जीना चाहता हूँ। इस समय स्टालिन की आँखों में नमी थी। फिर छह माह बाद ही स्टालिन की मृत्यु हो गई।

1952 में सोवियत संघ से आने के बाद डॉ. राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति निर्वाचित किए गए। संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति का नया पद सृजित किया गया था। नेहरू जी ने इस पद हेतु राधाकृष्णन का चयन करके पुनः लोगों को चैंका दिया। उन्हें आश्चर्य था कि इस पद के लिए कांग्रेस पार्टी के किसी राजनीतिज्ञ का चुनाव क्यों नहीं किया गया। डॉ. राधाकृष्णन ने अनेक महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे पेरिस में यूनेस्को नामक संस्था की कार्यसमिति के अध्यक्ष भी रहे। यह संस्था ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ का एक अंग है और पूरे विश्व के लोगों की भलाई के लिए अनेक कार्य करती है। वे 1949 से सन् 1952 तक रूस की राजधानी मास्को में भारत के राजदूत पद पर रहे। भारत रूस की मित्रता बढ़ाने में उनका भारी योगदान रहा था। राष्ट्रपति बनने के बाद राधाकृष्णन ने भी पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की भाँति स्वैच्छिक आधार पर राष्ट्रपति के वेतन से कटौती कराई थी। उन्होंने घोषणा की कि सप्ताह में दो दिन कोई भी व्यक्ति उनसे बिना पूर्व अनुमति के मिल सकता है।

इस प्रकार राष्ट्रपति भवन को उन्होंने सर्वहारा वर्ग के लिए खोल दिया। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद की तुलना में राधाकृष्णन का कार्यकाल काफी कठिनाइयों से भरा था। इनके कार्यकाल में जहाँ भारत-चीन युद्ध और भारत-पाकिस्तान युद्ध हुए, वहीं पर दो प्रधानमंत्रियों की पद पर रहते हुए मृत्यु भी हुई। उनके कार्यकाल में ही पंडित नेहरू और शास्त्रीजी की प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए मृत्यु हुई थी। लेकिन दोनों बार नये प्रधानमंत्री का चयन सुगमतापूर्वक किया गया। जबकि दोनों बार उत्तराधिकारी घोषित नहीं था और न ही संवैधानिक व्यवस्था में कोई निर्देश था कि ऐसी स्थिति में क्या किया जाना चाहिए। सचमुच उनका जीवन एक प्रेरणा है, एक रोशनी है, इस रोशनी को साथ रखते हुए आदर्श समाज रचना के संकल्प को सचेतन करने के लिये हम अग्रसर बने, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


UP : जालौन में दलित लड़की की रेप के बाद हत्या

UP : जालौन में दलित लड़की की रेप के बाद हत्या

03-Sep-2019

मीडिया रिपोर्ट 

उत्तर प्रदेश के जालौन में एक 14 वर्षीय दलित लड़की की आंखें फोड़कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि उसके पड़ोसी को अपहरण और हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है।  मृतका के साथ दुष्कर्म हुआ था या नहीं इस बात की पुष्टि के लिए शव परीक्षण रिपोर्ट के आने की प्रतीक्षा की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जालौन जिले के अटा क्षेत्र की रहने वाली लड़की शनिवार शाम को किसी काम के लिए बाहर गई थी, लेकिन फिर घर नहीं लौटी। उसके माता-पिता ने उसी रात पुलिस स्टेशन में एक लापता व्यक्ति की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस के सूत्रों ने बताया कि रविवार दोपहर को पीड़िता का शव एक सुनसान जगह पर मिला। उसके कपड़े फटे हुए थे और उसकी आंखें भी फोड़ीं गई थीं, जिससे हत्या के पहले हुई प्रताड़ना और उसके दुष्कर्म होने की संभावना का संकेत दे रही है।

जालौन के पुलिस अधीक्षक अवदेश सिंह के साथ अपराध स्थल का दौरा करने वाले डीआईजी (झांसी रेंज) सुभाष सिंह बघेल ने कहा कि लड़की के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर रंजीत अहिरवार को आईपीसी की धारा 302 और 363 के तहत गिरफ्तार किया गया है। डीआईजी ने आगे कहा, “संदिग्ध के खिलाफ पहले से ही धारा 376 (दुष्कर्म) का मामला दर्ज है। उस पर एक नाबालिग रिश्तेदार से छेड़छाड़ करने का भी आरोप है, जिसकी शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। हम आगे की कार्रवाई किए जाने से पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट (दुष्कर्म हुआ है या नहीं) की प्रतीक्षा कर रहे हैं। गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है।”

 


अल्लाह को प्यारा है मुहर्रम का महीना !

अल्लाह को प्यारा है मुहर्रम का महीना !

02-Sep-2019

इस्लामी वर्ष यानी हिजरी सन्‌ के पहले महीने मुहर्रम की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने को इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शुमार किया जाता है। अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद ने इसे अल्लाह का महीना कहा है। इस पाक़ माह में रोज़ा रखने की अहमियत बयान करते हुए उन्होंने कहा है कि रमजान के अलावा सबसे अच्छे रोज़े वे होते हैं जो अल्लाह के महीने यानी मुहर्रम में रखे जाते हैं। मुहर्रम के महीने के दसवे दिन को यौमें आशुरा कहा जाता है जिसका इस्लाम ही नहीं, मानवता के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यौमे आशुरा वो दिन है जब सत्य, न्याय, मानवीयता के लिए संघर्षरत हज़रत मोहम्मद के नवासे हुसैन इब्न अली की कर्बला के युद्ध में उनके बहत्तर स्वजनों और दोस्तों के साथ शहादत हुई थी। हुसैन विश्व इतिहास की ऐसी कुछ ऐसे महानतम विभूतियों में हैं जिन्होंने अपनी सीमित सैन्य क्षमता के बावज़ूद आततायी यजीद की विशाल सेना के आगे आत्मसमर्पण करने के बजाय लड़ते हुए अपनी और अपने समूचे कुनबे की क़ुर्बानी देना स्वीकार किया। कर्बला में इंसानियत के दुश्मन यजीद की अथाह सैन्य शक्ति के विरुद्ध हुसैन और उनके थोड़े-से स्वजनों के प्रतीकात्मक प्रतिरोध और आख़िर में उन सबको भूखा-प्यासा रखकर यजीद की सेना द्वारा उनकी बर्बर हत्या के किस्से और शायरी पढ़-सुनकर आज भी सिर्फ मुस्लिमों की नहीं, हर संवेदनशील व्यक्ति की आंखें नम हो जाती हैं। 
कब था पसंद रसूल को रोना हुसैन का 
आग़ोश-ए-फ़ातिमा थी बिछौना हुसैन का 
बेगौर ओ बेकफ़न है क़यामत से कम नहीं 
सहरा की गर्म रेत पे सोना हुसैन का !

मनुष्यता के हित में अपना सब कुछ लुटाकर भी कर्बला में उन्होंने सत्य के पक्ष में अदम्य साहस की जो रोशनी फैलाई, वह सदियों से न्याय और उच्च जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए लड़ रहे लोगों की राह रौशन करती आ रही है। कहा भी जाता है कि 'क़त्ले हुसैन असल में मरगे यज़ीद हैं / इस्लाम ज़िन्दा होता है हर कर्बला के बाद।' इमाम हुसैन का वह बलिदान दुनिया भर के मुसलमानों के लिए ही नहीं, संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। हुसैन महज़ मुसलमानों के ही नहीं, हम सबके हैं। यही वज़ह है कि यजीद के साथ जंग में लाहौर के ब्राह्मण रहब दत्त के सात बेटों ने भी शहादत दी थी जिनके वंशज ख़ुद को गर्व से हुसैनी ब्राह्मण कहते हैं। मरहूम अभिनेता सुनील दत्त इन्हीं हुसैनी ब्राह्मणों के वंशज थे। 
इस्लाम के प्रसार के बारे में पूछे गए एक सवाल के ज़वाब में एक बार महात्मा गांधी ने कहा था - 'मेरा विश्वास है कि इस्लाम का विस्तार उसके अनुयायियों की तलवार के ज़ोर पर नहीं, इमाम हुसैन के सर्वोच्च बलिदान की वज़ह से हुआ।' नेल्सन मंडेला ने अपने एक संस्मरण में लिखा है - 'क़ैद में मैं बीस साल से ज्यादा गुज़ार चुका था। एक रात मुझे ख्याल आया कि मैं सरकार की शर्तों पर आत्मसमर्पण कर इस यातना से मुक्त हो जाऊं, लेकिन तभी अचानक मुझे इमाम हुसैन और करबला की याद आई। उनकी याद ने मुझे वह ताक़त दी कि मैं विपरीत परिस्थितियों में भी स्वतंत्रता के अधिकार के लिए खड़ा रह सकूं।' 

लोग सही कहते हैं कि इमाम हुसैन आज भी ज़िन्दा हैं, मगर यजीद भी अभी कहां मरा है ? यजीद अब एक व्यक्ति का नहीं, एक अन्यायी और बर्बर सोच और मानसिकता का नाम है। दुनिया में जहां कहीं भी आतंक, अन्याय, बर्बरता, अपराध और हिंसा है, यजीद वहां-वहां मौज़ूद है। यही वज़ह है कि हुसैन हर दौर में प्रासंगिक हैं। मुहर्रम उनके मातम में अपने हाथों अपना ही खून बहाने का नहीं, उनके बलिदान से प्रेरणा लेते हुए मनुष्यता,समानता,अमन, न्याय और अधिकार के लिए उठ खड़े होने का अवसर भी है और चुनौती भी। ध्रुव गुप्ता सेवानिवृत्त आईपीएस
{सैयद काशिम लखनऊ }


इरादा इन लोगों को बाहर फेंकने का कभी नहीं था ! NRC याचिकाकर्ता प्रदीप कुमार भुइयां

इरादा इन लोगों को बाहर फेंकने का कभी नहीं था ! NRC याचिकाकर्ता प्रदीप कुमार भुइयां

31-Aug-2019

नई दिल्ली : बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) अपडेशन शुरू करने वाली याचिका के पीछे एक अस्सी साल का बुढ़ा है, जो गुवाहाटी के बाहरी इलाके में एक शांत जीवन व्यतीत करता है। अब तक, 1958 के आईआईटी-खड़गपुर स्नातक प्रदीप कुमार भुइयां ने इस मुद्दे पर साक्षात्कार के अनुरोधों और सवालों से इनकार करते हुए मीडिया से दूर रखा था। इसके बावजूद, असम में, कई लोगों की राय है कि भुवन के बिना, NRC नहीं होता – अधिक से अधिक असमिया समाज की एक लंबी मांग। 84 वर्षीय अभ्यास पर द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हैं।

NRC से आप कैसे जुड़े?

2009 के फरवरी में, एनजीओ असम पब्लिक वर्क्स के अभिजीत शर्मा एक अनुरोध के साथ मेरे पास आए। उन्होंने महसूस किया कि अवैध आव्रजन असम को बहुत लंबे समय से खत्म कर रहा है, और एनआरसी मुद्दा वर्षों से अधर में है। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं NRC को लागू करने के लिए एक याचिका का मसौदा तैयार कर सकता हूं।

मैं एक बात के बारे में निश्चित था कि अगर हमें कुछ स्थापित करना है, तो उसे डेटा और आँकड़ों पर आधारित होना चाहिए। हमें यह दिखाने की जरूरत है कि पिछले कुछ वर्षों में मतदाता कैसे तेजी से बढ़ा है। मैंने उनसे कहा कि मुझे 1971 के बाद से भारत के चुनाव आयोग (ECI) के नवीनतम दस्तावेज़ / प्रकाशन मिलें। अगले दो महीनों में, मैंने इस पर काम किया – दस्तावेजों के माध्यम से जाना, बहुत निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव परिणामों का अध्ययन, 1971 के बाद से चुनाव परिणाम – मेरे घर की बालकनी से जुड़े मेरे कार्यालय के कमरे में बैठे।

जुलाई 2009 में, सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका दायर की थी। अभिजीत चैंबर के अंदर था, मैं बाहर था, वास्तव में प्रार्थना कर रहा था, क्योंकि 60 फीसदी पीआईएल को फेंक दिया गया था! शुक्र है, CJI, याचिका के माध्यम से ब्राउज़ करने के बाद, “सूचना जारी किया…”
अभिजीत और एपीडब्ल्यू याचिका का मुख्य चेहरा बने। आपने पृष्ठभूमि में रहने का विकल्प क्यों चुना?

कोई मेरे पास एक अनुरोध के साथ आया था, और मैंने उस पर कार्रवाई की क्योंकि मुझे इसके कारण के बारे में दृढ़ता से महसूस हुआ। मेरे समय में कई अन्य लोगों की तरह, मैंने असम आंदोलन में भाग लिया। फिर भी दशकों बाद भी, मुझे एहसास हुआ कि यह मुद्दा हल होने से दूर है और राजनीतिक सत्ता प्रवासियों के पास जा रही थी। मैं स्वाभाविक रूप से चिंतित था। इसलिए मैंने जो किया वह सिर्फ समय की जरूरत थी। मैंने कभी भी साक्षात्कार नहीं दिया और न ही बाद में एक समाचार पैनल में उपस्थित हुआ। वह सिर्फ मेरे स्वभाव में नहीं है। मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि मैं अपने राज्य से प्यार करता हूं।

आज हर किसी की नजर असम पर है। NRC ने लाखों लोगों को परेशान किया है, हजारों हिरासत में हैं। क्या आपने कभी मानवीय संकट की भयावहता की कल्पना की है जो सामने आएगी?

अभ्यास इतना व्यापक है कि यह लोगों को प्रभावित करने के लिए बाध्य है। यह इतने बड़े पैमाने पर है कि अगर 1% भी विसंगति है, तो इसका मतलब है कि तीन लाख लोगों के जीवन को प्रभावित करना! पिछले कुछ वर्षों में क्या हुआ, इसके संचालन और कार्यान्वयन में दोषों का पता लगाया जा सकता है। मैं कभी नहीं चाहता कि किसी को सताया जाए – खासकर महिलाओं और बच्चों को। भारत सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेने की जरूरत है। 1985 के बाद से लगातार सरकारों ने इस मुद्दे की अनदेखी क्यों की?

क्या आपको लगता है कि कहानी में असम के पक्ष को उजागर नहीं किया गया है या उस पर ध्यान नहीं दिया गया है?

आजादी के बाद से असम के कारणों को गलत समझा गया है, इसलिए यह कोई नई बात नहीं है। हमें बस अपनी बात स्थापित करनी है – यही कारण है कि NRC हो रहा है। और न ही मैं इस मुद्दे पर लिखने के लिए मीडिया को दोषी मानता हूं – जब इतने सारे लोग प्रभावित होते हैं, तो इस मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण होना स्वाभाविक ही है।

तो NRC से आपको क्या हासिल होने की उम्मीद है?

सरकार पहले ही कह चुकी है कि जो लोग छूट गए हैं वे विदेशियों के न्यायाधिकरण में बहिष्कार की अपील कर सकते हैं। इन लोगों को बाहर फेंकने का इरादा कभी नहीं था। लेकिन जब तक उन्हें विदेशी / भारतीय घोषित नहीं किया जाता, मैं सुझाव देता हूं कि ईसीआई ने पहली बार मतदाताओं की सूची से उनके नाम को हटा दिया। अंततः वर्क परमिट दें, लेकिन निश्चित रूप से उन्हें अस्वीकार करें। यह मुख्य खतरा था – भाषा और संस्कृति और जनसांख्यिकी के अलावा, राजनीतिक नियंत्रण की शुरुआत।

कई असम लोक निर्माण सहित कह रहे हैं कि यह एक गलत NRC है जिसे वे कभी स्वीकार नहीं करेंगे? क्या आपको भी लगता है कि पूरी कवायद बेकार थी?

खैर, यह एक लोकतंत्र है और लोगों की अपनी राय होगी। मैं अभ्यास के कार्यान्वयन के बारे में टिप्पणी करने वाला कोई नहीं हूं, लेकिन सभी को याद करने वाली एक चांदी की परत है: कि पहचान के डर के कारण कई पोस्ट ’71 बांग्लादेशियों ने एनआरसी पर लागू नहीं किया था। हाल ही में आई एक खबर की रिपोर्ट में यह दस लाख लोगों को बताया गया है, लेकिन मेरी गणना के आधार पर, जनगणना के आंकड़ों और 1981 और 2011 के बीच के चुनावी विकास को देखते हुए यह आंकड़ा और भी अधिक है। सरकार को तुरंत इन भूत नागरिकों को ट्रैक करना चाहिए। मेरे लिए, NRC, 31 अगस्त को जो भी फॉर्म लेता है, वह दशकों पुरानी समस्या के समाधान के लिए पहला कदम है।


बिहार में अब पान मसाला की बिक्री पर लगा प्रतिबंध

बिहार में अब पान मसाला की बिक्री पर लगा प्रतिबंध

30-Aug-2019

एजेंसी 

पटना : बिहार में पान मसाला के उत्पादन, बिक्री, भंडारण और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गयी है. राज्य के खाद्य संरक्षा आयुक्त ने जन स्वास्थ्य के हित में जिन पान मसालों पर प्रतिबंध लगाया है, उनमें रजनीगंधा, राज निवास, सुप्रीम पान पराग, पान पराग, बहार, बाहुबली, राजश्री, रौनक, सिग्नेचर, पैसन, कमला पसंद और मधु पान मसाला शामिल हैं. प्रतिबंध लगाये जाने की सूचना सूबे के सभी जिलाधिकारी, आरक्षी अधीक्षक, प्रमंडलीय आयुक्त और सिविल सर्जनों को दिये जाने के साथ इसे प्रभावी तरीके से लागू करने का निर्देश दिया गया है.

खाद्य संरक्षा आयुक्त सह स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार द्वारा लोगों के स्वास्थ्य पर पड़नेवाले दुष्प्रभावों के कारण पान मसाला की खरीद-बिक्री, भंडारण, परिवहन और प्रदर्शन करने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है. शुक्रवार को जारी आदेश में बताया गया है कि राज्य में विभिन्न ब्रांड के पान मसालों के 20 सैंपल की जांच करायी गयी है. इसका विश्लेषण करने पर पाया गया कि इन मसालों में मैग्नेशियम कार्बोंनेट के तत्व पाये गये है. इन तत्वों के सेवन से हाइपरमैगनेसिया और हृदयाघात की आशंका होती है. इसे देखते हुए इन सभी पान मसालों पर तत्काल प्रभाव से एक साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया है. कुछ अन्य ब्रांडों का नमूना जांच के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आने पर उस पर भी कार्रवाई की जायेगी. 


RBI की सालाना रिपोर्ट कह रही है कि नोटबंदी इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक घोटाला है!

RBI की सालाना रिपोर्ट कह रही है कि नोटबंदी इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक घोटाला है!

30-Aug-2019

गिरीश मालवीय (mediavigil)

रिजर्व बैंक की 2018-19 की एन्युअल रिपोर्ट कल आ गयी और इस बात पर पक्की मुहर लग गयी कि नोटबंदी से बड़ा आर्थिक घोटाला भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ.......यह वाकई एक आर्गेनाइज्ड लूट ओर लीगलाइज्ड प्लंडर (क़ानूनी डाका) बनकर सामने आया है - Girish Malviya

मीडिया इस रिपोर्ट की असली बात को छुपा रहा है...इस रिपोर्ट की हेडलाइन मीडिया द्वारा यह बनाई जा रही है कि इस वर्ष बैंकों में हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 6 हजार से अधिक मामले सामने आए है लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि देश में चलन में मौजूद मुद्रा पिछले साल से 17 फीसदी बढ़कर 21.10 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। जबकि नोटबंदी से पहले 15.44 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में थे. ओर साल भर बाद पता चला था कि 15.28 लाख करोड़ के नोट वापस आ गए हैं यानी लगभग 99 प्रतिशत नोट वापस आ गए थे ,

तो कहाँ गया काला धन?

तब सरकार के पिट्ठू बने अर्थशास्त्री यह बता रहे थे कि नोटबन्दी के पहले बड़ी संख्या में करंसी सर्कुलेशन में आ गयी थी जिसे रोका जाना जरूरी था आठ नवंबर, 2016 को की गई नोटबंदी का बड़ा उद्देश्य डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देना और नकदी के इस्तेमाल में कमी लाना बताया गया था अगर यह सच था तो आज नोटबन्दी के 2 साल 9 महीने के बाद साढ़े पंद्रह लाख करोड़ की नकदी 21 लाख करोड़ से अधिक कैसे पुहंच गयी?........

नोटबंदी की घोषणा करने के बाद अपने पहली मन की बात में 27 नवंबर, 2016 को नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी को 'कैशलेस इकॉनमी' के लिए ज़रूरी क़दम बताया था...... आज अगर कैश इतना अधिक बढ़ा है तो कहा गयी आपकी कैशलेस इकनॉमी?......

नकली नोटों पर भी बहुत हल्ला मचाया गया था आज  पता चला है कि  रिजर्व बैंक के मुताबिक 2017-18 ओर 2018-19 में नयी करंसी छापे जाने के बाद भी जाली नोटों को पकड़े जाने का सिलसिला जारी है. इस साल भी 3.17 लाख नकली नोट पकड़े गए है 2000 रुपये के नकली नोट 2018-19 में 22% बढ़ गए। 500 रुपये के नोट्स में यह बढ़ोतरी रिकॉर्ड 121% की है। .........अब कोई नकली नोट कैसे बढ़ गए! यह बात क्यो नही पूछता?..........

नोटबन्दी ने देश की आर्थिक विकास की गति को अवरुद्ध कर दिया  2015-1016 के दौरान जीडीपी की ग्रोथ रेट 8.01 फ़ीसदी के आसपास थी, जो 2016-2017 के दौरान 7.11 फ़ीसदी रह गई और इसके बाद जीडीपी की ग्रोथ रेट 6.1 फ़ीसदी पर आ गई. 2018-19 की आखिरी तिमाही में तो यह दर 5.8 पर आ गयी.......... पिछले साल ही रिजर्व बैंक की एक समिति ने माना था कि नोटबंदी के चलते देश की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ एक फ़ीसदी कम हुई है. यानी आज के दिन तक मोटे तौर पर अर्थव्यवस्था को तीन लाख करोड़ का नुकसान हो चुका है ........

जीडीपी ग्रोथ के गिरने से दोहरा नुकसान हुआ है रिज़र्व बैंक की बैठक में बताया गया था कि नोटबन्दी के पहले मंत्रालय के मुताबिक 500 और 1000 रुपये के नोट 76% और 109% की दर से बढ़ रहे थे, जबकि अर्थव्यवस्था इससे ज्यादा तेजी से बढ रही थी. लेकिन अब अर्थव्यवस्था के बढ़ने की गति धीमी हो गयी है ओर बाजार में मुद्रा की अधिकता हो गयी है तब भी अर्थव्यवस्था कैश क्रंच को झेल रही है.......... 21 लाख करोड़ की मुद्रा होने के बाद भी लोगो की जेब मे पैसा नहीं है लेकिन तब साढ़े 15 लाख करोड़ रुपये होने पर भी सबकी जेब मे पैसा था!.......

RBI के निदेशकों ने उस वक्त ही कह दिया था कि था कि काला धन कैश में नहीं, सोने या प्रॉपर्टी की शक्ल में ज़्यादा है और नोटबंदी का काले धन के कारोबार पर बहुत कम असर पड़ेगा. इतना ही नहीं, निदेशकों का यह भी कहना था कि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा.

आज वही हो रहा है इस रिजर्व बैंक की इस वार्षिक रिपोर्ट में साफ साफ लिखा है कि पिछले 10 साल में रिजर्व बैंक के बैलेंसशीट की औसत वार्षिक विकास दर 9.5% रही है जबकि 2013-14 से 2017-18 के पाँच साल के दौरान इसकी औसत विकास दर 8.6% रही। समिति ने कहा है कि बैलेंसशीट की विकास दर में गिरावट का 2016-17 में की गई नोटबंदी थी। 

15 अगस्त, 2017 को अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा था कि 'तीन लाख करोड़ रुपए जो कभी बैंकिंग सिस्टम में नहीं आता था, वह आया है' .............अगर वह पैसा वापस आ ही गया है तो मोदी जी आपको रिजर्व बैंक के 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपये हड़पने की जरूरत क्यों पड़ रही है ?..........

नोटबन्दी के बाद देश के टैक्स कलेक्शन पर भी विपरीत असर पड़ा  केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अपने आंकड़ों में बताया था कि कुल कर-संग्रह में प्रत्यक्ष कर पिछले पांच सालों में सबसे कम वित्त वर्ष 2016-17 में रहा है, इस साल पेश कैग की रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि पिछले दो साल में भारत मे टैक्स कलेक्शन की गति अवरुद्ध हो गयी है........

अर्थव्यवस्था तेजी से बर्बाद हो रही है लेकिन मुख्य मीडिया की औकात नही है कि इस बर्बाद हो चुकी अर्थव्यवस्था के असली कारण नोटबन्दी पर बहस कर ले............

अब अंत मे आप मोदी जी के उस भाषण को याद कर लीजिए जो उन्होंने नोटबन्दी के तुरंत बाद किये गए जापान दौरे से लौटने पर दिया था ......."भाइयों बहनों, मैंने सिर्फ़ देश से 50 दिन मांगे हैं. 50 दिन. 30 दिसंबर तक मुझे मौक़ा दीजिए मेरे भाइयों बहनों. अगर 30 दिसंबर के बाद कोई कमी रह जाए, कोई मेरी ग़लती निकल जाए, कोई मेरा ग़लत इरादा निकल जाए. आप जिस चौराहे पर मुझे खड़ा करेंगे, मैं खड़ा होकर..देश जो सज़ा करेगा वो सज़ा भुगतने को तैयार हूं.".............

साभार : MEDIAVIGIL


राजस्थान के बीजेपी विधायक का अजीब बयान, कहा- जब हम विपक्ष में होते हैं तो जूते के जोर पर भी काम करवाना जानते हैं'

राजस्थान के बीजेपी विधायक का अजीब बयान, कहा- जब हम विपक्ष में होते हैं तो जूते के जोर पर भी काम करवाना जानते हैं'

29-Aug-2019

जयपुर। राजस्थान में भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने अजीब बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब सरकार में होते हैं तो कलम की ताकत से काम होते हैं और जब विपक्ष में होते हैं तो हम जूते के ज़ोर पर भी काम करवाना जानते हैं।विधायक सराफ का यह बयान सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। 

दरअसल, राजस्थान की राजधानी जयपुर में मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक कालीचरण सराफ के नेतृत्व में गुरुवार को करतारपुरा नाले पर विशाल धरना दिया गया। धरने पर बीजेपी मीडिया प्रकोष्ठ के सम्पर्क प्रमुख आनंद शर्मा सहित क्षेत्र के आसपास की कॉलोनियों के विकास समितियों के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और आमजन मौजूद रहे। सुबह 11.30 बजे शुरू हुआ धरना कुछ ही देर में समाप्त हो गया। क्योंकि जेडीए और नगर निगम के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लिखित में मांगें मानने का आश्वासन विधायक को सौंप दिया। 

मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 57 और 58 के बीच करतारपुरा नाले को पक्का करने, जगह-जगह हो रहे कटावों को दुरुस्त करने, नाले पर अतिक्रमण हटाने, भाजपा सरकार द्वारा शुरू किए गए सीवरेज लाइन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के कार्य को दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर विधायक ने करतारपुरा नाले के पास जन सुविधा केंद्र के सामने धरना दिया। 


पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सचिवालय के पास बिजली का बिल भरने के लिए नहीं है पैसे, कटेगी बिजली

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सचिवालय के पास बिजली का बिल भरने के लिए नहीं है पैसे, कटेगी बिजली

29-Aug-2019

मीडिया रिपोर्ट 

इस्लामाबाद: दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली की स्थिति कितनी गंभीर है, इसे इसी से समझा जा सकता है कि बिल नहीं चुकाने की वजह से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सचिवालय की बिजली काटे जाने की नौबत आ गई है.

कश्मीर मामले में भारत के साथ ‘अंतिम युद्ध’ की धमकियां देने में व्यस्त पाकिस्तानी शासकों के पास शायद अपने ही दफ्तर का बिल भरने का समय नहीं है या पैसा नहीं है. इसी वजह से इस्लामाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी को प्रधानमंत्री सचिवालय को बिजली काटे जाने का नोटिस भेजने पर मजबूर होना पड़ा है.

‘एक्सप्रेस न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री सचिवालय पर इस्लामाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी का 41 लाख 13 हजार 992 रुपये का बिल बकाया है. बीते महीने का बिल 35 लाख से अधिक का है जबकि इससे पहले का पांच लाख 58 हजार का बकाया है.

कंपनी के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री सचिवालय द्वारा नियमित रूप से बिजली का बिल नहीं भरा जाता. कभी बिल का पैसा जमा कराया जाता है और किसी महीने नहीं कराया जाता है. इसी वजह से इस पर बकाया हो गया है जिसे जमा नहीं कराए जाने पर बिजली काट दी जाएगी.


लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर केला बेचने पर लगा बैन

लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर केला बेचने पर लगा बैन

28-Aug-2019

लखनऊ। अब आपके चहेते चारबाग रेलवे स्टेशन पर केला नहीं बिकेगा और अगर कोई उसे बेचेते पाया गया तो उस पर तगड़ा जुर्माना लगेगा, दरअसल लखनऊ रेलवे प्रशासन ने चारबाग स्टेशन पर केले की बिक्री पर रोक लगा दी है, इसके पीछे रेलवे अधिकारियों ने दलील ही है कि केलों के छिलके से स्टेशन पर गंदगी फैल रही थी, इसलिए इसकी बिक्री ही बंद करवा दी गई। 

मालूम हो कि चारबाग स्टेशन से रोजाना 280 से अधिक ट्रेनों का आना-जाना होता है, इनमें सफर करने वाले सवा लाख से अधिक यात्रियों का सबसे पसंदीदा फल केला है लेकिन अब इसकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है, रेलवे प्रशासन ने कहा है कि स्वच्छता से समझौता नहीं किया जा सकता है इसी वजह से केले बेचेने पर रोक लगाई गई है, हालांकि विक्रेता और यात्री इस कदम से खुश नहीं दिखाई दे रहे हैं। 


पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा - कर्नाटक में कभी भी चुनाव हो सकते हैं

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा - कर्नाटक में कभी भी चुनाव हो सकते हैं

27-Aug-2019

दिल्ली : मीडिया रिपोर्ट 

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा है कि पार्टी को मजबूत बनाया जाए, क्योंकि चुनाव कभी आ सकते हैं. सिद्धारमैया के मुताबिक किसी को विश्वास नहीं है कि भाजपा के नेतृत्व वाली बीएस येदियुरप्पा सरकार ज्यादा समय तक चलेगी. डेक्कन क्रॉनिकल की खबर के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि येदियुरप्पा सरकार ज्यादा से ज्यादा एक साल तक चल सकती है. इस दौरान कभी भी मध्यावधि चुनाव हो सकते हैं, लिहाजा कांग्रेस कार्यकर्ता इसकी तैयारी शुरू कर दें.

खबर के मुताबिक कर्नाटक के हुबली में पत्रकारों से बातचीत में सिद्धारमैया ने कहा, ‘अगर वे बागियों (कांग्रेस-जेडीएस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए 17 विधायक) के साथ मिल कर सरकार बनाते हैं तो क्या वह आखिर तक टिक सकती है? वे कितने समय तक ऐसा कर पाएंगे? मुझे नहीं लगता कि वे एक साल भी रह पाएंगे, यह बहुत बड़ी बात है. वे लोगों के जनादेश से सत्ता में नहीं आए. इसके लिए उन्होंने खरीद-फरोख्त की. जनता उन्हें सबक सिखाएगी.’

इस बीच, खबर यह भी है कि कर्नाटक सरकार के कैबिनेट विस्तार के बाद दिए गए मंत्रालयों और विभागों से नए मंत्री खुश नहीं हैं. इसे लेकर भाजपा के अंदर ही विरोध शुरू हो गया है. खबर के मुताबिक चिकमगलूर के विधायक सीटी रवि ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर अपना विरोध दर्ज कराया है. वहीं, पूर्व भाजपा सरकारों में उप-मुख्यमंत्री रहे केएस ईश्वरप्पा और आर अशोक को इस बार यह पद नहीं दिया गया. इसे लेकर भी पार्टी के लोग असंतुष्ट दिखाई दे रहे हैं. इन दोनों नेताओं के समर्थकों ने इसे उनका अपमान बताया है और विरोध करने की चेतावनी दी है.


6 महीने बाद ही अभिनेत्री अर्शी खान ने छोड़ी कांग्रेस

6 महीने बाद ही अभिनेत्री अर्शी खान ने छोड़ी कांग्रेस

24-Aug-2019

बिग बॉस 11 फेम अर्शी खान किसी ने किसी वजह से सुर्खियों में बनी रहती हैं. इस साल की शुरुआत में ही उन्‍होंने कांग्रेस पार्टी का दामन थामा था. उन्‍हें एक बड़ा पद भी दिया गया था. पार्टी ने उन्‍हें मुंबई प्रदेश माइनॉरिटी वेलफेयर कमेटी का वाइस प्रेसिडेंट बनाया था लेकिन अब अचानक अर्शी ने कांग्रेस पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है. अभिनेत्री ने इसके पीछे एक बड़ी वजह बताई है. बता दें कि अर्शी ने इस साल फरवरी महीने में कांग्रेस ज्‍वाइन की थी. उन्‍होंने यह भी कहा था कि वो जनरल इलेक्‍शंस में भाग लेंगी. 

लेकिन अब अर्शी खान ने 6 महीने बाद ही कांग्रेस पार्टी से इस्‍तीफा दे दिया है. इसकी जानकारी अभिनेत्री ने खुद ट्विटर पर दी है. उन्होंने लिखा,' इंडस्‍ट्री में बढ़ते हुए मेरे काम की वजह से राजनीति में योगदान देना बहुत मुश्किल हो गया है.' अर्शी खान ने लिखा,' मैं भारतीय नेशनल कांग्रेस पार्टी से इस्‍तीफा देती हूं. पार्टी ने मुझपर विश्‍वास किया और इस समाज की देखभाल करने का मौका दिया, इसके लिए मैं दिल से उनका शुक्रिया अदा करना चाहती हूं. मैं एक जिम्‍मेदार भारतीय नागरिक होने के नाते हमेशा इन बातों का समर्थन करती रहूंगी.'

अर्शी खान ने लिखा,' फिल्‍मों, वेब-सीरीज और म्‍यूजिक वीडियो प्रोडक्‍शन से की गई कमिटमेंट्स के अलावा मेरे इस्‍तीफा देने का कोई और कारण नहीं है. मैं एक अभिनेत्री, एंटरटेनर के तौर पर लोगों की बीच पहचान बनाने का इंतजार कर रही हूं. आपके प्‍यार और सपोर्ट के लिए शुक्रिया.' बता दें कि अर्शी खान ने बिग बॉस 11 में आने के बाद खासा लोकप्रियता हासिल की थी. वे आखिरी दिनों तक बिग बॉस के घर में टिकी थीं. बिग बॉस में आने से अर्शी खान अपनी कंट्रोवर्शियल लाइफ को लेकर चर्चा में रही थीं. 


एक शख्स के लिए भिड़ी तीन औरते, थाने में बोलने लगी ये मेरा पति है...नहीं मेरा है

एक शख्स के लिए भिड़ी तीन औरते, थाने में बोलने लगी ये मेरा पति है...नहीं मेरा है

24-Aug-2019

भिवाड़ी। राजस्थान के भिवाड़ी में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसे सुनकर पुलिसकर्मी भी हैरत में पड़ गए। दरअसल, थाने में एक 40 वर्षीय व्यक्ति पर तीन महिलाएं अपना हक जमाने के लिए पहुंच गईं। दो महिलाओं ने उसे अपना पति बताया, लेकिन कोई भी महिला शिकायत देने के लिए राजी नहीं हो रही थी। ये देखकर भिवाड़ी के फूलबाग थाने में मौजूद पुलिस भी परेशान हो गई। 

भिवाड़ी की रहने वाली बंटी देवी नाम की एक महिला 40 वर्षीय हरिओम नाम के व्यक्ति को लेकर थाने पहुंची। बंटी ने पुलिस को बताया की तीन वर्ष पहले उसके पति की मौत हो गई थी। जिसके बाद हरिओम से उसकी मुलाकात हुई। दोनों ने परिजनों के सामने शादी कर ली थी। बंटी ने बताया कि हरिओम ने अपनी पहली पत्नी को तलाक दे दिया है। महिला ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से हरिओम उससे झगड़ा कर बेटे के पास गुरुग्राम चला जाता है। जहां उसका बेटा एक महिला के पास रहता है। इस बात को लेकर हरिओम और उसका झगड़ा चल रहा है। इसकी शिकायत देने वह उसे थाने लेकर आई है। बंटी ने पुलिस से कहा कि वह उसके साथ रहे नहीं तो उसे धोखाधड़ी के आरोप में जेल में डाले। 

मंजू और सुमन भी पहुंची थाने

दोनों अभी थाने में ही मौजूद थे तभी गुरुग्राम की रहने वाली मंजू नाम की महिला भी थाने में पहुंच गई। मंजू ने बताया कि वह हरिओम और उसकी पहली पत्नी सुमन को पिछले 10-15 सालों से जानती है। उसने बताया कि हमारे परिवार ने हरिओम के बुरे वक्त में उसकी मदद की थी। सुमन ने अलग होने के बाद से ही उसका बड़ा बेटा उसके पास ही रह रहा था। इसलिए हरिओम उसके घर आता-जाता है। अभी यह मामला चल ही रहा था तभी हरिओम की पहली पत्नी सुमन भी थाने आ पहुंची। उसने पुलिस के सामने दावा किया कि हरिओम ने उसे तलाक नहीं दिया है। उसने झूठ बोलकर दूसरी महिला से शादी कर ली है। 

सुमन ने कहा कि तलाक के सबूत को वह थाने में पेश करे। परिवार को उसकी जरूरत है वह आकर साथ रहे। अगर वह साथ नहीं रह सकता तो हमें गुजारे के लिए पैसे दे। जब पुलिस विवाद को नहीं सुलझा पाई तो उसने तीनों से शिकायत देने को कहा। इस बात पर गुरुग्राम निवासी महिला मंजू व पहली पत्नी सुमन एक पाले में हो गईं। मंजू ने कहा कि हरिओम अगर अपनी पत्नी व बेटे के साथ रहेगा तो उसे कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन अगर वह भिवाड़ी निवासी महिला के पास रहेगा तो वह उसका सारे हिसाब को चुकता कर दे। फूलबाग थाने के एसएचओ बालाराम ने बताया कि फिलहाल हरिओम को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। 

साभार : hindi.oneindia से 


भारत को हमले की धमकी देने वाले पाकिस्तान के रेल मंत्री की लंदन में पिटाई

भारत को हमले की धमकी देने वाले पाकिस्तान के रेल मंत्री की लंदन में पिटाई

23-Aug-2019

लंदन : भारत सरकार ने जब अनुच्छेद 370 को खत्म किया, तो भारत को परमाणु हमले की धमकी देने वाले पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद की लंदन में जमकर पिटाई की गई है। भीड़ ने उन्हें लात-घूसों से पीटा और अंडे फेंक कर मारे। हमलावरों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है और रशीद की पिटाई करने के बाद वे मौके से फरार हो गए।

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, अवामी मुस्लिम लीग के प्रमुख व रेल मंत्री शेख रशीद पर लंदन में उस समय हमला किया गया जब वह एक होटल में पुरस्कार समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे। हमलावर शेख रशीद को पीटने के बाद वहां से भाग निकले। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से संबद्ध पीपुल्स यूथ ऑर्गनाइजेशन यूरोप के अध्यक्ष आसिफ अली खान और पार्टी की ग्रेटर लंदन महिला शाखा की अध्यक्ष समाह नाज ने ली है।

रेल मंत्री शेख रशीद ने कुछ दिन पहले ही पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी के खिलाफ अपशब्द कहे थे, जिसके बाद से पीपुल्स यूथ ऑर्गनाइजेशन यूरोप और ग्रेटर लंदन महिला शाखा के सदस्य उनसे नाराज चल रहे थे। हालांकि उन्होंने रशीद पर केवल अंडा फेंकने की बात कही है।


बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के सम्मान में दी जा रही थी 21 बंदूकों की सलामी, लेकिन एक भी बंदूक नहीं चली

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के सम्मान में दी जा रही थी 21 बंदूकों की सलामी, लेकिन एक भी बंदूक नहीं चली

22-Aug-2019

तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे डॉ. जगन्नाथ मिश्रा का 19 अगस्त को दिल्ली में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनका बुधवार को उनके गृह जिले सुपौल में राजकीय सम्‍मान के साथ अंतिम संस्‍कार किया गया। अंतिम विदाई के समय जगन्नाथ मिश्रा को राजकीय सम्मान के साथ 21 बंदूकों की सलामी दी जानी थी। लेकिन सलामी के दौरान पुलिसकर्मियों की 21 बंदूकों में से एक भी बंदूक नहीं चलीं।

यह देखकर प्रशासनिक अमले के होश फाख्ता हो गए। हैरान करने वाली बात तो यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के साथ ही जिले के तमाम वरीय पुलिस प्रशासन के पदाधिकारी भी मौजूद थे। इस पूरे वाक्य का एक वीडियो भी सामने आया है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान पुलिस की एक भी रायफल नहीं चलने के इस मामले को पुलिस प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इस बारे में किसी भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कुछ भी नहीं कहा है। सुपौल के पुलिस अधीक्षक मृत्युंजय चौधरी ने मात्र इतना कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जगन्नाथ मिश्र का पार्थिव शरीर बलुआ पहुंचा, जहां पर बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। इसके बाद पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। राजकीय सम्मान के वक्त एक भी गोली न चल पाने के बाद बिहार पुलिस की लोग जमकर खिंचाई करने में लगे हैं।

बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र का लंबी बीमारी के बाद 19 अगस्त को को दिल्ली में निधन हो गया था। वह 82 वर्ष के थे। तीन बार बिहार के सीएम रहे मिश्रा के निधन पर राजनीतिक हलके में शोक की लहर है। सीएम नीतीश कुमार ने राज्य में तीन के दिन राजकीय शोक का ऐलान किया था। वह कैंसर से पीड़ित थे और दिल्ली में उनका इलाज चल रहा था।

यहाँ दिए गए लिंक पर क्लिक कर वीडियो देखे https://twitter.com/i/status/1164150678027145216

साभार : Jantakareporter.com से 

यह खबर मूल रूप से जनता का रिपोर्टर न्यूज में प्रकाशित हुआ है 


प्रयागराज: युवती से दरिंदगी करने के बाद दुपट्टे से गला दबाकर की हत्या

प्रयागराज: युवती से दरिंदगी करने के बाद दुपट्टे से गला दबाकर की हत्या

22-Aug-2019

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक युवती से रेप के बाद उसकी हत्या कर शव को हाईवे किनारे फेंके जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कातिलों ने उसके दोनों हाथ बांध दिए थे और शव को धान के खेत में फेंक दिया था। पुलिस की मानें तो युवती की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है। एसपी गंगापार की मानें तो युवती के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही रेप की पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल युवती की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे है। इसके लिए उसके फोटो पूरे प्रदेश में भेजे गए है।


छत्तीसगढ़ में 40 लारव लोग सिकलसेल से प्रभावित

छत्तीसगढ़ में 40 लारव लोग सिकलसेल से प्रभावित

22-Aug-2019

कृष्ण देव सिंह (बुधवार समाचार)

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पीढ़ी दर पीढ़ी सिकलसेल की अनुवांशिक बीमारी से जुझती चली आ रही है.इसका असर यूँ तो कुछ न कुछ सभी जगह विराजमान है परन्तु राज्य सरकार ने इसकी गंभीरता को देखते हुए 22 जिला अस्पतालों में इसके उपचार और परीक्षण के लिए नये सेंटर खोलने की स्वीकृति दी है. वर्तमान में राज्य के पाँच मेडिकल कालेजों में इसके सेंटर संचालित हैं. केन्द्र सरकार द्वारा जारी दिव्यांगता सूची में सिकलसेल को भी शामिल किया गया है किन्तु सिकलसेल पीड़ितों को अभी दिव्यागंता प्रमाण पत्र मिलने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. नाम मात्र लोगों को ही दिव्यागंता प्रमाण पत्र जारी किये गये हैं। झ्स रोग से पीड़ित लोग रोज मौत और जिन्दगी के बीच झुलते रहते हैं

सिकल सेल एक अनुवांशिक बीमारी (Genetic Disorder) है। जिसका आधुनिका चिकित्सा विज्ञान में कोई निश्चित ईलाज नहीं है। यद्यपि यह रोग किसी भी स्थान पर किसी भी जाति में हो सकता है लेकिन अमुमन सिकल सेल रोग कुछ खास इलाको में रहने वाली कुछ खास जातियों में ज्यादा पाया जाता है। यह माता-पिता के जीन्स से पुश्तैनी तौर से मिलता है। हलांकि यह कहना मुश्किल है कि यह बीमारी कब और कहाँ से आई। लेकिन यह देखा गया है कि यह बीमारी उस भू-भाग पर ज्यादा है जहाँ मलेरिया बहुतायत में रहता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मलेरिया पैरासाइड़ से बचने के लिए लाल रक्तकणों ने यह रक्षात्मक रूप (mutation)धारण किया होगा ।

छत्तीसगढ़ में सिकलसेल के मरीज कितना है कहना मुश्किल है क्योकि इसका अधिकृत आंकड़ा शासन के पास भी नही है परन्तु माना जा रहा है कि 40 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। ढाई करोड़ से ज्यादा आबादी वाले राज्य में लगभग 15% लोग सिकलसेल से पीड़ित हैं, जिसका कोई इलाज नहीं। 28 जिलों वाले राज्य में ज्यादातर यह बीमारी साहू, कुर्मी और आदिवासी समुदाय के लोगो में पायी जाती है। उपचार के साथ -साथ सामाजिक जागरूकता से जुड़ी इस बीमारी में विवाह के समय जन्मकुंडली से ज्यादा रक्त कुंडली मिलाने का महत्व है। सिकल सेल का प्रसार संतान उत्पत्ति से होता है इसलिए विवाह पूर्व जाँच कर लेना उचित होगा। सिकल का रोगी या कैरियर विवाह कर सकता है ,लेकिन उसे विशेष ध्यान रखना होगा कि जिससे उसका विवाह हों रहा है उसके सिकल जीन की स्थिति क्या है । यदि दो सिकलसेल कैरियर आपस में विवाह करते हैं तो उनकी संतानें सिकलिंग से पीड़ित होगी। ऐसे बच्चे लगातार उपचार के बावजूद 20-25 साल तक अधिकतम जीवित रह पाते हैं।

छत्तीसगढ़ की विधानसभा में 15 वर्ष पूर्व 27 मई 2004 को सिकल रोग नियंत्रण के लिए एक अशासकीय संकल्प रखा गया था जो सर्वसम्मति से पास हुआ। यह संकल्प राज्यसभा, लोकसभा, योजना आयोग तथा भारत के राष्ट्रपति से होते हुए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र संघ तक पंहुचा इसके बाद प्रदेश में कुछ इंस्टीटयूट खुल गया पर 154 से ज्यादा पद आज भी खाली है। सिकलसेल की बीमारी की व्यापकता और गंभीरता के बावजूद, राज्य में उपलब्ध संसाधन और उपचार, परामर्श सहायता केन्द्रों की संख्या और सक्रियता को लेकर काफी आलोचनाएँ होती रहती हैं पर अभी तक कोई समुचित व्यवस्था नही हो पाई है।

सिकलसेल इंस्टीट्यूट की स्थापना 2013 में हुई थी, और इसके भीतर 180 जॉब पोजिशन हैं, लेकिन 154 पद खाली रह गए हैं। भरे हुए पदों में से अधिकांश चिकित्सा कर्मियों के बजाय कथित तौर पर प्रशासनिक हैं। सिकलसेल रोग के प्रभावों को रोकने के प्रयास हाल ही में स्थापित किए गए हैं, हालांकि उपचार की दिशा में ये प्रयास काफी हद तक अनुत्पादक हैं। लेकिन अनुपादक  को उत्पादक बनाने की जरूरत हैा इसके लिए राज्य सरकार की स्वास्थ विभाग को ही आवश्यक कदम उठाने होगें जो फिलहाल सोया हुआ है ।

सिकल सेल मिशनमोड प्रोजेक्ट,संचालक डॉ.पी के पात्रा ने बताया कि सिकल सेल के मरीज दो प्रकार के होते है 1: सिकल वाहक (केरियर)  ( AS) और दूसरे सिकल पीड़ित रोगी  ( SS)'I सिकल वाहक में सिकल का एक जीन होता है लेकिन रोग के कोईं लक्षण नही होते । इन्हें किसी तरह की इलाज की आवश्यकता नहीं होती ये सामान्य जीवन व्यतीत करते है और इन्हें स्वयं भी मालूम नही होता कि वे अपने रक्त मे सिकल का जीन धारण करते हैं और वे अनजाने में ही सिकल के वाहक बन जाते हैं। सिकल रोगी को सिकल सेल सफरर या होमोजायगोट्स.भी कहते है। जब दोनों पालकों से असामान्य जीन्स (SS) मिलते हैं तो संतान सिकल रोगी / सफरर होता है। इसे. सिकल सेल एनीमिया रोग कहा जाता है और झ्स स्थिति में रोग के सभी लक्षण मिलते हैं।

इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष डॉ ए.आर. दल्ला का कहना है कि इस विषय को लेकर अगर सरकार गंभीर है तो सरकार को विभिन्न अभियानों का प्रबंध करना होगा, जनजागरण अभियान चलाकर सिकल रोग सम्बंधित भ्रांतियों को दूर करना होगा। सभी राष्ट्रों से स्वास्थ सेवा का आग्रह करना होगा। संयुक्त राज्य संघ ने यह भी आग्रह किया कि अपने देश में राष्ट्रीय सिकलसेल नियंत्रण निवारण कार्यक्रम प्रारम्भ करते हुए विशेष सिकलसेल नियंत्रण का गठन करें। 

पीढ़ियों तक चलती है यह बीमारी 

एक जानकारी के अनुसार रायपुर की गोंड जनजाति में लगभग 20 प्रतिशत बीमारी का प्रचलन है। क्षेत्र में कुर्मी और साहू जातियों में यह रोग पाया जाता हैं, जिनकी संख्या 20 से 22 प्रतिशत के बीच है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी उच्च स्तर पर सिकलसेल रोग मौजूद है। सिकलसेल रोग एक आनुवंशिक रोग है जो रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। यदि माता-पिता इस रोग से पीड़ित हैं तो बेशक विरासत में यह रोग शिशु को मिलेगा. बरसात के दिनों में तो सिकलसेल के रोगी दर्द के मारे तड़पते रहते है । झ्स रोग से पीड़ित व्यक्ति की आयु कम हो जाती है और इससे मृत्यू भी हो जाती है।

सिकल सेल एनीमिया में विरासत में मिला रोग एक सिकल आकार बनाता है। शरीर की छोटी रक्त वाहिनियों में यह सिकल नुकीला और कड़ा होकर फंस जाता है। रक्त और ऑक्सीजन के मार्ग में अवरोध होने से दर्द होता है जिससे रोगी चिल्ला उठता है इसे सिकल क्राइसेस कहते हैं। डिस्क के आकार की रक्त कोशिकाएं लचीली होती हैं, जो बिना किसी समस्या के रक्त वाहिकाओं के अलग-अलग व्यास को नेविगेट करने में सक्षम होती हैं। सिकल कोशिकाओं में इस लचीलेपन की कमी होती है, इससे रक्त वाहिका के बंद होने की संभावना बढ़ जाती है। लाल रक्त कोशिकाओं की कमजोर स्थिति के कारण मलेरिया परजीवी द्वारा आक्रमण किए जाने पर कोशिकाएं फट जाती हैं। यह कट पैरासाइट के प्रतिकृति चक्र को छोटा करता है और इस तरह मानव मेजबान को मलेरिया संक्रमण से बचाता है। 

  उपचार ना हुआ तो हो सकती है मौत 

सिकलसेल की यह बीमारी भारत सहित अफ्रीका और दक्षिण एशिया के कई क्षेत्रों में प्रचलित है। डॉ. दल्ला का कहना है की सिकलसेल घातक हो सकता है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सिकलसेल डिजीस यानी एससीडी को बचपन के दौरान बीमारी का उपचार ना किया जाये, तो रोगी मर सकता है. यदि इलाज किया जाता है तो सबसे अच्छा परिणाम स्वरुप संभावित बीस वर्षों का जीवनकाल होगा। भारत के सिकलसेल संगठन के डॉक्टरों का कहना है कि एससीडी हर साल अकेले छत्तीसगढ़ में 10,000 बच्चों का जीवन खतरे में होने का दावा करता है । छत्तीसगढ़ के सिकलसेल इंस्टिट्यूट के संचालक डॉ अरविंद नेरलवार ने बताया था कि छत्तीसगढ़ में सरकारी आँकड़ों मे 9.2 % लोग इस बीमारी से कैरियर के रूप पीड़ित है और 0.9 लोग इस बीमारी से गंभीर रूप से पीड़ित हैं किन्तु यह बीमारी कोई बैक्टीरिया या वायरस से होने वाली बीमारी नहीं है न ही कोई छुआछूत की बीमारी न ही एड्स की तरह एक दूसरे में फैलने वाली बीमारी है। यह कोई सामजिक दोष भी  नहीं है, इसलिए इसे छुपाने की आवश्यकता भी नहीं है. 

रोगियों की जीवरेखा बढ़ रही है

हालांकि इस रोग से डरने की आवश्यकता नहीं है. इसका कोई ठोस उपचार तो नहीं लेकिन हाईटोसियूरिया एक मात्र ऐसी औषधि है जो जीवन बचाने में नहीं लेकिन जीवन की उम्र बढ़ाने में सहयोग प्रदान करती है। इस औषधि के उपचार से  बहुत से रोगियों की जीवन रेखा 15-20 साल से बढ़कर 20-30 साल की हो गयी है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की है कि राज्य के पाँच मेडीकल कालेज जहाँ पर इसके सेंटर हैं उसके अलावा बाक़ी 22 जिला अस्पतालों में भी इस रोग के लिए मेडिकल सेंटर्स खोले जाएंगे। इन सेंटरों में सही तरीके से उपचार के लिए लैब तकनीशियन और काउंसलर को भी अप्पॉइंट किया जाएगा। देखना है कि मुख्यमंत्री जी की घोषणा कब तक पुरा हो पाता है ताकि प्रदेश की जनता को इसका लाभ मिलना शुरू हो सके 

( लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं अक्सर राजनीतिक, सामाजिक और समसामयिक मुद्दों पर वे लिखते रहते हैं )

 


उत्तराखंड में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री ले जा रहा हेलीकॉप्टर क्रैश

उत्तराखंड में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री ले जा रहा हेलीकॉप्टर क्रैश

21-Aug-2019

नई दिल्ली। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री ले जा रहा हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है। बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित उत्तरकाशी के लिए राहत सामग्री लेकर ये हेलीकॉप्टर उड़ा था। हेलीकॉप्टर उत्तरकाशी जिले में राहतकार्य में जुटा था। हेलीकॉप्टर राहत सामग्री लेकर मोरी से मोलदी जा रहा था। इसमें तीन लोग पायलट राजपाल, को-पायलट कापताल और एक स्थानीय शख्स रमेश सावर सवार थे। क्रैश के पीछे की क्या वजहें और हेलीकॉप्टर में सवार पायलट और दूसरे लोगों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। 


लूटी जा रही है जनता की कमाई

लूटी जा रही है जनता की कमाई

20-Aug-2019

क्या कोई है जो विरोध प्रदर्शन करे, धरना दे, टीवी पर डिबेट करें, नेता, मुल्ला, पत्रकार, सब कहां हैं जो हर बात पर टीवी पर दिखाई देते थे। आज पेट्रोल, डीजल की कीमतों में वृद्धि होने पर कोई आवाज नहीं। जबकि इस वृद्धि से हर सामान के दामों में वृद्धि होगी। उत्तर प्रदेश में मंगलवार से पेट्रोल की कीमत में 2.50 रुपये/लीटर और डीजल में 1 रुपये/लीटर की वृद्धि हो गई। प्रदेश सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ा दिया है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद वाणिज्य कर विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।

कैबिनेट के पास जनता की भलाई के लिए कोई काम नहीं है। कब तक जनता को लूटा जायेगा। रोजगार मिल नहीं रहा है कम्पनी कर्मचारियों की छंटनी कर रही है। बहुत सी कम्पनीज़ बंद होने की कगार पर हैं। ऊपर से पेट्रोल डीजल के दाम बढने से जनता मंहगाई की मार नहीं बर्दाश्त कर पायेगी। नया आदेश सोमवार रात 12 बजे से लागू हो गया है. अभी तक पेट्रोल पर 14.70 रुपये/लीटर और डीजल पर 7.68/प्रति लीटर की दर से वैट लगता था. लेकिन अब कीमतें तय करने के लिए नया फॉर्म्यूला बनाया गया है।  वाणिज्य कर अधिकारियों के अनुसार, वैट में कमी की वजह से अक्टूबर से लेकर अब तक सरकार को पेट्रोल-डीजल से मिलने वाले राजस्व में करीब 3,000 करोड़ रुपये की कमी आई है। राज्य सरकार को इस फैसले से राजस्व में 2500 करोड़ रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी की उम्मीद है। सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा वैट से आता है। यही वजह है कि पिछले साल कम किए वैट को फिर बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

सवाल यह भी है कि प्राप्त राजस्व से सरकार जनता के लिए कौन सा भलाई का काम कर रही है। भारत की जनता टैक्स के चक्रव्यूह में बुरी तरह फंसी हुई है। वन नेशन वन टैक्स प्रभावी नहीं हो रहा है । जनता इनकम टैक्स देने के बाद टैक्स फ्री रकम से खरीदी चीज़ पर फिर टैक्स दे। राज्य वैट के नाम पर अलग वसूले । यह सब दर्शाता है कि हमारा देश किस रास्ते पर जा रहा है अगर यही स्थिति रही तो 2022 तक पूरा देश बर्बाद हो जायेगा। 

देश बुरी स्थिति में है अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सरकार बात कर रही मगर फिर एक सवाल सामने है जो सरकार शहर और गांव में चौबीस घंटे लाइट नहीं दे पा रही है वह चार्जिंग के लिए इलेक्ट्रिक स्टेशन पर लाइट कैसे दे पायेगी। वैसे भी यह वादों की सरकार है कर्म की नहीं। वह झूठे और चापलूस लोग किस बिल में घुस कर बैठे हैं जो यह दावा कर रहे थे कि मोदी के आने के बाद पेट्रोल डीजल तीस पैंतीस रुपए बिकेगा। बाबा रामदेव कहां हैं जिन्होंने रजत शर्मा के शो में कहा था कि वह प्रैक्टिकल बात करते हैं और इकोनामिक्स जानने का दावा किया था। बहरहाल इन चापलूस मंडली के कारण देश डूबता जा रहा है। सरकार को चाहिए कि इन सब बातों पर ध्यान दे। क्यूंकि सरकार जनता द्वारा जनता एवं देश की भलाई के लिए बनाई जाती है।

( प्रस्तुत लेख सैय्यद एम अली तक़वी के हैं यह लेखक के निजी विचार है )