चरित्र शंका में पत्नी का पीछा कर रहा था पति, बिजली के खंभे से बांधकर पत्नी ने की जमकर पिटाई

चरित्र शंका में पत्नी का पीछा कर रहा था पति, बिजली के खंभे से बांधकर पत्नी ने की जमकर पिटाई

25-Sep-2019

मीडिया रिपोर्ट 

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक पति को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करना और उसकी पीछा करना भारी पड़ गया। पत्नी ने अपने पति को खंभे से बांधकर उसकी घूंसों और थप्पड़ों से जमकर पिटाई कर दी। इस दौरान राहगीरों ने भी उसे शोहदा समझकर पीट दिया। बाद में मामला पुल‍िस तक पहुंचा, लेक‍िन वहां दोनों का समझौता कराकर पुल‍िस ने उन्हें घर भेज दिया। अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला कानपुर जिले के बाबूपुरवा थाना इलाके का है। बता दें कि महिला किदवई नगर इलाके में एक शॉपिंग दुकान में काम करती है। उसका पति उसके चरित्र पर शक करता था। पत्नी के मोबाइल पर बातचीत करने पर भी उसे ऐतराज था। इसलिए आए दिन दोनों के बीच विवाद होता था। सोमवार को उसकी पत्नी किदवई नगर हनुमान मंदिर की तरफ जा रही थी। इस बात की भनक लगने पर पति उसका पीछा करने लगा। लेकिन रास्ते में पत्नी ने पति को देख लिया। इस बात को लेकर दोनों के बीच विवाद होने लगा। विवाद इतना बढा कि दोनों के बीच मारपीट शुरू हो गई।

पहले पति ने पत्नी को लगातार कई तमाचे मारे। लेकिन स्थानीय लोगों ने शोहदा समझकर पति को पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद खुद उसकी पत्नी ने खंभे से बंधे अपने पत‍ि पर थप्पड़ों और घूंसों की बार‍िश कर दी। पत‍ि हाथ जोड़ता रहा लेक‍िन पत्नी को उस पर कोई तरस नहीं आया। इस दौरान पति सबसे बचाने की गुहार लगाता रहा। इसके बाद क‍िसी ने पुल‍िस को फोन क‍िया। क‍िदवई नगर पुलिस, पति-पत्नी दोनों को थाने ले गई थी जहां आपसी समझौते के बाद दोनों घर चले गए। अब पति की पिटाई का ये वीड‍ियो इलाके में जमकर वायरल हो रहा है।


कोर्ट परिसर से लापता हुआ जज साहब, पत्नी ने दर्ज कराई FIR

कोर्ट परिसर से लापता हुआ जज साहब, पत्नी ने दर्ज कराई FIR

24-Sep-2019

नई दिल्ली : मध्य प्रदेश के सतना से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। उत्तम हिन्दू में प्रकाशित खबर के अनुसार, सतना में अदालत परिसर से सोमवार को 35 वर्षीय एक न्यायाधीश एकाएक लापता हो गये। बाद में जज की पत्नी कृष्णा सिंह ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दी और उनकी गुमशुदगी की एफआईआर भी दर्ज कराई। सिविल लाइन थाने की इंस्पेक्टर अर्चना द्विवेदी ने बताया कि कृष्णा सिंह (34) ने सतना न्यायालय में पदस्थ अपने न्यायाधीश पति आर.पी. सिंह (35) के सोमवार को सतना के न्यायालय परिसर से लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। 

उन्होंने कहा कि उनकी शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश में जुट गई है। अर्चना ने बताया कि वह सतना न्यायालय में अष्टम व्यवहार न्यायाधीश के पद पर पदस्थ हैं और सतना के सिविल लाइन थाना इलाके में शासकीय आवास में रहते हैं। शिकायत के अनुसार लापता न्यायाधीश आर.पी. सिंह की करीब दो माह से तबीयत ठीक नहीं है। 23 सितंबर की सुबह करीब 11 बजे न्यायालय परिसर सतना से उनका कोई पता नहीं चल रहा है। अर्चना ने बताया कि पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।


संवेदना से उभरा लेख : क्या हमारे जीवन से दूर हो रहा है रामायण !

संवेदना से उभरा लेख : क्या हमारे जीवन से दूर हो रहा है रामायण !

24-Sep-2019

तहसीन मुनव्वर

हमारे बचपन में हर गली हर मुहल्ले में रामलीला होती थीं। इनका हिस्सा हिंदू मुसलमान सभी होते थे। शाम को घर का काम ख़त्म कर सभी की कोशिश होती कि घर  के समीप की किसी बड़ी रामलीला को देखने जाएं। फिर रामलीलाओं में प्रतिस्पर्धा बढ़ने लगीं और उस में नर्तक आदि बुलाए जाने लगे। इससे संस्कृति से जुड़े लोग धीरे धीरे दूर होने लगे लेकिन वह अधिक जुड़ने लगे जिनका उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक संतुष्टि नहीं अपितु मनोरंजन पाना था। शायद उसी समय में हम लोगों को वहां जाने से घर वालों ने मना किया। रही सही कसर रामानंद सागर जी ने पूरी कर दी और घर घर रामायण दूरदर्शन के माध्यम से पहुंचा दी गई। 

एक एसा समय भी आया कि रामलीला के मंचन की जगह बड़े पर्दे पर दिखाई जाने वाली रामायण ने ले ली। आरंभ में इसका सभी ने आनंद लिया क्योंकि पर्दे के दोनों ओर दर्शक बैठ जाते थे और रामायण का आनंद लेते थे।  भू माफिया के चलते और पार्क समाप्त हो जाने के कारण रामलीला मंचन के स्थान भी समाप्त होते चले गए। अब इक्का दुक्का स्थान पर ही रामलीला मंचन होता है। जहां बड़े स्तर पर होता है वहां आप हर दिन नहीं जा सकते। पश्चिमी बंगाल ने अपने यहां दुर्गा पूजा को संस्कृति से इस प्रकार जोड़ा हुआ है कि दुर्गा पूजा पंडालों का व्यापक प्रोत्साहन होता है। हमें रामलीलाओं को भी उसी प्रकार आगे बढ़ाना था लेकिन हम राम के नाम से की जाने वाली राजनीति में इस प्रकार उलझ गए कि राम राम से जय श्री राम तक तो पहुंच गए किन्तु मर्यादा पुरषोत्तम राम जिन को अल्लामा इक़बाल ने क्या सुंदर अभिव्यक्ति से सजाया है और इमामे हिंद कहा है, आज हमारी संस्कृति से दूर हो गए हैं। 

यह हमारे समय की त्रास्दी ही कही जायेगी कि सोनाक्षी सिन्हा को यह तक नहीं मालूम था कि हनुमान जी किन के लिए संजीवनी बूटी लेने गए थे जबकि हमारे घर में सब एक दूसरे को देख रहे थे कि इतना भी नहीं मालूम। सोनाक्षी सिन्हा के बारे में यह कहते हुए इस कारण भी दुख होता है कि वह एक एसे परिवार में जन्मी पली बढ़ी हैं जिस में सभी का नाम रामायण से ही जुड़ा है। उनका घर रामायण, उनके पिता शत्रुघन, चाचा राम, लखन और भरत यहां तक कि उनके भाइयों तक का नाम लव और कुश है और सब से बड़ी बात यह कि उनके पिता उस समय भाजपा का हिस्सा रहे थे जब राम मंदिर आंदोलन अपने ज़ोर पर था। 

यह केवल एक फ़िल्मी परिवार का मामला नहीं है बल्कि हमें सोचना होगा कि जो नई नस्ल सोनाक्षी जैसों को अपना आइडल या आराध्य मान लेती है उनके जीवन से भी कहीं रामायण दूर न हो गई हो। मुझे राम इस लिए पसंद हैं कि वह त्याग की मूरत हैं, वह अपने पिता के कहने पर राज सिंहासन त्याग कर जंगलों का कठिन जीवन जीने निकल पड़ते हैं। वह भी एक दो वर्ष के लिए नहीं बल्कि चौदह वर्षों के लिए। रावण से भी उनका युद्ध अंतिम समय तक टालने की कोशिश होती है किन्तु जब रावण अपनी हद में नहीं रहता तब राम युद्ध करते हैं। रावण के अंतिम क्षणों में भी वह उसके ज्ञान का सम्मान करने से नहीं चूकते और लक्ष्मण से उसे पानी पिलाने को और ज्ञान पाने को कहते हैं। लक्ष्मण चरणों के स्थान पर सर के पास बैठते हैं और ज्ञान से वंचित रह जाते हैं। 

ऐसे मर्यादा पुरषोत्तम राम किसे पसंद नहीं आएंगे और कौन उनके बताए रास्ते पर चल कर रोशनी नहीं पाना चाहेगा। अफ़सोस हमारे जीवन से ऐसे राम की लीला दूर हो गई हैं। आवश्यकता है देश को फिर मर्यादा पुरषोत्तम राम जी से जोड़ने की जो धार्मिक मान्यता के अनुसार मेरे साथी देश वासियों के भगवान हैं ही किन्तु मेरी अपनी सांस्कृतिक धरोहर भी हैं। राम जी को हमारे जीवन में सरकार या कोई राजनीतिक दल वापस नहीं ला पाएगा बल्कि इस के लिए हमारे समाज को ही हर स्तर पर कठिन आराधना करनी होगी। जहां तक सोनाक्षी सिन्हा की बात है उन्हें घर में बैठ कर कई दिन तक रामायण पढ़नी चाहिए और हो सके तो इतनी रट लेनी चाहिए कि आगे हो सके तो वह राम कथा वाचन कर सकें। भूल सुधार की उनके पास यही सूरत बची है।
 
दिलों के बीच बना दे जो प्यार का सेतु।
उस आला ज़ात को भगवान राम कहते हैं।।
*तहसीन मुनव्वर*( सीनियर एडिटर न्यूज़ 18 उर्दू )


जिसके पास लाइसेंस उसके नाम वाहन

जिसके पास लाइसेंस उसके नाम वाहन

23-Sep-2019

 हेमेन्द्र क्षीरसागर, पत्रकार, लेखक व विचारक

केंद्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम लागू क्या किया देश में गजब की हलचल मच गई। इसमें यातायात सुरक्षा के साथ-साथ यातायात स्वच्छता और स्वस्थता दिखाई पड़ी। कानून के मुताबिक नियम, कायदों को तोड़ने पर सक्त कार्रवाई और भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान है।  यह पहले भी कम सीमा में थे, किंतु ना जाने क्यों अमलीजामा पहनाने में ना-नूकर की जा रही थी। इसके लिए सरकारों को दोष दे या हुक्मरानों को या अफसरों को किवां अपने आप को?

खैर! दोषारोपण के चक्कर में अब अपना आज ना गंवाए। जो बीत गया सो बीत गया अब आगे की सुध ले। लापरवाही से नियमों को तोड़कर हमने आज तक जितनी जाने गवाई है वह वापस तो नहीं आ सकती लेकिन सीख में आगे सुरक्षा, सतर्कता, सजगता, नियमब्धता, कर्तव्यता और दृढ़ता से नियमों का पालन करते हुए बे मौतों से बचा जा सकता है।  दुर्भाग्य जनक स्थिति ये है कि जितने लोग बीमारियों से जान नहीं गवाते उससे कहीं अधिक वाहनों की दुर्घटना से असमयक काल के गाल में समा जाते हैं। हादसों में सड़कों का भी बड़ा योगदान है, जिसके के लिए व्यवस्थाएं दोषी नहीं अपितु जुर्मी है। बावजूद सबक लेने के बेखौफ आज भी बैगर या फर्जी लाइसेंस, पंजीयन, परमिट, इंश्योरेंस और नाबालिक वाहनों की सवारी केरोसिन से गढ्डों की सड़कों पर बेधड़क कर रहे हैं। इनमें बाईकर्स की तेजी तो ऐसी है जैसे लाखों रूपए घंटे कमाते हो वैसे जान हथेली पर रखकर और लेकर कर्कश ध्वनि से कोहराम मचाते रहते हैं। 

ऊपर से नौसिखिया, नियमों से बेखबर ऑटो, टैक्सी और ट्रैक्टर चालक राह चलतों की इस कदर आफत खड़ी कर देते हैं कि वाहनों से चलना तो छोड़िए कदमताल भी अवरूद्ध कर देते हैं। बरबस फिलवक्त सड़को पर सरपट दौड़ रहे वाहनों के मुकाबले लाइसेंस, बीमा, परमिट और पंजीयन कमतर ही है। यहां यह भी समझ से परे है कि लाइसेंस ना हो तब भी बड़ी आसानी से वाहन खरीदा जा सकता है। इस पर रोक हर हाल में लगना चाहिए। जिसके पास लाइसेंस उसके नाम वाहन का प्रचलन हो। उसके लिए जिले में मौजूद एकमात्र परिवहन कार्यालय के भरोसे सबकी लाइसेंस बनने और वाहनों के पंजीयन में काफी समय बीत जाएगा। लिहाजा कमशकम ब्लाक स्तर पर शिविर आदि लगाकर इसकी पुक्ता व्यवस्था बनाई जाए। 

दरअसल, इस नये मोटर वाहन अधिनियम को  अपने राज्यों में वोट बैंकों के खातिर जमीन पर लाने सरकारें कतरा रही है, इनमें भाजपानित प्रांत भी शामिल हैं। हां! यह कानून कड़ा जरूर है। इसे भारत जैसे देश में मनवाना दांतों तले चने चबाने के समान है, पर जीवन बचाने के वास्ते इसे चबाना भी पड़ेगा और हजम भी करना होगा। तभी हमारी सेहत सलामत रहेगी। अगर हम कानून के फंडे और पुलिस के डंडे के बिना नियमों का पालन कर लिए होते तो आज इस कानून की जरूरत ही ना पड़ती। कुछ सोच भी ऐसी अख्तियार हो चुकी है कि पुलिस को दिखाने मात्र के लिए वाहनों के कागजात और सुरक्षा पात्र होते हैं। यहां यह ना भूले की पुलिस तो जैसे तैसे छोड़ देगी अलबत्ता यमराज कैसे छोड़ेंगे? क्योंकि नजर हटी, दुर्घटना घटी जगजाहिर है। इसलिए चाकचौबंद रहने में सब की भलाई है।

अंतोगत्वा, मोटर वाहन अधिनियम का प्रभाव यह पड़ा  कि देश में लाइसेंस, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र, परमिट, पंजीयन और हेलमेट की बिक्री में  वृद्धि तथा दुर्घटनाएं भी कम हुई। असरकारक डिजिटल दस्तावेजों को मान्य करते हुए आवश्यक कागजात, सुरक्षात्मक सामग्री समेत जो भी कमी हो उसे मौके पर ही पूरी करवाने की पहल हो। पुनश्चय, प्रावधानों के नाम पर माकुल सुविधाएं, मजबूत सड़क देकर जितने की गाड़ी नहीं उससे अधिक का जुर्माना वसूला मुनासिब नहीं। हालातों के हिसाब से कार्यवाही हो तो बने बात। यथा देश में जबरदस्ती के जगह जबरदस्त तरीके से नियमों का पालन होने में अभी और समय लगेगा।

 

 


आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- एक भी हिंदू को देश नहीं छोड़ना पड़ेगा

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- एक भी हिंदू को देश नहीं छोड़ना पड़ेगा

23-Sep-2019

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि एक भी हिंदू को देश छोड़कर नहीं जाना पड़ेगा. पीटीआई के मुताबिक उन्होंने यह बात असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर यानी एनआरसी से जुड़ी चिंताओं को दूर करने का प्रयास करते हुए कही. रविवार को आरएसएस और भाजपा समेत उससे जुड़े संगठनों की कोलकाता में एक समन्वय बैठक हुई थी. इसके बाद संघ के एक पदाधिकारी ने कहा, ‘मोहन भागवतजी ने स्पष्ट कहा कि एक भी हिंदू को देश नहीं छोड़ना होगा. उन्होंने कहा कि दूसरे राष्ट्रों में प्रताड़ना और कष्ट सहने के बाद भारत आए हिंदू यहीं रहेंगे.’

असम में बहुप्रतीक्षित एनआरसी की 31 अगस्त को जारी हुई अंतिम सूची में 19 लाख से ज्यादा आवेदकों के नाम नहीं हैं. यानी उन्हें भारतीय नहीं माना गया है. आरएसएस के सूत्रों के मुताबिक बैठक में मौजूद कुछ नेताओं ने पश्चिम बंगाल में एनआरसी की कवायद शुरू करने से पहले राज्य में नागरिकता (संशोधन) विधेयक को लागू करने की जरूरत पर जोर दिया. बैठक में शामिल एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘बंगाल में पहले नागरिकता संशोधन विधेयक लागू होगा और इसके बाद एनआरसी लाया जाएगा. राज्य के हिंदुओं को इस बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है.’

राजस्थान में इस महीने के शुरू में आरएसएस की तीन दिवसीय वार्षिक समन्वय बैठक हुई थी. इस दौरान यह चिंता जताई गई थी कि असम में एनआरसी की अंतिम सूची में कई वास्तविक भारतीय छूट गए हैं जिनमें से अधिकतर हिंदू हैं. मोहन भागवत का यह बयान इसी चिंता की पृष्ठभूमि में आया है.


मूंगफली बेचने वाले शख्स को बिजली विभाग ने थमा दिया 62 लाख का ​बिल

मूंगफली बेचने वाले शख्स को बिजली विभाग ने थमा दिया 62 लाख का ​बिल

23-Sep-2019

सीतापुर। यूपी के सीतापुर में बिजली विभाग का अजब गजब कारनामा सामने आया है। यहां मूंगफली का ठेला लगाने वाले गरीब को विद्युत विभाग ने 62 लाख 39 हजार रुपए बिजली का बिल भेज दिया। बिजली का बिल देखते ही राम अवतार का पूरा परिवार सदमे में चला गया। राम अवतार और उसका बेटा मूंगफली का ठेला लगाकर अपने परिवार की जीविका चलाते हैं।

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विद्युत उपखंड लहरपुर के अधिकारियों और कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। 19 महीने का 62 लाख 39 हजार 16 रुपए का बिजली बिल भेजने से मूंगफली का ठेला लगाने वाले राम अवतार का पूरा परिवार सदमे में चला गया और अधिकारियों से न्याय की गुहार लगा रहा है।

बता दें कि अकबरपुर गांव के रहने वाले राम अवतार ने 19 महीने से बिल नहीं जमा किया था और जब बिजली का बिल आया तब 62 लाख रुपए से अधिक बिल देखकर राम अवतार का पूरा परिवार हैरान रह गया। पीड़ित राम अवतार के बेटे का कहना है पिछली बार उनका बिजली का बिल 287 रुपए का आया था, जिसे उन्होंने जमा कर दिया था। 19 महीने का बिल 62 लाख रुपए से अधिक का देखकर पूरे परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। वहीं, इस बारे में जब बिजली विभाग के अधिकारियों से बात करनी चाहिए तो बिजली विभाग के अधिकारी कैमरे के सामने आने से बचते नजर आए।


YouTube में वीडियो देखकर नकल कर रही थी लड़कियां, एक की मौत और दूसरी ......

YouTube में वीडियो देखकर नकल कर रही थी लड़कियां, एक की मौत और दूसरी ......

21-Sep-2019

IANS

बीजिंग: चाइना की यूट्यूबर (YouTuber) झोउ जिओ हुई (Zhou Xiao Hui) दो लड़कियों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए तैयार हो गई है. लड़कियों ने उनके वायरल वीडियो की नकल की और ऐसा करने के चलते दोनों में से एक की मौत हो गई. 25 वर्षीय येह (झोउ जिओ हुई) के यूट्यूब में 70 लाख सब्सक्राइबर हैं. यूट्यूबर को अनकन्वेंशनल ऑफिस कुकिंग वीडियो (Unconventional Office Cooking Video) बनाने के लिए जाना जाता है.

बीबीसी ने बताया, यूट्यूबर पर कथित तौर पर आरोप है कि 14 और 12 साल की लड़कियों ने उनके वीडियो का अनुसरण करते हुए टिन के कैन पर पॉपकॉन बनाने की कोशिश की.

लड़कियां जब 22 अगस्त को टिन के कैन पर अल्कोहल गर्म करने की कोशिश कर रही थीं, उसी दौरान उसमें विस्फोट हो गया, जिसके चलते 14 वर्षीय झेजे की 5 सितंबर को मौत हो गई. 12 साल की लड़की जिआयु के परिजनों के अनुसार उसे कॉस्मेटिक सर्जरी (Cosmetic Surgery) की जरुरत है. मुआवजा देने के बजाए यूट्यूबर झोउ जिओ हुई ने इस बात से इनकार किया कि वह लड़किया उनके वीडियो की नकल कर रही थी. उन्होंने कहा कि लड़कियों ने वीडियो में बताए गए तरीके के बजाय इसे गलत तरीके से किया.


भगवान राम के वनवास पर एंकर चित्रा त्रिपाठी ने किया ट्विट, लोग बोले 'चापलूसी से नौकरी मिलने वालों का यही हाल है'

भगवान राम के वनवास पर एंकर चित्रा त्रिपाठी ने किया ट्विट, लोग बोले 'चापलूसी से नौकरी मिलने वालों का यही हाल है'

19-Sep-2019

दिल्ली 

आज तक की एंकर चित्रा त्रिपाठी अपने एक ट्वीट को लेकर ट्रोल हो रही हैं। एंकर चित्रा त्रिपाठी ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ''सतयुग में जैसे 14 सालों का वनवास खत्म हुआ था, वैसे ही लग रहा है कि सदियों का वनवास अब कलयुग में खत्म होने वाला है।'' चित्रा त्रिपाठी के इस ट्वीट के बाद ही लोगों ने उनको ट्रोल करना शुरू कर दिया। लोगों ने कहा, चित्रा त्रिपाठी जी, थोड़ा सा तो ज्ञान रखती कि सतयुग नही त्रेता युग में श्री राम का जन्म और वनवास हुआ था।' चित्रा त्रिपाठी न्यूज चैनल आज तक से पहले एबीपी न्यूज चैनल में थी। 

एक यूजर ने लिखा, ''सतयुग नही त्रेता युग था वो। बिना पढ़ाई चाटूकारिता से नौकरी मिलने वालों की जानकारी ऐसी ही होती है।'' एक यूजर ने लिखा, आपको ये भी नहीं पता कि राम का जन्म सतयुग नहीं त्रेता में हुआ था।

आपकी दिमाग काम करता है की नही सतयुग द्वापर त्रेता कलियुग कुछ इसमे जनकारी है चित्रा हालांकि ट्रोल होने के बाद चित्रा त्रिपाठी ने एक यूजर के कमेंट पर रिप्लाई कर कहा- अच्छा...।

 

 


ढाई महीनों में LIC को हुआ 57 हजार करोड़ का नुकसान

ढाई महीनों में LIC को हुआ 57 हजार करोड़ का नुकसान

18-Sep-2019

दिल्ली 

ढ़ाई महीने के अंदर भारतीय जीवन बीमा निगम को शेयर बाजार में निवेश से 57,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। एलआईसी जिन कंपनियों में निवेश किया है उनमें से 81 फीसदी के बाजार मूल्‍य में गिरावट आयी है। शेयर बाजार में एलआईसी को हुए निवेश से इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर में अब तक) में केवल 57,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। एलआईसी ने सबसे ज्यादा आईटीसी में निवेश कर रखा है, उसके बाद एसबीआई, ओएनजीसी, एलएंडटी, कोल इंडिया, एनटीपीसी, इंडियन ऑयल और रिलायंस इंडस्ट्रीज में निवेश है।

बिजनेस स्‍टैंडर्ड की रिर्पोट के अनुसार जून तिमाही के अंत तक शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों में एलआईसी का निवेश मूल्य 5.43 लाख करोड़ रुपये का था, लेकिन अब यह घटकर महज 4.86 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इस तरह महज ढाई महीने में एलआईसी के शेयर बाजार में निवेश को 57,000 करोड़ रुपये की चपत लग गई है।

आपको बता दें कि एलआईसी को सरकार के विनिवेश एजेंडा को पूरा करने के लिए सरकारी कंपनियों के मुक्तिदाता की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। तो वहीं पिछले एक दशक में सार्वजनिक कंपनियों में एलआईसी का निवेश चार गुना हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2019 तक एलआईसी ने कुल 26.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है जिसमें से अकेले सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में 22.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, सिर्फ 4 लाख करोड़ रुपये निजी क्षेत्र में लगाए गए हैं।


कश्मीर के पूर्व विधायक यूसुफ ने कहा- मैं विदेशी नहीं और न ही फारूक अब्दुल्ला आतंकवादी

कश्मीर के पूर्व विधायक यूसुफ ने कहा- मैं विदेशी नहीं और न ही फारूक अब्दुल्ला आतंकवादी

18-Sep-2019

कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद भले ही केंद्र सरकार कह रही है कि घाटी में स्थिति सामान्य हैं, लेकिन सरकार के दावे में विरोधाभास दिखाई देता है। पिछले दिनों सीपीआई (एम) नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व विधायक मोहम्‍मद यूसुफ तरीगामी को कश्मीर से दिल्ली एम्स अपना इलाज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की मदद लेनी पड़ी। इसी पर तरीगामी ने कहा मैं कोई विदेशी नहीं हूं और न ही फारूक अब्दुल्ला और अन्य नेता आतंकवादी हैं। कश्मीर की स्थिति कश्मीर के लोगों की वजह से नहीं, बल्कि हम सभी राजनेताओं और राजनीति के कारण खराब है। तरीगामी कश्मीर में नजरबंदी का सामना करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले पहले नेता हैं।

‘कश्मीरी धीरे-धीरे मौत के करीब जा रहे हैं’

तरीगामी और राष्ट्रीय महासचिव सीताराम येचुरी ने आज दिल्‍ली में प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि सुप्रीम कोर्ट के जज तरूण गोगोई और एस ए बोबड़े ने उनके वापस कश्मीर जाने पर कोई रोक नहीं है, वह जब चाहें जा सकते हैं बशर्ते उनकी तबीयत यह यात्रा करने योग्य हो। यूसुफ तरीगामी ने कहा कि भाजपा का दावा है कि एक भी गोली नहीं चलाई गई है और कोई भी मारा नहीं गया है, लेकिन कश्मीरी धीरे-धीरे मौत के करीब जा रहे हैं। हम भी जीना चाहते हैं, हमें भी मौका दिया जाना चाहिए। यह एक कश्मी‍री, एक हिंदुस्तानी बोल रहा है। ये मेरी अपील है, हमारी भी सुनें, ये बोलते हुए तरीगामी भावूक हो गए और उनकी आंखों से आंसू आ गए।
‘संचार टूटने से दिक्कतें’

उन्होने कहा कि मैं परेशान हूं, इस शासन से हमें बहुत उम्मींदें नहीं थीं, लेकिन मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे एक संवैधानिक प्रावधान को अलविदा कहने के लिए इतने उतावले होंगे। कश्मीर के लोग मजबूर नहीं थे, लेकिन मैं इस स्थिति को देखकर चिंतित हूं। दुकानें नहीं खुली हैं, स्कूल नहीं खुले हैं। कोई सार्वजनिक परिवहन नहीं है। 40 दिनों से अधिक समय से लोग कुछ भी कमाने के लिए कोई भी काम करने में असमर्थ हैं। वहां लोगों का बड़ा वर्ग रोजाना काम करता है और कमाता है और उस आधार पर रहते हैं। संचार टूटना लोगों को सबसे अलग कर रहा है।

कश्मीर की जमीनी हकीकत सरकारी दावे के उलट: येचुरी

वहीं मोदी सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए येचुरी ने कहा कि कश्मीर के हालात सामान्य नहीं है। कश्मीर का मुद्दा अब कोर्ट के पास है। कोर्ट को ही इस पर फैसला सुनाने का हक है। येचुरी ने कहा कि हमारे कोर्ट में दायर किए हलफनामे में कहा गया था कि कश्मीर की जमीनी हकीकत कुछ और है जो कि सरकारी दावे के एकदम विपरीत है। एक राज्य दो केंद्र शासित प्रदेशों में बंट गया है और इसके क्या परिणाम होंगे। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में एक अलग याचिका दायर की जा रही है।

सीताराम येचुरी ने कहा कि वहां पर लोगों को आजीविका में दिक्कत हो रही है। 40 दिनों से अधिक समय हो गया है, संचार पूरी तरह से बंद है। हम पार्टी के उन लोगों तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिनके पास लैंडलाइन है। वहां पर कोई सार्वजनिक परिवहन नहीं है। अस्पतालों में दवाओं की कमी की भी खबरें आ रही हैं।

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32 साल के शख्स को 81 साल का बुजुर्ग बनाने वाला मेकअप आर्टिस्ट बिल्लू बार्बर गिरफ्तार

32 साल के शख्स को 81 साल का बुजुर्ग बनाने वाला मेकअप आर्टिस्ट बिल्लू बार्बर गिरफ्तार

16-Sep-2019

नई दिल्ली: अभी कुछ दिन पहले ही खबर आई थी जब एक 32 साल का शख्स जयेश 81 साल के बुजुर्ग का भेष बनाकर देश से भागने की फिराक में था. अब इस मामले में दिल्ली पुलिस ने उस मेकअप आर्टिस्ट को भी गिरफ्तार कर लिया है, जिसने जयेश को ये हुलिया दिया था. बिल्लू बार्बर के नाम से मशहूर इस मेकअप आर्टिस्ट का नाम  शमशेर सिंह है, जो दिल्ली के रोहिणी इलाके का रहने वाला है. 

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डीसीपी एयरपोर्ट संजय भाटिया के मुताबिक आरोपी मेकअप आर्टिस्ट बिल्लू बार्बर ने एजेंट सिद्धू और उसके एक साथी  के कहने पर उसने जयेश पटेल का हुलिया बदला. उसने जयेश के दाढ़ी और सिर के बाल बढ़वाए,फिर उनमें सफेद रंग किया, पगड़ी पहनाई. ज़ीरो पावर का मोटे फ्रेम का चश्मा पहनाया ,सफेद कपड़े पहनाए और फिर एयरपोर्ट पर व्हीलचेयर में बैठकर जाने के लिए कहा था.

पुलिस के मुताबिक शमशेर एजेंट्स के कहने पर 10 और लोगों का गेटअप ऐसे ही बदल चुका है, जिनमें 2 महिलाएं भी शामिल हैं. पुलिस ने उसके पास से मेकअप का पूरा सामान भी बरामद कर लिया है. आरोपी ने बताया कि वह एक शख्स से मेकअप के लिए 20 हज़ार रुपये लेता था.  मालूम हो जयेश पटेल ने बुज़ुर्ग के गेटअप में अपना पासपोर्ट बनवाया था और उसी पासपोर्ट से अमेरिका जाने की फिराक में था लेकिन 10 सितंबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ा गया. सुरक्षा में लगे सीआईएसएफ के अधिकारियों को उसके बोलने के लहजे, आवाज और त्वचा देखकर शक हुआ था. इसके बाद उसकी करामात का भंडाफोड़ हो गया. 

साभार : NDTV


मंत्रीजी का नया शिगूफ़ा- रोजगार बहुत हैं, बस लोग ही इसके काबिल नहीं

मंत्रीजी का नया शिगूफ़ा- रोजगार बहुत हैं, बस लोग ही इसके काबिल नहीं

16-Sep-2019

नित्‍यानंद गायेन 

मोदीजी की दूसरी पारी के 100 दिन बीतने के जश्न में केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, “देश में रोजगार और नौकरियों की कोई कमी नहीं है बल्कि उत्तर भारतीयों में योग्यता की कमी है।” गंगवार ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि उन्हें जिस पद के लिए भर्ती करनी है उसके लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिलते हैं।

संतोष गंगवार का बयान ऐसे समय आया है जब बेरोजगारी और आर्थिक हालात को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने गंगवार के इस बयान पर पलटवार किया.

हर साल दो करोड़ नौकरी देने का वादा कर 2014 में सत्ता पाने के बाद मोदी सरकार ने अपनी पहली पारी में जहां बेरोजगारी के आंकड़ों पर रोक लगा दी और इससे जुड़े सवालों को भटका दिया, वहीं उनकी दूसरी पारी से पहले इस बात का उद्घाटन हो गया कि बीते 45 वर्षों में देश में आज सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की रिपोर्ट जनवरी में लीक हुई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार देश में 2017-18 में बेरोजगारी दर 6.1% रही। यह 45 साल में सबसे ज्यादा है। इन सबके बाद भी पीयूष गोयल सहित मोदी मंत्रिमंडल के सदस्य और सरकार दावा करती रही है कि देश का युवा अब नौकरी करना नहीं चाहता बल्कि वह नौकरी देना चाहता है! अब यह नया शिगूफा खुद रोजगार मंत्री ने छोड़ा है.


पाकिस्तान से प्याज नहीं खरीदेगा भारत

पाकिस्तान से प्याज नहीं खरीदेगा भारत

14-Sep-2019

नई दिल्ली : सरकार ने देश के घरेलू बाजार में आपूर्ति के लिए पाकिस्तान से प्याज नहीं खरीदने का फैसला किया है। गौरतलब है कि घरेलू बाजार में प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के तहत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार से 2000 टन प्याज खरीदने की निविदा जारी की है। यह निविदा पांच सितंबर को जारी की गयी और इसे 24 सितंबर तक भरा जा सकता है। इसके अलावा सरकार ने प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य भी 850 डालर प्रति टन कर दिया है।

आयात के लिए अधिकृत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एमएमटीसी लिमिटेड ने 2000 टन प्याज का आयात करने के लिए निविदा जारी की है और कहा है कि यह प्याज उच्चगुणवत्ता वाली तथा पाकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान या अन्य किसी देश में पैदा हुई होनी चाहिए। लेकिन कल देर रात निविदा को संशोधित करते हुए एमएमटीसी लिमिटेड ने कहा कि आयात की जानी वाली प्याज पाकिस्तान में पैदा हुई नहीं होनी चाहिए।


इस महीने लगातार 4 दिन बंद रहेंगे बैंक, जानें डेट

इस महीने लगातार 4 दिन बंद रहेंगे बैंक, जानें डेट

13-Sep-2019

इस महीने लगातार चार दिन बैंक में कामकाज नहीं होगा। 26 व 27 सितंबर को दो दिवसीय राष्ट्रीय हड़ताल है, जिसमें सभी बैंकों के अधिकारी शामिल होंगे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अधिकारियों की चार यूनियनों ने दस सरकारी बैंकों के विलय की घोषणा के विरोध में 26 सितंबर से दो दिन की हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। इसके अलावा, 28 सितंबर को भी बैंक में काम नहीं होंगे, क्योंकि महीने के अंतिम शनिवार को बैंकों में छुट्टी रहती है और 29 सितंबर को बैंक में रविवार की छुट्टी रहेगी।

सरकार ने दस सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों का विलय कर चार बैंक बनाने की घोषणा की है। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) को भेजे नोटिस में अधिकारियों की यूनियनों ने कहा कि उनका बैंकिंग क्षेत्र में विलय के खिलाफ हड़ताल पर जाने का प्रस्ताव है। सरकार ने 30 अगस्त को सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों का एकीकरण कर चार बैंक बनाने की घोषणा की थी।
यूनियन के नेता ने यह भी कहा कि नवंबर के दूसरे सप्ताह से राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। आल इंडिया बैंक आफिसर्स कनफेडरेशन (एआईबीओसी), आल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए), इंडियन नेशनल बैंक आफिसर्स कांग्रेस (आईएनबीओसी) और नेशनल आर्गेनाइजेशन आफ बैंक आफिसर्स (एनओबीओ) ने संयुक्त रूप से हड़ताल का नोटिस दिया है। इसके अलावा बैंक यूनियनों की पांच दिन का सप्ताह करने और नकद लेनदेन के घंटों और विनियमित कार्य घंटों को कम करने की भी मांग है।

यूनियनों ने सतर्कता से संबंधित मौजूदा प्रक्रियाओं में बाहरी एजेंसियों का हस्तक्षेप रोकने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों से संबंधित मुद्दों को सुलझाने, पर्याप्त भर्तियां करने, एनपीएस को समाप्त करने और उपभोक्ताओं के लिए सेवा शुल्क कम करने और अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के नाम पर अधिकारियों को परेशान नहीं करने की मांग की है।
एआईबीओसी (चंडीगढ़) के महासचिव दीपक कुमार शर्मा ने कहा कि देशभर में राष्ट्रीयकृत बैंक 25 सितंबर मध्यरात्रि से 27 सितंबर मध्यरात्रि तक हड़ताल पर रहेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के विरोध और अपनी अन्य मांगों के समर्थन में बैंक कर्मियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि नवंबर के दूसरे सप्ताह से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। सरकार ने दस राष्ट्रीयकृत बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की घोषणा की है। इसके तहत यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया और ओरियंटल बैंक आफ कॉमर्स का विलय पंजाब नेशनल बैंक में किया जाएगा। इसके बाद अस्तित्व में आने वाला बैंक सार्वजनिक क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा।  इसी तरह सिंडिकेट का विलय केनरा बैंक में किया जाएगा। इलाहाबाद बैंक का विलय इंडियन बैंक में होना है जबकि आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को यूनियन बैंक आफ इंडिया में मिलाया जाएगा।


ऑटो सेक्टर में मंदी : वित्त मंत्री सीतारमण के बयान पर मारुति ने कहा- Ola-Uber की वजह से नहीं घटी बिक्री

ऑटो सेक्टर में मंदी : वित्त मंत्री सीतारमण के बयान पर मारुति ने कहा- Ola-Uber की वजह से नहीं घटी बिक्री

12-Sep-2019

एजेंसी 

नई दिल्ली: ऑटो सेक्टर में मंदी की असल वजह क्या है? सरकार का कहना है कि ओला और ऊबर जैसे टैक्सी एग्रीगेटर्स की वजह से ऑटो इंडस्ट्री में मंदी का दौर आया है. वहीं ऑटो सेक्टर इस कारण को सिरे से ख़ारिज़ करते हुए सरकार को स्टडी करने की सलाह दे रहा है.

दरअसल मंगलवार को निर्मला सीतारमण ने ओला और उबर जैसी आनलाइन टैक्सी को मंदी की वजह बताया था. जिसके बाद मारुति ने ऑटो सेक्टर में मंदी को लेकर पहली बार बयान देते हुए कहा कि ओला और उबर ऑटो इंडस्‍ट्री में मंदी के ठोस कारण नहीं हैं. मारुति सुजुकी के मार्केटिंग और सेल्‍स के एग्‍जीक्‍यूटिव डायरेक्‍टर शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि धारणा में अभी भी कोई बदलाव नहीं आया है. लोग अपनी जरूरत और शौक पूरा करने के लिए कार खरीदते हैं.

उन्‍होंने आगे कहा, ” मौजूदा मंदी के पीछे ओला और उबर जैसी सेवाओं का होना कोई बड़ा कारण नहीं है. मेरी समझ से इस तरह के निष्कर्षों पर पहुंचने से पहले हमें मंदी के कारणों का पता लगाना चाहिए. इसके लिए स्‍टडी की जरूरत है.”

शशांक श्रीवास्तव ने आगे कहा, ”ओला और उबर जैसी सेवायें पिछले 6-7 साल में सामने आई हैं. इसी अवधि में हमने बेहतरीन अनुभव भी हासिल किये हैं. सिर्फ पिछले कुछ महीनों में ऐसा क्या हुआ कि मंदी गंभीर होती चली गई. मुझे नहीं लगता कि ओला और उबर की वजह से हम यहां खड़े हैं.”

श्रीवास्तव ने अमेरिकी बाजार का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां उबर सबसे बड़ी टैक्‍सी एग्रीगेटर है, बावजूद इसके पिछले कुछ सालों में कार बिक्री में जबरदस्‍त बढ़ोतरी हुई है.

श्रीवास्‍तव ने बताया, ”लोग सप्ताह के दिनों में ऑफिस में जाने के लिए ओला और उबर जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन फिर भी वे परिवार के साथ वीकेंड के लिए अपनी गाड़ी को ही प्राथमिकता देते हैं. अभी भी यह पैटर्न नहीं बदला है.”

उन्‍होंने बताया कि ऑटो इंडस्‍ट्री में मंदी जैसे हालात के लिए लिक्‍विडिटी की कमी, टैक्‍स और इंश्‍योरेंस के रेट जिम्‍मेदार हैं. शशांक श्रीवास्तव के मुताबिक मंदी से निपटने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयत्न पर्याप्‍त नहीं हैं. हालांकि यह लॉन्‍ग टर्म में मददगार हो सकते हैं. शशांक श्रीवास्तव को उम्‍मीद है कि फेस्टिव सीजन में ऑटो इंडस्‍ट्री को बूस्‍ट मिलेगा.

इससे पहले मंगलवार को निर्मला सीतारमण ने कहा था कि वाहन क्षेत्र में नरमी के कारणों में युवाओं की सोच में बदलाव भी है. लोग अब खुद का वाहन खरीदकर मासिक किस्त देने के बजाए ओला और उबर जैसी आनलाइन टैक्सी सेवा प्रदाताओं के जरिये वाहनों की बुकिंग को तरजीह दे रहे हैं. सीतारमण ने कहा कि दो साल पहले तक वाहन उद्योग के लिये अच्छा समय था. निश्चित रूप से उस समय वाहन क्षेत्र के उच्च वृद्धि का दौर था.


कश्मीर के किसानों से सीधे ऐपल खरीदेगा केन्द्र सरकार!

कश्मीर के किसानों से सीधे ऐपल खरीदेगा केन्द्र सरकार!

11-Sep-2019

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अब केंद्र सरकार राज्य के सेब किसानों के लिए बड़ी सौगात लेकर आई है। सरकार का प्लान है कि जम्मू कश्मीर के किसानों की जेब में अच्छी खासी रकम जाए और उनके नुकसान को कम किया जाए।
इसके लिए केंद्र सरकार कश्मीर के लिए मिशन ‘ऐपल’ लाने जा रही है। इस प्लान के तहत केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर के सेब किसानों से सीधे सेब खरीदेगी। किसानों से सेब खरीदने का काम नेफेड करेगा।
ऐसा बताया जा रहा है कि 15 दिसबंर तक किसानों से सेब खरीददारी का काम पूरा कर लिया जाएगा। इससे किसानों को पैसे सीधे उनके खातों में दिए जाएंगे।
ज़ी न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, NAFED द्वारा जम्मू कश्मीर के श्रीनगर, शोपियां, सोपोर की मंडियों से सेब खरीदे जाएंगे। इसके बाद क्वॉलिटी कमेटी सेबों की किस्मों की ग्रेडिंग तय करेगी।
यह प्राइस कमेटी सभी कैटेगरी के सेब की कीमत तय करेगी। जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव इसपूरी प्रक्रिया में को-ऑर्डिनेट करेंगे और यह पूरा काम कृषि और गृह मंत्रालय की निगरानी में होगा।
जम्मू कश्मीर में 67% कश्मीरी यानी 7 लाख परिवार सेब व्यवसाय पर निर्भर है। देश के कुल सेब उत्पादन का 79.3% का हिस्सा से होता है। जम्मू कश्मीर से सालाना 6,500 करोड़ रुपये का सेब निर्यात होता है। पिछले साल कश्मीर में 20 लाख मैट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ है।

 

 

 


बीमा कम्पनी क्लेम देने में कर रही थी आनाकानी, हाईकोर्ट ने कहा- सवार या मोटरसाइकिल सीखने वाले को प्रशिक्षक के साथ की आवश्यकता नहीं, याचिका खारिज

बीमा कम्पनी क्लेम देने में कर रही थी आनाकानी, हाईकोर्ट ने कहा- सवार या मोटरसाइकिल सीखने वाले को प्रशिक्षक के साथ की आवश्यकता नहीं, याचिका खारिज

11-Sep-2019

एक सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया लर्नर लाइसेंस, एक वैध लाइसेंस है और एक राइडर या लर्नर को मोटरसाइकिल चलाने के दौरान किसी प्रशिक्षक के साथ की आवश्यकता नहीं है, जैसा कि कार के मामले में आवश्यक है, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मृतक महिला के परिवार को मोटर दुर्घटना न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए अवार्ड को चुनौती देने वाली बीमा कंपनी की याचिका को ख़ारिज करते हुए यह कहा। न्यायमूर्ति के. नटराजन ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया और ट्रिब्यूनल द्वारा ज्योतिबा शिगाते और उनके नाबालिग बेटे की. मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे की मांग करते हुए दायर याचिका पर दिए गए आदेश को बरकरार रखा।

अदालत ने 9 प्रतिशत ब्याज के साथ विभिन्न शीर्षों के तहत मुआवजे के रूप में 12,65,731 रुपये की राशि दिए जाने का आदेश दिया। केस की पृष्ठभूमि: 29 मई 2009 को दावेदार की पत्नी, मंगला, अंजना द्वारा संचालित की जा रही मोटरसाइकिल (पंजीकरण नंबर KA 22/EB-9566) पर पिलियन सवार के रूप में बैठी थी अर्थात मोटरसाइकिल पर पीछे बैठी हुई थी और जब उक्त वाहन बेलगाम-बेलगुंडी रोड पर बोकनूर क्रॉस के पास पंहुचा, अंजना ने तेज रफ्तार के साथ मोटरसाइकिल को लापरवाही से चलाया, जिससे दुर्घटना हो गयी। मंगला मोटरसाइकिल से गिरकर घायल हो गयी। इलाज के दौरान अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया।

मृतका एक सरकारी प्राथमिक मराठी स्कूल में प्रधानाध्यापक के रूप में काम कर रही थी और प्रति माह 30,000 रुपये कमा रही थी और वह आयकर दाता (income tax Assessee) भी थी। वह अपने पूरे परिवार को पाल रही थी, इसलिए, मामले में दावेदारों ने विभिन्न आधारों पर मुआवजे के लिए 30 लाख रुपये दिए जाने की प्रार्थना की। बीमा कंपनी ने तर्क दिया: दुर्घटना के समय मोटरसाइकिल चला रही अंजना के पास मोटरसाइकिल चलाने हेतु कोई वैध लाइसेंस नहीं था और वह केवल एक लर्नर लाइसेंस रखती थी। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के अनुसार, एक व्यक्ति जो लर्नर लाइसेंस रखता है, उसे प्रशिक्षक के साथ चलना चाहिए। हालाँकि, यहां इस मामले में मृतका, प्रतिवादी नंबर 1 द्वारा चलायी जा रही मोटर साइकिल पर पिलियन सवार के रूप में बैठी थी और प्रतिवादी नंबर 1 के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और केवल एक लर्नर लाइसेंस था। उसे प्रशिक्षक के साथ मोटर साइकिल चलानी सीखनी या उसकी सवारी करनी चाहिए थी।

केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 3 के उप-नियम (1) के प्रावधान के अनुसार, (संक्षिप्त में "नियम"), उसे मोटरसाइकिल पर अंग्रेजी अक्षर 'एल' लिखना चाहिए था और प्रशिक्षक के बिना एक लर्नर द्वारा मोटरसाइकिल चलाया जाना, बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन होगा और यह पॉलिसी के नियमों और शर्तों का एक बुनियादी उल्लंघन है। लेकिन, ट्रिब्यूनल ने बीमाकर्ता पर देयता निर्धारित करते हुए त्रुटि की और मोटरसाइकिल के मालिक पर यह दायित्व निर्धारित किया जाना चाहिए। जहाँ तक मुआवजा राशि की गणना का संबंध है। यह तर्क दिया गया था कि "दूसरे दावेदार (नाबालिग पुत्र) के सम्बन्ध में निर्भरता की हानि के चलते मुआवजे की गणना के लिए, आय के केवल 25% पर विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि मृतका का पति कामकाजी व्यक्ति हैं।

इस मामले में विभाजित गुणक (split multiplier) लागू किया जाएगा, क्योंकि मृतका स्थायी कर्मचारी, एक शिक्षिका थी, जो 5 साल के भीतर अपनी सेवा से सेवानिवृत्त हो जाती और इसलिए पूरे वेतन को सेवानिवृत्ति के बाद निर्भरता का नुकसान नहीं माना जा सकता है।" दावेदारों ने तर्क दिया: टू व्हीलर मोटरसाइकिल के लिए किसी इंस्ट्रक्टर की आवश्यकता नहीं होती है और इंस्ट्रक्टर की आवश्यकता केवल फोर-व्हीलर सीखने के लिए होती है। मोटरसाइकिल पर 'L' बोर्ड लगाने के संबंध में बीमा कंपनी द्वारा कोई डिफेन्स नहीं दिया गया है और न्यायालय के समक्ष स्कूटर की कोई भी तस्वीर नहीं लायी गयी जिसमे यह दिखाया गया हो कि स्कूटर पर 'L' अक्षर का उल्लेख नहीं किया गया था।

इसके अलावा, "मुआवजे की मात्रा के संबंध में, हालांकि मृतका हेडमिस्ट्रेस थी और चूंकि वह घर की कमाने वाले सदस्या थी, इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि पहला दावेदार, सिर्फ इसलिए कि वह एक कर्मचारी है और कमाई भी कर रहा है, अपनी पत्नी पर निर्भर नहीं था।" अदालत ने कहा: "केंद्रीय मोटर वाहन नियम एक मोटर वाहन में एक प्रशिक्षक की मौजूदगी के बारे में सख्ती से विचार करता है, लेकिन मोटरसाइकिल को इससे बाहर करता है। इसलिए, मैं मानता हूं कि एक लर्नर लाइसेंस भी एक वैध लाइसेंस है, सवार या मोटरसाइकिल सीखने वाले को एक प्रशिक्षक के साथ की आवश्यकता नहीं है, जैसा कि चार पहिया मोटर वाहनों के मामले में आवश्यक है, जहाँ प्रशिक्षक की आवश्यकता होती है।

इसलिए, बीमाकर्ता द्वारा दी गयी इस दलील को, कि प्रतिवादी नंबर 1 (अंजना) के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और वह मोटरसाइकिल की सड़क पर सवारी के दौरान केवल लर्नर लाइसेंस के साथ थी, स्वीकार नहीं किया जा सकता है।" आगे यह कहा गया, "अपीलार्थी/बीमाकर्ता के विद्वान वकील द्वारा दी गयी दलील, कि न्यायाधिकरण ने अत्यधिक मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है, स्वीकार नहीं किया जा सकता है और इसके लिए इस न्यायालय के किसी भी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।"

साभार : LIVELAW

यह खबर मूल रूप से लाइव लॉ में प्रकाशित हुआ है 

 


डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन को बर्खास्त करने का ऐलान किया

डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन को बर्खास्त करने का ऐलान किया

11-Sep-2019

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन को बर्खास्त करने का ऐलान किया है. पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा कि वे जॉन बोल्टन के रुख से असहमत थे. डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक वे अगले सप्ताह घोषणा करेंगे कि नया राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कौन होगा. उन्होंने ट्वीट किया, ‘मैंने जॉन से इस्तीफा देने को कहा, जो मुझे आज सुबह दिया गया.’ डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा, ‘मैंने जॉन बोल्टन को कल रात सूचित कर दिया था कि व्हाइट हाउस में उनकी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है.’

जॉन बोल्टन बीते तीन साल में व्हाइट हाउस से बाहर होने वाले तीसरे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं. बताया जा रहा है कि उत्तर कोरिया से लेकर अफगानिस्तान तक कई मसलों पर वे डोनाल्ड ट्रंप के रुख से सहमत नहीं थे. उधर, जॉन बोल्टन का कहना है कि उन्होंने खुद इस्तीफा देने की पेशकश की थी.

जॉन बोल्टन अप्रैल 2018 में व्हाइट हाउस आए थे. माइकल फ़्लिन और एचआर मैक्मास्टर के बाद डोनाल्ड ट्रंप के तीसरे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे. बताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप और उनके बीच हर बड़ी विदेशी नीति को लेकर विवाद था. चर्चा है कि अफगानिस्तान रिश्तों के इस ताबूत में आखिरी कील साबित हुआ. जॉन बोल्टन ने ऐन मौके पर तालिबान के साथ बैठक रद्द करने के अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले की आलोचना की थी. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव स्टेफनी ग्रिशम ने भी एक बयान में कहा, ‘राष्ट्रपति को उनकी कई नीतियां पसंद नहीं थीं, उनमें मतभेद था.’


यूपी- फिरोजाबाद के डिग्री कॉलेज में छात्राओं के बुर्का पहनने पर रोक !

यूपी- फिरोजाबाद के डिग्री कॉलेज में छात्राओं के बुर्का पहनने पर रोक !

08-Sep-2019

फिरोजाबाद- फिरोजाबाद के एक  डिग्री कॉलेज में अब बुर्का पहनकर आने वाली छात्राओं पर रोक लगा दी गई है. खबर के मुताबिक शुक्रवार को कॉलेज में छात्रों के दो गुटों के बीच हुई वर्चस्व की जंग के बाद कॉलेज प्रशासन ने यह कदम उठाया है. कॉलेज में जो छात्राएं बुर्का पहनकर पहुंची उन्हें ड्रेस कोड का हवाला देकर बैरंग लौटा दिया कई छात्राओं ने अपना बुर्का उतारा तब कहीं जाकर उन्हें एंट्री मिल सकी.
छात्रों के दो गुटों के बीच मारपीट की यह तस्वीर फिरोजाबाद के एसआर के डिग्री कॉलेज की है. जहां वर्चस्व को लेकर शनिवार को इस कॉलेज के छात्रों के दो गुट आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते शिक्षा का मंदिर जंग का मैदान बन गया था. शनिवार को जब कॉलेज खुला तो कॉलेज का नजारा बदला हुआ था. कॉलेज परिसर में पुलिस तैनात थी और जो छात्राएं बुर्का पहनकर आई थी, उन्हें वापस किया जा रहा था.

 


कर्नाटक में एक या दो नहीं होंगे पांच उपमुख्यमंत्री !

कर्नाटक में एक या दो नहीं होंगे पांच उपमुख्यमंत्री !

07-Sep-2019

कर्नाटक में 2 नए उप-मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति हो सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी आलाकमान के इशारे पर सीएम बीएस येदियुरप्पा ने तैयारी पूरी कर ली है। गौरतलब है कि कर्नाटक में फिलहाल तीन उप-मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने पदभार संभाल लिया है। इस तरह राज्य में मुख्यमंत्री के अलावा पांच उप-मुख्यमंत्री हो जाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी आलाकमान के इस फैसले के दो उद्देश्य हो सकते हैं। पहला, सभी बड़े समुदायों के प्रतिनिधित्व देकर पूरे कर्नाटक में प्रसार करना और वोटबैंक को बढ़ाना। दूसरा, येदियुरप्पा के बाद उनका उत्तराधिकारी तैयार करना। माना जा रहा है कि दो नए उपमुख्यमंत्री एसटी और कुरुबा समुदाय से हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने 17 नवनियुक्त मंत्रियों को 26 अगस्त को विभागों की जिम्मेदारी सौंपी थी। इन मंत्रियों को करीब एक सप्ताह पहले कैबिनेट में शामिल किया गया था। तीन उपमुख्यमंत्री में गोविंद करजोल को पीडब्ल्यूडी और समाज कल्याण, अश्वत्थ नारायण को उच्च शिक्षा, आईटी और बीटी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा लक्ष्मण सावदी को परिवहन विभाग का प्रभार दिया गया था। बसवराज बोम्मई को गृह विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। 

पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार को बड़े और मध्यम स्तरीय उद्योग का मंत्रालय, दो पूर्व उप मुख्यमंत्री-के एस ईश्वरप्पा और आर अशोक को क्रमश: ग्रामीण विकास और पंचायती राज, तथा राजस्व विभाग का प्रभार दिया गया था। वरिष्ठ नेता बी श्रीरामुलू को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बनाया गया है जबकि एस सुरेश कुमार को प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग का कार्यभार दिया गया था। 

रोचक है कि उपमुख्यमंत्री बनाए गए सावदी ना तो विधानसभा के सदस्य हैं ना ही विधानपरिषद के। कैबिनेट में उनको शामिल करने के कारण भाजपा के कुछ वरिष्ठ विधायकों के बीच असंतोष है।

समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से इनपुट्स लेकर