करसा गांव से ’मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ’ यात्रा की हुई शुरूआत ...

करसा गांव से ’मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ’ यात्रा की हुई शुरूआत ...

30-Jul-2022

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

गांव-गांव पहुंचकर महिलाओं को जागरूक करेगा न्याय रथ निःशुल्क कानूनी सहायता भी दी जाएगी

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने ’मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ’ को किया रवाना 

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की पहल पर प्रदेश की महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों और कानूनों की जानकारी देकर जागरूक करने और उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ यात्रा शुरू की गई है। मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ यात्रा की शुरूआत दुर्ग जिले के पाटन ब्लॉक के करसा गांव से हुई। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने हरेली तिहार के अवसर पर गुरूवार को करसा गांव से ’मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। शुभारंभ के पहले दिन यह रथ मुख्यमंत्री श्री बघेल के विधानसभा क्षेत्र ग्राम करसा, जामगांव एम और अमलेश्वर पहंुचा और महिलाओं को जागरूक किया। 

प्रारंभिक चरण में महतारी न्याय रथ दुर्ग जिले के महिला बाल विकास विभाग के आठ सेक्टरों में भ्रमण करेगा। यात्रा के दूसरे दिन महतारी न्याय रथ दुर्ग जिले के तेलीगुंडरा, असोगा, रानीतराई और झीठ गांव पहुंचा और महिलाओं को उनके विधिक अधिकारों से जागरूक कराया। इसके बाद न्याय रथ जिले के दरबारमोखली, जामगांव आर, गाडाडीह और सेलूद पहुंचेगा। 

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. नायक ने बताया कि रथ के माध्यम से लोगों को राष्ट्रीय विधिक जागरूकता पर बनी चयनित और पुरस्कृत लघु फिल्में दिखाई जाएंगी। यह रथ गांव-गांव में भ्रमण कर महिलाओं के कानूनी प्रावधानों और उनके संवैधानिक अधिकारों के बारे में अवगत कराएगा। इसके लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पुरस्कृत कानून संबंधी फिल्में उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें मुख्य रूप से भोर के किरण (टोनही प्रताड़ना), नन्ही परी (भ्रूण हत्या), कैसे कहूं ना (नशामुक्ति), ‘‘बोलते दरख्त’’ (मानव तस्करी), भंवर (साइबर क्राइम), खुशी (पास्को एक्ट, घरेलु हिंसा गुडटच, बैडटच), फुलवा (घरेलु हिंसा और नशा), ‘‘अधिकार किसका’’ (प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण, दहेज प्रताड़ना), सार्थक (बालश्रम और बंधवा मजदूरी) फिल्में शामिल हैं। इसके साथ ही स्त्री शिक्षा, नाबालिकों का विवाह और उनका घर से भाग जाना जैसे विषयों को भी इसमें शामिल किया गया है।

डॉ. नायक ने बताया कि प्रथम चरण में न्याय रथ प्रदेश के नौ जिलों में जाएगा। महतारी न्याय रथ का संचालन जिलों को प्राप्त डीएमएफ राशि से किया जा रहा है। इस अभियान के तहत महिलाओं को निःशुल्क कानूनी सहायता भी दी जाएगी। प्रत्येक महतारी न्याय रथ में 2 अधिवक्ता भी होंगे, जो महिलाओं की समस्याओं को सुनकर उन्हें जानकारी और सलाह देंगे। न्याय रथ के माध्यम से महिलाएं आवेदन भी दे सकेंगी। प्राप्त आवेदनों का महिला आयोग द्वारा निराकरण किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार ने डीएमएफ पॉलिसी में विशेष बदलाव किए हैं।


इतिहास में पहली बार कोई कलेक्टर पहुँचा पहाड़ी कोरवा... शासन द्वारा संचालित योजनाओं के संबंध में जानकारी दी

इतिहास में पहली बार कोई कलेक्टर पहुँचा पहाड़ी कोरवा... शासन द्वारा संचालित योजनाओं के संबंध में जानकारी दी

30-Jul-2022

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

छाता लेकर घर-घर जाकर मिले पहाड़ी कोरवा परिवारों से जाना उनका हाल

हाट बाजार पहुंचकर छोटे बच्चों के लिए खरीदे कॉपिया और चॉकलेट

बलरामपुर : बलरामपुर के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया जब पहली बार कोई कलेक्टर पहाड़ी कोरवा उनसे मिलने उनके घर पहुंचा जी हां हम बात कर रहे हैं बलरामपुर कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. की कलेक्टर आज पहाड़ी कोरवाओ से मिलने दूरस्थ पहाड़ी कोरवा बाहुल्य ग्राम रकैया पहुंचे झमाझम बारिश के बीच कलेक्टर ने पैदल छाता लेकर घर-घर जाकर वहां पर लोगों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना इतना ही नहीं वहां पर बैठी बुजुर्ग महिला के घर जाकर उनका स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और स्वास्थ्य विभाग को जल्दी यहां कैंप लगाकर इलाज की सुविधा मुहैया कराने के निर्देश दिए, इतना ही नहीं कलेक्टर पहाड़ी कोरवा हाट बाजार पहुँचे और वहां से पहाड़ी कोरवा बच्चों के लिए कॉपियां और चॉकलेट खरीदी साथ ही उन्होंने वहां मौजूद पहाड़ी कोरवा लोगों के साथ काफी समय बिताया और जमीन पर बैठकर उनका हाल समाचार जाना साथ ही उनके बच्चों को बिस्किट और मिठाइयां भी बांटी।

दरअसल आज कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. दूरस्थ पहाड़ी कोरवा बाहुल्य ग्राम रकैया पहुंचे उन्होंने पैदल ही गांव का भ्रमण कर गांव में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. की नजर अपने घर के बरामदे में अपने नौनिहाल साथ बैठी पहाड़ी कोरवा महिला सुखनी पर पड़ी, कलेक्टर ने सुखनी से चर्चा करते हुए कहा कि अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहते हुए अपने बच्चे का ध्यान रखें। जिसके बाद कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. पहाड़ी कोरवा ग्रामीण चमरू के बुलावे पर उसके घर पहुंचे। कलेक्टर ने चमरू के परिवारजनों से परिचय प्राप्त कर उनका हालचाल जाना तथा विषेष पिछड़ी जनजाति के लिए शासन द्वारा संचालित योजनाओं के संबंध में जानकारी दी।

  कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने रकैया में ग्रामीणों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य के बारे जानकारी लेते हुए कहा कि वर्षा का समय है बच्चों को पानी में भींगने न दें, इससे कई प्रकार की मौसमी बीमारी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि सर्दी-जुकाम व बुखार से ग्रसित होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर अपना इलाज करायें। कलेक्टर ने कृषकों से खेती-बाड़ी की जानकारी ली, उन्होंने जिले में अल्प वर्षा को देखते हुए कृषकों से अल्प अवधि में तैयार होने वाले फसल लगाने को कहा, इसके लिए उन्होंने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से कृषकों को सहयोग करने के निर्देष दिये। कलेक्टर ने कृषि विभाग के एसएडीओ से किसान सम्मान निधि हेतु कृषकों की पंजीयन की जानकारी लेते हुए सभी कृषकों का किसान सम्मान निधि हेतु पंजीयन कराने तथा सभी कृषकों का फसल बीमा कराने के निर्देष दिये। कलेक्टर ने ग्रामीणों से शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने आग्रह किया, साथ ही ग्रामीणों से स्कूली बच्चों को नियमित स्कूल भेजने को कहा। इस दौरान उन्होंने बुजुर्ग ग्रामीणों से वृद्धा पेंषन के संबंध में जानकारी ली।

इस अवसर पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती रीता यादव, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री शषि चौधरी, तहसीलदार श्री सुरेष राय, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत श्री संजय दुबे, खण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ. आफताब अंसारी सहित विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।


संयमित दिनचर्या और संतुलित खानपान बचाता है कई बीमारियों से

संयमित दिनचर्या और संतुलित खानपान बचाता है कई बीमारियों से

30-Jul-2022

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

कीटनाशक, प्रदूषण, मोटापा तथा शारीरिक श्रम व व्यायाम की कमी भी जीवन-शैली से जुड़े रोगों के लिए जिम्मेदार

मधुमेह, उच्च रक्तचाप व हृदय रोगों के बचने के लिए वसायुक्त खाद्य पदार्थों, जंक-फूड, कोल्डड्रिंक्स, मांसाहार, मद्मपान और धूम्रपान से करें परहेज

रायपुर : आधुनिक जीवन-शैली, अनियमित दिनचर्या और खानपान के कारण एक बड़ी आबादी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रही है। किशोर और युवा भी इनकी चपेट में आ रहे हैं। जीवन-शैली से जुड़े इन रोगों के लिए मुख्यतः अनुवांशिक, हमारी खानपान से जुड़ी आदतें और अनियमित दिनचर्या जिम्मेदार हैं। लोगों में वसायुक्त भोजन, फास्ट-फूड, मांसाहार, शराब और धूम्रपान का सेवन बढ़ रहा है। इनके शौकीनों में ज्यादातर किशोर और युवा भी हैं। इसके अलावा फसलों में कीटनाशकों का अधिकाधिक उपयोग, प्रदूषण, शारीरिक श्रम या व्यायाम का अभाव तथा मोटापा भी इन रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ा रहा है।

शासकीय आयुर्वेद कॉलेज, रायपुर के सह-प्राध्यापक डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि जीवन-शैली से जुड़े रोगों से बचाव संयमित दिनचर्या और संतुलित खानपान से ही हो सकता है। आज की पीढ़ी खानपान और दिनचर्या के प्रति लगातार लापरवाही बरत रही है। फलस्वरूप कम उम्र में ही लोग उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगों का शिकार हो रहे हैं। युवाओं में इन बीमारियों का प्रमुख कारण मोटापा भी है जो जंक-फूड, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब और मांसाहार के कारण बढ़ रहा है। किशोर व युवा लगातार इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की गिरफ्त में रहते हैं और वे रात में देर तक जागते हैं। इनका प्रभाव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

शोध से यह पता चला है कि मानसिक स्वास्थ्य का असर सीधे तौर पर इन जीवन-शैली से जुड़ी बीमारियों में होता है। इन रोगों के उपचार के लिए आजीवन दवाईयां, नियमित रूप से चिकित्सक के परामर्श में रहने, नियंत्रित खानपान और संयमित दिनचर्या अपनाने की जरूरत होती है। आमतौर पर यह देखा जाता है कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगों के मरीज बिना चिकित्सक के परामर्श के दवाईयां बंद कर देते हैं। फलस्वरूप उन्हें आपात स्थितियों का सामना करना पड़ता है। कई बार यह जानलेवा साबित होता है। लोगों को इस बारे में जागरूक होना होगा कि ये बीमारियां जड़ से खत्म नहीं होतीं, बल्कि दवाओं, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम व योग के द्वारा नियंत्रित होती है। अत‌एव सावधानी जरूरी है।

डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि चूंकि ये बीमारियां मनो-दैहिक यानि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हैं, इसलिए इन रोगों के बचाव में आयुर्वेद और योग कारगर है। इस पद्धति में विभिन्न ऋतुओं के लिए खानपान और दिनचर्या निर्धारित हैं। इन्हें अपनाकर तथा पंचकर्म, रसायन चिकित्सा, आचार रसायन, नियमित व्यायाम, योग व ध्यान के द्वारा जीवन-शैली गत रोगों से बचाव संभव है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों के बचाव के लिए शाकाहारी भोजन जिसमें मिश्रित अनाज की रोटी, अरहर या मूंग की दाल, कोदो या ब्राउन चांवल, करेला, सहजन यानि मुनगा, तरोई, हरी तरकारी, करी पत्ते, अदरक, मेथी, लहसुन, गुणमार, जामुन, आंवला इत्यादि का सेवन करना चाहिए तथा वसायुक्त खाद्य पदार्थ, जंक-फूड, कोल्डड्रिंक्स, मांसाहार, मद्मपान और धूम्रपान का परहेज आवश्यक है। इसके अलावा शक्कर और नमक का संतुलित मात्रा में उपयोग करना चाहिए। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में इन रोगों के बचाव और नियंत्रण के लिए अनेक प्रकार के रसायन और औषधियां भी उपलब्ध हैं जिनका प्रयोग आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन एवं परामर्श में किया जाना चाहिए।


किसानों को 4340 करोड़ का ऋण वितरित...

किसानों को 4340 करोड़ का ऋण वितरित...

30-Jul-2022

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

रायपुर : चालू खरीफ-सीजन में किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण वितरण जारी है। इस साल किसानों को 5800 करोड़ का ऋण दिए जाने का लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 4340 करोड़ 18 लाख रूपए का ऋण वितरित किया जा चुका है, जो बीते वर्ष खरीफ सीजन में इसी अवधि का किसानों को प्रदाय 3378 करोड़ 91 लाख रूपए के ऋण का 112 प्रतिशत है। 


भूकंप से घायल कर्मचारियों को मिले बेहतर चिकित्सा सुविधाएं... मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

भूकंप से घायल कर्मचारियों को मिले बेहतर चिकित्सा सुविधाएं... मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

29-Jul-2022

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने चरचा कालरी क्षेत्र में आए भूकंप से घायल 2 कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने अधिकारियों को दिये निर्देश

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने एसईसीएल के चरचा कालरी क्षेत्र में कल रात भूकंप की घटना में घायल दो कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया है।

    गौरतलब है कि गत रात्रि माइनिंग क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे दो कर्मचारी भूकम्प के कम्पन महसूस होने पर भागने के क्रम में घायल हो गए। जिनका उपचार बिलासपुर जिले के अपोलो अस्पताल में कराया जा रहा है, अभी उनकी स्थिति पहले से बेहतर है। भूकंप की तीव्रता 4.6 रिक्टर मापी गई हैं।


डॉ मृणालिका ओझा को दिया जाएगा 'समाज श्री' सम्मान

डॉ मृणालिका ओझा को दिया जाएगा 'समाज श्री' सम्मान

28-Jul-2022

राजेन्द्र ओझा 

रायपुर : विश्व हिन्दी साहित्य सेवा संस्थान,  प्रयागराज ( उत्तर प्रदेश) के द्वारा 24 सितम्बर को महाराष्ट्र के अहमदनगर में आयोजित होने वाले अपने राष्ट्रीय सम्मेलन में रायपुर ( छत्तीसगढ़ ) की डॉ. मृणालिका ओझा को समाज श्री सम्मान / उपाधि से सम्मानित किया जाएगा।

       संस्था के सचिव डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने एक पत्र के माध्यम से यह सूचित करते हुए यह भी बताया कि देश भर के 15 से ज्यादा लोगों को पत्रकारिता, हिन्दी सेवा, समाज सेवा आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 'समाज श्री', 'सम्पादक श्री', 'पत्रकार श्री', 'कला श्री', 'शिक्षक श्री', 'साहित्य श्री' आदि सम्मानों से सम्मानित किया जाएगा।

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अरे आप तो 60 साल के जवान हैं.....ऐसे गेड़ी चढ़ते मैं आज तक किसी को नहीं देखा : मुख्यमंत्री बघेल

अरे आप तो 60 साल के जवान हैं.....ऐसे गेड़ी चढ़ते मैं आज तक किसी को नहीं देखा : मुख्यमंत्री बघेल

28-Jul-2022

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

हरेली पर तीरथराम को सीएम से मिलने की ऐसी ललक कि दो साल से गेड़ी पर कर रहे थे 10 किलोमीटर का सफर

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को पता चला तो तत्काल पास बुलाया और देखा तीरथराम का हुनर, प्रशंसा भी की

रायपुर : अरे आप तो 60 साल के जवान हैं। जरा दिखाओ तो गेड़ी पर अपना हुनर। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को जब पता चला कि बुजुर्ग तीरथ राम सिन्हा पिछले दो साल से गेड़ी पर चढ़कर उनसे मिलने आ रहे हैं तो उन्होंने तत्काल तीरथराम को मिलने के लिये बुलाया और आत्मीयता से बात की। दरअसल गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास में हरेली तिहार के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन था। जिसमें रायपुर समेत राज्यभर के लोग शिरकत करने आते हैं। ऐसे ही एक शख्स तीरथराम सिन्हा हैं, जो रायपुर जिले से 10 किलोमीटर दूर जोरा गांव में रहते हैं। वे बताते हैं कि मैं पिछले दो साल से लगातार हरेली तिहार में मुख्यमंत्री जी से मिलने आ रहा था लेकिन मुलाकात नहीं हो पा रही थी। लेकिन आज मुख्यमंत्री जी को मेरे बारे में जानकारी हुई तो उन्होंने स्वयं निवास के अंदर बुलवाया और मुझसे बात की। तीरथराम ने मुख्यमंत्री को बताया कि मैं जोरा से 10 किलोमीटर तक गेड़ी चढ़कर आया हूं और आपको गेड़ी पर चलकर दिखाना चाहता हूं। इस मुख्यमंत्री ने कहा कि जरा दिखाओ अपना हुनर। तीरथराम तत्काल उछलकर दोनों गेड़ी पर एक साथ चढ़ गये। उनके इस हुनर को देखकर मुख्यमंत्री बोल पड़े अरे वाह आप तो 60 साल के जवान हैं। मुख्यमंत्री से मिलने के बाद तीरथराम ने कहा कि आज मिलकर बहुत अच्छा लगा। प्रदेश के मुखिया ने स्वयं संज्ञान लेकर मुझे मिलने बुलाया ये मेरे लिये बहुत बड़ी बात है।


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया... शुभकामनाएं दी

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया... शुभकामनाएं दी

28-Jul-2022

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज अपने निवास  परिसर से मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और शुभकामनाएं दी।  राजगीत से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य के संबंध में शपथ भी दिलाई ।

इस मौके पर महिला एवं बाल विकास  मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, उद्योग मंत्री श्री कावासी लखमा, खाद्य मंत्री श्री अमरजीत भगत, वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत राजेश्री राम सुंदर दास, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ किरणमई नायक, विधायक श्री सतनारायण शर्मा, राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री रामगोपाल अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।


जन संस्कृति मंच का आयोजन : 31 जुलाई को प्रेमचंद जयंती पर कहानी पाठ और विमर्श...

जन संस्कृति मंच का आयोजन : 31 जुलाई को प्रेमचंद जयंती पर कहानी पाठ और विमर्श...

27-Jul-2022

राजकुमार सोनी 

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रायपुर : जन संस्कृति मंच की रायपुर ईकाई द्वारा 31 जुलाई को कथा और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर कहानी पाठ और विमर्श का आयोजन किया गया है. स्थानीय वृंदावन हॉल में शाम साढ़े पांच बजे लब्ध प्रतिष्ठित कथाकार जया जादवानी और हरि भटनागर अपनी कहानियों का पाठ करेंगे.कार्यक्रम की अध्यक्षता देश के सुप्रसिद्ध आलोचक जय प्रकाश करेंगे जबकि कहानियों पर टिप्पणी जसम रायपुर के अध्यक्ष और कथाकार आनंद बहादुर की होगी. प्रेमचंद का देश : कल आज और कल विषय पर युवा आलोचक भुवाल सिंह का व्याख्यान होगा. कार्यक्रम का संचालन अमित चौहान करेंगे.

इस मौके पर जन संस्कृति मंच की राष्ट्रीय ईकाई से संबंद्ध प्रसिद्ध आलोचक प्रोफेसर सियाराम शर्मा, लेखिका कल्पना मिश्रा, जसम रायपुर के सचिव मोहित जायसवाल, युवा आलोचक इंद्र कुमार राठौर, वसु गंधर्व, अजुल्का, बृजेंद्र तिवारी, नरोत्तम शर्मा, सृष्टि आलोक, कमलेश्वर साहू, उपन्यासकार किशन लाल, अखिलेश एडगर, डाक्टर दीक्षित, संस्कृतिकर्मी सुलेमान खान, अप्पला स्वामी, शंकर राव, उमेश बाबू, संतोष बंजारा, राजेंद्र पेठे, अशोक तिवारी, घनश्याम त्रिपाठी और राजकुमार सोनी सहित रायपुर-दुर्ग-भिलाई के अनेक साहित्यकार और संस्कृतिकर्मी विशेष रुप से मौजूद रहेंगे.

गौरतलब है कि लेखकों और संस्कृतिकर्मियों के सबसे महत्वपूर्ण संगठन जन संस्कृति मंच की रायपुर ईकाई का गठन इसी साल 3 मई 2022 को किया गया है. इस ईकाई ने पिछले दिनों चर्चित मार्क्सवादी विचारक रामजी राय  की पुस्तक मुक्तिबोध: स्वदेश की खोज का विमोचन कार्यक्रम आयोजित किया था जो बेहद सफल था. ईकाई द्वारा आगामी 13 अगस्त को एक काव्य गोष्ठी भी रखी गई है. इस आयोजन के बाद ईकाई से जुड़े सभी पदाधिकारी और सदस्य राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों में जुट जाएंगे जो 8 और 9 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में होगा. इस दौरान देशभर के तीन सौ से ज्यादा लेखक और संस्कृतिकर्मी फासीवाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे.


छत्तीसगढ़ मा हरेली तिहार के धूम... गौमूत्र खरीदी के होही सुरूआत

छत्तीसगढ़ मा हरेली तिहार के धूम... गौमूत्र खरीदी के होही सुरूआत

27-Jul-2022

लेख- तेजबहादुर सिंह भुवाल, सहायक सूचना अधिकारी

’हरेली तिहार ले ‘‘गौमूत्र खरीदी’’ के होही सुरूआत’

’आत्मनिर्भरता अउ रोजगार बढ़ाए बर एक अउ प्रयास’

रायपुर : छत्तीसगढ़ के गांव-गवई के मनखे मन के जिन्दगी मा रचे-बसे हे खेती किसानी। अउ इही खेती किसानी से जुड़े हे हमर पहली तिहार हरेली। छत्तीसगढ़ मा लोक संस्स्कृति, परम्परा ले जुड़े अउ सहेजे बर ये तिहार ला सब्बो लोगन मन हंसी, खुसी, आस्था, प्रेम व्यवहार अउ धूमधाम से मनाथे। इही दिन ले तिहार के   सुरूआत हो जथे। सावन के आये ले चारो मुड़ा हरियर-हरियर रूख, राही, पेड़, झाड़, खेत-खलियान हा मन ला मोह डारथे। ये तिहार ला किसान मन खेती के बोआई, बियासी के बाद मनाथे। जेमा जुड़ा, नागर, गैंती, कुदाली, फावड़ा ला चक उज्जर करके रखथे अउ गौधन के पूजा-पाठ करथे संग मा कुलदेवी-देवता, इन्द्र देवता, ठाकुर देव ला घलो सुमरथे। ये दिन किसान मन हवा, पानी अउ भुईयां ला सुघ्घर बनाये राखे बर और सुख-सांति बनाये रखे के प्रार्थना करथे। बैगा मन रात में गांव के सुरक्षा करे बर पूजा-पाठ करथे। धान के कटोरा छत्तीसगढ़ महतारी ला किसान मन खेती-किसानी के बढ़त और बिकास बर सुमरथे। येखर सेती तो हमर छत्तीसगढ़ के बात ही कुछ अलग हे-

‘‘अरपा पैरी के धार
महानदी हे अपार
इंद्रावती ह, पखारय तोर पईयां
महू पांवे परव तोरे भुइया
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मईयां’’

ऐसे लागथे जैसे कि हमर छत्तीसगढ़ महतारी हा हरियर लुगरा पहिन के रंग-बिरंगी फूल, माला में सजे, अंग-अंग मा नदिया-नरवा समाए, धन-धान्य ले धरे हवये, अउ आसीरबाद देवत हे।
छत्तीसगढ़ मं ये बखत हरेली तिहार म खुसहाली कई गुना बढ़ही। राज्य सासन हा अपन महत्वाकांक्षी योजना ‘‘गोधन न्याय योजना’’ के सुरूआत 2020 में करे रिहिस। इहीं योजना ला आगे बढ़ावत हरेली तिहार ले ‘‘गो-मूत्र खरीदी’’ करे के सुरूआत करत हवए। प्रदेस के मुख्यमंत्री हा ग्रामीण अर्थव्यवव्था का सुदृढ़ करे बर ‘‘सुराजी गांव योजना’’ चालू करके किसान मन बर उखर नदाये लोक संस्कृति अउ पारंपरिक चिन्हारी ला वापस लाए के प्रयास करत हे। सासन के प्रयास हे कि प्रदेस के लईका मन हा अपने भुईया, संस्कृति, आस्था, परम्परा ला जानय, समझये अउ बचा के राखे राहय।

सासन हा ‘‘गोधन न्याय योजना’’ ले किसान मन ला रोजगार के अवसर अउ आर्थिक रूप ले लाभ पहुचावत हे। सासन हा राज्यभर के गोठान म गोवंसीय पसु के पालक मन ले गोबर ला सासकीय दर 2 रूपया किलो में लेवत हे। इही गोबर ला बने सुघ्घर खातू बनाके 10 रूपया किलो में किसान मन ला बेचे जावत हे। गोबर ले गमला, पेंट अउ कतको सामान बना के बेचत हे। सासन हा हरेली तिहार ले योजना ला आगे बढ़ावत ‘‘गोमूत्र खरीदी’’ करे के निर्णय लेहे। गौठान मन में गौ-मूत्र ला 4 रूपया लीटर में खरीदे जाही। ये गौ-मूत्र ले जीवामृत अउ खेती-किसानी के बउरे बर दवई बनाए जाही। येखर ले किसान अउ मजदूर मन ला काम-बूता अउ ज्यादा कमाये के नफा घलो मिलही। येखर ले जैविक खेती ला बढ़ावा मिलही अउ किसान मन ला खेती-किसानी करे बर खरचा कम लगही। खेत में पैदावारी घलोक बढ़ही।

अवईया साल मा योजना ले अउ जैविक खेती ला बढ़ावा मिलही, सासन के प्रयास ले गांव अउ सहर म रोजगार बढ़त जाही। गौपालन अउ गौ-सुरक्षा ला प्रोत्साहन के संगे-संग पसुपालक मन ला आर्थिक लाभ घलोक होही। सासन के प्रयास से ऐसे लगथे कि हमर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज के सपना अब आत्मनिर्भर गांव के रूप मा छत्तीसगढ़ में साकार होवत दिखत हे।

सासन ह ‘‘गोधन न्याय योजना’’ लागू करके पसुपालक मन के आय म वृद्धि, पसुधन विचरण अउ खुल्ला चरई म रोक, जैविक खाद के उपयोग ला बढ़ावा अउ रासायनिक खातू के उपयोग म कमी, गांव-गांव म जैविक खाद के उपलब्धता बनाये बर, स्थानीय स्व सहायता समूह ला रोजगार दे बर, भुइंया ल अउ उपजाउ बनाए बर, जहर रहित अन्न उपजाए बर अउ सुपोषण ल बढ़ाए बर जोर देवत हे।

राज्य के महत्वाकांक्षी योजना ‘‘नरवा, गरूवा, घुरूवा व बाडी’’ के माध्यम से मनरेगा अउ स्व सहायता समूह में सबे झन ला जोड़ के काम करत हे। ऐखरे सगे-संग ‘‘गोधन न्याय योजना’’ से गोठान मा बड़े संख्या मा रोजगार उपलब्ध कराये जात हे। कोनो मजदूर, किसान ला गांव-सहर छोड़ के जाए के जरूरत नई पड़ये। सब्बो झन ला सुघ्घर काम-बूता मिलत हे।
त बताओ संगवारी हो ये सब खुसी मिलही त हमर पहिली हरेली तिहार ला बने मनाबो ना। तिहार ला खेती-किसानी के बोअई, बियासी के बाद बने सुघ्घर मनाबो। जेमा नागर, गैंती, कुदारी, फावड़ा ला चक उज्जर करके अउ गौधन के पूजा-पाठ करके संग मा कुलदेवी-देवता ला सुमरबो। धान के कटोरा छत्तीसगढ़ महतारी ला, हमर खेती-किसानी के उन्नति अउ विकास बर सुमरबो।

तिहार में गांव मा घरो-घर गुड़-चीला, फरा के संग गुलगुला भजिया, ठेठरी-खुरमी, करी लाडू, पपची, चौसेला, अउ बोबरा घलो बनही। जेखर ले हरेली तिहार के खुसी अउ बढ़ जाही। ये साल हरेली अमावस्या गुरूवार के पड़त हे। सब किसान भाई मन अपन किसानी औजार के पूजा-पाठ कर गाय-बैला ला दवई खवाही, ताकि वो हा सालभर स्वस्थ अउ सुघ्घर रहाय। ये दिन गाय-गरवा मन ला बीमारी ले बचाय बर बगरंडा, नमक खवाही अउ आटा मा दसमूल-बागगोंदली ला मिलाके घलो खवाये जाथे। ये दिन शहर के रहईयां मन घलो अपन-अपन गांव जाके तिहार ला मनाथे।

हरेली तिहार मा लोहार अउ राऊत मन घरो-घर दुआरी मा नीम के डारा अउ चौखट में खीला ठोंकही। ऐसे केहे जाथे कि अइसे करे ले घर के रहैय्या मन के संकट ले रक्षा होथे। ये दिन लईका मन बांस ले गेड़ी बनाथे। गेड़ी मा चढ़के लईका मन रंग-रंग के करतब घलो दिखाते। राज्य सासन  हा गांव-गांव अउ स्कूल मा विसेस आयोजन करत हे, जेमा गांव मा लईका मन बर गेड़ी दउड़, खो-खो, कबड्डी, फुगड़ी, नरियल फेक अउ नाचा के आयोजन घलो करे जाथे। ये प्रयास के उद्देश्य हे कि प्रदेस के लईका मन ला हमर लोक संस्कृति, परम्परा ला जानये, समझये, जुड़ये अउ सहेज के राखये राहेय।

छत्तीसगढ़िया मन ल हरेली तिहार के गाड़ा-गाड़ा बधई, जय छत्तीसगढ़ महतारी।


प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का लोकपर्व: हरेली

प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का लोकपर्व: हरेली

26-Jul-2022

छत्तीसगढ़ में जैविक खेती और आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय

रायपुर : छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जन-जीवन में रचा-बसा खेती-किसानी से जुड़ा पहला त्यौहार है, हरेली। सावन मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह त्यौहार वास्तव में प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का लोकपर्व है। हरेली के दिन किसान अच्छी फसल की कामना के साथ धरती माता का सभी प्राणियों केे भरण-पोषण के लिए आभार व्यक्त करते हैं। सभी लोग बारिश के आगमन के साथ चारो ओर बिखरी हरियाली और नई फसल का उत्साह से स्वागत करते हैं। 

हरेली पर्व को छोटे से बड़े तक सभी उत्साह और उमंग से मनाते हैैं। गांवों में हरेली के दिन नागर, गैती, कुदाली, फावड़ा समेत खेती-किसानी से जुड़े सभी औजारों, खेतों और गोधन की पूजा की जाती है। सभी घरों में चीला, गुलगुल भजिया का प्रसाद बनाया जाता है। पूजा-अर्चना के बाद गांव के चौक-चौराहों में लोगों को जुटना शुरू हो जाता है। यहां गेड़ी दौड़, नारियल फेक, मटकी फोड़, रस्साकशी जैसी प्रतियोगिताएं देर तक चलती रहती हैं। लोग पारंपरिक तरीके से गेड़ी चढ़कर खुशियां मनाते हैं। माना जाता है कि बरसात के दिनों में पानी और कीचड़ से बचने के लिए गेड़ी चढ़ने का प्रचलन रहा है, जो समय के साथ परम्परा में परिवर्तित हो गया। इस अवसर पर किया जाने वाला गेड़ी लोक नृत्य भी छत्तीसगढ़ की पुरातन संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है। हरेली में लोहारों द्वारा घर के मुख्य दरवाजे पर कील ठोककर और नीम की पत्तियां लगाने का रिवाज है। मान्यता है कि इससे घर-परिवार अनिष्ट से बचे रहते हैं। 
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर माटी से जुड़ी अपनी गौरवशाली संस्कृति और परम्परा को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की पहल की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री निवास सहित पूरे राज्य में लोकपर्वों के धूम-धाम से सार्वजनिक आयोजन कर इसकी शुरूआत की है। इससे नई पीढ़ी के युवा भी अपनी पुरातन परम्पराओं से जुड़ने लगे हैं। सरकार ने हरेली त्यौहार के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस साल से प्रदेश के स्कूलों में हरेली तिहार को विशेष रूप से मनाने की शुरूआत की जा रही है। इससे बच्चे न सिर्फ अपनी कृषि संस्कृति को समझेंगे, उसका सक्रिय हिस्सा बनेंगे बल्कि अपनी संस्कृति के मूल भाव को आत्मसात भी कर सकेंगे। साथ ही स्कूलों में गेड़ी दौड़, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण पर संगोष्ठी जैसे आयोजनों से बच्चों में अपनी संस्कृति और प्रकृति के प्रति प्रेम विकसित होगा।   
 
छत्तीसगढ़ में पारंपरिक लोक मूल्यों को सहेजते हुए गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार रूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में पारंपरिक संसाधनों के उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया जा रहा है। इसके चलते राज्य सरकार ने दो साल पहले सन् 2020 में हरेली के दिन ‘गो-धन न्याय योजना‘ शुरू की थी। शुरूआत में किसी ने कल्पना नहीं की थी, कि गोबर खरीदी की यह योजना गांवों की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी। आज यह ग्रामीण अंचल की बेहद लोकप्रिय योजना साबित हुई है। इस अनूठी योजना के तहत सरकार ने गोबर को ग्रामीणों की आय का नया जरिया बनाया और किसानों और पशुपालकों से दो रूपए की दर से गोबर खरीदी शुरू की। पशुपालक ग्रामीणों ने गोबर बेचकर पिछले दो सालों में 150 करोड़ रूपये से अधिक की कमाई की है। खरीदे गए गोबर से गौठानों में स्व-सहायता समूहों ने 20 लाख क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया है, जिससे प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है। अब तक महिला समूह और गौठान समितियां 143 करोड़ से अधिक की राशि वर्मी खाद के निर्माण और विक्रय से प्राप्त कर चुकी हैं। इसके साथ ही गौठानों में गोबर से दिए, गमले सहित विभिन्न सजावटी समान बनाने से स्थानीय महिलाओं को रोजगार का नया साधन मिला है।  
 गोधन न्याय योजना को विस्तार देते हुए राज्य सरकार इस साल हरेली तिहार से गौठानों में 4 रूपए प्रति लीटर की दर से गो-मूत्र की खरीदी की शुरूआत करने जा रही है। इस गो-मूत्र से महिला स्व-सहायता समूह द्वारा जीवामृत और कीट नियंत्रक उत्पाद तैयार किये जाएंगे। इससे रोजगार और आय का नया जरिया मिलने के साथ जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और कृषि लागत कम होगी। गौ-मूत्र से बने कीट नियंत्रक उत्पाद का उपयोग किसान भाई रासायनिक कीटनाशक के बदले कर सकेंगे, जिससे खाद्यान्न की विषाक्तता में कमी आएगी और महंगे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी। इन नवाचारों ने हरेली को प्रदेश में जैविक खेती और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अध्यायों का प्रतीक बना दिया है। इससे लगता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज का सपना अब आत्मनिर्भर गांवों के रूप में छत्तीसगढ़ में साकार हो रहा है। छत्तीसगढ़ में परंपराओं को सहेजते हुए उसे आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढालने की जो शुरूआत की गई है, उसे जरूरत है सबके सहयोग से आगे बढ़ाने की। प्रकृति से जुड़कर पर्यावरण अनुकूल विकास की दिशा में आगे बढ़ने का हमारा यह कदम बेहतर कल के लिए सर्वोत्तम योगदान होगा।



छत्तीसगढ़ में अब तक 528.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज...

छत्तीसगढ़ में अब तक 528.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज...

26-Jul-2022

रायपुर : राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बनाए गए राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष द्वारा संकलित जानकारी के मुताबिक एक जून 2022 से अब तक राज्य में 528.1 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। राज्य के विभिन्न जिलों में 01 जून से आज 26 जुलाई तक रिकार्ड की गई वर्षा के अनुसार बीजापुर जिले में सर्वाधिक 1357.4 मिमी और बलरामपुर जिले में सबसे कम 188.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी है।

राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक जून से अब तक सरगुजा में 207.5 मिमी, सूरजपुर में 278.1 मिमी, जशपुर में 260.3 मिमी, कोरिया में 305.7 मिमी, रायपुर में 360.7 मिमी, बलौदाबाजार में 497.5 मिमी, गरियाबंद में 598.8 मिमी, महासमुंद में 527.8 मिमी, धमतरी में 637.8 मिमी, बिलासपुर में 548.4 मिमी, मुंगेली में 568.4 मिमी, रायगढ़ में 491.2 मिमी, जांजगीर-चांपा में 628.0 मिमी, कोरबा में 410.8 मिमी, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 522.7 मिमी, दुर्ग में 503.8 मिमी, कबीरधाम में 501.0 मिमी, राजनांदगांव में 568.6 मिमी, बालोद में 665.8 मिमी, बेमेतरा में 366.4 मिमी, बस्तर में 679.1 मिमी, कोण्डागांव में 612.1 मिमी, कांकेर में 713.3 मिमी, नारायणपुर में 547.4 मिमी, दंतेवाड़ा में 708.3 मिमी और सुकमा में 530.8 मिमी औसत वर्षा रिकार्ड की गई।


प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का लोकपर्व: हरेली

प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का लोकपर्व: हरेली

26-Jul-2022

छत्तीसगढ़ में जैविक खेती और आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जन-जीवन में रचा-बसा खेती-किसानी से जुड़ा पहला त्यौहार है, हरेली। सावन मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह त्यौहार वास्तव में प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का लोकपर्व है। हरेली के दिन किसान अच्छी फसल की कामना के साथ धरती माता का सभी प्राणियों केे भरण-पोषण के लिए आभार व्यक्त करते हैं। सभी लोग बारिश के आगमन के साथ चारो ओर बिखरी हरियाली और नई फसल का उत्साह से स्वागत करते हैं।

हरेली पर्व को छोटे से बड़े तक सभी उत्साह और उमंग से मनाते हैैं। गांवों में हरेली के दिन नागर, गैती, कुदाली, फावड़ा समेत खेती-किसानी से जुड़े सभी औजारों, खेतों और गोधन की पूजा की जाती है। सभी घरों में चीला, गुलगुल भजिया का प्रसाद बनाया जाता है। पूजा-अर्चना के बाद गांव के चौक-चौराहों में लोगों को जुटना शुरू हो जाता है। यहां गेड़ी दौड़, नारियल फेक, मटकी फोड़, रस्साकशी जैसी प्रतियोगिताएं देर तक चलती रहती हैं। लोग पारंपरिक तरीके से गेड़ी चढ़कर खुशियां मनाते हैं। माना जाता है कि बरसात के दिनों में पानी और कीचड़ से बचने के लिए गेड़ी चढ़ने का प्रचलन रहा है, जो समय के साथ परम्परा में परिवर्तित हो गया। इस अवसर पर किया जाने वाला गेड़ी लोक नृत्य भी छत्तीसगढ़ की पुरातन संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है। हरेली में लोहारों द्वारा घर के मुख्य दरवाजे पर कील ठोककर और नीम की पत्तियां लगाने का रिवाज है। मान्यता है कि इससे घर-परिवार अनिष्ट से बचे रहते हैं।

    छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर माटी से जुड़ी अपनी गौरवशाली संस्कृति और परम्परा को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की पहल की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री निवास सहित पूरे राज्य में लोकपर्वों के धूम-धाम से सार्वजनिक आयोजन कर इसकी शुरूआत की है। इससे नई पीढ़ी के युवा भी अपनी पुरातन परम्पराओं से जुड़ने लगे हैं। सरकार ने हरेली त्यौहार के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस साल से प्रदेश के स्कूलों में हरेली तिहार को विशेष रूप से मनाने की शुरूआत की जा रही है। इससे बच्चे न सिर्फ अपनी कृषि संस्कृति को समझेंगे, उसका सक्रिय हिस्सा बनेंगे बल्कि अपनी संस्कृति के मूल भाव को आत्मसात भी कर सकेंगे। साथ ही स्कूलों में गेड़ी दौड़, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण पर संगोष्ठी जैसे आयोजनों से बच्चों में अपनी संस्कृति और प्रकृति के प्रति प्रेम विकसित होगा।    

छत्तीसगढ़ में पारंपरिक लोक मूल्यों को सहेजते हुए गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार रूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में पारंपरिक संसाधनों के उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया जा रहा है। इसके चलते राज्य सरकार ने दो साल पहले सन् 2020 में हरेली के दिन ‘गो-धन न्याय योजना‘ शुरू की थी। शुरूआत में किसी ने कल्पना नहीं की थी, कि गोबर खरीदी की यह योजना गांवों की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी। आज यह ग्रामीण अंचल की बेहद लोकप्रिय योजना साबित हुई है। इस अनूठी योजना के तहत सरकार ने गोबर को ग्रामीणों की आय का नया जरिया बनाया और किसानों और पशुपालकों से दो रूपए की दर से गोबर खरीदी शुरू की। पशुपालक ग्रामीणों ने गोबर बेचकर पिछले दो सालों में 150 करोड़ रूपये से अधिक की कमाई की है। खरीदे गए गोबर से गौठानों में स्व-सहायता समूहों ने 20 लाख क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया है, जिससे प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है। अब तक महिला समूह और गौठान समितियां 143 करोड़ से अधिक की राशि वर्मी खाद के निर्माण और विक्रय से प्राप्त कर चुकी हैं। इसके साथ ही गौठानों में गोबर से दिए, गमले सहित विभिन्न सजावटी समान बनाने से स्थानीय महिलाओं को रोजगार का नया साधन मिला है।  
 गोधन न्याय योजना को विस्तार देते हुए राज्य सरकार इस साल हरेली तिहार से गौठानों में 4 रूपए प्रति लीटर की दर से गो-मूत्र की खरीदी की शुरूआत करने जा रही है। इस गो-मूत्र से महिला स्व-सहायता समूह द्वारा जीवामृत और कीट नियंत्रक उत्पाद तैयार किये जाएंगे। इससे रोजगार और आय का नया जरिया मिलने के साथ जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और कृषि लागत कम होगी। गौ-मूत्र से बने कीट नियंत्रक उत्पाद का उपयोग किसान भाई रासायनिक कीटनाशक के बदले कर सकेंगे, जिससे खाद्यान्न की विषाक्तता में कमी आएगी और महंगे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी। इन नवाचारों ने हरेली को प्रदेश में जैविक खेती और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अध्यायों का प्रतीक बना दिया है। इससे लगता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज का सपना अब आत्मनिर्भर गांवों के रूप में छत्तीसगढ़ में साकार हो रहा है। छत्तीसगढ़ में परंपराओं को सहेजते हुए उसे आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढालने की जो शुरूआत की गई है, उसे जरूरत है सबके सहयोग से आगे बढ़ाने की। प्रकृति से जुड़कर पर्यावरण अनुकूल विकास की दिशा में आगे बढ़ने का हमारा यह कदम बेहतर कल के लिए सर्वोत्तम योगदान होगा।


बड़ी खबर : बीजापुर में नक्सलियों का उत्पात, तीन वाहनों को किया आग के हवाले...

बड़ी खबर : बीजापुर में नक्सलियों का उत्पात, तीन वाहनों को किया आग के हवाले...

25-Jul-2022

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा- जय प्रकाश ठाकुर

बीजापुर में नक्सलियों ने उत्पात मचाया है. यहां के पदेड़ा इलाके में नक्सलियों ने तीन वाहनों को आग के हवाले कर दिया. इस इलाके में टेलीफोन केबल बिछाने का कार्य किया जा रहा था. मारपीट के बाद नक्सलियों ने मजदूरों को छोड़ा है.

बीजापुर: बीजापुर में एक बार फिर नक्सलियों ने उत्पात मचाया है. यहां बीएसएनएल का फाइबर केबल बिछाने का काम चल रहा था. यहां पर नक्सलियों ने तीन वाहनों को आग के हवाले कर दिया. पुलिस ने इस नक्सली घटना की पुष्टि नहीं की है. बीजापुर थाने से करीब 15 किलोमीटर दूर पदेड़ा गांव के स्कूलपारा के आंगनबाड़ी में फाइबर केबल बिछाने गई बीएसएनएल की 1 जेसीबी और 2 पिकअप वाहन को नक्सलियों ने आग के हवाले कर दिया.

मजदूरों को नक्सलियों ने धमकाया: सूत्रों के मुताबिक नक्सलियों ने यहां काम कर रहे मजदूरों को पहले धमकाकर भगाया फिर वाहनों में आग लगा दी. शाम करीब 5 बजे इस घटना को अंजाम दिया गया है. दिन दहाड़े हुई इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में दहशत है. हालांकि पुलिस ने नक्सल वारदात होने की पुष्टि नहीं की है. लेकिन वह भी प्रथम दृष्टया इसे नक्सल घटना ही मान रही है. दूसरी तरफ नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले सोमवार से 29 जुलाई तक होने वाली सामूहिक हड़ताल का समर्थन किया है. इसे लेकर नक्सलियों ने बीजापुर में पर्चा भी फेंका है.


मुख्यमंत्री बघेल की अध्यक्षता में हुआ कैबिनेट की बैठक...

मुख्यमंत्री बघेल की अध्यक्षता में हुआ कैबिनेट की बैठक...

22-Jul-2022

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में विधानसभा परिसर स्थित उनके कार्यालय कक्ष में कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई।


होटल प्रबंधन संस्थान रायपुर के पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु युवाओं के लिए सुअवसर

होटल प्रबंधन संस्थान रायपुर के पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु युवाओं के लिए सुअवसर

22-Jul-2022

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

रायपुर : इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट नवा रायपुर के विभिन्न पाठ्यक्रमों में वर्तमान में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। यदि किसी ने कभी भी होटल उद्यम क्षेत्र में एक प्रोफेशनल होने का सपना देखा है और उसे जानने-समझने तथा विकसित करने की कोशिश की है। तो इस संस्थान के माध्यम से ऐसे युवक-युवतियां विशेषज्ञता और समझ हासिल करने तथा सही दृष्टिकोण एवं दक्षता विकसित करने हेतु वर्तमान में डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते है। जिसके तहत् त्रिवर्षीय बीएससी हॉस्पीटिलीटी एंड होटल एडमिनिस्ट्रेशन की 60 सीट और एक वर्षीय डिप्लोमा इन फूड प्रोडक्शन की 60 सीट तथा डिप्लोमा इन फूड एण्ड बेवरेज सर्विस सहित डिप्लोमा इन हाऊस कीपिंग ऑपरेशन की 40-40 सीट में प्रवेश लिया जा सकता है।

    ज्ञातव्य है कि इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट नवा रायपुर वर्ष 2020 में इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी के सहयोग से संचालित राष्ट्रीय होटल प्रबन्धन परिषद से सम्बद्ध राज्य का एकमात्र संस्थान है। प्रदेश में आतिथ्य उद्योग तीव्र गति से बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में सेवाएं देने के लिए कुशल युवाओं की आवश्यकता है। राज्य शासन द्वारा उक्त संस्थान के माध्यम से युवाओं के कौशल उन्नयन सहित विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इस संस्थान द्वारा गुणवत्तापूर्ण ज्ञान, उपयुक्त दृष्टिकोण और व्यावसायिक कौशलयुक्त उन्हे आतिथ्य उद्योग की आवश्यकतानुरूप प्रशिक्षित करना है ताकि इन युवाओं को होटल, रेस्टारेंट, संस्थागत खानपान, औद्योगिक खानपान प्रतिष्ठान आदि मंे रोजगार सुलभ हो सके। उक्त संस्थान के माध्यम से डिप्लोमा कोर्स के छात्र-छात्राओं को भोजन और बेवरेज सर्विसेस प्रस्तुत करना, आतिथ्य सत्कार, खाद्य एवं बेवरेज सर्विसेस की प्रस्तुतिकरण संबन्धी व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना, कार्य के दौरान अकस्मात परिस्थितियों से सामना करने एवं समाधान के तरीके ईत्यादि के बारे में अवगत कराया जाता है। 

इसके साथ ही रिसेप्शन एवं फ्रंट डेस्क, कक्ष आरक्षण, सेल्स एवं मार्केटिंग, हाऊसकीपिंग ईत्यादि प्रक्रियाओं में प्रशिक्षित किया जाता है। होटल प्रबन्धन संस्थान नवा रायपुर में छात्र-छात्राओं के तकनीकी ज्ञान को विकसित करने हेतु सुसज्जित कम्प्यूटर लैब, उनकी प्रस्तुतिकरण हेतु सुसज्जित कमरे और उन्मुखीकरण हेतु कार्यशाला आयोजन की व्यवस्था सुलभ है। इस संस्थान में युवक-युवतियों के लिए पृथक-पृथक छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं को आयु सीमा में अधिकतम 3 वर्ष की छूट दी जाती है। इस होटल प्रबन्धन संस्थान के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश संबन्धी आवश्यक जानकारी एवं परामर्श के लिए आगामी 05 अगस्त 2022 तक कार्यालय सहायक संचालक जिला कौशल विकास प्राधिकरण कोण्डागांव में संपर्क किया जा सकता है।


हरेली पर्व पर गौठानों में पारंपरिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन...

हरेली पर्व पर गौठानों में पारंपरिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन...

22-Jul-2022

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

कांकेर : इस वर्ष हरेली पर्व के अवसर पर 28 जुलाई को जिले के गौठानों में पारंपरिक कार्यक्रम जैसे- गेड़ी दौड़, कुर्सी दौड़, फुगड़ी, रस्सा-कस्सी, भौंरा, नारियल, छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजन इत्यादि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायेगा। गौठान प्रबंधन समिति द्वारा स्व-सहायता समूह, ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों से गौठान की गतिविधियों के संबंध में चर्चा कराई जायेगी। खरीफ फसलों के सुरक्षा हेतु पशुओं को गौठान में लाने हेतु प्रोत्साहित किया जायेगा तथा पशु चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जायेगा। गौठान में क्रय किये जा रहे गोबर, उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट के रख-रखाव, सुरक्षा के समुचित प्रबंधन जैसे-छायादार चबूतरा, तिरपाल आदि के माध्यम से बचाव के संबंध में जागरूक किया जायेगा। वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन विक्रय एवं फसल में उपयोग व फायदे के संबंध में कृषकों को जानकारी दी जायेगी तथा गौठान में फलदार, छायादार वृक्षारोपण विशेषकर कदम के पौध रोपण करने हेतु प्रेरित किया जायेगा।

 


आवारा घूमने वाले पशुओं के मालिक पर होगी कड़ी कार्यवाही...

आवारा घूमने वाले पशुओं के मालिक पर होगी कड़ी कार्यवाही...

22-Jul-2022

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

पहले समझाइश फिर अर्थदंड फिर जेल पशुओं को आवारा घूमने के लिए छोड़ने पर पशुपालकों पर होगी कड़ी कार्यवाही जिला स्तरीय पशु क्रुरता निवारण समिति की बैठक संपन्न

बलरामपुर : कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के अध्यक्षता में संयुक्त जिला कार्यालय भवन के सभा कक्ष में जिला स्तरीय पशु क्रुरता निवारण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पशु क्रुरता निवारण अधिनियम तथा पशु कल्याण के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर ने नगरीय एवं ग्रामीण स्तर अधिनियमों का पालन एवं क्रियान्वयन का पालन हो सके इसका प्रचार-प्रसार करने के निर्देश पशुपालन विभाग को दिये।

कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने कहा कि नगरीय क्षेत्रों में अधिकतर पशुपालक अपने पशुओं को खुले में छोड़ देते हैं, जिससे दुर्घटना एवं सड़क जाम की स्थिति हो जाती है। उन्होंने ऐसे पशुपालकों को पहले समझाईश देने, दूसरी बार पशु पकड़ने पर 500 रूपये की जुर्माना लगाने तथा तीसरी बार पकड़ने पर पशु मालिक के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने हेतु नगरीय निकाय एवं पशु चिकित्सा विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने घूम रहे दुधारू गाय एवं बछिया को पकड़कर कांजी हाउस में रखने को कहा। यदि पशु मालिक उसे छुड़ाने नहीं आता है तो उसे नीलामी किया जा सकता है। कलेक्टर ने पशु क्रय, विक्रय हेतु व्यापारियों का पंजीयन कराने तथा सभी विकासखण्डों में पशुबाजार को पुनर्जीवित करने के निर्देश दिये। उन्होंने मुख्य नगर पालिका अधिकारी बलरामपुर को मटन दुकानों को स्वास्थ्य की दृष्टि से व्यवस्थित कराने हेतु जगह चिन्हांकित करने के निर्देश दिये।
बैठक में उप संचालक पशुपालन विभाग श्री बी.पी.सतनामी, पुलिस विभाग की ओर से उप पुलिस अधीक्षक सुश्री ज्योत्सना चौधरी, समिति के उपाध्यक्ष श्री विनोद तिवारी, प्रबंधकीय समिति अशासकीय सदस्य श्री इंद्रजीत दीक्षित सहित पशुपालन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।


गोधन न्याय योजना के दो वर्ष पूर्ण... स्वावलम्बन की ओर बढ़ रहे समूह

गोधन न्याय योजना के दो वर्ष पूर्ण... स्वावलम्बन की ओर बढ़ रहे समूह

21-Jul-2022

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

जिले के 274 सक्रिय गौठानों में अब तक 3.62 लाख क्विंटल गोबर की हुई खरीदी

धमतरी : प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना को दो वर्ष पूरे हो गए हैं। इस संक्षिप्त कार्यकाल में गौठानों के जरिए समूह स्वावलम्बी हो रहे हैं। गोबर से आय के नवाचार के साथ ही रासायनिक खाद के विकल्प के तौर पर जैविक खाद (वर्मी कम्पोस्ट) तैयार कर जनमानस को सेहतमंद खाद्यान्न की ओर अग्रसर किया जा रहा है। इन गौठानों में बहुआयामी गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता भी आई है। जिले के 274 सक्रिय गौठानों में अब तक 3 लाख 62 हजार 800 क्विंटल खरीदकर 7 करोड़ 29 लाख 60 हजार रूपए की आमदनी 10 हजार 279 पशुपालकों को हुई है।

        शासन के निर्देशानुसार जिले के गौठानों को सुविधायुक्त बनाया जा रहा है, जहां बाउण्ड्रीवॉल, तार एवं बाड़ फेंसिंग, पानी के लिए सोलर पम्प एवं मैनुअल बोर, वर्मी टांके, कोटना सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं तैयार की गई है। जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 266 और शहरी क्षेत्र में 8 गौठान स्थित हैं। इनमें लगभग 69 हजार क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट और साढ़़े 9 हजार क्विंटल सुपर कम्पोस्ट तैयार किया गया है, जिनके विक्रय का प्रतिशत क्रमशः 81 एवं 54 फीसदी है। लगभग सभी गौठानों की जीमैप एंट्री पूर्ण हो चुकी है। जिले में 45 ऐसे गौठान हैं जहां पर प्रसंस्करण इकाई स्थापित किया जाना प्रस्तावित है, जिनमें तेल मिल, दाल मिल, आटा मिल, मिनी राइस मिल आदि की स्थापना की जानी है। इनमें से 15 गौठानों में प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जा चुकी है। इनमें से 290 गौठानों में बहुआयामी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं जहां पर 146 में शाक-सब्जी उत्पादन, 30 में मशरूम उत्पादन, 38 में बकरीपालन, 62 में मुर्गीपालन, 17 में मछलीपालन किया जा रहा है। उक्त मल्टी एक्टिविटी से समूहों को ढाई लाख रूपए का लाभांश प्राप्त हो चुका है।

        इसी तरह ग्रामीण औद्योगिक पार्क (रिपा) के अंतर्गत प्रथम चरण में 23 गौठानों का चयन किया गया है, जिनमें धमतरी विकासखण्ड के छह गौठान भटगांव, पोटियाडीह, परसतराई, सारंगपुरी, देवपुर और अछोटा, कुरूद विकासखण्ड के 07 गौठान, गातापार को., हंचलपुर, पचपेड़ी, भेण्डरा, चटौद, कातलबोड़ और कठौली, मगरलोड के 5 गौठान भेण्ड्री, भरदा, सौंगा, परेवाडीह, केकराखोली और नगरी विकासखण्ड के पांच गौठान छिपली, सांकरा, उमरगांव, भुरसीडोंगरी और गढ़डोंगरी रै. का चयन किया गया है। इन गौठानों में मल्टीएक्टिविटी के तौर पर तेल मिल, दाल मिल, आटा मिल, मिनी राइस मिल, मसाला युनिट, लघु धान्य, लघु धान्य प्रसंस्करण, एलोवेरा प्रसंस्करण, जूट बैग निर्माण, दूध प्रोसेंसिंग युनिट, सिलाई युनिट, सटरिंग प्लेट, हैण्डलूम निर्माण, रंगाई यॉर्न युनिट, बटन मशरूम युनिट, अगरबत्ती निर्माण, वॉशिंग पावडर, इकाई के अलावा आजीविकामूलक गतिविधियों में सब्जी उत्पादन, मशरूम उत्पादन, मुर्गीपालन, बकरीपालन, मछलीपालन, बटेरपालन, फूलों की खेती, मोमबत्ती निर्माण आदि की कार्ययोजना तैयार कर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

        गोधन न्याय योजना के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार (योजना, नीति, कृषि एवं ग्रामीण विकास) श्री प्रदीप शर्मा ने जमीनी स्तर के अधिकारियों की बैठक लेकर इसे और बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए समूहों के सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि जिन पशुपालकों को गौठानों में जाकर गोबर बेचने में परेशानी होती है, समूह के सदस्य के द्वारा उनके घर जाकर गोबर संग्रहित करने का काम भी किया जा सकता है।

 


79 पदों हेतु प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन...

79 पदों हेतु प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन...

21-Jul-2022

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

जशपुर : जिला रोजागर एंव स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र जशपुर द्वारा 79 रिक्त पदों हेतु प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन 25 जुलाई 2022 को किया जा रहा है। जिला रोजगार अधिकारी ने बताया कि दो संस्था ओपीजेसीसी पूंजीपथरा जिंदल एजुकेशन वेल्फेयर सोसायटी रायगढ़ से 60 पद, एवं वृन्दावन पब्लिक स्कूल, लुडेग कोतबा, बागबहार, पण्डरीपानी जशपुर से  कुल 19 पदों हेतु रिक्तियां प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि ओपीजेसीसी पूंजीपथरा जिंदल एजुकेशन वेल्फेयर सोसायटी रायगढ से वेल्डर के  60 पद पर भर्ती हेतु योग्यता 8वीं पास एवं वेतनमान 8500 से 15000 तक रखी गई है।

इसी प्रकार जशपुर जिले के वृन्दावन पब्लिक स्कूल लुडेग कोतबा, बागबहार, पण्डरीपानी  में प्राचार्य के 3 पद, समाजशास्त्र शिक्षक के 2 पद, अंग्रेजी शिक्षक के 3 पद, गणित शिक्षक के 2 पद, विज्ञान शिक्षक के 2 पद, डाटा एन्ट्री ऑपरेटर के 1 पद, प्री प्रायमरी वर्ग के 4 पद एवं संगीत या नृत्य के 2 पद पर भर्ती हेतु वेतनमान 6 हजार से 10 हजार रुपए प्रति माह रखी गई है। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी निर्धारित तिथि को प्रातः 11 बजे समस्त मूल दस्तावेज के साथ जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र जशपुर में उपस्थित होकर प्लेसमेंट कैम्प में भाग ले सकते है।