मंत्रीजी का नया शिगूफ़ा- रोजगार बहुत हैं, बस लोग ही इसके काबिल नहीं

मंत्रीजी का नया शिगूफ़ा- रोजगार बहुत हैं, बस लोग ही इसके काबिल नहीं

16-Sep-2019

नित्‍यानंद गायेन 

मोदीजी की दूसरी पारी के 100 दिन बीतने के जश्न में केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, “देश में रोजगार और नौकरियों की कोई कमी नहीं है बल्कि उत्तर भारतीयों में योग्यता की कमी है।” गंगवार ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि उन्हें जिस पद के लिए भर्ती करनी है उसके लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिलते हैं।

संतोष गंगवार का बयान ऐसे समय आया है जब बेरोजगारी और आर्थिक हालात को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने गंगवार के इस बयान पर पलटवार किया.

हर साल दो करोड़ नौकरी देने का वादा कर 2014 में सत्ता पाने के बाद मोदी सरकार ने अपनी पहली पारी में जहां बेरोजगारी के आंकड़ों पर रोक लगा दी और इससे जुड़े सवालों को भटका दिया, वहीं उनकी दूसरी पारी से पहले इस बात का उद्घाटन हो गया कि बीते 45 वर्षों में देश में आज सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की रिपोर्ट जनवरी में लीक हुई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार देश में 2017-18 में बेरोजगारी दर 6.1% रही। यह 45 साल में सबसे ज्यादा है। इन सबके बाद भी पीयूष गोयल सहित मोदी मंत्रिमंडल के सदस्य और सरकार दावा करती रही है कि देश का युवा अब नौकरी करना नहीं चाहता बल्कि वह नौकरी देना चाहता है! अब यह नया शिगूफा खुद रोजगार मंत्री ने छोड़ा है.


पाकिस्तान से प्याज नहीं खरीदेगा भारत

पाकिस्तान से प्याज नहीं खरीदेगा भारत

14-Sep-2019

नई दिल्ली : सरकार ने देश के घरेलू बाजार में आपूर्ति के लिए पाकिस्तान से प्याज नहीं खरीदने का फैसला किया है। गौरतलब है कि घरेलू बाजार में प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के तहत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार से 2000 टन प्याज खरीदने की निविदा जारी की है। यह निविदा पांच सितंबर को जारी की गयी और इसे 24 सितंबर तक भरा जा सकता है। इसके अलावा सरकार ने प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य भी 850 डालर प्रति टन कर दिया है।

आयात के लिए अधिकृत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एमएमटीसी लिमिटेड ने 2000 टन प्याज का आयात करने के लिए निविदा जारी की है और कहा है कि यह प्याज उच्चगुणवत्ता वाली तथा पाकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान या अन्य किसी देश में पैदा हुई होनी चाहिए। लेकिन कल देर रात निविदा को संशोधित करते हुए एमएमटीसी लिमिटेड ने कहा कि आयात की जानी वाली प्याज पाकिस्तान में पैदा हुई नहीं होनी चाहिए।


इस महीने लगातार 4 दिन बंद रहेंगे बैंक, जानें डेट

इस महीने लगातार 4 दिन बंद रहेंगे बैंक, जानें डेट

13-Sep-2019

इस महीने लगातार चार दिन बैंक में कामकाज नहीं होगा। 26 व 27 सितंबर को दो दिवसीय राष्ट्रीय हड़ताल है, जिसमें सभी बैंकों के अधिकारी शामिल होंगे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अधिकारियों की चार यूनियनों ने दस सरकारी बैंकों के विलय की घोषणा के विरोध में 26 सितंबर से दो दिन की हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। इसके अलावा, 28 सितंबर को भी बैंक में काम नहीं होंगे, क्योंकि महीने के अंतिम शनिवार को बैंकों में छुट्टी रहती है और 29 सितंबर को बैंक में रविवार की छुट्टी रहेगी।

सरकार ने दस सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों का विलय कर चार बैंक बनाने की घोषणा की है। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) को भेजे नोटिस में अधिकारियों की यूनियनों ने कहा कि उनका बैंकिंग क्षेत्र में विलय के खिलाफ हड़ताल पर जाने का प्रस्ताव है। सरकार ने 30 अगस्त को सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों का एकीकरण कर चार बैंक बनाने की घोषणा की थी।
यूनियन के नेता ने यह भी कहा कि नवंबर के दूसरे सप्ताह से राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। आल इंडिया बैंक आफिसर्स कनफेडरेशन (एआईबीओसी), आल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए), इंडियन नेशनल बैंक आफिसर्स कांग्रेस (आईएनबीओसी) और नेशनल आर्गेनाइजेशन आफ बैंक आफिसर्स (एनओबीओ) ने संयुक्त रूप से हड़ताल का नोटिस दिया है। इसके अलावा बैंक यूनियनों की पांच दिन का सप्ताह करने और नकद लेनदेन के घंटों और विनियमित कार्य घंटों को कम करने की भी मांग है।

यूनियनों ने सतर्कता से संबंधित मौजूदा प्रक्रियाओं में बाहरी एजेंसियों का हस्तक्षेप रोकने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों से संबंधित मुद्दों को सुलझाने, पर्याप्त भर्तियां करने, एनपीएस को समाप्त करने और उपभोक्ताओं के लिए सेवा शुल्क कम करने और अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के नाम पर अधिकारियों को परेशान नहीं करने की मांग की है।
एआईबीओसी (चंडीगढ़) के महासचिव दीपक कुमार शर्मा ने कहा कि देशभर में राष्ट्रीयकृत बैंक 25 सितंबर मध्यरात्रि से 27 सितंबर मध्यरात्रि तक हड़ताल पर रहेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के विरोध और अपनी अन्य मांगों के समर्थन में बैंक कर्मियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि नवंबर के दूसरे सप्ताह से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। सरकार ने दस राष्ट्रीयकृत बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की घोषणा की है। इसके तहत यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया और ओरियंटल बैंक आफ कॉमर्स का विलय पंजाब नेशनल बैंक में किया जाएगा। इसके बाद अस्तित्व में आने वाला बैंक सार्वजनिक क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा।  इसी तरह सिंडिकेट का विलय केनरा बैंक में किया जाएगा। इलाहाबाद बैंक का विलय इंडियन बैंक में होना है जबकि आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को यूनियन बैंक आफ इंडिया में मिलाया जाएगा।


ऑटो सेक्टर में मंदी : वित्त मंत्री सीतारमण के बयान पर मारुति ने कहा- Ola-Uber की वजह से नहीं घटी बिक्री

ऑटो सेक्टर में मंदी : वित्त मंत्री सीतारमण के बयान पर मारुति ने कहा- Ola-Uber की वजह से नहीं घटी बिक्री

12-Sep-2019

एजेंसी 

नई दिल्ली: ऑटो सेक्टर में मंदी की असल वजह क्या है? सरकार का कहना है कि ओला और ऊबर जैसे टैक्सी एग्रीगेटर्स की वजह से ऑटो इंडस्ट्री में मंदी का दौर आया है. वहीं ऑटो सेक्टर इस कारण को सिरे से ख़ारिज़ करते हुए सरकार को स्टडी करने की सलाह दे रहा है.

दरअसल मंगलवार को निर्मला सीतारमण ने ओला और उबर जैसी आनलाइन टैक्सी को मंदी की वजह बताया था. जिसके बाद मारुति ने ऑटो सेक्टर में मंदी को लेकर पहली बार बयान देते हुए कहा कि ओला और उबर ऑटो इंडस्‍ट्री में मंदी के ठोस कारण नहीं हैं. मारुति सुजुकी के मार्केटिंग और सेल्‍स के एग्‍जीक्‍यूटिव डायरेक्‍टर शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि धारणा में अभी भी कोई बदलाव नहीं आया है. लोग अपनी जरूरत और शौक पूरा करने के लिए कार खरीदते हैं.

उन्‍होंने आगे कहा, ” मौजूदा मंदी के पीछे ओला और उबर जैसी सेवाओं का होना कोई बड़ा कारण नहीं है. मेरी समझ से इस तरह के निष्कर्षों पर पहुंचने से पहले हमें मंदी के कारणों का पता लगाना चाहिए. इसके लिए स्‍टडी की जरूरत है.”

शशांक श्रीवास्तव ने आगे कहा, ”ओला और उबर जैसी सेवायें पिछले 6-7 साल में सामने आई हैं. इसी अवधि में हमने बेहतरीन अनुभव भी हासिल किये हैं. सिर्फ पिछले कुछ महीनों में ऐसा क्या हुआ कि मंदी गंभीर होती चली गई. मुझे नहीं लगता कि ओला और उबर की वजह से हम यहां खड़े हैं.”

श्रीवास्तव ने अमेरिकी बाजार का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां उबर सबसे बड़ी टैक्‍सी एग्रीगेटर है, बावजूद इसके पिछले कुछ सालों में कार बिक्री में जबरदस्‍त बढ़ोतरी हुई है.

श्रीवास्‍तव ने बताया, ”लोग सप्ताह के दिनों में ऑफिस में जाने के लिए ओला और उबर जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन फिर भी वे परिवार के साथ वीकेंड के लिए अपनी गाड़ी को ही प्राथमिकता देते हैं. अभी भी यह पैटर्न नहीं बदला है.”

उन्‍होंने बताया कि ऑटो इंडस्‍ट्री में मंदी जैसे हालात के लिए लिक्‍विडिटी की कमी, टैक्‍स और इंश्‍योरेंस के रेट जिम्‍मेदार हैं. शशांक श्रीवास्तव के मुताबिक मंदी से निपटने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयत्न पर्याप्‍त नहीं हैं. हालांकि यह लॉन्‍ग टर्म में मददगार हो सकते हैं. शशांक श्रीवास्तव को उम्‍मीद है कि फेस्टिव सीजन में ऑटो इंडस्‍ट्री को बूस्‍ट मिलेगा.

इससे पहले मंगलवार को निर्मला सीतारमण ने कहा था कि वाहन क्षेत्र में नरमी के कारणों में युवाओं की सोच में बदलाव भी है. लोग अब खुद का वाहन खरीदकर मासिक किस्त देने के बजाए ओला और उबर जैसी आनलाइन टैक्सी सेवा प्रदाताओं के जरिये वाहनों की बुकिंग को तरजीह दे रहे हैं. सीतारमण ने कहा कि दो साल पहले तक वाहन उद्योग के लिये अच्छा समय था. निश्चित रूप से उस समय वाहन क्षेत्र के उच्च वृद्धि का दौर था.


कश्मीर के किसानों से सीधे ऐपल खरीदेगा केन्द्र सरकार!

कश्मीर के किसानों से सीधे ऐपल खरीदेगा केन्द्र सरकार!

11-Sep-2019

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अब केंद्र सरकार राज्य के सेब किसानों के लिए बड़ी सौगात लेकर आई है। सरकार का प्लान है कि जम्मू कश्मीर के किसानों की जेब में अच्छी खासी रकम जाए और उनके नुकसान को कम किया जाए।
इसके लिए केंद्र सरकार कश्मीर के लिए मिशन ‘ऐपल’ लाने जा रही है। इस प्लान के तहत केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर के सेब किसानों से सीधे सेब खरीदेगी। किसानों से सेब खरीदने का काम नेफेड करेगा।
ऐसा बताया जा रहा है कि 15 दिसबंर तक किसानों से सेब खरीददारी का काम पूरा कर लिया जाएगा। इससे किसानों को पैसे सीधे उनके खातों में दिए जाएंगे।
ज़ी न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, NAFED द्वारा जम्मू कश्मीर के श्रीनगर, शोपियां, सोपोर की मंडियों से सेब खरीदे जाएंगे। इसके बाद क्वॉलिटी कमेटी सेबों की किस्मों की ग्रेडिंग तय करेगी।
यह प्राइस कमेटी सभी कैटेगरी के सेब की कीमत तय करेगी। जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव इसपूरी प्रक्रिया में को-ऑर्डिनेट करेंगे और यह पूरा काम कृषि और गृह मंत्रालय की निगरानी में होगा।
जम्मू कश्मीर में 67% कश्मीरी यानी 7 लाख परिवार सेब व्यवसाय पर निर्भर है। देश के कुल सेब उत्पादन का 79.3% का हिस्सा से होता है। जम्मू कश्मीर से सालाना 6,500 करोड़ रुपये का सेब निर्यात होता है। पिछले साल कश्मीर में 20 लाख मैट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ है।

 

 

 


बीमा कम्पनी क्लेम देने में कर रही थी आनाकानी, हाईकोर्ट ने कहा- सवार या मोटरसाइकिल सीखने वाले को प्रशिक्षक के साथ की आवश्यकता नहीं, याचिका खारिज

बीमा कम्पनी क्लेम देने में कर रही थी आनाकानी, हाईकोर्ट ने कहा- सवार या मोटरसाइकिल सीखने वाले को प्रशिक्षक के साथ की आवश्यकता नहीं, याचिका खारिज

11-Sep-2019

एक सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया लर्नर लाइसेंस, एक वैध लाइसेंस है और एक राइडर या लर्नर को मोटरसाइकिल चलाने के दौरान किसी प्रशिक्षक के साथ की आवश्यकता नहीं है, जैसा कि कार के मामले में आवश्यक है, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मृतक महिला के परिवार को मोटर दुर्घटना न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए अवार्ड को चुनौती देने वाली बीमा कंपनी की याचिका को ख़ारिज करते हुए यह कहा। न्यायमूर्ति के. नटराजन ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया और ट्रिब्यूनल द्वारा ज्योतिबा शिगाते और उनके नाबालिग बेटे की. मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे की मांग करते हुए दायर याचिका पर दिए गए आदेश को बरकरार रखा।

अदालत ने 9 प्रतिशत ब्याज के साथ विभिन्न शीर्षों के तहत मुआवजे के रूप में 12,65,731 रुपये की राशि दिए जाने का आदेश दिया। केस की पृष्ठभूमि: 29 मई 2009 को दावेदार की पत्नी, मंगला, अंजना द्वारा संचालित की जा रही मोटरसाइकिल (पंजीकरण नंबर KA 22/EB-9566) पर पिलियन सवार के रूप में बैठी थी अर्थात मोटरसाइकिल पर पीछे बैठी हुई थी और जब उक्त वाहन बेलगाम-बेलगुंडी रोड पर बोकनूर क्रॉस के पास पंहुचा, अंजना ने तेज रफ्तार के साथ मोटरसाइकिल को लापरवाही से चलाया, जिससे दुर्घटना हो गयी। मंगला मोटरसाइकिल से गिरकर घायल हो गयी। इलाज के दौरान अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया।

मृतका एक सरकारी प्राथमिक मराठी स्कूल में प्रधानाध्यापक के रूप में काम कर रही थी और प्रति माह 30,000 रुपये कमा रही थी और वह आयकर दाता (income tax Assessee) भी थी। वह अपने पूरे परिवार को पाल रही थी, इसलिए, मामले में दावेदारों ने विभिन्न आधारों पर मुआवजे के लिए 30 लाख रुपये दिए जाने की प्रार्थना की। बीमा कंपनी ने तर्क दिया: दुर्घटना के समय मोटरसाइकिल चला रही अंजना के पास मोटरसाइकिल चलाने हेतु कोई वैध लाइसेंस नहीं था और वह केवल एक लर्नर लाइसेंस रखती थी। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के अनुसार, एक व्यक्ति जो लर्नर लाइसेंस रखता है, उसे प्रशिक्षक के साथ चलना चाहिए। हालाँकि, यहां इस मामले में मृतका, प्रतिवादी नंबर 1 द्वारा चलायी जा रही मोटर साइकिल पर पिलियन सवार के रूप में बैठी थी और प्रतिवादी नंबर 1 के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और केवल एक लर्नर लाइसेंस था। उसे प्रशिक्षक के साथ मोटर साइकिल चलानी सीखनी या उसकी सवारी करनी चाहिए थी।

केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 3 के उप-नियम (1) के प्रावधान के अनुसार, (संक्षिप्त में "नियम"), उसे मोटरसाइकिल पर अंग्रेजी अक्षर 'एल' लिखना चाहिए था और प्रशिक्षक के बिना एक लर्नर द्वारा मोटरसाइकिल चलाया जाना, बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन होगा और यह पॉलिसी के नियमों और शर्तों का एक बुनियादी उल्लंघन है। लेकिन, ट्रिब्यूनल ने बीमाकर्ता पर देयता निर्धारित करते हुए त्रुटि की और मोटरसाइकिल के मालिक पर यह दायित्व निर्धारित किया जाना चाहिए। जहाँ तक मुआवजा राशि की गणना का संबंध है। यह तर्क दिया गया था कि "दूसरे दावेदार (नाबालिग पुत्र) के सम्बन्ध में निर्भरता की हानि के चलते मुआवजे की गणना के लिए, आय के केवल 25% पर विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि मृतका का पति कामकाजी व्यक्ति हैं।

इस मामले में विभाजित गुणक (split multiplier) लागू किया जाएगा, क्योंकि मृतका स्थायी कर्मचारी, एक शिक्षिका थी, जो 5 साल के भीतर अपनी सेवा से सेवानिवृत्त हो जाती और इसलिए पूरे वेतन को सेवानिवृत्ति के बाद निर्भरता का नुकसान नहीं माना जा सकता है।" दावेदारों ने तर्क दिया: टू व्हीलर मोटरसाइकिल के लिए किसी इंस्ट्रक्टर की आवश्यकता नहीं होती है और इंस्ट्रक्टर की आवश्यकता केवल फोर-व्हीलर सीखने के लिए होती है। मोटरसाइकिल पर 'L' बोर्ड लगाने के संबंध में बीमा कंपनी द्वारा कोई डिफेन्स नहीं दिया गया है और न्यायालय के समक्ष स्कूटर की कोई भी तस्वीर नहीं लायी गयी जिसमे यह दिखाया गया हो कि स्कूटर पर 'L' अक्षर का उल्लेख नहीं किया गया था।

इसके अलावा, "मुआवजे की मात्रा के संबंध में, हालांकि मृतका हेडमिस्ट्रेस थी और चूंकि वह घर की कमाने वाले सदस्या थी, इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि पहला दावेदार, सिर्फ इसलिए कि वह एक कर्मचारी है और कमाई भी कर रहा है, अपनी पत्नी पर निर्भर नहीं था।" अदालत ने कहा: "केंद्रीय मोटर वाहन नियम एक मोटर वाहन में एक प्रशिक्षक की मौजूदगी के बारे में सख्ती से विचार करता है, लेकिन मोटरसाइकिल को इससे बाहर करता है। इसलिए, मैं मानता हूं कि एक लर्नर लाइसेंस भी एक वैध लाइसेंस है, सवार या मोटरसाइकिल सीखने वाले को एक प्रशिक्षक के साथ की आवश्यकता नहीं है, जैसा कि चार पहिया मोटर वाहनों के मामले में आवश्यक है, जहाँ प्रशिक्षक की आवश्यकता होती है।

इसलिए, बीमाकर्ता द्वारा दी गयी इस दलील को, कि प्रतिवादी नंबर 1 (अंजना) के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और वह मोटरसाइकिल की सड़क पर सवारी के दौरान केवल लर्नर लाइसेंस के साथ थी, स्वीकार नहीं किया जा सकता है।" आगे यह कहा गया, "अपीलार्थी/बीमाकर्ता के विद्वान वकील द्वारा दी गयी दलील, कि न्यायाधिकरण ने अत्यधिक मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है, स्वीकार नहीं किया जा सकता है और इसके लिए इस न्यायालय के किसी भी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।"

साभार : LIVELAW

यह खबर मूल रूप से लाइव लॉ में प्रकाशित हुआ है 

 


डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन को बर्खास्त करने का ऐलान किया

डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन को बर्खास्त करने का ऐलान किया

11-Sep-2019

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन को बर्खास्त करने का ऐलान किया है. पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा कि वे जॉन बोल्टन के रुख से असहमत थे. डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक वे अगले सप्ताह घोषणा करेंगे कि नया राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कौन होगा. उन्होंने ट्वीट किया, ‘मैंने जॉन से इस्तीफा देने को कहा, जो मुझे आज सुबह दिया गया.’ डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा, ‘मैंने जॉन बोल्टन को कल रात सूचित कर दिया था कि व्हाइट हाउस में उनकी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है.’

जॉन बोल्टन बीते तीन साल में व्हाइट हाउस से बाहर होने वाले तीसरे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं. बताया जा रहा है कि उत्तर कोरिया से लेकर अफगानिस्तान तक कई मसलों पर वे डोनाल्ड ट्रंप के रुख से सहमत नहीं थे. उधर, जॉन बोल्टन का कहना है कि उन्होंने खुद इस्तीफा देने की पेशकश की थी.

जॉन बोल्टन अप्रैल 2018 में व्हाइट हाउस आए थे. माइकल फ़्लिन और एचआर मैक्मास्टर के बाद डोनाल्ड ट्रंप के तीसरे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे. बताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप और उनके बीच हर बड़ी विदेशी नीति को लेकर विवाद था. चर्चा है कि अफगानिस्तान रिश्तों के इस ताबूत में आखिरी कील साबित हुआ. जॉन बोल्टन ने ऐन मौके पर तालिबान के साथ बैठक रद्द करने के अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले की आलोचना की थी. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव स्टेफनी ग्रिशम ने भी एक बयान में कहा, ‘राष्ट्रपति को उनकी कई नीतियां पसंद नहीं थीं, उनमें मतभेद था.’


यूपी- फिरोजाबाद के डिग्री कॉलेज में छात्राओं के बुर्का पहनने पर रोक !

यूपी- फिरोजाबाद के डिग्री कॉलेज में छात्राओं के बुर्का पहनने पर रोक !

08-Sep-2019

फिरोजाबाद- फिरोजाबाद के एक  डिग्री कॉलेज में अब बुर्का पहनकर आने वाली छात्राओं पर रोक लगा दी गई है. खबर के मुताबिक शुक्रवार को कॉलेज में छात्रों के दो गुटों के बीच हुई वर्चस्व की जंग के बाद कॉलेज प्रशासन ने यह कदम उठाया है. कॉलेज में जो छात्राएं बुर्का पहनकर पहुंची उन्हें ड्रेस कोड का हवाला देकर बैरंग लौटा दिया कई छात्राओं ने अपना बुर्का उतारा तब कहीं जाकर उन्हें एंट्री मिल सकी.
छात्रों के दो गुटों के बीच मारपीट की यह तस्वीर फिरोजाबाद के एसआर के डिग्री कॉलेज की है. जहां वर्चस्व को लेकर शनिवार को इस कॉलेज के छात्रों के दो गुट आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते शिक्षा का मंदिर जंग का मैदान बन गया था. शनिवार को जब कॉलेज खुला तो कॉलेज का नजारा बदला हुआ था. कॉलेज परिसर में पुलिस तैनात थी और जो छात्राएं बुर्का पहनकर आई थी, उन्हें वापस किया जा रहा था.

 


कर्नाटक में एक या दो नहीं होंगे पांच उपमुख्यमंत्री !

कर्नाटक में एक या दो नहीं होंगे पांच उपमुख्यमंत्री !

07-Sep-2019

कर्नाटक में 2 नए उप-मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति हो सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी आलाकमान के इशारे पर सीएम बीएस येदियुरप्पा ने तैयारी पूरी कर ली है। गौरतलब है कि कर्नाटक में फिलहाल तीन उप-मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने पदभार संभाल लिया है। इस तरह राज्य में मुख्यमंत्री के अलावा पांच उप-मुख्यमंत्री हो जाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी आलाकमान के इस फैसले के दो उद्देश्य हो सकते हैं। पहला, सभी बड़े समुदायों के प्रतिनिधित्व देकर पूरे कर्नाटक में प्रसार करना और वोटबैंक को बढ़ाना। दूसरा, येदियुरप्पा के बाद उनका उत्तराधिकारी तैयार करना। माना जा रहा है कि दो नए उपमुख्यमंत्री एसटी और कुरुबा समुदाय से हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने 17 नवनियुक्त मंत्रियों को 26 अगस्त को विभागों की जिम्मेदारी सौंपी थी। इन मंत्रियों को करीब एक सप्ताह पहले कैबिनेट में शामिल किया गया था। तीन उपमुख्यमंत्री में गोविंद करजोल को पीडब्ल्यूडी और समाज कल्याण, अश्वत्थ नारायण को उच्च शिक्षा, आईटी और बीटी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा लक्ष्मण सावदी को परिवहन विभाग का प्रभार दिया गया था। बसवराज बोम्मई को गृह विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। 

पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार को बड़े और मध्यम स्तरीय उद्योग का मंत्रालय, दो पूर्व उप मुख्यमंत्री-के एस ईश्वरप्पा और आर अशोक को क्रमश: ग्रामीण विकास और पंचायती राज, तथा राजस्व विभाग का प्रभार दिया गया था। वरिष्ठ नेता बी श्रीरामुलू को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बनाया गया है जबकि एस सुरेश कुमार को प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग का कार्यभार दिया गया था। 

रोचक है कि उपमुख्यमंत्री बनाए गए सावदी ना तो विधानसभा के सदस्य हैं ना ही विधानपरिषद के। कैबिनेट में उनको शामिल करने के कारण भाजपा के कुछ वरिष्ठ विधायकों के बीच असंतोष है।

समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से इनपुट्स लेकर


कानपुर में एक सरकारी अस्पताल की बड़ी लापरवाही, MRI मशीन में 8 साल की बच्‍ची की मौत

कानपुर में एक सरकारी अस्पताल की बड़ी लापरवाही, MRI मशीन में 8 साल की बच्‍ची की मौत

06-Sep-2019

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक सरकारी अस्पताल की बड़ी लापरवाही देखने को मिली है. यहां के लाला लाजपत राय अस्पताल में एमआरआई के दौरान 8 साल की एक बच्ची की मौत हो गई. टीवी9भारतवर्ष की खबर के अनुसार  बच्ची के परिजनों को आरोप है कि एमआरआई स्कैन से पहले दिए गए ओवरडोज़ के कारण उसकी मौत हुई है.

अस्पताल में प्राइवेट तौर पर एमआरआई की सुविधा दी जा रही थी. वहीं मामले के सामने आने के बाद अस्पताल के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. आरके मौर्य ने एमआरआई चलाने वाले सेंटर को नोटिस जारी कर दिया है और वहां से जवाब आने के बाद उचित कार्रवाई की जाने की बात कही है. इस मामले पर सेंटर की इंचार्ज पूनम पांडे का कहना है कि बच्ची की मौत ओवरडोज के कारण नहीं हुई. उन्होंने कहा कि जब बच्ची को यहां लाया गया था, तो उसकी हालत गंभीर थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्ची के पिता ने बताया कि अस्पताल में बच्ची का कार्डियोपैगिया के लिए इलाज चल रहा था. इस बीमारी में धड़ के नीचे शरीर के अंग ठीक तरह से काम नहीं करते हैं. गुरुवार को डॉ. ने बच्ची का एमआरआई कराने के लिए कहा था. परिजन बच्ची को लाइफलाइन सेंटर ले गए, जो कि अस्पताल में प्राइवेटली चल रहा था. बच्ची के पिता ने कहा, “मुझसे कहा गया कि बच्ची को परेशानी हो सकती है इसलिए उसे बेहोश किया जाएगा और हमने उनकी बात मान ली.”

तीन घंटे बाद उन्हें सूचना दी गई कि बच्ची की मौत हो गई है. वे तुरंत बच्ची को डॉ. के पास लेकर गए जहां उन्होंने बच्ची की मौत की पुष्टि की. पिता ने आरोप लगाया है कि जब उन लोगों ने विरोध किया तो सेंटर वालों ने उन्हें यह कहकर डरा दिया कि बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाएगा और उसकी आंखें निकाल ली जाएंगी.


खिड़की पर लगी लोहे की रेलिंग से फांसी पर लटकता मिला दो भाइयों का शव

खिड़की पर लगी लोहे की रेलिंग से फांसी पर लटकता मिला दो भाइयों का शव

06-Sep-2019

नई दिल्ली। देश की राजधानी में दो भाइयों का उनके घर पर खिड़की पर लगी लोहे की रेलिंग से शव लटकता हुआ पाया गया है, जिसके बाद से इलाके में दहशत का माहौल है। दरअसल जब पड़ोस के लोगों को घर से बदबू आने लगी तो इस बाबत पुलिस को जानकारी दी गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर जब पुलिस पहुंची तो उसने घर का दरवाजा तोड़कर शव को बरामद किया है। यह घटना दिल्ली के हरि नगर स्थित घर का है।

जानकारी के अनुसार दोनों भाई इस घर में पिछले चार महीने से रह रहे थे। पुलिस ने बताया कि दोनों ही शव सड़ चुके हैं, लिहाजा इसकी पहचान कर पाना मुश्किल है। मौके से किसी भी तरह का कोई सुसाईड नोट बरामद नहीं किया गया है। शव को दीन दयाल उपाध्याय हॉस्पिलट में पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया गया है। हालांकि अभी तक यह नहीं साफ हो सका है कि यह दोनों भाइयों की कब मृत्यु हुई है। फिलहाल हरिनगर थाने की पुलिस मामले की जांच कर रही है।

घटना की जानकारी मिलने पर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो दरवाजा तोड़कर घर के भीतर से शव को बाहर निकाला गया। पुलिस के अनुसार दोनों ही भाइयों की कई दिन पहले मौत हो चुकी है। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी कि यह घटना कब की है। जिस घर में यह शव बरामद किया गया है वह बाबूलाल नाम के व्यक्ति का है। दोनों भाई यहां किराए पर रहते थे। हालांकि शव के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन पुलिस को इस बात का शक है कि यह आत्महत्या का मामला हो सकता है।


डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन : राजनीति में दार्शनिकता के शिखर व्यक्तित्व

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन : राजनीति में दार्शनिकता के शिखर व्यक्तित्व

05-Sep-2019

ललित गर्ग 

महापुरुषों की कीर्ति किसी एक युग तक सीमित नहीं रहती। उनका लोकहितकारी चिन्तन, जीवन मूल्यों को लोकजीवन में संचारित करने की दृष्टि एवं गिरते सांस्कृतिक मूल्यों की प्रतिष्ठा का संकल्प कालजयी होता है और युग-युगों तक समाज का मार्गदर्शन करता है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन हमारे एक ऐसे ही प्रकाश-स्तंभ है, जिन्होंने अपनी बौद्धिकता, सूझबूझ, व्यापक सोच से भारतीय संस्कृति के संक्रमण दौर में संबल प्रदान किया। वे भारतीय संस्कृति के ज्ञानी, एक महान् शिक्षाविद, महान् दार्शनिक, महा-मनीषी अध्येता, समाज-सुधारक, राजनीतिक चिन्तक एवं भारत गणराज्य के राष्ट्रपति थे। वे समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे। उनका मानना था कि शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है और यही आदर्श समाज संरचना का आधार है।

डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितंबर को प्रतिवर्ष ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि उन्होंने अपने जीवन के 40 वर्ष एक शिक्षक के रूप में व्यतीत किए थे। वह एक आदर्श शिक्षक थे। इस दिन समस्त देश में भारत सरकार द्वारा श्रेष्ठ शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान किया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन बहुआयामी प्रतिभा के धनी होने के साथ ही देश की संस्कृति को प्यार करने वाले व्यक्ति थे। सन् 1967 तक राष्ट्रपति के रूप में वे देश की सेवा करते रहे। एक बार विख्यात दार्शनिक प्लेटो ने कहा था- राजाओं को दार्शनिक होना चाहिए और दार्शनिकों को राजा। प्लेटो के इस कथन को 1962 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने तब सच कर दिखाया, जब वह भारत के दूसरे राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। इस प्रकार एक दार्शनिक ने राजा की हैसियत प्राप्त की। बर्टेड रसेल जो विश्व के जाने-माने दार्शनिक थे, वे डाॅ. राधाकृष्णन के राष्ट्रपति बनने पर अपनी प्रतिक्रिया को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा था ‘यह विश्व के दर्शन शास्त्र का सम्मान है कि महान् भारतीय गणराज्य ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राष्ट्रपति के रूप में चुना और एक दार्शनिक होने के नाते मैं विशेषतः खुश हूँ।

डॉ. राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरूतनी ग्राम में, जो मद्रास, अब चेन्नई से लगभग 64 कि॰ मी॰ की दूरी पर स्थित है, 5 सितंबर 1888 को हुआ था। वे एक ब्राह्मण परिवार से संबंधित थे। वह बचपन से ही मेधावी थे। इन्होंने वीर सावरकर और स्वामी विवेकानन्द का गहन अध्ययन किया, दुनिया के विभिन्न धर्म एवं दर्शनों का तुलनात्मक अध्ययन किया। उन्होंने दर्शन शास्त्र में एम.ए. किया और सन् 1916 में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए। उनको बचपन से ही पुस्तकों से प्रेम था। इस कारण तभी स्पष्ट हो गया था कि यह बालक बड़ा होकर विद्वत्ता एवं महानता का वरण अवश्य करेगा।

यही हुआ, उन्होंने सत्यं, शिवं और सौन्दर्य की युगपत् उपासना की। उन्होंने अपने बौद्धिक कौशल से सम्पूर्ण भारत को धर्म एवं संस्कृति के अटूट बंधन में बांधकर विभिन्न मत-मतांतरों के माध्यम से सामंजस्य स्थापित किया। उन्होंने विज्ञान का अनादर नहीं किया, किन्तु उसके जो दोष हैं, उनकी उन्होंने भत्र्सना की। वे दर्शन को केवल मानसिक व्यायाम का साधन नहीं मानते थे। इसलिये उन्होंने जो कुछ लिखा, वह केवल बुद्धि की तुष्टि के लिये नहीं है, बल्कि उससे तात्कालिक समस्याओं का समाधान होता है, जीवन को गति मिलती है, मन को प्रेरणा एवं धार्मिक भावों को स्फूर्ति प्राप्त होती है।

कुछ लोग हिन्दुत्ववादी विचारों को हेय दृष्टि से देखते थे और उनकी आलोचना करते थे। उनकी आलोचना को डॉ. राधाकृष्णन ने चुनौती की तरह लिया और हिन्दुवादिता का गहरा अध्ययन करना आरम्भ कर दिया। वे यह जानना चाहते थे कि वस्तुतः किस संस्कृति के विचारों में चेतनता है और किस संस्कृति के विचारों में जड़ता है। तब स्वाभाविक अंतर्प्रज्ञा द्वारा इस बात पर दृढ़ता से विश्वास करना आरम्भ कर दिया कि भारत के दूरस्थ स्थानों पर रहने वाले गरीब तथा अनपढ़ व्यक्ति भी प्राचीन सत्य को जानते थे। इस कारण उन्होंने तुलनात्मक रूप से यह जान लिया कि भारतीय अध्यात्म काफी समृद्ध है और क्रिश्चियन मिशनरियों द्वारा हिन्दुत्व की आलोचनाएँ निराधार हैं। इससे इन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि भारतीय संस्कृति धर्म, ज्ञान और सत्य पर आधारित है जो प्राणी को जीवन का सच्चा संदेश देती है। भारतीय संस्कृति में सभी धर्मों का आदर करना सिखाया गया है और सभी धर्मों के लिए समता का भाव भी हिन्दू संस्कृति की विशिष्ट पहचान है। इस प्रकार उन्होंने भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान को समझा और उसके काफी नजदीक हो गए।

डाॅ. राधाकृष्णन की महात्मा गांधी से प्रथम भेंट 1915 में हुई थी। उनके विचारों से प्रभावित होकर राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय आन्दोलन के समर्थन में लेख भी लिखे। जुलाई, 1918 में मैसूर प्रवास के समय उनकी भेंट रवीन्द्रनाथ टैगोर से हुई। इस मुलाकात के बाद वह टैगोर से काफी अभिभूत हुए। उनके विचारों की अभिव्यक्ति हेतु डॉ. राधाकृष्णन ने 1918 में ‘रवीन्द्रनाथ टैगोर का दर्शन’ शीर्षक से एक पुस्तक लिखी। इसके बाद उन्होंने दूसरी पुस्तक ‘द रीन आफ रिलीजन इन कंटेंपॅररी फिलॉसफी’ लिखी। इस पुस्तक ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी।

यह डाॅ. राधाकृष्णन की ही प्रतिभा थी कि स्वतंत्रता के बाद इन्हें संविधान निर्मात्री सभा का सदस्य बनाया गया। वह 1947 से 1949 तक इसके सदस्य रहे। उन्हें एक गैर राजनीतिक व्यक्ति होते हुए भी संविधान सभा का सदस्य गया। जवाहरलाल नेहरू चाहते थे कि राधाकृष्णन के संभाषण एवं वक्तृत्व प्रतिभा का उपयोग 14 - 15 अगस्त, 1947 की रात्रि को किया जाए, जब संविधान सभा का ऐतिहासिक सत्र आयोजित हो। राधाकृष्णन को यह निर्देश दिया गया कि वह अपना सम्बोधन रात्रि के ठीक 12 बजे समाप्त करें। उसके पश्चात् संवैधानिक संसद द्वारा शपथ ली जानी थी। उन्होंने ऐसा ही किया और ठीक रात्रि 12 बजे अपने सम्बोधन को विराम दिया। आजादी के बाद उनसे आग्रह किया गया कि वह मातृभूमि की सेवा के लिए विशिष्ट राजदूत के रूप में सोवियत संघ के साथ राजनयिक कार्यों की पूर्ति करें। इस प्रकार विजयलक्ष्मी पंडित का इन्हें नया उत्तराधिकारी चुना गया।

डॉ. राधाकृष्णन को स्टालिन से भेंट करने का दुर्लभ अवसर दो बार प्राप्त हुआ। जब वे विदा होने वाले थे,  उस समय राधाकृष्णन ने स्टालिन के सिर और पीठ पर हाथ रखा। तब स्टालिन ने कहा था ‘तुम पहले व्यक्ति हो, जिसने मेरे साथ एक इंसान के रूप में व्यवहार किया हैं और मुझे अमानव अथवा दैत्य नहीं समझा है। तुम्हारे जाने से मैं दुःख का अनुभव कर रहा हूँ। मैं चाहता हूँ कि तुम दीर्घायु हो। मैं ज्यादा नहीं जीना चाहता हूँ। इस समय स्टालिन की आँखों में नमी थी। फिर छह माह बाद ही स्टालिन की मृत्यु हो गई।

1952 में सोवियत संघ से आने के बाद डॉ. राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति निर्वाचित किए गए। संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति का नया पद सृजित किया गया था। नेहरू जी ने इस पद हेतु राधाकृष्णन का चयन करके पुनः लोगों को चैंका दिया। उन्हें आश्चर्य था कि इस पद के लिए कांग्रेस पार्टी के किसी राजनीतिज्ञ का चुनाव क्यों नहीं किया गया। डॉ. राधाकृष्णन ने अनेक महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे पेरिस में यूनेस्को नामक संस्था की कार्यसमिति के अध्यक्ष भी रहे। यह संस्था ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ का एक अंग है और पूरे विश्व के लोगों की भलाई के लिए अनेक कार्य करती है। वे 1949 से सन् 1952 तक रूस की राजधानी मास्को में भारत के राजदूत पद पर रहे। भारत रूस की मित्रता बढ़ाने में उनका भारी योगदान रहा था। राष्ट्रपति बनने के बाद राधाकृष्णन ने भी पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की भाँति स्वैच्छिक आधार पर राष्ट्रपति के वेतन से कटौती कराई थी। उन्होंने घोषणा की कि सप्ताह में दो दिन कोई भी व्यक्ति उनसे बिना पूर्व अनुमति के मिल सकता है।

इस प्रकार राष्ट्रपति भवन को उन्होंने सर्वहारा वर्ग के लिए खोल दिया। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद की तुलना में राधाकृष्णन का कार्यकाल काफी कठिनाइयों से भरा था। इनके कार्यकाल में जहाँ भारत-चीन युद्ध और भारत-पाकिस्तान युद्ध हुए, वहीं पर दो प्रधानमंत्रियों की पद पर रहते हुए मृत्यु भी हुई। उनके कार्यकाल में ही पंडित नेहरू और शास्त्रीजी की प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए मृत्यु हुई थी। लेकिन दोनों बार नये प्रधानमंत्री का चयन सुगमतापूर्वक किया गया। जबकि दोनों बार उत्तराधिकारी घोषित नहीं था और न ही संवैधानिक व्यवस्था में कोई निर्देश था कि ऐसी स्थिति में क्या किया जाना चाहिए। सचमुच उनका जीवन एक प्रेरणा है, एक रोशनी है, इस रोशनी को साथ रखते हुए आदर्श समाज रचना के संकल्प को सचेतन करने के लिये हम अग्रसर बने, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


UP : जालौन में दलित लड़की की रेप के बाद हत्या

UP : जालौन में दलित लड़की की रेप के बाद हत्या

03-Sep-2019

मीडिया रिपोर्ट 

उत्तर प्रदेश के जालौन में एक 14 वर्षीय दलित लड़की की आंखें फोड़कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि उसके पड़ोसी को अपहरण और हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है।  मृतका के साथ दुष्कर्म हुआ था या नहीं इस बात की पुष्टि के लिए शव परीक्षण रिपोर्ट के आने की प्रतीक्षा की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जालौन जिले के अटा क्षेत्र की रहने वाली लड़की शनिवार शाम को किसी काम के लिए बाहर गई थी, लेकिन फिर घर नहीं लौटी। उसके माता-पिता ने उसी रात पुलिस स्टेशन में एक लापता व्यक्ति की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस के सूत्रों ने बताया कि रविवार दोपहर को पीड़िता का शव एक सुनसान जगह पर मिला। उसके कपड़े फटे हुए थे और उसकी आंखें भी फोड़ीं गई थीं, जिससे हत्या के पहले हुई प्रताड़ना और उसके दुष्कर्म होने की संभावना का संकेत दे रही है।

जालौन के पुलिस अधीक्षक अवदेश सिंह के साथ अपराध स्थल का दौरा करने वाले डीआईजी (झांसी रेंज) सुभाष सिंह बघेल ने कहा कि लड़की के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर रंजीत अहिरवार को आईपीसी की धारा 302 और 363 के तहत गिरफ्तार किया गया है। डीआईजी ने आगे कहा, “संदिग्ध के खिलाफ पहले से ही धारा 376 (दुष्कर्म) का मामला दर्ज है। उस पर एक नाबालिग रिश्तेदार से छेड़छाड़ करने का भी आरोप है, जिसकी शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। हम आगे की कार्रवाई किए जाने से पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट (दुष्कर्म हुआ है या नहीं) की प्रतीक्षा कर रहे हैं। गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है।”

 


अल्लाह को प्यारा है मुहर्रम का महीना !

अल्लाह को प्यारा है मुहर्रम का महीना !

02-Sep-2019

इस्लामी वर्ष यानी हिजरी सन्‌ के पहले महीने मुहर्रम की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने को इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शुमार किया जाता है। अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद ने इसे अल्लाह का महीना कहा है। इस पाक़ माह में रोज़ा रखने की अहमियत बयान करते हुए उन्होंने कहा है कि रमजान के अलावा सबसे अच्छे रोज़े वे होते हैं जो अल्लाह के महीने यानी मुहर्रम में रखे जाते हैं। मुहर्रम के महीने के दसवे दिन को यौमें आशुरा कहा जाता है जिसका इस्लाम ही नहीं, मानवता के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यौमे आशुरा वो दिन है जब सत्य, न्याय, मानवीयता के लिए संघर्षरत हज़रत मोहम्मद के नवासे हुसैन इब्न अली की कर्बला के युद्ध में उनके बहत्तर स्वजनों और दोस्तों के साथ शहादत हुई थी। हुसैन विश्व इतिहास की ऐसी कुछ ऐसे महानतम विभूतियों में हैं जिन्होंने अपनी सीमित सैन्य क्षमता के बावज़ूद आततायी यजीद की विशाल सेना के आगे आत्मसमर्पण करने के बजाय लड़ते हुए अपनी और अपने समूचे कुनबे की क़ुर्बानी देना स्वीकार किया। कर्बला में इंसानियत के दुश्मन यजीद की अथाह सैन्य शक्ति के विरुद्ध हुसैन और उनके थोड़े-से स्वजनों के प्रतीकात्मक प्रतिरोध और आख़िर में उन सबको भूखा-प्यासा रखकर यजीद की सेना द्वारा उनकी बर्बर हत्या के किस्से और शायरी पढ़-सुनकर आज भी सिर्फ मुस्लिमों की नहीं, हर संवेदनशील व्यक्ति की आंखें नम हो जाती हैं। 
कब था पसंद रसूल को रोना हुसैन का 
आग़ोश-ए-फ़ातिमा थी बिछौना हुसैन का 
बेगौर ओ बेकफ़न है क़यामत से कम नहीं 
सहरा की गर्म रेत पे सोना हुसैन का !

मनुष्यता के हित में अपना सब कुछ लुटाकर भी कर्बला में उन्होंने सत्य के पक्ष में अदम्य साहस की जो रोशनी फैलाई, वह सदियों से न्याय और उच्च जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए लड़ रहे लोगों की राह रौशन करती आ रही है। कहा भी जाता है कि 'क़त्ले हुसैन असल में मरगे यज़ीद हैं / इस्लाम ज़िन्दा होता है हर कर्बला के बाद।' इमाम हुसैन का वह बलिदान दुनिया भर के मुसलमानों के लिए ही नहीं, संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। हुसैन महज़ मुसलमानों के ही नहीं, हम सबके हैं। यही वज़ह है कि यजीद के साथ जंग में लाहौर के ब्राह्मण रहब दत्त के सात बेटों ने भी शहादत दी थी जिनके वंशज ख़ुद को गर्व से हुसैनी ब्राह्मण कहते हैं। मरहूम अभिनेता सुनील दत्त इन्हीं हुसैनी ब्राह्मणों के वंशज थे। 
इस्लाम के प्रसार के बारे में पूछे गए एक सवाल के ज़वाब में एक बार महात्मा गांधी ने कहा था - 'मेरा विश्वास है कि इस्लाम का विस्तार उसके अनुयायियों की तलवार के ज़ोर पर नहीं, इमाम हुसैन के सर्वोच्च बलिदान की वज़ह से हुआ।' नेल्सन मंडेला ने अपने एक संस्मरण में लिखा है - 'क़ैद में मैं बीस साल से ज्यादा गुज़ार चुका था। एक रात मुझे ख्याल आया कि मैं सरकार की शर्तों पर आत्मसमर्पण कर इस यातना से मुक्त हो जाऊं, लेकिन तभी अचानक मुझे इमाम हुसैन और करबला की याद आई। उनकी याद ने मुझे वह ताक़त दी कि मैं विपरीत परिस्थितियों में भी स्वतंत्रता के अधिकार के लिए खड़ा रह सकूं।' 

लोग सही कहते हैं कि इमाम हुसैन आज भी ज़िन्दा हैं, मगर यजीद भी अभी कहां मरा है ? यजीद अब एक व्यक्ति का नहीं, एक अन्यायी और बर्बर सोच और मानसिकता का नाम है। दुनिया में जहां कहीं भी आतंक, अन्याय, बर्बरता, अपराध और हिंसा है, यजीद वहां-वहां मौज़ूद है। यही वज़ह है कि हुसैन हर दौर में प्रासंगिक हैं। मुहर्रम उनके मातम में अपने हाथों अपना ही खून बहाने का नहीं, उनके बलिदान से प्रेरणा लेते हुए मनुष्यता,समानता,अमन, न्याय और अधिकार के लिए उठ खड़े होने का अवसर भी है और चुनौती भी। ध्रुव गुप्ता सेवानिवृत्त आईपीएस
{सैयद काशिम लखनऊ }


इरादा इन लोगों को बाहर फेंकने का कभी नहीं था ! NRC याचिकाकर्ता प्रदीप कुमार भुइयां

इरादा इन लोगों को बाहर फेंकने का कभी नहीं था ! NRC याचिकाकर्ता प्रदीप कुमार भुइयां

31-Aug-2019

नई दिल्ली : बहुत से लोग यह नहीं जानते हैं कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) अपडेशन शुरू करने वाली याचिका के पीछे एक अस्सी साल का बुढ़ा है, जो गुवाहाटी के बाहरी इलाके में एक शांत जीवन व्यतीत करता है। अब तक, 1958 के आईआईटी-खड़गपुर स्नातक प्रदीप कुमार भुइयां ने इस मुद्दे पर साक्षात्कार के अनुरोधों और सवालों से इनकार करते हुए मीडिया से दूर रखा था। इसके बावजूद, असम में, कई लोगों की राय है कि भुवन के बिना, NRC नहीं होता – अधिक से अधिक असमिया समाज की एक लंबी मांग। 84 वर्षीय अभ्यास पर द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हैं।

NRC से आप कैसे जुड़े?

2009 के फरवरी में, एनजीओ असम पब्लिक वर्क्स के अभिजीत शर्मा एक अनुरोध के साथ मेरे पास आए। उन्होंने महसूस किया कि अवैध आव्रजन असम को बहुत लंबे समय से खत्म कर रहा है, और एनआरसी मुद्दा वर्षों से अधर में है। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं NRC को लागू करने के लिए एक याचिका का मसौदा तैयार कर सकता हूं।

मैं एक बात के बारे में निश्चित था कि अगर हमें कुछ स्थापित करना है, तो उसे डेटा और आँकड़ों पर आधारित होना चाहिए। हमें यह दिखाने की जरूरत है कि पिछले कुछ वर्षों में मतदाता कैसे तेजी से बढ़ा है। मैंने उनसे कहा कि मुझे 1971 के बाद से भारत के चुनाव आयोग (ECI) के नवीनतम दस्तावेज़ / प्रकाशन मिलें। अगले दो महीनों में, मैंने इस पर काम किया – दस्तावेजों के माध्यम से जाना, बहुत निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव परिणामों का अध्ययन, 1971 के बाद से चुनाव परिणाम – मेरे घर की बालकनी से जुड़े मेरे कार्यालय के कमरे में बैठे।

जुलाई 2009 में, सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका दायर की थी। अभिजीत चैंबर के अंदर था, मैं बाहर था, वास्तव में प्रार्थना कर रहा था, क्योंकि 60 फीसदी पीआईएल को फेंक दिया गया था! शुक्र है, CJI, याचिका के माध्यम से ब्राउज़ करने के बाद, “सूचना जारी किया…”
अभिजीत और एपीडब्ल्यू याचिका का मुख्य चेहरा बने। आपने पृष्ठभूमि में रहने का विकल्प क्यों चुना?

कोई मेरे पास एक अनुरोध के साथ आया था, और मैंने उस पर कार्रवाई की क्योंकि मुझे इसके कारण के बारे में दृढ़ता से महसूस हुआ। मेरे समय में कई अन्य लोगों की तरह, मैंने असम आंदोलन में भाग लिया। फिर भी दशकों बाद भी, मुझे एहसास हुआ कि यह मुद्दा हल होने से दूर है और राजनीतिक सत्ता प्रवासियों के पास जा रही थी। मैं स्वाभाविक रूप से चिंतित था। इसलिए मैंने जो किया वह सिर्फ समय की जरूरत थी। मैंने कभी भी साक्षात्कार नहीं दिया और न ही बाद में एक समाचार पैनल में उपस्थित हुआ। वह सिर्फ मेरे स्वभाव में नहीं है। मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि मैं अपने राज्य से प्यार करता हूं।

आज हर किसी की नजर असम पर है। NRC ने लाखों लोगों को परेशान किया है, हजारों हिरासत में हैं। क्या आपने कभी मानवीय संकट की भयावहता की कल्पना की है जो सामने आएगी?

अभ्यास इतना व्यापक है कि यह लोगों को प्रभावित करने के लिए बाध्य है। यह इतने बड़े पैमाने पर है कि अगर 1% भी विसंगति है, तो इसका मतलब है कि तीन लाख लोगों के जीवन को प्रभावित करना! पिछले कुछ वर्षों में क्या हुआ, इसके संचालन और कार्यान्वयन में दोषों का पता लगाया जा सकता है। मैं कभी नहीं चाहता कि किसी को सताया जाए – खासकर महिलाओं और बच्चों को। भारत सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेने की जरूरत है। 1985 के बाद से लगातार सरकारों ने इस मुद्दे की अनदेखी क्यों की?

क्या आपको लगता है कि कहानी में असम के पक्ष को उजागर नहीं किया गया है या उस पर ध्यान नहीं दिया गया है?

आजादी के बाद से असम के कारणों को गलत समझा गया है, इसलिए यह कोई नई बात नहीं है। हमें बस अपनी बात स्थापित करनी है – यही कारण है कि NRC हो रहा है। और न ही मैं इस मुद्दे पर लिखने के लिए मीडिया को दोषी मानता हूं – जब इतने सारे लोग प्रभावित होते हैं, तो इस मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण होना स्वाभाविक ही है।

तो NRC से आपको क्या हासिल होने की उम्मीद है?

सरकार पहले ही कह चुकी है कि जो लोग छूट गए हैं वे विदेशियों के न्यायाधिकरण में बहिष्कार की अपील कर सकते हैं। इन लोगों को बाहर फेंकने का इरादा कभी नहीं था। लेकिन जब तक उन्हें विदेशी / भारतीय घोषित नहीं किया जाता, मैं सुझाव देता हूं कि ईसीआई ने पहली बार मतदाताओं की सूची से उनके नाम को हटा दिया। अंततः वर्क परमिट दें, लेकिन निश्चित रूप से उन्हें अस्वीकार करें। यह मुख्य खतरा था – भाषा और संस्कृति और जनसांख्यिकी के अलावा, राजनीतिक नियंत्रण की शुरुआत।

कई असम लोक निर्माण सहित कह रहे हैं कि यह एक गलत NRC है जिसे वे कभी स्वीकार नहीं करेंगे? क्या आपको भी लगता है कि पूरी कवायद बेकार थी?

खैर, यह एक लोकतंत्र है और लोगों की अपनी राय होगी। मैं अभ्यास के कार्यान्वयन के बारे में टिप्पणी करने वाला कोई नहीं हूं, लेकिन सभी को याद करने वाली एक चांदी की परत है: कि पहचान के डर के कारण कई पोस्ट ’71 बांग्लादेशियों ने एनआरसी पर लागू नहीं किया था। हाल ही में आई एक खबर की रिपोर्ट में यह दस लाख लोगों को बताया गया है, लेकिन मेरी गणना के आधार पर, जनगणना के आंकड़ों और 1981 और 2011 के बीच के चुनावी विकास को देखते हुए यह आंकड़ा और भी अधिक है। सरकार को तुरंत इन भूत नागरिकों को ट्रैक करना चाहिए। मेरे लिए, NRC, 31 अगस्त को जो भी फॉर्म लेता है, वह दशकों पुरानी समस्या के समाधान के लिए पहला कदम है।


बिहार में अब पान मसाला की बिक्री पर लगा प्रतिबंध

बिहार में अब पान मसाला की बिक्री पर लगा प्रतिबंध

30-Aug-2019

एजेंसी 

पटना : बिहार में पान मसाला के उत्पादन, बिक्री, भंडारण और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गयी है. राज्य के खाद्य संरक्षा आयुक्त ने जन स्वास्थ्य के हित में जिन पान मसालों पर प्रतिबंध लगाया है, उनमें रजनीगंधा, राज निवास, सुप्रीम पान पराग, पान पराग, बहार, बाहुबली, राजश्री, रौनक, सिग्नेचर, पैसन, कमला पसंद और मधु पान मसाला शामिल हैं. प्रतिबंध लगाये जाने की सूचना सूबे के सभी जिलाधिकारी, आरक्षी अधीक्षक, प्रमंडलीय आयुक्त और सिविल सर्जनों को दिये जाने के साथ इसे प्रभावी तरीके से लागू करने का निर्देश दिया गया है.

खाद्य संरक्षा आयुक्त सह स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार द्वारा लोगों के स्वास्थ्य पर पड़नेवाले दुष्प्रभावों के कारण पान मसाला की खरीद-बिक्री, भंडारण, परिवहन और प्रदर्शन करने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है. शुक्रवार को जारी आदेश में बताया गया है कि राज्य में विभिन्न ब्रांड के पान मसालों के 20 सैंपल की जांच करायी गयी है. इसका विश्लेषण करने पर पाया गया कि इन मसालों में मैग्नेशियम कार्बोंनेट के तत्व पाये गये है. इन तत्वों के सेवन से हाइपरमैगनेसिया और हृदयाघात की आशंका होती है. इसे देखते हुए इन सभी पान मसालों पर तत्काल प्रभाव से एक साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया है. कुछ अन्य ब्रांडों का नमूना जांच के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आने पर उस पर भी कार्रवाई की जायेगी. 


RBI की सालाना रिपोर्ट कह रही है कि नोटबंदी इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक घोटाला है!

RBI की सालाना रिपोर्ट कह रही है कि नोटबंदी इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक घोटाला है!

30-Aug-2019

गिरीश मालवीय (mediavigil)

रिजर्व बैंक की 2018-19 की एन्युअल रिपोर्ट कल आ गयी और इस बात पर पक्की मुहर लग गयी कि नोटबंदी से बड़ा आर्थिक घोटाला भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ.......यह वाकई एक आर्गेनाइज्ड लूट ओर लीगलाइज्ड प्लंडर (क़ानूनी डाका) बनकर सामने आया है - Girish Malviya

मीडिया इस रिपोर्ट की असली बात को छुपा रहा है...इस रिपोर्ट की हेडलाइन मीडिया द्वारा यह बनाई जा रही है कि इस वर्ष बैंकों में हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 6 हजार से अधिक मामले सामने आए है लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि देश में चलन में मौजूद मुद्रा पिछले साल से 17 फीसदी बढ़कर 21.10 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। जबकि नोटबंदी से पहले 15.44 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में थे. ओर साल भर बाद पता चला था कि 15.28 लाख करोड़ के नोट वापस आ गए हैं यानी लगभग 99 प्रतिशत नोट वापस आ गए थे ,

तो कहाँ गया काला धन?

तब सरकार के पिट्ठू बने अर्थशास्त्री यह बता रहे थे कि नोटबन्दी के पहले बड़ी संख्या में करंसी सर्कुलेशन में आ गयी थी जिसे रोका जाना जरूरी था आठ नवंबर, 2016 को की गई नोटबंदी का बड़ा उद्देश्य डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देना और नकदी के इस्तेमाल में कमी लाना बताया गया था अगर यह सच था तो आज नोटबन्दी के 2 साल 9 महीने के बाद साढ़े पंद्रह लाख करोड़ की नकदी 21 लाख करोड़ से अधिक कैसे पुहंच गयी?........

नोटबंदी की घोषणा करने के बाद अपने पहली मन की बात में 27 नवंबर, 2016 को नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी को 'कैशलेस इकॉनमी' के लिए ज़रूरी क़दम बताया था...... आज अगर कैश इतना अधिक बढ़ा है तो कहा गयी आपकी कैशलेस इकनॉमी?......

नकली नोटों पर भी बहुत हल्ला मचाया गया था आज  पता चला है कि  रिजर्व बैंक के मुताबिक 2017-18 ओर 2018-19 में नयी करंसी छापे जाने के बाद भी जाली नोटों को पकड़े जाने का सिलसिला जारी है. इस साल भी 3.17 लाख नकली नोट पकड़े गए है 2000 रुपये के नकली नोट 2018-19 में 22% बढ़ गए। 500 रुपये के नोट्स में यह बढ़ोतरी रिकॉर्ड 121% की है। .........अब कोई नकली नोट कैसे बढ़ गए! यह बात क्यो नही पूछता?..........

नोटबन्दी ने देश की आर्थिक विकास की गति को अवरुद्ध कर दिया  2015-1016 के दौरान जीडीपी की ग्रोथ रेट 8.01 फ़ीसदी के आसपास थी, जो 2016-2017 के दौरान 7.11 फ़ीसदी रह गई और इसके बाद जीडीपी की ग्रोथ रेट 6.1 फ़ीसदी पर आ गई. 2018-19 की आखिरी तिमाही में तो यह दर 5.8 पर आ गयी.......... पिछले साल ही रिजर्व बैंक की एक समिति ने माना था कि नोटबंदी के चलते देश की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ एक फ़ीसदी कम हुई है. यानी आज के दिन तक मोटे तौर पर अर्थव्यवस्था को तीन लाख करोड़ का नुकसान हो चुका है ........

जीडीपी ग्रोथ के गिरने से दोहरा नुकसान हुआ है रिज़र्व बैंक की बैठक में बताया गया था कि नोटबन्दी के पहले मंत्रालय के मुताबिक 500 और 1000 रुपये के नोट 76% और 109% की दर से बढ़ रहे थे, जबकि अर्थव्यवस्था इससे ज्यादा तेजी से बढ रही थी. लेकिन अब अर्थव्यवस्था के बढ़ने की गति धीमी हो गयी है ओर बाजार में मुद्रा की अधिकता हो गयी है तब भी अर्थव्यवस्था कैश क्रंच को झेल रही है.......... 21 लाख करोड़ की मुद्रा होने के बाद भी लोगो की जेब मे पैसा नहीं है लेकिन तब साढ़े 15 लाख करोड़ रुपये होने पर भी सबकी जेब मे पैसा था!.......

RBI के निदेशकों ने उस वक्त ही कह दिया था कि था कि काला धन कैश में नहीं, सोने या प्रॉपर्टी की शक्ल में ज़्यादा है और नोटबंदी का काले धन के कारोबार पर बहुत कम असर पड़ेगा. इतना ही नहीं, निदेशकों का यह भी कहना था कि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा.

आज वही हो रहा है इस रिजर्व बैंक की इस वार्षिक रिपोर्ट में साफ साफ लिखा है कि पिछले 10 साल में रिजर्व बैंक के बैलेंसशीट की औसत वार्षिक विकास दर 9.5% रही है जबकि 2013-14 से 2017-18 के पाँच साल के दौरान इसकी औसत विकास दर 8.6% रही। समिति ने कहा है कि बैलेंसशीट की विकास दर में गिरावट का 2016-17 में की गई नोटबंदी थी। 

15 अगस्त, 2017 को अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा था कि 'तीन लाख करोड़ रुपए जो कभी बैंकिंग सिस्टम में नहीं आता था, वह आया है' .............अगर वह पैसा वापस आ ही गया है तो मोदी जी आपको रिजर्व बैंक के 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपये हड़पने की जरूरत क्यों पड़ रही है ?..........

नोटबन्दी के बाद देश के टैक्स कलेक्शन पर भी विपरीत असर पड़ा  केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अपने आंकड़ों में बताया था कि कुल कर-संग्रह में प्रत्यक्ष कर पिछले पांच सालों में सबसे कम वित्त वर्ष 2016-17 में रहा है, इस साल पेश कैग की रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि पिछले दो साल में भारत मे टैक्स कलेक्शन की गति अवरुद्ध हो गयी है........

अर्थव्यवस्था तेजी से बर्बाद हो रही है लेकिन मुख्य मीडिया की औकात नही है कि इस बर्बाद हो चुकी अर्थव्यवस्था के असली कारण नोटबन्दी पर बहस कर ले............

अब अंत मे आप मोदी जी के उस भाषण को याद कर लीजिए जो उन्होंने नोटबन्दी के तुरंत बाद किये गए जापान दौरे से लौटने पर दिया था ......."भाइयों बहनों, मैंने सिर्फ़ देश से 50 दिन मांगे हैं. 50 दिन. 30 दिसंबर तक मुझे मौक़ा दीजिए मेरे भाइयों बहनों. अगर 30 दिसंबर के बाद कोई कमी रह जाए, कोई मेरी ग़लती निकल जाए, कोई मेरा ग़लत इरादा निकल जाए. आप जिस चौराहे पर मुझे खड़ा करेंगे, मैं खड़ा होकर..देश जो सज़ा करेगा वो सज़ा भुगतने को तैयार हूं.".............

साभार : MEDIAVIGIL


राजस्थान के बीजेपी विधायक का अजीब बयान, कहा- जब हम विपक्ष में होते हैं तो जूते के जोर पर भी काम करवाना जानते हैं'

राजस्थान के बीजेपी विधायक का अजीब बयान, कहा- जब हम विपक्ष में होते हैं तो जूते के जोर पर भी काम करवाना जानते हैं'

29-Aug-2019

जयपुर। राजस्थान में भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने अजीब बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब सरकार में होते हैं तो कलम की ताकत से काम होते हैं और जब विपक्ष में होते हैं तो हम जूते के ज़ोर पर भी काम करवाना जानते हैं।विधायक सराफ का यह बयान सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। 

दरअसल, राजस्थान की राजधानी जयपुर में मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक कालीचरण सराफ के नेतृत्व में गुरुवार को करतारपुरा नाले पर विशाल धरना दिया गया। धरने पर बीजेपी मीडिया प्रकोष्ठ के सम्पर्क प्रमुख आनंद शर्मा सहित क्षेत्र के आसपास की कॉलोनियों के विकास समितियों के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और आमजन मौजूद रहे। सुबह 11.30 बजे शुरू हुआ धरना कुछ ही देर में समाप्त हो गया। क्योंकि जेडीए और नगर निगम के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लिखित में मांगें मानने का आश्वासन विधायक को सौंप दिया। 

मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 57 और 58 के बीच करतारपुरा नाले को पक्का करने, जगह-जगह हो रहे कटावों को दुरुस्त करने, नाले पर अतिक्रमण हटाने, भाजपा सरकार द्वारा शुरू किए गए सीवरेज लाइन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के कार्य को दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर विधायक ने करतारपुरा नाले के पास जन सुविधा केंद्र के सामने धरना दिया। 


पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सचिवालय के पास बिजली का बिल भरने के लिए नहीं है पैसे, कटेगी बिजली

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सचिवालय के पास बिजली का बिल भरने के लिए नहीं है पैसे, कटेगी बिजली

29-Aug-2019

मीडिया रिपोर्ट 

इस्लामाबाद: दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली की स्थिति कितनी गंभीर है, इसे इसी से समझा जा सकता है कि बिल नहीं चुकाने की वजह से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सचिवालय की बिजली काटे जाने की नौबत आ गई है.

कश्मीर मामले में भारत के साथ ‘अंतिम युद्ध’ की धमकियां देने में व्यस्त पाकिस्तानी शासकों के पास शायद अपने ही दफ्तर का बिल भरने का समय नहीं है या पैसा नहीं है. इसी वजह से इस्लामाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी को प्रधानमंत्री सचिवालय को बिजली काटे जाने का नोटिस भेजने पर मजबूर होना पड़ा है.

‘एक्सप्रेस न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री सचिवालय पर इस्लामाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी का 41 लाख 13 हजार 992 रुपये का बिल बकाया है. बीते महीने का बिल 35 लाख से अधिक का है जबकि इससे पहले का पांच लाख 58 हजार का बकाया है.

कंपनी के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री सचिवालय द्वारा नियमित रूप से बिजली का बिल नहीं भरा जाता. कभी बिल का पैसा जमा कराया जाता है और किसी महीने नहीं कराया जाता है. इसी वजह से इस पर बकाया हो गया है जिसे जमा नहीं कराए जाने पर बिजली काट दी जाएगी.


लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर केला बेचने पर लगा बैन

लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर केला बेचने पर लगा बैन

28-Aug-2019

लखनऊ। अब आपके चहेते चारबाग रेलवे स्टेशन पर केला नहीं बिकेगा और अगर कोई उसे बेचेते पाया गया तो उस पर तगड़ा जुर्माना लगेगा, दरअसल लखनऊ रेलवे प्रशासन ने चारबाग स्टेशन पर केले की बिक्री पर रोक लगा दी है, इसके पीछे रेलवे अधिकारियों ने दलील ही है कि केलों के छिलके से स्टेशन पर गंदगी फैल रही थी, इसलिए इसकी बिक्री ही बंद करवा दी गई। 

मालूम हो कि चारबाग स्टेशन से रोजाना 280 से अधिक ट्रेनों का आना-जाना होता है, इनमें सफर करने वाले सवा लाख से अधिक यात्रियों का सबसे पसंदीदा फल केला है लेकिन अब इसकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है, रेलवे प्रशासन ने कहा है कि स्वच्छता से समझौता नहीं किया जा सकता है इसी वजह से केले बेचेने पर रोक लगाई गई है, हालांकि विक्रेता और यात्री इस कदम से खुश नहीं दिखाई दे रहे हैं।