नागरिकता कानून  !अंग्रेजों ने भी नहीं किया था ऐसा दमन:,इतिहासकार इरफान हबीब

नागरिकता कानून !अंग्रेजों ने भी नहीं किया था ऐसा दमन:,इतिहासकार इरफान हबीब

26-Dec-2019

नागरिकता कानून 2019 के खिलाफ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन जारी है। दिल्ली से लेकर मुंबई और लखनऊ से लेकर बेंगलुरु तक प्रदर्शनकारी इस कानून के खिलाफ सड़कों पर उतर गए हैं। कई राजनेता, फिल्मी हस्तियां और बड़े नाम इस विरोध के समर्थन में जुड़ चुके हैं, इसी कड़ी में अब प्रसिद्ध इतिहासकार इरफान हबीब का भी नाम जुड गया है। हबीब ने  मोदी सरकार की तुलना ब्रिटिश राज से की है।

इतिहासकार इरफान हबीब ने बुधवार को कहा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ हाल ही में सार्वजनिक भावनाओं के प्रकोप को केवल एक “मुस्लिम आक्रोश” के रूप में देखना गलत होगा क्योंकि यह अंततः सभी को प्रभावित करेगा और खासकर आधुनिक राज्य के रूप में भारत के विचार को सबसे ज्यादा। देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रजों के काल में भी हमने इस तरह से असहमति की आवाज का दमन होते नहीं देखा था।

ब्रिटिश पुलिस भी ऐसा अमानवीय रवैया नहीं दिखाती थी

पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि लोगों के विरोध को कुचलने के ऐसे प्रयासों पर चिंता हो रही है क्योंकि विरोध का अधिकार एक लोकतांत्रिक समाज का मूल्य है। उन्होंने कहा कि अंग्रजों के समय में भी ब्रिटिश पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के प्रति ऐसा अमानवीय रवैया नहीं दिखाया था जैसा कि देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों के दौरान देखा गया है।
भारत और लोकतंत्र के भविष्य के बारे में है यह प्रदर्शन


 
हबीब ने जोर देते हुए कहा कि पूरे देश में बड़ी संख्या में हिंदू और अन्य समुदाय इस विरोध प्रदर्शन में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यह सत्तारूढ़ सोच के लिए उपयुक्त होगा यदि यह विरोध केवल हिंदू-मुस्लिम मुद्दे के चश्मे से देखा जाता है। प्रख्यात इतिहासकार ने कहा कि यह संघर्ष भारत और लोकतंत्र के भविष्य के बारे में है।

विभाजन के बाद के पाकिस्तान से की तुलना

हबीब ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई कुछ नीतियां हिंदुत्व आंदोलन की दीर्घकालिक परियोजना की अभिव्यक्ति हैं जो काफी हद तक असंतोष और विरोध को दबाने की नीति पर टिकी हुई हैं। साथ ही प्रोफेसर ने कहा कि आज भारत में जो हो रहा है, दुर्भाग्य से विभाजन के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में जो कुछ हो रहा था उससे अलग नहीं है। उन्होंने कहा पाकिस्तान के शासक वर्गों की तरह ही वर्तमान भारतीय शासकों को पता है कि धर्म जनता की भावनाओं को उत्तेजित करता है और उनकी राजनीतिक शक्ति इस कथा पर टिकी हुई है।

मुसलमान काफी समय से आक्रोशित थे

सीएए पर सार्वजनिक आक्रोश के अचानक फैलने की जड़ों की व्याख्या करते हुए, हबीब ने कहा कि मुसलमानों में काफी समय से आक्रोश व्याप्त है। हालांकि यह नाराजगी पिछले कुछ दिनों के दौरान ही सामने आई है क्योंकि अब वे लोग ऐसा अनुभव कर रहे हैं कि हिंदू राष्ट्र का मुद्दा गंभीर रूप ले रहा है जैसा कि सरकार के कुछ हालिया फैसलों में भी देखा जा सकता है।

एनपीआर में 7 रेसकोर्स बता दें पताः अरुंधति राय

वहीं, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय ने बुधवार को केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने देश में डिटेंशन सेंटर के मुद्दे पर सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया।  अरुंधति रॉय सीएए  के विरोध में दिल्ली यूनिवर्सिटी में जमा हुए कई यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने पहुंची थीं। उनके साथ फिल्म अभिनेता जीशान अय्यूब भी पहुंचे। उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा कि जब अधिकारी एनपीआर के लिए आपका डेटा लेने के लिए आपके घर आएं तो आप अपना नाम और पता गलत बता दीजिए। आप पता 7 रेस कोर्स बता दें।

साभार- Outlook.com

 


कौन होगा राजधानी रायपुर का महापौर  ?

कौन होगा राजधानी रायपुर का महापौर ?

25-Dec-2019

इस बार राजधानी रायपुर में महापौर कौन होगा ये देखना दिलचस्प होगा क्योकि फ़िज़ा बदली बदली सी है और पुराने महापौर ब मुश्किल से अपनी पार्षद की सीट बचा पाए है हालांकि उन्होंने 1500 वोटों से विजयी हासिल किया लेकिन एक वक्त में वह 250-300 वोटो से पीछे हो गए थे तब लग रहा था कि बीजेपी के दिग्गज संजय श्रीवास्तव की तरह प्रमोद दुबे भी न पिछड़ जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ प्रमोद दुबे के खिलाफ बिलकुल कमज़ोर प्रत्याशी खड़े हुए लेकिन एक लोकसभा प्रत्याशी का पार्षद जैसे चुनाव में इतने कम मार्जिन वोटो से जितना बताता है की अब पहले वाली लोकप्रियता में कमी हुई है और इसका कारण बहुत हद तक  नगर निगम के पिछले कार्यकाल की कार्यप्रणाली रही है !

वैसे प्रदेश कांग्रेस के आलाकमान को गंभीरता से विचार करना होगा की इस बार राजधानी रायपुर का महापौर एक सर्व वर्ग की सहमति वाला होना चाहिए क्योकि दोबारा फिर से उसी चेहरे को रिपीट करना कांग्रेस की भूल हो सकती है वैसे भी इस बार पार्षदों का खेल है महापौर का चुनाव इस बार पार्षद करेंगे और पार्षद जिसके पक्ष में होंगे वही महापौर होगा । 


झारखण्ड  विधानसभा  चुनाव में AIMIM) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।

झारखण्ड विधानसभा चुनाव में AIMIM) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।

24-Dec-2019

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिेमिन को भी झारखंड की जनता का साथ नहीं मिला।
इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, ओवैसी की पार्टी न तो कांग्रेस और झामुमो के वोटरों को प्रभावित कर सकी और न ही भाजपा को ही नुकसान पहुंचाने में सफल रही।
ओवैसी ने गढ़वा, विश्रामपुर, हजारीबाग, बरकट्ठा, बोकारो, मधुपुर, डुमरी, धनवार, सारठ, लातेहार, लोहरदगा, जमशेदपुर और राजमहल में अपना प्रत्याशी उतारा था।
झारखंड विधानसभा चुनावों असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। एआईएमआईएम का वोट शेयर नोटा से भी कम है।
एआईएमआईएम का वोट शेयर 1.16% है वहीं, NOTA का वोट शेयर 1.37% है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक एआईएमआईएम को सिर्फ 172872 वोट मिले हैं जबकि NOTA के तहत 203706 वोट पड़ चुके हैं। यही हाल आम आदमी पार्टी का भी है। आप को भी नोटा से कम वोट पड़े हैं।
बता दें कि झारखंड विधानसभा चुनाव- 2019 में अपनी पार्टी का खाता खोलने के लिए ओवैसी ने धुआंधार प्रचार किया था। लेकिन ओसैवी के उम्मीदवार जमानत भी नहीं बचा पाए।

 


भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की शरद पवार चाहते हैं SIT जांच, कही ये बात !

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की शरद पवार चाहते हैं SIT जांच, कही ये बात !

23-Dec-2019

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार  ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच करने के लिए एसआईटी (SIT) गठित करने की बात कही है. न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार पवार ने कहा कि हम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भीमा कोरेगांव मामले की उचित जांच करने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने की मांग करेंगे. उन्होंने कहा कि वो सीएम उद्धव ठाकरे से इस पर बात करेंगे.
बता दें कि एक जनवरी, 2018 के दिन पुणे के करीब भीमा कोरेगांव में जमकर हिंसा हुई थी. जश्न के दौरान दलित और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस दौरान एक शख्स की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे. दलित और बहुजन समुदाय के लोगों ने एल्गार परिषद के नाम से शनिवार वाड़ा में कई जनसभाएं की थीं. शनिवार वाड़ा 1818 तक पेशवा की सीट रही है. जनसभा में मुद्दे हिंदुत्व राजनीति के खिलाफ थे. इस मौके पर कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण दिए थे, इस दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी थी.नए साल का जश्न मनाया जाता है
हर वर्ष एक जनवरी के दिन दलित समुदाय के लोग भीमा कोरेगांव में जमा होते है. वो यहां ‘विजय स्तंभ’ के सामने अपना सम्मान प्रकट करते हैं. ये विजय स्तंभ ईस्ट इंडिया कंपनी ने उस युद्ध में शामिल होने वाले लोगों की याद में बनाया था. इस स्तंभ पर वर्ष 1818 के युद्ध में शामिल होने वाले महार योद्दाओं के नाम अंकित हैं. इन योद्धाओं को पेशवा के खिलाफ जीत मिली थी.

 


मौलाना मज़हरूल हक़ की याद !

मौलाना मज़हरूल हक़ की याद !

22-Dec-2019

                                 ध्रुव गुप्ता सेवानिवृत्त आईपीएस

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देश के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर शिक्षाविद, लेखक और अग्रणी समाज सेवक मौलाना मज़हरुल हक़ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे योद्धाओं में रहे हैं जिन्हें उनके स्मरणीय योगदान के बावज़ूद इतिहास ने वह यश। नहीं दिया जिसके वे हकदार थे। 1866 में पटना जिले के बिहपुरा के एक जमींदार परिवार में जन्मे तथा सारण जिले के ग्राम फरीदपुर में जा बसे मज़हरुल हक़ लंदन से क़ानून की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद पटना और छपरा में वक़ालत के साथ सामाजिक कार्यों और देश के स्वाधीनता आंदोलन से जुड़ते चले। 1916 में बिहार में होम रूल मूवमेंट के वे अध्यक्ष बने। अंग्रेजों के खिलाफ डॉ राजेन्द्र प्रसाद के साथ चंपारण सत्याग्रह में शामिल होने के कारण उन्हें जेल की सजा भी हुई। जब महात्मा गांधी ने देश में असहयोग और ख़िलाफ़त आंदोलनों की शुरुआत की तो मज़हरुल हक़ अपनी वकालत का और मेंबर, इम्पीरियल लेजिस्लेटिव कौंसिल का सम्मानित पद छोड़ पूरी तरह स्वाधीनता आंदोलन का हिस्सा हो गए।

स्वाधीनता आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए 1920 में उन्होंने पटना में अपनी सोलह बीघा ज़मीन दान दी जिस पर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सदाकत आश्रम की स्थापना हुई। यह आश्रम जंग-ए-आज़ादी के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का तीर्थ हुआ करता था। सदाकत आश्रम से उन्होंने 'मदरलैंड' नाम से एक साप्ताहिक पत्रिका भी निकाली जिसमें आज़ादी के पक्ष में अपने प्रखर लेखन के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। सदाकत आश्रम आज़ादी के बाद बिहार कांग्रेस का मुख्यालय बना, लेकिन आज देश तो क्या बिहार के भी बहुत कम कांग्रेसियों को आज मौलाना साहब की याद होगी। सारण जिले के फरीदपुर में उनका घर 'आशियाना' उस दौर में स्वतंत्रता सेनानियों का आश्रय-स्थल हुआ करता था। पंडित मोतीलाल नेहरू, सरोजिनी नायडू, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, मदन मोहन मालवीय सहित अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तारी के डर से भागे आज़ादी के सेनानियों ने 'आशियाना' में पनाह पाई थी। 

मौलाना मजहरुल हक़ बिहार में शिक्षा के अवसरों और सुविधाओं को बढ़ाने तथा निःशुल्क प्राइमरी शिक्षा लागू कराने के लिए अरसे तक संघर्ष करते रहे। गांघी के असहयोग आंदोलन के दौरान पढ़ाई छोड़ने वाले युवाओं की शिक्षा के लिए उन्होंने सदाकत आश्रम परिसर में विद्यापीठ कॉलेज की स्थापना की। यह विद्यापीठ उन युवाओं के लिए वरदान साबित हुआ जिनकी पढ़ाई आन्दोलनों और जेल जाने की वजह से बाधित हुई थी। बिहपुरा में जहां वे पैदा हुए, उस घर को उन्होंने एक मदरसे और एक मिडिल स्कूल की स्थापना के लिए दान दे दिया ताकि एक ही परिसर में हिन्दू और मुस्लिम बच्चों की शिक्षा-दीक्षा हो सके। सामाजिक कार्यों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने पर्दा प्रथा के खिलाफ जनचेतना जगाने का प्रयास किया था।

मौलाना साहब देश की गंगा-जमुनी संस्कृति और हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल हिमायती थे। उनका कथन है - 'हम हिन्दू हों या मुसलमान, हम एक ही नाव पर सवार हैं। हम उबरेंगे तो साथ, डूबेंगे तो साथ !' आज़ादी की सुबह देखने के पहले 1930 में उनका देहावसान हो गया। स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान की स्मृति में सरकार ने 1998 में मौलाना मज़हरुल हक़ अरबी एंड पर्शियन यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी। पटना में इनके नाम से शहर की एक प्रमुख सड़क और छपरा शहर में उनकी एक मूर्ति भी है !

मौलाना मज़हरुल हक़ के यौमे पैदाईश (22 दिसंबर} पर खिराज-ए-अक़ीदत !

 


लोकतंत्र के लिए मतदान आवश्यक

लोकतंत्र के लिए मतदान आवश्यक

20-Dec-2019

संविधान में ‘‘हम भारत के लोग भारत की संप्रभुता, सम्पन्न, समाजवादी, पंथ निरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य बनाने का संकल्प लेते हैं’’ का उल्लेख किया गया है। पूरी दुनिया में भारत देश जैसा अच्छा और सक्षम लोकतांत्रिक गणतंत्र और कहीं नहीं है। संविधान के अनुसार देश को चलाने के लिए राजनीतिक ढ़ाचा तैयार किया गया। जो देश और राज्य को चलाने के सहायक सिद्ध होती है। इसी प्रकार राज्य के भीतर नगरीय निकायो में पार्षद चुनाव कराये जाते है, जो सीधे जनता के द्वारा अपने मनपसंद प्रत्याशी को चुना जाता है। जीते हुए प्रत्याशी पार्षद बनते है और 5 वर्ष के लिए अपने वार्ड के विकास एवं आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रयासरत रहते हैं। इसी प्रकार वार्ड की समस्याओं से जनता द्वारा अवगत होकर उसका निराकरण कराने का प्रयत्न भी करते है।

हमारे देश में किसी भी चुनाव में वोट देने अधिकार 18 वर्ष की आयु के युवक एवं युवतियों को है। निर्वाचन में एक-एक वोट का महत्व बहुत होता है। इस वोट से अपने क्षेत्र की बागडोर ऐसे व्यक्ति के हाथों सौपने का निर्णय किया जाता है, जो आपके अनुसार सही, निष्पक्ष और जनता के हित में कार्य करें। इसके लिए जनता को चाहिए कि वे अपने सुविवेक का उपयोग करें और ऐसे व्यक्ति को वोट दें, जो शिक्षित हो, अनुभवी हो, जो सभी का आदर करने वाला, संस्कारी एवं मिलनसार हो। पद पर बैठने के बाद जनता के लिए कार्य करें। इस सोच के साथ सभी नागरिकों को अपना बहुमूल्य वोट देना चाहिए। एक गणतांत्रिक देश में सबसे अहम होता है मत देना। गणतंत्र एक यज्ञ की तरह होता है, जिसमें मतों की आहुति बेहद अहम मानी जाती है। नागरिकों को सभी चुनावों में धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय, भाषा आधार पर प्रभावित हुए बिना निर्भीक होकर मतदान करना चाहिए।

 यह चुनाव जमीन से जुड़ी होती है, जिसमें आपको प्रतिदिन आने वाली समस्याओं को देखते हुए, उन समस्याओं का त्वरित निराकरण करने की क्षमता करने वाले प्रत्याशी को चुना जाना चाहिए और व शिक्षित, अनुभवी व दूरदर्शी हो, जो आपके वार्ड और शहर की आमजनता के हित में कार्य करने के लिए उचित निर्णय लेने की क्षमता रखते हो। यहीं वक्त होता है, जब हर नागरिक अपने मताधिकार का सही उपयोग कर एक शिक्षित, ईमानदार, अनुभवी और जिम्मेदार व्यक्ति को वोट दे। आपके एक महत्वपूर्ण वोट से एक अच्छा प्रत्याशी चुन सकते हैं और आपके एक वोट ना देने से अयोग्य प्रत्याशी जीत सकता है। चयन आपको करना है।

 प्रायः देखा गया है कि युवा अपने मौज, मस्ती और सोशल मीडिया में इतने डूबे रहते है, कि उन्हें मतदान करने की फुरसत नहीं होती। वे यह सोचते है कि कौन जाकर लम्बी कतारे पर खड़ा होगा उनके एक वोट न देने से क्या बिगड़ जाएगा। जब तक युवाओं की सोच इस प्रकार की होगी, वाकिब में देश एवं शहर का कुछ नहीं हो सकता। भारत देश की 35 प्रतिशत आबादी युवाओं की है इसलिए देश के प्रत्येक चुनाव में युवाओं को बढ़-चढ़कर भागीदारी करनी चाहिए और ऐसी सरकारें चुननी चाहिए, जो कि साप्रदायिकता और जातिवाद से ऊपर उठकर देश के विकास के बारे में सोचें।

भारत में प्रत्येक व्यक्ति का वोट ही देश के भावी भविष्य की नींव रखता है। इसलिए हर एक व्यक्ति का वोट राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनता है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जनता को जागरूक करने के लिए अनेकों कार्यक्रम और विज्ञापनों के माध्यम से प्रचार-प्रसार करती है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग अनिवार्य रूप से करने के लिए प्रेरित किया जाता है। शिक्षित एवं अशिक्षित व्यक्ति दोनों अपने मताधिकार को उपयोग कर सकते हैं।

आज हमारे देश में औसतन 50 से 60 प्रतिशत ही मतदान होता है। इसमें छोटी-बड़ी राजनैतिक पार्टियो व निर्दलीय उम्मीदवारों में वोट बंटते या पड़ते हैं। जिसको भी 10-20 प्रतिशत वोट पड़ जाते हैं वो जीत जाता है, आज कल के नेता शराब पिला कर व पैसे बाँट कर इन 10 से 20 प्रतिशत लोगों को अपने प्रभाव से वोट करवा लेते हैं व चुनाव जीत जाते है जिस कारण ऐसे लोग चुन कर आते है जो पूर्णतया भ्रष्ट होते है व जिनका चुनाव जिंतने का एक मात्र उदेश्य सत्ता पाना और धन कमाना होता है, तथा चुनाव जिंतने के बाद वह अगले 5 वर्ष तक देश के संसाधनों का खूब शोषण करते है व खूब भ्रष्टाचार करते है।

अगर भ्रष्ट व्यवस्था को बदलना है तो लोगों को यह भी समझना होगा की आज जो भ्रष्ट व्यवस्था चल रही है व चारों ओर जो अव्यवस्था का वातावरण है उसका एक बहुत बड़ा कारण चुनाव के दौरान मतदान नहीं करना है। यदि सभी लोग मतदान करेंगे को वही लोग चुन कर देश के सत्ता में आयेंगे जो देश व आम जनता के लिए काम करेंगे। इसलिए पूरे नागरिक अपने मताधिकार को उपयोग अवश्य करें।

राजनीतिक दलों द्वारा जनता को लुभाने के लिए अनेकों माध्यम कोशिश की जाती है। व्यक्तियों को चाहिए कि वे प्रत्याशी के लालच में ना आए बल्कि अपने मताधिकार का उपयोग कर ऐसे व्यक्ति को चुने जो आपके हित में कार्य करें, आपकी सुने और समय पड़ने पर आपकी मद्द भी करें। चुनाव के पहले राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिगण घर-घर जाकर वोट मांगते हैं, पैर छूते है, और जब चुनाव जीत जाते है, तो उस घर, गली, मोहल्ले की तरफ देखते भी नहीं, यहां तक की आपके द्वारा काम पड़ने पर उसके ऑफिस/बंगले जाने पर आपको पहचानते भी नहीं। आपसे अच्छे से बात भी नहीं करते है। इस प्रकार की स्थिति निर्मित हो जाती है। प्रतिनिधियों को अपने पद का घमण्ड होने लगता है। वे सिर्फ अपने स्वार्थ का सोचने और करने लगते हैं।

इसलिए आमजन को चाहिए कि अपना बहुमूल्य वोट सोच समझकर ऐसे व्यक्ति को दे जो आपके सुख-दुख में काम आये, आपके समस्याओं का निराकरण करें, अपने से ज्यादा आम जनता के हित में कार्य करें। चुनाव में मताधिकार का उपयोग प्रत्येक युवा, बुजुर्ग, दिव्यांगजन सहित महिलाएं को भी शतप्रतिशत किया जाना चाहिए। इस मतदान से वार्ड का भविष तय होता है 


दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए AAP सरकार का नया नारा-‘अच्छे बीते 5 साल, लगे रहो केजरीवाल’

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए AAP सरकार का नया नारा-‘अच्छे बीते 5 साल, लगे रहो केजरीवाल’

20-Dec-2019

नई दिल्ली 

अगले साल होने जा रहे दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी का नारा है ‘अच्छे बीते पांच साल – लगे रहो केजरीवाल’। इस नारे के साथ पार्टी ने 2020 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ‘अच्छे बीते पांच साल – लगे रहो केजरीवाल’ नारे की आप विधायकों एवं पार्टी के अन्य नेताओं की मौजूदगी में शुरुआत की।

इस मौके पर सिसोदिया ने कहा कि यह नारा दिल्ली के लोगों की प्रतिक्रिया पर आधारित है। आम आदमी पार्टी ने 2015 में 70 सीटों में से 67 पर जीत दर्ज की थी और पार्टी इस बार चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कंसल्टेंसी कंपनी आई-पैक के साथ समन्वय कर चुनाव लड़ेगी।


कस्टमर से Domino’s ने कैरी बैग के वसूले थे 13 रुपये, कोर्ट ने लगाया 10 लाख का जुर्माना

कस्टमर से Domino’s ने कैरी बैग के वसूले थे 13 रुपये, कोर्ट ने लगाया 10 लाख का जुर्माना

19-Dec-2019

चंडीगढ़ में एक चौंकाने वाला सामने आया है. पिज्जा बनाने वाली डोमिनोज (Domino’s) को कैरी बैग (Carry Bag) के लिए चार्ज करना महंगा पड़ा है. कोर्ट ने डोमिनोज (Dominos) पर 10 लाख रुपये का जुर्माना (Fine) लगाया है. डोमिनोज ने चंडीगढ़ के वकील पंकज से वर्ष 2018 में कैरी बैग के लिए पैसे लिए थे.

डोमिनोज ने कंज्यूमर कोर्ट के फैसले को स्टेट कमिशन में चुनौती दी थी. पहले भी डोमिनोज पर एक मामले में जुर्माना हुआ था. अब दोनों मामलों में उसपर कुल 10 लाख रुपये का जुर्माना हुआ है. कमिशन ने डोमिनोज को 4 लाख 90 हजार रुपए पीजीआई के पेशेंट वेलफेयर फंड में देने के निर्देश दिए हैं.

इसके साथ ही 10 हजार रुपए कमिशन को देने के साथ-साथ शिकायतकर्ता को 1500 रुपए देने के भी निर्देश दिए. स्टेट कमीशन ने दो मामलों में अलग-अलग ये आदेश जारी किए हैं. इस तरह डोमिनोज कंपनी पर कुल दस लाख रूपये का जुर्माना लगाया गया है.

कंपनी ने दी यह दलील

हालांकि कंपनी ने अपने पक्ष में दलील दी कि वह पिज्जा को पहले से ही एक कार्डबोर्ड बाक्स में पैक कर उपभोक्ता को देते हैं. ऐसे में वह किसी को कैरीबैग देने के लिए उत्तरदायी नहीं है. स्टेट कमीशन ने उनकी इस दलील को नहीं माना.

वकील पंकज चांदगोठिया ने उपभोक्ता फोरम में डोमिनोज, जुबिलेंट फूड वर्क्स लिमिटेड के खिलाफ शिकायत की थी. शिकायत में उन्होंने बताया कि दो पिज्जा लेने के लिए उन्होंने अपने ड्राइवर को स्टोर में भेजा. दो रेगुलर पिज्जा के लिए 306 रुपये मांगे गए. वकील पंकज ने जब बिल देखा तो उसमें कैरीबैग के लिए 13 रुपये चार्ज किए गए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि स्टोर में कहीं भी जिक्र नहीं किया गया था कि कैरीबैग के अलग से पैसे चार्ज किए जाएंगे. कैरीबैग के दोनों ओर डोमिनोज के लोगो प्रिंट थे. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कस्टमर्स से कैरीबैग के लिए पैसे चार्ज करके कंपनी अपना विज्ञापन कर रही है.

फोरम ने एक आदेश में साफ किया है कि सामान को हाथ में नहीं ले जा सकते, उसे कैरीबैग मुहैया कराना स्टोर की जिम्मेदारी है. वह चाहे प्रिंटेड बैग दें या सादा.

साभार : tv9bharatvarsh 


नागरिकता कानून में बदलाव को लेकर गृह मंत्रालय ने दिए संकेत !

नागरिकता कानून में बदलाव को लेकर गृह मंत्रालय ने दिए संकेत !

18-Dec-2019

नई दिल्ली :गृह मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि नागरिकता (संशोधन) कानून मुसलमानों सहित किसी भारतीय नागरिक को प्रभावित नहीं करेगा और संविधान में दिए गये मौलिक अधिकारों का लाभ उन्हें मिलता रहेगा। मंत्रालय ने इस मुद्दे पर गलत सूचना फैलाए जाने के लिए चलाए जा रहे अभियान को रोकने की कोशिश के तहत यह कहा है।

गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस कानून का किसी विदेशी के भारत में निर्वासन से कोई लेना देना नहीं है। इस बीच, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा कि नागरिकता (संशोधन) कानून किसी भारतीय के खिलाफ नहीं है और इस कानून को समझना तथा इस बारे में फैलाई जा रही गलत सूचना के खिलाफ जागरूक होना जरूरी है।

वहीं, इस विवादित कानून पर प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) के जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा, ‘‘गलत सूचना फैलाने के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है। नागरिकता (संशोधन) कानून मुसलमान नागरिकों सहित किसी भारतीय नागरिक को प्रभावित नहीं करता है।’’ दरअसल, इस नये कानून के विरोध में पिछले कुछ दिनों से दिल्ली सहित देश के कुछ हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। एफएक्यू के जवाब गृह मंत्रालय ने जारी किए हैं।

गृह मंत्रालय ने कहा कि नया कानून सिर्फ हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई धर्मावलंबी विदेशियों के लिए हैं, जो अपने धर्म को लेकर प्रताड़ना का सामना करने के चलते पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हैं। मंत्रालय ने कहा कि यह कानून इन तीन देशों सहित किसी अन्य देश से भारत आए मुसलमानों सहित अन्य विदेशियों पर लागू नहीं होगा। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया कि इस नये कानून का किसी विदेशी के भारत में निर्वासन से कोई लेना देना नहीं है। गृह मंत्रालय ने कहा कि किसी विदेशी के निर्वासन की प्रक्रिया, चाहे उसका धर्म या देश कुछ भी हो, विदेशी नागरिक अधिनियम 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920 के मुताबिक क्रियान्वित की जाती है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘ ये दोनों कानून सभी विदेशियों के भारत में प्रवेश एवं निकास, यहां ठहरने, देश में यहां-वहां आने-जाने को शासित करते हैं, भले ही उनका धर्म कुछ भी हो। इसलिए, सामान्य निर्वासन प्रक्रिया भारत में रह रहे किसी अवैध विदेशी पर लागू होगी। ’’ यह जवाब इस सवाल पर दिया किया गया क्या इन देशों से आए मुसलमान आव्रजकों को नये कानून के तहत वापस भेजा जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि किसी विदेशी नागरिक का निर्वासन एक बखूबी विचारित न्यायिक प्रक्रिया है जो स्थानीय पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों की एक उचित जांच पर आधारित है, जिसके तहत इस तरह के अवैध विदेशियों का पता लगाया जाता है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित किया गया है कि इस तरह के अवैध विदेशी को उसके देश के दूतावास द्वारा उचित यात्रा दस्तावेज जारी किए गए हों ताकि जब उसे निर्वासित किया जाए तब उसके देश के अधिकारी उपयुक्त रूप से उसकी अगवानी कर सकें। ’’ गृह मंत्रालय ने कहा कि असम में निर्वासन की प्रकिया विदेशी नागरिक अधनियम, 1946 के तहत ऐसे किसी व्यक्ति के ‘विदेशी’ निर्धारित होने पर ही होती है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘इसके बाद वह निर्वासित किए जाने लायक हो जाता है। इसलिए, इस प्रक्रिया में कुछ भी अपने-आप, मशीनी या भेदभावपूर्ण तरीके से नहीं होता।

राज्य सरकारों और उनके जिला स्तर के अधिकारियों के पास विदेशी नागरिक अधिनियम की धारा तीन और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920 की धारा पांच के तहत केंद्र सरकार की शक्तियां प्राप्त हैं, जिसके तहत वे किसी अवैध विदेशी का पता लगा सकते हैं, उसे हिरासत में ले सकते हैं और उसे निर्वासित कर सकते हैं।’’ यह सवाल कि क्या पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमान भारतीय नागरिकता कभी नहीं प्राप्त कर सकते, मंत्रालय ने जवाब दिया-‘‘नहीं’’।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘किसी भी श्रेणी के किसी विदेशी के एक निर्धारित अवधि तक भारत में रहने से उसके भारत की नागरिकता हासिल करने की मौजूदा कानूनी प्रक्रिया (नागरिकता कानून की धारा छह) या पंजीकरण के जरिए (इस कानून की धारा पांच) नागरिकता हासिल करना जारी रहेगा। संशोधित नागरिकता कानून इसमें किसी तरह का संशोधन या बदलाव नहीं करता है।’’ गृह मंत्रालय ने कहा कि इन तीनों देशों से आए सैकड़ों मुसलमानों को पिछले कुछ बरसों में भारतीय नागरिकता दी गई है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘योग्य पाए जाने पर, भविष्य में आने वाले ऐसे सभी प्रवासियों को भी भारतीय नागरिकता मिलेगी, चाहे उनकी संख्या या धर्म कुछ भी क्यों न हो।’’ मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 2014 में भारत-बांग्लादेश सीमा मुद्दे के समाधान के बाद 14,864 बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी गई थी।

उनके ‘एनक्लेव’ को भारतीय भूक्षेत्र में शामिल किए जाने के बाद ऐसा किया गया था। गृह मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान को छोड़ कर किसी अन्य देश में धर्म के आधार पर प्रताड़ित होने वाले हिंदू नये कानून का लाभ नहीं प्राप्त कर पाएंगे। उन्हें भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि नया कानून किसी भारतीय नागरिक पर लागू नहीं होता है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘सभी भारतीय नागरिक संविधान में प्रदत्त मूल अधिकारों का लाभ उठाते रहेंगे। संशोधित कानून का उद्देश्य किसी भारतीय नागरिक को नागरिकता से वंचित करना नहीं है। इसके बजाय यह एक विशेष कानून है जो इन तीन पड़ोसी देशों में एक विशेष स्थिति का सामना करने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता देगा।’’ मंत्रालय ने यह भी कहा कि संशोधित नागरिकता कानून का राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से कोई लेना देना नहीं है। (भाषा)

TNIS 


OLX से  दू पहिया खरीदी के नाम फिर ठगा गया एक बुजुर्ग मामला रायपुर माना  एयरपोर्ट का !

OLX से दू पहिया खरीदी के नाम फिर ठगा गया एक बुजुर्ग मामला रायपुर माना एयरपोर्ट का !

15-Dec-2019

पूरा मामला कल 14/12/2019  का है , बनवारीलाल शर्मा  उम्र :- 62 वर्ष रायपुर, छतीसगढ़ ने 

एक  दू पहिया स्कूटर  (Activa 4g)(CG-O4-2149)  OLX  आन लाइन पर देखी जिसकी कीमत 19000 रुपए लिखी गई थी।।   उस  OLX पर दिए गए नंबर (9588122317) पर फोन कर सम्पर्क  किया तो दूसरी ओर उसने  फोन उठाने वाले ने अपना अपना नाम टीकेष नेताम बताया ।।


और बताया की वो व्यक्ति एयरपोर्ट में सीआईएसएफ की नौकरी करता है और बताया की उसका ट्रांसफर होने वाला है इस कारण वो अपनी गाड़ी का विक्रय करना चाहता है फिर हमने उससे गाड़ी के बारे में विस्तार में बात किया जिसमें उसने बताया की गाड़ी बहुत ही अच्छी कंडीशन में है और बताया मैंने  उस गाड़ी को 17000 रूपए में क्रय करने का पक्का  किया उसके बाद मैंने उसको कुछ देर में कॉल कर के कहा कि मै गाड़ी की बुकिंग कुछ रुपए दे कर रहा हूं और बाकी रुपए गाड़ी लेने के बाद देंगे फिर मैंने उससे कहा कि हम 2100 दे कर गाड़ी की बुकिंग कर रहे है फिर उसने कहा कि मैं उसे 3120 रुपए paytm के जरिए भेजू ताकि वो उस गाड़ी की बुकिंग कर ले और मैंने उसे फिर से कॉल कर के ये कहा की मै अभी 2100 रुपए दे रहा हूं और बाकी रुपए  उसे गाड़ी लेने के बाद दूंगा ।। फिर उसने कहा सर आप 2120 paytm के द्वारा भेजे फिर मैंने उसकी बात मान कर उसे पैसे भेजे  फिर मैंने उसे कॉल किया और कहा कि मैंने  पैसे भेज दिए है फिर उसने कहा कि आप गाड़ी देखने कब आयेंगे..?? फिर मैने कहा कि मैं आधे घंटे में आ रहा हूं  फिर उसने कहा आप माना एयरपोर्ट आ जाइए फिर मैंने उसे 2120 रुपए (7988792536) पर भेज दिया और  तैयार हो कर घर से निकल गया फिर कुछ देर में उसका कॉल आया और उसने कहा कि माना बस स्टैंड आ जाइए और मुझे पहुंच कॉल करे ।। फिर मैंने माना बस स्टैंड पहुंच कर उसे कॉल किया उसने कहा आप तोड़ा इंतज़ार करें मै गाड़ी भेजवा रहा हूं ।। फिर कुछ समय इंतेज़ार करने के बाद उसका काल आया और उसने कहा कि सर मेरे सीनियर सर ने कहा है कि आपको एक विक्रय पर्ची बनवाने के लिए अमाउंट डलवाना पड़ेगा जिसकी राशि 3120 रुपए है फिर मैंने उससे कुछ देर में 3120 रुपए (7988792536) पर भेजा फिर कुछ देर बाद उसका कॉल आया और उसने कहा मै गाड़ी डॉक्युमेंट्स के साथ भेजवा  रहा हूं फिर कुछ देर बाद उसने अपने  एक और साथी का कॉल नंबर दिया (9864510014) जिसको उसने कोरियर वाला बताया और  और मैंने उसे कॉल किया और उसके कहा की सर टिकेश नेताम जी की गाड़ी आपको ही भेजवाया जा रहा है ना..?? मैंने उनसे कहा कि -  हां..!! फिर उसने बताया कि सर मै चैकपोस्ट में दो लोगो के पीछे हूं और फिर मै आपके पास गाड़ी लेके आ जाऊंगा फिर कुछ देर इंतज़ार करने के बाद उसका (कोरियर वाला ) का कॉल आया और उसने कहा कि सर टिकेस सर की  गाड़ी का बिलिंग 17000 का हुआ है तो आपको पूरा पैसा देना पड़ेगा तभी टिकेश नेताम की गाड़ी चैकपोस्ट से निकलेगी फिर मैंने उस व्यक्ति को कॉल किया जिसने अपना नाम टीकेश नेताम बताया था फिर मैंने उससे कहा कि  आपका कोरियर वाला मुझे पूरा 17000 रुपए देने को कह रहा है फिर उसने मुझे अपने कोरियर वाले को कॉन्फ्रेंस कॉल पर रखने को कहा फिर मैंने उन दोनों व्यक्ति को कॉन्फ्रेंस कॉल पे लिया फिर उन दोनों ने बाते कि फिर  कुछ देर में मुझे उस व्यक्ति (टिकेष  नेताम) का कॉल आया और उसने कहा कि सर आप बाकी बचे 12000 रुपए डलवा दीजिए वरना मेरी गाड़ी होल्ड में चले जाएगी जिससे मै मुसीबत में पड़ जाऊंगा और आपका भी पैसा डूब जाएगा और कहा कि आप पैसों का इंतजाम कर के पेमेंट करा दे फिर मैंने कुछ देर विचार करने के बाद पैसों का इंतजाम किया और उसे कॉल कर कहा कि पैसों का इंतजाम हो गया है और मै पैसे भेज रहा हूं और आप अपने साहब से एक बार और पूछ ले की कितने पैसे और देने है तो उनका जवाब आया कि आप 12000 रुपए डाल दे और बाकी बची राशि आपको नगद भुगतान कर दी जाएगी ।। फिर बकिं बचे 12000 रुपए भेजने के बाद मैंने  उक्त व्यक्ति ( टिकेस नेताम)को कॉल किया और कहां की मैंने पैसे भेज दिए है फिर उसने कहा कि - हां..!! मै अपने ऑफिस जा कर चेक करता हूं फिर उसने कुछ देर में बताया कि मेंरा भेजा हुए पैसा (12000) उसके ऑफिस के अकाउंट में 24 घंटे के लिए  पेंडिंग बता रहा है और फिर कुछ देर बात करने के बाद उसने कहा कि सर आप 6000 - 6000 के दो ट्रांसाक्शन कर दीजिए फिर मुझे तोड़ा शक हुआ और मैंने उसे और पैसे भेजने से साफ मना कर दिया और तब तक मैैंने उस व्यक्ति को उसकी गाड़ी की (17000) कीमत से  240 रुपए  ज्यादा दे दिया था फिर मैंने कहा कि मुझे गाड़ी चाहिए फिर उसने कहा सर आप फिर से 6000 - 6000 के दो ट्रांस्क्शन करे  फिर मैंने उसे मना कर दिया और कहा कि 24 घंटे के बाद जब ट्रंस्क्शन पूरा हो जाएगा तब मै गाड़ी ले जाऊंगा फिर उसने कहा ठीक है सर और फिर मै वापस अपने घर आ गया ।। 
और यह सारी वस्तुस्थति होने के बाद जब मैंने अपने परिवार वालों को इन सारी बातों से अवगत करवाया तो उन सब ने मुझे सलाह देते हुए कहा कि एक बार इंटरनेट पर इसकी i'd के बारे में जानने की कोशिश करें फिर जब मैंने उस व्यक्ति के द्वारा दिए गए I'd  के नंबर को गूगल पर डाला और देखा कि उस नंबर के बहुत सारे फ्रौड़ हो चुके है ।।

जैसा की पीड़ित पक्ष ने बताया  


IPS अफसर के खिलाफ झूठा हलफनामा देने पर सुप्रीम कोर्ट ने महिला के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया

IPS अफसर के खिलाफ झूठा हलफनामा देने पर सुप्रीम कोर्ट ने महिला के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया

11-Dec-2019

नई दिल्ली 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली में पश्चिम बंगाल कैडर के एक आईपीएस अधिकारी पर कथित रूप से जानलेवा हमला करने के प्रयास का आरोप लगाने वाली एक महिला के खिलाफ "गलत बयान" देने के लिए स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना नोटिस जारी किया। उसने शादी से इंकार करने के बाद फेसबुक-मित्र अधिकारी के खिलाफ 2018 में बलात्कार की एफआईआर दर्ज की थी।

शीर्ष अदालत ने दिल्ली में दर्ज बलात्कार एफआईआर को स्थानांतरित करने और अधिकारी की मां द्वारा 15 लाख रुपये की कथित जबरन वसूली की शिकायत पर दर्ज एफआईआर को पश्चिम बंगाल के बशीरहाट पुलिस स्टेशन से केंद्रीय जांच एजेंसी को स्थानांतरित करने की अर्जी को खारिज कर दिया। जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​की पीठ ने महिला द्वारा दायर एक याचिका पर अपना ये निर्देश पारित किया, जिसे उसकी पहचान की छिपाने के लिए एबीसीडी नाम दिया गया है। उसकी दलीलों के आधार पर अदालत ने नोट किया कि बलात्कार के मामले में आरोप पत्र दायर किया गया है।

आरोपी के मोबाइल फोन का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) बरामद किया गया लेकिन ललित होटल की लॉबी, रेस्तरां और कमरे के नंबर के 27 जनवरी से 29 जनवरी, 2018 के सीसीटीवी फुटेज को इसलिए हासिल नहीं किया जा सका क्योंकि तीन महीने के अंतराल के कारण उन्हें संरक्षित नहीं किया गया था। महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी कथित रूप से अपराध करने के लिए उसे होटल ललित ले गया था जहां उससे बलात्कार किया। मामले के दौरान महिला ने 18 अक्टूबर, 2019 को एक और एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें कहा गया था कि उसका जीवन खत्म हो जाएगा क्योंकि वह अधिकारी के लगातार रडार पर है और वह एक कार की चपेट में आकर घायल हो गई।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच जिसने सीसीटीवी फुटेज को पुनः प्राप्त किया, ने कहा कि वास्तव में ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी। इसके बजाय, "एक बच्चे द्वारा संचालित एक ठेला (गाड़ी) को शिकायतकर्ता के बाएं पैर को रगड़ते हुए देखा गया जब वह एक ऑटो को किराए पर लेने का प्रयास कर रही थी।

वह गाड़ी की ओर देखती है और फिर दूर चली जाती है। उसने उसे रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। अदालत ने कहा, "जैसा कि यह सब प्रथम दृष्टया देखकर पता चला है, इसका मतलब है कि इस अदालत के सामने उसके शपथ बयान में आरोप सत्य नहीं थे।" अदालत ने 14 जनवरी, 2020 को महिला की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश जारी करते हुए कहा कि शपथ पर गलत बयान देना और गलत सूचना प्रस्तुत करने के इरादे से लोक सेवक को नुकसान पहुंचाने के अपनी वैध शक्ति का उपयोग करना दंडनीय अपराध है।


बिल पास होने के बाद भी मुसलमानों के लिए नागरिकता के दरवाजे बंद नहीं होंगे- RSS

बिल पास होने के बाद भी मुसलमानों के लिए नागरिकता के दरवाजे बंद नहीं होंगे- RSS

11-Dec-2019

लोकसभा से पास हुए नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) को मुस्लिम विरोधी और भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के विरुद्ध बताए जाने का राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने खंडन किया है।
खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, संघ ने कहा है कि इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद भी मुस्लिमों के लिए भारतीय नागरिकता के दरवाजे बंद नहीं होंगे।
पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि देशों में रहने में अगर किसी को डर लगता है तो वह भारत में नागरिकता के लिए निर्धारित नियम-कायदों को पूरा करते हुए आवेदन करे तो सरकार विचार करेगी।
संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “हम किसी के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन नागरिकता संशोधन बिल के विषय को गलत तरह से घुमाया जा रहा।
इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद भी बाहरी मुस्लिमों के भारतीय नागरिक बनने के रास्ते बंद नहीं हो जाते। 2016 में पाकिस्तानी सिंगर अदनान सामी को इसी सरकार ने नागरिकता दी थी।
बाहरी देशों का अगर कोई मुस्लिम भारत में रहना चाहे तो वह भी अदनान सामी की तरह गृह मंत्रालय की ओर से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए अर्जी दे तो विचार होगा। पात्र होगा तो नागरिकता मिलेगी, नहीं तो नहीं।”

उन्होंने कहा कि तस्लीमा नसरीन भी परमिट लेकर भारत में रह रहीं हैं। लेकिन पड़ोसी देशों में बहुसंख्यक होते हुए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के लिए प्रस्तावित कानून के जरिए कैसे किसी को नागरिकता मिल सकती है।


 
उधर, मंगवार को अदनान सामी ने भी ट्वीट कर कुछ इसी तरह का बात कही है। उन्होंने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा, “इस बिल के बावजूद मुसलमानों के नागरिकता लेने पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, मुस्लिम पहले की तरह भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।”

लोकसभा में सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं कि बाहरी मुस्लिमों के भी आवेदन पर विचार होगा, मगर धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर नागरिकता नहीं मिलेगी।

उन्होंने कहा था, “पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुस्लिम अगर भारत में नागरिकता का आवेदन करते हैं तो उन पर खुले मन से विचार होगा। लेकिन उन्हें धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर नागरिकता देने पर विचार नहीं किया जाएगा। ”
अदनान सामी पहली बार 13 मार्च, 2001 को विजिटर्स वीजा पर भारत आए थे। उनके वीजा की अवधि समय-समय पर बढ़ती रही।
इस बीच 26 मई, 2015 को एक्सपायर हुए पासपोर्ट को पाकिस्तानी सरकार ने रिन्यू नहीं किया था, जिसके बाद उनकी अर्जी पर भारत सरकार ने एक जनवरी 2016 से अनिश्चितकाल के लिए नागरिकता प्रदान की थी।

 


नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा से पास होने के बाद अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने चिंता व्यक्त की !

नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा से पास होने के बाद अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने चिंता व्यक्त की !

10-Dec-2019

नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा से पास हो गया. इस बिल को लेकर जहां भारतीय वैज्ञानिकों, स्कॉलर्स और कई राजनीतिक पार्टियों ने मोर्चा खोल दिया है, वहीं अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने भी चिंता जाहिर की है. अंतराराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों को देखने वाली संघीय अमेरिकी आयोग ने नागरिकता संशोधन विधेयक को मोदी सरकार द्वारा एक गलत रास्ते पर लिया गया खतरनाक मोड़ करार दिया है. अमेरिकी आयोग ने कहा कि अगर ये बिल भारतीय संसद के दोनों सदनों से पास हो जाता है, जो अमित शाह के खिलाफ कई प्रतिबंध लगाने के बारे में सोचना चाहिए.

लोकसभा में मोदी सरकार के प्रस्तावित बिल के अनुसार, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध प्रवासी के तौर पर नहीं देखा जाएगा. ये सभी लोग भारत में नागरिकता के लिए आवेदन करने के पात्र बन जाएंगे.
अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक बड़ी समस्या बनने वाला है. बयान में कहा गया, ‘अगर नागरिकता संशोधन विधेयक दोनों संसद के सदन से पास हो जाता है, तो अमेरिकी सरकार को अमित शाह और दूसरे मुख्य नेताओं के खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि USCIRF लोकसभा में इस बिल के पास होने से बड़े खतरे में है.’
बता दें कि संसद के निचले सदन लोकसभा में सोमवार देर तक चली बहस के बाद रात करीब पौने 12 बजे वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हुई. इस दौरान नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में कुल 311 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में सिर्फ 80 वोट आए. लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद अब माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इसे मंगलवार को राज्यसभा में भी पास करा सकती है. MEDIA IN PUT 


बीएचयू मामला : फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति का समर्थन करने वाले दलित प्रोफेसर से मारपीट की कोशिश

बीएचयू मामला : फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति का समर्थन करने वाले दलित प्रोफेसर से मारपीट की कोशिश

10-Dec-2019

लखनऊः बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के छात्रों के एक समूह ने डॉ. फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति का समर्थन करने वाले संस्कृत धर्म विज्ञान (एसवीडीवी) संकाय के एक दलित प्रोफेसर का पीछा किया और उनके साथ मारपीट करने की कोशिश की.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के एसवीडीवी फैकल्टी के छात्र मुस्लिम होने की वजह से फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं.

प्रोफेसर शांति लाल साल्वी ने बताया कि वह अपने फैकल्टी ऑफिस से बाहर आ रहे थे कि तभी छात्रों के एक समूह ने उन्हें जातिसूचक शब्द कहने शुरू किए और हमला करने के इरादे से उनके पीछे भागे.

साल्वी ने चीफ प्रॉक्टर ओपी राय को लिखे पत्र में छात्रों को उकसाने के लिए फैकल्टी के ही एक वरिष्ठ प्रोफेसर पर आरोप लगाया है.

साल्वी ने प्रॉक्टर को लिखे पत्र में कहा, ‘मैं एसवीडीवी फैकल्टी में अपने ऑफिस में बैठा था कि कुछ छात्र मेरे पास आए और मुझे जाने को कहा क्योंकि वे फैकल्टी बंद कर रहे थे. जैसे ही मैं एक सहकर्मी के साथ बाहर आया, मुनीश मिश्रा नाम के एक बाहरी शख्स ने शुभम तिवारी नाम के एक छात्र और अन्य के साथ मिलकर मेरे खिलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी.’

प्रोफेसर ने आगे लिखा, ‘उन्होंने मुझे और विभाग के एचओडी को चोर कहा. जल्द ही और भी छात्र आ गए और मुझ पर जातिसूचक टिप्पणी करने लगे. वे सब मुझे पीटने के इरादे से मेरे पीछे भागे. यह जानकर कि मुझे खतरा है, मैंने भागना शुरू किया और लगभग आधा किलोमीटर भागा. सेंट्रल ऑफिस पहुंचने के लिए मैंने एक बाइक सवार से लिफ्ट ली. एक छात्र ने मुझ पर ईंट फेंकी लेकिन वह मुझे लग नहीं पाई.’

इस घटना का कारण पूछने पर साल्वी ने कहा कि यह पूरा मामला फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का ही एक प्रोफेसर छात्रों को उनके खिलाफ भड़का रहा है.

साल्वी ने कहा, ‘मेरे विभाग में एक प्रोफेसर हैं, जो पहले एचओडी हुआ करते थे. बीते कई वर्षों से वह मेरा उत्पीड़न कर रहे हैं. उन्होंने अफवाह भी फैलाई है कि बीएचयू से ही पीएचडी करने वाली मेरी पत्नी मुस्लिम है और फ़िरोज़ ख़ान की बहन है. उन्होंने छात्रों को बताया कि मैं ही फ़िरोज़ ख़ान को लेकर आया और इसलिए आज छात्रों ने मुझ पर हमला किया. मैंने प्रॉक्टर को पत्र सौंप दिया है और मैं उन लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराऊंगा, जिन्होंने मेरा उत्पीड़न किया.’

यूनिवर्सिटी के लगभग 20 प्रोफेसर ने साल्वी के साथ मिलकर बीते सोमवार शाम को वाइस चांसलर राकेश भटनागर और चीफ प्रॉक्टर राय से चर्चा की. प्रशासन ने मामले की जांच के लिए जांच समिति के गठन का वादा किया है.

यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने कहा, ‘समिति के निष्कर्षों के आधार पर इस घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुरूप ही कार्रवाई की जाएगी. इस संबंध में वाराणसी के लंका पुलिस थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई है.’


एक और भीषण अग्निकांड से जुड़े सवाल

एक और भीषण अग्निकांड से जुड़े सवाल

09-Dec-2019

- ललित गर्ग- 

देश में एक के बाद एक डरावने, भयानक, त्रासद एवं वीभत्स अग्निकांड हो रहे हैं, जो असावधानी एवं लापरवाही की निष्पत्ति होते हैं। प्रशासनिक एवं जिम्मेदार लोगों की आपराधिक लापरवाही से दिल्ली के रानी झांसी रोड पर फिल्मिस्तान इलाके के अनाजमंडी की फैक्ट्री में लगी भीषण आग की घटना में अब तक जहां 43 लोग मौत के ग्रास बन गये है, वहीं कई लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। यह अग्निकांड रविवार की भोर में करीब पांच बजे संकरी गलियों में स्थित पैकेजिंग और बैग बनाने वाली फैक्ट्री में शार्ट सर्किट होने से हुआ, अधिकतर लोगों की मौत दम घुटने से हुई है। मरने वाले अधिकतर लोग यूपी और बिहार के बताए जा रहे हैं। एक सवाल सभी के मन में है कि आखिर लापरवाही किसकी थी? जिस इमारत में आग लगी, वहां यह फैक्ट्री कानून एवं आवश्यक नियमों की घोर उपेक्षा करते हुए काफी दिन से चल रही थी। यह फैक्ट्री पूरी तरह से अवैध थी। इसमें किसी तरह का कोई संसाधन नहीं था, जिससे आग पर काबू पाया जा सके। आग से बचाव के भी कोई उपकरण नहीं लगे थे। ऐसे में सवाल प्रशासन के ऊपर उठ रहे हैं कि कैसे इतनी बड़ी गलती नजरअंदाज की जा सकती है?

जिस बिल्डिंग में आग लगी है वहां बेकरी का गोदाम चल रहा था, जहां पैकेजिंग का काम भी होता था और लोग सोते भी थे। ये भी बताया जा रहा है कि जिस इलाके में ये फैक्ट्रियां चल रही थी वो बेहद संकरी गली वाला इलाका है। इसके अलावा सभी फैक्ट्रियां आपस में जुड़ी हुई थी, जिस वजह से आग तेजी से फैल गई। संकरी गलियों के कारण राहत का काम तेजी से नहीं हो पाया और धुंआ बढ़ते ही लोग बेहोश होने लगे। ये भी कहा जा रहा है कि इन गलियों में एक ही गाड़ी अंदर जा सकती है। प्रश्न है कि इन मौत की संकरी गलियों में ये अवैध धंधे एवं फैक्ट्रियां क्यों एवं कैसे प्रशासन चलने दे रहा है? दिल्ली में ऐसे अनेक इलाके हंै जहां ऐसे ही धंधे एवं फैक्ट्रियां मौत का अंधा कुआं बनी हुई है, जहां हर पल मौत पसरी हुई दिखाई देती है। चुनाव के समय इन मौत के अंधियारी गलियों को चुनावी मुद्दा बनाने के लिये सभी राजनीतिक दल लपकते हैं, लेकिन चुनाव होने के बाद कोई इनकी सुध नहीं लेता। कब तक राजनीतिक दल ऐसे ज्वलंत एवं जीवन से जुड़े मुद्दों के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकते रहेंगे?

इस अग्निकांड की काली आग एवं दमघोंटू धुएं ने कितने ही परिवारों के घर के चिराग बुझा दिए। इस अग्निकांड ने एक बार फिर एक कालिख पोत दी कानून, व्यवस्था एवं राजनीति के कर्णधारों के मुँह पर। ये मौतें इसलिए हुईं, क्योंकि जिन पर भी इन अति-संकीर्ण, असुरक्षित एवं जानलेवा जगहों पर नियम-कायदे के हिसाब से सुरक्षा देने की जिम्मेदारी थी उन सबने हद दर्जे की लापरवाही, असावधानी एवं गैर जिम्मेदारी का परिचय दिया। इसीलिए इस अग्निकांड को हादसा कहना उसकी गंभीरता को कम करना है। यह हादसा नहीं, जिम्मेदार लोगों की आपराधिक लापरवाही का क्रूरतम एवं हत्यारेपन की त्रासद निष्पत्ति है। भ्रष्ट, लापरवाह एवं लालची प्रशासनिक चरित्रों के स्वार्थ की पराकाष्ठा है। अव्यवस्था की अनदेखी कैसे घातक एवं त्रासद परिणाम सामने लाती है, इसका एक डरावना एवं खौफनाक उदाहरण है फिल्मिस्तान का श्मशान बनना।

हर घटना में कोई न कोई ऐसा संदेश छिपा होता है, जिस पर विचार करके हम भविष्य के लिए चेत सकते हैं। अनाजमंडी की फैक्ट्री की इस कलंकित करने वाली दुखद दुर्घटना में भी कई सबक छिपे हैं। सवाल यह है कि क्या हम उन पर गौर करेंगे? क्या भविष्य के लिये सचेत एवं सावधान होंगे? अभी कुछ समय पहले ही हमने करोल बाग की अर्पित होटल के अग्निकांड में दो दर्जन के लगभग लोगों को ऐसे ही मौत का ग्रास बनते देखा है, लेकिन हम इन दुर्घटनाओं से न कुछ सीख लेते हैं और न ही सावधान होते हैं। लेकिन कब तक?

अनाजमंडी की फैक्ट्री जैसे हादसे तभी होते हैं जब भ्रष्टाचार होता है, जब अफसरशाह लापरवाही करते हैं, जब स्वार्थ एवं धनलोलुपता में मूल्य बौने हो जाते हैं और नियमों और कायदे-कानूनों के उल्लंघन में संवेदनाएं दब जाती है। आग क्यों और कैसे लगी, यह तो जांच का विषय है ही लेकिन फैक्ट्री को तो उसके मालिक ने मौत का कुआं बना रखा था। आखिर क्या वजह है कि जहां दुर्घटनाओं की ज्यादा संभावनाएं होती है, वहीं सारी व्यवस्थाएं फेल दिखाई देती है? सारे कानून कायदों का वहीं पर स्याह हनन होता है। यही कारण है कि जिस फैक्ट्री में यह हादसा हुआ, वहां जीवन रक्षा, अग्नि शमन एवं आग से बचाव के प्रबंध का कोई उपकरण या स्थिति नहीं था, बल्कि कहा तो यह भी जा रहा है कि फैक्ट्री के गेट पर ताला भी लगा था, एक तरह से कामगारों को मौत का बंधक बना रखा था।

इस फैक्ट्री में आग का कहर यह भी बताने वाला है कि देश की राजधानी में व्यावसायिक गतिविधियां किस तरह इंसान का जीवन लीलने वाली हैं। हर बड़ी दुर्घटना कुछ शोर-शराबें के बाद एक और नई दुर्घटना की बाट जोहने लगती है। सरकार और सरकारी विभाग जितनी तत्परता मुआवजा देने में और जांच समिति बनाने में दिखाते हैं, अगर सुरक्षा प्रबंधों में इतनी तत्परता दिखाएं या वास्तविक दुर्घटनाओं की संभावनाओं पर सख्ती बरते तो दुर्घटनाओं की संख्या घट सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है, क्यों नहीं हो रहा है, यह मंथन का विषय है। अनाजमंडी की फैक्ट्री में आग लगने के कारणों की जांच के आदेश क्या प्रभावी होंगे? कब इस बुनियादी बात को समझा जाएगा कि अगर ऐसे स्थल नियम-कानूनों के साथ सुरक्षा उपायों की घोर अनदेखी करके चलेंगे तो वे तबाही का कारण ही बनेंगे? यह नकारापन ही है कि बेतरतीब शहरी ढांचे और सार्वजनिक सुरक्षा की उपेक्षा तब हो रही है जब उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। शहरी ढांचे का नियमन करने वाले न केवल नियोजित विकास की अनदेखी कर रहे हैं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा को भी ताक पर रख रहे हैं।

इन बढ़ती दुर्घटनाओं की नृशंस चुनौतियों का क्या अंत है? बहुत कठिन है दुर्घटनाओं की उफनती नदी में जीवनरूपी नौका को सही दिशा में ले चलना और मुकाम तक पहुंचाना, यह चुनौती सरकार के सम्मुख तो है ही, आम जनता भी इससे बच नहीं सकती। मनुष्य अपने स्वार्थ और लोभ के लिए इस सीमा तक बेईमान और बदमाश हो जाता है कि हजारों के जीवन और सुरक्षा से खेलता है। दो-चार परिवारों की सुख समृद्धि के लिए अनेक घर-परिवार उजाड़ देता है।

ऐसा लगता है कि दिल्ली के शासन-प्रशासन ने पुरानी घटनाओं से कोई सबक सीखना उचित नहीं समझा। इससे भी शर्मनाक बात यह है कि अभी भी ऐसा नहीं लगता कि जरूरी सबक सीख लिए गए हैं। जिम्मेदार राजनेता, दिल्ली सरकार और आला अफसरों के बयान कर्तव्य की इतिश्री करते ही अधिक दिखते हैं। दिल्ली में केवल अनाजमंडी की फैक्ट्री ही नहीं, अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जहां अवैध रूप से ऐसी व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं जो मानव जीवन के लिए जानलेवा हैं। वेश्यालयों में देह व्यापार से मन्दिरों में देह का धंधा समाज के लिए इसलिए और भी घातक है कि वह पवित्रता की ओट में अपवित्र कृत्य है।

मालिकों से ज्यादा दोषी ये अधिकारी और कर्मचारी हैं। अगर ये अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाते तो उपहार सिनेमा अग्निकांड नहीं होता, नन्दनगरी के समुदाय भवन में आग नहीं लगती, पीरागढ़ी उद्योगनगर की आग भी उनकी लापरवाही का ही नतीजा थी, बवाना की फैक्टरी हो या करोलबाग अर्पित होटल या अनाजमंडी की फैक्ट्री की आग भी ऐसी ही त्रासदी थी। जीवन पर मंडरा रहे मौत के तरह-तरह की डरावने हादसों एवं दुर्घटनाओं पर काबू पाने के लिये प्रतीक्षा नहीं, प्रक्रिया आवश्यक है।

स्थानीय निकाय हो या सरकारें, लाइसेंसिंग विभाग हो या कानून के रखवाले- अगर मनुष्य जीवन की रक्षा नहीं की जा सकती तो फिर इन विभागों का फायदा ही क्या? कौन नहीं जानता कि ये विभाग कैसे काम करते हैं। सब जानते हैं कि प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर इंस्पैक्टर आते हैं और बंधी-बंधाई राशि लेकर लौट जाते हैं। लाइसेंसिंग विभाग में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार है। पर नैतिकता और मर्यादाओं के इस टूटते बांध को, लाखों लोगों के जीवन से खिलवाड़ करते इन आदमखोरों से कौन मुकाबला करेगा? कानून के हाथ लम्बे होते हैं पर उसकी प्रक्रिया भी लम्बी होती है। कानून में अनेक छिद्र हैं। सब बच जाते हैं। सजा पाते हैं गरीब आश्रित, जो मरने वालों के पीछे जीते जी मर जाते हैं। और ये होटल, ये फैक्टरियां, ये कारखाने, ये पब फिर लेबल और शक्ल बदल-बदलकर एक नये अग्निकांड को घटित करते रहते हैं। लेकिन कब तक?  

 


4 साल की उम्र से गुम होकर  परिवार से बिछड़ी लड़की को 12 साल बाद फेसबुक के माध्यम से मिली !

4 साल की उम्र से गुम होकर परिवार से बिछड़ी लड़की को 12 साल बाद फेसबुक के माध्यम से मिली !

09-Dec-2019

आंध्रप्रदेश की एक लड़की 12 साल बाद अपने परिवार से जल्द मिलने वाली है. यह लड़की 4 साल की उम्र में खो गई थी और फेसबुक  के जरिए वापस अपने परिवार को मिल पाई है. दरअसल, वामसी कृष्णा नाम का एक शख्स फेसबुक की मदद से अपने परिवारों से अलग हुए नाबालिगों को वापस उनके परिवार से मिलाने का काम करता है.

आंध्रप्रदेश की इस बच्ची का नाम भवानी है जो वामसी कृष्णा के घर पर काम करने के लिए आई थी. इसके बाद वामसी कृष्णा से बात करते हुए उसने बताया था कि वह विजयवाड़ा में 4 साल की उम्र में अपने माता-पिता से बिछड़ गई थी. इसके बाद उसे एक महिला ने गोद ले लिया और वह तबसे उस महिला के साथ विजयवाड़ा में रह रही है. भवानी ने कहा कि वह वापस अपने परिवार से मिलकर काफी खुश है. वामसी कृष्णा ने भवानी के भाई को फेसबुक पर ढूंढा था.
न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए वामसी कृष्णा ने कहा, ”मैं किसी को भी काम पर रखने से पहले उनके कागजों को देखती हूं. इसलिए मैंने इस बच्ची से भी उसके कागज मांगे थे ताकि मुझे पता चल पाए कि इसकी उम्र क्या है. इस पर बच्ची ने कहा कि उसके पास कोई कागज नहीं हैं, क्योंकि वह 4 साल की उम्र में खो गई थी और उसे एक महिला ने गोद ले लिया”. उन्होंने आगे कहा, ”फिर मैंने उससे पूछा कि क्या वह अपने असली माता-पिता से मिलना चाहती है, तो उसने हां बोला. इसके बाद मैंने उसकी जानकारी ली और फेसबुक पर उसके माता-पिता को ढूंढना शुरू कर दिया”.

वामसी ने आगे बताया, ”मैंने अपने कुछ जानने वालों को बच्ची के बारे में बताया और उनमें से एक ने मेरे द्वारा दी गई जानकारी पर मैसेज किया”. इसके बाद मैंने उसकी सभी चीजें पूछीं, जो लड़की से मिली जानकारी से मिल रही थी. इसके बाद मैंने वीडियो कॉल के लिए कहा. इसके बाद लड़की के परिवार ने कहा कि वह उनकी की बेटी है”.

मीडिया इन पुट 


नित्यानंद का VIDEO शोसल मीडिया में हो रहा है  वायरल : मुझ तक कोई कानून नहीं पहुंच सकता !

नित्यानंद का VIDEO शोसल मीडिया में हो रहा है वायरल : मुझ तक कोई कानून नहीं पहुंच सकता !

07-Dec-2019

बलात्कार और महिला उत्पीड़न के आरोपी भगोड़े ‘स्वयंभू बाबा’ नित्यानंद को लेकर विदेश मंत्रालय ने दुनिया भर में अपने दूतावासों और मिशनों को सतर्क कर दिया है। लेकिन अभी इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि नित्यानंद कब और कैसे फरार हुआ और फिलहाल कहां है। फिर भी विदेश मंत्रालय ने मीडिया में आ रही खबरों के देखते हुए यह कदम उठाया है।
गौरतलब है कि खबर आई थी कि नित्यानंद ने दक्षिण अमेरिका में कहीं अपना नया ठिकाना बना लिया है और एक वेबसाइट के जरिए यह बताया गया था कि उसने अपना एक अलग देश कैलासा के नाम से बना लिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि किसी वेबसाइट के जरिए देश नहीं बनता है।


विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसके पास 2008 में एक पासपोर्ट था लेकिन उसके खिलाफ मिली सूचनाओं के आधार पर उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया है। वैसे भी नित्यानंद का पासपोर्ट सिर्फ 2018 तक ही वैध था।
इस बीच नित्यानंद का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह खुद को परम शिव बताते हुए कहता है कि कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता, कोई अदालत उसे सजा नहीं दे सकती।
गौरतलब है कि नित्यानंद के बारे में पहली बार 2010 में एक स्कैंडल सामने आया था जिसमें उसका एक अभिनेत्री के साथ एक वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद नित्यानंद करीब 8 साल तक खबरों से गायब रहा था। अभी एक साल पहले ही वह फिर से सबके सामने आया था।
इस बीच अहमदाबाद स्थित ‘योगिनी सर्वज्ञपीठम’ आश्रम से दो लड़कियों के लापता होने के बाद पिछले महीने नित्यानंद के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। उस पर अपहरण और चंदा वसूलने के लिए बच्चों को गलत तरीके से बंधक बनाकर रखने के आरोप लगाए गए थे। बताया जाता है कि नेपाल के रास्‍ते देश से फरार हो गया है। उसके बारे में यह जानकारी वेबसाइट से पता चली है।

 


NRC  नागरिकता संशोधन बिल भारत को इजराइल बना देगा- असदुद्दीन ओवैसी

NRC नागरिकता संशोधन बिल भारत को इजराइल बना देगा- असदुद्दीन ओवैसी

05-Dec-2019

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है. बताना चाहते है कि केंद्र सरकार ने बुधवार को नागरिकता संशोधन बिल को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा. वही दूसरी तरफ इस बिल को लेकर विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में अब  ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईेएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है. ओवैसी ने कहा कि  यदि इस लागू किया जाता है  तो “भारत को इजरायल बन जाएगा, जिसे “भेदभाव”  करने के लिए जाना जाता है.  उन्होंने कहा यदि मीडिया रिपोर्ट सही है कि पूर्वोत्तर राज्यों को प्रस्तावित नागरिकता (संशोधन) विधेयक (सीएबी) कानून से छूट दी जाएगी तो यह अपने आप में आर्टिकल 14 का उल्लंघन है. ओवैसी ने कहा कि आपके पास देश में नागरिकता पर 2 कानून नहीं हो सकते.

असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा कि यह कानून अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है क्योंकि आप धर्म के आधार पर नागरिकता दे रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि अगर हम इस कानून को पारित करते हैं तो यह महात्मा गांधी और आंबेडकर का अपमान है.

गौरतलब है कि केंद्र की मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 समेत छह महत्वपूर्ण विधेयकों को आज हरी झंडी दिखाई है. देश के पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया है.


फेसबुक पर हुए प्यार को निभाने के लिए हरियाणा की युवती पाकिस्तान युवक भारत पाक सीमा पार करते पकडे गए !

फेसबुक पर हुए प्यार को निभाने के लिए हरियाणा की युवती पाकिस्तान युवक भारत पाक सीमा पार करते पकडे गए !

04-Dec-2019

फेसबुक पर हुए प्यार को निभाने के लिए हरियाणा की युवती पाकिस्तान युवक से मिलने डेरा बाबा नाननानक (तरनतारन) के रास्ते करतारपुर पहुंच गई। इसकी भनक जब पाकिस्तान रेंजरों को लगी तो उन्होंने दोनों  को हिरासत में लिया।

अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि करीब 20 वर्ष की मंजीत कौर नवम्बर के अंतिम हफ्ते में करतारपुर कॉरिडोर से गुरुद्वारा दरबार साहिब पहुंची थी। कौर फेसबुक के माध्यम से उस व्यक्ति के संपर्क में थी और गुरुद्वारा में उसने उससे मुलाकात की और एक पाकिस्तानी महिला का परमिट दिखाकर उस व्यक्ति के भारतीय श्रद्धालु हाल में खुले करतारपुर कॉरिडोर के माध्यम से बिना वीजा के गुरुद्वारा दरबार साहिब जा सकते हैं लेकिन वे पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में नहीं जा सकते हैं। इवैक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (विस्थापित न्यास संपत्ति बोर्ड) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘यह पहली घटना है जिसमें किसी भारतीय सिख महिला ने नौ नवम्बर को करतारपुर कॉडोर खुलने के बाद से इस सीमित क्षेत्र से बाहर निकलने का प्रयास किया है।’
साथ फैसलाबाद जाने का प्रयास किया।
भारतीय श्रद्धालु हाल में खुले करतारपुर कॉरिडोर के माध्यम से बिना वीजा के गुरुद्वारा दरबार साहिब जा सकते हैं लेकिन वे पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में नहीं जा सकते हैं। इवैक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (विस्थापित न्यास संपत्ति बोर्ड) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘यह पहली घटना है जिसमें किसी भारतीय सिख महिला ने नौ नवम्बर को करतारपुर कॉडोर खुलने के बाद से इस सीमित क्षेत्र से बाहर निकलने का प्रयास किया है।’

मीडिया इन पुट 


और कितनी निर्भयाएं कब तक नोंची जाएंगी?

और कितनी निर्भयाएं कब तक नोंची जाएंगी?

02-Dec-2019

ललित गर्ग:-

समूचा राष्ट्र रांची और हैदराबाद में हुए दो जघन्य, वीभत्स एवं दरिन्दगीपूर्ण सामूहिक बलात्कार कांड से न केवल अशांत है बल्कि कलंकित भी हुआ है। एक बार फिर नारी अस्मिता एवं अस्तित्व को नौंचने वाली इन घटनाओं ने हमें शर्मसार किया है। ये त्रासद घटनाएं बता रही हैं कि देश में लड़कियां अभी भी सुरक्षित नहीं हैं। ये क्रूर एवं अमानवीय घटनाएं महाभारतकालीन उस घटना का नया संस्करण है जिसमें राजसभा में द्रौपदी को बाल पकड़कर खींचते हुए अंधे सम्राट धृतराष्ट्र के समक्ष उसकी विद्वत मंडली के सामने निर्वस्त्र करने का प्रयास हुआ था।

इन वीभत्स घटनाओं में मनुष्यता का ऐसा भद्दा एवं घिनौना स्वरूप सामने आया है जिसने न केवल इन दो प्रांतों बल्कि पूरे राष्ट्र को एक बार फिर झकझोर दिया है। एक बार फिर अनेक सवाल खड़े हुए हंै कि आखिर  कितनी बालिकाएं, कब तक ऐसे जुल्मों का शिकार होती रहेंगी। कब तक अपनी मजबूरी का फायदा उठाने देती रहेंगी। दिन-प्रतिदिन देश के चेहरे पर लगती यह कालिख को कौन पोछेगा? कौन रोकेगा ऐसे लोगों को जो इस तरह के जघन्य अपराध करते हैं, नारी को अपमानित करते हैं। इन सवालों के उत्तर हमने निर्भया के समय भी तलाशने की कोशिश की थी। लेकिन इस तलाश के बावजूद इन घटनाओं का बार-बार होना दुःखद है और एक गंभीर चुनौती भी है।


ताजा दोनों घटनाएं किसी दूर-दराज के इलाके की नहीं हैं बल्कि ये दो बडे़ प्रदेशों की राजधानी की हैं। रांची में एक छात्रा का अपहरण करके उसे ले जाया गया और उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ। जबकि हैदराबाद में पशु चिकित्सक की स्कूटी का टायर पंक्चर हो जाने के बाद उसे घर तक पहुंचने के लिए मदद लेनी पड़ी और मदद मिलने की बजाय वह ऐसे लोगों के चंगुल में फंस गई, जिन्होंने न सिर्फ बलात्कार किया, बल्कि उसकी निर्मम हत्या करके जला दिया। दोनों ही घटनाएं सीधे तौर पर बताती हैं कि निर्भया कांड के बाद जो भी कदम उठाए गए, वे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नाकाफी साबित हुए हैं।

हर बार की घटना सवाल तो खडे़ करती है, लेकिन बिना उत्तर के वे सवाल वहीं के वहीं खड़े रहते हैं। यह स्थिति हमारी कमजोरी के साथ-साथ राजनीतिक विसंगतियों को भी दर्शाती है। शासन-व्यवस्था जब अपना राष्ट्रीय दायित्व नैतिकतापूर्ण नहीं निभा सके, तब सृजनशील शक्तियों का योगदान अधिक मूल्यवान साबित होता है। आवश्यकता है वे अपने सम्पूर्ण दायित्व के साथ आगे आयें। अंधेरे को कोसने से बेहतर है, हम एक मोमबत्ती जलाएं। अन्यथा वक्त आने पर, वक्त सबको सीख दे देगा। वक्त सीख दे उससे पहले हमें जाग जाना होगा, हम नहीं जाग रहे हैं, हमारी मानसिकता में बदलाव नहीं हो रहा है, तभी बार-बार निर्भया जैसे कांड हमें झकझोर कर रह जाते हैं।

प्रश्न है कि हम निर्भया के वक्त ही कुछ क्यों जागे थे, इसके बाद हुई ऐसी घटनाओं पर हमें क्यों मूक दर्शक बने रहे। यदि एक निर्भया के समय हमारी जागृति से कड़े कानून बनेे, निर्भया के बलात्कारियों को फांसी की सजा सुनाई गई और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर बहुत कुछ किया गया, तो क्या वैसी ही जागृति कायम रहती तो महिलाओं के प्रति दरिंदगी की घटनाएं बार-बार नहीं होती। लेकिन हमारे सुषुप्तावस्था के कारण ही बलात्कार-व्यभिचार बढ़ रहे है बल्कि कड़े कानूनों की आड में निर्दोष लोगों को फंसाने का धंधा भी पनप रहा है। जिसमें असामाजिक तत्वों के साथ-साथ पुलिस भी नोट छाप रही है।

हमें उन आदतों, वृत्तियों, महत्वाकांक्षाओं, वासनाओं एवं कट्टरताओं को अलविदा कहना ही होगा जिनका हाथ पकड़कर हम उस ढ़लान में उतर गये जहां रफ्तार तेज  है और विवेक का नियंत्रण खोते चले जा रहे हैं जिसका परिणाम है नारी पर हो रहे नित-नये अपराध और अत्याचार। हमें जीने के प्रदूषित एवं विकृत हो चुके तौर-तरीके ही नहीं बदलने हैं बल्कि उन कारणों की जड़ों को भी उखाड़ फेंकना है जिनके कारण से बार-बार नारी को जहर के घूंट पीने को विवश होना पड़ता है। ऐसा वातावरण निर्भया-कांड के समय बना, तब सरकार एवं समाज के एक बडे़ तबके और सभी राजनीतिक दलों ने यह संकल्प लिया था कि अब कोई और निर्भया नहीं होगी। उस आंदोलन और उन संकल्पों से एकबारगी लगने लगा था कि अब देश की सूरत बदलेगी ही, देश में महिलाएं पहले से सुरक्षित होंगी।

यह उस समय का आवेग था, जो सरकार पर कुछ करने का दबाव भी बना रहा था और हमें कई तरह के आश्वासन भी दे रहा था। निर्भया कांड के बाद जो बदलाव हुए, उसमें मुख्य था बलात्कार से जुडे़ कानूनों में बदलाव। उस समय जो आंदोलन चल रहा था, उसकी एक प्रमुख मांग थी कि बलात्कार के दोषियों को मृत्युदंड दिया जाए। हालांकि इसे लेकर कई मतभेद थे, लेकिन अंत में इसकी सिफारिश भी की गई। सोच यही थी कि अगर बलात्कारियों के बच निकलने के रास्ते बंद करने के साथ ही उनको दिया जाने वाला दंड बाकी समाज के लिए एक कठोर सबक का काम करेगा और यह अपराधी मानसिकता के लोगों को ऐसे अपराध करने से रोकेगा।

लेकिन इसके बावजूद अगर ऐसी वारदात नहीं रुक रही हैं, तो यह सोचना जरूरी है कि इस दिशा में और क्या किया जाए? इस समस्या का केवल कानून में समाधान खोजना भी एक भ्रांति है, समस्या के समाधान की दिशा में आधा-अधूरा प्रयत्न है। जरूरत है जन-जन की मानसिकता को बदलने की। समाजशास्त्र मानता है कि अपराधी के बच निकलने के रास्ते बंद करना और कड़े दंड का प्रावधान किया जाना जरूरी हैं, पर ये अपराध के खत्म होने की गारंटी नहीं हो सकते। इनके साथ सबसे जरूरी है उन स्थितियों को खत्म करना, जो ऐसे अपराधों का कारण बनती हैं।

बलात्कार जैसे अपराध कुंठित मानसिकता के लोग करते हैं, लेकिन ऐसी कुंठाएं कई बार महिलाओं के प्रति हमारी सामाजिक सोच से उपजती हैं। महिलाओं को सिर्फ कानूनों में ही नहीं, सामाजिक धारणा के स्तर पर बराबरी का दर्जा देकर और उनकी सार्वजनिक सक्रियता बढ़ाकर ही इस मानसिकता को खत्म किया जा सकता है। इससे हम ऐसा समाज भी तैयार करेंगे, जो कुंठित मानसिकता वालों को बहिष्कृत कर सकेगा। प्रश्न यह भी है कि आखिर हमारे देश में महिलाओं को लेकर पुरुषों में ही इतनी कुंठाएं क्यों है? इन कुंठाओं को समाप्त कैसे किया जाये, इस पर भी तटस्थ चिन्तन जरूरी है।

रांची एवं हैदराबाद की ताजा त्रासद एवं अमानवीय घटनाएं हो या निर्भरा कांड, नितीश कटारा हत्याकांड, प्रियदर्शनी मट्टू बलात्कार व हत्याकांड, जेसिका लाल हत्याकांड, रुचिका मेहरोत्रा आत्महत्या कांड, आरुषि मर्डर मिस्ट्री की घटनाओं में पिछले कुछ सालों में इंडिया ने कुछ और ऐसे मौके दिए जब अहसास हुआ कि भू्रण में किस तरह नारी अस्तित्व बच भी जाए तो दुनिया के पास उसके साथ और भी बहुत कुछ है बुरा करने के लिए। बहशी एवं दरिन्दे लोग ही नारी को नहीं नोचते, समाज के तथाकथित ठेकेदार कहे जाने वाले लोग और पंचायतंे भी नारी की स्वतंत्रता एवं अस्मिता को कुचलने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है, स्वतंत्र भारत में यह कैसा समाज बन रहा है, जिसमें महिलाओं की आजादी छीनने की कोशिशें और उससे जुड़ी हिंसक एवं त्रासदीपूर्ण घटनाओं ने एक बार फिर हम सबको शर्मसार किया है। यह वक्त इन स्थितियों पर आत्म-मंथन करने का है, उस अहं के शोधन करने का है जिसमें श्रेष्ठताओं को गुमनामी में धकेलकर अपना अस्तित्व स्थापित करना चाहता है।

समाज के किसी भी एक हिस्से में कहीं कुछ जीवन मूल्यों, सामाजिक परिवेश जीवन आदर्शों के विरुद्ध होता है तो हमें यह सोचकर चुप नहीं रहना चाहिए कि हमें क्या? गलत देखकर चुप रह जाना भी अपराध है। इसलिये बुराइयों से पलायन नहीं, उनका परिष्कार करना सीखें। चिनगारी को छोटी समझ कर दावानल की संभावना को नकार देने वाला जीवन कभी सुरक्षा नहीं पा सकता। बुराई कहीं भी हो, स्वयं में या समाज, परिवार अथवा देश में तत्काल हमें अंगुली निर्देश कर परिष्कार करना चाहिए। क्योंकि एक स्वस्थ समाज, स्वस्थ राष्ट्र स्वस्थ जीवन की पहचान बनता है। हमें इतिहास से सबक लेना चाहिए कि नारी के अपमान की एक घटना ने एक सम्पूर्ण महाभारत युद्ध की संरचना की और पूरे कौरव वंश का विनाश हुआ। रांची-हैदराबाद जैसी बालिकाओं की अस्मिता को लूटने और उन्हें मौत के हवाले कर देने की घटनाएं कहीं सम्पूर्ण मानवता के विनाश का कारण न बन जाये।