जशपुर में मुखिया का आगमन, खोला विकास का पिटारा, जिले को दी 792 करोड़ रूपए के 196 विकास कार्याें की सौगात

जशपुर में मुखिया का आगमन, खोला विकास का पिटारा, जिले को दी 792 करोड़ रूपए के 196 विकास कार्याें की सौगात

04-Dec-2020

656 करोड़ रूपए की लागत के 94 कार्याें का किया भूमिपूजन: 137 करोड़ रूपए की लागत के 102 कार्याें का लोकार्पण

जशपुर जिले में 568.80 करोड़ रूपए की लागत से बनने
वाली 64 सड़कों का भूमि पूजन

लगभग 62.68 करोेड़ रूपए की लागत से पूर्ण किए गए सोलर सिंचाई पम्पों, सोलर होम लाईट और सोलर प्लांट स्थापना के पूर्ण हो चुके कार्याें का लोकार्पण

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने जशपुर जिले को दी 792 करोड़ रूपए के 196 विकास कार्याें की सौगात

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज जिला मुख्यालय  जशपुर के रणजीता स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में जिले को 792 करोड़ रूपए 86 लाख रूपए की लागत के 196 विभिन्न विकास कार्याें की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने इनमें से 655 करोड़ 77 लाख रूपए की लागत के 94 कार्याें का भूमिपूजन और 137 करोड़ रूपए की लागत के 102 कार्याें का लोकार्पण किया। इस अवसर पर खाद्य मंत्री श्री अमरजीत भगत, उच्च शिक्षा मंत्री श्री उमेश पटेल, मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री लालजीत सिंह राठिया, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती उत्तरी गनपत जांगड़े, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री गिरीश देवांगन, विधायक जशपुर श्री विनय भगत, रायगढ विधायक श्री प्रकाश नायक, लैलूंगा विधायक श्री चक्रधर सिदार सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में प्रबुद्व नागरिक उपस्थित थे।

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    मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले में 568 करोड़ 80 लाख रूपए की लागत से बनने वाली 64 सड़कों के लिए भूमि पूजन किया। इन कार्याें में से लोक निर्माण विभाग द्वारा 359 करोड़ 63 लाख रूपए की लागत से बनाई जाने वाली 32 सड़कों के कार्य, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 205 करोड़ 65 लाख रूपए की लागत से बनने वाली 28 सड़कें और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 3 करोड़ 52 लाख रूपए की लागत से बनने वाली 4 सड़कें शामिल हैं। इनमें से अनेक सड़कों पर पुल-पुलियों के निर्माण के कार्य भी किए जाएंगे। इन कार्याें के पूर्ण होने से जशपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में लोगों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 38 करोड़ 28 लाख रूपए की लागत से पूर्ण हो चुके सड़कों के 40 कार्याें का लोकार्पण भी किया।
मुख्यमंत्री ने वनांचल के इस जिले में क्रेडा द्वारा लगभग 62 करोड़ 68 लाख रूपए की लागत से पूर्ण किए गए सोलर सिंचाई पम्पों, सोलर होम लाईट और सोलर प्लांट स्थापना के पूर्ण हो चुके कार्याें का लोकार्पण किया। इन कार्याें में सौर सुजला योजना के अंतर्गत 47 करोड़ 85 लाख रूपए की लागत से स्थापित किए गए 1927 सोलर सिंचाई पम्प स्थापना के कार्य, 2 करोड़ 9 लाख रूपए की लागत से गौठानों और चारागाहों में पेयजल के लिए स्थापित 74 सौर सिंचाई पम्पों, 6 करोड़ 29 लाख रूपए की लागत से पेयजल के लिए स्थापित किए गए 110 सोलर ड्यूल पम्प, 5 करोड़ 30 लाख रूपए की लागत से लगाई गई 1301 सोलर होम लाईट और 1 करोड़ 15 लाख रूपए की लागत से जशुपर बगीचा और पत्थलगांव के न्यायालय एवं व्यवहार न्यायालय में स्थापित किए गए 4 सोलर पॉवर प्लांट स्थापना का कार्य शामिल है।

श्री बघेल ने जशपुर जिले में 28.60 करोड़ रूपए की लागत से सौर सुजला योजना के अंतर्गत 1 हजार सौर सिंचाई पम्पों की स्थापना के कार्य, 4.96 करोड़ रूपए की लागत से गौठानों और चारागाहों में पेयजल हेतु स्थापित किए जाने वाले 150 सौर सिंचाई पम्पों, 6.66 करोड़ रूपए की लागत से जल जीवन मिशन के अंतर्गत 45 सोलर ड्यूल पम्प और टंकी स्थापना के कार्याें का भूमिपूजन भी किया।   

श्री बघेल ने जिन कार्याें का भूमिपूजन किया उनमें जशपुर जिले के कुनकुरी क्षेत्र के 217 करोड़ 41 लाख रूपए की लागत के 23 विकास कार्य, पत्थलगांव क्षेत्र के 164 करोड़ 41 लाख रूपए की लागत के 23 कार्याें तथा जशपुर क्षेत्र के 273 करोड़ 95 लाख रूपए की लागत के 48 कार्यों शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने जशपुर में जिन कार्याें का भूमिपूजन किया उनमें 83.45 करोड़ रूपए की लागत से 29.40 किलोमीटर लम्बे कुनकुरी-तपकरा मार्ग के उन्नयन कार्य, 75 करोड़ रूपए की लागत से 26.60 किलोमीटर लम्बे बगीचा-कामारिमा-सन्ना मार्ग का उन्नयन एवं नवीनीकरण कार्य, 28.06 करोड़ रूपए की लागत से 10 किलोमीटर लम्बे चराईडाड़-बगीचा मार्ग का उन्नयन कार्य, 15.16 करोड रूपए की लागत से 7 किलोमीटर लम्बे बटईकेला-समदुरा मार्ग निर्माण कार्य, 14.44 करोड़ रूपए की लागत से 9.20 किलोमीटर लम्बे लुड़ेग-तपकरा-लवाकेरा मार्ग का उन्नयन एवं नवीनीकरण कार्य, 14.97 करोड़ रूपए की लागत से 21 किलोमीटर लम्बे महादेवडांड से बिमड़ा मार्ग निर्माण, 8.92 करोड़ रूपए की लागत से ईब एनीकट योजना, जशपुर क्षेत्र में 18.27 करोड़ रूपए की लागत से 10 किलोमीटर लम्बे जशपुर-आस्ता-कुसमी मार्ग का उन्नयन एवं नवीनीकरण के कार्याें शामिल हैं।  

 इसी प्रकार मुख्यमंत्री ने 137.09 करोड़ रूपए की लागत के जिन 102 कार्याें का लोकार्पण किया, उनमें कुनकुरी क्षेत्र में पूर्ण किए गए 33 करोड़ 12 लाख रूपए की लागत के 25 कार्य, पत्थलगांव में 9 करोड़ 43 लाख रूपए के 19 कार्य और जशपुर के 94  करोड़ 54 लाख रूपए की लागत के 58 कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री बघेल आदिमजाति कल्याण विभाग द्वारा 12 करोड़ की लागत से पूर्ण किए गए 7 कार्याें, लोक निर्माण विभाग द्वारा 33 करोड़ 13 लाख रूपए की लागत से पूर्ण किए गए 15 कार्याें, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 20 करोड़ 78 लाख रूपए की लागत से पूर्ण किए गए सड़क निर्माण के 33 कार्याें, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 45 लाख रूपए की लागत से पूर्ण किए गए 2 कार्याें, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल द्वारा 14 करोड़ 64 लाख रूपए की लागत से पूर्ण किए 3 कार्याें, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा 01 करोड़ 63 लाख रूपए की लागत से 29 स्कूलों में रनिंग वाटर पेयजल व्यवस्था सहित 2 नल-जल प्रदाय योजनाओं का लोकार्पण भी किया।


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की एक ओर संवेदनशील पहल : सुदुर अंचल के छात्रों को निजी मेडिकल काॅलेजों में सरकार कराएगी प्रवेश

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की एक ओर संवेदनशील पहल : सुदुर अंचल के छात्रों को निजी मेडिकल काॅलेजों में सरकार कराएगी प्रवेश

02-Dec-2020

नीट क्वालिफाई बच्चे जो नेटवर्क प्राब्लम के चलते काउंसिलिंग के लिए तय समय पर नही करा सके थे अपना पंजीयन

इन होनहार बच्चों का अब सरकार संवारेगी भविष्य

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रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने एक ओर संवेदनशील पहल करते हुए प्रदेश के सुदुर अंचल जहां नेटवर्क और अन्य तकनीकी कारणों से नीट क्वालिफाई होनहार छात्र-छात्राएं जो काउंसलिंग के लिए निर्धारित समय पर अपना पंजीयन नही करा सके थे उन्हें अब प्रदेश के निजी काॅलेजों में पेमेंट सीट पर प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए है। इन होनहार बच्चों का भविष्य अब सरकार संवारेगी। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद यह पहली बार है कि एमबीबीएस के लिए निजी काॅलेजों के पेमेंट सीट में बच्चों को राज्य सरकार के खर्च पर दाखिला दिलाया जाएगा।

     मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा है कि किसी भी बच्चे के भविष्य के साथ कोई समझौता नही होना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने प्रदेश के दूरस्थ आदिवासी अंचलों के ऐसे सभी होनहार बच्चों के एमबीबीएस मेें दाखिला के लिए जिला प्रशासन को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के संज्ञान में जैसे ही यह बात आयी कि दंतेवाड़ा जिले के 27 होनहार छात्र-छात्राएं जिन्होंने नीट क्वालिफाई किया है परन्तु नेटवर्क प्राब्लम के चलते प्रथम काउंसलिंग में उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका था। इस सम्बन्ध में जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर पंजीयन कराने का प्रयास किया गया और राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय काउंसलिंग पूर्व इनका रजिस्ट्रेशन कराया गया परंतु ये छात्र चयन से वंचित रह गए । राज्य में पंजीयन हेतु द्वितीय अवसर नहीं होने से उनका पंजीयन नहीं कराया जा सका । प्रथम काउंसलिंग के पश्चात इसमें दो छात्रा कुमारी पदमा मडे और पीयूषा बेक एमबीबीएस में प्रवेश की पात्रता रखती हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कलेक्टर दंतेवाड़ा द्वारा इन छात्राओं का प्रदेश के निजी काॅलेजों में दाखिला की कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आगे भी यदि इनमें से कोई छात्र कटअप के बाद प्रवेश के लिए पात्र पाया जाता है तो उन्हें भी निजी काॅलेजों की पेमेंट सीट पर दाखिला दिलाया जाएगा और इसका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

 


विश्व एड्स दिवस पर विशेष  जागरुकता से बचाव संभव

विश्व एड्स दिवस पर विशेष जागरुकता से बचाव संभव

01-Dec-2020

‘’वैश्विक एकजुटता साझा जिम्मेदारी’’ की थीम पर मनाया जायेगा विश्व एड्स दिवस

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रायपुर 

विश्व एड्स दिवस हर साल 1 दिसंबर को मनाया जाता है। इस वर्ष इसकी थीम``वैश्विक एकजुटता साझा जिम्मेदारी’’ है कोरोना सक्रमण काल में डिजिटल माध्य्म का उपयोग करते हुए एड्स जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा ।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मीरा बघेल ने बताया, एचआईवी एक प्रकार के जानलेवा इंफेक्शन से होने वाली गंभीर बीमारी है जिसे मेडिकल भाषा में ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस यानि एचआईवी के नाम से जाना जाता है । जबकि लोग इसे आम बोलचाल में एड्स यानि एक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम के नाम से भी जानते हैं। इस रोग में जानलेवा इंफेक्शन व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) पर हमला करता है जिसकी वजह से शरीर सामान्य बीमारियों से लड़ने में भी अक्षम होने लगता है। इस बीमारी का कोई इलाज़ नहीं है लेकिनजागरुकता से इस बीमारी से बचाव संभव है। 

डॉ. बघेल ने वर्ल्ड एड्स डे के उद्देश्य  के बारे में कहा एचआईवी संक्रमण की वजह से होने वाली यह बीमारी हर उम्र के लोगों में हो सकती है जागरूकता बढ़ाना ही इसका बचाव है।एड्स वर्तमान युग की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है।

डॉ.बघेल ने कहा विश्व में प्रत्येक वर्ष एचआईवी संक्रमण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 1 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे (World AIDS Day) यानि विश्व एड्स दिवस  मनाया जाता है। सबसे पहले विश्व एड्स दिवस को वैश्विक स्तर पर मनाने की शुरूआत  वल्ड हेल्थ आर्गनाईज़ेशन में एड्स की जागरुकता अभियान से जुड़े जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस नेटर नाम के दो व्यक्तियों ने अगस्त 1987 में की थी।

डॉ. बघेल ने बताया शुरुआती दौर में विश्व एड्स दिवस को सिर्फ बच्चों और युवाओं से ही जोड़कर देखा जाता था जबकि एचआईवी संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। साल 1996 में एचआईवी/ एड्स पर संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक स्तर पर इसके व्यापक प्रचार और प्रसार का काम किया ।वर्ष 1997 में विश्व एड्स अभियान के तहत संचार, रोकथाम और शिक्षा पर काफी काम किया। 

एचआईवी क्या है।

एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियंसी वायरस हमारे इम्यून सिस्टम पर असर डालता है। इसके कारण शरीर किसी अन्य रोग के संक्रमण को रोकने की क्षमता खोने लगता है। वहीं एड्स एचआईवी संक्रमण का अगला चरण माना जाता है। शरीर का बैक्टीरिया वायरस से मुकाबला करने की क्षमता खोने लगता है। जिससे शरीर बीमारियों की चपेट में आने लगता है। शरीर प्रतिरोधक क्षमता आठ-दस सालों में ही न्यूनतम हो जाती है। इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है।

इन वजहों से होता है एड्स ।

संक्रमित खून चढ़ाने से ,HIV पॉजिटिव महिला से उसके बच्चे को,एक बार इस्तेमाल की जानी वाली सुई को दूसरी बार यूज करने से,इन्फेक्टेड ब्लेड यूज करने से

एचआईवी/एड्स होने के लक्षण में प्रमुख रूप से  बुखार, पसीना आना, ठंड लगना, थकान, भूख कम लगना, वजन घटा, उल्टी आना, गले में खराश रहना, दस्त होना, खांसी होना, सांस लेने में समस्या, शरीर पर चकत्ते होना, स्किन प्रॉब्लम आदि है।

एनएफएचएस- 4 के आंकड़ों

एनएफएचएस- 4 के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में एड्स जागरूकता के मामले मे 81% से अधिक महिलाओं ने एचआईवी एड्स के बारे में सुना है जिसमें से 93%शहरी क्षेत्र जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 70% महिलाएं इस बारे में जानती हैं।

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हमारा लक्ष्य, गांधी का राम-राज : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

हमारा लक्ष्य, गांधी का राम-राज : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

30-Nov-2020

समानता, प्रेम, भाईचारा और भयमुक्त समाज की स्थापना के लिए काम कर रहे :मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

समानता, प्रेम, भाईचारा और भयमुक्त समाज की स्थापना के लिए काम कर रहे

भगवान राम से जुड़े शिवरीनारायण का एक अच्छे पर्यटन तीर्थ 
के रूप में किया जाएगा विकास
 
शिवरीनारायण में 30 बिस्तर अस्पताल शुरु करने और तीन दिवसीय मानस महोत्सव 
के आयोजन की घोषणा

मुख्यमंत्री ने 36 करोड़ रूपए के प्रस्तावित कार्यों के मॉडल का किया अवलोकन

भगवान राम, लक्ष्मण और माता शबरी की प्रतिमा का अनावरण

शिवरीनारायण मानस महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री

रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार राज्य में उस राम-राज्य की स्थापना के लिए काम कर रही है, जिसकी बात महात्मा गांधी किया करते थे। उन्होंने कहा- असली रामराज वह है जहां समानता, प्रेम और भाईचारा हो, किसी के भीतर किसी भी तरह का भय न हो, जहां शेर और बकरी एक घाट में पानी पी सकें।

    श्री बघेल ने आज जाजंगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण में आयोजित मानस महोत्सव में उक्त बातें कही। यह महोत्सव शिवरीनारायण-मठ की ओर से आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमेशा करुणामय भगवान श्री राम की पूजा करने की परंपरा रही है। हम उन्हें साकार और निराकार दोनों रूपों में पूजते हैं। गोस्वामी तुलसी दास ने जहां उनके साकार स्वरूप को जन-जन तक पहुंचाया, वहीं संत कबीर ने राम के निर्गुण रूप की उपासना की। छत्तीसगढ़ का रामनामी समुदाय अपने शरीर पर राम नाम का गोदना अंकित करके उनके निर्गुण रूप की आराधना करता है।

    श्री बघेल ने कहा महात्मा गांधी के रामराज के सपने को साकार करने के लिए राज्य शासन ने सुराजी गांव योजना शुरु की है। जब हर वर्ग के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को यह महसूस होगा कि प्रदेश में उसकी सरकार है, तभी रामराज का सपना साकार होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से असली गो-सेवा तो हमारी सरकार कर रही है। पूरी दुनिया में यह पहली बार हो रहा है कि कोई सरकार किसानों से गोबर खरीद रही है। उन्होंने कहा- हम किसानों से 2 रुपए किलो में गोबर खरीद कर उससे जैविक खाद तैयार कर रहे हैं, जिसका विक्रय 8 रुपए किलो की दर से किया जा रहा है। जब पशुपालकों को गोबर की भी कीमत मिलने लगेगी तब वह अपने हर पशु के चारे की चिंता करेगा, चाहे उनसे दूध न भी मिलता हो। वह अपने पशुओं को घर पर ही बांधकर रखना चाहेगा। गोबरों की खरीद राज्य के 3926 गोठानों के माध्यम से की जा रही है, पूरे प्रदेश में 6430 से अधिक गोठानों का निर्माण किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ किसानों का प्रदेश है, इसीलिए कोरोनाकाल की आर्थिक चुनौतियों के बावजूद यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को उनकी उपज की सही कीमत मिले। हमने किसानों से 2500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी का वादा किया था, सरकार बनने के बाद हमने उसे पूरा किया। हमने राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरु की, जिसके माध्यम से 10 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से किसानों को 5750 करोड़ रूपए आदान सहायता राशि उपलब्ध कराई जा रही है। तीन किश्तों में 4500 करोड़ रूपए की राशि से अधिक किसानों के खातों में अंतरित की जा चुकी हैं, चौथी किश्त भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में किसानों की संख्या में गिरावट आ रही थी। खेती का रकबा भी तेजी से सिमटता जा रहा था। पहले जहां 12-15 लाख किसान ही धान बेचने के लिए पंजीयन कराते थे, वहीं इस साल छत्तीसगढ़ के साढ़े 21 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। हमारे कार्यकाल में किसानों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है और खेती का रकबा भी बढ़ा है। जो लोग अपने खेत रेग (ठेके) पर दिया करते थे, उन लोगों ने भी स्वयं खेती करनी शुरु कर दी है, क्योंकि अब उन्हें फसल का अच्छा पैसा मिलने लगा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवरीनारायण वह स्थान है, जहां वनवास काल के दौरान भगवान राम का आगमन हुआ था और माता शबरी का जन्म हुआ था। कोरिया से लेकर बस्तर तक श्री राम के वन गमन मार्ग पर ऐसे अनेक स्थान हैं, जहां उन्होंने प्रवास किया था। इनमें से 9 स्थानों को चिन्हित कर उन्हें पर्यटक केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा शासन ने राम वन गमन पथ पर्यटन सर्किट की जो योजना तैयार की है, यह उसके पहले चरण का काम है। अगले चरण में और भी स्थानों को इसमें शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिवरीनारायण और पूरा छत्तीसगढ़ वह स्थान है जिसने हर युग में भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया है। त्रेता युग में यहां राम का आगमन हुआ, वहीं द्वापर में रायपुर के निकट आरंग में भगवान श्री कृष्ण, अर्जन के साथ आए थे। यहां बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव रहा। बुद्ध के बाद सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध संत नागर्जुन ने यहीं के सिरपुर में तपस्या की। नालंदा के बाद भारत का सबसे बड़ा प्राचीन शिक्षा केंद्र सिरपुर में ही था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रचे-बसे हुए हैं। हम सोते-जागते, खाते-पीते हर पल राम को याद करते हैं। एक दूसरे से राम-राम कहकर ही भेंट करते हैं। फसलों के मापने के पारंपरिक पैमाने की पहली गणना भी राम से ही शुरु होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम से जुड़े शिवरीनारायण का न केवल एक अच्छे पर्यटन तीर्थ के रूप में विकास किया जाएगा, बल्कि यहां हर तरह की नागरिक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। 

    छत्तीसगढ़ गो सेवा आयोग के अध्यक्ष और शिवरीनारायण मठ के महंत रामसुंदर दास की मांग पर श्री बघेल ने शिवरीनारायण में 30 बिस्तर अस्पताल शुरु करने तथा तीन दिवसीय मानस गान महोत्सव के आयोजन की घोषणा की। इस मौके पर मुख्मयंत्री ने मानस महोत्सव में मानस मर्मज्ञों का शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित भी किया। 

रामायणकालीन नगरी शिवरीनारायण का होगा विकास

    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण में राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत लगभग 36 करोड़ रुपये के प्रस्तावित कार्यों के मॉडल का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने मेला मैदान में भगवान राम, लक्ष्मण और माता शबरी की प्रतिमा का अनावरण भी किया। 

    राम वनगमन पर्यटन परिपथ के महत्वपूर्ण पड़ाव और महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के संगम पर स्थित शिवरीनारायण में रामायण की थीम के अनुरूप विभिन्न विकास कार्य आकार ले रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से महानदी मोड़ पर 44 फीट ऊंचा विशाल प्रवेश द्वार और इसके समीप 32 फीट ऊंची भगवान श्रीराम सहित लक्ष्मण और माता शबरी की मूर्ति का निर्माण किया जायेगा। शिवरीनारायण में माता शबरी की भक्ति एवं वात्सल्य के प्रतीक जूठे बेर खिलाने के प्रसंग को उद्धरित करते हुए नदीतट घाट एरिया का सुंदरीकरण के अंतर्गत 14 व्यू पॉइंट का निर्माण, आरती पूजन जन सुविधा के रूप में, फूड प्लाजा, मेला ग्राउंड के पास कैफेटेरिया, पर्यटन सूचना केंद्र, पार्किंग एरिया का निर्माण, थ्री डी मॉडल, वाक थू्र के प्रस्तावित प्रारूप का अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि राम वनगमन पर्यटन परिपथ राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। छत्तीसगढ़ वासियों के लिए भगवान केवल आस्था ही नहीं बल्कि भांजे के रूप में भी पूजनीय हैं। पर्यटन परिपथ में कोरिया से लेकर सुकमा तक लगभग 1440 किलोमीटर के पथ में 75 स्थलों का चिन्हांकन किया गया है। इनमें से प्रथम चरण में 9 स्थलों के विकास का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है। इनमें सीतामणी हरचौका, रामगढ़, शिवरीनारायण, तुरतुरिया, चंदखुरी, राजिम, सिहावा, जगदलपुर और रामाराम (सुकमा) शामिल हैं।
    
मुख्यमंत्री का छत्तीसगढ़ी व्यंजनों से स्वागत

    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का शिवरीनारायण में स्वागत-सम्मान छत्तीसगढ़ी व्यंजनों से किया गया। मुख्यमंत्री ने शिवरीनारायण मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। उनके शिवरीनारायण मठ पहुंचने पर उन्हें ठेठरी, खुर्मी, पपची, अइरसा, मुरकु, खाजा, सलोनी स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों से भी तौला गया।
  
    मुख्यमंत्री ने शिवरीनारायण मंदिर में की पूजा-अर्चना 

    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग के अध्यक्ष महंत श्री रामसुंदर दास, स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव, नगरीय प्रशासन एवं श्रम मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, राजस्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्री पी.एल. पुनिया और विधायक श्री मोहन मरकाम भी उपस्थित थे। 

 


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा

26-Nov-2020

TNIS

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रायपुर : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री प्रगति पोर्टल के अंतर्गत कोरोना से संबंधित मुद्दे (वित्तीय सहायता, अस्पताल का ढांचा, राशन तथा रोजगार आदि), प्रधान मंत्री आवास योजना (ग्रामीण), प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत स्वनिधी योजना, निर्यात के रूप में जिले का विकास तथा आपरेशनाइ एग्रीकल्चर रिफार्म के संबंध में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की गई।

    प्रधानमंत्री श्री मोदी को मुख्य सचिव श्री आर.पी. मण्डल द्वारा बताया गया कि कोरोना संबंधी सीपी ग्राम पोर्टल में कुल 1028 शिकायतें प्राप्त हुई थी, जिसमें से शत प्रतिशत (1027) शिकायतों का निराकरण छत्तीसगढ़ में कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ श्रम विभाग द्वारा 12.57 करोड़ रूपए का वितरण कुल 18087 श्रमिकों को कोरोना के दौरान किए जाने की जानकारी दी गई। कोरोना के इलाज के लिए सभी निजी अस्पतालों के लिए दिशा-निर्देश का निर्धारण समय पर राज्य सरकार द्वारा किये जाने के बारे में अवगत कराया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत अनाज एवं चने का वितरण कोरोना के दौरान शत प्रतिशत पूरे राज्य में कर दिया गया था। इस दौरान 29.35 लाख लोगों को मनरेगा के माध्यम से कोरोना के दौरान रोजगार से लाभान्वित किया गया।

मुख्य सचिव द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को अवगत कराया गया कि, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत सीपी ग्राम पोर्टल में प्राप्त शिकायतों का शत प्रतिशत निराकरण छत्तीसगढ़ में किया गया है। मुख्य सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत स्वनिधी योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की रैंकिंग पूरे देश में 7वें स्थान पर रही है तथा कुल 50 हजार 753 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 15 हजार 076 प्रकरणों में राशि का वितरण सभी हितग्राहियों को डिजिटल माध्यम से किया जा चुका है। इस पर प्रधानमंत्री ने राज्य की प्रशंसा की। मुख्य सचिव ने बताया कि निर्यात हब के रूप में जिले का विकास अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में डिस्ट्रिक्ट एक्सपोर्ट हब प्रमोशन कमेटी का गठन कर दिया गया है तथा 31 दिसम्बर 2020 तक डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान को भी स्वीकार कर लिया जाएगा। आपरेशनाइजेशन एग्रीकल्चर रिफार्म के संबंध में मुख्य सचिव द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को जानकारी दी गई कि एआईएफ के लिए नोडल ऑफिसर नियुक्त कर दिया गया है तथा एफपीओ एवं एसएचजी को भी एआईएफ में शामिल करने के लिए योजना बनाई जा रही है।

    मुख्य सचिव ने बताया कि स्लरी पाईपलाईन स्थापना हेतु 83.831 हेक्टेयर व्यपवर्तन प्रस्ताव के संबंध में राज्य शासन द्वारा समय-सीमा में कार्यवाही पूर्ण कर ली गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा की गई कार्यवाही की तारीफ करते हुए धन्यवाद दिया।
 


दाई-दीदी क्लीनिक को मिला जन सहयोग  किशोरियों और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर कराई जांच

दाई-दीदी क्लीनिक को मिला जन सहयोग किशोरियों और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर कराई जांच

23-Nov-2020

19 नवंबर को महिलाओं के लियें स्पेशल ‘दाई-दीदी क्लीनिक’ की हुई है शुरूआत

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रायपुर  विशेष रूप से महिलाओं को समर्पित ‘दाई-दीदी क्लीनिक’ के अंतर्गत संचालित मोबाईल क्लीनिक के द्वारा आज गुढ़ियारी के पहाड़ी चौक में शिविर लगाया गया जिसमें21 किशोरी बालिकाओं और 42 महिलाओं की जांच की गई । इस अवसर पर रामकृष्ण परमहंस वार्ड के पार्षद श्रीकुमार मैनन, दानवीर भामाशाह वार्ड के पार्षद सुंदरलाल जोगी भी उपस्थित थे ।साथ ही क्षेत्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएवं मितानिन मौजूद रहीं ।‘दाई-दीदी क्लीनिक’ में कुल 63 लोगों की जांच की गई ।जिसमें 38 महिलाओं का शुगर टेस्ट एल्ब्यूमिन और ब्ल्ड प्रेशर टेस्ट भी किया गया 1  महिला का ईसीजी भी किया गया था ।

महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यावेक्षक रीता चौधरी ने बताया, दाई-दीदी क्लीनिक गाड़ियों की शुरुआत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 19 नवम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती पर किया था । यह स्पेशल महिला मेडिकल मोबाइल क्लीनिक देश में अपनी तरह की पहली अनूठी क्लीनिक है इसमें केवल महिला मरीजों को ही निःशुल्क इलाज की सुविधा है । विभाग द्वारा आज गुढ़ियारी के  पहाड़ी चौक में शिविर लगाकर 21 किशोरी बालिकाओं और 42 महिलाओं की जांच कराई गई ।जिसमें कोविड-19 के दिशा निर्देशों का पालन भी किया गया है ।

मातारानी चौक निवासी सावित्री यादव 63 वर्षीय ने बताया,फास्टिंग और खाना खाने के उपरांत मेरी यहॉ शुगर की जांच की गई । उसके बाद मुझे दवाइयों का वितरण किया गया । साथ ही मेरे बीपी (रक्तचाप )की जांच भी की गई ।  दाई-दीदी क्लीनिक मोबाइल वाहन से बहुत सारी समस्याओं का घर बैठे ही निराकरण हो गया ।

शुक्रवारी बाजार निवासी 18 वर्षीय अमेरिका साहू कहती हैं, दाई दीदी क्लीनिक वाहन विशेषकर किशोरी बालिकाओं और नव युवतियों के लिए बहुत अच्छी शुरुआत है । इसके अंदर जो पूरा स्टाफ कार्य कर रहा है वह महिलाएं हैं । जिसके कारण हम कोई भी परामर्श बिना झिझक के ले सकते हैं मैंने भी अपने आंतरिक समस्याओं की चर्चा खुलकर की और यहां से उन समस्याओं के निराकरण का परामर्श भी मिला और महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त हुई ।

केवल महिला मरीजों को ही मिलेगा निःशुल्क इलाज

क्लीनिक की गाड़ियों में केवल महिला मरीजों को ही निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध है । दाई-दीदी क्लीनिक गाड़ियों में केवल महिला स्टाफ और महिला डॉक्टर, महिला लैब टेक्नीशियन के साथ महिला एएनएम ही कार्यरत हैं।

रायपुर, भिलाई एवं बिलासपुर में हुई है शुरूआत

इस क्लीनिक के शुरू होने से महिला श्रमिकों एवं स्लम क्षेत्रों में निवासरत महिलाओं एवं बच्चियों को अपने घर के निकट ही महिला डॉक्टरों के माध्यम से इलाज की सुविधा मिलेगी। इस क्लीनिक का संचालन मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत किया जाएगा। वर्तमान में प्रदेश के तीन बड़े नगर पालिक निगम रायपुर, भिलाई एवं बिलासपुर में महिलाओं के लिए एक-एक दाई-दीदी क्लीनिक शुरू की जा रही है।

मिलेंगी विशेष जांच सुविधाएं

इस क्लीनिक में महिलाओं के प्राथमिक उपचार के साथ-साथ महिला चिकित्सक द्वारा स्तन कैंसर की जांच, हितग्राहियों को स्व स्तन जांच का प्रशिक्षण, गर्भवती महिलाओं की नियमित एवं विशेष जांच आदि की अतिरिक्त सुविधा होगी।

स्लम क्षेत्रों पर है खास ध्यान

महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से शहरों में स्थित आंगनबाड़ी के निकट पूर्व निर्धारित दिवसों में यह क्लीनिक स्लम क्षेत्र में लगाया जाएगा। इस क्लीनिक के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, बच्चों आदि के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न हितग्राहीमूलक परियोजना का लाभ भी प्रदान किया जाएगा।

महिलाएं निःसंकोच ले सकेंगी परामर्श

गौरतलब है कि जनरल क्लीनिक में महिलाओं के लिए पृथक जांच कक्ष और काउंसलर नहीं होने से महिलाएं परिवार नियोजन के साधन, कॉपर-टी निवेशन, आपातकालीन पिल्स की उपलब्धता, गर्भनिरोधक गोलियां, साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोली, गर्भनिरोधक इंजेक्शन, परिवार नियोजन परामर्श, एसटीडी परामर्श में झिझक का अनुभव करती है। इस महिला क्लीनिक में डेडीकेटेड महिला स्टाफ होने से अब इस प्रकार के परामर्श निःसंकोच लिये जा सकेंगे।


बस्तर  में कोरोना से ठीक होने के बाद, बीमार हुए मरीज़ों का उपचार होगा

बस्तर में कोरोना से ठीक होने के बाद, बीमार हुए मरीज़ों का उपचार होगा

21-Nov-2020

पोस्ट कोविड लक्षण वाले मरीजों के लिये नई व्यवस्था

जगदलपुर 20 नवम्बर। जगदलपुर मेडिकल कॉलेज के चेस्ट एंड टीबी डिपार्टमेंट में पोस्ट-कोविड ओपीडी बनाया जा रहा है, जहाँ कोविड से ठीक होने के बाद भी परेशानी महसूस कर रहे मरीज़ों का उपचार होगा। कोरोना वायरस से ठीक होने के बाद भी कुछ लोग बीमार पड़ रहे हैं। जिसे पोस्ट कोविड सिम्पटम भी कहा जाता है.

मेडिकल कॉलेज जगदलपुर के कोविड प्रभारी डॉ नवीन दुल्हानी ने बताया, कोविड-19 से ठीक होने के बाद कई मरीज ऐसे हैं जिन्हें थकान, साँस लेने में परेशानी, चक्कर आना, बेहोशी, हल्का बुख़ार, जोड़ों में दर्द उदासी और मानसिक तनाव जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। कई लोगों में स्वाद का ना आना और गले में ख़राश की दिक़्क़त भी बनी हुई है। जिस मरीज़ में कोविड का संक्रमण जितना अधिक होता है, उतने ज़्यादा लक्षण उसमें ठीक होने के बाद देखने को मिलते हैं।  ऐसे मरीजों के उपचार के लिये मेकॉज में पोस्ट कोविड ओपीडी प्रारम्भ करने की तैयारी पूरी की जा चुकी है जहाँ एमडी मेडिसिन, चेस्ट एंड टीबी विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट, व मानसिक स्वास्थ्य हेतु साइकॉलजिस्ट उपस्थित रहेंगे। ये ओपीडी केवल उन मरीजों के लिए बनाई जा रही है, जो कोरोना संक्रमण को मात देकर एक बार ठीक हो चुके हैं लेकिन पोस्ट कोविड प्रभाव के कारण उनमे पुनः कोई लक्षण सामने आ रहे है।

कोरोना की बीमारी ठीक होने पर भी ऐसे लक्षण इसलिये दिखाई पड़ते है क्योंकि वायरस से लड़ने के लिए शरीर में बने एंटीजन इम्यून सिस्टम में इस तरह के बदलाव कर देते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम अति प्रतिक्रिया करने लगता है. इसी कारण बुख़ार, बदन दर्द और अन्य समस्याएँ होने लगती हैं।

कोरोना से बचाव के लिये कुछ नियमों का पालन जरूरी है, खासतौर पर ऐसे व्यक्ति जो हाल ही में इस संक्रमण से उबरे हो क्योंकि इस स्थिति में शरीर थोड़ा कमजोर हो चुका होता है। इसलिये प्रतिदिन कम समय के लिए ही सही लेकिन एक्सरसाइज करते रहें। इसे एक बार रुटीन में शामिल कर लें तो आप शारीरिक और मानसिक रुप से फिट रहेंगे। स्वस्थ खाना खाएं, ताकि सेहत में तेजी से सुधार आए, संक्रमण के दौरान कई बार वजन कम होने की स्थिति उत्पन्न हुई है इसलिए इपनी डाइट में प्रोटीन युक्त सब्जियां शामिल करें या डॉक्टर द्वारा बताई हुई डाइट का खाना खाएं।

कोरोना रिपोर्ट अगर निगेटिव आ गई है तो ऐसे में अपने शरीर का ध्यान रखते हुए धीरे-धीरे आम जिंदगी की तरफ बढ़े। सबसे पहले अपने इम्यून सिस्टम पर काम करें। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और अपने आस पास लोगों को कोरोना के प्रति जागरुक करें। अगर थकान, साँस लेने में परेशानी, चक्कर आना, बेहोशी,  हल्का बुख़ार, जोड़ों में दर्द उदासी और मानसिक तनाव जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं तो इन बातों के नजर अंदाज ना करें, तुंरत डॉक्टर से संपर्क करें।


छत्तीसगढ़ के दो मत्स्यकृषकों को मिला राष्ट्रीय सम्मान, विश्व मात्स्यिकी दिवस पर होंगे सम्मानित

छत्तीसगढ़ के दो मत्स्यकृषकों को मिला राष्ट्रीय सम्मान, विश्व मात्स्यिकी दिवस पर होंगे सम्मानित

20-Nov-2020

21 नवम्बर को विश्व मात्स्यिकी दिवस पर नई दिल्ली में होंगे सम्मानित

मुख्यमंत्री तथा कृषि मंत्री ने छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित करने वाले मत्स्य कृषकों एवं संस्थाओं को दी बधाई और शुभकामनाएं

रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य के दो मत्स्य कृषकों को मछली पालन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जाएगा। 21 नवंबर को विश्व मात्स्यिकी दिवस के अवसर पर भारत शासन द्वारा ए.पी. सिम्पोजियम हॉल, पूसा कैंपस नई दिल्ली में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसमें छत्तीसगढ़ राज्य के मेसर्स एम.एम.फिश सीड़ कल्टीवेशन प्राइवेट लिमिटेड, माना, जिला रायपुर को बेस्ट फिशरीज इन्टरप्राइजे़स के तहत् दो लाख रूपए का नगद पुरस्कार तथा प्रशस्ति पत्र एवं मेसर्स एम.आई.के कम्पनी, सिहावा, जिला धमतरी को बेस्ट प्रोप्राईटरी फर्म संवर्ग के तहत् एक लाख रूपए का नगद पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र दिया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल तथा कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित करने वाले मत्स्य कृषकों एवं संस्थाओं को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। 

 कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य में मछली पालन के क्षेत्र में प्रदेश के मत्स्य कृषक नवीनतम तकनीक को अपनाते हुए सफलता अर्जित कर रहे हैं। मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश आत्मनिर्भर हैं। विगत दो वर्षो में प्रदेश में 13 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मत्स्य बीज उत्पादन 251 करोड़ स्टैण्डर्ड फ्राई से 267 करोड़ स्टैण्डर्ड फ्राई का उत्पादन में किया हैं। देश में राज्य का मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में छठवां स्थान हैं। राज्य के मत्स्य कृषक प्रदेश में आवश्यक मत्स्य बीज प्रदाय करने के अतिरिक्त मध्यप्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, आध्रप्रदेश एवं बिहार प्रदेशों को भी निजी क्षेत्र द्वारा मत्स्य बीज की आपूर्ति कर रहे हैं। यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। 

 संचालक मछली पालन ने बताया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर राज्य के मत्स्य कृषक 6-7 मेट्रिक टन तक मत्स्य उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। विगत दो वर्षो में प्रदेश में 9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मत्स्य उत्पादन 4.89 लाख मिटरिक टन से 5.31 लाख मिटरिक टन का उत्पादन हुआ हैं। देश में राज्य का मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी छठवां स्थान हैं।

 राज्य में विगत दो वर्षो में मत्स्य कृषकों द्वारा स्वयं की भूमि पर 1000 तालाबों का निर्माण कर पंगेशियस प्रजाति का उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश के प्रगतिशील मत्स्य कृषक एवं जिला कांकेर के कृषकों द्वारा समूह में तालाबों का निर्माण कर विशेषकर पंगेशियस मत्स्य प्रजाति का नवीनतम तकनीक के साथ-साथ पूरक आहार का उपयोग कर 60-70 मेट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक मत्स्य उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं जिससे प्रदेश वासियों को स्वस्थ्य प्रोटीन युक्त ताजा आहार उपलब्ध हो रहा हैं। राज्य में मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि हेतु तीव्र बढ़वार वाली मत्स्य ‘‘तिलापिया‘ का उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। निजी क्षेत्र में एक तिलापिया बीज उत्पादन हेतु हैचरी रायपुर में स्थापित की गई हैं प्रदेश में प्रति दिवस लगभग 20 टन तिलाबिया की मांग है। तिलापिया मत्स्य का निर्यात अन्य राज्यों जैसे केरल, उत्तर प्रदेश, मघ्य प्रदेश को किया जा रहा है। प्रदेश में इस वर्ष 3.00 करोड़ तिलापिया मत्स्य बीज निजी क्षेत्र में उत्पादित किया गया है।

 राज्य के मध्यम एंव बड़ेे जलाशयों में मत्स्य की शत्-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित करती है केज कल्चर तकनीक। इस तकनीक में जलाशयों में 6x4x4 मीटर के केज बनाकर तीव्र बढ़वार वाली मत्स्य जैसे कि ‘पंगेशियस‘ एवं ‘तेलापिया‘ का पालन किया जाता है। प्रति केज 3000-5000 किलो मत्स्य उत्पादित की जाती है। अब तक प्रदेश के 11 जिलों में 1400 केज स्थापित हो चुके है।

 प्रदेश के सबसे बड़े जलाशय हसदेव बांगो, कोरबा में 1000 केज की परियोजना स्वीकृत की गई है। इन्हें स्थापित कर प्रति हितग्राही 05-05 केज की इकाई एक-एक हितग्राही को मत्स्य पालन हेतु आबंटित की जावेगी। उक्त केज स्थानीय अनुजनजाति के मत्स्य पालकों को प्रदाय कर शासन की ओर से 40 से 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इसमें डुबान क्षेत्र में आने वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जावेगी।

 प्रदेशवासी मछलीपालन के क्षेत्र में क्रियान्वित नवीनतम तकनीक जैसे एकीकृत मत्स्य पालन, सघन मत्स्य पालन, पंगास पालन, रिसर्कलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आर.ए.एस.) तकनीक के माध्यम से कम क्षेत्र एवं कम जलक्षेत्र में पानी को निरन्तर परिशुद्धि कर मत्स्य पालन अपनाकर सफलता अर्जित कर रहे हैं, जिससे प्रदेश का मत्स्य उत्पादन निरंतर बढ़ रहा है। प्रदेश की आर.एस.ए. तकनीक का अन्य प्रदेश से मछलीपालन अधिकारी एवं प्रगतिशील मत्स्य कृषक यहाँ प्रयोग की नई तकनिकों का अध्ययन एवं परीक्षण कर प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं।

 प्रदेश में नवीनतम तकनीक से कम क्षेत्र में छोटी-छोटी टंकिया स्थापित कर कम जलक्षेत्र में परिपूरक आहार का उपयोग कर मछली पालन कर अधिक उत्पादन लेने हेतु बायोफ्लॉक तकनीक संचालित किये जाने हेतु शासन द्वारा इस वर्ष से मत्स्य कृषकों को प्रोत्साहन करने हेतु योजना स्वीकृत की गई है। जिसके तहत् प्रदेश वासियों को राशि 7.50 लाख रूपए लागत की इकाई स्थापना पर लागत राशि पर 40 प्रतिशत आर्थिक सहायता दिया जाने का प्रावधान रखा गया है।


 ​​​​​​​धनतेरस पर चिटफंड निवेशकों को दिलाया मुख्यमंत्री ने न्याय

​​​​​​​धनतेरस पर चिटफंड निवेशकों को दिलाया मुख्यमंत्री ने न्याय

13-Nov-2020

फर्जी चिटफंड कम्पनी की सम्पत्ति कुर्क कर, 16 हजार 796 निवेशकों को साढ़े सात करोड़ से ज्यादा वापस, छत्तीसगढ़ के साढ़े 13 हजार से अधिक निवेशकों के साथ ओड़िशा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के निवेशकों को भी लौटाई गई राशि 

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रायपुर : निवेशकों से धोखाधड़ी करने वाली एक चिटफंड कम्पनी याल्स्को रियल स्टेट एण्ड एग्रो फार्मिंग लिमिटेड पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी सम्पत्ति कुर्क करके निवेशकों को 7 करोड़ 33 लाख रूपए आज लौटा दिए हैं। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में निवेशकों के खाते में ऑनलाईन राशि अंतरित की। इस अवसर पर विधायक और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री दलेश्वर साहू और छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री गिरीश देवांगन, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री विनोद वर्मा और श्री रूचिर गर्ग, अपर मुख्य सचिव गृह श्री सुब्रत साहू, विशेष पुलिस महानिदेशक श्री अशोक जुनेजा उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री बघेल पहले ही कह चुके थे कि फर्जी चिटफंड कम्पनियों पर केवल एफआईआर करना पर्याप्त नहीं है। हम उनकी सम्पत्ति कुर्क करके निवेशकों के पैसे लौटाने की दिशा में काम करेंगे। आज धनतेरस के अवसर पर मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर भी अमल के साथ निवेशकों को न्याय मिलना शुरू हो गया है। 

    मुख्यमंत्री श्री बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने फर्जी चिटफंड कम्पनियों पर कार्रवाई कर  निवेशकों को उनकी जमा राशि दिलाने के विषय को अपनी प्राथमिकता में रखा। ऐसे प्रकरणों में प्रगति की समीक्षा मुख्यमंत्री स्वयं लगातार करते हैं। बीते दो वर्षो के कार्यकाल के दौरान शासन ने धोखाधड़ी के मामलों की जांच शुरू करते हुए फर्जी कम्पनियों के खिलाफ एफआईआर करने तथा निवेशकों को राशि लौटाने का सिलसिला शुरू किया था। साथ ही कम्पनी में काम करने वाले स्थानीय युवाओं के खिलाफ दर्ज मामले भी वापस लिए गए। इसी दौरान जन घोषणा पत्र में किए गए वादों से भी आगे बढ़कर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा था कि निवेशकों को न्याय दिलाने के लिए फर्जी कम्पनियों पर कानूनी शिकंजा कसने के साथ-साथ उनकी सम्पत्तियां भी कुर्क करके राशि लौटाई जाएगी।

    राजनांदगांव की चिटफंड कम्पनी याल्स्को रियल स्टेट एण्ड एग्रो फार्मिंग लिमिटेड के विरूद्ध शिकायतें प्राप्त होने पर राजनांदगांव कलेक्टर ने सम्पत्तियों की जानकारी प्राप्त की थी, जिसमें डायरेक्टरों के स्वामित्व की कुल 292.36 एकड़ अचल सम्पत्ति पाई गई। इस भूमि की कुर्की का अंतिम आदेश विशेष न्यायालय द्वारा पारित किया गया था। इसके बाद संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा कुर्क-सम्पत्तियों की नीलामी कराई गई। इस नीलामी से अब तक 8 करोड़ 15 लाख 34 हजार 345 रूपए प्राप्त हुए हैं। राजनांदगांव एवं छुरिया तहसीलों की एक-एक सम्पत्ति की नीलामी अभी शेष है। 

    27 जुलाई 2020 से 20 अगस्त 2020 तक कम्पनी के निवेशकों से दावा आपत्ति प्राप्त की गई। कुल 17 हजार 171 निवेशकों ने 24 करोड़ 75 लाख 47 हजार 337 रूपए का दावा प्रस्तुत किया। आवेदनों की समीक्षा के बाद 16 हजार 796 निवेशकों ने पूरी जानकारी के साथ  दावा प्रस्तुत किया। अब तक सम्पत्तियों की नीलामी से जो राशि प्राप्त हुई है, वह दावा राशि का केवल एक तिहाई। जिला स्तरीय पांच सदस्यीय समिति ने 16 हजार 796 निवेशकों द्वारा प्रस्तुत दावे की राशि का 30 प्रतिशत यानी 7 करोड़ 32 लाख 95 हजार 528 रूपए लौटाने का निर्णय लिया है। अब नीलामी की बचत राशि 82 लाख 38 हजार 817 रूपए शेष रहेगी।

    जिन 16 हजार 796 निवेशकों को राशि लौटाई जा रही है, उनमें 13 हजार 586 छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के हैं। इसी प्रकार 197 ओड़िशा के, 2971 महाराष्ट्र के और 42 निवेशक मध्यप्रदेश के हैं। इन निवेशकों के खाते में एन.ई.एफ.टी. के माध्यम से राशि स्थानांतरित की गई। 

विगत दो वर्षों में चिटफण्ड कंपनियों से वसूली गई 9 करोड़ से अधिक की राशि

    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा चिटफंड कंपनी संचालकों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये गये हैं। इसी क्रम में विगत 02 वर्षों में कुल 34 कंपनियों के विरूद्ध धोखाधड़ी की शिकायत प्राप्त होने पर 63 प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्यवाही करते हुये 43 डायरेक्टरों, 08 पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर तत्काल न्यायालय प्रस्तुत किया गया। विगत 02 वर्षों में वर्ष 2018 के पूर्व के प्रकरणों में से कुल 43 प्रकरणों के 80 आरोपियों को अन्य राज्यों से गिरफ्तार कर लाया गया है, जिनमें मध्यप्रदेश के 39 आरोपी, महाराष्ट्र के 09 आरोपी, राजस्थान के 05 आरोपी, ओड़िशा के 09 आरोपी, दिल्ली के 07 आरोपी, पश्चिम बंगाल के 02 आरोपी, उत्तर प्रदेश के 07 आरोपी, बिहार के 02 आरोपी शामिल हैं। 

    राज्य में वर्ष 2018 तक किसी भी कंपनी की संपत्ति की नीलामी नहीं किया गया था और न ही कोई राशि जप्त की गई थी। वर्ष 2019 में पुलिस द्वारा चिटफण्ड कंपनियों एवं उनके डायरेक्टरों की चल-अचल सम्पत्ति के पहचान की लगातार कार्यवाही करके कुल 123 प्रकरणों मंे कुर्की की कार्यवाही हेतु जिला कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजा गया। जिला कलेक्टरों द्वारा 29 अनियमित वित्तीय संस्थानों, डायरेक्टरों की सम्पत्ति को कुर्की का अंतिम आदेश हेतु न्यायालय में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इसमें से अब तक 17 प्रकरणों में न्यायालय द्वारा कुर्की का अंतिम आदेश पारित कर नीलामी, वसूली की कार्यवाही कर 09 करोड़ 04 लाख 40 हजार 220 रूपये शासन के खाते में जमा की गई। कुल 10 निवेशकों को कुल 22 लाख 94 हजार 243 रूपये वापस की गई। 02 प्रकरणों में नीलामी वसूली की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।  84 प्रकरणों में जिला कलेक्टर द्वारा कुर्की का अंतरिम आदेश हेतु कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

एजेंटों को राहत- 

    एजेंटों के प्रति शासन पूर्ण संवेदनशील है। पूर्व में स्थानीय एजेंटों को अपराधी बना दिया था, परन्तु वर्ष 2019 के बाद गिरफ्तार किये गये स्थानीय एजेंटों को 59 प्रकरणों में 104 एजेंटों को न्यायालय में शासकीय गवाह बनने हेतु आवेदन पत्र प्रस्तुत कराया है। विवेचनाधीन प्रकरणों में 42 प्रकरणों में 130 एजेंटों को शासकीय गवाह बनाया गया है।


कम हो रहे तापमान में बुजुर्गों और बच्चों का रखें ख्याल

कम हो रहे तापमान में बुजुर्गों और बच्चों का रखें ख्याल" स्टोरी आपके अवलोकनार्थ प्रेषित कर रहे हैं।

12-Nov-2020

तापमान में आई गिरावट से बढ़ी ठंड

बच्चों और बुजुर्गों पर दें विशेष ध्यान

बुखार या जुकाम होने पर लें डॉक्टर की सलाह

दमा उच्च रक्तचाप के रोगी पहनें गर्म कपड़े

रायपुर   नवंबर माह शुरू होते ही तापमान में निरंतर कमी महसूस हो रही है ऐसे में चिकित्सक एहतियात बरतने की सलाह दे रहे है। ठंडक बढ़ने के साथ ही निमोनिया जैसी संक्रमित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। अस्थमा ,उच्च रक्तचाप के रोगियों को डॉक्टर गर्म कपड़े पहननें की हिदायत दे रहे है ।अधिकतम और न्यूनतम तापमान के कारण मधुमेह के रोगियों को भी अपनी सेहत को ठीक रखने की सलाह भी दी जा रही है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मीरा बघेल के अनुसार, ऋतु परिवर्तन का सबसे ज़्यादा असर बच्चों और बुज़ुर्गों पर पड़ता है । ऐसे में बैक्टीरिया, वायरस या फंगल की वजह से फेफड़ों में संक्रमण होने का खतरा बना रहता है। बुखार या जुकाम होने के बाद निमोनिया भी हो सकता है। पांच साल से छोटे बच्चों व 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है इसलिए उन पर निमोनिया का असर जल्द होता है। बच्चों को होने वाले जानलेवा निमोनिया को टीकाकरण करा कर रोका जा सकता है। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल में आवश्यक टीकाकरण की सुविधा मौजूद है।

डॉ. बघेल ने कहा,शीत ऋतु में ताजा गर्म पौष्टिक आहार का सेवन करें । मामूली सी भी सर्दी खांसी होने पर या स्वाद ना आना, सूखी खांसी,बुखार, उल्टी-दस्त,थकान, कमजोरी महसूस होने पर कोविड-19 की जांच अवश्य कराएं । सर्दी खांसी होने पर बिना चिकित्सीय सलाह के किसी भी दवाई का सेवन करना हानिकारक भी हो सकता है ।सर्दी जुकाम बुखार को समान्य ना लेकर कोविड जाँच करवाने के बाद डॉक्टर की सलाह से पूरा इलाज करवायेंफेस मास्क,शारीरिक दूरी, का ध्यान सदैव रखें । किसी भी प्रकार की समस्या होने पर अपने नज़दीकी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र पर सम्पर्क करें ।

वहीं शासकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय रायपुर के पंचकर्म विभागाध्यक्ष डॉ.रंजीप दास कहते है मौसम में बदलाव के साथ ही मौसमी बीमारियां अपना प्रभाव दिखाने लगती है। तापमान में लगातार गिरावट से सबसे ज़्यादा प्रभाव बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। ऐसे में बच्चों को नंगे पांव ना खेलने दें। सिर पर टोपी के साथ साथ उचित गर्म वस्त्र पहनाने चाहिए। घर से बाहर जाने से पहले करीब 15-20 मिनट पहले रूम हीटर को बंद कर शरीर के तापमान को बाहर के अनुरुप बनाकर ही बहार जाना चाहिए। क्योंकि गर्म कमरे से बाहर ठंड में निकलते ही बच्चे और बुज़ुर्ग के बीमार होने का खतरा बढ़ सकता है।

अस्थमा उच्च रक्तचाप के मरीज़ गर्म परिधान करें धारण

तापमान में गिरावट के कारण ठंड से अस्थमा उच्च रक्तचाप के मरीज़ के साथ-साथ बुजुर्गों को भी ज्यादा परेशानी होती है। इसलिए उन्हें गर्म कपड़े ज़रुरत के अनुरुप पहनना चाहिए। ठंड लगने पर एंटीबायटिक दवा लेने की बजाए तुरंत चिकित्सक से चेकअप करवाना चाहिए। अस्थमा उच्च रक्तचाप के मरीज़  को एहतियात के तौर पर प्रतिदिन गर्म भाप लेंना और ठंड से बच कर रहना चाहिये ।

खानपान पर रखें ध्यान

ठंड में संक्रमण काफी तेजी से फैलता है, बेहतर है रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आप पहले से ही एहतियात बरतें। खाने में पपीता, कद्दू, गाजर, टमाटर, पालक, अमरूद जैसे मौसमी फलों और सब्जियों का इस्तेमाल कर सकते हैं ।

सुबह सुबह च्वनप्राश को शहद के साथ सेवन करें तो ठंडी बीमारियों से बचा जा सकता है हल्दी वाले दूध का सेवन कर सकते हैं किसी भी प्रकार की आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग करने के पूर्व आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अनिवार्य रूप से लें ।

ज़्यादातर कम उम्र के बच्चे और अधिक आयु के बुज़ुर्ग होते प्रभावित

सर्दी के मौसम मधुमेह के मरीजों के लिए खासा परेशानी वाला होता है । तापमान कम होने पर बच्चे और बुज़ुर्गों को घर में ही टहलना चाहिये एवं नियमित रुप से डॉक्टरी सलाह लेना चाहिये ताकि समय रहते जोखिम के खतरे को टाल जा सके ।

 


खेती के लिए सिंचाई से लेकर विपणन तक हर मोर्चे में पहल कर रही राज्य सरकार : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

खेती के लिए सिंचाई से लेकर विपणन तक हर मोर्चे में पहल कर रही राज्य सरकार : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

11-Nov-2020

सिंचाई सुविधा बेहतर होगी और किसानों को उत्पाद का उचित दाम मिलेगा तो अर्थव्यवस्था बेहतर होगी, छत्तीसगढ़ सरकार इसी दिशा में कर रही कार्य, बस स्टैंड परिसर में एक करोड़ रुपए से व्यावसायिक परिसर के निर्माण, पांच करोड़ रुपए की लागत से स्कूलों की मरम्मत एवं सात करोड़ रुपए की लागत से आंगनबाड़ियों के जीर्णोद्धार की घोषणा, स्वामी आत्मानंद उद्यान का लोकार्पण किया, एसडीएम कार्यालय का भूमिपूजन किया, तहसील कार्यालय एवं एसडीएम कार्यालय का भी होगा जीर्णोद्धार


रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि किसानों की बेहतरी के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत किश्त ऐसे समय में दिये गए जब खेती किसानी के काम के लिए किसानों को राशि की जरूरत होती है। इससे किसानों का संबल बढ़ा है। हमारे किसान बड़े दिलवाले हैं कोरोना के समय उन्होंने मुक्त हस्त से दान किया। किसान हमेशा हर मोर्चे पर आगे रहते हैं। शासन को लगातार उन्हें सशक्त करने की दिशा में काम करना चाहिए।

    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल आज दुर्ग जिले के पाटन में आयोजित जनसंपर्क कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर पाटन के बस स्टैंड परिसर में एक करोड़ रुपए की लागत से व्यावसायिक परिसर के निर्माण, पांच करोड़ रुपए की लागत से स्कूलों की मरम्मत और सात करोड़ रुपए की लागत से आंगनबाड़ियों के जीर्णोद्धार की घोषणा भी की। साथ ही उन्होंने पाटन में खेलप्रेमियों की सुविधा बढ़ाने 25 लाख रुपए की लागत से ओपन बैडमिंटन कोर्ट, क्रिकेट पिच और वालीबाल कोर्ट भी बनवाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जनपद कार्यालय में कक्ष भी विस्तारित किये जाएंगे। इस अवसर पर उन्होंने एसडीएम कार्यालय के नये भवन का भूमिपूजन भी किया। एसडीएम कार्यालय एवं तहसील कार्यालय का रिनोवेशन भी होगा।

    मुख्यमंत्री श्री बघेल ने स्वामी आत्मानंद उद्यान का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि पाटन में नागरिक सुविधाओं को विकसित करने के लिए लगातार बहुत से अच्छे कार्य किये जा रहे हैं। तालाबों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। उद्यानों को बेहतर किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि सिंचाई सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार विशेष रूप से फोकस कर रही है। सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाए और किसानों के लिए विपणन की व्यवस्था कराई जाए तो किसानों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। उन्होंने कहा कि बीते दिनों ऊर्जा विभाग की बैठक में उन्होंने निर्देश दिये कि नदियों और नालों के किनारे बिजली तार विस्तारित करें। इससे किसान लिफ्ट इरीगेशन का लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने कहा कि विडंबना यह होती है कि नदियों और नालों के किनारे के किसान ही सिंचाई के लिए पानी की तंगी का ज्यादा सामना करते हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अनेक निर्माण कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले किसी आयोजन में जाओ तो अतिथियों के लिए काजू किशमिश परोस दिये जाते थे। अब लोकल छत्तीसगढ़ी आइटम रखे जाते हैं। तिखुर-सिंघाड़ा जो हमारी इतनी प्रिय सामग्री है कभी भी ऐसे आयोजन में नहीं रखी जाती थी। अब तिखुर-सिंघाड़ा रखते हैं। यह छत्तीसगढ़ी अस्मिता और गरिमा का प्रतीक है। अपने मूल्यों को हमने केंद्र में रखा है। हमारे तीज त्योहार और हमारी परंपरा यही तो हमारी पहचान हैं।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि लघु वनोपजों के विक्रय के लिए नीति तैयार की गई है। इसका लाभ हुआ और लाकडाउन के दौरान पूरे देश में सबसे ज्यादा वनोपज छत्तीसगढ़ में बिका और इसका रेट भी अच्छा मिला। यहां काजू उत्पादकों से जयपुर के व्यवसायी 50 रुपए की दर से काजू ले जाते थे। सोसायटी के माध्यम से तात्कालिक रूप से सौ रुपए दर दिलाई गई जिसमें भविष्य में और अधिक राशि मिली। पांच हजार क्विंटल काजू बिका। कितनी बड़ी आर्थिक संभावना लोगों के लिए खुली।

 


पर्यावरण और प्रकृति के सम्मान के साथ विकास हमारी प्राथमिकता : सीएम भूपेश बघेल

पर्यावरण और प्रकृति के सम्मान के साथ विकास हमारी प्राथमिकता : सीएम भूपेश बघेल

07-Nov-2020

मुख्यमंत्री ने जंगल सफारी नवा रायपुर में वन्य प्राणियों के लिए नवनिर्मित 7 बाड़ों का किया लोकार्पण

जंगल सफारी में बाड़ों की संख्या बढ़कर हुई 18

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रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कल अपने निवास कार्यालय से नवा रायपुर स्थित नंदनवन जंगलसफारी एवं जू में वन्य प्राणियों के लिए नवनिर्मित 7 बाड़ों का ई-लोकार्पण किया। नंदनवन जंगल सफारी के नवनिर्मित सात बाड़ों में लोमड़ी, सियार, चौसिंगा, काला हिरण, कोटरी, नीलगाय तथा लकड़बग्गा का बाड़ा शामिल है। इसे मिलाकर वर्तमान में वहां जंगल सफारी में कुल बाड़ों की संख्या 18 हो गई है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम में वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर, कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री रविन्द्र चौबे, संसदीय सचिव श्री शिशुपाल सोरी, संसदीय सचिव श्री चन्द्रदेव राय उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री श्री बघेल ने नवीन बाड़ों का लोकार्पण करते हुए नंदनवन जंगल सफारी जू नवा रायपुर को पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में वन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और प्रकृति के सम्मान के साथ विकास हमारी प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ राज्य की विलक्षण जैव-विविधता हमारी पहचान है। इस पहचान को आगे बढ़ाने के लिए वन्य प्राणियों का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने इस अवसर पर बताया कि जंगल सफारी में वन्य प्राणियों को उनकी पसंद के अनुरूप वातावरण में रखने के लिए 37 बाड़ों के निर्माण का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि जंगल सफारी नवा रायपुर में वन्य प्राणियों के लिए लगातार बाड़ों का निर्माण किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा जंगल सफारी में निर्मित विभिन्न बाड़ों से जैव विविधता के संरक्षण तथा संवर्धन में भी मदद मिलेगी। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वन मंत्री श्री अकबर ने कहा कि जंगल सफारी और जू का निर्माण वन्य प्राणियों के व्यवस्थित प्रबंधन तथा प्राकृतिक परिवेश को बनाए रखने के लिए किया गया है। इसी कड़ी में नंदनवन जंगल सफारी एवं जू नवा रायपुर के निर्माण में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इससे विलुप्त प्राय वन्य प्राणी की प्रजातियों के संवर्धन तथा संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही आम आदमी तथा सैलानियों को विभिन्न वन्य प्राणियों को नजदीक से देखने का बेहतर मौका उपलब्ध होगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री बघेल द्वारा गत वर्ष 2019 में 5 अक्टूबर को जंगल सफारी नवा रायपुर में 11 बाड़ों का लोकार्पण किया गया था। इनमें रायल टायगर, लायन, लेपड़, सफेद बाघ, कछुआ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल, ऊद बिलाव, बंगाल मॉनीटर लिजॉर्ड-गोह, क्रोको डायल तथा वन भैंसा आदि बाड़ा शामिल है। नंदनवन जंगल सफारी एवं जू, नवा रायपुर में उपलब्ध नैसर्गिक वन के साथ-साथ लगभग 200 हेक्टेयर क्षेत्र में 1978-80 के मध्य रोपित किए गए विभिन्न प्रजातियों के वृक्षारोपण आज प्राकृतिक वन के रूप में विकसित हो चुके हैं। जंगल सफारी के इस अलौकिक क्षेत्र में एक सर्वेक्षण के मुताबिक लगभग 70 प्रजातियों के पेड़-पौधे, 12 विभिन्न प्रजातियों के वन्य प्राणी, 18 सर्व वर्ग के प्राणियों के साथ-साथ लगभग 76 विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षी जैव विविधता में अपना विशिष्ठ स्थान रखते हैं, जो वन्य प्राणियों के लिए आदर्श रहवास स्थल के रूप में उपयोग में आ रहा है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव वन श्री मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री राकेश चतुर्वेदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री पी.व्ही. नरसिंगा राव, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरूण पाण्डेय तथा मुख्य वन संरक्षक श्री जे.आर. नायक सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।


न्याय पाने दर-दर भटक रही है नेत्रहीन महिला, प्रधान मंत्री आवास गलत तरीके से तुड़वाने वालों पर जिलाधीश से की कार्यवाही की मांग

न्याय पाने दर-दर भटक रही है नेत्रहीन महिला, प्रधान मंत्री आवास गलत तरीके से तुड़वाने वालों पर जिलाधीश से की कार्यवाही की मांग

06-Nov-2020

सतीश पारख उतई

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नेत्रहीन महिला का बना प्रधान मंत्री आवास गलत तरीके से तुड़वाने वालों पर क्या होगी कार्यवाही 

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ये है मामला- 
नगर पंचायत उतई वार्ड 03 अंतर्गत नेत्रहीन महिला श्रीमती दुर्गी बाई पति श्री रामेश्वर साहू के नाम विगत 40/50 वर्षों से निवासरत वर्तमान प्रचलित आबादी भूमि 970/1 पर प्रधान मंत्री आवास स्वीकृत हो निर्मित किया गया था जो कि कब्जा नुसार पटवारी द्वारा कब्जा के आधार पर मौका देखकर ही आबादी नक्सा खसरा दिया गया होगा तदुपरांत ही वहां प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत व निर्मित किया गया ।

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चुकी उक्त भूमि से लगा पुराना खसरा नम्बर 356/5 जवरीलाल पारख के नाम की भूमि उनके ही कब्जे में थी जिस पर लंबे न्यायालयीन कार्यवाही के बाद जवरीलाल पारख के वारिसान की ओर से प्राप्त अधिकार के तहत उनके पुत्र प्रफुल्ल पारख के नाम हक में  न्यायालय द्वारा 21 बाई 64 की भूमि खाली करवा कर कब्जा देने का आदेश मा.नायब तहसीलदार दुर्ग को हुवा था जिसका परिपालन मौके पर किया जाना था किंतु उक्त आदेशीत भूमि के बाहर बने एक नेत्रहीन महिला के प्रधानमंत्री आवास को भी शायद न्यायालय आदेशित हक भूमि स्वामी के साथ मिलकर तुड़वा दिया गया ।
माननीय,....

एक गरीब नेत्रहीन महिला जो हर दृष्टिकोण से कमजोर है क्या उसे न्याय मिलेगा...
मौका निरीक्षण कर नापी करने से मामला पूर्णतया दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा..चूंकि लाभार्थी एक गरीब नेत्रहीन महिला व केंद्रीय योजना जिसका इतना बड़ा मजाक बनाया गया जिसमें जांच व दोषियों पर कार्यवाही का आग्रह है की जिसके द्वारा भी यह अन्यायपूर्ण कार्यवाही की गई है उनसे निर्मित आवास की राशि की वसूली के साथ साथ  दोषी व्यक्ति के खिलाफ न्यायलयीन मुकदमा दर्ज करने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाय

प्रतिलिपि
1. माननीय.PMO नई दिल्ली 
2. माननीय मुख्यमंत्री छ ग 
3. माननीय केबिनेट मंत्री व स्थानीय विधायक
4. लोकसभा सांसद दुर्ग
5. राज्यसभा सांसद जी
6. अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)दुर्ग
7. संयुक्त संचालक नगरीय निकाय दुर्ग सम्भाग

प्रधानमंत्री कार्यालय नई दिल्ली व मुख्यमंत्री सचिवालय रायपुर ...स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा 
बाकी सभी को ज्ञापन सौंपा

मौके पर नेत्रहीन महिला दुर्गी बाई साहू स्वयम सहिंत साथी रजा रिजवी व शुभम सोनी दुर्ग

सतीश पारख उतई
7869093377


कोविड-19 के दौरान भूतपूर्व सैनिकों द्वारा दिया गया योगदान सराहनीय : सुश्री उइके :

कोविड-19 के दौरान भूतपूर्व सैनिकों द्वारा दिया गया योगदान सराहनीय : सुश्री उइके :

06-Nov-2020

राज्यपाल की अध्यक्षता में राज्य सैनिक बोर्ड की राज्य प्रबंधन समिति की हुई ऑनलाइन बैठक, लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
झंडा दिवस के अवसर पर सर्वाधिक धनराशि एकत्रित करने वाले कलेक्टर एवं जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों को गवर्नर ट्राफी से किया गया सम्मानित

अब छत्तीसगढ़ के भूतपूर्व सैनिकों को राज्य सैनिक बोर्ड छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं तथा आर्थिक सहायता के लिए आनलाईन आवेदन करने की सुविधा मिलेगी। साथ ही भूतपूर्व सैनिकों के रिकार्ड का भी डिजिटलाईजेशन किये जाएंगे। इससे भूतपूर्व सैनिकों को ऑफलाइन आवेदन करने में होने वाली परेशानियों से निजात मिलेगी। इसके लिए एक साफ्टवेयर भी बनाया जाएगा। यह निर्णय राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके की अध्यक्षता में आयोजित राज्य सैनिक बोर्ड की अमलगेटेड स्पेशल फंड के राज्य प्रबंधन समिति की ऑनलाइन बैठक में लिया गया। राजभवन में हुई इस बैठक में राज्यपाल ने सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर सर्वाधिक धनराशि एकत्रित करने वाले कलेक्टर एवं जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों को गवर्नर ट्राफी से सम्मानित किया।
राज्यपाल ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे विश्वास है कि आज की बैठक में लिए गये निर्णय से भूतपूर्व सैनिकों, उनकी विधवाओं एवं उनके आश्रितों को अवश्य लाभ प्राप्त होगा। गत 14 मार्च 2020 को छत्तीसगढ़ के 26 वीर नारियों एवं माताओं का राजभवन में पहली बार सम्मान किया गया जो कि अत्यंत गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान पूर्व सैनिकों द्वारा जनसेवा में जो योगदान दिया, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि मुझे आशा है कि हमारे भूतपूर्व सैनिक कठिन परिस्थितियों में सदैव आगे बढ़कर निःस्वार्थ सेवा प्रदान करेंगे।
राज्यपाल ने कैंसर से पीड़ित भूतपूर्व सैनिकों की विधवाओं को आयुष्मान भारत योजना के तहत चिन्हित अस्पतालों में तथा अन्य शासकीय अस्पतालों में इलाज कराने के भी निर्देश दिए। बैठक में कैंसर से पीड़ित भूतपूर्व सैनिकों की विधवाओं को दी जाने वाली सहायता राशि को 25 हजार रूपए निर्धारित करने का निर्णय लिया गया। राज्यपाल ने कहा कि इस बीमारी के इलाज में काफी धनराशि खर्च होती है। अतः उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।
बैठक में भूतपूर्व सैनिकों के दिव्यांग (मानसिक रूप से) बच्चों को दी जाने वाले सहायता राशि देने का दायरा बढ़ाया गया है। पहले केवल 100 प्रतिशत दिव्यांगता पर ही सहायता दी जाती है, लेकिन अब दिव्यांगता (मानसिक रूप से) की विभिन्न श्रेणियों के तहत आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया गया। इसके तहत 100 प्रतिशत से कम दिव्यांगता होने पर 1500 रूपए, 50 प्रतिशत से कम में 700 रूपए और 25 प्रतिशत से कम में 500 रूपए प्रतिमाह दिये जाने का प्रावधान किया गया। साथ ही इस बैठक में भूतपूर्व सैनिक की मृत्यु पश्चात्् उनके विधवा/उत्तराधिकारी को मिलने वाली मृत्यु अनुदान राशि को 15,000 रूपए से बढ़ाकर 25,000 रूपए की गई। भारतीय रक्षा सेवाओं में प्रवेश के लिए होने वाली सर्विस सेलेकशन बोर्ड परीक्षा के पूर्व प्रषिक्षण के लिए आर्थिक अनुदान 5,000 रूपए से बढ़ाकर  20,000 रूपये किया गया। सुश्री उइके ने कहा कि इससे बच्चों को कोचिंग प्राप्त करने में सुविधा होगी।
राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भूतपूर्व सैनिकों की 75 वर्ष की आयु पूर्ण होने के पष्चात्् मिलने वाली 15,000/- रूपये की सम्मान राशि में प्रति 10 वर्ष पष्चात् 5,000/- रूपये की बढ़ोतरी किये जाने का निर्णय लिया गया। बैठक में सामाजिक गतिविधियों और कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए कार्यालय के साथ एक हॉल मुहैया कराने तथा भूतपूर्व सैनिकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए छात्रावास को किराये पर लिये जाने का सुझाव दिया गया। राज्यपाल ने सुझाव पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।
बैठक में सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर वर्ष 2017 में सर्वाधिक धनराशि एकत्रित करने के लिए दुर्ग जिले के कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे को प्रथम पुरस्कार और रायपुर जिले के कलेक्टर श्री एस. भारतीदासन को दूसरा पुरस्कार दिया गया। इसी तरह वर्ष 2018 में सर्वाधिक धनराशि एकत्रित करने के लिए रायपुर जिले के कलेक्टर श्री एस. भारतीदासन को प्रथम पुरस्कार और दुर्ग जिले के कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे को दूसरा पुरस्कार दिया गया
इसी तरह वर्ष 2017 में सर्वाधिक धनराशि एकत्रित करने के लिए कैप्टन (आई एन) पुरनेन्दु विद्यांता (से.नि) जिला सैनिक कल्याण अधिकारी दुर्ग को प्रथम पुरस्कार तथा कैप्टन (भा.नौ.) ए. सी. पोखरियाल (से.नि.) जिला सैनिक कल्याण अधिकारी रायपुर को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। वर्ष 2018 में कैप्टन (भा.नौ.) ए. सी. पोखरियाल (से.नि.) जिला सैनिक कल्याण अधिकारी रायपुर को प्रथम पुरस्कार तथा कैप्टन (आई एन) पुरनेन्दु विद्यांता (से.नि) जिला सैनिक कल्याण अधिकारी दुर्ग को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
बैठक में अमलगमेटेड स्पेशल फण्ड के राज्य प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष एवं मुख्य सचिव श्री आर.पी. मण्डल एवं छत्तीसगढ़ ओडिशा सब एरिया के कमाण्डर ब्रिगेडियर प्रशांत चौहान, समिति के पदेन सदस्य के रूप में अपर मुख्य सचिव वित्त श्री अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव गृह श्री सुब्रत साहू एवं राज्यपाल के सचिव श्री अमृत कुमार खलखो सहित रक्षा मंत्रालय भारत सरकार के अधिकारी, सैन्य अधिकारी एवं पुनर्वास महानिदेशालय के अधिकारी भी ऑनलाईन उपस्थित थे।
 

 199 करोड़ रूपए की लागत से बने जल शोधन संयंत्र एवं उच्च स्तरीय जलागार का मंत्री द्वय ने किया लोकार्पण

199 करोड़ रूपए की लागत से बने जल शोधन संयंत्र एवं उच्च स्तरीय जलागार का मंत्री द्वय ने किया लोकार्पण

05-Nov-2020

नगर निगम राजनांदगांव के लिए 5 करोड़ रूपए स्वीकृत
हमर मयारू राजनांदगांव अभियान का हुआ शुभारंभ

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नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया तथा वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने अमृत मिशन योजनांतर्गत राजनांदगांव में 199.23 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित 17 एमएलडी क्षमता के रानी जोतकुंवर बाई जल शोधन संयंत्र तथा नवागांव एवं कंचनबाग नवनिर्मित उच्च स्तरीय जलागार का लोकार्पण किया। जल संयंत्र गृह मोहारा में आयोजित इस कार्यक्रम में संसदीय सचिव श्री इंद्रशाह मंडावी, अध्यक्ष अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण श्री दलेश्वर साहू, अध्यक्ष अनुसूचित जाति प्राधिकरण श्री भुनेश्वर बघेल, विधायक खुज्जी श्रीमती छन्नी साहू, महापौर श्रीमती हेमा देशमुख एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। इस अवसर पर हमर मयारू राजनांदगांव अभियान का शुभारंभ किया गया। जिसके तहत शहर के विभिन्न स्थानों पर रंग-बिरंगी लाईट लगाकर छत्तीसगढ़ की विभिन्न कला-संस्कृतियों को जोड़ा जाएगा और शहर का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।

 नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया ने नगर निगम राजनांदगांव में विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए 5 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़़ वासियों ने जो सपना देखा था, उसी के अनुरूप शासन कार्य कर रही है। सभी मिलकर छत्तीसगढ़ को देश में सिरमौर बनाएंगे। उन्हांेने कहा कि शासन द्वारा हर वार्ड में पेयजल उपलब्ध हो इसके लिए कार्य किए जा रहे है। इस दिशा में आज लोकार्पित जल शोधन संयंत्र एवं जलागार जिले के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। वहीं सरकार द्वारा गरीब, जरूरतमंद, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, महिला एवं सबके हित के लिए कार्य किया जा रहे हैं। किसानों की कर्ज माफी की गई, वहीं समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के साथ ही किसानों को राजीव गांधी न्याय योजना के तहत प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। जिले में मोर आवास, मोर मकान के तहत 2500 मकान का निर्माण हो चुका है। मोर जमीन, मोर चिन्हारी के तहत 1345 आवास में कार्य हो रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में 47 करोड़ रूपए की लागत से विकास कार्य चल रहे हैं। महापौर एवं पार्षद निधि में शीघ्र ही राशि स्वीकृत की जाएगी। स्लम एरिया में रहने वाले गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के लिए शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत मोबाईल मेडिकल युनिट के माध्यम से स्लम एरिया में जाकर ईलाज एवं दवाईयां निःशुल्क प्रदान की जा रही है। 

 जिले के प्रभारी मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस जल शोधन संयंत्र का लाभ जनता को मिलेगा। शासन ने अपना वचन निभाते हुए किसानों एवं जनसामान्य के हित में कई कार्य किए है। राजीव गांधी न्याय योजना के तहत किसानों को अब तक 4500 करोड़ की प्रोत्साहन राशि तीन किस्तों में दी जा चुकी है। इस योजना के तहत राज्य के 19 लाख किसानों को 5750 करोड़ रूपए की राशि दी जाएगी। सभी लोगों के लिए राशन कार्ड बनाने की योजना प्रारंभ की गई है। किसानों के धान खरीदी एक दिसम्बर से करने की तैयारी की जा रही है। राजनांदगांव जिले में इसके लिए 2048 केन्द्र बनाए गए है। 

 महापौर श्रीमती हेमा देशमुख ने कहा कि गढ़बो नवा छत्तीसगढ़़ के स्वप्नदृष्टा मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़़ को टैंकर मुक्त करना है, इसके लिए हम प्रतिबद्ध है। इसके लिए जल शोधन संयंत्र का निर्माण किया गया है। जिसके माध्यम से शहरवासियों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इस अवसर पर अध्यक्ष छत्तीसगढ़ अंतव्यवसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम श्री धनेश पाटिला, नगर निगम के अध्यक्ष श्री हरिनारायण धकेता, सदस्य छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग श्री हफीज खान, अध्यक्ष राजगामी संपदा न्यास श्री विवेक वासनिक, श्री पद्म कोठारी, श्री कुलबीर छाबड़ा, श्री शाहिद खान, श्री थानेश्वर पाटिला, नगर निगम आयुक्त श्री चंद्रकांत कौशिक, कार्यपालन अभियंता श्री दीपक जोशी एवं अन्य जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

 

 


स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने लोगों को वायु प्रदूषण के खतरों से जागरूक करने पोस्टर का किया विमोचन

स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने लोगों को वायु प्रदूषण के खतरों से जागरूक करने पोस्टर का किया विमोचन

05-Nov-2020

स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा है राज्यव्यापी जागरूकता अभियान

रायपुर. 
 स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने आज सिविल लाइन स्थित अपने शासकीय आवास में स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार वायु प्रदूषण एवं इसके खतरों के बारे में जागरूक करने वाले पोस्टर का विमोचन किया। राज्य शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा संचालित राज्यव्यापी अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए ये पोस्टर तैयार किए गए हैं। इन पोस्टरों के माध्यम से लोगों को वायु प्रदूषण के खतरों, इससे होने वाली बीमारियों और उनसे बचाव के बारे में जागरूक किया जाएगा। 

स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने अभियान की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान कोविड-19 महामारी के दौर में वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर लोगों के लिए खतरनाक और जानलेवा हो सकता है। सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। प्रदूषण का ऊंचा स्तर और कोरोना संक्रमण का संयोजन खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। 

श्री सिंहदेव ने उम्मीद जताई कि यह अभियान राज्य के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचेगा और उन्हें वायु प्रदूषण के खतरों, इससे होने वाली बीमारियों और उनसे बचाव के बारे में जागरूक करेगा। राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र के निदेशक डॉ. समीर गर्ग, जलवायु परिवर्तन के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. कमलेश जैन और स्वास्थ्य विभाग के उप संचालक डॉ. जी. राव भी पोस्टर विमोचन के दौरान मौजूद थे।


सर्दियों में ठंडी तासीर की सब्जियों से परहेज कर रहें सेहतमंद

सर्दियों में ठंडी तासीर की सब्जियों से परहेज कर रहें सेहतमंद

04-Nov-2020

सर्दियों में ठंडी तासीर की सब्जियों से परहेज कर रहें सेहतमंद

 रायपुर, 3 नवंबर 2020। मौसम में बदलवा के साथ नवंबर  में सर्दियाँ शुरु होने लगी  है। ऐसे में खान पान का विशेष ख्याल रखने की जरुरत है। सर्दियों में कौन सी सब्जियों को खाया जाए और कौन सी सब्जियों को भोजन  में कम किया जाए, यह जानना भी जरूरी है।

कोरोना संक्रमण के काल में सेहत को तंदरुस्त बनाए रखने के लिए  जिन सब्जियों की तासीर ठंडी होती है उन्हें खाने  से निकाल दें| भोजन  में सब्जियों का असर सीधे स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसके अलावा इस मौसम में कम एक्टिविटीज के चलते लोग को वजन बढऩे या कब्ज जैसी समस्या भी हो जाती है। लोग जल्दी इस मौसम में खांसी, जुकाम, बुखार, रूखी त्वचा, मुरझाए बाल आदि के शिकार भी हो जाते हैं। इन सब से बचने के लिए खान-पान  का बेहतर होना बेहद जरूरी है।

गले में कफ बनने से हो सकता कोरोना संक्रमण का खतरा

आयुवेर्दिक चिकित्सक डॉ रंजीप कुमार दास का कहना है सर्दियों में कदम रखने का मतलब है आलस भरे माहौल में कदम रखना। ``ऐसे में हमारे दिमाग में सबसे पहले सवाल यह  आता है कि इस मौसम में क्या खाया जाए और क्या नहीं।हर सब्जी की अपनी एक खासियत होती है। कोई भी सब्जी इतनी बुरी नहीं है कि वह किसी भी कारण से सेवन करने के लिए अयोग्य हो। लेकिन रंगीन और मौसमी सब्जियां और फल हमेशा सेहतमंद आहार का हिस्सा बनते हैं।‘’

डॉ. दास ने बताया सर्दियों के सीजन में मूली की सब्जी व भाजी से परहेज करने की जरुरत है। इससे शरीर को ठंड मिलने से कफ की समस्या बढ जाती है। इसका असर फेफड़ों  को प्रभावित करता है। कोरोना वायरस के संक्रमण में फेफड़ों में समस्याएं होने से श्वांस लेने की तकलीफ की शिकायतें भी मिली है। ऐसे में दही, आइसक्रिम और फ्रीज में रखे फलों का सेवन से बचना चाहिए। वहीं सर्दियों में गर्म पानी पीने से कई तरह की समस्याओं से राहत मिलता है।

खीरे व तोरई का सेवन

गर्मी में खीरे को सबसे ज्यादा खाया जाता है क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है। इसके अलावा खीरे में विटामिन ए, फाइबर, फॉलिक एसिड आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन सर्दियों में इसकी जगह लोग गोभी, गाजर आदि को अपने भोजन  में जोड़ लेते हैं। सर्दी में ऐसी चीजों का सेवन करें जिस की तासीर गर्म हो। ठंडी तासीर वाली तोरई को खाने से गर्मियों में पानी की कमी नहीं होती। इसके अलावा इसके अंदर विटामिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है| इनका सेवन सर्दियों में भी किया जा सकता है क्योंकि पानी की कमी को पूरा करते हैं इसलिए ये त्वचा को हाइड्रेट करने में भी मददगार है। इसके अलावा कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। लोग इसे अपने खाने  में जोड़ भी सकते हैं और इनकी जगह  कुछ हरी पत्तेदार सब्जियों को भी जोड़ सकते हैं।

हरी पत्तेदार सब्जियां, नारंगी और पीले रंग की सब्जियां:

डिग्री गर्ल्स कॉलेज की फूड एवं न्यूट्रेशन विभाग की प्रो. अभ्या आर. जोगलेकर बताती हैं ठंड के दिनों में बाजार में सीजनल सब्जियों की बम्पर  आवक होती है। इस लिए फूलगोभी, गाजर, मटर, सेमी, ग्वार फल्ली, बरबट्टी की आवक बाजार में आने लगती है। सर्दियों के मौसम में हरी पत्तेदार सब्जियां सबसे जल्दी खराब होने वाली सब्जियां हैं। पालक और  गोभी में बीटा- कैरोटीन (विटामिन ए का प्रीसेक्टर), विटामिन सी और विटामिन-के से भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह सब्जियां विटामिन, कैल्शियम, कॉपर, आयरन से भी भरपूर होते हैं। डॉ. जोगलेकर बताती हैं गोभी, शलजम इत्यादि जैसी गुणकारी सब्जियां ग्लूकोसाइनोलेट्स के समृद्ध स्रोत बनती हैं। गाजर कैरोटीनॉयड एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हैं। चुकंदर में मौजूद बीटालिन में एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।शकरकंद में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह  एन्थोसाइनिंस की उपस्थिति के कारण एंटीऑक्सिडेंट गुण रखती है। 

 


मुख्यमंत्री श्री बघेल के नरवा कार्यक्रम को मिली बड़ी उपलब्धि: केन्द्र सरकार ने बिलासपुर और सूरजपूर जिले को नेशनल वाटर अवार्ड के लिए किया चयनित

मुख्यमंत्री श्री बघेल के नरवा कार्यक्रम को मिली बड़ी उपलब्धि: केन्द्र सरकार ने बिलासपुर और सूरजपूर जिले को नेशनल वाटर अवार्ड के लिए किया चयनित

28-Oct-2020

’नदी-नालों के पुनरोद्धार में बिलासपुर और जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर जिले ने देश में बनाया प्रथम स्थान’

नवंबर माह में मिलेगा पुरस्कार

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। मुख्यमंत्री के नरवा कार्यक्रम को केन्द्र सरकार पुरस्कृत करेगी। नरवा कार्यक्रम के तहत पिछले दो साल में नदी-नालों के पुनरोद्धार के लिए किए गए कार्यों के लिए प्रदेश के बिलासपुर जिले और जल संरक्षण के कार्यो के लिए सूरजपुर जिले को भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय की ओर से देश के सर्वश्रेष्ठ जिलों में प्रथम स्थान मिला है।    

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      केन्द्र सरकार के जलशक्ति मंत्रालय द्वारा जल स्त्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये दोनों जिलों को सन् 2019 का नेशनल वाटर अवार्ड प्रदान किया जाएगा। इसमें बिलासपुर जिले को ईस्ट अण्डर रिवाइवल ऑफ रिवर कैटेगरी में और सूरजपुर जिले को ईस्ट अण्डर वाटर कन्जर्वेशन कैटेगरी पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। यह पुरस्कार नवंबर माह में प्रदान किया जाएगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने राज्य में नई सरकार के गठन के साथ ही छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी ‘नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी’ ऐला बचाना हे संगवारी के विजन के साथ प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया जीवन प्रदान जो बीड़ा उठाया है। वह अब धरातल पर साकार होता दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजना का एक महत्वपूर्ण घटक नरवा कार्यक्रम के तहत प्रदेश के सभी जिलों में बड़ी संख्या में नदी और नालों के संरक्षण और संवर्धन के कार्य किए जा रहे हैं। इससे पेयजल की उपलब्धता, सिंचाई साधनों का विकास, भू-जल के रिचार्ज के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया जीवन प्रदान हो रहा है।

  नरवा कार्यक्रम के तहत बिलासपुर जिले में विभिन्न नदियों एवं नालों में 47 स्ट्रक्चर्स का निर्माण किया एवं 17.508 मिलियन घन मीटर जल भराव क्षमता का सृजन किया गया तथा 152 किलोमीटर लम्बाई तक नदियों एवं नालों में जलभराव सुनिश्चित किया गया। इसके साथ ही जिले में 49 लघु जलाशय योजनायें निर्माणाधीन हैं जिनसे 48.53 मिलियन घन मीटर जल भराव क्षमता सृजित होगी। इससे 181 किलोमीटर लम्बी नदी एवं नालों में जल भराव होगा।  

बिलासपुर जिले में प्रवाहित होने वाली 13 मुख्य नदियों एवं नालों तथा स्थानीय नालों की कुल लम्बाई 2352.56 किलोमीटर है। इसमें जल संसाधन विभाग ने एक वृहद, एक मध्यम तथा 165 लघु जलाशय एवं 117 एनिकट का निर्माण किया गया है। कुल 1146.90 किलोमीटर नदी नालों का पुनरोद्धार जल संसाधन विभाग ने किया है। इन नदी-नालों में 284 स्ट्रक्चर निर्मित किये गये हैं, जिनमें से खारंग नदी में 13, शिवनाथ में 5, लीलागर में 13, अरपा में 17, सोन नदी में 12, मनियारी नदी में 8, घोंघा नाला में 12, गोकने नाला में 5, तुंगन नाला में 3, नर्मदा नाला में 3, चांपी नाला में 3, एलान नाला में 4, जेवस नाला में 5 और लोकल नालों में 181 लघु जलाशय और एनीकट का निर्माण किया गया है।

इसी तरह सूरजपुर जिले में जल संरक्षण और भूमिगत जल के स्तर को उठाने के लिए डबरी महाभियान कार्यक्रम चलाया गया। जिसमें हितग्राही मूलक डबरी, कूप के अलावा छोटे-बड़े नालों का चिन्हांकन कर उन्हें पुर्नजीवित करने के गैवियन, लुज बोल्डर चेक डेम, व्रश वुड जैसे संरचना का निर्माण किया गया। डबरी महाभियान के तहत पिछले दो सालों में लगभग 7 हजार डबरी और 4200 कूप का निर्माण किया गया है। इसमें लगभग 18 हजार एकड़ भूमि सिंचित हुई और किसान साल भर में दो बार फसल लेने लगे है। इसके अलावा पिछले दो साल में छोटे-बड़े नालों का चिन्हांकन कर उन्हें पुर्नजीवित करने का कार्य शुरू किया गया। इसमें 29 अरदन डेम, 55 गैब्रियन, 57 स्टाप डेम, 10 अंडर ग्राउंड डायक, 4500 एलबीसीडी स्ट्रक्चर तथा 10 हजार कन्टूर ट्रेंच तथा 30 हेक्टेयर में सव गली प्लग जैसी संरचनाओं का निर्माण किया गया। जिससे करीब 12 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई क्षमता का विकास हुआ है एवं भूमिगत जल में वृद्धि हुई है।

 


ये क्या अफसरों की तानाशाही नहीं है? आखिर आम लोगों के बारे में कौन सोचेगा? - प्रकाशपुन्ज पाण्डेय

ये क्या अफसरों की तानाशाही नहीं है? आखिर आम लोगों के बारे में कौन सोचेगा? - प्रकाशपुन्ज पाण्डेय

23-Oct-2020

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समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने मीडिया के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन और नगर निगम, रायपुर का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के देवेंद्र नगर चौराहे के पास लाइन से जो दुकानें बनी हुई हैं और लोग उन दुकानों में सालों से दुकानदारी कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं, उन दुकानों को नगर निगम के जोन क्रमांक 2 के अधिकारियों ने 24 घंटे में खाली करने का आदेश जारी करते हुए नोटिस दिया है जिसमें यह लिखा है कि देवेंद्र नगर चौराहे पर जो दुकानें हैं उनके एवज़ में उन दुकानों के पीछे नवनिर्मित दुकानों में सभी दुकानों को 24 घंटा में खाली करके उसमें शिफ्ट किए जाने की अनिवार्यता है। लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब पीछे बनने वाली दुकानों का काम भी पूरा नहीं हुआ है तो वर्तमान स्थिति में जो दुकानें चल रही हैं और लॉकडाउन से जूझ रहे रायपुर के लोग उसमें जैसे तैसे अपना जीवन यापन कर रहे हैं, वह 24 घंटे में नई दुकानों में कैसे विस्थापित हो जाएंगे? यह सबसे बड़ा प्रश्न है। क्या इन अधिकारियों को इतना भी समझ में नहीं आता है कि किसी कार्य को सुगमता से करने का क्या तरीका होता है? 

मैं स्थानीय विधायक और जोन कमिश्नर के साथ ही नगर निगम कमिश्नर, महापौर, नगरी प्रशासन मंत्री तथा मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन को अपील करता हूं कि कम से कम मानवता को ध्यान में रखते हुए इन अफसरों की तानाशाही पर लगाम देने के निर्देश जारी करें वरना यह लोग मिलकर कांग्रेस के नवनिर्मित सरकार की छवि धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और उन दुकानदारों पर अपनी कृपा दृष्टि सदैव बनाए रखें क्योंकि आप ही छत्तीसगढ़ के रहनुमा हैं। 
 प्रकाशपुन्ज पाण्डेय, राजनीतिक विश्लेषक व समाजसेवी, रायपुर, छत्तीसगढ़ । 
7987394898, 9111777044

 


कोरोना काल में 1,271 महादानियों ने किया स्वैच्छिक रक्त दान

कोरोना काल में 1,271 महादानियों ने किया स्वैच्छिक रक्त दान

20-Oct-2020

रायपुर, 19 अक्टूबर 2020। राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान पखवाड़े में कोरोना काल में भी 1,271  महादानियों ने रक्तदान किया है । पखवाड़े के दौरान प्रदेश के 22 जिला अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया | इस दौरान वैश्विक स्वास्थ्य संकट कोरोना को ध्यान में रखते हुए सभी दिशानिर्देशों का पालन किया गया।

एक अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक शिविर में एकत्रित रक्त को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में संचित किया गया है । ब्लड बैंक से रक्त को जरुरतमंद लोगों की मदद के लिए उपयोग किया जाएगा । राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर में 20, बिलासपुर में 148, महासमुंद में 157, कोंडागांव में 102, दंतेवाड़ा में 33, जगदलपुर में 5, राजनांदगांव में 90, अंबिकापुर में 4, बालोद में 30, कांकेर में 30, कोरिया में 144, बलौदाबाजार में 77, मुंगेली में 34, कर्वधा में 138, कोरबा में 150, बेमेतरा में 3, जशपुर में 1, रायगढ़ में 20, सुकमा में 21 , जांजगीर चांपा में 1, गरियाबंद में 17 और बलरामपुर में 42 लोगों द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान किया गया ।

एड्स कंट्रोल सोसायटी के अतिरिक्त परियोजना संचालक डॉ एसके बिंझवार ने बताया कोरोना संकट के बावजूद रक्तदाताओं ने रक्तदान पखवाड़े में रक्तदान किया। डॉ. बिंझवार ने कहा रक्तदान को समस्त विश्व में सबसे बड़ा दान माना गया है क्योंकि रक्तदान ही है, जो न केवल किसी जरूरतमंद का जीवन बचाता है बल्कि उसकी  जिंदगी बचाकर उस परिवार के जीवन में खुशियों के ढ़ेरों रंग भी भरता है। कल्पना कीजिए कि कोई व्यक्ति रक्त के अभाव में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है और आप एकाएक उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं और आपके द्वारा किए गए रक्तदान से उसकी जिंदगी बच जाती है तो आपको कितनी खुशी होगी।

रक्तदान से आपात कालीन समय में रक्त के अभाव में असमय होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम किया जा सकता है। डॉ. बिंझवार ने बताया, हर साल अक्टूबर महीने में दो सप्ताह तक सभी ब्लड बैंकों में रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते  है। वर्ष 2019 में स्वैच्छिक रक्तदान पखवाड़े के दौरान 2,400 यूनिट रक्त संग्रहित किए गए थे। इस वर्ष कोराना वायरस के बावजूद भी 1,271  यूनिट यानी लगभग 50 फीसदी से ज्यादा रक्त संग्रह हुआ है। जबकि वर्ष 2019 में अक्टूबर महीने में 8,555 यूनिट रक्त संग्रह किए गए थे। उन्होंने कहा दरअसल रक्तदान के महत्व को लेकर किए जा रहे प्रचार-प्रसार के बावजूद आज भी बहुत से लोगों में कुछ गलत धारणाएं विद्यमान हैं, जैसे रक्तदान करने से संक्रमण का खतरा रहता है, शरीर में कमजोरी आती है, बीमारियां शरीर को जकड़ सकती हैं ।

जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और जनपद पंचायत सदस्य उमेश प्रधान अब तक 33 वें बार रक्तदान किए हैं। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान करने के बाद उमेश ने कहा थोड़े से प्रयास से अगर किसी की जान बचती है। तो इससे अच्छा सहयोग और क्या होगा जिससे किसी जरुरतमंद परिवार की मुसिबत के घड़ी में चेहरे पर मुस्कान लौट जाए। उन्होंने कहा किसी की जीवन बचाने के लिए मानवता के खातिर रक्तदान करने के दौरान कोरोना संकट का डर नहीं लगता।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार देश में प्रतिवर्ष एक करोड़ यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ती है।  छत्तीसगढ राज्य की कुल जनसंख्या 2.55 करोड़ के आधार पर 1 प्रतिशत रक्त की आवश्यकता होती है अर्थात 2.55 लाख यूनिट रक्त की प्रतिवर्ष जरूरत पड़ती है। रक्त की आवश्यकता की पूर्ति राज्य के कुल 94 ब्लड बैंकों (31 शासकीय और 63 गैर शासकीय ब्लड बैंक) के माध्यम से किया जाता है | वर्ष 2019-20 में ब्लड बैंकों द्वारा 90 प्रतिशत रक्त यानि कुल 2,31,054 यूनिट रक्त संग्रहण किया गया। वहीं वर्ष 2020-21 (अप्रैल से अगस्त) तक ब्लड बैंकों द्वारा 30 प्रतिशत यानि कुल 67543 यूनिट रक्त संग्रहण किया गया है ।