सरकार की नाकामी मुसलमानों के सर फोड़ने की साजिश

सरकार की नाकामी मुसलमानों के सर फोड़ने की साजिश

05-May-2020

पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस छत्तीसगढ़ मोहम्मद वजीर अंसारी ने अपने एक टेलीफोनिक विशेष बीएड वार्ता में भारत के 85% दलित एकमजोरए पिछड़ी जाति, अति पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक समुदाय में क्रिश्चियन, सिख, बुद्धिस्ट, और मुसलमानों को होशियार रहने की जरूरत पर बल देते हुए कहा है कि लॉकडाउन को 101% पालन करें क्योंकि हमारी एक गलती को केंद्र सरकार और राज्य सरकार अपने किए गए कामों की नाकामी का ठीकरा इन समुदाय के किसी एक पर फोड़ने की साजिश की जा चुकी है जिससे होशियार होने की जरूरत है.  

उन्होंने कहा कि गोदी मीडिया को केंद्र सरकार की विफलता को छुपाने के लिए एक समुदाय से दूसरे समुदाय में नफरत की बीज बोने का काम करा रही है. उन्होंने विशेष तौर पर पूरे भारत के मुसलमानों से अपील किया है कि माहे रमजान के अवसर पर तराबी की नमाज में, भारत के विभिन क्षेत्रों में 10 पारा 20 पारा खत्म हो जाने के बाद शिरनी (मिठाई) वगैरह तकसीम करते हैं ! इसका बिलकुल आयोजन ना की जाए ! मस्जिद के पास अपना बीमार आदमी भेज कर मुसलमानों के सर अपनी नाकामी फोड़ने की कोशिश की जाएगी ! और लॉकडाउन खत्म करके फिर हमारे ऊपर नाकामी की ठीकरा फोड़ने की कोशिश की जाएगी इसलिए लॉकडाउन के खत्म होने के बाद भी कुछ दिनों तक हम अपनी मर्जी से लॉकडाउन रखें

उन्होंने यह भी कहा कि टेस्ट किट किस तरह नाकाम हो गया है ? और यह कोई पूछने वाला नहीं ! 23 मार्च तक पार्लियामेंट चला नमस्ते ट्रम्प के आयोजन में हजारों विदेशी एयरपोर्ट पर उतरे ! भारत के विभिन्न राज्यों में गए क्या उनसे कोरोनावायरस नहीं फैला ? भारत के रेल मंत्रालय 39 लाख टिकट बेच देती है कि 15 अप्रैल से ट्रेन चलेगी स्टेशन के करीब मस्जिद होने पर मस्जिद नजर आती है सूरत शहर में भीड़ के पास मंदिर रहती है तो वहां मंदिर नजर नहीं आती पालघर में मॉब लिचिंग बच्चा चोर के नाम पर होती है यहाँ भी गोदी मीडिया और बीजेपी की आईटी सेल ने मुस्लिम रंग देने का खूब प्रयास किया मुसलामन नहीं मिले पर कम्युनिस्ट पार्टी के बाद कल से कांग्रेस पर ठीकरा फोड़ दिया गया है इस गोदी मीडिया और भाजपा के कुछ सांसदों की वजह से पूरी दुनिया में थू थू हो रहा है भारत के अंदर बुद्धिजीवी सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं थाली-ताली पीटने से और दिया जलाने से वायरस खत्म होगा या स्वास्थ्य इक्विपमेंट बढ़ाने से खत्म होगा ! यह कोई पूछने वाला नहीं उन्होंने सवाल खड़ा किया मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के तकरीबन 60 बड़े अफसर पॉजिटिव कैसे हो गया.

उन्होंने भारतीय मुसलमानों से अपील किया कि एक माह खामोशी के साथ अपने घरों में रहकर रोजा रखें और नमाज पढ़ें लॉकडाउन का 101% पालन करें मुसलमानों की एक गलती पर सिर्फ मुसलमानों का रैपिड टेस्ट करा कर पूरे भारत में प्रसिद्ध कर दिया जाएगा भारत में मुसलमान कोरोना पीड़ित है इसलिए अभी डाटा छुपा कर रखा जा रहा है लॉकडाउन खत्म करके मुसलमानों को मस्जिद के माध्यम से फंसाने की पूरी कोशिश की जाएगी मेरी अपील है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी और रमजान के अवसर पर भी बिलकुल भीड़भाड़ न करें धीरे धीरे मीडिया का मसाला खत्म हो रहा है इसलिए हमें होशियार रहने की जरूरत और पूर्ण रूप से लॉकडाउन का पालन करना है ।


क्या लाकडाउन का डोज़ फायदेमंद है?

क्या लाकडाउन का डोज़ फायदेमंद है?

04-May-2020

कहां से शुरू करूं कुछ समझ में नहीं आता है क्यूंकि जनवरी से शुरू हुआ खतरा जिससे सरकार मार्च में सचेत हुई और अब मई तक आ गये हमलोग। लेकिन हुआ क्या! कुछ नहीं। सिर्फ राजनीति हो रही है। मीडिया प्रचार हो रहा है। जनता भूखों मर रही है। यही सच्चाई है।
देश में कोरोनावायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। संक्रमितों की संख्या 40,000 के करीब पहुंच गई है। 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। सरकार क्या कर रही है? क्यूं नहीं टीवी के माध्यम से जनता को बताते! यह जो अरबों रुपए कोरोना के नाम पर जमा हुए हैं किस क्षेत्र में खर्च हो रहा जनता को बताना चाहिए।
सिर्फ लॉकडाउन के सहारे भारत कोरोना से नहीं जीत सकता है। पिछले 40 दिनों में स्थिति खराब ही हुई है लेकिन हम सच्चाई स्वीकारने को तैयार नहीं हैं। राहुल गांधी यह बात पहले ही कह चुके हैं। प्रत्येक दिन का आकलन करने के बाद यह स्पष्ट है कि सिर्फ लॉकडाउन से हम कोरोना से जीत नहीं सकते। हम जैसे भी आकलन करें, पिछले 40 दिनों में स्थिति खराब ही हुई है, लेकिन हम सच्चाई स्वीकारने और अपनी रणनीति बदलने को तैयार नहीं हैं। दुर्भाग्यवश, इस तरह से 17 मई के बाद भी स्थिति बिगड़ती दिखेगी। इसमें कोई सुधार आने वाला नहीं है। प्रतिदिन संख्या बढ़ती जा रही है।
आज हालात यह हैं कि लोग भूखे मर रहे हैं। लोग पैदल सड़कों पर चलने के लिए मजबूर हैं, फ्री यात्रा के नाम पर किराया लिया जा रहा है, लोगों तक राशन नहीं पहुंच रहा है। जो पहुंच रहा है वह सामाजिक संस्थाओं के द्वारा पहुंचाया जा रहा है। 
करोड़ों लोगों के व्यवसाय, दुकानें, प्रतिष्ठान, संस्थान इत्यादि बंद है। कहां से किराया देंगे? खर्च कैसे चलेगा? घर का क्या होगा? यह सब सवाल जनता को कष्ट पहुंचा रहे हैं। लेकिन सरकार खामोश है।
सच्चाई यही है कि यह मीठी सरकार है जिसकी तासीर कड़वी है। सिर्फ लफ़्फाज़ी और कुछ नहीं। एक भी वक्तव्य सरकार ने शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा, भूख, किसान, अनाज इत्यादि पर नहीं बोला। बस ताली और थाली बजवा कर चल दिए। देश में हत्यायें हो रही, धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है, मीडिया लड़ाने में लगी है।  कोई पैदल चला जा रहा है तो कोई साइकिल से, कहीं सब्जियां मुसलमान हो गई तो कहीं हिंदू। लोग धार्मिक बैनर लगा कर सब्जी बेच रहे। मोहल्लों से जाति देखकर भगाया जा रहा है। विधायक उन्मादी बयान दे रहे। लेकिन क्या मजाल जो बिग बॉस कोई बयान दें।
सब ख़ामोश हैं।
कोरोनावायरस की जिम्मेदारी सरकार की है आज भी मूर्खतापूर्ण कार्य हो रहे हैं। शहर के अंदर जगह जगह कोरोना संक्रमित को रखा जा रहा है इससे तो और फैलेगा। कई शहरों में जिन इलाकों में संक्रमण नहीं था वहां संक्रमितों को रखने से वह इलाका भी संक्रमित हो गया। बगैर किसी प्लान के कार्य किया जा रहा है।
बसें चलीं मगर जनता पैदल नज़र आई।
निःशुल्क ट्रेन चलाई मगर किराया ले लिया।
राशन बंटा मगर जनता भूखी और मांगती नजर आई।
ताली थाली से आभार व्यक्त करवाया लेकिन योद्धा बगैर मास्क और किट के।
दुकान खोलने का ऐलान मगर जनता का निकलना मना।
स्कूल फीस पर सरकार की रोक मगर स्कूल मांगने पर अड़ा।
मतलब सरकार है या क्या है समझ नहीं आता पूरी दुनिया में मज़ाक बन गया है। लोग ट्विटर पर अनफालो कर रहे हैं। शायद इसका एहसास हो गया कि टीवी पर से गायब हो गए और गृहमंत्रालय का सहारा लिया।
अभी भी वक़्त है जाग जाओ। वरना यह समय इतिहास के पन्नों में कटु शब्दों में लिखा जायेगा
देश निराश हैं, जनता निराश हैं।
ईश्वर का सहारा है।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com


विश्व हास्य दिवस- 3 मई 2020 पर विशेष

विश्व हास्य दिवस- 3 मई 2020 पर विशेष

02-May-2020

हास्य कोरोना मुक्ति का सशक्त माध्यम-  ललित गर्ग -


विश्व हास्य दिवस विश्व भर में मई महीने के पहले रविवार को मनाया जाता है और इस वर्ष कोरोना महामारी के बीच जन-जन में व्याप्त तनाव, परेशानी एवं मानसिक असंतुलन के बीच इस दिवस का विशेष महत्व है। हास्य सकारात्मक और शक्तिशाली भावना है जिसमें व्यक्ति को ऊर्जावान और संसार को शांतिपर्ण बनाने के सभी तत्व उपस्थित रहते हैं। विश्व हास्य दिवस का आरंभ संसार में इंसान को स्वस्थ एवं प्रसन्न रखने, शांति की स्थापना और मानवमात्र में भाईचारे और सद्भाव के उद्देश्य से हुई। आज पूरे विश्व में लगभग दस हजार से भी अधिक हास्य क्लब हैं।
इस समय जब अधिकांश विश्व कोरोना कहर के डर से सहमा हुआ है तब हास्य दिवस की अत्यधिक आवश्यकता महसूस होती है। इससे पहले इस दुनिया में इतनी चिन्ता, अनिश्चितता एवं महामारी का प्रकोन कभी नहीं देखा गया। हर व्यक्ति के अंतर आत्मद्वंद्व मचा हुआ है, भय एवं आशंकाएं परिव्याप्त है। ऐसे में हंसी दुनियाभर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकती है। हास्य व्यक्ति के विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित करता है और व्यक्ति में आत्म विश्वास,सकारात्मक ऊर्जा एवं आनन्दित जीवन जीने की इच्छा का संचार करता है। जब व्यक्ति समूह में हंसता है तो यह सकारात्मक ऊर्जा पूरे क्षेत्र में फैल जाता है और क्षेत्र से नकारात्मक ऊर्जा को हटाता है। हास-परिहास पीड़ा का दुश्मन है, निराशा और चिंता का अचूक इलाज और दुःख मुक्ति के लिए रामबाण औषधि है।
आज का जीवन मानव इतिहास का सबसे जटिल आपदा एवं महामारी के प्रकोप का  समय है, आम आदमी कोरोना कहर के तनाव एवं परेशानियों से घिरा हैं, ऐसे जीवन में व्यक्ति के चेहरे से मुस्कान ही गायब हो गयी है, हास्य एवं विनोद से वंचित जीवन मानव के लिये एक जटिल पहेली बनता जा रहा है। जबकि जीवन में विनोद का सर्वाधिक महत्त्व है। हास्य ही एक ऐसा माध्यम है, जो व्यक्ति के तनावपूर्ण जीवन में कुछ क्षणों के लिए खुशी लाता है। हास्य-रस एक बुझे हुए दीपक में तेल की नवऊर्जा का संचार करता है।
हास्य-व्यंग्य का इस महामारी के समय हमारे जीवन में इसलिये भी सर्वाधिक महत्त्व है क्योंकि यह जीवन को स्वस्थ बनाये रखने में यह अहम् भूमिका का निर्वाह करता है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हँसना भी उतना ही जरूरी है जितना श्वास लेना। हास्य जीवन का अनमोल तोहफा है, जो व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने के साथ-साथ समस्याओं से जूझने की ताकत देता है। हास्य जीवन का प्रभात है, शीतकाल की मधुर धूप है जो ग्रीष्म की तपती दुपहरी में सघन छाया का काम करती है। इससे आप तो आनंद पाते ही हैं दूसरों को भी आनंदित करते हैं।

हास्य के बिना न केवल जीवन अधूरा है बल्कि नीरस भी है। जीने की कला का यह सबसे बेहतर रास्ता है, जो हमारे थके हारे मन को ताजगी देता है, जीवन की विडम्बनाओं पर खुल कर हंसने का अवसर देता हैं और कोरोना की जटिल परिस्थितियों से जूझने का मनोबल भी देता है। हास्य बीमारी से लड़ने का सशक्त हथियार है जो हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है। केवल मनुष्य जाति को ही हास्य का आनन्द लेना आता है। यदि जीवन में हास्य न हो तो जीवन भारभूत बन जाता है। इसलिये जितने भी महापुरुष हुए है उन्होंने हास्य को अपने जीवन में महत्वपूर्ण बनाया। हास्य में किसी व्यक्ति, संस्था पर व्यंग्य नहीं होता। किसी का मजाक उड़ाने की भावना नहीं होती, इसलिये इसका आनन्द सभी ठहाका लगाकर उठाते हैं, लेकिन यही हास्य जब व्यंग्य के साथ सम्मिलित होकर निन्दा की घोषणा करने लगता है, तब उपहास बनकर महाभारत का युद्ध करा देता है, इसलिये उपहास किसी का भी करना एक बड़ा गंभीर मामला है। लोक में जिनका उपहास होता है, जरूरी नहीं कि वे उपहास का पात्र हो। आज तक अनुभव यह है कि लोक में जिसका उपहास किया जाता है, वह वास्तव में प्रतिभा-सम्पन्न व्यक्ति होते हंै। प्रभु यीशू से सुकरात तक जाने कितने उदाहरण हैं, जिनसे यह सिद्ध किया जा सकता है कि उपहास सहनेवालों ने विश्व को नये विचार दिये हैं और दुनिया को सुन्दर बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान किया है। दार्शनिक शिवानन्द का कहना है, ‘‘मजाक चतुराई से किया गया, अपमान है।’’ इसलिये भूलकर भी किसी का उपहास मत कीजिये। हमें यह अधिकार नहीं है कि हम किसी का उपहास करें।
दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति है ही नहीं, जो पूर्णतः निर्दोष हो। तब हममें ही अनेक अवगुण हैं, दोष हैं, विकार हैं, तब हम अन्य किसी के अवगुणों को लेकर उसका उपहास कैसे कर सकते हैं? हिन्दी में एक बड़ी अच्छी लोकोक्ति है, ‘सूप हंसे तो हंसे, चलनी भी हंसे जिसमें बहत्तर छेद’। अगर हमंे हंसना ही हो तो अपनी कमजोरियों पर ही हंसना चाहिये। जो व्यक्ति निर्मल हृदय होगा, वह किसी का उपहास कर ही नहीं सकता। उसमें तो अपार करुणा होती है। दुनिया में आज तक उपहास से किसी का सुधार नहीं हुआ है। इसके कारण खून-खराबा अवश्य हुआ है। सामाजिक और राजनीतिक जीवन में हम हर दिन एकदूसरे का उपहास करने सेे होने वाली असामान्य स्थितियों को देखते ही है। द्रोपदी के उपहास के कारण ही महाभारत जैसा भयावह युद्ध हम इतिहास में देखते हैं। हिन्दी में एक लोकोक्ति प्रचलित है, ‘रोग का घर खांसी, झगड़े का घर हांसी’, अर्थात् अनेक रोगों का मूल खांसी है और झगड़ों का मूल कारण किसी की हंसी उड़ाना है। खलील जिब्रान ने सटिक लिखा है, ‘‘उपहास मृत्यु से अधिक कटू है।’
शरीर में पेट और छाती के बीच में एक डायफ्राम होता है, जो हँसते समय धुकधुकी का कार्य करता है। फलस्वरूप पेट, फेफड़े और यकृत की मालिश हो जाती है। हँसने से ऑक्सीजन का संचार अधिक होता है व दूषित वायु बाहर निकलती है। नियमित रूप से खुलकर हँसना शरीर के सभी अवयवों को ताकतवर और पुष्ट करता है व शरीर में रक्त संचार की गति बढ़ जाती है तथा पाचन तंत्र अधिक कुशलता से कार्य करता है, इसलिये कोरोना को परास्त करने के लिये हास्य-योग बहुत उपयोगी है।

लखनऊ के रेलवे स्टेशन से आदमी बाहर निकलता है तो बड़े अक्षरों में लिखे बोर्ड पर नजर टिकती है- ‘मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में हैं।’ यह वाक्य पढ़ते ही यात्रियों के चेहरे पर मुस्कुराहट फैल जाती है। इस एक वाक्य में लखनऊ की जिंदादिली व खुशमिजाजी के दर्शन होते हैं। जीवन में निरोगी रहने के लिए हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए। खाना खाते समय मुस्कुराइए, आपको महसूस होगा कि खाना अब अधिक स्वादिष्ट लग रहा है। थैकर एवं शेक्सपियर जैसे विचारकों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि प्रसन्नचित व्यक्ति अधिक जीता है। मनुष्य की आत्मा की संतुष्टि, शारीरिक स्वस्थता व बुद्धि की स्थिरता को नापने का एक पैमाना है और वह है चेहरे पर खिली प्रसन्नता।
हास्य एक सार्वभौमिक भाषा है। इसमें जाति, धर्म, रंग, लिंग से परे रहकर मानवता को समन्वय करने की क्षमता है। हंसी विभिन्न समुदायों को जोड़कर नए विश्व का निर्माण कर सकता है। यह विचार भले ही काल्पनिक लगता हो, लेकिन लोगों में गहरा विश्वास है कि हंसी ही दुनिया को एकजुट कर सकती है। मनोवैज्ञानिक प्रयोगों से यह स्पष्ट हुआ है कि अधिक हँसने वाले बच्चे अधिक बुद्धिमान होते हैं। हँसना सभी के शारीरिक व मानसिक विकास में अत्यंत सहायक है। जापान के लोग अपने बच्चों को प्रारंभ से ही हँसते रहने की शिक्षा देते हैं।
प्रेषकः

 (ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
मो. 9811051133


टीबी के खिलाफ जंग में कोरोना नहीं बनेगा बाधक, गाइडलाइन्स की गयी जारी

टीबी के खिलाफ जंग में कोरोना नहीं बनेगा बाधक, गाइडलाइन्स की गयी जारी

01-May-2020
* प्रवासी मजदूरों को टीबी जांच एवं उपचार की बेहतर सुविधा मुहैया कराने के निर्देश
* कोविड-19 के ग्रीन, ऑरेंज एवं रेड जोन जिले के मुताबिक टीबी सेवा बहाल करने के निर्देश 
* टीबी मरीजों को 1 से 2 महीने की दी जाएगी दवा 
* टीबी संबंधित जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1800-11-6666 पर करें कॉल 
रायपुर 30 अप्रैल 2020 । कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच टीबी मरीजों को दी जाने वाली सुविधाएँ अब बाधित नहीं होगी. इसको लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से आरएनटीसीपी ( रिवाइज्ड नेशनल टीबी प्रोग्राम) के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. केएस सचदेवा ने राज्य के राज्य स्तरीय टीबी पदाधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखकर विस्तार से दिशानिर्देश दिया है. पत्र में बताया गया है कि कोविड-19 महामारी के बीच भी टीबी की रोकथाम एवं उपचार को लेकर प्रदान की जाने वाली सेवाओं को नियमित रखने की जरूरत है. इसके लिए राज्य एवं जिला स्तर पर कार्यरत संबंधित अधिकारीयों एवं कर्मियों को इस महामारी काल में भी अधिक सतर्क रहकर टीबी संबंधित सेवाओं को सुचारू रखने की जरूरत है. जिसमें टीबी की रोकथाम, डायग्नोसिस, उपचार एवं देखभाल संबंधित सेवाएं शामिल है. साथ ही इस दौरान टीबी के कारण होने वाली अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं पर भी ध्यान देने की जरूरत होगी. पत्र में यह भी बताया गया है कि टीबी प्रबंधकों की यह जिम्मेदारी है कि डायग्नोसिस के साथ टीबी मरीजों की पहचान करने का कार्य भी जारी रखना सुनिश्चित करें. 
हॉस्पिटल ट्रीटमेंट की जगह सामुदायिक आधारित देखभाल अधिक कारगर:
कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार को देखते हुए सामान्य टीबी मरीजों को हॉस्पिटल में उपचार देने की जगह सामुदायिक देखभाल पर अधिक जोर देने की बात कही गयी है. साथ ही टीबी अस्पतालों में ओपीडी भीड़ से कोरोना संक्रमण के बढ़ने की आशंका को देखते हुए टीबी मरीजों को 1 महीने की दवा एवं अत्यधिक गंभीर स्थिति में 2 महीने की एंटी-टीबी दवाएं देने के निर्देश दिए गए हैं. ताकि बेवजह लोगों की अधिक भीड़ अस्पतालों में न हो सके.
कोविड-19 के ग्रीन, ऑरेंज एवं रेड जोन के मुताबिक टीबी सेवा प्रदान करने के निर्देश: 
कोरोना संक्रमण के प्रसार को देखते हुए सभी राज्यों में में ग्रीन, ऑरेंज एवं रेड जोन जिले निर्धारित किये गए हैं. पत्र में बताया गया है कि ग्रीन जोन जिले में टीबी संबंधित सभी सेवाएं सामान्य तरीके से प्रदान की जाए. जिसमें दवाओं का वितरण, सैंपल का ट्रांसपोर्टेशन, मरीजों का आवागमन आदि सेवाएं शामिल हैं. ऑरेंज जोन जिले जिला प्रशासन द्वारा कोविड-19 के संक्रमित क्षेत्र में कुछ नामित अधिकारीयों को छोड़कर शेष कर्मी टीबी संबंधित सेवाओं को प्रदान करने में शामिल रहेंगे. जबकि रेड जोन जिले में जो कोविड-19 एवं राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम दोनों में शामिल हैं, वे यह प्रयास करेंगे कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम किसी भी तरह से कमजोर न हो.
प्रवासी मजदूरों को मिले बेहतर सुविधा:
पत्र में बताया गया हा कि प्रवासी मजदूरों में टीबी से ग्रसित होने की संभावना अधिक है. इसलिए संभावित लोगों जांच की जाए. कोरोना के मद्देनजर राज्य में उनके लिए बनाए गए आइसोलेशन सेंटर में यदि किसी प्रवासी मजदुर में टीबी के संभावित लक्षण हों तो भी उनकी टीबी की जांच की जानी चाहिए. इसके लिए राज्य/जिलों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि सभी प्रवासी मजदूरों में जो भी टीबी से ग्रसित हों, उन्हें समुचित देखभाल एवं दवा मिल सके. 
टोल फ्री नंबर से लें जानकारी: 
टीबी संबंधित जानकारी प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा जारी टोल फ्री नंबर(1800-11-6666) के विषय में आम जागरूकता बढ़ाने की बात कही गयी है.        
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीबी कर्मी बरतें सावधानी:कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार के मद्देनजर टीबी कर्मियों( हेल्थ केयर स्टाफ एवं लेबोरेटरी टेकनीशियन) को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है जो टीबी सैंपल कलेक्शन एवं उसके जांच संबंधित कार्यों में शामिल होते हैं: 
लेबोरेटरी में सेफ्टी मेजर का ऐसे करें अनुपालन: 
* टीबी के सैंपल एकत्रित करने के बाद साबुन एवं पानी से हाथों को अच्छी तरह साफ़ करें 
* लेबोरेटरी एरिया के आस-पास खाना खाने एवं पानी पीने से बचें 
* लेबोरेटरी प्रेमिसेस में अधिक व्यक्तियों के प्रवेश को वर्जित करें. यदि एक से अधिक टेकनीशियन हों तो आपस में पर्याप्त दूरी बनाकर रहें 
* लेबोरेटरी के सतहों को 1% सोडियम हाइपो-क्लोराइट से सैनिटाइज्ड करें
* बायोमेडिकल वेस्ट को राष्ट्रीय गाइडलाइन्स के मुताबिक ही डिस्पोज करें 
टीबी कर्मी व्यक्तिगत सुरक्षा का भी रखें ख्याल: 
* डिस्पोजेबल एन-95 मास्क का करें इस्तेमाल
* डिस्पोजेबल एप्रन/ सर्जिकल गाउन/ नार्मल एप्रन प्लास्टिक शीट के साथ का इस्तेमाल करें एवं इसे हाइपोक्लोराइट से डिसइन्फेक्ट भी करें 
* ग्लव्स एवं डिस्पोजेबल हेड कैप का प्रयोग करें 
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हाँ मैं कांग्रेसी हूँ ,पर क्यूँ हूँ     ?

हाँ मैं कांग्रेसी हूँ ,पर क्यूँ हूँ ?

29-Apr-2020

     कृब्ण देव (केडी) सिंह


 

आज जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद एक नया टकराव हर कांग्रेसी के हृदय और मस्तिष्क में मचा हुआ है .कुछ लोगों का धर्म संकट झ्सलिए है किं एकतरफ कांग्रेस की नीतियों सिद्धान्तों से दशकों का जुड़ाव दूसरा सिंधिया से व्यक्तिगत जुड़ाव निश्चित ही जो सिंधिया को अपना प्रेरक मानते रहे है उनका कठिन समय है ।लेकिन मैं उन पुरखों के विरासतों का उत्तराधिकारी हूँ जिन्होने आजादी की ध्युदध में निस्वार्थ योगदान दिया और कांग्रेस का क्षंड़ा  फहराते रहे।मैं उनका तीसरी पीड़ी हूँ।कांग्रेस से सैद्धांतिक नैतिक जुड़ाव से कांग्रेसी हूँ।।। भले परिस्थितियों वश कहो या अन्य दुकानदार टाइप नेताओ से विचार भिन्नता के चलते  राजनीति और पत्रकारिता मे सक्रिय हूँ। और  अभी तक रहा हूँ ब आगे भी रहुगा।
      मुझे याद है जब मैं रायपुर जो अब छत्तीसगढ़ की राजघानी है लेकिन .1977में मध्यप्रदे१ा का एक प्रमुख शहर था,के शासकीय अभियांत्रिक एंव प्रौद्योगिक महाविद्यालय में अभियांत्रिकी की शिक्षा ग्रहण कर रहा था ।तभी मेरी आजतक की सबसे अधिक प्रिय इंदिराजी की गिरफ्तारी हुई ।मेरे पिता बंगाल रेजीमेंड़ से सेवानिवृत होकर भिलाई इस्पात सयंत्र में कार्यरत थें।उनकी दुर्ग लोक सभा के संसद व पूर्व केन्दीय मंत्री स्व० श्री चन्दुलाल चन्द्राकर से सामाजिक निकटता थी ।उनके नेतृत्व में दुर्ग_ भिलाई में जबरदस्त आंदोलन हुआ ,गिरफ्तारी हुई ।मैं भी रायपुर के शास्त्री चौक में जिला कांग्रेस के द्वारा इन्दिरा जी की गिरफ्तारी के विरोघमें आयोजित घरना और सड़क जाम आन्दोलन में भाग लेने से अपने आपको नहीं रोक सका। इस तरह मेरा ग़ैर विधिवत तरीके से कांग्रेस में प्रवेश आप मान सकते है ।लेकिन विधीवत कांग्रेस की सदस्यता पूर्व मंत्री व रायपुर ग्रामीण के विघायक सत्यनारायण शर्मा जी की पहल  व हस्ताक्षर से1978में ग्रहण किया ।तब से लेकर आज दिनांक तक विधीवत कांग्रेस पार्टी का सक्रिय सदस्य हूँ।
       आज भी मप्र के पुराने कांग्रेसी याद करते है लेकिन कभी समझौता ना करने की जिद्द और सैद्धांतिक दृढ़ता का रक्त वही था ।तो मैं भी उसी राह पर चल बैठा ।अब इसे व्यक्तिगत दुर्भाग्य ना कहकर कांग्रेस का दुर्भाग्य कहूँगा की गुटबाजी,क्षेत्रवादी और जातिवादी राजनीति में उलझी कांग्रेस ने कभी मुक्षे अवसर नहीं दिया।पिछली वार मैने वैशालीनगर से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का टिकिट मांगा था ।मेरे लाख प्रयास के वाद मैं समक्ष गया गया कि  अज्ञात कारणों से मुक्षे टिकट नहीँ मिलेगा और वही हुआ। जिन्हें टिकट मिला वे रिकार्ड मतों से चुनाव हार गये ।जवकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की लहर भी । मराठी में एक कहावत है कि आचवल साहेब आपले सद्गुण कांग्रेस मधे अवगुण आहे यानि आपके सद्गुण कांग्रेस के लिए अवगुण है ।वह भी सभी राजनैतिक सामाजिक संगठनों नेताओ से व सम्बन्धो के बावजूद।
        मेरी सार्वजनिक जीवन यात्रा भी कुछ लोगों से मिलती जुलती है। विश्वविद्यालय में पढ़ने के दौरान एआईएसएफ फिर युवक कांग्रेस सभी मे सांकेतिक पदों पर रहा। तारिक अनवर जी के नेतृत्व में रायपुर व भिलाई में ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस में काम फिर कांग्रेस की सेवा की। राष्ट्रवाद राष्ट्रीयता के ऐतिहासिक परिवार में पैदा हुआ तो राष्ट्रवादी पार्टी तो केवल कांग्रेस ही थी ,तो कांग्रेसी था रहा ,अभी तक हूँ।पर कांग्रेस ने मुझे कभी अवसर  नही दिया ताकि अपनी योग्यता सिद्ध कर सकु ।खैर।मैंने टिकिटों के लिए लीलाएं निकट से देखी ।कांग्रेस का छ्त्तीसगढ़ में व्याप्त जातिगत व परिवार का एकाधिकार और क्षेत्रवाद देखा ।छोटे छोटे पंचों को विधायक बनते देखा पर मुझे कुछ नहीं मिला और न ही कोई चुनाव लड़ने काअवसर दिया गया और न ही किसी तरह की अशासकीय सदस्य के रन्प में किसी भी स्तर पर कोईं पद दिया गया।सभी ने मेहनत कराई। मैंने की भरपूर की पर किसी ने भी आजतक कुछ नहीं दिया और डंके की चोट पर कहता हूँ कि मैंने आजतक एक पैसे का व्यक्तिगत फायदा नहीं उठाया ।हाँ इस दौरान मैंने अपने पिता के सेवानिवृत होने पर जो घन मिला उसे बर्वाद जरूर कर दिया।क्योंकि उस पैसे के सहारे रायपुर में मेरा हाई स्टील एलो३ज कारिस्टग का प्रोजेक्ट को  अन्तिम समयः में  उद्योगमत्री स्व० क्षुमूकलाल भेडिया मे रायपुर के तत्कालिन प्रभावशाली नेता राधेश्याम शर्मा उर्फ राधेश्याम कलाभाटिया के कहने पर रद्द कर दिया ।जबकि मैं उन्ही के साथ राजनीति में था।श्री शर्मा का तर्क था कि चुकि मैं बिहारी हूँ और कालेज का छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुका हूँ ,इसलिए मैं गुण्डा हूँ।जबकि मैं जन्म से ही छ्त्तीसगढ़ी हूँ और मेरे पुरे जिवनकाल में भी कहीं भी किसी भी तरह के अपराघ में लिप्त होने सम्बन्धी किसी भी घारा में कोई अपराघ आज दिनांक तक पंजीबद्ध तक नहीं हआ है।
     सन्दर्भ बस युवा विचार मंच का गठन का भी उल्लेख कर दूँ।मैंने भोपाल में स्व० राजीव गॉधी जी की प्रथम उद्वोघन से प्रेरित होकर युवा विचार मंच,मध्यप्रदेश नामक सामाजिक संगठन का विधीवत पजीयन कराया था।इसका शपथ ग़हण समारोह भोपाल के पत्रकार भवन में रखा गया।३स समारोह के मुख्य अतिथि थे स्व० दाऊ साहव श्री अर्जुन सिंह और कार्यक्रम की अध्यक्ष थे   छत्तीसगढ़ के प्रथम मुरन्य मंत्री अजीत प्रमोदकुमार जोगी जी।कार्यक्रम अपेक्षा से अधिक सफल रहा ।समाचार पत्रों में खुब छपा क्योंकि मैं स्वंम पत्रकारिता से मिलने वाला वेतन से अपना पारिवार का पोषण कर रहा था झ्स कारण राष्ट्रीय समाचार पत्रों ने भी भरपुर स्थान दिया।।प्रदे१ा के युवाओं के जबरदस्त समर्थन तत्कालिन युवा हृदय सम्राट पूर्व केन्द्रीय मत्री सुरेश पचौरी व प्रदे१ा युवक काग्रेस अध्यक्ष तथा तत्कालिन मुरन्यमंत्री व कांग्रेस के महासचिव मोती लाल वोरा जी को
वर्दास्त नही हुआ।इसलिए युवा विचार मच को युवक काग्रेस के समानान्तर व वगावत करने वालों का फर्जी आरोप लगवाकर  तत्कालिन कांग्रेस अध्यक्ष स्व० राजीव गाँधी जी भ्रमित किया और मेरी सामाजिक संस्था को भंग करवाया।मैने संस्था को भंग करते हुए अपनी प्रातिवद्धता कांग्रेस पार्टी और राजीव जी पर सर्वजनिक रूप से तब भी जताया था और आज भी उसपर कायम हूँ।।
                 अक्सर मुक्षपर लोग जाति और बिहार की वात करने और कभी-कभी जातिवाद ब बिहारीवाद करने का आरोप लगा देते हैं। मुक्षे ऐसे लोगों को न तो कुछ कहना है और न ही ऐसे आरोपों का प्रातिवाद  करना है । क्योंकि मुक्षे गर्व है कि मेरा पूर्वजों का गाँव मगघ ( बिहार) के नालन्दा जिले में है और मेरा सम्बन्ध पूर्व कुर्मी जमींनदार पारिवार से ह्रै।मुक्षे इस वात का भी गर्व है कि मेरे दादा और पिता दोनों स्वतंत्रता संग्राम में भागीदार रहे और आजादी मिलने के वाद भी सरकार से किसी भी तरह का लाभ नहीं लिया।मेरा जन्म भिलाई में हुआ है तभा रायपुर के शासकीय अभियांत्रिक एंव प्राद्यौगिक महाविद्यालय से स्नातक अभियन्ता तक की शिक्षा प्राप्त किया व वर्ष 1979-80में महाविद्यालय का प्रथम छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर भारी मतों से पुरे पेनल के साथ विजयी रहा।चलते - चलते यह भी वताना आवथ्यक है कि मेरा सम्बन्ध सनातन कश्यप गोत्री सूर्य वंशी शाक्त क्षत्रिय कुर्मी कुल की धमैला( मराठो की विस्थापित) शाखा के बड़दमनियां प्रतिष्ठित किसान परिवार में हुआ है तथा मेरे पिता  आर्मी से सेवानिवृत होकर भिलाई ३स्पात संयत्र के संस्थापक कर्मचारी रहे
             मुक्षे इस वात का भी कतई अवसाद नही है कि मैं राजीव जी की सहमति के वाद भी मध्यप्रदेश युवक कांग्रेस का अध्यक्ष सिर्फ झ्स लिए नहीं बन पाया क्योकि मेरे विस्द्ध तत्कालिन कांग्रेस के लगभग सभी ब्राम्हण नेता एकजूट होकर विरोघ किया क्योंकि न केवल संयुक्त मध्यप्रदेशका बल्कि छत्तीसगढ़ से पहला कुर्मी जाति का प्रदेश यूवक कांग्रेस अध्यक्ष  होता।खैर। यहाँ यह भी बताता चलू कि मेरे अध्यक्ष नहीं बनने देने की जबरदस्त प्रतिक्रिया वाद में अन्य पिछड़ा वर्ग और विशेषकर मध्यप्रदेश की कुर्मी जाति में हुई। नतीजे में तीन वार के मुख्यमंत्री रहे पं. श्यामाचरण शुक्ल( महासमुन्द) तथा युवा ह्रदयसंम्राट पं सुरेश पचौरी ( भोपाल) से लोक सभा चुनाव भारी मतों से हार गये और रही सही सबक पं सत्य नारायण शर्मा को रायपुर ग्रामीण विघान सभा चुनाव में हार पाकर मिल गया।
        अब सोचता हूँ दुसरों पर जातिवाद और क्षेत्रवादी होने का आरोप लगाने वालों तथा राजनीतिक फायदे क्षुठ और फरेव का सहारा लेकर षडयंत्र करने वालों की असलियत वयान कर दूँ कि आदर्श और सिद्धान्त बघारने बालों में हमाम में कौन नंगा नही है?खैर फिर कभी क्योंकि तब आलेख बहुत लम्बा हो जावेगा ।
                 लेकिन अब मैं भी इस प्रश्न का जवाब ढूंढ रहा हूँ कांग्रेसी तो हूँ पर क्यूँ हूँ ???
*बुघवार बहुमाध्यम समुह 

 


*** साधारण से असाधारण होने की कहानी हैं तीजन बाई *** पत्रकार  विनोद वर्मा

*** साधारण से असाधारण होने की कहानी हैं तीजन बाई *** पत्रकार विनोद वर्मा

27-Apr-2020

यूरोपीय धरती से निकले ओपेरा, बैले, सिम्फ़नी और फ़्लेमिंको विशुद्ध शास्त्रीय हैं. पर बेहद लोकप्रिय हैं. और इनमें से कुछ भी देख रहे हों तो दर्शक सहज रूप से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं, अक्सर भावुक हो जाते हैं और आत्मविभोरता में रोंगटे खड़े हो जाते हैं. ठीक वही अनुभव होता है जब आप तीजन बाई से पंडवानी सुनते हैं. पंडवानी यानी महाभारत के अलग अलग प्रसंगों की संगीतमय प्रस्तुति. एकल नाट्य की तरह.

जिन्होंने अब तक तीजन बाई से आमने सामने बैठकर पंडवानी नहीं सुनी है वो नहीं समझ सकते कि इसका मतलब क्या है. जिन्होंने फ़िल्मों के अलावा ओपेरा, बैले, सिम्फ़नी और फ्लेमिंको का अनुभव नहीं किया है वे इस तुलना को भी नहीं समझ सकते.

तीजन बाई छत्तीसगढ़ की धरती से निकलती हैं और पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. बावजूद इसके कि लोग छत्तीसगढ़ी नहीं जानते लेकिन वे इस अनजान भाषा में गढ़े जा रहे आख्यान को ठीक तरह से समझते हैं. तीजन बाई के हाथ में रखा रंगबिरंगा तंबूरा (या तानपुरा) कभी अर्जुन के रथ में लगा ध्वज बन जाता है, कभी भीम की गदा तो कभी द्रोपदी के रौद्र रूप में उसके हाथ का कोई अदृश्य हथियार. वह दु:शासन के प्रहसन में अलग पात्र की तरह होता है तो दुर्योधन का ज़िक्र आते ही भूमिका बदल लेता है. तीजन बाई दहाड़ रही होती हैं और एकाएक इतनी मुलायमियत के साथ गाने लगती हैं कि सहज विश्वास नहीं होता. जब तीजन बाई मंच पर होती हैं तो भाषा गौण हो जाती है. भावभंगिमा या प्रहसन हावी हो जाता है. कभी कोई शिकायत नहीं करता कि जो तीजन बाई ने कहा वह समझ में नहीं आया.

तीजन बाई साधारण से असाधारण हो जाने की कहानी है. महिला होकर भी कापालिक शैली में पंडवानी करती हुईं वे विद्रोह की भी प्रतिनिधि हो जाती हैं और दुनिया भर में घूम-घूमकर पंडवानी गाने के बाद, अनगिनत पुरस्कारों और सम्मानों के बाद, लौटकर वे एक सरल साधारण छत्तीसगढ़ी स्त्री भी हो जाती हैं.

आज उनका जन्मदिन है. वे दीर्घायु हों, स्वस्थ रहें और हमारे आने वाली पीढ़ी के लिए भी पंडवानी गाती रहें. शुभकामनाएं. 


यूनिसेफ द्वारा प्रदेश में कोविड-19 की रोकथाम के उपायों और मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की सराहना

यूनिसेफ द्वारा प्रदेश में कोविड-19 की रोकथाम के उपायों और मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की सराहना

26-Apr-2020

 

कहा- छत्तीसगढ़ सरकार का आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए यह नवाचार माडल पूरे देश के लिए बनेगा उदाहरण

 

TNIS

यूनिसेफ की भारत की प्रमुख सुश्री यास्मिन अली हक ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रदेश में कोविड-19 से बचाव और रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों और मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में प्रदेश के विकास के लिए किए जा रहे कार्यो की सराहना की है। सुश्री हक ने छत्तीसगढ़ के आंगनबाड़ी के बच्चों के समग्र विकास के लिए महिला बाल विकास विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से तैयार किए गए ‘चकमक अभियान‘ और ‘सजग कार्यक्रम‘ के शुभारंभ के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के कार्यो की सराहना की। वे नई दिल्ली में अपने घर से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुई।
     सुश्री हक ने ’चकमक अभियान’ और ’सजग परवरिश कार्यक्रम’ की सराहना करते हुए कहा कि इन दोनों कार्यक्रमों से समाज को बच्चों के साथ घरों में ही व्यस्त रखने और बच्चों को रचनात्मक गतिविधियां सिखाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही साथ ’सजग परवरिश कार्यक्रम’ से घरों पर ही बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास की प्रक्रिया को पारिवारिक सदस्यों की देख-रेख में बढ़ावा मिलेगा। आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ का यह नवाचार माॅडल पूरे देश के लिए उदाहरण होगा।
    सुश्री हक ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से कोविड-19 के प्रसार को रोकने में सफलता हासिल हुई है। प्रदेश के 81 प्रतिशत जिले ग्रीन जोन में हैं। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा 24 लाख हितग्राहियों को घर-घर जाकर पोषण आहार वितरण, बच्चों के लिए रेडी-टू-ईट सामग्री और मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान में सूखा राशन के वितरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे महिलाओं एवं बच्चों को पोषण की पूर्ति में सहायता मिली है। सुश्री हक ने गरीब परिवारों को लाॅकडाउन के दौरान 3 माह का निःशुल्क राशन का वितरण, मनरेगा के माध्यम से 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार दिलाने, आश्रय शिविरों के माध्यम से जरूरतमंदों के रहने खाने की व्यवस्था जैसे राज्य सरकार के कार्याें की सराहना की। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ छत्तीसगढ़ सरकार के एक विश्वसनीय सहयोगी के रूप में साथ मिलकर काम करेगी।

 


कोरोना  की जंग जितने मे छत्तीसगढ़ राज्य अव्वल बना

कोरोना की जंग जितने मे छत्तीसगढ़ राज्य अव्वल बना

25-Apr-2020

एम् एच जकारिया एडिटर इन चीफ़

कोरोना की जंग जितने मे छत्तीसगढ़ राज्य अव्वल बना , और इसका पूरा श्रेय जाता है मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार को जिनके ढृढ़ संकल्प से ये सब कुछ सम्भव हो सका !, भारत सरकार के स्वास्थ मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में कोरोना संक्रमित जो कि 35 से अधिक पाए गए थे  उनमे से 3 को छोड़कर बाकि सरे स्वस्थ हो कर अपने-अपने  घर वापस चले गए है ! उसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में जिस प्रकार से सतर्कता और सावधानी शासन के द्वारा बरती जा रही है, उससे ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण नगण्य  है, और कोरोना  के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के रूप में मनरेगा को प्राथमिकता से पुरे छत्तीसगढ़  में नियमो के साथ  प्रारंभ कर  ग्रामीणों में रोजगार के अवसर पहले से और बेहतर बढे है  ये  रिजर्व  बैंक की रिपोर्ट  बता रही है

2020   कोरोना रोकथाम में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों को ना केवल देश भर में सराहना मिली, बल्कि आज रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि देश व्यापी लॉकडाउन के बावजूद छत्तीसगढ़ जेसे राज्य में आर्थिक क्षेत्र में तेज़ी से वृद्धि देखी गयी जो कि देश में सुखद वातावरण बनाता है।

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, पिछले तीन हफ्तों में, घरेलू विकास पर कुछ आंकड़े जारी किए गए हैं, लेकिन वे अर्थव्यवस्था की स्थिति का व्यापक मूल्यांकन करने के लिए बहुत निराश करते है। इन सबके बावजूद छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, ओडिशा, असम, कर्नाटक और जैसे राज्य तालाबंदी के बावजूद बुवाई गतिविधि में अग्रणी हैं। खाद्यान्न और बागवानी के उत्पादन में कृषि और संबद्ध गतिविधियों के सभी कार्य निरन्तर तेज़ी बनी रहने के कारण इन राज्यों में देश के अन्य विकसित राज्यों के मुक़ाबले आर्थिक विकास की दर काफ़ी अच्छी है।

छत्तीसगढ़ के बाहर अन्य राज्यों में 90 हजार 418 श्रमिकों की

समस्याओं का त्वरित समाधान

मुख्यमंत्री की पहल और निर्देश पर दो लाख से अधिक श्रमिकों को मिली राहत

आज पुरे देश में यूपी बिहार के मज़दूर महाराष्ट्र दिल्ली हरियाणा से भूखे पैदल अपने घर लौटने पर मज़बूर हुआ है वही लॉकडाउन से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण प्रदेश एवं प्रदेश से बाहर फंसे हुए दो लाख से अधिक जरूरतमंद श्रमिकों को मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल एवं निर्देश पर तत्काल राहत पहंुचायी गई है। उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण से बचाव के लिए देश भर में किये गये लॉकडाउन के दौरान मुख्यमंत्री श्री बघेल के निर्देशन पर श्रम विभाग द्वारा स्थापित हेल्पलाईन सहित अन्य स्त्रोतों से मिली सूचना के आधार पर राज्य में तथा राज्य के बाहर अब तक करीब दो लाख एक हजार 998 जरूरतमंद श्रमिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया गया है।

 छत्तीसगढ़ के 90 हजार 418 प्रवासी श्रमिक जो देश के 21 राज्यों और 4 केन्द्र शासित प्रदेशों में होने की सूचना मिली उनके द्वारा बताई गई समस्याओं का त्वरित निदान करते हुए उनके लिए  भोजन, राशन, नगद, नियोजकों से वेतन तथा रहने आदि की व्यवस्था जुटायी गई है। इसके साथ ही श्रम विभाग के अधिकारियों का दल गठित कर विभिन्न औद्योगिक संस्थाओं, नियोजकों एवं प्रबंधकों से समन्वय कर (राशन एवं नगद) आदि की व्यवस्था भी की जा रही है। लॉकडाउन के द्वितीय चरण में 21 अप्रैल से शासन द्वारा छूट प्रदत्त गतिविधियों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 13 हजार 907 श्रमिकों को पुनः कार्य उपलब्ध कराया गया है।

 

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर कोटा से छात्रों को लाने 75 बस रवाना

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर आज राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड से राजस्थान के कोटा में लॉकडाउन के दौरान फंसे छात्र-छात्राओं को लाने 75 बसों को रवाना किया गया। बसों के साथ एम्बुलेंस सहित डॉक्टरों का दल भी भेजा गया है, ताकि  कोटा से आने वाले छात्रों का स्वास्थ्य परीक्षण पश्चात उन्हें बसों से लाया जा सके। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा है कि रायपुर से कोटा की दूरी बहुत अधिक है। इसलिए छात्र-छात्राओं के भोजन व्यवस्था का भी ध्यान रखा गया है। साथ में एम्बुलेंस रहेगा तो रास्ते में अगर किसी की तबीयत खराब होती है तो तत्काल समुचित इलाज सहित देखरेख हो सकेगी। छात्रों को रास्ते में किसी तरह की परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया है।  

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गरीब परिवारों को जून माह का भी चावल मिलेगा निःशुल्क

राशनकार्डधारियों को जून माह के चावल के साथ प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तीन माह के अतिरिक्त चावल का होगा निःशुल्क वितरण

 

उचित मूल्य दुकानों से एक मई से प्रांरभ होगा वितरण

 

रायपुर : छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की रोकथाम के प्रबंधन के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के गरीब परिवारों को जून माह का भी चावल निःशुल्क प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अप्रैल और मई माह का चावल भी निःशुल्क प्रदान किया गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन कार्डधारियों को जून माह के चावल के साथ प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के हितग्राहियों को अप्रैल से जून तीन माह का अतिरिक्त चावल भी निःशुल्क वितरित किया जाएगा। खाद्यान्न का वितरण उचित मूल्य दुकानों से 01 मई से प्रारंभ किया जाएगा।

 

 छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अंत्योदय, प्राथमिकता, निःशक्तजन, एकल निराश्रित और अन्नपूर्णा राशन कार्डधारियों को जून माह का चावल निःशुल्क वितरित किया जाएगा। इसके साथ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत प्रचलित राशन कार्डधारियों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना तथा छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत प्रचलित अंत्योदय एवं प्राथमिकता श्रेणी के राशन कार्डधारियों को नियमित आबंटन के साथ अप्रैल से जून तीन माह के अतिरिक्त चावल का निःशुल्क वितरण एक मई से प्रारंभ किया जाएगा। सामान्य राशन कार्डाें में पूर्व से प्रचलित पात्रता एवं मूल्य के अनुसार चावल वितरित किया जाएगा।

 

 प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंत्योदय एवं प्राथमिकता श्रेणी के राशन कार्डधारियों को अप्रैल से जून 3 माह का अतिरिक्त चावल का वितरण 01 मई से प्रारंभ किया जाएगा। अन्नपूर्णा, एकल निराश्रित, निःशक्तजन राशन कार्ड में जून महीने के नियमित मासिक आबंटन का निःशुल्क वितरण किया जाएगा। राज्य सरकार के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण आयुक्त द्वारा इस संबंध में आदेश जारी करते हुए उचित मूल्य दुकानों में वितरण के समय राशन कार्डवार आबंटन की पात्रता की सूची का प्रदर्शन अनिवार्य रूप से करने तथा सभी राशन कार्डधारियों को उनकी पात्रता के बारे में सूचित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

 

आदेश के तहत् राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) अंत्योदय राशनकार्ड में प्रत्येक सदस्य को तीन माह की अतिरिक्त पात्रता 15 किलो प्रति सदस्य होगी (5 किलो प्रति सदस्य प्रति माह)। इस तरह से अंत्योदय राशनकार्डधारियों को जून महीने में चावल वितरण की मात्रा इस प्रकार होगी- एक सदस्य वाले कार्ड को जून महीने का नियमित आबंटन 35 किलो के साथ अप्रैल से जून तक अतिरिक्त चावल 15 किलो के साथ जून महीने में कुल 50 किलो चावल का निःशुल्क वितरण होगा। इसी तरह दो सदस्य वाले कार्ड को नियमित आबंटन 35 किलो के साथ तीन महीने का अतिरिक्त चावल 30 किलो के साथ कुल 65 किलो, तीन सदस्य वाले कार्ड को 35 किलो नियमित आबंटन के साथ 45 किलो अतिरिक्त आबंटन को मिला कर 80 किलो, चार सदस्य वाले कार्ड को 35 किलो नियमित आबंटन के साथ 60 किलो अतिरिक्त आबंटन को मिला कर 95 किलो और 5 सदस्य वाले कार्ड पर 35 किलो नियमित आबंटन के साथ 75 किलो अतिरिक्त आबंटन को मिला कर 110 किलो चावल निःशुल्क दिया जाएगा।

 

प्राथमिकता राशनकार्डधारियों को जून महीने में चावल वितरण की मात्रा के तहत् 5 से अधिक सदस्य वाले राशनकार्ड में तीन माह का अतिरिक्त आबंटन 9 किलो प्रति सदस्य होगा (3 किलो प्रति सदस्य प्रति माह) इस तरह से एक सदस्य वाले राशनकार्ड को जून महीने में 10 किलो, दो सदस्य वाले राशनकार्ड को 20 किलो, तीन सदस्य वाले राशनकार्ड को 35 किलो, चार सदस्य वाले राशनकार्ड को 35 किलो नियमित आबंटन के साथ 15 किलो अतिरिक्त आबंटन मिलाकर 50 किलो, पांच सदस्य वाले राशनकार्ड को 35 किलो नियमित आबंटन के साथ 45 किलो अतिरिक्त आबंटन मिकाकर 80 किलो और छह सदस्य वाले राशनकार्ड को 42 किलो नियमित आबंटन के साथ 54 किलो अतिरिक्त आबंटन मिलाकर 96 किलो चावल जून महीने में निःशुल्क दिया जाएगा। अन्नपूर्णा, एकल निराश्रित, निःशक्त जन राशनकार्ड में जून महीने के नियमित मासिक आबंटन का निःशुक्ल वितरण किया जाएगा। सामान्य राशनकार्डों में पूर्व से प्रचलित पात्रता एवं निर्धारित मूल्य के अनुसार वितरण किया जाएगा।

लॉकडाउन में मुख्यमंत्री ने कराई स्कूली बच्चों की घर पर ही पढने की व्यवस्था

पढ़ई तंुहर दुआर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने स्कूली बच्चों को घर पर ही रहकर पढ़ने के लिए देश के सबसे बड़े ऑनलाइन पोर्टल में से एक ’पढ़ई तंुहर दुआर’ का 7 अप्रैल को अपने निवास कार्यालय में शुभारंभ किया था। इस पोर्टल के जरिए लाखों छात्र बिना किसी शुल्क के ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे। लॉकडाउन के साथ ही आने वाले समय में बच्चों की निरंतर पढ़ाई में यह कार्यक्रम बहुत उपयोगी साबित होगा। इस ई-लर्निंग प्लेटफार्म में ऑनलाइन इंटरएक्टिव कक्षाओं के जरिए शिक्षक और बच्चे अपने-अपने घरों से ही वीडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। यह छत्तीसगढ़ राज्य के छात्रों सहित हिन्दी भाषा राज्यों के लिए भी बहुत लाभदायक होगा। स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट सीजीस्कूलडॉटइन ;बहेबीववसण्पदद्ध पर कक्षा पहलीं से 10वीं तक विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के संसाधनों को इसमें उपलब्ध कराया गया है। आगे और इसका विस्तार किया जा रहा है, जिसके तहत शीघ्र ही कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं को यह सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

कोरोना की जंग जितने मे छत्तीसगढ़ राज्य अव्वल बना , और इसका पूरा श्रेय जाता है मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार को जिनके ढृढ़ संकल्प से ये सब कुछ सम्भव हो सका !, भारत सरकार के स्वास्थ मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में कोरोना संक्रमित जो कि 35 से अधिक पाए गए थे  उनमे से 3 को छोड़कर बाकि सरे स्वस्थ हो कर अपने-अपने  घर वापस चले गए है ! उसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में जिस प्रकार से सतर्कता और सावधानी शासन के द्वारा बरती जा रही है, उससे ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण नगण्य  है, और कोरोना  के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के रूप में मनरेगा को प्राथमिकता से पुरे छत्तीसगढ़  में नियमो के साथ  प्रारंभ कर  ग्रामीणों में रोजगार के अवसर पहले से और बेहतर बढे है  ये  रिजर्व  बैंक की रिपोर्ट  बता रही है

2020। कोरोना रोकथाम में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों को ना केवल देश भर में सराहना मिली, बल्कि आज रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि देश व्यापी लॉकडाउन के बावजूद छत्तीसगढ़ जेसे राज्य में आर्थिक क्षेत्र में तेज़ी से वृद्धि देखी गयी जो कि देश में सुखद वातावरण बनाता है।

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, पिछले तीन हफ्तों में, घरेलू विकास पर कुछ आंकड़े जारी किए गए हैं, लेकिन वे अर्थव्यवस्था की स्थिति का व्यापक मूल्यांकन करने के लिए बहुत निराश करते है। इन सबके बावजूद छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, ओडिशा, असम, कर्नाटक और जैसे राज्य तालाबंदी के बावजूद बुवाई गतिविधि में अग्रणी हैं। खाद्यान्न और बागवानी के उत्पादन में कृषि और संबद्ध गतिविधियों के सभी कार्य निरन्तर तेज़ी बनी रहने के कारण इन राज्यों में देश के अन्य विकसित राज्यों के मुक़ाबले आर्थिक विकास की दर काफ़ी अच्छी है।

 


'हर्ड इम्यूनिटी यानी सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता' : गिरीश मालवीय

'हर्ड इम्यूनिटी यानी सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता' : गिरीश मालवीय

24-Apr-2020

हर्ड इम्यूनिटी एक ऐसा शब्द है जिसे आज से महीने भर पहले कही बोल दिया जाता तो पढ़े लिखे लोग तलवारें भांजते हुए निकल पड़ते थे कि कोरोना से लड़ने के लिए आपको इसके अलावा कुछ नही सूझा..... आज उसी शब्द चर्चा हो रही है बड़े बड़े लेख छप रहे हैं कुछ विशेषज्ञ भी अब स्वीकृति में सिर हिलाने लगे है........

कल एक बड़ी खबर आयी है अमेरिका स्थित सेंटर फॉर डिसीज, डायनामिक्स एंड इकोनॉमिक पॉलिसी (CDDEP) ने 20 अप्रैल को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि 'सितंबर तक भारत में कोविड -19 संक्रमण के कुल 111 करोड़ मामले हो सकते है, ये लगातार लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के बाद भी संभव है'

इसलिए हमें इस शब्द को सही तरह से समझने की आज जरूरत है आखिर क्या होती हैं हर्ड इम्युनिटी? लेख लंबा जरूर है लेकिन यह सब्जेक्ट ही इतना बड़ा है कि कम शब्दों में ठीक से समझ नही आ पाएगा

देखिए कोरोना से लड़ने के तीन ही उपाय है पहला है लॉक डाउन।........ आप जिसे लॉक डाउन कहते हैं वैज्ञानिक इसे अग्रेसिव सप्रेशन (Aggressive Suppression) कहते हैं, लोगो को अलग थलग कर देना लॉक डाउन का मूल तत्व है इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग की बात की जाती हैं  इस प्रक्रिया में संक्रमण की रफ्तार को धीमा कर दिया जाता है फिर इसके जरिए इस वायरस का संक्रमण रोका जाता है। साथ ही देश में स्वास्थ्य सुविधाओं की उचित व्यवस्था की जाती है, लेकिन अग्रेसिव सेपरेशन सफल जब होगा जब अग्रेसिव टेस्टिंग होगी  विदेशों में यही किया जा रहा है और भारत के हाल अग्रेसिव टेस्टिंग के विषय मे क्या है बताने की जरूरत नही है ओर हमे यह भी सोचना है कि अग्रेसिव टेस्टिंग नही हो रही है तो लॉक डाउन जैसे आर्थिक रूप से महंगे उपायों को कई महीनों तक कैसे जारी रखा जा सकता  है।......

दूसरा तरीका है टीका यानी वैक्सीन, एक कामयाब वैक्सीन को बनाना और उसे हर आदमी को लगाना यह अभी भविष्य की गर्त में है इसलिए अब जल्दी से तीसरे उपाय पर आते हैं.........

तीसरा उपाय है हर्ड इम्यूनिटी
यदि यह  वायरस फैलता रहता है, तो निश्चित ही है अंततः बहुत से लोग संक्रमित हो जाएंगे और वे अपने शरीर मे वायरस के विरुद्ध एंटीबॉडी विकसित कर लेंगे  जब बड़ी आबादी में कोरोना का संक्रमण होगा तो उनमे वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता का भी विकास होगा तो इसका प्रकोप अपने आप ही खत्म हो जाएगा क्योंकि वायरस के लिये एक अतिसंवेदनशील मेजबान को खोजना कठिन और कठिन हो जाता है। इस घटना को हर्ड इम्यूनिटी के रूप में जाना जाता है।

हर्ड इम्युनिटी एक प्रोसेस या एक प्रकिया है जिसे अपना कर किसी समाज या समूह में रोग के फैलने की शृंखला को तोड़ा जा सकता है और इस प्रकार रोग को उन लोगों तक पहुँचाने से रोका जा सकता है, जिन्हें इससे सबसे अधिक खतरा हो या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) कमजोर है।........

सबसे पहले ब्रिटिश सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने  COVID-19 से निपटने के लिये हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity) की बात करना शुरु की थी, ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता मैट हैनकॉक ने कहा भी है कि हर्ड इम्युनिटी किसी भी महामारी का स्वाभाविक बाय प्रोडक्ट है. यानी महामारी के फैलने के साथ ही अपने आप हर्ड इम्युनिटी विकसित हो जाती है.

यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है कुछ डॉक्टर मित्रों से चर्चा हुई तो उन्होंने कहा कि यह सम्भव है कि हम जानते भी नही हो और इस वायरस का अटैक हम पर हो भी चुका हो और जा भी चुका हो और हमारे शरीर मे इसके विरुद्ध ऐंटीबॉडी मौजूद हो,..............

दुनिया मे कुछ देशों ने इसे लागू करने का प्रयास भी किया है ब्रिटेन ने तो सिर्फ बात की लेकिन स्वीडन हर्ड इम्युनिटी पर काम कर रहा है. स्वीडन अपने देश में हर्ड इम्युनिटी लागू कर रहा है. इसका तरीका ये है कि लोगों को इन्फ़ेक्शन हो और उनका शरीर उसके ख़िलाफ़ इम्यूनिटी डेवलप कर ले..........

कोरोना संक्रमण से ग्रसित हर व्यक्ति दो से ज्यादा लोगों को इंफेक्शन फैलाता है। इसे वैज्ञानिक कोरोना वायरस का रिप्रोडक्शन नंबर यानी R0 कहते है  (इसे R-Naught पढ़ा जाता है)जो  2 और 2.5 के बीच है।

कोरोना वायरस अभी 1 से 2,....2 से 4,.....4 से 8 और 8 से 16 लोगों को संक्रमित कर रहा है। लेकिन अगर दुनिया की 50 प्रतिशत जनसंख्या इम्यून हो जाए तो यह इंफेक्शन एक व्यक्ति से एक में ही जाएगा।  स्थिति में कोरोना वायरस का रिप्रोडक्शन नंबर 2 से घटकर 1 रह जाएगा।......

अगर यह R0 एक से भी कम हो जाए तो कोरोना वायरस का आउटब्रेक खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा। इसी वजह से वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर दुनिया की 60 प्रतिशत आबादी इम्यून हो जाए तो यह वायरस धीरे-धीरे खुद ही खत्म हो जाएगा।........

अब बड़ा सवाल उठता है कि क्या ऐसा पहले किया जा चुका है?... यह स्ट्रेटेजी कितनी कामयाब रहेगी ?....

हर्ड इम्यूनिटी का सबसे बेहतरीन उदाहरण है पोलियो। दुनिया की लगभग पूरी आबादी पोलियो से इम्यून हो चुकी है। जब किसी जगह पर लोगों को किस भयानक बीमारी से लड़ने के लिए बड़ी संख्या में वैक्सीन दी जाती है तो इससे बाकी लोगों में उस महामारी के फैलने का खतरा कम हो जाता है. जिन्हें उस महामारी की वैक्सीन नहीं लगी है या फिर वैक्सीन नहीं दी जा सकती, उन्हें भी यह बीमारी अपनी चपेट में कम ले पाती है. खसरे की भी कुछ ऐसी ही कहानी है .......2015 में आया जीका वायरस जो  एक मच्छर जनित बीमारी थी जो जन्म संबंधी असामान्यताओं की कड़ी से उत्पन्न हुआ था, 2017 में उसका प्रकोप कम हो गया ब्राजील के अध्ययन में रक्त के नमूनों की जाँच करके पाया गया कि सल्वाडोर के उत्तरपूर्वी समुद्र तट शहर में 63% आबादी पहले से ही जीका के संपर्क में आ गयी थी शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि हर्ड इम्युनिटी ने उस जीका वायरस के प्रकोप को तोड़ दिया.......

भारत मे इसके सफल सिद्ध होने की संभावना इसलिए ज्यादा है क्योंकि भारत मे युवा आबादी ज्यादा है ज्यादातर को वायरस से संक्रमित होने के बावजूद अस्पताल नहीं ले जाना पड़ेगा और उनकी मौत नहीं होगी।

दूसरी बात यह कि यहाँ अधिकतर लोगों को बीसीजी के टीके लगे हुए है भारतीयों की इम्युनिटी पश्चिमी देशों के मुकाबले स्ट्रांग है. आंकड़े बताते हैं कि जिन देशों में मलेरिया फैल चुका है. वहां कोविड-19 का असर या तो नहीं है. या फिर बेहद कम है.

पीपल्स हेल्थ मूवमेंट के ग्लोबल को-ऑर्डिनेटर टी. सुंदररमण कहते है, 'एक तरह से आप यह कह रहे हैं कि हम (60 वर्ष से कम उम्र के) लोगों को संक्रमित होने और फिर बीमारी से खुद ही ठीक होने देंगे। हम सिर्फ बीमार लोगों का ही ध्यान रखेंगे।' हर्ड इम्यूनिटी की यही पॉलिसी है।' इस प्रोसेस में उन्हीं लोगों को शामिल किया जा सकता है जिनके अंदर इम्युनिटी का निरंतर विकास हो सकता है

लेकिन फिर भी भारत मे हर्ड इम्युनिटी जैसे कदम बहुत सोच समझ कर उठाने होंगे पर फिलहाल इसके अलावा कोई चारा भी नजर नही आ रहा........ 
द्वारा सै कासिम लखनऊ 


Ramzan 2020: कर्नाटक और केरल में हुआ चांद का दीदार, यहाँ कल से रखा जाएगा रोजा

Ramzan 2020: कर्नाटक और केरल में हुआ चांद का दीदार, यहाँ कल से रखा जाएगा रोजा

24-Apr-2020

रमजान के पाक महीने की शुरुआत कल से होने वाली है। 23 अप्रैल की शाम को भारत में केरल राज्य में चांद का दीदार हो गया। चांद दिखने के साथ ही कल से केरल में रमजान का पवित्र महीनेा शुरु हो गया है। कल यानी शुक्रवार को रोजे का पहला दिन होगा। कल से मुस्लिम धर्म के लोग रोजे से रहेंगे। पवित्र रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग तकरीबन 900 मिनट तक बिना खाए पीए रहते हैं।

शुक्रवार को रमजान के रोजे शुरुआत होगी। वहीं इस बार कोरोना वायरस और लाकडाउन के चलते रमजान की सभी इबादतें घर में ही होंगी। देश के उलेमाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओ ने लोगों से अपील की है कि वो इस बार रमजान में घरों में ही इबादतें करेंकेरल-कर्नाटक में कल से रमजान

मुस्लिमों के पवित्र महीने रमजान की शुरुआत 24 अप्रैल से हो रही है। कर्नाटक और केरल में कल से रोजा रखा जाएगा। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक गुरुवार को केरल के कप्पड़ मेंं और कर्नाटक के उडुपी में चांद दिखा। चांद दिखने के अगले दिन से रोजे की शुरुआत होती है। केरल स्थित कोझिकोड के कप्पड में चांद नजर आ गया है। कल से यहां रोजे की शुरुआत होगी जो 24-25 मई तक चलेगा। कल के सेहरी का समय सुबह 4 बजकर 22 मिनट का है तो वहीं इफ्तार का वक्त शाम के 6 बजकर 53 मिनट है।15 घंटे नौ मिनट का होगा पहला रोजा इस बार पहला रोजे 15 घंटे 9 मिनट से ज्यादा वक्त के होगा। वहीं अंतिम रोजा 15 घंटे एक मिनट अवधि का होगा। पहला रोजा सुबह 04.15 बजे शुरू होगा जो शाम को 6.54 बजे खत्म होगा। लोगों को इस बार घरों में रहकर इबादत करने की सलाह दी गई है। वहीं लोगों को सामूहिक रूप से रोजा इफ्तार के कार्यक्रम नहीं करने की सलाह दी गई है।

15 घंटे नौ मिनट का होगा पहला रोजा इस बार पहला रोजे 15 घंटे 9 मिनट से ज्यादा वक्त के होगा। वहीं अंतिम रोजा 15 घंटे एक मिनट अवधि का होगा। पहला रोजा सुबह 04.15 बजे शुरू होगा जो शाम को 6.54 बजे खत्म होगा। लोगों को इस बार घरों में रहकर इबादत करने की सलाह दी गई है। वहीं लोगों को सामूहिक रूप से रोजा इफ्तार के कार्यक्रम नहीं करने की सलाह दी गई है।


मुख्य मार्ग पर भीड़ देखकर जिलाधिकारी रुके तथा सब्जी विक्रेता एवं भीड़ को तत्काल मौके से हटवाया

मुख्य मार्ग पर भीड़ देखकर जिलाधिकारी रुके तथा सब्जी विक्रेता एवं भीड़ को तत्काल मौके से हटवाया

23-Apr-2020

जिलाधिकारी श्री आन्जनेय कुमार सिंह सुबह करीब 7:00 बजे अचानक बिलासपुर पहुंचे। अपने भ्रमण कार्यक्रम के दौरान मुल्ला खेड़ा में मुख्य मार्ग पर भीड़ देखकर जिलाधिकारी रुके तथा सब्जी विक्रेता एवं भीड़ को तत्काल मौके से हटवाया। इसके बाद जिलाधिकारी बिलासपुर पहुंचे जहां भारी भीड़ देखकर जिलाधिकारी ने सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए उपजिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी एवं इंस्पेक्टर को जमकर फटकार लगाई  निर्धारित पॉइंट पर सेक्टर मजिस्ट्रेट भी उपस्थित नहीं पाए गए जिस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सेक्टर मजिस्ट्रेटों की लापरवाही से लॉक डाउन के दौरान दिए गए निर्देशों के अनुपालन में समस्या हो रही है इसलिए लापरवाह सेक्टर मजिस्ट्रेट एवं अन्य अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित न कराने व दुकानों को बंद कराने में लापरवाही के  साथ ही निर्धारित स्थलों पर गैर हाज़िर रहने पर बिलासपुर में तैनात किए गए सभी सेक्टर मजिस्ट्रेटों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए भी निर्देशित किया। वह लगभग डेढ़ घंटे लगातार बिलासपुर नगर का भ्रमण करते रहे तथा इस दौरान उन्हें भारी संख्या में दुकानें खुली मिली तथा भीड़ भी जमा हुई थी जिस पर जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी को निर्देशित किया कि वे सभी खुली दुकानों एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ना करने वाले पेट्रोल पम्पों को चिन्हित करते हुए भारी जुर्माना लगाना सुनिश्चित कराएं।भ्रमण के दौरान उन्होंने 100 से अधिक वाहनों का चालान करवाया तथा बैंक के बाहर लगी भीड़ को देखकर जिलाधिकारी लोगों के पास पहुंचे तथा कहा कि प्रशासन द्वारा तिथि वार बैंक खाता नंबर के अंतिम अंकों का निर्धारण किया गया है वे लोग ही बैंकों में आकर पैसा निकालें।उन्होंने लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ भी पढ़ाया तथा कहा कि आमजन यथासंभव घर में ही रहे बाहर न निकले। लॉक डाउन आम जनता की सुरक्षा के लिए ही लगाया गया है ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के साथ ही जनजीवन को इस बीमारी से प्रभावित होने से बचाया जा सके। होम डिलीवरी न कराए जाने पर भी जिलाधिकारी नाराज हुए तथा कहा कि तत्काल पूरी मार्केट बंद कराते हुए होम डिलीवरी की कार्यवाही को सर्वोच्च प्राथमिकता से लागू कराएं अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
निःशुल्क प्रकाशनार्थ
जिला सूचना अधिकारी, रामपुर

 


अर्नब गोस्वामी और उनके जैसे पत्रकारों की पत्रकारिता पर लगे रोक।

अर्नब गोस्वामी और उनके जैसे पत्रकारों की पत्रकारिता पर लगे रोक।

23-Apr-2020

देश का दुर्भाग्य है कि शहीदों के परिवारों पर अभद्र टिप्पणी की जाये और देश तोड़ने और लूटने वालों की जय जयकार की जाये और सरकार खामोश रहे।
अफसोस इस बात का नहीं कि अर्नब जैसे पत्रकार देश की एकता और अखंडता को खंडित कर रहे हैं। अफसोस इस बात का है कि सरकार इसको संज्ञान में क्यों नहीं ले रही है? हालांकि अर्नब गोस्वामी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है लेकिन वह देश की जनता की तरफ से है जबकि प्रधान सेवक को इस पर बोलना चाहिए। जब एक सौ तीस करोड़ जनता सरकार की एक आवाज पर थाली बजा सकती है, दिया जला सकती है तो क्या एक आवाज पर यह देश तोड़ने वाली हरकतें नहीं बंद हो सकती हैं? 
इस वीडियो को देखने के बाद मन बहुत दुखी हुआ, शायद राजनीति और पत्रकारिता का इतना घिनौना चेहरा पहले कभी नहीं देखा गया।
मैं भी एक पत्रकार हूं लेकिन क्या पत्रकार और खासकर किसी बड़े चैनल के पत्रकार को इतनी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिये? सबसे पुरानी राष्ट्रीय राजनैतिक पार्टी की अध्यक्ष का नाम लेकर ऐसी बेहूदा टिप्पणी क्या उचित है? बड़े चैनल के सम्पादक होने का यह मतलब नहीं है कि आप मेज पीट के और ताली बजा के किसी के सम्मान के साथ खेलें! क्या इस अर्नब गोस्वामी को देश का ठेका दिया गया है कि माहौल बिगाड़ने की कोशिश करें।
क्या सत्ताधारी दल का आशीर्वाद मिला है या सत्ताधारी पार्टी ने दूध की मक्खी की तरह निकाल दिया है और चापलूसी में लगे हैं या फिर चैनल की टीआरपी बढ़ाने के लिये सम्मानित एवं शहीद परिवार के लोगों को गाली दे रहे हैं?
कुछ भी हो सकता है मगर अर्नब को पत्रकार और इस कृत्य को पत्रकारिता नहीं कहा जा सकता है।
 
अब समय आ गया है कि पत्रकारिता को बचाने के लिए स्वयं ईमानदार पत्रकारों को आगे आना होगा और भ्रष्ट पत्रकारों के खिलाफ मोर्चा खोलना होगा। इसमें पत्रकार शामिल हों। बड़े और छोटे का सवाल नहीं है। बड़ा पत्रकार वही है जिसके कलम में ईमानदार और पाक लहू हो बिकी हुई स्याही नहीं।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com

 


कोरोना से है बचना तो धूम्रपान सेदूर रहो !

कोरोना से है बचना तो धूम्रपान सेदूर रहो !

22-Apr-2020

- हाथ और होठों के संपर्क से संक्रमण फैलने का खतरा 

- रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी करता है कमजोर 

- धूम्रपान का सीधा असर श्‍वसन प्रणाली व फेफड़ों पर 

 

रायपुर, 21अप्रैल 2020 । कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की चपेट में आने से बचने के लिए बचना है तो धूम्रपान से तौबा करने में ही भलाई है । बीड़ी-सिगरेट संक्रमित हो सकते हैं और उँगलियों व होंठों के संपर्क में आकर वह आसानी से संक्रमण फैला सकते हैं । हालाँकि सरकार ने सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा रखी है, फिर भी लोग चोरी-चुपके इसका इस्तेमाल कर अपनी जान को जोखिम में डालने से बाज नहीं आ रहे हैं । इन उत्पादों का सेवन कर इधर-उधर थूकने से भी संक्रमण का खतरा था, इसलिए सरकार ने खुले में थूकने पर भी रोक लगा रखी है, इसका उल्लंघन करने पर दण्ड का प्रावधान भी किया गया है।

 

होम क्‍वारेंटाइन कोरोना सर्विलेंस टीम के प्रभारी सदस्य व उपसंचालक स्‍वास्‍थ्‍य विभाग डॉ. अखिलेश त्रिपाठी का कहना है  धूम्रपान से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिसके चलते कोरोना जैसे वायरस सबसे पहले ऐसे लोगों को ही अपनी चपेट में लेते हैं। इसके अलावा बीमारी की चपेट में आने पर ऐसे लोगों के इलाज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वालों को कोरोना का खतरा कई गुना अधिक रहता है।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी बाकायदा दिशा-निर्देश जारी कर धूम्रपान से कोरोना की जद में आने के खतरे के बारे में सचेत कर चुका है।  

 

नेशनल टोबैको कण्ट्रोल प्रोग्राम (एनटीसीपी)के नोडल अधिकारी डॉ. कमलेश जैन ने बताया बीड़ी-सिगरेट ही नहीं बल्कि अन्य तम्बाकू उत्पादों के साथ ही हुक्का, सिगार, ई-सिगरेट भी कोरोना वायरस के संक्रमण को फैला सकते हैं, इसलिए अपने साथ ही अपनों की सुरक्षा के लिए इनसे छुटकारा पाने में ही भलाई है । कोरोना का वायरस छींकने, खांसने और थूकने से निकलने वाली बूंदों के जरिये एक दूसरे को संक्रमित करता है । लोगों को छूने से परहेज यानी सोशल डिसटेंसिंग के पालन करने के दौरान पान व पान मसाला खाकर थूकने से वायरस बाहर आने से संक्रमण का खतरा समुदाय को हो सकता है।

 

डॉ जैन ने बताया, गुटखा पान मसाला के बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के बाद लगातार विभाग इसके बिक्री की शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी कर रहा है। प्रतिबंध के बावजूद लोग 4 से 5 गुना महंगे दाम पर गुटका पान मसाला खरीद कर सेवन कर अपने परिवार व समाज को खतरे में डाल रहे हैं। महामारी एक्‍ट-1897 के तहत सर्वाजनिक रुप से कहीं भी इसके सेवन व उल्‍लंघन करते पाए जाने पर धारा-188 के तहत जुर्माना व दंड का प्रावधान हैं। लोगों की जागरुकता ही कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए कारगर साबित हो सकता है। कांकेर कलेक्‍टर ने आगामी 3 मई तक लॉकडाडन के पालन करते हुए संपूर्ण जिले में गुटखा, तंबाकू एवं गुड़ाकू के क्रय-विक्रय को तत्‍काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया है। वहीं रायपुर कलेक्‍टर डॉ.एस भारतीय दासन ने सडक पर थूकने वालों क खिलाफ केस दर्ज करने का फैसला लिया है।

 

इसीलिए प्रदेश में खुले में थूकने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल कर दिया गया है । इसके अलावा धूम्रपान से श्वसन प्रणाली, सांस की नली और फेफड़ों को भारी नुकसान पहुँचता है। धूम्रपान व प्रभाव हमारे शरीर के गले के लंग्‍स और फेफड़े को प्रभावित करता है। ये हमारे शरीर के रोगप्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है। यही कारण है कि फेफड़ों की कोशिकाएं कमजोर होने से संक्रमण से लड़ने की क्षमता अपने आप कम हो जाती है । वर्तमान में कोविद -19 का वायरस गले के लंग्‍स को प्रभावित कर गले में खराब पैदा करता है। वहीं आगे वायरस श्‍वसन नली को संक्रमित कर सांस लेने में परेशानी खड़ा करता है।


लॉक डाउन के पीछे सरकार का प्लान क्या था?....

लॉक डाउन के पीछे सरकार का प्लान क्या था?....

21-Apr-2020

लॉक डाउन के पीछे सरकार का प्लान क्या था?......लॉक डाउन के पीछे सरकार का प्लान यह था कि सब व्यक्ति अपने अपने घरों में रहेंगे जिसे कोरोना का लक्षण दिखेगा वह व्यक्ति हस्पताल आ जाएगा या हम उसे ढूंढ लेंगे और उसका इलाज हो जाएगा उसके साथ के लोगो को क्वारंटाइन में रखेंगे और दूसरों में यह बीमारी नही फैलेगी इस तरह से बीमारी खत्म हो जाएगी?.....मैं गलत तो नही कह रहा हूँ न?......लगभग सभी पढ़ने वाले उपरोक्त तर्क से सहमत होंगे........

अब कल जो ICMR ने कहा है वो समझ लीजिए ......कल दोपहर में NDTV पर एक इंटरव्यू दिखाया गया उसमे ICMR के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ रमन गंगाखेड़कर ने NDTV संवाददाता से बात करते हुए कहा कि 'भारत में कोरोना वायरस के 80 प्रतिशत मरीज बिना लक्षणों वाले हैं।'

यह इतनी बड़ी बात थी कि मुझे अपने कानो पर  विश्वास नहीं हुआ शाम को जब बीबीसी पर देखा तो उसमे यह हेडलाइन थी तब मुझे लगा कि मैंने ठीक ही सुना था रात एक वेबसाइट पर इस बातचीत की डिटेल मिली .......... रमन गंगाखेड़कर ने बताया है कि देश के हर राज्य में लगभग यही स्थिति है NDTV से बात करते हुए उन्होंने कहा, "80 प्रतिशत मामले बिना लक्षणों वाले हैं। हमारी सबसे बड़ी चिंता उनका पता लगाना है। संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों के अलावा ऐसे मरीजों की पहचान करने का कोई और तरीका नहीं है।"उन्होने कहा कि 'ऐसे मरीजों की पहचान बेहद मुश्किल हैं।'

अब आखिरी वाक्य पर गौर कीजिए 'ऐसे मरीजों की पहचान बेहद मुश्किल हैं।'..... बात तो ठीक ही है जिसमें कोई सिम्टम्स ही नही उसको कैसे रेक्टिफाई किया जाए?
यानी लॉक डाउन की पूरी थ्योरी अब सिर के बल खड़ी हो जाती है.......

दो दिन पहले एक प्रमुख न्यूज़ चैनल ने भी दस राज्यों में बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों की खबर दी है  एक वेबसाइट के अनुसार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी कह रहे हैं कि , राज्य में कोरोना के 70 प्रतिशत मरीज बिना लक्षणों वाले हैं। अन्य राज्यों की बात करें तो कर्नाटक में 60 प्रतिशत, पंजाब में 75 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 75 प्रतिशत और असम में 82 प्रतिशत मरीज बिना लक्षणों वाले हैं।

बिना लक्षणों वाले ज्यादातर मरीज 20-45 आयु वर्ग के हैं। एक डॉक्टर कह रहे है कि ज्यादातर मिलेनियल्स यानी युवा साइलेंट कैरियर्स होते हैं, क्योंकि छोटे बच्चों और बूढ़ों की अपेक्षा इनका इम्यून सिस्टम स्ट्रॉन्ग होता है.

कल एक मित्र की वाल पर खबर थी कि मुम्बई में सिर्फ एक दिन की रिपोर्ट में 53 मीडियाकर्मी कोरोना पॉज़िटिव मिले है कोरोना संक्रमित मीडियाकर्मियों में टीवी रिपोर्टर, कैमरामैन और प्रिंट फोटोग्राफर शामिल हैं. चौकाने वाली बात यह है कि '99% लोगों में कोई लक्षण ही नहीं दिखा' इस बात को मै कन्फर्म नही कर पाया कि क्या वास्तव में 99 प्रतिशत को कोई लक्षण नही दिख रहे है लेकिन जैसा कि एक वेबसाइट पर उध्दव ठाकरे का बयान है उसके हिसाब से यह लगभग ठीक ही होगा

दो दिन पहले की खबरे तलाशेंगे तो दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का बयान भी मिल जाएगा कि कई लोगों की हिस्ट्री नही मिल रही है। कई लोगों को खांसी, बुखार या सांस की समस्या नहीं थी, मगर जांच में कोरोना पॉजिटिव पाए गए, अरविंद केजरीवाल ने भी इस रविवार को कहा है 18 अप्रैल को हमारे पास 736 केसों के टेस्ट की रिपोर्ट आई, उनमें 186 कोरोना के मरीज निकले। ये मरीज एसिम्प्टमैटिक (जिसमें किसी प्रकार का लक्षण न हो) हैं। इनमें खांसी, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ जैसे कोई लक्षण भी नहीं थे, लेकिन जांच में ये पॉजिटिव मिले हैं। दिल्ली में ऐसे बहुत लोग कोरोना लेकर घूम रहे हैं। यह स्थिति बहुत ही खतरनाक है।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने तो यहाँ तक कह दिया था कि जिस तरह से दिल्ली में बिना लक्षण वाले मरीज बढ़े हैं, उसे देखते हुए कोरोना के कम्युनिटी स्प्रेडिंग (समुदाय में फैलने) की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है

क्या हमारे यहाँ कोई यह अनोखी घटना घट रही है? नही!... बिल्कुल भी नही........

जब अमेरिका वुहान से अपने नागरिकों को वापस लाया तो ये जानने के लिए कि कहीं वो कोरोना वायरस की चपेट में तो नहीं हैं. उनका मेडिकल टेस्ट करवाया गया एक यूएस सिटिजन का कैलिफोर्निया के सैन डियागो के एक अस्पताल में टेस्ट हुआ. नतीजा निगेटिव आया. कुछ दिन बाद दोबारा उस व्यक्ति का टेस्ट हुआ. इस बार पता चला कि उसके शरीर में कोरोना वायरस है. उसी दौरान जापान से भी इस तरह के दो मामले सामने आए. शुरुआती टेस्ट में कोरोना वायरस निगेटिव नतीजा आया, बाद के टेस्ट में पॉजिटिव........ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि ये तीनों कोरोना वायरस के ‘साइलेंट कैरियर’ थे. इनके शरीर में मौजूद कोरोना वायरस का पता उन टेस्टिंग मेथड से नहीं हो सका, जो एक महीने पहले तक आमतौर पर यूएस में कोरोना का पता लगाने के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं............

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीजेज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन डायरेक्टर रार्बट रेडफील्ड के अनुसार कोरोना से संक्रमित 25 प्रतिशत लोग न लक्षण लिए होते हैं और न बीमार होते हैं फिर भी दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं। मतलब वायरस शरीर में बैठा-पहुंचा हुआ है और वह एसिम्प्टमैटिक याकि लक्षणरहित है .........अभी भी अमेरिका के मैसाचुसेट्स में 82 ऐसे मामले आए हैं जहां लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण ना दिखने के बावजूद उन्हें इस महामारी से पीड़ित पाया गया. वहीं कई स्टडीज से ये भी पता चला है कि बिना लक्षण वाले लोग ज्यादा संक्रमण फैला रहे हैं........

ऐसे मरीजों के बारे में सबसे पहली विस्तृत जांच रिपोर्ट चीन में प्रकाशित हुई है. कुछ दिन पहले चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन की रिपोर्ट आई थी जिसमे 6764 एसिम्प्टोमैटिक मरीजों की जांच पर आधारित रिपोर्ट तैयार की गई थी. इनमें सिर्फ 1297 मरीजों में ही बाद में बीमारी के लक्षण दिखे.
यानी कोरोना पॉजिटिव मरीजों में सिर्फ 20 फीसदी मरीजों में ही बाद में बीमारी का लक्षण दिखा, बाकी मरीजों में ऐसा कोई लक्षण नजर नहीं आया

ठीक यही पैटर्न ICMR के रिसर्च में सामने आया है यहाँ भी 80 प्रतिशत मामले बिना लक्षणों वाले हैं।

इस खबर को आप सकारात्मक तरीके से भी ले सकते हैं और नकारात्मक तरीके से भी, यह आपके विवेक के ऊपर है........ मुझे ऐसा लगता है कि हमे 'लड़ना' 'हराना' जैसे वाक्यों का प्रयोग छोड़ देना चाहिए ..... यह वायरस कही जा नही रहा है.... यह खत्म हो जाएगा ऐसा दावा किसी वैज्ञानिक ने नहीं किया हो सकता है कि धीरे धीरे यह वायरस हमारे शरीर के साथ अनुकूलित हो जाए.........कोई भी परजीवी उसको खत्म नही करता जिसके शरीर मे वह रहता हो वह दोनों परस्पर एक बॉडी में साथ रहने का अनुकूलन प्राप्त कर लेते हैं यह कॉमन सेंस की बात है .........बहुत संभव है कि यह हो भी गया हो बहुत संभव है कि भारत की बड़ी आबादी हर्ड इम्युनिटी को प्राप्त कर गयी हो जिस हिसाब से दूसरे देशों की तुलना में भारत मे कम मौतें हुई है उससे यह उम्मीद बंधती है, .............लेकिन एक बात तो तय मानिए कि इन नए तथ्यों के संदर्भ में  कोविड -19 के बारे में हमे एक बार हमे नए सिरे से पुनर्विचार करना होगा....
गरीश मालवीय 
द्वारा सै क़ासिम 


महाराष्ट्र में साधुओं की भीड़ द्वारा पुलिस के सामने मोब्लिंचिंग

महाराष्ट्र में साधुओं की भीड़ द्वारा पुलिस के सामने मोब्लिंचिंग

20-Apr-2020

महाराष्ट्र के पालघर में उन्मादी भीड ...

मुम्बई  पालघर , महाराष्ट्र में साधुओं की भीड़ द्वारा पुलिस के सामने मोब्लिंचिंग कर दी गयी । बूढ़े घायल साधु की जिस तरह से लोग लाठियों से पीट -- पीट कर हत्या कर रहे थे वह इंसानों के वहशी बना दिये जाने की कहानी है । भीड़ को न पुलिस का डर था न ही मारने वाले लोगों में इंसानों के प्रति कोई दया भावना । लोगों में इतनी हिंसा और नफरत फैलाने के सबसे बड़े जिम्मेदार वही लोग हैं जो इस हत्या से तिलमिला रहे हैं । मोदी सरकार, मीडिया, बीजेपी आईटी सेल और भगुआ गैंग इसके लिए जिम्मेदार हैं जिन्होंने देश में इस तरह की वहशी भीड़ का निर्माण किया है । 

     मोब्लिंचिंग करने वाले हत्यारों को बीजेपी द्वारा महिमामण्डित किया जाता रहा । हत्यारों को सम्मानित कर उनके सम्मान में रैली निकाले जाने लगी और हत्यारोपी अपराधी ( आतंकी ) के शव को तिरेंगे में लपेटकर सम्मानित किया गया क्योंकि इन लोगों ने मुस्लिम व्यक्तियों की लिंचिंग ( हत्या ) की थी । इखलाख की हत्या से शुरू हुई यह परंपरा पालघर तक पहुँची है जिसमें इन छः सालों में 100 से अधिक लोगों की हत्या हो चुकी है । मोदी सरकार इसके ख़िलाफ़ कोई कठोर कानून बनाने के स्थान पर कुछ राज्य सरकारों द्वारा बनाये गए कानून को भी मंजूरी नहीं दे रही है । 

     भीड़तंत्र के निर्माण और भीड़ द्वारा किये जाने वाले ( अ) न्याय को समर्थन देने से देश की न्यायव्यवस्था खत्म हो गयी है । मारो -- मारो का शोर कभी भी न्यायसंगत नहीं हो सकता । मुस्लिमों और दलितों की हत्या हो या डॉक्टरों की पिटाई , चारों ओर हिंसा करने वाली भीड़ बनाई गई है जिससे राजनीतिक लाभ तो कुछ समय तक मोदी जी को मिल सकता है लेकिन जिस तरह का भारत वे बना रहे हैं वह रोज अव्यवस्था की गहरी खाई में गिरता जा रहा है ।

    मुसलमानों के खिलाफ चलाये जाने वाले प्रोपेगैंडा और हिंसा से न केवल सभी लोग प्रभावित होंगे बल्कि इसका असर भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ना तय है जिसे हम निरन्तर इन वर्षों में लिखते आये हैं । खाड़ी देशों से इसकी प्रतिक्रिया शुरू हो चुकी है । कुवैत सरकार ने भारत में मुसलमानों के साथ हो रहे अन्याय का विरोध किया है । खबरों के अनुसार इस मुद्दे को UNHRC में ले जाये जाने की तैयारी की जा रही है । इसके बहुत गहरे प्रभाव भारत पर पड़ने तय हैं । खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीय भारत भेजे जा सकते हैं और भारत पर मुस्लिम देश व्यापार प्रतिबन्ध भी लगा सकते हैं । ध्यान रहे , पेट्रोलियम के लिए भारत खाड़ी देशों पर ही निर्भर है ।

      मोदी सरकार इजराइल और अमेरिका के अनुसार चल रही है जिसके गंभीर नतीजे देश को झेलने पड़ेंगे । इजराइल छोटा सा देश है जिसकी स्थिति भारत की तुलना में बहुत अधिक अलग है । उसका विवाद मुस्लिम देशों से ही नहीं चल रहा है बल्कि उसके अंदर बड़ी आबादी मुसलमानों की भी नहीं रहती जबकि भारत बहुधर्मी और बहुजातीय देश है जिसके पाकिस्तान को छोड़कर मुस्लिम देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबन्ध रहे हैं। एक पाकिस्तान को काउंटर करने के लिए 50 से अधिक मुस्लिम देशों से संबन्ध खराब करना मूर्खता नहीं तो और क्या है ?

       दूसरा देश है अमेरिका जिसकी चमचागिरी मोदी सरकार लगातार कर रही है , जो अपने हितों के लिए किसी भी हद तक चला जाता है । वह देशों को बर्बाद करने का सुपर एक्सपर्ट देश है । भारत में वह तब तक हिन्तुत्ववादी चरमपंथ को बढ़ाएगा जब तक देश गृहयुद्ध की चपेट में न आ जाये उसके बाद अपना सैन्य ठिकाना भारत के अंदर बना सकता है जैसे उसने अफगानिस्तान या अन्य देशों में किया है । 

      मोदीजी ने देर से ही सही कोरोना को किसी जाति, समुदाय, धर्म या सीमा से जोड़ने के खिलाफ ट्वीट किया है जो पर्याप्त नहीं है । अभी भी समय है मोदीजी देश के प्रधानमंत्री होने के नाते, देश के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हितों को समझते हुए साम्प्रदायिक नफरत के खिलाफ कठोर कार्यवाही कीजिये और भीड़तंत्र को खत्म करने के उपाय कीजिये । 

    मोब्लिंचिंग किसी भी व्यक्ति की हो वह अस्वीकार्य है इसके खिलाफ केंद्र सरकार तुरन्त कठोर कानून बनाये और ऐसी भीड़ के खिलाफ कठोर कार्यवाह सुनिश्चित करे ।
...
: कमल कुमार जी  का लेख :
 syed Quasim

 

 


रायपुर : छत्तीसगढ़ कोरोना वायरस महामारी के नियंत्रण में पूरे देश के समक्ष बना उदाहरण: श्री बघेल

रायपुर : छत्तीसगढ़ कोरोना वायरस महामारी के नियंत्रण में पूरे देश के समक्ष बना उदाहरण: श्री बघेल

19-Apr-2020

मुख्यमंत्री ने पिछले एक माह से प्रदेशवासियों के अनुशासन, त्याग और समर्पण को सराहा

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को किया सम्बोधित: पिछले एक माह से दिए जा रहे सहयोग के लिए व्यक्त किया आभार

मुख्यमंत्री ने कहा रोजमर्रा के कामों में बरते पूरी सावधानी: प्रदेश में कोरोना संक्रमण नियंत्रित लेकिन खतरा अभी टला नहीं

 

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज प्रदेश की जनता को सम्बोधित करते हुए कहा है कि प्रदेशवासियों ने कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव और रोकथाम के लिए पिछले एक माह से जिस अनुशासन, संबल और संकट से निपटने की जिजीविषा दिखाई हैं, वह विलक्षण हैं।
      मुख्यमंत्री बघेल ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज से ठीक एक माह पहले मैंने कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए इसी तरह आपको संबोधित करते हुए आप सबका सहयोग मांगा था। आपको सच कहूंगा। जब पहली बार कोरोना वायरस से बचाव के बारे में आपसे सहयोग की अपील कर रहा था तो मेरे मन में कई आशंकाएं थी। इतने बड़े प्रदेश के करोड़ो लोगों से अपना व्यवसाय, जीवन पद्धति, आचरण आदि बदलने को कहना और उसका पालन कराना कोई आसान काम नहीं था लेकिन आप सबने जो अनुशासन, संबल और संकट से निपटने की जिजीविषा दिखाई हैं, वो विलक्षण हैं।
 ऽ  श्री बघेल ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ कोरोना वायरस महामारी के नियंत्रण में पूरे देश के समक्ष उदाहरण बना है तो इसके मूल में आप लोगों का अपने परिवार, अपने राज्य के लोगों के प्रति त्याग और समर्पण का भाव हैं। मैं इन सबके लिए आपका दिल से धन्यवाद करता हूँ। मैं हमेशा इस सहयोग के लिये आपका ऋणी रहूँगा। मैं धन्यवाद करना चाहूंगा सभी चिकित्सकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, जिला  और पुलिस प्रशासन, खाद्य, महिला बाल विकास, नगर निगमों, नगर पालिकाओं, जनसंपर्क विभाग के समस्त कर्मचारियों का भी जिन्होंने 24 घण्टे इस संकट से निपटने के लिए कार्य किया। मैं मीडिया के बंधुओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों का भी आभारी रहूँगा जिन्होंने हर पल हमारा सहयोग किया।
 ऽ मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे राज्य में अगर हम कोरोना संक्रमण को नियंत्रण में रख पाये हैं, तो उसमें सबसे बड़ी भूमिका हमारे गांवों की रही हैं। छत्तीसगढ़, गांवों का प्रदेश हैं और हमारे ग्रामीणों ने स्वेच्छा से अपने गांवों में जिस तरह फिजिकल डिस्टेंसिंग और साफ-सफाई का पालन किया वह अदभुद है। मैं हाथ जोड़ कर उनका आभार व्यक्त करता हूँ। आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि आज छत्तीसगढ़ की प्रशंसा पूरे देश में हो रही हैं। रिजर्व बैंक ने हमारी तारीफ की हैं । कोरोना वायरस नियंत्रण में हम सभी राज्यों में सबसे आगे हैं। यह सब आपके कारण ही हैं। 20 अप्रैल से राज्य में बहुत सारी आर्थिक गतिविधियां प्रारंभ करने पर हम विचार कर रहे हैं। गांवो में मनरेगा के काम शुरू हो गए हैं। आप अपने जिले में क्या क्या कर सकते हैं। इसकी पूरी जानकारी और दिशा-निर्देश आपको बताये जा रहे हैं। इन दिशा निर्देशों का पालन करना सबके लिये जरूरी है।
        मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से विनम्र आग्रह करते हुए कहा कि आप रोजमर्रा के कामों में पूरी सावधानी बरतें। अफवाहों से सावधान रहें। कोरोना को हमने प्रदेश में नियंत्रित जरूर कर लिया है लेकिन खतरा अभी टला नहीं हैं। हमें अपने राज्य में फैलने का दूसरा अवसर नहीं देना है। अगर आपने फिजिकल डिस्टेंसिन्ग का पालन किया, लगातार हाथ धोते रहे और भीड़भाड़ से बचे तो कोरोना को राज्य फिर से फैलने का मौका नहीं मिलेगा । एक बार फिर मैं आपके सहयोग के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूँ । हमारी यह एकजुटता ही हमें हमारे प्रयासों में पूर्ण रूप से सफल करेगी ।

TNIS


मोदी सरकार ने कोरोना संकट की गंभीरता को समझने में बहुत देर की !

मोदी सरकार ने कोरोना संकट की गंभीरता को समझने में बहुत देर की !

17-Apr-2020

मोदी सरकार ने कोरोना संकट की गंभीरता को समझने में बहुत देर की है अब सरकार चाहे कुछ भी बोले लेकिन यह सच बदलने वाला नही है!.... भारत को नोवेल कोरोना वायरस के संबंध में चीन से पहली सूचना 31 दिसंबर को मिली थी। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने 10 फरवरी में दी थी ........जी हाँ 10 फरवरी 2020 को पहली बार सदन में कोरोना पर चर्चा हुई थी

कोरोना के विश्व भर में प्रसार को समझने में 23 जनवरी 2020 बहुत महत्वपूर्ण तारीख है 23 जनवरी को  चीन के वुहान में जो 1 करोड़ की संख्या वाला शहर है वहाँ पहली बार लॉक डाउन इंप्लिमेंट किया गया था 

लेकिन 23 जनवरी से पहले ही यह वायरस दुनिया भर में फैल चुका था इस मे WHO की बहुत बड़ी गलती थी उस पर कभी ओर चर्चा करेंगे लेकिन आप यह जान लीजिए कि 29 जनवरी 2020 तक 18 देशों में कुल 83 मामले सामने आ चुके थे इसके बाद ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नावेल कोरोनवायरस के प्रकोप को  पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया 30 जनवरी को ही पहला मामला भारत मे सामने आया था

लेकिन उससे पहले ही  विश्व के अन्य देशों में जैसे थाईलैंड (13 जनवरी); जापान (15 जनवरी); दक्षिण कोरिया (20 जनवरी); ताइवान और संयुक्त राज्य अमेरिका (21 जनवरी); हांगकांग और मकाऊ (22 जनवरी); सिंगापुर (23 जनवरी); फ्रांस, नेपाल और वियतनाम (24 जनवरी); ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया (25 जनवरी); कनाडा (26 जनवरी); कंबोडिया (27 जनवरी); जर्मनी (28 जनवरी); फिनलैंड, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात (29 जनवरी); कोरोना के मामले सामने आ चुके थे

1 फरवरी को फिलीपींस में होने वाली चीन के बाहर पहली हुई कोरोना से मौत दर्ज की गई लेकिन कहा जाता है कि 30 जनवरी को कलकत्ता में एक थाई महिला की भी मौत हुईं थी

बहरहाल अगर आप जनवरी 2020 के मध्य भाग  में देखे तो मोदीं सरकार जरूर कुछ प्रो एक्टिव कदम उठा चुकी थी जैसे 18 जनवरी से सरकार ने दिल्ली समेत देश के सात हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था कर दी थी ताकि अगर चीन या हांगकांग से लौटे किसी शख़्स में संक्रमण के असर दिखते हैं तो उसकी तुरंत जांच कराई जा सके.

आप यदि स्वास्थ्य मंत्रालय की बात करे तो एक सूचना हमे मिलती है 22 जनवरी तक 60 विमानों के कुल 12,828 यात्रियों की जांच कर ली गयी थी हालांकि किसी भी यात्री में इस विषाणु की पुष्टि नहीं हुई थी 

24 जनवरी को संभवतः पहली बार मीडिया इस विषय मे सचेत हुआ था और उसने खबर दी थी कि मुंबई में कोरोना वायरस के दो संदिग्ध मामले सामने आए हैं. दोनों संदिग्धों को कस्तूरबा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. फिलहाल, उनका परीक्षण कराया जा रहा है. ( लिंक कमेन्ट बॉक्स में )

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन आधिकारिक बयान दिया था कि उन्होंने राज्यों एवं केंद्र शासित क्षेत्रों को बेहद गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अलग-थलग रखने एवं उनका वेंटिलेटर प्रबंधन करने, कमियों की पहचान करने और निगरानी एवं प्रयोगशाला सहयोग के क्षेत्र में मूलभूत क्षमता को मजबूत करने के संदर्भ में अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है यानी उसे स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा कुछ हद तक लग गया था.......लेकिन इन आदेशों को राज्यो ने रद्दी की टोकरी में फेंक दिया और मोदी सरकार ने भी बाद में इस पर कोई ध्यान नही दिया

लेकिन असली गलतियों की शुरुआत हो गयी थी कोरोना के संदिग्ध भारत आ चुके थे 28 जनवरी तक भारत में लगभग 450 लोगों को निगरानी में रखने की बात आ गयी थी. उस वक्त सरकार ने भी दावा किया था कि सबसे ज्यादा लोग केरल में हैं. 450 में से 436 लोग सिर्फ केरल के थे शायद केरल सरकार स्थिति की गंभीरता समझ चुकी थी ये अधिकतर वो लोग थे जो मेडिकल स्टूडेंट्स थे .......भारत के पहले तीन दर्ज किये गए मामले केरल के मेडिकल स्टूडेंट्स के ही थे जो बड़ी संख्या में वुहान में पढ़ते थे और वापस लौट रहे थे.....

आपको बेहद आश्चर्य होगा कि मीडिया इसके संकेत दे रहा था  30 जनवरी को बीबीसी में प्रकाशित भारत में नेशनल सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के डायरेक्टर डॉ. सुजीत कुमार सिंह ने बीबीसी को एक इंटरव्यू में बताया था, "यह वायरस अमरीका तक पहुंच चुका है तो हमारे देश के लोग भी चीन की यात्रा करते हैं. क़रीब 1200 मेडिकल स्टूडेंट चीन में पढ़ाई कर रहे हैं, जिसमें से ज़्यादातर वुहान प्रांत में ही हैं. ऐसे में अगर वो वहां से लौटते हैं तो इस वायरस के भारत में आ जाने की आशंका बहुत बढ़ जाती है."

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन हालाँकि कह रही थी कि चीन में नववर्ष की छुट्टियों के मद्देनजर वहां अध्ययनरत या काम करने वालों से भारत आने पर विधिवत चिकित्सा जांच का अनुरोध किया जा रहा है.

मंत्रालय ने भारत आने वाले विमानों के लिए विमान के अंदर घोषणा करने का निर्देश भी दिया. इस संबंध में 17 जनवरी को ट्रेवल एडवाजरी जारी की थी लेकिन चीन से लौट रहे लोगों के लिए 14 दिन तक क्वारंटाइन रहने की  एडवाइजरी 30 जनवरी को जारी की गई..........

इसके बाद फरवरी में सरकार पूरे महीने सोती ही रही कोई इन यात्रियों के क्वारंटाइन को मॉनिटर करने के लिए कोई कदम नही उठाए गए शायद सरकार नमस्ते ट्रम्प प्रोग्राम में बिजी थी 8 जनवरी से 23 मार्च तक 15 लाख विदेशी यात्री भारत मे आए यह जानकारी खुद केबिनेट सेकेट्री ने दी थी और जैसा ऊपर बताया ही गया है कि यह संक्रमण पूरे विश्व मे बहुत तेजी के साथ फैल चुका था.......लेकिन मोदी सरकार स्थिति की गंभीरता को समझने में नाकाम रही...गिरीश मालवीय
द्वारा सै क़ासिम 

 

 


बहुत से लोग ये जानना चाहते हैं कि भारत मे कोरोना वायरस आया कहा से?

बहुत से लोग ये जानना चाहते हैं कि भारत मे कोरोना वायरस आया कहा से?

16-Apr-2020

बहुत से लोग ये जानना चाहते हैं कि भारत मे कोरोना वायरस आया कहा से? अगर आप भी उनमें से एक है तो जरा दिल थाम के बैठिए ओर बहुत ध्यान से यह पोस्ट पढ़िए...... क्योंकि इस पोस्ट में वो रिसर्च है जो बताती है कि दरअसल भारत मे जिन पर इसे फैलाना का इल्जाम लग रहा है वो गलत है.....ओर संभवतः भारत मे कोरोना, मार्च से पहले फरवरी में ही फैलना शुरू हो गया था........

शुरू से शुरू करते हैं ताकि शक ओ शुबहा की कोई गुंजाइश ही न रहे भारत मे पहला कोरोना केस 30 जनवरी को केरल में रिपोर्ट किया गया सबसे पहले  जिस स्टूडेंट में कोरोना की पुष्टि हुई वह 24 जनवरी को केरल लौटा था। उसके बाद 30 जनवरी और 2 फरवरी को वुहान से लौटे केरल के दो छात्रों को संक्रमित पाया गया था।

अब सबसे खास बात समझिए ये तीनो छात्र MBBS के स्टूडेंट्स थे दरअसल चाइना का वुहान राज्य में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र MBBS की पढ़ाई करने जाते है दरअसल चाइना जाकर पढ़ाई करना भारत की तुलना में सस्ता पड़ता है अगर यहाँ MBBS की पढ़ाई के 1 करोड़ लगते हैं तो चीन में 60 लाख में ही काम हो जाता है चीन में लगभग कुल 23 हजार भारतीय छात्र पढ़ते है इसमे में से 21 हजार ने केवल एमबीबीएस में ही दाखिला लिया हुआ है। यह संख्या ब्रिटेन और अमेरिका में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स से कही अधिक है।......

चीन में नववर्ष मनाने की परंपरा है उनके यहाँ स्कूल यूनिवर्सिटी में नववर्ष पर सालाना अवकाश दिया जाता है जो एक महीने का रहता है. साल 2020 में यह अवकाश लगभग 15 जनवरी से 15 फरवरी तक था MBBS का कोर्स वुहान में स्थित 2 यूनिवर्सिटी में चलता है... बड़ी संख्या में भारतीय छात्र इस दौरान भारत मे आए यह वही समय था जब वुहान में कोरोना का प्रसार आरम्भ हुआ था वुहान सिटी में 18 जनवरी 2020 से को एक साथ 4,000 मामलों में कोरोना के लक्षणों की शुरुआत हो गई थी 20 जनवरी को, चीन ने लगभग 140 नए रोगियों की पहचान की थी, 23 जनवरी को वुहान में लॉक डाउन किया गया लेकिन उससे पहले ही भारतीय छात्रों का वहाँ से भारत लौटने की शुरुआत हो गयी थी

उस वक्त हम नही जानते थे लेकिन अब हम जानते है कि इस वायरस के लक्षण शरीर मे 7 से 8 दिनों के बाद ही प्रकट होते हैं...... भारत मे आ चुके इन स्टूडेंट्स में भी ये लक्षण प्रकट होना शुरु हुए...... देश के अलग अलग राज्यों मे पुहंचे इन मेडिकल स्टूडेंट्स में भी ये लक्षण प्रकट हुए थे यह लेख विभिन्न मीडिया पोर्टल की पड़ताल करके यह बताता है कि 20 जनवरी से 6 फरवरी के बीच आए कितने MBBS स्टूडेंट्स को ये लक्षण प्रकट हुए थे ........

(1) Jan 26, 2020 
राजस्थान के जयपुर में चीन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर लौटे एक डॉक्टर के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका व्यक्त की गई राज्य के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा तुरंत उसे  हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया
(लाइव हिंदुस्तान का लिंक देखिए)

(2) January 28, 2020
पंजाब के मोहाली में राज्य का पहले कोरोना वायरस संदिग्ध की पहचान की गई चीन से करीब एक हफ्ता पहले लौटे 28 वर्षीय व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी और सिर दर्द की शिकायत थी, उसी के बाद व्यक्ति को पीजीआई में दाखिल करवाया गया
( इंडिया टीवी का लिंक देखिए)

(3) Jan 28, 2020
मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक मेडिकल छात्र को कोरोना वायरस का संदिग्ध मरीज माना गया है. छात्र कुछ दिन पहले ही चीन के वुहान शहर से लौटकर उज्जैन आया था. चीन से वापस उज्जैन आने के बाद छात्र में कोरोना वायरस जैसे लक्षण देखते हुएछात्र को लगातार सर्दी, खांसी और बुखार होने के बाद उज्जैन के माधव नगर अस्पताल में भर्ती कराया गया है
( आज तक का लिंक सलग्न है )

(4) 30 Jan 2020
चीन के वुहान प्रांत के कनमिंग शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही देहरादून की एक युवती में कोरोना वायरस के लक्षण मिले हैं। छाती के एक्सरे में फेफड़े में एक स्पॉट पाया गया। इस पर उसे फौरन ऋषिकेश एम्स के लिए रेफर किया गया।
(अमर उजाला का लिंक कमेन्ट बॉक्स में)

(5) 31 Jan 2020
इंदौर की खबर है कि मध्यप्रदेश के इंदौर और खरगोन में दो दो संदिग्ध मरीज मिले हैं। बताया जा रहा है कि दोनों चीन एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। फिलहाल दोनों को जांच के लिए एमवाय हॉस्पिटल के स्पेशल वार्ड में भर्ती कराया गया है।
( ibc24 in का लिंक दिया है )

(6) 31 jan 2020
भाषा न्यूज़ एजेंसी की खबर है चीन से लौटे ओडिशा के कंधमाल जिले से ताल्लुक रखने वाले मेडिकल के एक छात्र को खांसी और जुकाम के चलते शुक्रवार को कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजा गया है।
(बिजनेस स्टेंडर्ड का लिंक संलग्न है )

(7) 04 Feb 2020
चीन से लौटे हिसार जिले के एक गांव के व्यक्ति में कोरोना के लक्षण पाए गए है यह छात्र चीन के वेफांग मेडिकल विश्वविद्यालय से एमबीबीएस कर चुका है और इंटर्नशिप कर रहा है। सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दाखिल छात्र ने बताया कि उसे बुखार महसूस हो रहा है, कभी-कभी गला भी दर्द करता है। कभी बुखार ठीक हो जाता है।
( अमर उजाला का लिंक नीचे देखिए )

(8) 02 Feb 2020
खबर है कि मध्यप्रदेश के खरगोन में चीन से लौटे एक छात्र में कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए हैं. जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. खरगोन का यह युवक चीन में MBBS पढ़ाई कर रहा है. कुछ दिन पहले ही ये छुट्टी पर चीन से खरगोन लौटा था.
(सच एक्सप्रेस का लिंक नीचे दिया है)

(9) 03 feb 2020
छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर की खबर है कि सरगुजा जिले के एक व्यक्ति में में करोना वायरस का लक्षण पाया गया है। बताया जा रहा है कि वह व्यक्ति साउथ वेस्ट मेडिकल यूनिवर्सिटी चाइना लोजो में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। और परीक्षा खत्म होने के बाद 9 जनवरी को अम्बिकापुर पहुंचा है। पिछले 25 दिनों से खांसी खरास आने के बाद आज वो मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पहुंचा है
(पोर्टल सुयश ग्राम की खबर है लिंक नीचे)

(10) 6 Feb 2020
रोहतक पीजीआई  में एक संदिग्ध मरीज दाखिल हुआ है, जो चीन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है. उसमें कुछ ऐसे लक्षण मिले हैं, जो कोरोना वायरस जैसे हैं.
(न्यूज़ 18 हरियाणा की खबर है यू ट्यूब लिंक उपलब्ध है)

(11) Feb 21, 2020
राजस्थान के कोटा में कोरोना वायरस का एक संदिग्ध मरीज सामने आया है. चाइना के सुजो शहर से एमबीबीएस के फाइनल ईयर में 25 वर्षीय छात्र पढ़ाई कर रहा था. छात्र 2 फरवरी को कोटा आया है उसे खांसी जुकाम की शिकायत पर कोटा के एमबीएस अस्पताल ले जाया गया.

(12) 13 mar 2020
40 दिन पहले चीन से लौटी युवती अपने साधारण सर्दी और खांसी का इलाज कराने जिले के सरकारी अस्पताल में पहुंची. घटना संतकबीरनगर की है जहां कोरोना वायरस से पीड़ित वह छात्रा तीन फरवरी को एक छात्रा चीन से लौटी थी
( आज तक का लिंक दिया है )

यह वो केस है जो मीडिया की नजर में आए हैं और ऐसे सैकड़ों केस हों सकते है क्योंकि उस दौरान हजारों छात्र वहाँ से भारत लौटे है..... इतने चीन से लौटे इतने अधिक मेडिकल छात्रों का सर्दी खाँसी बुखार से पीड़ित पाया जाना साधारण घटना नही थी .....बहुत से छात्रों को कोरोना वायरस से संक्रमित नही पाया गया..... लेकिन अब हमें पता चला है कि बहुत सी रिपोर्ट फाल्स निगेटिव निकल रही है अब हमें यह भी पता चला है कि बहुत से मरीजो में कोई लक्षण नही होते लेकिन वो इस वायरस के साइलेंट कैरियर होते है...... ये सारे लड़के 22 से 32 सालो के है,  हो सकता है कि इनके इम्युनिटी पावर ने कोरोना को हरा दिया हो लेकिन इस आशंका से इनकार नही किया जा उन्होंने यह वायरस स्प्रेड किया हो ...........आप यह नही कह सकते कि ये काम इन्होंने जानबूझकर किया एक बात और खास है अभी देश मे जितने हॉट स्पॉट बने हुए उन शहरों के हस्पतालों में इनके इलाज के लिए इन्हें भर्ती किया गया था 24 जनवरी को मुंबई के अस्पताल में भी 3 कोरोना संदिग्धों को भर्ती किया गया था हालांकि उनके मेडिकल स्टूडेंट्स होने की पुष्टि नही हो पाई यहाँ तक कि बिहार के सीवान जिले के मेडिकल स्टूडेंट्स भी चीन में पढ़ रहे थे.........

साफ है कि सरकार से कोरोना संक्रमण से उपजी परिस्थितियों की गंभीरता समझने में बहुत बड़ी चूक हुई है, अगर सरकारी अमला वक्त पर हरकत में आ जाता तो इस देशव्यापी लॉक डाउन से बचा जा सकता था.........

(इस पोस्ट का मतलब यह न निकाला जाए कि यह किसी पर दोषारोपण का प्रयास है इसे सिर्फ एक अलग संभाव्यता ओर इन्फॉर्मेशन की दृष्टि से ही लिया जाए)
Girish Malviya 
द्वारा सै क़ासिम 


कोरोना संक्रमण की खबरों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हो पालन

कोरोना संक्रमण की खबरों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हो पालन

15-Apr-2020

फेक न्यूज़ चलाने वाले चेनलों तथा न्यूज़ एजेंसी के खिलाफ हो कड़ी कार्यवाही- दारापुरी 
“कोरोना संक्रमण के सम्बंध में छापी या न्यूज चैनलों पर दिखाई जा रही खबरों में पुलिस व प्रशासन के पक्ष को भी देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का शत प्रतिशत अनुपालन कराया जाए और इसका उल्लंघन कर फेक न्यूज चलाने  वाले चेनलों तथा समाचार पत्रों व न्यूज़ एजेंसी के खिलाफ केस दर्ज कर कडी कार्यवाही की जाए ताकि समाज में वैमनस्यता व साम्प्रदायिकता को रोका जा सके और पूरा देश एकजुट होकर इस संकट का सामना कर सके। यह बात आज एस आर दारापुरी आईपीएस (से.नि.) राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने मुख्य मंत्री उत्तर प्रदेश को प्रेषित पत्र में कही है. उन्होंने कहा है की पिछले दिनों कुछ टीवी चेनलों तथा एक न्यूज़ एजंसी द्वारा सहारनपुर, फिरोजाबाद तथा इलाहबाद में कोरोना के मरीजों के लेकर फेक न्यूज़ चलाई गयी थी जिसे पुलिस ने जांच से झूठा पाया था तथा इन चेंनलों को अपने टवीट हटाने के लिए आदेश दिया था. यह सर्वविदित है कि इन चेनलों/एजंसी द्वारा चलाई गयी फेक न्यूज़ का सामाजिक सौहार्द पर बहुत बुरा असर पड़ा है. इतना ही नहीं इन फेक न्यूज़ से एक तबके के खिलाफ दूसरे तबकों में तीव्र घृणा एवं विद्वेष भी पैदा हुया है. 
यह विचारणीय है कि इस समय जब देश कोरोना की महामारी से लड़ रहा है जिसमें समाज के सभी तबकों के सहयोग तथा सामजिक सौहार्द की आवश्यकता है तो ऐसे समय में फेक न्यूज़ चला कर सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ना बहुत घातक हो सकता है जोकि क्षम्य नहीं है. यह भी देखने की बात है कि क्या ऐसे राष्ट्रीय संकट के समय में ऐसा राष्ट्रविरोधी कार्य करने वालों को केवल अपना ट्वीट डिलीट करने के लिए कह कर छोड़ देना पर्याप्त है? महाराष्ट्र सरकार ने ऐसे न्यूज चैनलों के विरूध्द मुकदमा दर्ज किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार ने भी कल कोरोना के नाम पर सामाजिक वैमनस्य न फैलाने की अपील की है।
अतः आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट जनहित एवं राष्ट्रहित में मांग करता है फेक न्यूज़ चलाने वाले चैनलों तथा न्यूज़ एजंसी के विरुद्ध केस दर्ज करके कडी कार्यवाही की जानी चाहिए.  
एस आर दारापुरी आईपीएस (से.नि.)
राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट  
द्वारा सै क़ासिम 

 


कोरोना संकट के दौर में दलित परिदृश्य

कोरोना संकट के दौर में दलित परिदृश्य

14-Apr-2020

 {आज आंबेडकर जयंती पर विशेष} 
-एस आर दारापुरी आईपीएस (से.नि.), राष्ट्रीय  प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट  
2011 की आर्थिक एवं जाति जनगणना के अनुसार भारत के कुल परिवारों में से 4.42 करोड़ परिवार अनुसूचित जाति (दलित) से सम्बन्ध रखते हैं. इन परिवारों में से केवल 23% अच्छे मकानों में, 2% रहने योग्य मकानों में और 12% जीर्ण शीर्ण मकानों में रहते हैं. इन परिवारों में से 24% परिवार घास फूस, पालीथीन और मिटटी के मकानों में रहते हैं. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अधिकतर दलितों के पास रहने योग्य घर भी नहीं है. काफी दलितों के घरों की ज़मीन भी उनकी अपनी नहीं है. यह भी सर्विदित है कि शहरों की मलिन बस्तियों तथा झुग्गी झोंपड़ियों में रहने वाले अधिकतर दलित एवं आदिवासी ही हैं. यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इतने छोटे मकानों और झोंपड़ियों में कई कई लोगों के एक साथ रहने से कोरोना की रोकथाम के लिए फिज़िकल डिस्टेंसिंग कैसे संभव है. महाराष्ट्र का धार्वी स्लम इसकी सबसे बड़ी उदाहरण है जहाँ बड़ी तेजी से संक्रमण के मामले आ रहे हैं. ऐसी परिस्थिति में यदि ऐसी ही परिस्थिति रही तो इससे मरने वालों की संख्या का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. 
उपरोक्त जनगणना के अनुसार केवल 3.95% दलित परिवारों के पास सरकारी नौकरी है. केवल 0.93% के पास राजकीय क्षेत्र तथा केवल 2.47% के पास निजी क्षेत्र का रोज़गार है. इससे स्पष्ट है कि दलित परिवार बेरोज़गारी का सबसे बड़ा शिकार हैं. वास्तव में आरक्षण के 70 साल लागू रहने पर भी सरकारी नौकरियों में दलित परिवारों का प्रतिनिधित्व केवल 3.95% ही क्यों है? क्या आरक्षण को लागू करने में हद दर्जे की बेईमानी नहीं बरती गयी है? क्या मेरिट के नाम पर दलित वर्गों के साथ खुला धोखा नहीं किया गया है और दलितों को उनके संवैधानिक अधिकार (हिस्सेदारी) से वंचित नहीं किया गया है? यदि  दलितों में मेरिट की कमी वाले वाले झूठे तर्क को मान भी लिया जाए तो फिर दलितों  में इतने वर्षों में मेरिट पैदा न होने देने के लिए कौन ज़िम्मेदार है? 
इसी जनगणना में यह उभर कर आया है कि देश में दलित परिवारों में से केवल 83.55% परिवारों की मासिक आय 5,000 से अधिक है.  केवल 11.74% परिवारों  की मासिक आय 5,000 से 10,000 के बीच है और केवल 4.67% परिवारों की आय 10,000 से अधिक है. सरकारी नौकरी से केवल 3.56% परिवारों की मासिक आय 5,000 से अधिक है. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि गरीबी की रेखा के नीचे दलितों  का प्रतिश्त बहुत अधिक है जिस कारण दलित ही कुपोषण का सबसे अधिक शिकार हैं. 
इसी प्रकार उपरोक्त जनगणना के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में 56% परिवार भूमिहीन हैं. इन में से भूमिहीन दलितों का प्रतिशत 70 से 80% से भी अधिक हो सकता है. दलितों की भूमिहीनता की दशा उन की सबसे बड़ी कमज़ोरी है जिस कारण वे भूमिधारी जातियों पर पूरी तरह से आश्रित रहते हैं. इसी प्रकार देहात क्षेत्र में 51% परिवार हाथ का श्रम करने वाले हैं जिन में से दलितों का प्रतिशत 70 से 80% से अधिक हो सकता है. जनगणना के अनुसार  दलित परिवारों में से केवल 18.45% के पास असिंचित, 17.41% के पास सिंचित तथा 6.98% के पास अन्य भूमि है. इससे स्पष्ट है की दलितों की भूमिहीनता लगभग 91% है. दलित मजदूरों की कृषि मजदूरी पर सब से अधिक निर्भरता है. जनगणना के अनुसार देहात क्षेत्र में केवल 30% परिवारों को ही कृषि में रोज़गार मिल पाता है जिससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इन में कितने दलितों को कृषि से रोज़गार मिल पाता  होगा. यही कारण है कि गाँव से शहरों को ओर पलायन करने वालों में सबसे अधिक दलित ही हैं. हाल में कोरोना संकट के समय शहरों से गाँव की ओर उल्टा पलायन करने वालों में भी बहुसंख्यक दलित ही हैं.
दलितों की भूमिहीनता और हाथ की मजदूरी की विवशता उनकी सब से बड़ी कमज़ोरी है. इसी कारण वे न तो कृषि मजदूरी की ऊँची दर की मांग कर सकते हैं और न ही अपने ऊपर प्रतिदिन होने वाले अत्याचार और उत्पीड़न का मजबूती से विरोध ही कर पाते हैं. अतः दलितों के लिए ज़मीन और रोज़गार उन की सब से बड़ी ज़रुरत है परन्तु इस के लिए मोदी सरकार का कोई भी एजेंडा नहीं है. इस के विपरीत मोदी सरकार भूमि अधिग्रहण करके दलितों को भूमिहीन बना रही है और कृषि क्षेत्र में कोई भी निवेश न करके इस क्षेत्र में रोज़गार के अवसरों को कम कर रही है. अन्य क्षेत्रों में भी सरकार रोज़गार पैदा करने में बुरी तरह से विफल रही है.
सरकारी उपक्रमों के निजीकरण के कारण दलितों को आरक्षण के माध्यम से मिलने वाले रोज़गार के अवसर भी लगातार कम हो रहे हैं. इसके विपरीत ठेकेदारी प्रथा से दलितों एवं अन्य मज़दूरों का खुला शोषण हो रहा है. मोदी सरकार ने श्रम कानूनों का शिथिलीकरण करके मजदूरों को श्रम कनूनों से मिलने वाली सुरक्षा को ख़त्म कर दिया है. इससे मजदूरों का खुला शोषण हो रहा है जिसका सबसे बड़ा शिकार दलित परिवार हैं. 
अमेरिका में वर्तमान कोरोना महामारी के अध्ययन से पाया गया है कि वहां पर संक्रमित/मृतक व्यक्तियों में गोरे लोगों की अपेक्षा काले लोगों की संख्या अधिक है. इसके चार मुख्य कारण बताये गए हैं: अधिक खराब सेहत और कम स्वास्थ्य सुविधाओं की उप्लब्धता एवं भेदभाव, अधिकतर काले अमरीकन लोगों का आवश्यक सेवाओं में लगे होना, अपर्याप्त जानकारी एवं छोटे घर. भारत में दलितों के मामले में तो इन सभी कारकों के इलावा सबसे बड़ा कारक सामाजिक भेदभाव है. इसी लिए यह स्वाभाविक है कि हमारे देश में भी काले अमरीकनों की तरह समाज के सबसे निचले पायदान पर दलित एवं आदिवासी ही कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित होने की सम्भावना है. .  
वर्तमान कोरोना संकट से जो रोज़गार बंद हो गए हैं उसकी सबसे अधिक मार दलितों/ आदिवासियों पर ही पड़ने वाली है. हाल के अनुमान के अनुसार कोरोना की मार के फलस्वरूप भारत में लगभग 40 करोड़ लोगों के बेरोज़गारी का शिकार होने की सम्भावना है जिनमें अधिकतर दलित ही होंगे. इसके साथ ही आगे आने वाली जो मंदी है उसका भी सबसे बुरा प्रभाव दलितों एवं अन्य गरीब तबकों पर ही पड़ने वाला है. यह भी देखा गया है कि वर्तमान संकट के दौरान सरकार द्वारा राहत सम्बन्धी जो घोषणाएं की भी गयी हैं वे बिलकुल अपर्याप्त हैं और ऊंट के मुंह में जीरा के सामान ही हैं. इन योजनाओं में पात्रता को लेकर इतनी शर्तें लगा दी जाती हैं कि उनका लाभ आम आदमी को मिलना असंभव हो जा रहा है. 
उत्तर कोरोना काल में दलितों की दुर्दशा और भी बिगड़ने वाली है क्योंकि उसमें भयानक आर्थिक मंदी के कारण रोज़गार बिलकुल घट जाने वाले हैं. चूँकि दलितों के पास उत्पादन का अपना कोई साधन जैसे ज़मीन तथा व्यापर कारोबार आदि नहीं है, अतः मंदी के दुष्परिणामों का सबसे अधिक प्रभाव दलितों पर ही पड़ने वाला है. इसके लिए ज़रूरी है कि भोजन तथा शिक्षा के अधिकार की तरह रोज़गार को भी मौलिक अधिकार बनाया जाये और बेरोज़गारी भत्ते की व्यवस्था लागू की जाये. इसके साथ ही स्वास्थ्य सुरक्षा को भी मौलिक अधिकार बनाया जाये ताकि गरीब लोगों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सके. इसके लिए ज़रूरी है कि हमारे विकास के वर्तमान पूंजीवादी माडल के स्थान पर जनवादी समाजवादी कल्याणकारी राज्य के माडल को अपनाया जाये. 
यह उल्लेखनीय है कि डा. आंबेडकर राजकीय समाजवाद (जनवादी समाजवाद) के प्रबल समर्थक और पूंजीवाद के कट्टर विरोधी थे. उन्होंने तो दलित रेलवे मजदूरों के सम्मलेन को संबोधित करते हुए कहा था कि “दलितों के दो बड़े दुश्मन हैं, एक ब्राह्मणवाद और दूसरा पूँजीवाद.” वे मजदूर वर्ग की राजनीतिक सत्ता में हिस्सेदारी के बहुत बड़े पक्षधर थे. डॉ आंबेडकर के मस्तिष्क में समाजवाद की रूप-रेखा बहुत स्पष्ट थी। भारत के सामाजिक रूपान्तरण और आर्थिक विकास के लिए वे इसे अपरिहार्य मानते थे। उन्होंने भारत के भावी संविधान के अपने प्रारूप में इस रूप-रेखा को राष्ट्र के समक्ष प्रस्तुत भी किया था जो कि "स्टेट्स एंड माइनॉरिटीज अर्थात राज्य एवं अल्पसंख्यक" नामक पुस्तक के रूप में उपलब्ध है। वे सभी प्रमुख एवं आधारभूत उद्योगों, बीमा, कृषि भूमि का राष्ट्रीयकरण एवं सामूहिक खेती के पक्षधर थे. वे कृषि को राजकीय उद्योग का दर्जा दिए जाने के पक्ष में थे. डा. आंबेडकर तो संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार नहीं बनाना चाहते थे परन्तु यह उनके वश में नहीं था. 
वर्तमान कोरोना संकट ने यह सिद्ध कर दिया है कि अब तक भारत सहित अधिकतर देशों में विकास का जो पूँजीवाद माडल रहा है उसने शोषण एवं असमानता को ही बढ़ावा दिया है. यह आम जन की बुनियादी समस्यायों को हल करने में बुरी तरह से विफल रहा है. जबसे राजनीति का कारपोरेटीकरण एवं फाइनेंस कैपिटल का महत्त्व बढ़ा है, तब से लोकतंत्र की जगह अधिनायिकवाद और दक्षिणपंथ का पलड़ा भारी हुआ है. इस संकट से यह तथ्य भी उभर कर आया है कि इस संकट का सामना  केवल समाजवादी देश जैसे क्यूबा, चीन एवं वियतनाम आदि ही कर सके हैं. उनकी ही व्यवस्था मानव जाति के जीवन की रक्षा करने में सक्षम है। वरना आपने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को तो सुना ही होगा जिसमें वह कहते हैं कि लगभग ढाई लाख अमरीकनों को तो कोरोना से मरना ही होगा और इसमें वह कुछ नहीं कर सकते। पूंजीवाद के सर्वोच्च माडल की यह त्रासद पुकार है जो दिखा रही है कि मुनाफे पर पलने वाली पूंजीवादी व्यवस्था पूर्णतया खोखली है। इसलिए दलितों के हितों की रक्षा भी जनवादी समाजवादी राज्य व्यवस्था में ही सम्भव है। बाबा साहब की परिकल्पना तभी साकार होगी जब दलित, पूंजीपतियों की सेवा में लगे बसपा, अठवाले, रामविलास जैसे लोगों से अलग होकर, रेडिकल एजेंडा (भूमि आवंटन, रोज़गार, स्वास्थ्य सुरक्षा, शिक्षा, एवं सामाजिक सम्मान आदि) पर आधारित जन राजनीति के साथ जुड़ेंगे। यही राजनीति एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करेगी जिसमें उत्तर कोरोना काल की चुनौतियों का जवाब होगा। आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट इसी दिशा में जनवादी समाजवादी राजनीति का एक प्रयास है।
नोट: यह विशेष लेख 14 अप्रैल आंबेडकर जयंती के अवसर पर छापने के लिए है.