द फॉरगॉटेन एजुकेशनिस्टः सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख

द फॉरगॉटेन एजुकेशनिस्टः सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख

03-Jan-2022

भोपाल: छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी श्री एम. डब्ल्यू अंसारी साहब ने आज 3 जनवरी को सावित्री बाई फुले की जन्मदिन के अवसर पर सावित्री बाई फुले और शेख फातिमा (9 जनवरी, 1827) को श्रद्धांजलि दी.

उन्होंने कहा कि फातिमा शेख एक भारतीय महिला शिक्षाविद् थीं. जो समाज सुधारक ज्योति बा फुले और सावित्री बा फुले के साथी थीं। फातिमा शेख मियां उस्मान शेख की बहन थीं जिनके घर पर ज्योति बाई और सौत्री बाई फुले का ने रिहाइश इख्तियार कीं (रहीं)। उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि, “आज के सामाजिक-राजनीतिक माहौल में, किसी से यह पूछना हास्यास्पद होगा कि क्या वे महिला शिक्षा का समर्थन करते हैं, क्योंकि  यह न केवल हमारे संविधान में निहित है, बल्कि मुख्यधारा के सार्व जनिक प्रवचन में भी समर्थित है। जाति या धर्म की परवाह किए बिना लड़कियों की शिक्षा के लिए समर्पित कई सरकारी कार्यक्रम और योजनाएं हैं। हालाँकि, 175 साल से भी अधिक पहले, यह मुख्यधारा के सामाजिक-राजनीतिक प्रवचन का हिस्सा भी नहीं था, और वास्तव में , जिन लोगों ने इस
पर जोर दिया, उन्हें गंभीर शत्रुता और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा।

वाजेह रहे कि भारत में शिक्षा के पीछे के इतिहास का सरसरी ज्ञान रखने वालों ने सावित्री बाई फुले के बारे में सुना होगा, जिन्होंने अस्पृश्यता को चुनौती देने और लड़कियों को शिक्षित करने के लिए जाति और लिंग के दमनकारी वर्गीकरण के खिलाफ बहादुरी से  लड़ाई लड़ीं, और फातिमा शेख वह महिला थीं जिन्होंने अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक हस्तक्षेपों  का सामना किया। और 1847 के दशक मे ं “बेटी पढ़ाओ“ आंदोलन शुरू किया गया। सभी नियम तोड़ते हुए फातिमा शेख और सावित्री बाई ने एक स्कूल की स्थापना की और यहां तक कि पेशावर शिक्षक बनने के लिए एक प्रशिक्षण संस्थान में भी गईं। उनके विद्यालय का पाठ्यक्रम ब्राह्मण शिक्षकों द्वारा उनके गृह विद्यालयों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम से भिन्न था। इसमें वेद और शास्त्र जैसे ब्राह्मणवादी ग्रंथों के बजाय गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान शामिल थे। अधिकांश पुरुष शिक्षा तक सार्व भौमिक पहुंचने से डरते थे, जो उस वक्त तक केवल उच्च जाति के पुरुषों के लिए एक सम्मान था। उच्च जातियों ने इन स्कूलों के खुलने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और यहां तक कि हिंसक रूप से भी इसकी निंदा की। उन्होंने रास्ते में  फातिमा और सावित्री बाई पर पथराव किया और गोबर भी फेंके। कहा जाता है कि फातिमा और सावित्री बाई स्कूल जाते समय एक अतिरिक्त साड़ी ले जाती थीं क्योंकि लोगों ने गाली-गलौज के अलावा उन पर पत्थर और गोबर फेंकते थे। लेकिन दोनों महिलाओं ने इन सभी अत्याचारों का डटकर सामना किया। फातिमा ने 1856 तक स्कूल में पढ़ाया और भारत में उन्हें पहली मुस्लिम महिला शिक्षक के रूप में जानी जाती हैं। लड़कियों को शिक्षित बनाने के लिए उन्हें कई तरह के दुव्र्यवहार और बद सुलूकी का शिकार होना पड़ा।

इन महान महिलाओं ने शिक्षित महिलाओं के लिए हर तरह के अत्याचार सहे, लेकिन आज उन्हें कम ही लोग जानते हैं। हम सभी लोगों से अपील करते हैं कि जिस तरह सीवी रमन की याद में जवाहरलाल नेहरू की याद में “बाल दिवस“ और “राष्ट्रीय विज्ञान दिवस“ मनाया जाता है।


जमीन हड़पने को लेकर चीन का नाम लेने से क्यों कतरा रहे हैं मोदी: कांग्रेस

जमीन हड़पने को लेकर चीन का नाम लेने से क्यों कतरा रहे हैं मोदी: कांग्रेस

31-Dec-2021

चीनी सरकार द्वारा अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थानों का नाम बदलने के बाद, कांग्रेस ने शुक्रवार को मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को ‘निष्क्रियता और भारतीय क्षेत्र की भूमि हड़पने के लिए चीन का नाम लेने से कतराने’ के लिए नारा दिया।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘चीन अरुणाचल प्रदेश में 15 जगहों का ‘नाम बदल रहा है। सैटेलाइट इमेज ने हाल ही में दिखाया था कि चीन ने हमारे क्षेत्र में दो गांव भी बनाए हैं। पीएम मोदी और उनकी बीजिंग जनता पार्टी के नेता चीन का नाम लेने से भी कतराते हैं! वे बस इतना करते हैं कि चीनियों द्वारा इस जमीन पर कब्जा करने से इनकार करते हैं। ”

यह प्रतिक्रिया चीन द्वारा अपने नए सीमा कानून को लागू करने से पहले आती है, चीनी सरकार ने अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थानों का नाम बदल दिया था।

चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि उनके पास अरुणाचल प्रदेश में 15 स्थानों के लिए ‘मानकीकृत’ नाम हैं, जिनका उपयोग चीनी मानचित्रों पर किया जाएगा।

यह दूसरी बार है जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों का नाम बदला है। 2017 में चीन ने छह जगहों के नाम बदल दिए थे।

23 अक्टूबर को, चीन के शीर्ष विधायी निकाय, नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति ने “देश के भूमि सीमा क्षेत्रों के संरक्षण और शोषण” का हवाला देते हुए एक नया कानून पारित किया। समिति ने कहा था कि नया कानून एक जनवरी से लागू होगा।

कानून विशेष रूप से भारत के साथ सीमा के लिए नहीं है। चीन भारत सहित 14 देशों के साथ अपनी 22,457 किलोमीटर भूमि सीमा साझा करता है, जो मंगोलिया और रूस के साथ सीमाओं के बाद तीसरी सबसे लंबी सीमा है।

नए सीमा कानून में 62 अनुच्छेद और सात अध्याय हैं। कानून के अनुसार, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना सीमा को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने के लिए अपनी सभी भूमि सीमाओं पर सीमा चिह्न स्थापित करेगा।

संबंधित पड़ोसी राज्य के साथ समझौते में मार्कर का प्रकार तय किया जाना है।

कांग्रेस चीन के साथ विवादों से निपटने के लिए सरकार की आलोचना करती रही है।


संत कालीचरण महाराज गिरफ्तार...(video)

संत कालीचरण महाराज गिरफ्तार...(video)

30-Dec-2021

संत कालीचरण महाराज गिरफ्तार...

मनोज शुक्ला 

रायपुर : राजधानी रायपुर में आयोजित धर्म संसद में ‘अपमानजनक' टिप्पणी करने और उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे की तारीफ करने के आरोप में कालीचरण महाराज को गिरफ्तार कर लिया गया है. मध्यप्रदेश के खजुराहो से कालीचरण की गिरफ्तारी हुई है.रायपुर एसएसपी प्रशांत अग्रवाल ने कालीचरण की गिरफ्तारी की पुष्टि की है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक कालीचरण ने खजुराहो में एक गेस्ट हाउस में बुकिंग कराई थी लेकिन वो वहां रूका नहीं था, उस गेस्ट हाउस से उसने चेक आउट भी नहीं किया ताकि पुलिस को चकमा दे सके. कालीचरण खजुराहो से 25 किलोमीटर दूर बाघेश्वरी धाम के करीब एक शख्स के घर पर रुका था. पुलिस से बचने के लिये उसके तमाम साथियों ने भी फोन बंद कर दिये थे. पूरे दिन पुलिस ने सुराग तलाशे और सुबह तड़के 8-10 पुलिसकर्मियों की टीम उसे गिरफ्तार कर रायपुर रवाना हो गई. आज शाम तक उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा.

देखें विडियो - 

कालीचरण का संबोधन- 
कालीचरण महाराज ने अपने संबोधन में कहा था कि इस्लाम का उद्देश्य राजनीति के माध्यम से राष्ट्र पर कब्जा करना है. उसने यह भी घोषणा की 'मोहनदास करमचंद गांधी ने देश को नष्ट कर दिया... नाथूराम गोडसे को सलाम, जिन्होंने उन्हें मार डाला.


ये कैसा धर्म संसद : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान और हत्यारें गोडसे का सम्मान ?(video)

ये कैसा धर्म संसद : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान और हत्यारें गोडसे का सम्मान ?(video)

27-Dec-2021

ये कैसा धर्म संसद : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान और हत्यारें गोडसे का सम्मान ?

खुलासा पोस्ट न्यूज़ नेटवर्क 

राजधानी रायपुर में धर्म संकट को लेकर आयोजित धर्म संसद में अचानक एक संत हिंदुत्व की चर्चा को छोड़ महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे की चर्चा करने लगे, महाराष्ट्र से आए संत कालीचरण ने मोहनदास करमचंद गांधी पर विवादित बयान दिया  कालीचरण ने महात्मा गांधी के लिए अपशब्द का प्रयोग करते हुए गोडसे को प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की वजह से देश का विभाजन हुआ, गोडसे को नमस्कार है कि उन्होंने महात्मा गांधी को गोली मार दी. उनको मार डाला।

वहीं उन्होंने कहा कि इस्लाम का मकसद राजनीति के जरिए राष्ट्र पर कब्जा करना है। 1947 में हमने अपनी आंखों से देखा कि कैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश पर इस्लामाबाद ने कब्जा किया। मोहनदास करमचंद गांधी ने उस वक्त देश का सत्यानाश किया।

देखें विडियो- 

इस बयान के बाद धर्म संसद में हंगामा मच गया। कुछ लोगों ने इसका भारी विरोध भी किया। अमन और शांति का पदेश के राजधानी रायपुर में जहां सभी जाती और समुदाय के लोग एक साथ सहजता से रहते है लेकिन बहर से आये कुछ लोग धर्म के नाम पर यहां नफरत का जहर घोल रहे है जो कभी कामयाब नहीं होगा इसमें बहुंत हद तक आयोजक भी जिम्मेदार है जिन्होंने इस तरह की आयोजन सभा किया | 

 


भूपेश का भरोसा जीता छत्तीसगढ़ शहरी निकाय चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत !

भूपेश का भरोसा जीता छत्तीसगढ़ शहरी निकाय चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत !

25-Dec-2021

खुलासपोस्ट न्यूज़ नेटवर्क 

 

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने कार्यकुशलता का लोहा मनवा ही लिया, छत्तीसगढ़ में हुए शहरी निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का सूपड़ा साफ़ करते हुए  कांग्रेस ने 300 वार्डों में से 174 वार्डों में जीत दर्ज की है, जिसके लिए मतगणना पूरी हो चुकी है। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने निकाय चुनाव परिणामों पर कहा कि बस्तर, सरगुजा, सारंगढ़ से लेकर भिलाई और भीरगांव तक हमें अच्छे परिणाम मिले हैं।चुनाव अधिकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 89 में जीत दर्ज की है, जबकि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने 6 में जीत दर्ज की है।


सीएम भूपेश बघेल ने विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी.

बस्तर, सरगुजा, सारंगढ़ से लेकर भिलाई और भीरगांव तक अच्छे परिणाम मिले हैं। मैं अपने सभी विजयी उम्मीदवारों और पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई देता हूं।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा, ‘हमने सेमीफाइनल जीता है और फाइनल मैच भी जीतेंगे. 2023 में कांग्रेस राज्य में सत्ता में वापस आएगी।

चुनाव 20 दिसंबर को हुए थे।


यूपी चुनाव में शोसल मीडिया और भक्तो के व्हाट्स अप यूनिवर्सिटी के द्वारा भ्रम फ़ैलाने का प्रयास

यूपी चुनाव में शोसल मीडिया और भक्तो के व्हाट्स अप यूनिवर्सिटी के द्वारा भ्रम फ़ैलाने का प्रयास

23-Dec-2021

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

यूपी चुनाव में शोसल मीडिया और भक्तो के व्हाट्स अप यूनिवर्सिटी के द्वारा भ्रम फ़ैलाने का प्रयास

शकील अख्तर ने अपने ट्विटर हैण्डल से यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बागी तेवर दिखाने वाले कांग्रेस के गिग्ज नेता हरीश रावत पर हमला करते हुए कहा कि हरीश रावत को लगा कि उनके बिना कांग्रेस कि नैया पार नहीं हो सकती तो वे समुद्र, तैराकी की ऊंची ऊंची बातें करने लगे। उन्हें पता है कि कांग्रेस दब जाती है नहीं तो भाजपा का रास्ता खुला ही है।
 
उधर छत्तीसगढ़ में एक और क्षत्रप कांग्रेस की अच्छी भली चलती राज्य सरकार को हिलाने में लगे हैं लेकिन मुख्यमंत्री बघेल ने यूपी में कांग्रेस का इतना विस्तृत ढांचा खड़ा कर दिया है की प्रियंका और राहुल उन्हें डिस्टर्ब नहीं करेंगे।
 
लेकिन हर हाल में सरकार को अस्थिर करने में लगे क्षत्रप के बारे में नई सूचना यह है कि उन्होंने किसी भी हद तक जाने की तैयारी कर ली है। बंगाल की किसी क्षेत्रीय पार्टी तक में जाने तक। क्षत्रपों में जब केंद्रीय सत्ता का भय खत्म हो जाता है तो इतिहास गवाह है कि ऐसे विद्रोह रोज होने लगते हैं। एक संभालो, जैसा राजस्थान में संभाला तो चार नई जगह शुरु हो जाता है। कड़ा मैसेज ही एकमात्र उपाय होता है। और राहुल अगर यह नहीं कर सके तो उनकी मुश्किलें बढ़ती जाएंगी।

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शकील अख्तर ने कहा जो समझते हैं कि कांग्रेस वही चला रहे हैं। उनमें से एक अमरिंदर सिंह चले गए भाजपा को चलाने। अजय माकन ने बहुत धीरज, राजनीतिक कुशलता से राजस्थान में स्थिति संभाल ली।


मेरे बच्चों के इंस्टाग्राम अकाउंट हैक करा रही BJP सरकार: प्रियंका का बड़ा आरोप

मेरे बच्चों के इंस्टाग्राम अकाउंट हैक करा रही BJP सरकार: प्रियंका का बड़ा आरोप

23-Dec-2021

मेरे बच्चों के इंस्टाग्राम अकाउंट हैक करा रही BJP सरकार: प्रियंका का बड़ा आरोप

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के फोन टैपिंग के आरोप के बाद कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव व उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर बड़ा आरोप जड़ा है। उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस में जोश भरने के काम में जुटीं प्रियंका गांधी वाड्रा ने लखनऊ में केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार उनके बच्चों के इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर रही है। 
 
कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि अखिलेश यादव तो फोन टैपिंग की बात कर रहे हैं, मेरे तो बच्चों का इंस्टाग्राम अकाउंट भी हैक कराया जा रहा है। भाजपा की सरकार तो विपक्षी दलों के खिलाफ दमन का रवैया अपना रही है। प्रियंका ने लखनऊ में मीडिया से बातचीत में कहा कि आप लोग फोन टैपिंग की बात कर रहे हैं, वे लोग तो मेरे बच्चों के इंस्टाग्राम अकाउंट भी हैक कर रहे हैं। क्या उनके पास और कोई काम नहीं है। उन्होंने प्रयागराज में महिला सशक्तिकरण सम्मेलन को लेकर भी भाजपा पर हमला किया।
 
प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधा। मंगलवार को प्रयागराज में महिला सशक्तिकरण सम्मेलन में महिलाओं से संवाद के आयोजन पर प्रियंका ने कहा कि मैं लड़की हूं लड़ सकती हूं के नारे के बाद इस देश की महिलाएं जाग गई हैं। वे सभी अपना हक मांग रही हैं। इसी कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रयागराज में आज महिलाओं के सामने झुक गए। मैं उनसे पूछना चाहती हूं इतने वर्षों से उनको महिलाओं की चिंता क्यों नहीं थी। पहले ये घोषणाएं क्यों नहीं की, जो वह आज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं आज बहुत खुश हूं कि पीएम नरेन्द्र मोदी को देश की महिलाओं के आगे झुकना पड़ा।
 
बता दें कि आयकर विभाग ने शनिवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबियों के लखनऊ, मऊ, मैनपुरी, आगरा व बेंगलुरु स्थित ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें सपा के राष्ट्रीय सचिव राजीव राय व अखिलेश यादव के पूर्व ओएसडी जैनेंद्र यादव के आवासों के अलावा आरसीएल ग्रुप के निदेशक मनोज यादव व लखनऊ के कारोबारी राहुल भसीन के ठिकाने भी शामिल हैं। अखिलेश यादव ने आयकर छापों को लेकर राज्य सरकार पर निशाना भी साधा। इस कार्रवाई के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी कहा था कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार विपक्षी दलों पर दबाव बनाने के लिए अपनी एजेंसियों का ऐसे ही इस्तेमाल करती है। 
एजेंसी इन पुट 


हेलमेट और सीट बेल्ट न लगाने की वजह से होती हैं मौतें

हेलमेट और सीट बेल्ट न लगाने की वजह से होती हैं मौतें

22-Dec-2021

हेलमेट और सीट बेल्ट न लगाने की वजह से होती हैं मौतें
 

-जनजागरूकता और सेफ्टी रूल्स की सजग मानिटरिंग से काफी संख्या में कम हो सकती हैं दुर्घटना में मौत
- सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री अभय मनोहर सप्रे, पूर्व न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट ने ली रोड सेफ्टी को लेकर जिले में प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक

दुर्ग 21 दिसंबर 2021/यदि 40 किमी प्रति घंटा की स्पीड हो तो दुर्घटना में बचने की पूर्ण संभावना होती है। यदि यह रफ्तार दोगुनी हो तो बचने की संभावना केवल 20 फीसदी रह जाती है। यह बात सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश श्री अभय मनोहर सप्रे ने रोड सेफ्टी को लेकर जिले में हुई प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक में बताई। उन्होंने छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया के अनेक देशों में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों की जानकारी दी तथा तुलनात्मक समीक्षा भी की। उन्होंने बताया कि जिन देशों में रोड सेफ्टी को लेकर ज्यादा जागरूकता है वहां इनकी संख्या में तेजी से गिरावट आई है। वियतनाम का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इस संबंध में बेहद गंभीर उपाय बरतने से वहां सड़क दुर्घटना में मौतों की संख्या में काफी गिरावट आई। उन्होंने कहा कि अधिकतम मौत तेज रफ्तार गाड़ी चलाने से होती हैं इसके बाद हेल्मेट नहीं पहनने, सीट बेल्ट आदि नहीं लगाने जैसे सुरक्षा उपाय नहीं अपनाने से मौतें होती हैं। शराब पीकर गाड़ी चलाने से भी बड़ी संख्या में मौतें होती हैं। उन्होंने कहा कि लोग अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक होकर सेफ्टी रूल्स अपनायें तो ज्यादातर मौतें घट सकती हैं। सड़क सुरक्षा से जुड़े अधिकारी इस बात में बेहद गंभीरता से काम करते हुए सेफ्टी रूल्स का अनुपालन सुनिश्चित कराएं। सख्त मानिटरिंग से स्वतः ही लोग ट्रैफिक नियमों को अपनाने लगते हैं। बैठक में सचिव यातायात श्री टोपेश्वर वर्मा भी उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर शासन ने विशेष रूप से फंड दिया है। सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इंस्टीट्यूट आफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट 17 करोड़ की लागत से तेंदुआ में बनाया गया है। 5.22 करोड़ रुपए की लागत से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय रायपुर में ई-ट्रैक बनाया गया है। आईजी श्री ओपी पाल ने बताया कि प्रशासन द्वारा नियमित रूप से मोटर व्हीकल एक्ट के गाइडलाइन के मुताबिक जांच की जा रही है। जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर नियमित रूप से समीक्षा बैठक होती है और इसके अनुरूप निर्णय लिये जाते हैं। लोगों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देकर कार्य किया जा रहा है। एसपी श्री बद्रीनारायण मीणा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अंजोर रथ के माध्यम से यातायात जागरूकता के लिए कार्य किया जा रहा है। ट्रैफिक डीएसपी श्री गुरजीत सिंह ने बताया कि दुर्ग जिले में लगातार एहतियाती कदम उठाये जाने से सड़क दुर्घटना में मौतों की संख्या में कमी आई है।
छत्तीसगढ़ में हो रहे ये उपाय- सड़क सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों के बारे में जानकारी इंटर डिपार्टमेंट लीड एजेंसी के चेयरमैन श्री संजय शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि तेंदुवा में ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं रिसर्च सेंटर में अभी 200 वाहन चालकों को विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर में ट्रेनिंग दी जा रही है। स्कूल में सिलेबस में रोड सेफ्टी को शामिल किया गया है। सड़क सुरक्षा को लेकर रायपुर जिले में पायलेट प्रोजेक्ट चल रहा है  इसमें अधिक दुर्घटना वाले 83 गांवों में सड़क सुरक्षा को लेकर चौपाल आयोजित कराई गई है। इससे दुर्घटनाओं में कमी परीलक्षित हुई है। उन्होंने बताया कि ओवर लोडेड वाहनों पर इस साल 4 लाख 81 हजार प्रकरण प्रदेश भर में दर्ज किये गये। मुख्य सड़कों की सुरक्षा आडिट कराई गई और 53 सड़कों में सुधार कार्य किया गया। जंक्शन सुधार के 1797 कार्य किये गये। यातायात नियमों के उल्लंघन के 3 लाख 59 हजार प्रकरणों पर कार्रवाई की गई। सड़क सुरक्षा के लिए रंबल स्ट्रिप, ब्लिंकर्स आदि भी बनाये गये।
रोड सेफ्टी अब सीएसआर में भी शामिल- अध्यक्ष श्री सप्रे ने बताया कि रोड सेफ्टी अब सीएसआर में भी शामिल है। कोयंबटूर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि यहां पर होंडा सिटी कंपनी ने सीएसआर से मोटर व्हीकल एक्ट की जागरूकता को लेकर पार्क बनाया है। उन्होंने कहा कि इसी तरह से सोशल मीडिया में वीडियो आदि के माध्यम से व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा सकता है।

 


अफगान की ओर मैत्री एवं मदद के भारतीय कदम

अफगान की ओर मैत्री एवं मदद के भारतीय कदम

14-Dec-2021

अफगान की ओर मैत्री एवं मदद के भारतीय कदम

-ः ललित गर्ग:-
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जब दुश्मनी निश्चित हो जाए तो उससे दोस्ती कर लेनी चाहिए-इस एक पंक्ति में फलसफा है, कूटनीति है, अहिंसा है, मानवीयता है एवं जीवन का सत्य है और यही भारतीयता भी है। इसी भारतीयता का एक अनूठा उदाहरण तमाम विपरीत स्थितियों के बावजूद अफगानिस्तान की मदद करके भारत ने प्रस्तुत किया है। भारत ने फिर से सहयोग, संवेदना एवं मानवीय सोच से कदम बढ़ाया है। संकट से जूझ रहे अफगान नागरिकों के लिए यहां से भारी मात्रा में जीवनरक्षक दवाओं की खेप भेजी गई है। जो विमान काबुल से भारतीय और अफगान नागरिकों को लेकर यहां आया था, उसी के जरिए यह खेप भेजी गई। यह भारत का सराहनीय कदम है, मानवीयता से जुड़ा है।
समस्या जब बहुत चिन्तनीय बन जाती है तो उसे बड़ी गंभीरता एवं चातुर्य से नया मोड़ देना होता है। भारत ने ऐसा ही किया गया है। जबसे अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता कायम हुई है, तबसे वहां भारत की गतिविधियां लगभग रुकी हुई थीं। वहां भारत के द्वारा चल रहे विकास के आयाम भी अवरुद्ध हो गये थे। तालिबानी मानसिकता एवं भारत विरोधी गतिविधियों के कारण शुरू में तो भारत लंबे समय तक यही तय नहीं कर पा रहा था कि वह तालिबान को मान्यता दे या न दे, क्योंकि पूरी दुनिया में तालिबान को एक दहशतगर्द, आतंकवादी एवं हिंसक संगठन माना जाता है और इस तरह किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर कब्जा करके सत्ता बनाने वाली शक्तियों को मान्यता देना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध माना जाता है। इन स्थितियों के कारण भारत द्वंद्व में रहा। समस्याएं अनेक रही हैं, चीन और रूस ने तालिबान की सत्ता को समर्थन देना भी एक समस्या रही है। भारत के सामने एक समस्या यह भी थी कि उसे अमेरिका का रुख भी देखना था। अमेरिका को पसंद नहीं कि कोई देश अफगानिस्तान की मदद करता। जब उसकी सेना वहां से हटी, तभी तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था। इसलिए दुनिया के वे सभी देश तालिबान के विरोध में खड़े थे, जो अमेरिका के मित्र थे। लेकिन इन सब समस्याओं एवं स्थितियों के बावजूद भारत का एक स्वतंत्र वजूद भी रहा है, उसकी सोच राजनीति के साथ-साथ मानवीय एवं उदारवादी रही है। शायद यही वजह है कि भारत ने एक बार फिर अफगानिस्तान की जनता की खेर-खबर लेना जरूरी समझा है।
आज अफगानिस्तान के सम्मुख संकट इसलिए उत्पन्न हुआ कि वहां सब कुछ बनने लगा पर राष्ट्रीय चरित्र नहीं बना और बिन चरित्र सब सून........। तभी आतंकवाद जैसी स्थितियों के लिये उसका इस्तेमाल बेधड़क होने लगा, अहिंसा और शांति चरित्र के बिना ठहरती नहीं, क्योंकि यह उपदेश की नहीं, जीने की चीज है। उसे इस तरह जीने के लिये भारत ने वातावरण दिया, लेकिन उनका पडौसी पाकिस्तान इस वातावरण को पनपने नहीं दिया। अफगानिस्तान भारत का पड़ोसी है और पाकिस्तान का भी। पाकिस्तान के भारत से रिश्ते हमेशा तनाव भरे ही रहते हैं। ऐसे में अगर अफगानिस्तान का झुकाव भी उसकी तरफ रहेगा, तो भारत के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। इसलिए भारत ने शुरू से अफगानिस्तान के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखा है। तालिबान के कब्जे से पहले वहां भारत ने अनेक विकास परियोजनाओं में भारी धन लगा रखा है। तालिबान के आने के बाद उन परियोजनाओं पर प्रश्नचिह्न लग गया था।
जगजाहिर है कि अफगानिस्तान तालीबानी बर्बरता एवं पाकिस्तानी कुचेष्ठाओं के चलते इस वक्त भयानक संकटों का सामना कर रहा है। देश में भुखमरी के हालात हैं, आम जीवन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। विकास की जगह आतंकवाद मुख्य मुद्दा बना हुआ है। लाखों लोग पहले ही पलायन कर चुके हैं। सत्ता को लेकर तालिबान के उग्र तेवर एवं भीतर ही भीतर वहां के राजनीतिक गुटों में तना-तनी का माहौल है। देश के अंदरूनी मामलों में पाकिस्तान का दखल मुश्किलों को और बढ़ा रहा है, अधिक चिन्ता की बात तो यह है कि अफगानिस्तान की जमीन का उपयोग आतंकवाद के लिये हो रहा है। एक विकास की ओर अग्रसर शांत देश के लिये ये स्थितियां एवं रोजाना हो रहे आतंकी हमलों में निर्दोष नागरिकों का मारा जाना, भूख-अभाव का बढ़ना, चिन्ताजनक है। भारत यदि इन चिन्ताओं को दूर करने के लिये आगे आया है तो यह एक सराहनीय कदम है।
इस तरह भारत ने अफगानिस्तान को जीवनरक्षक दवाओं की खेप भेज कर न सिर्फ दुनिया के सामने अपना मानवीय पक्ष स्पष्ट किया है, बल्कि अफगानिस्तान के लोगों का दिल जीतने का भी प्रयास किया है और कूटनीतिक दृष्टि से भी बड़ा कदम उठाया है। चीन और अमेरिका दोनों को इससे स्पष्ट संकेत मिल गया है। भारत अभी अफगानिस्तान को पचास हजार टन अनाज और दवाओं की कुछ और खेप भेजने वाला है। यह खेप पाकिस्तान के रास्ते जानी है। पाकिस्तान ने इसके लिए रास्ता दे दिया है, उस पर दोनों तरफ के अधिकारी अंतिम बातचीत के दौर में हैं। तालिबानी हमले की वजह से अफगानिस्तान में बड़ी तबाही मची है, वहां के पारंपरिक कामकाज भी लगभग ठप हैं। ऐसे में वहां के लोगों के लिए भोजन और दवाओं की किल्लत झेलनी पड़ रही है। भारत से पहुंची यह मदद वहां के लोगों के लिए बड़ी राहत पहुंचाएगी। इससे वहां की जनता में भारत के प्रति मानवीय सोच पनपेगी। भारत चाहता है कि अफगानी लोग अहिंसा, शांति, मानवीयता एवं आतंकमुक्ति का जीवन जीये। न अहिंसा आसमान से उतरती है, न शांति धरती से उगती है। इसके लिए पूरे राष्ट्र का एक चरित्र बनाना जरूरी होता है, भारत ऐसी ही कोशिश कर रहा है। वही सोने का पात्र होता है, जिसमें अहिंसा रूपी शेरनी का दूध ठहरता है। वही उर्वरा धरती होती है, जहां शांति का कल्पवृक्ष फलता है। ऐसी संभावनाओं को तलाशते हुए ही भारत सहयोग के लिये आगे आया है।
भारत ने तो अफगानिस्तान का लम्बे समय तक सहयोग किया है। वहां के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो भारत वहां का विकास चाहता है, शांति चाहता है, उन्नत चरित्र गढ़ना चाहता है, वहां उन्नत जीवनशैली चाहता है, हर इंसान को साधन-सुविधाएं, शिक्षा-चिकित्सा देना चाहता है, उस देश का भी भारत के साथ प्रगाढ़ मै़त्री संबंध है, इन सुखद स्थितियों के बीच उस जमीन का उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों के लिये हो, यह कैसे औचित्यपूर्ण हो सकता है? यह तो विरोधाभासी स्थिति है। भारत तो वहां लंबे समय से विकास की बहुआयामी एवं विकासमूलक योजनाओं में सहयोग के लिये तत्पर है। वहां संसद भवन के निर्माण, सड़कों का नेटवर्क खड़ा करने से लेकर बांध, पुलों के निर्माण तक में भारत ने मदद की है। लेकिन अब मुश्किल तालिबान सत्ता को मान्यता देने को लेकर बनी हुई है। दो दशक पहले भी भारत ने तालिबान की सत्ता को मान्यता नहीं दी थी। जाहिर है, इसमें बड़ी अड़चन खुद तालिबान ही है। जब तक तालिबान अपनी आदिम एवं आतंकी सोच नहीं छोड़ता, मानवाधिकारों का सम्मान करना नहीं सीखता, तब तक कौन उसकी मदद के लिए आगे आएगा? अब यह तालिबान पर निर्भर है कि वह गतदिनों दिल्ली में हुए क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद को किस तरह लेता है और कैसे सकारात्मक कदम बढ़ाता है। लेकिन उसकी मानसिकता बदलने तक भारत इंतजार नहीं कर सकता है, इसलिये उसने अफगानी लोगों के सहयोग के लिये अपने कदम बढ़ा दिये हैं, जो सराहनीय है, मानवीय सोच से जुड़े हैं, निश्चित ही इन सहयोगी कदमों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।
प्रेषकः

(ललित गर्ग)
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
फोनः 22727486, 9811051133


बाबरी मस्जिद गिराए जाने पर सपा, बसपा, कांग्रेस ने आंखें मूंद लीं: असदुद्दीन ओवैसी

बाबरी मस्जिद गिराए जाने पर सपा, बसपा, कांग्रेस ने आंखें मूंद लीं: असदुद्दीन ओवैसी

13-Dec-2021

समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस की आलोचना करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को कहा कि बाबरी मस्जिद को गिराए जाने पर उन्होंने आंखें मूंद लीं।

ओवैसी ने यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “मेरी मस्जिद (बाबरी) को गिरा दिया गया। जिन लोगों ने इसे ध्वस्त किया, भारत की नींव और कानून के शासन को बाधित किया … क्या सपा, बसपा या कांग्रेस में से किसी ने कुछ कहा? उन्होंने आंखें मूंद लीं क्योंकि मेरी मस्जिद तोड़ी गई लेकिन उनकी नहीं।”

एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव में 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम गठबंधन बनाने के लिए तैयार है।

सरकार और नीति निर्माण में मुसलमानों के प्रतिनिधित्व पर जोर देते हुए ओवैसी ने कहा, “यादवों ने मुलायम सिंह और अखिलेश की सरकार बनाई। मायावती को दलितों ने मुख्यमंत्री बनाया। ठाकुर और ब्राह्मणों ने उत्तर प्रदेश में वर्तमान भाजपा सरकार बनाई है। अब दलाल यह तय नहीं करेंगे कि मुसलमान वोट कहां डालेंगे। मैं उत्तर प्रदेश के मुसलमानों से कहता हूं कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है और अगर उत्तर प्रदेश के मुसलमान आगे बढ़ना चाहते हैं तो उन्हें कोई नहीं रोक पाएगा।

उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।

उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनावों में, भारतीय जनता पार्टी ने 403 सीटों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में से 312 सीटें हासिल कीं, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) ने 47 सीटें हासिल कीं, बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) ने 19 सीटें जीतीं और कांग्रेस केवल जीतने का प्रबंधन कर सकी। सात सीटें। बाकी सीटों पर अन्य उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया।


छत्तीसगढ़ के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं, जरूरत सिर्फ उन्हें तराशने और अवसर देने की : श्री भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं, जरूरत सिर्फ उन्हें तराशने और अवसर देने की : श्री भूपेश बघेल

11-Dec-2021

छत्तीसगढ़ के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं, जरूरत सिर्फ उन्हें तराशने और अवसर देने की : श्री भूपेश बघेल

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ उनकी प्रतिभा को तराशने और उन्हें अच्छे अवसर प्रदान करने की है। मुख्यमंत्री आज महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद वीर नारायण सिंह के शहादत दिवस पर अपने निवास कार्यालय में आयोजित स्वर्गीय राजीव गांधी बाल भविष्य सुरक्षा प्रयास आवासीय विद्यालय के प्रतिभावान विद्यार्थियों के प्रतिभा सम्मान समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के प्रारम्भ में शहीद वीर नारायण सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम, उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा, संसदीय सचिव श्री द्वारिकाधीश यादव, विधायक श्री देवेंद्र यादव, आदिम जाति कल्याण विभाग के सचिव श्री डी.डी.सिंह, आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी उपस्थित थीं।

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 उल्लेखनीय है कि वर्ष-2021 में प्रयास आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों में से आईआईटी में 27, एनआईटी एवं समकक्ष शैक्षणिक संस्थानों में 35, सीएस फाऊंडेशन में 5, क्लेट में दो, इंजीनियरिंग कॉलेज में 61 विद्यार्थी सफल हुए हैं। मुख्यमंत्री ने सम्मान समारोह में प्रतीक स्वरूप आईआईटी, एन.आई.टी. और समकक्ष शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश प्राप्त करने वाले 10 विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए 50-50 हजार रुपए के चेक प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय राजीव गांधी बाल भविष्य सुरक्षा प्रयास आवासीय विद्यालय के वर्ष 2021-22 के प्रगति प्रतिवेदन का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के नक्सल प्रभावित और अनुसूचित क्षेत्रों के छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन के अच्छे अवसर प्रदान करने के लिए 200 सीटों के साथ वर्ष 2010 में प्रयास आवासीय विद्यालय प्रारंभ किए गए थे। आज प्रदेश में 9 प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें सीटों की संख्या बढ़कर 4000 हो गई है। सीटों की संख्या बढ़ने से अब अधिक विद्यार्थियों को अच्छे अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में मिले अच्छे अवसर का ही परिणाम है कि अब तक प्रयास आवासीय विद्यालयों से आईआईटी तथा समकक्ष संस्थानों में 97 विद्यार्थियों, एनआईटी तथा ट्रिपल आईटी के समकक्ष संस्थानों में 261, सीए, सीएस, सीएमए में 29, इंजीनियरिंग कॉलेजों में 833, मेडिकल कॉलेज में 39 और क्लेट के माध्यम से 3 विद्यार्थी सफलता प्राप्त कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयास आवासीय विद्यालय के विद्यार्थी आज आईआईटी कानपुर, खड़गपुर, बीएचयू, भुवनेश्वर, आईएसएम धनबाद, मंडी, पटना, आईआईएसटी तिरूवंतपुरम आदि संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस वर्ष सफल हुए सभी विद्यार्थियों बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये विद्यार्थी जिन क्षेत्र से आए हैं, वहां के बच्चों को भी पढ़ाई के लिए प्रेरित करें और जिस संस्थान में वे अध्ययनरत हैं, उसमें अच्छा स्थान प्राप्त कर प्रदेश और विद्यालय का नाम रौशन करें।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस अवसर पर वीर नारायण सिंह के दीन-दुखियों और गरीबों के लिए किये गए योगदान को याद करते हुए कहा है कि वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ महतारी के सच्चे सपूत थे। शहीद वीर नारायण सिंह सोनाखान के जमींदार थे। वे लोगों के सुख-दुख में सदैव भागीदार रहते थे। वर्ष 1854-55 जब अकाल पड़ा उस समय उन्होंने कसडोल के मालगुजार से अनाज उधार लेकर प्रजा में बांटा। उन्होंने मालगुजार से कहा कि अगले बरस फसल आने पर अनाज लौटा दिया जाएगा, लेकिन उनकी शिकायत की गई और अंग्रेजों ने उनकी खोजबीन शुरू कर दी। सोनाखान, सराईपाली और बसना में उनकी अंग्रेजों से मुठभेड़ हुई, जिसमें अंग्रेजों को वापस लौटना पड़ा। बाद में मुखबिर की सूचना पर उन्हें गिरफ्तार कर रायपुर के जयस्तंभ चौक पर फांसी दे दी गई।

इस अवसर पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि प्रयास आवासीय विद्यालय के विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से देश के प्रतिष्ठित संस्थानों आईआईटी, एनआईटी, सीए, सीएस, सीएमए, नेशनल लॉ कॉलेज और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्राप्त करने में सफल हुए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस विद्यालय से सफल होकर निकले विद्यार्थी आने वाले विद्यार्थियों के लिए सफलता का पथ प्रशस्त करने में प्रेरक का कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रयास विद्यालय में विद्यार्थी नक्सल प्रभावित जिलों और अनुसूचित क्षेत्रों के स्कूलों में पढ़कर चयन द्वारा प्रवेश लेते हैं। ग्रामीण और आदिवासी अंचलों की पृष्ठ भूमि में पले-बढ़े विद्यार्थियों के लिए उत्कृष्ट कैरियर निर्माण के लिए यह विद्यालय एक बड़ा अवसर और मंच प्रदान करता है। मंत्री डॉ. टेकाम  ने कहा कि इन विद्यालयों के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए राष्ट्रीय प्रतिभा खोज, विज्ञान पहेली, गणित एवं विज्ञान ओलम्पियाड जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में भाग लेकर सफलता प्राप्त की है।

अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के सचिव श्री डी.डी.सिंह ने बताया कि वर्ष 2010 में नक्सल प्रभावित जिलों में अध्ययनरत प्रतिभाशाली बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए इन विद्यालयों की स्थापना की गई। योजना के प्रारंभ में सुदूर नक्सल  प्रभावित 16 जिलों के हाई स्कूल उत्तीर्ण अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को कक्षा 11वीं और 12वीं स्कूली शिक्षा के साथ-साथ प्रदेश के ख्याति प्राप्त अखिल भारतीय स्तर की तकनीकी, चिकित्सा संस्थानों में प्रवेश दिलाने के उद्देश्य से इसका संचालन किया जा रहा था। वर्तमान में इस योजना का विस्तार करते हुए अब यह योजना नक्सल प्रभावित जिलों के साथ-साथ राज्य के समस्त अनुसूचित क्षेत्रों के स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए भी लागू कर दी गई है। इस योजना का लाभ अब 21 जिलांे के अनुसूचित और उप योजना क्षेत्र के विद्यार्थियों को प्राप्त हो रहा है। आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी नेे बताया कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवार के बच्चों को इस विद्यालय में सीधे प्रवेश दिया जाता है। इन विद्यालयों से अधिक से अधिक विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षा में सफल हो। इसके लिए विचार मंथन के बाद रणनीति में परिवर्तन करते हुए शिक्षा सत्र 2021-22 से नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए इन विद्यालयों को गणित, जीव विज्ञान और कॉमर्स इत्यादि पाठ्यक्रम के लिए विशेषीकृत किया गया है। प्रयास आवासीय विद्यालय से आईआईटी में प्रवेशित विद्यार्थी को 40 हजार रूपए प्रति विद्यार्थी प्रति वर्ष प्रोत्साहन स्वरूप और आईआईटी और एनआईटी में प्रवेशित विद्यार्थियों को लैपटाप या लैपटाप के लिए राशि प्रदान की जाती है।


भ्रष्टाचार है बेहतर दुनिया बनाने की बड़ी बाधा

भ्रष्टाचार है बेहतर दुनिया बनाने की बड़ी बाधा

09-Dec-2021

अन्तर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस 9 दिसम्बर, 2021

भ्रष्टाचार है बेहतर दुनिया बनाने की बड़ी बाधा
-ः ललित गर्ग:-

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अन्तर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस प्रतिवर्ष 9 दिसम्बर को पूरे विश्व में मनाया जाता है। भ्रष्टाचार एक दीमक की तरह है जो देश एवं दुनिया को, उसकी अर्थव्यवस्था को और कुल मिलाकर नैतिकता एवं मूल्यों को खोखला कर रहा है। यह उन्नत एवं मूल्याधारित समाज के विकास में बड़ी बाधा है। दुनिया का लगभग हर देश इस समस्या से ग्रसित है। इसीलिये 31 अक्टूबर 2003 को संयुक्त राष्ट्र ने एक भ्रष्टाचार-निरोधी समझौता पारित किया था और तभी से यह दिवस मनाया जाता है।
आसान शब्दों में कहें तो भ्रष्टाचार उन लोगों के द्वारा जिनमें पॉवर होती है एक प्रकार का बेईमान या धोखेबाज आचरण को दर्शाता है। यह समाज की बनावट को भी खराब एवं भ्रष्ट करता है। यह लोगों से उनकी आजादी, स्वास्थ्य, धन और कभी-कभी उनके जीवन को ही खत्म कर देता है। किसी ने सही कहा है कि भ्रष्टाचार एक मीठा जहर है। विश्व भर में हर साल खरबों डॉलर की रकम या तो रिश्वतखोरी या फिर भ्रष्ट तरीकों की भेंट चढ़ जाती है जिससे कानून के शासन की अहमियत तो कम होती ही है, साथ ही मादक पदार्थों, हथियारों और लोगों की अवैध तस्करी, हिंसा, आपराधिक राजनीति एवं आतंकवाद को भी बढ़ावा मिलता है। हर साल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने वाली खरबों डॉलर की ये रकम वैश्विक घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 5 फीसदी के बराबर है। इसके कारण राष्ट्रों की समृद्धि से ज्यादा साख खतरे में पड़ी है। आज हमारे कंधे भी इसीलिये झुक गये कि भ्रष्टाचार का बोझ सहना हमारी आदत हो गयी है। भ्रष्टाचार के नशीले अहसास में रास्ते गलत पकड़ लिये और इसीलिये भ्रष्टाचार की भीड़ में हमारे साथ गलत साथी, संस्कार, सलाह, सहयोग जुड़ते गये। जब सभी कुछ गलत हो तो भला उसका जोड़, बाकी, गुणा या भाग का फल सही कैसे आएगा? तभी भ्रष्टाचार से एक बेहतर दुनिया बनाने के प्रयासों के रास्ते में भारी रुकावट पैदा हो रही है।
भ्रष्टाचार एक गंभीर अपराध है जो सभी समाजों में नैतिक, सामाजिक और आर्थिक विकास को कमजोर करता है। आज के समय में भ्रष्टाचार से कोई देश, क्षेत्र या समुदाय बचा नहीं है। यह दुनिया के सभी हिस्सों में फैल गया है, जो राजनीतिक, सामाजिक या आर्थिक ही नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थानों को भी कमजोर करता है, सरकारी अस्थिरता में योगदान देता है और आर्थिक विकास को भी धीमा करता है, तभी इस विकराल होती समस्या पर नियंत्रण पाने के लिये संयुक्त राष्ट्र ने भ्रष्टाचार निरोध दिवस को आयोजित करने का निश्चय किया।
दुःखद स्थिति है कि भारत अपनी आजादी के अमृत महोत्सव तक पहुंचते हुए भी स्वयं को ईमानदार नहीं बना पाया, चरित्र सम्पन्न राष्ट्र नहीं बन पाया। यह सत्य है कि जब राजनीति भ्रष्ट होती है तो इसकी परछाइयां दूर-दूर तक जाती है। हमारी आजादी की लड़ाई सिर्फ आजादी के लिए थी- ईमानदार एवं आदर्श व्यवस्था के लिए नहीं थी। यही कारण है कि आजादी के बाद बनी सरकारों के भ्रष्टाचार का विष पीते-पीते भारत की जनता बेहाल हो गई। हजारों लोग बेकसूर जेलों में पड़े हैं। रोटी के लिए, शिक्षा के लिये, चिकित्सा के लिये, रोजगार के लिए तरसते हैं। उपचार के लिए अस्पतालों के धक्के खाते हैं। आयुष्मान जैसी योजना भी भारत में भ्रष्टाचार की शिकार हो गई। कुछ सत्तापतियों की सात पीढ़ियों सुरक्षित हो गयी। आज हमारी व्यवस्था चाहे राजनीति की हो, सामाजिक हो, पारिवारिक हो, धार्मिक हो, औद्योगिक हो, शैक्षणिक हो, चरमरा गई है। दोषग्रस्त एवं भ्रष्ट हो गई है। उसमें दुराग्रही इतना तेज चलते हैं कि ईमानदार बहुत पीछे रह जाता है। जो सद्प्रयास किए जा रहे हैं, वे निष्फल हो रहे हैं। प्रगतिशील कदम उठाने वालों ने और समाज सुधारकों ने अगर व्यवस्था सुधारने में मुक्त मन से सहयोग नहीं दिया तो आजादी के कितने ही वर्ष बीत जाये, हमें जैसा होना चाहिए, वैसा नहीं हो पायेंगे, लगातार भ्रष्ट होते चले जायेंगे।
भारत अभी भी विकासशील देशों में से एक है। पूर्ण रूप से विकसित ना होने का सबसे बड़ा कारण यहां देश मे बढ़ता भ्रष्टाचार ही है। भ्रष्टाचार की बढ़ती विभीषिका को नियंत्रित करने के लिये 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबन्दी की घोषणा की थी। इसका असर भी देखने को मिला है। देश में भ्रष्टाचार कम हो रहा है। यह बात विश्वसनीय नहीं लगती, लेकिन ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया’ (टीआईआई) ने अपनी ‘इंडिया करप्शन सर्वे-2019’ नाम से जारी रिपोर्ट में यही दावा किया है। यह एक गैरसरकारी संगठन है, जो भ्रष्टाचार रोधी अभियान चलाने के साथ, भ्रष्टाचार की स्थिति पर वार्षिक सर्वेक्षण करके रिपोर्ट भी देता है। इस संगठन ने पहली बार भ्रष्टाचार कम होने की रिपोर्ट दी है। यह सुखद स्थिति है।
भ्रष्टाचार निरोध दिवस मनाते हुए दुनिया के कतिपय राष्ट्रों ने ईमानदार शासन व्यवस्था देने का उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिनमें भारत में नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश में एक नयी चुस्त-दुरूस्त, पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त कार्यसंस्कृति को जन्म दिया है, इस तथ्य से चाह कर भी मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। न खाऊंगा का प्रधानमंत्री का दावा अपनी जगह कायम है लेकिन न खाने दूंगा वाली हुंकार अभी अपना असर नहीं दिखा पा रही है। सरकार को भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिये सख्ती के साथ-साथ व्यावहारिक कदम उठाने की अपेक्षा है। पिछले 75 वर्षों की भ्रष्ट कार्यसंस्कृति ने देश के विकास को अवरूद्ध किया। आजादी के बाद से अब तक देश में हुये भ्रष्टाचार और घोटालों का हिसाब जोड़ा जाए तो देश में विकास की गंगा बहायी जा सकती थी। दूषित राजनीतिक व्यवस्था, कमजोर विपक्ष और क्षेत्रीय दलों की बढ़ती ताकत ने पूरी व्यवस्था को भ्रष्टाचार के अंधेरे कुएं में धकेलने का काम किया। देखना यह है कि क्या वास्तव में हमारा देश भ्रष्टाचार मुक्त होगा? यह प्रश्न आज देश के हर नागरिक के दिमाग में बार-बार उठ रहा है कि किस प्रकार देश की रगों में बह रहे भ्रष्टाचार के दूषित रक्त से मुक्ति मिलेगी। वर्तमान सरकार की नीति और नियत दोनों देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की है, लेकिन उसका असर दिखना चाहिए।
भारत विश्व में अपने लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिये प्रसिद्ध है लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से इसको भारी क्षति पहुँचती रही है। इसके लिये सबसे ज्यादा जिम्मेदार हमारे यहाँ के राजनीतिज्ञ है जिनको हम अपनी ढ़ेरों उम्मीदों के साथ वोट देते हैं, चुनाव के दौरान ये भी हमें बड़े-बड़े सपने दिखाते हैं लेकिन चुनाव बीतते ही ये अपने असली रंग में आ जाते हैं। कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों से भ्रष्टाचार मुक्ति की आशा करना, अंधेरे में सूई तलाशना है। हमंे यकीन है कि जिस दिन ये राजनीतिज्ञ अपने लालच को छोड़ देंगे, उसी दिन से हमारा देश भ्रष्टाचार मुक्त हो जाएगा। विभिन्न राजनीतिक दल जनता के सेवक बनने की बजाय स्वामी बन बैठे। मोदी ने इस सड़ी-गली और भ्रष्ट व्यवस्था को बदलने का बीड़ा उठाया और उसके परिणाम भी देखने को मिले। प्रधानमंत्री का स्वयं को प्रधानसेवक कहना विपक्ष के लिये जुमलेबाजी का विषय हो सकता है लेकिन मोदी ने लोकतंत्र में लोक को स्वामी होने का एहसास बखूबी कराया है। लोकतंत्र में लोक विश्वास, लोक सम्मान जब ऊर्जा से भर जाए तो लोकतंत्र की सच्ची संकल्पना आकार लेने लगती है। लेकिन प्रश्न यह है कि यही लोक अब तक भ्रष्टाचार के खिलाफ जागृत क्यों नहीं हो रहा है? जन-जागृति के बिना भ्रष्टाचार को समाप्त नहीं किया जा सकता।
लोगों की लालसा, स्वार्थ और सत्ता पाने की चाहत, मानव को भ्रष्टाचार की तरफ ढकेलती है। हमें अपने देश के लिये भ्रष्टाचारमुक्त शासन-व्यवस्था को स्थापित करने के लिये सरदार पटेल, लालबहादुर शास्त्री, अटलबिहारी वाजपेयी, नरेन्द्र मोदी जैसे ईमानदार और भरोसेमंद नेता को चुनना चाहिए क्योंकि केवल उन्हीं जैसे नेताओं ने ही भारत में भ्रष्टाचार को खत्म करने का काम किया। हमारे देश के युवाओं को भी भ्रष्टाचार से लड़ने के लिये आगे आना चाहिये। साथ ही बढ़ते भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिये किसी ठोस कदम की आवश्यकता है। प्रेषकः

(ललित गर्ग)
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फोनः 22727486, 9811051133

 

 


JNU के छात्रों ने 6 दिसंबर की रात एक प्रोटेस्ट मार्च निकाला फिर नारे लगे नहीं सहेंगे हाशिमपुरा, नहीं करेंगे दादरी, फिर बनाओ बाबरी

JNU के छात्रों ने 6 दिसंबर की रात एक प्रोटेस्ट मार्च निकाला फिर नारे लगे नहीं सहेंगे हाशिमपुरा, नहीं करेंगे दादरी, फिर बनाओ बाबरी

08-Dec-2021

JNU के छात्रों ने 6 दिसंबर की रात एक प्रोटेस्ट मार्च निकाला फिर नारे लगे नहीं सहेंगे हाशिमपुरा, नहीं करेंगे दादरी, फिर बनाओ बाबरी

 जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में बाबरी मस्जिद दोबारा बनाने की मांग उठी है। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (जेएनयूएसयू) ने सोमवार 6 दिसंबर की रात कथित तौर पर बाबरी मस्जिद के समर्थन में नारे लगाए और इसे जाने का मामला सामने आया है। इसके साथ ही बाबरी मस्जिद को दोबारा बनाने की मांग भी उठाई गई। जेएनयूएसयू की ओर से 6 दिसंबर की रात एक प्रोटेस्ट मार्च निकाला गया। 6 दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ी गई थी, जिसके खिलाफ यह प्रदर्शन किया गया। इस दौरान JNU छात्रसंघ के कार्यकर्ताओं और यहां मौजूद लेफ्ट संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को दोबारा बनाने की मांग की।
 
इस दौरान छात्रसंघ कार्यकर्ताओं की ओर से “नहीं सहेंगे हाशिमपुरा, नहीं करेंगे दादरी, फिर बनाओ बाबरी” जैसे नारे लगाए गए, बाबरी विध्वंस की घटना के 29 साल बाद जेएनयू कैंपस में छात्र संघ ने इस घटना के विरोध में प्रोटेस्ट मार्च निकाला, जिसमें कहा गया की बाबरी मस्जिद दोबारा से बननी चाहिए।इस प्रदर्शन की कॉल जेएनयूएसयू द्वारा रात को 8:30 बजे दी गई थी। जेएनयू कैंपस के गंगा ढाबा पर रात 8:30 बजे काफी संख्या में लेफ्ट विंग के छात्र जमा हो गए और यहां से यह प्रदर्शन मार्च चंद्रभागा हॉस्टल तक पहुंचा। इस दौरान जेएनयू छात्र संघ के वाइस प्रेसिडेंट साकेत मून ने अपनी स्पीच के दौरान कहा कि बाबरी मस्जिद दोबारा बनाकर उसे इंसाफ लिया जाएगा। जेएनयू कैंपस से उठी बाबरी मस्जिद दोबारा बनाने की मांग को लेकर बीजेपी ने कपिल मिश्रा ने कहा कि, बाबरी दुबारा बनाने का ख्वाब बुनने वालो को ये समझ लेना चाहिए कि 47,000 मंदिरों को अपराधियों, हत्यारों, लुटेरों द्वारा तोड़ा और कब्जाया गया था, अभी एक का हिसाब हुआ हैं संवैधानिक तरीके से मथुरा , काशी और बाकियों पर चर्चा, विचार, आंदोलन, निर्णय अभी अधूरा है।
 


एनटीपीसी लारा द्वारा भू-विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर दी जाए नौकरी: श्री भूपेश बघेल

एनटीपीसी लारा द्वारा भू-विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर दी जाए नौकरी: श्री भूपेश बघेल

07-Dec-2021

मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर एनटीपीसी लारा के भू-विस्थापित 49 पात्र लोगों को नियुक्ति पत्र वितरित
मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को किया सम्बोधित

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के लगातार प्रयासों और विशेष पहल से आज रायगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में एनटीपीसी लारा ताप विद्युत परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित 9 गांवों के 49 भू विस्थापित लोगों को उनकी पात्रता के अनुसार एनटीपीसी लारा द्वारा स्थायी नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री श्री बघेल भी इस कार्यक्रम में अपने निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। उन्होंने नौकरी प्राप्त करने वाले सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उल्लेखनीय है कि इसके पहले भी प्रभावित 6 भू विस्थापितों को नौकरी दी गई थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शेष बचे पदों पर भर्ती के लिए फिर से विज्ञापन निकालकर परीक्षा आयोजित की गई, जिसके माध्यम से आज 49 लोगांे को आज नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस तरह अब तक कुल 55 भू- विस्थापितों को पात्रतानुसार नौकरी दी जा चुकी है।
एनटीपीसी लारा द्वारा भू-विस्थापितों के लिए विभिन्न कुशल ट्रेडों में आईआईटी डिप्लोमा, लैब असिस्टेंट और असिस्टेंट जनरल के 79 पदों पर भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था। इनमें से 22 आरक्षित पदों पर नियुक्ति होना अभी शेष है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने अभी भी शेष बचे हुए भर्ती के 22 पदों पर पात्र भू-विस्थापित लोगों को उनकी योग्यता अनुसार नियुक्ति प्रदान करने के लिए उचित पहल करने के निर्देश आज कार्यक्रम में उपस्थित एनटीपीसी प्रबंधन के अधिकारियों और कलेक्टर रायगढ़ को दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि एनटीपीसी लारा के लिए अधिग्रहित की गई भूमि से प्रभावित हुए भू-विस्थापितों को पात्रतानुसार प्राथमिकता के आधार पर एनटीपीसी लारा में भविष्य में होने वाली भर्तियों में नौकरी दी जानी चाहिए। छत्तीसगढ़ के लोगों को भी भर्ती में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित एनटीपीसी लारा के ईडी श्री आलोक गुप्ता ने मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार प्रभावित भू-विस्थापितों और छत्तीसगढ़ के लोगों को भविष्य में होने वाली भर्तियों में प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया। आज आईआईटी इलेक्ट्रीशियन ट्रेड के पद पर 19, आईआईटी फिटर ट्रेड के पद पर 9, लैब असिस्टेंट कैमेस्ट्री के पद पर 5, डिप्लोमा इलेक्ट्रीकल ट्रेड के 4, डिप्लोमा मैकेनिकल ट्रेड के एक और असिस्टेंट जनरल के 11 पदों पर नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने एनटीपीसी लारा के भू-विस्थापितों को पात्रता अनुसार नान एक्जिक्यूटिव पदों पर नौकरी देने के निर्देश 5 मार्च 2019 को अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारियों, राजस्व मंत्री, मुख्य सचिव, राजस्व सचिव और कलेक्टर रायगढ़ की बैठक मंे दिए थे, जिसके तारतम्य में भू-विस्थापितों के लिए विभिन्न कुशल ट्रेडों में आईआईटी डिप्लोमा, लैब असिस्टेंट और असिस्टेंट जनरल के 79 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। इसके लिए प्रथम चरण में आयोजित लिखित परीक्षा और कौशल परीक्षण के आधार पर 6 उम्मीदवारों को नियुक्ति प्रदान की गई थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर एनटीपीसी लारा द्वारा नवम्बर 2020 में 73 पदों पर भर्ती के लिए पुनः विज्ञापन निकाला गया, जिसके लिए परीक्षा के बाद 49 उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिन्हें आज नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के दौरान विधायक श्री प्रकाश नायक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि एनटीपीसी लारा के भू-विस्थापितों तथा छत्तीसगढ़ के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी दी जानी चाहिए। कलेक्टर रायगढ़ श्री भीम सिंह ने कार्यक्रम में बताया कि एनटीपीसी लारा सुपर क्रिटिकल टेक्नॉलाजी पर आधारित बिजली संयंत्र है, जिसमें 800 मेगावाट क्षमता की 2 यूनिट हैं। इस संयंत्र से बिजली उत्पादन का 50 प्रतिशत हिस्सा छत्तीसगढ़ को मिलता है। उन्होंने बताया कि इस प्लांट के लिए 9 गांवों आरमुड़ा, बोड़ाझरिया, छपोरा, देवलसुर्रा, झिलगीटार, कांदागढ़, लारा, महलोई एवं रियापाली की 2000 एकड़ निजी भूमि अधिग्रहित की गई थी। इससे 2449 किसान प्रभावित हुए हैं। एनटीपीसी द्वारा अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के रूप में 187 करोड़ रूपए की राशि जमा की गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान मंे प्रभावित गांवों के 500 लोग तथा छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के 550 लोग कार्यरत है। इसके अतिरिक्त वाहन मालिकों सहित प्रभावित लोगों को टाउन शिप में दुकाने और पीएपी वेण्डर को कार्य प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से प्रभावित 1789 किसानों ने एक मुश्त पुनर्वास राशि 5 लाख प्रति एकड़ के मान से अधिकतम 25 लाख रूपए तथा 31 प्रभावित किसानों ने 30 वर्ष तक अर्जित भूमि पर 50 हजार रूपए प्रति एकड़ के मान से अधिकतम 5 एकड़ तक के लिए दी जाने वाली वार्षिंक वृत्ति का विकल्प दिया था। दोनों विकल्पों के तहत अब तक प्रभावित किसानों को 118 करोड़ रूपए की राशि प्रदान की जा चुकी है, 688 भू-धारकों की पात्रता का परीक्षण जिला प्रशासन द्वारा किया जाना है। कलेक्टर ने एनटीपीसी द्वारा सीएसआर मद से कराए गए कार्यो की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पुसौर के नये भवन के लिए एनटीपीसी द्वारा 2.64 करोड़ रूपए की राशि दी गई है।     
रायगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में विधायक श्री प्रकाश नायक, कलेक्टर रायगढ़ श्री भीम सिंह, एनटीपीसी लारा के ईडी श्री आलोक गुप्ता, एजीएम एचआर श्री कन्हैया दास सहित नियुक्ति पत्र पाने वाले लोग और उनके परिजन उपस्थित थे।


भारत में लोग “बेहद दर्द” में हैं और अर्थव्यवस्था अभी भी 2019 के स्तर से नीचे है : नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी

भारत में लोग “बेहद दर्द” में हैं और अर्थव्यवस्था अभी भी 2019 के स्तर से नीचे है : नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी

06-Dec-2021

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि भारत में लोग “बेहद दर्द” में हैं और अर्थव्यवस्था अभी भी 2019 के स्तर से नीचे है, लोगों की “छोटी आकांक्षाएं” अब और भी छोटी होती जा रही हैं।

वह विश्वविद्यालय के 11वें वार्षिक दीक्षांत समारोह के दौरान शनिवार रात अमेरिका से गुजरात में अहमदाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों को वस्तुतः संबोधित कर रहे थे, जो ऑनलाइन भी आयोजित किया गया था।

अर्थशास्त्री हाल ही में पश्चिम बंगाल की यात्रा से अपनी टिप्पणियों को साझा कर रहे थे।

“आप (छात्र) ऐसी जगह हैं जहाँ आप वापस दे सकते हैं। समाज को वास्तव में इसकी आवश्यकता है। हम भारत में अत्यधिक पीड़ा के समय में हैं, ”उन्होंने कहा।

बनर्जी ने कहा, “मैंने अभी कुछ समय ग्रामीण पश्चिम बंगाल में बिताया है और आप जिन कहानियों के बारे में सुनते हैं, आप जानते हैं, सभी आकांक्षाएं जो थोड़ी धराशायी हो गई हैं, वे बहुत वास्तविक हैं … छोटी आकांक्षाएं जो अब छोटी हो गई हैं।”

“मुझे लगता है कि हम बहुत दर्द के क्षण में हैं। अर्थव्यवस्था अभी भी 2019 की तुलना में काफी नीचे है। हम नहीं जानते कि कितना नीचे है, लेकिन यह काफी नीचे है। और मैं किसी को दोष नहीं दे रहा हूं, मैं सिर्फ इतना कह रहा हूं, ”अर्थशास्त्री ने कहा, जिन्होंने 2019 में एस्थर डुफ्लो और माइकल क्रेमर के साथ नोबेल पुरस्कार जीता था।

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने करियर के रास्ते चुनने में परिवार या समाज के दबाव के आगे न झुकें, बल्कि जीवन में वह करने का साहस रखें जो वे वास्तव में करना चाहते हैं।

बनर्जी ने दर्शकों को यह भी बताया कि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली में अपने छात्र जीवन के दौरान तिहाड़ जेल में 10 दिन बिताए थे।

“जब मैं जेएनयू छोड़कर हार्वर्ड जाने वाला था, मैं एक छात्र प्रदर्शन में था और फिर मुझे तिहाड़ जेल ले जाया गया, और वहां दस दिनों तक रखा गया। जब मैं बाहर आया, तो बहुत से बुजुर्गों ने मुझसे कहा कि मैंने अपना करियर बर्बाद कर दिया है, और हार्वर्ड या अमेरिका आपको कभी अंदर नहीं आने देंगे। उन्होंने सोचा कि मुझे खेद होना चाहिए, ”उन्होंने कहा।

करियर चुनने के बारे में अपनी बात रखने के लिए, बनर्जी ने बताया कि भारत के दो महान फिल्म निर्माता – सत्यजीत रे और श्याम बेनेगल – अर्थशास्त्र में स्नातक थे, लेकिन उन्होंने एक अलग रास्ता चुना।

“फिर भी, उन्होंने जीवन में अच्छा किया। इसलिए, विशिष्ट प्रशिक्षण के बजाय, जो वास्तव में महत्वपूर्ण है वह यह है कि आप एक जीवंत, विचारशील और खुले इंसान हैं। यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, ”उन्होंने कहा।

दीक्षांत समारोह के दौरान निजी विश्वविद्यालय के चार डॉक्टरेट छात्रों सहित 833 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई।

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आज चक्रवात तूफान 'जवाद' आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा !

आज चक्रवात तूफान 'जवाद' आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा !

04-Dec-2021

आज चक्रवात तूफान 'जवाद' टकराएगा आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा !

आंध्र प्रदेश के तट से आज चक्रवात तूफान 'जवाद' टकराएगा। राज्य में लगातार बारिश दर्ज हो रही है। कुछ स्थानों पर 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं है। इतना ही नहीं प्रदेश की सरकार ने अलर्ट भी जारी कर दिया है। चक्रवात तूफान 'जवाद' को लेकर प्रशासन पहले ही अलर्ट मोड पर है। बंगाल की खाड़ी से उठे इस चक्रवात का असर सबसे ज्यादा आंध्र प्रदेश-ओडिशा और बंगाल में देखने को मिल सकता है। जानमाल के संभावित नुकसान से बचने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार राज्य में अलर्ट घोषित कर दिया है। स्कूल- कालजों के साथ कई ट्रनों को रद कर दिया गया है। इसके अलावा बंगाल और ओडिशा में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है।  ओडिशा के पूरी में भी चक्रवात तूफान जवाद को लेकर चेतावनी जारी की गई है। सभी मछुआरों को समुद्र में ना जाने की सलाह दी गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की माने तो जवाद के आज सुबह उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा तक पहुंचने की संभावना है। इसके बाद पुरी में रविवार को भारी बारिश होने हो सकती है। इस दौरान 80 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। IMD ने यह भी बताया है कि चक्रवाती तूफान अस्थायी अवधि के लिए समुद्र में बड़े तूफान में तब्दील हो जाएगा और 110 किमी प्रति घंटा की गति से हवाएं चल सकती हैं।
 
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम जिले से 3- 4 दिसंबर को लगभग 65 ट्रेनों को रद कर दिया गया है। शुक्रवार को पूर्वी तट रेलवे ने यह जानकारी दी है। पूर्वी तट रेलवे के शीर्ष अधिकारी ए.के. त्रिपाठी ने कहा कि चक्रवात जवाद के चलते इन सभी ट्रेनों का रद किया गया है। तूफान के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी विशाखापट्टनम और श्रीकाकुलम जिलों के सभी स्कूलों को शनिवार तक बंद करने का आदेश दिया है। चक्रवात तूफान से निपटने को लेकर केंद्र व राज्य सरकारें पूरी तरह अलर्ट हैं। चक्रवाती तूफान जवाद के चलते तटीय आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने तीनों राज्यों में रेड अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही इस दौरान उत्तरी महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिमी तटीय इलाकों में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इस बीच, लगभग 46 राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमों को ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में 46 टीमों को तैनात किया गया है। शुक्रवार को कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने चक्रवाती तूफान जवाद से निपटने के लिए राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों और एजेंसियों की तैयारियों की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की।


UP विधानसभा चुनाव : ओवैसी ने साधा निशाना यूपी में 19 फीसदी से ज्यादा मुसलमान हैं, लेकिन आज तक उनका कोई CM नहीं बना

UP विधानसभा चुनाव : ओवैसी ने साधा निशाना यूपी में 19 फीसदी से ज्यादा मुसलमान हैं, लेकिन आज तक उनका कोई CM नहीं बना

04-Dec-2021

UP विधानसभा चुनाव : ओवैसी ने साधा निशाना यूपी में 19 फीसदी से ज्यादा मुसलमान हैं, लेकिन आज तक उनका कोई CM नहीं बना !

नई दिल्ली। UP के विधानसभा चुनाव में 100 सीटों पर लड़ने का ऐलान करने वाले AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। ओवैसी ने 'एजेंडा आज तक' कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि यूपी में 19 फीसदी से ज्यादा मुसलमान हैं, लेकिन आज तक उनका कोई CM नहीं बन पाया है। ओवैसी ने कहा कि कांग्रेस, SP और BSP जैसी पार्टियों ने हमेशा मुसलमानों के वोट यूपी में लिए हैं, लेकिन उनकी कोई लीडरशिप विकसित नहीं हो पाई है। ओवैसी ने कहा कि हम तो ऐसी लैला बन गए हैं, जिसका नाम लिए बिना किसी का काम नहीं चलता है। ओवैसी और मुसलमानों का नाम लेकर सब एक-दूसरे को डराते हैं और वोट बटोरने का काम करते हैं।
 
असदुद्दीन ओवैसी ने सपा सरकार में यादवों को महत्व मिलने और मुसलमानों की उपेक्षा का आरोप लगाया। ओवैसी ने कहा, '10 पर्सेंट यादव दो-दो बार सीएम बन गए। लेकिन 19 पर्सेंट से ज्यादा मुसलमान हैं, हमारा क्या होगा। क्या मुसलमान बैंड बाजे की पार्टी है कि किसी के लिए भी बाजा बजाएगा। मैं मुसलमानों से कह रहा हूं कि अपनी लीडरशिप तैयार करिए। आज य़ूपी में मुस्लिमों के वोट की कोई ताकत नहीं है। मैं चाहता हूं कि जिस तरह से हर समाज ने अपनी लीडरशिप ने बनाई है, उसी तरह हमें भी तैयार करना है। अब अखिलेश कह रहे हैं कि जाट को डिप्टी सीएम बना देंगे, लेकिन 19 पर्सेंट को क्यों नहीं बनाएंगे। AIMIM के लीडर ने कहा कि जाट, कुर्मी और यादव समेत सभी लोगों की लीडरशिप है, लेकिन मुस्लिमों की क्यों नहीं है। यह बड़ा सवाल है। हम इस सवाल का ही जवाब देने का काम कर रहे हैं। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हम सबकी लैला बन चुके हैं। हमारा नाम लिए बिना इनके घरों में चिराग नहीं जलता है। यही नहीं कांग्रेस की लीडरशिप को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इसके टुकड़े हो जाएंगे। राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता को लेकर सवाल पूछने पर ओवैसी ने कहा कि ये कौन हैं, हम उन्हें जानते ही नहीं। गौरतलब है कि ओवैसी ने यूपी में 100 सीटों पर लड़ने का ऐलान किया है। उन्हें लेकर एसपी और कांग्रेस समेत कई दल कह चुके हैं कि ओवैसी बीजेपी की बी टीम हैं। 


यूपी की सियासी फ़िज़ाओं से छटेंगे नफ़रतों के बादल  !

यूपी की सियासी फ़िज़ाओं से छटेंगे नफ़रतों के बादल !

29-Nov-2021

यूपी की सियासी फ़िज़ाओं से छटेंगे नफ़रतों के बादल  !

लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी

राज्य मुख्यालय लखनऊ।क्या 2014 से शुरू हुआ नफ़रतों का सियासी कारोबार 2022 के विधानसभा चुनाव में ख़त्म होने जा रहा है और फिर से वहीं आपसी तालमेल की शुरुआत होने जा रही हैं ऐसे क़यास लगाए जा रहे हैं।सियासत पर बारीक नज़र रखने वाले जानकारों का कहना है कि महंगाई की मार से त्रस्त जनता बुरी तरह कर्रहा रही हैं आम जन की रसोई का बजट बिगड़ गया है महंगाई का नाम आते ही गृहणियों में एक अलग सा दर्द महसूस हो रहा है लेकिन धार्मिक धुर्वीकरण कर बनी सरकारों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है यहीं वजह है कि अब लोगों के दिमाग़ में लग रहे इसके करंट का असर दिखने लगा है बेरोज़गारी की मार से युवा भी हैरान और परेशान हैं सरकार हैडिंग मैनेजमेंट के सहारे ही केंद्र में सात साल और यूपी लगभग पाँच साल पूरे कर चुकीं हैं।पूरब से लेकर पश्चिम तक माहौल सरकार के ख़िलाफ़ बनता दिख रहा है पश्चिम में रालोद का वोटबैंक अगर अपनी पार्टी के साथ चला गया तो यूपी की फ़िज़ाओं से नफ़रतों के बादल छँटने के चांस बढ़ जाते हैं और अगर रालोद अपना वोटबैंक वापिस लाने में कामयाब नहीं होता है तो फिर बहुत कठिन है डगर पनघट।रालोद का वोटबैंक पूरी तरह से वापिस आ गया है यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी वैसे मोटे तौर पर देखा जाए तो उसके वोटबैंक में वापिस होने के लिए छटपटात तो है उनके दिल में यह टिस है कि चौधरी चरण सिंह की विरासत को ज़िंदा रखने के लिए जयंत चौधरी के साथ जाना ही चाहिए लेकिन मोदी की भाजपा का हिन्दू मुसलमान करने का फ़ार्मूला उसे अपनी विरासत को ज़िंदा करने से रोकता है वहीं बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी की समस्या जो लगभग सभी घरों में प्रवेश कर चुकी हैं वह मोदी की भाजपा के धार्मिक धुर्वीकरण के तड़के पर भारी पड़ती दिख रही हैं।वहीं अगडे और पिछड़े वर्ग में भी अपनी चौधराहठ को लेकर जद्दोजहद चल रही हैं पिछड़ा वर्ग बहुत तेज़ी के साथ सपा के साथ लामबंद होता जा रहा है ऐसा सियासी जानकार बता रहे हैं जो मोदी की भाजपा की चिंता का कारण बन रहा है विवादित तीनों कृषि क़ानूनों के साथ बहुत मज़बूती से खड़ी मोदी सरकार को किसानों की ज़िद की वजह से बैकफ़ुट पर आना ही पड़ा जिसके चलते विवादित तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने की घोषणा की गई कैबिनेट से मंज़ूरी ले ली गई है फिर भी किसान आंदोलन को ख़त्म करने को तैयार नहीं हैं उनका कहना है कि एमएसपी पर भी क़ानून बने तब ही आंदोलन को ख़त्म किया जाएगा इस लिए क़ानून रद्द करने का फ़ण्डा भी मोदी सरकार का काम नहीं आ रहा है अगर यहीं हवा चुनाव तक बनी रही तो दस प्रतिशत वोट ऐसा भी होता है जो हवा का रूख देख कर वोटिंग करता है यह और परेशानी का सबब बनेगा।चुनाव आने पर नेताओं में पार्टी बदलने का फ़ैशन चलता है उसमें देखा जाए तो सपा पिछड़े वर्ग के नेताओं को शामिल करने में कामयाब रही हैं जबकि मोदी की भाजपा में पिछले छह महीने में जिन नेताओं ने पार्टी में शामिल होने की घोषणा की उनमें अधिकांश राजपूत वर्ग के नेता हैं।यह सब देखने से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पिछड़ा वर्ग सपा की ओर रूख कर रहा है।एक बात और भी दिख रही हैं कि कहीं यूपी का सियासी संग्राम बंगाल की तर्ज़ पर न चला जाए कि मैदान में सिर्फ़ दो ही पार्टियाँ होगी बाक़ी सब साफ हो जाएगी।ख़ैर यह तो जैसे जैसे चुनाव की तारीख़ें नज़दीक आती जाएगी वैसे-वैसे ही समीकरण भी बदलेंगे हो सकता है मोदी की भाजपा का हिन्दू मुसलमान करने तड़का महंगाई के तड़के पर एक बार फिर भारी पड़ जाए फिलहाल तो मुश्किल लग रहा है लेकिन सियासी संग्राम में कुछ भी संभव है यही होगा ऐसा कहना ग़लत है राजनीति संभावनाओं का घर है।एक और सच कहना उचित होगा मुसलमान सपा की साथ ऐसा चिपक गया है कि सपा नेतृत्व ने उसके नेताओं को जूतों में पानी पिला दिया है उनकी कोई औक़ात नहीं हैं न वह उनसे मिलना पसंद करते हैं और न उनसे बात करना सही भी है जब कोई हमारे साथ हैं ही तो उसकी कयादत की इज़्ज़त करने की क्या ज़रूरत है पश्चिम के एक मुस्लिम नेता जो हमेशा विवादों में रहे ने सपा में शामिल होने के लिए अखिलेश यादव के लगभग पैर तक पकड़ लिए लेकिन वह उनको शामिल करने को तैयार नहीं हैं हर दिन तारीख़ों का ऐलान होता रहता है कि उस तारीख़ में फला नेता सपा में शामिल हो सकते सपा नेतृत्व ने हरी झंडी दे दी है लेकिन वह तारीख़ भी चली जाती हैं और शामिल नहीं किया जाता यही होना भी चाहिए जब तुम्हारी कॉम पहले ही जूते चप्पलों के वहाँ मौजूद हैं तों तुम्हारी क्या ज़रूरत है अब फिर एक तारीख़ का ऐलान किया गया है पता नहीं इस बार भी होगा या नहीं।असल में यह मालूम हुआ है कि उसके शामिल होने से पश्चिम सहित पूरी यूपी में सपा को नुक़सान होने की संभावना है जिसकी वजह से उस नेता को एंट्री नहीं मिल पा रही हैं।यह सियासी बाज़ीगरी है चलतीं रहती हैं देखना यह है कि क्या  यूपी के चुनावी परिणाम अपने साथ देश की सियासी फ़िज़ा बदलने का काम करने जा रहे हैं।
*( लेखक शाह टाइम्स समाचार पत्र के समूह समाचार संपादक एवं मुख्य समन्वयक हैं )* 


प्रकृति-पर्यावरण संरक्षण से ही जीवन की सुरक्षा

प्रकृति-पर्यावरण संरक्षण से ही जीवन की सुरक्षा

27-Nov-2021

विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस-26 नवंबर, 2021
प्रकृति-पर्यावरण संरक्षण से ही जीवन की सुरक्षा

- ललित गर्ग-

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विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस 26 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिवस पर्यावरण के प्रति जागरूक होने और पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने के संबंध में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यूएनईपी के माध्यम से सन् 1992 में पृथ्वी सम्मेलन पर पर्यावरण के प्रति जागरूक होने के लिए विश्व के सभी देश एकत्रित होकर इस के संबंध में सार्थक विचार विमर्श किया था। पिछले करीब तीन दशकों से ऐसा महसूस किया जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण से जुड़ी हुई है। इस सन्दर्भ में ध्यान देने वाली बात है की करीब दस वैश्विक पर्यावरण संधियाँ और करीब सौ के आस-पास क्षेत्रीय और द्विपक्षीय वार्ताएं एवं समझौते संपन्न किये गये हैं। ये सभी सम्मेलन रिओ डी जेनेरियो में किये गए पृथ्वी सम्मलेन जोकि 1992 के संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास कार्यक्रम के आलोक में किये गए हैं। मानवीय क्रियाकलापों की वजह से पृथ्वी पर बहुत सारे प्राकृतिक संसाधनों का विनाश हुआ है। इसी सन्दर्भ को ध्यान में रखते हुए बहुत सारी सरकारों एवं देशों नें इनकी रक्षा एवं उचित दोहन के सन्दर्भ में अनेकों समझौते संपन्न किये हैं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश एवं दुनिया में पर्यावरण संरक्षण के लिये एक सकारात्मक वातावरण बनाया है। जलवायु संकट से निपटने के लिए अमीर एवं शक्तिशाली देशों की उदासीनता एवं लापरवाह रवैया को लेकर भारत ने शक्तिशाली राष्ट्रों के सामने जो चिंता जताई, वह गैरवाजिब नहीं है। ग्लासगो में आयोजित हुए अंतरराष्ट्रीय जलवायु सम्मेलन (सीओपी 26) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बढ़ते पर्यावरण संकट में पिछड़े देशों की मदद की वकालत की ताकि गरीब आबादी सुरक्षित जीवन जी सके। मोदी ने अमीर देशों को स्पष्ट संदेश दिया कि धरती को बचाना उनकी प्राथमिकता होनी ही चाहिए, वे अपनी इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। दरअसल कार्बन उत्सर्जन घटाने के मुद्दे पर अमीर देशों ने जैसा रुख अपनाया हुआ है, वह इस संकट को गहराने वाला है। जलवायु परिवर्तन के घातक प्रभावों ने भारत ही नहीं पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
पर्यावरण के सम्मुख उपस्थित खतरे कितने भयावह एवं जानलेवा है एवं उनके समाधान की दृष्टि से मोदी ने कुछ ठानी है तो उसका स्वागत होना ही चाहिए। क्या कुछ छोटे, खुद कर सकने योग्य कदम नहीं उठाये जा सकते? पर्यावरण संरक्षण में हम हर तरह से सहयोग करने की कोशिश कर सकते। जलवायु परिवर्तन भी विभिन्न प्रकार के भूमि क्षरण का कारण बन रहा है। समुद्र के जलस्तर में वृद्धि, अनियमित वर्षा, असंतुलित मौसम चक्र और तूफान के कारण ऐसा हो रहा है। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, मरुस्थलीकरण, वायु, जल, जंगल, जमीन, ध्वनि, कृषि प्रदूषण जैसी समस्याएं जहां पर्यावरण के लिये गंभीर खतरा बनी हुई है वहीं यदि शुद्ध पानी, शुद्ध हवा, उपजाऊ भूमि, शुद्ध वातावरण एवं शुद्ध वनस्पतियाँ नहीं मिल सकेंगी तो इन सबके बिना हमारा जीवन जीना मुश्किल हो जायेगा। आज आवश्यकता है कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की ओर विशेष ध्यान दिया जाए, जिसमें मुख्यतः धूप, खनिज, वनस्पति, हवा, पानी, वातावरण, भूमि तथा जानवर आदि शामिल हैं। इन संसाधनों का अंधाधुंध दुरुपयोग किया जा रहा है, जिसके कारण ये संसाधन धीरे-धीरे समाप्त होने की कगार पर हैं। इस जटिल होती समस्या की ओर चिन्तीत होना एवं कुछ सार्थक कदम उठाने के लिये पहल करना जीवन की नयी संभावनाओं को उजागर करता है। इंसान की आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती भविष्य में भी सुरक्षित बनी रहे इसके लिये भारत इसमें अग्रणी भूमिका निभा सकता है। क्योंकि भारत के पास समृद्ध विरासत एवं आध्यात्मिक ग्रंथ ऋग्वेद आदि है जो पर्यावरण का आधार रहे हैं।
पिछले 200 साल में हमने पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचाया है, उसे ठीक करना है। पौधों एवं कीट-पतंगों के लगातार कम होती किस्मों ने भी पर्यावरण के सम्मुख गंभीर संकट खड़ा किया है। समूचे विश्व में 2 लाख 40 हजार किस्म के पौधे और 10 लाख 50 हजार प्रजातियों के प्राणी हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजनर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) एक की रिपोर्ट में कहा कि विश्व में जीव-जंतुओं की 47677 विशेष प्रजातियों में से एक तिहाई से अधिक प्रजातियां यानी 15890 प्रजातियों पर विलुप्ति का खतरा मंडरा रहा है। आईयूसीएन की रेड लिस्ट के अनुसार स्तनधारियों की 21 फीसदी, उभयचरों की 30 फीसदी और पक्षियों की 12 फीसदी प्रजातियाँ विलुप्ति की कगार पर हैं। वनस्पतियों की 70 फीसदी प्रजातियों के साथ ताजा पानी में रहने वाले सरिसृपों की 37 फीसदी प्रजातियों और 1147 प्रकार की मछलियों पर भी विलुप्ति का खतरा मंडरा रहा है। ये सब इंसान के लालच और जगलों के कटाव के कारण हुआ है। गंदगी साफ करने में कौआ और गिद्ध प्रमुख हैं। गिद्ध शहरों ही नहीं, जंगलों से खत्म हो गए। 99 प्रतिशत लोग नहीं जानते कि गिद्धों के न रहने से हमने क्या खोया? लोग कहते है कि उल्लू से क्या फायदा, मगर किसान जानते हैं कि वह खेती का मित्र है, जिसका मुख्य भोजन चूहा है। भारतीय संस्कृति में पशु पक्षियों के संरक्षण और संवर्धन की बात है। इसीलिए अधिकांश हिंदू धर्म में देवी-देवताओं के वाहन पशु -पक्षियों को बनाया गया है। एक और बात बड़े खतरे का अहसास कराती है कि एक दशक में विलुप्त प्रजातियों की संख्या पिछले एक हजार वर्ष के दौरान विलुप्त प्रजातियों की संख्या के बराबर है।
पर्यावरण के सम्मुख प्लास्टिक प्रदूषण भी एक गंभीर खतरा है। सरकार ने ठान लिया है कि भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक के लिए कोई जगह नहीं होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूर्व में ही देश को स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने की अपील कर एक महाभियान का शुभारंभ कर चुके हैं। प्रकृति को पस्त करने, मानव जीवन एवं जीव-जन्तुओं के लिये जानलेवा साबित होने के कारण समूची दुनिया बढ़ते प्लास्टिक के उपयोग एवं उसके कचरे से चिन्तित है। जैसाकि सर्वविदित है कि 2015 और 2017 के बीच भारत में पेड़ों और जंगल के दायरे में आठ लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन संबंधी अंतर-सरकारी समिति (आईपीसीसी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विश्व में 23 फीसदी कृषियोग्य भूमि का क्षरण हो चुका है, जबकि भारत में यह हाल 30 फीसदी भूमि का हुआ है। इस आपदा से निपटने के लिए कार्बन उत्सर्जन को रोकना ही काफी नहीं है। इसके लिए खेती में बदलाव करने होंगे, शाकाहार को बढ़ावा देना होगा और जमीन का इस्तेमाल सोच-समझकर करना होगा।
जल, जंगल और जमीन इन तीन तत्वों से प्रकृति का निर्माण होता है। यदि यह तत्व न हों तो प्रकृति इन तीन तत्वों के बिना अधूरी है। विश्व में ज्यादातर समृद्ध देश वही माने जाते हैं जहां इन तीनों तत्वों का बाहुल्य है। बात अगर इन मूलभूत तत्व या संसाधनों की उपलब्धता तक सीमित नहीं है। आधुनिकीकरण के इस दौर में जब इन संसाधनों का अंधाधुन्ध दोहन हो रहा है तो ये तत्व भी खतरे में पड़ गए हैं एवं भूमि की उत्पादकता कम होती जा रही है, पानी की कमी हो रही है। ऊपजाऊ भूमि भी रेगिस्तान में तब्दील हो रही है। तकनीकी तौर पर मरुस्थल उस इलाके को कहते हैं, जहां पेड़ नहीं सिर्फ झाड़ियां उगती हैं। जिन इलाकों में यह भू-जल के खात्मे के चलते हो रहा है, वहां इसे मरुस्थलीकरण का नाम दिया गया है। लेकिन शहरों का दायरा बढ़ने के साथ सड़क, पुल, कारखानों और रेलवे लाइनों के निर्माण से खेतिहर जमीन का खात्मा और बची जमीन की उर्वरा शक्ति कम होना भू-क्षरण का दूसरा रूप है, जिस पर कोई बात ही नहीं होती। बढ़ती जनसंख्या, बढ़ता प्रदूषण, नष्ट होता पर्यावरण, दूषित गैसों से छिद्रित होती ओजोन की ढाल, प्रकृति एवं पर्यावरण का अत्यधिक दोहन- ये सब देश एवं दुनिया के लिए सबसे बडे़ खतरे हैं और इन खतरों का अहसास करना एवं कराना ही विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस का ध्येय था। जब तक व्यक्ति अपने अस्तित्व की तरह दूसरे के अस्तित्व को अपनी सहमति नहीं देगा, तब तक वह उसके प्रति संवेदनशील नहीं बन पाएगा। प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति भी संवेदनशीलता जागना जरूरी है।
प्रेषकः

 (ललित गर्ग)
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
मो. 9811051133

 

 

 


वोटर को लुभाने के लिये मुफ्त की संस्कृति

वोटर को लुभाने के लिये मुफ्त की संस्कृति

25-Nov-2021

वोटर को लुभाने के लिये मुफ्त की संस्कृति

 ललित गर्ग 

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पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देजनर आम आदमी पार्टी के नेता एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पूरी ताकत लगा रहे हैं, मतदाताओं को लुभाने के लिये कई घोषणाएं कर रहे हैं, इनदिनों उनकी ऐसी ही एक घोषणा चर्चा का विषय बनी हुई है जिसमें उन्होंने एलान किया है कि यदि उनकी पार्टी की सरकार बनी, तो राज्य में 18 साल से ऊपर की सभी महिलाओं के खाते में हर महीने 1,000 रुपये डाले जाएंगे। बुजुर्ग महिलाओं को वृद्धा पेंशन के अतिरिक्त यह राशि मिलेगी। इस योजना को उन्होंने भले ही स्त्री सशक्तीकरण से जोड़ा है, लेकिन यह सीधे रूप में पंजाब की महिलाओं को अपने पक्ष में वोट डालने का प्रलोभन है, लोक-लुभावन घोषणा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल बजाकर भारतीय राजनीति में अपना सितारा आजमाने वाले अरविन्द केजरीवाल खैरात बांटने एवं मुफ्त की सुविधाओं की घोषणाएं करके चर्चित हो गये हैं। वैसे हर दल में मुफ्त बांटने की संस्कृति का प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है। लोकतंत्र में इस तरह की बेतूकी एवं अतिश्योक्तिपूर्ण घोषणाएं एवं आश्वासन राजनीति को दूषित करते हैं, जो न केवल घातक है बल्कि एक बड़ी विसंगति का द्योेतक हैं। किसी भी सत्तारूढ पार्टी को जनता की मेहनत की कमाई को लुटाने के लिये नहीं, बल्कि उसका जनहित एवं विकासमूलक कार्यों में उपयोग करने के लिये जिम्मेदारी दी जाती है। इस जिम्मेदारी का सम्यक् निर्वहन करके ही कोई भी सत्तारूढ पार्टी या उसके नेता सत्ता के काबिल बने रह सकते हैं।
केजरीवाल की यह घोषणा अनेक सवालों को खड़ा करती है। क्या इस तरह की घोषणा से किसी तरह का बुनियादी विकास होता है? क्या यह लोकतंत्र की मूल भावना का हनन नहीं है? क्या पंजाब जैसे समृद्ध प्रांत में ऐसी घोषणा की अपेक्षा है? ऐसी कितनी महिलाएं वाकई इस तरह की राशि के लिये जरूरतमंद हैं? सवाल यह भी है कि 18 साल की सीमा क्यों? किसी लोक-कल्याणकारी योजना में एक से 18 साल की बच्चियों के साथ भेदभाव क्यों करना चाहिए? क्योंकि उनके पास वोट का अधिकार नहीं? चुनावी घोषणापत्रों में रेवड़ियां बांटने की प्रवृत्ति कब तक चलेगी? इन प्रश्नों के उत्तर तलाशना इसलिये जरूरी हो गया है कि सभी राजनीतिक दल विकास को भूल कर अब ऐसी खेरात बांटने एवं मुफ्त की संस्कृति को पनपाने में लगे हैं।
यह कैसा लोकतांत्रिक ढ़ांचा बन रहा है जिसमें पार्टियां अपनी सीमा से कहीं आगे बढ़कर लोक-लुभावन वादे करने लगी हैं, उसे किसी भी तरह से जनहित में नहीं कहा जा सकता। बेहिसाब लोक-लुभावन घोषणाएं और पूरे न हो सकने वाले आश्वासन पार्टियों को तात्कालिक लाभ तो जरूर पहुंचा सकते हैं, पर इससे देश के दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक हालात पर प्रतिकूल असर पड़ने की भी आशंका है। इससे विकास योजनाओं के पंगु होने एवं जनता में मुफ्तखोरी की मानसिकता पांव पसारने लगी है। प्रश्न है कि राजनीतिक पार्टियां एवं राजनेता सत्ता के नशे में डूबकर इतने गैरजिम्मेवार एवं स्वार्थी कैसे हो सकते है?
प्रश्न है कि क्या सार्वजनिक संसाधन किसी को बिल्कुल मुफ्त में उपलब्ध कराए जाने चाहिए? क्या जनधन को चाहे जैसे खर्च करने का सरकारों को अधिकार है? तब, जब सरकारें आर्थिक रूप से आरामदेह स्थिति में न हों। यह प्रवृत्ति राजनीतिक लाभ से प्रेरित तो है ही, सांस्थानिक विफलता को भी ढकती है, और इसे किसी एक पार्टी या सरकार तक सीमित नहीं रखा जा सकता। कोई सरकार कैंपेन चलाकर आम आदमी की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये यह बताने में खर्च कर देती हैं कि किस तरह उन्होंने देश को चमका दिया है। इस तरह का बड़बोलेपन एवं मुफ्त की संस्कृति को पढ़े-लिखे बेरोजगारों ने अपना अपमान समझा। कई बार सरकारों के पास इतने संसाधन नहीं होते कि वे अपने लोगों के अभाव, भूख, बेरोजगारी, प्रदूषण जैसी विपदाओं से बचा सकें। लेकिन जब उनके पास इन मूलभूत जनसमस्याओं के निदान के लिये धन नहीं होता है तो वे मुफ्त में सुविधाएं कैसे बांटते हैं? क्यों करोड़ों-अरबों रूपये अपने प्रचार-प्रसार में खर्च करते हैं?
दक्षिण भारत में, खासकर तमिलनाडु से चली यह मुफ्त बांटने की परम्परा अब लगभग समूचे राष्ट्र मेें हावी है। अर्थव्यवस्था और राज्य की माली हालत को ताक पर रखकर लगभग सभी पार्टियों व सरकारों ने गहने, लैपटॉप, मंगलसूत्र, टीवी, स्मार्टफोन से लेकर चावल, दूध, घी तक बांटा है या बांटने का वादा किया है। यह मुफ्तखोरी की पराकाष्ठा है। मुफ्त दवा, मुफ्त जाँच, लगभग मुफ्त राशन, मुफ्त शिक्षा, मुफ्त विवाह, मुफ्त जमीन के पट्टे, मुफ्त मकान बनाने के पैसे, बच्चा पैदा करने पर पैसे, बच्चा पैदा नहीं (नसबंदी) करने पर पैसे, स्कूल में खाना मुफ्त, मुफ्त जैसी बिजली 200 रुपए महीना, मुफ्त तीर्थ यात्रा, मुफ्त पानी। जन्म से लेकर मृत्यु तक सब मुफ्त। मुफ्त बाँटने की होड़ मची है, फिर कोई काम क्यों करेगा? मुफ्त बांटने की संस्कृति से देश का विकास कैसे होगा? पिछले दस सालों से लेकर आगे बीस सालों में एक ऐसी पूरी पीढ़ी तैयार हो रही है या हमारे नेता ऐसी पीढ़ी निर्मित कर रहे हैं, जो पूर्णतया मुफ्त खोर होगी। अगर आप उनको काम करने को कहेंगे तो वे गाली देकर कहेंगे, कि सरकार क्या कर रही है?
विडम्बना एवं विसंगति की हदें पार हो रही है। ये मुफ्त एवं खैरात कोई भी पार्टी अपने फंड से नहीं देती। टैक्स दाताओं का पैसा इस्तेमाल करती है। हम ’नागरिक नहीं परजीवी’ तैयार कर रहे हैं। देश का टैक्स दाता अल्पसंख्यक वर्ग मुफ्त खोर बहुसंख्यक समाज को कब तक पालेगा? जब ये आर्थिक समीकरण फैल होगा तब ये मुफ्त खोर पीढ़ी बीस तीस साल की हो चुकी होगी। जिसने जीवन में कभी मेहनत की रोटी नहीं खाई होगी, वह हमेशा मुफ्त की खायेगा। नहीं मिलने पर, ये पीढ़ी नक्सली बन जाएगी, उग्रवादी बन जाएगी, पर काम नहीं कर पाएगी। यह कैसा समाज निर्मित कर रहे हैं? यह कैसी विसंगतिपूर्ण राजनीति है? राजनीति छोड़कर, गम्भीरता से चिंतन करने की जरूरत है।
निश्चित रूप से पंजाब की गरीब महिलाओं को ऐसी किसी योजना से लाभ होगा, लेकिन प्रश्न है कि क्या पंजाब में सभी गरीब ही महिलाएं हैं? फिर अमीर एवं समृद्ध महिलाओं को ऐसी सहायता पहुंचाकर केजरीवालजी क्या जताना चाहते हैं? जैसाकि दिल्ली में प्रत्येक परिवार को हर महीने 200 इकाई तक मुफ्त बिजली और 20 हजार लीटर पानी के वादे ने दिल्ली के विकास को अवरुद्ध कर दिया है? सड़के टूटी है, कोई नयी विकास योजना सामने नहीं आयी है। भले ही ऐसी स्थितियों से आम आदमी पार्टी ने लगातार दो चुनावों में शानदार सफलता हासिल की है। लेकिन उसने ऐसी परम्परा का सूत्रपात भी किया है कि उससे प्रेरित होकर उन प्रदेशों की राजनीतिक पार्टियों में भी हास्यास्पद स्तर तक मुफ्त सुविधाओं के वादे की होड़ लगने लगी है, जिन्हें आर्थिक रूप से बीमारू प्रदेशों में गिना जाता है।
वर्तमान दौर की सत्ता लालसा की चिंगारी इतनी प्रस्फुटित हो चुकी है, सत्ता के रसोस्वादन के लिए जनता और व्यवस्था को पंगु बनाने की राजनीति चल रही है। राजनीतिक दलों की बही-खाते से सामाजिक सुधार, रोजगार, नये उद्यमों का सृजन, खेती को प्रोत्साहन, ग्रामीण जीवन के पुनरुत्थान की प्राथमिक जिम्मेवारियां नदारद हो चुकी है, बिना मेहंदी लगे ही हाथ पीले करने की फिराक में सभी राजनीतिक दल जुट चुके हैं। जनता को मुफ्तखोरी की लत से बचाने की जगह उसकी गिरफ्त में कर अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करने में लगे हैं। लोकतंत्र में लोगों को नकारा, आलसी, लोभी, अकर्मण्य, लुंज बनाना ही क्या राजनीतिक कर्त्ता-धर्त्ताओं की मिसाल है? अपना हित एवं स्वार्थ-साधना ही सर्वव्यापी हो चला है? हकीकत में मुफ्त तरीकों से हम एक ऐसे समाज को जन्म देंगे जो उत्पादक नहीं बनकर आश्रित और अकर्मण्य होगा और इसका सीधा असर देश की पारिस्थितिकी और प्रगति, दोनों पर पड़ेगा। सवाल यह खड़ा होता है कि इस अनैतिक राजनीति का हम कब तक साथ देते रहेंगे? इस पर अंकुश लगाने का पहला दायित्व तो हम जनता पर ही है। स्वस्थ एवं आदर्श लोकतंत्र में सरकारों का पहला दायित्व यही है कि वे ऐसी योजनाएं लागू करें, जो सर्वांगीण विकास कर सकें। प्रेषकः

(ललित गर्ग)
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
फोनः 22727486, 9811051133