कोरोना वायरस से  घर से काम करने को लेकर जागरूकता जरुरी!

कोरोना वायरस से घर से काम करने को लेकर जागरूकता जरुरी!

21-Mar-2020

कोराेना वायरस तेजी से भारत में पैर पसारता ही जा रहा है। भारत में कोरोना वायरस से पीड़ितों की संख्या 271 तक पहुंच गई हैं।

एजेंसी की  खबर के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि भारत में कोरोना वायरस से अब तक 4 लोगों की मौत हो गई है। जबकि संक्रमितों के संपर्क में आने वाले 6,700 से अधिक लोगों को कड़ी निगरानी में रखा गया है।
सैन्य मुख्यालय में तैनात 35 फीसदी अधिकारी और 50 प्रतिशत जूनियर कमीशंड अधिकारी (JCO) 23 मार्च से एक सप्ताह तक घर से कमा करेंगे। अधिकारियों और जेसीओ का दूसरा समूह 30 मार्च से घर से काम होगा।

सेना ने कहा कि समूहों को एक दूसरे से मिलने से बचाया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे कार्य के समय हर वक्त फोन और इलेक्ट्रानिक माध्यमों पर उपलब्ध रहें।
मुख्यालय के प्रवेश और निकास द्वारों पर भीड़ से बचने के लिए सैन्य कर्मियों को अलग-अलग ड्यूटी टाइम पर बुलाने का निर्णय किया है।
कोरोना वायरस से निपटने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान कर दिया है। रोजाना कमाने वाले मजदूरों के लिए 1 हजार रुपए का भत्ता दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से जनता कर्फ्यू रविवार को लगाने का आह्वान किया है। इसी को ध्यान में रखकर भारतीय रेलवे ने 3700 ट्रेनें रद्द कर दी हैं और इंडिगो और गोएयर ने 1000 विमानों को स्थगित कर दिया है।
मंत्रालय ने बताया कि देश में कोरोना वायरस से संक्रमितों में 32 विदेशी हैं, जिनमें 17 इतालवी, तीन फिलीपीन के, दो ब्रिटेन और एक-एक कनाडा, इंडोनेशिया और सिंगापुर का निवासी है। इनमें अबतक दिल्ली, कर्नाटक, पंजाब और महाराष्ट्र में हुई चार मौतें भी शामिल है।

गायिका कनिका कपूर के खिलाफ यूपी सरकार ने मामला दर्ज कर लिया है। कनिका 15 मार्च को लंदन से वापस आई थीं। मगर एयरपोर्ट पर उन्होंने अपना चेकअप नहीं कराने का आरोप है।

इसी बात पर यूपी सरकार ने उनपर सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है, उनपर कानूनी कार्रवाई कर दी गई है। कनिका पर संवेदनशील मुद्दे पर जानकारी छिपाने के आरोप में कार्रवाई की गई है।
शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में पहली बार कोरोना वायरस के पॉजिटिव सामने आए। हिमाचल में 2 तो मध्य प्रदेश में 4 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए।
केरल में अभी तक कोरोना वायरस के मरीजों के 40 मामलों की पुष्टि हो गई है। यहां 24 घंटे के अंदर यहां 12 नए मामले सामने आए।
गुजरात में भी कोरोना वायरस पैर पसारता जा रहा है। पिछले 24 घंटे में यहां इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 7 पर पहुंच गई।
अहमदाबाद में 3, वडोदरा में 2, सूरत और राजकोट में 1-1 मामले सामने आए। वहीं, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भी एक-एक नए मामले की पुष्टि हो गई है।


मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा: CAA किसी का हनन नहीं करता

मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा: CAA किसी का हनन नहीं करता

18-Mar-2020

केंद्र ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में दावा किया कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA), 2019 संविधान में प्रदत्त किसी भी मौलिक अधिकार का हनन नहीं करता है. केंद्र ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपने 129 पेज के जवाब में नागरिकता संशोधन कानून को वैध बताया और कहा कि इसके द्वारा किसी भी प्रकार की संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन होने का सवाल ही नहीं है.
केन्द्र की ओर से गृह मंत्रालय में निदेशक बीसी जोशी ने यह हलफनामा दाखिल किया

केंद्र ने हलफनामे में कहा कि यह कानून कार्यपालिका को किसी भी प्रकार के मनमाने और अनियंत्रित अधिकार प्रदान नहीं करता है, क्योंकि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों को इस कानून के अंतर्गत विर्निदिष्ट तरीके से ही नागरिकता प्रदान की जाएगी. केन्द्र की ओर से गृह मंत्रालय में निदेशक बीसी जोशी ने यह हलफनामा दाखिल किया है.
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 18 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता का परीक्षण करने का निश्चय किया था, लेकिन उसे इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था. संशोधित नागरिकता कानून में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में कथित रूप से उत्पीड़न का शिकार हुये हिन्दू, सिख, बौद्ध, ईसाई, जैन और पारसी अल्पसंख्यक समुदाय के उन सदस्यों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है जो 31 दिसंबर, 2014 तक यहां आ गये थे.

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ केरल और राजस्थान सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 का सहारा लेते हुये वाद दायर किया है जबकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, माकपा, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा, कांग्रेस के जयराम रमेश, द्रमुक मुन्नेत्र कषगम, एआईएमआईएम, भाकपा और कई अन्य संगठनों ने 160 से अधिक याचिकायें शीर्ष अदालत में दायर की गयी हैं.


 सुप्रसिद्ध चर्चित कार्टूनिस्ट काक साहब के जन्मदिवस पर विशेष !

सुप्रसिद्ध चर्चित कार्टूनिस्ट काक साहब के जन्मदिवस पर विशेष !

17-Mar-2020

अरविंद गौर का लेख

अपने समय के सुप्रसिद्ध चर्चित कार्टूनिस्ट काक आज 80 के हो गए। आदरणीय काक साहब को जन्म दिन पर हार्दिक शुभकामनाएं। आज की पीढ़ी इस नाम से ज्यादा परिचित ना हो, पर 1983 से 1990 के थोड़ा आगे तक का एक ऐसा भी दौर था, जब ज़्यादातर पाठक अखबार हाथ में आते ही काक का कार्टून पहले देखते थे, हेडलाइन बाद में पढ़ते थे। उनकी सेंस ऑफ ह्यूमर और कटाक्ष में गजब की ताजगी थी। उनके कार्टूनों मे रोजाना की देशव्यापी राजनीतिक  हलचलों का पोस्टमार्टम दिखता था।
उनकी तीखी 'काक' दृष्टि वाले करारे कार्टून शुरुआत मे जनसत्ता में छपते थे। बाद में काक ने नवभारत टाइम्स ज्वाइन कर लिया। हिंदी पत्रकारिता के दिग्गज प्रभाष जोशी से लेकर राजेन्द्र माथुर और सुरेन्द्र प्रताप सिंह तक उनके कायल थे।
उस समय काक स्टार थे। यह वह वक्त था, जब जनसत्ता में तेज तर्रार खोजी और खांटी पत्रकारिता की नई जमीन तैयार हो रही थी। काक के कार्टून पहले पेज पर प्रकाशित हो रहे थे। काक पहले दैनिक जागरण, धर्मयुग से लेकर दिनमान और शंकर वीकली में छप चुके थे, पर जनसत्ता में नियमित प्रकाशित बेबाक और तीक्ष्ण कार्टूनों से उन्हें देशव्यापी पहचान मिली। तभी 1985 में अचानक उन्होंने जनसत्ता छोड़ नवभारत टाइम्स ज्वाइन कर लिया। कारण कुछ भी रहा हो, पर उनका जाना हमारे जैसे जनसत्ता के हजारों पाठकों के लिए पीड़ादायक था।
उन दिनों मैं थियेटर के साथ साथ फ्रीलांस पत्रकारिता करता यहां वहां भटकता रहता था। काक सेलिब्रिटी थे, वो मुझे शायद ही पहचानते हो, पर हम खफा थे, सो कुछ दिनों तक सामने दिखने पर भी पहले की तरह भागकर नमस्ते करने की कोशिश, चाहकर भी नहीं हुई। पर उनके कार्टूनों का नशा था, सो अब घर में दो अखबार आने शुरू हो गए। फिर वही रोजाना सुबह उनके कार्टूनों को देखकर ही खबरों को पढ़ने का सिलसिला शुरू हुआ।
ऐसा ही कुछ दिवंगत सुथीर तैलंग के नवभारत टाइम्स से अंग्रेजी के हिन्दुस्तान टाइम्स मे जाने के बाद भी हुआ था। हिन्दुस्तान टाइम्स उनकी वजह से ही घर में आना शुरू हुआ था।
यह वह समय था जब हिंदी अखबारों में युवा कार्टूनिस्ट अपनी महत्वपूर्ण जगह बनाने लगे थे। सुधीर तैलंग, इरफान, राजेन्द्र धोड़पकर से लेकर चंदर तक कार्टूनिस्टों की नई जमीन तैयार कर रहे थे। इन सबका गजब का फैन क्लब बन रहा था। राजनैतिक कार्टून्स को लोकप्रियता दिलाने में इस नई पीढ़ी का अद्भूत योगदान है।
बाद में इससे आगे की  हिंदी अखबारों की दास्तानें, विशुद्ध व्यापारीकरण, उत्थान-पतन के साथ भटकाव, बिखराव के क़िस्से है। आज इसका प्रभाव दैनिक अखबारों की खबरों से लेकर कार्टूनों तक भी दिखता है। 

खैर बात काक साहब को जन्म दिन की बधाई से शुरू हुई थी। सो उनका असली नाम और परिचय भी जान लिजिए। काक का जन्मजात नाम हरीश चंद्र शुक्ल (काक)  है। काक उनका बतौर कार्टूनिस्ट सिग्नेचर है।  
इनका जन्म 16 मार्च 1940 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव के गाँव पुरा में हुआ था। वह पेशे से भूतपूर्व मैकेनिकल इंजीनियर थे। काक जी के पिता, शोभा नाथ शुक्ला, एक स्वतंत्रता सेनानी थे।
अखबारों से सेवानिवृत्त होने के बाद  काक साहब आज भी लगातार कार्टून बना रहे हैं। गाहे-बगाहे अभी भी उनके पेज पर जाकर कार्टून देखता रहता हूं। हम उनके छोटे पर पक्के वाले पुराने फैन हैं। उनके स्वस्थ और खुशहाल जिंदगी की हार्दिक मंगलकामनाएं। 
काक साहब का पेज  Cartoonist : काक

सौजन्य सै क़ासिन लखनऊ 


एन पी आर, सी ए ए, एन आर सी या अमित शाह- D कौन?

एन पी आर, सी ए ए, एन आर सी या अमित शाह- D कौन?

15-Mar-2020

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भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि एन पी आर में कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा और किसी के नाम के आगे D अर्थात डाउटफुल नहीं लिखा जाएगा, यह बयान कोई माने या न माने निश्चित रूप से तीन महीने से चल रहे आंदोलन के दबाव तथा साथ ही साथ अंतराष्ट्रीय स्तर के दबाव का परिणाम है,लेकिन जबानी बयानबाजी की ना तो कोई हैसियत होती है और ना ही कोई भरोसा। वैसे भी भाजपा सरकार क़लाबाज़ी में माहिर है और आज के भारत में D का बोलबाला है। नौकरी D, अमन- सुकून-चैन D, एकता एवं अखंडता D, अर्थव्यवस्था D, रोजगार D, सुरक्षा D, महिला उत्थान D, सबकुछ D अर्थात डाउटफुल है।
एनपीआर का आधार नागरिकता नियम 2003 का अनुच्छेद 4 है, जिसके अनुसार एनपीआर एनआरसी का पहला कदम है। 31 जुलाई, 2019 को,केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार देश भर में एनआरसी करने के लिए केंद्र सरकार तैयार है,उससे पहले एनपीआर अपडेट किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 14 जून 2014 से 31 जुलाई 2019 तक 9 बार लोकसभा और राज्यसभा में गृह मंत्रालय द्वारा यह कहा गया कि पहले एनपीआर किया जाएगा और फिर एनआरसी तैयार की जाएगी।
*अब नियम देखिए और सरकार की पैतरेबाजी समझिए।

NPR 2020 मैनुअल और नागरिकता नियम 2003 खंड 4 में कहा गया है कि NPR करने वाले अधिकारी को जिसकी नागरिकता पर संदेह होगा वह उस व्यक्ति के सामने D अर्थात संदिग्ध नागरिक(डाउटफुल) लिखने का पूर्ण अधिकार है। साथ ही साथ यह भी लिखा है कि यदि कोई व्यक्ति किसी नागरिक की नागरिकता पर आपत्ति करता है, तो मजिस्ट्रेट या रजिस्ट्रार उस नागरिक को संदिग्ध घोषित करेगा और 30 दिनों के भीतर उसकी नागरिकता साबित करने के लिए उसे एक नोटिस भेजा जाएगा। यदि वह फिर भी नागरिकता साबित नहीं कर पाता तो उसकी जमीन, जायदाद, बैंक बैलेंस आदि सबकुछ सीज कर दिया जाएगा।
यह कानून न होकर एक मज़ाक है जहां दुश्मनी निभाने वाले लोगों के लिए एक मौका सरकार ने दे दिया।
2020 एनपीआर में,आठ अतिरिक्त डेटा फ़ील्ड हैं जो माता-पिता के जन्म और जन्म की तारीख,एक व्यक्ति के वर्तमान और स्थायी पता,मातृ भाषा और राष्ट्रीयता के बारे में पूछते हैं। साथ ही,शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों को जिन्हें देश भर में अब तक प्रशिक्षित किया गया है। यह कहा जा रहा है कि जिस व्यक्ति की मातृभाषा उसके आवासीय क्षेत्र के अनुसार नहीं है, उसके नाम के सामने D लिखा जाए,साथ ही उस व्यक्ति या उसके माता-पिता के सामने भी D लिखा जाएगा जिसकी जन्म तिथि या जन्म स्थान संदिग्ध है।

अब इस विवरण और बयान में अंतर साफ दिखाई दे रहा है जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा को गुमराह किया है और कुछ नहीं। वैसे भी पिछले पांच सालों का अनुभव अच्छा नहीं रहा जनता के लिए इसलिए कोई भरोसा नहीं कर रहा है। दूसरी बात यह है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव में है, विदेशों में भी भारत की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इसलिए वह इस तरह का बयान देकर माहौल को सामान्य करना चाहते हैं। काले कानून के बहिष्कार अभियान और देशव्यापी विरोध प्रदर्शन को समाप्त करने के लिए शायद यह बयान दिया गया है।

बहरहाल गृह मंत्री यदि अपने बयान के प्रति ईमानदार हैं और देशवासियों से प्रेम करते हैं तो जनता में उत्पन्न भय को ख़त्म करें जिसके लिए
1.नागरिकता नियम 2003 सरकार के अनुच्छेद 3,4,5 के नियम को समाप्त करें ।
2.गृह मंत्रालय अधिसूचना जारी करे जिसमें किसी भी नागरिक को एनपीआर में संदिग्ध नहीं मानने का आदेश हो।
3.सरकार को एनपीआर 2020 के मैनुअल और प्रश्नों को वापस लेना चाहिए और एक आदेश पारित करना चाहिए कि किसी भी नागरिक से कोई कागज नहीं मांगा जाएगा,न ही किसी को संदिग्ध बनाया जाएगा।
4.गृह मंत्रालय एक नया गजट नोटिफिकेशन जारी करे जिसमें कहा जाए कि एनआरसी नहीं लायेंगे। 

सरकार को एनपीआर के उद्देश्य को स्पष्ट करना चाहिए, क्योंकि वास्तव में इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत एवं राज्य सभा में लिखित बयान देना चाहिए जिससे जनता को यकीन आये। 
मैं अपने देश के गृह मंत्री से निवेदन करना चाहता हूं कि आप गृह मंत्री होने के कारण देशहित में कदम उठाएं।
यदि गृह मंत्री इन मांगों को स्वीकार करते हैं और उन्हें लिखित रूप में जारी करते हैं, तो यह स्वागत योग्य है,अन्यथा एनपीआर का बहिष्कार पूरे देश में जोरों पर है और आगे भी जारी रहेगा क्योंकि एनपीआर का आधार नागरिकता नियम 2003 है,जो एनआरसी का पहला कदम है और एन आर सी भारतीय नागरिकों के जनहित के खिलाफ है,साथ ही मानव अधिकारों का हनन और गोपनीयता के अधिकार को छीनने वाला है।
आंखें खोलो। यह बात जनता और सरकार दोनों के लिए है। जनता के लिए इसलिए क्योंकि जागो तो सवेरा है, सरकार के लिए इसलिए क्योंकि जनता से टकराने वाले कभी कामयाब नही हुए। कहीं ऐसा न हो कि जनता सरकार के आगे D लिख दे।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com

 


ज्योतिरादित्य सिन्धिया और मध्यप्रदेश की सियासत कही साज़िश का शिकार तो नहीं ?

ज्योतिरादित्य सिन्धिया और मध्यप्रदेश की सियासत कही साज़िश का शिकार तो नहीं ?

14-Mar-2020

लेख : एम.एच.जकरीया 

मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार को बड़ा झटका लगा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया । ऐसी क्या मज़बूरी थी की ज्योतिआदित्य सिंधिया की राजनीतिक शुरुवात कांग्रेस से शुरू हुई और पिता माधव राव सिंधिया के आकस्मिक दुर्घटना में निधन होने के बाद अपने पिता के स्थान पर ग्वालियर और गुना से अपनी राजनीति के सफर की शुरुवात की ज्योतिरादित्य बीते 18 सालों से कांग्रेस के साथ रहे हैं. उनके पिता माधवराव सिंधिया भी पार्टी के आला नेताओं में शुमार किए जाते थे. 30 सितंबर 2001 को ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया की उत्तर प्रदेश में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई. वे मध्य प्रदेश की गुना सीट से सांसद थे.

2001 में पिता माधवराव के निधन के तीन महीने बाद ज्योतिरादित्य कांग्रेस में शामिल हो गए और इसके अगले साल उन्होंने गुना से चुनाव लड़ा जहाँ की सीट उनके पिता के निधन से ख़ाली हो गई थी. वो भारी बहुमत से जीते. 2002 की जीत के बाद वो 2004, 2009 और 2014 में भी सांसद निर्वाचित हुए. मगर 2019 के चुनाव में वे अपने ही एक पूर्व निजी सचिव केपीएस यादव से हार गए. केपीएस यादव ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था.

ज्योतिरादित्य केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकारों (2004-2014) में मंत्री रहे. 2007 में उन्हें संचार और सूचना तकनीक मामलों का मंत्री बनाया गया, 2009 में वे वाणिज्य व उद्योग मामलों के राज्य मंत्री बने और 2014 में वे ऊर्जा मंत्री बने.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ ज्योतिरादित्य की नज़दीकी कई मौक़ों पर साफ़ दिखाई दी. 2014  के चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद भी दोनों नेता कई बार साथ दिखे थे. लेकिन मध्य प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ उनके रिश्ते उतने मधुर नहीं रहे. वो पहले भी राज्य में सरकार के कामकाज से नाराज़गी जता चुके थे लेकिन ये कोई इतना बड़ा मसला नहीं था यूँ तो कांग्रेस के कई दिग्गज बड़े नेता चुनाव हार चुके है जिसमे पी चिदंबरम भी है जिन्हे कई तरह की जांच और जेल जाना पड़ा था लेकिन उन्होंने समझौता नहीं किया क्या  ज्योतिरादित्य भी किसी दबाव में थे ?

क्योकि इतना बड़ा फैसला नासमझी भरा तो नहीं कहा जा सकता है जो वर्षो पुरानी अपनी स्वतः की राजनीति को छेड़ने का प्रयास करे क्योकि वे बेहतर जानते है की उन्हें और उनके सहयोगियों को भारतीय जनता पार्टी में ज़ीरो से शुरुवात करनी होगी क्योकि मध्यप्रदेश की राजनीति में पहले से ही कई बड़े राजनीतिक दिग्गज मौजूद है क्या उन्हें कांग्रेस जैसा सम्मान मिल पायेगा क्या वैसा स्थान भारतीय जनता पार्टी म ज्योतिआदित्य सिंधिया बना सकेंगे ?

क्योकि कांग्रेस को उनके पिता माधवराव सिंधिया ने भी छोड़कर देखा था परिणाम क्या हुआ सबने देखा था ।  तो क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया किसी साजिश का शिकार हो गए है या किसी बड़े दबाव के चलते उन्हें कांग्रेस छोड़ने को मज़बूर होना पड़ा है क्योकि सामने राज्यसभा के चुनाव है और वर्तमान केंद्र सरकार हर तरह से राज्यों में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहती है और उसके लिए हर तरह के हथकंडे अपना रही है गोवा, कर्नाटक, असम, कई उदाहरण सामने देखे जा सकते है और जानकारी के अनुसार और भी कांग्रेस शासित राज्यों को प्रभावित करने की इनकी योजना है जिससे सावधान रहने की आवश्यकता है ।  


दिल्ली में नफरत की फसल

दिल्ली में नफरत की फसल

13-Mar-2020

खुलासा पोस्ट मैगजीन लेख 

देश की जनता फिर से कांग्रेस के शासन काल को याद कर रही हैं, जिस तरह से वर्तमान भाजपा की सरकार ने देश का हाल किया है और देश मे जिस तरह की स्थिति है उससे लगता हैं कि  UPA सरकार के मनमोहन सिंह का कार्यकाल एक स्वर्णिम काल था आज भारत देश की आर्थिक स्थिति डावाडोल है और मोदी सरकार फिजूल खर्ची मे मशगूल है। मोदी सरकार को देश की विषम परिस्थिति  दिखाई नहीं दे रही है, इस सरकार ने  CAA, NPR, NRC जैसे कानून  का डर दिखा कर देश की जनता को उलझाने का काम किया है जबकि वर्तमान समय मे आर्थिक विसंगति से लड़ने और सार्थक नीति बनाने की जरूरत थी ना की नागरिकता संसोधन कानून की ।

मोदी सरकार के द्वारा लाया गया यह बिल देश की जनता को देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति से दिग्भ्रमित करने की कोशिश है ताकि लोग CAA, NPR, NRC, को लेकर आपस में ही उलझी रहे ? दिल्ली की भयावह तस्वीर इसका ताजा तरीन उदाहरण है, जहाँ दिल्ली जलती रही और पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बन देखती रही ये सोशल मीडिया के वीडियो फुटेज बता रहे है। दिल्ली की हिंसा में 100 से अधिक घायल हुए 20 से अधिक मारे जा चुके, घायलो मे कई की स्थिति नाजुक है लेकिन कोई संवेदना नहीं. कहाँ है केजरीवाल की सरकार ? इन्ही गरीब लोगों ने आम आदमी पार्टी को जिताया था दिल्ली में अब जीतने के बाद वे अपनी जिम्मेदारी से हाथ खड़े कर रहे हैं, भारतीय जनता पार्टी के हारे हुए नेता ने दिल्ली को दंगे की आग मे झोंक दिया है, ये किसने किया इसे सबने देखा लेकिन बेबस जनता मूक दर्शक बनकर खामोशी से देखती रही । देश की राजधानी दिल्ली जलती रही और देश के मुखिया अमेरिकी राष्ट्रपति के स्वागत मे लगे रहे। उनका राज धर्म था देश की जनता की संवेदना जो वे भूल गए ?

अमेरिकी राष्ट्राध्यक्ष भारत में हमारे ही खर्च पर दिनभर प्राइवेट पार्टी करते हैं और दूसरे दिन की सरकारी यात्रा में अकेले प्रेस के सवालों के जवाब देते हैं। कश्मीर पर मध्यस्थता की बात करते हैं। दिल्ली में हिंसा के सवाल को चतुराई से मोदीजी के पाले में डाल सवालों को टालते रहे । ऐसा लगा की भारतीय पक्ष की नुमाइंदगी करने वाला कोई नहीं। प्रेस के सवालों का जवाब देने वाला कोई नहीं। ट्रम्प के मित्र मोदीजी साथ में नहीं हैं। भारत की कोई संप्रभुता बची ही नहीं। ट्रम्प भारत के राष्ट्रपति नहीं, पर लगता है कि मोदीजी उनके प्रधानमंत्री हैं। प्रेस वार्ता के फुटेज देखिए समझ मे आ जायेगा भारत की संप्रभुता को गिरवी रखने का काम किया गया है।

अमेरिकी सांसदों ने भी दिल्ली हिंसा को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने कहा कि भारत में धार्मिक असहिष्णुता में वृद्धि भयावह है. जयपाल ने ट्वीट किया, ‘लोकतांत्रिक देशों को विभाजन और भेदभाव बर्दाशत नहीं करना चाहिए या ऐसे कानून को बढ़ावा नहीं देना चाहिए जो धार्मिक स्वतंत्रता को कमजोर करता हो.' उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया देख रही है.'सांसद एलन लोवेन्थाल ने भी हिंसा को ‘नैतिक नेतृत्व की दुखद विफलता' करार दिया. उन्होंने कहा, ‘‘हमें भारत में मानवाधिकार पर खतरे के बारे में बोलना चाहिए.'

राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की दावेदार एवं सांसद एलिजाबेथ वारेन ने कहा, ‘भारत जैसे लोकतांत्रिक साझेदारों के साथ संबंधों को मजबूत करना अहम है लेकिन हमें मूल्यों पर सच्चाई से बात करनी चाहिए जिनमें धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल है. शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा स्वीकार्य नहीं है.'' मीडिया ने भी इन घटनाओं को पूरी तवज्जो दी है. वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘ये दंगे विवादित नागरिकता कानून पर महीनों तक चले प्रदर्शनों के बाद चरम पर पहुंचे तनाव को दिखाते हैं. साथ ही यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के समर्थकों और आलोचकों के बीच बढ़ रहे मतभेद को भी दिखाता है.'' वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप जब भारत की राजधानी की यात्रा पर थे उसी दौरान वहां हुए साम्प्रदायिक दंगों में कम से कम 11 लोग मारे गए.'

‘अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग' ने ट्वीट कर कहा कि नयी दिल्ली में मुसलमानों को निशाना बनाने वाली भयानक भीड़ हिंसा की खबरों से चिंतित है. आयोग ने मोदी सरकार से भीड़ को नियंत्रित करने और धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करने की अपील की है. हमेशा ऐसा होता देखा गया है कि भड़काऊ भाषण-बयान देने वाले नेताओं के घर-परिवार सुरक्षित होते हैं वे भड़काऊ बयान इसलिए देते हैं क्योंकि उन्हें मालूम होता है कि उनका परिवार सुरक्षित हैं उनके बच्चे सुरक्षित है भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं के बच्चे हिंसा में मरे हैं ऐसा कम ही सुनने या देखने को मिलेगा लेकिन उन्हें अपना आदर्श मानकर हिंसा के लिए सड़क में उतरने वालों के परिवार तक खत्म हो जाते हैं ।

और यह ऐसे ही चलता रहेगा जब तक किसी पार्टी का समर्थक ऐसे भड़काऊ बयान देने वाले नेताओं से यह सवाल नहीं करते की आप अपने बच्चो, रिश्तेदारों को कब सड़क पर उतार रहे हैं ? याद कीजिए ये वही कांग्रेस पार्टी है जिसने मुम्बई हमलो के बाद केन्द्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल से इस्तीफा ले लिया था क्या पीएम मोदी की सरकार ऐसा कर पाएगी ?


दिल्ली हिंसा: हेट स्पीच देने वाले नेताओं के खिलाफ एक और याचिका दाखिल

दिल्ली हिंसा: हेट स्पीच देने वाले नेताओं के खिलाफ एक और याचिका दाखिल

12-Mar-2020

नई दिल्ली, दिल्ली हाई कोर्ट में एक ताजा याचिका दायर की गई है। जिसमें कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषण देने और दिल्ली हिंसा के दौरान आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने के लिए कई नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
इसके साथ ही सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान के लिए उनकी संपत्तियों की जब्त की भी मांग की गई है। बता दे उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर अब तक 53 हो गई है। गुरु तेग बहादुर अस्पताल में गुरुवार को मौत के छह और मामले आने के बाद यह संख्या बढ़कर 44 हो गई।

 


दिल्ली हिंसा एक तरफा सुनियोजित थी, पुलिस ने ही दी थी दंगा करने कि इजाजत : अल्पसंख्यक आयोग

दिल्ली हिंसा एक तरफा सुनियोजित थी, पुलिस ने ही दी थी दंगा करने कि इजाजत : अल्पसंख्यक आयोग

08-Mar-2020

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने हाल ही में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुयी हिंसा की घटनाओ का आकलन रिपोर्ट प्रस्तुति किया जिसमे कहा गया जो हिंसा भड़की, वह “एकतरफा, सुनियोजित” थी और इसमें स्थानीय लोगों का समर्थन था।

आयोग ने यह भी कहा कि हिंसा के कारण हुई क्षति की सीमा को देखते हुए, दिल्ली सरकार द्वारा घोषित मुआवजा अपर्याप्त है। उन्होंने कहा, “हमने हर जगह मुस्लिम घरों, दुकानों और कार्यशालाओं को अधिक क्षतिग्रस्त पाया।

पैनल ने कहा कि लोग 24-25 फरवरी को भाग जाने के बाद पहली बार अपने क्षतिग्रस्त घरों का दौरा किया। जिसमे अधिकतर घर क्षतिग्रस्त है जो बुरी तरह बर्बाद हो गए है। मलबा पड़ा हुआ था, इसलिए कोई सवाल ही नहीं था इन बर्बाद घरो में जल्द से नहीं रहा जा सकता है।
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पैनल की रिपोर्ट में खजूरी खास में गली नंबर 5 के निवासियों का भी हवाला दिया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा द्वारा धमकी और अल्टीमेटम के तुरंत बाद 23 फरवरी को हिंसा शुरू हो गई थी।

पैनल ने कहा – “यह ‘गली’ एक अंधी गली है जहाँ 100 व्यक्ति रहते थे और वे मुख्य सड़क से अपने स्वयं के पलायन पर नहीं जा सकते थे। उन्होंने 25 फरवरी की सुबह पुलिस सुरक्षा के तहत जगह छोड़ दी। इस ‘गली’ में, हमें बीएसएफ जवान मोहम्मद अनीस का घर मिला, जो बुरी तरह क्षतिग्रस्त था।
रिपोर्ट में कहा गया है- “सड़क के एक तरफ मुस्लिम घर और दुकानें हैं, जबकि दूसरी तरफ हिंदू घर और दुकानें हैं। दोनों क्षेत्र लूटपाट और जलाने से प्रभावित थे। एक चार्टेड पेट्रोल पंप पर, मालिक महिंदर अग्रवाल ने दावा किया कि 30 वाहनों को वहां रखा गया था।”

एक स्कूल सञ्चालन का कहना है कि 24 फरवरीको लगभग 500 लोगों ने शाम 6. 30 बजे के आसपास उनके स्कूल में प्रवेश किया। उन्होंने हेलमेट पहना और अपना चेहरा छिपा लिया।
वे अगले 24 घंटों तक वहां रहे और इलाके में पुलिस बल के आने के बाद शाम को चले गए। वे युवा लोग थे जिनके पास हथियार और विशाल प्रताप थे, जो वे स्कूल की छतों से पेट्रोल बम फेंकते थे, “


महिला संघर्ष के 50 दिन, आओ संघर्ष के साथ चलो

महिला संघर्ष के 50 दिन, आओ संघर्ष के साथ चलो

07-Mar-2020

यू पी ब्यूरो 
लखनऊ घंटाघर धरने के 50 दिन पूरा होने पर घंटाघर धरने पर संघर्ष कर रही महिलाओं ने नारा दिया कि "महिला संघर्ष के 50 दिन, आओ संघर्ष के साथ चलो।" महिलाओं के संघर्ष के 50 दिन पूरे होने पर महिलाओं ने इसे संघर्ष उत्सव के नाम पर मनाया।

भारी बारिश के बावजूद घंटाघर और उजरियांव धरने पर बैठी हुई महिलाएं ने इंक़लाब का नारा बुलंद कर रखा है। आज महिला संघर्ष के 50 दिन पूरे होने पर बनारस से फादर आंनद की टीम प्रेरणा कला मंच काशी द्वारा गीत-नाटक की प्रस्तुति की गई।

फादर आनंद ने नागरिकता संशोधन कानून को काला कानून बताते हुए कहा कि यह कानून धर्म के आधार पर देश को बांटने की साजिश है। उन्होंने कहा कि देश हम भारत के लोग से मिलकर बना है, हमें कोई अलग नहीं कर सकता है।

महिला संघर्ष के 50 दिन अनिश्चितकालीन धरना पूरा होने पर भाजपा सरकार को बता दिया कि अघोषित आपातकाल और दमनकारी नीतियों को अवाम सिरे से खारिज करती है। घन्टाघर, उजरियावं में बैठी हुई महिलाओं समेत दूर-दराज से आई महिलाओं ने काले कानून के खिलाफ जमकर हल्ला बोला और संकल्प लिया है कि वो भी अपने गांव, कस्बा, शहर में घंटाघर, शाहीन बाग़ बनाएंगी।

जारी
घंटाघर/उजरियावं लखनऊ की संघर्षशील महिलाएं

 

 


कड़े कानून के बावज़ूद नहीं रुक रहा है महिलाओ से  दुष्कर्म !

कड़े कानून के बावज़ूद नहीं रुक रहा है महिलाओ से दुष्कर्म !

07-Mar-2020

ऐसा लगता है कि POCSO अधिनियम और अन्य कड़े कानून बच्चों के खिलाफ अपराध करने वाले व्यक्तियों के बीच भय पैदा करने में विफल रहे हैं। कई नाबालिग लड़कियां यौन अपराधों का शिकार हो रही हैं।

अपराध स्कूल परिसर में हुए
ऐसे ही एक अपराध में, एक 26 वर्षीय स्कूल शिक्षक ने 11 नाबालिग लड़कियों के साथ कथित रूप से बलात्कार किया। बताया गया है कि कुछ बलात्कार तेलंगाना राज्य के वानापर्थी जिले में स्थित स्कूल परिसर में किए गए थे।
मामले के विवरण के अनुसार, आरोपी ने चौथी कक्षा में पढ़ने वाली 11 छात्राओं के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया। 10 साल की उम्र के पीड़ितों में से एक के माता-पिता को खून बहने की शिकायत के बाद यह अपराध सामने आया।
पुलिस गिरफ्त में आरोपी

जब मामला पुलिस स्टेशन में पहुंचा, तो पुलिस ने आरोपियों पर POCSO अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।


पूर्व संसद पेंशन घोटाला ?

पूर्व संसद पेंशन घोटाला ?

06-Mar-2020

राजेश यादव
जन सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई एक जानकारी से खुलासा हुआ है कि पूर्व सांसदों की पेंशन पर कुल 70,50,00000 रु (70 करोड़ 50 लाख ) वार्षिक खर्च किया जाता है। ज्ञात हो कि सांसदों की न्यूनतम पेंशन 25000 प्रतिमाह होती है। जिसमे 5 वर्ष से ज़्यादा कार्यकाल के लिए अगले हर वर्ष पर 2000 रु प्रति माह अतिरिक्त वृद्धि होती है।

यहाँ तक तो सब ठीक है। अब असली खेल की तरफ ध्यान दीजिए। जब लोकसभा सचिवालय से कुल पेंशनर सांसदों की संख्या पूछी गयी तो जबाब 3849 बताया गया। इसी प्रकार राज्यसभा के पेंशनर्स एमपी की संख्या 847 बताई गई। कुल मिलाकर योग 4796 हुआ। 

ठीक यही संख्या जब पेंशन देने वाले केंद्रीय पेंशन लेखा विभाग से पूछी गयी तो जबाब चौंकाने वाला था। इस विभाग के अनुसार लोकसभा के कुल पेंशनर्स एमपी 1470 और राज्यसभा के कुल पेंशनर्स 708 हैं। जिनका कुल योग 2170 है।

गौर कीजिए सचिवालय कुल पेंशनर्स सांसदों की संख्या 4796 बता रहा है और वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाला केंद्रीय पेंशन लेख विभाग ये संख्या 2170 बता रहा है। अब सवाल ये है कि दोनों की संख्या के अंतर 2618 वाले पेंशनर्स एमपी कौन हैं ? ये बहुत बड़ा घोटाला प्रतीत होता है।

ये वो देश है जिसमे करोड़ों रु का विज्ञापन देकर आम जनता से गैस सब्सिडी छोड़ने की अपील की जाती है। रेलवे में सफर करने वाले लाखों बुजुर्गों से सब्सिडी छीन ली जाती है और राहुल बजाज, संजय डालमिया जैसे उद्योगपति पूर्व सांसद की पेंशन पाते हैं। 2618 फर्जी लोग भूतपूर्व सांसद बने पेंशन उठा रहे हैं। काश आर्थिक रूप से मजबूत पूर्व सांसदों, विधायकों को भी पेंशन छोड़ने के लिये कहा जाता ! कहावत भी है कि 'पर उपदेश,कुशल बहुतेरे ।

 

 


कोरोना वायरस के खिलाफ़ जागरूकता फैला रही हैं सानिया मिर्जा!

कोरोना वायरस के खिलाफ़ जागरूकता फैला रही हैं सानिया मिर्जा!

05-Mar-2020

कोरोनावायरस से संबंधित चल रही चिंताओं के बीच, भारत की टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा ने इस मुद्दे के बारे में जागरूकता बढ़ाई और लोगों से कहा कि वे तब करें जब लक्षण उत्पन्न हों।
हमें सावधानी बरतने की जरूरत है: सानिया मिर्जा

“जैसा कि आप जानते हैं कि कोरोनावायरस तेजी से फैल रहा है, यह चीन में उत्पन्न हुआ और संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह दुनिया भर में फैल गया है, हमें सावधानी बरतने की जरूरत है, खांसी और बुखार जैसे कुछ लक्षण हैं, अगर आपको लगता है कि आपके लक्षण हैं, आपको तुरंत एक डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए, ”मिर्जा ने एक वीडियो में कहा।
एक हेल्पलाइन (104) है और आप उस पर कॉल कर सकते हैं। आपको अपने हाथों को नियमित रूप से धोना चाहिए, यदि आपके लक्षण हैं, तो अपने आप को 14 दिनों के लिए अलग रखें, ”उसने कहा।
शुटलर पीवी सिंधु ने भी इस मुद्दे के बारे में जागरूकता बढ़ाई और कहा कि देश में लोगों को तुरंत हेल्पलाइन पर कॉल करना चाहिए अगर उन्हें लगता है कि वे कोरोनोवायरस के लक्षण हैं।
बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ। हर्षवर्धन ने कहा कि देश में अब तक कोरोनावायरस के 28 पुष्ट मामले सामने आए हैं।
दुनिया भर में मौतें

वैश्विक स्तर पर कोविद -19 के कारण होने वाली मौतें 3,000 को पार कर गई हैं। घातक वायरस, जिसकी उत्पत्ति पिछले साल के अंत में चीन में हुई थी, दुनिया भर में फैल रहा है और 90,000 से अधिक लोगों को संक्रमित कर चुका है।

 


लश्कर के कथित  आतंकवादी बताये गए अब्दुल करीम टुंडा को हैदराबाद की अदालत ने बरी किया

लश्कर के कथित आतंकवादी बताये गए अब्दुल करीम टुंडा को हैदराबाद की अदालत ने बरी किया

04-Mar-2020

हैदराबाद में 22 साल पहले बम धमाके की साजिश रचने के मामले में कथित आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को आज नामपल्ली मेट्रोपॉलिटन अदालत ने  बरी कर दिया।

खबर के मुताबिक अब्दुल करीम गाजियाबाद जिला जेल में बंद था, इसलिए पुलिस उसे संबंधित न्यायाधीश के समक्ष पेश नहीं कर सकी, जिसके बाद अदालतों ने उसे आपराधिक साजिश मामले में बरी कर दिया।
बता दें की हैदराबाद की नामपल्लि कोर्ट में टुंडा पर 1998 में सलीम जुनैद के साथ मिलकर आतंकी हमले की साजिश रचने का केस चल रहा था ।

अदालत ने अब्दुल करीम टुंडा को 120 बी, 121,121 ए।, 122, 153-ए, 153-बी, 420, 471, 436, 511, 428, 302, 307, आईपीसी की धारा 25 1 से सभी आरोपों से बरी कर दिया। विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4,5,6, पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12, धारा 3 (2) (ए), विदेशियों के अधिनियम की 14, पुलिस एसआईटी / सीसीएस हैदराबाद ने साबित किया कि मामले की जांच के लिए कुल 12 मामले थे।
बता दें की अगस्त 2013 में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने उसे आतंकी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया था।
सियासत डॉट कॉम से साभार 


दिल्ली हिंसा पर लोकसभा और राज्यसभा में भारी हंगामा, दोनों सदन की कार्यवाही स्थगित!

दिल्ली हिंसा पर लोकसभा और राज्यसभा में भारी हंगामा, दोनों सदन की कार्यवाही स्थगित!

03-Mar-2020

दिल्ली हिंसा को लेकर कांग्रेस सहित विपक्ष दल लगातार संसद में हंगामा मचाया। उनका कहना है प्रधानमंत्री आकर इस संबंध में जवाब दें।

एजेंसी की  खबर के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हो जाने के साथ ही विपक्ष ने दिल्ली हिंसा को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया है। दिल्ली हिंसा को लेकर कांग्रेस लगातार अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जवाब दो के भी नारे लग रहे हैं। कुछ सासंद बैनर लेकर वेल तक पहुंच गए हैं। कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दल के नेता दिल्ली हिंसा पर सदन में हंगामा कर रहे हैं।

सदन में ‘अमित शाह इस्तीफा दो’, ‘जवाब दो जवाब’ दो, प्रधानमंत्री जवाब दो के नारे लग रहे हैं। कांग्रेस नेता अधीर रंजन ने कहा कि प्रधानमंत्री दिल्ली दंगों पर चुप्पी साधे हुए हैं।
प्रधानमंत्री को सदन में आकर इस पर बोलना चाहिए। हम अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसके बाद दोनों सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है।


दिल्ली हिंसा: दंगा पीड़ितों को एक माह की सैलरी दान करेंगे AIMIM नेता!

दिल्ली हिंसा: दंगा पीड़ितों को एक माह की सैलरी दान करेंगे AIMIM नेता!

02-Mar-2020

असदुद्दीन ओवैसी, एआईएमआईएम अध्यक्ष ने खुलासा किया कि पार्टी के स्थानीय निकायों के सांसद, विधायक और पार्षद दिल्ली दंगों के पीड़ितों को एक महीने का वेतन दान करेंगे।

राजधानी के पूर्वोत्तर भाग को हिला देने वाले दंगों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 43 हो गई है, जिसमें पुलिस को दो और शव मिले हैं।
दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की कि दो शव दो अलग-अलग क्षेत्रों से बरामद किए गए हैं – एक गोकलपुरी में नहर से और एक भागीरथी विहार नहर इनके अलावा, 41 मौतें दो अस्पतालों द्वारा की गई हैं – 38 गुरु तेग बहादुर अस्पताल से और तीन राम मनोहर लोहिया अस्पताल से मृतक व्यक्तियों के शवों की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है।
समर्थक और विरोधी-सीएए प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद उत्तर पूर्वी दिल्ली में चार दिनों तक जारी हिंसा में 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं और करोड़ों की संपत्ति क्षतिग्रस्त हुई है।

 संसद में मुद्दा उठाने वाली है कांग्रेस

कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह संसद सत्र में चुपचाप नहीं बैठेगी। पार्टी ने कहा है कि वह दिल्ली के दंगों का मुद्दा उठाएगी और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करेगी।
कांग्रेस के एक सूत्र ने कहा, “दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता जानबूझकर है और हमने गृह मंत्री को हटाने की मांग की है और इस मुद्दे को संसद के दोनों सदनों में उठाएंगे।”


दिल्ली हिंसा पर मोदी की आलोचना कर रहा है विदेशी मीडिया

दिल्ली हिंसा पर मोदी की आलोचना कर रहा है विदेशी मीडिया

28-Feb-2020


दिल्ली में 24-25 फ़रवरी, 2020 के बीच हुई सांप्रदायिक हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में नरेंद्र मोदी सरकार की ख़ूब आलोचना हो रही है.
विदेशी मीडिया में कहा जा रहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार इस हिंसा को रोकने में नाकाम रही, जिस हिंसा में कम से कम 39 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों घायल हैं.
यह हिंसा विवादास्पद क़ानून नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई पत्थरबाज़ी से शुरू हुई

 इस क़ानून का समर्थन कर रहे लोगों में अधिकांश हिंदू हैं जबकि मुसलमान इस क़ानून का विरोध कर रहे हैं क्योंकि कथित तौर पर कहा जा रहा है कि यह क़ानून मुसलमानों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला है.

यह हिंसा तब हुई जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत की यात्रा पर थे. न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा है, "ट्रंप और मोदी का आलिंगन तब हो रहा था जब नागरिकता संबंधी क़ानून पर हो रहा विरोध प्रदर्शन सड़क पर दंगे में तब्दील हो गया था."

न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा है, "सरकार ने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा निरस्त कर दिया. वहां के मुस्लिम नेताओं को जेल में बंद कर दिया है. इसके बाद एक क़ानून लेकर आई जिसमें ग़ैर-मुस्लिम बाहरी लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया.

वहीं सीएनएन ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नागरिकता संबंधी क़ानून को आगे बढ़ान से ये हिंसा हुई है. सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "डोनाल्ड ट्रंप के राजकीय दौर में उम्मीद की जा रही थी कि भारत वैश्विक स्तर पर अपने प्रभुत्व का प्रदर्शन करेगा. लेकिन इसकी जगह उसने महीनों से चले रहे धार्मिक तनाव की तस्वीर पेश की.

वाशिंगटन पोस्ट में दिल्ली की हिंसा पर छपी रिपोर्ट में कहा गया है, "नरेंद्र मोदी के राजनीतिक करियर में यह दूसरा मौक़ा है जब बड़े सांप्रदायिक हिंसा के दौरान वे शासनाध्यक्ष हैं." अख़बार ने लिखा है कि गुजरात में 2002 की सांप्रदायिक हिंसा के दौरान मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे.
गार्डियन ने अपने एक संपादकीय में नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए लिखा है, "उन्होंने शांति और भाईचारे की अपील काफ़ी देरी से की और यह उनकी कई दिनों की चुप्पी की भरपाई नहीं कर सकता. ना ही विभाजन के आधार पर बने उनके करियर पर पर्दा डाल सकता है."
इंडिपेंडेंट ने 27 फ़रवरी को अपनी रिपोर्ट में लिखा है, "नरेंद्र मोदी की आलोचना इसलिए भी हो रही है क्योंकि वे हिंसा करने वालों की आलोचना करने में भी नाकाम रहे हैं. इसमें कुछ तो राजमार्ग पर आगज़नी करते हुए मलबे के ढेर से गुज़रते हुए उनके नाम के नारे भी लगा रहे थे.

सै क़ासिम 

 


दिल्ली हिंसा के बाद हैदराबाद में प्रदर्शन के दौरान महिलाएं ज्यादा तादाद में निकल रही हैं!

दिल्ली हिंसा के बाद हैदराबाद में प्रदर्शन के दौरान महिलाएं ज्यादा तादाद में निकल रही हैं!

28-Feb-2020

दिल्ली में जारी साम्प्रदायिक हिंसा का असर हैदराबाद में देखने को मिल रहा है। दिल्ली की खबरों पर खासकर पुराने शहर हैदराबाद में लोग कान लगाए बैठें हैं।

हिन्दी डॉट साक्षी पर खबर के अनुसार, दिल्ली हिंसा के खिलाफ टोली चॉकी, सेवेन टॉम्ब्स रोड, किंग कोटी और याकुतपुरा में देर शाम लोग घरों से बाहर निकले और नारेबाजी की साथ ही कैंडल भी जलाए गए।
हैदराबाद में प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की तादाद अधिक देखने को मिली। लोगों ने एक सुर में दिल्ली हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों और घायलों के प्रति सहानुभूति जताई। प्रदर्शन के दौरान लोगों के हाथों में प्ले कार्ड्स भी नजर आए।

नेकलेस रोड से हुसैन सागर की तरफ जा रहे कैंडल मार्च पर पुलिस की तवज्जो रही। दिल्ली हिंसा के बाद मंगलवार को रात नौ बजे कैंडल मार्च का आह्वान किया गया। इस दौरान पुलिस के बड़े जाप्ते की तैनाती की गई थी।

इस बीच हैदराबाद पुलिस कमिश्नर अंजनी कुमार ने लोगों से सतर्क रहने और उपद्रवी तत्वों से सावधान रहने की हिदायत दी है। दिल्ली से आ रही खबरें लोगों को आक्रोशित कर रही हैं व सोशल मीडिया का इस्तेमाल इसके लिए खूब किया जा रहा है।
 ऐसे में लोगों के भड़कने की गुंजाइश देखते हुए छुटभैये नेताओं पर भी नजर रखी जा रही है।
हैदराबाद पुलिस की तरफ से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। किसी भी तरह की साम्प्रदायिक भावना भड़काने की शिकायत पर पुलिस त्वरित कार्रवाई कर रही है। सीपी अंजनी कुमार ने ट्वीट कर मीडिया से भी आग्रह किया है कि वे भड़काने वाले कंटेन्ट न चलाएं।


दिल्ली हिंसा में SIT ने शुरू की जांच, मीडिया और चश्मदीदों से मांगे सबूत !

दिल्ली हिंसा में SIT ने शुरू की जांच, मीडिया और चश्मदीदों से मांगे सबूत !

28-Feb-2020

उत्तर-पूर्वी दिल्ली क्यों और कैसे जला? यह हादसा था या फिर सोची समझी रणनीति के तहत फैलाया गया दंगा? इन सवालों के जवाब तलाश कर जवाबदेही तय करने के लिए गठित दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की एसआईटी ने जांच गुरुवार रात से ही शुरू कर दी. एसआईटी का गठन गुरुवार को दोपहर बाद ही किया गया. गुरुवार को एसआईटी गठित होने के तत्काल बाद दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने सबसे पहले एक अपील जारी की. आम-नागिरक और मीडिया के नाम जारी अपील में कहा गया है कि इस हिंसा की जांच में जिसके पास जो भी तस्वीरें, वीडियो फुटेज या फिर अन्य संबंधित सबूत हों, तो वो सात दिन के भीतर पुलिस को मुहैया कराके जांच में मदद करें.

तस्वीरें और वीडियो फुटेज उत्तर पूर्वी दिल्ली जिले के डीसीपी के सीलमपुर स्थित कार्यालय में जमा कराने होंगे. अपील में अनुरोध किया गया है कि 23 फरवरी 2020 को या फिर उसके बाद उत्तर पूर्वी दिल्ली जिले में जो भी हिंसात्मक घटनाएं हुई हैं, उनसे संबंधित सबूत पुलिस तक पहुंचाने में विशेषकर मीडिया भी मदद करे.
सबूत पुलिस के हवाले करने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी. अगर कोई इन हिंसक घटनाओं के बारे में गवाही देना चाहता हो तो उसे भी पुलिस गुप्त रखेगी


दिल्ली हिंसा पर आया अमेरिकी सांसदों का बयान, कहा- दुनिया देख रही है

दिल्ली हिंसा पर आया अमेरिकी सांसदों का बयान, कहा- दुनिया देख रही है

27-Feb-2020

वाशिंगटन:

 भारत की राजधानी दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून को ले कर हुई हिंसा पर अमेरिकी सांसदों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के साथ ही मीडिया इन घटनाओं की भी खबरें दे रहा है. अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने कहा कि भारत में धार्मिक असहिष्णुता में वृद्धि भयावह है. जयपाल ने ट्वीट किया, ‘लोकतांत्रिक देशों को विभाजन और भेदभाव बर्दाशत नहीं करना चाहिए या ऐसे कानून को बढ़ावा नहीं देना चाहिए जो धार्मिक स्वतंत्रता को कमजोर करता हो.' उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया देख रही है.' गौरतलब है कि सीएए को लेकर दिल्ली में हुई हिंसा में 20 लोगों की जान चली गई और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं.
सांसद एलन लोवेन्थाल ने भी हिंसा को ‘नैतिक नेतृत्व की दुखद विफलता' करार दिया. उन्होंने कहा, ‘‘हमें भारत में मानवाधिकार पर खतरे के बारे में बोलना चाहिए.'

राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की दावेदार एवं सांसद एलिजाबेथ वारेन ने कहा, ‘भारत जैसे लोकतांत्रिक साझेदारों के साथ संबंधों को मजबूत करना अहम है लेकिन हमें मूल्यों पर सच्चाई से बात करनी चाहिए जिनमें धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल है. शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा स्वीकार्य नहीं है.

agency

 


 सांसद आज़म खान,व बेटे अबदुल्ला पत्नी ताज़ीन फातिमा ने रामपुर जिला न्यायालय में किया आत्मसमर्पण, भेजे गए जेल

सांसद आज़म खान,व बेटे अबदुल्ला पत्नी ताज़ीन फातिमा ने रामपुर जिला न्यायालय में किया आत्मसमर्पण, भेजे गए जेल

26-Feb-2020

रामपुर बिग ब्रेकिंग 

2017 में योगी सरकार बनने के बाद से आज़म खान व उनके परिवार पर सैकड़ो मुकदमे लगाए गए,जिनमें कई मामलों में न्यायालय ने उनको हाजिर होने का आदेश दिया था जिस पर आज़म खान के कई बार से गैर हाजिर होते रहे ,उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत न मिलने के कारण उनको हाजिर होने पड़ेगा ।

रामपुर से सांसद आज़म खान व उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म अभी अभी  रामपुर जिला न्यायालय में आत्म समर्पण कर दिया,न्यायालय भेजे उनको जेल ।

न्यायालय ने आज़म खान उनकी पत्नी विधायक ताज़ीन फातिमा व बेटे अब्दुल्ला आज़म को कई मामलों में अरेस्ट  वारण्ट जारी कर रखा था

 अदालत ने कल एक मामले में उनके घर की कुर्की के आदेश भी दिए है।
यू पी ब्यूरो