बिजली का मीटर लगाने को लेकर दो पक्षों में हुवा विवाद

बिजली का मीटर लगाने को लेकर दो पक्षों में हुवा विवाद

10-Sep-2020

Report: Abdul kalam

Place:Bengal

पश्चिम बंगाल हावड़ा के सालकिया में स्थित एक टोटो गैरेज में लगी बिजली का कनेक्शन इलाके के दबंगों द्वारा जबरन काटे जाने को लेकर टोटो गैरेज मालिक और इलाके के दबंग साव परिवार के साथ शुरू हुवा विवाद थमने का नही ले रहा नाम इलाके के दबंग साव परिवार किसी भी कीमत पर इलाके में स्थित एक बंद पड़े फैक्ट्री के गेट के सामने नही लगाने देना चाहते किसी भी लोगों को बिजली का मीटर गेट के सामने लगे हैं पहले से ही 10 बिजली के मीटर, 10 मीटरों में से पहले टोटो गैरेज मालिक राहुल सिंह के बिजली के मीटर को जबरन अपनी दबंगई दिखाकर काटा,हम बतादें के जिस गैरेज के बगल में लगे बिजली का मीटर सड़क के किनारे स्थित एक बंद कारखाने के गेट के पाश लगा हुवा है उस कारखाने पर अवैध तरीके से साव परिवार ने कब्जा जमाया हुवा है और वहां लगे इलाके के लोगों के करीब 10 बिजली के मीटरों को वो लोग दबंग तरीके से इलाके के ही रहने वाले राहुल सिंह का टोटो गैरेज का बिजली कनेक्शन काट दिया है और बिजली कनेक्शन जोड़ने भी नही दे रहे है अगर कोई भी बिजली कनेक्शन जोड़ने जाता है तो वो लोग उसके साथ मारपीट करने पर उतारू हो जाते है इलाके के साव परिवार का पूरे इलाके में कुछ इस कदर दबंगई है के उनके दबंगई के आगे इलाके के लोग तो दूर की बात स्थानीय थाना गोलाबाड़ी पुलिस भी कुछ नही बोलती और ना ही उनके किसी भी मामले में कोई भी तरह की दखल अंदाजी ही करती है यही कारण है के  साव परिवार का मनोबल कुछ इस कदर बढ़ गया है के उनको ना तो कानून भय है और ना ही जिला प्रशासन की हालांकि टोटो गैरेज मालिक राहुल सिंह ने साव परिवार द्वारा उनका बिजली कनेक्शन काटे जाने व उसे जोड़ने नही दिए जाने के मामले की शिकायत इलाके की गोलाबाड़ी थाने को दी गई इलाके के पार्षद को भी सिकायत की गई मंत्री लक्ष्मी रतन शुक्ला को भी सिकायत दी गई पर इलाके के पुलिस कमिश्नर को भी सिकायत दी गई पर कहीं से भी उन्हें कोई मदद नही मिली जिसके बाद थक हार के राहुल सिंह ने हाई कोर्ट का सहारा लिया वहीं हाई कोर्ट ने मामले की पूरी तरह देखते हुवे दोनों पछों की दलीलें सुनते हुवे टोटो गैरेज मालिक राहुल सिंह के पक्ष में अपनी आदेश सुना दी और इलाके के उस बंद पड़े माँ तारा इंडस्ट्रीज नामक स्क्रैप की फैक्ट्री के गेट के सामने बिजली का मीटर लगाने के लिए सीएससी वीभग को पुलिस प्रोटेक्सन के साथ आदेश जारी कर दिया न्यालय के आदेश पर सीएससी वीभग के कुछ अशिकारी फैक्ट्री के गेट पर बिजली का मीटर लगाने तो  पहोंची पर न्यालय के आदेश की अवहेलना करते हुवे पुलिस उनकी मदद के लिए नही पहोंची जिस कारण साव परिवार के लोगों ने सीएससी विभाग के अधिकारियों और राहुल सिंह के साथ अभद्रता से पेश आए और उनके साथ धक्का मुक्की करते हुवे उनको गाली गलौज भी किया साथ ही उन्होंने ये भी धमकी दे डाली के अगली बार अगर वो दोबारा बिजली का मीटर लगाने आए तो वो वहां से जिंदा नही लौटेंगे साव परिवार के लोगों द्वारा किए गए इस व्यवहार से भयभीत सीएससी के अधिकारी डर के मारे भाग खड़े हुवे


 महंगा कोरोना इलाज एक त्रासदी

महंगा कोरोना इलाज एक त्रासदी

09-Sep-2020

ललित गर्ग  

कोरोना महामारी ने भारतीय चिकित्सा क्षेत्र की विसंगतियों एवं दुर्भाग्यपूर्ण स्थितियों की पोल खोल दी है। भले केन्द्र सरकार की जागरूकता एवं जिजीविषा ने जनजीवन में आशा का संचार किया हो, लेकिन इस महाव्याधि से लड़ने में चिकित्सा सुविधा नाकाफी है, धन कमाने एवं लूटखसोट का जरिया बन गयी है।

कोरोना के इलाज के लिए निजी अस्पताल में एक दिन का खर्च जहां एक लाख रुपए तक है, वहीं सरकारी अस्पताल में एक दिन भी काटना मुश्किल है।

राजधानी दिल्ली सहित महानगरों, नगरों एवं गांवों में चिकित्सा की चरमराई स्थितियों ने निराश किया है। चिकित्सक, अस्पताल, दवाई, संसाधन इत्यादि से जुड़ी कमियां एक-एक कर सामने आ रही हैं। इन त्रासद स्थितियों ने कोरोना पीड़ितों को दोहरे घाव दिये हंै, निराश किया है, उत्पीड़ित किया है।

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन स्थितियों एवं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राजधानी लखनऊ में निजी अस्पतालों की लूट के खिलाफ अभियान चलाया है। लखनऊ के कुछ निजी अस्पतालों में कई मरीजों ने कोरोना इलाज के नाम पर लाखों रुपये की लूट की शिकायत की थी।बताया गया कि उनसे 50 से 80 हजार रुपये नकद जमा कराने के बाद ही इलाज शुरू किया गया।

डिस्चार्ज करने के बाद निर्धारित दर से भी अधिक बिल वसूला गया। यह स्थिति केवल उत्तर प्रदेश की नहीं है, समूचे देश में निजी अस्पतालों ने कोरोना इलाज के नाम पर नोट छापने की मशीनें लगा ली है, मनमानी वसूली हो रही है। 

सुप्रीम कोर्ट ने भी इन जटिल होती स्थितियों को गंभीरता से लिया है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि उन निजी अस्पतालों की पहचान करें जो कोविड-19 के मरीजों का मुफ्त या कम खर्च में इलाज कर सकते हैं। प्रधान न्यायाधीश एस. ऐ. बोबडे, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश राय की पठ ने वीडियो काॅन्फ्रेंस के जरिये मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि ऐसे निजी अस्पताल हैं

जिन्हें मुफ्त या बेहद कम दामों पर जमीन आवंटित की गयी है, उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का निःशुल्क इलाज करना चाहिए। न्यायालय एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें देश के निजी अस्पतालों में कोविड-19 के मरीजों के इलाज के खर्च को नियंत्रित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि सरकार को निजी अस्पतालों जिन्हें रियायती दर पर सार्वजनिक भूमि आवंटित की गयी है या जो धर्मार्थ अस्पतालों की श्रेणी में आते हैं, उन्हें कोविड-19 के मरीजों का जनसेवा के रूप में या बगैर किसी नफे नुकसान के आधार पर इलाज करने का आदेश देना चाहिए।

इस याचिका में ऐसे निजी अस्पतालों में कोविड-19 से संक्रमित गरीब, अभावग्रस्त और बगैर किसी स्वास्थ्य बीमा वाले मरीजों तथा सरकार की आयुष्मान भारत जैसी योजना के दायरे में नहीं आने वाले मरीजों के इलाज का खर्च सरकार को वहन करने का भी निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

याचिका के अनुसार आपदा प्रबंधन कानून के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र ने जिस तरह निजी अस्पतालों में कोविड-19 के संक्रमित मरीजों की जांच की कीमत को नियंत्रित किया है, ठीक उसी तरह उसे इस महामारी से प्रभावित मरीजों के उपचार पर होने वाले खर्च को भी नियंत्रित करना चाहिए।

कोरोना इलाज की अपेक्षाओं को देखते हुए निजी अस्पतालों को कोरोना के इलाज की मंजूरी दी गई है लेकिन यहां इलाज का खर्च उठा पाना सबके बस की बात नहीं हैं। संजय नगराल ने ट्वीट किया कि एक निजी अस्पताल ने कोरोना से संक्रमित रोगी के इलाज का 12 लाख रूपये का बिल बनाया।

इसे देख बीमा कंपनियां सकते में हैं। आखिरकार इस वायरस के लिए कितने इंश्योरेंस की जरूरत होगी? प्रश्न यह भी है कि इस महासंकट के दौर में कोरोना इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों को लूटखसोंट करने की छूट कैसे दी जा सकती है?

कोरोना संक्रमण के दौर में जब हर कोई किसी की सहायता को तत्पर दिखता है, तब निजी अस्पतालों द्वारा मनमाना शुल्क वसूलने के साथ ही मरीज ही नहीं, तीमरदार के साथ भी बदसलूकी किए जाने की शिकायतें अमानवीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण ही कही जाएंगी। योगी एवं उनकी सरकार को साधुवाद कि उसने निजी अस्पतालों की लूट-खसोंट की खबरों पर कान दिए और तुरत-फरत जांच बैठा दी।

उम्मीद की जानी चाहिए जांच में दोषी पाए जाने वाली निजी अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आपदा की इस घड़ी में मरीजों के साथ मनमाने शुल्क की वसूली कतई उचित नहीं बल्कि इसे दुस्साहस ही कहा जाएगा।

विडम्बनापूर्ण है कि कोरोना को लेकर शुरू से ही सख्त रूख अपनाने वाली योगी सरकार के फरमानों को भी निजी अस्पताल ने धता बता दी। उचित होगा लखनऊ की नजीर मानकर देश के सभी निजी अस्पतालों के खिलाफ जांच का सघन अभियान चलाया जाए और ऐसी व्यवस्था की जाये कि जब तक कोरोना महामारी का प्रकोप समाप्त न हो जाये, ये निजी अस्पताल निःशुल्क या कम दरों पर ही इलाज करें।

कोरोना काल में देश की राजधानी की हालत खराब है। दिल्ली के सभी प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना बेड्स की मारामारी मची है। गंगाराम, मैक्स, अपोलो, मेदांता, ये सभी अस्पताल लगभग पूरी तरह से भर चुके हैं।

बेड्स खत्म होने की सूरत में वेटिंग लिस्ट बना दी गई है, मतलब बेड खाली होने पर ही बारी आएगी, इसमें भी भारी भ्रष्टाचार व्याप्त है। यहां भी मनमानी कीमत वसूलने के बावजूद कोई संतोषजनक इलाज नहीं है। ये हालात तब हैं, जब प्राइवेट अस्पताल में एक दिन का खर्च नॉर्मल वॉर्ड में 25 से 30 हजार रोजाना से लेकर आईसीयू में 1 लाख रोजाना तक का है।

वहीं दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में बेड तो हैं लेकिन व्यवस्था छुट्टी पर है। पहले भर्ती करने में आनाकानी, फिर भर्ती करने के बाद सिस्टम फेल। देश के सबसे बड़े सरकारी कोविड-अस्पताल एलएनजेपी के बाहर भी लोग लाचार नजर आ रहे हैं।

कोरोना महामारी का प्रकोप भारत में तेजी से पसर रहा है, हर दिन नब्बे हजार से अधिक रोगी सामने आ रहे हैं। प्रारंभिक दौर में जब एक-दो हजार रोगी सामने आ रहे थे, तब हमारे चिकित्साकर्मियों ने अपने जान की परवाह न करते हुए कोरोना पीड़िता का इलाज किया था, अनेक मनोवैज्ञानिक उपक्रम भी हुए, लेकिन अब यह महामारी विकराल रूप धारण कर रही है,तब सरकार भी, चिकित्सा सेवाएं एवं मनोवैज्ञानिक उपचार निस्तेज क्यों हो रहे हैं? प्रश्न केन्द्र सरकार एवं केन्द्रीय स्वास्थ्यमंत्री की कोरोना मुक्ति की योजनाओं को लेकर नहीं है।

प्रश्न है भारत की चिकित्सा प्रक्रिया की खामियों का, निजी अस्पतालों के महंगे इलाज का, इस अंधेरे का अब तीव्रता से अहसास हो रहा है।

संकट के बढ़ते इस समय में निजी अस्पतालों में आज के भगवान रूपी डॉक्टर एवं अस्पताल मालिक मात्र अपने पेशा के दौरान वसूली व लूटपाट ही करते हुए नजर आए तो यह एक तरह की अराजकता एवं अमानवीयता की पराकाष्ठा है। निजी अस्पतालों एवं उनके डाक्टरों पर धन वसूलने का नशा इस कदर हावी है कि वह उन्हें सच्चा सेवक के स्थान पर शैतान बना रहा है।

केन्द्र सरकार कोरोना पीडित को बेहतर तरीके से इस असाध्य बीमारी की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये प्रतिबद्ध है। निजी अस्पतालों पर कार्रवाई करना बेहद जरूरी है क्योंकि कोरोना के समय में अनेक अस्पतालों ने चिकित्सा-सेवा को मखौल बना दिया है।

एक लोकतांत्रिक देश में लोगों के इलाज एवं निजी अस्पतालों पर अनुशासन स्थापित करने की जिम्मेदारी सरकार की है और वह इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। सरकारी अस्पतालों की पर्याप्त भ्रष्टाचारमुक्त एवं प्रभावी सुविधाएं स्थापित हो, उससे पहले निजी अस्पतालों पर नकेल कसना जरूरी है। वैसे सरकारी इलाज की सबसे अच्छी व्यवस्था ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया में और हांगकांग की मानी जाती है।

ऑस्ट्रेलिया ने आइएएस की तरह हेल्थकेयर का अलग कैडर बना रखा है। वहां अमीर व्यक्ति भी बीमार होता है तो सबसे पहले सरकारी अस्पताल में जाता है न कि प्राइवेट अस्पताल में। इसके विपरीत भारत आबादी के हिसाब से अस्पतालों में बेड बढ़ाने एवं चिकित्सा सेवाओं को प्रभावी बनाने में बुरी तरह विफल रहा।

अब सरकार का ध्यान इस ओर गया है, जब तक उसके परिणाम आये, तब तक कोरोना महामारी के मोर्चे पर सरकारी और निजी क्षेत्र की जुगलबंदी ही देश में कारगर इलाज कर सकती है। 

 


आगरा में बस हाईजैक के दो आरोपी हाथ में पोस्टर लेकर सरेंडर करने पहुंचे

आगरा में बस हाईजैक के दो आरोपी हाथ में पोस्टर लेकर सरेंडर करने पहुंचे

09-Sep-2020

Report: Shuaib Hashmi

Place:Agra

आगरा में थाना मलपुरा में सोमवार की दोपहर को उस समय हड़बड़ी मच गई, जब दो आरोपित हाथों में पोस्टर थामे सरेंडर करने पहुंच गए। पुलिस ने तत्काल उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उन्हें कोर्ट में पेश करने की तैयारी में जुट गए।

18 अगस्त 2020 की रात करीब 10:30 बजे दो कार सवार बदमाशों ने  न्यू दक्षिणी बाइपास पर 34 सवारियों से भरी ग्वालियर की कल्पना ट्रेवल्स की बस का अपहरण कर लिया था। चालक ग्वालियर के डबरा निवासी रमेश था। उसके साथ परिचालक मध्य प्रदेश के थाना छत्तरपुर के गांव चन्देला निवासी रामविलास और हेल्पर देवरी कलां ग्वालियर का भोला था। तीनों को कार में बन्धक बना लिया। एक बदमाश बस को चलाकर कुबेरपुर पहुंचा। बदमाशों ने खुद को एक फाइन्नेस कम्पनी का कर्मचारी बताया और सवारियों की टिकट के 23600 भी ले लिये। इसके बाद चालक, परिचालक और हेलपर को सुनसान जगह छोड़कर बस को ले गए। बस में 34 सवारियां भी थी। तीनों ने दूसरे दिन मामले की जानकारी थाना मलपुरा में दी। सूचना मिलते ही विभाग में हडकंप मच गया। पुलिस ने इटावा जिले से बस बरामद कर ली। जांच में मुख्य आरोपित प्रदीप गुप्ता समेत 12 लोग प्रकाश में आ गए थे।

पुलिस ने शुक्रवार सुबह नौवें आरोपित नन्दनगरी दिल्ली के हरिविंदर को दिल्ली से ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन सोमवार को सुबह 11 बजे दिल्ली के नन्दनगरी निवासी मनोज बघेल और सूरज बघेल थाने पहुंच गए। वे हाथों में पोस्टर भी थामे थे। हाथों में लगे पोस्टर लेकर अंदर चलने लगे। उस पर खुद के सरेंडर करने सम्बन्धी लिखा था।


आपदा को अवसर मे बदल कर कोरोना के मरीज की मजबूरी का पूरा फायदा उठाने मे कोई कसर नही छोड़ रहे निजी अस्पताल!

आपदा को अवसर मे बदल कर कोरोना के मरीज की मजबूरी का पूरा फायदा उठाने मे कोई कसर नही छोड़ रहे निजी अस्पताल!

07-Sep-2020

बढती कोरोना महामारी और आपदा को निजी अस्पतालों ने  अवसर मे बदल कर कोरोना के मरीज की मजबूरी का पूरा फायदा उठाने मे कोई कसर नही छोड़ रहे है , और प्रशासन ने निजी अस्पतालों में ईलाज का रेट तय कर उन्हें लूटने की पूरी छुट दे दी है  ,पूरे प्रदेश मे अधिकांश बडे अस्पतालों ने होटलों को किराये पर लेकर कोरोना पोजिटिव मरीजो को लूटने का धंधा चला रखा है और ये बे खौफ जोर शोर से जारी है, क्योंकि बढ़ती महामारी और लॉक डाउन से होटलों का करोबार् लगभग समाप्त है इस पर दिमाग लगाने वाले निज़ी हॉस्पिटल दोनों हाथो से कोरोना महामारी के नाम पर लूट रहे हैं। और प्रशासन और स्वास्थ विभाग खामोश मूक दर्शक बंनकर कोरोना के मरीजों को लूटते हुए मूक दर्शक बने देख रहा है ! और जनता आक्रोशित है क्योंकि महामारी से गरीब मध्यम वर्गीय अधिक पीड़ित है राजा - महाराजा मंत्री  तो होम आईशुलेशन मे करंटाईन हो कर इलाज करवा लेते हैं ! गरीब और मध्यम वर्गीय जनता मुसीबत में है लोगों के पास काम नही है कारोबार ठप्प पडा है आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है,  सरकारी अस्पताल में सुविधा नाम मात्र भी नही है और प्राइवेट अस्पताल कोरोना का डर दिखा कर प्रति दिन के हिसाब से हज़ारों रुपये कोरोंटाइंन के नाम से  चार्ज कर रहे है क्योंकि लोगो के दिल में कोरोना का डर और दहशत का भय बैठा हुआ है। और इस दहशत का फायेदा  उठा रहे है अवसर वादी निजी अस्पताल,ऐसे  समय में निजी अस्पतालों के संचालकों द्वारा मनमाने तरीके से कोविड-19 के मरीजों से  फीस वसूली किये जाने की शिकायत की जा रही है। यहाँ ये बात जनकारी मे लाना आवश्यक होगा की इन निजी अस्पताल  को किस आधार पर इनका रेट तय किया गया है। इनकी कारगुजरियों मुख्यमंत्री महोदय के संज्ञान में लाना अवश्यक हो गया है , क्योंकि स्वस्थ विभाग और उनके मंत्री आम जनता की पहुँच से बाहर है, वहाँ कोई सुनवाई नहीं होती है, इसका उदाहरण हाल ही में एक पत्रकार का परिवार जिसके परिजन निजी अस्पताल में भर्ती था, भारी भरकम बिल देख कर पत्रकार को स्वस्थ मंत्री जी के बंगले भेजा गया था दिन भर बैठने के बाद भी कोई बात भी करने को तैयार नही हुआ , मंत्री जी के निजी सचिव बंगले में रहने के बाद भी मिलने को तैयार नहीं हुए राज्य के जनता के स्वस्थ की जिम्मेदारी किसकी है  जब ये सुनने वाले नहीं है तो, एक और जानकारी के अनुसार इस कोविड महामारी के चलते मरीज की मौत हो जाने पर मरीज के परिजन अगर अस्पताल का पूरा बिल न भी चुका पाएं तो भी शव को ले जाने से मे भी हिल हवाला किया जा रहा है,
ऐसे ही मनमानी जारी रहा तो हालात और बिगड़ जायेंगे गरीब  और मध्य्यम वर्गीय पीड़ित परिवार निजी अस्पतालों में ईलाज कराने से कतरा रहे हैं और सरकारी अस्पतालों  में मूलभूत सुविधाए नही मिलने की शिकायत की जा रही है कि ऐसी स्थिति में लोग कहाँ जायेंगे प्रशासन को ध्यान देकर ऐसे निजी अस्पतालों की जाँच कर इनका  लाइसेंस निरस्त  करना देना चाहिए । 

 


पश्चिम बंगाल कोलकाता के नारकल डांगा स्थित झुग्गी झोपड़ियों में लगी भीषण आग

पश्चिम बंगाल कोलकाता के नारकल डांगा स्थित झुग्गी झोपड़ियों में लगी भीषण आग

07-Sep-2020

Report: Abdul Kalam

Place:Bengal

आग पर काबू पाने के लिए मौके पर पहोंची दमकल की 17 इंजने

पश्चिम बंगाल कोलकाता के नारकल डांगा स्थित बसी झुगी झोपड़ियों में अहले सुबह अचानक से लगी आग के बाद पूरे इलाके में अफरा तफरी का माहौल छा गया आग की लपटें इतनी तेज थीं के देखते ही देखते इन लपटों में करीब डेढ़ सौ झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया और झोपड़ियां जलकर पूरी तरह खाक हो गई वहीं घटना की खबर सुन मौके पर एक पर एक करीब 17 दमकल की इंजने पहोंच गई जो लगातार आग पर काबू पाने की प्रयास में लगी है फिलहाल इलाके में लगी इस आग के कारण हर तरफ काला धुंआ पसर गया है जिससे स्थानीय लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कतें हो रही हैं साथ ही घटना का जायजा लेने प्रशासनिक अधिकारियों सहित दमकल मंत्री सुदीप बसु भी पाहोंचे हुवे है


शिक्षाको  का हुआ सम्मान

शिक्षाको का हुआ सम्मान

06-Sep-2020

आज शिक्षक दिवस के उपलक्ष में राजीव भवन में महिला कांग्रेस द्वारा शिक्षक सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री माननीय श्री दीपक सक्सेना जी जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री पंडित गंगा प्रसाद तिवारी जी जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष किरण चौधरी जी शहर  कांग्रेस अध्यक्ष श्री पंकज शुक्ला जी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विश्वनाथ ओके जी एवं अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी एवं समस्त महिला पदाधिकारी उपस्थित रहे कार्यक्रम में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित एवं राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों का सम्मान किया ग

आशीष मालवीय

जिला छिंदवाड़ा एमपी मध्य प्रदेश


डॉ. राधाकृष्णनः एक दार्शनिक का शासक बनना

डॉ. राधाकृष्णनः एक दार्शनिक का शासक बनना

05-Sep-2020

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिवस- 5 सितम्बर 2020 पर विशेष

- ललित गर्ग-

भारत के राष्ट्रपति, महान दार्शनिक, शिक्षाशास्त्री डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का दार्शनिक चिन्तन, जीवन मूल्यों को लोकजीवन में संचारित करने की दृष्टि एवं गिरते सांस्कृतिक मूल्यों की प्रतिष्ठा का संकल्प कालजयी है जो युग-युगों तक राष्ट्र एवं समाज का मार्गदर्शन करता रहेगा, उनका जन्म दिवस 5 सितम्बर पूरे देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन हमारे एक ऐसे ही प्रकाश-स्तंभ हैं, जिन्होंने अपनी बौद्धिकता, सूझबूझ, व्यापक सोच से भारतीय संस्कृति के संक्रमण दौर में संबल प्रदान किया। वे भारतीय संस्कृति के ज्ञानी, एक महान् शिक्षाविद, महान् दार्शनिक, महा-मनीषी अध्येता, समाज-सुधारक, राजनीतिक चिन्तक एवं भारत गणराज्य के राष्ट्रपति थे। वे समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे। उनका मानना था कि शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है और यही आदर्श समाज संरचना का आधार है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति घोषित की गयी है, इसको लेकर देश में शिक्षा एवं शिक्षक पर व्यापक चर्चा आरंभ रही है। ऐसे समय में डॉ. राधाकृष्णन के शिक्षा विषयक चिन्तन एवं प्रेरणाओं को अपनाने की अपेक्षा है। क्योंकि डॉ. राधाकृष्णन ने अपने जीवन के 40 वर्ष एक शिक्षक के रूप में व्यतीत किए थे। वह एक आदर्श शिक्षक थे। इस दिन समस्त देश में भारत सरकार द्वारा श्रेष्ठ शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान किया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन बहुआयामी प्रतिभा के धनी होने के साथ ही देश की संस्कृति को प्यार करने वाले व्यक्ति थे। सन् 1967 तक राष्ट्रपति के रूप में वे देश की सेवा करते रहे। एक बार विख्यात दार्शनिक प्लेटो ने कहा था- राजाओं को दार्शनिक होना चाहिए और दार्शनिकों को राजा। प्लेटो के इस कथन को 1962 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने तब सच कर दिखाया, जब वह भारत के दूसरे राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। इस प्रकार एक दार्शनिक ने राजा की हैसियत प्राप्त की। बर्टेड रसेल जो विश्व के जाने-माने दार्शनिक थे, वे डॉ. राधाकृष्णन के राष्ट्रपति बनने पर अपनी प्रतिक्रिया को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा था ‘ यह विश्व के दर्शन शास्त्र का सम्मान है कि महान भारतीय गणराज्य ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राष्ट्रपति के रूप में चुना और एक दार्शनिक होने के नाते मैं विशेषतः खुश हूं। यह विश्व के दर्शन शास्त्र का सम्मान है।
डॉ. राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरूतनी ग्राम में, जो मद्रास, अब चेन्नई से लगभग 64 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, 5 सितंबर 1888 को हुआ था। वे एक ब्राह्मण परिवार से संबंधित थे। वह बचपन से ही मेधावी थे। इन्होंने वीर सावरकर और स्वामी विवेकानन्द का गहन अध्ययन किया, दुनिया के विभिन्न धर्म एवं दर्शनों का तुलनात्मक अध्ययन किया। उन्होंने दर्शन शास्त्र में एमए किया और सन् 1916 में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए। उनको बचपन से ही पुस्तकों से प्रेम था। इस कारण तभी स्पष्ट हो गया था कि यह बालक बड़ा होकर विद्वत्ता एवं महानता का वरण अवश्य करेगा। यही हुआ, उन्होंने सत्यं, शिवं और सौन्दर्य की युगपत् उपासना की। उन्होंने अपने बौद्धिक कौशल से सम्पूर्ण भारत को धर्म एवं संस्कृति के अटूट बंधन में बांधकर विभिन्न मत-मतांतरों के माध्यम से सामंजस्य स्थापित किया। उन्होंने विज्ञान का अनादर नहीं किया, किन्तु उसके जो दोष हैं, उनकी उन्होंने भर्त्सना की। वे दर्शन को केवल मानसिक व्यायाम का साधन नहीं मानते थे। इसलिये उन्होंने जो कुछ लिखा, वह केवल बुद्धि की तुष्टि के लिये नहीं है, बल्कि उससे तात्कालिक समस्याओं का समाधान होता है, जीवन को गति मिलती है, मन को प्रेरणा एवं धार्मिक भावों को स्फूर्ति प्राप्त होती है।
हिन्दुत्ववादी विचारों को हेय दृष्टि से देखने वालों और उनकी आलोचना करने वालों की आलोचना को डॉ. राधाकृष्णन ने चुनौती की तरह लिया और हिन्दुवादिता का गहरा अध्ययन करना आरम्भ कर दिया। वे यह जानना चाहते थे कि वस्तुतः किस संस्कृति के विचारों में चेतनता है और किस संस्कृति के विचारों में जड़ता है। तब स्वाभाविक अंतर्प्रज्ञा द्वारा इस बात पर दृढ़ता से विश्वास करना आरम्भ कर दिया कि भारत के दूरस्थ स्थानों पर रहने वाले गरीब तथा अनपढ़ व्यक्ति भी प्राचीन सत्य को जानते थे। इस कारण उन्होंने तुलनात्मक रूप से यह जान लिया कि भारतीय अध्यात्म काफी समृद्ध है और क्रिश्चियन मिशनरियों द्वारा हिन्दुत्व की आलोचनाएं निराधार हैं। इससे इन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि भारतीय संस्कृति धर्म, ज्ञान और सत्य पर आधारित है जो प्राणी को जीवन का सच्चा संदेश देती है। भारतीय संस्कृति में सभी धर्मों का आदर करना सिखाया गया है और सभी धर्मों के लिए समता का भाव भी हिन्दू संस्कृति की विशिष्ट पहचान है। इस प्रकार उन्होंने भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान को समझा और उसके काफी नजदीक हो गए।
डॉ. राधाकृष्णन की महात्मा गांधी से प्रथम भेंट 1915 में हुई थी। उनके विचारों से प्रभावित होकर राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय आन्दोलन के समर्थन में लेख भी लिखे। जुलाई, 1918 में मैसूर प्रवास के समय उनकी भेंट रवीन्द्रनाथ टैगोर से हुई। इस मुलाकात के बाद वह टैगोर से काफी अभिभूत हुए। उनके विचारों की अभिव्यक्ति हेतु डॉ. राधाकृष्णन ने 1918 में ‘रवीन्द्रनाथ टैगोर का दर्शन’ शीर्षक से एक पुस्तक लिखी। इसके बाद उन्होंने दूसरी पुस्तक ‘द रीन आफ रिलीजन इन कंटेंपॅररी फिलॉसफी’ लिखी। इस पुस्तक ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी। यह डॉ. राधाकृष्णन की ही प्रतिभा थी कि स्वतंत्रता के बाद इन्हें संविधान निर्मात्री सभा का सदस्य बनाया गया। आजादी के बाद उनसे आग्रह किया गया कि वह मातृभूमि की सेवा के लिए विशिष्ट राजदूत के रूप में सोवियत संघ के साथ राजनयिक कार्यों की पूर्ति करें। इस प्रकार विजयलक्ष्मी पंडित का इन्हें नया उत्तराधिकारी चुना गया।
डॉ. राधाकृष्णन को स्टालिन से भेंट करने का दुर्लभ अवसर दो बार प्राप्त हुआ। जब वे विदा होने वाले थे, उस समय राधाकृष्णन ने स्टालिन के सिर और पीठ पर हाथ रखा। तब स्टालिन ने कहा था ‘तुम पहले व्यक्ति हो, जिसने मेरे साथ एक इंसान के रूप में व्यवहार किया हैं और मुझे अमानव अथवा दैत्य नहीं समझा है। तुम्हारे जाने से मैं दुःख का अनुभव कर रहा हूँ। मैं चाहता हूँ कि तुम दीर्घायु हो। मैं ज्यादा नहीं जीना चाहता हूँ। इस समय स्टालिन की आँखों में नमी थी। फिर छह माह बाद ही स्टालिन की मृत्यु हो गई। 1952 में सोवियत संघ से आने के बाद डॉ. राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति निर्वाचित किए गए। संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति का नया पद सृजित किया गया था। नेहरू जी ने इस पद हेतु राधाकृष्णन का चयन करके पुनः लोगों को चैंका दिया। उन्हें आश्चर्य था कि इस पद के लिए कांग्रेस पार्टी के किसी राजनीतिज्ञ का चुनाव क्यों नहीं किया गया। डॉ. राधाकृष्णन ने अनेक महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे पेरिस में यूनेस्को नामक संस्था की कार्यसमिति के अध्यक्ष भी रहे। यह संस्था ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ का एक अंग है। राष्ट्रपति बनने के बाद राधाकृष्णन ने भी पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की भाँति स्वैच्छिक आधार पर राष्ट्रपति के वेतन से कटौती कराई थी। उन्होंने घोषणा की कि सप्ताह में दो दिन कोई भी व्यक्ति उनसे बिना पूर्व अनुमति के मिल सकता है। इस प्रकार राष्ट्रपति भवन को उन्होंने सर्वहारा वर्ग के लिए खोल दिया। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद की तुलना में राधाकृष्णन का कार्यकाल काफी कठिनाइयों से भरा था। इनके कार्यकाल में जहाँ भारत-चीन युद्ध और भारत-पाकिस्तान युद्ध हुए, वहीं पर दो प्रधानमंत्रियों की पद पर रहते हुए मृत्यु भी हुई। उनके कार्यकाल में ही पंडित नेहरू और शास्त्रीजी की प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए मृत्यु हुई थी। लेकिन दोनों बार नये प्रधानमंत्री का चयन सुगमतापूर्वक किया गया। जबकि दोनों बार उत्तराधिकारी घोषित नहीं था और न ही संवैधानिक व्यवस्था में कोई निर्देश था कि ऐसी स्थिति में क्या किया जाना चाहिए। सचमुच उनका जीवन एक प्रेरणा है, एक रोशनी है, इस रोशनी को साथ रखते हुए आदर्श समाज रचना के संकल्प को सचेतन करने के लिये हम अग्रसर बने, नई शिक्षा नीति को उनकी प्रेरणाओं के आलौक में परिपूर्ण एवं भारतीयता के अनुरूप प्रतिष्ठापित करें, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

प्रेषकः

 (ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
मो. 9811051133

 


रिटायर्ड डी जी पी एम डब्ल्यू अंसारी ने केंद्र व प्रदेश सरकार से बुनकरों की समस्याओं के निराकरण की माँग की

रिटायर्ड डी जी पी एम डब्ल्यू अंसारी ने केंद्र व प्रदेश सरकार से बुनकरों की समस्याओं के निराकरण की माँग की

03-Sep-2020
रिटायर्ड डीजीपी श्री एम.डब्ल्यु अंसारी जी के द्वारा बुनकरों से संबन्धित समस्याओं के निराकरण हेतु केन्द्र सरकार एंव प्रदेश सरकार से मांग। 1) पाॅवरलूम बुनकरों की निर्धारित न्यूनतम पुरानी फ्लेटरेट योजना बहाल करते हुए 1 जनवरी 2020 से पासबुक के आधार पर बिजली बिल जमा कराया जाय। 2) बिजली विभाग एंव हत्कर्घा विभाग द्वारा किये जा रहे उत्पीड़न एंव शोषण को तुरन्त बन्द कराया जाय। 3) पाॅवरलूम बुनकरों के ऊपर जो फर्जी बिल बक़ाया है उसको जल्द से जल्द माफ किया जाय। इसके अतिरिक्त भारत सरकार एंव प्रदेश सरकार के द्वारा हर वह क़दम उठाया जाय जिससे कि बुनकर मज़दूर किसानों की तरह आत्मा हत्या करने पर मजबुर न हों। इसके लिए आवश्यक है कि उनको राॅ-मटेरियल इंट्रेस्ट फ्री लोन और भी अन्य वित्तीय सहायता दी जाय जिससे कि पाॅवरलूम का कारोबार पुनः जीवित हो सके। जय हिन्द, जय भारत।

राहुल तुम्हे बोलने की इज़ाज़त नहीं है  ,क्योकि सच्चाइ  इन्हे ?

राहुल तुम्हे बोलने की इज़ाज़त नहीं है ,क्योकि सच्चाइ इन्हे ?

03-Sep-2020

एम् ऐच ज़करिया 

राहुल तुम्हे बोलने की इज़ाज़त नहीं है ?

एक स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए एक मज़बूत सरकार के सामने एक मजबूत विपक्ष का होना ज़रूरी समझा जाता है. विपक्ष सरकार के कार्यों और नीतियों पर सवाल उठाता है और उसे निरंकुश होने से रोकता है. लेकिन जिस तरह से वर्तमान  सरकार CBI  ED INCOMTEX का खौफ दिखा कर विपक्ष को चुप करने का काम कर रही है  वह जग जाहिर है।

यहाँ  विपक्ष  को कमज़ोर करने का हर सम्भव प्रयास किया जा रहा है और   कई तरीके से  राज्य की सत्ता को पाने  लोकतंत्र की गरिमा को कुचला जा रहा है जिसका ताज़ा उदाहरण है राजस्थान ,जबकि  भारतीय लोकतंत्र इस बात का गवाह रहा है कि जब भी  विपक्ष् कमजोर रहा  तब - तब देश कमज़ोर हुआ है।
40 साल में पहली बार भारत आर्थिक मंदी की चपेट में जा चुका है , आज़ाद भारत के इतिहास में अर्थव्यवस्था इतने ख़राब हाल में कभी नहीं आई और ऐसे मे राहुल गांधी का सवाल पूछना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है सरकार के लिए क्योंकि सरकार की खामोशी लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़े कर रहा हैं, कोरोना को लेकर, अर्थव्यवस्था को लेकर।
एक समय वह भी था जब तत्कालीन सरकार , माननिय अटल बिहारी वाजपेयी, भैरो सिंह शेखावत, लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं को संसद में बोलने के पूरे अवसर दिये जाते थे और सत्ता पक्ष उनकी बातों को संजीदगी से सुनाता और न सिर्फ सुनाता, नीतियों और योजनाओं को विपक्ष की बहस से धार दिया जाता था और उसे जनोत्थान के लिए बेहतर समझा जाता है.लेकिन अब तो संसद में भी बोलने का अधिकार नहीं है?
लेकिन आज जो हो रहा है उसे सभी अचंभित् है , लोकतंत्र के मंदिर में बोलने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है,क्योंकि वर्तमान सरकार और भक्त मीडिया विपक्ष् को खामोश कर देना चाहती है जिसका ताजा तरिन उदाहरण है वर्तमान संसद सत्र और दूसरा उदाहरण है
हाल ही मे कॉंग्रेस कार्य समिति की बैठक और 23 कांग्रेस के नेताओ के लिखे पत्र को और वरिष्ठ नेताओं के नोक झोंक को गोदी  मीडिया ने बे मतलब का बतंगड़ बना दिया, जबकि लोक तांत्रिक प्रक्रिया में ये सब आम बात है !
लेकिन  विपक्ष् और भक्त मीडिया को तो बोलने का मौक मिलना चाहिए! क्योंकि उनका IT सेल इन्ही सबकी तलाश में रहता है।
कार्य समिति की बैठक में क्या हुआ इसे कोई नहीं जनता की अंदर क्या बाते हुई बस एक अनुमान लगाया गया और बोलने लगे।
कांग्रेस के पूर्ण कालिक अध्यक्ष पद को लेकर जिस तरह से  पार्टी में सियासी संकट की बाते तथा कथित IT सेल और गोदी मीडिया ने उठाई  और श्रीमती सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के समाचार चलाया गया वह संगठन में दरार बताने की साजिश ही नज़र आई । क्योंकि गांधी परिवार से हट बाहर किसी अन्य नेता को पार्टी की कमान देने के लेकर विचार-विमर्श की बे - बुनियाद बाते मीडिया में चलाई गई,  उससे तो ऐसा लगता हैं की विप क्ष् गाँधी परिवार से बहुत ज्यादा डारा हुआ है , क्योंकि गिरती अर्थ व्यवस्था को लेकर राहुल गाँधी के तीखे सवाल उठाने से ये ला - जवाब हो गए है  और भारतीय जनतापार्टी लगातार राजस्थान मणिपुर की घटना से  चूक जाने के बाद घबरा गई है , मन की बात में मोदी जी को जिस तरह से डिस लाइक किया गया उसे भी नज़र अंदाज़ नही किया जा सकता इनके प्रयोग लगातार फेल होते जा रहे है। 
वैसे इतिहास गवाह है कांग्रेस मे गाँधी परिवार के अलावा भी आजादी के बाद से 18 बार कांग्रेस अध्यक्ष बदले गए  जिनमें 13 नेता गांधी परिवार के बाहर से रहे है , कांग्रेस के इतिहास की बात करें तो 1947 में देश की आजादी के बाद से अब तक कांग्रेस के 18 अध्यक्ष हुए हैं. जिसमें सिर्फ 5 अध्यक्ष ही गांधी परिवार से रहे, जबकि 13 अध्यक्ष का गांधी परिवार से दूर-दूर तक नाता नहीं रहा. हालांकि, गांधी परिवार के सदस्य भले ही पांच हुए हों, लेकिन पांच दशक तक उनके हाथों में पार्टी की कमान रही और  उन लोगों ने जो खोया है जो कुर्बानी दी है उसे देश भुला नही सकता और उन्ही कुर्बानियों की वजह से कांग्रेस सत्ता के शिखर तक पहुँची , इतिहास गवाह है जब - जब गाँधी परिवार का नेतृत्व कांग्रेस से हटा है कांग्रेस कमजोर हुआ है  पार्टी के नेताओ में बिखराव  हुआ है,क्योंकि कार्यकारताओ और नेताओ को  गाँधी परिवार एक जुट  और समेट कररख सकती है और ये भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अच्छे से जनता है और वह कांग्रेस को कमज़ोर करने नित नई चाले चलता है ,अगर पद की ही चाह होती तो  सोनिया गाँधी प्रधान मंत्री कब की बन सकती थी  तो ये संगठन की बात है जो इतने बिगड़े स्वस्थ के बाद भी कांग्रेस को जिन्दा रखने पुरा परिवार समर्पित है!
ये गोदी मीडिया कैसे भूल गई की ये उनकी कुर्बानी का ही सिला है जो मनमोहन सिंह जैसा अर्थशात्री  देश का प्रधान मंत्री   बना और पद की गरिमा को बढ़ाया  10 साल नेतृत्व किया  ।
इन्ही बातो से भारतीय जनता पार्टी बौखला गई है क्योंकि मोदी जी के नेतृत्व का प्रभाव कम होता जा रहा है।

अब तो  फिर से राहुल गांधी ने भी अपन तेवर दिखाना शुरू कर दिया है, और अपने तीखे वयानों से भाजपा को ला जवाब कर दिया है, उनके प्रवक्ता अब बगले झाँकने लगे है गोदी मीडिया के चेंनलो में, इ नमें इतनी बेचैन पहले कभी नहीं देखी गई थी जितनी अब दिखाई दे रही है , क्योंकि मोदी के कद को टक्कर केवल राहुल गाँधी ही दे सकते है और इन दिनों  में राहुल गाँधी आक्रामक भी नजर आ ए है। क्योंकि विपक्ष् का कहीं दूर दूर तक अता पता नज़र नही आ रहा है ,और राहुल गाँधी के ट्वीट में उठाए गये मुद्दों का वास्तव में भाजपा और  सरकार सीधे तौर पर जवाब दे पा रहे  है। सो बौखलाहट में भाजपा और उनकी गोदी मीडिया नया शगूफा छोड़ कर गिरते अर्थ व्यवस्था और कोरोना संकट जैसे  मुद्दे से जनता का ध्यान  को
भटकाना चाहती हैं,  आपको बता दे की सत्ता क्षीण भाजपा अतीत के झरोखे से जवाब देने की कोशिशों में उलझ गई है। क्योंकि राजस्थान में इन्हे मुहॅ की खानी पड़ी है और बौखलाहट मे
भाजपा की ओर से इस किस्म की प्रतिक्रिया ने राहुल को राजनीतिक रूप से मजबूत और हमलावर बनाया है।कहना नहीं होगा कि  राहुलजी ने.कोरोना --19की महामारी  और.गलवान घाटी पर चीन के हमले के बाद विपक्ष के रूप में अपनी पार्टी के तेवर को एक नयी ऊंचाई दी है।

आज जिस तरह का एक तरफा माहौल देश में तैयार किया जा रहा है  कांग्रेस और अन्य विपक्ष् दलों के खिलाफ़ उन्हें ना बोलने देने और उन्हें समाप्त करने का उसे अब बे नकाब करने का
सच्चाई को सामने लाने का समय आ गया है  ? क्योंकि अधिकतर  गोदी मीडिया सरकार की चाटुकारिता  और नफरत का ज़हर फैलाने में लगी हुई है !ऐसे समय में लोकतंत्र बचाने के लिए विपक्ष् के साथ लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया के सम्मान और इज़्ज़त को भी बचाना होगा नही तो न संविधान बचेगा और ना लोकतंत्र, क्योंकि जिस तरह की विचार धारा लागू करने की कोशिशे की जा रही हैं उससे अब या तो कांग्रेस और विपक्ष् ही बचा सकता हैं। या देश गर्त में जा सकता है। क्योंकि
विपक्ष कहीं भी नहीं दिखाई दे रहा है, और न कोई मीडिया है जो सरकार की आलोचना कर सके क्योंकि ना मायावती बोल रही हैं ना मुलायम सिंह और अखिलेश यादव ऐसे मे सिर्फ कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है जो लगातार भाजपा सरकार के कार्यकलापों को जनता के सामने लाने का प्रयास कर रही है और उसी का परिणाम है, जो सरकार खामोश हो गई है।
क्योंकि मुद्दा विहीन सरकार के पास अब जनता को दिखाने के लिए झूठे सपने नही बचे हैं।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में है, नफरत फैलाने वाली ताकतें देश का मुंह बंद करना चाहती हैं

      

 


जॉन विक ने पीएम मोदी के ट्विटर हैंडल को हैक करते हुए ये कहा?

जॉन विक ने पीएम मोदी के ट्विटर हैंडल को हैक करते हुए ये कहा?

03-Sep-2020

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पर्सनल वेबसाइट का ट्विटर अकाउंट गुरुवार को हैक कर दिया गया।

हैकर्स ने पीएम मोदी के निजी वेबसाइट सेो लिंक ट्विटर narendramodi_in को हैकर्स बिटक्वाइन की डिमांड रखी। पीएम मोदी के ट्विटर अकाउंट को हैक कर हैकर्स ने करीब आधे दर्जन ट्विट किए और अपनी डिमांड रखी।

इतना ही नहीं हैकर्स ने खुद अपनी पहचान को भी ट्विट के जरिए उजागर की । हम आपको उस हैकर्स के बारे में बता रहे हैं, जिसने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सोशल मीडिया को हैक कर सनसनी पैदा कर दी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पर्सनल वेबसाइट के ट्विटर हैंडल को हैक कर हैकर्स ने बिटक्वाइंन की डिमांड की। पीएम के इस ट्विटर अकाउंट पर 25 लाख फॉलोअर्स हैं। इतना ही नहीं हैकर ने अपनी पहचान भी उजागर कर दी।
हैकर ने अकाउंट हैक करने के बाद लिखा था कि इस अकाउंट को जॉन विक (hckindia@tutanota.com) ने हैक किया है। जॉन विक ने पीएम मोदी के अकाउंट को हैक किया दिया।

 पीएम मोदी के ट्विटर अकाउंट को हैक करने वाले हैकर ने अपनी पहचान जॉन विक के तौर पर बताई। जॉन विक एक फेमस हॉलीवुड फिल्म है। इस फिल्म में डॉन विक की भूमिक हॉलीवुड के मशहूर एक्टर कीनू रीव्स ने निभाई है।

 उसने पीएम मोदी के अकाउंट को हैक कर कोरोना वायरस के लिए डोनेशन देने काी भी मांग की। narendra modi.in से जुड़े ट्विटर अकाउंट को हैक कर जॉन विक ने PM रिलीफ फंड में पैसे जमा करने की बात लिखी। उसने लोगों को बिटक्वाइन के जरिए डोनेशन करने को कहा।


यह मूवी एक अमेरिकी एक्शन थ्रिलर मीडिया फ्रैंचाइजी है। इसे डेरेक कोलस्टैड ने तैयार किया है।फिल्म एक काल्पनिक कैरेक्टर पर आधारित है, जिसमें फिल्म का मुख्य कलाकार जॉन विक का किरदार बहुत फेमस हुआ था। इस फिल्म को तीन पार्ट में तैयार किया गया है। इस फिल्म को डायरेक्ट चाड स्टेल्स्की ने किया था।

 

साभार- वन इंडिया हिन्दी

 


400 लोगों के सामने पहले चाची-भतीजे के उतरवाए कपड़े, फिर…….

400 लोगों के सामने पहले चाची-भतीजे के उतरवाए कपड़े, फिर…….

02-Sep-2020

Report: Nikhil Kumar

 Pleace: राजस्थान

राजस्थान के सीकर जिले में खाप पंचायत के एक शर्मनाक आदेश पर चाची और भतीजे को अमानवीयता से गुजरना पड़ा। पंचायत ने दोनों के कपड़े उतरवाए और करीब 400 लोगों के सामने नंगे नहलाया गया। ससे भी शर्मनाक बात यह है कि पुलिस को घटना के बारे में 11 दिन बाद उस समय पता चला, जब अखिल राजस्थान सांसी समाज सुधार एवं विकास न्यास के प्रदेश अध्यक्ष सवाई सिंह मालावत ने सीकर के एएसपी को इसकी लिखित शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

कुछ समय पहले सीकर जिले की नेछवा ग्राम पंचायत के सोला गांव के सांसी समाज से जुड़े और रिश्ते में चाची-भतीजा लगने वाले युवक-युवती का एक वीडियो वायरल हो गया था। वीडियो सामने आने पर खाप पंचायत के लोग इकट्ठे हुए और शुद्धीकरण के नाम पर युवक-युवती को बिना कपड़ों के सभी के सामने नहलाने का फरमान सुनाया। सजा सुनाने वाली खाप पंचायत के पंचों ने दोनों के परिवारों पर जुर्माना भी लगाया। 

युवक से 31 हजार रुपए और युवती के परिवार से 22 हजार रुपए वसूले गए। 21 अगस्त को गांव में हुई इस खाप पंचायत में सीकर, चूरू, झुंझुनूं और बीकानेर से पंच इकट्ठा हुए थे। सजा सुनाने वाले पंचों में से एक सरकारी नौकरी से रिटायर्ड है और एक सरकारी कर्मचारी है।

सीकर के एएसपी डॉक्टर देवेंद्र शर्मा का कहना है कि पीड़ितों के परिवार की सहमति से युवक और युवती को नहलाया गया है। युवती के सास-ससुर से पूछताछ की जा रही है। एसटी-एससी सेल के सीओ, लक्ष्मणगढ़ सीओ और थानाधिकारी को भेजकर जांच करवाई गई है।


बिहार चुनाव : पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने महागठबंधन से तोड़ा नाता

बिहार चुनाव : पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने महागठबंधन से तोड़ा नाता

02-Sep-2020

Report:Sanjy Kumar

Pleace:Bihar

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने महागंठबंधन से नाता तोड़ लिया है अब वो एक बार फिर से NDA में वापसी करेंगे.

पटना: 

बिहार में कुछ ही दिनों बाद विधानसभा का चुनाव होने वाला है. पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने महागंठबंधन से नाता तोड़ लिया है अब वो एक बार फिर से NDA में वापसी करेंगे. बताते चले कि हाल के दिनों में मांझी महागठबंधन से नाराज चल रहे थे. मांझी ने महागठबंधन में रहने के लिए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सामने कई शर्तें रखी थी, लेकिन नीतीश कुमार से उनकी बढ़ती नज़दीकी के खबरों कें बीच तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने उनकी किसी भी मांग को गंभीरता से नहीं लिया.पटना में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में जीतन राम मांझी ने कहा कि वो जनता दल यूनाइटेड के साथ तालमेल करने जा रहे हैं और चूँकि  जनता दल यूनाइटेड NDA का हिस्सा है इसलिए वो भी NDA के पार्टनर हो गए. 

गौरतलब है कि मांझी ने हाल ही में कहा था कि महागठबंधन में समन्वय समिति की मांग से कांग्रेस नेतृत्व को अवगत कराया गया है. जिसके बाद उन्होंने उम्मीद जतायी थी कि मामले पर कांग्रेस की तरफ से कोई कदम उठाया जाएगा लेकिन अब उन्होंने गठबंधन से अलग होने का फैसला लिया है. बताते चले कि जीतन राम मांझी 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू के खराब प्रदर्शन के बाद नीतीश कुमार द्वारा दिए गए त्यागपत्र के बाद मुख्यमंत्री बने थे. हालांकि बाद में नीतीश कुमार के साथ उनके रिश्ते खराब हो गए जिस कारण से उन्हें पद छोड़ना पड़ा था. 


UPSC CSE प्रीलिम्स 2020: एडमिट कार्ड डाउनलोड करें

UPSC CSE प्रीलिम्स 2020: एडमिट कार्ड डाउनलोड करें

02-Sep-2020

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से 4 अक्टूबर को होने वाली सिविल सर्विसेज प्रीलिम्स परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। 

जो उम्मीदवार परीक्षा देने वाले हैं वह upsc.gov.in की आधिकारिक वेबसाइट से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। यह परीक्षा देशभर के विभिन्न सेंटर्स में होगी।

 बता दें कि इस परीक्षा के माध्यम से आईएएस, आईएफएस और आईपीएस पदों पर अभ्यर्थ‍ियों का चयन किया जाएगा।

 पहले इस परीक्षा का आयोजन 31 मई को किया जाना था, लेकिन कोरोना वायरस के कारण परीक्षा स्थगित करनी पड़ी। अब परीक्षा का आयोजन 4 अक्टूबर को किया जाएगा।

 एडमिट कार्ड डाउनलोड 

स्टेप 1 – सबसे पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं।

 स्टेप 2 – होमपेज पर ई-एडमिट कार्ड लिंक पर क्ल‍िक करें।

 स्टेप 3 – रजिस्ट्रेशन नंबर और रोल नंबर दर्ज करें।

स्टेप 4 – सबमिट करें।
स्टेप 5 – आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर होगा।
स्टेप 6 – एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और इसका प्रिंटआउट निकाल लें।

बता दें, यूपीएससी की परीक्षा सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक होती है। तीन चरणों में यूपीएससी की परीक्षा में चयन किया जाता है, इसमें पहले प्रीलिम्स, फिर मेन और आखिरी में इंटरव्यू कर उम्मीदवारों का चयन किया जाता है।
साभार- आज तक

 

महाकौशल में छिंदवाड़ा को सबसे ज्यादा नुकसान: नकुल नाथ

महाकौशल में छिंदवाड़ा को सबसे ज्यादा नुकसान: नकुल नाथ

01-Sep-2020

छिंदवाड़ा: जिले में बाढ से हुए नुकसान का जायजा लेने सांसद नकुल नाथ मंगलवार को छिंदवाड़ा आए। श्री नाथ ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि महाकौशल में सबसे ज्यादा नुकसान छिंदवाड़ा जिले को हुआ है। एक हजार मवेशियों की मौत हो गई है। कई लोगों के घर की छत छीन गई। इसे लेकर वो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखेंगे और प्रभावितों को ज्यादा से ज्यादा सहायता दिलाने का प्रयास करेंगे।

 नकुल नाथ ने हेलीकॉप्टर के जरिए चौरई, सौसर अमरवाड़ा का दौरा कर किसानों को हुए नुकसान का आकलन किया।

व्हाइट नकुल नाथ सांसद छिंदवाड़ा


पेय जल की आपरूति के लिए स्थानीय लोगों का सड़क पर प्रदर्शन

पेय जल की आपरूति के लिए स्थानीय लोगों का सड़क पर प्रदर्शन

01-Sep-2020

Report:Abdul Kalam

Pleace:Bengal

पार्षद प्रेमनाथ शाव ने सड़क पर प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शन कारियों को करवाया सांत,

दिया जल्द से जल्द इलाके की पेय जल शमस्या समाधान करने का अस्वाशन

पश्चिम बंगाल आसनसोल नगर निगम के वार्ड नंबर 67,68,69 और 70 में पिछले कई दिनों से हो रही पेय जल की आपरूति ठप होने के कारण इलाके के रहने वाले हजारों लोगों को काफी समस्या का समाधान करना पड़ रहा था लोगों को पेय जल की पूर्ति करने के लिए या तो पानी खरीदना पड़ता था या फिर कई किलोमीटर दूर जाकर पानी की वेवस्था करनी पड़ती थी हालांकि की इलाके में हो रही पानी की समस्या को समाधान करने के लिए आसनसोल नगर निगम के एमएमआइसी पूर्ण शशि राय ने भी इलाके का दौरा किया स्थानीय लोगों ने पूर्ण शशि राय का घेराव कर प्रदर्शन भी किया जिसके बाद पूर्ण शशि राय ने स्थानीय लोगों को जल्द से जल्द इलाके की पेय जल की समस्या को दूर करने का आश्वाशन भी दिया पर कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई समाधान नही हुवा जिससे गुस्साए स्थानीय लोगों ने मंगलवार को सड़क पर उतर कर निगम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया वहीं घटना की खबर सुन पार्षद प्रेम नाथ शाव पहोंच गए और उन्होंने प्रदर्शन कारियों को ये आस्वाशन दिया के जबतक इलाके के चारों वाडों में पेय जल की शुविधा बहाल नही हो जाती है तब-तक स्थानीय लोगों को टैंकर के जरिए पानी उपलब्ध करवाई जाएगी और एक सप्ताह के भीतर पेय जल की समस्या दूर कर इलाकों में जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी पार्षद के इस आस्वाशन को सुनने के बाद सड़क पर प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शन कारियों ने सड़क को खाली कर प्रदर्शन बंद कर दिया हम बतादें के पार्षद प्रेमनाथ शाव इलाके के एक शोसलिस्ट व्यक्ति है और उन्होंने लॉक डाउन के दौरान कुल्टी और बराकर क्षेत्र में रह रहे गरीब और जरूरत मंदों की काफी मदद की थी यही कारण है के इन इलाकों में जनता उनकी काफी इज्जत और सम्मान करती है और उनकी कोई भी बात नही काटती


पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के निधन के बाद उनके पैतृक आवाश पर छाया गम का माहौल

पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के निधन के बाद उनके पैतृक आवाश पर छाया गम का माहौल

01-Sep-2020

Report:Abdul Kalam 

Pleace: Bengal 

बीरभूम जिले में स्थित मुखर्जी भवन पर जुटने लगे हैं उनके रिश्तेदार और इलाके के लोग

पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का सोमवार को निधन हो गया है वो पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे उनको भेंटीलेटर पर रखा गया था उनकी कोरोना संक्रमन होने की भी खबर सामने आई थी पर कल उनके निधन होने के बाद पूरे देश मे शोक का माहौल छा गया देश के तमाम राजनीति दलों ने उनके निधन पर शोक जताते हुवे उन्हें भावबीन श्रद्धांजलि दी वहीं इस दुनिया से उनको  विदा लेने के बाद उनके पैतृक आवास मुखर्जी भवन पर उनके कुछ रिश्तेदार और स्थानीय लोग भी इक्कठा हुवे और उन्हें अपनी नम आंखों से उन्हें याद कर रहे है


रिहाई के आदेश के बाद डॉ कफील खान की पत्नी बोलीं- प्लीज़ NSA का गलत इस्तेमाल ना करें

रिहाई के आदेश के बाद डॉ कफील खान की पत्नी बोलीं- प्लीज़ NSA का गलत इस्तेमाल ना करें

01-Sep-2020

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भड़काऊ भाषण देने के आरोप में रासुका का सामना कर रहे डॉक्टर कफील खान को रिहा करने के आदेश दिए हैं. इसपर उनकी पत्नी की प्रतिक्रिया आई है’

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad HC) ने भड़काऊ भाषण देने के आरोप में रासुका (National Security Act-NSA) का सामना कर रहे डॉक्टर कफील खान को रिहा (Dr Kafeel Khan) करने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने मंगलवार को मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि 'NSA के तहत डॉक्टर कफील को हिरासत में लेना और हिरासत की अवधि को बढ़ाना गैरकानूनी है. कफील खान को तुरंत रिहा किया जाए.' इसपर उनकी पत्नी की प्रतिक्रिया आई है. एक वीडियो जारी कर उनकी पत्नी शबिस्ता खान (Shabista Khan) ने कहा कि उनकी जिंदगी से सात महीने छीन लिए गए, जिसे अब कोई वापस नहीं लौटा सकता है.

शबिस्ता खान ने कहा, 'एक निर्दोष व्यक्ति, जिसने कुछ नहीं किया है, उसपर NSA लगाकर उसे जेल में बंद कर दिया गया और सात महीनों तक उसे प्रताड़ित किया गया. वो सात महीने कोई वापस नहीं ला सकता है. हम तो जब सोचते हैं कि ये सात महीने कैसे गुजरे हैं तो हमारी रूह कांप जाती है. अगर आपके पास NSA का पावर है तो उसे मिसयूज़ मत करिए. अगर कोई दंगा कर रहा है. कुछ गलत कर रहा है तो जरूर उसे जेल में डाल दीजिए, उसपर NSA लगा दीजिए. लेकिन जिसने कुछ किया ही नहीं है, उसपर NSA लगा दिया गया और जेल में डाल दिया गया. प्लीज़ यही अपील है कि अगर आपके पास NSA की शक्ति है तो उसका गलत इस्तेमाल मत करिए.'


गोंडा-बहराइच राजमार्ग पर भीषण सड़क दुर्घटना, पांच की मौत, 11 घायल

गोंडा-बहराइच राजमार्ग पर भीषण सड़क दुर्घटना, पांच की मौत, 11 घायल

31-Aug-2020

Report:Shuaib Hashmi

Pleace:बहराइच

उत्तर प्रदेश में गोंडा-बहराइच राजमार्ग पर सुकई पुरवा चौराहे पर सोमवार सुबह भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। चौराहे पर खड़ी खराब ट्रक में गोंडा की तरफ से आ रही सवारी गाड़ी एचआर 37 डी 4630 टकरा गई। 

टक्कर इतनी तेज थी कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। घटनास्थल पर ही दो लोगों की मौत हो गई, जिसमें एक की पहचान मिकऊ, सुल्तानपुर निवासी पवन कुमार (32) और दूसरे की सीवान, बिहार निवासी जितेंद्र गिरि (46) के रूप में की गई।

घायल हुए लगभग 14 लोगों को एसओ पयागपुर सीएचसी ले गए, जहां तीन घायलों ने दम तोड़ दिया। हादसे में काफी गंभीर रूप से घायलों को सीएचसी से मेडिकल कालेज बहराइच भेज दिया गया है। 

सुबह चार बजे के आस पास घटी दुर्घटना की सूचना पाते ही सीओ नरेश सिंह व एसओ पयागपुर व चौकी इंचार्ज खुटेहना शशि कुमार राणा पूरे दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। घटना स्थल का निरीक्षण कर बुरी तरह क्षत-विक्षत दो शवों को इकट्ठा करवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। 

प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो सवारी गाड़ी के ड्राइवर को झपकी आने से यह दर्दनाक हादसा हुआ। सीओ नरेश सिंह ने बताया कि अभी मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। हादसे में टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आस पास के गांवों के तमाम लोग मौके पर जमा हो गए। 

घटना की सूचना पाकर प्रशासन के तमाम आला अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गये। घटनास्थल पर ही मरने वाले दो लोगों के चेहरे तक पहचान में नहीं आ रहे थे। हादसे के कुछ मिनट बाद ही मौके पर पहुंचे खुटेहना चौकी इंचार्ज शशि कुमार राणा ने बताया कि गाड़ी में कुल 16 लोग सवार थे, जिनमें पांच की मौत हो गई है और 11 बहुत गंभीर रूप से घायल हैं।


बिहार में बाढ़ से 105 प्रखंडों में खेतों में लगी पूरी फसल बर्बाद

बिहार में बाढ़ से 105 प्रखंडों में खेतों में लगी पूरी फसल बर्बाद

31-Aug-2020

Report:Shamsh Alam 

Pleace:Bihar

बिहार में बाढ़ क्या आई, आधे दर्जन जिले के लोगों के रोज का निवाला ही छीन ले गई। 33 प्रतिशत फसल नुकसान वाले प्रखंडों की संख्या भले 234 प्रखंड हो, लेकिन 105 प्रखंड ऐसे हैं जहां किसानों को अनाज के लिए अब अगली फसल का ही इंतजार करना होगा। उनकी पूरी फसल बाढ़ में डूब गई है। ऐसे किसानों की निगाहें, अब सरकारी सहायता पर ही टिकी है। 

कुल खेती का 22 प्रतिशत फसल चौपट
राज्य में इस बार खरीफ मौसम में 36.76 लाख हेक्टयर में खेती हुई है। धान की खेती 32.78 लाख हेक्टेयर और मक्के की 3.98 लाख हेक्टेयर में हुई। बाढ़ ने जिन फसलों को 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान किया है उसका रकबा 7.53 लाख हेक्टेयर है। यानि कुल रकबे का लगभग 22 प्रतिशत भाग बाढ़ से प्रभावित हुआ। लेकिन, अगर प्रखंडों में हुई खेती के अनुसार गणना करें तो सौ से अधिक ऐसे प्रखंड है जहां की खेती पूरी तरह चौपट हो गई। 

कई जिलों में 90 प्रतिशत तक नुकसान 
आधा दर्जन जिले ऐसे हैं जहां जितनी खेती हुई उसकी 70 से 90 प्रतिशत तक फसल चौपट हो गई। दरभंगा जिले में जितने रकबे में धान और मक्का की खेती हुई, उसका 90 प्रतिशत भाग चौपट हो गया। मुजफ्फरपुर में 81 प्रतिशत तो खगड़िया में 74 प्रतिशत फसल नष्ट हो गई। इसके अलावा सहरसा, पूर्वी चम्पारण और पश्चिमी चम्पारण जिलों में भी नुकसान का प्रतिशत 60 से ऊपर है। 

लंबे समय तक टिकी बाढ़ 
राज्य में इस बार बाढ़ की अवधि काफी लंबी रही। धान की रोपनी खत्म होते ही आर्द्रा नक्षत्र से बाढ़ शुरू हो गई। अगस्त तक फसल खेतों में डूबी रही। ऐसे में पौधे भी छोटे थे और पानी भी ज्यादा दिन टिका, लिहाजा फसल को बचाना कठिन हो गया। 

खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी 
इस बार खरीफ की रोपनी समय पर हो गई थी। समय पर मानसून के आने के कारण किसानों ने खूब मेहनत की और धान के साथ मक्के की खेती भी बढ़े उत्साह से की। लेकिन उनकी यह खुशी ज्यादा दिन तक नहीं टिकी। अभी पूरी तरह धान की रोपनी हुई भी नहीं हुई कि बाढ़ ने दस्तक दे दी।   

बाढ़ प्रभावित जिले 
वैशाली, सारण, सीवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी,  समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, कटिहार, शिवहर, भागलपुर, सीतामढ़ी, मधेपुरा, सहरसा, अररिया और पूर्णिया। 

आपदा प्रबंधन का प्रावधान
68 सौ रुपए प्रति हेक्टेयर असिंचित क्षेत्र में फसल नष्ट होने पर
13 हजार 500 प्रति हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र में फसल नष्ट होने पर 
18
हजार प्रति हेक्टेयर पेरेनियल (सलाना) फसल में 
12
हजार 200 रुपए प्रति हेक्टेयर तीन फीट बालू जमा होने पर
39 हजार प्रति हेक्टेयर जमीन की व्यापक क्षति होने पर


मुहर्रम पर शिया समाज ने  ने किया रक्तदान !

मुहर्रम पर शिया समाज ने ने किया रक्तदान !

31-Aug-2020

गाँव खिरवा जलालपुर शोक में इस्लाम धर्म के शिया संप्रदाय के सदस्यों द्वारा मोहर्रम पर हज़रत इमाम हुसैन के सर्वोच्च बलिदान का शोक मनाने का एक अनोखा तरीका देखा गया।

विवार को मोहर्रम पर हजरत हुसैन के बलिदान पर शोक व्यक्त करते हुए ब्लेड से खुद को घायल करने की सदियों पुरानी परंपरा की जगह ग्रामीणों ने रक्तदान किया। हालांकि, यह भारतीय मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सचिव डॉ। अनिल नौसरन के सुझाव से संभव हो पाया, जो खिरवा जलालपुर के ग्रामीणों में से एक, सैफुल हसनैन जैदी, जो डॉक्टर के नाम से जाने जाते थे। विचार ने उसे क्लिक किया और उसने इसे अन्य ग्रामीणों के साथ साझा किया।

शुरुआत में, गाँव के मुश्किल से पाँच लोग रक्तदान के लिए तैयार थे, लेकिन धीरे-धीरे यह विचार हिट बन गया और गाँव के शिया मुसलमान मोहर्रम को चिह्नित करने के लिए इस कारण से बाहर आए, जैदी को सूचित किया।

रक्तदान करने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के ब्लड बैंक की एक टीम रविवार सुबह गांव पहुंची। चालीस शिया मुस्लिम, सभी काले संगठनों में पहने जाते हैं जो वे मुहर्रम के दौरान शोक के निशान के रूप में पहनते हैं, रक्त दान के लिए सामने आए। आईएमए सचिव, जो मेरठ में अपने ब्लड बैंक के प्रभारी हैं, डॉ। अनिल नौसरन ने कहा कि मोहर्रम को चिह्नित करने के लिए 18 से 59 साल के 40 लोगों ने रविवार को रक्तदान किया और वादा किया कि वे ऐसा करना जारी रखेंगे। आने वाले वर्षों के।

डॉ। नौसरन ने ग्राम खिरवा जलापुर के शिया मुसलमानों के इस अनुकरणीय कदम की सराहना की और कहा कि यह दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। जैदी, जो स्वयं दाताओं में से एक थे, ने कहा, “रक्त दान करके हम मानव जाति को बचाने में योगदान करना चाहते थे जैसा कि इमाम हुसैन द्वारा निर्देशित है और यह हमें io जियो और जीईन डो ‘के उनके शिक्षण की याद दिलाता है।” ”

एक अन्य दाता ज़फ़रुल हसनैन ज़ैदी ने कहा कि यह रक्त दान करने की एक अलग भावना थी जो किसी के लिए जीवन-रक्षक हो सकती है। शुरू में गाँव के लोग मोहर्रम के जुलूस पर प्रतिबंध से नाखुश थे, लेकिन बाद में रक्तदान के निर्णय के बाद, वे खुश लग रहे थे।

सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, शिया मुस्लिम लगभग 1400 साल पहले हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार के बलिदान का शोक मनाते हुए मोहर्रम पर अपने खून को तेज ब्लेड से बहाकर दर्द को महसूस करते हैं। यह हमारी परंपरा थी लेकिन इस बार हमने मानव जीवन को बचाने के लिए उसी रक्त को दान करने का फैसला किया, सैय्यद अली बिन हादी ने कहा। खिरवा जलालपुर एक मुस्लिम बहुल गाँव है जिसकी आबादी लगभग 10,000 है। गाँव में लगभग 200 शिया मुस्लिम परिवार हैं, जिन्होंने मुहर्रम को ‘इस साल आतंकवाद के खिलाफ एक कार्य’ के रूप में मनाया। हादी ने कहा, “हम आतंकवाद के खिलाफ हैं और अच्छे कामों से देश की सेवा कर रहे हैं और रक्तदान करना ऐसा ही एक काम था।”

डॉ। नौसरन ने ग्रामीणों की सराहना करते हुए कहा कि एक व्यक्ति द्वारा दान की गई एक यूनिट रक्त से दो लोगों की जान बच सकती है, इसलिए उनके द्वारा दान किए गए 40 यूनिट रक्त 80 व्यक्तियों के जीवन को बचा सकते हैं। इसलिए यह सही कहा गया है कि रक्तदान एक सर्वोच्च दान है। उन्होंने लोगों से इस तरह के कारण के लिए आगे आने का आह्वान किया