CAA - NRC  के खिलाफ  पटना में प्रदर्शन में शामिल हुए आमिर हंज़ला  की हत्या के आरोप में छह लोगों को गिरफ़्तार किया गया !

CAA - NRC के खिलाफ पटना में प्रदर्शन में शामिल हुए आमिर हंज़ला की हत्या के आरोप में छह लोगों को गिरफ़्तार किया गया !

03-Jan-2020

नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ पटना में प्रदर्शन में शामिल हुए आमिर हंज़ला  की हत्या के आरोप में छह लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। गिरफ़्तार लोगों में से दो आरोपी संदिग्ध हिंदू संगठनों से जुड़े हैं। युवक का शव प्रदर्शन के 10 दिन बाद 31 दिसंबर को मिला था और युवक को आख़िरी बार नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ आरजेडी के प्रदर्शन के दौरान हाथों में तिरंगा झंडा लिए देखा गया था। प्रदर्शन को ख़त्म करने के लिए जब पुलिस ने बल का प्रयोग किया था तब वह युवक वहाँ से जाने की कोशिश में था और इसी दौरान उसकी हत्या कर दी गई थी।

पुलिस ने कहा है कि फुलवारी शरीफ में बैग सिलाई का काम करने वाले 18 वर्षीय आमिर हंज़ला की हत्या के आरोप में हिंदू पुत्र संगठन के 23 वर्षीय नागेश सम्राट, हिंदू समाज संगठन के 21 वर्षीय विकास कुमार सहित छह लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इसकी पुष्टि की है कि हिंदू पुत्र संगठन उन 19 संस्थाओं में से है जिसके कार्यालयों और इससे जुड़े लोगों के बारे में बिहार पुलिस की विशेष शाखा ने पिछले साल मई में ही जानकारी जुटाने के लिए पत्र भेजा था।

पुलिस हिंसा भड़काने में सम्राट और कुमार की भूमिका की भी जाँच कर रही है। पुलिस का कहना है कि यह जाँच की जाएगी कि आरजेडी के प्रदर्शन के आह्वान के बाद और प्रदर्शन से पहले फ़ेसबुक लाइव से प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने में इन दोनों का कितना हाथ रहा है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, फुलवारी शरीफ थाना प्रमुख रफिक़ुर रहमान ने कहा, ’21 दिसंबर को प्रदर्शन के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का प्रयास करने वाले प्रमुख लोगों में ये दोनों युवा भी शामिल थे।’

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, उनमें से एक वीडियो में कुमार आरोप लगा रहा है कि पुलिस ‘हिंदुओं को प्रताड़ित’ करती है और ‘सभी हिंदू बेटों’ को ‘फुलवारी शरीफ़ में आने’ को कहते हुए देखा जा सकता है। एक अन्य वीडियो में सम्राट ने ख़ुद को ‘एक हिंदू का बेटा’ घोषित किया और कहा कि वह ‘फुलवारी थाना प्रमुख रहमान ने कहा, ‘हम इन दोनों संगठनों के शीर्ष अधिकारियों से सवाल करेंगे। ऐसे समूहों का रुझान बाहर से भीड़ जुटाने का रहा है। ये दोनों लड़के पटना के नहीं हैं। तीन साल पहले सांप्रदायिक तनाव के दौरान भी ऐसी ही भीड़ जुटी थी। हम और अधिक सबूत जुटा रहे हैं। हमारे पास एक मज़बूत केस है।’

उन्होंने कहा कि इन दोनों के ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश रचने का केस लगाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, फुलवारी शरीफ थाना प्रमुख रफिक़ुर रहमान ने कहा, ‘हमारी जाँच से पता चलता है कि पुलिस द्वारा हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल के इस्तेमाल किए जाने के बाद आमिर हंज़ला वहाँ से जाने की कोशिश में था। आमिर को तब संगत गली इलाक़े में कुछ लड़कों ने पकड़ लिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि ईंटों और अन्य भोथरी चीजों का इस्तेमाल उसे मारने के लिए किया गया था। सिर पर चोट के निशान थे और शरीर पर दो कट के निशान थे। पेट के हिस्से में काफ़ी ज़्यादा ख़ून जमा था जिससे पता चलता है कि अंदरूनी ख़ून का बहाव हुआ था।’

हंज़ला की हत्या मामले में गिरफ़्तार अन्य आरोपियों में दीपक महतो, छोटू महतो, सनोज महतो उर्फ ​​ढेलवा और रईस पासवान हैं। इन्हें पुलिस ने ‘ज्ञात अपराधी’ के रूप में बताया है। पुलिस ने कहा कि दीपक, छोटू और सनोज से उन्हें हंज़ला के शव के स्थान के बारे में पता चला।

पुलिस ने कहा कि हंज़ला 21 दिसंबर को अपनी बाइक से काम के लिए निकला था। लेकिन प्रदर्शन को देखते हुए उसकी यूनिट बंद थी और वह आरजेडी के प्रोटेस्ट मार्च में शामिल हो गया। पुलिस के अनुसार, वीडियो फ़ुटेज में दिख रहा है कि वह प्रदर्शन में हाथों में तिरंगा झंडा लिए चल रहा था। मोबाइल स्विच ऑफ़ होने से पहले उसकी लोकेशन फुलवारी शरीफ ब्लॉक ऑफ़िस के पास मिली। बाद में इसी क्षेत्र में उसके शव को पाया गया। हंज़ला के पिता ने 21 दिसंबर की रात को ही गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, हंज़ला के पिता सोहेल अहमद ने कहा कि यह पहली बार था कि किसी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए वह गया था। वह पूछते हैं कि ‘उसकी क्या ग़लती थी? उसने तो हाथ में तिरंगा झंडा ले रखा था।’

हज़ेला का परिवार मूल रूप से दरभंगा का है और वह क़रीब आठ साल से किराए पर फुलवारी शरीफ में रह रहा है।

पहुँच गया है’। मीडिया इन पुट 


इंडोनेशिया : जकार्ता में बाढ़ से 16 लोगों की मौत, हजारों फंसे

इंडोनेशिया : जकार्ता में बाढ़ से 16 लोगों की मौत, हजारों फंसे

02-Jan-2020

मीडिया रिपोर्ट 

जकार्ता : इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में भीषण बाढ़ के कारण नए साल का जश्न गम में तब्दील हो गया और इसके कारण कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई और हजारों अन्य लोग विस्थापित हो गए. बाढ़ के कारण एक हवाईअड्डे को बंद करना पड़ा. राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण एजेंसी के प्रवक्ता अगुस विबोवो ने बृहस्पतिवार को बताया कि मानसून की बारिश और उफनती नदियों की वजह से कम से कम 169 इलाके जलमग्न हो गए. जकार्ता के बाहरी जिलों बोगोर एवं दीपोक जिलों में भूस्खलन हुआ.

उन्होंने बताया कि बाढ़ के कारण कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई। एजेंसी की ओर से जारी वीडियो और तस्वीरों में पानी में तैरती कारें दिखाई दे रही हैं. विबोवो ने बताया कि बाढ़ के कारण हजारों घर और इमारतें डूब गईं और प्राधिकारियों को बिजली और जलापूर्ति रोकनी पड़ी. उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर बाढ़ के पानी के आठ फुट ऊपर तक पहुंच जाने के कारण 31000 से अधिक लोगों को अस्थायी आश्रयगृहों में शरण लेनी पड़ी. नागर विमानन के महानिदेशक पोलाना प्रमेस्ती ने बताया कि बाढ़ से जकार्ता हलीम पेरडानाकुस्माह घरेलू हवाईअड्डे का रनवे डूब गया और अधिकारियों को इसे बंद करना पड़ा.

 


पूर्वी कांगो में आतंकवादियों ने 20 लोगों की हत्या की

पूर्वी कांगो में आतंकवादियों ने 20 लोगों की हत्या की

31-Dec-2019

भाषा की खबर 

बेनी (डीआर कांगो) : अफ्रीकी देश कांगो के पूर्वी बेनी क्षेत्र में आतंकवादियों ने 20 लोगों की हत्या कर दी. स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मूल रूप से पड़ोसी देश यूगांडा की इस्लामिक मिलिशिया एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेज के लड़ाकों ने रविवार को बेनी क्षेत्र के मुख्य प्रशासनिक शहर ओइचा के पश्चिम में स्थित अपेटिना सना पर हमला किया.

बेनी के प्रशासक डोनट किबवाना ने कहा, ‘एडीएफ ने गत रात अपेटिना-सना पर हमला किया. उन्होंने 18 नागरिकों की हत्या कर दी.’ स्थानीय अधिकारियों ने हमले के बाद तलाश अभियान के दौरान दो और शव बरामद किए जिससे मृतकों की संख्या 20 हो गई है.

सेना ने 30 अक्टूबर को मिलिशिया के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई शुरू की थी जिसके बाद से लेकर अब तक एडीएफ के लड़ाकों ने 200 से अधिक लोगों की हत्याएं की हैं.


अखिलेश के विधायक सड़क पर उतरे

अखिलेश के विधायक सड़क पर उतरे

31-Dec-2019

सैय्यद क़ासिम

समाजवादी पार्टी  के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव  ने  आज एक बार फिर बीजेपी  सरकार पर निशाना साधा. सपा विधायकों को विधानसभा के लिए साइकिल से रवाना करने के बाद अखिलेश ने कहा कि बीजेपी अपने बहुमत की ताकत से लोकतंत्र को कुचल रही है. आप नागरिकता धर्म के आधार पर देना चाहते हैं. CAA, NRC, और NPR के विरोध में ये साइकिल यात्रा है. सरकार नाकामी छिपाने के लिए नए नए शिगूफे लाती है. जब आधार में सारी जानकारी है तब NPR की ज़रूरत क्या है? ये नाश करने वाली सरकार है.

अखिलेश यादव ने कहा "आप नागरिकता धर्म के आधार पर देना चाहते हैं, आप चाहते हैं कि मुसलमानों का नागरिकता न मिले. बीजेपी तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है. क्या असम और पूर्वोत्तर के लोग इस कानून से खुश हैं? आधार में सब मौजूद है. समाजवादी पार्टी सीएए, और एनआरसी और एनपीआर का विरोध करती है. भारत की अर्थव्यवस्था का नाश हो गया है. बैंकिग सिस्टम डूबा दिया. अपने लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए आप ऐसा कर रहे हैं ।
देश का रंग तिरंगा ही रहेगा

भगवा पर बोलते हुए अखिलेश ने कहा, "पता नहीं कहां पर खलबली मची है. किसी का अधिकार थोड़े ही है. केवल रंग बदलने के लिए ऐसा किया जा रहा है. भगवा में ऐसा क्या है? पीताम्बर रंग भी है, लेकिन देश का रंग तिरंगा ही रहेगा. जाति के आधार पर जनगणना होनी चाहिए, ताकि अबादी के आधार पर सबको अधिकार मिले." अखिलेश यादव ने आगे कहा कि विधायक खुद जाना चाहते थे साइकिल से. आगे भी साइकिल चलेगी. साल का अंत हो गया है.

नए साल में अपने पापों की माफी मांगें नहीं तो जनता सजा देगी. पूरे यूपी की जनता जानती है कि कानून व्यवस्था इनके हाथ में नहीं हैं. निवेश नहीं आ रहा है इसलिए एनपीआर आ रहा है. निवेश नहीं आया इसलिए एनआरसी आ रहा है. हमारे देश की पहचान खराब हो रही है. देश की बदनामी हो रही है. कोई ग्लोबल निवेश नहीं आएगा.


अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कहा है कि राम मंदिर का काम जल्द शुरू होना चाहिए : बाबरी मस्जिद के पक्षकार इक़बाल अंसारी

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कहा है कि राम मंदिर का काम जल्द शुरू होना चाहिए : बाबरी मस्जिद के पक्षकार इक़बाल अंसारी

30-Dec-2019

बाबरी मस्जिद के पक्षकार इक़बाल अंसारी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कहा है कि राम मंदिर का काम जल्द शुरू होना चाहिए। इक़बाल अंसारी ने आगे कहा कि कोर्ट का निर्णय आ गया है , इसलिए अब राम मंदिर का काम जल्द शुरू हाे जाना चाहिए।

खास खबर प्र छपी खबर के अनुसार, धानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मिलकर राम मंदिर निर्माण के लिए हाथ बटाना चाहिए।
इक़बाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या से दक्षिण की तरफ सरयू नदी है जिसकी दूरी मात्र 100 से डेढ़ सौ मीटर है। मंदिर के गेट के सामने से रेलवे स्टेशन की दूरी कम से कम 200 मीटर की है।
उनका यह भी कहना है कि वे चाहते हैं कि अयोध्या में अगर लोग आएं और अयोध्या स्टेशन पर उतरें तो वहीं से उनको राम मंदिर दिखाई दे जाए। राम मंदिर पर पहुंचें तो उन्हें सरयू नदी दिखाई दें।
इक़बाल अंसारी ने कहा कि इस तरह से राम मंदिर का निर्माण हो तो लोगों की चाहत भी पूरी होगी और अयोध्या का विकास भी होगा। इसलिए शीघ्र ही राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाना चाहिए।
अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकार इक़बाल अंसारी ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, हमने पहले भी कहा था कि अदालत का फैसला मानेंगे।

 


उत्तर प्रदेश की स्थिति भयावह क्यूं?

उत्तर प्रदेश की स्थिति भयावह क्यूं?

28-Dec-2019

सैय्यद एम अली तक़वी

आजादी का एक लम्बा वक्त बीत जाने के बाद एक सुखद एहसास होना चाहिए। जो आज नहीं है। बहुत चिंता की बात है। प्रति वर्ष हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। इसलिए कि हम आजाद हैं। मगर आज क्या हो रहा है इसे समझने के लिए आज की स्थिति को समझना होगा। आज जनता आजादी मांग रही है। क्या हम 1947 से पहले के दौर में पहुंच गए हैं? क्या हमने अपने अधिकार खो दिए हैं? क्या उच्च पदों पर बैठे कुछ लोग 130 करोड़ लोगों की बात नहीं सुनेंगे? क्या करोड़ों लोगों पर चंद लोगों की बात थोप दी जाएगी? क्या संवेदना मर चुकी है? 

संविधान ने जो अधिकार दिए वो कहां हैं? अधिकारों का हनन क्यूं हो रहा है? लोगों को जेलों में क्यूं बंद किया जा रहा है? घरों में घुसकर महिलाओं को क्यूं मारा जा रहा है? सच लिखने पर कार्यवाही क्यों हो रही है? शांति पूर्ण प्रदर्शन पर लाठीचार्ज क्यूं हो रहा है? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिसका जवाब मिलना मुश्किल है। आज उत्तर प्रदेश की स्थिति बहुत भयावह है। लोगों के रोजगार ठप्प हो गये हैं। एनआरसी और कैब के नाम पर जो भी सरकार एवं प्रशासन की तरफ से हो रहा है वह चिंता का विषय है। शांति पूर्ण प्रदर्शन करना जनता का अधिकार है। मगर हो क्या रहा है पूरा देश देख रहा है। विपक्षी पार्टियां उत्तर प्रदेश में दम तोड़ चुकी हैं। अब जनता सड़कों पर उतर आई है।

नागरिकता संशोधन कानून पर विरोध प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश के कई शहरों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई। इसके अलावा दिल्ली के साथ साथ और जगह भी इंटरनेट सेवा बंद की गई। इससे कितना नुक़सान हुआ किसी ने सोचा कि नहीं? शायद नहीं। इंटरनेट आम लोगों की जिंदगी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है और इसकी सेवाएं बंद होने से न सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि कई जरूरी सेवाएं प्रभावित हुई हैं और आम जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। कारोबार पर असर पड़ा। अपना रोजगार और कारोबार करने वालों का क्या हाल है? पहली तारीख को इनके पास तनख्वाह नहीं आती है। दिन भर कुआं खोद कर शाम को पानी मिलता है। सरकार और प्रशासन को यह सोचना चाहिए।

इतनी हिंसा हुई क्यों?  इसके लिए कौन जिम्मेदार है? यदि प्रशासन जनता को शांति पूर्ण प्रदर्शन के लिए सहयोग करता तो शायद प्रदेश की स्थिति ऐसी नहीं होती। मगर सरकार और प्रशासन की ज़िद के कारण देश एवं प्रदेश का नुक़सान हुआ। पुलिस प्रशासन के पास वह ताकत है कि अगर वह चाह ले तो भ्रष्टाचार और बदमाशी ख़त्म हो जाये। इसके लिए प्रशासन को दबाव मुक्त होकर कार्य करना होगा। जब संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभायेगा तो पूरा देश बर्बाद हो जाएगा।  

सरकार के लिए मानवाधिकार का पालन करना और कराना उसकी जिम्मेदारी है। प्रदेश में दमन प्रक्रिया सही नहीं है। जनता का दमन करने से जनता का विद्रोह सामने आता है। सरकार को बताना चाहिए कि सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास में सबका से तात्पर्य क्या है। सरकार को अतीत से सबक लेना चाहिए। जनता का विश्वास जीतने की जरूरत है। हम सब भारतीय हैं, हम सब एक हैं। फिर यह मतभेद क्यूं? जनता, सरकार और प्रशासन सबको सोचना चाहिए? 
जय हिन्द।

 


हैदराबाद की एक 19 वर्षीय छात्रा  को ऑस्ट्रेलिया के वोलेगॉन्ग विश्वविद्यालय द्वारा 60 की छात्रवित्ती !

हैदराबाद की एक 19 वर्षीय छात्रा को ऑस्ट्रेलिया के वोलेगॉन्ग विश्वविद्यालय द्वारा 60 की छात्रवित्ती !

28-Dec-2019

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हैदराबाद : हैदराबाद की एक 19 वर्षीय लड़की को ऑस्ट्रेलिया के वोलेगॉन्ग विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गई लगभग 60 लाख रुपये की World चेंज द वर्ल्ड ’छात्रवृत्ति मिली है।
शवाणी कोल्ली, जिन्होंने हाल ही में “वाइल्ड विंग्स” शीर्षक से अपनी पहली कविता पुस्तक प्रकाशित की है, ने कहा कि उन्हें एक वीडियो एप्लिकेशन सबमिट करने के बाद प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति के लिए चुना गया था।
हैदराबाद की एक 19 वर्षीय लड़की को ऑस्ट्रेलिया के वोलेगॉन्ग विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गई लगभग 60 लाख रुपये की World चेंज द वर्ल्ड ’छात्रवृत्ति मिली है।

शवाणी कोल्ली, जिन्होंने हाल ही में “वाइल्ड विंग्स” शीर्षक से अपनी पहली कविता पुस्तक प्रकाशित की है, ने कहा कि उन्हें एक वीडियो एप्लिकेशन सबमिट करने के बाद प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति के लिए चुना गया था।

 


नागरिकता कानून  !अंग्रेजों ने भी नहीं किया था ऐसा दमन:,इतिहासकार इरफान हबीब

नागरिकता कानून !अंग्रेजों ने भी नहीं किया था ऐसा दमन:,इतिहासकार इरफान हबीब

26-Dec-2019

नागरिकता कानून 2019 के खिलाफ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन जारी है। दिल्ली से लेकर मुंबई और लखनऊ से लेकर बेंगलुरु तक प्रदर्शनकारी इस कानून के खिलाफ सड़कों पर उतर गए हैं। कई राजनेता, फिल्मी हस्तियां और बड़े नाम इस विरोध के समर्थन में जुड़ चुके हैं, इसी कड़ी में अब प्रसिद्ध इतिहासकार इरफान हबीब का भी नाम जुड गया है। हबीब ने  मोदी सरकार की तुलना ब्रिटिश राज से की है।

इतिहासकार इरफान हबीब ने बुधवार को कहा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ हाल ही में सार्वजनिक भावनाओं के प्रकोप को केवल एक “मुस्लिम आक्रोश” के रूप में देखना गलत होगा क्योंकि यह अंततः सभी को प्रभावित करेगा और खासकर आधुनिक राज्य के रूप में भारत के विचार को सबसे ज्यादा। देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रजों के काल में भी हमने इस तरह से असहमति की आवाज का दमन होते नहीं देखा था।

ब्रिटिश पुलिस भी ऐसा अमानवीय रवैया नहीं दिखाती थी

पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि लोगों के विरोध को कुचलने के ऐसे प्रयासों पर चिंता हो रही है क्योंकि विरोध का अधिकार एक लोकतांत्रिक समाज का मूल्य है। उन्होंने कहा कि अंग्रजों के समय में भी ब्रिटिश पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के प्रति ऐसा अमानवीय रवैया नहीं दिखाया था जैसा कि देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों के दौरान देखा गया है।
भारत और लोकतंत्र के भविष्य के बारे में है यह प्रदर्शन


 
हबीब ने जोर देते हुए कहा कि पूरे देश में बड़ी संख्या में हिंदू और अन्य समुदाय इस विरोध प्रदर्शन में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यह सत्तारूढ़ सोच के लिए उपयुक्त होगा यदि यह विरोध केवल हिंदू-मुस्लिम मुद्दे के चश्मे से देखा जाता है। प्रख्यात इतिहासकार ने कहा कि यह संघर्ष भारत और लोकतंत्र के भविष्य के बारे में है।

विभाजन के बाद के पाकिस्तान से की तुलना

हबीब ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई कुछ नीतियां हिंदुत्व आंदोलन की दीर्घकालिक परियोजना की अभिव्यक्ति हैं जो काफी हद तक असंतोष और विरोध को दबाने की नीति पर टिकी हुई हैं। साथ ही प्रोफेसर ने कहा कि आज भारत में जो हो रहा है, दुर्भाग्य से विभाजन के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में जो कुछ हो रहा था उससे अलग नहीं है। उन्होंने कहा पाकिस्तान के शासक वर्गों की तरह ही वर्तमान भारतीय शासकों को पता है कि धर्म जनता की भावनाओं को उत्तेजित करता है और उनकी राजनीतिक शक्ति इस कथा पर टिकी हुई है।

मुसलमान काफी समय से आक्रोशित थे

सीएए पर सार्वजनिक आक्रोश के अचानक फैलने की जड़ों की व्याख्या करते हुए, हबीब ने कहा कि मुसलमानों में काफी समय से आक्रोश व्याप्त है। हालांकि यह नाराजगी पिछले कुछ दिनों के दौरान ही सामने आई है क्योंकि अब वे लोग ऐसा अनुभव कर रहे हैं कि हिंदू राष्ट्र का मुद्दा गंभीर रूप ले रहा है जैसा कि सरकार के कुछ हालिया फैसलों में भी देखा जा सकता है।

एनपीआर में 7 रेसकोर्स बता दें पताः अरुंधति राय

वहीं, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय ने बुधवार को केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने देश में डिटेंशन सेंटर के मुद्दे पर सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया।  अरुंधति रॉय सीएए  के विरोध में दिल्ली यूनिवर्सिटी में जमा हुए कई यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने पहुंची थीं। उनके साथ फिल्म अभिनेता जीशान अय्यूब भी पहुंचे। उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा कि जब अधिकारी एनपीआर के लिए आपका डेटा लेने के लिए आपके घर आएं तो आप अपना नाम और पता गलत बता दीजिए। आप पता 7 रेस कोर्स बता दें।

साभार- Outlook.com

 


कौन होगा राजधानी रायपुर का महापौर  ?

कौन होगा राजधानी रायपुर का महापौर ?

25-Dec-2019

इस बार राजधानी रायपुर में महापौर कौन होगा ये देखना दिलचस्प होगा क्योकि फ़िज़ा बदली बदली सी है और पुराने महापौर ब मुश्किल से अपनी पार्षद की सीट बचा पाए है हालांकि उन्होंने 1500 वोटों से विजयी हासिल किया लेकिन एक वक्त में वह 250-300 वोटो से पीछे हो गए थे तब लग रहा था कि बीजेपी के दिग्गज संजय श्रीवास्तव की तरह प्रमोद दुबे भी न पिछड़ जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ प्रमोद दुबे के खिलाफ बिलकुल कमज़ोर प्रत्याशी खड़े हुए लेकिन एक लोकसभा प्रत्याशी का पार्षद जैसे चुनाव में इतने कम मार्जिन वोटो से जितना बताता है की अब पहले वाली लोकप्रियता में कमी हुई है और इसका कारण बहुत हद तक  नगर निगम के पिछले कार्यकाल की कार्यप्रणाली रही है !

वैसे प्रदेश कांग्रेस के आलाकमान को गंभीरता से विचार करना होगा की इस बार राजधानी रायपुर का महापौर एक सर्व वर्ग की सहमति वाला होना चाहिए क्योकि दोबारा फिर से उसी चेहरे को रिपीट करना कांग्रेस की भूल हो सकती है वैसे भी इस बार पार्षदों का खेल है महापौर का चुनाव इस बार पार्षद करेंगे और पार्षद जिसके पक्ष में होंगे वही महापौर होगा । 


झारखण्ड  विधानसभा  चुनाव में AIMIM) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।

झारखण्ड विधानसभा चुनाव में AIMIM) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।

24-Dec-2019

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिेमिन को भी झारखंड की जनता का साथ नहीं मिला।
इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, ओवैसी की पार्टी न तो कांग्रेस और झामुमो के वोटरों को प्रभावित कर सकी और न ही भाजपा को ही नुकसान पहुंचाने में सफल रही।
ओवैसी ने गढ़वा, विश्रामपुर, हजारीबाग, बरकट्ठा, बोकारो, मधुपुर, डुमरी, धनवार, सारठ, लातेहार, लोहरदगा, जमशेदपुर और राजमहल में अपना प्रत्याशी उतारा था।
झारखंड विधानसभा चुनावों असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। एआईएमआईएम का वोट शेयर नोटा से भी कम है।
एआईएमआईएम का वोट शेयर 1.16% है वहीं, NOTA का वोट शेयर 1.37% है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक एआईएमआईएम को सिर्फ 172872 वोट मिले हैं जबकि NOTA के तहत 203706 वोट पड़ चुके हैं। यही हाल आम आदमी पार्टी का भी है। आप को भी नोटा से कम वोट पड़े हैं।
बता दें कि झारखंड विधानसभा चुनाव- 2019 में अपनी पार्टी का खाता खोलने के लिए ओवैसी ने धुआंधार प्रचार किया था। लेकिन ओसैवी के उम्मीदवार जमानत भी नहीं बचा पाए।

 


भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की शरद पवार चाहते हैं SIT जांच, कही ये बात !

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की शरद पवार चाहते हैं SIT जांच, कही ये बात !

23-Dec-2019

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार  ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच करने के लिए एसआईटी (SIT) गठित करने की बात कही है. न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार पवार ने कहा कि हम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भीमा कोरेगांव मामले की उचित जांच करने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने की मांग करेंगे. उन्होंने कहा कि वो सीएम उद्धव ठाकरे से इस पर बात करेंगे.
बता दें कि एक जनवरी, 2018 के दिन पुणे के करीब भीमा कोरेगांव में जमकर हिंसा हुई थी. जश्न के दौरान दलित और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस दौरान एक शख्स की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे. दलित और बहुजन समुदाय के लोगों ने एल्गार परिषद के नाम से शनिवार वाड़ा में कई जनसभाएं की थीं. शनिवार वाड़ा 1818 तक पेशवा की सीट रही है. जनसभा में मुद्दे हिंदुत्व राजनीति के खिलाफ थे. इस मौके पर कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण दिए थे, इस दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी थी.नए साल का जश्न मनाया जाता है
हर वर्ष एक जनवरी के दिन दलित समुदाय के लोग भीमा कोरेगांव में जमा होते है. वो यहां ‘विजय स्तंभ’ के सामने अपना सम्मान प्रकट करते हैं. ये विजय स्तंभ ईस्ट इंडिया कंपनी ने उस युद्ध में शामिल होने वाले लोगों की याद में बनाया था. इस स्तंभ पर वर्ष 1818 के युद्ध में शामिल होने वाले महार योद्दाओं के नाम अंकित हैं. इन योद्धाओं को पेशवा के खिलाफ जीत मिली थी.

 


मौलाना मज़हरूल हक़ की याद !

मौलाना मज़हरूल हक़ की याद !

22-Dec-2019

                                 ध्रुव गुप्ता सेवानिवृत्त आईपीएस

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देश के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर शिक्षाविद, लेखक और अग्रणी समाज सेवक मौलाना मज़हरुल हक़ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे योद्धाओं में रहे हैं जिन्हें उनके स्मरणीय योगदान के बावज़ूद इतिहास ने वह यश। नहीं दिया जिसके वे हकदार थे। 1866 में पटना जिले के बिहपुरा के एक जमींदार परिवार में जन्मे तथा सारण जिले के ग्राम फरीदपुर में जा बसे मज़हरुल हक़ लंदन से क़ानून की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद पटना और छपरा में वक़ालत के साथ सामाजिक कार्यों और देश के स्वाधीनता आंदोलन से जुड़ते चले। 1916 में बिहार में होम रूल मूवमेंट के वे अध्यक्ष बने। अंग्रेजों के खिलाफ डॉ राजेन्द्र प्रसाद के साथ चंपारण सत्याग्रह में शामिल होने के कारण उन्हें जेल की सजा भी हुई। जब महात्मा गांधी ने देश में असहयोग और ख़िलाफ़त आंदोलनों की शुरुआत की तो मज़हरुल हक़ अपनी वकालत का और मेंबर, इम्पीरियल लेजिस्लेटिव कौंसिल का सम्मानित पद छोड़ पूरी तरह स्वाधीनता आंदोलन का हिस्सा हो गए।

स्वाधीनता आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए 1920 में उन्होंने पटना में अपनी सोलह बीघा ज़मीन दान दी जिस पर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सदाकत आश्रम की स्थापना हुई। यह आश्रम जंग-ए-आज़ादी के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का तीर्थ हुआ करता था। सदाकत आश्रम से उन्होंने 'मदरलैंड' नाम से एक साप्ताहिक पत्रिका भी निकाली जिसमें आज़ादी के पक्ष में अपने प्रखर लेखन के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। सदाकत आश्रम आज़ादी के बाद बिहार कांग्रेस का मुख्यालय बना, लेकिन आज देश तो क्या बिहार के भी बहुत कम कांग्रेसियों को आज मौलाना साहब की याद होगी। सारण जिले के फरीदपुर में उनका घर 'आशियाना' उस दौर में स्वतंत्रता सेनानियों का आश्रय-स्थल हुआ करता था। पंडित मोतीलाल नेहरू, सरोजिनी नायडू, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, मदन मोहन मालवीय सहित अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तारी के डर से भागे आज़ादी के सेनानियों ने 'आशियाना' में पनाह पाई थी। 

मौलाना मजहरुल हक़ बिहार में शिक्षा के अवसरों और सुविधाओं को बढ़ाने तथा निःशुल्क प्राइमरी शिक्षा लागू कराने के लिए अरसे तक संघर्ष करते रहे। गांघी के असहयोग आंदोलन के दौरान पढ़ाई छोड़ने वाले युवाओं की शिक्षा के लिए उन्होंने सदाकत आश्रम परिसर में विद्यापीठ कॉलेज की स्थापना की। यह विद्यापीठ उन युवाओं के लिए वरदान साबित हुआ जिनकी पढ़ाई आन्दोलनों और जेल जाने की वजह से बाधित हुई थी। बिहपुरा में जहां वे पैदा हुए, उस घर को उन्होंने एक मदरसे और एक मिडिल स्कूल की स्थापना के लिए दान दे दिया ताकि एक ही परिसर में हिन्दू और मुस्लिम बच्चों की शिक्षा-दीक्षा हो सके। सामाजिक कार्यों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने पर्दा प्रथा के खिलाफ जनचेतना जगाने का प्रयास किया था।

मौलाना साहब देश की गंगा-जमुनी संस्कृति और हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल हिमायती थे। उनका कथन है - 'हम हिन्दू हों या मुसलमान, हम एक ही नाव पर सवार हैं। हम उबरेंगे तो साथ, डूबेंगे तो साथ !' आज़ादी की सुबह देखने के पहले 1930 में उनका देहावसान हो गया। स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान की स्मृति में सरकार ने 1998 में मौलाना मज़हरुल हक़ अरबी एंड पर्शियन यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी। पटना में इनके नाम से शहर की एक प्रमुख सड़क और छपरा शहर में उनकी एक मूर्ति भी है !

मौलाना मज़हरुल हक़ के यौमे पैदाईश (22 दिसंबर} पर खिराज-ए-अक़ीदत !

 


लोकतंत्र के लिए मतदान आवश्यक

लोकतंत्र के लिए मतदान आवश्यक

20-Dec-2019

संविधान में ‘‘हम भारत के लोग भारत की संप्रभुता, सम्पन्न, समाजवादी, पंथ निरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य बनाने का संकल्प लेते हैं’’ का उल्लेख किया गया है। पूरी दुनिया में भारत देश जैसा अच्छा और सक्षम लोकतांत्रिक गणतंत्र और कहीं नहीं है। संविधान के अनुसार देश को चलाने के लिए राजनीतिक ढ़ाचा तैयार किया गया। जो देश और राज्य को चलाने के सहायक सिद्ध होती है। इसी प्रकार राज्य के भीतर नगरीय निकायो में पार्षद चुनाव कराये जाते है, जो सीधे जनता के द्वारा अपने मनपसंद प्रत्याशी को चुना जाता है। जीते हुए प्रत्याशी पार्षद बनते है और 5 वर्ष के लिए अपने वार्ड के विकास एवं आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रयासरत रहते हैं। इसी प्रकार वार्ड की समस्याओं से जनता द्वारा अवगत होकर उसका निराकरण कराने का प्रयत्न भी करते है।

हमारे देश में किसी भी चुनाव में वोट देने अधिकार 18 वर्ष की आयु के युवक एवं युवतियों को है। निर्वाचन में एक-एक वोट का महत्व बहुत होता है। इस वोट से अपने क्षेत्र की बागडोर ऐसे व्यक्ति के हाथों सौपने का निर्णय किया जाता है, जो आपके अनुसार सही, निष्पक्ष और जनता के हित में कार्य करें। इसके लिए जनता को चाहिए कि वे अपने सुविवेक का उपयोग करें और ऐसे व्यक्ति को वोट दें, जो शिक्षित हो, अनुभवी हो, जो सभी का आदर करने वाला, संस्कारी एवं मिलनसार हो। पद पर बैठने के बाद जनता के लिए कार्य करें। इस सोच के साथ सभी नागरिकों को अपना बहुमूल्य वोट देना चाहिए। एक गणतांत्रिक देश में सबसे अहम होता है मत देना। गणतंत्र एक यज्ञ की तरह होता है, जिसमें मतों की आहुति बेहद अहम मानी जाती है। नागरिकों को सभी चुनावों में धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय, भाषा आधार पर प्रभावित हुए बिना निर्भीक होकर मतदान करना चाहिए।

 यह चुनाव जमीन से जुड़ी होती है, जिसमें आपको प्रतिदिन आने वाली समस्याओं को देखते हुए, उन समस्याओं का त्वरित निराकरण करने की क्षमता करने वाले प्रत्याशी को चुना जाना चाहिए और व शिक्षित, अनुभवी व दूरदर्शी हो, जो आपके वार्ड और शहर की आमजनता के हित में कार्य करने के लिए उचित निर्णय लेने की क्षमता रखते हो। यहीं वक्त होता है, जब हर नागरिक अपने मताधिकार का सही उपयोग कर एक शिक्षित, ईमानदार, अनुभवी और जिम्मेदार व्यक्ति को वोट दे। आपके एक महत्वपूर्ण वोट से एक अच्छा प्रत्याशी चुन सकते हैं और आपके एक वोट ना देने से अयोग्य प्रत्याशी जीत सकता है। चयन आपको करना है।

 प्रायः देखा गया है कि युवा अपने मौज, मस्ती और सोशल मीडिया में इतने डूबे रहते है, कि उन्हें मतदान करने की फुरसत नहीं होती। वे यह सोचते है कि कौन जाकर लम्बी कतारे पर खड़ा होगा उनके एक वोट न देने से क्या बिगड़ जाएगा। जब तक युवाओं की सोच इस प्रकार की होगी, वाकिब में देश एवं शहर का कुछ नहीं हो सकता। भारत देश की 35 प्रतिशत आबादी युवाओं की है इसलिए देश के प्रत्येक चुनाव में युवाओं को बढ़-चढ़कर भागीदारी करनी चाहिए और ऐसी सरकारें चुननी चाहिए, जो कि साप्रदायिकता और जातिवाद से ऊपर उठकर देश के विकास के बारे में सोचें।

भारत में प्रत्येक व्यक्ति का वोट ही देश के भावी भविष्य की नींव रखता है। इसलिए हर एक व्यक्ति का वोट राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनता है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जनता को जागरूक करने के लिए अनेकों कार्यक्रम और विज्ञापनों के माध्यम से प्रचार-प्रसार करती है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग अनिवार्य रूप से करने के लिए प्रेरित किया जाता है। शिक्षित एवं अशिक्षित व्यक्ति दोनों अपने मताधिकार को उपयोग कर सकते हैं।

आज हमारे देश में औसतन 50 से 60 प्रतिशत ही मतदान होता है। इसमें छोटी-बड़ी राजनैतिक पार्टियो व निर्दलीय उम्मीदवारों में वोट बंटते या पड़ते हैं। जिसको भी 10-20 प्रतिशत वोट पड़ जाते हैं वो जीत जाता है, आज कल के नेता शराब पिला कर व पैसे बाँट कर इन 10 से 20 प्रतिशत लोगों को अपने प्रभाव से वोट करवा लेते हैं व चुनाव जीत जाते है जिस कारण ऐसे लोग चुन कर आते है जो पूर्णतया भ्रष्ट होते है व जिनका चुनाव जिंतने का एक मात्र उदेश्य सत्ता पाना और धन कमाना होता है, तथा चुनाव जिंतने के बाद वह अगले 5 वर्ष तक देश के संसाधनों का खूब शोषण करते है व खूब भ्रष्टाचार करते है।

अगर भ्रष्ट व्यवस्था को बदलना है तो लोगों को यह भी समझना होगा की आज जो भ्रष्ट व्यवस्था चल रही है व चारों ओर जो अव्यवस्था का वातावरण है उसका एक बहुत बड़ा कारण चुनाव के दौरान मतदान नहीं करना है। यदि सभी लोग मतदान करेंगे को वही लोग चुन कर देश के सत्ता में आयेंगे जो देश व आम जनता के लिए काम करेंगे। इसलिए पूरे नागरिक अपने मताधिकार को उपयोग अवश्य करें।

राजनीतिक दलों द्वारा जनता को लुभाने के लिए अनेकों माध्यम कोशिश की जाती है। व्यक्तियों को चाहिए कि वे प्रत्याशी के लालच में ना आए बल्कि अपने मताधिकार का उपयोग कर ऐसे व्यक्ति को चुने जो आपके हित में कार्य करें, आपकी सुने और समय पड़ने पर आपकी मद्द भी करें। चुनाव के पहले राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिगण घर-घर जाकर वोट मांगते हैं, पैर छूते है, और जब चुनाव जीत जाते है, तो उस घर, गली, मोहल्ले की तरफ देखते भी नहीं, यहां तक की आपके द्वारा काम पड़ने पर उसके ऑफिस/बंगले जाने पर आपको पहचानते भी नहीं। आपसे अच्छे से बात भी नहीं करते है। इस प्रकार की स्थिति निर्मित हो जाती है। प्रतिनिधियों को अपने पद का घमण्ड होने लगता है। वे सिर्फ अपने स्वार्थ का सोचने और करने लगते हैं।

इसलिए आमजन को चाहिए कि अपना बहुमूल्य वोट सोच समझकर ऐसे व्यक्ति को दे जो आपके सुख-दुख में काम आये, आपके समस्याओं का निराकरण करें, अपने से ज्यादा आम जनता के हित में कार्य करें। चुनाव में मताधिकार का उपयोग प्रत्येक युवा, बुजुर्ग, दिव्यांगजन सहित महिलाएं को भी शतप्रतिशत किया जाना चाहिए। इस मतदान से वार्ड का भविष तय होता है 


दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए AAP सरकार का नया नारा-‘अच्छे बीते 5 साल, लगे रहो केजरीवाल’

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए AAP सरकार का नया नारा-‘अच्छे बीते 5 साल, लगे रहो केजरीवाल’

20-Dec-2019

नई दिल्ली 

अगले साल होने जा रहे दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी का नारा है ‘अच्छे बीते पांच साल – लगे रहो केजरीवाल’। इस नारे के साथ पार्टी ने 2020 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ‘अच्छे बीते पांच साल – लगे रहो केजरीवाल’ नारे की आप विधायकों एवं पार्टी के अन्य नेताओं की मौजूदगी में शुरुआत की।

इस मौके पर सिसोदिया ने कहा कि यह नारा दिल्ली के लोगों की प्रतिक्रिया पर आधारित है। आम आदमी पार्टी ने 2015 में 70 सीटों में से 67 पर जीत दर्ज की थी और पार्टी इस बार चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कंसल्टेंसी कंपनी आई-पैक के साथ समन्वय कर चुनाव लड़ेगी।


कस्टमर से Domino’s ने कैरी बैग के वसूले थे 13 रुपये, कोर्ट ने लगाया 10 लाख का जुर्माना

कस्टमर से Domino’s ने कैरी बैग के वसूले थे 13 रुपये, कोर्ट ने लगाया 10 लाख का जुर्माना

19-Dec-2019

चंडीगढ़ में एक चौंकाने वाला सामने आया है. पिज्जा बनाने वाली डोमिनोज (Domino’s) को कैरी बैग (Carry Bag) के लिए चार्ज करना महंगा पड़ा है. कोर्ट ने डोमिनोज (Dominos) पर 10 लाख रुपये का जुर्माना (Fine) लगाया है. डोमिनोज ने चंडीगढ़ के वकील पंकज से वर्ष 2018 में कैरी बैग के लिए पैसे लिए थे.

डोमिनोज ने कंज्यूमर कोर्ट के फैसले को स्टेट कमिशन में चुनौती दी थी. पहले भी डोमिनोज पर एक मामले में जुर्माना हुआ था. अब दोनों मामलों में उसपर कुल 10 लाख रुपये का जुर्माना हुआ है. कमिशन ने डोमिनोज को 4 लाख 90 हजार रुपए पीजीआई के पेशेंट वेलफेयर फंड में देने के निर्देश दिए हैं.

इसके साथ ही 10 हजार रुपए कमिशन को देने के साथ-साथ शिकायतकर्ता को 1500 रुपए देने के भी निर्देश दिए. स्टेट कमीशन ने दो मामलों में अलग-अलग ये आदेश जारी किए हैं. इस तरह डोमिनोज कंपनी पर कुल दस लाख रूपये का जुर्माना लगाया गया है.

कंपनी ने दी यह दलील

हालांकि कंपनी ने अपने पक्ष में दलील दी कि वह पिज्जा को पहले से ही एक कार्डबोर्ड बाक्स में पैक कर उपभोक्ता को देते हैं. ऐसे में वह किसी को कैरीबैग देने के लिए उत्तरदायी नहीं है. स्टेट कमीशन ने उनकी इस दलील को नहीं माना.

वकील पंकज चांदगोठिया ने उपभोक्ता फोरम में डोमिनोज, जुबिलेंट फूड वर्क्स लिमिटेड के खिलाफ शिकायत की थी. शिकायत में उन्होंने बताया कि दो पिज्जा लेने के लिए उन्होंने अपने ड्राइवर को स्टोर में भेजा. दो रेगुलर पिज्जा के लिए 306 रुपये मांगे गए. वकील पंकज ने जब बिल देखा तो उसमें कैरीबैग के लिए 13 रुपये चार्ज किए गए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि स्टोर में कहीं भी जिक्र नहीं किया गया था कि कैरीबैग के अलग से पैसे चार्ज किए जाएंगे. कैरीबैग के दोनों ओर डोमिनोज के लोगो प्रिंट थे. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कस्टमर्स से कैरीबैग के लिए पैसे चार्ज करके कंपनी अपना विज्ञापन कर रही है.

फोरम ने एक आदेश में साफ किया है कि सामान को हाथ में नहीं ले जा सकते, उसे कैरीबैग मुहैया कराना स्टोर की जिम्मेदारी है. वह चाहे प्रिंटेड बैग दें या सादा.

साभार : tv9bharatvarsh 


नागरिकता कानून में बदलाव को लेकर गृह मंत्रालय ने दिए संकेत !

नागरिकता कानून में बदलाव को लेकर गृह मंत्रालय ने दिए संकेत !

18-Dec-2019

नई दिल्ली :गृह मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि नागरिकता (संशोधन) कानून मुसलमानों सहित किसी भारतीय नागरिक को प्रभावित नहीं करेगा और संविधान में दिए गये मौलिक अधिकारों का लाभ उन्हें मिलता रहेगा। मंत्रालय ने इस मुद्दे पर गलत सूचना फैलाए जाने के लिए चलाए जा रहे अभियान को रोकने की कोशिश के तहत यह कहा है।

गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस कानून का किसी विदेशी के भारत में निर्वासन से कोई लेना देना नहीं है। इस बीच, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा कि नागरिकता (संशोधन) कानून किसी भारतीय के खिलाफ नहीं है और इस कानून को समझना तथा इस बारे में फैलाई जा रही गलत सूचना के खिलाफ जागरूक होना जरूरी है।

वहीं, इस विवादित कानून पर प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) के जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा, ‘‘गलत सूचना फैलाने के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है। नागरिकता (संशोधन) कानून मुसलमान नागरिकों सहित किसी भारतीय नागरिक को प्रभावित नहीं करता है।’’ दरअसल, इस नये कानून के विरोध में पिछले कुछ दिनों से दिल्ली सहित देश के कुछ हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। एफएक्यू के जवाब गृह मंत्रालय ने जारी किए हैं।

गृह मंत्रालय ने कहा कि नया कानून सिर्फ हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई धर्मावलंबी विदेशियों के लिए हैं, जो अपने धर्म को लेकर प्रताड़ना का सामना करने के चलते पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हैं। मंत्रालय ने कहा कि यह कानून इन तीन देशों सहित किसी अन्य देश से भारत आए मुसलमानों सहित अन्य विदेशियों पर लागू नहीं होगा। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया कि इस नये कानून का किसी विदेशी के भारत में निर्वासन से कोई लेना देना नहीं है। गृह मंत्रालय ने कहा कि किसी विदेशी के निर्वासन की प्रक्रिया, चाहे उसका धर्म या देश कुछ भी हो, विदेशी नागरिक अधिनियम 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920 के मुताबिक क्रियान्वित की जाती है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘ ये दोनों कानून सभी विदेशियों के भारत में प्रवेश एवं निकास, यहां ठहरने, देश में यहां-वहां आने-जाने को शासित करते हैं, भले ही उनका धर्म कुछ भी हो। इसलिए, सामान्य निर्वासन प्रक्रिया भारत में रह रहे किसी अवैध विदेशी पर लागू होगी। ’’ यह जवाब इस सवाल पर दिया किया गया क्या इन देशों से आए मुसलमान आव्रजकों को नये कानून के तहत वापस भेजा जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि किसी विदेशी नागरिक का निर्वासन एक बखूबी विचारित न्यायिक प्रक्रिया है जो स्थानीय पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों की एक उचित जांच पर आधारित है, जिसके तहत इस तरह के अवैध विदेशियों का पता लगाया जाता है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित किया गया है कि इस तरह के अवैध विदेशी को उसके देश के दूतावास द्वारा उचित यात्रा दस्तावेज जारी किए गए हों ताकि जब उसे निर्वासित किया जाए तब उसके देश के अधिकारी उपयुक्त रूप से उसकी अगवानी कर सकें। ’’ गृह मंत्रालय ने कहा कि असम में निर्वासन की प्रकिया विदेशी नागरिक अधनियम, 1946 के तहत ऐसे किसी व्यक्ति के ‘विदेशी’ निर्धारित होने पर ही होती है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘इसके बाद वह निर्वासित किए जाने लायक हो जाता है। इसलिए, इस प्रक्रिया में कुछ भी अपने-आप, मशीनी या भेदभावपूर्ण तरीके से नहीं होता।

राज्य सरकारों और उनके जिला स्तर के अधिकारियों के पास विदेशी नागरिक अधिनियम की धारा तीन और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920 की धारा पांच के तहत केंद्र सरकार की शक्तियां प्राप्त हैं, जिसके तहत वे किसी अवैध विदेशी का पता लगा सकते हैं, उसे हिरासत में ले सकते हैं और उसे निर्वासित कर सकते हैं।’’ यह सवाल कि क्या पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमान भारतीय नागरिकता कभी नहीं प्राप्त कर सकते, मंत्रालय ने जवाब दिया-‘‘नहीं’’।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘किसी भी श्रेणी के किसी विदेशी के एक निर्धारित अवधि तक भारत में रहने से उसके भारत की नागरिकता हासिल करने की मौजूदा कानूनी प्रक्रिया (नागरिकता कानून की धारा छह) या पंजीकरण के जरिए (इस कानून की धारा पांच) नागरिकता हासिल करना जारी रहेगा। संशोधित नागरिकता कानून इसमें किसी तरह का संशोधन या बदलाव नहीं करता है।’’ गृह मंत्रालय ने कहा कि इन तीनों देशों से आए सैकड़ों मुसलमानों को पिछले कुछ बरसों में भारतीय नागरिकता दी गई है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘योग्य पाए जाने पर, भविष्य में आने वाले ऐसे सभी प्रवासियों को भी भारतीय नागरिकता मिलेगी, चाहे उनकी संख्या या धर्म कुछ भी क्यों न हो।’’ मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 2014 में भारत-बांग्लादेश सीमा मुद्दे के समाधान के बाद 14,864 बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी गई थी।

उनके ‘एनक्लेव’ को भारतीय भूक्षेत्र में शामिल किए जाने के बाद ऐसा किया गया था। गृह मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान को छोड़ कर किसी अन्य देश में धर्म के आधार पर प्रताड़ित होने वाले हिंदू नये कानून का लाभ नहीं प्राप्त कर पाएंगे। उन्हें भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि नया कानून किसी भारतीय नागरिक पर लागू नहीं होता है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘सभी भारतीय नागरिक संविधान में प्रदत्त मूल अधिकारों का लाभ उठाते रहेंगे। संशोधित कानून का उद्देश्य किसी भारतीय नागरिक को नागरिकता से वंचित करना नहीं है। इसके बजाय यह एक विशेष कानून है जो इन तीन पड़ोसी देशों में एक विशेष स्थिति का सामना करने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता देगा।’’ मंत्रालय ने यह भी कहा कि संशोधित नागरिकता कानून का राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से कोई लेना देना नहीं है। (भाषा)

TNIS 


OLX से  दू पहिया खरीदी के नाम फिर ठगा गया एक बुजुर्ग मामला रायपुर माना  एयरपोर्ट का !

OLX से दू पहिया खरीदी के नाम फिर ठगा गया एक बुजुर्ग मामला रायपुर माना एयरपोर्ट का !

15-Dec-2019

पूरा मामला कल 14/12/2019  का है , बनवारीलाल शर्मा  उम्र :- 62 वर्ष रायपुर, छतीसगढ़ ने 

एक  दू पहिया स्कूटर  (Activa 4g)(CG-O4-2149)  OLX  आन लाइन पर देखी जिसकी कीमत 19000 रुपए लिखी गई थी।।   उस  OLX पर दिए गए नंबर (9588122317) पर फोन कर सम्पर्क  किया तो दूसरी ओर उसने  फोन उठाने वाले ने अपना अपना नाम टीकेष नेताम बताया ।।


और बताया की वो व्यक्ति एयरपोर्ट में सीआईएसएफ की नौकरी करता है और बताया की उसका ट्रांसफर होने वाला है इस कारण वो अपनी गाड़ी का विक्रय करना चाहता है फिर हमने उससे गाड़ी के बारे में विस्तार में बात किया जिसमें उसने बताया की गाड़ी बहुत ही अच्छी कंडीशन में है और बताया मैंने  उस गाड़ी को 17000 रूपए में क्रय करने का पक्का  किया उसके बाद मैंने उसको कुछ देर में कॉल कर के कहा कि मै गाड़ी की बुकिंग कुछ रुपए दे कर रहा हूं और बाकी रुपए गाड़ी लेने के बाद देंगे फिर मैंने उससे कहा कि हम 2100 दे कर गाड़ी की बुकिंग कर रहे है फिर उसने कहा कि मैं उसे 3120 रुपए paytm के जरिए भेजू ताकि वो उस गाड़ी की बुकिंग कर ले और मैंने उसे फिर से कॉल कर के ये कहा की मै अभी 2100 रुपए दे रहा हूं और बाकी रुपए  उसे गाड़ी लेने के बाद दूंगा ।। फिर उसने कहा सर आप 2120 paytm के द्वारा भेजे फिर मैंने उसकी बात मान कर उसे पैसे भेजे  फिर मैंने उसे कॉल किया और कहा कि मैंने  पैसे भेज दिए है फिर उसने कहा कि आप गाड़ी देखने कब आयेंगे..?? फिर मैने कहा कि मैं आधे घंटे में आ रहा हूं  फिर उसने कहा आप माना एयरपोर्ट आ जाइए फिर मैंने उसे 2120 रुपए (7988792536) पर भेज दिया और  तैयार हो कर घर से निकल गया फिर कुछ देर में उसका कॉल आया और उसने कहा कि माना बस स्टैंड आ जाइए और मुझे पहुंच कॉल करे ।। फिर मैंने माना बस स्टैंड पहुंच कर उसे कॉल किया उसने कहा आप तोड़ा इंतज़ार करें मै गाड़ी भेजवा रहा हूं ।। फिर कुछ समय इंतेज़ार करने के बाद उसका काल आया और उसने कहा कि सर मेरे सीनियर सर ने कहा है कि आपको एक विक्रय पर्ची बनवाने के लिए अमाउंट डलवाना पड़ेगा जिसकी राशि 3120 रुपए है फिर मैंने उससे कुछ देर में 3120 रुपए (7988792536) पर भेजा फिर कुछ देर बाद उसका कॉल आया और उसने कहा मै गाड़ी डॉक्युमेंट्स के साथ भेजवा  रहा हूं फिर कुछ देर बाद उसने अपने  एक और साथी का कॉल नंबर दिया (9864510014) जिसको उसने कोरियर वाला बताया और  और मैंने उसे कॉल किया और उसके कहा की सर टिकेश नेताम जी की गाड़ी आपको ही भेजवाया जा रहा है ना..?? मैंने उनसे कहा कि -  हां..!! फिर उसने बताया कि सर मै चैकपोस्ट में दो लोगो के पीछे हूं और फिर मै आपके पास गाड़ी लेके आ जाऊंगा फिर कुछ देर इंतज़ार करने के बाद उसका (कोरियर वाला ) का कॉल आया और उसने कहा कि सर टिकेस सर की  गाड़ी का बिलिंग 17000 का हुआ है तो आपको पूरा पैसा देना पड़ेगा तभी टिकेश नेताम की गाड़ी चैकपोस्ट से निकलेगी फिर मैंने उस व्यक्ति को कॉल किया जिसने अपना नाम टीकेश नेताम बताया था फिर मैंने उससे कहा कि  आपका कोरियर वाला मुझे पूरा 17000 रुपए देने को कह रहा है फिर उसने मुझे अपने कोरियर वाले को कॉन्फ्रेंस कॉल पर रखने को कहा फिर मैंने उन दोनों व्यक्ति को कॉन्फ्रेंस कॉल पे लिया फिर उन दोनों ने बाते कि फिर  कुछ देर में मुझे उस व्यक्ति (टिकेष  नेताम) का कॉल आया और उसने कहा कि सर आप बाकी बचे 12000 रुपए डलवा दीजिए वरना मेरी गाड़ी होल्ड में चले जाएगी जिससे मै मुसीबत में पड़ जाऊंगा और आपका भी पैसा डूब जाएगा और कहा कि आप पैसों का इंतजाम कर के पेमेंट करा दे फिर मैंने कुछ देर विचार करने के बाद पैसों का इंतजाम किया और उसे कॉल कर कहा कि पैसों का इंतजाम हो गया है और मै पैसे भेज रहा हूं और आप अपने साहब से एक बार और पूछ ले की कितने पैसे और देने है तो उनका जवाब आया कि आप 12000 रुपए डाल दे और बाकी बची राशि आपको नगद भुगतान कर दी जाएगी ।। फिर बकिं बचे 12000 रुपए भेजने के बाद मैंने  उक्त व्यक्ति ( टिकेस नेताम)को कॉल किया और कहां की मैंने पैसे भेज दिए है फिर उसने कहा कि - हां..!! मै अपने ऑफिस जा कर चेक करता हूं फिर उसने कुछ देर में बताया कि मेंरा भेजा हुए पैसा (12000) उसके ऑफिस के अकाउंट में 24 घंटे के लिए  पेंडिंग बता रहा है और फिर कुछ देर बात करने के बाद उसने कहा कि सर आप 6000 - 6000 के दो ट्रांसाक्शन कर दीजिए फिर मुझे तोड़ा शक हुआ और मैंने उसे और पैसे भेजने से साफ मना कर दिया और तब तक मैैंने उस व्यक्ति को उसकी गाड़ी की (17000) कीमत से  240 रुपए  ज्यादा दे दिया था फिर मैंने कहा कि मुझे गाड़ी चाहिए फिर उसने कहा सर आप फिर से 6000 - 6000 के दो ट्रांस्क्शन करे  फिर मैंने उसे मना कर दिया और कहा कि 24 घंटे के बाद जब ट्रंस्क्शन पूरा हो जाएगा तब मै गाड़ी ले जाऊंगा फिर उसने कहा ठीक है सर और फिर मै वापस अपने घर आ गया ।। 
और यह सारी वस्तुस्थति होने के बाद जब मैंने अपने परिवार वालों को इन सारी बातों से अवगत करवाया तो उन सब ने मुझे सलाह देते हुए कहा कि एक बार इंटरनेट पर इसकी i'd के बारे में जानने की कोशिश करें फिर जब मैंने उस व्यक्ति के द्वारा दिए गए I'd  के नंबर को गूगल पर डाला और देखा कि उस नंबर के बहुत सारे फ्रौड़ हो चुके है ।।

जैसा की पीड़ित पक्ष ने बताया  


IPS अफसर के खिलाफ झूठा हलफनामा देने पर सुप्रीम कोर्ट ने महिला के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया

IPS अफसर के खिलाफ झूठा हलफनामा देने पर सुप्रीम कोर्ट ने महिला के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया

11-Dec-2019

नई दिल्ली 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली में पश्चिम बंगाल कैडर के एक आईपीएस अधिकारी पर कथित रूप से जानलेवा हमला करने के प्रयास का आरोप लगाने वाली एक महिला के खिलाफ "गलत बयान" देने के लिए स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना नोटिस जारी किया। उसने शादी से इंकार करने के बाद फेसबुक-मित्र अधिकारी के खिलाफ 2018 में बलात्कार की एफआईआर दर्ज की थी।

शीर्ष अदालत ने दिल्ली में दर्ज बलात्कार एफआईआर को स्थानांतरित करने और अधिकारी की मां द्वारा 15 लाख रुपये की कथित जबरन वसूली की शिकायत पर दर्ज एफआईआर को पश्चिम बंगाल के बशीरहाट पुलिस स्टेशन से केंद्रीय जांच एजेंसी को स्थानांतरित करने की अर्जी को खारिज कर दिया। जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​की पीठ ने महिला द्वारा दायर एक याचिका पर अपना ये निर्देश पारित किया, जिसे उसकी पहचान की छिपाने के लिए एबीसीडी नाम दिया गया है। उसकी दलीलों के आधार पर अदालत ने नोट किया कि बलात्कार के मामले में आरोप पत्र दायर किया गया है।

आरोपी के मोबाइल फोन का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) बरामद किया गया लेकिन ललित होटल की लॉबी, रेस्तरां और कमरे के नंबर के 27 जनवरी से 29 जनवरी, 2018 के सीसीटीवी फुटेज को इसलिए हासिल नहीं किया जा सका क्योंकि तीन महीने के अंतराल के कारण उन्हें संरक्षित नहीं किया गया था। महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी कथित रूप से अपराध करने के लिए उसे होटल ललित ले गया था जहां उससे बलात्कार किया। मामले के दौरान महिला ने 18 अक्टूबर, 2019 को एक और एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें कहा गया था कि उसका जीवन खत्म हो जाएगा क्योंकि वह अधिकारी के लगातार रडार पर है और वह एक कार की चपेट में आकर घायल हो गई।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच जिसने सीसीटीवी फुटेज को पुनः प्राप्त किया, ने कहा कि वास्तव में ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी। इसके बजाय, "एक बच्चे द्वारा संचालित एक ठेला (गाड़ी) को शिकायतकर्ता के बाएं पैर को रगड़ते हुए देखा गया जब वह एक ऑटो को किराए पर लेने का प्रयास कर रही थी।

वह गाड़ी की ओर देखती है और फिर दूर चली जाती है। उसने उसे रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। अदालत ने कहा, "जैसा कि यह सब प्रथम दृष्टया देखकर पता चला है, इसका मतलब है कि इस अदालत के सामने उसके शपथ बयान में आरोप सत्य नहीं थे।" अदालत ने 14 जनवरी, 2020 को महिला की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश जारी करते हुए कहा कि शपथ पर गलत बयान देना और गलत सूचना प्रस्तुत करने के इरादे से लोक सेवक को नुकसान पहुंचाने के अपनी वैध शक्ति का उपयोग करना दंडनीय अपराध है।


बिल पास होने के बाद भी मुसलमानों के लिए नागरिकता के दरवाजे बंद नहीं होंगे- RSS

बिल पास होने के बाद भी मुसलमानों के लिए नागरिकता के दरवाजे बंद नहीं होंगे- RSS

11-Dec-2019

लोकसभा से पास हुए नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) को मुस्लिम विरोधी और भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के विरुद्ध बताए जाने का राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने खंडन किया है।
खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, संघ ने कहा है कि इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद भी मुस्लिमों के लिए भारतीय नागरिकता के दरवाजे बंद नहीं होंगे।
पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि देशों में रहने में अगर किसी को डर लगता है तो वह भारत में नागरिकता के लिए निर्धारित नियम-कायदों को पूरा करते हुए आवेदन करे तो सरकार विचार करेगी।
संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “हम किसी के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन नागरिकता संशोधन बिल के विषय को गलत तरह से घुमाया जा रहा।
इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद भी बाहरी मुस्लिमों के भारतीय नागरिक बनने के रास्ते बंद नहीं हो जाते। 2016 में पाकिस्तानी सिंगर अदनान सामी को इसी सरकार ने नागरिकता दी थी।
बाहरी देशों का अगर कोई मुस्लिम भारत में रहना चाहे तो वह भी अदनान सामी की तरह गृह मंत्रालय की ओर से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए अर्जी दे तो विचार होगा। पात्र होगा तो नागरिकता मिलेगी, नहीं तो नहीं।”

उन्होंने कहा कि तस्लीमा नसरीन भी परमिट लेकर भारत में रह रहीं हैं। लेकिन पड़ोसी देशों में बहुसंख्यक होते हुए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के लिए प्रस्तावित कानून के जरिए कैसे किसी को नागरिकता मिल सकती है।


 
उधर, मंगवार को अदनान सामी ने भी ट्वीट कर कुछ इसी तरह का बात कही है। उन्होंने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा, “इस बिल के बावजूद मुसलमानों के नागरिकता लेने पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, मुस्लिम पहले की तरह भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।”

लोकसभा में सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं कि बाहरी मुस्लिमों के भी आवेदन पर विचार होगा, मगर धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर नागरिकता नहीं मिलेगी।

उन्होंने कहा था, “पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुस्लिम अगर भारत में नागरिकता का आवेदन करते हैं तो उन पर खुले मन से विचार होगा। लेकिन उन्हें धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर नागरिकता देने पर विचार नहीं किया जाएगा। ”
अदनान सामी पहली बार 13 मार्च, 2001 को विजिटर्स वीजा पर भारत आए थे। उनके वीजा की अवधि समय-समय पर बढ़ती रही।
इस बीच 26 मई, 2015 को एक्सपायर हुए पासपोर्ट को पाकिस्तानी सरकार ने रिन्यू नहीं किया था, जिसके बाद उनकी अर्जी पर भारत सरकार ने एक जनवरी 2016 से अनिश्चितकाल के लिए नागरिकता प्रदान की थी।

 


नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा से पास होने के बाद अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने चिंता व्यक्त की !

नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा से पास होने के बाद अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने चिंता व्यक्त की !

10-Dec-2019

नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा से पास हो गया. इस बिल को लेकर जहां भारतीय वैज्ञानिकों, स्कॉलर्स और कई राजनीतिक पार्टियों ने मोर्चा खोल दिया है, वहीं अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने भी चिंता जाहिर की है. अंतराराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों को देखने वाली संघीय अमेरिकी आयोग ने नागरिकता संशोधन विधेयक को मोदी सरकार द्वारा एक गलत रास्ते पर लिया गया खतरनाक मोड़ करार दिया है. अमेरिकी आयोग ने कहा कि अगर ये बिल भारतीय संसद के दोनों सदनों से पास हो जाता है, जो अमित शाह के खिलाफ कई प्रतिबंध लगाने के बारे में सोचना चाहिए.

लोकसभा में मोदी सरकार के प्रस्तावित बिल के अनुसार, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध प्रवासी के तौर पर नहीं देखा जाएगा. ये सभी लोग भारत में नागरिकता के लिए आवेदन करने के पात्र बन जाएंगे.
अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक बड़ी समस्या बनने वाला है. बयान में कहा गया, ‘अगर नागरिकता संशोधन विधेयक दोनों संसद के सदन से पास हो जाता है, तो अमेरिकी सरकार को अमित शाह और दूसरे मुख्य नेताओं के खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि USCIRF लोकसभा में इस बिल के पास होने से बड़े खतरे में है.’
बता दें कि संसद के निचले सदन लोकसभा में सोमवार देर तक चली बहस के बाद रात करीब पौने 12 बजे वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हुई. इस दौरान नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में कुल 311 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में सिर्फ 80 वोट आए. लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद अब माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इसे मंगलवार को राज्यसभा में भी पास करा सकती है. MEDIA IN PUT