छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य, जहां मोबाइल एप के जरिए मिलेगा विद्युत संबंधी सेवाओं का लाभ

छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य, जहां मोबाइल एप के जरिए मिलेगा विद्युत संबंधी सेवाओं का लाभ

07-Oct-2020

बिजली दफ्तर जाने की जरूरत नहीं, 90 फीसद समस्याओं के त्वरित निदान में मददगार बनेगा मोर बिजली मोबाइल एप

मुख्यमंत्री ने ‘‘मोर बिजली एप’’ के नये फीचर्स का किया शुभारंभ

एप के जरिए अब हर मोबाइल बन जाएगा बिजली दफ्तर

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कलयहां अपने निवास कार्यालय मंे छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्टीब्यूशन कंपनी के ‘‘मोर बिजली एप’’ के नये फीचर्स का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का ऐसा पहला राज्य है, जहां विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा उपभोक्ताओं को विद्युत सेवाओं का घर बैठे लाभ मुहैया कराने के लिए मोर बिजली मोबाइल एप लॉन्च किया गया है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इसके लिए सीएसपीडीसीएल के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को इससे बड़ी सहूलियत मिलेगी। विद्युत उपभोक्ता इस एप के जरिए विद्युत वितरण कम्पनी की 90 फीसद से अधिक सेवाओं का घर बैठे लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यह एप विद्युत संबंधित किसी भी समस्या का भी मददगार साबित होगा।  

    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आगे कहा कि अब उपभोक्ताओं को बिजली दफ्तर पर चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। इससे श्रम, समय और पैसे की बचत होगी। उन्होंने विद्युत वितरण कम्पनी के अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस एप के जरिए विद्युत कम्पनी की मैदानी टीम को काम करने में आसानी होगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा बिजली उत्पादन, पारेषण एवं वितरण को उन्नत बनाने के लिए पॉवर कंपनी द्वारा नवीनतम तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका एक आदर्श उदाहरण ‘‘मोर बिजली एप’’ भी है। इस निःशुल्क सुविधा का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को इसे अपने मोबाईल पर डाउनलोड करना चाहिए। कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, मुख्यमंत्री के अपर सचिव एवं पावर कम्पनीज के चेयरमैन श्री सुब्रत साहू, एम.डी. सर्वश्री हर्ष गौतम, राजेश वर्मा, एम. के. बिजौरा, श्रीमती उज्जवला बघेल एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    कार्यक्रम में पॉवर कम्पनीज के चेयरमेन श्री सुब्रत साहू ने कहा कि उर्जा से उन्नति की ओर प्रदेशवासियों को अग्रसर करने अनेक योजनायें और सुविधायें पहली बार आरंभ की गई है। जिनमें हाफ रेट पर बिजली योजना और मोर बिजली एप से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। भविष्य में भी छत्तीसगढ़ विद्युत विकास का गढ़ बना रहेगा। इसके लिए प्रदेश में विद्युत अधोसंरचना का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण काल में भी विद्युत उत्पादन के मामलें में छत्तीसगढ़ अग्रणी बना हुआ है और ‘‘सबको बिजली, सस्ता दाम-सबको राहत, सबको काम’’ की अवधारणा को पूर्ण कर रहा है।

    उन्होंने बताया कि इस एप को गूगल प्ले स्टोर से निःशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है। इस एप के जारिए लोग घर बैठे 16 से अधिक प्रकार के विद्युत संबंधी कार्यों का निपटारा कभी भी किसी भी समय कर सकते हैं। इस एप में शामिल नया फीचर ‘‘आपातकालीन शिकायत’’ विद्युत दुर्घटना की घड़ी में उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। कहीं टूटे बिजली के तार या अन्य क्षतिग्रस्त विद्युत प्रणाली की फोटो खींचकर अपातकालीन शिकायत के अपलोड बटन को दबाने पर एसएमएस के द्वारा संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी को लोकेशन की सूचना मिल जाएगी और बिजली तार या क्षतिग्रस्त उपकरण दुरूस्त कर लिए जाएंगे। शिकायत दाता को इसकी सूचना भी मिल जाएगी। इसके अलावा मीटर, नाम परिवर्तन, शिफ्टिंग, नया कनेक्शन, भार वृद्धि, टेरिफ परिवर्तन, बिल भुगतान, बिजली बिल हाफ योजना से प्राप्त छूट, बिजली बिल की गणना आदि कार्य घर बैठे ही की जा सकेगी।
मोर बिजली एप की खासियत

    मोर बिजली एप के जरिए हर उपभोक्ता का मोबाईल बिजली दफ्तर बन जाएगा। इसके द्वारा बिजली बंद की शिकायत दर्ज करने पर बिजली मिस्त्री गूगल मैप के सहारे उपभोक्ता के परिसर तक पहुंच सकता है। बिजली की आपातकालीन शिकायत इस एप से करने पर जीपीआरएस लोकेशन की सूचना मिल जाती है और विद्युत दुर्घटना रोकने आपातकालीन शिकायत दूर करने सुधार दल स्थल पर जल्दी ही पहुंच जाता है। मीटर शिफ्टिंग, नाम परिवर्तन, निम्नदाब बिजली कनेक्शन, भार वृद्धि-कमी हेतु बिजली दफतर जाये बिना इस एप से ऐसे कार्य पूर्ण हो जाते हैं। उपभोक्तागण अपने सहित अन्य 04 विद्युत कनेक्शन के बिल को इस एप के माध्यम से अपने मोबाईल पर देख सकता है। बिल का भुगतान ऑनलाईन कर सकता है। उपभोक्तागण पिछले दो वर्षों में खपत किये गये बिजली की यूनिट्स तथा उसके भुगतान की भी जानकारी इस एप से ले सकते हैं। बिजली बिल में गड़बड़ी की आशंका होने पर उपभोक्तागण इस एप से वर्तमान में लागू बिजली की दर को देखकर स्वयं सही बिजली बिल की गणना कर सकते हैं। मीटर रीडिंग गड़बड़ी सुधारने हेतु उपभोक्तागण मीटर की रीडिंग की फोटो खींचकर इस एप के द्वारा बिजली दफ्तर में भेजकर आसानी से सुधार करवा सकते हैं।


कोविड-19 से पीड़ित 2 मरीजों को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से मिला रक्त

कोविड-19 से पीड़ित 2 मरीजों को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से मिला रक्त

02-Oct-2020

दुर्ग : शासकीय जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक द्वारा राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के मौके पर आज स्वैच्छिक रक्तदान के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने सीएमएचओ ने अपील की है।

सीएमएचओ डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर और दुर्ग जिला अस्पताल  सिविल सर्जन डॉ.पी. बाल किशोर ने ब्लड बैंक प्रभारियों व गैर शासकीय संस्थाओं को स्वैच्छिक रूप से स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करते हुए वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखना है। स्वैच्छिक रक्तदान के लिए लोगों को प्रोत्साहित करते हुए 1 से 15 अक्टूबर तक 4 बार रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाना है।

जिला अस्पताल दुर्ग की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ० जिज्ञासा ने बताया आज कोविड -19 पॉजेटिव 2 मरीजों को दो यूनिट रक्तदान किया गया। यह  दोनों कोविड-19 से पीड़ित मरीज शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में भर्ती हैं। इन मरीजों को रक्त की जरुरत पड़ने पर शासन द्वारा निर्धारित नियमों के तहत रक्त उपलब्ध कराया गया।

कोरोना काल में रक्तदान के लिए छ.ग. राज्य एड्स नियंत्रण समिति के सह परियोजना संचालक डॉ. एसके बिंझवार ने कहा कोराना संक्रमण से स्वस्थ हो चुके व्यक्तियों को नियमानुसार प्लाजमा दान के लिये चिन्हीत करते हुए सहमति उपरांत प्लाजमा दान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।  साथ ही गैर कोविड सेवाओं को निरंतर बनाये रखते हुए एवं आपातकालीन सेवायें जैसे प्रसव, दुर्घटना आदि तथा हीमोग्ब्लोबीनोपैथी मरीजों के लिए ब्लड बैंक में रक्त की उपलब्धता बनाये रखना सुनिश्चित करना ब्लड बैंक की उपयोगिता सर्वोपरि है।

अशासकीय संगठनों को रक्तदान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने के लिए जिला स्तर पर युवा संगठनों, सामाजिक संगठन, महिला समितियों, स्वयं सेवी संगठनों, व्यापारिक संगठनों आदि को आहवान किया गया है। रक्तदान में सोशल डिस्टेंसिंग के मानको का पालन करते हुए रक्तदान शिविरों में अधिक से अधिक सहभागी हों। कोविड- 19 के चलते उत्पन्न वैश्विक स्वास्थ्य संकट को ध्यान में रखते हुए सभी शिविरों में तमाम सुरक्षा व्यवस्था जैसे कि दो गज देह से दूरी, मास्क का प्रयोग, सैनिटाइजेशन आदि का विशेष ध्यान रखा जाएगा। शिविर में स्थानीय जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की टीम मौजूद रहेगी। इस दौरान एकत्र किए गए रक्त को जिला अस्पताल में संचित किया जाएगा और जरूरतमंद लोगों की मदद की जाएगी।

ब्लड बैंक प्रभारी डॉ० जिज्ञासा ने कहा स्वैच्छिक रुप से रक्तदान के लिए आने वाले लोगों को काउंसलिंग के बाद रक्त संग्रहण किया जाता है। डॉ. जिज्ञासा ने बताया शासकीय अस्पतालों में भर्ती मरीजों को आपात काल के समय निशुल्क रक्त प्रदान किया जाता है। रक्तदान करने से शरीर में कोई नुकसान नही होता। रक्तदान करने हेतु कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जो 18 से 65 साल आयु वर्ग का है और जो कम से कम 45 किलो वजन का हो एवं उसका हीमोग्लोबीन 12.5 ग्राम से ज्यादा का हो रक्तदान कर सकता है। रक्तदान संबंधी कई भ्रांतियों का भी उल्लेख करते हुये बताया कि रक्तदान करने से कमजोरी नहीं आती।

राज्य के कुल जनसंख्या 2.55 करोड़ के आधार पर 01 प्रतिशत रक्त की आवश्यकता होती है अथार्त 2.55 लाख युनिट प्रतिवर्ष जरूरत पड़ती है जिसे शासकीय एवं गैर शासकीय ब्लड बैंको के माध्यम से पूर्ति किया जाना है। वर्तमान में राज्य में कुल 94 ब्लड बैंक कार्यरत हैं जिसमें 31 शासकीय चिकित्सालय ब्लड बैंक तथा 63 गैर शासकीय ब्लड बैंक संचालित है। वर्ष 2019-20 में ब्लड बैंकों द्वारा कुल 231054 रक्त संग्रहण किया गया। वर्ष 2020-21 (अप्रैल से अगस्त) में अबतक ब्लड बैंकों द्वारा कुल 67543 रक्त संग्रहण किया गया।

रक्तदान करने से मुझे क्या मिलेगा, क्या हैं इसके फायदे?

 एक प्रशस्ति-पत्र और एक डोनर कार्ड मिलेगा

 जरूरत पड़ने पर कार्ड से एक साल तक सिविल अस्पताल से रक्त ले सकते हैं

 रक्तदान से नई लाल रक्त कोशिकाएं बनती हैं

 रक्त-प्रवाह को सामान्य बनाये रखता है, बीपी की समस्या नहीं होती

 रक्तदान से हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है

 यह कैंसर के रिस्क को भी घटाता है

 रक्तदान करने से वजन भी नियंत्रण में रहता है

 हालांकि इसे वजन घटाने के उद्देश्य से किया जाना ठीक नहीं है

 एक यूनिट रक्त से चार लोगों की जान बचाई जा सकती है।


कांकेर घटना पर पत्रकारों की उच्च स्तरीय जांच समिति गठित, 10 दिनों में जांच प्रतिवेदन सौंपेगी समिति

कांकेर घटना पर पत्रकारों की उच्च स्तरीय जांच समिति गठित, 10 दिनों में जांच प्रतिवेदन सौंपेगी समिति

02-Oct-2020

 रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर त्वरित कार्यवाही करते हुए कांकेर जिला मुख्यालय में वरिष्ठ पत्रकार श्री कमल शुक्ला के साथ हुई मारपीट एवं दुर्वव्यवहार पर जांच हेतु पत्रकारों की उच्च स्तरीय जांच दल के गठन के आदेश राज्य शासन ने जारी कर दिए हैं। उच्च स्तरीय जांच दल 10 दिनों के भीतर अपना जांच प्रतिवेदन राज्य शासन को सौंपेगा। 

श्री राजेश जोशी, संपादक नवभारत रायपुर की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय जांच दल के अन्य सदस्य श्री रूपेश गुप्ता, सुश्री शगुफ्ता सिरीन, श्री अनिल द्विवेदी, श्री सुरेश महापात्र एवं श्री राजेश शर्मा ब्यूरो चीफ कांकेर, नवभारत रायपुर होंगे।


पत्रकार से पत्रकार के झगडे को राजनैतिक रूप देकर भ्रम फ़ैलाने की कोशिश की जा रही है !

पत्रकार से पत्रकार के झगडे को राजनैतिक रूप देकर भ्रम फ़ैलाने की कोशिश की जा रही है !

26-Sep-2020

पत्रकार से पत्रकार के झगडे को राजनैतिक रूप देकर भ्रम फ़ैलाने की कोशिश की जा रही है !

कांकेर में आज दिनक 26  9 2020 को दोपहर 2 बजे के लगभग कांकेर थाने  के सामने पत्रकार कमल शुक्ल की कुछ पत्रकारों  जो कि अमर सतम्भ और श्रमबिंदु  समाचार के सह संपादक  बताये जा रहे है  इन सब ने मिलकर कमल शुक्ला की  पिटाई कर दी कथित पिटाई के मामले को लेकर 
 कांकेर कुछ  पत्रकार के  द्वारा  पत्रकार कमल शुक्ला समेत कई पत्रकार धरना देने पुलिस थाने पहुचे थे इस दौरान दूसरे पक्ष   ने उनपर हमला कर दिया और मारपीट करने के साथ ही अभद्र व्यवहार किया।मारपीट करने वालो को कांग्रेस संगठन से जुड़ा बताया गया   ,जबकि हमारे प्रतिनिधि का कहना है की  दोनों पक्ष पत्रकारिता से जुड़े हुए है जिसे जानबूझकर  एक राजनैतिक दल विशेष का बताकर झगडे को  तूल दिया गया है  
शोसल मीडिया  में पत्रकार  के द्वारा दूसरे पक्ष पर टिपण्णी और  भडास् निकाल  गया झगडे की मूल वजह  बताई जा रही है , | अपराध पंजी बद्ध हो चूका है अब पुलिस जांच कर रही है वैस भी पीड़ित बताये जाने वाले पत्रकार महोदय का विवादों से पुराना नाता रहा है  कई सारे मामले इन पत्रकार महोदय के खिलाफ पंजी बद्ध है जिसमे एक नव निर्वाचित बस्तर के विधायक से वसूली का भी है  जिसकी राजधानी में खूब चर्चा रही है ,पत्रकारिता के नाम पर इन्ही से ही झगडे और विवाद क्यों होते है यह सोचने वाली बात है पत्र्कार सुरक्षा के नाम पर इनकी अग्रणी भूमिका रहती है ये भी गौर करने वाली बात है
 


125 महिला, किशोरी व बच्चों की हिमोग्लोबिन जांच

125 महिला, किशोरी व बच्चों की हिमोग्लोबिन जांच

26-Sep-2020

खून की कमी वाले लक्षण दिखने पर थाली को सतरंगी बनाने की सलाह   

दुर्ग, 

जिले में राष्ट्रीय पोषण माह-2020 के तहत `सही पोषण-छत्तीसगढ रोशन’ थीम पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 1 सितंबर से 30 सितंबर तक पोषण जागरुकता माह मनाया जा रहा है।

पोषण माह के आयोजन में  कोविड-19 के निर्देशों को पालन करते हुए लोगों को सोशल डिसटेंसिंग का महत्व व सही पोषण से शरीर में होने वाले प्रतिरोधक क्षमता के प्रति जागरुकता लाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन आंगनबाड़ी केंद्र स्तर पर किया जा रहा  हैं।

कार्यकम पोषण माह के अन्तर्गत जिला कार्यकम अधिकारी विपिन जैन एवं पर्यवेक्षक श्रीमती उषा झा के मार्गदर्शन में किया गया। एकीकृत बाल विकास परियोजना भिलाई के तीनदर्शन परिक्षेत्र के तीनदर्शन एवं शास्त्रीनगर-1 के आंगनबाड़ी केंद्रों में आज 6 माह से 6 वर्ष के बच्चे गर्भवती, शिशुवती, किशोरी बालिकाओं का एनिमिया मुक्त छत्तीसगढ बनाने के लिए हिमोग्लोबिन टेस्ट करवाया गया। महिला पर्यवेक्षक श्रीमती ऊषा झा ने बताया एनिमिया जांच दोनों आंगनबाड़ी केन्द्रों में 80 बच्चे, 25 गर्भवती महिलाओं, 12 शिशुवती माताओं और 8 किशोरी बालिकाओं का टेस्ट किया गया। जांच रिपोर्ट में 3 बच्चे, 1 गर्भवती, 1 शिशुवती और 2 किशोरी बालिकाओं में खून की कमी पायी गयी।

स्वास्थ्य कार्यकर्ता यानी  ए एन एम श्रीमती सरोज साहू द्वारा स्वास्थ्य जांच में सहयोग प्रदान किया गया एवं हिमोग्लोबिन टेस्ट किया गया। आंगनबाडी कार्यकर्ता द्वारा तबस्यूम एवं सविता डकोरे एवं सहायिका प्यारी बाई एवं रूखमणी चन्द्राकर,  रंजना बडगे द्वारा उपस्थित लोगों को समझा गया की भोजन में पोषकत्तवों की कमी से महिलाओं व बच्चों में एनिमिया की समस्या को लेकर जानकारियां दी गई ।

महिला पर्यवेक्षक ऊषा झा ने बताया खानपान में सही पोषण से ही एनिमिया मिटेगा। उन्होंने कहा शरीर में पोषक तत्वों की कमी का असर लंबाई, वजन, कमजोरी और दुर्बलता के रूप में सामने आता है। थकान, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द होना एनीमिया के सामान्य लक्षण हैं। जब दैनिक आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन्स, वसा और खनिज जैसे पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते हैं, तब धीरे-धीरे खून की कमी होने लगती हैं। इससे बचाव के लिए भोजन की थाली को सतरंगी बनाना ज़रूरी है। महिला पर्यवेक्षक का कहना है जब शिशु, किशोरी, गर्भवती महिला व शिशुवती माता सुपोषित होगा तभी स्वस्थ्य समाज की परिकल्पना साकार होगा।

 


भिलाई परियोजना के तीन दर्शन सेक्टर के आंगनबाड़ी केंद्रों में 26 बच्चों का कराया गया अन्नप्राशन

भिलाई परियोजना के तीन दर्शन सेक्टर के आंगनबाड़ी केंद्रों में 26 बच्चों का कराया गया अन्नप्राशन

24-Sep-2020


दुर्ग, । जिले में राष्ट्रीय पोषण माह-2020  के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों और सेक्टर स्तर पर “ सही पोषण-छत्तीसगढ रोशन “ जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। कोविड-19 की वजह से कंटेन्टमेंट जोन को छोड़ कर अन्य क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों को संचालन भी किया जा रहा है। पोषण माह में 1 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रत्येक दिन अलग-अलग गतिविधियां महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन जैन एवं परियोजना अधिकारी श्रीमती पूजा अग्रवाल के मार्गदर्शन में की जा रही  है।

 

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भिलाई परियोजना के तीन दर्शन सेक्टर के 26 आंगनबाड़ी केंद्रों के 6 माह के उम्र के 26 बच्चों का माह के चौथे मंगलवार को अन्नप्राशन करवाया गया। पर्यवेक्षक श्रीमती ऊषा झा ने बताया सही समय पर पूरक आहार की शुरुआत से कुपोषण से बचा जा सकता है। इस  दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मुनेश्वरी सिंह ने बच्चों के हाथ भी धुलवाए।  

महिला पर्यवेक्षक श्रीमती झा ने बताया 6 माह पूरे करने वाले शिशुओं को मीठा खीर खिलाकर पहली बार पूरक  आहार की शुरुआत यानि अन्नप्राशन करवाया गया। अन्नप्राशन कराए गए बच्चों में तीनदर्शन के आंगनबाड़ी केंद्र में शिशु यश कुमार माता सीमा देवी, मशानघाट आंगनबाड़ी केन्द्र में शिशु साक्षी माता पूजा साहू, कोसानगर सतनामी मोहल्ला आंगनबाड़ी केन्द्र में शिशु युगान्त माता किरण शामिल थे।  

वहीं अम्बेडकर नगर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अन्नपूर्णा दुबे द्वारा विभिन्न मौसमी पौष्टिक फल एवं सब्जियों के पोषक तत्वों को भोजन में शामिल कर पोषण अभियान को सफल बनाने पर जोर दिया गया। मौसमी फल सेव, केला, अनार, पपीता और सब्जी हरी पत्तेदार सब्जी, मुनगा, गोभी, भिंडी, करेला, बरबट्टी, गवारफल्ली, कद्दू सहित अन्य सब्जी थाली में होना जरुरी है।

6 माह के बाद दें शिशु को पूरक आहार

छह महीने की उम्र के बाद शिशु को भोजन से अतिरिक्त पोषक तत्वों की जरुरत होती है, विशेष तौर पर आयरन की। शिशु के शुरुआती छह महीनों में उसकी पाचन और रोग प्रतिरोधक प्रणाली धीरे-धीरे मजबूत हो रही होती है। 7 वें माह से शिशु ठोस आहार को अधिक कुशलता से पचाने में सक्षम होने लगता है। शिशु को विभिन्न प्रकार के ठोस खाद्य पदार्थों (जैसे, मसला हुआ, नर्म या पका हुआ और सादा आहार) का स्वाद चखाते रहें। शिशु की बढ़ती शारीरिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, मसली हुई सब्ज़ियाँ और फल लगातार दिए जा सकते हैं। बेहतर प्रभाव के लिए, इसे सीरियल के साथ मिलाकर शिशु को दिन में लगभग 3 बार दें ।

क्या खिलाएं: सादे अनाज और मसले हुए फलों व सब्जियों के अलावा अब शिशु को गाढ़े मसले और नर्म पके हुए खाद्य पदार्थ भी दें।

कितना खिलाएं : स्तनपान कराने और ठोस खाद्य पदार्थों के बीच संतुलन बनाए रखें ।

आहार संबंधी सलाह: एक समय में एक ही ठोस पदार्थ देने का प्रयास करें।


होम आइसोलेशन में हैं, तो कड़ाई से करें नियमों का पालन

होम आइसोलेशन में हैं, तो कड़ाई से करें नियमों का पालन

19-Sep-2020

- होम आइसोलेशन वाले मरीजों की शंकाओं का चिकित्सक कर रहे  समाधान
- घर तक दवाएं और सामान्य जानकारी पहुंचा रहा निगम

रायपुर । कोरोनावायरस के संक्रमण की चपेट में आए कई मरीज बिना लक्षण या कम लक्षण वाले हैं, उनका इलाज घर पर ही चिकित्सकों की निगरानी में किया जा रहा है। इलाज प्रक्रिया और इलाज की अवधि को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उपज रहे हैं। इन्हीं सवालों के जवाब और दवाईयां नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयास से घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है। साथ ही चिकित्सक मरीजों से  होमआइसोलेशन नियमों का पालन सख्ती से करने की अपील भी कर रहे हैं।
होम आइसोलेशन वाले मरीज अपने चिकित्सकों से कई तरह के सवाल फोन के माध्यम से पूछ रहे हैं। इसलिए गुरूवार को चिकित्सकों और निगम के अधिकारियों ने जूम मीटिंग की। इस दौरान आइसोलेशन वाले मरीजों द्वारा पूछे जाने वालों सवालों पर चर्चा कर अब दवाओं के साथ-साथ ऐसे मरीजों को सामान्य प्रश्न और उत्तर भी दिए जाएंगे। चिकित्सकों का मानना है इससे मरीजों को ना तो इलाज को लेकर चिंता सताएगी और ना ही उन्हें बेवजह परेशानी होगी।
रखें सावधानी- होम आईसोलेशन डि्यूटी में कार्यरत चिकित्सक डॉक्टर निलय मोझरकर ने बताया होम आइसोलशन वाले मरीजों को वाट्सऐप के जरिए सलाह दे रहे हैं जैसे- रैपि़ड एंटीजेन या आऱटीपीसीआर टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीज होम आईसोलेशन की सुविधा चुन सकता है, पॉजिटिव आने वाले दिन से कुल 17 दिनों तक आइसोलेशऩ में रहना है, अलग कमरा, अगल शौचालय का होना अति आवश्यक है, थर्मामीटर व पल्सऑक्सीमीटर घर में रखना अनिवार्य है, थर्मामीटर से तापमान और पल्स ऑक्सीमीटर से दिल की धड़कन को दिन में दो बार मापना जरूरी है, आखिरी 7 दिन में कोई लक्षण नहीं है तो दोबारा टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लक्षण है तो डॉक्टर से बात कर जांच की सलाह लें, खाने में गर्म और ताजा भोजन, ताजे फल-सब्जियां नियमित रूप से लें, काढ़ा या अन्य पेय भी ले सकते हैं, पांच दिन दी गई दवाओं का सेवन करने के पश्चात हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन बंद करके सिर्फ जिंक और विटामिन सी ही डॉक्टरी सलाह पर लेनी चाहिए। 
दिखे यह लक्षण तो भर्ती होने की जरूरत- डॉक्टर निलय मोझरकर ने बताया यदि सांस की रफ्तार सामान्य से तेज हो, पल्सरेट 120 से ऊपर 94 नीचे आए, सांस लेने में कठिनाई, सीने में लगातार दर्द या दबाव, होंठ या चेहरे का नीला पड़ना,तो फौरन इलाज कर रहे चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। साथ ही बुखार लगातार कम ना हो रहा हो, तेज खांसी और सांस लेने में बहुंत ही परेशानी हो रही हो तो भी सतर्कता और चिकित्सकीय सहायता जरूरी है। 
घर वालें रखें ध्यान- कोरोनावायरस संक्रमित मरीज के साथ रहने वाले व्यक्तियों को भी जरूरी सावधानियां रखनी होती है। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन गोली 400 एमजी सुबह और शाम हफ्ते में एक दिन लेना चाहिए। संक्रमित मरीज को खाना या अन्य सामग्री पहुंचाते वक्त मास्क पहनना अनिवार्य है। साथ ही हाथ लिक्वि़ड सोप से धोना भी जरूरी है। घर के बच्चों और बुजुर्गों को होम आइसोलेशन वाले मरीज के संपर्क में नहीं आने देना है।
पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग ऐसे करें – चिकित्सक निलय मोझरकर के मुताबिक घर में इलाजरत कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों को पल्स ऑक्सीमीटर के उपयोग की जानकारी भी व्हाट्सऐप के जरिए दी जा रही है। अपनी तर्जनी उंगली ( इंडेक्स फिंगर) में पल्स ऑक्सीमीटर को लगाकर उसका बटन ऑन करें, इसके बाद एक मिनट पल्सऑक्सीमीटर को उंगली में लगाकर रखें और दिल की धड़कन मापें। यदि रीडिंग कम आती है तो घबराएं नहीं, यही प्रक्रिया पुनः दोहराएं। बार-बार यदि रिडिंग कम आए और मरीज को सांस लेने में दिक्कत या अन्य कठिनाईयां हो तो इसे देखते हुए भर्ती की सलाह ली जा सकती है।
होम आइसोलेशन के नियम- संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ की ओर से होम आईसोलेशन मानक संचालन प्रक्रिया के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। होम आईसोलेशन का चयन करने वाले मरीज को जिले के कंट्रोल रूम में तैनात नोडल अधिकारी को मोबाईल द्वारा अपने होम आईसोलेशन में होने की जानकारी देनी होगी, कंट्रोल रूम या नो़डल अधिकारी द्वारा मरीज के मोबाइल में अंडरटेकिंग फार्म, चिकित्सकीय सहमति फार्म अटेंडेंट एवं अटेंडेंट के लिए दी जाने वाली किट हेतु अपनी सहमति प्रदान करने के लिए प्रपत्र भेजा जाएगा। इस प्रपत्र को मरीज द्वारा डाउनलोड करके पूर्ण रूप से भरकर सीएमएचओ कंट्रोल रूम को व्हाट्सएप्प करना होगा, प्रत्येक मरीज को होम आईसोलेशन के दौरान अपने स्वास्थ्य की जानकारी प्रतिदिन शाम को व्हाट्सएप्प के माध्यम से कंट्रोल रूम या चिकित्सक को देनी होगी, आकस्मिक अवस्था की सूचना चिकित्सक को देनी होगी। छोटे बच्चों को पॉजिटिव आने पर मां के साथ या परिजन के साथ होम आईसोलेशन में रखना होगा, गर्भवती महिलाओं को होम आईसोलेशन की पात्रता उनके स्वास्थ्य की स्थिति के आधार पर दी जाएगी।

 


पोषण वॉरियर्स दे रहे हैं ‘’सही पोषण देश रोशन’’ का संदेश

पोषण वॉरियर्स दे रहे हैं ‘’सही पोषण देश रोशन’’ का संदेश

18-Sep-2020

सुपोषित थाली, प्रदर्शनी और रंगोली के माध्यम से कर रहे पोषण के प्रति जागरूक

किशोरियों को सिखाए जा रहा महावारी के दिनों में स्वच्छता रखने के तरीके

ज़िले में 30 सितंबर तक चलने वाले राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत विकासखंड अभनपुर के सेक्टर केंद्री की समस्त पंचायत में नियमित रूप से पोषण वारियर्स के माध्यम से गर्भवती, शिशुवती माताओं और बच्चों को गृह भेंट कर पोषण संबंधी जानकारियां दी जा रहीं हैं ।पोषण माह में विशेष रुप से 11 से 18 वर्ष के किशोरियों को माहवारी के दिनों में स्वच्छता बनाए रखने के सही तरीके सिखाए जा रहे हैं । विकासखण्ड अभनपुर में राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन सीडीपीओ जागेश्वर साहू के मार्गदर्शन में किया गया ।

केंद्री की सुपरवाइजर श्रीमती खेमेश्वरी वर्मा ने बताया राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत केंद्री सेक्टर की 6 पंचायतों केंद्री, झांकी, बकतरा, भेलवाड़ीह बेंद्री और पचेड़ा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा नियमित रूप से  गृह भेंट, पोषण थाली निर्माण प्रदर्शनी, रंगोली, नारा लेखन और पोषक खाद्य पदार्थ के चित्रों के माध्यम से समाज को पोषण की महत्वता के बारे में जागरूक कर ‘’सही पोषण देश रोशन’’ का संदेश भी दिया जा रहा है । गृहभेंट के दौरान  रेडी-टू-ईट फूड का वितरण भी किया जा रहा है ।

16 वर्षीया भेलवाड़ीह निवासी रानू साहू बताती है वह नही जानती थी की महावारी के दिनों में किस प्रकार साफ-सफाई रखना होता है । गृह भ्रमण के दौरान आंगनबाड़ी दीदी ने पूछा की आप महामारी के दिनों में स्वच्छता का कैसे ख्याल रखती हो ? उस समय मैं निरुत्तर हो गई ।

उसके बाद आंगनबाड़ी दीदी ने बताया कि नियमित रूप से सेनेटरी पैड को बदलते रहना आवश्यक है । अत्यधिक रक्तस्राव होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जानकारी ली जा सकती है । अपने से किसी भी प्रकार की घरेलू या चिकित्सकीय दवाई ना लें । जब तक आपको कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ या डॉक्टर सलाह ना दे, तब तक किसी भी प्रकार की दवाई ना ले। नियमित रूप से स्नान और सफाई का ध्यान रखें । साथ ही उन्होंने स्वस्थ शरीर के लिए तिरंगा थाली  कैसे बनाई जाएगी  और उसे कैसे खाते हैं की भी जानकारी दी गई ।

आंगनबाड़ी पचेड़ा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गीता माण्डले ने बताया समुदाय में पोषण और स्वच्छता का संदेश देने के लिए ग्राम की किशोरी बालिकाओं द्वारा रंगोली बनाकर ‘’सही पोषण देश रोशन’’ का संदेश भी दिया गया जिसमें विशेष रूप से निशिता ऋषिका और आयुषी द्वारा बनाई गई रंगोलियों में ‘’बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ का संदेश भी दिया गया है ।

पोषण माह में स्वास्थ्य विभाग की मितानिन का सहयोग भी लिया जा रहा है । जिसके द्वारा शिशुवती माताओं और गर्भवती महिलाओं को पोषण और टीकाकरण के लिए जागरूक किया जा रहा है । विभाग द्वारा समस्त गतिविधियों का आयोजन कोविड-19 की गाइडलाइन अनुसार किया जा रहा है ।


कुपोषण दूर करने के लिए खुद ही बना दी पोषण वाटिका

कुपोषण दूर करने के लिए खुद ही बना दी पोषण वाटिका

16-Sep-2020


6 डिसमिल जमीन पर उगाते है आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए फल और सब्ज़ियॉ
सामाजिक सरोकार का है एक बड़ा उदाहरण

रायपुर/अभनपुर 
ठाकुर राम पटेल का नाती कुपोषित क्या हुआ कि अपने क्षेत्र की आंगनबाड़ी के लिए लगा दी पोषण वाटिका । 65 वर्षीय ठाकुर राम पटेल कहते हैं कि लगभग चार-पांच वर्ष पहले मेरा नाती कुपोषित हो गया था । आंगनबाड़ी दीदी ने बताया कि उचित पोषण आहार न मिलने के कारण आपका नाती कुपोषित है । बस फिर क्या था अपने खेत की 6 डिसमिल जमीन पर ग्राम पंचायत टीला विकासखण्ड अभनपुर की आंगनबाड़ी क्रमांक 2 के लिए सुपोषण वाटिका लगा डाली ।

उन्होंने बताया कि इस कार्य में ग्राम के सरपंच का भी सहयोग मिला है ग्राम स्तर से मुनगा, भाटा, बरबट्टी, पपीता, केला तोरई एवं करेला सब्जी के पौधे लगाकर पोषण वाटिका के माध्यम से बच्चों को गरमा गरम सुपोषित भोजन की व्यवस्था की जाती है । सब्जी को नियमित रूप से आंगनबाड़ी को भेज देते हैं जिससे वहां पर बच्चों को ताजा गरमा गरम सुपोषित पौष्टिक भोजन खाने में मिलता है ।

नीरा पटेल कहती हैं आंगनबाड़ी दीदी करुणा सोनी को जब भी बच्चों के लिए सब्जी की जरूरत होती है हमारे यहां से मंगा लेती हैं । हमारे परिवार में 8 लोग हैं आठ पोषण वाटिका को विशेष रुप से सहयोग करते हैं । परिवार इस पोषण वाटिका में नियमित रूप से अपना सहयोग करता है साथ ही समय पर पानी देना, दवा का छिड़काव करना और आवश्यकता अनुसार देख रेख की जाती है।  हमने अब ठान लिया है कि हम अपने ग्राम के किसी भी बालक को कुपोषित नहीं होने देंगे । जब से कोरोनावायरस आया है तबसे आंगनबाड़ी दीदी की सहायता से सब्जियों को अच्छे से धोकर ही उनकी मदद से बच्चों के घर पर भी पर भी पहुंचाते हैं ।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता करुणा सोनी ने कहा ठाकुर राम पटेल द्वारा नियमित रूप से आंगनबाड़ी को सब्जी उपलब्ध कराई जाती है जो कि निशुल्क होती है। ठाकुर राम पटेल ने अपनी 6 डिसमिल जमीन पर आंगनबाड़ी के लिए पोषण वाटिका लगाई है यह एक बड़ा सामाजिक सरोकार का उदाहरण है जो कुछ लोग ही कर पाते हैं।

इस समय सही पोषण देश रोशन की अवधारणा के साथ पूरे प्रदेश में राष्ट्रीय पोषण माह भी मनाया जा रहा है। इस दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अन्य विभागों के सहयोग से आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों, घरों की बाड़ियों, सामुदायिक भूमि में पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए पोषण वाटिका तैयार कराई जा रही है। इनमें मुख्य रूप से सब्जियां और फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। पोषण वाटिकाओं को तैयार करने का मुख्य उद्देश्य मौसमी और ताजी सब्जियों और फल की पर्याप्त स्थानीय उपलब्धता से बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाना और हरी साग-सब्जियों को खान-पान में अनिवार्य रूप से शामिल करने के लियें जागरूकता लाना है। पोषण वाटिका में लौकी, बरबट्टी, लाल भाजी, पालक और मुनगा जैसे विभिन्न प्रकार की पौष्टिक हरी साग-सब्जियों के साथ पपीता,अमरूद जैसे पौष्टिक फलों के पौधे भी लगाए जाते हैं।इस दौरान कोविड-19 से सुरक्षा के संबंध में समस्त निर्देशों का पालन भी किया जा रहा है।


गृह भ्रमण और बैठकों के माध्यम से दी जा रही जानकारी

गृह भ्रमण और बैठकों के माध्यम से दी जा रही जानकारी

15-Sep-2020

ग्राम पंचायत द्वारा मुनगा, केला,आम और सब्जी भाजी के पेड़ एवं बीजों का किया जा रहा वितरण

रायपुर/अभनपुर 
प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय पोषण माह के तहत शिशुवती माताओं को पौष्टिक आहार के साथ-साथ पौष्टिक आहार बनाने की सीख भी मिल रही है । साथ ही गर्भवती महिलाओं को गर्भ में पल रहे शिशु की उचित देखभाल के साथ स्वस्थ शिशु के लिए किन पौष्टिक आहार का उपयोग करना है के बारे में भी गृह भ्रमण और बैठकों के माध्यम से जानकारी दी जा रही है ।

इसी कडी में विकाखण्ड अभनपुर के सेक्टर तोरला की ग्राम पंचायत टीला में आंगनबाड़ी क्रमांक 1 से 4 तक में कई गतिविधियों का आयोजन किया गया,  इस दौरान शिशुवती माता जानकी निराला कहती हैं, मुनगा फली हमारे घर के आंगन और खेत में लगी हुई है लेकिन उसके महत्व के बारे में हमें नहीं पता था । ग्राम में चल रहे राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान पौष्टिक आहार की जानकारी आंगनवाड़ी दीदी से मिली , दीदी ने बताया इसकी पत्तियों में प्रोटीन विटामिन बी 6, विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन ई, आयरन, मैग्नीशियम पोटेशियम, जिंक जैसे तत्व पाये जाते हैं, इसकी फली में विटामिन ई और मुनगा की पत्ती में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाये जाते है । मुनगा में एंटी ओग्सिडेंट बायोएक्टिव प्लांट कंपाउंड होते हैं, यह पत्तियां प्रोटीन का भी अच्छा स्रोत है। एक कप पानी में 2 ग्राम प्रोटीन होता है, यह प्रोटीन किसी भी प्रकार से मांसाहारी स्रोत से मिले प्रोटीन से कम नहीं है क्योंकि इसमें सभी आवश्यक एमिनों एसिड पाए जाते है । जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार होते हैं ।

वहीं 6 माह की गर्भवती सुजाता कहती हैं कि गृह भेंट के दौरान आंगनबाड़ी और मितानिन दीदी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चे के लिए मुनगा भाजी कितना लाभकारी है, बच्चा हो जाने के उपरांत दूध पिलाने वाली मां के लिए भी मुनगा भाजी अमृत के समान है । दीदी ने बताया मुनगा की पत्ती को घी में गर्म करके प्रसूता स्त्री को दिए जाने का पुराना रिवाज है, इससे दूध की कमीं नहीं होती और जन्म के बाद भी कमजोरी और थकान का भी निवारण होता है। साथ ही बच्चा भी स्वस्थ रहता है और वजन भी बढ़ता है। मुनगा में पाये जाने वाला पर्याप्त कैल्शियम किसी भी अन्य कैल्शियम पूरक से कई गुना अच्छा है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता करुणा सोनी ने बताया विभाग द्वारा विभिन्न गतिविधियां का आयोजित किया जा रहा है। ग्राम में सुपोषण के बारे में जागरूकता लाने के लिए स्कूली बच्चों के सहयोग से चित्रकारी, स्लोगन तथा रंगोली द्वारा संदेश बनवाये गये और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से भी पोषण से संबंधित जागरूकता संदेश दिए जा रहे है।

ग्राम में सुपोषण चौपाल कृषक बैठक का भी आयोजन किया जा रहा है। सुपोषण चौपाल में पौष्टिक आहार से संबंधित जानकारियां दी जा रही है। सुपोषण से संबंधित इन रचनात्मक गतिविधियों के द्वारा महिलाओं तथा बच्चों मे सुपोषण के बारे मे जागरूकता लाई जा रही है। ऐसी बैठकों के माध्यम से ग्राम पंचायत द्वारा मुनगा, केला, आम और सब्जी भाजी के पेड़ एवं बीजों का वितरण भी किया जा रहा है ।

चौपाल और कृषक बैठक के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा, शारीरिक दूरी अपनाकर कृषि कार्यों के साथ-साथ हाथ को अच्छे से धोना । जगह-जगह गुटका खा कर थूकने से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है ।

कोरोना महामारी के इस दौर मे कोविड-19 के संबंधित गाईडलाइन का पालन कर सभी गतिविधियां सम्पन्न की जा रही है। सुपोषण के बारे मे जागरूकता लाने तथा बच्चों, महिलाओं को कुपोषण से बचाने के चित्रकारी, सुपोषण से संबंधित स्लोगन तथा रचनात्मक चित्रकारी को बच्चों के साथ बड़े भी रूचि लेकर सुपोषण का महत्व समझ रहे हैं। बच्चों तथा महिलाओं को कुपोषण से मुक्ति दिलाने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर पौष्टिक आहार “रेडी टू ईट”का वितरण किया भी किया जा रहा है।


देश और प्रदेश की आर्थिक- सामाजिक समस्याओं का समाधान, समावेशी विकास से ही संभव : सीएम भूपेश बघेल

देश और प्रदेश की आर्थिक- सामाजिक समस्याओं का समाधान, समावेशी विकास से ही संभव : सीएम भूपेश बघेल

14-Sep-2020

 

रेडियो वार्ता ’लोकवाणी’ की दसवीं कड़ी में ’समावेशी विकास-आपकी आस’ विषय पर मुख्यमंत्री ने साझा किए अपने विचार

सभी की आजीविका और बेहतर आमदनी की व्यवस्था समावेशी विकास का मूलमंत्र

महान विभूतियों की न्याय की अवधारणा में मिला विकास का ’छत्तीसगढ़ी मॉडल’

राजमेरगढ़ और कबीर चबूतरा में बनेगा ईको रिसार्ट और कैफेटेरिया

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कल प्रसारित अपनी रेडियो वार्ता लोकवाणी की दसवीं कड़ी में ‘समावेशी विकास-आपकी आस’ विषय पर श्रोताओं के साथ अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, डॉ. अम्बेडकर, शास्त्री, आजाद, मौलाना जैसे हमारे नेता जिस न्याय की बात करते थे, उसी साझी विरासत से हमें विकास का छत्तीसगढ़ी मॉडल मिला है। समावेश का सरल अर्थ होता है- समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना, सभी की भागीदारी, सबके विकास की व्यवस्था। उन्होंने कहा कि किसान को जब हम अर्थव्यवस्था की धुरी मान लेंगे तो समझ लीजिए कि समावेशी विकास की धुरी तक पहुंच गए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को अर्थव्यवस्था के केन्द्र में रखा है। इसके साथ ही अर्थव्यवस्था में किसान, ग्रामीण, अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के गंभीर प्रयास करते हुए राज्य सरकार सबसे विकास की व्यवस्था कर रही है। 

‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के वेदवाक्य में है समावेशी विकास की भावना

    मुख्यमंत्री ने ‘समावेशी विकास-आपकी आस’ विषय पर आपने विचार रखते हुए कहा कि मेरा दृढ़ विश्वास है कि देश और प्रदेश की आर्थिक- सामाजिक समस्याओं का समाधान, समावेशी विकास से ही संभव है। हम अपने राज्य में समावेशी विकास की अलख जगा रहे हैं और इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के वेदवाक्य में भी यही भावना है, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत है। सवाल उठता है कि प्रचलित व्यवस्था में किसका समावेश नहीं है? कौन छूटा है? तो सीधा जवाब है कि जिसे संसाधनों पर अधिकार नहीं मिला, जिसके पास गरिमापूर्ण आजीविका का साधन नहीं है, विकास के अवसर नहीं हैं या जो गरीब है। वही वर्ग तो छूटा है। हमारी प्रचलित अर्थव्यवस्था में किसान, ग्रामीण, अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाओं की भागीदारी बहुत कम रही है। ऐसा नहीं है कि प्रयास शुरू ही नहीं हुए बल्कि यह कहना उचित होगा कि वह मुहिम कहीं भटक गई, कहीं जाकर ठहर गई। थोड़ा पीछे जाकर देखें तो महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, डॉ. अम्बेडकर, शास्त्री, आजाद, मौलाना जैसे हमारे नेता जिस न्याय की बात करते थे, उसी साझी विरासत से हमें छत्तीसगढ़ी मॉडल मिला है। नेहरू जी ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में पंचवर्षीय योजनाओं का सिलसिला शुरू किया था। उसी की बदौलत भारत की बुनियाद हर क्षेत्र में, विशेष तौर पर आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में मजबूत हुई थी। उन्होंने कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना काल (2007 से 2012) में भारत की अर्थव्यवस्था में ‘समावेशी विकास’ की अवधारणा को काफी मजबूती के साथ रखा गया था। उस समय यूपीए की सरकार थी और प्रधानमंत्री थे श्री मनमोहन सिंह अर्थात देश की बागडोर कुशल अर्थशास्त्री के हाथों में थी। लक्ष्य था कि देश की जीडीपी अर्थात सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक लाना है। यह भी तय हुआ था कि विकास दर को लगातार 10 प्रतिशत तक बनाए रखना है ताकि वर्ष 2016-17 तक प्रति व्यक्ति आय को दोगुना किया जा सके। 12वीं पंचवर्षीय योजना काल 2012 से 2017 के लिए भी जीडीपी को 9 से 10 प्रतिशत के बीच टिकाए रखने का लक्ष्य रखा गया था। आज भारत की विकास दर 3 प्रतिशत के आसपास है। वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में देश की विकास दर में लगभग 24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो दुनिया में सर्वाधिक गिरावट है। कोरोना की समस्या तो पूरी दुनिया में है। अमेरिका के सर्वाधिक कोरोना प्रभावित होने के बावजूद वहां की जीडीपी मात्र 10 प्रतिशत गिरी है। जबकि भारत की जीडीपी दुनिया में सर्वाधिक 24 प्रतिशत गिरी है। इस हालात को समझना होगा।
 
सभी की आजीविका और बेहतर आमदनी की व्यवस्था समावेशी विकास का मूलमंत्र

    मुख्यमंत्री ने समावेशी विकास की अवधारणा को छत्तीसगढ़ में लागू किया करने के संबंध में कहा कि समाज के जो लोग चाहे वे छोटे किसान हों, गांव में छोटा-मोटा काम-धंधा करने वाले लोग हों, खेतिहर मजदूर हांे, वनोपज पर आश्रित रहने वाले वन निवासी तथा परंपरागत निवासी हों, चाहे कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार की महिलाएं हों, ग्रामीण अंचलों में परंपरागत रूप से काम करने वाले बुनकर हांे, शिल्पकार हांे, लोहार हों, चर्मकार हों, वनोपज के जानकार हों, सभी के पास कोई न कोई हुनर है, जो उन्हें परंपरागत रूप से मिलता है। समय की मार ने उनकी चमक, उनकी धार को कमजोर कर दिया है। उनके कौशल को बढ़ाया जाए, उनके उत्पादों को अच्छा दाम मिले, अच्छा बाजार मिले तो वे बड़ा योगदान कर सकते हैं। ऐसे सभी लोगों की आजीविका और बेहतर आमदनी की व्यवस्था करना ही समावेशी विकास का मूलमंत्र है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें यह समझना होगा कि हर परिवार के पास आजीविका का साधन हो। मुख्यतः अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को राज्य के संसाधन और उनकी आय के साधन सौंपकर हम आर्थिक विकास के लाभों के समान वितरण का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। दिसम्बर 2018 से छत्तीसगढ़ में हमने जिस तरह की नीति-रीति अपनाई है, उसे देखकर समावेशी विकास को समझा जा सकता है।

किसानों को माना अर्थव्यवस्था की धुरी

    मुख्यमंत्री ने रेडियो वार्ता के श्रोताओं से कहा कि किसान को जब हम अर्थव्यवस्था की धुरी मान लेंगे तो समझ लीजिए कि समावेशी विकास की धुरी तक पहुंच गए हैं। ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ से प्रदेश के 19 लाख किसानों को लाभ मिल रहा है। दो किस्तों में 3 हजार करोड़ का भुगतान हो चुका है। अब जल्दी ही पूरे 5700 करोड़ रू. भुगतान का वादा भी पूरा हो जाएगा। हमने न सिर्फ धान के किसानों को 2500 रूपए प्रति क्विंटल देने का वादा पूरा किया है, बल्कि मक्का, गन्ना के साथ छोटी-छोटी बहुत सी फसलों का भी बेहतर दाम देंगे। राज्य सरकार ने कर्ज माफी की, सिंचाई कर माफ किया और अब न्याय योजनाओं का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। गोधन न्याय योजना के चालू होते ही गौठान निर्माण में तेजी आई है। हर 15 दिन में हम खरीदे गए गोबर का भुगतान कर रहे हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं गोबर खरीदकर, वर्मी कम्पोस्ट बना रही हैं। इस तरह से ग्रामीण जनता ही नहीं, बल्कि अनेक संस्थाओं को भी अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिला। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गांव के सभी वर्गों का एकजुट होना, मेरे ख्याल से सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति भी है। जिस तरह से कुछ लोग गाय और शिक्षा प्रणाली को लेकर सिर्फ बातें करते थे, करते कुछ नहीं थे। उन्हें यह देखना चाहिए कि हमारे 40 नए इंग्लिश मीडियम स्कूलों में प्रवेश भी अब सम्मान का विषय बन गया है। ‘पढ़ाई तुंहर दुआर’ ‘पढ़ाई तुंहर पारा’, जैसे लोक अभियानों से हमने बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखा है।


    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें वरिष्ठ सांसद राहुल गांधी जी ने ही न्याय योजना शुरू करने, हर ब्लॉक में फूडपार्क खोलने जैसे व्यावहारिक उपाय बताए थे। हमने 200 फूडपार्क खोलने की योजना बना ली है और इनमें से 100 से ज्यादा के लिए जमीन का इंतजाम भी हो गया। औद्योगिक विकास को ब्लॉक स्तर पर पहुंचाने वाली नई औद्योगिक नीति लागू कर दी है। मुख्यमंत्री को श्रोताओं ने बताया कि आमचो बस्तर, आमचो ग्राम, आमचो रोजगार योजना के माध्यम से उन्हें लाभ मिलना शुरू हो गया है। इसी तरह पंचायत में लगाए सर्वर से भी लोगों को लाभ मिल रहा है। राजनांदगांव जिले के गर्रापार के श्री मानवेन्द्र साहू ने नरवा-गरवा -घुरवा- बारी के माध्यम से समावेशी विकास और रोजगार के संबंध में मुख्यमंत्री से जानकारी चाही। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुराजी गांव योजना को आप लोगों ने जिस तरह से हाथों-हाथ लिया है, उससे मैं बहुत उत्साहित हूं। यह योजना वास्तव में ग्रामवासियों को ही चलानी है। नरवा का पानी सिंचाई के लिए भी जरूरी है और अन्य कार्यों के लिए भी।  गरवा, गौठान, गोधन न्याय योजना सब एक दूसरे से जुड़ गए हैं। जैविक खाद भी बन रही है और मूर्तियां भी। हर गौठान में समिति भी हैं और इनके साथ महिला स्व-सहायता समूह भी बन रहे हैं। सब मिलकर अपने गांव की जमीन को उपजाऊ भी बना रहे हैं और रोजगार का नया-नया साधन भी अपना रहे हैं। गौठान, गोधन, बाड़ी, जैविक खाद निर्माण विपणन आदि के माध्यम से लाखों लोगों के लिए रोजगार के रास्ते बन रहे हैं। गांव के संसाधन को जब गांव के लोग अपना समझकर उसे आर्थिक उन्नति के लिए उपयोग में लाते हैं, तो यह समावेशी विकास का सबसे अच्छा उदाहरण बन जाता है। मेरा पूरा विश्वास है कि आप सब लोग मिलकर गांवों को सचमुच में चमन बना देंगे और यही छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत होगी। 

छत्तीसगढ़ ने साबित किया: समावेशी विकास ही सर्वांगीण विकास का रास्ता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने यह साबित किया है कि समावेशी विकास ही सर्वांगीण विकास का रास्ता है। उन्होंने कहा कि हमने यह देखा कि किसी भी तरह किसानों, ग्रामीणों, आदिवासियों, महिलाओं, युवाओं की जेब में नगद राशि डाली जाए। यह राशि डेढ़ साल में 70 हजार करोड़ रू. तक पहुंच गई। इस तरह प्रदेशवासियों को मान-सम्मान के साथ उनके स्वावलंबन का रास्ता बनाया है। हमारी योजनाओं से हर तबके को लाभ मिला। बिजली बिल हाफ, छोटे भू-खंडों की खरीदी-बिक्री, गाइड लाइन दरों में 30 प्रतिशत कमी, पंजीयन शुल्क में कमी, राजस्व संबंधी मामलों का निपटारा, भूमिहीनों को भूमि प्रदाय और ऐसे  अनेक सुधार किए जिसके कारण आम आदमी का जीवन आसान हुआ। इस तरह लाखों लोगों के हाथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को संभालने में मददगार बने। हमने कोरोना संकट के बीच, एक ओर जहां सरकारी कर्मचारियों का वेतन यथावत् रखा, कोई कटौती नहीं की, वहीं प्रवासी मजदूरों सहित उद्योग, व्यापार और कारोबार जगत पर विश्वास किया। किसानों से लेकर व्यापारियों तक, सबके बीच हमारा विश्वास का रिश्ता बना है, उसी के कारण खेती भी चली और उद्योगों के पहिये भी चले। हमारी नीतियों से गांवों से लेकर शहरों तक वित्तीय तरलता बनी रही जिससे लोगों को रोजगार मिला और बेरोजगारी की दर घटी। हमने यूपीए सरकार की महात्मा गांधी नरेगा योजना की विरासत को संजोया और उसमें प्राण फूंके, जिससे देश में मनरेगा के तहत काम और मजदूरी देने वाले अग्रणी राज्य बने। तेंदूपत्ता की संग्रहण मजदूरी 4 हजार रू. करके ही चुप नहीं बैठे, बल्कि लघु वनोपजों की खरीदी 7 से बढ़ाकर 31 वस्तुओं तक पहुंचा दी। जो महुआ 17 रू. में बिकता था उसे 30 रू. किलो में खरीदा। ऐसे तमाम काम जनता की जरूरतें और दुख-दर्द को समझने वाली सरकार ही कर सकती है। अपनी संस्कृति से लेकर जनता की आर्थिक स्थिति तक से सीधा जुड़ाव, उनकी स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर, हर परिस्थिति में शिक्षा-दीक्षा के इंतजाम, पोषण और प्रगति के इंतजाम करना ही हमारा मुख्य उद्देश्य रहा है। लॉकडाउन के बीच भी पीडीएस, आंगनबाड़ी, मध्याह्न भोजन योजना, कुपोषण मुक्ति अभियान पूरी गति से चलता रहा, जिसके कारण कुपोषण की दर में भी कमी आई। ऐसे सभी प्रयास जो आम जनता या कमजोर तबकों को सीधे मदद करते हैं, ये सब समावेशी विकास के प्रयास ही हैं। जिसका नतीजा राज्य के सर्वांगीण विकास के रूप में मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने यह साबित किया है कि समावेशी विकास ही सर्वांगीण विकास का रास्ता है।

राजमेरगढ़ और कबीर चबूतरा में सात करोड़ रूपए की लागत से विकसित किए जाएगा ईको रिसार्ट और कैफेटेरिया

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला गठन के 6 माह के अंदर, वहां करीब 100 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की स्वीकृति मिल चुकी है। कई कार्य प्रगति पर हैं। मरवाही अनुभाग, मरवाही नगर पंचायत, सरकारी अंग्रेजी माध्यम शाला तथा महंत बिसाहूदास उद्यानिकी महाविद्यालय, एक के बाद एक नई-नई उपलब्धियां नए जिले के खाते में जुड़ती जा रही हैं। नए जिले में पर्यटन विकास की संभावनाओं को साकार किया जाएगा। साथ ही इसे ग्रामीण विकास के रोल मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने लोकवाणी में ही घोषणा करते हुए कहा कि राजमेरगढ़ और कबीर चबूतरा की प्राकृतिक छटा और ऐतिहासिक महत्व का सम्मान करते हुए यहां ईको रिजॉर्ट, कैफेटेरिया तथा अन्य पर्यटन अधोसंरचनाओं का विकास तेजी से किया जाएगा। फिलहाल इसके लिए 7 करोड़ रू. की लागत से विकास कार्य शीघ्र शुरू होंगे।

कोरोना संक्रमण की रोकथाम और उपचार के लिए किए जा रहे हर संभव उपाय

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कोरोना संकट से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि मार्च 2020 की स्थिति में केवल एम्स रायपुर में ही कोविड टेस्टिंग की सुविधा थी, जिसे बढ़ाना एक बड़ी चुनौती थी। आज की स्थिति में राज्य के सभी 6 शासकीय मेडिकल कॉलेज, 4 निजी लैब में आर.टी.पी.सी.आर. टेस्ट, 30 लैब में ट्रू नॉट टेस्ट तथा 28 जिला अस्पतालों सहित सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में रैपिड एंटीजन किट से टेस्ट की व्यवस्था कर दी गई है। मार्च 2020 में प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार की सुविधा केवल एम्स रायपुर में थी, लेकिन राज्य शासन ने सुनियोजित कार्ययोजना से अब तक 29 शासकीय, 29 डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल, 186 कोविड केयर सेन्टर की स्थापना कर दी है। 19 निजी अस्पतालों को भी उपचार हेतु मान्यता दी गई है। मार्च 2020 की स्थिति में 54 आईसीयू बिस्तर तथा 446 जनरल बेड उपलब्ध थे, जिसमें बढ़ोतरी करते हुये अब 776 आईसीयू बेड्स तथा 28 हजार 335 जनरल बेड उपलब्ध करा दिए गए हैं, जो कि एक बड़ी उपलब्धि है। राज्य के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सुविधा हेतु 148 वेन्टिलेटर थे। जो अब बढ़कर 331 हो गए हैं। श्री बघेल ने कहा कि संक्रमण की रोकथाम और उपचार के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे है।

एसिम्टोमेटिक मरीजों को होम आइसोलेशन की सुविधा: टेलीमेडिसिन परामर्श केन्द्र से उपचार हेतु मार्गदर्शन

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वक्त सबसे बड़ी जरूरत है कि सब लोग मिलकर हिम्मत का परिचय दें। सावधानी और साहस से यह दौर भी निकल जाएगा। राज्य में ज्यादातर व्यक्ति एसिम्टोमेटिक श्रेणी के आ रहे हैं। इसको लेकर भी भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन फेस मास्क और फेस शील्ड के महत्व को समझें। हाथ साफ करने के लिए साबुन-पानी, सेनेटाइजर का उपयोग करें। भीड़ से बचें। एसिम्टोमेटिक मरीजों के होम आइसोलेशन की सुविधा भी नियमानुसार उपलब्ध है। लगातार समीक्षा और सुधार से स्थितियों को बेहतर किया जा रहा है। टेलीमेडिसिन परामर्श केन्द्र के माध्यम से पूर्ण जानकारी, उपचार हेतु मार्गदर्शन व दवाईयॉ उपलब्ध कराने की सुविधा भी दी है। संकट अभी टला नहीं है। सावधानी जरूरी है। 


रायपुर जिले में 29 केंद्रों पर निःशुल्क कोरोना जांच

रायपुर जिले में 29 केंद्रों पर निःशुल्क कोरोना जांच

14-Sep-2020

रायपुर :  कोरोना वायरस संक्रमितों की पहचान के लिए रायपुर जिले में 29 केंद्रों पर सैंपल संकलित कर जांच की जा रही है। कोविड-19 के संभावित मरीज या कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आए लोग इन केंद्रों में सैंपल देकर निःशुल्क जांच करा सकते हैं।

रायपुर शहर में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों खोखोपारा, लाभांडी और उरला के साथ ही शंकर नगर से विधानसभा जाने वाले मार्ग में स्थित बाल आश्रयस्थल, गुढ़ियारी के भारत माता चौक स्थित सियान सदन, चंगोराभाठा सांस्कृतिक भवन और भनपुरी बाजार चौक में मितानिन भवन में कोविड-19 की पहचान के लिए स्वाब सैंपलों की जांच की जा रही है। इन केंद्रों में सवेरे दस बजे से दोपहर दो बजे तक जांच के लिए सैंपल लिए जा रहे हैं। जिला अस्पताल पंडरी, कालीबाड़ी टीबी अस्पताल और बिरगांव शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी जांच के लिए सैंपल लिए जा रहे हैं। संदिग्ध मरीज सवेरे दस बजे से शाम पांच बजे तक इन सेंटरों में पहुंचकर जांच करवा सकते हैं।

रायपुर और बिरगांव के साथ ही जिले के माना सिविल अस्पताल तथा अभनपुर, आरंग, धरसीवां एवं तिल्दा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी कोरोना की जांच के लिए सैंपल संकलित किए जा रहे हैं। मंदिरहसौद, चंदखुरी, रीवां, फरफौद, कुरूद, कुटैला, मानिकचौरी, चंपारण, खोरपा, तोरला, मांढर, दोंदेकलां, सिलयारी और खिलौरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी कोविड-19 की पुष्टि हेतु जांच के लिए सैंपल लिए जा रहे हैं। इन सभी केन्द्रों पर सवेरे दस बजे से दोपहर दो बजे तक सैंपल दिए जा सकते हैं।


लॉकडाउन में जिंदगी से हार गया था उम्मीद, स्पर्श क्लीनिक ने फिर लौटाया आत्मविश्वास

लॉकडाउन में जिंदगी से हार गया था उम्मीद, स्पर्श क्लीनिक ने फिर लौटाया आत्मविश्वास

10-Sep-2020

रायपुर, 9 सितंबर 2020। एक तरफ पूरी दुनिया में विभिन्न तरह की बीमारियों से लाखों लोगों की जानें जाती है तो दूसरी तरफ लाखों लोग ऐसे भी हैं जो खुद ही अपनी जान के दुश्मन बन आत्महत्या तक कर लेते हैं। आत्महत्या, बहुत ही डरावना शब्द है। एक ऐसा शब्द जो आंखों के सामने मौत का भयावह मंजर खड़ा कर देता है।  ऐसा करने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक हर 40 सेकेंड में एक जिंदगी खत्म हो रही है। स्पर्श क्लीनिक रायपुर के मनोरोग चिकित्सक डॉ. अविनाश शुक्ला कहते हैं, मेंटल इलनेस का इलाज पूरी तरह संभव है। इससे आत्महत्याओं को रोका जा सकता है। बहुत से लोग काउंसलिंग और इलाज कराने के बाद सफल हैं यानी अच्छी जिंदगी जी रहे हैं। अलग-अलग तरह के कारणों से लोगों के मन में आत्महत्या का ख्याल आता है। लोग आत्महत्या से बचें इसलिए परिजनों को ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। प्राइवेसी बनाए रखने के लिए उनके नाम बदल दिए गए हैं।

डॉ. शुक्ला ने बताया राजधानी के पुरानी बस्ती निवासी राजेश कुमार (परिवर्तित नाम) 4 माह पहले स्पर्श क्लिनिक रायपुर में परामर्श के लिए आये थे। परामर्श का कारण कुछ दिन पूर्व आत्महत्या का प्रयास था। काउंसिलिंग से पता चला राजेश पिछले कुछ सालों से शराब का सेवन आदी बन गया था। और एक साल से यह मात्रा काफी बढ़ गयी थी। उनकी कमाई का लगभग आधे से ज्यादा पैसा शराब पर खर्चा हो जाता था।

``डॉक्टर ने मेरी काउंसलिंग की। उसके बाद से मैंने खुद को खत्म करने का ख्याल मन से निकाल दिया है,’’ राजेश कहते हैं। राजेश ने बताया कोरोना महामारी के दौरान लॉडकाडन के दिनों में उनका ऑटो मेकेनिक का व्यवसाय बंद हो गया और शराब भी मिलना बंद हो गया। शादी के बाद दो बच्चें परिवार चलाने की चिंता की वजह से वह परेशान रहने लगा। शुरुवात में उन्हें नींद नहीं आना, भूख न लगना और शारीर में छटपटाहट, बेचैनी जैसी समस्या रही और कुछ दिन बाद घर वालों ने देखा कि वह उदास रहने लगा।  परिवार के सदस्यों से पत्नी व बच्चों से भी बात कम करने लगा और किसी भी कार्य में रूचि नहीं थी। पड़ोस के लोगों से सलाह ले कर परिवार वालों ने झाड़ फूक करवाने ले गए पर कोई भी फायदा नहीं मिला। समस्या धीरे-धीरे बढ़ते रही और परेशान हो कर राजेश ने आत्महत्या का प्रयास किया।

``मुझे इस हाल  देखकर मम्मी-पापा दुखी हुए। मम्मी-पापा और दोस्त ही मुझे स्पर्श क्लिनिक मनोचिकित्सक के पास ले गए। डॉक्टर ने कई सेशन में मेरी काउंसलिंग की और दवाई खाने को भी कहा। इस सबसे मेरा कॉन्फिडेंस वापस आने लगा। राजेश को शराब की आदत के साथ-साथ डिप्रेशन भी था,’’ ।

पिछले 4 माह से राजेश नियमित रूप से स्पर्श क्लिनिक इलाज के लिए आ रहे है। राजेश बताते है कि आत्महत्या का प्रयास उनके जीवन का सब से गलत निर्णय था। उन्होंने अपनी समस्या का समाधान खोजने के बजाय उनको अनदेखा किया । शराब पर खर्चा इतना ज्यादा हो जाता था कि बचत कुछ नहीं था। लॉडाउन के समय आर्थिक परेशानी बढ़ गयी और मूलभूत ज़रूरतों  को पूरा करना भी मुश्किल पड़ रहा था।

इससे परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया लेकिन अब समझ आ गया कि हार व नाराशा नहीं उम्मीदों की रोशनी से सही रास्ता मिलने से मंजील मिलती है। तनाव में आकर उन्होंने  गलत रास्ता चुन लिया था । पिछले 4 माह से वह शराब से दूर है और उपचार के बाद उदासी भी गायब हो गई।  पहले से अब काम भी बेहतर कर पाते है और अब बचत पर भी ध्यान देने लगा। शराब का सेवन बंद करने के बाद पारिवारिक झगडे़ भी नहीं होते और बच्चों से भी रिश्ता बेहतर हुआ है ।

राजेश सभी लोगों को संदेश देना चाहते है ताकि ऐसे लोगों को आत्महत्या जैसा कदम उठाने से बचाया जा सके। किसी को भी जीवन में होने वाले समस्याओं से भागना नहीं चाहिए बल्कि उनको शांत मन से समाधान खोजने कि ज़रूरत है। यह सभी के लिए ज़रूरी है कि शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्प्रभाव से अवगत रहे और इनका उपयोग ना करें। ऐसे ही मानसिक रोगों से भी डरने कि ज़रूरत नहीं। अगर उन्हें स्पर्श क्लिनिक के मुफ्त परामर्श और उपचार के बारे में पता होता तो शायद समस्या इतनी ना बढती। राजेश कहते है कि बिना किसी डर और संकोच के लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के लिए सरकार द्वारा संचालित स्पर्श क्लिनिक में संपर्क करना चाहिए ।


मां को मिल रही पोष्टिक आहार बनाने की सीख कुपोषित शिशुओं को मिल रहा पोष्टिक आहार

मां को मिल रही पोष्टिक आहार बनाने की सीख कुपोषित शिशुओं को मिल रहा पोष्टिक आहार

04-Sep-2020

रायपुर जिले में कुपोषित शिशुओं को चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केंद्र के माध्यम से मां को पोष्टिक आहार बनाने और बच्चों  को समय समय पर भोजन करवाने की सीख के साथ बच्चे को कुपोषण मुक्त करने का कार्य किया जा रहा है ।जिले में संचालित दो पोषण पुनर्वास केंद्रों में गैर कोविड गतिविधियों संचालित किया जा रहा है ।
पोषण पुनर्वास केंद्र, जिला अस्पताल कालीबाड़ी में किलकारी करते 9 माह के संजय (बदला हुआ नाम) और 2 वर्ष की सुनीता (बदला हुआ नाम) के माता पिता खुश है कि उनके बच्चे खाना खाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं । संजय की मां बताती हैं उनका बच्चा कुछ नहीं खाता था, जबरदस्ती खिलाओ तो रोने लगता और कमजोर होता जा रहा था । जब उसका वजन कराया गया तो वजन और आयु के अनुसार उसका वजन सामान्य से कम निकला । ``26 अगस्त को जब हम पोषण पुनर्वास केंद्र में आए तब हमारे बच्चे का फिर से वजन लिया गया तब उसका का वजन 5.7 किलोग्राम निकला । नियमित रूप और नियमित अंतराल से मिले पोषण आहार के कारण 3 सितंबर को 5.96 किलोग्राम वजन हो गया है ।‘’
 ऐसी ही कुछ कहानी सुनीता की भी है। बच्ची 2 वर्ष की है लेकिन वज़न और ऊंचाई के अनुसार उसका वजन सामान्य से कम है । सुनीता का स्वभाव चिड़चिड़ा और खाना खाने की इच्छा बिल्कुल नहीं होती है । सुनीता की मां बताती है सुनीता को कुछ भी खाने को दो तो नहीं खाती थी । ``जब हम 26 अगस्त को यहाँ आये तब इसका का वजन 8.2 किलोग्राम था जो अब 3 सितंबर को बढ़कर 8.64 किलोग्राम हो गया है ।‘’
बच्चों की माताओं ने बताया  यहां पर जिस तरह से भोजन दिया जाता है वह भोजन हम घर पर भी बना सकते हैं  लेकिन उनको इसकी जानकारी नहीं थी ।साथ ही वह लोग यह समझते थे कि बच्चे एक बार में ही पूरा खाना खा लेते हैं लेकिन ऐसा नही है । यहां आकर पता चला बच्चों को नियमित अंतराल से थोड़ा थोड़ा भोजन खिलाने से बच्चों को लाभ होता है । एक साथ भोजन खिला देने से बच्चा भोजन नहीं पचा पाता है और या तो वह उस भोजन को बाहर निकाल देता है या उसकी तबीयत खराब हो जाती है ।
डाइटिशियन पूनम कहती हैं एडमिशन के समय बच्चों को हल्की सर्दी और बुखार भी होता है । कुपोषण में अक्सर ऐसी शिकायत हो जाती है । एडमिशन के बाद शिशु का उपचार शुरू किया । उपचारात्मक डाईट एफ-75 और एफ-100 कहलाती है । ज़्यादातर उपचारात्मक डाईट एफ-75 से खान-पान कराना शुरू किया जाता। दो से तीन घंटे में थोड़ी-थोड़ी डाइट बच्चे को दी जाती है । इसमें विशेष रुप से खिचड़ी हलवा, दलिया दिया जाता है । साथ ही डिस्चार्ज के समय यह भी ध्यान रखा जाता है एडमिशन के समय और डिस्चार्ज के बीच में कुपोषित बच्चे के वज़न में  15 प्रतिशत की वृद्धि हुई या नही हुई है । यदि नहीं हुई होती है तो उसको 1 सप्ताह के लिए और एडमिट रखा जाता है । कभी-कभी एक माह तक भी एडमिट रखा जाता है । ऐसी स्थिति में जो व्यक्ति (बच्चे की मॉ ) को कार्य क्षतिपूर्ति के रूप में 15 दिन का 150 रुपये प्रतिदिन दिया जाता है । पोषण पुनर्वास केंद्र से डिस्चार्ज होने के पूर्व मां को घर पर बनने वाले पौष्टिक आहार की जानकारी भी विशेष रुप से दी जाती है । साथ ही माता को भी पौष्टिक आहार कैसे बनाया जाए और खाया जाए पर भी बताया जाता है । 
डाइटिशियन पूनम का कहना है बच्चों की माताओं को पता ही नहीं होता है कि उनका बच्चा कुपोषित है या हो रहा है । आंगनबाड़ी या मितानिन के माध्यम से उनको जानकारी मिलती है कि उनका बच्चा कुपोषित है । हमारे कार्यकर्ता भी बच्चों के खानपान के बारे में बताते हैं ।कुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रो, मितानिनों  या शिशु संरक्षण माह के दौरान चिन्हित और अस्पतालों के माध्यम से चिन्हित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंन्द्र भेजा जाता है। 
उपचार और निः शुल्क दवाईयां मिलती है
शिशुओं के शारीरिक विकास के थैरेपिक फूड और दूध, खिचड़ी, हलवा दलिया दिया जाता है। यहां विशेंष रूप से चिकित्सकीय देख रेख में नियमित स्वास्थ्य जांच की जाती है। साथ ही कुपोषण का उपचार एवं निः शुल्क दवाईयां भी दी जाती है।
क्या है कुपोषण 
शरीर को लंबे समय तक संतुलित आहार नहीं मिलना कुपोषण कहलाता है। शरीर बीमारियों का शिकार होने लग जाता है।  स्त्रियों और बच्चों में यह रोग अधिक देखने को मिलता है । कुपोषित बच्चों को दो प्रकार से नापते हैं  । बच्चों को वजन और आयु , वजन और लम्बाई के अनुसार कुपोषण निर्धारित किया जाता  है ।
कैसे पहचाने कुपोषण 
थकान का रहना,मांसपेशियां मेंढीलापन ,चिड़चिड़ापन,बालों में सूखापन,चेहरे पर चमक की कमी होना, शरीर में सूजन, आंखों के चारों तरफ कालापन होना, हाथ पैरों का पतला होना, किसी भी काम करने में मन नालगना, शारीरिक विकास में कमी.नींद का ज़्यादा आना कुपोषण के लक्षण है।
कोविड महामारी से बचाने में किया जा रहा दिशा- निर्देशों का पालन 
कोविड महामारी के दौरान भी खुले हैं पोषण पुनर्वास केंद्र में संक्रमण को रोकने के लिए दिए निर्देश का पालन किया जा रहा है । कुपोषण से ग्रस्त बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण कोरोना महामारी के समय उन्हें देखभाल की अत्यंत आवश्यक है। साथ ही माताओं को कुपोषित बच्चों के खान-पान व साफ़-सफाई से सम्बंधित ज़रूरी संदेश भी दिए जा रहे है । उचित चिकित्सीय देखरेख को सुनिश्चित करने के निर्देश का पालन भी किया जा रहा हैं ।
एनएफएचएस- 4 के अनुसार
एनएफएचएस-4 (2015-16) के अनुसार रायपुर में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे जो कम वजन वाले हैं (वजन-आयु) शहरी क्षेत्र में 32.4 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 39.8 प्रतिशत है वहीं ज़िले में कुल 37.4प्रतिशत है ।
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1 सितम्बर से 30 सितम्बर तक मनाया जाएगा पोषण माह

1 सितम्बर से 30 सितम्बर तक मनाया जाएगा पोषण माह

02-Sep-2020

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर दी गई पोषण माह में प्रस्तावित कार्यक्रमों की जानकारी

रायपुर/छत्तीसगढ़ 

प्रत्येक वर्ष 1 सितम्बर से 30 सितम्बर के बीच राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाता है जिसका उद्देश्य जनसामान्य को पोषण के महत्व से परिचित करवाना एवं उनमें खानपान से सम्बंधित स्वास्थ्य व्यवहार को विकसित करना है। इस बार पोषण माह कोविड 19 अनुरूप व्यवहारों का पालन करते हुए डिजिटली जनआन्दोलन के रूप में मनाया जाएगा ।

इस बार पोषण माह में इन गतिविधियों पर रहेगा फोकस

1.     गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान, उनका सन्दर्भन एवं प्रबंधन

2.     डिजिटल पोषण पंचायत      

3.     गृह भ्रमण एवं ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस के माध्यम से समुदाय का संवेदीकरण

4.     एनेमिया, डायरिया एवं फिट इंडिया जैसे कार्यक्रमों का एकीकरण 

5.     पोषण पर आधारित डिजिटली प्रतियोगिताओं का आयोजन

6.     दूरदर्शन और आल इंडिया रेडियो पर पोषण संबंधी कार्यक्रमों का प्रसारण

बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को मिलेगा पुरस्कार और प्रोत्साहन
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक कुमार ने बताया, इस वर्ष पोषण माह में ऐसे जिलों को सरकार द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जाएगा जहाँ पर बच्चों में  गंभीर कुपोषण का एक भी मामला ना हो । साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि इस बार ऐसे ए.ए.ए.(आंगनबाड़ी, आशा, ए.एन.एम.) को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा जिन्होंने अपने लक्ष्यों के अनुसार कार्य किया होगा । इसके लिए अलग से दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे ।    

 

उन्होंने जानकारी दी कि कोरोना के दौरान भी महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से बच्चों एवं महिलाओं के पोषण का पूरा खयाल रखने की कोशिश की जा रही है जिसके अंतर्गत आंगनवाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत 3 से 6 वर्ष आयु के सामान्य व गंभीर कुपोषित बच्चों को गर्म पके हुए भोजन के स्थान पर आंगनबाड़ी द्वारा घर भ्रमण कर राशन का वितरण किया जा रहा है, ताकि कोरोना संक्रमण की संभावना ना रहे साथ ही गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण के साथ कोई समझौता भी न हो ।

 

बच्चे के जीवन में पोषण की शुरुआत तभी से हो जाती है जब वह गर्भ में होता है, इस सन्दर्भ में यदि छत्तीसगढ़ के एन.एफ.एच.एस- 4 के आंकड़ो को देखें तो यह पता चलता है कि 15 से 49 आयु वर्ग की 47% महिलायें एनेमिक (खून की कमी) हैं यानि कि लगभग आधी महिलाओं में खून की कमी है एवं सही खान-पान के आभाव में प्रदेश के लगभग 38% बच्चे कम वजन के रह जाते हैं| ऐसे में जो बच्चा पैदा होगा उसके कुपोषित होने की सम्भावना ज्यादा होती है|

उपरोक्त परिस्थितियों में सुधार के लिए सरकार द्वारा हर वर्ष पोषण माह मनाया जाता है | इसके साथ ही अन्य पोषण संबंधी कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं जिनका उद्देश्य मुख्य रूप से माँ एवं बच्चों की सेहत में सुधार लाना है | इन कार्यक्रमों में “समेकित बाल विकास कार्यक्रम”(ICDS), महतारी जतन योजना, मिड-डे-मील, पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC), मुख्यमंत्री सुपोषण योजना, प्रधान मंत्री मातृ वंदन योजना, प्रधान मंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान इत्यादि प्रमुख हैं|


"मिशन स्वराज" के मंच पर 'कोरोना काल में समाज और मीडिया की सकारात्मक ज़िम्मेदारी', विषय पर हुई सार्थक वर्चुअल चर्चा - प्रकाशपुन्ज पाण्डेय

01-Sep-2020

समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने मीडिया के माध्यम से बताया कि रविवार 30 अगस्त 2020 को दोपहर 2 बजे 'कोरोना काल में समाज और मीडिया की सकारात्मक ज़िम्मेदारी', इस विषय पर एक बौद्धिक वर्चुअल चर्चा का आयोजन हुआ। इस चर्चा में देश के विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों से वक्ताओं ने शिरकत की। इस चर्चा के आयोजन का जो प्रयोजन था वो यह था कि आज कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच समाज और मीडिया में जो कुछ भी प्रचारित व प्रसारित किया जाता है उससे कहीं न कहीं, जनता में भय व्याप्त हो गया है, भले ही वो ख़बरें सही होता हैं। लेकिन इसका दूसरा भी रूप है जिसमें कितने लोग इससे ठीक हो गए हैं और हो रहे हैं। इससे बचाव के लिए क्या क्या करना चाहिए, कैसे अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को उन्नत करना चाहिए, कैसे नियमित रूप से व्यायाम और योगासन करना चाहिए, अपने खाने में क्या-क्या शामिल करना चाहिए आदि। मीडिया को इन सभी मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए। आज अगर किसी को कोरोना पॉजिटिव हो जाता है तो इसका इलाज हो रहा है, लेकिन समाज में एक अवधारणा बन चुकी है कि उस व्यक्ति और यहां तक कि उसके परिवार को समाज दुर्भावना से देखने लगते हैं। क्या ये सही है? 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने बताया कि इसी विषय पर तमाम वक्ताओं ने अपने अपने पक्ष रखे। इस चर्चा में रायपुर से वरिष्ठ पत्रकार बाबूलाल शर्मा, दिल्ली से विश्व हिंदू परिषद के विनोद बंसल, रायपुर से ज्योतिष रत्न पं. प्रियशरण त्रिपाठी, अकोला, महाराष्ट्र से डॉ अहमद उरूज़, रायपुर से समाजसेवी व कांग्रेस नेता नितिन भंसाली, भाजपा नेता सोमेश चंद्र पांडेय और रायपुर से इस चर्चा और मिशन स्वराज के संचालक, राजनीतिक विश्लेषक व समाजसेवी प्रकाशपुंज पांडेय ने शामिल होकर अपना अपना पक्ष रखा। इस चर्चा के रिकॉर्डेड वीडियो को मिशन स्वराज के फेसबुक पेज पर सभी के लिए अपलोड कर दिया गया है। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने बताया कि मिशन स्वराज, बौद्धिक चर्चाओं का एक मंच है और प्रत्येक शनिवार व रविवार को समाजिक विषयों पर वर्चुअल चर्चा आयोजित की जाती है जिसमें देश भर से बुद्धिजीवियों को शामिल किया जाता है। इस चर्चा की शुरुआत 9 अगस्त 2020 को कई गई थी। ये न ही कोई राजनीतिक मंच है और न ही कोई मीडिया प्लेटफॉर्म, न ही इसका कोई आर्थिक लाभ का उद्देश्य है।

 

 


बेफिक्री सही नहीं, कोरोना से बचने को अभी भी स्वच्छता और सावधानी जरूरी

बेफिक्री सही नहीं, कोरोना से बचने को अभी भी स्वच्छता और सावधानी जरूरी

28-Aug-2020

अगर दो लोग बिना मास्क के हैं और शारीरिक दूरी का पालन नहीं कर रहे है तो उन्हें 90% संक्रमण होने की संभावना है। वहीं यदि एक व्यक्ति मास्क पहन रहा है और शारीरिक दूरी का पालन नहीं कर रहा है तो उसे 30% संक्रमण होने की संभावना है। यदि दोनों व्यक्ति मास्क पहनते हैं और शारीरिक दूरी का पालन करते हैं तो उनको संक्रमण होने की संभावना न के बराबर  है।

लेकिन जैसे जैसे समय बीत रहा है लोगों में कोरोना के प्रति बेफिक्री बढती जा रही है जो चिंताजनक है। कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में जब कोरोना के मामले आते थे तो लोग पूरी सावधानी बरत रहे थे किन्तु अब कुछ लोग  सावधानी बरतना तो दूर बेफिक्र होकर घूम रहे हैं और अपने काम में मशगूल हैं ।

उपरोक्त परिस्थिति चिंतनीय है, इसलिए अगर हमें कोरोना को हराना है तो पर्याप्त स्वच्छता और सावधानी बरतने के साथ साथ कोरोना अनुकूल व्यवहारों का पालन करना ही होगा इसके अतिरिक्त हमारे पास और कोई भी विकल्प नहीं है।

कैसे फैलता है कोरोना

रायपुर की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मीरा बघेल ने बताया किसी व्यक्ति को खांसी या जुकाम है तो उसके छींकने या खांसने के साथ सूक्ष्म चीज़ें भी बाहर आती हैं। अगर इनमें वायरस है तो सांस लेने के दौरान इन्हें ग्रहण कर इससे संक्रमित हो सकते हैं या किसी सतह अथवा वस्तु पर वायरस के कण मौजूद हैं तो संक्रमित वस्तु को छूने से भी संक्रमित हो सकते हैं । 

उन्होंने बताया कुछ सावधानियों का हमेशा पालन करें। ध्यान रखें आप और आसपास के लोग साफ-सफाई के प्रति जागरूरक रहें। खांसी या जुकाम की स्थिति में सभी कोहनी या टिशू पेपर का इस्तेमाल करें। इससे अगर कोई व्यक्ति संक्रमित है तो भी अन्य व्यक्तियों में कोरोना फैलने की संभावना कम होगी।

सलाह का पालन करें

राष्ट्रीय व स्थानीय स्तर पर लागू किए जा रहे चिकित्सीय नियमों का पालन करें। डॉक्टर के संपर्क में रहें और सलाह का पालन करते रहें।

साबुन से हाथ अवश्य धोएं

हाथ धोते समय साबुन का इस्तेमाल जरूर करें और कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोये क्योंकि ऐसा करने से अगर हाथ में वायरस है तो नष्ट हो जाएगा।

तनाव को भगाएं दूर

किसी भी बीमारी का तनाव जायज है लेकिन उससे निपटना जरूरी है। इसके लिए मन में डर पनपने न दे । किसी तरह की चिंताएं व मानसिक तनाव होने पर टोल फ्री नंबर 08046110007 पर मनोचिकित्सक से जरूर बात करें ।

दोस्तों व परिवार के संपर्क में रहें

अगर डर या तनाव की स्थिति में हैं तो विश्वसनीय लोगों से बात करें। परिवार और दोस्तों के संपर्क में रहें और सही सलाह का पालन करें।

 स्वस्थ जीवनशैली का पालन करें

अगर घर पर हैं तो एक हेल्दी लाइफस्टाइल का पालन करें। पर्याप्त नींद, खानपान और व्यायाम करें। फोन और ईमेल के जरिए लोगों के संपर्क में रहें।

एल्कोहल का सहारा न लें

तनाव से निपटने के लिए दवाओं, ध्रूमपान या एल्कोहल का सेवन न करें। ज्यादा तनाव की स्थिति में काउंसलर की मदद ले सकते हैं।

मास्क का करें इस्तेमाल
अगर किसी को खांसी या जुकाम है या किसी संक्रमित व्यक्ति की देखभाल कर रहे हों, ऐसी स्थिति में आप मास्क जरुर पहनें । कई लोग एक ही मास्क को कई-कई दिन तक लगातार पहने रहते  हैं। ऐसा कतई न करें, अगर धुलने योग्य मास्क है तो उसे एक बार प्रयोग के बाद अवश्य धो लें।

इन वचनों का पालन कर कोरोना संक्रमण की करें रोकथाम ।
सतर्कता कोरोना से बचाव का बेहतर उपाय है। इसके लिए विशेष सावधानी एवं सतर्कता जरुरी है जैसे- मास्क लगा ने व 2 गज की शारीरिक दूरी बनाए रखें, सार्वजनिक स्थल हो, किसी ऑफिस के कमरे में अन्य व्यक्तियों के साथ हों या फिर सर्दी, जुकाम हो तो बाहर निकलने से पहले मास्क जरूर लगाएं, छींकते या खांस ने समय रूमाल या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें, बहुत अधिक इस्तेमाल होने वाली सतहों दरवाजे के हैंडल, या ऐसी जगहों का नियमित सफाई जरूरी है, सार्वजनिक या खुले स्थानों पर नहीं थूकें, ऐसा करना दंडनीय अपराध है, बहुत जरूरी हो तभी यात्रा करें, कोवि़ड- 19 संक्रमित या उसके परिवार वालों से भेदभाव नहीं करें सहानुभूति से पेश आएं, अपने स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग करने के लिए आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल करें, कोविड-19 को लेकर होने वाली चिंताएं या मानसिक दबाव के लिए 08046110007 फ्री हेल्पलाइन नंबर पर बातकर मनोचिकित्सक से आवश्यक सलाह लें।


आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गृहभ्रमण कर गर्भवती व शिशुवती महिलाओं को कर रहीं जागरूक

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गृहभ्रमण कर गर्भवती व शिशुवती महिलाओं को कर रहीं जागरूक

27-Aug-2020

रायपुर  राजधानी में कोविड-19 से लोगों को बचाने के लिए फ्रंट लाइन वारियर्स के रुप में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लगातार सर्वे कार्य और हितग्राही मूलक योजना को क्रियांवित करने में जुटी हुई हैं। कोविड-19 से बचाव और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जरूरी  उपायों की जानकारी देते हुए रोज घरों में पहुंच कर  गर्भवती महिलाओं व शिशुवती माताओं को जागरुक कर रही है। गुढियारी सेक्टर के नया तालाब आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता श्रीमती अर्चना चक्रवती ने आज गृहभेंट के दौरान माताओं को नवजात शिशुओं की देखभाल कैसे करनी है के बारे में बताया ।

गृहभ्रमण में शिशुवती माता दुर्गावती पटेल के घर पहुंच कर उन्होंने 2 माह के बच्चे को स्तनपान कराने को लेकर एवं कंगारू मदर केयर के सम्बंध में जानकारी दी।  दुर्गावती ने बताया, सीजेरियन डिलवेरी होने के बाद अब 2 माह की बेबी को स्तनपान कराने में दिक्कतें आ रही है। मां का दूध पर्याप्त नहीं आने से बच्चे का पेट आधा ही भरता है। जबकि शिशुओं को 6 माह तक केवल स्तनपान की सलाह ही बतायी जाती है।

दुर्गावती ने शिशु को बाहरी दूध देना शुरु किया था लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अर्चना चक्रवर्ती द्वारा शिशुवती माता दुर्गावती पटेल को स्तनपान को लेकर होने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए पर्याप्त पानी और भोजन में पोषक तत्वों युक्त आहार लेने की सलाह दी । इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र में मिलने वाली रेडी-टू-ईट का नियमित सेवन भी करने को कहा ।

शिशुवती को मां के दूध बनने के लिए शरीर को जरुरत पड़ने वाले तत्वों व समय-समय पर आहार की प्रक्रिया व मां का सही रूप से बैठकर बच्चे को छाती से लगाकर दूध पिलाने की विधि बताई  गई। इससे 15 से 30 दिन में ही शिशुवती माता को पर्याप्त दूध आने लगा है साथ ही बच्चे को स्तनपान से वंचित होने से भी बचाया गया।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा महिलाओं को स्तनपान से जुड़ी सभी बातों के चित्र दिखाकर समझाया जाता है । अब दुर्गावती को बाहर का दूध खरीदकर शिशु को पिलाने की जरुर नहीं पड़ेगी। कई बार गृहभ्रमण कर समझाने के बाद  दुर्गावती  ने अपना खानपान सुधारा एवं अपने भोजन में जरूरी पोषक तत्वों को शामिल किया जिसके परिणामस्वरूप अब उसे पर्याप्त दूध बन रहा है और उसके बच्चे का पेट भी भर रहा है ।

गुढियारी सेक्टर पर्यवेक्षक रीता चौधरी ने बताया, गुढियारी सेक्टर के  आंगनबाड़ी केंद्रों में 316 शिशुवती  एवं 270 गर्भवती महिला  पंजीकृत है। उनका कहना है कि 6 माह के पश्चात बच्चे को पोषण आहार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त खाद्य पदार्थों को शामिल करने को लेकर विडियों की सहायता से जानकारी दी जा रही। बच्चे की बढती उम्र के साथ समग्र विकास के लिए सभी पोषक तत्वों का भोजन में समावेश होना नितांत ही महत्वपूर्ण है। शिशुवती माताओं को सही आहार व पोषक तत्वों की पूर्ति से बच्चों को छः माह तक केवल स्तनपान कराने के  लिए समझाया जा रहा है।


आधार केंद्र पर करा रहा शारीरिक दूरी का पालन

आधार केंद्र पर करा रहा शारीरिक दूरी का पालन

26-Aug-2020

लोगों का मिल रहा सहयोग
बिना मास्क है प्रवेश निषेध

रायपुर 

आधार केंद्र पर कोरोना वायरस से लाभार्थियों को बचाने के लियें केंद्र द्वारा शारीरिक दूरी का पालन और भीड़ नियंत्रित करने के लिये टोकन के द्वारा प्रवेश दिया जा रहा है । केंद्र पर पहुचने पर सुरक्षा साथी लाभार्थियों का टेंपरेचर लेकर और हाथों को सैनिटाइजर से सेनीटाइज करवाते हैं उसके बाद ही केंद्र के अंदर प्रवेश दिया जा रहा है। क्षमता से अधिक लोग होने पर लोगों को बाहर ही रोक कर रखा जाता है और दूरी बनाए रखने को कहा जाता है ।

श्याम प्लाजा स्थित आधार केंद्र के ऑपरेशन मैनेजर मोहम्मद अमीन अंसारी कहते हैं कोविड- 19 के दौर में आधार केंद्र को अब अनलॉक कर दिया गया है नियमित रूप से लोगों का आना हो रहा है । प्रतिदिन 150 से 175 लोग आधार कार्ड के लिए आते हैं । उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा साथी के द्वारा ताप मशीन के माध्यम से उनका ताप लिया जाता है ।

सुरक्षा साथी उनके हाथों को सैनिटाइज करवाता है साथ ही जो साथी मास्क के बगैर आते हैं उन्हें मास्क पहनकर आने की निवेदन किया जाता है । अंदर जाने से पूर्व उन्हें शारीरिक दूरी बनाए रखने का कहा जाता है जैसे ही लाभार्थी परिसर में प्रवेश करता है उसकी आवश्यकतानुसार फॉर्म प्रदान किया जाता है । फॉर्म भर कर शारीरिक दूरी का पालन करते हुए वह अपना टोकन नंबर लेता है । टोकन नंबर के उपरांत उसके कार्य के अनुरूप जो पेमेंट लिया जाना है उसके बारे में जानकारी देकर उसे पेमेंट काउंटर पर भेज दिया जाता है एवं वहाँ पर भी शारीरिक दूरी बनाए रखने एवं मास्क लगाए रहने की हिदायत दी जाती है ।

आधार कार्ड के लिए जो प्रक्रिया की जाती है उस समय भी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है जैसे फिंगरप्रिंट लेते समय मशीन को सैनिटाइज किया जाता है साथ ही हाथों को सैनिटाइज करके ही मशीन पर फिंगरप्रिंट लिया जाता है। इसी प्रकार रेटीना मार्किंग की मशीन का भी इस्तेमाल किया जाता है ।

मोहम्मद अंसारी कहते हैं कि परिसर में बैठने के लिए भी गाइडलाइन के अनुसार व्यवस्था की गई है साथ ही उन्होंने कहा कि मैं उन माताओं से भी अपील करना चाहता हूं जो  आधार केंद्र पर अपने काम से आ रही है तो छोटे बच्चों को साथ में ना लाएं इसके अलावा जो भी अपने आधार कार्ड के लिए आता है वह मास्क लगाकर आए, सरकार द्वारा समय-समय पर जारी की गई गाइडलाइन है का पालन करें ।

क्या कहते है लाभार्थी

आधार कार्ड में मोबाइल नंबर की त्रुटि सुधार के लिए आई सोनम दुबे बताती हैं कि मात्र आधे घंटे में मेरा काम हो गया टोकन मिलने के बाद मेरा दसवां नंबर था मैं अपने स्थान पर बैठी रही टोकन नंबर की आवाज दी मैं वहां गई और 5 से 10 मिनट में मेरी सारी प्रक्रिया पूरी हो गई ।

निवेदन कर करवा रहे है शारीरिक दूरी का पालन

बाहर एवं परिसर में एक जगह एकत्रित हो रहे लोगों को शारीरिक दूरी का पालन के लिये निवेदन किया जाता है। लोग को भी इसके प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना हैं। वहां ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा साथी की बात को सुनने को लोग तैयार नहीं होते हैं तो उनको हाथ जोड़कर निवेदन भी किया जाता है और सहयोग के लियें निवेदन भी किया जाता है ।

क्या कहते हैं केंद्र के कर्मचारी

आधार केंद्र में त्रुटि सुधार के लिए नियुक्त मनीषा साहू कहती है कोरोना वायरस काल में लोगों को बर्दाश्त करने की क्षमता अपने अंदर विकसित करनी होगी । क्योंकि कोई भी प्रक्रिया एक निश्चित समय में पूर्ण होती है । हम लोग भी जब एक साथी को बुलाकर उसकी आधार की प्रक्रिया करते हैं तो उस प्रक्रिया में एक समय लगता है जब तक वह प्रक्रिया पूर्ण नहीं होगी तो हम दूसरे साथी को नहीं बुला सकते । लोग अपने टोकन का इंतजार नहीं करते हैं और बार-बार आकर पूछते रहते हैं । मेरा उन सभी  लोगों से निवेदन है कि वह कहीं भी जाएँ  तो अपने समय का इंतजार करें ।

सुरक्षा साथी अमन सिंह कहते हैं कि लोग आते हैं तो उनको लगता है कहीं मेरा काम आज नहीं हुआ तो क्या होगा जबकि सबका काम यहां हो ही जाता है । लोग अपनी बारी का इंतजार नहीं करते हैं उनको लगता है कहीं मेरा काम नहीं हुआ तो क्या होगा हम भी उनको पूरा आश्वासन देते हैं कि आपका काम आज ही पूरा हो जाएगा आप इंतजार करें हड़बड़ी ना करें भीड़ लगाने से बचें सुरक्षित रहें ।

इन वचनों का करें पालन

वचनों का पालन कर कोरोना संक्रमण की करें रोकथाम- सतर्कता कोरोना से बचाव का बेहतर उपाय है। इसके लिए विशेष सावधानी एवं सतर्कता जरुरी है जैसे- मास्क लगाने व 2 गज की शारीरिक दूरी बनाए रखें, सार्वजनिक स्थल हो, किसी ऑफिस के कमरे में अन्य व्यक्तियों के साथ हों या फिर सर्दी, जुकाम हो तो बाहर निकलने से पहले मास्क जरूर लगाएं, छींकते या खांसने समय रूमाल या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें, बहुत अधिक इस्तेमाल होने वाली सतहों दरवाजे के हैंडल, या ऐसी जगहों का नियमित सफाई जरूरी है, सार्वजनिक या खुले स्थानों पर नहीं थूकें, ऐसा करना दंडनीय अपराध है, बहुत जरूरी हो तभी यात्रा करें, कोवि़ड- 19 संक्रमित या उसके परिवार वालों से भेदभाव नहीं करें सहानुभूति से पेश आएं, अपने स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग करने के लिए आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल करें, कोविड-19 को लेकर होने वाली चिंताएं या मानसिक दबाव के लिए 08046110007 फ्री हेल्पलाइन नंबर पर बात कर मनोचिकित्सक से सलाह आवश्यक लें।

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गंभीर श्वसन रोग से पीड़ित बच्चों के लिए मास्क इस्तेमाल जरुरी

गंभीर श्वसन रोग से पीड़ित बच्चों के लिए मास्क इस्तेमाल जरुरी

25-Aug-2020

गंभीर श्वसन रोग से पीड़ित बच्चों के लिए मास्क का इस्तेमाल है जरूरी

•         बच्चों में मास्क के इस्तेमाल पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दिया गाइडलाइन

•         मास्क लगाने में परेशानी है तो बच्चों के लिए है फेस शील्ड का विकल्प 

•         बच्चों को पैरेंट्स व स्कूल प्रबंधन मास्क इस्तेमाल के प्रति करें जागरूक

रायपुर/ छत्तीसगढ़ , 25 अगस्त: वैश्विक महामारी कोविड 19 का असर बच्चों पर भी पड़ा है. कोरोना काल में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए उनके पोषण का ध्यान रखने के अलावा सुरक्षात्मक नियमों की जानकारी देना व उसका पालन करवाना आवश्यक है. कोरोना संक्रमण के जोखिम की रोकथाम के लिए बच्चों में मास्क के इस्तेमाल को बढ़ावा दिये जाने की जरूरत पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी बल दिया है. साथ ही शारीरिक दूरी के नियम का पालन, हाथों की स्वच्छता और घरों के अंदर के हिस्सों का हवादार होना भी जरूरी बताया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन(डबल्यूएचओ) ने एडवाइस ऑन द यूज ऑफ मास्क फॉर चिल्ड्रेन इन द कम्यूनिटी इन द कंटेक्सट ऑफ कोविड 19 नाम से जारी गाइडलाइंस में उम्र के अनुसार बच्चों में नॉन मेडिकल मास्क यानी कपड़ों से बनाये गये मास्क के इस्तेमाल को लेकर विशेष चर्चा की है.

मास्क के इस्तेमाल के बारे में दे जरूरी जानकारी:

डबल्यूएचओ के मुताबिक 6 से 11 साल के उम्र के बच्चों को उन जगहों पर मास्क जरूर लगाने के लिए कहें जहां पर अधिक लोग मौजूद हैं और संक्रमण का खतरा हो सकता है. डबल्यूएचओ ने सलाह दी है कि बच्चों को मास्क के बारे में जानकारी और उसके पहनने के तरीके को विस्तार से बताया जाना चाहिए. जब बच्चे मास्क लगायें तो ध्यानपूर्वक देख लें कि उन्होंने सही से मास्क लगाया है या नहीं.  वहीं डबल्यूएचओ ने 5 साल या इससे कम उम्र के बच्चों के लिए मास्क अनिवार्य नहीं बताया है. तथा बच्चों के खेलते समय व शारीरिक गतिविधियों के दौरान मास्क लगाने को जरूरी नहीं कहा है. 

माता पिता व स्कूल प्रबंधन बच्चों को करें जागरूक:

डबल्यूएचओ ने माता पिता सहित स्कूल प्रबंधन, स्वास्थ्य संबंधी नीतिगत फैसले लेने वाली एंजेंसियां व स्वास्थ्य विभाग द्वारा संक्रमण के बारे में पर्याप्त जानकारी देने और मास्क का इस्तेमाल करवाने की बात भी कही है. संगठन के अनुसार छोटी उम्र के बच्चों की तुलना में बड़ी उम्र के बच्चों के संक्रमण से प्रभावित होने और उनके द्वारा संक्रमण फैलाने में उनकी सक्रिया भूमिका देखी गयी है. उनके साझा अध्ययन के मुताबिक 1 से 7 प्रतिशत बच्चों में कोविड 19 मामले होने की सूचना है लेकिन अन्य आयु समूह की अपेक्षाकृत उनकी मौत बहुत कम है.

गंभीर श्वसन रोग से पीड़ित बच्चों के लिए मास्क जरूरी:

डबल्यूएचओ के अनुसार गंभीर श्वसन रोग से पीड़ित बच्चों को हर हालात में मास्क पहनाना आवश्यक है. पांच साल या उससे कम उम्र के बच्चों को शारीरिक दूरी रखने, बार बार हाथ धोने व व्यक्तिगत साफ सफाई की जानकारी देनी चाहिए. उन्हें यह भी बताना है कि कब और किन जगहों पर उन्हें मास्क लगाना जरूरी है. यदि बच्चे मास्क सहन नहीं कर पाते हैं उनके लिए फेस शील्ड दूसरा विकल्प है. साथ ही उन्हें बीमार लोगों के संपर्क में आने नहीं दिया जाना चाहिए.