सांसद हिटलर की पोशाक में, पीएम मोदी को दी हिटलर के समान अंत की चेतावनी !

सांसद हिटलर की पोशाक में, पीएम मोदी को दी हिटलर के समान अंत की चेतावनी !

10-Aug-2018

नई दिल्ली : आंध्र प्रदेश के दक्षिणी राज्य में भारत की तेलगू देशम पार्टी द्वारा विरोध प्रदर्शन गुरुवार को विचित्र हो गया, जिसमें पार्टी के एक सांसद नाजी जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर के रूप में पोशाक पहने संसद में आए । कानून निर्माता नर्मल्ली शिवप्रसाद, जो अपनी विलक्षण फैशन शैली के लिए मीडिया और राजनीतिक सर्कल में लोकप्रिय हैं, उनकी तस्वीरों और वीडियो ने समाचार मंचों और सोशल मीडिया में छा गया है।

अभिनेता से बने राजनेता नर्मल्ली शिवप्रसाद, जो अक्सर कुछ मुद्दों के अस्वीकृति को व्यक्त करने के लिए विभिन्न पात्रों के रूप में तैयार होते हैं, ने नाजी प्रतीक के साथ भूरे रंग की शर्ट के साथ हिटलर की तरह जुड़े मूंछ के साथ विरोध करना शुरू कर दिया। उन्होंने नाज़ी सलामी के साथ कैमरों की तरफ भी देखा।

सांसद शिवप्रसाद ने सदन में प्रवेश करने से पहले मीडिया को बताया, “मैंने जर्मन सेना में एक सैनिक के रूप में काम शुरू किया और बहुत सम्मान अर्जित किया लेकिन मैं सत्ता में लालची था और नतीजतन, द्वितीय विश्व युद्ध के लिए जिम्मेदार बन गया जिसके परिणामस्वरूप कई करोड़ लोगों की मौत हो गई और मैंने खुद को भी मार डाला।”

शिवप्रसाद ने कहा, “मोदी (प्रधान मंत्री) को मेरा सुझाव है कि वो इस तरह लालची और दमनकारी न करें वरना उनका हश्र भी हीटर कि तरह होगा। उन्होंने आंध्र प्रदेश और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को धोखा दिया है। अगर वह पश्चाताप नहीं करता है, तो वह अपना पतन हिटलर कि तरह ही देख पाएंगे।” आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे की मांग करने के लिए तेलगू देशम पार्टी सत्तारूढ़ गठबंधन को छोड़ने के बाद से पार्टी गुस्से में है। 2013 में आंध्र प्रदेश को विभाजित किया गया था और एक नया राज्य तेलंगाना का गठन किया गया था। तब से, आंध्र प्रदेश इस प्रक्रिया में किए गए संसाधनों और आय के संदर्भ में हानि के लिए मुआवजे के रूप में विशेष पैकेज की मांग कर रहा है।

साभार  : hindi.siasat.com


एक बार फिर बढ़ेगी तलवार दम्पति की मुश्किलें, SC में CBI द्वारा दायर याचिका स्वीकार

एक बार फिर बढ़ेगी तलवार दम्पति की मुश्किलें, SC में CBI द्वारा दायर याचिका स्वीकार

10-Aug-2018

नई दिल्ली। देश के बहुचर्चित आरुषि तलवार हत्या मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की ओर से दायर अपील को स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार करने के बाद एक बार फिर से राजेश तलवार और नुपुर तलवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बता दें कि, तलवार दंपती के घरेलू नौकर हेमराज की पत्नी खुमकला और जांच एजेंसी सीबीआइ ने हाईकोर्ट द्वारा पिछले साल तलवार दंपती को संदेह का लाभ देते हुए रिहा करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।   

सुप्रीम कोर्ट ने  शुक्रवार को तीनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। बता दें कि, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में सबूतों को लेकर सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट द्वारा तलवार दंपती को बरी किए जाने के बाद नेपाल में रह रही हेमराज की पत्नी खुमकला बंजाडे ने जनवरी 2018 में इस मामले की फिर से जांच करने के लिए याचिका दायर की थी। खुमकला की याचिका के बाद सीबीआइ ने भी मार्च 2018 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। जिसे सर्वोच्च अदालत ने आज स्वीकार कर लिया है। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2017 को आरुषि तलवार और नेपाली मूल के नौकर हेमराज की हत्या के आरोप में गाजियाबाद की डासना जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे डॉ. राजेश तलवार और उनकी पत्नी डॉ. नूपुर तलवार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। 


ABP न्यूज़ से इस्तीफा देने के बाद पुण्य प्रसून बाजपेयी का भावुक ट्वीट हुआ वायरल

ABP न्यूज़ से इस्तीफा देने के बाद पुण्य प्रसून बाजपेयी का भावुक ट्वीट हुआ वायरल

09-Aug-2018

नई दिल्ली 

देश के प्रमुख हिंदी समाचार चैनल ABP न्यूज में पिछले दिनों भारी उथल पुथल देखने को मिला। मोदी सरकार के आलोचक के रूप में चैनल में कार्यरत प्रमुख नामों को या तो इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया गया या उन्हें रिपोर्ट ना करने के लिए निर्देश दे दिया गया। मोदी सरकार के कार्यों को लेकर सवाल पूछने वाले चैनल में कार्यरत कई पत्रकारों को तो जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है।

ABP न्यूज़ में 1-2 अगस्त को जो कुछ हुआ, वह काफी भयानक था। 24 घंटे के अंदर चैनल के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर और वरिष्ठ पत्रकार व एंकर पुण्य प्रसून बाजपेयी ने ABP न्यूज से इस्तीफा दे दिया। प्रसून के अलावा अभिसार शर्मा को भी लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। बता दें कि बाजपेयी का ‘मास्टर स्ट्रोक’ शो हर रोज सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे आता था।

माना जा रहा है कि मिलिंद खांडेकर और पुण्य प्रसून बाजपेयी की विदाई ‘मास्टरस्ट्रोक’ के कारण ही हुई है। देश के वरिष्ठ पत्रकारों में से एक बाजपेयी अपने शो ‘मास्टर स्ट्रोक’ से मोदी सरकार की ना​कामियों और जनता से किए कथित झूठे वादों का सच उजागर कर रहे थे। जिसके चलते अब उन्हे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ गया है। बाजपेयी के इस्तीफे के बाद अब ‘मास्टर स्ट्रोक’ शो को भी चैनल ने बंद कर दिया है।

ABP न्यूज चैनल से मिलिंद खांडेकर और पुण्य प्रसून बाजपेयी को कथित तौर पर हटाने का मुद्दा लोकसभा में भी उठा था। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने की वजह से चैनल पर दबाव डालकर संपादक और एंकर को हटाया गया। वहीं, लेकिन सूचना प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कांग्रेस के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उस चैनल की टीआरपी गिर रही थी।

सोशल मीडिया से लेकर संसद तक जारी घमासान के बीच चैनल से इस्तीफे के बाद पुण्य प्रसून बाजपेयी ने एक भावुक ट्वीट किया है, जो वायरल हो गया है। प्रसून ने चैनल छोड़ने के बाद अपने पहले ट्वीट में लिखा है, “मॉं कहती है…हवा का रुख़ देख कर चलना चाहिए…पिता जी कहते थे..ज़िन्दा मछलियाँ हमेशा धारा के विपरीत चलती है… -अब/तब?”

सोशल मीडिया पर पुण्य प्रसून बाजपेयी का यह ट्वीट वायरल हो गया है। खबर लिखे जाने तक बाजपेयी का यह ट्वीट 3200 से अधिक बार रीट्वीट किया जा चुका है, जबकि करीब 13000 हजार लोगों ने लाइक किया है। वहीं एक हजार से अधिक लोगों ने इस ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

साभार : jantakareporter.com


बच्चे के रोने पर भारतीय दंपत्ति को फ्लाइट से नीचे उतारा

बच्चे के रोने पर भारतीय दंपत्ति को फ्लाइट से नीचे उतारा

09-Aug-2018

नई दिल्ली। एक भारतीय दपंत्ति ने यूरोप की बड़ी एयरलाइन कंपनी पर नस्लभेदी टिप्पणियां करने और उन्हें फ्लाइट से उतारने का आरोप लगाया है। भारतीय दंपत्ति का कहना है कि उनके 3 साल के बेटे के रोने के कारण क्रू ने उन्हें फ्लाइट से उतार दिया और उनपर नस्लभेदी टिप्पणियां भी कीं। दंपत्ति ने ब्रिटिश एयरवेज पर कार्रवाई की मांग करते हुए विमानन मंत्री सुरेश प्रभु को चिट्ठी लिखी है। 

भारतीय दंपत्ति ने यूरोप की प्रतिष्ठित ब्रिटिश एयरवेज के क्रू पर आरोप लगाया है कि उन्होंने बच्चे के रोने के कारण उन्हें फ्लाइट से उतार दिया। दंपत्ति ने बताया कि बच्चे की मां उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थी, तभी क्रू के एक सदस्य ने बच्चे को जोर से चुप होने के लिए कहा। इससे बच्चा डर गया और जोर-जोर से रोने लगा। इसके बाद फ्लाइट को वापस टर्मिनल के पास ले जाया गया जहां दंपत्ति समेत कुछ और भारतीय परिवारों को उतार दिया गया। 

ये घटना 23 जुलाई को ब्रिटिश एयरवेज लंदन-बर्लिन फ्लाइट BA 8495 में इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज 1984 बैच के एक अधिकारी के साथ घटी। सड़क परिवहन मंत्रालय में कार्ररत इस अधिकारी और उसके परिवार समेत कुछ भारतीय परिवारों को इस फ्लाइट से लंदन एयरपोर्ट पर बोर्डिंग के बाद उतार दिया गया। अधिकारी ने विमानन मंत्री सुरेश प्रभु को चिट्ठी लिखकर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने एयरलाइंस पर अपमान और नस्लीय व्यवहार का आरोप लगाया है। 

अपनी चिट्ठी में अधिकारी ने लिखा, 'सिक्योरिटी अनाउंसमेंट के बाद मेरी पत्नी तीन साल के बेटे की सीट बेल्ट बांधने लग गई। मेरे बेटे को अजीब लगा और वो रोने लग गया। मेरी पत्नी ने उसे अपनी गोद में लेकर चुप कराने की कोशिश की कि तभी क्रू के एक पुरुष सदस्य ने आकर हमपर चिल्लान शुरू कर दिया। वो मेरे बेटे पर भी चिल्लाया और उसे अपनी सीट पर जाने के लिए कहा। मेरा बेटा इससे और डर गया और जोर-जोर से रोने लगा। पीछे बैठे एक और भारतीय परिवार ने उसे बिस्किट देकर शांत करने की कोशिश की।' अधिकारी ने आगे लिखा की बेटे के रोने के बावजूद उनकी पत्नी ने उसे सीट पर बैठा दिया।

इसके बाद फ्लाइट वापस रनवे की तरफ जाने लगी। 'क्रू का वो सदस्य फिर से आया और आकर मेरे बेटे पर चिल्लाने लगा। उसने कहा कि तुम चुप हो जाओ नहीं तो तुम्हें खिड़की से बाहर फेंक दिया जाएगा और परिवार को विमान से नीचे उतार दिया जाएगा। हम काफी डर गए थे।' इसके बाद विमान को वापस टर्मिनल के पास लाया गया और परिवार को नीचे उतार दिया गया। एक सिक्योरिटी गार्ड ने अधिकारी के परिवार और उनके पीछे बैठे भारतीय परिवार से उनके बोर्डिंग पास वापस लिए और उन्हें नीचे उतार दिया। इसके बाद परिवार को एयरपोर्ट से लंदन का जाने का इंतजाम भी खुद करना पड़ा।

अधिकारी ने सुरेश प्रभु को लिखा कि क्रू के सदस्य ने भारतीयों के खिलाफ नस्लभेदी टिप्पणिायां की हैं इसलिए वो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं। वहीं दूसरी तरफ एयरलाइंस के प्रवक्ता ने कहा कि वो इन आरोपों को गंभीरता से लेते हैं और किसी भी तरह का भेदभाव नहीं सहा जाएगा। ब्रिटिश एयरवेज का कहना है कि उन्होंने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और सीधा कस्टमर से संपर्क कर रहे हैं।

साभार : hindi.oneindia.com


शेल्टर होम रेप केस के आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने कहा, कांग्रेस से लड़ना चाहता था चुनाव, इसलिए फंसाया गया !

शेल्टर होम रेप केस के आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने कहा, कांग्रेस से लड़ना चाहता था चुनाव, इसलिए फंसाया गया !

08-Aug-2018

एजेंसियों से 

नई दिल्ली: बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने सनसनीखेज बयान दिया है. एनजीओ से जुड़ी मधु के बारे में ब्रजेश ठाकुर ने कहा कि कहा कि मधु के साथ कभी भी मेरे किसी भी तरह के रिश्ते नहीं रहे. उन्होंने कहा कि यह कुछ अखबारों का फैलाया हुआ प्रोपेगेंडा है जो मेरे न्यूज पेपर को बंद करना चाहते हैं. मेरे अखबार की खबरों की वजह से कुछ लोगों का व्यापार और हित प्रभावित हुआ है इसलिए वे मुझे फंसाने की साजिश रच रहे हैं.

ब्रजेश ठाकुर ने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी जॉइन करने की सोच रहा था. मेरा मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़ना लगभग फाइनल हो गया था. मुझे फंसाने की साजिश इस वजह से भी हो रही है. किसी भी लड़की ने मेरा नाम नहीं लिया है. गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में बच्चियों के कथित यौन शोषण को लेकर भाजपा और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला था और कहा था कि यदि नीतीश को शर्म आ रही है तो वह दोषियों पर तुरन्त कार्रवाई करें.


शेल्टर होम रेप केस के आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने कहा, कांग्रेस से लड़ना चाहता था चुनाव, इसलिए फंसाया गया !

शेल्टर होम रेप केस के आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने कहा, कांग्रेस से लड़ना चाहता था चुनाव, इसलिए फंसाया गया !

08-Aug-2018

एजेंसियों से 

नई दिल्ली: बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने सनसनीखेज बयान दिया है. एनजीओ से जुड़ी मधु के बारे में ब्रजेश ठाकुर ने कहा कि कहा कि मधु के साथ कभी भी मेरे किसी भी तरह के रिश्ते नहीं रहे. उन्होंने कहा कि यह कुछ अखबारों का फैलाया हुआ प्रोपेगेंडा है जो मेरे न्यूज पेपर को बंद करना चाहते हैं. मेरे अखबार की खबरों की वजह से कुछ लोगों का व्यापार और हित प्रभावित हुआ है इसलिए वे मुझे फंसाने की साजिश रच रहे हैं.

ब्रजेश ठाकुर ने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी जॉइन करने की सोच रहा था. मेरा मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़ना लगभग फाइनल हो गया था. मुझे फंसाने की साजिश इस वजह से भी हो रही है. किसी भी लड़की ने मेरा नाम नहीं लिया है. गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में बच्चियों के कथित यौन शोषण को लेकर भाजपा और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला था और कहा था कि यदि नीतीश को शर्म आ रही है तो वह दोषियों पर तुरन्त कार्रवाई करें.


शेल्टर होम रेप केस के आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने कहा, कांग्रेस से लड़ना चाहता था चुनाव, इसलिए फंसाया गया !

शेल्टर होम रेप केस के आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने कहा, कांग्रेस से लड़ना चाहता था चुनाव, इसलिए फंसाया गया !

08-Aug-2018

एजेंसियों से 

नई दिल्ली: बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने सनसनीखेज बयान दिया है. एनजीओ से जुड़ी मधु के बारे में ब्रजेश ठाकुर ने कहा कि कहा कि मधु के साथ कभी भी मेरे किसी भी तरह के रिश्ते नहीं रहे. उन्होंने कहा कि यह कुछ अखबारों का फैलाया हुआ प्रोपेगेंडा है जो मेरे न्यूज पेपर को बंद करना चाहते हैं. मेरे अखबार की खबरों की वजह से कुछ लोगों का व्यापार और हित प्रभावित हुआ है इसलिए वे मुझे फंसाने की साजिश रच रहे हैं.

ब्रजेश ठाकुर ने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी जॉइन करने की सोच रहा था. मेरा मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़ना लगभग फाइनल हो गया था. मुझे फंसाने की साजिश इस वजह से भी हो रही है. किसी भी लड़की ने मेरा नाम नहीं लिया है. गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में बच्चियों के कथित यौन शोषण को लेकर भाजपा और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला था और कहा था कि यदि नीतीश को शर्म आ रही है तो वह दोषियों पर तुरन्त कार्रवाई करें.


दोस्त और बीवी की अजीब कहानी, सियासत के पेंच में फंस गया रिश्ता!

दोस्त और बीवी की अजीब कहानी, सियासत के पेंच में फंस गया रिश्ता!

07-Aug-2018

एक शख्स की जो पिछले के साल से अपनी बीवी को घर वापिस लाने के लिए पुलिस से गुहार लगा रहा है। मामला उत्तराखंड के उधमसिंह नगर का है। हाथ में बीवी की तस्वीर लिए नसीम नाम का ये शख्स पिछले एक साल से थाने का चक्कर काट रहा है।
इसकी पत्नी खोई नहीं है, ना ही किसी ने किनडैप किया है। नसीम की मानें तो इसके दोस्त ने इसकी बीवी को उधार लिया था। जी हां उधार लेकिन अब वो उसे लौटा नहीं रहा है। बीवी उधार ली है ये सुनकर आपको हैरानी जरूर हो रही होगी लेकिन नसीम के मुताबिक ये सोलह आने सच है।
इस शख्स ने अपने दोस्त को अपनी बीवी उधार क्यों दी उसके पीछे की कहानी भी जान लीजिए। नसीम के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के भोजपुर में रहने वाला इसका दोस्त शफी अहमद चेयरमैन का चुनाव लड़ना चाहता था लेकिन भोजपुर सीट पिछड़े वर्ग में आरक्षित हो गई इसीलिए उसने पिछड़ी जाति के दोस्त नसीम अहमद से उसकी बीबी रेहमत जहां को उधार मांग कर उसे चुनाव में खड़ा कर दिया।
किस्मत देखिए रहमत जहां चुनाव जीतकर चेयरमैन बन गई। डील के मुताबिक चुनाव के बाद उसे इसकी बीवी वापस करनी थी लेकिन अब एक साल हो गए लेकिन अब तक उसके दोस्त ने नसीम की बीवी को वापस नहीं किया है।
नसीम ने पहले पुलिस से शिकायत की और जब पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो कोर्ट से गुहार लगाई। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने छानबीन की तो पता चला नसीम से रेहमत जहां का तलाक हो चुका है जिसके बाद रेहमत जहां ने शफी अहमद से शादी कर ली लेकिन नसीम अब भी आस लगाए बैठा है कि उसकी बीवी एक दिन वापस आ जाएगी। 

siasat .com 


आरक्षण के ”जिन्न“ को बोतल से बाहर न निकालें

आरक्षण के ”जिन्न“ को बोतल से बाहर न निकालें

07-Aug-2018

लेख : ललित गर्ग 

महाराष्ट्र में आरक्षण की मांग को लेकर मराठा आंदोलन की आग जैसे-जैसे तेज होती जा रही है, एक गंभीर संकट की स्थिति बनती जा रही है। मराठा आरक्षण आंदोलन की मांग को लेकर खुदकुशी एवं आत्मदाह करने की संख्या तो बढ़ ही रही है, मराठा समुदाय के लोग मुंबई में जेल भरो आंदोलन कर रहे हैं, सार्वजनिक सम्पत्ति को व्यापक नुकसान पहुंचा रहे हैं। मराठा आरक्षण की आग से समूचा महाराष्ट्र सुलग उठा है। प्रांत के कई हिस्सों में हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी, सड़क जाम, पुलिस पर हमले, बंद की ताजा घटनाएं ने चिन्ताजनक स्थितियां खड़ी कर रही है। समूचा राष्ट्र आहत है।

गौरतलब है कि सरकारी नौकरियों तथा शिक्षण संस्थाओं में 16 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर चालू आंदोलन के ताजा दौर में पिछले एक सप्ताह में प्रांत में व्यापक तनाव, असुरक्षा एवं हिंसा का माहौल बना हैं। राज्य में करीब 30 फीसदी आबादी वाला मराठा समुदाय राज्य की राजनीति में खासा दबदबा रखता है। समुदाय के लोगों ने आरक्षण समेत कई अन्य मांगों के समर्थन में पहले भी मूक मोर्चा निकाला था। लेकिन अब यह आंदोलन हिंसक एवं आक्रामक होता जा रहा है, जो मराठा संस्कृति एवं मूल्यों के विपरीत है।

आरक्षण की नीति सामाजिक उत्पीड़ित व आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों की सहायता करने के तरीकों में एक है, ताकि वे लोग बाकी जनसंख्या के बराबर आ सकें। एक समतामूलक समाज बन सके। पर जाति के आधार पर आरक्षण का निर्णय कभी भी गले नहीं उतरा और आज भी नहीं उतर रहा है। जातिवाद सैकड़ों वर्षों से है, पर इसे संवैधानिक अधिकार का रूप देना उचित नहीं माना गया है। हालांकि राजनैतिक दल अपने ”वोट स्वार्थ“ के कारण इसे नकारते नहीं, पर स्वीकार भी नहीं कर पा रहे हैं। और कुछ नारे, जो अर्थ नहीं रखते सभी पार्टियां लगा रही हैं। जो वोट की राजनीति से जुड़े हुए हैं, वे आरक्षण की नीति में बंटे हुए हैं।

1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री विश्वनाथ प्रतापसिंह ने मण्डल आयोग की सिफारिशों को बिना आम सहमति के लागू करने की घोषणा कर पिछड़े वर्ग को जाति के आधार पर सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण देकर जिस ”जिन्न“ को बोतल से बाहर किया था, उसने पूरे राष्ट्रीय जीवन को प्रभावित किया था। देश में उस समय मंडल-कमंडल की सियासत शुरू हुई। वी.पी. सिंह सरकार के निर्णय के खिलाफ आंदोलन भड़क उठा। युवा सड़कों पर आकर आत्मदाह करने लगे थे। शीर्ष अदालत ने फैसला दिया था कि आरक्षण किसी भी स्थिति में 50 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। आज देश के हालात ऐसे हैं कि हर कोई आरक्षण मांग रहा है। समृद्ध और शिक्षित मानी जाने वाली जातियां भी आरक्षण मांग रही हैं। गुजरात में पटेल, हरियाणा में जाट आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन करने लगे।

अब महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन चल रहा है। आरक्षण की मांग को लेकर युवा आत्महत्याएं कर रहे हैं। हर कोई आरक्षण के प्याले के रस को पीकर संतुष्ट हो जाना चाहता है। हर समुदाय को लगता है कि सरकारी नौकरी पाकर उनका जीवन स्तर सुधर जाएगा। लेकिन प्रश्न है कि नौकरियां है कहां?

भारतीय लोकतंत्र का यह कड़वा सच है कि जाति के आधार पर आरक्षण का लाभ लेने वाले लगातार फायदा उठाते गए जबकि सवर्ण जातियों के लोग प्रतिभा सम्पन्न होने पर भी किसी तरह के लाभ से वंचित रहे। लोकसभा में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया लेकिन यह कह पाना मुश्किल है कि यह आरक्षण संबंधी समस्याओं का समाधान करने में कितना सक्षम हो पाया। उग्र तरीके से आंदोलन कर रहा मराठा समूह पात्रता की श्रेणी में नहीं आता। ऐसी ही स्थिति अन्य जातियों की भी है। संसद में आरक्षण की सीमा बढ़ाने की मांग की गई। आरक्षण संबंधी मांगों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। यदि एक जाति को आरक्षण दिया जाता है तो अन्य जातीय समूहों के उठ खड़े होने का खतरा पैदा हो जाता है। इसका विरोध आज नेता नहीं, जनता कर रही है। वह नेतृत्व की नींद और जनता का जागरण है। यह कहा जा रहा है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान विधान में नहीं है। पर संविधान का जो प्रावधान राष्ट्रीय जीवन में विष घोल दे, जातिवाद के वर्ग संघर्ष की स्थिति पैदा कर दे, वह सर्व हितकारी कैसे हो सकता है।

पं. नेहरू व बाबा साहेब अम्बेडकर ने भी सीमित वर्षों के लिए आरक्षण की वकालत की थी तथा इसे राष्ट्रीय जीवन का स्थायी पहलू न बनने का कहा था। डाॅ. लोहिया का नाम लेने वाले शायद यह नहीं जानते कि उन्होंने भी कहा था कि अगर देश को ठाकुर, बनिया, ब्राह्मण, शेख, सैयद में बांटा गया तो सब चैपट हो जाएगा। जाति विशेष में पिछड़ा और शेष वर्ग में पिछड़ा भिन्न कैसे हो सकता है। गरीब की बस एक ही जाति होती है ”गरीब“। एक सोच कहती है कि गरीब-गरीब होता है, उसकी कोई जाति, पंथ या भाषा नहीं होती। उसका कोई भी धर्म हो, मुस्लिम, हिन्दू या मराठा, सभी समुदाय में एक वर्ग ऐसा है जिसके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं, खाने के लिए भोजन नहीं है। हमें हर समुदाय के अति गरीब वर्ग पर भी विचार करना चाहिए।

आरक्षण किस-किय को दिया जाये, क्योंकि 3000 से अधिक जातियां गिनाई हैं और वे भी सब अलग-अलग रहती हैं। उनमें उपजातियां भी हैं। नई जातियां भी अपना दावा लेकर आएंगी। मुसलमान भी आरक्षण मांग रहे हैं। देश की तस्वीर की कल्पना की जा सकती है। घोर विरोधाभास एवं विडम्बना है कि हम जात-पात का विरोध कर रहे हैं, जातिवाद समाप्त करने का नारा भी दे रहे हैं और आरक्षण भी चाहते हैं। सही विकल्प वह होता है, जो बिना वर्ग संघर्ष को उकसाये, बिना असंतोष पैदा किए, सहयोग की भावना पैदा करता है।

आरक्षण के खिलाफ या पक्ष में अभिव्यक्ति सड़कों पर नहीं हो। क्योंकि यह हिंसा और वैमनस्य को जन्म देती है। राष्ट्रीय जीवन को घायल कर देती है। विचार व्यक्त उपयुक्त मंचों से हो। राष्ट्रीय चर्चा के माध्यम से प्रतिक्रिया हो। अभी क्या देश के जख्म कम हैं? इस आन्दोलन ने कई जलती समस्याओं को पृष्ठभूमि में डाल दिया है। आरक्षण की तात्कालिक प्रतिक्रिया साम्प्रदायिक आधार पर आरक्षण और पृथक मतदान की सामंतवादी नीति के भयानक परिणामों की याद दिलाती है।

परेशानी वाली बात तो यह है कि कभी आरक्षण का विरोध करने वाले मराठा अब आरक्षण की मांग को लेकर हिंसक एवं आक्रामक हो उठे हैं। सोचनीय बात है कि नौकरियां कम होने की वजह से आरक्षण का कोई फायदा नहीं होने वाला है। सरकारी भर्तियां बन्द हैं। नौकरियां हैं कहां? आरक्षण मिल भी जाए तो रोजगार की गारंटी नहीं है। ऐसी स्थितियों में आरक्षण की मांग के पीछे तथाकथित संकीर्ण एवं विघटनकारी राजनीतिक सोच ही सामने आ रही है। अब वक्त आ गया है कि आरक्षण को लेकर राजनीतिक नजरिये से नहीं बल्कि एक स्वस्थ सोच से विचार किया जाए। आरक्षण का लाभ ले चुके लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसका फायदा उठाते आ रहे हैं जबकि आरक्षण उन लोगों को मिलना चाहिए जो गरीब हैं और उनके आर्थिक उत्थान के लिए उन्हें मदद देने की जरूरत है। आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मिलना ही चाहिए।

 


करुणानिधि की तबीयत बिगड़ी, अगले 24 घंटे बेहद अहम, लगा समर्थकों का हुजूम

करुणानिधि की तबीयत बिगड़ी, अगले 24 घंटे बेहद अहम, लगा समर्थकों का हुजूम

07-Aug-2018

चेन्नई। द्रविड़ मुनेत्र कडगम (द्रमुक) अध्यक्ष एम. करुणानिधि के स्वास्थ्य में सोमवार को काफी गिरावट आने की खबर के बाद द्रमुक कार्यकर्ता और उनके शुभचिंतक अस्पताल के पास एकत्रित होना शुरू हो गए हैं। 94 वर्षीय करुणानिधि गत 10 दिनों से यहां कावेरी अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टरों ने कहा कि अगले 24 घंटों में उन पर हो रहे इलाज के असर के बाद उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जा सकेगी।
अस्पताल के बयान के अनुसार, "करुणानिधि की स्थिति में लगातार गिरावट हो रही है। उम्र संबंधी बीमारी की वजह से उनके महत्वपूर्ण अंगों को काम करने के लायक बनाए रखना लगतार चुनौती बना हुआ है।" बयान के अनुसार, "उन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और एक्टिव मेडिकल सपोर्ट के जरिए उनका इलाज किया जा रहा है। अगले 24 घंटों में वे इलाज पर किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं, इसके बाद उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जा सकेगी।"
करुणानिधि की हालत नाजुक होने की खबर के बाद सैकड़ों द्रमुक कार्यकर्ताओं ने अलवरपेट में कावेरी अस्पताल की ओर जाना शुरू कर दिया जिसके बाद शहर के कई जगहों पर यातायात बाधित हो गया। द्रमुक के महासचिव के. अनबालागन, करुणानिधि के परिजन और अन्य नेता उनके स्वास्थ्य खराब होने की खबर के बाद अस्पताल पहुंचे।
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस की तैनाती की गई है। पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे 94 वर्षीय करुणानिधि को बढ़े रक्तचाप के बाद 28 जुलाई को कावेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी साल 3 जून को करुणानिधि ने अपना 94वां जन्मदिन मनाया. ठीक 50 साल पहले 26 जुलाई को ही उन्होंने डीएमके की कमान अपने हाथ में ली थी।
लंबे समय तक करुणानिधि के नाम हर चुनाव में अपनी सीट न हारने का रिकॉर्ड भी रहा। वो पांच बार मुख्यमंत्री और 12 बार विधानसभा सदस्य रहे हैं। अभी तक वह जिस भी सीट पर चुनाव लड़े हैं, उन्होंने हमेशा जीत दर्ज की है।
करुणानिधि ने 1969 में पहली बार राज्य के सीएम का पद संभाला था, इसके बाद 2003 में आखिरी बार मुख्यमंत्री बने थे। शाम में जब बुलेटिन जारी किया गया, उस समय अस्पताल के बाहर 200 से ज्यादा लोग मौजूद थे। वे करुणानिधि के जल्द ठीक होने की प्रार्थना के साथ नारे भी लगा रहे थे।

 


खबर अजब-गजब : एक पत्नी के लिए भिड़ गए दो 'पति', तीसरे के साथ भाग गई महिला

खबर अजब-गजब : एक पत्नी के लिए भिड़ गए दो 'पति', तीसरे के साथ भाग गई महिला

06-Aug-2018

बेंगलुरू। क्या आपने कभी सुना है कि एक महिला के लिए दो शख्स आपस में भिड़ जाएं, दूसरी ओर महिला उन दोनों पुरुषों में से किसी के साथ न जाकर तीसरे शख्स के साथ भाग जाए? आपको ये सुनकर थोड़ा अजीब जरूर लगा होगा लेकिन ऐसा ही हाईवोल्टेज ड्रामा शनिवार को सामने आया, जहां एक महिला के सामने दो शख्स आपस भिड़ गए। उनके बीच जमकर मारपीट हो रही थी, इसी दौरान पता चला कि जिस महिला के लिए ये दोनों शख्स एक-दूसरे जूझ रहे थे, वो किसी और के साथ ही भाग गई। पूरा हंगामा यहीं नहीं थमा, इसके बाद मौके पर पुलिस पहुंची और बीच हाइवे पर हंगामा करने की वजह से दोनों युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। 

पूरा मामला शनिवार सुबह करीब 11 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर बेंगलुरू-नीलमंगला के बीच देखने को मिला। पुलिस ने बताया कि जिस महिला की वजह से बीच हाइवे पर हंगामा हुआ उसकी पहचान शशिकला के तौर पर हुई है, जो एक ट्रैक्टर ड्राइवर चिकाबिदारुकल्लू मूर्ती के साथ रहती थी। पुलिस ने कहा कि शशिकला की शादी साल 2000 में रंगास्वामी नाम के शख्स से हुई थी। हालांकि 2010 में उनकी शादी टूट गई।  

पुलिस ने बताया कि इसके बाद शशिकला रमेश कुमार नाम के शख्स के साथ रहने लगी। रमेश एक कपड़े की फैक्ट्री में सुपरवाइजर था। हालांकि महज 6 महीने बाद 2015 में शशिकला इससे भी अलग हो गई। 2017 से शशिकला चिकाबिदारूकल्लू मूर्ती के साथ रह रही थी। मूर्ती एक शादीशुदा शख्स था और उसके दो बच्चे भी थे। इसी दौरान सिद्दाराजू नाम के एक कैब ड्राइवर ने शशिकला को शादी का प्रस्ताव दिया। सिद्दाराजू गैर-शादीशुदा था, हालांकि शशिकला ने मामले को टाल दिया। शनिवार को जिस समय हंगामा हुआ उस समय शशिकला और सिद्दाराजू एक बस स्टैंड पर खड़े थे। इसी दौरान मूर्ति वहां पहुंच गया और सिद्दाराजू पर हमला कर दिया। 

पुलिस ने बताया कि हाइवे पर ही दोनों शख्स आपस में भिड़ गए। इस दौरान उनके बीच मारपीट भी हुई। आखिरकार पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर बीचबचाव किया और उन्हें थाने ले आई। जब पुलिस ने शशिकला से उन दोनों युवकों के बारे में पूछा तो उसने बताया कि दोनों ही उसके दोस्त हैं और एक-दूसरे जलते हैं। जब पुलिस ने पूछा कि तुम इनमें से किसी से शादी करना चाहती हो तो उसने मना कर दिया। इसी बीच एक तीसरा शख्स पुलिस स्टेशन पहुंचा, जिसे शशिकला ने अपना दोस्त बताया और फिर शशिकला उनके साथ चली गई। 

साभार : hindi.oneindia.com


मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी राजयोग ट्रेनिंग सेंटर एवं आवासीय शिविर स्थल का किया भूमिपूजन एवं शिलान्यास

मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी राजयोग ट्रेनिंग सेंटर एवं आवासीय शिविर स्थल का किया भूमिपूजन एवं शिलान्यास

05-Aug-2018

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज राजनांदगांव में बर्फानी आश्रम में प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में राजयोग ट्रेनिंग सेंटर एवं आवासीय शिविर स्थल का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया। डॉ. सिंह ने कहा कि ब्रम्हाकुमारी संस्था द्वारा सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने के लिए किये गये कार्य सराहनीय हैं। वे समाज को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य करते हैं। उन्होंने पूरे छŸाीसगढ़ राज्य तथा खासकर राजनांदगांव जिले के लिए इस टेªनिंग सेन्टर को बड़ी उपलब्धि बताया। कहा कि इस जोन में पूरे 600 केन्द्रों का संचालन अपने आप में बहुत बड़ी बात है। संस्था द्वारा समाज में दुख तनाव की मुक्ति, मूल्यों की पुर्नस्थापना के कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने इस संस्था को 15 लाख रूपए देने की घोषण भी की। इस अवसर पर ब्रम्हाकुमारी हेमलता दीदी, कमला दीदी, एवं आशा दीदी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने बताया कि राजयोग ट्रेनिंग सेंटर एवं आवासीय शिविर स्थल कुल चार तलों का प्रोजेक्ट है। जिसमें 1500 सीट बैठक क्षमता वाला ऑडिटोरियम, 200 लोगों के लिए आवासीय टेªनिंग सेंटर, आर्ट गैलेरी, मेडिटेशन सेंटर आदि होगा। सेवा के लिए मेडिकल, इंजीनियरिंग, समाज सेवा, यूथ विंग, परिवहन सहित कुल 19 प्रभाग होंगे।
    इस अवसर पर लोक निर्माण एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री राजेश मूणत, सांसद श्री अभिषेक सिंह, महापौर श्री मधुसूदन यादव, बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष श्री खूबचंद पारख, छŸाीसगढ़ राज्य समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्षा श्रीमती शोभा सोनी, छŸाीसगढ़ उर्दू अकादमी के अध्यक्ष श्री अकरम कुरैशी, डोंगरगढ़ विधायक श्रीमती सरोजनी बंजारे, राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, छŸाीसगढ़ राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के पूर्व अध्यक्ष श्री लीलाराम भोजवानी, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष श्री सचिन बघेल, पूर्व सांसद श्री प्रदीप गांधी, पूर्व विधायक श्री कोमल जंघेल, राजगामी संपदा न्यास के पूर्व अध्यक्ष श्री संतोष अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे। इस अवसर पर कलेक्टर श्री भीम सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री कमलोचन कश्यप सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 


अच्छे नंबर का झांसा देकर छात्रा से करता रहा रेप, गिरफ्तार

अच्छे नंबर का झांसा देकर छात्रा से करता रहा रेप, गिरफ्तार

04-Aug-2018

संस्कारी नगरी के नाम से मशहूर वडोदरा में गुरु और शिष्या के संबंधों को तार-तार करने वाली वारदात सामने आई है, जिसमें ट्यूशन पढ़ने वाली छात्रा को ज्यादा मार्क्स देने का प्रलोभन देकर उसपर यौन उत्पीड़न किया गया.
वडोदरा के मांजलपुर इलाके में प्राइवेट ट्यूशन क्लास टीचर वीनू कटारिया अपनी छात्रा को बायोलॉजी का ट्यूशन देता था. करीबन एक साल तक शिक्षक पीड़िता को अच्छे मार्क्स दिलाने का झांसा देकर उनका यौन उत्पीड़न करता रहा.
इतना ही नहीं मगर वीनू कटारिया ने छात्रा का वीडियो वायरल करने की भी धमकी दी थी. आखिरकार पीड़िता ने गुरु की इस हरकत के बारे में अपने परिजनों को बताया तब घरवालों के पैरों तले से जमीन खिसक गई.
पीड़िता के पिता ने कहा, ‘जब मेरी बेटी ने शिक्षक की हरकत के बारे में बताया तो हमें काफी धक्का लगा. इसने अच्छे मार्क्स दिलवाने की बात कहकर लगातार उनका यौन शोषण किया.’

जैसे ही शिक्षक पर छात्रा की ओर से बलात्कार किए जाने की बात का खुलासा हुआ तो आनन-फानन में वडोदरा पुलिस ने कसूरवार शिक्षक को धर दबोचा और उससे कड़ी पूछताछ शुरू कर दी गई. आरोपी शिक्षक वडोदरा की नामी स्कूल में भी बतौर शिक्षक कार्यरत है.
पुलिस ने पूरे मामले की तह तक जाने का फैसला किया है, पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस लड़की के अलावा और भी दूसरी लड़कियों को अच्छे मार्क्स का लालच देकर उनके साथ यौन शोषण तो नहीं किया गया.


‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ का डायरेक्टर करोड़ो रुपए के फर्जीवाड़ा के आरोप में गिरफ्तार

‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ का डायरेक्टर करोड़ो रुपए के फर्जीवाड़ा के आरोप में गिरफ्तार

03-Aug-2018

नई दिल्ली 

फिल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ के निर्देशक विजय रत्नाकर गुट्टे को गिरफ्तार कर लिया गया है। गुट्टे को जीएसटी इंटेलिजेंस विंग ने गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक निर्देशक को मुंबई से जीएसटी संबंधी 34 करोड़ रुपए के फ्रॉड के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि ‘द एक्सीडेंटल प्राइममिनिस्टर’ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जीवन पर बन रही है। अभिनेता अनुपम खेर इस फिल्म में डॉ. मनमोहन सिंह का किरदार निभा रहे हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक निर्देशक विजय गुट्टे पर आरोप है कि उनकी कंपनी वीआरजी डिजिटल कॉर्प प्राइवेट लिमिटेड ने हॉरिजन ऑउटसोर्स सॉल्‍यूशंस प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी से एनीमेशन और कर्मचारियों की सर्विस लेने के नाम पर 266 करोड़ रुपये दिए। इसपर 34 करोड़ रुपये जीएसटी क्रेडिट फर्जी दस्तावेज देकर हासिल करने की कोशिश की। जबकि विजय ने इस कंपनी से कोई सर्विस ही नहीं ली थी। हॉरिजन कंपनी के खिलाफ 170 करोड़ का फर्जी जीएसटी बिल का मामला चल रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक डायरेक्‍ट्रेट जनरल ऑफ गुंड्स एंड सर्विसेज इंटेजिजेंस (DGGSTI) ने जीएसटी में 34 करोड़ रुपये के फ्रॉड के आरोप में गिरफ्तार किया है। गुट्टे की फर्म पर हॉरिजन ऑउटसोर्स सॉल्‍यूशंस प्राइवेट लिमिटेड से मिली एनिमेशन और मैनपावर सेवाओं के लिए 34 करोड़ रुपये के जीएसटी की ‘फर्जी रसीदें’ लेने का आरोप है। अदालती कागजातों के अनुसार, वीआरजी डिजिटल कॉर्प ने जुलाई 2017 के बाद इन फर्जी रसीदों के जरिए सरकार से CENVAT (सेंट्रल वैल्‍यू एडेड टैक्‍स) के तहत 28 करोड़ रुपये के नकद रिफंड का गलत तरीके से दावा किया।

गुट्टे पर CGST एक्‍ट की धारा (1)(c) के तहत केस दर्ज किया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि गुट्टे की वीआरजी डिजिटल कॉर्प असल में हॉरिजन ऑउटसोर्स सॉल्‍यूशंस के शीर्ष क्‍लाइंट्स में से एक थी। वीआरजीको को 266 करोड़ रुपये की सेवाओं के बदले 40 करोड़ रुपये का जीएसटी भरते दिखाया गया था, जबकि असल में कोई सेवा दी ही नहीं गई। अखबार के मुताबिक मुंबई की एक अदालत ने गुट्टे को 14 अगस्‍त तक के लिए न्‍यायिक हिरासत में आर्थर रोड जेल भेज दिया है। गुट्टे की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब उनके पिता रत्‍नाकर गुट्टे पर 5,500 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धनंजय मुंडे ने 17 जुलाई को आरोप लगाया था कि रत्‍नाकर की आठ फर्मों ने मिलकर विभिन्‍न बैंकों को 5,500 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का चूना लगाया। गुट्टे के पिता रत्‍नाकर गुट्टे 2014 में बीजेपी-नीत गठबंधन के उम्‍मीदवार क तौर पर परभानी जिले के गंगाखेड़ से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं।


रेलवे ट्रैक पर मिला जेडीयू विधायक बीमा भारती के बेटे का शव

रेलवे ट्रैक पर मिला जेडीयू विधायक बीमा भारती के बेटे का शव

03-Aug-2018

पटना : एजेंसियों से 

जेडीयू विधायक बीमा भारती के बेटे का शव नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के सामने रेलवे ट्रैक पर पड़ा मिला है. घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्‍जे में ले लिया है. रेल एसपी भी मौके पर पहुंच गए हैं और छानबीन की जा रही है.

रुपौली विधानसभा से जेडीयू विधायक बीमार भारती के बेटे का शव मिलने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. पुलिस ने शव को कब्‍जे में लेकर पोस्‍टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस इस मामले को हत्‍या और आत्‍महत्‍या दोनों की एंगल से जांच रही है.

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गौरतलब है कि करीब दो साल पहले बीमा भारती ने आरोप लगाया था कि उनके पति अवधेश मंडल ने बेटे को समोसे में ज़हर देकर मारने का प्रयास किया था. इससे पहले अवधेश मंडल और बीमा भारती में कई बार मारपीट का मामला भी सामने आ चुका है. विधायक बीमा के पति अवधेश कुछ ही महीनों पहले जेल से बाहर आया है. उस पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. जेल से आने के बाद पति–पत्नी एक साथ रह रहे थे और रिश्ते बेहतर थे.

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110 फीट बोरवेल में गिरी 3 साल की अबोध बालिका , 30 घंटे बाद निकाल ली गई

110 फीट बोरवेल में गिरी 3 साल की अबोध बालिका , 30 घंटे बाद निकाल ली गई

02-Aug-2018


बिहार के मुंगेर जिले में मंगलवार की शाम करीब चार बजे एक बोरवेल में गिरी तीन साल की एक बच्ची करीब 30 घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद सकुशल बाहर निकाल ली गई. जिले में कोतवाली थाना क्षेत्र के मुर्गीयाचक मोहल्ला में एक घर के आंगन में समरसेबुल बोरिंग के लिए किए गए 165 फुट बोरवेल में सन्नो नाम की यह बच्ची सोमवार को गिर गई थी. वह अपने ननिहाल आई हुई थी और खेलने के दौरान वह बोरवेल में गिर गई थी.


सीएम नीतीश कुमार ने आज रात 9.45 बजे सन्नो को बोरवेल से सकुशल निकाल लिए जाने पर खुशी एवं संतोष व्यक्त किया. उन्होंने इसके साथ ही परिजनों एवं बचाव दल के तमाम सदस्यों को भी बधाई दी है. उन्होंने बचाव में शामिल आपदा प्रबंधन विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं जिला प्रशासन की टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बाद भी सन्नो का बोरवेल से सकुशल निकाला जाना बेहतर टीम समन्वय का परिणाम है.
सीएम ने दिए निर्देश
मुख्यमंत्री ने सन्नो को बेहतर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है और उसके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की. सन्नो को बोरवेल से निकाले जाने के बाद वहां मौजूद चिकित्सकों की टीम उसे एक एम्बुलेंस से सदर अस्पताल ले गए और वहां उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया है.
शाह ने किया ट्वीट
पुलिस अधीक्षक गौरव मंगला ने बताया बच्ची के बोरवेल में गिरने के बाद जिला पुलिस और प्रशासन को सूचना मिलने पर बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया था. 45 फीट गहराई पर बोरवेल में फंसी सन्नो को सिलेंडरों और पाइपों की मदद से ऑक्सीजन प्रदान किया गया. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बच्ची को बोरवेल से निकालने के लिए आपदा प्रतिक्रिया सेवाओं को बधाई दी. शाह ने एक ट्वीट कर कहा कि एनडीआरएफ और राज्य आपदा मोचन बल के कर्मियों ने उसे बाहर निकालने के लिए घंटों अथक कार्य किया. उन्होंने बच्ची की कुशलता की कामना भी की.

 


देश में  277 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं फर्जी

देश में 277 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं फर्जी

01-Aug-2018

दिल्ली : भारत में इंजीनियरिंग और टेक्निकल कोर्स कराने के नाम पर 277 फेक इंजीनियरिंग कॉलेज चल रहे हैं. इसमें 66 दिल्ली में हैं. लोक सभा में सोमवार को राज्य मानव संसाधन विकास मंत्री सत्य पाल सिंह ने जो दस्तावेज पेश किए, उसके अनुसार राष्ट्रीय राजधानी के अलावा तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में भी क्रमश: 35 और 27 फेक इंजीनियरिंग कॉलेज चलाए जा रहे हैं.

फेक कॉलेजों की इस सूची में 23 कनार्टक, 22 उत्तर प्रदेश, 18 हरियाणा, 16 महाराष्ट्र और 11 तमिलनाडु के इंजीनियरिंग कॉलेज शुमार हैं.

इन कॉलेजों को ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्नीकल एजुकेशन(AICTE) की ओर से मान्यता प्राप्त नहीं है. इन कॉलेजों को AICTE से स्वीकृति लेने का निर्देश दिया गया है. वरना इन्हें बंद कर कर दिया जाएगा.

इस मामले पर यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन UGC भी नजर बनाए हुए है. कमीशन ने हाल ही में राज्यों को इस मामले में लिखित निर्देश भेजा है और जरूरी कदम उठाने को कहा है. यूजीसी की वेबसाइट पर पहले से 24 फेक यूनिवर्सिटीज की लिस्ट दी गई है.

फर्जी इंजीनियरिंग कॉलेजों की सूची

दिल्ली- 66

तेलंगाना- 35

पश्चिम बंगाल- 27

कर्नाटक- 23

उत्तर प्रेदश- 22

हिमाचल प्रदेश- 18

बिहार- 17

महाराष्ट्र- 16

तमिलनाडु – 11

गुजरात- 8

आंध्र प्रदेश- 7

चंडीगढ़- 7

पंजाब- 5

राजस्थान- 3

उत्तराखंड- 3


"नहीं पूछते डूबते इंसान का मजहब" कांवड़ियों के लिए मुस्लिम युवकों की पहल

01-Aug-2018

‘हम डूबते इंसान को बचाते वक्त उसका मजहब नहीं पूछते’, यह कहना है मोहम्मद सूखा का जो गोताखोरी कैंप का हिस्सा बने हैं। वह उन मुस्लिम युवकों में से एक हैं, जो सावन में कांवड़ यात्रा के दौरान गोताखोरी के लिए आगे आए हैं, जिससे किसी भी अनहोनी की स्थिति में श्रद्धालुओं को बचा सकें। ये लोग अपर गंगनहर के किनारे कैंपिंग कर रहे हैं, जहां लाखों कांवड़िए हर साल पूजा करने आते हैं।
सूखा की तरह 20 और मुस्लिम युवक ऐसे हैं, जिन्होंने शिवभक्तों की जान बचाने के लिए गोताखोरी कैंप में हिस्सा लिया है। कैंप में रहने वाले ये युवक हर पल किसी जरूरतमंद की मदद के लिए तैयार और तैनात रहते हैं।
हर साल तेज बहाव और गहरी नदी के चलते कई कांवड़ियों की डूबकर मौत की खबरें सामने आती रही हैं, यात्रा के समय बारिश के चलते यहां कीचड़ जमा हो जाता है। इस वक्त कैंप में 25 गोताखोर तैनात हैं।
एसपी (सिटी) रणविजय सिंह ने कहा, ‘मैं इन गोताखोरों को जानता हूं और पुलिस नहर में लोगों के डूबने की स्थिति में और जरूरत पड़ने पर इनसे मदद लेती रही है। मैंने उनसे पूछा कि क्या वे कैंप का हिस्सा बनना चाहेंगे और वे खुशी से इसके लिए राजी हो गए। हम उनकी सेवाओं के बदले उन्हें इनाम भी देंगे।’ गोताखोर सूखा इसे एक अच्छा काम मानते हैं।
सूखा कहते हैं, ‘हम सभी मुसलमान हैं लेकिन इससे फर्क नहीं पड़ता। मुझे लगता है कि जान बचाने की हमारी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है और जब हम किसी की जान बचा रहे होते हैं, हम तकलीफ में डूबे इंसान से यह नहीं पूछते कि उसका मजहब क्या है।’
इनमें से ज्यादातर गोताखोर मेरठ के किनारे बसे जुलहेरा औक मेहमाती गांव के हैं। इनमें से कुछ युवक बीते साल भी गोताखोरी कर लोगों की जान बचा चुके हैं।
(साभार : नवभारत टाइम्स)


 


CM केजरीवाल ने कहा- अगर दिल्ली में CCTV कैमरे लग गए तो बीजेपी और कांग्रेस को चुनाव में दारू और पैसा बाँटना मुश्किल हो जाएगा

CM केजरीवाल ने कहा- अगर दिल्ली में CCTV कैमरे लग गए तो बीजेपी और कांग्रेस को चुनाव में दारू और पैसा बाँटना मुश्किल हो जाएगा

31-Jul-2018

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्‍ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, अगर दिल्ली में CCTV कैमरे लग गए तो बीजेपी और कोंग्रेस को चुनाव में दारू और पैसा बाँटना मुश्किल हो जाएगा।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार(31 जुलाई) को ट्वीट करते हुए लिखा, “अगर दिल्ली में CCTV कैमरे लग गए तो भाजपा और कोंग्रेस को चुनाव में दारू और पैसा बाँटना मुश्किल हो जाएगा। कल एक भाजपा नेता ने बताया की LG को कहा गया है कि किसी भी तरह लोक सभा चुनाव के पहले CCTV कैमरे मत लगने दो।”

वहीं सीएम केजरीवाल ने एक अन्य ट्वीट में दोनों ही पार्टियों से सवाल करते हुए पूछा, “बीजेपी व कांग्रेस बताएं कि वे CCTV कैमरों का विरोध क्यों कर रहे हैं?”


गोकशी की घटनाओं को आतंकवादी गतिविधियों की तरह समझकर ही उनको ट्रीट करना चाहिए- बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा

गोकशी की घटनाओं को आतंकवादी गतिविधियों की तरह समझकर ही उनको ट्रीट करना चाहिए- बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा

31-Jul-2018

बीते दिनों अलवर के राजगढ़ थाना इलाके में कथित गोरक्षकों द्वारा गोकशी के लिए ले जा रहे रकबर उर्फ अकबर की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के विधायकों के विवादित बोल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसी सिलसिले में राजगढ़ विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने आज केंद्र व राज्य सरकार को एक अजीब सलाह दे डाली।
आहूजा ने कहा है कि गोकशी की घटनाओं को आतंकवादी गतिविधियों की तरह समझकर ही उनको ट्रीट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह के मामले आतंकवादियों पर चलाए जाते हैं, वैसे ही गोकशी करने वालों पर भी चलाए जाने चाहिए।
राजगढ़ से ही विधायक आहूजा ने कहा कि इस तरह की घटनाएं तभी रुक सकती हैं, जब सरकार गोतस्करों पर सख्ती करे। विधायक आहूजा ने ये बात आज भाजपा कार्यालय में आयोजित संभाग स्तरीय बैठक में हिस्सा लेने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कही।
इससे पहले भी कथित गोतस्कर अकबर की हत्या के बाद हर रोज ज्ञानदेव आहूजा के लगातार विवादित बयान जारी है। एक दिन पहले ही आहूजा ने सरकारों द्वारा अकबर उर्फ रकबर के परिजनों को मुआवजा दिए जाने को भी गलत करार दिया था। इस मामले में उन्होंने कहा था कि वो इसको लेकर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से बात करेंगे।
उल्लेखनीय है कि अलवर जिला गोतस्करी को लेकर काफी समय से गढ़ बना हुआ है। यहां पर दो साल में कथित तौर पर गाय तस्करी को लेकर दो लोगों की भीड़ के द्वारा हत्या की जा चुकी है। एक साल पहले इसी थाना क्षेत्र में पहलू खान को भी मार दिया गया था। अकबर की हत्या को लेकर पुलिस की भूमिका पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।