राजस्थान में सियासी उठापटक जारी है ।नाराज़ सचिन पायलट ने दिल्ली में आज राहुल गांधी से मुलाक़ात की है ।

राजस्थान में सियासी उठापटक जारी है ।नाराज़ सचिन पायलट ने दिल्ली में आज राहुल गांधी से मुलाक़ात की है ।

10-Aug-2020
राजस्थान में सियासी उठापटक जारी है ।नाराज़ सचिन पायलट ने दिल्ली में आज राहुल गांधी से मुलाक़ात की है । राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सुलह की कोशिशें की जा रही हैं । सूत्रों के अनुसार सचिन पायलट के समर्थक विधायकों ने कांग्रेस न छोड़ने का उन पर दबाव बनाया और वे अलग थलग पड़ गए थे । आज राहुल गांधी से मुलाक़ात के बाद राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर संकट के बादल छंटते नज़र आ रहे हैं

छत्तीसगढ़ में शुरू होगी इंदिरा वन मितान योजना : सीएम भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ में शुरू होगी इंदिरा वन मितान योजना : सीएम भूपेश बघेल

10-Aug-2020

मुख्यमंत्री ने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर की घोषणा

वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और मार्केटिंग से वनवासियों की समृद्धि के खुलेंगे नए द्वार
अनुसूचित क्षेत्र के विकासखण्ड में होगी वनोपज प्रसंस्करण केन्द्रों की स्थापना  
10 हजार गांवों में बनेंगे युवाओं के समूह: 5 से 6 लाख लोग जुड़ेंगे
योजना से 19 लाख परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य
समूहों को दिए जाएंगे वृक्ष प्रबंधन के अधिकार
वनवासियों की खुशहाली और वनांचल के गांवों को स्वालंबी बनाने की पहल
जल जंगल जमीन ही नहीं बल्कि वनवासियों को हमने शासन-प्रशासन
की ताकत भी सौंपी: मुख्यमंत्री

वनाधिकार दिलाने में छत्तीसगढ़ पूरे देश में अव्वल

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कल विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर राज्य में वनवासियों की खुशहाली और वनांचल के गांवों को स्वावलंबी बनाने के उद्ेदश्य से इंदिरा वन मितान योजना शुरू किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत राज्य के आदिवासी अंचल के दस हजार गांव में युवाओं के समूह गठित कर उनके माध्यम से वन आधारित  समस्त आर्थिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इन समूहों के माध्यम से वनवासियों के स्वरोजगार और उनकी समृद्धि के नए द्वारा खुलेंगे। इस योजना के तहत समूहों के माध्यम से वनोपज की खरीदी, उसका प्रसंस्करण एवं मार्केटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। राज्य के प्रत्येक आदिवासी विकासखण्डों में वनोपज प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना किए जाने का लक्ष्य सरकार ने रखा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों के 10 हजार गांवों में इस योजना के अंतर्गत समूह गठित किए जाएंगे, जिनमें युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रत्येक समूह में 10 से 15 सदस्य होंगे। इंदिरा वन मितान योजना में अनुसूचित क्षेत्रों के 19 लाख परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य है। इस योजना के माध्यम से समूहों को वृक्ष प्रबंधन का अधिकार प्रदान किया जाएगा, जिससे वे वन क्षेत्रों के वृक्षों से वनोपज संग्रहण कर आर्थिक लाभ ले सकें। वनोपज की खरीदी की व्यवस्था समूह के माध्यम से की जाएगी, जिससे वनोपज का सही मूल्य मिल सके। समूह के माध्यम से लोगों के लिए स्व-रोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे। वनोपजों की मार्केटिंग की व्यवस्था के साथ अनुसूचित क्षेत्रों के प्रत्येक विकासखण्ड में वनोपज प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी। एक यूनिट की अनुमानित लागत लगभग 10 लाख रूपए होगी। अनुसूचित क्षेत्रों के 85 विकासखण्ड में वनोपज प्रोसेसिंग यूनिट स्थापना के लिए 8 करोड़ 50 लाख रूपए की राशि प्राधिकरण मद से उपलब्ध कराई जाएगी। वनों में इमारती लकड़ी की बजाए फलदार और वनौषधियों के पौधे लगाए जाएंगे। जिससे वनवासियों की आय बढ़ सके।

    विश्व आदिवासी दिवस का गरिमामय कार्यक्रम मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, मंत्रीगणों, संसदीय सचिवों, विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों तथा आदिवासी समाज के गणमान्य लोगों की मौजूदगी में कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल सहित अतिथियों द्वारा आंगादेव, बूढ़ादेव एवं मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना से हुआ। इस अवसर पर आदिवासी नर्तक दल द्वारा  गौर नृत्य की प्रस्तुति दी गयी। इस मौके पर मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, कवासी लखमा, अमरजीत भगत, डॉ. शिव डहरिया, श्रीमती अनिला भेंड़िया तथा खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री गिरीश देवांगन भी नर्तक दलों के साथ मांदर की थाप पर थिरके और आदिवासी कला संस्कृति को आगे बढ़ाने और उसे जीवंत बनाए रखने की छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। आदिवासी गौर नृत्य में मंत्रीगणों की भागीदारी से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय का पूरा वातावरण उत्साह और उमंग से भर उठा।

        मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल अपने उद्बोधन में आगे कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति और  प्राकृतिक संसाधनों का सबसे बड़ा संरक्षक रहा है। प्रकृति से निकटता और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित दोहन भावी पीढ़ी के बेहतर जीवन के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर हमें आदिवासी समाज के हित के सभी पहलुओं पर समग्रता से विचार करना चाहिए। उन्होंने आदिवासी समाज के प्रत्येक सदस्य और संगठन से अपील की कि वे अपने अधिकारों और विकास के अवसरों के बारे में मुखर हो। छत्तीसगढ़ सरकार सदैव आपके साथ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के काम-काज, नीतियों और फैसलों से आदिवासी अंचलों की फिजा में तेजी से बदलाव आ रहा है। जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकार की नई ईबारत लिखी जा रही है।

        मुख्यमंत्री ने इस मौके पर वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि हमने राज्य के सभी पात्र वनवासियों को वन अधिकार पट्टा देने का अभियान शुरू किया है। छत्तीसगढ़ राज्य वनवासियों को व्यक्तिगत एवं सामुदायिक पट्टा देने के मामले में देश में अव्वल स्थान पर है। अभी तक राज्य में 4.50 लाख व्यक्तिगत तथा 43 हजार सामुदायिक पट्टे दिए जा चुकें है। वन अधिकार पट्टों के माध्यम से चार लाख 18 हजार हेक्टेयर भूमि आबंटित की गई है, जो देश में सर्वाधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि  वन अधिकार पट्टों को मनरेगा, सिंचाई, खेती-किसानी और खाद्य संरक्षण जैसे अनेक कार्यो से जोड़कर पट्टे की ंभूमि को हमने वनवासियों के खुशहाली और आमदनी का माध्यम बनाने का प्रयास कर रहें है। उन्होंने इस मौके पर राज्य के सभी वन भूमि पट्टाधारियों से अपने अधिकार और अवसर का भरपूर लाभ उठाने की अपील की।

        मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य में लघु वनोपज की खरीदी और उनके समर्थन मूल्य में वृद्धि सहित शहीद महेन्द्र कर्मा तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की यह तमाम कोशिशें आदिवासी भाई-बहनों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने तथा उन्हें विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में पहले सात लघु वनोपज की खरीदी होती थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 31 कर दिया है। उन्होंने कहा कि महुआ सहित अन्य लघु वनोपजों के मूल्य में वृद्धि किए जाने से इसका सीधा फायदा संग्राहक परिवारों को हुआ है।

        मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी अंचलों में विशेषकर बस्तर में सिंचाई का रकबा बहुत कम है। इसे बढ़ाने और बस्तर अंचल के लोगों की हर जरूरत के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने हेतु बोधघाट परियोजना की शुरूआत की है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के डूबान क्षेत्र में आने वाली भूमि का मुआवजा और पुनर्वास पैकेज आदिवासी समाज के लोग खुद तय करेंगे। उन्होंने कहा कि बोधघाट सिंचाई परियोजना की पुनर्वास नीति देश दुनिया की सबसे अच्छी नीति बने यह उनकी मंशा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी भाई-बहनों को सिर्फ जल, जंगल और जमीन की ताकत ही नही बल्कि शासन और प्रशासन की ताकत भी सौंपी है। उन्होंने इस मौके पर आदिवासी समाज के लोगों से पूरी सक्षमता के साथ आगे बढ़ने और राज्य के विकास में भागीदारी निभाने की अपील की।

        इस अवसर पर मंत्री श्री कवासी लखमा एवं मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने भी अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आदिवासियों के हितों का ध्यान रखा है, उनका मान-सम्मान बढ़ाया है। मंत्रीद्वय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति को संरक्षित एवं संवर्धित करने तथा उसे विश्व पटल पर लाने की सराहनीय पहल मुख्यमंत्री ने की है। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर वनांचल क्षेत्र के विकास के लिए मुख्यमंत्री द्वारा दी गई सौगातों के लिए उनका आभार जताया। कार्यक्रम को सर्वआदिवासी समाज के अध्यक्ष श्री बी.पी.एस. नेताम ने भी सम्बोधित किया और आदिवासी समाज से संबंधित मांगों का ज्ञापन सौंपा।

    कार्यक्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री अमरजीत भगत, कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे, गृह मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, राजस्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल और नगरीय विकास मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, संसदीय सचिव सुश्री शकुंतला साहू, श्री चिंतामणि महाराज और जशपुर विधायक विनय भगत, राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री गिरीश देवांगन अनेक जनप्रतिनिधि, मुख्य सचिव श्री आर.पी. मण्डल सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।


एसजीपीजीआई की कोविड रिपोर्ट का फर्जीवाड़ा

एसजीपीजीआई की कोविड रिपोर्ट का फर्जीवाड़ा

08-Aug-2020

लखनऊ-

एसजीपीजीआई की कोविड रिपोर्ट का फर्जीवाड़ा

मरीजों को नकली रिपोर्ट देकर पैसे वसूली का खुलासा

पीजीआई के जैसी दिखने वाली रिपोर्ट तैयार कर रहे जालसाज

एसजीपीजीआई ने कम पैसों का झांसा देकर की गई रिपोर्ट को नकारा

SGPGI की तरफ से पीजीआई थाने में दर्ज कराई गई FIR


निराश जनता  के पास काग्रेस एकमात्र विकल्प ?

निराश जनता के पास काग्रेस एकमात्र विकल्प ?

07-Aug-2020

              के डी सिंह.
        देश की सबसे  पुरानी राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आज भी एकमात्र पार्टी है जो  भाजपा और सत्ता के विरूद्ध अलग - अलग मोर्चे पर संघर्ष करती दिख रही है၊ जबकि अन्य विपक्षी दल व उसके नेता प्रधान मंत्री तथा गृह मंत्री की युगल जोड़ी के सामने घुटने टेक चुकी है ၊हलांकि काग्रेस एकजुट होने के बजाय  चार  अलग -अलग मोर्चा पर बटकर देश में विपक्ष की भूमिका में है ၊लेकिन पार्टी के नेताओं का पतक्षड़नुमा आचरण ने कई तरह के प्र१न चिन्ह  खड़ा कर दिया है ?बाबजूद इसके भाजपा से निराश  जनता के पास अब कांग्रेस के सिवा कोई और विकल्प नही दिख रहा है?परन्तु अभी सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही हैं कि यदि राजस्थान में भी कांग्रेस की सरकार अगर अंततः गिरा ही दी जाती है तो उसका ‘ठीकरा’ किसके माथे पर फूटना चाहिए ? मध्य प्रदेश को लेकर भी यही सवाल अभी हवा में ही लटका हुआ है।?
       राजस्थान के मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत  एक बड़े जादूगर हैं।उनकी सरकार अब किसी बड़े जादू से ही बच सकती है?राजस्थान में संकट की शुरुआत ‘सोने की छुरी पेट में नहीं घुसेड़ी जाती’ के प्रचलित राजस्थानी मुहावरे से हुई थी और उसका आंशिक समापन जनता राजभवन घेर ले तो फिर मुझे मत कहिएगा ,से हुआ है၊मुख्यमंत्री ने अब कहा है कि ज़रूरत पड़ी तो वे अपने विधायकों के साथ राष्ट्रपति से भी मिलेंगे या प्रधानमंत्री निवास के सामने धरना देंगे।मुख्यमंत्री को अभी अपनी उस चिट्ठी का जवाब प्रधानमंत्री से नहीं मिला है जिसमें उन्होंने राजस्थान में लोकतंत्र बचाने की अपील की थी।गहलोत सत्ता बचाने के उनके संघर्ष को जनता के अधिकारों की लड़ाई में बदलना चाहते हैं। लेकिन जनता अब अपना परिचय इसी प्रकार देने में ज़्यादा सुरक्षित महसूस करती है। वह जानती है कि भाजपा लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर चुनी हुई सरकारों को गिराने और कांग्रेस उन्हें बचाने के काम में लगी है।जनता के विवेक पर किसी का कोई भरोसा नहीं है। ऐसा नहीं होता तो विधायकों का समर्थन जुटाने के लिए करोड़ों की बोलियां नहीं लगतीं और जनता के चुने हुए प्रतिनिधि अपने आप को सितारा होटलों के कमरों में ‘दासों’ की तरह बंद नहीं कर लेते। और जनता मूक दर्शकों की तरह थिएटर के बाहर खड़ी है । मंच पर १ केवल  वे ही दिखाई देते हैं और प्रवेश द्वारों पर सख़्त पहरे हैं।
      मध्य प्रदेश में कोरोना काल का पूरा मार्च महीना एक चुनी हुई सरकार को गिराने में खर्च हो गया।जिसके बारे में मुख्यमंत्री ने ही  स्वीकार किया कि सब कुछ केंद्र के इशारे पर किया गया ।़शिवराज सिंह के शपथ लेने के तीन महीने बाद पूरे मंत्रिमंडल का गठन हुआ और अब ज़्यादातर नए मंत्री उप-चुनाव जीतने की तैयारी में लग गए हैं।मुख्यमंत्री को कोरोना हो गया है၊लोकतंत्र भी देश की तरह मध्य प्रदेश में भी पूरी तरह सुरक्षित है पर एक सरकार कोरना में बन गई၊देश एक ऐसी व्यवस्था की तरफ़ बढ़ रहा है जिसमें . धीरे-धीरे चुनी हुई सरकारों की ज़रूरत ही ख़त्म हो जाएगी।जनता की जान की क़ीमत घटती जाएगी?लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिस जनता की लड़ाई का दम भरा जा रहा है उसमें अस्सी करोड़ तो पाँच किलो गेहूं या चावल और एक किलो दाल लेने के लिए।। क़तारों में लगा दिए गए हैं और बाक़ी पचास करोड़ कोरोना से बचने के लिए बंटने वाली सरकारी वैक्सीन का अपने घरों में इंतज़ार कर रहे हैं। और यह भी कि इस ‘असहमति’ के लिए उस मतदाता की कोई ‘सहमति’ नहीं ली जाती जिसकी उम्मीदों को सरे आम धोखा दिया जा रहा है ?ऐसी हालत में कुछ प्रेक्षकों का मत है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लाख जतन कर लें, उनकी सरकार बचने वाली नहीं है और मुमकिन है कि अगस्त में उनकी सरकार गिरा दिया.जाये? राजस्थान की जनता के आदेश से खिलवाड़ चल रहा है၊भाजपा राजस्थान संकट के लिए कांग्रेस के आंतरिक कलह को वजह बताती है तो अशोक गहलोत भाजपा को और सचिन पायलट अशोक गहलोत को ၊ कहा जा रहा है कि.राज्यपाल और अदालत अपनी-अपनी जगह पर हैं ,उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है ,दोनों कायदे-क़ानून से बंधे हैं ?अब अशोक गहलोत सचिन और भाजपा के साथ-साथ राज्यपाल और अदालत के लपेटे में भी आ गए हैं ၊कांग्रेस का हाईकमान गहलोत सरकार के साथ खड़ा है ၊
      वर्ष 2014 की लोकसभा सभा चुनाव के वाद भारतीय राजनीति में भाजपा ने देश में नई राजनीतिक संस्कृति का इजाद किया है ၊ इस रणनीति के मामले में पिछले छह साल से सत्तारूढ़ भाजपा की मोदी और शाह की जोड़ी एक कामयाब जोड़ी साबित हुई है၊तमाम नाकामियों के बावजूद सरकारें हड़पने में इस जोड़ी का कोई सानी नहीं है၊ .चूंकि इस जोड़ी ने तय कर लिया है कि उसे काग्रेस की एक = एक करके. राज्य सरकारे गिराना है तो ये सरकार किसी भी कीमत पर गिराकर ही रहेगी ၊ इसीलिए.कांग्रेस मध्यप्रदेश की सरकार नहीं बचा सकी,कर्नाटक के नाटक में उसे नाकामी हाथ लगी और यही सब अब राजस्थान में होता दिखाई दे रहा है ၊.भाजपा का कमाल है कि उसे हर सूबे में कांग्रेस के भीतर बिभीषण मिल जाते हैं. मिलते जा रहे हैं .ईडी और सीबीआई से घबड़ाई बसपा सुप्रीमो भी अब बिभीषन बनने पर विवश हैं ၊
        ..भविष्यवाणी की जा रही है कि राजस्थान सरकार को अब कोई 'माई का लाल' बचाने  वाला नहीं है और इस सरकार के गिरते ही भाजपा का 'कुरसी अश्वमेघ यज्ञ ' का घोड़ा महाराष्ट्र की और मुड़ जाएगा .၊महाराष्ट्र के  मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भाजपा को सरकार गिराने के लिए न्यौता दे चुके हैं ၊भाजपा जनता को उलझाए रखने के लिए योजनाबद्ध तरीके की तैयारी किये बैठी है. 5  अगस्त को राममंदिर का भूमि पूजन,15  अगस्त को कोविड वैक्सीन की घोषणा,बाद में रफाल लड़ाकू विमान का भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाना तो जगजाहिर है .आगे बिहार है,बंगाल है भाजपा इन्हीं शिगूफों के सहारे अगले चुनाव यानि 2024  तक की यात्रा पूरी कर लेगी ? परन्तु सोनिया गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस संगठन के कर्णधार से लेकर तमाम सेनापति या तो बुढ़ा  हो.गए हैं या उनमें  समर जीतने की सू

 


सुशांत सिंह राजपूत और दिशा की हत्या की गई -वरिष्ठ नेता नारायण राणे

सुशांत सिंह राजपूत और दिशा की हत्या की गई -वरिष्ठ नेता नारायण राणे

06-Aug-2020

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और बीजेपी के वरिष्ठ नेता नारायण राणे ने दावा किया है कि सुशांत सिंह राजपूत और उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत आत्महत्या नहीं, जबकि हत्या का मामला है।

 सियासत की  खबर के अनुसार, नारायण राणे ने मुंबई पुलिस एवं महाराष्ट्र सरकार पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सुशांत और दिशा दोनों की हत्या हुई है और इन दोनों मामलों की जांच एक-दूसरे से जोड़कर ही की जानी चाहिए।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की मौत केम मामलेम में मुंबई पुलिस पहले से सवालों के घेरे में है। सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान ने सुशांत की मौत से सिर्फ 6 दिन पहले आत्महत्या कर ली थी, लेकिन इन दोनों मौत की सही जांच न करने के आरोप मुंबई पुलिस पर लग रहे हैं।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने मंगलवार को इन दोनों ही मामलों को हत्या का मामला बताते हुए राज्य सरकार एवं मुंबई पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
राणे ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार दिशा सालियान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या हुई है।

 उसकी ऑटोप्सी रिपोर्ट में उसके प्राइवेट पार्ट्स पर चोट के गहरे निशान पाए गए हैं। मुंबई पुलिस चुप्पी साथ कर उन लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है, जो दोषी हैं।
राणे ने आरोप लगाया कि दिशा सालियान का परिवार काफी दबाव में है। जब मुंबई महानगरपालिका एक IPS अधिकारी को क्वारंटाइन कर सकती है, तो दिशा का परिवार कैसे बोल सकता है।
राणे ने कहा कि जब जरूरत होगी, वह दिशा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट संबंधित अधिकारी के सामने पेश करेंगे, और उस मंत्री का नाम भी बताएंगे, जो आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहा है। जब वह गिरफ्तार होगा, तो उसका नाम उसकी तस्वीर के साथ अपने आप सामने आ जाएगा।


महानायक  अमिताभ  बच्चन  कोरोना से जंग जीतकर लौटे ,बच्चन बोले- शुक्रिया !

महानायक अमिताभ बच्चन कोरोना से जंग जीतकर लौटे ,बच्चन बोले- शुक्रिया !

04-Aug-2020

कोरोना से जंग जीतते ही अमिताभ का ...

बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने कोरोना से जंग जीत ली है. एक्टर होम क्वारनटीन में हैं और रेस्ट कर रहे हैं. अमिताभ के लिए दुनियाभर के तमाम प्रशंसकों की दुआएं और प्यार हमेशा से खास मायने रखते रहे हैं. अपने फैन्स को बिग बी एक्सटेंडेड फैमिली कह कर बुलाते हैं. अमिताभ का फैन तो हर कोई है. अब जब अमिताभ स्वस्थ हो चुके हैं तो अमूल ने भी उन्हें खास अंदाज में इसकी बधाई दी है.

अमूल हमेशा से अपने कॉमिक पोस्टर्स के जरिए लोगों के साथ जुड़ता है. लॉकडाउन में रामायण के रीटेलिकास्ट को दुनियाभर में पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला था. तब भी अमूल ने अपनी इस यूनिक स्टाइल में सीरियल को ट्रिब्यूट दिया था. अब जब करोड़ों लोगों के आइकन 78 वर्षीय अमिताभ बच्चन कोरोना जैसे खतरनाक वायरस को मात देकर पूरी तरह स्वस्थ होकर वापस लौटे हैं, तो अमूल ने भी बड़ी गर्मजोशी से एक्टर का स्वागत किया है. अमूल ने अमिताभ के सम्मान में एक पोस्टर जारी किया है जो वाकई में आकर्षक है.

पोस्टर खुद महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. कॉमिक फोटो में अमिताभ सोफे पर बैठे हैं और मोबाइल देख रहे हैं. अमिताभ के बगल में क्यूट लिटिल अमूल गर्ल भी बैठी हुई है. फोटो में सेंटर ऑफ अट्रैक्शन तो वो जगह है जहां लिखा हुआ है- AB बीट्स C. अमिताभ ने पोस्टर शेयर करते हुए लिखा- ”शुक्रिया अमूल, हमेशा अपने अद्भुत और जुदा पोस्टर कैंपेन्स में मेरे बारे में सोचने के लिए. वर्षों से ‘अमूल’ ने सम्मानित किया है मुझे, एक साधारण शख्सियत को ‘अमूल्य’ बना दिया तुमने!”

फैन्स ने बिग बी के लिए किए हवन

बता दें कि अमिताभ बच्चन कुछ हफ्तों पहले कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. उन्हें मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अब वे पूरी तरह से स्वस्थ होकर घर वापस पहुंच चुके हैं. एक्टर की सलामती के लिए फैन्स ने प्रार्थना की दुआएं मांगी और हवन तक कर डाले. अमिताभ ने भी सभी का शुक्रिया अदा किया.

मीडिया इन पुट 


राहुल को RSS की विचारधारा पर चलने वाले कांग्रेसी मंज़ूर नही यही बने है उनकी राह का रोड़ा

राहुल को RSS की विचारधारा पर चलने वाले कांग्रेसी मंज़ूर नही यही बने है उनकी राह का रोड़ा

03-Aug-2020

लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी

राज्य मुख्यालय लखनऊ।देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को बाहरी रूप में तो संकटों का सामना करना ही पड़ रहा था साथ ही पार्टी के अंदर भी संकट का दौर चल रहा है।कहते है जब बुरा दौर चल रहा होता है तो ऊँट पर बैठे हुए कुत्ता काट लेता है इस लिए बहुत ही फूंक-फूंक कर क़दम रखना पड़ता है और यह सही भी है रखना भी चाहिए।ख़ैर जब मोदी की भाजपा सरकार चारों ओर से घिरी हुई नज़र आ रही है हर तरफ़ चाहे विदेश नीति,अर्थव्यवस्था या बढ़ता कोरोना का प्रकोप देश में बढ़ती बेरोज़गारी भी विकराल रूप ले रही है जिस तरफ़ नज़र दौड़ाओ तरही-तरही है मची हुई है जनता कांग्रेस की वापसी पर विचार करने को विवश लग रही है इसमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा मोदी सरकार को हर मोर्चे पर घेरने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहे ऐसे में पूरी कांग्रेस को राहुल गाँधी के पीछे लामबंद होना चाहिए था लेकिन नही वहाँ तो एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ मची है वरिष्ठ कांग्रेसियों द्वारा जो टांग खिंचाई की जा रही है उसका जनता में ग़लत संदेश जा रहा है जो कांग्रेस के भविष्य के लिए ठीक नहीं है अब सवाल उठता है कि क्या हमेशा वरिष्ठों ने कांग्रेस को कमज़ोर करने का काम किया ? कांग्रेस की सबसे बड़ी कमज़ोरी उसके अंदर ही मौजूद साँप नही अजगरों ने कांग्रेस और उसकी की विचारधारा को निगल लिया।राजनीतिक विशेषज्ञ का मानना है कि उसके अंदर RSS की विचारधारा को पसंद करने एवं उस पर काम करने वाले मौजूद है जो हिन्दुस्तान के राजनीतिक भविष्य राहुल गाँधी को मंज़ूर नही यही वजह है कि उसकी राह में रोड़े डालने में कोई कमी नही छोड़ी जा रही है लगता है कि राहुल सच्चाई और झूटो के चक्रव्यूहों के बीच में फँस गए है जबकि राहुल गाँधी यह साफ़ कर चुके है किसी ओर पर निशाना साधते हुए कि मेरा राजनीतिक भविष्य चाहे ख़त्म हो जाए लेकिन मैं झूठ की राजनीति नही करूँगा और न ही झूठ बोलूँगा राहुल गाँधी के इस बयान के बाद जनता में एक अलग ही संदेश गया झूठ के इस दौर में अगर कोई सच की बात करे तो उसका सकारात्मक संदेश जाना ही है जनता इस पर चर्चा कर रही कि राहुल गाँधी सच की राजनीति करना चाहते है लेकिन कांग्रेस के बुजुर्ग हो चुके नेता उन्हें अपने पुराने ढर्रे पर चलाना चाहते और उन्हें यह मंज़ूर नही है।जिन्होंने कांग्रेस की भट्टी पर चढ़ी कढ़ाई से दूध नही मलाई खाकर अपने आपको पाला पोसा है बल्कि मृतक आश्रितों को भी आगे बढ़ाने का काम किया आज वहीं उसमे कमियाँ निकाल कांग्रेस को कमज़ोर करने का प्रयास कर रहे है अब देखना यह है कि क्या हिन्दुस्तान का राजनीतिक भविष्य इनकी महत्वकांक्षाओं के चलते हार मान लेगा या अपने सिद्धांतों पर चलते हुए उनको अपने ही सिद्धांतों पर चलने के लिए मजबूर कर देगा।वैसे तो राहुल गाँधी के सक्रिय होने बाद से ही कांग्रेस में उनकी टांग खिंचाई शुरू हो गई थी जो अब मंजरे आम पर आ गई लगता है अब या तो कांग्रेस इससे भी बुरा दौर आएगा या कांग्रेस और उसकी विचारधारा इन वरिष्ठों के मकड़जाल से बाहर निकल निखर कर सामने आएगी और ऐसा जब हो सकता है जब सोनिया , प्रियांका व राहुल गाँधी एक साथ मज़बूत और पक्का मन कर इस कांग्रेस को इन्हीं पुराने कांग्रेसियों को सौंपकर नई कांग्रेस का गठन करे अपनी दादी आर्यन लेडी पूर्व प्रधानमंत्री स्व श्रीमती इंदिरा गाँधी की तरह जब कुछ हो सकता है नहीं तो ये संघ विचारक कांग्रेसी पार्टी को अपने पैरों पर खड़ी नही होने देंगे।कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी द्वारा के राज्यसभा सांसदों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिए बैठक ले रही थी इसी बीच कुछ सांसदों जिसमें पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल , पीएल पुनिया, राजीव सातव रिपुन वोरा एवं छाया शर्मा जैसे सांसदों ने राहुल गाँधी को फिर से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की माँग की उनका तर्क था कि देश के मौजूदा सियासी हालात का सामना राहुल गाँधी जिस मज़बूती के साथ सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभा रहे है उससे साफ़ हो जाता है राहुल को पार्टी की कमान सौंप देनी चाहिए।वह मोदी सरकार की नकारात्मक नीतियों को जनता के बीच रख रहे है जबकि आज देश में मोदी सरकार के सामने खड़े होने की किसी भी पार्टी अथवा नेता की हिम्मत नही हो रही है लेकिन राहुल गाँधी सीना ठोंककर मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध कर और मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे है।इसके बाद बुज़ुर्ग कांग्रेसी राज्यसभा के सांसद पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल एवं आनन्द शर्मा आदि जैसे सरीखे नेताओं ने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते-लगाते उनका दर्द छलक गया उन्होंने कहा कि वेणुगोपाल और सातव को राज्यसभा में भेजने का फ़ैसला राहुल गाँधी ने किसकी सलाह पर लिया और किस हैसियत से लिया मामला यही नही रूका राहुल गाँधी द्वारा ट्विटर पर मोदी सरकार से सवाल पूछने को भी ग़लत क़रार दिया राहुल विरोधी कांग्रेस नेताओं का कहना था कि हमें नही पता राहुल गाँधी को सवाल पूछने की सलाह कौन देता है उसे विदेश नीति एवं रक्षा नीति का क्या ज्ञान है।इनका यह भी तर्क था कि इस तरह के सवालों से पार्टी को कोई फ़ायदा नही हो रहा है।वह यही नही रूके उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी के क़रीबी ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट जैसे ही पार्टी को कमज़ोर कर रहे है इन हालात में पार्टी की कमान यदि राहुल गाँधी के हाथ में दे भी दी तो वह पार्टी को कैसे सँभालेंगे इसकी क्या गारंटी है कि उनकी टीम के सदस्य आगे मोदी की भाजपा में नही जाएँगे यह सब सोनिया गाँधी की मौजूदगी में ही हो रहा था।राहुल विरोधियों के द्वारा पहली बार सार्वजनिक रूप से राहुल गाँधी का विरोध किया यह सब होता देख कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष त्याग की मूर्ति सोनिया गाँधी ख़ामोशी अख़्तियार किए रही लेकिन राहुल गाँधी के हामी सांसद ख़ामोश नही रहे उन्होंने बुजुर्गों पर यूपीए 2 में ख़राब प्रदर्शन को हथियार बनाते हुए पार्टी को इस हालत में लाने का ज़िम्मेदार बता दिया उन्होंने कहा कि यूपीए दो में आप सरकार में मंत्री थे इसके बाद भी पार्टी को नुक़सान हुआ जिसका ख़ामियाज़ा पार्टी अभी तक भुगत रही है।इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ग़ुलाम नबी आज़ाद, पार्टी के कोषाध्यक्ष रणनीतिकारों में शामिल अहमद पटेल पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी जिन्होंने पार्टी की 2014 में हुई हार के बाद बनी जाँच कमेटी की रिपोर्ट देते हुए कहा था कि पार्टी की हार मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से हुई है जबकि वह यह नही बता पाए थे कि क्या मुस्लिम तुष्टिकरण किया गया है मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप संघ एवं भाजपा के नेताओं का एक षड्यंत्र था बहुसंख्यकों को बहकाने का जिसमें वह कामयाब रहे और अब तक भी है जिसे एंटनी कमेटी ने मज़बूती दी थी उन्होंने भी संघ के दृष्टिकोण को सही क़रार दे दिया था जिसे किसी भी नज़रिये से सही नही कहा जा सकता था मुसलमान को कांग्रेस ने नुक़सान के सिवा कुछ नही दिया इसके बाद भी मुसलमान पूरी इमानदारी दयानत दारी से कांग्रेस के साथ खड़ा रहा एंटनी उन तथ्यों को उजागर नही कर पाए थे जिनकी वजह से यूपीए दो को नुक़सान हुआ जैसे केन्द्रीय गृह सचिव आर के सिंह मोदी की भाजपा के लिए काम कर रहे थे यूपीए दो ने उन्हें केन्द्रीय गृह सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर बिठा रखा था जो रिटायर होने पर मोदी की भाजपा में शामिल हुआ आज उसी साम्प्रदायिक पार्टी भाजपा से सांसद है।मुम्बई पुलिस कमिश्नर रहते RSS के मुख्यालय नागपुर में रोज़ हाजरी लगाने वाले सतपाल सिंह मुम्बई पुलिस कमिश्नर के पद पर विराजमान थे सरकार कांग्रेस की थी लेकिन लगता है उन्हें यह सब दिखाई नही दे रहा था इसी पुलिस कमिश्नर मुम्बई ने वीआरएस लेकर 2014 में अपनी जाति की राजधानी बागपत से लोकसभा का चुनाव लड़ा और उन्होंने जाटों के सर्वमान्य नेता की उपाधि लिए घूम रहे चौधरी अजित सिंह को सियासी पटकनीं देते हुए हरा दिया आज भी वही से सांसद है जब ऐसी विचारधारा के अफसरों को हॉट सीट पर बैठाया जाएगा तो परिणाम भी इसी तरह के आएँगे ऐसे और भी कई नाम है जो यूपीए दो में मोदी की भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे थे लेकिन संघ विचारधारा के हामी कहने को कांग्रेसी ख़ामोशी की चादर ओढ़े सत्ता का आनन्द ले रहे थे पार्टी को बर्बादी के कगार पर पहुँचा रहे थे एंटनी ने उनको निशाना नही बनाया था जो RSS चाहता था वही रिपोर्ट दी थी बैठक में एंटनी भी शामिल थे लेकिन यह ख़ामोश रहे दोनों की तरफ़ से नहीं बोले।अहमद पटेल ने 37 सालों बाद आई शिक्षा नीति पर अपने सुझाव रखे।पूर्व गृहमंत्री रहे पी चिदंबरम ने ज़मीनी स्तर पर पार्टी के कमज़ोर होते संगठन पर भी चिंता जताई लेकिन यूपीए के दस साल के शासनकाल में संगठन के लिए क्या किया इस पर कुछ नही बताया यूपीए एक और दो का यह हाल था कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की कोई हैसियत नही थी दोनों कार्यकाल में शामिल मंत्रियों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है ना यह था कि यह कमज़ोर क्यों और किस कारण से हुआ जिस राज्य में पार्टी का संगठन कमज़ोर था वहाँ के लोगों को बुलाकर कितनी बार चर्चा की गई यूपी की बात करे तो पिछले तीन दसको से पार्टी वेंटिलेटर पर चल रही है इसके बावजूद कहने को इन बड़े और सरीखे नेताओं ने क्या और क्यों प्रयास नहीं किए इसका कोई जवाब नहीं है जबकि यूपी ने यूपीए दो को इसी वेंटिलेटर पर पड़ी कांग्रेस ने 22 सांसद दिए थे उसके बाद भी यूपी पर कोई ध्यान नही दिया गया जबकि यूपी के नेता भी केन्द्र में मंत्री थे तब भी कुछ नही किया गया यूपी में अब आकर पार्टी महासचिव यूपी प्रभारी श्रीमती प्रियांका गाँधी मेहनत कर रही है जिसका असर साफ़ देखा जा सकता है।कपिल सिब्बल ने पार्टी में सभी को अपनी-अपनी समीक्षा करने की ओर इसारा किया।संगठन को मज़बूत बनाने के लिए ज़ोर आज़माइश करने की ज़रूरत है न कि पार्टी का अध्यक्ष बनाने की।राहुल गाँधी फिर से अध्यक्ष नही बनना चाहतें हैं।2019 के आमचुनाव में कांग्रेस को अपेक्षा से बहुत कम सीटें मिली थी बल्कि पार्टी की करारी हार हुई थी जिसकी ज़िम्मेदारी लेते हुए पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए कहा था कि गाँधी परिवार से पार्टी का कोई अध्यक्ष नही होगा कांग्रेसियों की लाख मान मनोव्वल के बाद भी राहुल गाँधी नही माने थे इनके अलावा भी अन्य कोई आगे नही आया था जिसके बाद सोनिया गाँधी को ही अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था जो अभी तक है।परमानेन्ट अध्यक्ष बनाने की माँग के चलते ही राहुल गाँधी का नाम फिर आगे किया जा रहा था जिसमें बुजुर्गों ने टांग मार दी है।सियासी जानकारों का कहना है राहुल गाँधी सिद्धांतवादी नेता है अब वह पार्टी का पुनः अध्यक्ष नही बनना चाहेंगे।इन वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का यह भी आरोप है कि राहुल प्रियांका गाँधी सोनिया गाँधी की भी बात नहीं सुनते है।मनीष तिवारी ने भी पार्टी से चार सवाल किए है पहला सवाल क्या 2014 के आमचुनाव में कांग्रेस के ख़राब प्रदर्शन लिए यूपीए दो की सरकार की नीतियाँ ज़िम्मेदार थी दूसरा क्या यूपीए के अंदर ही साज़िश रची गई थी तीसरा 2019 के आमचुनाव की भी समीक्षा होनी चाहिए चौथा सवाल पिछले छह साल में यूपीए पर किसी तरह का आरोप नही लगाया गया।पूर्व केन्द्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि यूपीए सरकार ने सूचना का अधिकार खाद्य सुरक्षा क़ानून और शिक्षा का अधिकार जैसे जनता के लिए अच्छे क़ानून बनाए।ऐसे में अगर मूल्यांकन करना है तो इसका भी होना चाहिए कि यूपीए सरकार पर जो ग़लत लांछनों की बारिश की गई उस सियासी षड्यंत्र में कौन-कौन वरिष्ठ या कनिष्ठ शामिल थे।उन्होंने तत्कालीन सीएजी विनोद राय की क्या मंशा थी इसकी भी समीक्षा होनी बेहद ज़रूरी है कि इतनी उपलब्धियों के बाद भी हम क्यों 2014 हार गए इसके बाद मोदी की झूट पर आधारित सरकार 2019 में भी क्यों जीत गई और हम क्यों हार गए।यूपीए ने बर्बाद कर दिया यह कहना ग़लत है।यूपीए पर जो कीचड़ उछाला गया था वह सब षड्यंत्रकारी की देन था।इन्हीं सब आरोप प्रत्यारोपों के चलते कांग्रेस को ऑक्सीजन दिया जा रहा है जबकि सामने झूठ का महल बनाने वाला है इसके बावजूद भी कांग्रेसी अपने पुराने ढर्रे से बाहर आने को तैयार नही है।सोनिया राहुल प्रियांका गाँधी कांग्रेस को खड़ी करने के चाहे जितने गंभीर प्रयास कर ले लेकिन कांग्रेस के ये बुज़ुर्ग और युवाओं की लड़ाई उन तीनों के संयुक्त प्रयास को पलीता लगा रही है इस आपसी खींच तान के क्या नतीजे निकल कर आएँगे यह तो आनेवाले दिनों में पता चलेगा जिसे हम भी देखेंगे और आप भी देखेंगे। 


कोरोना की दहसत - मालिक माकन ने किरायेदार को घर में आने से रोका !

कोरोना की दहसत - मालिक माकन ने किरायेदार को घर में आने से रोका !

31-Jul-2020

ना तेलंगाना के जगतियाल जिले से है जहाँ एक माकन के मालिक ने  किरायेदार में कोरोना सकारात्मक पाए जाने के बाद अपने घर में प्रवेश नहीं करने दिया।

सियासत डॉट कॉम की खबर के अनुसार  जब आदमी संक्रमित पाया गया, तो उसे अस्पताल ले जाया गया; चूंकि अस्पताल में कोई खाली बिस्तर नहीं थे, इसलिए उन्हें घर पर रहने के लिए कहा गया। जब वह अपने किराए के घर में पहुंचा, तो मालिक ने उसे अंदर नहीं जाने दिया।

पुलिस के हस्तक्षेप की मदद से शख्स को अस्पताल में भर्ती कराया जा सका। जबकि, उनका परिवार अस्पताल के दूसरे कमरे में भी रहता है।

हाल ही में एक अन्य हृदय विदारक घटना में, एक महिला जो कोरोनोवायरस को हराकर घर लौट आई थी, उसे सड़क पर रात बितानी थी। उसके बेटे ने महिला को घर में घुसने नहीं दिया। अपनी पत्नी के साथ, उसने घर को बंद कर दिया और पीछे के दरवाजे से भाग गया।

 

 


   आज ग्लोबल टाइगर  डे  भारत में कितने बचे है

आज ग्लोबल टाइगर डे भारत में कितने बचे है

29-Jul-2020

आज ग्लोबल टाइगर डे है। इस वक्त पूरी दुनिया में करीब 4,200 बाघ बचे हैं। सिर्फ 13 देश हैं जहां बाघ पाए जाते हैं। इनमें से भी 70% बाघ भारत में हैं।
भास्कर डॉटकॉम पपर छपी खबर के अनुसार, मंगलवार को पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 2018 की ‘बाघ जनगणना’ की एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की। ये जनगणना हर चार साल में होती है।
उन्होंने बताया कि 1973 में हमारे देश में सिर्फ 9 टाइगर रिजर्व थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 50 हो गई है। ये सभी टाइगर रिजर्व या तो अच्छे हैं या फिर बेस्ट हैं।
बाघों की घटती आबदी पर 2010 में रूस के पीटर्सबर्ग में ग्लोबल टाइगर समिट हुई थी, जिसमें 2022 तक टाइगर पॉपुलेशन को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया था।

 इस समिट में सभी 13 टाइगर रेंज नेशन ने हिस्सा लिया था। इसमें भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, रूस, थाईलैंड और वियतनाम शामिल थे।

2010 में तय किए लक्ष्य की ओर भारत तेजी से बढ़ रहा है। आठ साल में ही यहां बाघों की आबादी 74% बढ़ी। जिस तेजी से देश में बाघों की आबादी बढ़ रही है उससे उम्मीद है कि 2022 का लक्ष्य भारत हासिल कर लेगा।

2012 से लेकर 2017 तक भारत में 560 बाघों की जान गई, इनमें से 38% का अवैध शिकार हुआ
भा रत में 6 साल में 560 बाघों की मौत हुई, जिनमें से 152 की मौत का कारण पता नहीं चल सका। जिन 408 बाघों की मौत का कारण पता चला उनमें से 55% बाघ ऐसे थे जिनकी नेचुरल डेथ हुई। 38% का अवैध शिकार हुआ। 4% कार या ट्रेन एक्सीडेंट में मारे गए।

 देश के 20 राज्यों में कुल 2,967 बाघ हैं। इनमें से 1,492 बाघ मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड में हैं।

 यानी सिर्फ तीन राज्यों में ही देश में बाघों की कुल आबादी के 50% से ज्यादा बाघ रहते हैं। अगर दुनिया के लिहाज से देखें तो इन तीन राज्यों में बाघों की कुल आबादी का 35% बाघ रहते हैं।

 2010 से 2018 के बीच भारत में बाघों की आबादी 74% बढ़ी है। 2022 तक बाघों की आबादी को डबल करने के लिए किसी भी देश की टाइगर पॉपुलेशन ग्रोथ हर साल 9% से थोड़ी कम होनी चाहिए। भारत की ये ग्रोथ रेट 9% से ऊपर की है। इस ग्रोथ रेट से 2022 तक भारत में बाघों की आबादी आसानी से डबल हो जाएगी।


 


हेपेटाइटिस से बचने के लिए जागरूकता है जरूरी, डॉ. मीरा बघेल

हेपेटाइटिस से बचने के लिए जागरूकता है जरूरी, डॉ. मीरा बघेल

28-Jul-2020

कोविड-19 के संकट के बीच दुनिया भर में मनाया जा रहा है हेपेटाइटिस दिवस 
। विश्व भर में कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण  के बीच आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जा रहा है । हेपेटाइटिस से बचने के लिए लोगों में जागरूकता का होना जरूरी है । इसके कारण और बचाव के उपाय के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए हर वर्ष 28 जुलाई को हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है । 
वैश्विक महामारी (कोविड-19) को देखते हुए इस बार वर्चअल कार्यक्रम आयोजित किए जाने का निर्णय लिया गया है । इस बार हेपेटाइटिस दिवस की थीम 'हेपेटाइटिस फ्री फ्यूचर'रखा गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मीरा बघेल ने बताया हेपेटाइटिस एक जानलेवा बीमारी है, जिसके प्रति लोगों में जागरूकता की काफी कमी है। वैज्ञानिकों ने हेपेटाइटिस के लिए पांच जिम्मेदार वायरसों की खोज की है। इन्हें ए, बी, सी, डी और ई नाम दिया गया है।
 हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण शरीर में कई साल तक खामोश रहता है। इससे क्रोनिक हेपेटाइटिस होने का खतरा बढा रहता जिसके बाद मरीज का लीवर ख़राब हो जाता है| 
हेपेटाइटिस से बचने के लियें सावधानी 
साफ-सफाई पर सबसे पहले ध्यान रखना, ब्रश और रेजर को साझा नहीं करना, और शराब के सेवन से बचना। शुरुआती दौर में हेपेटाइटिस के लक्षण समझ नहीं आते है। समयानुसार थकान, भूख न लगना, पेट में दर्द, सिर का दर्द, चक्कर आना,मूत्र का पीला होने की समस्याएं आने  लगती हैं।इस प्रकार की समस्या होने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें ।
शुरुवाती लक्षण 
कई लोगों को प्रारंभ में हेपेटाइटिस के लक्षण दिखाई नहीं देते है। कुछ के लक्षण 15 से 180 दिनों के बाद दिखाई देने लगते हैं जिसमें बुखार आना, डायरिया होना, थकान महसूस होना, उल्टीयॉ होना, भूख न लगना, घबराट होना पेट में दर्द की शिकायत रहना, और वजन में  कमी आना है। त्वचा, आंखों के सफेद भाग, जीभ का रंग पीला पड़ जाना (ये लक्षण पीलिया में दिखाई देते हैं)| 

 


कोरोना की तबाही में  महा कोरोना बन कर डराने लगी है संशोधित मीडिया नीति !

कोरोना की तबाही में महा कोरोना बन कर डराने लगी है संशोधित मीडिया नीति !

27-Jul-2020

कोरोना की तबाही में क्यों लागू हो रही संशोधित मीडिया नीति !

 कोराना के मुश्किल दौर में भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की संशोशित 'मीडिया नीति 2020' एक अगस्त से लागू होने जा रही है। ये देश के हज़ारों मझौले अखबारों को महा कोरोना बन कर डराने लगी है। हिन्दी पट्टी के सार्वाधिक अखबारों वाले उत्तर प्रदेश में इसका सबसे अधिक खौफ है। इस सूबे से प्रेस कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के सदस्य भी संशोधित नीति को ग़लत ठहरा रहे हैं। मंझोले अखबारों पर लटकटी तलवार से प्रदेश की राजधानी के लगभग एक हजार राज्य मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकारों में सैकड़ों पत्रकारों की मान्यता भी खतरे में पड़ सकती है। इसलिए यहां पत्रकार मीडिया संगठनों के नेताओं पर दबाव बना रहे हैं कि वो संशोधित मीडिया नीति के खिलाफ आवाज उठायें। 
इस संशोधित नीति के तहत पच्चीस से पैतालिस हजार के बीच प्रसार वाले पत्र-पत्रिकाओं को आर.एन.आई. या एबीसी की जटिल जांच करानी होगी। इस जांच में मंहगी वेब प्रिंटिंग मशीन, न्यूज प्रिंट(अखबारी क़ागज) और इंक इत्यादि की डिटेल, कार्यालय स्टॉफ, पीएफ, प्रसार डिस्ट्रीब्यूशन के सेंटर आदि का विवरण देना होगा। कम संसाधन वाले संघर्षशील समाचार पत्रों के लिए ऐसी अग्नि परीक्षा देना मुश्किल है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अखबारों के पत्रकारों की राज्य मुख्यालय की मान्यता के लिए पच्चीस हजार से अधिक प्रसार होना ज़रूरी है। यदि मंझोले अखबार जांच से बचने के लिए अपने अखबारों का प्रसार पच्चीस हजार से कम करके लघु समाचार पत्र के दायरे में आ जाते हैं तो ऐसे अखबारों के सैकड़ों पत्रकारों की राज्य मुख्यालय की मान्यता समाप्त हो जायेगी। इसलिए यूपी के मीडिया संगठनों पर प्रकाशक और पत्रकार ये भी दबाव बना रहे हैं कि वे योगी सरकार से प्रेस मान्यता के मानकों को संशोधित करवाना का आग्रह करें। ताकि संशोधित मीडिया नीति के तहत जांच से बचने के लिए मझोले वर्ग से लघु समाचार पत्र के दायरे में आने वाले समाचार पत्रों के पत्रकारों की मुख्यालय मान्यता बच जाये।
इन तमाम घबराहट, बगावत, सियासत और विरोध के बीच प्रेस कॉउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य अशोक नवरत्न और रज़ा रिज़वी केंद्र सरकार के सूचना एंव प्रसारण मंत्रकालय के फैसले के खिलाफ प्रकाशकों और पत्रकारों के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
कुछ मीडिया संगठनों ने भी संशोधित नीति का विरोध करना शुरु कर दिया है। इसे छोटे अखबारों को खत्म करने की साजिश बताया जा रहा हैं। 
चर्चा ये भी है कि देश के चंद बड़े अखबारों ने स्थानीय अखबारों को खत्म करने के लिए ऐसी साजिश रची है। सोशल मीडिया पर प्रकाशकों और कलमकारों का विरोध मुखर हो रहा है-

हर क्षेत्र की बड़ी ताकतें होती हैं। ऐसी शक्तियां अपने क्षेत्र की संघर्षशील प्रतिभाओं को उभरने नहीं देना चाहतीं। जैसा कि उभरते हुए फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह की आत्महत्या की वजह के पीछे फिल्म उद्योग की बड़ी ताकतों को शक की निगाहों से देखा जा रहा है।
 ताकत की ताकत से दोस्ती होती है। बड़ी मीडिया इंडस्ट्रीज की हर सरकार से दोस्ती रही है। दोस्त दोस्त के काम भी आता है। इन दिनों कोरोना काल की तबाही में तबाह होती हर इंडस्ट्री की तरह मीडिया की अखबारी खर्चीली ब्रॉड इंडस्ट्री बुरी तरह आर्थिक मंदी का शिकार है। कई संस्करण बंद कर दिए, पेज भी कम कर लिए। छंटनी कर ली। वेतन आधा कर दिया। कांट्रेक्ट पर काम कर रहे मीडियाकर्मियों का रिनिवल बंद कर दिया। कॉस्ट कटिंग और छट्नी की तलवाल भी चला दी, लेकिन फिर भी कमाई के मुख्य द्वारा लगभग बंद हैं। वजह साफ है। मीडिया में सरकारी और गैर सरकारी विज्ञापन ही अर्निंग के दो रास्ते होते हैं। कोरोना की चपेट में ये आधे हो गये हैं। सरकार आने वाले समय में विज्ञापन जैसे खर्चों का खर्च और भी कम कर सकती है। गैर सरकारी विज्ञापन आधे से भी कम हो गया है। कार्पोरेट के कामर्शियल विज्ञापनों से लेकर वर्गीकृत विज्ञापन बेहद कम हो गये हैं।
अब कैसे अपने बड़े खर्च पूरे करें ! कैसे विज्ञापन का स्त्रोत बढ़ायें ! इस फिक्र में बड़े ब्रॉड अखबारों को एक रास्ता सूझा होगा !
 विज्ञापनों के बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा छोटे लोकल अखबारों के हिस्से में चला जाता है। ये खत्म हो जायें या लघु वर्ग में पंहुचकर इनकी विज्ञापन दरें बेहद कम हो जायें तो सरकारी विज्ञापन के अधिकांश बजट पर बड़े अखबारों का कब्जा हो जायेगा। ये डूबते को तिनके का सहारा होगा।
शायद इसी लिए ही देश के बड़े  मीडिया समूहों के दबाव में इस कोरोना काल के तूफान में भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय संशोधित मीडिया पॉलिसी लागू कर रहा है।
नहीं तो ऐसे वक्त में जब पीआई बी में नियमित अखबार जमा होने का सिलसिला तक चार महीने से रुका है। आर एन आई ने तीन महीने विलम्ब से एनुअल रिटर्न का सिलसिला शुरू किया। 
देश में सबकुछ अस्त-वयस्त है। पुराने जरूरी रुटीन काम तक बंद है। सूचना मंत्रालय के अधीन कार्यालय में ही कोरोना संक्रमण से बचाव के मद्देनजर शेडयूल वाइज थोड़े-थोड़े कर्मचारी बुलाये जाते हैं। ऐसे में देश के सैकड़ों अखबारों और सैकड़ों कर्मचारियों को फील्ड में निकल कर इकट्ठा होने का नया काम देने वाली नई संशोधित मीडिया पॉलिसी को हड़बड़ी में लागू करने का क्या अर्थ है !
 नियमानुसार मीडिया पॉलिसी संशोधन से पहले प्रेस कॉउन्सिल ऑफ इंडिया की सहमति लेना जरुरी होती है, किंतु कौंसिल के सदस्य आरोप लगा रहे हैं कि इस संबंध में उनसे परामर्श के लिए कोई बैठक तक नहीं हुई।
उत्तर प्रदेश से कौंसिल के सदस्य सवाल उठा रहे हैं कि कोरोना काल में कम संसाधन वाले संघर्षशील समाचार पत्र जो पहले ही आर्थिक तंगी से बेहाल हैं ऐसे में उनपर जांच थोपने का क्या अर्थ है।

ऐसे में देश के कोरोना काल में मध्यम वर्गीय समाचार पत्रों के प्रकाशकों को एक नया कोरोना डराने लगा है। कोविड 19 वाले कोरोना वायरस की चपेट वाले तीन फीसद को जान का खतरा और 97% को ठीक होने की उम्मीद होती है। लेकिन यहां अखबार के प्रकाशकों को जिस नये कोरोना का डर सता रहा है उसमें 97% को खत्म हो जाने का डर है।
पब्लिशर्स को डराने वाले कोरोना  संशोधित मीडिया पॉलिसी के अंतर्गत मंझोले वर्ग के प्रसार वाले पत्र-पत्रिकाओं को निर्देश दिया गया है कि इन्हें आर.एन.आई या ए बी सी की जटिल जांच की अग्नि परीक्षा से ग़ुजरना होगा। तब ही मध्यम वर्गीय प्रसार संख्या वर्ग में सरकारी विज्ञापन की दर बर्करार रहेगा, अन्यथा इनकी डीएवीपी की मान्यता समाप्त कर दी जायेगी। जांच ना कराने की स्थिति में प्रकाशकों के पास एक मौका है। वो पच्चीस हजार के ऊपर के प्रसार का दावा छोड़कर पच्चीस हजार के अंदर प्रसार का ही दावा करें। यानी लघु समाचार के वर्ग में आकर वो कम विज्ञापन दरों में ही संतोष करे, अन्यथा जांच करायें। जो ज्यादातार प्रकाशकों के लिए मुम्किन ही नहीं नामुमकिन है। इसलिए प्रकाशक कह रहे हैं कि जांच का ये कोरोना हमें मार देगा !
- नवेद शिकोह


कोरोनाकाल में छत्तीसगढ़ की  महिलाओं ने ढूंढा रोजगार का अवसर : खबर कबीरधाम जिले की

कोरोनाकाल में छत्तीसगढ़ की महिलाओं ने ढूंढा रोजगार का अवसर : खबर कबीरधाम जिले की

27-Jul-2020

-फल और सब्जियों का उपयोग कर महिला समूहों ने बनाई राखियां 
- राखियों से कोरोना से बचाव का दे रहीं संदेश, होम डिलीवरी की सुविधा भी

।कवर्धा जिले की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने कोरोनाकाल में धैर्य को बरकरार रखते हुए रोजगार का अवसर ढूंढ लिया है। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जिले के महिला  स्वयं सहायता समूह ने फल एवं सब्जियों से अनोखी राखियां बनाकर खुद के लिए आमदनी का जरिया तलाशा है। ऱाखियां बनाकर बिक्री के साथ ही समूह की महिलाएं हैंडवाश और मास्क का उपयोग कर कोविड-19 से बचाव का संदेश भी दे रही हैं।  

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” के तहत  कार्य करने वाली महिला समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित हैंड मेड राखियों को लोग काफी पसंद भी कर रहे हैं। कलेक्टर कार्यालय एवं जिला पंचायत परिसर एवं  जिले के सभी जनपद पंचायतों में महिला समूह की स्वदेशी और हाथ से बनी हुई राखियों की बिक्री की जा रही है। दो दिनों से राखियों की बिक्री शुरू की गई है जो 3 अगस्त तक चलेगी। अभी तक लगभग 3000 से अधिक रूपए की राखियों की बिक्री हो चुकी हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत विजय दयाराम के मार्गदर्शन में जिले के बहुत सी महिला स्व सहायता समूह द्वारा राखी निर्माण का कार्य किया जा रहा है। प्राकृतिक सामान का उपयोग कर समूह की महिलाओं ने अब तक जिला पंचायत में 1000 रुपये से अधिक की राखियां विक्रय की है। जनपद पंचायत बोड़ला के मुख्यालय में आंचल स्वयं सहायता समूह पौड़ी की महिलाओं ने 1200 रुपये से अधिक की राखियां  का विक्रय किया है । कोरोना महामारी को देखते हुए महिला स्वयं सहायता समूह ने होम डिलीवरी की सुविधा भी जिले वासियों को दी है जिसके लिए विकासखंड कवर्धा के मुख्यालय से संपर्क किया जा सकता है। मां दुर्गा समूह की अध्यक्ष श्रीमती कुमारी लाझी बताती है लॉकडाउन और कोरोनाकाल में कामकाज बंद हो गए थे। ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो गया। समूह की महिलाओं ने त्योहार को देखते हुए और देसी सामान से राखी बनाकर स्वरोजगार पाया है। 
पर्यावरण के अनुकूल हैं राखियां- जय मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की सदस्य नूतन झरिया ने बताया राखियां प्राकृतिक चीजों को मिलाकर बनाई गई है, जो पर्यावरण के अनुकूल है। ऱाखी निर्माण और सजावट में बॉंस के छिलके और देसी बीजों जैसे लौकी, खीरा, भिंडी के बीज, धान के दाने, चावल के दाने का इस्तेमाल किया गया है।
मोर राखी किट में कोविड बचाव उपाय भी - स्टॉल लगाकर बिक्री की जा रही राखियों में कॉम्बो पैक मोर राखी किट भी है। 110 रूपए मूल्य की इस किट में एक जोड़ी स्वदेसी राखी , रोली चावल, चॉकलेट के साथ ही कोरोनावायरस से बचाव के लिए स्वदेसी सेनेटाइजर, कपड़े का हाथ से बनाया हुआ मास्क, रूमाल भी है। बिक्री स्टॉल पर महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कोविड बचाव के लिए हाथों को साफ करने, मास्क पहनने, लोगों से दूरी बनाकर रखने के प्रति लोगों को जागरूक भी कर रही हैं।  

 


घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम मलेरिया वारियर्स ने की लोगों की जांच

घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम मलेरिया वारियर्स ने की लोगों की जांच

25-Jul-2020

21 सदस्य टीम ने तीन दिन में की 3000 से ज़्यादा मलेरिया जांच
प्रथम चरण की तुलना में कम मिले पॉजिटिव

रायपुर  23 जुलाई 2020 ।कभी मीलों पैदल चले, तो कभी ट्रेक्टर पर बैठे, उबड़ खाबड़ रास्ते में गिरे तो कहीं धूल में कपड़े सने, कहीं बारिश में पूरी तरह भीगे लेकिन गीले कपड़ों में ही पहुंच गए सुकमा जिले के सुदूर अंचलों में । 
अक्सर शरीर के ताप से ही कपड़े सूख जाते है या कभी गीले कपड़ों में ही पूरे गांव की मलेरिया जांच करते हुए स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर अंचलों में लोगों के द्वार तक पहुंचाया।
खंड चिकित्सा अधिकारी कोंटा डॉ. कपिल देव कश्यप के नेतृत्व में सुकमा जिले के सुदूर अंचलों के घोर नक्सल प्रभावित --तिमापुरम, मोरपल्ली, किस्टाराम, पोलमपाड़, बोड़केल, रावगुड़ा और  चिंतागुफा में घर घर जाकर मलेरिया की जांच करके अपने सामने दवा खिलाकर ही उपचार शुरू करते है।
सीएमएचओ (सुकमा) डॉ. सी बी प्रसाद बंसोड़ ने कहा मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के प्रथम चरण में 2.86 लाख लोगों का टेस्ट किया गया था जिसमें 16,599 लोग पॉजिटिव आए थे । उन सभी का फॉलोअप के बाद स्लाइड टेस्ट किया गया, जिसमें 550 पॉजिटिव आए और उन सभी का पूर्ण उपचार भी किया गया।
वहीं अभियान के द्वितीय चरण में भी 2.86  लाख लोगों का टेस्ट करने का लक्ष्य रखा गया है । 21 जुलाई तक लगभग 2.34 लाख लोगों तक पहुंचा गया है जिसमें 3,723 लोग पॉजिटिव आए है जो पूर्व की तुलना में काफी कम हैं ।
पोलमपाड़ के निवासी हिंगा (बदला हुआ नाम) बताते हैं उनका क्षेत्र काफी दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में है जहाँलोग दवाई से ज्यादा झाड़-फूंक में विश्वास करते हैं । लोगों को मलेरिया (जुड़ी बुखार) जब होता है तो वह स्थानीय बैगा से झाड़-फूंक करवाते हैं । जब हालत ज़्यादा नाजुक हो जाती है तब स्वास्थ्य केंद्र पर जाते हैं ।``मलेरिया से बचने के लिए सरकार द्वारा चलाया जा रहा मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान कार्यक्रम बहुत अच्छा है । हम तो स्वास्थ्य कर्मियों से यही कहेंगे आप लोग हमेशा यहॉ आते रहा करिए,’’ उसने कहा ।
खंड चिकित्सा अधिकारी कोंटाडॉ. कपिल देव कश्यप ने बताया मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का द्वितीय चक्र तीन चरणों में चलाया जा रहा है ।प्रथम चरण में बरसात में सम्पर्क बाधित हो जाने वाले क्षेत्र में आर.डी. किट से सभी लोगों के रक्त की जांच और सकारात्मक लोगों का पूर्ण उपचार 15 जून से 30 जून तक सम्पन्न किया गया है । उसके बाद 1 जुलाई से 31 जुलाई तक ऐसे क्षेत्र जहाँ मलेरिया बुखार के प्रकरण अधिक पाये गये हैं । उन क्षेत्रों में सभी लोगों के खून की जांच से की जायेगी । साथ ही  पूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जायेगा।इसके बाद सामान्य क्षेत्र में लोगों का रक्त परीक्षण उपचार की गतिविधियां सम्पन्न होगी।
डॉ. कश्यप ने कहा मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का द्वितीय चक्र में  21 सदस्यीय टीम के साथ सुकमा जिले के सुदूर अंचलों के जगरगुंडा क्षेत्र के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों जैसे तिमापुरम, मोरपल्ली, किस्टाराम, पोलमपाड़, बोड़केल, रावगुड़ा और  चिंतागुफा के पालामड़गू में घर घर जाकर 3 दिनों में लगभग 3000 से अधिक लोगों की मलेरिया की जांच की गयी।  इसमें 55 लोगों को मलेरिया के लक्षण पाये गये थे जिनका उपचार शुरु किया गया है । गर्भवती महिलाओं की मलेरिया की जांच, हिमोग्लोबिन जांच,टीकाकरण , वज़न , मच्छरदानी की उपलब्धता एवं अन्य मरीजों का इलाज भी किया गया।टीम में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके)के डॉ. वेद साहू,ग्रामीण चिकित्सा सहायक (आरएमए)मुकेश बख्शी, युवराज साहू और यूनिसेफ से आदर्श कुमारके साथ स्वास्थ्य विभाग के अन्य साथी भी थे।
मेडिकल आफिसर डॉ.व्यंकटेशने बताया जिस जगह भी जाना होता है वहॉ पर स्थानीय सम्पर्क के माध्यम से  लोगों को संदेश भेजा जाता है ताकि टीम जब पहुंचे तो सभी लोग मिल जायें जिससे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को स्वास्थ्य का लाभ मिले ।टीम के द्वारा मलेरिया जॉच ही नही अन्य जॉचें भी की जाती है । स्थानिय लोगों का सहयोग भी रहता है ।
सीएमएचओ डॉ.सीबी प्रसाद बंसोड़ ने बताया क्षेत्र के कई इलाकों में पहुंच पाना अपने आप में एक चुनौती से कम नही है । कई क्षेत्र नक्सल प्रभावित होनें के साथ पहुंच विहीन भी है। बारिश में कई ग्राम टापू में तब्दील हो जाते हैं।स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया वारियर्स कभी ट्रेक्टर में बैठकर तो कहीं मीलों पैदल चलकर मलेरिया मुक्त बस्तर के संकल्प को पूर्ण करने में अपना योगदान दे रहे है।
उन सभी का फॉलोअप के बाद स्लाइड टेस्ट किया जायेगा, पॉजिटिव आने वालेसभी लोगों का पूर्ण उपचार भी किया जायेगा।दोनो चरणों में अब तक 1.47 लाख मच्छरदानियों का वितरण और उसका उपयोग सुनिचित किया गया है ।ज्ञात रहे प्रथम चरण 15 जनवरी से 14 फरवरी तक चला वहीं द्वितीय चरण 15 जून से 31 जुलाई तक चलाया जा रहा है ।
क्षेत्र में मलेरिया उन्मूलन की दिशा में सपोर्टिव गतिविधियों के तहत मच्छरदानी का उपयोग सभी परिवारों द्वारा सुनिश्चित करवाया जा रहा है ,सभी घरों में मलेरिया रोधी कीटनाशक दवा का छिड़काव सुनिश्चित हो, और लार्वा नियंत्रण के लिये प्रति सप्ताह रविवार के दिन प्रातः 10बजे 10 मिनट अपने घरों के आसपास एवं सार्वजनिक जगहों में 10मीटर की दूरी को साफ सुथरा बनाये, और पानी का जमाव न होने देने पर जोर दिया जा रहा है| 
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"राखी" पर "सियासत" - प्रकाशपुंज पाण्डेय

23-Jul-2020

भाई-बहन के अटूट विश्वास और प्रेम का प्रतीक, "राखी" का त्योहार आने को है, लेकिन अब यह त्योहार भी राजनीति से अछूता नहीं रहा। राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने मीडिया के माध्यम से ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि छत्तीसगढ़ में दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच अब "राखी" पर सियासत तेज़ हो गई है। छत्तीसगढ़ की बेटी, राज्यसभा सांसद और भाजपा नेत्री सरोज पांडे ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को "राखी" भेजी है, साथ ही एक पत्र भी जिसमें "राखी" के उपहार स्वरूप उन्होंने अपनी एक इच्छापूर्ति का वरदान मांगा है और वो है 'छत्तीसगढ़ में संपूर्ण शराबबंदी'। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा है कि भाजपा नेत्री की मांग बिल्कुल ही जायज़ है क्योंकि शराब किसी भी प्रकार से समाज के लिए लाभदायक व लाभकारी नहीं है। इससे कई परिवार उजड़ जाते हैं और जनता के स्वास्थ्य की भी हानि होती है। उनकी इस मांग और "राखी" के बदले उपहार का छत्तीसगढ़ का प्रत्येक नागरिक समर्थन करता है क्योंकि उनकी मांग सर्वथा जायज़ है और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को उनकी इस मांग को पूरा भी करना चाहिए। लेकिन उससे पहले एक बड़ा प्रश्न खड़ा होता है कि क्या इन भाजपा नेत्री ने अपने शेष भाइयों से भी कभी इस उपहार की मांग है? मेरा संदर्भ है छत्तीसगढ़ की सत्ता पर 15 सालों तक राज करने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से, मेरा संदर्भ है 7 सालों से देश की सत्ता पर राज करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से, मेरा संदर्भ है देश के गृह मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से! क्या बहन सरोज पांडे ने कभी इन लोगों से "रक्षाबंधन" पर "शराबबंदी" का उपहार मांगा है? और अगर नहीं तो क्यों? यह जवाब तो जनता पूछेगी और उनको जवाब भी देना चाहिए, क्योंकि अगर वह एक भाई से उपहार मांग रही हैं तो दूसरे भाई से आज तक इस उपहार क्यों नहीं मांगा? और अगर मांगा है तो क्या उन भाइयों ने उन्हें ये उपहार क्यों नहीं दिया? मतलब क्या उन्होंने अपने भाई होने का कर्तव्य नहीं निभाया? सवाल तो बनता है और अगर भाजपा नेत्री सरोज पांडे ने अपने शेष भाइयों अमित शाह, नरेंद्र मोदी और डॉ रमन सिंह से इस उपहार को नहीं मांगा है, तो क्या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से ही क्यों? और अगर भाजपा नेत्री सरोज पांडे ने अपने शेष भाइयों अमित शाह, नरेंद्र मोदी और डॉ रमन सिंह से इस उपहार को नहीं मांगा है तो क्या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री जो कि अभी डेढ़ साल से छत्तीसगढ़ की सत्ता में हैं, उनसे यह उपहार मांगना राजनीति से प्रेरित नहीं है? 
जनता यह सवाल पूछ रही है माननीय सांसद महोदया। आपको उचित लगे तो जवाब जरुर दीजिए। 

 प्रकाशपुन्ज पाण्डेय, राजनीतिक विश्लेषक, रायपुर, छत्तीसगढ़ 
7987394898, 9111777044

 

 


बॉलीवुड सेलेब्स का रिश्ता पाकिस्तान के आईएसआई से जुड़ा है : बीजेपी उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा

बॉलीवुड सेलेब्स का रिश्ता पाकिस्तान के आईएसआई से जुड़ा है : बीजेपी उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा

23-Jul-2020


बीजेपी के उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा ने हाल ही में बॉलीवुड सेलेब्स पर बेहद संगीन आरोप लगाया है. उनका कहना है कि कुछ बॉलीवुड सेलेब्स का रिश्ता पाकिस्तान के आईएसआई से जुड़ा है. इतना ही नहीं इन सेलेब्स पर शिकंजा कसने के लिए कागजी कार्रवाई भी चल रही है. बैजयंत ने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए ये बात कही साथ में अपनी बात के समर्थन में एक ट्वीट भी किया.

बैजयंत ने ट्वीट में कहा, ”कुछ बेहद चौंकाने वाली कड़ियां सामने आई हैं. जिनमें बॉलीवुड के कुछ लोग निजी और बिजनेस को लेकर पाकिस्तान और एनआरई लोगों से रिश्त हैं, इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि ये जम्मू कश्मीर में हिंसा बढ़ाते हैं, पाकिस्तानी सेना और आईएसआई से रिश्तों को सबूत हैं. मैं देशभक्त बॉलीवुड के लोगों से कहूंगा कि उनके नाम उजागर करें.”

वहीं, बैजयंत ने निजी न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा कि इस बात के कई सबूत मिले हैं जिसमें कुछ तस्वीरें शामिल हैं.  उन्होंने कहा, ”इनमें कुछ एनआरआई और पाकिस्तानी वेस्टर्न देशों में रहते हैं. इसमें इन लोगों के खिलाफ दो प्रकार के सबूत मिले हैं. एक तो ये लोग सोशल मीडिया पर हिंसा के लिए लोगों को उक्साते हैं दूसरा, पाकिस्तानी कैंप में दिखते हैं. ये लोग बॉलीवुड के लोगों के साथ पार्टी करते दिखते हैं.”

बैजयंत ने कहा कि आज की स्थिति में किसी के लिए ये भी कहना गलत होगा कि वो भारत-पाक रिश्तों को लेकर जागरुक नहीं है. आए दिन सीमा पर सेना के जवान और आम लोग पाकिस्तान की ओर से भेजे गए आतंकियों द्वारा अपनी जान गंवा देते हैं. उन्होंने कहा, ”इन बॉलीवुड के लोगों को शक का फायदा मिल रहा है. लेकिन में इनसे कहना चाहूंगा कि उन्हें देशभक्ति दिखानी चाहिए और आईएसआई से जुड़े लोगों से अपने संबंध तोड़ देने चाहिए.”


यूपी में कोरोना वायरस से ज्यादा अपराधियों का क्राइम  वायरस हावी है-मायावती

यूपी में कोरोना वायरस से ज्यादा अपराधियों का क्राइम वायरस हावी है-मायावती

22-Jul-2020

 

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती ने ट्वीट कर उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बोला हमला ।
सुश्री मायावती ने कहा कि पूरे यूपी में हत्या हुआ महिला असुरक्षा सहित जिस तरह से हर प्रकार के गंभीर अपराधों की बाढ़ लगातार जारी है उससे स्पष्ट है कि यहां का नहीं बल्कि जंगलराज चल रहा है अर्थात बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती ने बयान देते हुए उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए ।
सुश्री मायावती ने कहा कि पूरे यूपी में हत्या हुआ महिला असुरक्षा सहित जिस तरह से हर प्रकार के गंभीर अपराधों की बाढ़ लगातार जारी है उससे स्पष्ट है कि यहां का नहीं बल्कि जंगलराज चल रहा है अर्थात यूपी में कोरोना वायरस से ज्यादा अपराधियों का क्राइम  वायरस हावी है जनता त्रस्त है सरकार इस ओर ध्यान दें ।
सुश्री मायावती ने कहा कि आज तक अभी हाल ही में यूपी के जंगल राज में गाजियाबाद में अपनी भांजी के साथ छेड़छाड़ करने के विरोध में, पत्रकार श्री विक्रम जोशी को गोली मारकर बुरी तरह से घायल किया गया जिनकी आज मृत्यु हो जाने पर दुःखी, परिवार के प्रति बीएसपी की गहरी संवेदनाएं है। साथ ही बीएसपी की यह मांग भी है कि यूपी सरकार द्वारा पीड़ित परिवार को आज जो कुछ भी मदद करने की बात कही गई है तो उसे सरकार समय से भी दे,और इसके लिए पीड़ित परिवार को अधिकारियों के चक्कर न काटने पड़े, तो यह बेहतर होगा ।जनता त्रस्त है सरकार इस ओर ध्यान दें ।
सुश्री मायावती ने कहा कि आज तक अभी हाल ही में यूपी के जंगल राज में गाजियाबाद में अपनी भांजी के साथ छेड़छाड़ करने के विरोध में, पत्रकार श्री विक्रम जोशी को गोली मारकर बुरी तरह से घायल किया गया जिनकी आज मृत्यु हो जाने पर दुःखी, परिवार के प्रति बीएसपी की गहरी संवेदनाएं है। साथ ही बीएसपी की यह मांग भी है कि यूपी सरकार द्वारा पीड़ित परिवार को आज जो कुछ भी मदद करने की बात कही गई है तो उसे सरकार समय से भी दे,और इसके लिए पीड़ित परिवार को अधिकारियों के चक्कर न काटने पड़े, तो यह बेहतर होगा ।


फर्टिलाइजर घोटाला: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के 13 ठिकानों पर ED की छापेमारी

फर्टिलाइजर घोटाला: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के 13 ठिकानों पर ED की छापेमारी

22-Jul-2020

राजस्थान : राजस्थान में राजनीतिक संकट के बीच प्रवर्तन निदेशालय ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी फर्टिलाइजर (उर्वरक) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हो रही है। ईडी यह छापेमारी देशभर के कई स्थानों पर कर रही है। 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के ठिकानों पर एक उर्वरक घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के मामले में देशव्यापी छापेमारी की गई है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली में कम से कम 13 स्थानों पर तलाशी ली जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि जोधपुर में अग्रसेन गहलोत के ठिकानों पर भी तलाशी ली जा रही है। इस कथित उर्वरक घोटाले के मामले में 7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है।

ईडी ने कथित उर्वरक घोटाला मामले में सीमा शुल्क विभाग की शिकायत और आरोपपत्र के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में छह, गुजरात में चार, पश्चिम बंगाल में 2 और दिल्ली में एक स्थान पर पीएमएलए के तहत एजेंसी द्वारा छापे मारी की जा रहा है।

आपको बता दें कि इससे पहले 13 जुलाई को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक आभूषण कंपनी के जयपुर सहित चार शहरों में मौजूद ठिकानों पर छापेमारी की है। आयकर विभाग के एक अधिकारी ने बताया था कि दिल्ली, जयपुर और मुंबई में इनकम टैक्स विभाग ओम कोठारी समूह पर छापेमारी कर रहा है। सुनील कोठारी, डीपी कोठारी और विकास कोठारी की कंपनी एनएसई और बीएसई पर सूचीबद्ध है।

विभाग ने जयपुर में राजीव अरोड़ा के आम्रपाली कार्यालय पर  ने छापा मारा था। बता दें राजीव अरोड़ा राज्य कांग्रेस कार्यालय के सदस्य हैं। वहीं आयकर विभाग ने कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौर के कार्यालय और निवास सहित राज्य भर में कई स्थानों पर भी छापा मारा था।


कलयुगी पुत्र ने अपने ही मां को गोली मारकर किया घायल | नशे में धुत्त बेटा आगबबूला हो उठा और माँ पर गोली चला दिया।

कलयुगी पुत्र ने अपने ही मां को गोली मारकर किया घायल | नशे में धुत्त बेटा आगबबूला हो उठा और माँ पर गोली चला दिया।

22-Jul-2020

कलयुगी पुत्र ने अपने ही मां को गोली मारकर किया घायल

बेगूसराय जिले से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आई है। ,जहां एक कलयुगी पुत्र ने अपने  ही मां को ही गोली मार गंभीर रूप से घायल कर दिया है।
आनन-फानन में स्थानीय लोगों ने उसे इलाज के लिए मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। पीड़िता को सिर में गोली लगने से उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। घटना जिला पटना के मरांची थाना क्षेत्र के सीतारामपुर वार्ड संख्या 10 निवासी रामबालक यादव की लगभग 50 वर्षीय पत्नी अंजू देवी की बताई जा रही है।
जख्मी की बड़ी पुत्रबधू इंदु देवी ने बताया कि बीते मंगलवार की देर शाम अपने बेटा को खाने के लिए बुलाने गई, इतने में ही नशे में धुत्त बेटा आगबबूला हो उठा और माँ पर गोली चला दिया। पड़ोसी राजकुमार ने बताया कि आरोपी पुत्र अपराधिक प्रवृति का है और अवैध कारोबार में लिप्त रहता है। उसने बताया कि रात भी वह चार अन्य मित्रों के साथ नशे में धुत होकर घर आया था, उसी दौरान मां उसे खाना खाने के लिए बुलाने गई उसी समय उसने गोली मार कर मां को घायल कर दिया।


शामली के कैराना एसडीएम ने कांधला कस्बे के स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण

शामली के कैराना एसडीएम ने कांधला कस्बे के स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण

21-Jul-2020

शामली के कैराना एसडीएम ने कांधला कस्बे के स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया है। जहां पर एसडीएम के निरीक्षण से स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डॉक्टर और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। इस दौरान एसडीएम ने स्वास्थ्य केंद्र पर दवाइयों के रखरखाव एवं साफ सफाई की बारीकी से जांच पड़ताल की और किसी भी तरह की कोई खामियां ना मिलने पर एसडीएम कैराना अपने काफिले के साथ शामली की ओर रवाना हो गए। जिसके बाद स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है।


पेड से लटकता मिला शव | घर से लापता विवाहिता का शव मिला जंगल  में |

पेड से लटकता मिला शव | घर से लापता विवाहिता का शव मिला जंगल में |

21-Jul-2020

आबूरोड़/ सिरोही  
घर से लापता विवाहिता का शव मिला जंगल  में 

पेड से लटकता मिला शव 

आबूरोड रीको थाना क्षेत्र के डेरी की घटना 

करीब 5 दिन से लटक रहा है शव 

पुलिस को सोमवार शाम को मिली सूचना 

पुलिस पहुची मौके पर 
 शव को पेड से उतार कर लाया जा रहा है मोर्चरी 

आबूरोड रीको थाना जाब्ता मौके पर