हेपेटाइटिस से बचने के लिए जागरूकता है जरूरी, डॉ. मीरा बघेल

हेपेटाइटिस से बचने के लिए जागरूकता है जरूरी, डॉ. मीरा बघेल

28-Jul-2020

कोविड-19 के संकट के बीच दुनिया भर में मनाया जा रहा है हेपेटाइटिस दिवस 
। विश्व भर में कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण  के बीच आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जा रहा है । हेपेटाइटिस से बचने के लिए लोगों में जागरूकता का होना जरूरी है । इसके कारण और बचाव के उपाय के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए हर वर्ष 28 जुलाई को हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है । 
वैश्विक महामारी (कोविड-19) को देखते हुए इस बार वर्चअल कार्यक्रम आयोजित किए जाने का निर्णय लिया गया है । इस बार हेपेटाइटिस दिवस की थीम 'हेपेटाइटिस फ्री फ्यूचर'रखा गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मीरा बघेल ने बताया हेपेटाइटिस एक जानलेवा बीमारी है, जिसके प्रति लोगों में जागरूकता की काफी कमी है। वैज्ञानिकों ने हेपेटाइटिस के लिए पांच जिम्मेदार वायरसों की खोज की है। इन्हें ए, बी, सी, डी और ई नाम दिया गया है।
 हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण शरीर में कई साल तक खामोश रहता है। इससे क्रोनिक हेपेटाइटिस होने का खतरा बढा रहता जिसके बाद मरीज का लीवर ख़राब हो जाता है| 
हेपेटाइटिस से बचने के लियें सावधानी 
साफ-सफाई पर सबसे पहले ध्यान रखना, ब्रश और रेजर को साझा नहीं करना, और शराब के सेवन से बचना। शुरुआती दौर में हेपेटाइटिस के लक्षण समझ नहीं आते है। समयानुसार थकान, भूख न लगना, पेट में दर्द, सिर का दर्द, चक्कर आना,मूत्र का पीला होने की समस्याएं आने  लगती हैं।इस प्रकार की समस्या होने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें ।
शुरुवाती लक्षण 
कई लोगों को प्रारंभ में हेपेटाइटिस के लक्षण दिखाई नहीं देते है। कुछ के लक्षण 15 से 180 दिनों के बाद दिखाई देने लगते हैं जिसमें बुखार आना, डायरिया होना, थकान महसूस होना, उल्टीयॉ होना, भूख न लगना, घबराट होना पेट में दर्द की शिकायत रहना, और वजन में  कमी आना है। त्वचा, आंखों के सफेद भाग, जीभ का रंग पीला पड़ जाना (ये लक्षण पीलिया में दिखाई देते हैं)| 

 


कोरोना की तबाही में  महा कोरोना बन कर डराने लगी है संशोधित मीडिया नीति !

कोरोना की तबाही में महा कोरोना बन कर डराने लगी है संशोधित मीडिया नीति !

27-Jul-2020

कोरोना की तबाही में क्यों लागू हो रही संशोधित मीडिया नीति !

 कोराना के मुश्किल दौर में भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की संशोशित 'मीडिया नीति 2020' एक अगस्त से लागू होने जा रही है। ये देश के हज़ारों मझौले अखबारों को महा कोरोना बन कर डराने लगी है। हिन्दी पट्टी के सार्वाधिक अखबारों वाले उत्तर प्रदेश में इसका सबसे अधिक खौफ है। इस सूबे से प्रेस कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के सदस्य भी संशोधित नीति को ग़लत ठहरा रहे हैं। मंझोले अखबारों पर लटकटी तलवार से प्रदेश की राजधानी के लगभग एक हजार राज्य मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकारों में सैकड़ों पत्रकारों की मान्यता भी खतरे में पड़ सकती है। इसलिए यहां पत्रकार मीडिया संगठनों के नेताओं पर दबाव बना रहे हैं कि वो संशोधित मीडिया नीति के खिलाफ आवाज उठायें। 
इस संशोधित नीति के तहत पच्चीस से पैतालिस हजार के बीच प्रसार वाले पत्र-पत्रिकाओं को आर.एन.आई. या एबीसी की जटिल जांच करानी होगी। इस जांच में मंहगी वेब प्रिंटिंग मशीन, न्यूज प्रिंट(अखबारी क़ागज) और इंक इत्यादि की डिटेल, कार्यालय स्टॉफ, पीएफ, प्रसार डिस्ट्रीब्यूशन के सेंटर आदि का विवरण देना होगा। कम संसाधन वाले संघर्षशील समाचार पत्रों के लिए ऐसी अग्नि परीक्षा देना मुश्किल है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अखबारों के पत्रकारों की राज्य मुख्यालय की मान्यता के लिए पच्चीस हजार से अधिक प्रसार होना ज़रूरी है। यदि मंझोले अखबार जांच से बचने के लिए अपने अखबारों का प्रसार पच्चीस हजार से कम करके लघु समाचार पत्र के दायरे में आ जाते हैं तो ऐसे अखबारों के सैकड़ों पत्रकारों की राज्य मुख्यालय की मान्यता समाप्त हो जायेगी। इसलिए यूपी के मीडिया संगठनों पर प्रकाशक और पत्रकार ये भी दबाव बना रहे हैं कि वे योगी सरकार से प्रेस मान्यता के मानकों को संशोधित करवाना का आग्रह करें। ताकि संशोधित मीडिया नीति के तहत जांच से बचने के लिए मझोले वर्ग से लघु समाचार पत्र के दायरे में आने वाले समाचार पत्रों के पत्रकारों की मुख्यालय मान्यता बच जाये।
इन तमाम घबराहट, बगावत, सियासत और विरोध के बीच प्रेस कॉउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य अशोक नवरत्न और रज़ा रिज़वी केंद्र सरकार के सूचना एंव प्रसारण मंत्रकालय के फैसले के खिलाफ प्रकाशकों और पत्रकारों के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
कुछ मीडिया संगठनों ने भी संशोधित नीति का विरोध करना शुरु कर दिया है। इसे छोटे अखबारों को खत्म करने की साजिश बताया जा रहा हैं। 
चर्चा ये भी है कि देश के चंद बड़े अखबारों ने स्थानीय अखबारों को खत्म करने के लिए ऐसी साजिश रची है। सोशल मीडिया पर प्रकाशकों और कलमकारों का विरोध मुखर हो रहा है-

हर क्षेत्र की बड़ी ताकतें होती हैं। ऐसी शक्तियां अपने क्षेत्र की संघर्षशील प्रतिभाओं को उभरने नहीं देना चाहतीं। जैसा कि उभरते हुए फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह की आत्महत्या की वजह के पीछे फिल्म उद्योग की बड़ी ताकतों को शक की निगाहों से देखा जा रहा है।
 ताकत की ताकत से दोस्ती होती है। बड़ी मीडिया इंडस्ट्रीज की हर सरकार से दोस्ती रही है। दोस्त दोस्त के काम भी आता है। इन दिनों कोरोना काल की तबाही में तबाह होती हर इंडस्ट्री की तरह मीडिया की अखबारी खर्चीली ब्रॉड इंडस्ट्री बुरी तरह आर्थिक मंदी का शिकार है। कई संस्करण बंद कर दिए, पेज भी कम कर लिए। छंटनी कर ली। वेतन आधा कर दिया। कांट्रेक्ट पर काम कर रहे मीडियाकर्मियों का रिनिवल बंद कर दिया। कॉस्ट कटिंग और छट्नी की तलवाल भी चला दी, लेकिन फिर भी कमाई के मुख्य द्वारा लगभग बंद हैं। वजह साफ है। मीडिया में सरकारी और गैर सरकारी विज्ञापन ही अर्निंग के दो रास्ते होते हैं। कोरोना की चपेट में ये आधे हो गये हैं। सरकार आने वाले समय में विज्ञापन जैसे खर्चों का खर्च और भी कम कर सकती है। गैर सरकारी विज्ञापन आधे से भी कम हो गया है। कार्पोरेट के कामर्शियल विज्ञापनों से लेकर वर्गीकृत विज्ञापन बेहद कम हो गये हैं।
अब कैसे अपने बड़े खर्च पूरे करें ! कैसे विज्ञापन का स्त्रोत बढ़ायें ! इस फिक्र में बड़े ब्रॉड अखबारों को एक रास्ता सूझा होगा !
 विज्ञापनों के बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा छोटे लोकल अखबारों के हिस्से में चला जाता है। ये खत्म हो जायें या लघु वर्ग में पंहुचकर इनकी विज्ञापन दरें बेहद कम हो जायें तो सरकारी विज्ञापन के अधिकांश बजट पर बड़े अखबारों का कब्जा हो जायेगा। ये डूबते को तिनके का सहारा होगा।
शायद इसी लिए ही देश के बड़े  मीडिया समूहों के दबाव में इस कोरोना काल के तूफान में भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय संशोधित मीडिया पॉलिसी लागू कर रहा है।
नहीं तो ऐसे वक्त में जब पीआई बी में नियमित अखबार जमा होने का सिलसिला तक चार महीने से रुका है। आर एन आई ने तीन महीने विलम्ब से एनुअल रिटर्न का सिलसिला शुरू किया। 
देश में सबकुछ अस्त-वयस्त है। पुराने जरूरी रुटीन काम तक बंद है। सूचना मंत्रालय के अधीन कार्यालय में ही कोरोना संक्रमण से बचाव के मद्देनजर शेडयूल वाइज थोड़े-थोड़े कर्मचारी बुलाये जाते हैं। ऐसे में देश के सैकड़ों अखबारों और सैकड़ों कर्मचारियों को फील्ड में निकल कर इकट्ठा होने का नया काम देने वाली नई संशोधित मीडिया पॉलिसी को हड़बड़ी में लागू करने का क्या अर्थ है !
 नियमानुसार मीडिया पॉलिसी संशोधन से पहले प्रेस कॉउन्सिल ऑफ इंडिया की सहमति लेना जरुरी होती है, किंतु कौंसिल के सदस्य आरोप लगा रहे हैं कि इस संबंध में उनसे परामर्श के लिए कोई बैठक तक नहीं हुई।
उत्तर प्रदेश से कौंसिल के सदस्य सवाल उठा रहे हैं कि कोरोना काल में कम संसाधन वाले संघर्षशील समाचार पत्र जो पहले ही आर्थिक तंगी से बेहाल हैं ऐसे में उनपर जांच थोपने का क्या अर्थ है।

ऐसे में देश के कोरोना काल में मध्यम वर्गीय समाचार पत्रों के प्रकाशकों को एक नया कोरोना डराने लगा है। कोविड 19 वाले कोरोना वायरस की चपेट वाले तीन फीसद को जान का खतरा और 97% को ठीक होने की उम्मीद होती है। लेकिन यहां अखबार के प्रकाशकों को जिस नये कोरोना का डर सता रहा है उसमें 97% को खत्म हो जाने का डर है।
पब्लिशर्स को डराने वाले कोरोना  संशोधित मीडिया पॉलिसी के अंतर्गत मंझोले वर्ग के प्रसार वाले पत्र-पत्रिकाओं को निर्देश दिया गया है कि इन्हें आर.एन.आई या ए बी सी की जटिल जांच की अग्नि परीक्षा से ग़ुजरना होगा। तब ही मध्यम वर्गीय प्रसार संख्या वर्ग में सरकारी विज्ञापन की दर बर्करार रहेगा, अन्यथा इनकी डीएवीपी की मान्यता समाप्त कर दी जायेगी। जांच ना कराने की स्थिति में प्रकाशकों के पास एक मौका है। वो पच्चीस हजार के ऊपर के प्रसार का दावा छोड़कर पच्चीस हजार के अंदर प्रसार का ही दावा करें। यानी लघु समाचार के वर्ग में आकर वो कम विज्ञापन दरों में ही संतोष करे, अन्यथा जांच करायें। जो ज्यादातार प्रकाशकों के लिए मुम्किन ही नहीं नामुमकिन है। इसलिए प्रकाशक कह रहे हैं कि जांच का ये कोरोना हमें मार देगा !
- नवेद शिकोह


कोरोनाकाल में छत्तीसगढ़ की  महिलाओं ने ढूंढा रोजगार का अवसर : खबर कबीरधाम जिले की

कोरोनाकाल में छत्तीसगढ़ की महिलाओं ने ढूंढा रोजगार का अवसर : खबर कबीरधाम जिले की

27-Jul-2020

-फल और सब्जियों का उपयोग कर महिला समूहों ने बनाई राखियां 
- राखियों से कोरोना से बचाव का दे रहीं संदेश, होम डिलीवरी की सुविधा भी

।कवर्धा जिले की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने कोरोनाकाल में धैर्य को बरकरार रखते हुए रोजगार का अवसर ढूंढ लिया है। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जिले के महिला  स्वयं सहायता समूह ने फल एवं सब्जियों से अनोखी राखियां बनाकर खुद के लिए आमदनी का जरिया तलाशा है। ऱाखियां बनाकर बिक्री के साथ ही समूह की महिलाएं हैंडवाश और मास्क का उपयोग कर कोविड-19 से बचाव का संदेश भी दे रही हैं।  

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” के तहत  कार्य करने वाली महिला समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित हैंड मेड राखियों को लोग काफी पसंद भी कर रहे हैं। कलेक्टर कार्यालय एवं जिला पंचायत परिसर एवं  जिले के सभी जनपद पंचायतों में महिला समूह की स्वदेशी और हाथ से बनी हुई राखियों की बिक्री की जा रही है। दो दिनों से राखियों की बिक्री शुरू की गई है जो 3 अगस्त तक चलेगी। अभी तक लगभग 3000 से अधिक रूपए की राखियों की बिक्री हो चुकी हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत विजय दयाराम के मार्गदर्शन में जिले के बहुत सी महिला स्व सहायता समूह द्वारा राखी निर्माण का कार्य किया जा रहा है। प्राकृतिक सामान का उपयोग कर समूह की महिलाओं ने अब तक जिला पंचायत में 1000 रुपये से अधिक की राखियां विक्रय की है। जनपद पंचायत बोड़ला के मुख्यालय में आंचल स्वयं सहायता समूह पौड़ी की महिलाओं ने 1200 रुपये से अधिक की राखियां  का विक्रय किया है । कोरोना महामारी को देखते हुए महिला स्वयं सहायता समूह ने होम डिलीवरी की सुविधा भी जिले वासियों को दी है जिसके लिए विकासखंड कवर्धा के मुख्यालय से संपर्क किया जा सकता है। मां दुर्गा समूह की अध्यक्ष श्रीमती कुमारी लाझी बताती है लॉकडाउन और कोरोनाकाल में कामकाज बंद हो गए थे। ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो गया। समूह की महिलाओं ने त्योहार को देखते हुए और देसी सामान से राखी बनाकर स्वरोजगार पाया है। 
पर्यावरण के अनुकूल हैं राखियां- जय मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की सदस्य नूतन झरिया ने बताया राखियां प्राकृतिक चीजों को मिलाकर बनाई गई है, जो पर्यावरण के अनुकूल है। ऱाखी निर्माण और सजावट में बॉंस के छिलके और देसी बीजों जैसे लौकी, खीरा, भिंडी के बीज, धान के दाने, चावल के दाने का इस्तेमाल किया गया है।
मोर राखी किट में कोविड बचाव उपाय भी - स्टॉल लगाकर बिक्री की जा रही राखियों में कॉम्बो पैक मोर राखी किट भी है। 110 रूपए मूल्य की इस किट में एक जोड़ी स्वदेसी राखी , रोली चावल, चॉकलेट के साथ ही कोरोनावायरस से बचाव के लिए स्वदेसी सेनेटाइजर, कपड़े का हाथ से बनाया हुआ मास्क, रूमाल भी है। बिक्री स्टॉल पर महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कोविड बचाव के लिए हाथों को साफ करने, मास्क पहनने, लोगों से दूरी बनाकर रखने के प्रति लोगों को जागरूक भी कर रही हैं।  

 


घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम मलेरिया वारियर्स ने की लोगों की जांच

घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम मलेरिया वारियर्स ने की लोगों की जांच

25-Jul-2020

21 सदस्य टीम ने तीन दिन में की 3000 से ज़्यादा मलेरिया जांच
प्रथम चरण की तुलना में कम मिले पॉजिटिव

रायपुर  23 जुलाई 2020 ।कभी मीलों पैदल चले, तो कभी ट्रेक्टर पर बैठे, उबड़ खाबड़ रास्ते में गिरे तो कहीं धूल में कपड़े सने, कहीं बारिश में पूरी तरह भीगे लेकिन गीले कपड़ों में ही पहुंच गए सुकमा जिले के सुदूर अंचलों में । 
अक्सर शरीर के ताप से ही कपड़े सूख जाते है या कभी गीले कपड़ों में ही पूरे गांव की मलेरिया जांच करते हुए स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर अंचलों में लोगों के द्वार तक पहुंचाया।
खंड चिकित्सा अधिकारी कोंटा डॉ. कपिल देव कश्यप के नेतृत्व में सुकमा जिले के सुदूर अंचलों के घोर नक्सल प्रभावित --तिमापुरम, मोरपल्ली, किस्टाराम, पोलमपाड़, बोड़केल, रावगुड़ा और  चिंतागुफा में घर घर जाकर मलेरिया की जांच करके अपने सामने दवा खिलाकर ही उपचार शुरू करते है।
सीएमएचओ (सुकमा) डॉ. सी बी प्रसाद बंसोड़ ने कहा मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के प्रथम चरण में 2.86 लाख लोगों का टेस्ट किया गया था जिसमें 16,599 लोग पॉजिटिव आए थे । उन सभी का फॉलोअप के बाद स्लाइड टेस्ट किया गया, जिसमें 550 पॉजिटिव आए और उन सभी का पूर्ण उपचार भी किया गया।
वहीं अभियान के द्वितीय चरण में भी 2.86  लाख लोगों का टेस्ट करने का लक्ष्य रखा गया है । 21 जुलाई तक लगभग 2.34 लाख लोगों तक पहुंचा गया है जिसमें 3,723 लोग पॉजिटिव आए है जो पूर्व की तुलना में काफी कम हैं ।
पोलमपाड़ के निवासी हिंगा (बदला हुआ नाम) बताते हैं उनका क्षेत्र काफी दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में है जहाँलोग दवाई से ज्यादा झाड़-फूंक में विश्वास करते हैं । लोगों को मलेरिया (जुड़ी बुखार) जब होता है तो वह स्थानीय बैगा से झाड़-फूंक करवाते हैं । जब हालत ज़्यादा नाजुक हो जाती है तब स्वास्थ्य केंद्र पर जाते हैं ।``मलेरिया से बचने के लिए सरकार द्वारा चलाया जा रहा मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान कार्यक्रम बहुत अच्छा है । हम तो स्वास्थ्य कर्मियों से यही कहेंगे आप लोग हमेशा यहॉ आते रहा करिए,’’ उसने कहा ।
खंड चिकित्सा अधिकारी कोंटाडॉ. कपिल देव कश्यप ने बताया मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का द्वितीय चक्र तीन चरणों में चलाया जा रहा है ।प्रथम चरण में बरसात में सम्पर्क बाधित हो जाने वाले क्षेत्र में आर.डी. किट से सभी लोगों के रक्त की जांच और सकारात्मक लोगों का पूर्ण उपचार 15 जून से 30 जून तक सम्पन्न किया गया है । उसके बाद 1 जुलाई से 31 जुलाई तक ऐसे क्षेत्र जहाँ मलेरिया बुखार के प्रकरण अधिक पाये गये हैं । उन क्षेत्रों में सभी लोगों के खून की जांच से की जायेगी । साथ ही  पूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जायेगा।इसके बाद सामान्य क्षेत्र में लोगों का रक्त परीक्षण उपचार की गतिविधियां सम्पन्न होगी।
डॉ. कश्यप ने कहा मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का द्वितीय चक्र में  21 सदस्यीय टीम के साथ सुकमा जिले के सुदूर अंचलों के जगरगुंडा क्षेत्र के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों जैसे तिमापुरम, मोरपल्ली, किस्टाराम, पोलमपाड़, बोड़केल, रावगुड़ा और  चिंतागुफा के पालामड़गू में घर घर जाकर 3 दिनों में लगभग 3000 से अधिक लोगों की मलेरिया की जांच की गयी।  इसमें 55 लोगों को मलेरिया के लक्षण पाये गये थे जिनका उपचार शुरु किया गया है । गर्भवती महिलाओं की मलेरिया की जांच, हिमोग्लोबिन जांच,टीकाकरण , वज़न , मच्छरदानी की उपलब्धता एवं अन्य मरीजों का इलाज भी किया गया।टीम में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके)के डॉ. वेद साहू,ग्रामीण चिकित्सा सहायक (आरएमए)मुकेश बख्शी, युवराज साहू और यूनिसेफ से आदर्श कुमारके साथ स्वास्थ्य विभाग के अन्य साथी भी थे।
मेडिकल आफिसर डॉ.व्यंकटेशने बताया जिस जगह भी जाना होता है वहॉ पर स्थानीय सम्पर्क के माध्यम से  लोगों को संदेश भेजा जाता है ताकि टीम जब पहुंचे तो सभी लोग मिल जायें जिससे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को स्वास्थ्य का लाभ मिले ।टीम के द्वारा मलेरिया जॉच ही नही अन्य जॉचें भी की जाती है । स्थानिय लोगों का सहयोग भी रहता है ।
सीएमएचओ डॉ.सीबी प्रसाद बंसोड़ ने बताया क्षेत्र के कई इलाकों में पहुंच पाना अपने आप में एक चुनौती से कम नही है । कई क्षेत्र नक्सल प्रभावित होनें के साथ पहुंच विहीन भी है। बारिश में कई ग्राम टापू में तब्दील हो जाते हैं।स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया वारियर्स कभी ट्रेक्टर में बैठकर तो कहीं मीलों पैदल चलकर मलेरिया मुक्त बस्तर के संकल्प को पूर्ण करने में अपना योगदान दे रहे है।
उन सभी का फॉलोअप के बाद स्लाइड टेस्ट किया जायेगा, पॉजिटिव आने वालेसभी लोगों का पूर्ण उपचार भी किया जायेगा।दोनो चरणों में अब तक 1.47 लाख मच्छरदानियों का वितरण और उसका उपयोग सुनिचित किया गया है ।ज्ञात रहे प्रथम चरण 15 जनवरी से 14 फरवरी तक चला वहीं द्वितीय चरण 15 जून से 31 जुलाई तक चलाया जा रहा है ।
क्षेत्र में मलेरिया उन्मूलन की दिशा में सपोर्टिव गतिविधियों के तहत मच्छरदानी का उपयोग सभी परिवारों द्वारा सुनिश्चित करवाया जा रहा है ,सभी घरों में मलेरिया रोधी कीटनाशक दवा का छिड़काव सुनिश्चित हो, और लार्वा नियंत्रण के लिये प्रति सप्ताह रविवार के दिन प्रातः 10बजे 10 मिनट अपने घरों के आसपास एवं सार्वजनिक जगहों में 10मीटर की दूरी को साफ सुथरा बनाये, और पानी का जमाव न होने देने पर जोर दिया जा रहा है| 
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"राखी" पर "सियासत" - प्रकाशपुंज पाण्डेय

23-Jul-2020

भाई-बहन के अटूट विश्वास और प्रेम का प्रतीक, "राखी" का त्योहार आने को है, लेकिन अब यह त्योहार भी राजनीति से अछूता नहीं रहा। राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने मीडिया के माध्यम से ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि छत्तीसगढ़ में दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच अब "राखी" पर सियासत तेज़ हो गई है। छत्तीसगढ़ की बेटी, राज्यसभा सांसद और भाजपा नेत्री सरोज पांडे ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को "राखी" भेजी है, साथ ही एक पत्र भी जिसमें "राखी" के उपहार स्वरूप उन्होंने अपनी एक इच्छापूर्ति का वरदान मांगा है और वो है 'छत्तीसगढ़ में संपूर्ण शराबबंदी'। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा है कि भाजपा नेत्री की मांग बिल्कुल ही जायज़ है क्योंकि शराब किसी भी प्रकार से समाज के लिए लाभदायक व लाभकारी नहीं है। इससे कई परिवार उजड़ जाते हैं और जनता के स्वास्थ्य की भी हानि होती है। उनकी इस मांग और "राखी" के बदले उपहार का छत्तीसगढ़ का प्रत्येक नागरिक समर्थन करता है क्योंकि उनकी मांग सर्वथा जायज़ है और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को उनकी इस मांग को पूरा भी करना चाहिए। लेकिन उससे पहले एक बड़ा प्रश्न खड़ा होता है कि क्या इन भाजपा नेत्री ने अपने शेष भाइयों से भी कभी इस उपहार की मांग है? मेरा संदर्भ है छत्तीसगढ़ की सत्ता पर 15 सालों तक राज करने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से, मेरा संदर्भ है 7 सालों से देश की सत्ता पर राज करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से, मेरा संदर्भ है देश के गृह मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से! क्या बहन सरोज पांडे ने कभी इन लोगों से "रक्षाबंधन" पर "शराबबंदी" का उपहार मांगा है? और अगर नहीं तो क्यों? यह जवाब तो जनता पूछेगी और उनको जवाब भी देना चाहिए, क्योंकि अगर वह एक भाई से उपहार मांग रही हैं तो दूसरे भाई से आज तक इस उपहार क्यों नहीं मांगा? और अगर मांगा है तो क्या उन भाइयों ने उन्हें ये उपहार क्यों नहीं दिया? मतलब क्या उन्होंने अपने भाई होने का कर्तव्य नहीं निभाया? सवाल तो बनता है और अगर भाजपा नेत्री सरोज पांडे ने अपने शेष भाइयों अमित शाह, नरेंद्र मोदी और डॉ रमन सिंह से इस उपहार को नहीं मांगा है, तो क्या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से ही क्यों? और अगर भाजपा नेत्री सरोज पांडे ने अपने शेष भाइयों अमित शाह, नरेंद्र मोदी और डॉ रमन सिंह से इस उपहार को नहीं मांगा है तो क्या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री जो कि अभी डेढ़ साल से छत्तीसगढ़ की सत्ता में हैं, उनसे यह उपहार मांगना राजनीति से प्रेरित नहीं है? 
जनता यह सवाल पूछ रही है माननीय सांसद महोदया। आपको उचित लगे तो जवाब जरुर दीजिए। 

 प्रकाशपुन्ज पाण्डेय, राजनीतिक विश्लेषक, रायपुर, छत्तीसगढ़ 
7987394898, 9111777044

 

 


बॉलीवुड सेलेब्स का रिश्ता पाकिस्तान के आईएसआई से जुड़ा है : बीजेपी उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा

बॉलीवुड सेलेब्स का रिश्ता पाकिस्तान के आईएसआई से जुड़ा है : बीजेपी उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा

23-Jul-2020


बीजेपी के उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा ने हाल ही में बॉलीवुड सेलेब्स पर बेहद संगीन आरोप लगाया है. उनका कहना है कि कुछ बॉलीवुड सेलेब्स का रिश्ता पाकिस्तान के आईएसआई से जुड़ा है. इतना ही नहीं इन सेलेब्स पर शिकंजा कसने के लिए कागजी कार्रवाई भी चल रही है. बैजयंत ने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए ये बात कही साथ में अपनी बात के समर्थन में एक ट्वीट भी किया.

बैजयंत ने ट्वीट में कहा, ”कुछ बेहद चौंकाने वाली कड़ियां सामने आई हैं. जिनमें बॉलीवुड के कुछ लोग निजी और बिजनेस को लेकर पाकिस्तान और एनआरई लोगों से रिश्त हैं, इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि ये जम्मू कश्मीर में हिंसा बढ़ाते हैं, पाकिस्तानी सेना और आईएसआई से रिश्तों को सबूत हैं. मैं देशभक्त बॉलीवुड के लोगों से कहूंगा कि उनके नाम उजागर करें.”

वहीं, बैजयंत ने निजी न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा कि इस बात के कई सबूत मिले हैं जिसमें कुछ तस्वीरें शामिल हैं.  उन्होंने कहा, ”इनमें कुछ एनआरआई और पाकिस्तानी वेस्टर्न देशों में रहते हैं. इसमें इन लोगों के खिलाफ दो प्रकार के सबूत मिले हैं. एक तो ये लोग सोशल मीडिया पर हिंसा के लिए लोगों को उक्साते हैं दूसरा, पाकिस्तानी कैंप में दिखते हैं. ये लोग बॉलीवुड के लोगों के साथ पार्टी करते दिखते हैं.”

बैजयंत ने कहा कि आज की स्थिति में किसी के लिए ये भी कहना गलत होगा कि वो भारत-पाक रिश्तों को लेकर जागरुक नहीं है. आए दिन सीमा पर सेना के जवान और आम लोग पाकिस्तान की ओर से भेजे गए आतंकियों द्वारा अपनी जान गंवा देते हैं. उन्होंने कहा, ”इन बॉलीवुड के लोगों को शक का फायदा मिल रहा है. लेकिन में इनसे कहना चाहूंगा कि उन्हें देशभक्ति दिखानी चाहिए और आईएसआई से जुड़े लोगों से अपने संबंध तोड़ देने चाहिए.”


यूपी में कोरोना वायरस से ज्यादा अपराधियों का क्राइम  वायरस हावी है-मायावती

यूपी में कोरोना वायरस से ज्यादा अपराधियों का क्राइम वायरस हावी है-मायावती

22-Jul-2020

 

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती ने ट्वीट कर उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बोला हमला ।
सुश्री मायावती ने कहा कि पूरे यूपी में हत्या हुआ महिला असुरक्षा सहित जिस तरह से हर प्रकार के गंभीर अपराधों की बाढ़ लगातार जारी है उससे स्पष्ट है कि यहां का नहीं बल्कि जंगलराज चल रहा है अर्थात बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती ने बयान देते हुए उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए ।
सुश्री मायावती ने कहा कि पूरे यूपी में हत्या हुआ महिला असुरक्षा सहित जिस तरह से हर प्रकार के गंभीर अपराधों की बाढ़ लगातार जारी है उससे स्पष्ट है कि यहां का नहीं बल्कि जंगलराज चल रहा है अर्थात यूपी में कोरोना वायरस से ज्यादा अपराधियों का क्राइम  वायरस हावी है जनता त्रस्त है सरकार इस ओर ध्यान दें ।
सुश्री मायावती ने कहा कि आज तक अभी हाल ही में यूपी के जंगल राज में गाजियाबाद में अपनी भांजी के साथ छेड़छाड़ करने के विरोध में, पत्रकार श्री विक्रम जोशी को गोली मारकर बुरी तरह से घायल किया गया जिनकी आज मृत्यु हो जाने पर दुःखी, परिवार के प्रति बीएसपी की गहरी संवेदनाएं है। साथ ही बीएसपी की यह मांग भी है कि यूपी सरकार द्वारा पीड़ित परिवार को आज जो कुछ भी मदद करने की बात कही गई है तो उसे सरकार समय से भी दे,और इसके लिए पीड़ित परिवार को अधिकारियों के चक्कर न काटने पड़े, तो यह बेहतर होगा ।जनता त्रस्त है सरकार इस ओर ध्यान दें ।
सुश्री मायावती ने कहा कि आज तक अभी हाल ही में यूपी के जंगल राज में गाजियाबाद में अपनी भांजी के साथ छेड़छाड़ करने के विरोध में, पत्रकार श्री विक्रम जोशी को गोली मारकर बुरी तरह से घायल किया गया जिनकी आज मृत्यु हो जाने पर दुःखी, परिवार के प्रति बीएसपी की गहरी संवेदनाएं है। साथ ही बीएसपी की यह मांग भी है कि यूपी सरकार द्वारा पीड़ित परिवार को आज जो कुछ भी मदद करने की बात कही गई है तो उसे सरकार समय से भी दे,और इसके लिए पीड़ित परिवार को अधिकारियों के चक्कर न काटने पड़े, तो यह बेहतर होगा ।


फर्टिलाइजर घोटाला: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के 13 ठिकानों पर ED की छापेमारी

फर्टिलाइजर घोटाला: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के 13 ठिकानों पर ED की छापेमारी

22-Jul-2020

राजस्थान : राजस्थान में राजनीतिक संकट के बीच प्रवर्तन निदेशालय ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी फर्टिलाइजर (उर्वरक) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हो रही है। ईडी यह छापेमारी देशभर के कई स्थानों पर कर रही है। 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के ठिकानों पर एक उर्वरक घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के मामले में देशव्यापी छापेमारी की गई है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली में कम से कम 13 स्थानों पर तलाशी ली जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि जोधपुर में अग्रसेन गहलोत के ठिकानों पर भी तलाशी ली जा रही है। इस कथित उर्वरक घोटाले के मामले में 7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है।

ईडी ने कथित उर्वरक घोटाला मामले में सीमा शुल्क विभाग की शिकायत और आरोपपत्र के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में छह, गुजरात में चार, पश्चिम बंगाल में 2 और दिल्ली में एक स्थान पर पीएमएलए के तहत एजेंसी द्वारा छापे मारी की जा रहा है।

आपको बता दें कि इससे पहले 13 जुलाई को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक आभूषण कंपनी के जयपुर सहित चार शहरों में मौजूद ठिकानों पर छापेमारी की है। आयकर विभाग के एक अधिकारी ने बताया था कि दिल्ली, जयपुर और मुंबई में इनकम टैक्स विभाग ओम कोठारी समूह पर छापेमारी कर रहा है। सुनील कोठारी, डीपी कोठारी और विकास कोठारी की कंपनी एनएसई और बीएसई पर सूचीबद्ध है।

विभाग ने जयपुर में राजीव अरोड़ा के आम्रपाली कार्यालय पर  ने छापा मारा था। बता दें राजीव अरोड़ा राज्य कांग्रेस कार्यालय के सदस्य हैं। वहीं आयकर विभाग ने कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौर के कार्यालय और निवास सहित राज्य भर में कई स्थानों पर भी छापा मारा था।


कलयुगी पुत्र ने अपने ही मां को गोली मारकर किया घायल | नशे में धुत्त बेटा आगबबूला हो उठा और माँ पर गोली चला दिया।

कलयुगी पुत्र ने अपने ही मां को गोली मारकर किया घायल | नशे में धुत्त बेटा आगबबूला हो उठा और माँ पर गोली चला दिया।

22-Jul-2020

कलयुगी पुत्र ने अपने ही मां को गोली मारकर किया घायल

बेगूसराय जिले से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आई है। ,जहां एक कलयुगी पुत्र ने अपने  ही मां को ही गोली मार गंभीर रूप से घायल कर दिया है।
आनन-फानन में स्थानीय लोगों ने उसे इलाज के लिए मुख्यालय स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। पीड़िता को सिर में गोली लगने से उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। घटना जिला पटना के मरांची थाना क्षेत्र के सीतारामपुर वार्ड संख्या 10 निवासी रामबालक यादव की लगभग 50 वर्षीय पत्नी अंजू देवी की बताई जा रही है।
जख्मी की बड़ी पुत्रबधू इंदु देवी ने बताया कि बीते मंगलवार की देर शाम अपने बेटा को खाने के लिए बुलाने गई, इतने में ही नशे में धुत्त बेटा आगबबूला हो उठा और माँ पर गोली चला दिया। पड़ोसी राजकुमार ने बताया कि आरोपी पुत्र अपराधिक प्रवृति का है और अवैध कारोबार में लिप्त रहता है। उसने बताया कि रात भी वह चार अन्य मित्रों के साथ नशे में धुत होकर घर आया था, उसी दौरान मां उसे खाना खाने के लिए बुलाने गई उसी समय उसने गोली मार कर मां को घायल कर दिया।


शामली के कैराना एसडीएम ने कांधला कस्बे के स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण

शामली के कैराना एसडीएम ने कांधला कस्बे के स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण

21-Jul-2020

शामली के कैराना एसडीएम ने कांधला कस्बे के स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया है। जहां पर एसडीएम के निरीक्षण से स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डॉक्टर और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। इस दौरान एसडीएम ने स्वास्थ्य केंद्र पर दवाइयों के रखरखाव एवं साफ सफाई की बारीकी से जांच पड़ताल की और किसी भी तरह की कोई खामियां ना मिलने पर एसडीएम कैराना अपने काफिले के साथ शामली की ओर रवाना हो गए। जिसके बाद स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है।


पेड से लटकता मिला शव | घर से लापता विवाहिता का शव मिला जंगल  में |

पेड से लटकता मिला शव | घर से लापता विवाहिता का शव मिला जंगल में |

21-Jul-2020

आबूरोड़/ सिरोही  
घर से लापता विवाहिता का शव मिला जंगल  में 

पेड से लटकता मिला शव 

आबूरोड रीको थाना क्षेत्र के डेरी की घटना 

करीब 5 दिन से लटक रहा है शव 

पुलिस को सोमवार शाम को मिली सूचना 

पुलिस पहुची मौके पर 
 शव को पेड से उतार कर लाया जा रहा है मोर्चरी 

आबूरोड रीको थाना जाब्ता मौके पर


 सवर्ण ठाकुरों ने दलितों को गांव में दौड़ा-दौड़ा कर पीटा | मौके पर पहुंची पुलिस मूकदर्शक बन देखती रही

सवर्ण ठाकुरों ने दलितों को गांव में दौड़ा-दौड़ा कर पीटा | मौके पर पहुंची पुलिस मूकदर्शक बन देखती रही

21-Jul-2020

जौनपुर
       सवर्ण ठाकुरों ने दलितों को गांव में दौड़ा-दौड़ा कर पीटा
         मौके पर पहुंची पुलिस मूकदर्शक बन देखती रही
जौनपुर जिले के सिकरारा थाना क्षेत्र के भूआ खुर्द गांव में सवर्ण ठाकुरों ने एक दलित बस्ती में घुस कर चमार जाति के लोगों को बुरी तरह से मारा पीटा। 
 जहाँ एक तरफ योगी सरकार उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त,  भय मुक्त बताने की कोशिश कर रही है, वहीं जौनपुर जिले के भुआ खुर्द गांव में सवर्ण ठाकुर जाति के लोगों ने 40 - 50 की संख्या में अपने हाथों में लाठी डंडे लेकर दलित बस्ती में घुस गए और दलितों को मारने पीटने लगे पीड़ितों ने 100 नंबर की पुलिस को फोन करके बुलाया पुलिस के आने के बाद भी सवर्णों ने दलितों के साथ मारपीट करना बंद नहीं किया यहां तक कि घर में घुसकर महिलाओं - किशोरियों को भी मारा पीटा, पीड़ित दलित ने बचाओ - बचाओ की गुहार लगाते रहे लेकिन  पुलिस उल्टा ही दलितों को ही घरों में छुप जाने को कहा और मारने आए लोगों को रोकने से अपनी असमर्थता जताती रही अभी तक शासन प्रशासन ने उक्त सवर्णों के खिलाफ कोई भी कानूनी या दंडात्मक कार्यवाही नहीं की है। क्या यही है योगी का राम राज्य एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ अपने को योगी बताकर प्रदेश में राम राज्य की स्थापना करने की बात करते हैं।  वहीं प्रदेश के दलितों, अछूतों,  गरीबों के साथ भेदभाव ही नहीं उन्हें आये दिन मारा पिटा जाता है उन्हें देश का नागरिक ही नहीं समझा जाता है यदि यही हाल रहा तो दलितों को माओवादी नक्सलवादी,  या फिर यों कहें इन्हे अपनी सुरक्षा और सम्मान  बचाने के लिए आतंकवादी बनने से कोई नहीं रोक सकता क्योंकि न्याय और सुरक्षा,  की जिम्मेदारी निभाने वाला जब खुद जुर्म करने वालों के साथ खडा हो तो ऐसे में अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद करनी पड़ती है।


गोधन न्याय योजना की शुरूआत के साथ ही 102 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया मुख्यमंत्री ने

गोधन न्याय योजना की शुरूआत के साथ ही 102 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया मुख्यमंत्री ने

21-Jul-2020

- 85 करोड़ 61 लाख रुपए के 435 विकास कार्यों के भूमिपूजन के साथ ही 16 करोड़ 90 लाख रुपए के 178 कार्यों का किया लोकार्पण,
-शानदार अधोसंरचना के साथ अत्याधुनिक सुविधाओं का आगाज
कम्युनिटी हाल के लोकार्पण के दौरान पाटन के नागरिकों के साथ किया संवाद भी

दुर्ग 20 जुलाई 2020/पाटन ब्लाक में हरेली तिहार के अवसर पर गोधन न्याय योजना की शुरूआत के साथ ही मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल 102 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया। लगभग 85  करोड़ रुपए के 435  कार्यों के भूमिपूजन के साथ ही 16 करोड़ रुपए के 178 विकास कार्यों का लोकार्पण मुख्यमंत्री के हाथों हुआ। इन विकास कार्यों से पाटन ब्लाक के लोगों की अधोसंरचना संबंधी जरूरत तो पूरी होगी ही, अत्याधुनिक सुविधाओं वाले शहर के रूप में भी पाटन पूरी तरह तैयार होगा। इंडोर स्टेडियम, अत्याधुनिक कम्युनिटी हाल, स्वीमिंग पुल के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन हुआ। साथ ही मुख्यमंत्री के द्वारा ग्राम सिकोला में पथ वृक्षारोपण का लोकार्पण भी किया गया। इसमें 44 किलोमीटर सड़को में लगभग इतने ही पेड़ लगाए गए। इस मौके पर जिले के सभी ब्लाकों में 10 ग्राम पंचायत इस तरह 30 ग्राम पंचायतों में गोधन न्याय योजना का भी शुभारंभ हुआ। 31 जुलाई तक सभी 216 गौठानों में यह योजना आरंभ हो जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पाटन के कम्युनिटी हाल के लोकार्पण के दौरान पाटन के नागरिकों के साथ संवाद भी किया।

पाटन नगर को  सामुदायिक भवन जीर्णोद्धार की सौगात-  प्रमुख लोकार्पण कार्यों में पाटन में वार्ड क्रमांक 15 में 34 लाख रुपए की लागत से निर्मित डाॅ. खूबचंद बघेल सामुदायिक भवन जीर्णोद्धार कार्य के साथ ही इसी वार्ड में 24 लाख रुपए की लागत से निर्मित गौठान, विभिन्न वार्डों में 32 लाख रुपए से डामरीकरण कार्य, नगर के विभिन्न विकास वार्डों में 73 लाख रुपए के विकास कार्य शामिल है। इस प्रकार नगर पंचायत पाटन में विभिन्न विकास कार्यों के लिए एक करोड़ 65 लाख रुपए की राशि से निर्मित संरचनाओं का लोकार्पण किया गया।
4 नलजल आवर्धन योजनाओं का शुभारंभ- कुल एक करोड़ 83 लाख रुपए की राशि से निर्मित 4 नलजल आवर्धन योजनाओं का लोकार्पण भी इस अवसर पर किया गया। यह योजनाएं पतोरा, ढौर, भानसुली और खुड़मुड़ा में आरंभ हो जाएंगी। इनकी शुरूआत से इन चार गांवों के लोगों की पेयजल की समस्या पूरी तरह हल हो जाएगी।
सोलर एनर्जी के कार्य भी होंगे लोकार्पित- पाटन में दो करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सोलर पावर प्लांट के माध्यम से स्ट्रीट लाइट स्थापना कार्य का लोकार्पण भी किया गया। इसी प्रकार 170 सोलर ड्यूल पंप के माध्यम से पेयजल व्यवस्था के कार्यों का लोकार्पण भी हुआ। इसकी लागत 7 करोड़ 41 लाख रुपए है। इस प्रकार 9 करोड़ 41 लाख रुपए की लागत के  178 कार्यों का लोकार्पण सोलर एनर्जी से संबंधित कार्यों का हुआ।
29 ऐसे कार्य जिनसे गुलजार होगा पाटन- नकटा तालाब का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का भूमिपूजन भी इस अवसर पर हुआ। पांच करोड़ 97 लाख रुपए की लागत से इस तालाब के जीर्णोद्धार का कार्य होगा। तालाब से शहर की खूबसूरती भी बढ़ेगी और गहराई होने से वाटर लेवल भी बढ़ेगा। इसी तरह से 2 करोड़ 95 लाख रुपए की लागत से हनुमान तालाब का गहरीकरण भी होगा। स्पोर्ट्स फैसिलिटी बढ़ाने के लिए वार्ड क्रमांक 5 में मल्टी परपस इंडोर स्पोर्ट्स हाल का भूमिपूजन हुआ। साढ़े चार करोड़ रुपए की लागत से इसी वार्ड में स्वीमिंग पुल निर्माण कार्य भी होगा। 21 लाख 55 हजार रुपए की लागत से प्रेस क्लब के भवन का भूमिपूजन और 20 लाख रुपए की लागत से बनने वाले कृषक सदन का भूमिपूजन भी इस अवसर पर किया गया। इसके साथ ही नगर के विकास एवं बुनियादी संरचनाओं से संबंधित अनेक कार्यों का भूमिपूजन भी मुख्यमंत्री ने किया। इस प्रकार 40 करोड़ 72 लाख रुपए के 29 अधोसंरचनाओं से संबंधित कार्यों का भूमिपूजन मुख्यमंत्री ने किया।
जनपद पंचायत संसाधन केंद्र का भी भूमिपूजन- इस मौके पर जनपद पंचायत संसाधन केंद्र का भूमिपूजन भी मुख्यमंत्री ने किया। इसका निर्माण 1 करोड़ 26 लाख रुपए की राशि से कराया जाएगा। इसके साथ ही झीट, मर्रा और सांतरा में भी धान संग्रहण केंद्र का भूमिपूजन भी हुआ।
19 जलआवर्धन योजनाओं का भी भूमिपूजन- मुख्यमंत्री द्वारा पाटन ब्लाक के 19 गांवों में 4 करोड़ 84 लाख रुपए की लागत से 19 योजनाओं का भूमिपूजन किया गया। इनमें से मुड़पार, तर्रीघाट, सिपकोन्हा, केसरा, छाटा, परसाही, उफरा, सोनपुर, बोरेन्दा, गुढ़ियारी, मगरघटा, सिकोला, अचानकपुर, चुनकट्टा, अमलेश्वर, गोडपेण्ड्री, नवागांव, तेलीगुण्डरा और फेकारी में नलजल आवर्धन योजनाओं का भूमिपूजन किया।
26 करोड़ रुपए की लागत से नहरों के जीर्णोद्धार का कार्य- मुख्यमंत्री द्वारा इस अवसर पर 6 करोड़ रुपए की लागत में बेलौदी जलाशय तथा नहरों का जीर्णोद्धार कार्य, 4 करोड़ 33 लाख रुपए की लागत से कौही उदवहन सिंचाई योजना का आधुनिकीकरण एवं नहरों की लाइनिंग, 3 करोड़ 31 लाख रुपए की लागत से गुजरा व्यपवर्तन नहर का मरम्मत कार्य शामिल है। इसके साथ ही मगरघटा, कापसी, सांकरा माइनर का जीर्णोद्धार , सेलूद तथा तर्रा के निरीक्षण गृह का जीर्णोद्धार कार्य भी शामिल है।
हितग्राहियों को वितरण कार्यक्रम-  इस अवसर पर 217 स्वसहायता समूहों को 78 लाख रुपए की राशि सक्षम योजना अंतर्गत प्रदाय की गई। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सुपोषण  मिशन के द्वितीय चरण की शुरूआत भी की गई। छत्तीसगढ़ महिला कोष अंतर्गत चेक का वितरण भी किया गया। कृषि विभाग द्वारा स्प्रिंकलर एवं मिनीकीट वितरण भी इस अवसर पर किया गया। इसके साथ ही श्रम विभाग की योजनाओं के हितग्राहियों को भी योजनाओं का लाभ दिया गया।

 


250 भाजपा कार्यकर्ताओं ने थमा राज्य सरकार तीर्णमुल कांग्रेस कानून मंत्री का हाथ।

250 भाजपा कार्यकर्ताओं ने थमा राज्य सरकार तीर्णमुल कांग्रेस कानून मंत्री का हाथ।

20-Jul-2020

पश्चिम बंगाल सीतारामपुर के 250 बाउरी समाज के भाजपा कार्यकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल राज्य सरकार कानून मंत्री एवं आसनसोल विधायक मोलेघाटक नेतृत्व में थामा तृणमूल कांग्रेस का हाथ।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद कई विरोधी दल भी हैं और सभी पार्टियां अपने दलों को मजबूत करने की हमेशा ही कोसिस करती रहती है इसी दौरान सीतारामपुर के लच्छीपुर ग्राम में तृणमूल कांग्रेस ने एक सभा का आयोजन किया जिसमें मुख्यरूप से पश्चिम बंगाल राज्य कानून मंत्री मोलेघाटक उपस्थिति हुए।
उनकी नेतृत्व में बाउरी समाज के 250 भाजपा कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया मंत्री मोलेघाटक ने भाजपा से सामिल हुए लोगों को धन्यवाद करते हुए बताया कि राज्य कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने राज्य के लिए हर संभव विकाश कि प्रयाश में लगी हुई हैं चाहे कोरोना का समय था या कोरोना से पहले वे अपने राज्य के लोगों के लिए राज्य कि पहली मुख्यमंत्री हैं इस कोरोना महामारी में भी अपनी जनता को लेकर हर संभव कार्य किए हैं।


अपनो की शाहादत भूल गई पुलिस?? विकास दुबे के खजांची जय बाजपई को छोड़ा गया।

अपनो की शाहादत भूल गई पुलिस?? विकास दुबे के खजांची जय बाजपई को छोड़ा गया।

19-Jul-2020

कानपुर ब्रेकिंग- 
विकास दुबे के खजांची जय बाजपई को छोड़ा गया। 
कानपुर की नजीराबाद पुलिस गई थी जय को घर छोड़ने। 
एसटीएफ के कब्जे में था अभी तक जय बाजपाई।
 करोड़ो के लेनदेन का  हिसाब मिला था विकास और जय के खाते में। 
आयकर और ईडी ने भी दे दी क्या जय को क्लीन चिट
 पुलिस और एसटीएफ ने आकाओ के दवाब में दी जय बाजपाई को क्लीन चिट?
अपनो की शाहादत भूल गई पुलिस??


कानपुर में 14 दिनों का लॉकडाउन ?

कानपुर में 14 दिनों का लॉकडाउन ?

19-Jul-2020

गोविंद नगर विधायक सुरेंद्र मैथानी ने जिलाधिकारी को लिखा पत्र।।

जिले में 14 दिनों का लॉकडाउन लगाने की रखी मांग ।

कोरोना लेवल 1 और 2 के मरीजों को स्वमं के साधन से कोरेन्टीन सेंटर पहुँचने की दी जाए इजाज़त।

कानपुर में कोरोना के दिन प्रतिदिन बढ़ते मामलों से जनता के साथ नेताओ के माथे पर भी खिंची चिंता की लकीरें।।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान बोले पूरी दुनिया कोरोना से परेशान है और कोरोना से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान बोले पूरी दुनिया कोरोना से परेशान है और कोरोना से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा

18-Jul-2020

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान बोले पूरी दुनिया कोरोना से परेशान है और कोरोना से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा इसके लिए सरकार ने कामगारों को स्वरोजगार के लिए लोन देने की भी बात की है और साथ में ये भी कहा  6 लाख से ज्यादा लोगों को योजना से जोड़ना है। लोगो से कहा जो पैसा कमाएं उसमें बचत भी करें। और सबसे अहम बात मुख्यमंत्री ने ये भी कही भेदभाव खत्म करना पीएम का लक्ष्य समाज में संतुलन होना चाहिए फिर लोगो से कहा मुनाफे को बचाएं तभी पूंजी बढ़ेगी।


आज भी अगर सेवादल को सक्रिय कर दिया जाए तो कांग्रेस को चमत्कार दिखने लगेंगे - प्रकाशपुंज पाण्डेय

आज भी अगर सेवादल को सक्रिय कर दिया जाए तो कांग्रेस को चमत्कार दिखने लगेंगे - प्रकाशपुंज पाण्डेय

18-Jul-2020

रायपुर छत्तीसगढ़ के राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी प्रकाशपुंज पांडेय ने काँग्रेस पार्टी को सुदृढ़ करने के लिए मीडिया के माध्यम से कहा है कि वर्तमान समय में जब कांग्रेस पार्टी अपने संगठन की मज़बूती का रास्ता खोज रही है, उसे अपने संगठन की ओर ध्यान देते हुए उस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करना चाहिए, जिसे 1969 के बाद लगातार ख़त्म किया जाता रहा है। 

Seva Dal - Wikipedia

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने उनके दादाजी, जो कि एक कांग्रेस नेता थे, उनके द्वारा उन्हें दी गई जानकारी के अनुसार कहा कि, 'ये बात 1959 की है, जब कांग्रेस के नासिक अधिवेशन में शामिल होने जा रहे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को गेट पर रोक दिया जाता है। गेट पर सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभाल रहे कमलाकर शर्मा से नेहरू पूछते हैं क्या तुम मुझे नहीं जानते? शर्मा विनम्रता से कहते हैं- मैं आपको जानता हूँ, आप देश के प्रधानमंत्री हैं। लेकिन, आपने उचित बैज नहीं लगाया इसीलिए आप अंदर प्रवेश नहीं कर सकते। नेहरू जी मुस्कुराते हैं और अपनी जेब से बैज निकालकर दिखाते हैं। उसके बाद उन्हें अंदर जाने दिया जाता है। काँग्रेस सेवादल की पत्रिका ‘दल समाचार’ में इस घटना का ज़िक्र है। अधिवेशन स्थल पर तैनात शर्मा तब कांग्रेस सेवादल के नायक थे। उनकी इस हिमाक़त से समारोह स्थल पर हड़कंप मच गया, पर नेहरू तो उनकी परीक्षा ले रहे थे, जिसमें वे पास हो गए थे। बाद में उन्हें मुंबई का चीफ़ ऑर्गेनाइजर बना दिया गया।' 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय आगे कहते हैं कि कांग्रेस में सेवादल को फ़ौजी अनुशासन और जज़्बे के लिए जाना जाता है। इसका संगठनात्मक ढांचा और संचालन का तरीक़ा सैन्य रहा है। कभी कांग्रेस में शामिल होने से पहले सेवादल की ट्रेनिंग ज़रूरी होती थी। इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी की कांग्रेस में एंट्री सेवादल के माध्यम से ही कराई थी। नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक सब सेवादल को ‘कांग्रेस का सच्चा सिपाही’ कहते रहे हैं। कांग्रेस के ये सच्चे सिपाही इन दिनों पार्टी की दुर्दशा व अपनी उपेक्षा से उदास और खिन्न हैं। करना तो बहुत कुछ चाहते हैं पर कर नहीं पा रहे हैं। सेवादल की तर्ज पर ही गठित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की लगातार बढ़ती ताक़त इन्हें और बेचैन कर देती है। संघ का गठन, सेवादल के दो साल बाद किया गया था। आठवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही 1969 में सेवादल में शामिल हुए बलराम सिंह के मुताबिक, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और डॉ. नारायण सुब्बाराव हार्डिकर क्लास फेलो थे। शुरुआती दिनों में साथ-साथ सक्रिय थे। लेकिन, हार्डिकर पर गांधीजी का प्रभाव था तो हेडगेवार ‘हिंदू राष्ट्र’ का सपना देख रहे थे। हेडगेवार ने अपना अलग रास्ता बनाते हुए संघ का गठन किया। वे हिंदू महासभा से जुड़े हुए थे और जब तक वे जीवित रहे, संघ, हिंदू महासभा के यूथ विंग की तरह की काम करता रहा। जबकि, सेवादल ब्रिटिश हुक़ूमत के ख़िलाफ़ संघर्ष के रास्ते पर बढ़ता चला गया। डॉ. राजेंद्र प्रसाद और सुभाषचंद्र बोस से लेकर क्रांतिकारी राजगुरू तक इसके पदाधिकारी रहे। बलराम बताते हैं कि ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान के संगठन लाल कुर्ती का विलय भी सेवादल में करा दिया गया था। आज़ादी के आंदोलन में सेवादल की भूमिका का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि 1931 में सेवादल का स्वतंत्र स्वरूप ख़त्म करते हुए इसे कांग्रेस का हिस्सा बना दिया गया। ऐसा सरदार बल्लभ भाई पटेल की सिफ़ारिश पर किया गया, जिसमें उन्होंने गांधीजी से कहा था कि ‘यदि सेवादल को स्वतंत्र छोड़ दिया गया तो वह हम सबको लील जाएगा’। इसके एक साल बाद ही अंग्रेज़ों ने 1932 में कांग्रेस और सेवादल पर प्रतिबंध लगा दिया। बाद में कांग्रेस से तो प्रतिबंध हटा पर हिंदुस्तानी सेवादल से नहीं। सेवादल और संघ की कहानी भी ‘खरगोश और कछुआ’ जैसी कही जा सकती है। आज़ादी के बाद सेवादल के पास अपना कोई लक्ष्य नहीं रहा। कांग्रेस में यह उपेक्षित होता गया और पिछली पंक्ति में बैठा दिया गया। जबकि, संघ अपने हिंदू राष्ट्र के सपने को साकार करने की दिशा में कछुआ गति से आगे बढ़ता रहा। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि ऐसे समय जब शिद्दत से यह महसूस किया जा रहा है कि कांग्रेस अपनी जड़ों से उखड़ गई है और अन्य पार्टियाँ भी यह महसूस कर रही हैं कि संघ के जैसा ही कैडर आधारित संगठन मुक़ाबले के लिए ज़रूरी है, सेवादल का इतिहास उसे रास्ता दिखा सकता है। कांग्रेस ने सेवादल को महज ‘सेरेमोनियल’ बना दिया है। पार्टी के उत्सवों में वर्दी पहनाकर खड़ा होने के अतिरिक्त और कोई काम सेवादल के पास अब नहीं है। हालांकि, सेवादल के जुड़े किसी भी सदस्य से बात करें, तो जोश अब भी 1923 वाला ही मिलेगा। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय कहते हैं कि अगर ‘सेवादल को काम करने की छूट मिले तो एक साल के भीतर स्थिति बदल सकती है’। कांग्रेस और जनता के बीच सेवादल एक सेतु की तरह था। आज भी इसके ज़्यादातर सदस्य मध्यम वर्ग से आते हैं और इस वर्ग की नब्ज़ से परिचित हैं। यदि इसमें सिफ़ारिशी नियुक्ति बंद हो जाए और सेवादल से सुझावों पर कांग्रेस अमल करे तो फिर से संगठन मज़बूत हो सकता है। साथ ही कांग्रेस के मुख्य संगठन और अन्य संगठनों में जो लोग शामिल नहीं हो पा रहे हैं या उन्हें पद नहीं मिल पा रहा है वह अपनी प्रतिभा और कांग्रेस के प्रति समर्पण कर सेवा भाव से सेवा दल में जुड़ कर काम कर सकते हैं इससे संगठन और मजबूत होगा। यदि पार्टी सेवादल को गंभीरता से ले तो अब भी टिड्डी-दल की तरह यह टूट सकता है। काँग्रेस पार्टी का संगठन हर ब्लाक/प्रखंड और गांव में मौजूद है। देशभर में हमारे सदस्य हैं जो निःस्वार्थ भाव से जुड़े हैं, लाखों लोग सिर्फ़ भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। ये सत्ता के लिए संगठन में नहीं आए हैं। लेकिन कांग्रेस में निर्णायक पदों पर बैठे लोग यही समझते हैं कि ये तो सिर्फ़ सेवा करने वाले लोग हैं। इनका काम कांग्रेस के कार्यक्रमों में महज सेवा करना है। 

प्रकाश पुंज पाण्डेय 

 

 


यूपी में मुसलमान और ब्राह्मण तय करेंगे कांग्रेस एवं बसपा का सियासी भविष्य

यूपी में मुसलमान और ब्राह्मण तय करेंगे कांग्रेस एवं बसपा का सियासी भविष्य

17-Jul-2020

लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी

लखनऊ। यूपी की सियासत में शह और मात का खेल शुरू हो गया है हालाँकि अभी यूपी चुनाव बहुत दूर है लेकिन सियासी दलों ने चुनावी बिसात बिछाने के लिए अपने चुनावी तरकश से तीर चलाने प्रारंभ कर दिए है मोदी की भाजपा को छोड़ कांग्रेस ,बसपा एवं सपा के वोटों को चुनावी ख़ज़ाने में समेटने के लिए उनके निशाने पर मोदी की भाजपा की योगी आदित्यनाथ सरकार तो है ही साथ ही वह यह नाप तौल रहे कि आगामी 2022 का विधानसभा चुनाव किसके सहारे जीता जा सकता है इस लिए वह कोई मौक़ा नही छोड़ना चाहते जिससे उनके वोटबैंक में इज़ाफ़ा होता हो ज़ाहिर सी बात है सियासत में इसको बुरा भी नही समझा जाता क्योंकि सबका लक्ष्य सत्ता पाना होता है जो ग़लत भी नही है सियासी दल होते ही इस लिए है।

आठ पुलिस वालों की हत्या करने वाला विकास दूबे डायरेक्ट तो नही लेकिन किन्तु परन्तु कर आजकल सियासी दलों का दुलारा बना हुआ है सियासी दलों के नेताओं के किन्तु परन्तु का ब्राह्मण समाज भी उनकी हाँ में हाँ मिला रहा है ये बहस अलग है कि वह सही है या ग़लत हमारा मक़सद किसी को ग़लत या सही का सर्टिफिकेट देना नही है और होना भी नही चाहिए उनके अपने तर्क है कि हमारे समाज का उत्पीडन हो रहा है जो सही भी हो सकता है और ग़लत भी।ख़ैर हम बात कर रहे थे सियासी दलों के आगामी विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियों की फ़िलहाल तीन वोटबैंक ऐसे है जिनको सियासी दल अपने-अपने पाले में लाने के प्रयास में जुटे हैं मुसलमान , ब्राह्मण और दलित कांग्रेस का लक्ष्य मुसलमान , ब्राह्मण और दलित तीनों को वापिस कांग्रेस में लाने का है इसके के लिए वह जी-तोड़ प्रयास कर रही है देखा जाए तो मुसलमान को कहा जा सकता है कि वह कांग्रेस की तरफ़ मूव कर जाए यूपी का मुसलमान सपा की लीपा-पोती से थक चुका है और वह कांग्रेस का पूर्व में वोटर भी रहा है इससे इंकार नही किया जा सकता है यही बात ब्राह्मणों पर भी लागू होती है 

वह भी उसका मूल वोटबैंक हुआ करता था वह तो हिन्दू मुसलमान के मकड़जाल में फँस कर अपनी पार्टी को छोड़ भटकता फिर रहा है कभी वह बसपा का तारण हार बन जाता है तो कभी वह मोदी की भाजपा की चुनावी नाव में सवार हो उसकी नय्या पार लगा देता है परन्तु कांग्रेस के बाद उसका कोई स्थायी सियासी आवास नही बन पाया है इस लिए कहा जा सकता है कि शायद वह अपने सियासी स्थायी घर की तलाश में है और ऐसा हो भी सकता है कि वह कांग्रेस के घर में प्रवेश कर जाए लेकिन दलितों को लेकर फ़िलहाल क़यास भी नही लगाए जा सकते है क्योंकि दलितों पर बसपा का जादू सर चढ़कर बोलता है इसमें किसी को कोई शक भी नही है इसकी वजह भी है जबसे दलित बसपा के साथ जुड़ा है उसमे आज तक कोई टूट नही हुई हर चुनाव में मज़बूती के साथ बसपा के साथ खड़ा रहा ये बात अपनी जगह है कि उसको पिछले दो चुनाव से अपेक्षाकृत कामयाबी नही मिली इसके बावजूद वह वही खड़ा है यही वजह है कि दलितों के वोटबैंक में सेंधमारी की बात सियासी गुणाभाग के पंडितों की समझ में नही आती हाँ यह बात अलग है कि प्रयास सियासी दल करते ही है कामयाबी मिलती है या नही यह सब चुनाव के बाद में समीक्षा का विषय है दलित भी बसपा से पूर्व कांग्रेस का ही वोटबैंक रहा है।हालाँकि कांग्रेस अपने 135 साल के लंबे दौर में सबसे ख़राब दौर से गुजर रही है उसके नौजवान सितारे आने वाले कल के भविष्य एक-एक कर अपनी महत्वकांक्षा के चलते या कांग्रेस हाईकमान की उदासीनता के चलते साथ छोड़ मोदी की भाजपा का दामन थाम रहे है

 कांग्रेस का इस पर कहना है कि उनको भविष्य की नही वर्तमान की चिंता है जो जाने का मन बना चुका हो उसको रोका नही जा सकता कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एनएसयूआई की बैठक को संभोधित करते हुए कहा कि इस तरह के नेताओं के जाने से नए युवाओं के लिए रास्ते खुलेंगे इस तरह के सख़्त बयान से एक बात तो साफ हो गई कि कांग्रेस आलाकमान इस तरह की धमकियों से डरने वाला नही है और हो सकता है कि वह और भी कई बहुत सख़्त निर्णय ले यह तो आने वाला समय बताएगा।

यूपी चुनाव 2022 के शुरू में होंगे बसपा भी अपने पत्ते फ़ेट रही है उसके सियासी तरकश से चुनावी बिसात बिछाई जा रही है उसकी रणनीति में ब्राह्मण एवं मुसलमान वोटबैंक है सियासी पंडितों और बसपा के रणनीतिकारों का मानना है कि इससे पूर्व भी ब्राह्मणों ने बसपा को वोट देकर सत्ता की दहलीज़ पर पहुँचाया था यह 2007 के विधानसभा चुनाव की बात है उसी रणनीति पर चलते हुए बसपा की सुप्रीमो मायावती ने कानपुर के बिकरू गाँव में डीएसपी सहित आठ पुलिस वालों की हत्या करने का मुख्य आरोपी विकास ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक मंदिर के अंदर सरेंडर किया था उसके बाद कानपुर लाते समय योगी की पुलिस ने योजनाबद्ध तरीक़े से एनकाउंटर कर दिया था इस तरह के एनकाउंटरों पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए थे सवाल सही खड़े किए थे या एनकाउंटर सही थे यह तो विपक्ष की माँग के अनुसार मौजूदा जज से जाँच कराई जाए जब साफ़ हो पाएगा कौन ग़लत है और कौन सही इस घटना के बाद मारे गए विकास दूबे को लेकर सियासी दलों ने योगी सरकार की ठोंक दो की नीति पर सवाल खड़े कर इस मामले को ब्राह्मणों पर अत्याचार का रूप दे दिया था इसमें सबसे पहले बसपा की सुप्रीमो मायावती थी जिसने योगी सरकार पर ब्राह्मणों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था मायावती ने कहा था कि प्रदेश की योगी सरकार ऐसा संदेश न दे जिससे ब्राह्मण समाज अपने आपको असुरक्षित , भयभीत और आतंकित समझने लगे मायावती यही नही रूकी उन्होंने कहा कि प्रदेश में आपराधिक पर्वती के लोगों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियान की आड़ में छाँट-छाँट कर दलितों , पिछड़ों और मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है जो मोदी की भाजपा की सियासत के फ़्रेम में फ़िट बैठता है उसी घिनौनी सियासत से जुड़ा होना लगता है।

मायावती के इस रूख से यह साफ हो जाता है कि वह एक बार फिर ब्राह्मण समाज और मुसलमान का पूर्व की भाँति समर्थन चाहती है जैसा उसे 2007 के विधानसभा चुनाव में मिला था उस चुनाव के बाद बसपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी उस सरकार में सबसे अधिक बसपा के ब्राह्मण विधायक जीते थे जिनकी संख्या 41 थी बसपा ने इसे सोशल इंजीनियरिंग का नाम दिया था जबकि सपा से 11 , भाजपा से 3 , कांग्रेस से 2 व 1 अन्य था।आगामी विधानसभा चुनाव में सही मायने में तो ढेढ साल बचा है लेकिन असल में मात्र एक वर्ष ही है छह महीने पहले तो टिकटों की लड़ाइयाँ एवं गठबंधनों का दौर शुरू हो जाता है।अन्य दलों का प्रयास है किसी तरह ब्राह्मण , मुसलमान और दलित हमारे पाले में आ जाए।मायावती का यह प्रयास सियासी पंडित इसी नज़रिये से जोड़ कर देख रहे है उनका मानना है कि मायावती अपनी सोशल इंजीनियरिंग को बहाल कर सत्ता की दहलीज़ तक पहुँचने का प्रयास कर रही है।

आगामी चुनाव को लेकर बसपा की रणनीति तय की जा रही है लोकसभा में संसदीय दल का नेता भी पंडित को बनाया गया है और राज्यसभा में भी पंडित ही संसदीय दल का नेता है लोकसभा में पूर्व सांसद राकेश पांडेय के पुत्र अम्बेडकर नगर सीट से बसपा सांसद रितेश पांडेय जो 2017 के विधानसभा चुनाव में पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे 2019 के लोकसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव लड़े और सांसद निर्वाचित हो गए थे वहीं राज्यसभा में सतीश मिश्रा को बनाया गया है यहाँ यह भी ग़ौरतलब है कि बसपा में पहली बार किसी दूसरे ब्राह्मण नेता को तर्जी देकर अहम पद दिया गया है इससे पहले सतीश मिश्रा के अलावा किसी दूसरे ब्राह्मण को अहमियत नही दी जाती थी यूपी प्रदेश अध्यक्ष पद पर मुस्लिम चेहरा पूर्व राज्यसभा सांसद बाबू मुनकाद अली को बनाया गया है साफ़तौर पर कहा जा सकता है कि यह बसपा की 2022 की चुनावी तैयारी है अब देखने वाली बात यह है कि क्या मायावती 2007 दोहरा पाएँगी या यह सब तैयारियाँ धरी की धरी रह जाएगी यह तो वक़्त ही बताएगा लेकिन बसपा की चुनावी तैयारियों से कांग्रेस और सपा को सबसे ज़्यादा नुक़सान होने की संभावनाओं से इंकार नही किया जा सकता है अगर उसकी सोशल इंजीनियरिंग फ़िट बैठती है।

सपा के मालिक अखिलेश यादव इस ख़ुशफ़हमी का शिकार हो रहे है कि जनता मोदी की भाजपा की योगी आदित्यनाथ की सरकार की जनविरोधी नीतियों का लाभ सपा को ही मिलेगा जबकि सपा से मुसलमान भी किनारा कर सकता है अगर ऐसा हुआ तो सपा बहुत ही बुरी स्थिति में जा सकती है 2017 में तो कुछ सीट आ भी गई थी सत्ता में रहते जिसे कुछ नही मिला अगर कुछ मिला था तो वह मोदी की भाजपा को मज़बूत करने के लिए प्रायोजित मुज़फ़्फ़रनगर के दंगे मिले थे इसके बाद भी मुसलमान पूरी मज़बूती से सपा कंपनी के साथ खड़ा था जबकि सत्ता में सबकुछ मिलने के बाद भी यादव वोट भाग गया था यानी साफ़-साफ कहा जाए तो यादव भी हिन्दू हो गया था यह बात सपा के एक मात्र मुस्लिम नेता आज़म खान जो इस समय योगी सरकार की द्वेष भावना की रणनीति का शिकार है जेल की सलाखों के पीछे ने कही भी थी मुलायम सिंह यादव की मौजूदगी में कि नेताजी मुसलमान खड़ा रहा और यादव भाग गया यही तीखी बातें अखिलेश यादव को आज़म खान की पसंद नही है बल्कि यूँ भी कहा जाए कि मुसलमान ही पसंद नही है तो ग़लत नही होगा सपा मुँह पर राम-राम बग़ल में छूरी रखती है. 

मुसलमान इस बात को जितनी जल्दी समझ जाए उतना ही उसके भविष्य के लिए बेहतर है सपा की हालत ठीक नही लग रही क्योंकि वह योगी सरकार से सड़क पर लड़ने के लिए तैयार नही है वैसे यही हाल बसपा का भी है वह भी देखा जाए तो सड़क पर लड़ने को तैयार नहीं है वैसे बसपा का इतिहास सड़क पर लड़ने का नही रहा है वह तो सोशल इंजीनियरिंग पर विश्वास रखती है क्योंकि उसका वोटबैंक मज़बूत है उसको दिखाकर दूसरे वोट लेने का प्रयास करती हैं।योगी सरकार से सीधी टक्कर अगर कोई विपक्षी दल ले रहा है तो वह कांग्रेस है लेकिन उसके पास मज़बूत वोटबैंक नही है और उसे अपने अंदर के शत्रुओं से भी लड़ना पड़ रहा जिसकी वजह से योगी सरकार से सीधी टक्कर का उसे लाभ नही मिलता दिख रहा है हाँ अगर मुसलमान और ब्राह्मण ने उसकी चुनावी नय्या में सफ़र किया तो वह 2009 का चुनाव दोहरा सकती है।कुल मिलाकर यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव में मुसलमान और ब्राह्मण तय करेंगे बसपा एवं कांग्रेस का चुनावी भविष्य।

लेखक लखनऊ से वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार है। 


कांग्रेस पार्टी को स्वयं कांग्रेसी ही नष्ट कर रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी को स्वयं कांग्रेसी ही नष्ट कर रहे हैं।

17-Jul-2020

भारतीय राजनीति में सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा समय तक राज करने वाली पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के जो हालात है वह किसी से छूटे हुए नहीं हैं सवाल यह उठता है कि कांग्रेस की इस दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है इसको जानने से पहले सबसे पहले यह देते हैं कि भारत में कांग्रेस की स्थिति किन राज्यों में बहुत बुरी है और जहां वर्षों से कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री नहीं बन सका है।
कुछ ऐसे राज हैं जहां बीते कई दशकों से कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती जा रही है और वहां कांग्रेस का मुख्यमंत्री नहीं बना है।

देश के इन राज्यों में बीते 50 सालों से कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है!
देश में कई ऐसे राज्य हैं, जहां कांग्रेस का अस्तित्व लगभग खत्म सा हो गया है। इन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बने दशकों बीत गए हैं। 
तमिलनाडु देश का ऐसा प्रदेश है जहां 52 सालों से कांग्रेस की सरकार नहीं बनी। वहां कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री एम भक्तवत्सलम थे जिनका कार्यकाल 1963 से 1967 के दौरान रहा था।
पश्चिम बंगाल भी ऐसा राज्य है, जहां कांग्रेस बीते 42 सालों से सत्ता में नहीं है। कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे का कार्यकाल 1977 तक रहा था।
कांग्रेस की सत्ता सिक्किम में भी लंबे वक्त से नहीं है। वहां कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री बीबी गुरुंग रहे थे। सिक्किम में बीते 35 सालों से कांग्रेस की सरकार नहीं है।
साल 1989 तक एनडी तिवारी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री थे। 30 सालों से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है।
भारतीय राजनीति का केंद्र बिहार में भी कांग्रेस की हालात काफी खराब है। कांग्रेस को सत्ता से बाहर हुए 30 साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है। वहां कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र थे।
उत्तर पूर्वी राज्य त्रिपुरा में कांग्रेस की सरकार आखिरी बार 1993 में थी। तब वहां के मुख्यमंत्री समीर रंजन बर्मन थे। राज्य की सत्ता से बेदखल हुए कांग्रेस को यहां 26 साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है।
गुजरात की बात करें तो वहां कांग्रेस की आखिरी बार सरकार मार्च 1995 तक रही। वहां कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री छबीलदास मेहता रहे थे।
ओडिशा में भी लंबे वक्त से कांग्रेस की सरकार नहीं है। वहां कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री हेमानंद बिस्वाल रहे और वहां 19 साल से कांग्रेस की सरकार नहीं है।
जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री गुलाब नबी आजाद थे। उनका कार्यकाल 2005 से 2008 तक रहा। तब से 11 सालों से वहां कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है।
यह कुछ ऐसे प्रदेश है जहां कांग्रेस सरकार बनाने के लिए तरसती रही है लेकिन एक बहुत ही बड़ा सवाल सामने आता है कि कांग्रेस की दुर्दशा के लिए इस नाकामी के लिए कौन जिम्मेदार है? हालात पर अगर नजर डाली जाए तो ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस की खस्ता हालत के लिए खुद कांग्रेसी और सीनियर नेता जिम्मेदार है।
अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के द्वारा एक लेटर जारी किया गया जिसमें कांग्रेस के संगठनों का वर्णन किया गया उस पत्र में कुल 42 संगठनों का उल्लेख किया गया है जिसमें उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कहा है कि यह 42 संगठन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा संचालित किए जा रहे हैं और इन्हीं संगठनों को मान्यता है। इसी बीच राष्ट्रीय स्तर पर एक और संगठन बहुत तेजी से उभर कर सामने आ रहा है अखिल भारतीय सोनिया गांधी ब्रिगेड जो बहुत तेजी के साथ पूरे देश में अपना विस्तार कर रहा है। सवाल यह है कि इस संगठन को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा लिस्ट में शामिल ना करना किस बात को दर्शाता है यहां पर कई सवाल सामने आते हैं क्या इस संगठन की सूचना श्रीमती सोनिया गांधी जी, राहुल गांधी जी और श्रीमती प्रियंका गांधी जी को नहीं है और अगर है और उनकी सहमति से संगठन बना है तो वह इस पर खामोश क्यों हैं संज्ञान क्यों नहीं लेते? उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जो लेटर जारी किया उस की प्रतिलिपि श्रीमती सोनिया गांधी तक गई है इसके अलावा अखिल भारतीय सोनिया गांधी द्वारा किए जा रहे क्रियाकलापों की सूची सोनिया गांधी तक प्रियंका गांधी और राहुल गांधी तक पहुंचाई जाती है। उनका खामोश रहना अखिल भारतीय सोनिया गांधी ब्रिगेड के ऊपर एक सवाल खड़ा करता है।
होना तो यह चाहिए था कि कांग्रेस पार्टी को इस को हाथों हाथ लेना चाहिए था क्योंकि इससे कांग्रेस पार्टी को ही मजबूती मिलती लेकिन कांग्रेस पर बैठे हुए जो प्रदेश के वरिष्ठ नेता है शायद वह नहीं चाहते हैं कि आज का नवयुवक तेजी के साथ उभरकर सामने आए या तो उन्हें अपने पद अपनी कुर्सी के लिए खतरा दिखाई देता है या वह अपने आगे किसी और को बढ़ने नहीं देना चाहते हैं और यह कांग्रेस की पुरानी प्रवृत्ति रही है कि वहां के सीनियर नेता नए उभरते हुए लोगों को बिल्कुल आगे नहीं आने देते और उनकी काट करने लगते हैं। शायद यही वजह है कि पूरे देश में कांग्रेस की हालत बहुत दयनीय है और वह सरकार बनाने में अक्षम नजर आती है। कांग्रेस पार्टी को तेजी के साथ उभरकर सामने आने के लिए सिर्फ श्रीमती सोनिया गांधी श्रीमती प्रियंका गांधी और श्री राहुल गांधी के बोलने से ही काम नहीं चलेगा बल्कि हर प्रदेश के जो वरिष्ठ नेता है उनको भी सामने आना होगा और नई जनरेशन के नवयुवकों को पूरा सहयोग देना पड़ेगा तभी कांग्रेस की स्थिति देश और प्रदेश में सुधर सकती है।

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com