कोविड-19: दुनियाभर में मरने वालों की संख्याओं ने हड़कंप मचाया!

कोविड-19: दुनियाभर में मरने वालों की संख्याओं ने हड़कंप मचाया!

13-Oct-2020

मीडिया रिपोर्ट 

नई दिल्ली : खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, यह जानकारी जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी ने मंगलवार को दी।

विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिस्टम साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) ने अपने नवीनतम अपडेट में खुलासा किया कि मंगलवार की सुबह तक कुल मामलों की संख्या 37,738,569 हो गई थी और मृत्यु दर बढ़कर 1,078,868 हो गई।

सीएसएसई के अनुसार, अमेरिका दुनिया में सबसे अधिक प्रभावित देश हैं, यहां 7,803,884 मामले दर्ज किए गए हैं और 214,063 मृत्यु दर्ज की गई है। वहीं मामलों की ²ष्टि से भारत 7,120,538 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि देश में मरने वालों की संख्या 109,150 है।

सीएसएसई के आंकड़ों के अनुसार, अधिक मामलों वाले अन्य शीर्ष 15 देश ब्राजील (5,103,408), रूस (1,305,093), कोलम्बिया (919,083), अर्जेंटीना (903,730), स्पेन (888,968), पेरू (849,371), मैक्सिको (821,045), फ्रांस (776,097), दक्षिण अफ्रीका (693,359), ब्रिटेन (620,458), ईरान (504,281), चिली (482,832), इराक (405,437), बांग्लादेश (379,738), और इटली (359,569) हैं।

ब्राजील वर्तमान में संक्रमण से हुई मौतों के मामले में 150,689 संख्या के साथ दूसरे स्थान पर है।

वहीं 10,000 से अधिक मौत वाले देश मेक्सिको (83,945), ब्रिटेन (42,965), इटली (36,205), पेरू (33,305), स्पेन (33,124), फ्रांस (32,703), ईरान (28,816), कोलंबिया (27,985), अर्जेंटीना (24,186), रूस (22,594), दक्षिण अफ्रीका (17,863), चिली (13,376), इक्वाडोर (12,218), इंडोनेशिया (11,935) और बेल्जियम (10,191) हैं।


दिल्ली: नजफगढ़ थाना पुलिस टीम ने पिस्टल के दम पर लूटपाट और वाहन चोरी करने वाले दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है

दिल्ली: नजफगढ़ थाना पुलिस टीम ने पिस्टल के दम पर लूटपाट और वाहन चोरी करने वाले दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है

13-Oct-2020

दिल्ली: नजफगढ़ थाना पुलिस टीम ने पिस्टल के दम पर लूटपाट और वाहन चोरी करने वाले दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है. इनके पास से पुलिस टीम ने चोरी की एक बाइक, एक कंट्री मेड पिस्टल और एक जिंदा कारतूस बरामद किया है. गिरफ्तार हुए बदमाशों की पहचान आकाश उर्फ डांगी और निखिल के रूप में हुई है.

Report:Atiq Malik

Place:Delhi

डीसीपी संतोष कुमार मीणा के अनुसार वारदात की रोकथाम के लिए नजफगढ़ एसएचओ की देखरेख में हेड कॉन्स्टेबल सुरेंद्र, कॉन्स्टेबल राजेंद्र और जितेंद्र की टीम जय विहार एरिया में पेट्रोलिंग कर रही थी. उसी दौरान पुलिस टीम ने मिली एक सूचना के आधार पर संदिग्ध हालत में बाइक से जा रहे दो लोगों को रोका.पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में दोनों कोई संतुष्टिजनक जवाब नहीं दे पाए. इसके बाद पुलिस टीम ने उनकी तलाशी ली. इनके पास से एक कंट्री मेड पिस्टल बरामद हुई. पुलिस ने बाइक की जांच की तो पता चला कि बाइक निहाल विहार थाना इलाके से चुराई गई थी. पुलिस टीम ने तुरंत उन दोनों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल पुलिस इस मामले मे छानबीन कर आगे की कार्रवाई कर रही है.

 


दिल्ली के तुगलकाबाद के क्षेत्र में अफ्रीकी नागरिकों की बढ़ते मूवमेंट के देखते हुए दिल्ली पुलिस सक्रियता से काम कर रही है

दिल्ली के तुगलकाबाद के क्षेत्र में अफ्रीकी नागरिकों की बढ़ते मूवमेंट के देखते हुए दिल्ली पुलिस सक्रियता से काम कर रही है

13-Oct-2020

 

Report:Atiq Malik

Place:Delhi

दिल्ली के तुगलकाबाद के क्षेत्र में अफ्रीकी नागरिकों की बढ़ते मूवमेंट के देखते हुए दिल्ली पुलिस सक्रियता से काम कर रही है. इसी कड़ी में तीन विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है. तीनों विदेशी नागरिक नाइजीरियन हैं, जिनके पास कोई दस्तावेज नहीं थे. जिसको लेकर तीनों से लगातार पूछताछ की जा रही है.

दिल्ली पुलिस ने तुगलकाबाद क्षेत्र से तीन विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है. तीनों विदेशी नागरिकों के पास कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं थे. जिसको लेकर तीनों के खिलाफ गोविंदपुरी थाना में मामला दर्ज करा दिया गया है और अब उन्हें साकेत कोर्ट में पेश किया जाएगा.

आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस के दो जवान राजीव और राजकुमार जब तुग़लकाबाद एक्सटेंशन में गश्त कर रहे थे, तभी तीन विदेशी नागरिकों को उन्होंने घूमते देखा. तीनों विदेशी नागरिकों से जब उनके दस्तावेज मांगे गए तो वे कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर सके. जब उन्हें एरिया में आने का कारण पूछा गया तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. जिसके बाद मौके पर मौजूद पुलिस ने तीनों विदेशी नागरिकों को हिरासत में ले लिया. एक विदेशी नागरिक की पहचान डेविड रिचर्ड और दूसरे की पहचान आइक स्टेनली और वहीं तीसरे की पहचान डेविड मेबाकासू के रूप में की गई है.

 


हीरापुर थानान्तर्गत बीसी कालेज के पास तालाब में युवती का शव मिलने से इलाके में हड़कंप।

हीरापुर थानान्तर्गत बीसी कालेज के पास तालाब में युवती का शव मिलने से इलाके में हड़कंप।

13-Oct-2020

Report:Abdul Kalam

Place:bengal

सूत्र के अनुसार उसकी उम्र 18-19 के आसपास है। खबर पाकर हीरापुर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल ले गई। हीरापुर पुलिस का प्रारंभिक अनुमान है कि यह धर्मपुर की एक लापता लड़की का शव है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह उन्होंने देखा कि एक युवती सलवार कमीज पहने एक तालाब में डूब रही है। कुछ ने कहा कि युवती के चेहरे पर खून के धब्बे हैं। जब इस संबंध में हीरापुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी सौमेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि पुलिस जांच कर रही है कि यह घटना आत्महत्या थी या हत्या।घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है।


कोलकाता के चितपुर स्थित प्लास्टिक कारखाने में लगी भयावह आग,  मौके पर पहुंची दमकल की दर्जन भर इंजन

कोलकाता के चितपुर स्थित प्लास्टिक कारखाने में लगी भयावह आग, मौके पर पहुंची दमकल की दर्जन भर इंजन

12-Oct-2020

Report:Abdul Klam

Place:Bengal

पश्चिम बंगाल के  कोलकाता के चितपुर स्थित एक प्लास्टिक के कारखाने में अचानक से लगी भयावह आग से पूरे इलाके में अफरा तफरी का माहौल छा गया ।  घटना की खबर मिलने के बाद  आग पर काबू पाने के लिए मौके पर दमकल की करीब दर्जन भर इंजने पहुंच कर आग पर काबू पाने की जद्दो जहद में जुटी हुई है।  आग के कारण आस पास के इलाके में काला धुंआ पसर गया है , जिस कारण लोगों को सांस लेने में भी काफी तकलीफें हो रही है।


जोगी के गढ़ को साधने की चुनौती!

जोगी के गढ़ को साधने की चुनौती!

12-Oct-2020

एम   एच जकरिया 

जोगी के गढ़ को साधने की चुनौती!
जोगी जी के जाने के बाद  कांग्रेस की परंपरा गत विधानसभा सीट  मरवाही मे उपचुनाव होने जा रहे है, इस विधान सभा में  त्रिकोणीय मुकावले की संभावना व्यक्त की जा रही हैं लेकिन हक़ीकत मे चुनाव संघर्ष पूर्ण होगा इसमें कोई दो मत नहीं है। अभी तक राजनैतिक दलों ने अपने पत्ते नही खोले है लेकिन मरवाही  को कांग्रेस  की भूपेश बघेल  सरकार ने जिला बनाने मे महत्व पूर्ण भूमिका अदा की है, और जनता इसे बेहतर समझ गई है इस लिए वहाँ की फ़िज़ा का अंदाज लगाना अभी थोड़ा मुश्किल हो सकता हैं, फिर भी  मरवाही जोगी परिवार की  परंपरा गत सीट  मानी जाती रही  हैं और वर्षों से यहाँ की राजनीति में जोगी परिवार काबिज रहा हैं और अभी भी अमित जोगी और उनका पुरा संगठन  मरवाही मे सक्रिय हो चुका है, वही कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को  मरवाही क्षेत्र  पर कब्जा जमाने के लिए  कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता हैं।  क्योंकि जोगी परिवार मरवाही विधानसभा क्षेत्र की  की जनता के घर घर से जुड़े हुए होना और परिवारिक तौर पर सब से  निजी रिश्ते और अजीत जोगी जी की देहांत पर  सहनुभूति वहाँ कितनी माने रखने वाली है चुनावी रण निति पर निर्भर करता है । वही कांग्रेस की बड़ी उपलब्धि होंगी मरवाही को जिला बनाया जाना जिससे वहाँ की जनता की एक पुरानी माँग पूरी हुई है, इस लिए कांग्रेस को इस उप चुनाव में इसका बड़ा लाभ मिल सकता हैं, वही भारतीय जनता पार्टी  के पास ना कुछ खोने के लिए है और ना पाने के लिए  इस लिए इनका इन डायरेक्ट स्पोर्ट जोगी कांग्रेस को मिलता है , तब चुनाव  और भी जबरदस्त होने की संभावना बन सकती है ? लेकिन राजनीति मे कुछ भी कहा नही जा सकता की चुनाव परिणाम किस करवट बैठने वाली है, वैसे कांग्रेस पुरी दम - खम से चुनावी मैदान में  उतरने की तैयारी कर रही है। क्योंकि केन्द्र की किसान विरोधी बिल पर काग्रेस न केवल आन्दोलनात्मक तेवर अपनाये हुए है वल्कि मुख्यमंत्री भुपेश  ने बिल को छत्तीसगढ में लागू नही होने देने की  घोषणाकर सीधे - सीधे प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने चुनौती खड़ा कर दिया है । जिससे किसान वर्ग खुश नज़र आ रहा है,  और छत्तीसगढ़ सरकार की यूजनाओ का लाभ भी इस चुनाव में मिल सकता हैं जरूरत है बेहतर चुनाव मैनेजमेंट की वैसे अमित जोगी भी बेहतर चुनाव मैनेज करते है लेकिन अभी
बहुत कठिन है डगर पनघट की क्योंकि सीधे सत्ता से लडाई है शासन प्रशासन सभी लग जायेंगे !वर्तमान भूपेश बघेल की सरकार में कार्य की रूप रेखा तो अच्छी बन रही हैं लेकिन क्रियांवयन सही तरीके से लागू नही हो रहा है, मरवाही जिला तो बन गया है, लेकिन  मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं के बारबर है ये यहाँ के वोट देने वाले लोग कहते है!  इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए था वैसे भी जोगी जी के लिए यहाँ के लोगों में सहानुभूति तो है अब देखना ये है की जोगी जी का इस विधान सभा से जुड़ाव कितना कारगर साबित होने वाला है, क्योंकि यहाँ उतारे जाने वाले प्रत्याशी कितने दमदार साबित होंगे ये मायने रखता है क्योंकि  मरवाही का नेतृत्व तो चुनाव लड़ने वाले  प्रत्याशी को करना है, और मरवाही की जनता भी समझती हैं की उनका काम कौन  बेहतर करेगा इस लिए यहाँ कोई भी अंदाज़ा लगाना अभी ठीक नहीं माना जाएगा लेकिन ये जरूर  कहा ज सकता हैं की निजी संबंध इस चुनाव में अधिक प्रभाव डालने वाले है।
मरवाही विधानसभा अजीत जोगी का गढ़ माना जाता है जहां वे बिना प्रचार के ही चुनाव जीत जाते थे। जोगी जी अब नहीं रहे लेकिन सहानुभूति जरूर दिखाई दे रही हैं, ऐसे में अब उनके  इस किले को कौन  ढहा पाएगा कांग्रेस या भाजपा  ,यह देखना दिलचस्प होगा क्योंकि क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए चुनावी मुकाबला बडी जबरदस्त होने जा रहा हैं । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में यह तीसरा उपचुनाव है, हालांकि चित्रकोट और दंतेवाड़ा में कांग्रेस का परचम लहराया लेकिन जोगी के इस गढ़ को ढहाने  की मुख्य मंत्री भूपेश बघेल के साथ ही पूरी कांग्रेस पार्टी और भाजपा के सामने बड़ी चुनौती है। अजीत जोगी जब मुख्यमंत्री बने और उपचुनाव हुआ तो मरवाही से जीते, वे दो बार इस सीट से जीत कर विधायक बने और जब स्व.अजीत जोगी  के पुत्र अमित जोगी पहली बार रिकार्ड वोट से चुनाव जीते तब सीट मरवाही ( अनुसूचित जनजाति )  ही थी। लेकिन अब परिस्थियां बदल गई है, अमित जोगी ना ही कांग्रेस में है और ना ही अजित जोगी रहे ।ऐसे में बड़ी चुनौती अमित जोगी के सामने भी है। ये अलग बात है कि मरवाही में जब भी चुनाव हुए कमान अमित जोगी के हाथ में ही रही है। अब देखना ये होगा की कौन बाज़ी जीतेगा

   
      


जेपी की सम्पूर्ण क्रांति राजनीति का आदर्श हो

जेपी की सम्पूर्ण क्रांति राजनीति का आदर्श हो

10-Oct-2020

लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती- 11 अक्टूबर 2020 पर विशेष
- ललित गर्ग -
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हिन्दुस्तान के इतिहास के हर दौर में कुछ मिट्ठीभर लोग ऐसे रहे हैं, जिन्होंने न केवल बनी बनाई लकीरों को पोंछकर नई लकीरें बनाई वरन एक खुशहाल आजाद भारत के सपनें को आकार दिया। इस तरह स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत की राजनीति में जिन महान नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभायीं, उनमें लोकनायक जयप्रकाश नारायण का नाम प्रमुख है। सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान वे ब्रिटिश शासकों की हिरासत में रहे, तो दशकों बाद आजाद हिंदुस्तान की सरकार ने उन्हें आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किया। देश और देश की जनता के उत्थान के लिए समर्पित जेपी ने हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों को मान दिया। वे अपना जीवन अपने आदर्शों एवं भारत के लिये कुछ विलक्षण और अनूठा करने के लिये जीते रहे, आजादी के बाद वे बड़े-बड़े पद हासिल कर सकते थे, पर उन्होंने गांधीवादी आदर्शों के अनुरूप जीवन को जीने का लक्ष्य बनाया। आजाद भारत की राजनीति में जब भ्रम, स्वार्थ, पदलोलुपता, जातीयता, साम्प्रदायिकता, लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन, सत्ता का मद आदि विकृतियां पांव पसारने लगी तो जेपी दुःखी हुए, उन्हें लगा कि सत्ता निरंकुशता और भ्रष्टाचार से ग्रस्त हो रही है, तो वे फिर कूद पड़े संघर्ष के मैदान में। उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया और इसी संघर्ष की आग में तपकर कुंदन की तरह दमकते हुए समाज के सामने आदर्श बने। वर्तमान राजनीति में उनके आदर्शों को प्रतिष्ठापित करने एवं उन्हें बार-बार याद करने बड़ी जरूरत है।

जयप्रकाश नारायण ने त्याग एवं संघर्षमय जीवन के कारण मृत्यु से पहले ही प्रातः स्मरणीय बन गये थे। अपने जीवन में संतों जैसा प्रभामंडल जेपी के केवल दो नेताओं ने प्राप्त किया। एक महात्मा गांधी थे तो दूसरे विनोबा भावे। इसलिए जब सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद वे 1974 में ‘सिंहासन खाली करो जनता आती है’ के नारे के साथ वे मैदान में उतरे तो सारा देश उनके पीछे चल पड़ा, जैसे किसी संत महात्मा के पीछे चल रहा हो। 11 अक्टूबर, 1902 को जन्मे जयप्रकाश नारायण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, समाज-सुधारक और राजनेता थे। वे समाज-सेवक थे, जिन्हें ‘लोकनायक’ के नाम से भी जाना जाता है। 1999 में उन्हें मरणोपरान्त ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें समाजसेवा के लिए 1965 में मैगससे पुरस्कार प्रदान किया गया था। पटना के हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखा गया है। दिल्ली सरकार का सबसे बड़ा अस्पताल ‘लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल’ भी उनके नाम पर है।
लोकनायक जयप्रकाशजी की समस्त जीवन यात्रा संघर्ष तथा साधना से भरपूर रही। उसमें अनेक पड़ाव आए, उन्होंने भारतीय राजनीति को ही नहीं बल्कि आम जनजीवन को एक नई दिशा दी, नए मानक गढ़े। जैसे- भौतिकवाद से अध्यात्म, राजनीति से सामाजिक कार्य तथा जबरन सामाजिक सुधार से व्यक्तिगत दिमागों में परिवर्तन। वे विदेशी सत्ता से देशी सत्ता, देशी सत्ता से व्यवस्था, व्यवस्था से व्यक्ति में परिवर्तन और व्यक्ति में परिवर्तन से नैतिकता के पक्षधर थे। वे समूचे भारत में ग्राम स्वराज्य का सपना देखते थे और उसे आकार देने के लिए अथक प्रयत्न भी किए। उनका संपूर्ण जीवन भारतीय समाज की समस्याओं के समाधानों के लिए प्रकट हुआ, एक अवतार की तरह, एक मसीहा की तरह। वे भारतीय राजनीति में सत्ता की कीचड़ में केवल सेवा के कमल कहलाने में विश्वास रखते थे। उन्होंने भारतीय समाज के लिए बहुत कुछ किया लेकिन सार्वजनिक जीवन में जिन मूल्यों की स्थापना वे करना चाहते थे, वे मूल्य बहुत हद तक देश की राजनीतिक पार्टियों को स्वीकार्य नहीं थे। क्योंकि ये मूल्य राजनीति के तत्कालीन ढांचे को चुनौती देने के साथ-साथ स्वार्थ एवं पदलोलुपता की स्थितियों को समाप्त करने के पक्षधर थे, राष्ट्रीयता की भावना एवं नैतिकता की स्थापना उनका लक्ष्य था, राजनीति को वे सेवा का माध्यम बनाना चाहते थे।
लोकनायक जयप्रकाशजी की जीवन की विशेषताएं और उनके व्यक्तित्व के आदर्श कुछ विलक्षण और अद्भुत हैं जिनके कारण से वे भारतीय राजनीति के नायकों में अलग स्थान रखते हैं। जालियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में ब्रिटिश शैली के स्कूलों से पढ़ाई छोड़कर बिहार विद्यापीठ से उच्च शिक्षा पूरी की। 1948 में आचार्य नरेंद्र देव के साथ मिलकर ऑल इंडिया कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की। बाद में वे चुनावी राजनीति से अलग होकर विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से जुड़ गये। आपातकाल के विरुद्ध आंदोलन कर केंद्र में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनवाने में निर्णायक भूमिका निभायी।
लोकनायक जयप्रकाशजी का सबसे बड़ा आदर्श था जिसने भारतीय जनजीवन को गहराई से प्रेरित किया, वह था कि उनमें सत्ता की लिप्सा नहीं थी, मोह नहीं था, वे खुद को सत्ता से दूर रखकर देशहित में सहमति की तलाश करते रहे और यही एक देशभक्त की त्रासदी भी रही थी। वे कुशल राजनीतिज्ञ भले ही न हो किन्तु राजनीति की उन्नत दिशाओं के पक्षधर थे, प्रेरणास्रोत थे। वे देश की राजनीति की भावी दिशाओं को बड़ी गहराई से महसूस करते थे। यही कारण है कि राजनीति में शुचिता एवं पवित्रता की निरंतर वकालत करते रहे।
महात्मा गांधी जयप्रकाश की साहस और देशभक्ति के प्रशंसक थे। उनका हजारीबाग जेल से भागना काफी चर्चित रहा और इसके कारण से वे असंख्य युवकों के सम्राट बन चुके थे। वे अत्यंत भावुक थे लेकिन महान क्रांतिकारी भी थे। वे संयम, अनुशासन और मर्यादा के पक्षधर थे। इसलिए कभी भी मर्यादा की सीमा का उल्लंघन नहीं किया। विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने अपना अध्ययन नहीं छोड़ा और आर्थिक तंगी ने भी उनका मनोबल नहीं तोड़ा। यह उनके किसी भी कार्य की प्रतिबद्धता को ही निरूपित करता था, उनके दृढ़ विश्वास को परिलक्षित करता है।
जयप्रकाश नारायण भारतीय राजनीति के लिये प्रेरणास्रोत रहे हैं। उनके विचार को आधार बनाकर राजनीति की विसंगतियों को दूर किया जा सकता है। क्योंकि उनका मानना था कि एक लोकतांत्रिक सरकार लोगों का प्रतिनिधित्व करती है और इसके कुछ सिद्धांत होते हैं, जिसके अनुरूप वह कार्य करती है। भारत सरकार किसी को गद्दार नहीं करार दे सकती, जब तक पूरी कानूनी प्रक्रिया से ये साबित न हो जाये कि वह गद्दार है। जब देश में राजनीतिक हालात बेकाबू हो रहे थे तब उनका कहना था कि देश के नेता जनता के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं। नेतृत्व करना नेताओं का काम है, लेकिन उनमें से ज्यादातर इतने डरपोक हैं कि अलोकप्रिय नीतियों पर वे सच्चाई बयान नहीं कर सकते हैं और अगर ऐसे हालात पैदा हुए, तो जनता के आक्रोश का सामना नहीं कर सकते हैं। उनकी रुचि सत्ता के कब्जे में नहीं, बल्कि लोगों द्वारा सत्ता के नियंत्रण में थी। वे अहिंसा के समर्थक थे, इसलिये उन्होंने कहा कि एक हिंसक क्रांति हमेशा किसी न किसी तरह की तानाशाही लेकर आयी है। क्रांति के बाद धीरे-धीरे एक नया विशेषाधिकार-प्राप्त शासकों एवं शोषकों का वर्ग खड़ा हो जाता है, लोग एक बार फिर जिसके अधीन हो जाते हैं।
मैंने जयप्रकाश नारायण को नहीं देखा लेकिन उनकी प्रेरणाएं मेरे पारिवारिक परिवेश की आधारभित्ति रही है। मेरी माताजी स्व. सत्यभामा गर्ग उनकी अनन्य सेविका थी। राजस्थान में होने वाले जेपी के कार्यक्रमों को वे संचालित किया करती थी, उनके व्यक्तिगत व्यवस्था में जुड़े होने के कारण उनके आदर्श एवं प्रेरणाएं हमारे परिवार का हिस्सा थे। मेरे आध्यात्मिक गुरु आचार्य श्री तुलसी के जीवन से जुड़ेे एक बड़े विरोधपूर्ण वातावरण के समाधान में भी जयप्रकाश का अमूल्य योगदान है। उनकी चर्चित पुस्तक अग्निपरीक्षा को लेकर जब देश भर में दंगें भड़के, तो जेपी के आह्वान से ही शांत हुए। जेपी के कहने पर आचार्य तुलसी ने अपनी यह पुस्तक भी वापस ले ली।
जयप्रकाश नारायण को 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है। इन्दिरा गांधी को पदच्युत करने के लिये उन्होने ‘सम्पूर्ण क्रांति’ नामक आन्दोलन चलाया। लोकनायक ने कहा कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियाँ शामिल हैं-राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति। इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रान्ति होती है। सम्पूर्ण क्रांति की तपिश इतनी भयानक थी कि केन्द्र में कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ गया था। जयप्रकाश नारायण की हुंकार पर नौजवानों का जत्था सड़कों पर निकल पड़ता था। बिहार से उठी सम्पूर्ण क्रांति की चिंगारी देश के कोने-कोने में आग बनकर भड़क उठी थी। जेपी के नाम से मशहूर जयप्रकाश नारायण घर-घर में क्रांति का पर्याय बन चुके थे। लालमुनि चैबे, लालू प्रसाद, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान या फिर सुशील मोदी, आज के सारे नेता उसी छात्र युवा संघर्ष वाहिनी का हिस्सा थे। देश में आजादी की लड़ाई से लेकर वर्ष 1977 तक तमाम आंदोलनों की मशाल थामने वाले जेपी यानी जयप्रकाश नारायण का नाम देश के ऐसे शख्स के रूप में उभरता है जिन्होंने अपने विचारों, दर्शन तथा व्यक्तित्व से देश की दिशा तय की थी। उनका नाम लेते ही एक साथ उनके बारे में लोगों के मन में कई छवियां उभरती हैं। लोकनायक के शब्द को असलियत में चरितार्थ करने वाले जयप्रकाश नारायण अत्यंत समर्पित जननायक और मानवतावादी चिंतक तो थे ही इसके साथ-साथ उनकी छवि अत्यंत शालीन और मर्यादित सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्ति की भी है। उनका समाजवाद का नारा आज भी हर तरफ गूंज रहा है। भले ही उनके नारे पर राजनीति करने वाले उनके सिद्धान्तों को भूल रहे हों, क्योंकि उन्होंने सम्पूर्ण क्रांति का नारा एवं आन्दोलन जिन उद्देश्यों एवं बुराइयों को समाप्त करने के लिये किया था, वे सारी बुराइयां इन राजनीतिक दलों एवं उनके नेताओं में व्याप्त है। सम्पूर्ण क्रान्ति के आह्वान में उन्होंने कहा था कि ‘भ्रष्टाचार मिटाना, बेरोजगारी दूर करना, शिक्षा में क्रांति लाना, आदि ऐसी चीजें हैं जो आज की व्यवस्था से पूरी नहीं हो सकतीं क्योंकि वे इस व्यवस्था की ही उपज हैं। वे तभी पूरी हो सकती हैं जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए और सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए क्रान्ति, ’सम्पूर्ण क्रान्ति’ आवश्यक है।’ इसलिये आज एक नयी सम्पूर्ण क्रांति की जरूरत है। यह क्रांति व्यक्ति सुधार से प्रारंभ होकर व्यवस्था सुधार पर केन्द्रित हो। प्रेषकः

 

            (ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
मो. 9811051133


बाबा का ढाबा’ में खाना खाने के लिए लगी भीड़, बुजुर्ग चेहरे पर आई मुस्कान

बाबा का ढाबा’ में खाना खाने के लिए लगी भीड़, बुजुर्ग चेहरे पर आई मुस्कान

09-Oct-2020

दिल्ली (Delhi) के मालवीय नगर (Malviya Nagar) में एक बुजुर्ग शख्स अपनी पत्नी के साथ ढाबा चलाता है, जिसका नाम ‘बाबा का ढाबा’ (Baba Ka Dhaba) है. लेकिन लॉकडाउन के बाद उनके ढाबे पर कोई खाना खाने नहीं आता था. एक यूट्यूबर उनकी छोटी सी दुकान पर पहुंचा तो वो पूरी कहानी सुनाते हुए रो पड़े. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया और देश से कई लोग उनकी मदद के लिए आगे आए. इनमें कई बड़े नाम भी शामिल हैं. वीडियो वायरल होने के कुछ ही घंटों बाद उनकी दुकान में खाना खाने के लिए लाइन लग गई. इतनी भीड़ को देख बुजुर्ग कपल के चेहरे पर मुस्कान आ गई. ट्विटर पर #BabaKaDhaba टॉप ट्रेंड कर रहा है. दिल्ली में लोग उनकी दुकान में लोग पहुंच रहे हैं और मदद कर रहे हैं.

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यूट्यूबर गौरव वासन ने इस बुजुर्ग जोड़े का वीडियो शेयर किया है. उनके चैनल ‘स्वाद ऑफिशियल’ पर 6 अक्टूबर को यह वीडियो डाला गया था, जहां से यह तेजी से वायरल हो गया. ट्विटर पर इस वीडियो को वसुंधरा नाम की यूजर ने भी 7 अक्टूबर को शेयर किया था. वहां से ट्विटर पर यह वीडियो वायरल हो गया.
https://twitter.com/gauravwasan08/status/1314028805556588544?s=20
वीडियो देख आप नेता सोमनाथ भारती 8 अक्टूबर को बाबा का ढाबा में पहुंचे और बुजुर्ग कपल की मुस्कुराहट वाली तस्वीर शेयर की. उन्होंने फोटो शेयर करते हुए लिखा, ‘बाबा का ढाबा पर पहुंचा और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने में मदद की.’
https://twitter.com/Punitspeaks/status/1314146027566297088?s=20
उनके अलावा आम लोग भी वहां पहुंच रहे हैं और बुजुर्ग कपल के साथ सेल्फी ले रहे हैं. कईयों ने मदद के लिए हाथ भी बढ़ाया है. ट्विटर पर तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं…


वायुसेना स्थापना दिवस पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने की वीरों की सराहना

वायुसेना स्थापना दिवस पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने की वीरों की सराहना

08-Oct-2020

नई दिल्ली : 8 अक्टूबर  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 88वें भारतीय वायु सेना (आईएएफ) दिवस के अवसर पर देश को शुभकामनाएंदीं और साथ ही भारतीय वायु सेना के जवानों की भी सराहना कीं, जिन्होंने न केवल देश की सुरक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है, बल्कि किसी भी आपदा के वक्त में भी अपनी जिम्मेदारियोंको बेहतर ढंग से निभाया है।

भारतीय वायु सेना दिवस को हर साल 8 अक्टूबर को स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।

राष्ट्रपति ने कहा, वायु सेना दिवस पर हम गर्व से अपने वायु योद्धाओं, पूर्व दिग्गजों और इनके परिवारों का सम्मान करते हैं।

उन्होंने कहा कि आसमान को सुरक्षित रखने, मानवीय सहायता में नागरिक अधिकारियों की सहायता करने और आपदा प्रबंधन में भारतीय वायुसेना के योगदान के प्रति हम ऋणी हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि आने वाले सालों में भी भारतीय वायु सेना प्रतिबद्धता और क्षमता के अपने उच्च मानकों को बनाए रखना जारी रखेगी। राफेल, अपाचे और चिनूक विमानों को शामिल करने के साथ ही आधुनिकीकरण की दिशा में चल रही यह प्रक्रिया भारतीय वायु सेना को और भी अधिक दुर्जेय सामरिक बल में बदल देगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट करते हुए कहा, एयर फोर्स डे पर भारतीय वायुसेना के सभी वीर योद्धाओं को बहुत-बहुत बधाई। आप न सिर्फ देश के आसमान को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि आपदा के समय मानवता की सेवा में भी अग्रणी भूमिका निभाते हैं। मां भारती की रक्षा के लिए आपका साहस, शौर्य और समर्पण हर किसी को प्रेरित करने वाला है।

उन्होंने अपने इस ट्वीट के साथ वायु सेना दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए एक छोटा वीडियो भी पोस्ट किया है। एक मिनट, 19 सेकेंड के इस वीडियो में प्रधानमंत्री को यह कहते हुए सुना जा सकता है, 8 अक्टूबर को हम वायु सेना दिवस मनाते हैं। 1932 में छह पायलट और 19 वायु सैनिकों के साथ एक छोटी सी शुरूआत से बढ़ते हुए हमारी वायु सेना आज 21वीं सदी की सबसे साहसिक और शक्तिशाली एयरफोर्स में शामिल हो चुकी है। यह अपने आप में एक यादगार यात्रा है। हम भारतवासी हमारे सुरक्षा बलों के प्रति हमेशा गौरव और आदर का भाव रखते हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस माके पर वायु योद्धाओं और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दी हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ट्विटर पर लिखा, भारतीय वायु सेना दिवस पर शुभकामनाएं! हमारे आसमान की रक्षा करने से लेकर सभी बाधाओं में सहायता प्रदान करने के लिए हमारे वायु सेना के बहादुर जवानों ने अत्यंत साहस और ²ढ़ संकल्प के साथ देश की सेवा की है। मोदी सरकार हमारे पराक्रमी वायु योद्धाओं को आसमान में बुलंद रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।


बंगाल में भाजपा समर्थकों के ऊपर हो रहे अत्याचार और तृणमूल के हिंसात्मक राजनीति के खिलाफ थाने में डेपोटेशन देने गए भाजपा समर्थकों पर तृणमूल कार्यकर्ताओं ने की बमबाजी

बंगाल में भाजपा समर्थकों के ऊपर हो रहे अत्याचार और तृणमूल के हिंसात्मक राजनीति के खिलाफ थाने में डेपोटेशन देने गए भाजपा समर्थकों पर तृणमूल कार्यकर्ताओं ने की बमबाजी

07-Oct-2020

Report:Abdul Kalam

Place:Bengal

पश्चिम बंगाल बीरभूम के परुई थाना के बाहर आज भाजपा के सैकड़ों समर्थकों के ऊपर तृणमूल समर्थकों ने पुलिस के सामने बम से हमला कर दिया इस घटना में भाजपा के कई कार्यकर्ता घायल बताए जा रहे हैं भाजपा समर्थकों की अगर माने तो आज पश्चिम बंगाल के तमाम जिलों में भाजपा द्वारा  भाजपा समर्थकों के ऊपर तृणमूल द्वारा किए जा रहे अत्याचार और तृणमूल की हिंसात्मक राजनीति के खिलाफ डेपोटेशन अभियान चलाया जा रहा है उसी के तहत आज बीरभूम के परुई थाना में भाजपा समर्थकों का एक दल डेपोटेशन देने गया था जहां पहले से ही बम लेकर खड़े तृणमूल समर्थकों ने थाने के बाहर वी भी पुलिस के सामने भाजपा समर्थकों पर बमबाजी कर दी इस घटना में भाजपा के कई कार्यकर्ता घायल हो गए है घटना के बाद से ही पूरे इलाके में उतेजना का माहौल है जिसको देखते हुवे मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है


जामिया मिलिया इस्लामिया  ने बनाई सलाइवा आधारित कोरोना टेस्ट किट

जामिया मिलिया इस्लामिया ने बनाई सलाइवा आधारित कोरोना टेस्ट किट

06-Oct-2020

जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) में एक स्मार्टफोन-सक्षम POC प्रोटोटाइप तैयार किया गया है. इससे टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स की सहायता के बिना ही, एक घंटे के अंदर कोरोना (Coronavirus) होने या ना होने का पता लगाया जा सकता है. जामिया के मल्टीडिसीप्लिनरी सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च एंड स्टडीज (MCRAS) ने अन्य वैज्ञानिकों के साथ मिल कर कोविड-19 संक्रमण का पता लगाने के लिए यह RNA इक्स्ट्रैक्शन फ्री सलाइवा आधारित किट की खोज की है.

इस टेक्नोलॉजी का नाम MI-SEHAT (मोबाइल इंटीग्रेटेड सेंसिटिव एस्टीमेशन एंड हाई स्पसेफिसिटी एप्लिकेशन टेस्टिंग) है. इसका इस्तेमाल कोरोना संक्रमण का पता लगाने में प्वाइंट ऑफ केयर (POC) डिवाइस के रूप में घर-घर टेस्टिंग के लिए किया जा सकता है.

इन डॉक्टर्स की टीम ने की यह खोज

सहायक प्रोफेसर डॉ. मोहन सी जोशी (UGC-FRP और DBA, वेलकम ट्रस्ट इंडिया अलायंस फेलो), असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तनवीर अहमद (UGC-FRP) और रामालिंगस्वामी फेलो डॉ. जावेद इकबाल (DBT) ने VMMC (सफदरजंग अस्पताल) के डॉ. रोहित कुमार और वेलेरियन केम लिमिटेड के CEO डॉ. गगन दीप झिंगन के साथ मिलकर यह बड़ी खोज की है.

संक्रमण का जल्द पता लगाने में होगी कारगर

इस टीम के डॉ. मोहन सी जोशी (Mohan C Joshi) ने नई टेक्नोलॉजी के बारे में बताते हुए कहा, “एक स्मार्टफोन-सक्षम POC प्रोटोटाइप तैयार किया गया है. इससे तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता के बिना ही, एक घंटे के भीतर कोरोना होने या ना होने का पता लगाया जा सकता है. ऐसे कठिन समय में जब कोरोनावायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए, कम कीमत में संक्रमण के लक्षण को जल्द से जल्द पता लगाना जरूरी हो गया है, उसके लिए यह सलाइवा आधारित किट बहुत कारगर साबित होगी.”

पूरी टीम ने इस खोज में दिया अहम योगदान

जामिया MCRC में पीएचडी के छात्र मुहम्मद इकबाल आजमी और इमाम फैजान, ने लैब्स में सभी प्रयोगों के आधारों को नोट किया, जिससे टीम को प्रोटोटाइप तैयार करने में मदद मिली.

नेचुरल साइंसेज फैकल्टी की डीन प्रोफेसर सीमी फरहत बसीर, MCARS के डायरेक्टर प्रो. एम जुल्फिकार, डिप्टी डायरेक्टर, डॉ. एस.एन. काजिम और फैकल्टी के अन्य सदस्यों ने भी इस खोज में महत्वपूर्ण मदद की. टीम ने भारत सरकार के बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) भारत कार्यालय में अपनी इस नई टेक्नोलॉजी के पेटेंट कराने के लिए आवेदन किया है.


 
जामिया की कुलपति प्रो नजमा अख्तर (Najma Akhtar) ने कहा, “यह टेक्नोलॉजी ग्लोबल महामारी के खिलाफ लड़ाई में एक गेम-चेंजर हो सकती है. MI-SEHAT सही मायनों में स्मार्ट इनोवेशन का एक बेहतरीन उदाहरण है और आत्मनिर्भर भारत की सच्ची भावना का प्रतीक है. एक अनुकूल तकनीक होने के नाते, MI-CHAT होम टेस्टिंग (घर में टेस्ट) को प्रोत्साहित करेगा. कोरोना मरीजों की पहचान कर, इस संक्रमण को फैलने से रोकने में अहम भूमिका निभाएगा.”

महामारी से लड़ने में निभाएगा अहम भूमिका

प्रो. अख्तर ने पूरी टीम को बधाई देते हुए विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की, जो इस जानलेवा वैश्विक महामारी से लड़ने में अपनी भूमिका अच्छे से निभा रहे हैं. MCARS के डायरेक्टर प्रो. एम जुल्फिकार ने कहा, “MI-CHAT से भारत के ग्रामीण इलाकों में तेजी से स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य-विशेषज्ञों की सेवाओं का विस्तार होगा. यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिकतर गांवों में अभी भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं काफी कमी है.”


मैं पत्रकार हूं?

मैं पत्रकार हूं?

05-Oct-2020

जी हां मैं पत्रकार हूं शायद यह वाक्य हिंदुस्तान में बहुत से लोगों के लिए बेशर्मी के साथ गर्व का विषय बन चुका है। और इसी बेशर्मी की चाशनी में डूबे हुए गर्व ने अपने देश की पत्रकारिता और मीडिया को भंवर में फंसा दिया है।
मैं पत्रकार हूं मैं जब जिससे चाहे सवाल कर सकता हूं! मैं जब जिससे चाहे बहस कर सकता हूं! मैं जब जिस पर जहां चाहूं इलजाम लगा सकता हूं! मैं जब जिसको चाहूं जहां चाहूं कटघरे में खड़ा कर सकता हूं।क्योंकि मैं पत्रकार हूं।
जी हां मैं पत्रकार हूं! मुझे लिखना नहीं आता तो क्या हुआ। मुझे किसी विषय पर गहन ज्ञान नहीं है तो क्या हुआ लेकिन मेरी आवाज बहुत तेज है मैं अच्छी तरह से चीख सकता हूं। मैं अच्छी तरह से हाथ चला सकता हूं। मैं अच्छी तरह से डेस्क पर हाथ मार सकता हूं। मैं अच्छी तरह से खड़ा होकर कूद सकता हूं। मैं बहुत अच्छी तरह से एक्टिंग कर सकता हूं। मैं पत्रकार हूं!
जी हां मैं पत्रकार हूं। मुझे तिल का ताड़ बनाना अच्छी तरह आता है। मुझे नमक मिर्च लगाकर मसाला खबरें बनाकर परोसने में महारत हासिल है। मैं अपनी आत्मा को बेच चुका हूं। मैंने सच और झूठ के बीच में अंतर करना छोड़ दिया है। मेरे अंदर गलत लोगों का साथ देने की परिपक्वता आ गई है। मैं पत्रकार हूं!
जी हां मैं पत्रकार हूं। मैं कई पत्रकार संगठनों का सदस्य एवं पदाधिकारी हूं। मैं रोज प्रेस क्लब में काफी समय व्यतीत करता हूं। मैं सरकार की चापलूसी करता हूं। मैं चार पहिया वाहन से घूमता हूं। मैं सरकार के हर गलत काम को सही साबित करता हूं। मैं पत्रकार हूं!
जी हां मैं पत्रकार हूं! मुझे लिखना नहीं आता तो क्या हुआ! मैं किसी विषय पर बहस नहीं कर सकता तो क्या हुआ! मैं किसी विषय पर लिख नहीं सकता तो क्या हुआ! मेरे शब्दों का उच्चारण साफ नहीं है तो क्या हुआ! मैं टीआरपी का भूखा हूं तो क्या हुआ! मैं पत्रकार हूं!
जी हां यह तारीफ है उन तथाकथित पत्रकारों के लिए हैं जिन्होंने पत्रकारिता और ईमानदार मेहनतकश पढ़े-लिखे पत्रकारों को बदनाम कर के रख दिया है उनके लिए जीना दूभर कर दिया है।
2014 से मीडिया की शक्ल बिल्कुल बदल चुकी है न्यूज़ एंकर बेलगाम हो चुके हैं उनकी जबान पर जो आता है वह न्यूज़ रूम में बैठकर बोल देते हैं उनकी जमीर आत्मा सब बिक चुकी है उन्हें अच्छे और बुरे की कोई तमीज नहीं रह गई उनके पास सच और गलत का ज्ञान खत्म हो चुका है। और ताल ठोक के कहते हैं कि मैं पत्रकार हूं।ऐसे न्यूज़ एंकर्स की फेहरिस्त लंबी है जो चापलूसी की चाशनी में डूब कर अपना वजूद खोने की कगार पर हैं। सुधीर चौधरी, अर्णब गोस्वामी, दिलीप चौरसिया, अमीश देवगन ये ऐसे न्यूज़ एंकर्स हैं जो देश में धार्मिक भावनाएं भड़का कर अमन और शांति को भंग करने का प्रयास करते रहते हैं इसके अलावा हिंदुस्तान की गंगा जमुनी तहजीब को भी खत्म करने का प्रयास करते रहते हैं। साथ ही साथ ये लोग पत्रकारिता को पूरी तरह बदनाम करने पर तुले हुए हैं।
खींचो न कमानो को न तलवार निकालो ।
जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो।।
आजकल के तथाकथित पत्रकारों ने इस शेर का मतलब ही उल्टा कर दिया। हर वक्त कमानो को खींचे रहते हैं और तलवार निकाले रहते हैं जबकि उनके मुकाबले पर कोई नहीं है वह अपने देश की अपनी ही जनता को निशाना बनाए हुए हैं।
शायद इस तरह के पत्रकार यही संदेश देना चाहते हैं कि
"खींचूंगा कमानों को मैं तलवार निकालूंगा।
"झूठों का साथ देने को अखबार निकालूंगा।।
जयहिंद।
सैय्यद एम अली तक़वी
लखनऊ
syedtaqvi12@gmail.com

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टीवी मीडिया की टीआरपी वार में यूपी सरकार हलकान

टीवी मीडिया की टीआरपी वार में यूपी सरकार हलकान

02-Oct-2020

योगी सरकार के संकट मोचन बनें सदाबहार नवनीत सहगल

 

  नवेद शिकोह

 

"  चंद दिनों से मीडिया के टीआरपी वार से यूपी सरकार हलकान है। ऐसे में वरिष्ठ आईएएस सरकार के संकट मोचन बनेंगे। सियासी और मीडिया के गलियारों में हो रही दिलचस्प चर्चाओं में कहा जा रहा है कि हर दिल अज़ीज़ नवनीत सहगल यूपी की हर सरकार में अज़ीज़ रहे अब योगी जी के भी अज़ीज़ हो गये हैं।"

 

हर सरकार में नवरत्न होते हैं। इसमें कुछ अत्यंत भरोसे के होते हैं। लेकिन जो अफसर सरकार के विश्वास के गुलदस्ते में महकता है वो दूसरी सरकार के भरोसे में फिट नहीं होता है। अमुमन ऐसा होता है। इस रवायत को एक डैशिंग अफसर ने तोड़ा है। वरिष्ठ आईएएस अफसर नवनीत सहगल की सिविल सेवाओं में वो ख़ूबियां हैं कि यूपी की कोई भी सरकार इस आलाधिकारी की कार्यकुशलता का लाभ लेना चाहती है। तमाम खूबियों के साथ मीडिया मैनेजमेंट में भी ये माहिर समझे जाते हैं।

 

कांग्रेस के सत्ता वनवास के बाद करीब ढाई दशक से अधिक समय से यूपी में सपा, बसपा और भाजपा की सरकारें बनती रहीं। 1988 के बैच के आईएएस नवनीत सहगल की  योग्यता को सबसे पहले बसपा सुप्रीमों मायावती ने परखा। बहन जी ने अपने कार्यकाल में श्री सहगल को शंशाक शेखर के बाद दूसरा सार्वधिक भरोसेमंद अफसर माना। पिछली सपा सरकार में अखिलेश यादव ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में नवनीत सहगल को बड़ी जिम्मेदारियां दीं। सूचना/मीडिया संभालने की जिम्मेदारी के साथ अखिलेश सरकार ने  ड्रीम प्रोजेक्ट साकार करने का दायित्व दिया।

 और अब ये हरदिल अज़ीज़ अफसर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अज़ीज बनते जा रहे हैं। यूपी सरकार ने इन्हें  मीडिया संभालने की अतिरिक्त जिम्मेदारी दे दी है। आमतौर से ये दायित्व काफी ठोक-बजा कर किसी योग्य और भरोसेमंद आलाधिकारी को दिया जाता है।

 

 सरकार के कार्यकाल का अंतिम लगभग डेढ़ वर्ष का कार्यकाल  सूचना और प्रचार-प्रसार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। किये गये तमाम जनकल्याणकारी कार्यों, योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पंहुचाने का लक्ष्य होता है। पिछले दौर पर ग़ौर कीजिए तो पता चलेगा कि सरकार का अंतिम एक-डेढ़ वर्ष वो समय होता है जब मीडिया खूटे से उखड़ कर बेलगाम सी हो जाता है और इसे संभालना जटिल होता है।

 

उत्तर प्रदेश का एक अलग सियासी मिजाज़ है। किसी भी सरकार के अंतिम बरस में सो रहा विपक्ष भी जाग जाता है। विरोधी ऊर्जा के साथ सक्रिय होने लगता है। सियासी कारसतानियों से धर्म या जातिवाद के दानव का क़द बढ़ने लगता है। प्रशासन के नाकारेपन की नुमाइश में कानून व्यवस्था से जनता नाखुश होने लगती है। और इन सब में कभी आग तो कही घी बनकर मीडिया छुट्टे सांड की तरह खूटे से अलग हो जाता है। सरकार के हाथों से इसकी लगाम छूट जाती है।

ऐसे समय में बहुत सोच समझ कर और परख कर ही मुख्यमंत्री योगी ने नवनीत सहगल को मीडिया संभालने की जिम्मेदारी दी होगी। उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी के तहत एसीएस सूचना विभाग बनाया गया है।

 

इत्तेफाक कि इधर कुछ चंद दिनों से टीआरपी को लेकर टीवी चैनल्स की जंग का एक पहलू सरकार को हलकान कर रहा है।

 

सब कुछ ठीक चल रहा था। देश के मूड की तरह मीडिया का मिजाज़ था और मीडिया का ख्याल और बड़ी आबादी के विचार एक दूसरे का समर्थन कर रहे थे। इसलिए गाड़ी  स्मूथली चल रही थी। जब पटरी चिकनी हो, पहिये ग्रीस से तरबतर हों तो तेज़ी से दौड़ती गाड़ी की आवाज़ में किसी रेप पीड़िता की सिसकियां तक नहीं सुनाई देतीं। बेरोजगारी, मंहगाई और कुव्यवस्था की पीड़ा की आवाज़ बुलंद नहीं हो पाती। असंतोष भी छूत की बीमारी जैसा होता है। मीडिया मैनेजमेंट इसे दबा दे तो ये अपना दायरा नहीं बढ़ा पाता।

 

अधिकांश जनता के बीच में मोदी-योगी की लोकप्रियता सिर चढ़ कर बोलती है। जनता इनकी सरकारों पर भरोसा करती है और कमियों को नजरअंदाज करना पसंद करती है। इसलिए सरकार का एजेंडा या भाजपा के विचारों को अपनाकर राष्ट्रीय चैनलों में टीआरपी हासिल करने की होड़ लग गयी। केंद्र की मोदी सरकार के साथ योगी सरकार के लिए भी ये सब सुखद था।

 

मीडिया वार क्यों शुरु हुई !

 

 एक मामूली टीवी चैनल रिपब्लिक भारत ने सरकारी एजेंडे की लाइन पर इतनी शिद्दत और जुनून से काम किया कि वो नंबर वन टीआरपी हासिल करने में कामयाब हो गया। और जो आजतक चैनल दशकों से नंबर वन की टीआरपी पर स्थापित था वो पिछड़ गया। ये बेहद बड़ा झटका था।

 नंबर वन की पोजीशन छिनने से आजतक घबरा गया। ये चैनल पिछले दो दिनों से सरकार को घेरने वाली खाली आलोचनात्मक स्पेस को हासिल करके दुबारा नंबर वन होने का प्रयोग करना शुरु कर चुका है। इसे देखा देखी एबीपी और अन्य राष्ट्रीय चैनलों को भी हाथरस मामले में जबरदस्त तरीके से कूदने पर मजबूर होना पड़ा। यूपी का क्षेत्रीय चैनल पहले से ही योगी सरकार के आलोचनात्मक पहलुओं पर सवाल उठाता रहा है।

 

आजतक चैनल और फिर एबीपी जिस पर कल गोदी मीडिया का आरोप लगता था वो भाजपा सरकार के खिलाफ आक्रामक हो गया। यूपी के हाथरस मामले को निर्भया कांड जैसा बनाने में आजतक और एबीपी कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।

 

 पहले एनडीटीवी एवं किसी हद तक न्यूज 24  जैसे कुछ राष्ट्रीय और भारत समाचार जैसे एक/दो क्षेत्रीय चैनल केंद्र को नहीं बख्शते थे। लेकिन नब्बे फीसद चैनल सरकार का एजेंडा फॉलो करते नज़र आते थे। सरकार की नाकामियों और सवाल उठाने वाली खबरों को दबाने के लिए गैर जरूरी मुद्दों  को न्यूज और डिबेट का हिस्सा बनाया जाता रहा है।

 

कहा जाता रहा है कि यूपी की तमाम सरकारों में होनहार समझे जाने वाले सदाबहार वरिष्ठ आईएएस नवनीत सहगल की मीडिया में अच्छी पकड़ है। वो मीडिया मैनेजमेंट में माहिर हैं।

बेलगाम से हो चले आजतक और अन्य राष्ट्रीय टीवी चैनलों को यूपी का ये अफसर संभाल पाता है या नही ये तो वक्त ही बतायेगा।

लेकिन ये दिलचस्प बात है कि सहगल की एहमियत की सहालग के दिन हर सरकार में देखने को मिलते हैं।

- नवेद शिकोह

8090180256


आपसी झगड़ो को पत्रकारिता और सुरक्षा क़ानून के नाम पर माहौल बिगड़ने का प्रयास हो रहा है ?

आपसी झगड़ो को पत्रकारिता और सुरक्षा क़ानून के नाम पर माहौल बिगड़ने का प्रयास हो रहा है ?

01-Oct-2020

खुलासा पोस्ट न्यूज़ नेटवर्क वेब डेस्क 
कांकेर की घटना को बे मतलब में कुछ लोगो के द्वारा तुल दिया जा रहा है , जबकि कोई इतनी बड़ी घटना नहीं घटी है सामान्य सी मारपीट हुई है जिसकी सरकार ने जांच करने का आदेश भी दे दिया है फिर पत्रकार सुरक्षा कानून के नाम पर पत्रकारिता जैसे पवित्र कार्य क्यों बदनाम किया जा रहा है !
छत्तीसगढ़  की  सरकार  ने  सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आफताब आलम की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बिल तैयार किया है जोकि अब तक देश  की  किसी भी राज्य सरकार ने ऐसा पहल नहीं किया है । बिल तैयार करने के लिए फरवरी में इस कमेटी का गठन किया गया था। लेकिन कोरोना की संकट की वजह से लागू होने में समय लग रहा है !
लेकिन यहाँ एक बात पर गौर करना जरुरी है की पत्रकार सुरक्षा की जरुरत कुछ लोगो को ही क्यों ज्यादा जरुरी हो जाता है जबकि हजारो की तादात में पत्रकार और  R T I  कार्यकर्त्ता है जो पुरे देश में जान हथेली पर रख कर काम कर रहे है हर व्यक्ति का अपना मान सम्मान होता है अगर ऐसे ही हर पत्रकार बीच बाजार में लात घुसा खता है तो उस  पत्रकार का अपना मान सम्मान क्या होगा , और कानून तो सभी के लिए एक सामान है फिर एक क्षेत्र की घटना को इतना बड़ा बतंगड़ क्यों बनाया जा रहा है जाहिर सी बात है किसी व्यक्ति विशेष या दल को टारगेट करने के लिए और अपने आप को हाईलाइट करने के लिए मीडिया से  तो कई लोग जुड़े है तो क्या हर पत्रकार इसी तरह  लोगो से मार थोड़े खा रहा है इनके लात जुते  खाने का जरूर कोई कारन होगा पुलिस इसकी जांच कर रही है उसका तो इंतज़ार कर लिया जाना चाहिए !
यहाँ मज़े की बात ये है की सरकार के विरोध  को परदे के पीछे वही लोग तूल दे रहे है जो सरकार की गोद में बैठ्कर जनसम्पर्क विभाग की विभिन्न  कमेटियों में बैठकर मलाई खा रहे है और  इनके पीठ में छुरा भोंक रहे है !
यही कमेटियों में बैठे लोग ही पत्रकार सुरक्षा  कमिटी की बैठकों में शामिल होते है 
और बेहतर जानते है की वास्तविक स्थिति क्या है  यदि इस बिल को लागू किया जाता है तो इस तरह के मामलों की जांच डिप्टी एसपी से कम रैंक वाले पुलिस अधिकारी से नहीं कराई जाएगी। कमेटी द्वारा तैयार इस बिल में पत्रकारों के उत्पीड़न को संज्ञेय लेकिन जमानती अपराध बनाया गया है। इस बिल को तैयार करने वाली कमेटी के सदस्यों का कहना है कि इसमें प्रत्येक जिले में मीडिया प्रोटेक्शन यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव भी दिया गया है। फिर इस तरह का हल्ला एक मारपीट की घटना से क्यों  वैसे में हर निजी झगड़ो में पत्रकार सुरक्षा कानून का दुरपयोग किया जा सकता है | 

पत्रकार सुरक्षा बिल को राज्य सरकार के पास नवंबर में जमा कराया जाना था  वर्तमान स्थिति में संभव नहीं है । बताया जाता है !
पत्रकार भी एक आम नागरिक होता है जिस तरह आम नागरिक सुरक्षा पाने और सविधान के अंतर्गत न्याय पाने का अधिकार रखता है , आपसी झगड़ो को पत्रकारिता और सुरक्षा क़ानून के नाम पर माहौल बिगड़ने का प्रयास हो रहा है ?


बिग बॉस-14 में एंट्री लेंगी राधे मां, लाखों रुपये चार्ज कर सकती हैं

बिग बॉस-14 में एंट्री लेंगी राधे मां, लाखों रुपये चार्ज कर सकती हैं

01-Oct-2020

 बिग बॉस के 14वें सीजन की शुरुआत होने में कुछ ही दिन बचे हैं और अब खबरें आने लगी हैं कि इस बार कौन-कौन लोग शो का हिस्सा हो सकते हैं।

ऐसे में बताया जा रहा है कि राधे मां भी शो का हिस्सा बन सकती हैं, इस वजह से इस बार का शो काफी मजेदार होने वाला है। पहले भी कई धर्म गुरु ने इस शो में हिस्सा लिया है।

 दरअसल, सोशल मीडिया पर बिग बॉस प्रोमो के वीडियो शेयर हो रहे हैं, जिसमें राधे मां शो के सेट पर हाथ में त्रिशूल लिए, तिलक लगाए और लाल

कपड़े पहने हुए नज़र आ रही हैं।

 राधे मां, अपने कपड़ों और बयानों को लेकर काफी खबरों में रही थीं। ऐसे में अगर अब राधे मां बिग बॉस में आती हैं तो दर्शकों को ज्यादा एंटरटनेमेंट मिल सकता है। इसी बीच, उनकी

फीस को लेकर भी रिपोर्ट्स आ रही हैं कि राधे मां हर दिन के लाखों रुपये ले रहे हैं।

सोशल मीडिया पर बिग बॉस के फैन पेज पर शेयर की गई जानकारी के अनुसार, राधे मां एक हफ्ते के 25 लाख रुपये लेंगी।

 यानी वो हर दिन के करीब साढ़े तीन लाख रुपये बिग बॉस के घर में रहने के लिए लेंगी। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं हैं और

रिपोर्ट्स के आधार पर ही उनकी फीस का अंदाजा लगाया जा रहा है।

 माना जा रहा है कि राधे मां इस बार सबसे ज्यादा फीस लेने वाली प्रतिभागियों में से एक हो सकती हैं।

अब देखना है कि राधे मां, प्रतिभागियों के बीच कैसे रहेंगी और उन्हें अपनी लाइफस्टाइल में भी काफी चेंज करना होगा। साथ ही उनका अन्य प्रतिभागियों से व्यवहार भी देखने लायक होगा।


राष्ट्रपति कोविंद की जन्मदिन पर पीएम मोदी ने दी बधाई!

राष्ट्रपति कोविंद की जन्मदिन पर पीएम मोदी ने दी बधाई!

01-Oct-2020

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का गुरुवार को जन्मदिन है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है और कहा कि उनकी समृद्ध 

अंतरदृष्टि और नीतिगत मामलों की समझदारी हमारे राष्ट्र के लिए बहुत बड़ी संपत्ति है।

जागरण डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति को जन्मदिन की बधाई देते हुए एक ट्वीट किया है।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘राष्ट्रपति जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। उनकी समृद्ध अंतरदृष्टि और नीतिगत मामलों की समझदारी हमारे राष्ट्र के लिए बहुत बड़ी संपत्ति है।

 वंचितों के प्रति उनका सेवाभव बुहत जबरदस्त है। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबे जीवन की कामना करता हूं।’

 
गृह मंत्री अमित शाह ने भी राष्ट्रपति को जन्मदिन की बधाई दी है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि देश के वंचित वर्ग के कल्याण के लिए राष्ट्रपति का समपर्ण सभी को प्रेरित करता है।


कोरोना महामारी से बदले जीवन का सन्देश

कोरोना महामारी से बदले जीवन का सन्देश

30-Sep-2020

- ललित गर्ग-

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कोरोनारूपी महामारी एवं महाप्रकोप से जुड़ी हर मुश्किल घड़ी का सामना हमने मुस्कराते हुए किया। हालात ने जितना भी गिराने की कोशिश की, हम हर बार उठने में कामयाब रहे। दुख हर किसी को तोड़ता भी नहीं है। टूटते वे हैं, जो नाउम्मीदी में उम्मीद पाने, निराशा में से आशा का संचार करने एवं तकलीफों को सीख बनाने के लिए तैयार नहीं होते, खुद पर भरोसा नहीं करते। कहावत है कि मुसीबत के समय हिम्मत हार कर बैठ जाने वाले बैठे ही रह जाते हैं। लेकिन दुनिया में लॉकडाउन के समय इंसानों में ही नहीं, पर्यावरण एवं पंछियों की दुनिया में भी अच्छे एवं सकारात्मक बदलाव हुए हैं। हर प्रतिकूलता में अनुकूलता का जन्म होता है, यह बात हमें पंछियों ने इस संक्रमण दौर में सिखायी है। पंछियों की दुनिया पहले से ज्यादा हसीन, खुशनुमा और रहने लायक हुई है। इसका असर उनकी आवाज में महसूस होने लगा है और इसी बदली आवाज पर हुए एक शोध के परिणामों ने हमें सुखद अहसास दिया है।

कोरोना महामारी से बदले जीवन का सन्देश - Pravakta.Com | प्रवक्‍ता.कॉम
व्यवहार पारिस्थितिकी विज्ञानी लिज डेरीबेरी की टीम को इन पंछियों का अध्ययन करते हुए दिलचस्प नतीजे मिले हैं। यह वही डेरीबेरी हैं जो करीब एक दशक तक सफेद कलगी वाली गौरैया का अध्ययन कर चुकी हैं। उन्होंने विस्तार से इस बात को सामने रखा था, समय के साथ बढ़ रहे ध्वनि-प्रदूषण एवं शहरी शोर ने संवाद करने की पंछियों की क्षमता को कैसे बाधित किया है। ऐसे में, यह एक खुशखबरी है कि लॉकडाउन के वक्त  पंछियों की आवाज ज्यादा खुशनुमा हुई है। जब महामारी के कारण सैन फ्रांसिस्को के लोग घरों के अंदर थे, तब यह अध्ययन शुरू किया गया। पंछियों और विशेष रूप से गौरैया की आवाजों का पीछा किया गया, उन्हें रिकॉर्ड किया गया। महामारी के पहले की उनकी रिकॉर्ड आवाज से नई आवाज की तुलना की गई और पाया गया कि पंछियों के स्वर पहले की तुलना में ज्यादा मधुर और मुखर हुए हैं। महामारी से पहले मानवी शोरगुल में उनकी आवाज वैसे ही दबी जा रही थी, जैसे नक्कारखाने में तूती। बात केवल पंछियों एवं गौरैया की ही नहीं है, हमारा पर्यावरण, प्रकृति, नदी, झरने एवं वादियां भी पहले की तुलना में अधिक स्वच्छ, साफ-सुथरी, मोहक एवं आकर्षक बनी है। इसका अर्थ यही है कि मनुष्य की सुविधावादी जीवनशैली ने समूची सृष्टि, पर्यावरण एवं जीवनशैली को बदनुमा किया है, प्रदूषित किया है। कृत्रिम साधनों, भोगवादी जीवनशैली एवं प्रकृति के अति दोहन ने जीवन पर पहले ही संकट के बादल मंडरा रखे हैं, इन संकटों का हमें आभास भी नहीं है। कोरोना के कारण बदली जीवनशैली से हुए सकारात्मक परिवर्तनों को देखते हुए हमें वास्तविक प्रकृति के नजारों का साक्षात्कार हुआ है, पंछियों की आवाज का जादू हमें अब सुनाई दे रहा है, नदी-झरने स्वच्छ जल से सराबोर है, प्रकृति एवं पहाड़ हंसते-मुस्कुराते हुए दूर से देखें जा सकते हैं।
 सैन फ्रांसिस्को की सूनी पड़ी सड़कों पर पंछियों की आवाज रिकॉर्ड करके डेरीबेरी और उनके सहयोगियों ने खुलासा किया कि लॉकडाउन के समय पक्षियों की आवाज की गुणवत्ता व दक्षता, दोनों में व्यापक रूप से सुधार हुआ है। खासकर नर पक्षी ज्यादा सुरीले हुए हैं, उन्हें अपने क्षेत्र की रक्षा व नया साथी खोजने के लिए अपने गीत-संगीत का सहारा लेना पड़ता है। टेनेसी यूनिवर्सिटी के शोधार्थी बताते हैं कि जितना अनुमान था, उससे कहीं ज्यादा पंछियों की आवाज बदली है। इससे पता चलता है, ध्वनि प्रदूषण किस तरह पंछियों की आवाज और दुनिया को नुकसान पहुंचाता है। यदि हम अनावश्यक शोर-गुल और प्रदूषण पर लगाम लगा दें, तो पंछियों की पुरानी दुनिया फिर गुलजार हो जाएगी, जिससे हमें भी लाभ होगा। साइंस पत्रिका में प्रकाशित शहरी वन्य जीवों पर महामारी के प्रभावों का वैज्ञानिक रूप से मूल्यांकन करने वाला यह पहला शोध है। यह अनुसंधान के एक जटिल क्षेत्र पर प्रकाश डालता है व संकेत करता है कि मानव निर्मित शोर ने कैसे पूरी प्रकृति को बाधित कर दिया है।
बात शोर प्रदूषण की ही नहीं है, बल्कि अन्य तरह के प्रदूषणों ने भी जीवन को बाधित किया है। आज मानव सभ्यताएं एवं विकास की तमाम योजनाएं हरेक प्रकार के प्रदूषण बढ़ाने में जुटी हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि कुछ ही महीनों में पंछियों के व्यवहार-आवाज में बदलाव महसूस किया जा सकता है, तो लंबे समय तक यही माहौल मिले, तो पूरे जीव जगत को कितना फायदा होगा। दुनिया मधुर ध्वनियों से सराबोर हो सकती है। सैन फ्रांसिस्को में यदि गौरैया नए गीत गाने लगी हैं, तो जाहिर है, दुनिया के दूसरे शहरों में भी पंछी अब मीठे स्वर में बातें कर रहे होंगे। शोध से यह भी संकेत मिलता है कि पंछियों में तनाव का स्तर घटा होगा, जिससे खासकर शहरी पंछियों की जिंदगी पहले की तुलना में लंबी होने का अनुमान है। गांव में जो पंछी रहते हैं, उनसे जुड़ा अध्ययन बताता है कि लॉकडाउन से पहले और उसके दौरान उनकी आवाज समान बनी रही है। एक और सकारात्मक सुधार यह हुआ है कि ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी है, जो अपने आंगन या बगीचे में पंछियों का आनंद ले रहे हैं। बेशक, पंछियों की खुशी केवल उनके ही नहीं, बल्कि हम इंसानों के भी काम आएगी, हमारे जीवन में भी खुशहाली, शांति एवं सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनेगी।
हमारी जीवनशैली का दुर्भाग्य है कि पंछियों की आवाज तो दूर की बात है सूरज की प्रथम किरणों से भी हम वंचित हैं, क्योंकि हम सूरज की दस्तक पर जागकर भी नहीं जागते, फिर सो जाते हैं बिस्तर पर करवटें बदलकर। यह चिन्तनीय बिन्दु है कि आजकल सूरज उतरता कहां है आंगन में? आदमी ने जमीं को इतनी ऊंची दीवारों से घेर कर तंगदील बना दिया कि धूप और प्रकाश तो क्या, हवा को भी भीतर आने के लिये रास्ते ढूंढ़ने पड़ते हैं। न खुला आंगन, न खुली छत, न खुली खिड़कियां और न खुल दरवाजे, सूरज की रोशनी एवं गौरैया की मधुर आवाज भीतर आए भी तो कैसे? सुविधावादी एवं भौतिकवादी जीवनशैली से जुड़ी स्थितियां कोरोना महामारी से अधिक घातक एवं जानलेवा है, यदि इस पर शोध हो तो उसके परिणाम गौरैया की बदली आवाज से अधिक चैंकाने वाले होेंगे। कोरोना के प्रकोप एवं उससे बचने की स्थितियों ने हमारी जीवनशैली को एक बड़ा संदेश दिया है कि कोरोना तो समय-सापेक्ष है, लेकिन आपकी अस्त-व्यस्त जीवनशैली स्थायी है, न  सही समय पर खानपान, न भ्रमण, न व्यायाम, न कार्य का संतुलन, न अपनों के बीच संवाद, संपर्क, सहवास। ऐसी भागती जिन्दगी में हम कहां बटोर पाते हैं पंछियों का कलरव एवं सूरज का प्रकाश? जीवनशैली ऐसी बन गयी कि आदमी जीने के लिये सबकुछ करने लगा पर खुद जीने का अर्थ ही भूल गया।
कोरोना महामारी एक सबक है जीवनशैली को बदलने का, पर्यावरण एवं प्रकृति के प्रति जागरूक होने का। शरीर, मन, आत्मा एवं प्रकृति के प्रति सचेत रहने का। हर कोई अपना और अपनों का ध्यान रखें। स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। अच्छा सोचें। दूसरों को माफ करें। दूसरों की मदद करें। खुद पर भरोसा रखें। नियमित ध्यान और स्वाध्याय करें। समभाव और सहजभाव में रहना सीखें। अपनी वस्तुओं की देखभाल एवं उन्हें प्यार करें। उन्हें बेकार न करें। जरूरतमंदों में बांटें। प्रकृति, पर्यावरण एवं आसपास को साफ-सुथरा रखें। जीव मात्र का ध्यान रखें। ऐसा करने से गौरैया की ही नहीं, सभी पंछियों की आवाज एवं प्रकृति खुशनुमा बन जायेगी, सूरज के आंगन में उतरने से सम्पूर्ण जीवन जीवंत हो जायेगा। यही वह क्षण है जिसे हमें समझना हैं, पकड़ना हंै और जीना हैं। प्रेषकः

 

            (ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
मो. 9811051133


बॉर्डर पर पकड़े गए तस्करी के माल में खेला जाता है खेल

बॉर्डर पर पकड़े गए तस्करी के माल में खेला जाता है खेल

28-Sep-2020

Report:Nuruddin

Place:Lakhimpur Kheri

पकड़े गए प्रतिबंधित माल को तस्करों के मन मुताबिक सीजर दिखाकर कर लेते हैं इतर्शी।

 इंडो नेपाल बॉर्डर पर इन दिनों चाइनीज मटर की तस्करी जोरों पर चल रही है।

बताया जाता है की बॉर्डर के दर्जनों गुप्त रास्तों व नाको से चाइनीज मटर की तस्करी को तस्कर बेखौफ होकर बड़े बड़े वाहनों में भरकर शहरी क्षेत्रों में ला रहे हैं

वही जब एसएसबी द्वारा कार्रवाई में पकड़ी जाती भी है तो सिर्फ साइकिल या मोटरसाइकिल ही मटर के साथ सीजर दिखाकर वारा न्यारा कर दिया जाता है।

वही जब गुप्त सूत्रों से जानकारी ली जाती है तो पता चलता है की बॉर्डर पर तस्करों द्वारा बड़ा खेल खेला जा रहा है।

बाडर पर तस्करी के प्रतिबंधित मालों को बड़े बड़े वाहनों द्वारा भरकर लें जाने के दौरान पकड़े जाते ही तस्करों का खेल सुरू हो जाता है

छुड़ाने का इसी बीच बड़े वाहनों को तय होने के बाद सीजर ना दिखा कर लेनदेन कर छोड़ दिया जाता है

बॉर्डर पर बैठे बड़े तस्करों के हौसले बुलंद क्यो नही होंगे जबकि सबसे बड़ी बात यह कि जब एसएसबी द्वारा बॉर्डर पार कर रहे माल को पकड़ने की कार्रवाई की जाती है

जबकि किसी भी पत्रकार द्वारा खबरें छापी व चलाई जाती है तो कई  सवाल खड़ा हो जाता है कि वह पत्रकार बिना तत्य की खबर चलाते हैं

इसी बात पर कई बार पत्रकारों से विभागो की तरफ से सूचनाएं नहीं दिए जाने के कारण नोकझोंक भी हो चुकी है वही अधिकारियों द्वारा आखिर क्यों नहीं बताया जाता है जबकि तमाम फोन करने पर भी अधिकारी पत्रकारों का फोन उठाना और सूचनाएं देना अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते हैं।


पश्चिम बंगाल बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन इलाके में हथियारों के जखीरे के साथ 5 बांग्लादेशीयों के साथ एक अन्य गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन इलाके में हथियारों के जखीरे के साथ 5 बांग्लादेशीयों के साथ एक अन्य गिरफ्तार

28-Sep-2020

Report:Abdul Kalam

Place:Bengal

पश्चिम बंगाल बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन इलाके में बीरभूम पुलिस ने अपराधियों की एक बड़ी साजिश को नाकाम किया है उनके मनसूबों को पूरा होने से पहले ही गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने बीरभूम शांतिनिकेतन के सालतोड़ इलाके में तबातोड़ छापेमारी करते हुवे भारी संख्या में हथियारों का जखीरा बरामद करते हुवे 5 बांग्लादेशियों सहित एक स्थानीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से गहमी से पूछताछ कर रही है और ये पता लगाने का प्रयास कर रही है के ये आरोपी आखिर किस मकसद से इलाके में अपना डेरा जमाए हुवे थे साथ ही इनके नेटवर्क का भी पता लगाने में पुलिस की टीम लगी हुई है


UPSC परिक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट  का   बड़ा बयान जारी किया !

UPSC परिक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान जारी किया !

28-Sep-2020

यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2020 की तारीख फिर टलने का खतरा पैदा हो गया है। परीक्षा के संबंध में सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई कर रहा है।

सियासत डॉट कॉम की  खबर के अनुसार, सुनवाई के दौरान यूपीएससी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षाएं टालना ‘असंभव’ है।
कोर्ट ने यूपीएससी को कल मंगलवार को एफिडेविड फाइल करने को कहा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2020 दो से तीन महीने स्थगित करने को लेकर याचिका लगाई गई है।

यूपीएससी के 20 आवेदकों ने वकील अलख आलोक श्रीवास्तव के जरिए याचिका लगाई है। यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 4 अक्टूबर 2020 को ऑफलाइन मोड पर होनी है।

यूपीएससी से जुड़ी इस याचिका में कोरोना वायरस महामारी और देश के विभिन्न भागों में बाढ़ का हवाला दिया गया है।
यह भी कहा गया है कि परीक्षा के लिए केंद्रों की संख्या भी काफी कम है। मौजूदा हालात भी सामान्य नहीं हैं। ऐसे में उम्मीदवारों को एक जगह से दूसरी जगह जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
 जस्टिस एएम खानविलकर और संजीव खन्ना की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। बेंच ने यूपीएससी को नोटिस भेजकर इसपर जवाब मांगा है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 सितंबर 2020 की तारीख दी है।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 4 अक्टूबर 2020 को ऑफलाइन मोड पर होनी है।
इस परीक्षा के लिए करीब 6 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। देशभर में 72 शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं