बिहार चुनाव: 78 सीटों पर तीसरे चरण का मतदान जारी!

बिहार चुनाव: 78 सीटों पर तीसरे चरण का मतदान जारी!

07-Nov-2020

बिहार विधानसभा चुनाव का तीसरे चरण का मतदान शनिवार को शुरु हो गया है। इस दौरन सुबह 7 बजे से 78 सीटों पर वोटिंग हो रही है। 

 

एजेंसी की  खबर के अनुसार, आखिरी चरण के इस लड़ाई में कुल 1204 कैंडिडेट अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, आखिरी दौर के इस युद्ध में कुल 2 करोड़ 35 लाख 54 हजार 71 वोटर इन उम्मीदवारों का भाग्य का फैसला करेंगे।

तीसरे चरण के मतदान में नीतीश कैबिनेट के मंत्रियों के अलावा वीआईपी पार्टी चीफ मुकेश सहनी, आरजेडी के दिग्गज नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, अब्दुल जलील मस्तान, शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव, पूर्व मंत्री चंद्रेशेखर, पूर्व सांसद लवली आनंद, शिवचंद्र राम और पूर्व मंत्री रमई राम की भी तीसरे चरण में परीक्षा होगी।

आखिरी चरण में नीतीश कुमार के 12 मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। साथ ही कई और दिग्गज मैदान में हैं। इनमें से चार बीजेपी और आठ जेडीयू खेमे से हैं।

इनमें बिजेंद्र प्रसाद यादव, नरेंद्र नारायण यादव, रमेश ऋषिदेव, खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद, लक्ष्मेश्वर राय, बीमा भारती, मदन सहनी, महेश्वर हजारी, प्रमोद कुमार, सुरेश कुमार भी मैदान में हैं।


 

 
 

अर्थव्यवस्था के फिर से पटरी पर लौटने के संकेत

अर्थव्यवस्था के फिर से पटरी पर लौटने के संकेत

04-Nov-2020

अर्थव्यवस्था के फिर से पटरी पर लौटने के संकेत

-ललित गर्ग-

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कोरोना वायरस के संक्रमण से जुड़ी खबरों ने फिलहाल थोड़ी राहत भले ही दी है, लेकिन खतरा टला नहीं है, इसके संकेत भी साफ है। जहां तक समाज एवं अर्थव्यवस्था पर पड़े इसके असर का मामला है, अभी इन सबसे उबरने में काफी समय लग सकता है। विशेषतः भारत की अर्थ-व्यवस्था तो पहले से अपनी स्थिति को मजबूत करने की स्थिति से जूझ रही थी, कोरोना महामारी ने उसे और गहरे घाव दिये हंै। भारत की स्थिति ज्यादा खराब होने का कारण यहां खूब संक्रमण हुआ और बहुत कड़े लाॅकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था अपंग हो गई है। सरकार एवं नीति-नियंता शायद सार्वजनिक रूप से इसी स्वीकार नहीं करेंगे, लेकिन यही कठोर वास्तविकता है।  

लॉकडाउन के दौरान बंद बहुत सी छोटी इकाइयां अभी भी नहीं खुल सकी हैं। इस क्षेत्र में बेरोजगार हो गए सभी लोगों को रोजगार मिल गया हो, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता। लेकिन फिलहाल का सच यही है कि स्थितियां अब उतनी भी खराब नहीं हैं, जितनी पांच-छह महीने पहले लग रही थीं। कोरोना संक्रमण के सच को स्वीकार करते हुए देश ने आगे बढ़ना शुरू कर दिया है, लेकिन लंबा रास्ता अभी बाकी है। अक्तूबर का जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये तक पहंुच गया है, जो कि अर्थव्यवस्था के फिर से पटरी पर लौटने का सबसे बड़ा संकेत माना जा सकता है। इससे भी ज्यादा राहत देने वाली खबर फैक्टरी उत्पादन का सूचकांक पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय का सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचना है। निक्कई परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स के अनुसार अक्तूबर महीने में यह 58.9 पर पहुंच गया है। अगर इस सूचकांक के हिसाब से देखें, तो यह ठीक है कि अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आई है, अक्तूबर में तमाम तरह के आंकड़े बाजार से हताशा के बादल छंटने के संकेत दे रहे हैं। विशेषतः ऑटोमोबाइल क्षेत्र के आंकड़े इतने बेहतर और हैरान करने वाले रहे है। दुपहिया वाहनों और कारों की बिक्री खासी उम्मीद बंधा रही है। लेकिन अर्थव्यवस्था के लिये जरूरी है, उसका इन पटरियों पर रफ्तार पकड़कर मंजिल की ओर बढ़ना। हमारी सरकारों और वित्तीय संस्थाओं को अपने प्रयासों में कोई कमी नहीं छोड़नी चाहिए और सशक्त आर्थिक नीतियों के द्वारा देश को समग्र विकास की ओर अग्रसर करना चाहिए।
दुनियाभर में यह कटु सच्चाई है कि नीति नियंताओं को वास्तव में नहीं पता कि उन्हें क्या करना है। भारत में अर्थ-व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये भी ऐसी ही स्थिति है। फिर भी भारत की वर्तमान अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिये अन्यान्य प्रयत्नों के साथ चार मुख्य बिन्दु हैं-गरीबी को मिटाना, जनसंख्या की वृद्धि को रोकना, पर्यावरण में सुधार करना एवं बेरोजगारी का उन्मूलन करना। ऐसा लगता है-गरीबी और जनसंख्या में भी कोई निकट का संबंध है। गरीब के संतान ज्यादा होती है क्योंकि कुपोषण में आबादी ज्यादा बढ़ती है। विकसित राष्ट्रों में आबादी की बढ़त का अनुपात कम है, अविकसित और निर्धन राष्ट्रों में आबादी की बढ़त का अनुपात ज्यादा है। प्राचीन संस्कृत साहित्य में एक प्रसंग आता है-दरिद्रता दुखतर है और उसके साथ जुड़ा दुख है संतान का आधिक्य। दारिद्रता की पीड़ा और संतति के आधिक्य की पीड़ा-दोनों ओर से आदमी पीड़ित होता है। जनसंख्या-वृद्धि के अनेक कारण हो सकते हैं, किन्तु कालखण्ड का प्रभाव और कुपोषण-ये दोनों जनसंख्या वृद्धि के सबसे प्रमुख कारण बनते हैं।
विश्व की सारी संपदा, सारे संसाधन गरीबी को मिटाने में लगते तो आज स्थिति बहुत भिन्न होती, किन्तु बीच में व्यवधान आ गए। कोरोना का व्यवधान भी गरीबी मिटाने की दिशा में गति का एक बड़ा अवरोध है। अब तक सम्पदा का उपयोग मानव को सुखी या सामान्य बनाने की दिशा में नहीं हुआ, बल्कि संहारक अस्त्रों के निर्माण में हुआ। एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र से भयभीत हो गया। शस्त्रों की होड़ सी लग गई। यू.एन.ओ. की एक रिपोर्ट के आंकड़ों को देखें तो पता चलेगा कि अर्थशक्ति और संसाधन किस दिशा में लग रहे हैं। दुनिया का अधिकांश अर्थ प्रतिवर्ष सुरक्षा पर व्यय हो रहा है। मानव की सुरक्षा के लिए नहीं, अपनी भौगोलिक सुरक्षा के लिए यह व्यय किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य में यह बताया गया है कि किसी एक विशेष कारण के चलते नहीं बल्कि विभिन्न कारणों की वजह से लोगों को गरीबी में जीवन व्यापन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसलिए यह आवश्यक है कि केवल आय का स्रोत एवं आमदनी ही गरीबी का कारण नहीं है बल्कि भोजन, घर, भूमि, स्वास्थ्य, सुरक्षा आदि भी गरीबी के निर्धारण में भूमिका निभाते हैं।
भारत में गरीबी का मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या, कमजोर कृषि, भ्रष्टाचार, रूढ़िवादी सोच, जातिवाद, अमीर गरीब में ऊंच-नीच, नौकरी की कमी, अशिक्षा, बीमारी आदि है। भारत एक कृषि प्रधान देश है जिसकी एक बड़ी जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, आज देश के यही किसान गरीबी की मार झेल रही है। खराब कृषि और बेरोजगारी की वजह से लोगों को भोजन की कमी से जूझना पड़ता है। यही कारण है कि महंगाई ने भी पंख फैला रखे हैं। बढ़ती जनसंख्या भी गरीबी का एक प्रमुख कारण है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में बताया कि भारत में 21.9 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहती है। विश्व बैंक की वर्ष 2011 रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की 23.6 प्रतिशत जनसंख्या (लगभग 276 मिलियन) की प्रतिदिन क्रय शक्ति 1.25 डॉलर प्रतिदिन है। इसके अतिरिक्त 2016 में जारी अंतरराष्ट्रीय भुखमरी सूचकांक में भारत को 97वां स्थान मिला है। इसमें विकासशील देशों के लिए औसत दर 21.3 रखी गयी थी जबकि भारत की यह दर 28.5 प्रतिशत थी। गरीबी उन्मूलन की दिशा में योगदान देने के लिए भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी का नोबेल पुरस्कार हेतु चयनित होना सुखद है। लेकिन दुखद पहलू यह है कि उनके ही देश के अधिकत्तर लोग गरीबी भरा जीवन जीने को विवश है।
भारत लंबे समय से गरीबी का दंश झेल रहा है। स्वतंत्रता पूर्व से लेकर स्वतंत्रता पश्चात भी देश में गरीबी का आलम पसरा हुआ है। गरीबी उन्मूलन के लिए अब तक कई योजनाएं बनीं, कई प्रयास हुए, गरीबी हटाओ चुनावी नारा बना और चुनाव में जीत हासिल की गई। लेकिन इन सब के बाद भी न तो गरीब की स्थिति में सुधार हुआ और न गरीबी का खात्मा हो पाया। सच्चाई यह है कि गरीबी मिटने के बजाय देश में दिनोंदिन गरीबों की संख्या में बढ़ावा हो रहा है। सत्ता हथियाने के लिए गरीब को वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया तो सत्ता मिलने के बाद उसे हमेशा के लिए अपने हाल पर छोड़ दिया गया। इसलिए गरीब आज भी वहीं खड़ा है जहां आजादी से पहले था। आज भी सवेरे की पहली किरण के साथ ही गरीब के सामने रोटी, कपड़ा और मकान का संकट खड़ा हो जाता है। दरअसल, यह कम विडंबना नहीं है कि सोने की चिड़िया के नाम से पहचाने जाने वाले देश का भविष्य आज गरीबी के कारण भूखा और नंगा दो जून की रोटी के जुगाड़ में दरबदर की ठोकरें खा रहा है। नरेन्द्र मोदी सरकार की गरीबी उन्मूलन एवं जनसंख्या नियंत्रण की योजनाओं से कुछ उजाला होता हुआ दिख रहा है। प्रेषकः

 

            (ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
मो. 9811051133

 


छत्तीसगढ़ राज्य में कोरोना टीकाकरण के लिए की जा रही तैयारी !

छत्तीसगढ़ राज्य में कोरोना टीकाकरण के लिए की जा रही तैयारी !

03-Nov-2020

कोरोना टीकाकरण के लिए की जा रही तैयारी
प्राथमिकता के आधार पर विभाग के लोगों का तैयार किया जा रहा डेटा

रायपुर, 
कोरोना वायरस वैक्सीन के जल्द आने की उम्मीद पर केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निगरानी के लिए समितियां बनाने को कहा है। वैक्सीन के लिए कोल्ड चैन से लेकर उसे सुदूर और जटिल इलाकों तक पहुंचाने के लिए जिला स्तर पर समन्वय समितियां बनाने की भी सलाह दी गई है।

राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ अमर सिंह ने बताया,कोरोना टीकाकरण के लिए अभी जानकारी एकत्र करने का कार्य चल रहा है इस संदर्भ में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी सीएमएचओ के साथ एक समीक्षा बैठक भी की गयी है जिसमें उन्हें संभावित वैक्सीन लगाए जाने वाले लोगों के बारे में जानकारी एकत्र करने कोकहा गया है।

उन्होंने बताया, जिन लोगों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है उनमें स्वास्थ्य विभाग सबसे पहले है। स्वास्थ्य विभाग में सभी सीएचसी, पीएचसी, निजी चिकित्सक और उनके स्टाफ,सीएमएचओ और उनके मातहत सभी रेगुलर व कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी, मेडिकल कॉलेज के डीन और  स्टाफ, शासकीय अस्पताल के स्टाफ, मेडिकल कॉलेज सुपरीटेंडेंट के स्टाफ इत्यादि शामिल है। इसी तरह महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समेत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,आंगनबाड़ी सुपरवाइजर और आंगनबाड़ी सहायिका के डेटा को तैयार किया जा रहा है इसके अलावा मितानिन का भी डेटा सहेजा जा रहा है। 28 अक्टूबर से यह डेटा तैयार किया जा रहा है जिसे फिलहाल एक्सेल शीट में भरा जा रहा है और बाद में इसे ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा।

कब वैक्सीन आएगी जानकारी नहीं पर तैयारी जोरों पर : डॉ अमर सिंह

डॉ अमर सिंह बताते हैं:  ``कोरोना टीकाकरण के संदर्भ में अभी प्राथमिकता के आधार पर विभाग से जानकारीका संग्रह किया जा रहा है | इसमें सरकारी और निजी चिकित्सकों और उनके स्टाफ की जानकारी भी एकत्र की जा रही है । वैक्सीन कौन लगा सकता है और कौन नहीं इसकी भी जानकारी एकत्र की जा रही है। इसके अलावा कोरोना की वैक्सीन कब आएगी के संदर्भ में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है लेकिन इसके लिए सभी जरूरी कार्य तेजी से पूर्ण किये जाने के निर्देश दिए गए हैं । ‘’

तीन समिति बनाने का निर्देश

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने इस संबंध में 26 अक्टूबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखा  जिसमें  उन्होंने मुख्य सचिव के नेतृत्व में राज्य संचालन समिति (एसएससी), अतिरिक्त मुख्य सचिव का प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) के नेतृत्व में राज्य कार्य बल (एसटीएफ) और जिलाधिकारियों के नेतृत्व में जिला कार्य बल गठित (डीटीएफ़) करने का सुझाव दिया है।

इसमें यह भी कहा गया कि एसएससी महीने में कम-से-कम एक बैठक करेगी। इसी तरह एसटीएफ की हर 15 दिन में बैठक होगी और डीटीएफ की बैठक हर हफ्ते होगी।

 


मरवाही उप चुनाव हुआ रोमांचक जोगी कांग्रेस का भाजपा प्रत्याशी को समर्थन

मरवाही उप चुनाव हुआ रोमांचक जोगी कांग्रेस का भाजपा प्रत्याशी को समर्थन

31-Oct-2020

मरवाही पेंड्रा से खुलासपोस्ट न्यूज़ 

मरवाही उप चुनाव हुआ रोमांचक जोगी कांग्रेस का भाजपा प्रत्याशी को समर्थन

हाल ही में खुलास पोस्ट न्यूज़  नेटवर्क की टीम ने अमित जोगी और ऋचा जोगी के नामांकन रद्द होने के बाद आशंका व्यक्त किया था की जोगी परिवार भारतीय जनता पार्टी का समर्थन करेगी और वही हुआ जोगी परिवार ने अपना दांव खेलते हुए जोगी कांग्रेस के विधायक दल के नेता धर्मजीत सिंह से भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने अमित जोगी ने  शोसल  मीडिया में जो पत्र जारी किया है  वह  भावनात्मक प्रचार का हिस्सा है जो इस तरह से है !

देर रात मुझे मेरे विधायक दल के नेता श्री धरमजीत सिंह जी और विधायक दल के सचिव श्री राजेंद्र राय जी ने जानकारी दी कि उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी श्री गम्भीर सिंह का समर्थन करने का निर्णय ले लिया है। श्री प्रमोद शर्मा और अधिकांश पार्टी कार्यकर्ता भी इस बात पर अपनी सहमति दे चुके हैं। मेरी भाजपा के किसी नेता से आज तक इस सम्बंध में सीधा संवाद नहीं हुआ है पर मैं अपनी पार्टी के नेताओं की इस राय से पूर्ण रूप से सहमत हूँ। इस तरह का बयान शोसल मीडिया प्लेटफार्म से जारी किया गया है

अब । मरवाही विधानसभा सीट  उप चुनाव और भी रोचक होने वाला है ? उपचुनाव में मतदान की तारीख पास आ रही है. 3 नवंबर को वहां वोट डाले जाएंगे. यहां का सियासी पारा अब चरम पर पहुंच गया है. मुख्यमंत्री समेत सरकार के बड़े मंत्री-नेता मरवाही में डेरा डाल डटे हुए हैं, वहीं बीजेपी भी इस सीट को जीतने में कोई कोर- कसर बाकी नहीं रखना चाहती. पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने मरवाही उप चुनाव की कमान संभल रखी है ऐसे में जोगी कांग्रेस और जोगी परिवार भावनात्मक प्रचार में जुट गया है

मतदान के  2  ठीक दिन पहले इस तरह जनता कांग्रेस का बीजेपी प्रत्याशी को समर्थन देना कहीं न कहीं बीजेपी का पलड़ा भारी कर सकता है. हालांकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी अपने चुनावी सभाओं में रिकॉर्ड मतों से जीत का दावा कर रहे हैं. अब देखना ये होगा कि जेसीसीजे का समर्थन बीजेपी के लिए कितना फायदेमंद साबित होता है. शुक्रवार को छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जेसीसीजे) के कद्दावर नेता और लोरमी विधायक धरमजीत सिंह का पूर्व सीएम रमन सिंह से मिलना काफी सुर्खियों में रहा. धरमजीत सिंह ने इसे सामान्य सौजन्य मुलाकात बताया था, लेकिन मरवाही के वर्तमान सियासी परिस्थितियों के बीच इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा था और जल्द ही किसी बड़े एलान का कयास लगाया जा रहा था.
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। मरवाही विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव में मतदान की तारीख पास आ रही है. 3 नवंबर को वहां वोट डाले जाएंगे. यहां का सियासी पारा अब चरम पर पहुंच गया है. मुख्यमंत्री समेत सरकार के बड़े मंत्री-नेता यहां डेरा जमाए हुए हैं, वहीं बीजेपी भी इस सीट को जीतने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहती.

इधर जेसीसीजे ने कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए बीजेपी प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. जाति को लेकर चुनावी रण से बाहर हुए जेसीसीजे प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर इसका ऐलान कर दिया है. जेसीसीजे विधायक धरमजीत सिंह, प्रमोद शर्मा और राजेंद्र राय ने भी बीजेपी प्रत्याशी गंभीर सिंह को अपना समर्थन देने का फैसला किया है.

अमित जोगी ने अपने पोस्ट में लिखा है कि विधायक दल के नेता धरमजीत सिंह और सचिव राजेंद्र राय ने सूचना दी है कि उन्होंने बीजेपी दल के प्रत्याशी गंभीर सिंह का समर्थन करने का निर्णय लिया है. प्रमोद शर्मा और पार्टी के अन्य सदस्य भी इसमें अपनी सहमति दे चुके हैं. अमित जोगी ने कहा कि इस मामले में उनका बीजेपी के किसी भी नेता से सीधा संवाद नहीं हुआ है. अमित जोगी ने आगे कहा कि ‘मैं मरवाही के मेरे परिवार से आग्रह करता हूं कि मेरे पिता अजीत जोगी को अपमानित करने वाली कांग्रेस पार्टी के विरुद्ध वोट देकर हमें न्याय दिलाएं.’

 

 


वैश्विक रवैये में बदलाव के बिना महामारियों के युग से बचना मुश्किल: विशेषज्ञ

वैश्विक रवैये में बदलाव के बिना महामारियों के युग से बचना मुश्किल: विशेषज्ञ

30-Oct-2020

संक्रामक बीमारियों से लड़ने के लिये वैश्विक रवैये में अगर आमूल-चूल बदलाव नहीं किये गये तो भविष्‍य में महामारियां जल्‍दी-जल्‍दी उभरेंगी। साथ ही वे ज्‍यादा तेजी से फैलेंगी, दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था को और ज्‍यादा नुकसान पहुंचाएंगी और कोविड-19 के मुकाबले ज्‍यादा तादाद में लोगों को मारेंगी। ऐसा दावा है दुनिया के 22 शीर्ष विशेषज्ञों का जिन्होंने आज जैव-विविधता और महामारियों को लेकर एक रिपोर्ट जारी कर यह चेतावनी दी है।
इंटरगवर्नमेंटल साइंस-पॉलिसी प्‍लेटफार्म और बायोडायवर्सिटी एण्‍ड इकोसिस्‍टम सर्विसेज (आईपीबीईएस) द्वारा कुदरत में आ रही खराबियों और महामारियों के बढ़ते खतरों के बीच सम्‍बन्‍धों पर चर्चा के लिये आयोजित एक आपात वर्चुअल वर्कशॉप में विशेषज्ञ इस बात पर सहमत दिखे कि महामारियों के युग से बचा जा सकता है, बशर्ते महामारियों के प्रति अपने रवैये में बुनियादी बदलाव लाकर प्रतिक्रिया के बजाय रोकथाम पर ध्‍यान दिया जाए।
बृहस्‍पतिवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 वर्ष 1918 में फैली ग्रेट इंफ्लूएंजा महामारी के बाद से अब तक आयी कम से कम छठी वैश्विक महामारी है। हालांकि इसकी शुरुआत जानवरों द्वारा लाये गये माइक्रोब्‍स से हुई, मगर अन्‍य सभी महामारियों की तरह यह भी पूरे तरीके से इंसान की नुकसानदेह गतिविधियों की वजह से फैली। ऐसा अनुमान है कि स्‍तनधारियों और पक्षियों की विभिन्‍न प्रजातियों में इस वक्‍त 17 लाख ‘अनखोजे’ वायरस मौजूद हैं। उनमें से लगभग 85 हजार ऐसे हैं जो इंसान को संक्रमित करने की क्षमता रखते हैं।
इकोहेल्थ अलायंस के अध्यक्ष और आईपीडीएस वर्कशॉप के चेयरमैन डॉक्टर पीटर डेजाक ने कहा ‘‘कोविड-19 या किसी भी आधुनिक महामारी के कारण को लेकर कोई बड़ा रहस्य नहीं है। जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता को हो रहे नुकसान को बढ़ावा देने वाली इंसानी गतिविधियां ही हमारे पर्यावरण पर उनके पड़ने वाले प्रभावों के कारण उत्‍पन्‍न महामारियों के खतरे को पैदा करती हैं। जमीन के उपयोग में बदलाव, खेती का विस्‍तार और सघनीकरण, गैरसतत कारोबार, कुदरत को तबाह करने वाला उत्‍पादन और उपभोग तथा वन्‍यजीवों, मवेशियों, रोगाणुओं और लोगों के बीच बढ़ते सम्‍पर्क वगैरह ऐसी चीजें हैं जो महामारियों को बुलावा देती हैं।”
रिपोर्ट के मुताबिक जैव विविधता को नुकसान पहुंचाने वाली इंसानी गतिविधियों को कम करके महामारी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए संरक्षित क्षेत्रों को और बेहतर तरीके से महफूज करना होगा। साथ ही जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध क्षेत्रों के अंधाधुंध दोहन को भी कम करना होगा। इससे वन्य जीवों, मवेशियों और इंसान के बीच संपर्क कम होगा और नई बीमारियों को रोकने में मदद मिलेगी।
डॉक्‍टर देजाक ने कहा "यह मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण बेहद सकारात्मक निष्कर्ष की तरफ इशारा करते हैं। हमारे पास महामारियों को रोकने की अच्छी क्षमता है लेकिन इस वक्त हम जिस तरह से उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे हैं, उनमें हमारी क्षमता को काफी हद तक नजरअंदाज किया जा रहा है। हमारी कोशिशें ठहरी हुई है। हम अब भी बीमारियों को उभरने के बाद वैक्सीन और चिकित्सीय इलाज के जरिए उनकी रोकथाम की कोशिशों पर ही निर्भर रहते हैं, मगर इसके लिए प्रतिक्रिया के साथ-साथ रोकथाम पर और ज्यादा ध्यान दिए जाने की जरूरत है।"
इसके साथ ही, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के कार्यक्रम निदेशक डॉ. सेजल वोरह ने कहा, "मानव कल्याण प्रकृति के स्वास्थ्य के साथ जुड़ा हुआ है। हम वर्तमान दर पर जैव विविधता खोना जारी नहीं रख सकते हैं। भविष्य के महामारी के जोखिम को कम करने के लिए वैश्विक, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर नीतियों और प्रथाओं को बदलने में अभी भी देर नहीं हुई है।”
वहीँ मेटास्ट्रिंग फाउंडेशन के सीईओ और निदेशक, मिशन सचिवालय, जैव विविधता और मानव कल्याण पर राष्ट्रीय मिशन परियोजना, रवि चेलम ने कहा, "रिपोर्ट स्पष्ट रूप से पर्यावरण पर मानव प्रभावों को मूल कारण के रूप में स्थापित करती है। यह भी स्पष्ट है कि हम महामारी के युग में हैं और कोई भी वास्तव में सुरक्षित नहीं है। महामारी की आर्थिक लागत उन्हें रोकने के लिए होने वाले खर्च से कहीं अधिक है। अब आर्थिक सुधारों को पूरी तरह से एक नयी नज़र से  देखना होगा। " 
रिपोर्ट में कहा गया है कि बीमारियां पैदा होने के बाद सिर्फ उनके इलाज के कदम उठाने या प्रौद्योगिकीय समाधान पर ही निर्भर रहना, खासतौर से नई वैक्सीन और चिकित्सीय इलाज तैयार करना और उनका वितरण करना, दरअसल एक 'धीमी और अनिश्चिततापूर्ण' कवायद है। इसमें इंसान द्वारा बड़े पैमाने पर सहन की जाने वाली तकलीफें और इन बीमारियों के इलाज पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को होने वाले सैकड़ों अरब डॉलर के सालाना आर्थिक नुकसान को कमतर बना दिया जाता है।
 रिपोर्ट में लगाए गए एक अनुमान के मुताबिक पूरी दुनिया में जुलाई 2020 तक कोविड-19 महामारी के कारण 8 से 16 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हुआ है। ऐसा भी अनुमान है कि वर्ष 2021 की चौथी तिमाही तक अकेले अमेरिका में ही कोविड-19 महामारी की वजह से 16 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि महामारियों का खतरा कम करने पर होने वाला खर्च, ऐसी महामारियों के इलाज पर खर्च होने वाली धनराशि के मुकाबले 100 गुना कम हो सकती है। इससे रूपांतरणकारी बदलाव के मजबूत आर्थिक प्रोत्साहन हासिल होते हैं।
इस रिपोर्ट में अनेक नीति संबंधी विकल्प दिए गए हैं, जिनसे महामारी के खतरे को कम करने और उससे निपटने में मदद मिलेगी। इनमें से प्रमुख इस प्रकार हैं :
·         महामारी की रोकथाम के लिए एक उच्च स्तरीय अंतर सरकारी परिषद गठित की जाए, जो नीतियां बनाने वालों को उभरती हुई बीमारियों के बारे में सर्वश्रेष्ठ विज्ञान और प्रमाण उपलब्ध कराए, अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों के बारे में पूर्वानुमान लगाए, संभावित बीमारियों के आर्थिक प्रभावों का मूल्यांकन करे और शोध में व्याप्त खामियों को रेखांकित करे। ऐसी काउंसिल एक वैश्विक मॉनिटरिंग कार्य योजना का डिजाइन तैयार करने में भी मदद कर सकती हैं।
·         विभिन्न देश एक अंतरराष्ट्रीय समझौते या सहमति के दायरे में रहते हुए परस्पर रजामंदी से लक्ष्य तय करें, जिनमें लोगों, जानवरों और पर्यावरण के स्पष्ट फायदे हों।
·         महामारी को लेकर तैयारी करने, महामारी की रोकथाम के लिए बेहतर कार्यक्रम बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में महामारी विस्फोट को नियंत्रित करने तथा उसकी पड़ताल करने के लिए सरकारों में ‘वन हेल्थ’ को संस्थागत रूप दिया जाए।
·         विकास तथा भू-उपयोग संबंधी बड़ी परियोजनाओं में महामारी और उभरती हुई बीमारियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के आकलन को विकसित करके उसे जोड़ा जाए। वहीं भू-उपयोग के लिए वित्तीय सहायता में सुधार किया जाए ताकि  जैव विविधता से जुड़े फायदों और जोखिमों की पहचान हो और उन्हें स्पष्ट रूप से लक्ष्य बनाया जाए।
·         महामारियों के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान को उपभोग, उत्पादन, सरकारी नीतियों और बजट में एक कारक के तौर पर शामिल करना सुनिश्चित किया जाए।
·         महामारियों को बढ़ावा देने वाली उपभोग की किस्मों, वैश्वीकृत कृषि विस्तार और कारोबार को कम करने वाले बदलाव को जमीन पर उतारा जाए। इन बदलावों में मांस के उपभोग, पशुधन उत्पादन तथा महामारी के खतरे को बहुत बढ़ाने वाली तमाम गतिविधियों पर कर या लेवी लगाना शामिल है।
·         नई अंतर सरकारी स्वास्थ्य एवं व्यापार साझीदारी के जरिए अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव कारोबार में प्राणिजन्‍य रोगों के खतरे को कम किया जाए। वन्यजीवों के कारोबार में बीमारी के ज्यादा खतरे वाले जीवों की हिस्सेदारी को कम या बिल्कुल समाप्त कर दिया जाए। साथ ही वन्यजीवों के अवैध कारोबार के तमाम पहलुओं पर कानून का शिकंजा और कसा जाए तथा वन्यजीवों के कारोबार में सेहत से जुड़े खतरों के बारे में बीमारी के हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जानकारी और बढ़ायी जाए।
·         महामारी नियंत्रण कार्यक्रम, बेहतर खाद्य सुरक्षा का लक्ष्य हासिल करने और वन्यजीवों का उपयोग कम करने में स्थानीय लोगों तथा समुदाय की सहभागिता और जानकारी का मोल समझा जाए।
·         जोखिम वाले प्रमुख बर्ताव तथा अन्य मुद्दों पर महत्वपूर्ण जानकारी में व्याप्त खामियों को दूर किया जाए। बीमारियों के जोखिम में अवैध और गैरनियमित तथा वैध और नियमित वन्यजीव कारोबार के तुलनात्मक महत्व को जाहिर किया जाए और पारिस्थितिकीय अपघटन और उसकी बहाली, लैंडस्केप के ढांचे और बीमारी पैदा होने के खतरे के बीच संबंधों को लेकर बनी समझ में सुधार किया जाए।
आईपीबीईएस की एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी डॉक्टर एनी लारीगुडरी ने वर्कशॉप की रिपोर्ट के बारे में कहा ‘‘कोविड-19 ने नीति और निर्णय लेने के मामले में विज्ञान और विशेषज्ञता के महत्व को जाहिर किया है। हालांकि यह आईपीबीईएस की परंपरागत अंतरसरकारी आकलन रिपोर्ट नहीं है। यह एक असाधारण प्रकाशन है जिसमें समय संबंधी महत्वपूर्ण बाधाओं के बीच नये-नवेले प्रमाणों के साथ दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों का नजरिया पेश किया गया है। हम महामारियों के उभार और भविष्य में उनके प्रकोप को रोकने तथा नियंत्रित करने के विकल्पों के बारे में हमारी समझ को और बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए डॉक्टर देजाक और इस वर्कशॉप रिपोर्ट के तमाम लेखकों को शुभकामनाएं देते हैं। इससे आईपीबीईएस में हो रहे तमाम आकलनों को दिशा मिलेगी। साथ ही नीति निर्धारकों को महामारी का खतरा कम करने और उसकी रोकथाम के विकल्पों के बारे में नई चेतना मिलेगी।

 


जामिया के 101 छात्रों ने पास की UPSC की प्रारंभिक परीक्षा !

जामिया के 101 छात्रों ने पास की UPSC की प्रारंभिक परीक्षा !

27-Oct-2020

यूपीएससी सिविल सर्विस प्रारंभिक परीक्षा 2020 (UPSC Prelim Exam)  का रिज़ल्ट जारी हो चुका है. यह परीक्षा 4 अक्टूबर को आयोजित की गई थी. खास बात यह है कि इस प्री परीक्षा में जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी (Jamia millia university) के 101 छात्र भी सफल हुए हैं. इसमे से 10 लड़कियां भी हैं. अब यह सभी छात्र जनवरी में होने वाली मेंस परीक्षा में शामिल होंगे. जामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (RCA) से इस परीक्षा में 283 छात्र शामिल हुए थे.

यूपीएससी 2019 में 30 छात्र हुए थे सेलेक्ट

जामिया मिल्लिया इस्लामिया की आवासीय कोचिंग अकादमी (आरसीए) में कोचिंग देने और प्रशिक्षण पाने वालों में से 30 उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा 2019 में सेलेक्ट हुए थे. जामिया प्रशासन का दावा है कि देश के किसी भी सार्वजनिक कोचिंग सेंटर से यह सबसे बड़ा चयनित समूह है.

0 कामयाब छात्रों में थीं 06 लड़कियां

चयनित 30 उम्मीदवारों में से 06 के आईएएस, 08 के आईपीएस बनने की उम्मीद है. बाकी उम्मीदवारों को उनकी रैंकिंग और विकल्पों के अनुसार आईआरएस, ऑडिट एंड अकाउंट सेवा, आईआरटीएस तथा ग्रुप-ए की अन्य सेवाएं मिलेंगी. इस साल आरसीए से कोचिंग पाने वालों में से रूचि बिंदल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा, जिन्होंने 39 वां रैंक हासिल किया. आरसीए के कामयाब 30 उम्मीदवारों में से 06 लड़कियां हैं.

साल दर साल लगातार अच्छा प्रदर्शन

आरसीए के अच्छे प्रदर्शन के लिए, प्रो अख्तर व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन कर रही हैं और आरसीए को उत्कृष्टता की ओर ले जाने के लिए उसे हर मुमकिन सहायता प्रदान करा रही हैं. उन्होंने सभी कामयाब छात्रों और उनके परिवार को बधाई दी. पिछले साल यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में तीसरा रैंक पाने वाले जुनैद अहमद आरसीए, जेएमआई से स्टार परफार्मर थे.

2019 तक आरसीए ने 230 सिविल सेवक दिए

साल, 2010-2011 में अपनी स्थापना से वर्ष 2019 तक आरसीए ने 230 सिविल सेवक बनाए हैं, जिनमें कई आईएएस, आईएफएस और आईपीएस शामिल हैं. इसके अलावा, 285 से अधिक छात्रों को विभिन्न अन्य केंद्रीय और राज्य सेवाओं यानी सीएपीएफ, आईबी, आरबीआई (ग्रेडबी), एपीएफ, बैंक पीओ और पीसीएस आदि में भी चुना गया है. इस साल आरसीए के 14 छात्र जम्मू-कश्मीर की सीविल सेवाओं में शामिल हुए. 24 छात्र यूपीपीएससी साक्षात्कार के क्वालिफाई हुए और 15 छात्र बीपीएससी साक्षात्कार के लिए.


पश्चिम बंगाल का एक ऐसा इलाका जहाँ माँ दुर्गा विसर्जन के दौरान गोलियों की तड़तड़ाहट के साथ की जाती है माँ की विदाई

पश्चिम बंगाल का एक ऐसा इलाका जहाँ माँ दुर्गा विसर्जन के दौरान गोलियों की तड़तड़ाहट के साथ की जाती है माँ की विदाई

26-Oct-2020

परंपरा के नाम पर तृणमूल नेता बच्चू रॉय और शिवा रॉय ने अपने अपने परिवार के साथ खुलेआम उड़ा रहे हैं कानून की धज्जियाँ

राजा महाराजाओं की परंपराओं को जिंदा रखने के नाम पर अपनी जमींदारी जिंदा रखने की कर रहे हैं कोसिस

Report:Abdul Kalam

Place:Bengal

आज विजया दशमी है आज के ही दिन माँ दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन कर उन्हें अगले वर्ष फिर से आने का आह्वान किया जाता है बहोत ही धूम-धाम से जिस तरह माँ की प्रतिमा पूजन के लिए लाई जाती है ठीक उसी तरह धूम-धाम से ही माँ दुर्गा की प्रतिमा की विदाई भी की जाती है ये परंपरा सदियों से चली आ रही है माँ की विदाई के दौरान बंगाल में सिंदूर खेला भी बहोत प्रचलित है माँ की मूर्ति विसर्जन के दौरान बंगाली महिलाएँ माँ की विदाई देते समय माँ को सिंदूर लगती हैं साथ ही माँ को पेड़ा खिलाकर मुह मीठा भी करती है और अपने सांस्कृतिक नृत्य व गान के जरिए माँ को अगले वर्ष दोबारा आने का आह्वान भी करती है पर पश्चिम बंगाल के आसनसोल के रहने वाले राय परिवार की 300 वर्ष पुरानी एक अनोखी परंपरा है जो परंपरा आज भी जारी है इस परंपरा में राय परिवार माँ की मूर्ति विसर्जन के दौरान उनकी विदाई में अपने पुरखों से चले आ रहे रीति रिवाज को मानते हुवे हवाई फायरिंग करते हैं इस फायरिंग में पुरुष तो पुरुष  महिलाएँ भी शामिल होती हैं उनका मानना है के काशीपुर के राजा का राज पाट राय परिवार ही देखता हैं और उनके द्वारा जारी रीति रिवाजों को राय परिवार आज भी कायम रखा है इस लिए वो हर वर्ष के तरह इस वर्ष भी सदियों से चली आ रही परंपरा को दोहराने का काम किए हैं हालांकि की तस्वीरों में दिख रहे लोग कोई राजा महाराजा के खानदान या फिर कोई राजवंश से नही हैं बल्कि वो जमींदार हैं राजा महाराजाओं के समय इनके पूर्वज उनकी जमनो का लेखा जोखा रखा करते थे जब राजपाठ खत्म हुई तो ये लोग जमींदार बन गए और राजा महाराजाओं की परंपरा को कुछ इस तरह से जारी रखे हैं हालांकि उनको उनके परंपरा में किसी भी तरह की दिक्कत या परेशानी ना हो इसके लिए इन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी की पार्टी तृणमूल का दामन थाम लिया इससे पहले वो सीपीएम का झंडा भी ढो चुके हैं बच्चू रॉय और शिवा रॉय


नेपाल से रिक्शे से यूपी पहुंचा दूल्हा, निकाह कर ले गया दुल्हन

नेपाल से रिक्शे से यूपी पहुंचा दूल्हा, निकाह कर ले गया दुल्हन

25-Oct-2020

Report:Pooja Singh

Place:Bahraich

भारत -नेपाल के बीच विवाद के बावजूद दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंध कितने मजबूत हैं इसका उदाहरण बीते शनिवार को देखने को मिला। एक दूल्हा अपनी दुल्हन को लेने के लिए रिक्शे से भारत पहुंचा। दरअसल कोरोना के बाद से ही भारत-नेपाल सीमा सील है। इसलिए कोई साधन नहीं चल रहा है। रिक्शे पर पहुंचे दूल्हे की चर्चा बहराइच में हर ओर हो रही है। सोशल मीडिया में भी फोटो वायरल हो रही है।

शनिवार को नेपाल के रफीक का निकाह उत्तर प्रदेश के बहराइच के रुपईडीहा में रहने वाली एक लड़की से होना था। रफीक ने बताया कि कई दिनों से साधन की तलाश कर रहा था पर कोई जुगाड़ नहीं चला। निकाह टालना उचित नहीं था इसलिए मैंने सोचा कि जाना है तो जाना है। मैं रिक्शा लेकर चल दिया। खुशी हूं कि निकाह हो गया। रिक्शे से ही अपनी दुल्हन को लेकर जा रहा हूं। 

आपको दें कि नेपाल देश का भारत से रोटी-बेटी का संबंध है और दोनों देश में रहने वाले लोगों की रिश्तेदारियां हैं। लेकिन लॉकडाउन होने के बाद दोनों देशों की सीमाएं भी सील हैं, जिससे आवागमन बंद है। बताया जा रहा है कि दुल्हा-दुल्हन को बीएसएफ ने बॉर्डर पार कराया। बॉर्डर बंद होने की वजह से दोनों देश में रहने वाले स्थानीय लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। इस बीच नेपाल के स्थानीय लोग भी नेपाल सरकार से लगातार भारत से लगी सीमा को खोलने की मांग कर रहे हैं।

 


*राष्ट्रपति और राज्यपाल को छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ ने लिखा पत्र*

*राष्ट्रपति और राज्यपाल को छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ ने लिखा पत्र*

25-Oct-2020

 *शिक्षा को महंगा करने वालो पर धारा 124 ए० के तहत अपराध दर्ज करने की रखी मांग* 

 *राजनांदगाँव* ज्ञात हो कि भारत देश के हर नागरिक को मौलिक अधिकार प्राप्त है  संविधान में शिक्षा का अधिकार ( 21क.राज्य.छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले सभी बालको के लिए निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है ) लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति निर्मित थी और इसी बीच पूरे देश में सभी शिक्षण संस्थाओं को भी बंद रखने का आदेश भारत सरकार का था ,विश्वव्यापी महावारी कोविड-19 कोरोना संक्रमण ने हमारे भारत देश को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है पूरे देश मे हाहाकार मचा हुआ है लोग दो वक़्त की रोटी के लिये तरस रहे है ,वही बात करे छत्तीसगढ़ प्रदेश की तो यहां पर भी यही स्थिति निर्मित है जिसके चलते पालक अभी फीस पटाने में सक्षम नहीं है परंतु प्रदेश के  निजी स्कूल संचालकों के द्वारा  एक  याचिका  दायर करवाई गई थी  शिक्षकों की सैलरी देने को आधार बनाया गया था जिस आधार पर  माननीय  उच्च न्यायालय बिलासपुर  के द्वारा  सभी निजी  स्कूलों को  सिर्फ  ट्यूशन फीस पालको से लेने के लिए  कहां गया था माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेशानुसार जो ट्यूशन फीस लेने के लिए निजी स्कूल संचालकों को छूट प्रदान की गई थी परंतु इन निजी स्कूल संचालकों के द्वारा मनमाने रूप से पूरे वर्ष की फीस पालको को जमा करने का दबाव बनाया जा रहा था जिससे चलते बहुत से पालक परेशान होकर पालक छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ के नेतृत्व में जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगाँव से मिले थे और वर्तमान की समस्याओ अवगत भी कराया था , वही जिला शिक्षा अधिकारी ने निजी स्कूलों के द्वारा पिछले वर्ष की अधिसूचित फीस जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय राजनांदगाँव में प्रस्तुत नही करते और ट्यूसन फीस को परिभाषित नही करते तब तक किसी भी पालक को फीस पटाने की आवश्यकता नही है यह मौखिक रूप से कहा था जिसका प्रमाणिक विडियो पालको के पास है ,वही शिक्षा अधिकारी द्वारा औपचारिक तरीके से निजी स्कूलों के विरुद्ध  अनुशासनात्मक  कार्यवाही किए जाने हेतु आदेश निकाला था लेकिन किसी भी निजी स्कूल इनके आदेश का पालन नहीं किया , निजी स्कूल और लगतार मनमानी करते रहे तो जिले के समस्त पालक एकजुट होकर छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ के बैनर तले एक दिवसीय सांकेतिक भूख हड़ताल भी की थी वहाँ समर्थन देने वर्त्तमान महापौर भी पहुची थी वही निजी स्कूलों की बिंदुओं पर विभागीय जाँच की मांग की गयी थी जिस पर जिला शिक्षा ने  7 दिवस के अंदर कार्यवाही का आश्वासन दिया था परंतु जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आज पर्यन्त विभागीय जाँच प्रारंभ भी नही करवाई गई नही आज तक पूरे जिले में किसी निजी स्कूलों की जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा अब तक किसी भी निजी स्कूल की मान्यता समाप्ति की कार्यवाही भी अभी तक नही की , इससे यह प्रतीत होता है कि जिला शिक्षा अधिकारी निजी स्कूलों के संचालकों के साथ सांठगांठ कर हमारे भारत देश के संविधान का अक्षरस ह पालन नहीं कर रहे हैं और देश के आने वाले भविष्य उन छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने में लगे हैं  सूत्रों से यह जानकारी भी प्राप्त हुई है जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगाँव निजी स्कूल संचालकों के साथ षड्यंत्र कर शिक्षा व्यवस्था को महंगा करने में लगे हुवे है ताकि देश का बच्चा शिक्षा प्राप्त न कर सके और अनपढ़ रह जावे इसलिये आज छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ ने देश के राष्ट्रपति और छत्तीसगढ़ के राज्यपाल से शिक्षा को महंगा करने और देश को अशिक्षित रखने के षड़यंत्र में शामिल संबंधित विभाग के अधिकारी और निजी स्कूलों के संचालको के ऊपर आई०पी०सी० की धारा 124 ए० के तहत अपराध दर्ज करवाने शिकायत की  जिससे कि आने वाले समय में इस तरह का कृत्य कोई न दोहरा सके ।


कोरोनासुर’ का वध करती मां दुर्गा की इस प्रतिमा ने लोगों को दी उम्मीद!

कोरोनासुर’ का वध करती मां दुर्गा की इस प्रतिमा ने लोगों को दी उम्मीद!

24-Oct-2020

Report:Abdul Kalam

Place:Bengal

कोरोना वायरस महामारी के बीच देश दुर्गा पूजा सेलिब्रेट कर रहा है। भले ही, पंडालों में भीड़ कम हो। लेकिन त्योहार को लेकर लोगों में उत्साह कम नहीं है। सोशल मीडिया पर दुर्गा प्रतिमाओं की बहुत सी तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें कोरोना काल की छाप है। फेसबुक यूजर Nittya Paul ने पश्चिम बंगाल के एक पंडाल से ऐसी ही शानदार प्रतिमाओं की तस्वीरें शेयर की हैं। इन फोटोज में मां दुर्गा को डॉक्टर और महिषासुर को ‘कोरोनासुर’ के रूप में दिखाया गया है

यह तस्वीरें यूजर ने 18 अक्टूबर को शेयर कीं। उन्होंने कैप्शन में बताया, ‘कोरोना से मां दुर्गा बचाएं। यह प्रतिमाएं सिलीगुड़ी में जितेन पॉल नाम के शिल्पी ने बनाई है।’ उनकी इस पोस्ट को आर्टिकल लिखे जाने तक 9 हजार से ज्यादा लाइक्स और 73 हजार शेयर मिल चुके हैं।

शशि थरूर ने भी मां दुर्गा की इस फोटो को शेयर किया और लिखा, ‘कोविड-19 थीम पर कोलकाता में मां दुर्गा की बेहतरीन प्रतिमा बनाई गई है। इस रचने वाले अज्ञात कलाकारों को प्रणाम!’ उनके इस ट्वीट को खबर लिखे जाने तक 15 हजार से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं। फोटो में देखा जा सकता है कि मां दुर्गा की प्रतिमा को डॉक्टर का सफेद कोर्ट पहनाया गया है। उनके गले में स्टेथोस्कोप (आला) लटका है। साथ ही, उन्हें त्रिशूल की जगह विशाल इंजेक्शन से ‘कोरोनासुर’का वध करता दिखाया गया है।


पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक समूचे महानगर कोलकाता ने देखी अबतक की सबसे सूनी सप्तमी

पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक समूचे महानगर कोलकाता ने देखी अबतक की सबसे सूनी सप्तमी

24-Oct-2020

Report:Abdul Kalam

Place:Bengal

कोलकाता के लोगों ने इससे सूनी सप्तमी शायद ही अपने जीवनकाल में अबतक देखी हो। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक समूचा कोलकाता इस दिन सुबह से रात तक वीरान नजर आया। लग ही नहीं रहा था कि बंगाल के सबसे बड़े उत्सव दुर्गापूजा का आयोजन हो रहा है। सड़कें आलोक सज्जा से जगमग रही हैं लेकिन उन्हें निहारने के लिए लोग नहीं हैं। पूजा पंडाल सज-धजकर तैयार हैं लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के कारण उनमें प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। दुर्गा प्रतिमाओं के बाहर से दर्शन करने पड़ रहे हैं। कुछ पंडाल तो ऐसे बने हैं कि देवी के दर्शन तक नहीं हो पा रहे। 

संतोष मित्र स्क्वायर, मोहम्मद अली पार्क, कॉलेज स्क्वायर, जगत मुखर्जी पार्क, एकडालिया एवरग्रीन, अहिरीटोला सार्वजनीन, सुरुचि संघ, त्रिधारा सम्मिलनी, काशी  बोस लेन, देशप्रिय पार्क, भवानीपुर 75 पल्ली,  चेतला अग्रणी, बोसपुकुर समेत सभी बड़े पूजा आयोजकों के पंडालों में वीरानी छाई हुई है।

पूजा आयोजकों को इस बात का सबसे ज्यादा अफसोस है कि अच्छे थीम पर पूजा पंडाल व प्रतिमा का निर्माण करने पर भी लोग उन्हें देख नहीं पा रहे हैं क्योंकि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार पूजा पंडालों में दर्शनार्थियों को प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।

अंदाजा लग रहा-अष्टमी और नवमी को भी भीड़ नहीं हाेगी 

अष्टमी और नवमी को भी भीड़ नहीं होने वाली है।

खाली पड़ा चित्तरंजन एवेन्यू, घूमने-फिरने के मूड में नहीं

खाली पड़ा चित्तरंजन एवेन्यू इस बात को बयां करने के लिए काफी है कि लोग इस बार पूजा घूमने-फिरने के मूड में नहीं है। ज्यादातर लोग पूजा पंडालों और प्रतिमाओं के आनलाइन दर्शन कर रहे हैं। हर साल पूजा के दिनों में बेहाल रहने वाले ट्रैफिक पुलिसकर्मी इन दिनों आराम फरमाते नजर आ रहे हैं।


राजग गठबंधन नहीं ठगबंधन है : भूपेश बघेल

राजग गठबंधन नहीं ठगबंधन है : भूपेश बघेल

24-Oct-2020

-  शराबबंदी कानून की समीक्षा गलत नहीं
राज्य ब्यूरो, पटना :  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने राजग गठबंधन को सबसे बड़ा ठगबंधन बताया है। प्रधानमंत्री की चुनावी सभा के बाद बिहार पहुंचे बघेल ने कहा कि कहा पीएम मोदी कल बिहार आए किसानों के लेकर तीन नए कानून पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है यह किसान विरोधी और आम उपभोगता विरोधी बिल है। लेकिन मोदी इसे किसान हितैषी बता कर लोगो को ठग रहे ही। असल में यह कानून उनके कुछ खास मित्र पूंजीपतियों के लिए है। 
बघेल ने कहा कि नए कानून में सरकार तभी करवाई करेगी जब देश मे युध्द की स्थिति हो अकाल हो या 100 प्रतिशत दाम बढ़ जाए। कानून बने 2 महीने भी नही हुए उसका असर दिखने लगा । प्याज की कीमत 70 से 83 रुपया हो गयी ही जबकि ना तो सूखा है और बारिश भी अच्छी हुई है। प्याज पर सरकार प्राइस सीमित करने की बात इस किये कह रही क्यों कि कई राज्यो चुनाव है। दिखावे के लिए कार्रवाई की जा रही ही। सरकार अपने ही कानून उलंघन कर रही है। 
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी की सरकार पुंजिपतियो की सरकार है। वे कांग्रेस मुक्त देश की बात करते है लेकिन उनके असल एजेंडा कांग्रेस मुक्त नही बल्कि कांग्रेस ने जो बनाया उसे मुक्त कर देना है। रेलवे हवाई जहाज को बेच रहे हैं ।अब इस सरकार की निगाह किसानों की जमीन पर है जो 1970 में इंदिरा गांधी ने गरीवों दी थी। ये कॉन्टेक्ट फार्मिंग के जरिये जमीन हथियाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी में चिराग के बारे में एक शब्द क्यों नही कहा। क्या अभी तक चिराग एनडीए  में हैं । बीजेपी नीतीश कुमार को ठग रही है । एक सवाल पर बघेल ने कहा कि शराब बंदी में समीक्षा की बात गलत नही। शराब बंदी है तो देखना होगा शराब की तस्करी हो रही है कि नही। शराब घर घर तक तो पहुँच रही है। यदि यह सब हो रहा है तो इसे रोकने के लिए समीक्षा करना ही चाहिए ।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि 
कानून है लेकिन सरकार की मंसा है अमीरों को शराब पिलाओ गरीबो को जेल में बंद करो। शराब को लेकर कांग्रेस पार्टी ऐसा कानून बनाएगी जिससे अमीरों को भी शराब नही मिलेगी। शराब में पैरलर इकोनॉमी खड़ी  हो गयी है उसे समाप्त करेंगे। शराब बंदी कानून लागू रहेगा 
मोदी के दाएं हाथ मे चिराग है जिससे वे जदयू का घर जलाना चाहते हैं और दूसरे हाथ मे ओबैसी है जो पेट्रोल बम लिए खड़े है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेडा, राजेश राठौड़ व आनन्द माधव भी मौजूद रहे।

 


कोरोना - देश में 90  प्रतिशत की ओर बढ़ रही रिकवरी दर, करीब 69 लाख लोग हुए  स्वस्थ !

कोरोना - देश में 90 प्रतिशत की ओर बढ़ रही रिकवरी दर, करीब 69 लाख लोग हुए स्वस्थ !

23-Oct-2020

भारत में कोरोना वायरस की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होता नजर आ रहा है। कोरोना के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में रिकवरी दर अब 90 फीसदी की ओर तेजी से बढ़ रही है। कोरोना के नए मामलों में गिरावट के साथ रिकवरी दर के तेज होने से देश में कोरोना के हालत में सुधार हो रहा है। देश में अब तक करीब 69 लाख लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में बीते 24 घंटों में कोरोना के नए मामले कम हुए है। कोरोना के 55,838 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान देश में 702 लोगों की मौत भी हुई है। इसको मिलाकर कोरोना का कुल आंकड़ा 77 लाख के पार चला गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक 77 लाख 6 हजार 946 कोरोना के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 68 लाख 74 हजार 518 लोग इससे ठीक हो चुके हैं। देश में कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 7 लाख 15 हजार 812 है। वहीं भारत में कोरोना के कारण 1 लाख 16 हजार 616 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

रिकवरी दर में तेजी से वृद्धि

देश में कोरोना की रिकवरी दर में तेजी से वृद्धि हो रही है। देश में बीते 24 घंटों में कोरोना से 79,415 लोग ठीक हुए हैं। इसको मिलाकर कोरोना की रिकवरी दर 89.20% हो गई है। इसके साथ ही देश में सक्रिय मामलों में कमी आ रही है। बीते 24 घंटों में 24,278 सक्रिय मामले कम हुए हैं। इसको मिलाकर फिलहाल कोरोना का एक्टिव केस 9.29% है। भारत की कोरोना मृत्यु दर फिलहाल 1.51% है।

करीब 10 कोरोना टेस्ट हो चुके

देश में अब तक साढ़े नौ करोड़ से ज्यादा सैंपलों की कोरोना जांच की जा चुकी है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research, ICMR) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में मंगलवार तक 9,86,70,363 सैंपलों की COVID-19 हो चुकी है, जिनमें से 14,69,984 टेस्ट कल किए गए हैं।


हैदराबाद बाढ़:  के  डर  के साए में जी रहे  है पीड़ित !

हैदराबाद बाढ़: के डर के साए में जी रहे है पीड़ित !

22-Oct-2020

हैदराबाद: उस्मान सागर का जल स्तर लगभग भारी बारिश के कारण अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच गया है, डर ने एक बार फिर उन लोगों को जकड़ लिया है जिनके घरों में पिछले हफ्ते बाढ़ आ गई थी और वे बर्बाद हो गए थे। मूसलाधार बारिश के कारण, हिमायत सागर के सभी 13 फाटकों को पिछले दिनों हटा दिया गया था, जिसके कारण मुसी नदी से पानी घुसने के बाद घरों को नष्ट कर दिया गया था और सचमुच उनके घर जलमग्न हो गए थे। मंगलवार को, हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वॉटर एंड सीवरेज बोर्ड (HMWSSB) के कर्मियों ने लोगों को सार्वजनिक घोषणाओं के माध्यम से अपने घर छोड़ने या खुद को सुरक्षित करने के लिए कहना शुरू किया। पिछले हफ्ते भी, चदरघाट पुल पर मोजो नगर जैसे क्षेत्रों में निवासियों को हिमायत सागर के फाटकों को झील से पूरी क्षमता से बाहर निकालने के कुछ घंटे पहले सूचित किया गया था। “हमें देखना होगा कि अगर पानी फिर से आ जाए तो क्या करना है। हम और कहाँ जाएँगे ?, ”मोहम्मद ने पूछा। मूस नगर का निवासी इमरान, जो निचले चदरघाट पुल पर है, जो मलकपेट मुख्य सड़क से जुड़ता है। लगभग आधे या अधिक, क्षेत्र के निवासियों ने मूसी नदी के पानी के रूप में अपना सामान खो दिया, जो चदरघाट पुल के पार कट जाता है, उनके घरों में बह गया।

हैदराबाद बाढ़: डर के साए में जी रहे पीड़ित  !

तब से अब तक की स्थिति खराब है, क्योंकि रुक-रुक कर होने वाली बारिश केवल वहां रहने वाले लोगों के लिए और भी बदतर बनाती है, न कि संगीत नदी के नदी तल पर। हिमायत सागर और उस्मान सागर बांध 1920 और 1913 में, हैदराबाद के अंतिम निजाम मीर उस्मान अली खान के शासनकाल के दौरान बनाए गए थे। दोनों झीलें 1908 की विनाशकारी बाढ़ के बाद बनी थीं, जब भारी बारिश के कारण बाढ़ के कारण अनुमानित 15,000 लोगों की मौत हो गई थी। पिछले हफ्ते, 13 अक्टूबर को दिन भर की भारी बारिश के कारण हिमायत सागर के सभी 13 फाटकों को हटा दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप नदी में भारी बाढ़ आ गई, जिसने नदी क्षेत्रों पर रहने वाले घरों पर कहर बरपा दिया।

20 अक्टूबर को HMWSSB की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उस्मान सागर झील में जल स्तर 1786 फीट को छू गया, जबकि इसके पूर्ण टैंक स्तर (FTL) 1790 शुल्क के विरुद्ध था। यदि बारिश में फिर से भारी बारिश होती है, तो जल स्तर इसके एफटीएल को छूने की उम्मीद है। “दोनों झीलें बापू घाट पर मिलती हैं। यदि फाटक खोल दिया जाता है, तो मुसी नदी भी साफ हो जाएगी। एचएमडब्ल्यूएसएसबी के एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि पानी छोड़ने से अब बाढ़ नहीं आएगी।

बारिश से तबाह, मोआसा नगर के निवासी अपने दम पर चले गए
हैदराबाद बाढ़: डर के साए में जी रहे पीड़ित  ! 1

कपड़े खरीदना हम में से ज्यादातर लोगों के लिए एक साधारण काम की तरह लग सकता है, लेकिन कई अन्य लोगों के लिए, यह ऐसा कुछ है जो वे महीनों तक बिट्स और टुकड़ों में पैसे बचाने के बाद ही कर सकते हैं। इसी तरह से बाढ़ पीड़ितों के लिए जीवन था, जो निम्न मध्यम वर्गीय और गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) चारेघाट के पास मोजो नगर में रहते थे।

सियासत डॉट कॉम से साभार 


पेंड्रा मरवाही उप चुनाव में  जोगी परिवार वर्चस्व की लडाई लड़ रहा है  ?

पेंड्रा मरवाही उप चुनाव में जोगी परिवार वर्चस्व की लडाई लड़ रहा है ?

21-Oct-2020

खुलासा पोस्ट न्यूज़ नेटवर्क 

मरवाही विधानसभा का चुनाव अपने  उरुज पर है ऐसे समय में जोगी परिवार के जाती प्रमाण पत्र के आधार पर उनका नामांकन ख़ारिज होना अब तक एक तरफा चुनाव परिणाम की ओर इशारा कर रहा है । वही ये उप चुनाव अलग तरह के राजनैतिक बदलाव के संकेत भी दे रहा है!
वर्षों से मरवाही क्षेत्र अजीत जोगी के वर्चस्व  और जनाधार का  क्षेत्र  जाना जाता रहा है, पिछली भाजपा की सरकार ने ही जोगी के आदिवासी होने को न्यायालय मे चैलेंज किया था और उनके जाती प्रमाण पत्र को फ़र्जी बताया था, फिर राजनैतिक ,परिस्थितियाँ बदली और स्व जोगी जी ने अपनी राजनिति तत्कालीन  रमन सरकार से अपनी ट्विनिंग बैठा लिया था, सो जाती का मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, अब मरवाही क्षेत्र में उप चुनाव होने जा रहे है ,ऐसे समय जोगी परिवार का आदिवासी का जाती प्रमाण पत्र का जिक्र फिर बाहर निकल गया है। इसमें एक बात यहाँ कहना जरूरी है की आम आदमी अपना जाती प्रमाण पत्र आसानी से नही बनवा पाता लेकिन ये राजनिति करने वाले नेताओ के लिए सब आसान हो जाता हैं, जोगी परिवार आरक्षित सीट से भी चुनाव लड़ते रहे , और समान्य सीट से भी !
याने इनके लिए  इनकी पार्टी में कोई और चुनाव लड़ने योगय नहीं  है  !इन विपरीत परिस्थितियाँ मे किसी और को भी तो मौका दिया जा सकता था लेकिन इन्होंने ये मौका भी गवा दिया है। और वही अब मरवाही उपचुनाव से पहले जाति प्रमाण-पत्र के विवाद ने सियासी रंग ले लिया है। जबकि ये बेहतर जानते थे की ये स्थिती आने वाली है!
 अमित जोगी ने घोषणा की है।  अब हम न्याय यात्रा लेके जन जन तक जायेंगे। मरवाही के हर गांव मे हर गली मे जनता कांग्रेस की न्याय यात्रा निकलेगी जो वोट के लिए नहीं पर न्याय के लिए होगी। जबकि जोगी कांग्रेस को कोई भी उम्मीदवार इस उप चुनाव में उतरना था ! तब स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता था 
 अमित जोगी कहते है  की  मरवाही अजित जोगी और उनके परिवार के साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ न्याय जरूर करेगा  अगर न्याय ही चाहिए था तो उनकी पार्टी चुनाव में भाग लेना था ,वे कहते है की हमारे साथ  अन्याय हुआ है, अब मरवाही की जनता को  बदला लेना है।  याने सीधे सीधे भाजपा को लाभ पहुंचना है 
इस बारे में  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भी कथन है कि भाजपा ने नकली आदिवासी के मुद्दे पर चुनाव लड़ा और सत्ता में आए। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जाति मामले में पूरे 15 साल लगा दिए और उसी के दम पर सत्ता हासिल की। जोगी की जाति के संबंध में उनकी ही शिकायत थी। सभी जानते हैं कि किस प्रकार से उनकी जुगलबंदी रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो वो 15 साल में नहीं कर पाए हमने 18 महीने में कर दिया। मुख्यमंत्री भूपेश ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के नाम पर बहुत से लोग फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर नौकरी करते हैं। शिकायत होती है तो स्टे लेकर सालों तक फायदा उठाते रहते हैं। अब फैसला आया तो भाजपा को इसका स्वागत करना चाहिए। वैसे इस चुनाव मे अमित जोगी की साख दांव पर लगी  हुई है। उनके कंधे पर अपने पिता के विरासत को बचाने का जिम्मा है। इस बात से वह भली भांति वाकिफ हैं।  जोगी परिवार की इस वर्चस्व की लडाई को नामांकन रद्द होने तक सीमित कर नही देखा जा सकता इसका लाभ किसे होगा यह महत्व पूर्ण है। इस स्थिति मे
अमित जोगी के राजनीतिक भविष्य पर प्रशन चिन्ह लगा हुआ है। अब देखना ये है की आगे क्या होने वाला हैं अमित जोगी क्या भाजपा के साथ देंगे ये उप चुनाव उनका राजनिति भविष्य तय करेगा। इसलिए अमित जोगी और पार्टी के वरिष्ठ नेता इस चुनाव को काफी गंभीरता से ले रहे हैं , ऐसी स्थिति में क्या अमित जोगी मरवाही में भावनात्मक कार्ड खेलेंगे ?  मरवाही क्षेत्र में जकांछ के पास स्थानीय कार्यकर्ता अधिक हैं, और आदिवासी समाज के मुख्य  लोगों को अपने पाले मे रखे हुए  है जिनकी अपने समाज में अच्छी पकड़ है। ये लोग जोगी जी के पुराने प्रचारक है जो कांग्रेस को भीतरी भागो में अच्छा खासा नुकसान पहुँचा सकते है,क्योंकि जिला बनाने की बाते शहरी झेत्र तक सीमित रह सकती है, कांग्रेस के खिलाफ इनका मौखिक प्रचार अभियान करने की तैयारी इनके द्वारा किया जा सकता हैं । जोगी के निधन और जाती प्रमाण पत्र को मुद्दा बना कर सहानुभूति लेने की पूरी कोशिश की जायेगी क्योंकि जोगी जी के देहांत को ज्यादा समय नहीं हुए हैं। क्षेत्र की जनता उनको आसानी से भूला नहीं पाई है। कांग्रेस विकास कार्य और जिला बनाने के दम पर तो भाजपा कांग्रेस सरकार की विफलता को लेकर जनता के सामने जा रही है लेकिन अमित जोगी अगर भाजपा के साथ चले जाते है और जोगी कांग्रेस इस चुनाव को भावनात्मक रूप से प्रचारित करते है तो ये उप चुनाव के परिणाम चौकाने वाले हो सकते हैं।


 


सभाएँ तेजस्वी की आकंलन नीतीश का पेशानी पसीनों पसीन

सभाएँ तेजस्वी की आकंलन नीतीश का पेशानी पसीनों पसीन

21-Oct-2020

पटना से तौसीफ़ क़ुरैशी

bihar election 2020 rjd tejashwi yadav said if every man arranges 10 votes  then after the 10 october he will give 10 lakh jobs | Bihar Election 2020:  हर आदमी करे 10
पटना।लोकतंत्र में चुनाव भी ऐसा मेला या उत्सव होता है कि इस मेले या उत्सव में शामिल क्या नेता क्या अभिनेता जनता जनार्दन के दरबार में हाज़िरी लगाने को बेताब रहता है और जनता भी ख़ूब आनन्द लेती है लेकिन अगर जनता भावनाओं में बहकर वोट करती है तो फिर रोती भी जनता ही है पूरे पाँच साल और नेता अभिनेता मौज लेते है।बिहार चुनाव के बाद क्या परिणाम निकलकर सामने आएँगे यह कहना तो अभी जल्द बाज़ी होंगी क्योंकि बिहार चुनाव की मतगणना दस नवंबर को की जाएँगी ज़ाहिर सी बात है यह तभी साफ़ हो पाएगा कि पूरे चुनाव के बाद यह परिणाम आएँ है।हाँ इतना ज़रूर है कि दस नवंबर तक क़यासों का दौर चलता रहेगा जो चल भी रहा है।हालाँकि पटना-सीएसडीएस-लोकनीति का ओपिनियन पोल आया है जैसा हर चुनाव से पूर्व आते है आरोप है कि यह सब कुछ ख़ास दलों के हक़ में माहौल बनाना का मक़सद होता है उसी के चलते ओपिनियन पोल होते हैं उसी के अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को 133-143 सीटें मिलने का अनुमान है बताया जा रहा है जबकि राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन को 88-98 सीटें मिलना दिखाया गया हैं।चिराग पासवान की लोक जन शक्ति पार्टी (एलजेपी) को महज 2-6 सीटों पर विजयी होना दिखाया है।अन्य दलों को ओपिनियन पोल में 6-10 सीटें दी गई हैं।जबकि ज़मीनी हक़ीक़त कुछ ओर ही इसारा कर रही है उसको देखकर ओपिनियन पोल बेमानी लगता है।इसी को ध्यान में रखते हुए हमने भी बिहार के चुनाव को लेकर मंथन कर निष्कर्ष निकालने की कोशिश की आम लोगों से बात कर यह जानने की कोशिश की कि आखिर बिहार चुनाव किस तरफ़ जा रहा क्या उसी रास्ते जा रहे जिस रास्ते 2014 से चुनावी परिणाम आ रहे है या बिहार उस रास्ते से अलग रास्ता चुन रहा हैं जिसके बाद वह पूरे देश को यह संदेश देगा कि 2014 वाला रास्ता देश के लिए ठीक नही है और ना ही जनता के लिए ठीक है।हालाँकि बिहार चुनाव 2014 के आमचुनाव में वही खड़ा था जहाँ अधिकांश देश खड़ा था लेकिन उसके अगले साल यानी 2015 के विधानसभा चुनाव में वह अलग संदेश दे रहा था उसी बिहार ने जदयू ,राजद व कांग्रेस गठबंधन को सरकार बनाने का जनादेश दिया था लेकिन बीच में नीतीश कुमार ने अपनी आदत के मुताबिक़ पलटी मारते हुए मोदी की भाजपा के साथ चले गए थे जनता ने जो जनादेश मोदी की भाजपा के ख़िलाफ़ दिया था वह ख़त्म हो गया था और सरकार भाजपा के सहयोग वाली बन गई थी।वही उसके बाद उसने 2019 के आमचुनाव में फिर वही परिणाम दिए जैसे उसने 2014 में दिए थे 39 लोकसभा सीट एनडीए को दे दी थी।ख़ैर इस बार विधानसभा चुनाव है पहले चरण का चुनाव 3 नवंबर को होगा।अब सवाल उठता है कि क्या बिहार से मोदी मय होने वाले परिणाम आने वाले है या पंद्रह साल के स्वयंभू सुशासन बाबू नीतीश कुमार और केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के जनविरोधी कार्यों का भी असर होगा जैसे लॉकडाउन के बाद सबसे ज़्यादा प्रभावित बिहार के लोग थे क्योंकि वह दो जून की रोटी के लिए देश के विभिन्न राज्यों में रहता है अचानक लगाए गए लॉकडाउन से वही राज्य और उसके वासी सबसे ज़्यादा परेशान हुए थे खाने पीने के भी लाले पड़ जाने के बाद वह अपने घरों की ओर पैदल ही निकल पड़े थे यह पूरे देश ने देखा कोई सवारी न होने की वजह से कैसे सड़कें भर-भर कर चल रही थी भूखे प्यासे कोई उनकी सूद लेने वाला नही था अगर देश के लोग सामने न आते उनकी मदद को तो हालात और भयावह होते इसके बाद भी बहुत लोगों ने लॉकडाउन के चलते भूखों प्यासों अपनी जान गँवा दी।पूरे लॉकडाउन सरकारों का रवैया सकारात्मक नही था प्रवासी मज़दूरों को छोड़ दिया था उनके हाल पर मरने के लिए सिर्फ़ बयानबाज़ी चलती रही सरकारों के द्वारा जो कुछ करना चाहिए था वह कुछ नही कर पायीं चाहे वह केन्द्र की मोदी सरकार हो या राज्यों की सरकारें सब लीपा पोती करती रही यही सच है कहने को कुछ भी कह लिया जाए।क्योंकि वो मंज़र आज भी अगर याद आ जाता है तो संवेदनशील व्यक्ति के शरीर में कंपन आ जाती है यह बात अपनी जगह है।क्या लॉकडाउन का दर्द इस विधानसभा चुनाव में बाहर निकलकर आएगा ? रही बात बेरोज़गारी की ,महँगाई की , गिरती जीडीपी की , शिक्षा की , सड़कों की , विकास की ,विदेश नीति की केन्द्र की सरकार हर विषय पर विपक्ष फ़ेल क़रार देता है जो किसी हद तक सही भी है यह अपनी जगह है।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पूरा ज़ोर इस बात पर है कि बड़े बुजुर्ग नौजवानों को इस बात को समझाएँ कि पंद्रह साल पहले हमने कैसा बिहार लिया था और आज कैसा है इस बात पर वह इस लिए ज़ोर दे रहे है क्योंकि राष्ट्रीय जनता दल राजद के नेता और मुख्यमंत्री पद के दावेदार पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपनी हर सभा में यही एलान कर रहे है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सबसे पहला क़लम राज्य के दस लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी दिलाने पर चलाएँगे यह बात राज्य के नौजवानों को उनकी तरफ़ आकर्षित कर रही है जिसे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाँपकर बुजुर्गों से यह अपील कर रहे है कि वह नौजवानों को समझाएँ कि वह ऐसा ना करे अब वह कौनसा बुज़ुर्ग होगा जो यह नहीं चाहेगा कि उसका लल्ला सरकारी नौकरी पर ना लगे।नीतीश कुमार के लिए यह चुनाव शुरूआती दौर में भारी पड़ता दिख रहा है।हालाँकि अभी चुनाव में धार्मिक तड़का भी लगना बाक़ी है क्योंकि अभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह , केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी, मोदी की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित क्षेत्रीय नेताओं की सभाएँ होनी बाक़ी है इनके प्रचार में उतरने के बाद क्या कुछ बदलाव होगा यह अभी देखना बाक़ी है।विपक्ष की ओर से अभी फ़िलहाल राष्ट्रीय जनता दल के नेता एवं मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव ही सत्ता पक्ष से लोहा लेते नज़र आ रहे है और सत्ता पक्ष पर भारी दिख रहे है।विपक्ष की ओर से कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँध

 


साम्प्रदायिकता पूरे देश के लिए हानिकारक है:मौलाना अरशद मदनी

साम्प्रदायिकता पूरे देश के लिए हानिकारक है:मौलाना अरशद मदनी

20-Oct-2020

तौसीफ कुरैशी 
 
नई दिल्ली।जमीअत उलमा-ए- हिन्द के अध्यक्ष एवं दारूल उलूम देवबन्द के नवनियुक्त सदर मुदर्रिस हज़रत मौलाना सैयद अरशद मदनी ने आज मीडिया को सम्बोधित करते हुए कहा के साम्प्रदायिकता न केवल मुसलमानों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए हानिकारक है।मीडिया का सवाल कि "देश किस तरफ जा रहा है, जो लोग भय और आतंक के वातावरण में भी सच्ची बात कहने का हौंसला रखते हैं उन्हें विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित किया जा रहा है, इस संबंध में आपकी क्या राय है ? इसका सवाल का जवाब देते हुए कहा कि निसंदेह देश खराब दौर से गुजर रहा है,मैं तो कहूँगा कि इस तरह के हालात देश के विभाजन के समय भी पैदा नहीं हुए थे,उस वक्त मारकाट और क़त्ल का वातावरण ज़रूर था, लेकिन हमारा समाज साम्प्रदायिकता के आधार पर विभाजित नहीं हुआ था।जमीअत उलमा-ए-हिन्द देश की आजादी के बाद से ही इन खतरों को महसूस कर रही है और उसने एक बार नहीं बल्कि हर अवसर पर और हर स्तर पर बार-बार आगाह किया कि सांप्रदायिकता के डंक को खत्म करो,अगर इसे खत्म नहीं किया गया तो देश उस स्थान पर पहुंच जाएगा जहाँ चाह कर भी संभालना मुश्किल होगा।मुझे चिंता इस बात की है कि देश की आजादी के बाद जो लोग सत्ता में आए उन्हें भी ऐसे हालात के पैदा होने का एहसास था, इसके बावजूद उन्होंने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया,अगर ध्यान दिया होता तो आज हालात कुछ और होते।देश के लिए कांग्रेस की सेवाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।हमें अफसोस सिर्फ इस बात का है कि आज जो चीजें हो रही हैं, यह तो हम पहले से जानते थे। आज एक खास सोच को देश पर थोपने की कोशिश हो रही है।लोकतंत्र में तानाशाही की मिलावट से आगे चलकर किस कदर तबाही हो सकती है, इस बारे में सोचकर ही डर लगता है, शहर से गांव तक साम्प्रदायिक सद्भाव को तबाह करने की साजिशें हो रही हैं, हर मसले को धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाने लगा है, दुख यह है कि सत्ता में बैठे लोग हर मसले को एक धार्मिक चश्मे से देख रहे हैं, इस वजह से नए-नए मसले जन्म ले रहे हैं,अगर वह खुली मानसिकता और सकारात्मक सोच का प्रमाण देते और खुद को कट्टरता के खोल से बाहर निकाल लेते तो आज जो देश में हो रहा है वह कभी नहीं होता,एक और प्रश्न "आज जो कुछ हो रहा है उसके पीछे क्या कोई खास नजरिया काम कर रहा है या मोदी की भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों का हाथ है या कोई और दूसरी वजह ? का जवाब देते हुए कहा कि आपने अच्छा सवाल किया है,पहली नज़र में तो यही कहा जाता है कि सब कुछ अनजाने में हो रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है, गाय की रक्षा का मामला हो या देश प्रेम का, इन सब के पीछे एक नियोजित षड्यंत्र के सिद्धांत काम कर रहे हैं, सब जानते हैं कि इसके पीछे एक ऐसे संगठन का हाथ है जो लंबे समय से वैचारिक युद्ध लड़ रही है, यह वैचारिक युद्ध हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए है,यह तो आरएसएस का एक विजन है और इस मिशन के तहत देश को चलाया जा रहा है,अगर आरएसएस नहीं चाहता तो क्या देश का नक्शा ऐसा हो सकता था, जो आज दुनियाँ के सामने है।आरएसएस की एक ऐसी पॉलिसी है, जिसे हम लोग पहले से जानते थे और यही दृष्टिकोण गोलवलकर और सावरकर की लेखनी में मौजूद है और अब यह किताब उर्दू में भी आ गई है,इससे यह संकेत मिल रहा था कि अगर किसी वक्त सत्ता साम्प्रदायिक शक्तियों के हाथों में चली गई तो मुल्क का अंजाम क्या होगा, इससे मुसलमान और बहुसंख्यक ही नहीं बल्कि भारत का नुकसान होगा।यहाँ हमारा मकसद किसी ख़ास पार्टी को निशाना बनाने का हरगिज़ नहीं है बल्कि हमारे नजदीक देश का संविधान आपसी सद्भाव और शांति सब से अहम है, जहाँ कहीं भी देश के खिलाफ कोई बात नजर आती है, मैं उसके खिलाफ आवाज बुलंद करता हूं,क्या संविधान में हर नागरिक को बराबर के हक नहीं दिए गए हैं ? क्या संविधान में यह उल्लेख नहीं है कि किसी भी नागरिक के साथ जात समुदाय बिरादरी रंग नस्ल और मजहब की बुनियाद पर कोई भेदभाव नहीं होगा ? यह सवाल में इसलिए कर रहा हूँ कि इस वक्त जो लोग हुकूमत में हैं वह भी संविधान की बात करते हैं। महात्मा गाँधी की अहिंसा नीति का प्रचार कर रहे हैं, फिर धर्म की बुनियाद पर नागरिकों के दरमियान भेदभाव क्यों बढ़ता जा रहा है ? देश में धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है ? एक तरफ "सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास" का नारा है तो दूसरी तरफ सत्ता में बैठे लोग अपने अमर्यादित बयानों से माहौल को खराब करने की कोशिश करते हैं।
इस शांति के वातावरण में डर का माहौल पैदा कर दिया गया है, हमारे नेताओं को यह समझना होगा कि सरकारें डर और खौफ से नहीं चला करतीं, बल्कि मोहब्बत और न्याय से चलती हैं, हमारा देश पहले भी जन्नत था आज भी है, सिर्फ इससे नफरत की सियासत को निकाल देने की जरूरत है।
प्रश्न: सच्चाई तो यह भी है कि मुसलमानों के साथ दूसरी सेक्युलर पार्टियों ने भी इंसाफ नहीं किया,आजादी के बाद लंबे समय तक कांग्रेस सत्ता में रही लेकिन कुछ करने के बजाय उसने मुसलमानों को उलझा कर रखा, इस पर क्या कहेंगे ?
उत्तर: आपका सवाल बिल्कुल सही है, लेकिन क्या कोई शख्स यह कह सकता है कि इसकी पॉलिसी वही थी जो आज की सरकार की है, सत्ताधारी दल और दूसरी पार्टियों में जो फर्क नजर आता है उसको आप भी महसूस कर रहे होंगे, हम कांग्रेस के समय भी संतुष्ट नहीं रहे, आप उस वक्त के अखबारों को उठाकर देखें जहाँ कहीं भी कोई गलत बात देखी हम उनसे लड़े और उन्हें रोकने का प्रयास किया। कभी हम उन्हें पीछे धकेलते थे कभी वह हमें पीछे धकेलते थे, मगर अब स्थिति यह है कि हम शिकायत भी नहीं कर सकते, आज हम ही नहीं न्याय में विश्वास रखने वाले दूसरे लोगों के साथ भी यही मसला है, हमारे प्रदर्शन और शिकायत को एक नया अर्थ और नया रूप दे दिया जाता है, इसे देश विरोधी गतिविधियों से जोड़ा जाने लगता है, यह बात आपके जेहन में अवश्य होगी, हालांकि आपने उस जमाने को नहीं देखा होगा लेकिन जानते होंगे, पढ़ा होगा, जब देश आज़ाद हो रहा था उस वक्त देश के अंदर मुसल

 


कोलकाता की पांच मंजिला इमारत में लगी आग, 12 साल के बच्चे सहित 2 की मौत

कोलकाता की पांच मंजिला इमारत में लगी आग, 12 साल के बच्चे सहित 2 की मौत

17-Oct-2020

Report:Abdul Kalam

Place:Bengal

इमारत की पहली मंजिल पर आग लग गई, जो ऊपरी मंजिल की ओर भी फैल गई। लड़के ने डर की वजह से इमारत की तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने कुछ मिनटों के बाद दम तोड़ दिया। एक महिला का शव इमारत के बाथरूम से मिला है।

 

कोलकाता के गणेश चंद्र एवेन्यू में शुक्रवार रात पांच मंजिला एक आवासीय इमारत में लगी आग की चपेट में आने से 12 वर्षीय एक लड़के सहित दो लोगों की मौत हो गई। पश्चिम बंगाल के अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस ने बताया कि इमारत से सभी लोगों को निकाल लिया गया है और अब स्थिति नियंत्रण में है।

 

अधिकारियों के मुताबिक इस घटना में 12 वर्षीय एक बच्चे और एक बुजुर्ग महिला की मौत हुई है। इस संबंध में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा,‘लड़के ने डर की वजह से इमारत की तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने कुछ मिनटों के बाद दम तोड़ दिया। एक महिला का शव इमारत के बाथरूम से मिला है। इमारत में रहने वाले दो लोग भी घायल हुए हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।’

अग्निशमन सेवा के एक अधिकारी ने बताया कि शहर के उत्तरी हिस्से में स्थित इमारत की पहली मंजिल पर आग लग गई, जो ऊपरी मंजिल की ओर भी फैल गई। बोस ने कहा, 'सभी लोगों को बचा लिया गया है। आग नियंत्रण में है। अब उसे ठंडा करने काम किया जा रहा है।’ अधिकारियों ने कहा कि इमारत के अंदर फंसे लोगों को बचाने और आग बुझाने के लिए कम से कम 25 दमकल गाड़ियां और एक हाइड्रोलिक सीढ़ी लगाई गई।

 

                                                    


सिविल लाइन थाना पुलिस ने एक महिला को 110 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया

सिविल लाइन थाना पुलिस ने एक महिला को 110 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया

13-Oct-2020

दिल्ली: सिविल लाइन थाना पुलिस ने एक महिला को 110 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया है. जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 लाख रुपये है. पुलिस ने स्थानीय लोगो की  शिकायत के आधार पर महिला पर कार्रवाई की

Report:Atiq Malik

Place:Delhi

उत्तरी जिले के डीसीपी एंटो अल्फोंस ने बताया कि स्थानीय लोगों द्वारा इलाके में लगातार पुलिस को स्मैक बेचने की शिकायत दी जा रही थी. सिविल लाइन थाने के एसएचओ अजय कुमार और मजनू टीला चौकी इंचार्ज ने सूचना के आधार पर स्मैक बेचने वाली महिला को गिरफ्तार किया और उसके पास से 110 ग्राम स्मैक बरामद की. महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है

आरोपी महिला मजनू टीला इलाके में रहती है और उसका नाम सीमा (55) है. यह इलाके में पिछले कुछ महीने से स्मैक बेचने का काम कर रही थी . पुलिस ने महिला को गिरफ्तार करने के बाद उसके पास से 110 ग्राम स्मैक की 179 पुड़िया और कुछ खुली हुई स्मैक बरामद की है. पूछताछ में महिला ने बताया कि वह संजू उर्फ लंगड़े से स्मैक लेती है फिलहाल महिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है.

 


पश्चिम बंगाल के कोलकाता के बेलेघाटा इलाके में एक जबर्दस्‍त विस्‍फोट हुआ है

पश्चिम बंगाल के कोलकाता के बेलेघाटा इलाके में एक जबर्दस्‍त विस्‍फोट हुआ है

13-Oct-2020

Report:Abdul Kalam

Place:Bengal

विस्‍फोट इतना ताकतवर था कि उसमें बेलेघाटा गांधीमठ फ्रेंड्स सर्कल क्‍लब की छत उड़ गई। हादसा के पीछे क्‍या वजह थी अभी इसका पता नहीं चल पाया है। अभी तक किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।

विस्‍फोट से इलाके में अफरातफरी मच गई थी। धमाके के बाद उच्चाधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है उसी के बाद धमाके की वजह के बारे में कुछ कहा जा सकेगा।