काँग्रेस पार्टी को अपने संगठन के साथ ही, अपने मीडिया विभाग को भी मजबूत करने की अत्यधिक आवश्यकता है - चंद्रशेखर शर्मा

काँग्रेस पार्टी को अपने संगठन के साथ ही, अपने मीडिया विभाग को भी मजबूत करने की अत्यधिक आवश्यकता है - चंद्रशेखर शर्मा

11-Jul-2020

काँग्रेसी चिंतक और समाजसेवी, रायपुर, छत्तीसगढ़ निवासी चंद्रशेखर शर्मा ने एक बार फिर कांग्रेस पार्टी को सुदृढ़ बनाने के लिए मौजूदा हालात के मद्देनज़र अपनी राय जाहिर की है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से यह अवगत कराया है कि जिस प्रकार काँग्रेस पार्टी को दिए गए अपने पहले सुझाव में उन्होंने कहा था की पार्टी को संगठनात्मक तरीके से सुदृढ़ होने की अत्यंत आवश्यकता है, उसी प्रकार कांग्रेस पार्टी को अपने मीडिया विभाग को भी सुदृढ़ और मजबूत करने पर विचार करना चाहिए क्योंकि जिस प्रकार किसी भी राजनीतिक दल का संगठन उसकी ताकत होती है, ठीक उसी प्रकार संगठन के कार्यों को प्रचारित और प्रसारित करने के लिए एक मजबूत मीडिया विभाग का होना अत्यंत आवश्यक है। 

चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि 'ऐसा मैं यह इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि वर्ष 2012 के बाद से ही भारतीय राजनीति में जो बदलाव आए हैं उसमें मीडिया की अहम भूमिका प्रदर्शित होती है जोकि पूरा विश्व देख रहा है। भारत की ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी मीडिया अब राजनीति का एक अभिन्न अंग बन चुका है या यूं कहें कि किसी भी राजनीतिक पार्टी की रीढ़ की हड्डी बन चुका है। इसीलिए मेरा सुझाव है कि काँग्रेस पार्टी को भी राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर अपने मीडिया विभाग को मजबूत करते हुए उसमें ऐसे लोगों को शामिल करने की आवश्यकता है जो मीडिया के क्षेत्र में पारंगत हों या कोई पुराने मीडिया कर्मी हों या जिन्हें मीडिया क्षेत्र का तकनीकी ज्ञान और अनुभव हो।' 

एक उदाहरण के माध्यम से चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि जिस प्रकार तत्कालीन काँग्रेसी नेता व छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी ने अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर में ही मीडिया का सदुपयोग करते हुए अपने आप को भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी और छत्तीसगढ़ का नाम भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया, ठीक उसी ढर्रे पर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर चल रही है। तो ध्यान देने योग्य बात यह है कि जब कांग्रेस पार्टी पहले से ही राजनीति में मीडिया की भूमिका को लेकर संजीदा है तो आज क्या हुआ? 

चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि मैं आशा करता हूं कि कांग्रेस पार्टी मेरे सुझाव पर अमल करेगी और आने वाले समय में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर एक नए कलेवर में उभर कर सामने आएगी। 

 चंद्रशेखर शर्मा, रायपुर, छत्तीसगढ़। 


अंग्रेजी माध्यम के स्कूल के लिए निकली विभिन्न पदों पर भर्ती

अंग्रेजी माध्यम के स्कूल के लिए निकली विभिन्न पदों पर भर्ती

10-Jul-2020

TNIS

सूरजपुर : छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग, मंत्रालय महानदी भवन अटलनगरनवा रायपुर के निर्देषन में कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा के द्वारा शासकीय उत्कृष्ट ( अंग्रेजी माध्यम ) विद्यालय, सूरजपुर व प्रतापपुर के लिए विभिन्न पदों पर भर्ती की जा रही है। जिसमें अग्रेंजी माध्यम के व्याख्याता, कम्प्यूटर षिक्षक, व्यायाम षिक्षक, ग्रंथपाल, प्रयोगषाला सहायक, सहायक ग्रेड-2, सहायक ग्रेड-3, भृत्य, चैकीदार तथा प्राथमिक व माध्यमिक शाला के लिए प्रधान पाठक व सभी विषयों के षिक्षकों के पदों पर अस्थाई रूप से प्रतिनियुक्ति एवं संविदा की नियुक्ति हेतु योग्यताधारी आवेदकों से आवेदन पत्र आमंत्रित किया गया है। जिसमें बताया गया है कि इच्छुक अभ्यर्थी 25 जुलाई 2020 तक कार्यालयीन समय प्रातः 10.30 बजे से सायं 5.30 तक कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर, संयुक्त जिला कार्यालय, जिला - सूरजपुर (छ0ग0) पिन -427229 के पते पर स्पीड पोस्ट व पंजीकृत डाक द्वारा जमा कर सकते है। विज्ञापित पदों की संख्या एवं विज्ञापन का विस्तृत विवरण व आवेदन पत्र का प्रारूप जिले के वेबसाईट  ूूूण्ेनतंरचनतण्दपबण्पद पर देखा जा सकता है।


शिवत्व को धारण करने का दिव्य अवसर

शिवत्व को धारण करने का दिव्य अवसर

09-Jul-2020

ललित गर्ग 

हमारे देश में पर्वांे एवं त्यौहारों की एक समृ़द्ध परम्परा रही है, यहां मनाये जाने वाले पर्व-त्योहार के पीछे कोई न कोई गौरवशाली इतिहास-संस्कृति का संबंध जुड़ा होता है। सभी धर्मों में धार्मिक भावना की दृष्टि से मनाये जाने वाले पर्व हैं जैसे-हिंदुओं में दीपावली नवरात्रि, मुसलमानों में रमजान, ईसाइयों में क्रिसमस आदि। हिन्दू संस्कृति में जितने भी पर्व व त्योहारों मनाये जाते हैं लगभग सभी में तप एवं  साधना का विशेष महत्व है। हिन्दुओं के लिये श्रावण मास का सर्वाधिक महत्व है। यह अवसर जहां प्रकृति के सौन्दर्य, आध्यात्मिक ऊर्जा के संचार एवं आत्मिक शक्ति के विस्तार का अलौकिक एवं दिव्य समय है। श्रावण मास की हर घड़ी एवं हर पल भगवान शिव को समर्पित एवं उनके प्रति आस्था एवं भक्ति व्यक्त करने का दुर्लभ एवं चमत्कारी अवसर है।

 श्रद्धा का यह महासावन भगवान शिव के प्रति समर्पित होकर ग्रंथियों को खोलने की सीख देता है। इस आध्यात्मिक पर्व के दौरान कोशिश यह की जाती है कि हिन्दू कहलाने वाला हर व्यक्ति अपने जीवन को इतना मांज ले, इतना आध्यात्मिकता से ओतप्रोत कर ले, इतना  शिवमय बना ले कि वर्ष भर की जो भी ज्ञात-अज्ञात त्रुटियां हुई हैं, आत्मा पर किसी तरह का मैल चढ़ा है वह सब धुल जाए। हिन्दू संस्कारों को सुदृढ़ बनाने और अपसंस्कारों को तिलांजलि देने का यह अपूर्व अवसर है। यह सम्पूर्ण माह इतना महत्वपूर्ण हैं कि इनमें व्यक्ति स्वयं के द्वारा स्वयं को देखने का प्रयत्न करता है। यह माह हिन्दू संस्कृति एवं उसकी पवित्रता, पोषकता, सात्विकता और नवजागरण का सन्देश देता है। हर श्रद्धालु का मन भक्तिमय होकर  नैतिकता और चरित्र की चैकसी का काम करता है। यह दिव्य एवं आस्थामय माह हर व्यक्ति को प्रेरित करता है कि वे भौतिक और सांसारिक जीवन जीते हुए भी आध्यात्मिकता को एवं भगवान शिव को जीवन का हिस्सा बनाएं, जीवन को पवित्र एवं पावन बनाये।

आत्मोत्थान तथा आत्मा को उत्कर्ष की ओर ले जाने वाले इस चमत्कारी श्रावण माह में साधक प्रकृतिमय दिनचर्या के साथ शांति और स्वास्थ्य, प्रकृति एवं पर्यावरण के लिये जागरूक एवं साधनारत रहता है। इस सम्पूर्ण माह मंे निरंतर धर्माराधना करने का प्रावधान है। इन दिनों में सभी धार्मिक पूजा-पाठ, धर्म-ध्यान, स्वाध्याय, जप, तप, उपवास, आदि विविध प्रयोगों द्वारा आत्म-मंथन एवं जीवन को पवित्र करते हैं। जिससे मनोमालिन्य दूर होता है और सहजता, सरलता, कोमलता, सहिष्णुता के भाव विकसित होते हैं। शिवभक्त अनेक धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। साथ ही महादेव को प्रसन्न करने के लिए कोई नंगे पाँव चलने की ठानता है, तो कोई पूरे सावन भर अपने केश नहीं कटवाने का संकल्प लेता है। वहीं अनेक सात्विक एवं पवित्र जीने को तत्पर होते हैं, माँस और मदिरा का त्याग करते हंै।                                      
                                                                                  
सावन का महीना शिवभक्तों के लिए खास होता है। शिवभक्त काँवरियों में जल लेकर शिवधाम की ओर निकल पड़ते हैं। शिवालयों में जल चढ़ाने के लिए लोग बोल बम के नारे लगाते घरों से निकलते हैं। भक्त भगवा वस्त्र धारण कर शिवालयों की ओर कूच करते हैं। महादेव का अभिषेक करने के पीछे एक पौराणिक कथा का उल्लेख है कि समुद्र मंथन के समय हलाहल विष निकलने के बाद जब महादेव इस विष का पान करते हैं तो वह मूच्र्छित हो जाते हैं। उनकी दशा देखकर सभी देवी-देवता भयभीत हो जाते हैं और उन्हें होश में लाने के लिए निकट में जो चीजें उपलब्ध होती हैं, उनसे महादेव को स्नान कराने लगते हैं। इसके बाद से ही जल से लेकर तमाम उन चीजों से महादेव का अभिषेक किया जाता है।

श्रावण मास के साथ मुख्य रूप से शिव भक्ति, तप और मंत्र साधना जुड़ी हुई है। संयम, सादगी, सहिष्णुता, अहिंसा, हृदय की पवित्रता से हर व्यक्ति अपने को जुड़ा हुआ पाता है और यही वे दिन हैं जब व्यक्ति घर और मंदिर दोनों में एक सा हो जाते हैं। छोटे-बड़े सभी का उत्साह दर्शनीय होता है। आहार-संयम, उपवास एवं तप के द्वारा इस श्रावण माह को उत्सवमय बनाते हंै। इस अवसर पर मंदिरों, धार्मिक स्थलों, पवित्र नदियों के आसपास रौनक बढ़ जाती है। श्रद्धालु अपना धार्मिक दायित्व समझकर अध्यात्म की ओर प्रयाण करते हैं। श्रावण माह मेें करुणा, तप, मंत्र साधना आदि पर विशेष बल दिया जाता है।

श्रद्धा एवं भक्ति का यह महाश्रावण अध्यात्म का अनूठा प्रयोग है। पीछे मुड़कर स्वयं को देखने, जीवन को पवित्र एवं साधनामय बनाने का ईमानदार प्रयत्न है। वर्तमान की आंख से अतीत और भविष्य को देखते हुए कल क्या थे और कल क्या होना है इसका विवेकी निर्णय लेकर एक नये सफर की शुरुआत की जाती है। श्रावण में मेघ अपना नाद सुनाते हैं, प्रकृति का अपना राग उत्पन्न होता है और मानव में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। सम्पूर्ण प्रकृति एवं पर्यावरण नहाया हुआ होता है, प्रकृति का सौन्दर्य जीवंत हो उठता है। कल-कल करते झरनों, नदियों एवं मेघ का दिव्य नाद से धरती की गोद में नयी कोपलें उत्पन्न होती है।

आज जो कोरोना महाव्याधि, युद्ध, आतंक, आपसी-द्वेष, जैसी ज्वलंत समस्याएं न केवल देश के लिए बल्कि दुनिया के लिए चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है और सभी कोई इन समस्याओं का समाधान चाहते हैं। उन लोगों के लिए भक्ति का महाश्रावण एक प्रेरणा है, पाथेय है, मार्गदर्शन है और सात्विक जीवन शैली का प्रयोग है। आज भौतिकता की चकाचैंध में, भागती जिंदगी की अंधी दौड़ में इस श्रद्धा एवं भक्ति के महाश्रावण की प्रासंगिकता बनाये रखना ज्यादा जरूरी है। इसके लिए हिन्दू समाज संवेदनशील बने विशेषतः युवा पीढ़ी महाश्रावण की मूल्यवत्ता से परिचित हो और वे पूजा-पाठ, मौन, जप, ध्यान, स्वाध्याय, आहार संयम, इन्द्रिय निग्रह, जीवदया आदि के माध्यम से आत्मचेतना को जगाने वाले इन दुर्लभ क्षणों से स्वयं लाभान्वित हो और जन-जन के सम्मुख एक आदर्श प्रस्तुत करे। 

कोरोना महाप्रकोप के दौर में महाश्रावण माह मात्र हिन्दुओं का ही नहीं है, यह एक सार्वभौम अवसर है, जिसका उपयोग कर मनुष्य अपने अंतर चेतना और अपने स्व से जुड़कर  शिवत्व को प्राप्त कर इस महाव्याधि से मुक्ति प्राप्त करें। पूरे विश्व के लिए यह एक उत्तम और उत्कृष्ट अवसर है, क्योंकि इसमंे आत्मा की उपासना करते हुए रोग-प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करें है। आज जरूरत है,रोग से निरोगता की ओर, श्रद्धा से समर्पण की ओर अग्रसर होने की, आध्यात्मिकता से आत्मीयता की ओर बढ़ने की और शिव-साधना के साथ शिवत्व को धारण करने की। संपूर्ण संसार में यही एक ऐसा उत्सव, अवसर या पर्व है जिसमें आत्मरत होकर व्यक्ति आत्मार्थी बनता है व अलौकिक, आध्यात्मिक आनंद के शिखर पर आरोहण करता हुआ मोक्षगामी होने का सद्प्रयास करता है।

 

 


कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग का हस्ताक्षर अभियान। स्टेट कोआरडिनेटर आसिम मुन्ना का बयान।

कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग का हस्ताक्षर अभियान। स्टेट कोआरडिनेटर आसिम मुन्ना का बयान।

09-Jul-2020

जब-जब कांग्रेस ने सड़कों पर उतरकर जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से जनता के बीच उठाया,और दमनकारी सरकार को चेताया है तब-तब इस सरकार के लोंगों ने कांग्रेस-जनों को झूठे मुकदमों में फसां कर उलझाने और उनकी हिम्मत को तोड़ने की साज़िश रची है प्रदेश अल्पसंखयक विभाग के जुझारू चेयरमैन जनाब Shahnawaz Alam साहब को गरीब, कुचले,परेशान लोगों की आवाज़ सड़कों पर मजबूती से सरकार के सामने लाने के लिए गिरफ्तार किया गया है,इस फ़र्ज़ी गिरफ्तारी के विरोध में हम कांग्रेस-जनों ने जनता के सहयोग से पूरे प्रदेश के हर जिले/शहर में धरने/प्रदर्शन कर आंदोलन किया और जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से ज्ञापन दिया,और अब आज से पूरे प्रदेश में हस्ताक्षर_अभियान चलाकर एक साथ 2 लाख लोगों की आवाज़ महामहिम_राज्यपाल जी तक पहुचाई जायेगी!
यह बात कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के स्टेट कोऑर्डिनेटर श्री आसिम मुन्ना ने कही।
उन्होंने जनता से निवेदन करते हुए कहा कि आप सबसे दरख़्वास्त है कि आप इस हस्ताक्षर अभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सेदारी करे, ताकि इस गूंगी-बहरी-दमनकारी सरकार के विरुद्ध मजबूत आवाज़ बुलंद की जा सके।
उन्होंने कहा कि हमारा नारा है।
हम कांग्रेस-जन इस गिरफ्तारी से न डरे है न डरेगें.!
सरकार कुछ भी कर ले हम  न झुके है न झुकेंगे.!!
हम कांग्रेस-जन सदैव जनहित के लिए लड़े है और लड़ेंगे.!!!

 

 

 


आजमगढ़ : कोरेन्टीन सेंटरों को फैसिलिटेट करने के लिए आगे आया पीपुल्स एलायंस, जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दिया पत्रक

आजमगढ़ : कोरेन्टीन सेंटरों को फैसिलिटेट करने के लिए आगे आया पीपुल्स एलायंस, जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दिया पत्रक

08-Jul-2020

आजमगढ़ : आजमगढ़ समेत पूरे सूबे में बढ़ती हुई कोरोना मरीजों कि संख्या देखते हुए हैबिटेट फॉर ह्यूमिनिटी इंडिया की पहल पर पीपुल्स एलायंस ने आजमगढ़ जिला अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को कोरेन्टीन  सेंटरों में सहयोग करने के लिए पत्र दिया.

सामाजिक कार्यकर्ता बांकेलाल यादव ने बताया कि जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से उन्होंने हैबिटेट फॉर ह्यूमिनिटी इंडिया द्वारा कोरेन्टीन सेंटरों में बेड, बैक रेस्ट, साइड टेबल, चादर, तकिया,  बेडरूम सेपरेटर और हाइजीन किट मुहैया करवाने की बात की. उन्होंने बताया कि इस संबंध में निज़ामाबाद के एसडीएम से भी कुछ वक़्त पहले मुलाकात कि गई थी. उन्होंने कोरोना मरीजों की संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अगर प्रशासन कोरेन्टीन सेंटर के लिए कोई जगह मुहैया कराएगा तो हम उसे फैसिलिटेट करने की भी कोशिश करेंगें.

सामाजिक कार्यकर्ता विनोद यादव और अवधेश यादव ने कहा कि रविवार को सूबे में कोरोना वायरस से संक्रमित रिकॉर्ड 1155 नए मरीज मिले वहीं सूबे में 785 मरीज़ दम तोड चुके हैं. 

ऐसे में आजमगढ़ जहां 295 केस में 7 लोगों की मृत्यु हो गई है वहां हम जनता में मास्क वितरण करके कोरोना के खिलाफ जनता में जागरूकता पैदा कर रहें हैं. पीपुल्स एलायंस यूपी के विभिन्न ज़िलों में कोरोना महामारी के दौर में जरूरतमंदों तक पहुँचकर राशन, मास्क आदि मुहैया करा रहा है.

बांकेलाल यादव , पीपुल्स एलायंस


मध्यप्रदेश की सियासत : प्रदेश कांग्रेस में  युद्ध विराम ?

मध्यप्रदेश की सियासत : प्रदेश कांग्रेस में युद्ध विराम ?

07-Jul-2020

   कृष्ण देव (के डी) सिंह बुधवार पत्रिका Image may contain: 1 person, sitting, beard and indoor

भोपाल : शिवराज मंत्री परिषद का विस्तार प्रदेश में रिक्त 24 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनावों की चुनौती के मद्देनजर किया गया है, इसमें सर्वाधिक 16 उपचुनाव ग्वालियर-चंबल संभाग में होना हैं और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए क्षेत्र को भारी- भरकम प्रतिनिधित्व भी मिला है।लेकिन  दल-बदल और मंत्रीमंडल के विस्तार के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस के भीतर विशेष तौर पर ग्वालियर- चंबल अंचल एक प्रकार से वर्चस्व  के लिए युद्ध विराम की स्थिति बन गई है,  जबकि भाजपा में अन्दरूनी जंग रूपी राजनीतिक शीत युद्ध के छिड़ने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। क्योंकि भाजपा में अब ज्यादा शक्ति केंद्र उभरेगें तो कांग्रेस में इस लड़ाई के थमने की संभावना बलवती होती जाएगी, क्योंकि बड़े कद के नेता अब दिग्विजय सिंह और कमलनाथ है।  हालांकि जो भी कांग्रेसी हैं उनमें से अधिकांश इन दोनों की वरिष्ठता और पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व से उनकी निकटता के कारण अपना नेता मानते हैं। लेकिन पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष द्वय अरुण यादव व कांतिलाल भूरिया  को पार्टी में ज्यादा महत्व मिलने की भी संभावना बन चुकी है।

          ग्वालियर-चंबल संभाग में भाजपा में वर्चस्व की लड़ाई पर्दे के पीछे तेज होने की संभावना है क्योंकि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, वरिष्ठ मंत्री नरोत्तम मिश्रा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा तो बड़े नेता हैं ही और अब सिंधिया के भाजपा में आने से एक और शक्ति केंद्र बन गया है। कमलनाथ सरकार के तख्तापलट अभियान में अहम भूमिका निभाने और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के विश्‍वासपात्र होने के कारण भाजपा की अंदरूनी राजनीति में नरोत्तम मिश्रा का कद काफी बढ़ गया है। प्रदेश अध्यक्ष शर्माजी की भी क्षेत्र में दखलंदाजी पहले से ही है। जहां तक तोमर जी का सवाल है वह तो सबको साथ लेकर चलने में एक प्रकार से माहिर माने जाते हैं और केंद्र की राजनीति में ज्यादा व्यस्त हैं ।

टकराव की एक वजह यह भी रहेगी कि भाजपा की कार्यशैली के नेताओं की अपनी एक अलग राजनीतिक शैली होगी और कांग्रेसी संस्कृति के आदी नेता तथा कार्यकर्ताओं के बड़े समूह का भाजपाईकरण हो रहा है । इनके बीच कहीं ना कहीं तनाव भी हो सकता है लेकिन अंदर ही अंदर सुलगती रहेगी और इसे रोक पाना आसान नहीं होगा।  हालांकि अभी तक सिंधिया की ग्वालियर-चंबल संभाग में कांग्रेस की राजनीति पर मजबूत पकड़ थी और सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी से नजदीकियों के चलते उनका ही वर्चस्व था, इसलिए  दिग्विजय सिंह यहां हस्तक्षेप करने से परहेज करते थे। लेकिन अब इस इलाके में दिग्विजय का ही बोलबाला हो गया है और कांग्रेस आलाकमान को भी अब निर्णय लेने में दुविधा या असमंजस नहीं रहेगा। अब कमलनाथ और दिग्विजय सिंह मिलकर राजनीति करेंगे, इसलिए कांग्रेस को तालमेल बैठाने में  मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी।

        प्रदेश की बदलती राजनीतिक हालात में भाजपा और कांग्रेस के नेता एक दूसरे पर छींटाकशी करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। शिवराज, ज्योतिरादित्य, नरोत्तम और विष्णु दत्त के निशाने पर दिग्विजय और कमलनाथ हैं तो वही दूसरी ओर कमलनाथ , दिग्विजय और अजय सिंह के निशाने पर शिवराज और ज्योतिरादित्य हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सिंधिया ने कहा कि टाइगर अभी जिंदा है तो कमलनाथ ने  रतलाम यात्रा के दौरान सैलाना में  कह डाला कि सर्कस का टाइगर जिंदा है। इसके साथ यह भी जोड़ दिया की शादी के घोड़े और रेस के घोड़े में फर्क होता है। उन्होंने कहा कि लोग खुद के लिए कहते हैं मैं टाइगर हूँ। अपने बारे में कमलनाथ ने कहा कि  मैं महाराजा नहीं हूं, मैं मामा नहीं हूं, मैंने कभी चाय नहीं बेची, मैं तो बस कमलनाथ हूं। अब तो प्रदेश की जनता यह तय करें कि कौन क्या है। सिंधिया ने भाजपा की वर्चुअल रैली में पार्टी छोड़ने पर कहा कि कई चील-कौवे बैठे हुए हैं, मुझे जितना नोच सकते हो नोच लो। शिवराज ने कमलनाथ सरकार को दलालों की सरकार निरूपित करते हुए आरोप लगाया कि वल्लभ भवन दलालों का अड्डा बन गया था।

प्रदेश में कमलनाथ सरकार के तख्ता पलट अभियान का पटाक्षेप शिवराज मंत्रि-परिषद के विस्तार के साथ पूरा हो गया है। लेकिन राज्य की सियासत में असली खेल शुरु होगा अब, क्योंकि उपचुनाव की तारीखों का भले ही ऐलान न हुआ हो लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों ही चुनावी मोड में आ गये हैं। कांग्रेस के सामने लक्ष्य बहुत बड़ा है और उसे 24 में से डेढ़ दर्जन से अधिक सीटें जीतना होगा ताकि फिर से सरकार बनाने का  स्वप्न  साकार हो सके। जबकि भाजपा के सामने वैसे तो 24 सीटें जीतने का लक्ष्य है लेकिन यदि वह आधे स्थान भी जीत जाती है तो उसकी सरकार आगामी आमचुनाव तक चलती रहेगी। 

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह चुनाव प्रचार में ऐसे चेहरों को आगे करे जो शिवराज, तोमर और सिंधिया की त्रिमूर्ति के मुकाबले अपनी बातों को ज्यादा असरकारक ढंग से जनमानस के बीच रख सके। हालांकि जिस प्रकार कांग्रेस का लक्ष्य बड़ा है उसी प्रकार उससे बड़ा लक्ष्य सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी है, उन्हें उन सभी विधायकों को जिताकर फिर से विधानसभा में पहुंचाना है क्योंकि उनके भरोसे ही इन विधायकों ने अपनी सदस्यता दांव पर लगाई है। उनके लिए यह भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है कि जिन 11 को मंत्री पद से उनके कारण नवाजा गया है उन सभी को जितायें, ताकि इससे उनकी पसंद पर जन-स्वीकृति की मोहर लग सके।

      अक्सर देखा गया है कि कुछ बड़े विभागों के मंत्री भी चुनाव हारते रहे हैं।  यदि सिंधिया उन सभी को जिता लेते हैं जिन्होंने उन पर विश्‍वास कर इस्तीफा दिया है तो ही वे पूरे आत्मविश्‍वास के साथ यह कह सकेंगे कि उन्होंने जो कुछ किया उस पर जनता ने मोहर लगा दी है। विधायकी छोड़ी और जो मंत्री बने उनके सामने चुनाव जीतने की भारी-भरकम चुनौती मुंह बाये खड़ी है। भाजपा के क्षत्रपों के सहयोग और उनके मंत्री बनने से भाजपा के जिन कार्यकर्ताओं में असंतोष है वह जब तक तिरोहित नहीं होगा, उनकी जीत शायद संभव न हो पाये।

कुछ मंत्रियों को तो दोहरे विरोध का सामना करना पड़ेगा, एक तो रुठे हुए भाजपाइयों का और दूसरे कांग्रेस का, खासकर तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, प्रद्युम्न सिंह तोमर, प्रभुराम चौधरी, ओपीएस भदौरिया, बृजेन्द्र सिंह यादव, गिरराज. दंडोतिया इनमें शामिल हैं। इसके साथ ही सीधे कांग्रेस से भाजपा में गये बिसाहूलाल सिंह, ऐंदल सिंह कंसाना और. हरदीप सिंह डंग को भी सबक सिखाने की कांग्रेस ने ठान ली है। भाजपा के सामने एक बड़ी समस्या यह है कि शिवराज सरकार में जो उसके अपने विधायक जगह पक्की मान रहे थे, उन्हें निराशा हाथ लगी है और उनकी निराशा को आशा में कैसे बदले। दलबदल करने वाले जो आठ विधायक मंत्री बनने से चूक गये हैं उनमें से पांच अनुसूचित जाति वर्ग के हैं और इसको लेकर कांग्रेस दलितों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए एक हथियार के रुप में उपयोग करने की रणनीति बना रही है इसमें उसका चेहरा फूल सिंह बरैया हैं। भांडेर, अम्बाह, गोहद, करेरा और अशोकनगर सुरक्षित से जीते विधायक मंत्री बनने से वंचित हो गये हैं। 16 विधानसभा क्षेत्रों में से अधिकांश में दलित वर्ग और खासकर जाटव समुदाय का प्रभुत्व रहता है, इसी इलाके में बहुजन समाज पार्टी भी अपना असर रखती है और कांग्रेस की नजर भी इन्हीं पर टिकी हुई है၊

           मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सरकार के सौ दिन पूरे होने के अवसर पर वर्चुअल रैली को सम्बोधित करते हुए चुनावी एजेंडा तय कर दिया है जिसके तहत एक तरफ तो उनके एक हाथ में होगा घोषणाओंऔर उपलब्धियों का पुलिंदा तो दूसरे हाथ में होगी कमलनाथ सरकार पर आरोपों की मूसलाधार झड़ी।  उन्होंने चार ‘डी‘ की शब्दावली ईजाद कर ली है। जिसमें तीन ‘डी‘ तो हैं दलाल, दंभ और दुर्भावना । कमलनाथ सरकार को दलालों की सरकार कहते हुए उन्होंने मंत्रालय को दलालों के अड्डे की संज्ञा दी है।

इस मुद्दे पर वे जमकर कमलनाथ को घेरेंगे तो चौथे ‘डी‘ के रुप में उनके निशाने पर दिग्विजय सिंह होंगे। क्योंकि वे कांग्रेस के असंतोष को सहेजने में सफल रहने के साथ ही संगठन पर हमेशा अपनी पकड़ बनाये रखते हैं। कमलनाथ ने रतलाम जिले के सैलाना में यह कहते हुए मुख्यमंत्री की घेराबंदी की है कि वे जहां भी जायेंगे वहां कोई न कोई झूठी घोषणा अवश्य करेंगे और प्रचार-प्रसार की राजनीति करते हुए बड़े-बड़े ऐलान भी उनके द्वारा किए जायेंगे। लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि प्रदेश की जनता शिवराज की घोषणाओं को अब किस रुप में लेती है?  चुनाव नतीजों में वह यह बतायेगी कि उसे कमलनाथ और शिवराज में से किस पर अधिक भरोसा है?


डॉ बी.आर.आंबेडकर के ऐक्टर जगन्नाथ निवंगुणे कोरोना, शूटिंग रुकी

डॉ बी.आर.आंबेडकर के ऐक्टर जगन्नाथ निवंगुणे कोरोना, शूटिंग रुकी

07-Jul-2020

करीब 3 महीने के लॉकडाउन पीरियड के बाद अनलॉक-1 के तहत लगभग सभी टीवी शोज की शूटिंग शुरू हो चुकी है. टीवी शो 'एक महानायक- डॉ बी.आर. आंबेडकर' की शूटिंग भी शुरू हो गई थी. शो के मेकर्स शूट के दौरान कोरोनावायरस से बचाव के लिए सभी सावधानियां और दिशा-निर्देश फॉलो कर रहे थे. लेकिन उस वक्त हलचल मच गई जब ऐक्टर जगन्नाथ निवंगुणे कोरोना पॉजिटिव पाए गए. जगन्नाथ निवंगुणे शो में भीमराव के पिता का रोल प्ले कर रहे हैं. उनके कोरोना पॉजिटिव पाए जाने से शो की शूटिंग तीन दिनों के लिए रुक गई है. सरकार के निर्देशों के मुताबिक, अगर टीवी शो के सेट पर कोई सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है तो शो की शूटिंग 3 दिन के लिए रोक दी जाएगी और कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति को क्वॉरंटीन कर दिया जाएगा.

आईडब्लूएमबज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'एक महानायक- डॉ बी.आर. आंबेडकर' के क्रू के कुछ और लोग भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं और सभी को क्वॉरंटीन कर दिया गया है. शो के अन्य सभी कलाकारों का भी कोरोना की जांच के लिए टेस्ट किया गया है, जिनकी रिपोर्ट आना अभी बाकी है.

रिपोर्ट के अनुसार, सोर्सेज ने बताया कि ऐक्टर जगन्नाथ निवंगुणे अभी ठीक हैं और उनकी सेहत में सुधार हो रहा है.' वहीं एक और टीवी शो 'मेरे साईं' की शूटिंग हाल ही में उस वक्त रुक गई थी, जब एक क्रू मेंबर कोरोना पॉजिटिव पाया गया. हालांकि शो की शूटिंग 3 दिन बार फिर से शुरू हो चुकी है. 'मेरे साईं' के प्रड्यूसर नितिन वैद्य ने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'क्रू के जिस सदस्य को कोरोना हुआ है उसे हल्का बुखार था और वह सेट पर भी नहीं आया था. चूंकि जांच किए जाने पर कोरोना पॉजिटिव निकला तो उसे क्वॉरंटीन कर दिया गया था. अब उसकी सेहत में सुधार हो रहा है. हमने सेट को पूरी तरह से सैनिटाइज और छिड़काव करवाया है. सभी सावधानियां बरत रहे हैं. सरकार के निर्देशों के मुताबिक, हमने शूट को तीन दिनों तक के लिए स्थगित कर दिया था.'


उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंखयक विभाग की बैठक।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंखयक विभाग की बैठक।

06-Jul-2020

लखनऊ  :उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंखयक विभाग की बैठक राष्ट्रिय कोआर्डिनेटर और प्रदेश प्रभारी जनाब मिन्नत्त रहमानी साहब की सदारत में हुई, जिसमे  रहमानी साहब ने बैठक को ख़िताब करते हुए कहा कि ये समय कांग्रेस के अल्पसंख्यकों के लिए बड़ा इम्तिहान का समय है  उन्होंने कहा कि अल्पसंखयक विभाग के चैयरमैन शहनवाज़ आलम को नाजायज़ तौर पर  योगी सरकार ने फ़र्ज़ी मुकदमे में फसां कर जेल भेजने का काम किया है उन्होंने सभी जिला/शहर चेयर मैनों की सराहना करते हुए कहा कि अनैतिक गिरफ्तारी के विरोध में जिस तरह सभी इकाइयों ने पुरे प्रदेश में प्रदर्शन कर विरोध का इजहार किया है वो क़ाबिल ए तारीफ है उन्होंने योगी सरकार के इस कार्यवाही की कड़े शब्दों में निंदा की।
बैठक में राष्ट्रीय सचिव जनाब  हंजला उस्मानी साहब ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज सरकार की गलत नीतियों को लोगों तक पहुंचाने की सबसे अहम जिम्मेदारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की है,उन्हें सड़को पर निकल कर आवाज़ उठानी होगी। राष्ट्रिय कोआर्डिनेटर रफत फात्मा जी ने कहा कि समाज को जोड़कर उन्हें पार्टी की नीतियों से अवगत कराना हम सभी कार्यकर्ताओं कार्य है,जिससे पार्टी को ताकत मिल सके।
 स्टेट कोआर्डिनेटर और देवीपाटन मंडल के प्रभारी आसिम मुन्ना ने कहा कि  पहली बार उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंखयक विभाग ने अपने चैयरमैन शहनवाज़ आलम की अनैतिक गिरफ्तारी के विरोध निरन्तर तीन दिनों तक पूरे प्रदेश में  जिले और ब्लॉक स्तर पर धरने/ प्रदर्शन कर इस सरकार का ज़बरदस्त विरोध किया,
और पार्टी के दिशा निर्देशों के तहत आने वाले दिनों सरकार की जनहित विरोधी नीतियों को लेकर संघर्ष तेज़ किया जायेगा। फैज़ाबाद मंडल और स्टेट कोर्डिनेटर अख्तर मलिक साहब ने कहा कि जिस तरह से सरकार अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न करके डराने का काम कर रही है उससे कांग्रेस के कार्यकर्त्ता डरने वाले नही,। बैठक को प्रदेश के पूर्व उपाधयक महबूब उर रहमान किदवाई, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता चौधरी सलमान क़ादिर साहब, पूर्व प्रदेश सचिव डाक्टर खलीलुल्लाह साहब  जिला अल्पसंखयक चैयरमैन  नजमी सिद्दीकी साहब , मो उबैद साहब सहित सैकड़ों लोगों कार्यकर्ताओं ने बैठक में हिस्सेदारी की।

 


काँग्रेस पार्टी को मजबूत करने के लिए कुछ बदलाव जरूरी हैं - चंद्रशेखर शर्मा

काँग्रेस पार्टी को मजबूत करने के लिए कुछ बदलाव जरूरी हैं - चंद्रशेखर शर्मा

04-Jul-2020

काँग्रेस पार्टी की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने वाले काँग्रेस चिंतक और समाजसेवी, रायपुर निवासी चंद्रशेखर शर्मा ने काँग्रेस पार्टी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मीडिया के माध्यम से अपने निजी विचार रखते हुए कहा है कि, आंदोलन से निकली हुई पार्टी को अपने मूल भूत सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ अभियान शुरू करते हुए अब जन आंदोलन और जेलभरो आंदोलन करने की अत्यधिक आवश्यकता है। काँग्रेस पार्टी को अपने अभियान को सफल बनाने के लिए सर्वप्रथम संगठन में अमूलचूल परिवर्तन करने की अत्यधिक आवश्यकता है जिसके तहत राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर अनुभव और जोश का समीकरण बनाने की जरूरत है। आज सर्वाधिक आवश्यकता है, कि काँग्रेस पार्टी की कमान युवा वर्ग के हाथ में हो इसके साथ ही अनुभव और मार्गदर्शन का भी समावेश हो। 

चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि काँग्रेस पार्टी में गांधी परिवार एक मजबूत धागे का काम करता है जिसने तमाम काँग्रेस जनों और काँग्रेसी विचारधारा वाले लोगों को एक साथ पिरोकर रखा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी को काँग्रेस अध्यक्ष बनाते हुए राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर ज्यादा से ज्यादा युवाओं को संगठन में शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही काँग्रेस पार्टी को इस युवा वर्ग को मार्गदर्शन देने के लिए एक मार्गदर्शक मंडल का गठन करना चाहिए जिसमें काँग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम, एके एंटनी जैसे और भी अनुभवी लोगों समूचे देश से चुनाव करके शामिल करना चाहिए। इसी प्रकार प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर पर भी संगठन में अनुभव और जोश का समीकरण बनाने की जरूरत है। काँग्रेस पार्टी को ऐसे लोगों को संगठित करने की अत्यधिक आवश्यकता है जो कि पार्टी के नाम का उपयोग अपने निजी स्वार्थ के बजाय जनसेवा के करें। संगठन में शामिल किए जाने वाले सभी लोगों की कार्यकुशलता का विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए न कि किसी नेता की सिफारिश पर। 

 चंद्रशेखर शर्मा, रायपुर, छत्तीसगढ़ 


इतिहास गवाह है कि सत्ता का घमंड कभी फला नहीं है। सैयद तक़वी

इतिहास गवाह है कि सत्ता का घमंड कभी फला नहीं है। सैयद तक़वी

02-Jul-2020

पूरी दुनिया में कोविड 19 यानी कोरोनावायरस का आतंक मचा हुआ है हर इंसान उस से घबराया और परेशान सा दिखाई दे रहा है जो उस से ग्रसित हैं वह भी परेशान हैं और जो बचे हुए हैं वह डर से परेशान हैं लेकिन इसी महामारी के दौर में जब राजनीति पर या राजनीतिक पार्टियों पर नजर पड़ती है तो सत्ताधारी पार्टी को देखने से पता चलता है कि न जाने कौन सा ऐसा वायरस जिस ने राजनीति को डस लिया है कि उसके अंदर अहंकार के वायरस फैल गए। और इस वायरस ने तमाम नेताओं को प्रभावित कर दिया है जिसका परिणाम यह दिख रहा है कि नेता तो नेता जनता भी इसका शिकार हो रही है वह भी बच नहीं पा रही है चाहे वह मजदूर हो किसान हो वह गरीब हो या फिर मध्यम वर्ग के लोग सब सत्ता के अहंकार का शिकार हो चुके हैं मजदूर पैदल चलकर मरा जा रहा है किसान खेतों में मरा जा रहा है गरीब भूख से मारा जा रहा है और मध्यम वर्ग अपने आप को संभालने में मरा जा रहा है।
आज के दौर में राजनीति का मतलब सिर्फ रैलियां भाषण बाजी और जनता को संबोधन रह गया लेकिन एक दौर था जब जनता के लिए काम होता था और देश के नाम पर जान न्योछावर कर दी जाती थी स्व राजीव गांधी और स्व इंदिरा गांधी इसकी मिसाल हैं जिन्होंने देश के ऊपर अपनी जान कुर्बान कर दी।
लेकिन अफसोस! 
आज के दौर में शहीद की बेटी और पोती को निशाना बनाया जा रहा है यह शहीद का अपमान है।
केंद्र सरकार ने कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को एक महीने के भीतर दिल्ली स्थित लोधी एस्‍टेट वाले सरकारी आवास को खाली करने का आदेश दिया है। इससे पहले पिछले साल भाजपा सरकार ने गांधी परिवार से स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) की सुरक्षा वापस ले ली थी। जबकि सरकार को अच्छी तरह मालूम है कि गांधी परिवार को कितना खतरा है लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा हटाने जैसा खतरनाक कदम उठाया गया। आवास खाली कराए जाने के पीछे इसी को वजह बताया गया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सुरक्षा कवर को रद्द करने के परिणामस्वरूप, प्रियंका गांधी सरकारी आवास की हकदार नहीं हैं। प्रियंका गांधी से एक अगस्त से पहले आवास को खाली करने के लिए कहा गया है।
जारी आदेश मैं कहा गया है कि, ‘एसपीजी सुरक्षा वापस लेने और Z+ सुरक्षा प्रदान किए जाने के आधार पर, आपके लिए किसी भी सरकारी आवास के आवंटन का प्रावधान नहीं है। ऐसे में टाइप 6 बी हाउस नंबर 35, लोधी एस्टेट का आवंटन रद्द किया जाता है।’ मंत्रालय के आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर वह अगले महीने में आवास खाली नहीं करती हैं तो फिर उन्हें नियमों के मुताबिक किराया अथवा क्षतिपूर्ति का भुगतान करना होगा।
सोचने और चिंतन करने वाली बात कि अगर एक शहीद के परिवार के सदस्यों के लिए आवास उपलब्ध नहीं है तो आखिर आवास किसके लिए उपलब्ध है? 
अगर इसकी तह में जाया जाए इसका मूल्यांकन किया जाए तो यह बात साफ जाहिर होती है कि जिस तरह से राहुल गांधी सरकार को निशाने पर लिए हुए हैं और लगातार सवाल पर सवाल पूछे चले जा रहे हैं उससे भाजपा में खलबली मची हुई है दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी ने जब से कमान संभाली है उत्तर प्रदेश सरकार परेशान दिखाई दे रही है आज की स्थिति यह है कि प्रियंका गांधी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू कांग्रेस जनों के साथ सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं भले ही उन्हें जेलों की यात्रा करनी पड़ रही है। आज कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है और यह कार्य अपने आप में बहुत कुछ बयान कर रहा है और बदलती राजनीति की तरफ इशारा भी कर रहा है।
उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के आगमन और अजय कुमार लल्लू की संघर्षमय उपस्थिति ने राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है। जब से प्रियंका गांधी और अजय कुमार लल्लू ने कमान संभाली है तब से इस कमान की कड़क और गरज में उत्तर प्रदेश की दूसरी पार्टियां समाजवादी और बसपा हाशिए पर चली गई हैं।
आने वाला समय में पता चल जाएगा कि राजनीति का यह ऊंट किस करवट बैठेगा।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com

 

 


जीवनसाथी की तलाश - श्री हुलेश्वर जोशी

जीवनसाथी की तलाश - श्री हुलेश्वर जोशी

29-Jun-2020

 


यदि आप स्वयं के लिए अथवा अपने संतान के लिए जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं तो यह लेख आपका मार्गदर्शन कर सकता है।

सबसे पहले आपको यह जान लेना आवश्यक है कि "हर लड़की - लड़का योग्य है, योग्यता किसी में कम या अधिक नहीं। बस किसी भी लड़के या लड़की के लिए उसके टाइप का, उसके समानांतर जीवनसाथी चाहिए होता है।" यह बात आपको पचने वाला नहीं है मगर यही सत्य है, मगर जो आपको देखने समझने में कुछ कम ज्यादा लग रहा है वह केवल अवसर की असमानता के कारण है।

हो सकता है आप बैचलर हों, मास्टर हों, एडवोकेट हों, सीए हों, इंजीनियर हों, डॉक्टरेट किये हों और सामने जिसे देख रहे हैं वह साक्षर भी न हों, तो इसका मतलब यह नहीं कि सामने वाले योग्य नहीं है। बस अवसर की असमानता जिसमें आपको अच्छा अवसर मिला और उन्हें अच्छे अवसर या माहौल ही नहीं मिल पाया हो। हो सकता है आप आईएएस हों, आईपीएस हों, मजिस्ट्रेट हों, वैज्ञानिक हों, प्रोफेसर हों, बड़े व्यवसायी हों या आप किसी विशालकाय सीमा में राजनीति के प्रमुख शक्तिकेन्द्र हों, तो इसका एक मात्र कारण "अवसर" हो सकता है।

आपसे अनुरोध है कि आप अपने हिसाब से सामान अवसर मिलने वाले से ही नही बल्कि सदैव कम अवसर मिलने वाले से विवाह करिए, सम्भव है ऐसे जीवनसाथी आपको ईश्वर से अधिक महान जान सकेंगे। जबकि समांतर जीवन साथी के नजर में आप योग्य दिखेंगे मगर इसकी कोई गारंटी नहीं है कि वे आपका अच्छा खासा सम्मान करेंगे।

अक्सर देखने मे आता है कि पुरूष वर्ग जब लड़की देखने जाते हैं तो सामने वाली लड़की की सुंदरता और शिक्षा को देखते हैं कुछ लोग जो स्वयं अच्छे पद में रहते हैं वे भी समांतर पद की लड़की ही खोजते हैं या अपने से अधिक शैक्षणिक योग्यता वाली लड़की देखते हैं ताकि वे उनसे रोज़गार करवा सकें, प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से बराबर या अपने स्वयं से अधिक उचे दर्जे का पदवी पा सके। अधिक हद तक ऐसे विचार सबके भीतर है, न्यायसंगत भी प्रतीत होता है मगर आप सार्वभौमिक रूप से सोचेंगे तो पाएंगे कि समाज मे असमानता का सबसे प्रमुख कारण यही सोच है। एक वर्ग अधिक शक्तिशाली हो रहा है, एक वर्ग अधिक धनवान हो रहा है एक वर्ग अधिक दिमाक वाला हो रहा है जिसके कारण शक्ति और धन आबादी की 70% से अधिक जनसंख्या के हिस्से कुछ नहीं है। यही असमानता किसी भी सीमाक्षेत्र में वर्गसंघर्ष को जन्म देती है। यह संघर्ष ही समानता और आत्मीयता का दुश्मन है इसके कारण ही अधिकतर लोग बराबर अवसर अर्थात बराबर शिक्षा, सम्मान, ओहदा, धन से परे रहकर जीवन जीने को मजबूर हैं। एक हिस्सा बड़े मजे से बहुसंख्यक समुदाय के हिस्से में मजा ले रहा है तो बहुसंख्यक समुदाय अपने मूलभूत जरूरत से वंचित अस्थिरता पूर्ण जीवन जीने को मजबूर है।

मनकी, अब मुंगेली जिला का एक गाँव है यहाँ एक मंडल हुआ करते थे संभु मंडल, पुरा नाम था श्री संभुदास जांगड़े। आसपास के बुद्धजीवी लोगों में उनका ओहदा बड़ा था आसपास के लोग उनसे सलाह मशविरा करने आते थे और सामाजिक, गैर सामाजिक मामलों के बैठकों में उनके तर्क और पक्ष का तोड़ कम ही मिलता था। मेरा बचपन खासकर गर्मी का दिन उन्ही के सानिध्य में गुजरता था, उनके द्वारा लगाए गस्ती और पीपल का वृक्ष ही गाँव का सबसे बड़ा सभास्थल हुआ करता था। वे अपने जीवन की 50% से अधिक समय इसी गस्ती के छांव में व्यतीत किए, एक बार की बात है मेरे एक मित्र के बड़े भैया की विवाह के लिए लड़की खोजने की बात चल रही थी उस दौरान उन्होंने कहा था "यदि आप सुंदरता का मतलब गोरी चमड़ी को मानते हैं तो आपसे अधिक अमानवीय सोच वाला इंसान पूरे विश्व में कोई और नहीं होगा।" उन्होंने आगे कहा था हमारे समय मे तो गर्भ के भीतर ही वैवाहिक अथवा मैत्री संबंधों की नींव रख दी जाती थी और ऐसे संबंध अधिक सफल रहे। आज हम लोकतंत्र के नागरिक हैं हमारे लाखों अधिकार हैं एक अच्छा खासा सिस्टम हमारे लिए हमारे अच्छे जीवन के लिए काम कर रहा है। अब लड़के और लड़की के लिए निर्धारित आयुसीमा तय है मतलब दोनो ही परिवार चलाने में सक्षम हैं ऐसे में तो विवाह को और भी अधिक सफल होना चाहिए मगर नहीं! पता है इसका कारण? इसका कारण है तीव्र इच्छाशक्ति, ऐला चाकंव कि ओला चाकंव वाले मन। अकेले आप मन, दिल या दिमाक से काम लेंगे या इनके योग से भी निर्णय लेंगे तो वह अमानवीय अथवा असफलता का कारक ही होगा इसलिये मनुष्य को अपनी आत्मा की सुनना चाहिए अंतरात्मा की बात सुनिए, अंतरात्मा से लिए गए निर्णय भी कतिपय मामलों में गलत हो सकते हैं यदि गलत है और सुधारने योग्य तो सुधारिए। मैंने इतिहास से लेकर अपने जीवन के शुरुआती दिनों तक राजपाठ के लिए हिंसा होते देखा, आज छोटी मोटी बातों के लिए लोग खून के प्यासे हो चले हैं। हिंसा और हत्या किसी भी शर्त में अच्छा या मानवीय नहीं हो सकता, चाहे इंसान की हो या अमुक पशु पक्षियों की। मैंने लगभग सभी धर्मों का धार्मिक पुस्तक पढ़ा है, रामायण के उस प्रसंग की बात बताना चाहता हूं जिसमें राजा राम और काल की वार्तालाप के समय शर्त उल्लंघन होने पर शर्त के अनुसार लक्ष्मण की हत्या करना था। विकल्प निकाला गया "मारने से अच्छा त्यागना" यदि किसी कारण से वैवाहिक जीवन सुखमय न रहा तो उसे सुखमय और सफल बनाया जा सकता है। इसके बावजूद लोग एकाकी परिवार की ओर बढ़ने के कारण इस विकल्प से वंचित होते जा रहे हैं यही वजह है पति पत्नी में आपसी विवाद और हिंसा, ये हिंसा और प्रताड़ना घोर अमानवीय और अव्यवहारिक है। यदि आप अपने जीवन सुखमय नहीं बना सकते हैं तो आपको विवाह विच्छेद का रास्ता अपनाना चाहिए यदि आप हिंसा या आत्महत्या कर रहे हैं तो आपसे बड़ा दुष्ट कंश भी नहीं रहा होगा। आप रामायण से सीखिए "मारने अथवा मरने से अच्छा त्यागना"

एक दिन की बात है दोपहर में मैं अपने अनन्य मित्र बीरेंद्र, श्री बीरेंद्र कुमार कुर्रे के साथ गस्ती के पास गए, खेल रहे थे और भी कुछ लोग थे मगर संभु मंडल वहां नही थे। कोई कुछ उल्टा सीधा बोल रहा था मगर उसके घर जाकर देखने की हिम्मत किसी में नही था। लोगों का कहना था उसे पिछले दिन 2-3 बार खार बाहिर जाते देखे हैं कहीं मंडल टपक तो नही गया? वे लगभग 115 साल के रहे होंगे, इसलिये उनके मृत्यु के बारे में सोचना सहज था। संभु मंडल नहीं मरेंगे यह मेरा विश्वास था, क्योंकि वे अमर हैं। मेरा पूरा परिवार उन्हें अमर जानते हैं, वह किसी धर्मगुरु अथवा महात्मा से कम नहीं थे, फर्जी और ढोंगी नहीं बल्कि सच्चे वाले महात्मा, सचमुच का धर्मगुरु। संभु मंडल का विश्वास था जब तक उनका रुपया लोगों के पास है लोग उनके कर्जदार रहेंगे तब तक वे जिंदा रहेंगे। इसलिए वे लोगों से उनके खेत, घर, सायकल, गाय- भैस या अन्य स्वर्ण आभूषण या बर्तन को गहना लिखवाकर रुपये दे दिया करते थे। ख्याल रखिए वे इन धरोहर की चीजों को अपने पास नही रखते बल्कि मूल मालिक के पास ही छोड़ देते थे। ब्याज नहीं बल्कि पिलारि लेते थे, पिलारि मतलब महीने के ब्याज को हर महीने मांग लेता जब तक वे जिंदा हैं तभी तक आप उनके कर्जदार हैं यदि उनकी मृत्यु हो गई तो कर्ज माफ, उनके वारिस को कर्ज वशूलने या मांगने का कोई अधिकार नही होगा। आप किसी महीने पिलारि नहीं दे पाते तब भी कोई बात नहीं, अगले महीने दे दीजिए अगले महीने भी नही देंगे तो कोई बात नहीं अपने दुःख या कारण बता दीजिए। जब वे पिलारि लेने आएं तो आदर से आसन दे दीजिए, चाय पानी या भोजन के लिए पूछ लीजिए फिर वे हलि भली पूछकर चले जायेंगे, पिलारि भी नहीं मांगेंगे, यदि आपका प्रेम और सम्मान सच्चा नही है तो वे न तो आपके घर पानी पियेंगे न बैठेंगे, बल्कि तगादा करके चले जायेंगे आप अगली संभावित तिथि बता दीजिए या इस महीने के पिलारि के लिए माफी मांग लीजिये। आप उनके सामने बेईमान हूँ कहकर भी उनके कर्ज के बोझ से मुक्त हो सकते हैं। मनकी के 40% से अधिक गरीब परिवार उधारी लेते थे, उधारी देने की शुरुआत उन्होंने अपने 50 या 70 वर्ष के उम्र होने के साथ ही कर दिया था।

मैं और बीरेंद्र संभु मंडल के घर गए, वे दरवाजा बंद किये हुए थे, बीरेंद्र ने दरवाजा खटखटाया उन्होंने आवाज दी, कौन झमलु? मैंने आवाज दी हव बबा। खोल रहा हूँ बेटा... उन्होंने दरवाजा खोलकर बोला खाना खाए हो कि नहीं? हमने कहा खा लिए हैं। पुनः कहा बासी बचे हे, तय खा ले बीरेंद्र। बीरेंद्र ने बताया कि वह जब अभी कुछ समय पहले खा रहा था तभी मैं उनके घर आया था। बीरेंद्र अधिक सीधा सच्चा आदमी था, बबा आपको तो अनपढ़ हैं बोलते हैं फिर ये इतने सारे पुस्तक आपके पास? आप अंग्रेजी के किताब को खोलकर क्या कर रहे हैं? वे हँसने लगे, और बोले बेटा बीरेंद्र, ये सारे पुस्तक अलग अलग धर्मों के धार्मिक पुस्तक हैं जिसके माध्यम से कुछ कुछ समझने और जानने में सहायता मिलती है। उनके पास हिन्दू, मुश्लिम, ईसाई और फारसी के धार्मिक पुस्तक थे। बीरेंद्र ने पूछा सबसे उच्च जाति के कौन है? जवाब आया - कोई नहीं, ये जाति धर्म का विभाजन केवल फुट डालो और राजकरो का सिद्धांत है। तब उन्होंने जाति धर्म के सिद्धांत का विरोध करते हुए कहा था बेटा यदि आप इसके विभाजनकारी सिद्धांतों के झांसे में आओगे तो मनुष्य नहीं बन पाओगे। सभी मनुष्य को गुरु घासीदास बाबा के बताए बात "मनखे मनखे एक समान" को जानने और उसके अनुसार जीवन जीने की जरूरत है। आप सतनामी हैं या सतनामी नहीं हैं फिर भी आपको गुरु घासीदास बाबा के बताए अनुसार जीवन के विकल्प का चुनाव करना चाहिए। यदि आप गुरु घासीदास बाबा के रास्ते नहीं चलेंगे तो आप भी केवल सतनामी होकर रह जाओगे, मनुष्य नहीं बन पाओगे। मनुष्य को किसी जाति या धर्म का होने की नही बल्कि मनुष्य होने की जरूरत है, मेरा मानना है कोई भी सामाजिक धार्मिक सिद्धांत अपने आप में पूर्ण और श्रेष्ठ नही हो सकता। मानवता को जानने के लिए, धर्म को समझने के लिए केवल आप "मनखे मनखे एक समान" और "सत्य ही मानव का आभूषण है" यह जानकर जीवन जिएं, यदि आप इससे अपरिचित हैं आप मेरे बातों से सहमत नही हैं तो आपको चाहिए कि आप मेरी तरह सभी धर्म के पुस्तकें पढ़कर समझें फिर जान पाएंगे कि कौन से धर्म के कौन से बात सही है और कौन से बात झूठ हैं। अपना दीपक खुद जलाओ अपने अंदर के अंधेरे को मिटाओ। मैं जब से अपना होश संभाला हूँ तब से धार्मिक विभाजन के खिलाफ हूँ परंतु जातिगत व्यवस्था के पक्षधर रहा हूँ अब भारत के आजाद होने के साथ ही जातिव्यवस्था को समाप्त करने योग्य जान चुका हूं।

प्रिय पाठक, अब तक आप संभुमण्डल की जाति धर्म के संबंध में विचार को समझ चुके होंगे, सम्भव है आप इस लेख को पढ़ने के पहले ही जाति और धर्म के सिद्धान्तों को समझ चुके होंगे। यदि नहीं तो अब समझने का प्रयास करिए, जाति और धर्म के विभाजनकारी सिद्धांत को तोड़ने का सबसे अच्छा तरीका है सभी जाति धर्म के बीच रोटी बेटी का सहज संबंध स्थापित करना। अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करिए अपने संतान के लिए जाति धर्म के भेद मिटाकर लड़का या लड़की खोजिए। सम्भव है कुंठा से ग्रसित कुछ लोग आपसे दुर्व्यवहार भी कर दें मगर आप अपना काम करिए, मानवता के अनुकूल जीवनसाथी की खोज करिए। जिस दिन हम समाज को जाति धर्म के बंधन से मुक्त कर लेंगे, जिस दिन हम असमान को समाप्त कर पाएंगे उसी दिन यह धरती उस काल्पनिक स्वर्ग का वास्तविक आकार ले लेगा।

वैवाहिक जीवन की अग्रिम शुभकामनाएं.....


मलेशिया में फंसे सीए दंपत्ति ने माना राज्यपाल का आभार !

मलेशिया में फंसे सीए दंपत्ति ने माना राज्यपाल का आभार !

25-Jun-2020

छिंदवाड़ा - कोरोनावायरस लॉकडाउन के चलते मलेशिया में फंसे सीए शैलेंद्र अग्रवाल और उनकी पत्नी सीए खुशी अग्रवाल ने संकट की घड़ी में छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके द्वारा की गई मदद के लिए उनका आभार जताया है । आज सर्किट हाउस पर सपरिवार अपने सामाजिक बंधुओं के साथ पहुंचे सीए शैलेंद्र अग्रवाल ने मलेशिया में बिताए उन कठिन 60 दिनों के बारे में याद करते हुए बताया कि अनिश्चितता का माहौल था सरकारें पल पल नए-नए नोटिफिकेशन जारी कर रही थी ऐसी स्थिति में राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके द्वारा जो मदद दी गई उसके लिए वह और उनका परिवार सदैव उनका ऋणी रहेगा ।  अग्रवाल दंपत्ति के माध्यम से मलेशिया में जो अन्य भारतीय फंसे थे उन्होंने भी महामहिम राज्यपाल का आभार व्यक्त किया है और उनके द्वारा किए गए सहयोग के लिए उन्हें साधुवाद ज्ञापित किया है  । 

विदित हो कि सीए दंपत्ति के मलेशिया के कुआलमपुर में फंसने पर केंद्र सरकार के शासकीय अधिवक्ता सत्येन्द्र ठाकुर ने इस मामले को जोर-शोर से उठाया था और उनके द्वारा संज्ञान में लाए जाने पर छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनु सुईया  उइके  द्वारा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के माध्यम से मलेशिया एंबेसी से संपर्क कर अग्रवाल दंपत्ति और उनके परिवार को सहायता उपलब्ध कराई थी ।


श्री गुरुसिंघ सभा समिति छिन्दवाड़ा द्वारा छिन्दवाडा की बेटी  छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उईके जी से भेट

श्री गुरुसिंघ सभा समिति छिन्दवाड़ा द्वारा छिन्दवाडा की बेटी छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उईके जी से भेट

24-Jun-2020

 आज श्री गुरुसिंघ सभा समिति छिन्दवाड़ा द्वारा छिन्दवाडा की बेटी  छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उईके जी से भेट कर सरोपा प्रदान किया और कोरोना आपदा के दौरान समिति द्वारा जिले भर मे किये गये कार्यो से अवगत कराया श्री गुरुसिंघ सभा समिति ने जिले के लिये माननीय महामहिम के द्वारा किये गये सहयोग और जनसेवा के लिये सुश्री उईके जी के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि हमे गर्व है कि आप छिंदवाड़ा की बेटी है इतने बड़े मुकाम पर पहुँचने के बाद भी आम आदमी की पहुँच आप तक पहुंचती है और आप सर्वसाधारण के सदा सहयोग के लिये तत्पर रहती है

आपकी ये विनम्रता और सरलता ने ही आपको ये मुकाम दिया है समिति द्वारा राज्यपाल जी को गुरुद्वारे आने का निवेदन किया गया कि जब भी आप अगले दौरे मे छिंदवाड़ा आये तब श्रीगुरुग्रंथ साहब का आशीर्वाद लेने गुरुद्वारे पधारे सुश्री उईके जी ने समिति द्वारा किये गये कार्यो की सराहना की और समिति को धन्यवाद प्रेषित किया और कहा कि जब भी देश किसी भी संकट  मे  आया है तब  सिख समाज देश के लिये सर्वस्व न्योछावर करने के लिये तत्पर रहा है इस अवसर पर  केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त शासकीय अधिवक्ता सत्येन्द्र ठाकुर,सरदार अजीत सिंग टुटेजा जी सरदार गुरमीत सिंह अरोरा जी सरदार खुशपाल सिंह भामरा जी सरदार मंजीत सिंह बग्गा जी सरदार रतनदीप सिंह अरोड़ा जी सरदार सोनू टुटेजा जी उपस्थित थे


एक सच्ची हकीकत महात्मा गांधी के प्राणरक्षक स्वतंत्रता सेनानी बत्तख मियां अंसारी के जन्मदिन के अवसर पर

एक सच्ची हकीकत महात्मा गांधी के प्राणरक्षक स्वतंत्रता सेनानी बत्तख मियां अंसारी के जन्मदिन के अवसर पर

24-Jun-2020

महात्मा गांधी के प्राणरक्षक बत्तख मियां को प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद द्वारा मिली भूमि पिछड़ों के राज में भी नहीं मिली क्यों?

*जावेद बिन अली स्वतंत्र पत्रकार (पूर्व डी.जी. अंसारी 

 

उत्तर प्रदेश लखनऊ : भारत के प्रसिद्ध पत्रकार एवं लेखक खुशवंत सिंह के अनुसार भारत की आजादी की कहानी और इतिहास मुसलमानों के खून से लिखी गई है आबादी के लिहाज से कम प्रतिशत होने के बावजूद भी आजादी में मुसलमानों की एक बड़ी आबादी ने ना बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया बल्कि अपने वतन अजीज की आजाद को यकीनी बनाने मे बढ़ चढ़क कर हिस्सा लिया दिल्ली की इंडिया गेट पर तकरीबन 95300 मुजाहिदीन आजादी के नाम लिखे गए हैं जिनमें से 61945 मुसलमान हैं सृष्टि 5% मुस्लिम मुजाहिदीन आजादी थेll हैदर अली उनके बहादुर पुत्र टीपू सुल्तान ने 1780 और 1790 मैं ब्रिटिश साम्राज्य के हमलावरों के खिलाफ रॉकेट और तोप के प्रयोग से उनके दांत खट्टे कर दिए थे l

आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी को जान से खत्म करने के लिए उन पर छ बार हमला किया गया था lलेकिन जिसे बचाने वाला अल्लाह हो उसे कौन मार सकता है l कानपुर से प्रकाशित होने वाला प्रताप अखबार मे बिहार की नील खेती करने वाले किसानों के हालात पीर मोहम्मद मूनिस के कालम से गांधीजी प्रभावित थे l उसी क्रम में जब 1916 में कांग्रेस के वार्षिक सत्र में बेतिया जिला के अंग्रेजी हाई स्कूल के अध्यापक, कवि और सहाफी पीर मोहम्मद मुनिस के आग्रह पर जब गांधी जी 1917 में चंपारण सत्याग्रह के लिए पहुंचे थे l उसी समय कारखानों के मैनेजर इरविन ने अंग्रेजों की आंख में गढ़ने वाले महात्मा गांधी का काम समाप्त करने का मंसूबा बना लिया l

मैनेजर इरविन ने खानसामा बत्तख मियां अंसारी के माध्यम से जहर से भरी दूध को उन तक पहुंचा तो जरूर दियाl लेकिन बत्तख मियां को अल्लाह की याद आई और अपने नम आंखों से महात्मा गांधी को दूध पीने से मना कर दिया lजान तो बच गई महात्मा गांधी की ,लेकिन अंग्रेजी सरकार ने उनकी पुश्तैनी 12 एकड़ भूमि छीन कर उनके घर तक को तहस-नहस कर के पूरे घर को बर्बाद कर दिया और जेल की सलाखों में डाल दियागयाl

मंडल कारागार मोतिहारी के पत्रांक संख्या 1935 के अनुसार बत्तख मियां को धारा 188 भारतीय दंड विधि के अंतर्गत डिप्टी सिटी मजिस्ट्रेट के न्यायालय से 5.12 .1921 को 1 माह का कारावास की सजा हुई थी l मारने वाले से जान बचाने वाले की ज्यादा इज्जत होनी चाहिएl लेकिन दुर्भाग्य हैl गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को भारत का बच्चा बच्चा जानता है lलेकिन 1917 में चंपारण आंदोलन के समय खानसामा बत्तख मियां अंसारी ने किस तरह अपनी इमानी ताकत के माध्यम से महात्मा गांधी की जान बचाई थी lइसको भारत के 5% लोग तक नहीं जानते हैं l

इसी कार्य को देखते हुए प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने बिहार सरकार को कृषि भूमि 50 एकड़ देने के लिए आदेश किया थाl लेकिन आजादी के बाद से लेकर आज तक केंद्र और राज्य सरकार ने दलित समाज पिछड़ी समाज अल्पसंख्यक समाज सभी को खूब ठगा हैl और आज तक ठगने का कार्य चल रहा है और इस लॉकडाउन में तो आंखों के सामने दलितों पिछड़ों गरीबों के साथ क्या सलूक किया गया? सारी दुनिया आज तक देख रही है l

बिहार राज्य में भोला पासवान शास्त्री, कर्पूरी ठाकुर ,अब्दुल गफूर, लालू प्रसाद यादव , राबड़ी देवी, नीतीश कुमार, जीतन राम मांझी आदि जैसे लोगों ने दलित पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का मसीहा बनकर आज तक राज्य करते आ रहे हैं lफिर भी महान स्वतंत्रता सेनानी महात्मा गांधी के प्राण रक्षक बत्तख मियां अंसारी के इस योगदान को भुला दिया गया l प्रथम राष्ट्रपति की आत्मा जरूर इन पिछड़े मुख्यमंत्रियों से पूछेगीl पूर्वी चंपारण के निवासी और बत्तख मियां के वारिस प्रपत्र चिराग अंसारी ने बताया कि बिहार सरकार द्वारा मात्र 5 एकड़ जमीन इनके वारिसों को मिला था lइसमें से आधा फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने ले लिया l बाकी जमीन नदी ने छीन लिया l भारत सरकार के राष्ट्रपति आदेश के बावजूद भी उनके वारिस दैनिक मजदूरी करने पर मजबूर हैं l

अब तो हद यह है मोतिहारी स्टेशन पर रेल मंत्री लालू प्रसाद द्वारा मुख्य गेट पर स्वतंत्रा सेनानी बत्तख मियां द्वार वर्ष 2006 में लिखा गया थाl लेकिन 2017 में भाजपा सांसद राधे मोहन सिंह द्वारा इस शिला पट को भी हटा दिया गया l

उन्होंने यह भी बताया कि 15 नवंबर 2016 को जिले के तमाम बड़े अधिकारी एक साथ स्वतंत्रा सेनानी बत्तख मियां के दरवाजे पर उपस्थित होकर यह घोषणा किया था l 40 बीघा जमीन बत्तख मियां के वारिसों को दी जाएगी lइसके लिए तमाम कागजात की तैयारी भी हुई थीl कुछ दिनों के बाद अधिकारी बदल गए और इरादा भी सरकार का अभी तक बदला हुआ है l

उन्होंने ये भी बताया सरकार द्वारा छथोनि थाना जिला मोतिहारी के सामने वर्ष 2004 में बत्तख मियां अंसारी मेमोरियल पुस्तकालय का निर्माण कराया गया थाl जिसका उद्घाटन शिव कुमार जिलाधिकारी और श्रीमती रामा देवी विधायक के कर कमलों द्वारा किया गया थाl पुस्तकालय मे किताब होनी चाहिएएl किताब की जगह विगत कुछ माह से ईवीएम मशीन रखी जा रही है l जिला अधिकारी का ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुईl मेरे द्वारा जिलाधिकारी मोतिहारी से कई बार संपर्क स्थापित किया गयाl लेकिन असफलता के बाद उप जिलाधिकारी पूजा कुमारी ने बताया कि बत्तख मियां के लोग पश्चिमी चंपारण में रहते हैं l

वहां पर कुछ भूमि मिली थी और जहां तक ईवीएम मशीन का संबंध हैl खाली पड़ी सरकार की हाल में ईवीएम मशीन रखी हुई है lजिसे अभी हटाना मुमकिन नहीं हैl

पूर्वी चंपारण मे भी बत्तख मियां अंसारी के प्रपौत्र चिराग अंसारी रहते हैंl बत्तख मियां अंसारी की पैदाइश 25 जून 1869 एवं मृत्यु 4 दिसंबर 1957 है l इनके पिता का नाम मोहम्मद अली मियां, मां का नाम रुकसाना खातून तथा इनकी स्त्री का नाम इमरा खातून है ! इन की पैदाइश ग्राम सिसवा अजगरी थाना बंजरिया मोतिहारी पूर्वी चंपारण बिहार में हुआ था l 18 वर्ष की आयु में महात्मा गांधी की जान का प्राण रक्षक बन कर अपनी तमाम खुशियों को अंधेरे में धकेल दिया था  इसी भारत में अंग्रेजों से माफी मांग कर आज भारत का सबसे बड़ा राष्ट्र प्रेमी बने हुए हैंl बत्तख मियां अंसारी के तीन लड़के थे lसबसे बड़े लड़के का नाम रशीद मियां दूसरे बच्चे का नाम शेर मोहम्मद मियां और तीसरे छोटे बच्चे का नाम मोहम्मद जान अंसारी हैl बड़े लड़के रशीद मियां के बच्चे पूर्वी चंपारण में रहते हैंl दूसरे नंबर के शेर मोहम्मद मियां और सबसे छोटे मोहम्मद जान अंसारी के बच्चे पश्चिमी चंपारण जिला के गांव एक्वा परसोनी थाना शोहदरा में निवास करते हैं l

इस संबंध में मोहम्मद वजीर अंसारी पूर्व डी जी पी छत्तीसगढ़ ने बताया कि आजादी के 70 साल बीत जाने के बावजूद भी बत्तख मियां अंसारी को इस तरह गुमनामी की दुनिया में भेज दिया गया थाl क्या कभी किसी ने सोचा है? नाथूराम गोडसे की तरह बत्तख मियां अंसारी पहले काम तमाम कर दिया होता तो वर्ष 1917 चंपारण सत्याग्रह के बाद से ही दूसरी दिशा बदल गई होती l

इसलिए महात्मा गांधी और बत्तख मियां अंसारी के संयुक्त तौर पर गंगा जमुना तहजीब को कायम रखने के लिए भारत के सभी राज्यों में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की जरूरत हैl समाज में नफरत न डालकर, मोहब्बत की दुनिया बसाने की जरूरत है   और प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा घोषित की गई कृषि हेतु उनके वारिसों को उनके वारिसों को बिहार राज्य सरकार उपलब्ध कराएं नहीं तो बड़ा जग हंसाई हो रहा है राष्ट्रपति का आदेश ठंडे बस्ते में पड़ जाए फिर कोई देश के नाम नीचावर होने को तैयार नहीं होगाl इस बार तो चुनावी मुद्दा भी यह बनेगा l इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तत्काल हस्तक्षेप करने की जरूरत है और सबसे दुख की बात तो यह है पिछड़ों के नाम से बनी लगभग 200 संस्थाओं मैं खासतौर पर ऑल इंडिया मोमिन कॉन्फ्रेंस ,बिहार राज्य मोमिन कॉन्फ्रेंस, अनसार मोमिन सभा ,पसमांदा महाज ,मुस्लिम पिछड़ा वर्ग कन्फर्डेशन बिहार से लेकर दिल्ली तक किसी ने इसकी तरफ ध्यान सरकार का आकर्षित नहीं कराया सिर्फ अपनी रोजी-रोटी में पड़े रहे l


जाएँ तो कहाँ जाएँ? आखिर अभिभावक किससे लगाएँ गुहार? - प्रकाशपुंज पाण्डेय

जाएँ तो कहाँ जाएँ? आखिर अभिभावक किससे लगाएँ गुहार? - प्रकाशपुंज पाण्डेय

24-Jun-2020

प्रकाशपुंज पाण्डेय 

रायपुर : समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने पुनः एक बार वर्तमान स्थिति को देखते हुए मीडिया के माध्यम से आम जनता, प्रशासन और शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि जहाँ एक ओर नोटबंदी के बाद से ही देश की जनता आर्थिक संकट से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण हुए देशव्यापी लॉकडाउन के कारणवश अब ये आर्थिक स्थिति बद से बदत्तर हो चुकी है। लेकिन चिंता की बात यह है कि इस विपरीत स्थिति में भी कुछ लोग, कुछ संस्थान और कुछ संगठन, मानवता और संवेदनशीलता पूरी तरह से भूल चुके हैं। यहां तक की यह लोग, यह संगठन और यह संस्थान सरकारी नियमों का भी पालन नहीं कर रहे हैं और पूरी तरह से केवल पैसे के लिए सरकारी फ़रमान की अनदेखी कर रहे हैं और लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर रहे हैं। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और सभी प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने देशवासियों को आश्वस्त किया था की कोरोनावायरस के कारण हुए देशव्यापी लॉकडाउन में कोई किसी से किराया नहीं लेगा, कोई किसी पर दबाव नहीं डालेगा, कोई सरकारी या गैर सरकारी स्कूल या कॉलेज अभिभावकों पर फीस के लिए कोई दबाव नहीं डालेंगे ना ही कोई मैसेज या कॉल करेंगे, लोग वर्क एट होम कर पाएंगे लेकिन उनकी पगार नहीं कटेगी। लेकिन ज़मीनी हकीक़त कुछ और ही है। असल बात यह है कि लोगों की नौकरियाँ चली गईं, किरायेदारों ने मकान मालिकों के दबाव के कारण या तो अपने सामान बेचकर किराया दिया या तो घर छोड़कर जाने को मजबूर हुए, बैंकों ने ईएमआई सुचारू रूप से वसूल की नहीं तो लोगों को भारी भरकम पेनल्टी भरने की चेतावनी दी, मजदूर काम नहीं होने के कारण अपने अपने घरों को जाने के लिए जूझते रहे जो कि पूरे देश ने देखा और स्कूल व कॉलेज अभिभावकों को निरंतर मैसेज भेजते रहे और आज भी भेज रहे हैं कि वह स्कूल की फीस जमा करवाएं। इन स्कूल व कॉलेजों में न केवल प्राइवेट बल्कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित स्कूल भी अभिभावकों को मैसेज व कॉल कर रहे हैं। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि अब प्रश्न यह उठता है कि यह अभिभावक किस से गुहार लगाएं, किसकी शरण में जाएं, क्योंकि सरकारें अपने अधिकारियों को आदेश तो जारी करने के लिए बोलती हैं लेकिन कभी यह नहीं देखतीं कि क्या उन आदेशों का सुचारू रूप से पालन हो रहा है? देश में यह जो स्थिति उत्पन्न हुई है उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि ना सरकारी नीति सही है ना नियम सही है और सरकारी नियमों और आदेशों का क्रियान्वयन सही प्रकार से हो रहा है या नहीं उस पर ना कोई अंकुश है और न ही उनका सुपरविजन हो पा रहा है। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि  प्राइवेट स्कूल कॉलेजों के साथ ही, केंद्रीय विद्यालय जैसे संगठन भी अभिभावकों को फीस भरने के लिए मैसेज भेज रहे हैं जो कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित है। अब मैं मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और छत्तीसगढ़ राज्य के शिक्षा मंत्रियों से यह प्रश्न करता हूं कि जब देश में कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण हुए लॉकडाउन के बाद आर्थिक संकट उत्पन्न हुआ है, लोगों के पास अपने जीविकोपार्जन के लिए पैसे नहीं हैं तो उस सूरत में लोग अपने बच्चों की स्कूल फीस कैसे भरें और जब सरकारें कह रही हैं कि फिलहाल फीस भरने की जरूरत नहीं है तो यह प्राइवेट और सरकारी शैक्षणिक संगठन किस आधार पर अभिभावकों को फीस देने के लिए मैसेज भेज रहे हैं। यह विचारणीय है।

इस पर कृपया ध्यान दें नहीं तो देश में बहुत ही विकराल स्थिति पैदा हो जाएगी, साथ ही मैं मांग करता हूं की एक ऐसी टीम का गठन किया जाए जो कि देश में सभी प्रकार के निर्देशों और आदेशों के पालन और क्रियान्वयन का सुपरविजन करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्या केंद्र और राज्य की योजनाएं और नियमों का पालन सही प्रकार से हो पा रहा है या नहीं? क्या वाकई जनता को इन नियमों आदेशों और योजनाओं से लाभ मिल पा रहा है या नहीं! 


क्या देश में बेरोज़गारी की समस्या के समाधान का कोई रोडमैप है मोदी सरकार के पास? - प्रकाशपुंज पाण्डेय

क्या देश में बेरोज़गारी की समस्या के समाधान का कोई रोडमैप है मोदी सरकार के पास? - प्रकाशपुंज पाण्डेय

19-Jun-2020

 प्रकाशपुन्ज पाण्डेय

समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने देश के एक अतिमहत्वपूर्ण विषय पर मीडिया के माध्यम से जनता का ध्यानाकर्षण करते हुए केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार से प्रश्न किया है कि देश में बेरोज़गारी की समस्या का समाधान कब तक होगा और क्या मोदी सरकार के पास इस सबसे बड़ी समस्या के समाधान के लिए कोई रोडमैप है? क्या सरकार ने इसके समाधान के लिए कोई रास्ता निकाला है? 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि जब 2014 में देश में बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और काले धन के मुद्दों पर सत्ता परिवर्तन हुआ तो लोगों को आस थी कि जो वायदे किए गए थे वे पूरे होंगे। जैसे कालाधन वापस आएगा लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं है, भ्रष्टाचार दूर होगा लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं है, उल्टा भ्रष्टाचार और बढ़ गया है, देश बेरोज़गारी की समस्या का हल होगा और प्रतिवर्ष 2 करोड़ नए रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं है। कोई वायदा पूरा नहीं हो पाया। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017-18 में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोज़गारी दर 6.1 फीसदी रही, जबकि 2011-12 में यह 2.2 फीसदी था। साल 2017-18 में छत्तीसगढ़ में सबसे कम बेरोज़गारी दर 3.3 फीसदी रही। यह दर मध्य प्रदेश में 4.5 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 4.6 फीसदी रही।

सितंबर से दिसंबर 2019 के चार महीनों में बेरोज़गारी की दर 7.5 फीसदी तक पहुंच गई, यही नहीं, उच्च श‍िक्ष‍ित लोगों की बेरोज़गारी दर बढ़कर 60 फीसदी तक पहुंच गई है। ग्रामीण भारत की तुलना में शहरी भारत में बेरोज़गारी की दर ज्यादा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के द्वारा जारी आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि सरकार को इन आंकड़ों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण हुए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण बेरोज़गारी की समस्या अब अपने चरम पर पहुंचने वाली है। 

 


कोरोना की व्याधि: योग की आंधी

कोरोना की व्याधि: योग की आंधी

19-Jun-2020

- ललित गर्ग -

योग की एक किरण ही काफी है भीतर का तम हरने के लिये, दुनिया में अमन एवं शांति स्थापित करने के लिये। शर्त एक ही है कि उस किरण को पहचानने वाली दृष्टि और दृष्टि के अनुरूप पुरुषार्थ का योग हो। भारतभूमि अनादिकाल से योग भूमि के रूप में विख्यात रही है, जिसका लाभ अब समूची दुनिया को मिल रहा है। भारत का कण-कण, अणु-अणु न जाने कितने योगियों की योग-साधना से आप्लावित हुआ है। तपस्वियों की गहन तपस्या के परमाणुओं से अभिषिक्त यह माटी धन्य है और धन्य है यहां की हवाएं, जो साधना के शिखर पुरुषों की साक्षी हैं। इसी भूमि पर कभी वैदिक ऋषियों एवं महर्षियों की तपस्या साकार हुई थी तो कभी भगवान महावीर, बुद्ध एवं आद्य शंकराचार्य की साधना ने इस माटी को कृत्कृत्य किया था।

साक्षी है यही धरा रामकृष्ण परमहंस की परमहंसी साधना की, साक्षी है यहां का कण-कण विवेकानंद की विवेक-साधना का, साक्षी है क्रांत योगी से बने अध्यात्म योगी श्री अरविन्द की ज्ञान साधना का और साक्षी है महात्मा गांधी की कर्मयोग-साधना का। योग साधना की यह मंदाकिनी न कभी यहां अवरुद्ध हुई है और न ही कभी अवरुद्ध होगी। इसी योग मंदाकिनी से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयत्नों एवं उपक्रमों से आज समूचा विश्व आप्लावित हो रहा है, निश्चित ही यह एक शुभ संकेत है सम्पूर्ण मानवता के लिये। विश्व योग दिवस की सार्थकता इसी बात में है कि सुधरे व्यक्ति, समाज व्यक्ति से, विश्व मानवता का कल्याण हो। सचमुच कोरोना महाव्याधि से पीड़ित विश्व में योग वर्तमान की सबसे बड़ी जरूरत है, रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का यह सशक्त माध्यम है। लोगों का जीवन योगमय हो, इसी से युग की धारा को बदला जा सकता है, कोरोना महासंकट से मुक्ति पायी जा सकती है।

जापान में एक मन्दिर है उसमें बुद्ध की प्रतिमा नहीं है, केवल मन्दिर में एक अंगुली बनी हुई है बुद्ध की। उसके ऊपर एक चांद बना हुआ है। नीचे बुद्ध का एक बोध वाक्य लिखा हुआ है-‘मैंने अंगुली दिखाई है चांद की तरफ लेकिन मैं जानता हूं कि तुम नासमझ हो। चांद को नहीं देखोगे और मेरी अंगुली की पूजा करोगे।’ सत्य की ओर उठी अंगुली का यथार्थ कथन वही समझ सकता है जिसमें सांकेतिक भाषा पढ़ने की पारदर्शी योगमय दृष्टि होती है। योग चीजों की सही परिप्रेक्ष्य में समझने का विज्ञान है, अन्यथा बिना योग आदमी  सिद्धान्तों को ढोता है, जीता नहीं। सत्य बोलता है, अनुभव नहीं करता। संसार को भोगता है, जानता नहीं। इसलिये योग सत्य तक ले जाने वाला राजपथ है। जो स्वदर्शी बनने की साधना साध लेता है वह कालिदास की भाषा में ‘ज्ञाने मौनं, क्षमा शक्तौ, त्यागे श्लाघाविपर्यय’ की भूमिका में पहुंच जाता है। उसका चरित्र सौ टंच सोना बन जाता है। योग जीवन का अन्तर्दर्शन कराता है। इसके दर्पण में मनुष्य अपना बिम्ब देखता है, क्योंकि दर्पण से ज्यादा जीवन का और कोई वक्ता नहीं होता। प्रतिक्षण भारुण्ड पक्षी की तरह जागरूक बने। अप्रतिक्रियावादी बने, अहिंसक एवं संतुलित बने। सुख-दुःख, लाभ-हानि, प्रतिकूल-अनुकूल प्रसंगों में संतुलन रखे, क्योंकि ‘सम्मत्तदंसी न करंति पावं’-समत्वदर्शी पाप नहीं करता। बस यही योग जीवन में अवतरित करना है कि मैं पुराने असत् संस्कारों का शोधन करूं। नये अशुभ संस्कारों-आदतों को प्रवेश न दूं।

मेेरी दृष्टि में योग मानवता की न्यूनतम जीवनशैली होनी चाहिए। आदमी को आदमी बनाने का यही एक सशक्त माध्यम है। एक-एक व्यक्ति को इससे परिचित- अवगत कराने और हर इंसान को अपने अन्दर झांकने के लिये प्रेरित करने हेतु विश्व योग दिवस को और व्यवस्थित ढंग से आयोजित करने के उपक्रम होने चाहिए। इसी से योगी बनने और अच्छा बनने की ललक पैदा होगी। योग मनुष्य जीवन की विसंगतियों पर नियंत्रण का माध्यम है। विश्वभर में योग के साधक आलोक की यात्रा पर निकल चुके हैं। जिस दिन वे दीर्घश्वास का अभ्यास करते हैं, स्वयं से स्वयं का साक्षात्कार करते आलोक की पहली किरण उनके भीतर प्रवेश कर जाती है। उसके प्रकाश में कोई भी साधक अपने भीतर को देखने में सफल हो सकता है, बशर्ते उसका लक्ष्य अन्तर्मुखता हो। आत्मदर्शन की सोपान पर चढ़कर ही हम अपने स्वरूप को पहचान सकते है। अपने विकास की सार्थकता तभी होगी, जब हमें स्वयं का बोध होगा। आत्मबोध का सबसे सरल उपाय है अभ्यास एवं एकाग्रता की साधना। जिस व्यक्ति का लक्ष्य महान् होता है, वही अपनी प्रवृत्ति का उदात्तीकरण सकता है, अपनी और जग की समस्याओं का समाधान पा सकता है।

योग मनुष्य को पवित्र बनाता है, निर्मल बनाता है, स्वस्थ बनाता है, कोरोना संक्रमण के दौर में योग रामबाण औषधि की तरह है। यजुर्वेद में की गयी पवित्रता- निर्मलता की यह कामना हर योगी के लिए काम्य है कि ‘‘देवजन मुझे पवित्र करें, मन में सुसंगत बुद्धि मुझे पवित्र करे, विश्व के सभी प्राणी मुझे पवित्र करें, अग्नि मुझे पवित्र करें।’’ योग के पथ पर अविराम गति से वही साधक आगे बढ़ सकता है, जो चित्त की पवित्रता एवं निर्मलता के प्रति पूर्ण जागरूक हो। निर्मल चित्त वाला व्यक्ति ही योग की गहराई तक पहुंच सकता है।

स्वामी विवेकानंद कहते हैं-‘‘निर्मल हृदय ही सत्य के प्रतिबिम्ब के लिए सर्वोत्तम दर्पण है। इसलिए सारी साधना हृदय को निर्मल करने के लिए ही है। जब वह निर्मल हो जाता है तो सारे सत्य उसी क्षण उसमें प्रतिबिम्बित हो जाते हैं।...पावित्र्य के बिना आध्यात्मिक शक्ति नहीं आ सकती। अपवित्र कल्पना उतनी ही बुरी है, जितना अपवित्र कार्य।’’ आज विश्व में जो कोरोना महामारी, आतंकवाद, हिंसा, युद्ध, साम्प्रदायिक विद्धेष की ज्वलंत समस्याएं खड़ी है, उसका कारण भी योग का अभाव ही है। जब मानव अपनी आधिदैविक, आधिभौतिक तथा आध्यात्मिक समस्याओं को सुलझाने के लिए अथवा उनका समाधान पाने के लिए योग का आश्रय लेता है तो वह योग से जुड़ता है, संबंध बनाता है, जीवन में उतारने का प्रयास करता है। किन्तु जब उसके बारे में कुछ जानने लगता है, जानकर क्रिया की प्रक्रिया में चरण बढ़ाता है तो वह प्रयोग की सीमा में पहुंच जाता है। इसी प्रयोग की भूमिका को जीवन का अभिन्न अंग बनाकर हम मानवता को एक नयी शक्ल दे सकते है।

योग के नाम पर साम्प्रदायिकता करने वाले मानवता का भारी नुकसान कर रहे है। क्योंकि योग किसी भी धर्म, सम्प्रदाय, जाति या भाषा से नहीं जुड़ा है। योग का अर्थ है जोड़ना,  इसलिए यह प्रेम, अहिंसा, करुणा और सबको साथ लेकर चलने की बात करता है। योग, जीवन की प्रक्रिया की छानबीन है। यह सभी धर्मों से पहले अस्तित्व में आया और इसने मानव के सामने अनंत संभावनाओं को खोलने का काम किया। आंतरिक व आत्मिक विकास, मानव कल्याण से जुड़ा यह विज्ञान सम्पूर्ण दुनिया के लिए एक महान तोहफा है।

आज योगिक विज्ञान जितना महत्वपूर्ण हो उठा है, इससे पहले यह कभी इतना महत्वपूर्ण नहीं रहा। आज हमारे पास विज्ञान और तकनीक के तमाम साधन मौजूद हैं, जो दुनिया के विध्वंस का कारण भी बन सकते हैं। ऐसे में यह बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है कि हमारे भीतर जीवन के प्रति जागरूकता और ऐसा भाव बना रहे कि हम हर दूसरे प्राणी को अपना ही अंश महसूस कर सकें, वरना अपने सुख और भलाई के पीछे की हमारी दौड़ सब कुछ बर्बाद कर सकती है।

अगर लोगों ने अपने जीवन का, जीवन में योग का महत्व समझ लिया और उसे महसूस कर लिया तो दुनिया में खासा बदलाव आ जाएगा। जीवन के प्रति अपने नजरिये में विस्तार लाने, व्यापकता लाने में ही मानव-जाति की सभी समस्याओं का समाधान है। उसे निजता से सार्वभौमिकता या समग्रता की ओर चलना होगा। भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो इस पूरी धरती पर मानव कल्याण और आत्मिक विकास की लहर पैदा कर सकता है।

हम भारतीयों के लिये यह गर्व का विषय है कि योग भारत की विश्व को एक महान देन है। योग भारतीयों के जीवन का एक अभिन्न अंग रहा है। लेकिन अब यह संपूर्ण विश्व का विषय एवं मानव मात्र के जीवन का अंग बन रहा है। यह जीव नाना प्रकार के संस्कार रूपी रंगों से रंगे हुए शरीर में रहता है, लेकिन योगाभ्यास द्वारा तपाया गया शरीर रोग, बुढ़ापा, क्रोध आदि से रहित होकर स्वरूपानुभूति के योग्य होता है।

प्रसिद्ध उक्ति है- ‘शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्’! इसके अनुसार निरोग एवं दृढ़ता से युक्त-पुष्ट शरीर के बिना साधना संभव नहीं। इसलिए योग को इस प्रकार गूंथ दिया गया है कि शरीर की सुडौलता के साथ-साथ आध्यात्मिक प्रगति भी हो। शरीर की सुदृढ़ता के लिए आसन एवं दीर्घायु के लिए प्राणायाम को वैज्ञानिक ढंग से ऋषियों ने अनुभव के आधार पर दिया है इससे व्यक्ति एक महान संकल्प लेकर उसे कार्यान्वित कर सकता है। अतः योग इस जीवन में सुख और शांति देता है और मुक्ति के लिए साधना का मार्ग भी प्रशस्त करता है। योग केवल सुंदर एवं व्यवस्थित रूप से जीवन-यापन करना ही नहीं सिखाता अपितु व्यक्तित्व को निखारने की कला को भी सिखाता है।

इस संसार में कर्म में प्रवृत्त परायण लोग शारीरिक शक्ति प्रधान होते हंै, कुछ लोग भक्ति परायण होकर भावनात्मक शक्ति प्रधान होते हैं, कुछ अन्य लोग ध्यान परायण होकर मानस शक्ति प्रधान होते हैं तो कुछ लोग विचार परायण होकर बौद्धिक शक्ति प्रधान होते हैं। इस प्रकार साधक भेद के अनुसार कर्मयोग, भक्तियोग, राजयोग एवं ज्ञानयोग-क्रमशः ये चार मार्ग प्रसिद्ध हैं। राजयोग के अनेक प्रभेदों में से एक ‘आष्टांग योग’ है। आजकल व्यवहार में इसके दो अंग-आसन और प्राणायाम-विशेष रूप से प्रचलित हैं। ‘ज्ञानादेव तु कैवल्य’ इस उक्ति के अनुरूप आपके शरीर एवं मन को उस ज्ञानानुभूति के योग बनाना ही योग का प्रमुख लक्ष्य है। विश्व योग दिवस की निरन्तरता बनी रहे, यह अपेक्षित है। यह इतिहास न बने, बल्कि परम्परा बने।


हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी के सम्मान का अपमान करने वाले न्यूज एंकर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए

हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी के सम्मान का अपमान करने वाले न्यूज एंकर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए

18-Jun-2020

जमीयत उलेमा-ए-हिंद सुप्रीम कोर्ट में पक्षपाती मीडिया के खिलाफ मामले में इस शर्मनाक घटना को भी शामिल करेगी: मौलाना अरशद मदनी तरन्नुम अतहर

नई दिल्ली ( करनेजी वॉइस न्यूज़ एजेंसी )  ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्ला अलैह की शान में अपशब्द कहने वाले न्यूज़ एंकर की कठोर शब्दों में निंदा करते हुए उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग करते हुए जमीअत उलमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना सय्यद अरशद मदनी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में पहले से ही मामला विचाराधीन है इसके बावजूद टीवी एंकर मुसलमानों के दिल को चोट पहुंचाने से बाज नहीं आ रहे हैं। मौलाना मदनी ने कहा कि सत्ताधारी लोगों के संरक्षण की वजह से न्यू एंकरों की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि मुसलमान इस्लाम मुसलमानों के तौर तरीके पर उंगली उठाते हुए अब मसाजिद मदारिस और ख़ानक़ाहों तक पहुंच गए हैं।

उन्होंने कहा कि मोईनुल हिन्द हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी की शान में एक टीवी चैनल के एंकर ने जिस तरह से अपशब्द कहे और उनको अक्रांता और लुटेरा तक कह डाला है उस से भारत ही नहीं पूरी दुनिया में सभी धर्मों के लोग जो ख्वाजा साहब में अपनी आस्था रखते हैं उनके दिल को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि हजरत ख्वाजा अजमेरी सिर्फ मुसलमान ही नहीं बल्कि दुनिया में पाए जाने वाले सभी जात धर्म और समुदायों के एक बड़े हिस्से को प्रिय हैं।

उन्होंने कहा कि हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती इस्लामिक शिक्षा और मानवीय मूल्यों के एक महान वकील और एक निर्विवादित आध्यात्मिक गुरु के रूप में हिंदू-पाक उपमहाद्वीप में एक अद्वितीय स्थान रखते हैं। इस तरह के एक निर्विवाद आध्यात्मिक गुरु का अपमान करना और उन के खिलाफ बोलना संवैधानिक रूप से गलत है। इसलिए, सरकार को तुरंत इस चैनल और विशेष रूप से एंकर के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। ज्ञात रहे कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मुस्लिमों को चोट पहुंचाने, उनके खिलाफ गलत प्रचार करने और उनको कोरोना के लिए दोषी देने के मीडिया के प्रचार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया है। जिस पर शुक्रवार 19 जून सुनवाई होगी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हजरत ख्वाजा अजमेरी के अपमान की इस शर्मनाक घटना को भी इसमें शामिल किया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल के अध्यक्ष दुष्यंत दवे जिरह करेंगे।


जब देश में इंटरनेट ही सुचारू रूप से काम नहीं कर रहा है तो ऑनलाइन स्टडीज और डिजिटल पेमेंट कैसे हो पाएंगी? जवाब दे सरकार - प्रकाशपुंज पांडेय

जब देश में इंटरनेट ही सुचारू रूप से काम नहीं कर रहा है तो ऑनलाइन स्टडीज और डिजिटल पेमेंट कैसे हो पाएंगी? जवाब दे सरकार - प्रकाशपुंज पांडेय

17-Jun-2020

 प्रकाशपुन्ज पाण्डेय,  राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी

समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने मीडिया के माध्यम से देश की जनता और सरकार के सामने एक अहम मुद्दे पर ध्यानाकर्षण करते हुए कहा है कि एक तरफ जहाँ केंद्र सरकार देश में डिजिटल पेमेंट पर जोर दे रही है, साथ ही कोरोना काल में स्कूल, कॉलेजों के बंद होने के कारण ऑनलाइन स्टडीज़ शुरू हैं और ऑफिसों के सुचारू रूप से शुरू ना हो पाने के कारण 'वर्क एट होम' का काम शुरू है। ऐसी सूरत में जब देश में इंटरनेट की सुविधा ही सुचारू रूप से कार्यान्वित नहीं रहेगी तो सरकार जो यह सब बातें कह रही है वो कैसे मुमकिन होंगी? 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा है कि सरकार एक तरफ बड़ी-बड़ी घोषणाएँ करती है और उसे मीडिया के माध्यम से करोड़ों रुपए खर्चा करके प्रचारित व प्रसारित भी करती है। लेकिन ऐसी किसी घोषणाओं का फायदा जनता को नहीं हो पाता है क्योंकि इन घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए जो काम किए जाने चाहिए वह कहीं ना कहीं ना कहीं नाकाफ़ी दिखाई देते हैं। सरकार को चाहिए की जो सेल्यूलर कंपनियां इंटरनेट की सुविधाएँ जनता को उपलब्ध करवा रहे हैं उन पर TRAI(Telecom Regulatory Authority of India), के आदेशों के अंतर्गत कार्यवाही करते हुए जनता के हित में इंटरनेट सुविधाओं को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए आदेश दें और जो ऐसा काम नहीं कर पा रहा है उसका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर देना चाहिए क्योंकि भारत में 4G के नाम पर केवल और केवल लोगों को यह कंपनियां झांसा दे रही हैं.

क्योंकि स्पीड 2G की भी नहीं आ पा रही है। ऐसे में ना डिजिटल पेमेंट हो पाएंगे, ना ही सर्वर से संबंधित कोई काम हो पाएंगे, नहीं नेटवर्क से संबंधित कोई काम हो पाएंगे और ना ही कोरोना काल में स्कूल कॉलेजेस बंद होने की स्थिति में बच्चों की ऑनलाइन स्टडीज़ हो पाएगी ना ही वर्क एट होम हो पाएगा। मेरा सरकार से निवेदन है कि रोज़मर्रा की इस बेहद महत्वपूर्ण जरूरत पर सरकार तुरंत संज्ञान लेते हुए उचित और कड़ी कार्रवाई करे। 


मिटती जा रही है ऐतिहासिक धरोहरें, खामोश है पुरातत्व विभाग और जिम्मेदारान : सैय्यद तक़वी

मिटती जा रही है ऐतिहासिक धरोहरें, खामोश है पुरातत्व विभाग और जिम्मेदारान : सैय्यद तक़वी

17-Jun-2020

सैय्यद एम अली तक़वी (syedtaqvi12@gmail. )

लखनऊ : ऐतिहासिक इमारतें सिर्फ लखनऊ ही नहीं लगभग पूरे प्रदेश में मुख्तलिफ शहरों में पाई जाती हैं लेकिन वक्त के साथ-साथ इसकी तस्वीरें बदलती जा रही हैं और आने वाले वक्त में उसका निशान भी शायद मिट जाएगा जैसा कि लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों को देखकर होता है रूमी गेट के आसपास आज जो मंजर दिखाई देता है अगर पुरानी तस्वीरों से उसकी तुलना की जाए तो यह एहसास होता है कि उसके आसपास की कितनी ऐतिहासिक इमारतें जमींदोज हो गई और उसका कोई निशान बाकी नहीं है। वक्फ बोर्ड , हुसैनाबाद ट्रस्ट और पुरातत्व विभाग सब खामोश हैं किसी को अपने देश के इतिहास से प्रेम नहीं दिखाई दे रहा है. प्रदेश में कुल 122839 वक्फ संपत्तियां हैं। इनमें से ज्यादातर पर अवैध कब्जे हैं। यहां तक की बहुत सारी वक्फ की संपत्तियां सरकारी क़ब्जे में भी हैं।

आइए बात करते हैं लखनऊ की। हुसैनाबाद ट्रस्ट, ऐतिहासिक शाहनजफ इमामबाड़े की बदहाली को लेकर बेफिक्र है। इमामबाड़े के मुख्य परिसर का प्लास्टर जगह-जगह से प्लास्टर टूट चुका है और कई जगह दरारें भी आ गई हैं। लंबे समय से मरम्मत व रंगाई-पुताई न होने से यह स्थिति बनी है। इमारत खंडहर होती जा रही है। हजरतगंज स्थित शाहनजफ इमामबाड़ा हुसैनाबाद ट्रस्ट के अधीन है और ऐतिहासिक स्मारक होने के साथ शिया समुदाय की धार्मिक आस्था का केंद्र है। यहां सिर्फ मुस्लिम नहीं बल्कि अन्य धर्म के मानने वाले भी माथा टेकने आते हैं, लेकिन ऐतिहासिक महत्व के इस स्मारक का कोई देखरेख करने वाला नहीं है। पुरातत्व विभाग द्वारा इस इमारत में लंबे समय से कोई भी मरम्मत का काम नहीं किया गया है और ना ही हुसैनाबाद ट्रस्ट इसकी तरफ ध्यान दे रहा है।

शाहनजफ इमामबाड़े के परिसर में शादी के कार्यक्रम का आयोजन भी होता है जिसके एवज में अच्छा खासा किराया भी आता है लेकिन बावजूद इसके इस इमारत की मरम्मत का काम तो दूर रंग और रौगन का काम भी सही ढंग से नहीं होता। इमारत की इस जर्जर स्थिति से हर चाहने वाला चिंतित है। अभी कुछ दिन पहले ही शाहनजफ इमामबाड़े का बाहरी दर जो अचानक गिर गया था उस जगह पर घेराव कर दिया गया है लेकिन कब्जा करने वाले आज भी उस जगह पर अपना व्यवसाय कर रहे हैं । अंदर शाहनजफ कैंपस का हाल यह है कि शादी ब्याह और पाटिर्यों के चलते यहां शोर शराबा और खाना पीना भी चलता है। खाना बनाने के लिए भठ्ठियां जलती है और और उसे निकलने वाला धुआं ऐतिहासिक ईमारत को नुकसान पहुंचता है। सोने पर सुहागा यह है कि सरकार ने खुद शाहनजफ के गेट पर अतिक्रमण कर रखा है यहां पर निर्मित किया गया फव्वारा वहां के आवागमन को प्रतिबंधित करता है उस इमामबाड़े से कोई भी जुलूस नहीं निकाला जा सकता। ऐसा लगता है कि अंदर पार्किंग स्थल बना दिया गया है। वहां की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है मगर कोई रोकने और टोकने वाला नहीं है। 

इसके अलावा गाजी उद्दीन हैदर द्वारा बनवाई गई छतर मंजिल वह भी काफी खस्ता हालत में है उसका पोर्च पहले ही गिर चुका है। यह ऐतिहासिक इमारत है और कई दशक से इसमे सेंट्रल ड्रग रिसर्च सेंटर चल रहा है। पुरातत्व विभाग के अनुसार यह इमारत जर्जर हो चुकी है। सीडीआरआई को करीब एक दशक पहले ही इसकी जानकारी दे दी गई थी पर इसे खाली नहीं किया गया।आज बादशाह गाजीउद्दीन हैदर की रूह जरूर तड़प रही होगी।

इसके अलावा नवाब आसिफुद्दौला के द्वारा बनवाया गया और लखनऊ की शान कहा जाने वाला रूमी दरवाजा भी खतरे में है इसमें भी दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं। नीचे से गुजरने वाले ट्रक, बसों और गाड़ियों से पैदा होने वाले कंपन से पूरी इमारत का वजूद खतरे में है। लखनऊ की पहचान रूमी दरवाजा में जो दरार आई है यदि उसे जल्द दुरुस्त नहीं किया गया तो आसिफुद्दौला की यह धरोहर इतिहास के पन्नो से गायब हो जाएगी।

बड़ा इमामबाड़ा  से लेकर छोटा इमामबाड़ा परिसर में लोगों ने मकान से लेकर दुकान तक खोल ली है। कहीं इमामबाड़े के सामने का हिस्सा अवैध कब्जे का शिकार है कहीं इमामबाड़े के पीछे का हिस्सा अवैध कब्जे का शिकार है ना तो इन इमारतों का सही ढंग से ख्याल रखा जा रहा है और ना ही इसकी मरम्मत की जा रही है ऐसा लग रहा है कि सरकार ही चाहती है कि इन इमारतों का निशान मिट जाए। अवध को बसाने वाले बादशाहों की निशानियां मिटती जा रही हैं और जिनका कोई योगदान नहीं उनके जगह जगह स्टेचू और स्मारक स्थापित किए जा रहे हैं यानी आने वाली नस्लों को धोखा दिया जा रहा है। छोटा इमामबाड़ा का हाल यह है यहां पर लोगों ने पूरी तरह से कब्जा कर रखा है। कहीं होटल कहीं ठेला कहीं चाय की दुकान कहीं कुछ और, यहां तक के कुछ की रसोई भी इमामबाड़े के अंदर दिखाई देती है चाहे इमामबाड़े के सामने वाला हिस्सा हो चाहे इमामबाड़े के पीछे वाला हिस्सा, अंदर हो या बाहर हर तरफ अवैध कब्जा दिखाई देता है। जगह जगह रहने वाले परिवारों का कब्जा और चौकी चूल्हा उसकी सुंदरता और उसके जीवन को खत्म किए दे रहा है।

छोटा इमामबाड़ा से सटा हुआ हुसैनाबाद गेट का तीनों दर जर्जर हो चुका है उसकी भी जीवन लीला समाप्त होने की कगार पर है। उसके एक गेट पर होटल वाले का पूरी तरह से कब्जा है उस के नीचे बने हुई कोठरियों में उसके होटल का कार्य होता है जो कि अवैध है। शासन प्रशासन हुसैनाबाद ट्रस्ट पुरातत्व विभाग किसी को यह चीजें नहीं दिखाई देती। भ्रष्टाचार इस हद तक बढ़ चुका है कि नीचे से लेकर ऊपर तक हर व्यक्ति चाहे वह उच्च पद पर बैठा हुआ अधिकारी ही क्यों ना हो अपनी आत्मा और ज़मीर को बेच चुका है।

अगर ऐसे ही चलता रहा तो बहुत जल्दी यह निशानी भी इतिहास के पन्नों में सिमट करके रह जाएगी। बात कड़वी है लेकिन सच यही है कि जल्दी ही यह निशानियां सिर्फ किताबों में ही दिखाई देंगी यह बानगी है लखनऊ की ऐतिहासिक ईमारतों की बदहाली की जिससे यह जाहिर होता है कि किस तरह ऐतिहासिक धरोहरों की अनदेखी की जा रही है और शहर ए अज़ा की रौनक मिटती चली जा रही है ।