छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री  ग्राम सड़क योजना में महाघोटाला !

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में महाघोटाला !

21-Aug-2020

प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना छत्तीसगढ़ में भृस्टाचार और ताना शाही का बोलबाला 
एम. एच. जकारिया (प्रधान संपादक)

रायपुर - छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकारण  परियोंजना  में एक तरफा हिटलर शाही को पूरी दबंगता के साथ अन्जाम दिया जा रहा है, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-2 में सड़कों के निर्माण में छत्तीसगढ़ राज्य को पूरे देश में सबसे अव्वल होने का ढोल पिटने वाले विभाग के लोगो ने हाल ही में नई दिल्ली में हुई प्रोजेक्ट रिव्यू कमेटी की बैठक में सभी राज्यों के कार्यों की समीक्षा में छत्तीसगढ़ में 89 फीसदी कार्य पूर्णता के साथ सबसे आगे होने का दावा किया गया ! जबकि सच्चाई कुछ और ही है! 


हमे प्राप्त प्रमाणिक जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य के कुछ सड़कों को OMMAS में चढ़ा कर के निर्माण कार्य पूर्ण बताया गया है, जबकि इनमें अधिकतर सड़के एवं पुल पुलिया का निर्माण पूर्ण ही नही हुआ है, या अधूरा है , जिसके प्रत्यक्ष् प्रमाण है,जिनमे अधिकतर बस्तर क्षेत्र  के  है  जिसकी पूरी सूची है और छत्तीसगढ़ ग्राम सड़क परियोजना के द्वारा केन्द्र की सरकार से लगभग 5000करोड़ का बजट और ले लिया गया है , जो की बड़े पैमाने पर भृष्टाचार की ओर इशारा करता है जिसकी जाँच CBI से किया जाना चाहिए  और इसकी प्रमाणिक जानकारी PMO और पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्रालय के संज्ञान में भी लाया जाना जरूरी है! क्योंकि (प्रोग्रेस ) बताकर स्थानीय प्रधान मन्त्री ग्रामीण सड़क योजना के अधिकारियों के द्वारा केन्द्र सरकार की आँखों में धूल झोंकने का कार्य किया गया हैं जो प्रमाणित है, और केन्द्र से बज़ट पास करा लिया गया है ! जो  की साफ  साफ इशारा कर रहा है की बज़ट में कमीशन का खेल  किया जा रहा है।
उसी तरह से छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के उच्च पदस्थ अधिकारियों के द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के तबादला नीति की खुलकर धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं, प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के पॉवर फूल CEO एवं मुख्य अभियंता के द्वारा बिना छत्तीसगढ़ शासन के समनवय समिति के अनुशासा के मनमाने ढंग से कार्य पालन अधिकारी (प्रथम श्रेणी) अधिकारी एवं सहायक अभियंता, उप अभियंताओ जो की 10से 15 की संख्या में होंगे का तबादला  /पदस्थापना/अटैच मेंट मनमाने तरीके से किया गया है जिससे छत्तीसगढ़ शासन के नियमो की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं, जिसे शासन के संज्ञान में लाना जरूरी है ।स्थाना भाव के कारण अगली जानकारी खुलासा पोस्ट पत्रिका एवं खुलासा एक्स्प्रेस वेब चैंनल में प्रस्तुत किया जायेगा!

आगे भाग 2 मे क्रमश :::: 


कोरोना पॉज़िटिव महिला की संदिग्ध हालत में कोविड 19 हॉस्पिटल में गिर कर हुई मौत।

कोरोना पॉज़िटिव महिला की संदिग्ध हालत में कोविड 19 हॉस्पिटल में गिर कर हुई मौत।

19-Aug-2020

Report- Shahrukh/मुरादाबाद।

कोरोना पॉज़िटिव महिला की संदिग्ध हालत में कोविड 19 हॉस्पिटल में गिर कर हुई मौत।

28 वर्षीय कविता नाम की महिला थी कोरोना पॉज़िटिव।

TMU में बनाये गए कोविड 19 लेवल  3 हॉस्पिटल में तीसरी मंजिल से गिरकर हुई मौत।

ICU में भर्ती थी महिला।

कोतवाली बिलारी के ग्राम गोरवा की थी रहने वाली।

पुलिस मौके पर।

शव भेजा पोस्टमॉर्टम के लिये।

थाना पाकबड़ा क्षेत्र में है कोविड 19 हॉस्पिटल TMU


भाई राहुल गाँधी की साथ क़दम ताल चलती बहन प्रियांका गाँधी

भाई राहुल गाँधी की साथ क़दम ताल चलती बहन प्रियांका गाँधी

19-Aug-2020

लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी

राज्य मुख्यालय लखनऊ।आम चुनाव 2019 में मिली करारी हार के बाद पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी लगता है अपनी बात पर क़ायम है जिसमें उन्होंने कहा था कि मेरे इस्तीफ़ा देने के बाद से रिक्त हुआ कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद पर ग़ैर गाँधी नेहरू परिवार का नेता ही अब अध्यक्ष बनेगा मैं और मेरे परिवार का कोई अध्यक्ष नहीं बनेगा हालाँकि कांग्रेस की वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) ने अपने पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को मनाने की भरपूर्व कोशिशें की लेकिन राहुल गाँधी अपने फ़ैसले पर अडिग रहे और उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के अनुरोध को ये कह कर इंकार कर दिया था कि हमारे परिवार से कांग्रेस का अध्यक्ष नही होगा यही मेरा फ़ैसला है इसके बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) ने कोई ऑप्शन होने तक श्रीमती सोनिया गाँधी को ही कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बना दिया था तब से कांग्रेस पार्टी का कोई स्थायी अध्यक्ष नहीं बनाया गया है और सोनिया गाँधी ही कांग्रेस पार्टी का कार्य देख रही है हालाँकि बीच-बीच में राहुल गाँधी को फिर कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने की कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ताओं द्वारा माँग की जाती रही है।ग़ौरतलब हो कि कोरोना की वजह से संसदीय दल की बैठकें ना होने के चलते वीडियो कांफ्रेंस के द्वारा बैठक की जा रही है सोनिया गाँधी द्वारा वीडियो कांफ्रेंस से राज्यसभा सांसदों की बैठक ले रही थी इसी बैठक में राहुल गाँधी को पुनः कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की माँग हुई थी और उसी में उनको अध्यक्ष बनाने का विरोध भी हुआ था विरोध करने वाले बुजुर्ग कांग्रेसी थे जैसे कपिल सिब्बल, आनन्द शर्मा व पी चिदम्बरम और समर्थन करने वाले के सी वेणुगोपाल , पी एल पुनिया , राजीव सातव , रिपुन वोरा एवं छाया शर्मा जैसे सांसदों ने राहुल को फिर अध्यक्ष बनाने की माँग की थी।कांग्रेस नेता राहुल गाँधी के इस कथन से कि कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष गाँधी नेहरू परिवार से नही होना चाहिए अब उनके परिवार के दूसरे सदस्य कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव उप्र जैसे बड़े राज्य की प्रभारी प्रियांका गाँधी का भी साथ मिल गया है इस मुद्दे पर श्रीमती प्रियांका गाँधी ने एक मैगज़ीन इंडिया टूमॉरो से बात करते हुए खुलकर कहा कि मैं अपने बड़े भाई राहुल गाँधी के इस तर्क से सहमत हूँ कि कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष गाँधी नेहरू परिवार से बाहर का होना चाहिए।इंडिया टुमॉरो से बातचीत करते हुए श्रीमती प्रियांका गाँधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा कि हम में से कोई पार्टी का अध्यक्ष नहीं होना चाहिए और मैं उनकी इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ मुझे भी लगता है कि कांग्रेस पार्टी को अपने नए रास्तों की तलाश करनी चाहिए।श्रीमती प्रियांका गाँधी ने यह भी साफ़ किया कि हमें गाँधी नेहरू परिवार से हठकर आने वाले पार्टी अध्यक्ष के साथ काम करने में कोई परेशानी नहीं है।प्रियांका गाँधी के द्वारा इस मुद्दे पर खुलकर अपना पक्ष रख देने के बाद यह बात साफ़ हो गई कि अगला कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहरू गाँधी परिवार से नहीं होगा।क्योंकि राजनीतिक गलियारो में बार-बार यह बात चर्चा का विषय रहती थी या है कि श्रीमती प्रियांका गाँधी को कांग्रेस पार्टी की बागडोर सौंपी जा सकती है लेकिन श्रीमती प्रियांका गाँधी और गाँधी परिवार को क़रीब से जानने वालों का मानना था या है कि दोनों भाई बहन में एक अटूट रिसता है जो सियासी ग्लैमर से बहुत ऊपर है उसी के चलते दोनों में बहुत अच्छी ट्यूनिंग मानी जाती है श्रीमती प्रियांका गाँधी के इस बयान के आ जाने के बाद इस अटूट संबंधों पर मोहर भी लग गई है कि सियासी ग्लैमर दोनों में कोई प्रतिस्पर्धा पैदा नहीं करती हालाँकि संघ विचारकों का यह भरक्षक प्रयास रहता है कि किसी तरह दोनों भाई बहन में सियासी ग्लैमर को लेकर प्रतिस्पर्धा हो जाए और गाँधी परिवार टूट जाए अभी तक तो वह कामयाब नही हुए है भविष्य की बात अलग है।2019 के आम चुनाव से पहले सक्रिय राजनीति में क़दम रखने वाली श्रीमती प्रियांका गाँधी के अपने मन की बात एक नई किताब इंडिया टूमॉरो के ज़रिए बाहर आयी है जिसमें भविष्य के नेताओं से वार्तालाप कर उनके विचारों से अवगत कराया गया है।इस बातचीत से एक बात और भी साफ़ हुई है कि सियासी गलियारो में जो ख़याली पुलाव बनायी जाती है वह सिर्फ़ क़यासों पर आधारित होती है कुछ सच हो जाती है तो कुछ ऐसे ही हवा हवाई हो जाती है।प्रियांका गाँधी ने राहुल गाँधी को ख़ुद से अधिक बुद्धिमानी बताया और उन्हें अपना अच्छा भाई होने के साथ अच्छा मित्र भी बताया है।श्रीमती प्रियांका गाँधी ने अपने पति रॉबर्ट वाढरा पर लगे आरोपों को सियासत से प्रेरित बताते हुए कहा कि आरोप लगने के बाद उन्होंने सबसे पहले अपने बच्चों को हिसाब किताब समझाते हुए बताया कि आरोप सियासत से प्रेरित है।इसी नई किताब इंडिया टूमॉरो से उन्होंने आगे कहा कि 1984 में मेरी दादी इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद अगले सात साल यानी 1991 में हुई पिता राजीव गाँधी की हत्या तक उन्होंने डर के माहौल में जीवन ज़ीया है।श्रीमती प्रियांका गाँधी ने कहा कि दादी इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद उन्हें अपने पिता की हत्या का डर सताता रहता था।श्रीमती प्रियांका गाँधी ने कहा कि वे देर रात तक जब तक पिता राजीव गाँधी घर नहीं लौट जाते थे तब तक मैं सोती नही थी।यहाँ तक कि जब पिता राजीव गाँधी कभी बाहर जाते थे तो वह सोचती रहती थी कि अब वह लौटकर नहीं आएँगे।कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं यूपी जैसे बड़े राज्य की प्रभारी जहाँ कांग्रेस पिछले तीन दशकों से वनवास झेल रही है वहाँ वह अपनी मेहनत से पार्टी में जान डालने का काम करने वाली इन्हीं की सक्रियता के चलते सपा बसपा में खलबली मची हुई हालाँकि वह दोनों अपनी परेशानी को दर्शाते नही है श्रीमती प्रियांका गाँधी ने कांग्रेस के कमज़ोर होने पर भी खुलकर बातचीत की उनका मानना है कि यूपीए की केन्द्र सरकार के दौरान कांग्रेस की मीडिया रणनीति बनाने वाली जब तक सचेत हुई तब तक मोदी की भाजपा के आरोपों पर आम जनता यक़ीन कर चुकीं थी।किताब के मुताबिक़ श्रीमती प्रियांका गाँधी ने कहा कि जब तक हम मोदी की भाजपा के झूटो आरोपों का जवाब देते तब तक हमारा नुक़सान हो चुका था।कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियांका गाँधी के द्वारा नई किताब इंडिया टूमॉरो के साथ जिस बेबाक़ी और निडरता से अपने मन की बात रखी है उससे कांग्रेस के हल्के में भी और देश के सियासी नेताओं सहित जनता में खासी चर्चा होगी उन्होंने कई मुद्दों को बड़ी बेबाक़ी से रखा जैसे कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के मुद्दे पर उन्होंने भाई पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के मत के साथ अपनी सहमति जता कर बहुत से विवादों को जन्म होने से पहले ही ख़त्म कर दिया इस बात से कांग्रेस में भी और कांग्रेस के बाहर भी श्रीमती प्रियांका गाँधी को लेकर चर्चा होती या हो रही थी कि कांग्रेस की कमान उन्हें सौंपी जाए उससे पहले ही उन्होंने सबकी बोलतीं बंद कर दी।दूसरे जो लोग यह भ्रम फैलाने का प्रयास करते है कि श्रीमती प्रियांका गाँधी भाई राहुल गाँधी से ज़्यादा हौसियार है उनको भी यह कहकर जवाब देने की कोशिश की है कि नही भाई राहुल गाँधी मुझसे ज़्यादा बुद्धिमान है अब वह लोग भी ख़ामोशी अख़्तियार कर लेंगे।तीसरे कांग्रेस की मीडिया रणनीति यूपीए सरकार में ख़राब या कमज़ोर थी जो नेता उस टीम का हिस्सा थे उन्हें भी एक तरह की सलाह दी या नसीहत कि इस तरह काम नही होता है।कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियांका गाँधी ने एक बार देश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है हालाँकि जब से वह सक्रिय राजनीति में आई है तब से ही वह मीडिया में अपना स्पेस खुद तय करती है कि मुझे कहाँ और कितना स्पेस चाहिए वह उतना स्पेस ले ही लेती है।भाई राहुल गाँधी के साथ क़दम ताल चलती बहन प्रियांका गाँधी। 


डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन और उनके साथ चल रही कमला हैरिस देश में दो अंकों की बढ़त बनाए हुए हैं।

डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन और उनके साथ चल रही कमला हैरिस देश में दो अंकों की बढ़त बनाए हुए हैं।

18-Aug-2020

वॉशिंगटन पोस्ट-एबीसी न्यूज पोल के अनुसार, राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प और उपराष्ट्रपति माइक पेंस के बीच डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन और उनके साथ चल रही कमला हैरिस देश में दो अंकों की बढ़त बनाए हुए हैं।

द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेट्स ने सोमवार को अपने राष्ट्रीय अधिवेशन को रद्द कर दिया, पंजीकृत मतदाताओं के बीच, बिडेन और हैरिस ने ट्रम्प और पेंस को 53 प्रतिशत से 41 प्रतिशत की बढ़त दी।

मतदाताओं के बीच, ट्रम्प पर बिडेन का वर्तमान राष्ट्रीय मार्जिन पिछले महीने हुए एक सर्वेक्षण में 15 अंकों के मार्जिन से थोड़ा छोटा है और मई में सर्वेक्षण से थोड़ा बड़ा है जब उन्होंने 10 अंकों का नेतृत्व किया था। जैसा कि महामारी अपने प्रारंभिक चरण में था, बिडेन और ट्रम्प को केवल दो अंकों से अलग किया गया था, जिसमें पूर्व में सांख्यिकीय महत्वहीन लाभ था।

ट्रम्प के 10 समर्थकों में से लगभग 9 उनके लिए मतपत्र डालने के लिए उत्साहित हैं और 65 प्रतिशत कहते हैं कि वे “बहुत उत्साही” हैं। सर्वेक्षण में कहा गया है कि 10 से 10 से अधिक बिडेन समर्थकों ने कहा कि वे पूर्व उपराष्ट्रपति के लिए मतदान करने को लेकर उत्साहित हैं, 48 प्रतिशत कहते हैं कि वे बहुत उत्साही हैं।

 राष्ट्रपति चुनाव के बाद ‘बहुत बारीकी से’
कुल मिलाकर, पंजीकृत मतदाताओं में से 54 फीसदी ने कहा कि वे राष्ट्रपति चुनाव “बहुत करीब से” कर रहे हैं। रिपब्लिकन और रिपब्लिकन-झुकाव वाले स्वतंत्र मतदाताओं की हिस्सेदारी 58 फीसदी है, जो सितंबर 2016 में थी।

53 फीसदी डेमोक्रेट और डेमोक्रेटिक-झुकाव वाले स्वतंत्र मतदाता भी कह रहे हैं कि वे अभियान के बहुत करीब हैं, चार साल पहले इस समय 13 अंकों की छलांग।

54 फीसदी अमेरिकियों ने अपने चल रहे साथी के रूप में हैरिस के बिडेन के चयन को मंजूरी दे दी, हालांकि पक्षपातपूर्ण लाइनों के साथ विचार काफी भिन्न होते हैं। डेमोक्रेट्स के बीच, हैरिस के चयन में 86 प्रतिशत शामिल हैं, जिसमें 64 प्रतिशत शामिल हैं जो दृढ़ता से अनुमोदन करते हैं।

रिपब्लिकन के बीच, 55 प्रतिशत ने 46 प्रतिशत से असहमत हैं। वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, बहुमत के अनुसार 52 प्रतिशत – का कहना है कि उन्होंने 29 प्रतिशत बिडेन के निर्णय को अस्वीकार कर दिया है।

अफ्रीकी अमेरिकियों
मतदान के अनुसार, 10 में से लगभग 8 अफ्रीकी-अमेरिकियों ने हैरिस के निर्णय को एक चल रहे साथी के रूप में स्वीकृत किया, जिसमें 50 प्रतिशत शामिल थे जिन्होंने दृढ़ता से अनुमोदन किया। लगभग दो-तिहाई हिस्पैनिक वयस्क बिडेन की पसंद को स्वीकार करते हैं, जबकि इसकी तुलना केवल आधे सफेद वयस्कों के साथ की जाती है। हालांकि, कुल 71 प्रतिशत वयस्कों का कहना है कि हैरिस के चयन से इस बात पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि वे कैसे वोट करते हैं, जिसमें डेमोक्रेट, रिपब्लिकन और निर्दलीय प्रमुख शामिल हैं।

भारतीय मूल के बहुत से अमेरिकी कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने को एक बड़े बदलाव के तौर पर देखते हैं. लेकिन क्या वह इस समुदाय को बाइडेन-हैरिस जोड़ी के पक्ष में कर पाएंगी?

अमेरिका में 2016 के पिछले राष्ट्रपति चुनाव मे भारतीय अमेरिकी समुदाय ज्यादातर एकजुट नजर आया।

एएपीआई डाटा संस्था के मुताबिक इस समुदाय के 85 प्रतिशत लोगों ने डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट दिया. यह संस्था एशियाई अमेरिकियों और प्रशांत क्षेत्रों के द्वीपों पर रहने वाले लोगों की जनसंख्या और उनसे जुड़ी नीतियों पर डाटा प्रकाशित करती है।

पिछले चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डॉनल्ड ट्रंप ने “अबकी बार ट्रंप सरकार” का नारा भी लगाया, लेकिन इससे वह भारतीय अमेरिकी समुदाय के एक छोटे से हिस्से को ही रिझा पाए।

 

अब 2020 के चुनाव में दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवारों की नजर भारतीय अमेरिकी समुदाय पर है।

 

डी डब्ल्यू हिन्दी पर छपी खबर के अनुसार, अमेरिका की जनसंख्या में इस समुदाय की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से थोड़ी सी ज्यादा है।  लेकिन हाल के सालों में इस समुदाय के लोग वोटर और डोनर के तौर पर बहुत सक्रिय हो गए हैं। यही नहीं, यह अमेरिका में सबसे तेजी से बढ़ने वाले प्रवासी समूहों में से एक है।

 हैरिस की खूबियां

लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के पास कमला हैरिस है, जिनकी मां का जन्म चेन्नई में हुआ था। कोलकाता में जन्मीं और तीस साल पहले पीएचडी करने अमेरिका आईं प्रोफेसर संगीता गोपाल कहती हैं, “यह बहुत उत्साहजनक बात है कि कोई अश्वेत महिला पहली बार किसी बड़ी पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में है।

 गोपाल लंबे समय से हैरिस के करियर को देख रही हैं. वह कहती हैं, “वह एक प्रभावशाली और ताकतवर वक्ता हैं। गोपाल हैरिस की दोस्त हैं। वह हैरिस से इतनी प्रभावित हैं कि अब बाइडेन की चुनावी मुहिम में वोलंटियर के तौर पर काम कर रही हैं।
वह नवंबर में होने वाले चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देने का मन बना रही हैं हालांकि इसका हैरिस की राजनीति से कुछ लेना देना नहीं है। वह तो बस ट्रंप को अब और राष्ट्रपति पद नहीं देखना चाहतीं।

 

वोटों का गणित

क्या कमला हैरिस को उम्मदीवार बनाए जाने से भारतीय अमेरिकी समुदाय के उन लोगों को डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ लाया जा सकता है जो ट्रंप के फैन हैं।

हिंदू अमेरिकी फाउंडेशन के संस्थापकों में से एक ऋषि भुटाडा इसकी संभावना नहीं देखते। इस फाउंडेशन की मेलिंग लिस्ट में लगभग तीन हजार लोग हैं। भुटाडा कहते हैं कि ट्रंप समर्थक आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए उनके साथ हैं।

लेकिन भुटाडा कहते हैं कि जो लोग आम तौर पर वोट डालने नहीं जाते, वे लोग हैरिस की वजह से निकल सकते हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट दे सकते हैं।

भुटाडा के फाउंडेशन ने अभी तक तय नहीं किया है कि वह किस उम्मीदवार का समर्थन करेगा। यह अभी नीतिगत मुद्दों पर दोनों उम्मीदवारों का रुख जानना चाहता है।

 खास तौर से भुटाडा जानना चाहते हैं कि दोनों उम्मीदवार नफरत आधारित हिंसा से कैसे निपटेंगे या फिर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वे भारत को किस तरह मदद देंगे।

 हैरिस को डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए एक ठोस उम्मीदवार के तौर पर देखा जाता है. वह ना तो एकदम नाटकीय बदलाव की समर्थक है और ना ही बहुत ज्यादा कंजरवेटिव।

 जमैका और भारत से आए प्रवासी माता-पिता की संतान के तौर पर उनकी पहचान, एक अश्वेत महिला के तौर पर उनकी पहचान अमेरिका के राजनीति परिदृश्य में एक विरला मामला है।

 अब से पहले ऐसे किसी व्यक्ति को उपराष्ट्रपति जैसे अहम पद के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया गया है।

 
 

पूर्व सांसद ज़फ़र अली नकवी पहुँचे घटना स्थल लखीमपुर के पकरिया गाँव |

पूर्व सांसद ज़फ़र अली नकवी पहुँचे घटना स्थल लखीमपुर के पकरिया गाँव |

16-Aug-2020

Place- लखीमपुर खीरी

Report-नुरुद्दीन 

 प्रियंका गांधी सलाहकार समिति के सदस्य पूर्व सांसद पूर्व मंत्री जफर अली नकवी ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम पकरिया पहुंचे 12 वर्षीय किशोरी के साथ रेप कर हत्या कर दी गई थी किशोरी का शव क्षत-विक्षत अवस्था में गन्ने के खेत में मिला था मामले का संज्ञान लेते हुए जफर अली नकवी साहब जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सहित कांग्रेस जनों के साथ मौके पर पहुंच कर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहां की बीजेपी सरकार में दलित उत्पीड़न चरम पर है पकरिया गांव में दलित नाबालिग के साथ दरिंदगी के बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई अगर यह जंगलराज नहीं तो फिर जंगलराज किसे कहते हैं हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं है हमारे घर सुरक्षित नहीं है हर तरफ बायो अराजकता का माहौल है उत्तर प्रदेश में आए दिन जगन ने अपराध खुलेआम सत्ता के संरक्षण में किए जा रहे हैं प्रदेश सरकार की नाकामी जगजाहिर हो चुकी है I साथी श्री नकवी ने कहा कि भाजपा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती रही लेकिन बेटियों को सुरक्षा नहीं दे पाई इस तरह अराजकता व्याप्त है अपराधी बेखौफ हैं उत्तर प्रदेश में जंगलराज बना रखा है श्री नकवी ने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को 2500000 रुपए मुआवजे की मांग रखी साथ ही सीबीआई जांच कराने की मांग की जिससे कि दूध का दूध पानी का पानी हो जाए अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवार के साथ है पीड़ित परिवार की कांग्रेस लड़ाई लड़ेगी I
उक्त कार्यक्रम में प्रमुख रुप से उपस्थित जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री प्रहलाद पटेल प्रदेश प्रवक्ता सैफ अली नकवी सूरत सिंह जिला पंचायत सदस्य श्री शाह जेंद्र दीक्षित श्री प्रेम वर्मा श्री मोनिस अली नकवी, दिलीप पासवान जमाल अहमद कमलेश एवं कांग्रेश निवर्तमान प्रवक्ता रवि तिवारी आदि लोग मौजूद रहे I


स्वतंत्रता दिवस-15 अगस्त, 2020 पर विशेष यही है आजाद भारत की वास्तविक इबारत

स्वतंत्रता दिवस-15 अगस्त, 2020 पर विशेष यही है आजाद भारत की वास्तविक इबारत

14-Aug-2020

-ललित गर्ग -

एक और आजादी का जश्न सामने हैं, जिसमें कुछ कर गुजरने की तमन्ना भी है तो अब तक कुछ न कर पाने की बेचैनी भी है। हमारी जागती आंखो से देखे गये स्वप्नों को आकार देने का विश्वास है तो जीवन मूल्यों को सुरक्षित करने एवं नया भारत निर्मित करने की तीव्र तैयारी है। अब होने लगा है हमारी स्वतंत्र चेतना का अहसास। जिसमें आकार लेते वैयक्तिक, सामुदायिक, सामाजिक, राष्ट्रीय एवं वैश्विक अर्थ की सुनहरी छटाएं हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद बहुत कुछ बदला मगर चेहरा बदलकर भी दिल नहीं बदला। विदेशी सत्ता की बेड़िया टूटी पर बन्दीपन के संस्कार नहीं मिट पाये और राष्ट्रीयता प्रश्नचिन्ह बनकर आदर्शों की दीवारों पर टंग गयी थी, उसे अब आकार लेते हुए देखा जा रहा है। जिस संकीर्णता, स्वार्थ, राजनीतिक विसंगतियों, आर्थिक अपराधों, शोषण, भ्रष्टाचार एवं जटिल सरकारी प्रक्रियाओं ने अनंत संभावनाओं एवं आजादी के वास्तविक अर्थों को धुंधला दिया था, अब उन सब अवरोधक स्थितियों से बाहर निकलते हुए हम अपना रास्ता स्वयं खोजते हुए न केवल नये रास्तों बल्कि आत्मनिर्भर भारत के रास्तों पर अग्रसर है। अब आया है उपलब्धिभरा वर्तमान हमारी पकड़ में। अब लिखी जा रही है कि भारत की जमीन पर आजादी की वास्तविक इबारत।
  एक संकल्प लाखों संकल्पों का उजाला बांट सकता है यदि दृढ़-संकल्प लेने का साहसिक प्रयत्न कोई शुरु करे। अंधेरों, अवरोधों एवं अक्षमताओं से संघर्ष करने की एक सार्थक मुहिम हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 में शुरू हुई थी। उनके दूसरे प्रधानमंत्री के कार्यकाल की एक वर्ष की सफल सम्पन्नता की सुखद एवं उपलब्धिभरी प्रतिध्वनियां सुनाई दे रही है, हाल ही में हमने मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के मन्दिर के शिलान्यास का दृश्य देखा। मोदी ने अपने छह साल के कार्यकाल में जता दिया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति वाली सरकार अपने फैसलों से कैसे देश की दशा-दिशा बदल सकती है, कैसे कोरोना जैसी महाव्याधि को परास्त करते हुए जनजीवन को सुरक्षित एवं स्वस्थ रख सकती है, कैसे महासंकट में भी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त होने से बचा सकती है, कैसे राष्ट्र की सीमाओं को सुरक्षित रखते हुए पडौसी देशों को चेता सकती है।
सरकार और सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक/एयर स्ट्राइक कर जबरदस्त पराक्रम का प्रदर्शन कर दिखाया है कि भारत की रक्षा शक्ति दुनिया के किसी विकसित देश से कम नहीं है। भारत पारंपरिक लड़ाई के साथ-साथ माडर्न लड़ाई में दुनिया की पेशेवर सेनाओं में से एक है। भारतीय जवानों द्वारा पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर देना भारत की बड़ी शक्ति एवं सामथ्र्य का परिचायक है। मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में सबसे बड़ा एवं साहसिक ऐतिहासिक फैसला जम्मू-कश्मीर को लेकर लिया जो जनसंघ के जमाने से उसकी प्राथमिकता रहा है। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने का कदम उठाने के साथ-साथ राज्य को दो हिस्सों में बांटने का काम भी इसी कार्यकाल में हुआ। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को निष्प्रभावी करने का प्रस्ताव मंजूर किया और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेश में बांट दिया गया। मोदी सरकार के इस फैसले के बाद कश्मीर में एक देश, एक विधान और एक निशान लागू हो गया है।
विकास की योजनाएं, नीतियां, सिद्धान्त और संकल्प सही परिणामों के साथ सही लोगों तक पहुंच रहे हैं। जनता को बैंकिंग से जोड़ने के लिए जन-धन योजना की घोषणा हो या हर घर को बिजली पहुंचाने के लिए सौभाग्य योजना या फिर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक करोड़ घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा जाना, आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब परिवार के हर सदस्य को सरकारी या निजी अस्पताल में सालाना पांच लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त देना- ये और ऐसी अनेक योजनाएं भारत के सशक्त एवं समृद्ध होने का परिचायक है। भारत में नया गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) देश में कर सुधार की दिशा में सबसे बड़ा कदम था। जीएसटी लागू करने का मकसद एक देश- एक कर (वन नेशन, वन टैक्स) प्रणाली है। सवर्ण आरक्षण की मांग देश में लंबे समय से हो रही थी, लेकिन किसी भी सरकार ने हाथ नहीं डाला। मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के आखिरी समय 2019 के जनवरी में सवर्ण समुदाय को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया।
अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े कई अहम फैसले भी लिए गये हैं। 45 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को बिना पुरुष अभिभावक के हज करने की इजाजत दी गई थी। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने का कदम भी उठाया। मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून को 10 जनवरी 2020 को अमलीजामा पहनाया। इस कानून से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अन्य देशों में रह रहे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और यहूदी को भारतीय नागरिकता मिल सकेगी। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दुनिया के तमाम देशों के साथ भारत के संबंध प्रगाढ़ हुए हैं और देश का सिर सम्मान से ऊंचा उठा और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। मोदी ने अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ह्यूस्टन में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में करीब 50 हजार लोगों को संबोधित किया। ऐसे ही इस साल फरवरी में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने मोदी के न्यौते पर गुजरात के अहमदाबाद में ‘नमस्ते ट्रंप’ में शामिल हुए और करीब 1 लाख लोगों को संबोधित किया। सऊदी अरब से लेकर यूएई सहित तमाम इस्लामिक देशों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित भी किया है। इसके अलावा इस्लामिक देशों के साथ भारत के संबंध भी मजबूत हुए हैं, जिसका नतीजा है कि कश्मीर मसले पर दुनिया भर के देशों ने भारत का साथ दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिवर्ष 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने की स्वीकृति दी। इसके दुनिया भर में भारत का सम्मान बढ़ा है।
आजादी के 74वें वर्ष में पहुंचते हुए हम अब वास्तविक आजादी का स्वाद चखने लगे हैं, आतंकवाद, जातिवाद, क्षेत्रीयवाद, अलगाववाद की कालिमा धूल गयी है, धर्म, भाषा, वर्ग, वर्ण और दलीय स्वार्थो के राजनीतिक विवादों पर भी नियंत्रण हो रहा है। इन नवनिर्माण के पदचिन्हों को स्थापित करते हुए कभी हम प्रधानमंत्री के मुख से स्कूलों में शोचालय की बात सुनते है तो कभी गांधी जयन्ती के अवसर पर स्वयं झाडू लेकर स्वच्छता अभियान का शुभारंभ करते हुए मोदी को देखते हैं। मोदी कभी विदेश की धरती पर हिन्दी में भाषण देकर राष्ट्रभाषा को गौरवान्वित करते है तो कभी “मेक इन इंडिया” का शंखनाद कर देश को न केवल शक्तिशाली बल्कि आत्म-निर्भर बनाने की ओर अग्रसर करते हैं। नई खोजों, दक्षता, कौशल विकास, बौद्धिक संपदा की रक्षा, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन, श्रेष्ठ का निर्माण-ये और ऐसे अनेकों सपनों को आकार देकर सचमुच मोदीजी हमारी स्वतंत्रता दिवस को सुदीर्घ काल के बाद सार्थक अर्थ दे रहे हैं।
आजादी का यह उत्सव उन लोगों के लिए एक आह्वान है जो अकर्मण्य, आलसी, निठल्ले, हताश, सत्वहीन बनकर सिर्फ सफलता की ऊंचाइयों के सपने देखते हैं पर अपनी दुर्बलताओं को मिटाकर नयी जीवनशैली की शुरुआत का संकल्प नहीं स्वीकारते। इसीलिए आजादी का यह जश्न एक संदेश है कि-हम जीवन से कभी पलायन न करें, जीवन को परिवर्तन दें, क्योंकि पलायन में मनुष्य के दामन पर बुज़्ादिली का धब्बा लगता है जबकि परिवर्तन में विकास की संभावनाएं सही दिशा और दर्शन खोज लेती है। आजादी का दर्शन कहता है-जो आदमी आत्मविश्वास एवं अभय से जुड़ता है वह अकेले ही अनूठे कीर्तिमान स्थापित करने का साहस करता है। समय से पहले समय के साथ जीने की तैयारी का दूसरा नाम है स्वतंत्रता का बोध। दुनिया का कोई सिकंदर नहीं होता, वक्त सिकंदर होता है इसलिए जरूरी है कि हम वक्त के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना सीखें।
हमें राष्ट्रीय जीवन में नैतिकता एवं आत्मनिर्भरता को स्थापित करने के लिए समस्या के मूल को पकड़ना होगा। हम पत्तों और फूलों के सींचन पर ज्यादा विश्वास करते हैं, जड़ के अभिसिंचन की ओर कम ध्यान देते हैं इसलिए पत्र और पुष्प मुरझा जाते हैं। इसलिये हम आत्मनिर्भर नहीं हो पाएं। नरेन्द्र मोदी समस्याओं के मूल को पकड़ने के लिये जद्दोजहद कर रहे है। वे पत्तों और फूलों को सींचने की बजाय जड़ को सींच रहे हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां समस्यामुक्त जीवन जी सके। आजादी का उत्सव मनाते हुए यही कामना है कि पुरुषार्थ के हाथों भाग्य बदलने का गहरा आत्मविश्वास सुरक्षा पाये। एक के लिए सब, सबके लिए एक की विकास गंगा प्रवहमान हो। आजादी का सही अर्थ है स्वयं की पहचान, सुप्त शक्तियों का जागरण, आत्मनिर्भरता एवं वर्तमान क्षण में पुरुषार्थी जीवन जीने का अभ्यास।
प्रेषकः

 

            (ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
मो. 9811051133


Zydus Cadila ने भारत में COVID-19 दवा रेमेडिसवीर लॉन्च की

Zydus Cadila ने भारत में COVID-19 दवा रेमेडिसवीर लॉन्च की

13-Aug-2020

भारत की फार्मा कंपनी जायडस कैडिला (Zydus Cadila) ने गिलियड साइंसेज की एंटीवायरल ड्रग रेमडेसिवीर (Remdesivir) का सबसे सस्ता जेनेरिक संस्करण लॉन्च कर दिया है।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स  के अनुसार, Zydus ने इसका मूल्य 2,800 रुपये ($37.44) प्रति 100mg शीशी रखा है।

 बता दें कि विश्व के कई देशों के अस्पतालों में क्लीनिकल ट्रायल के दौरान ये तथ्य सामने आए थे कि रेमडेसिविर कोरोना के लक्षण की मियाद को 15 दिनों से घटाकर 11 दिन कर सकता है।
इस वजह से भी रेमडेसिविर की मांग बढ़ गई है। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये कोई असरदार इलाज नहीं है। किन्तु किसी भी दवा की अनुपस्थिति में डॉक्टर्स भारत में कोरोना के मरीज़ों के लिए ये दवा लिख रहे हैं।

इस वजह से दिल्ली और भारत के अन्य शहरों में इसकी मांग बढ़ गई है। अमेरिका में स्थित गिलिएड साइंसेज़ ने मूल रूप से इबोला के उपचार के लिए रेमडेसिविर तैयार किया था।

 अब इसने भारत की सिप्ला, जुबिलिएंट लाइफ़, हिटेरो ड्रग्स और माइलॉन को भारत में ये दवा तैयार करने की इजाजत दे दी है।

 फार्मा कंपनी जायडस कैडिला ने अपनी संभावित कोरोना वैक्सीन ZyCoV-D का ह्यूमन ट्रायल शुरू कर दिया है। कंपनी ने एक नियामकीय जानकारी में बताया है कि प्रथम चरण में वह देश के विभिन्न हिस्सों में 1000 लोगों को इसके लिए इनरॉल करेगी।

 कंपनी ने कहा है कि ZyCoV-D का एडेप्टिव फेज I/II ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल पहली इंसानी डोज के साथ आरंभ हो चुका है। इस मल्टी सेंट्रिक स्टडी में वैक्सीन की सेफ्टी, टॉलेरेबिलिटी (सहनशीलता) और इम्यूनोजेनिसिटी (प्रतिरक्षाजनकता) का अध्ययन किया जाएगा।

 साभार- न्यूज़ ट्रैक

 

क्या दफन हो जावेगा मंडल आयोग ?

क्या दफन हो जावेगा मंडल आयोग ?

12-Aug-2020

      के.डी. सिंह
   7अगस्त 1990 को मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा संसद मे तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने किया था၊ देश की बहुसंख्यक आबादी अन्य पिछड़ों को समाज की मुख्य धारा में शामिल करके हक़ व अधिकार देने वाले ऐसे महान व्यक्तित्व को नमन ၊हलांकि
सारे हिंदुवो एक हो जाओ का नारा बुलंद करने वाले लोगों से उम्मीद थी कि देश की बहुसंख्यक आबादी के हक़ व हुकूक के हर निर्णयव कल्याण हेतु बनाई जाने वाली नीतियों में जिस तरह से नारा लगवाकर पिछड़ों को भी हिन्दू मानकर जयकारा लगवाते हैं उसी तरह उनके हक के लिए भी पुरजोर समर्थन करोगे।और जहां भी पिछड़ों के साथ जाति,धर्म,वर्ण इत्यादि के नाम पर शोषण,अत्याचार हो रहा होगा वहां पर  पहल करेगी? जैसे अन्य मुद्दों पर चिल्लाकर कहते हैं कि सारे हिंदुवो एक हो जाओ उसी तरह कहेंगें कि समता मूलक समाज के लिए समाज की मुख्यधारा से वंचित अन्य पिछड़ों को भी अधिकार व सम्मान पाने का हक़ है ।लेकिन ऐसा हो.नही रहा है बल्कि उलट लागूमंडल आयोग को दफन करने के षडयंत्र पूर्ण प्रयासों की खबरें आये दिन आते जा रहे है၊
              ओबीसी कोटा अब तक आधा ही भर पाया है, वैसी स्थिति में अगर सरकार नौकरीपेशा लोगों के बच्चों को ओबीसी से बाहर करके ओबीसी कैंडिडेट की संख्या को और कम कर देती है तो इसका फायदा सिर्फ और सिर्फ सामान्य वर्ग को होगा၊क्रीमी लेयर का सिद्धांत जब आया था तब क्रीमी लेयर के लिए आमदनी की लिमिट 1 लाख रुपए प्रति वर्ष थी၊महंगाई के हिसाब से हर तीन साल में इसमें बढ़ोतरी का प्रावधान है၊
      ओबीसी या अन्य पिछड़ा वर्ग संविधान के अनुच्छेद 340 के मुताबिक देश का वह वर्ग है जो शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा है. दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग यानि मंडल कमीशन के मुताबिक देश की 52% आबादी इस वर्ग में आती है. चूंकि केंद्र सरकार सामाजिक-आर्थिक और जातीय जनगणना, 2011 के आंकड़े जारी नहीं कर रही है, इसलिए हर किसी को इसी आंकड़े से काम चलाना पड़ता है၊केंद्र सरकार पहली बार हर तरह के नौकरीपेशा लोगों के वेतन को आमदनी की गणना में इस्तेमाल करने जा रही है၊ऐसी खबरें छपी हैं कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग इस बात के लिए तैयार हो गया है कि वेतन को आमदनी में गिना जाए हालांकि आयोग की तरफ से इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन सरकार की इस बारे में मंशा स्पष्ट है?केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में गठित मंत्रियों के समूह और इसके निर्धारण के बारे में सिफारिश देने के लिए बनी बीपी शर्मा कमेटी की इस बारे में एक ही राय है၊विरोध आयोग की तरफ से हुआ और सूचना है कि आयोग के सदस्यों पर दबाव डाला जा रहा है कि वे सरकार की राय पर मुहर लगा दें၊अगर ऐसा होता है तो सरकारी से लेकर निजी क्षेत्र के लाखों लोगों के बच्चे ओबीसी कोटे से बाहर हो जाएंगे၊
           क्रीमी लेयर की अवधारणा दरअसल संविधान या मंडल कमीशन में नहीं है. जब केंद्र सरकार की नौकरियों में 27% ओबीसी आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई तब 9 जजों की संविधान पीठ ने इंदिरा साहनी मुकदमे में ये फैसला दिया कि सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दे सकती है लेकिन ये आरक्षण अन्य पिछड़ा वर्ग के क्रीमी लेयर यानि आगे बढ़े हुए तबके को नहीं दिया जाएगा၊इसी के आधार पर केंद्र सरकार ने 1993 में आदेश जारी करके निर्धारित किया कि कौन कौन से लोग क्रीमी लेयर में आएंगे၊इसमें संवैधानिक पदों पर मौजूद व्यक्ति, क्लास वन अफसर और कई तरह की कटेगरी निर्धारित की गई၊कुल आमदनी की सीमा 1 लाख रुपए सालाना निर्धारित की गई. लेकिन वेतन की आय को आदमनी में नहीं जोड़ा गया၊अब पहली बार मोदी सरकार वेतन को आमदनी में जोड़कर क्रीमी लेयर का निर्धारण करना चाहती है. सरकार की तरफ से इसके लिए तर्क दिया जा रहा है कि अभी आमदनी की गणना को लेकर बहुत उलझन है. उन पेचीदगियों से बचने के लिए हर तरह की आमदनी, जिसमें वेतन शामिल है, को क्रीमी लेयर की गणना में शामिल किया जाए၊लेकिन ये वो बात है जो सरकार सार्वजनिक रूप से कह रही है, इसके पीछे भाजपा और. विशेषकर संघ की दो मंशा है၊
       एक, भाजपा अपने प्रतिबद्ध मतदाताओं को ये संदेश देगी कि उसने अन्य पिछड़े वर्ग के नौकरीपेशा वर्ग के बड़े हिस्से को ओबीसी कोटे से बाहर कर दिया है, जिससे आरक्षण का लाभ अब गरीब ओबीसी को मिलेगा၊इस तरह  ओबीसी वोट में सेंधमारी करना चाहती है, जो तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक उसका नहीं हुआ है၊और दो, बीजेपी अपने सवर्ण कोर वोटरों को कहेगी कि उसने अन्य पिछड़ा वर्ग को खंड-खंड कर दिया है । क्योंकि. सवर्णों को सबसे ज्यादा चुनौती अन्य पिछड़ा वर्ग से ही मिलती है၊सवर्ण तुष्टीकरण की दिशा में भाजपा का ये दूसरा बड़ा कदम होगा၊ इससे पहले बीजेपी सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण दे चुकी है၊ अगर नौकरीपेशा ओबीसी का बड़ा हिस्सा ओबीसी आरक्षण से बाहर होता है तो इससे कुल मिलाकर अन्य पिछड़ो की सत्ता और संसाधनों पर दावेदारी कमजोर होगी  और खासकर पढ़ा-लिखा मिडिल क्लास ही उस वर्ग की दावेदारी को मजबूत करता है और वही उस तबके के हितों की रक्षा करने में समर्थ होता है၊अगर ये तबका ओबीसी से काट कर अलग कर दिया गया, तो न तो ओबीसी आरक्षण को बचा पाना आसान होगा?
       क्रीमी लेयर की पूरी धारणा ही समस्यामूलक है၊संविधान का आर्टिकल-340 शैक्षणिक और सामाजिक पिछड़ापन की बात तो करता है लेकिन उसमें आर्थिक पिछड़ापन शब्द नहीं है. कुछ जातियों का सामाजिक पिछड़ापन इसलिए नहीं है कि वे गरीब हैं. उनके साथ अवमानना या अपमान का व्यवहार इसलिए होता है क्योंकि वे जातिक्रम में नीचे हैं၊ये आर्थिक नहीं, सामाजिक समस्या है၊ वैसे भी आरक्षण गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम नहीं है၊ आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करना और राजकाज में जिन समूहों की हिस्सेदारी नहीं है या कम है, उन्हें हिस्सेदारी देना है၊ लेकिन
सरकार संविधान की मूल भावना की अनदेखी करके .आरक्षण के लिए आर्थिक आधार को आगे बढ़ा रही है. मिसाल के तौर पर, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सामान्य वर्ग को आरक्षण देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) में संशोधन किया गया၊जाहिर है की भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार मंडल कमीशन के पिछले तीस साल के कामकाज को बेअसर करना चाहती है. राजकाज में सामाजिक विविधता लाने के प्राथमिक उद्देश्य से मंडल कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में केंद्र सरकार की नौकरियों में ओबीसी को 27% रिजर्वेशन देने की सिफारिश की थी. मंडल आयोग ने ओबीसी को समर्थ और सक्षम बनाने के लिए 40 सिफारिशें की थीं, जिनमें से सिर्फ 2 पर ही अमल हुआ है और वह भी आधा-अधूरा ၊ जिसे खुद भाजपा सरकार संसद के दोनों सदनों पर सांसदों के सवालों के जवाब में कई बार बता चुकी है कि अन्य पिछड़ा वर्ग  कोटा अभी तक भर नहीं पाया है ၊

लेखक के अपने  निजी विचार है !


रायबरेली में लगातार शव मिलने का सिलसिला जारी।

रायबरेली में लगातार शव मिलने का सिलसिला जारी।

12-Aug-2020

ब्रेकिंग रायबरेली-

रायबरेली में लगातार शव मिलने का सिलसिला जारी। शिवगढ़ थाना क्षेत्र के ढेकवा गाँव के पास रजबहे में मिला बुजुर्ग का शव। शव की सूचना से परिजनों में कोहराम। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल की शुरू।


बस स्टैंड में एक यात्री को अन्य यात्रियों ने जमकर पीटा

बस स्टैंड में एक यात्री को अन्य यात्रियों ने जमकर पीटा

11-Aug-2020

Banda

AMIT NAMDEV

बस स्टैंड में एक यात्री को अन्य यात्रियों ने जमकर मारपीट की _____ मारपीट के साथ-2 उसका मोबाइल और पांच हजार रुपये छीन ले गये _____ आरोपी युवक बस में सवार होकर फरार हो गये _____ पीड़ित युवक को मार-मारकर अधमरा किया _____ पूरा मामला बस स्टैंड बांदा का है|


खुलासा पोस्ट ने ब्रेक की खबर  -अब आया नतीजा  सचिन कैम्प के विधायक वापस लौटेंगे  -राजस्थान का संकट समाप्त  भाजपा का मिशन राजस्थान फैल

खुलासा पोस्ट ने ब्रेक की खबर -अब आया नतीजा सचिन कैम्प के विधायक वापस लौटेंगे -राजस्थान का संकट समाप्त भाजपा का मिशन राजस्थान फैल

10-Aug-2020
खुलासा पोस्ट ने ब्रेक की खबर अब आया नतीजा सचिन कैम्प के विधायक वापस लौटेंगे राजस्थान का संकट समाप्त भाजपा का मिशन राजस्थान फैल

राजस्थान में सियासी उठापटक जारी है ।नाराज़ सचिन पायलट ने दिल्ली में आज राहुल गांधी से मुलाक़ात की है ।

राजस्थान में सियासी उठापटक जारी है ।नाराज़ सचिन पायलट ने दिल्ली में आज राहुल गांधी से मुलाक़ात की है ।

10-Aug-2020
राजस्थान में सियासी उठापटक जारी है ।नाराज़ सचिन पायलट ने दिल्ली में आज राहुल गांधी से मुलाक़ात की है । राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सुलह की कोशिशें की जा रही हैं । सूत्रों के अनुसार सचिन पायलट के समर्थक विधायकों ने कांग्रेस न छोड़ने का उन पर दबाव बनाया और वे अलग थलग पड़ गए थे । आज राहुल गांधी से मुलाक़ात के बाद राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर संकट के बादल छंटते नज़र आ रहे हैं

छत्तीसगढ़ में शुरू होगी इंदिरा वन मितान योजना : सीएम भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ में शुरू होगी इंदिरा वन मितान योजना : सीएम भूपेश बघेल

10-Aug-2020

मुख्यमंत्री ने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर की घोषणा

वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और मार्केटिंग से वनवासियों की समृद्धि के खुलेंगे नए द्वार
अनुसूचित क्षेत्र के विकासखण्ड में होगी वनोपज प्रसंस्करण केन्द्रों की स्थापना  
10 हजार गांवों में बनेंगे युवाओं के समूह: 5 से 6 लाख लोग जुड़ेंगे
योजना से 19 लाख परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य
समूहों को दिए जाएंगे वृक्ष प्रबंधन के अधिकार
वनवासियों की खुशहाली और वनांचल के गांवों को स्वालंबी बनाने की पहल
जल जंगल जमीन ही नहीं बल्कि वनवासियों को हमने शासन-प्रशासन
की ताकत भी सौंपी: मुख्यमंत्री

वनाधिकार दिलाने में छत्तीसगढ़ पूरे देश में अव्वल

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कल विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर राज्य में वनवासियों की खुशहाली और वनांचल के गांवों को स्वावलंबी बनाने के उद्ेदश्य से इंदिरा वन मितान योजना शुरू किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत राज्य के आदिवासी अंचल के दस हजार गांव में युवाओं के समूह गठित कर उनके माध्यम से वन आधारित  समस्त आर्थिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इन समूहों के माध्यम से वनवासियों के स्वरोजगार और उनकी समृद्धि के नए द्वारा खुलेंगे। इस योजना के तहत समूहों के माध्यम से वनोपज की खरीदी, उसका प्रसंस्करण एवं मार्केटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। राज्य के प्रत्येक आदिवासी विकासखण्डों में वनोपज प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना किए जाने का लक्ष्य सरकार ने रखा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों के 10 हजार गांवों में इस योजना के अंतर्गत समूह गठित किए जाएंगे, जिनमें युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रत्येक समूह में 10 से 15 सदस्य होंगे। इंदिरा वन मितान योजना में अनुसूचित क्षेत्रों के 19 लाख परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य है। इस योजना के माध्यम से समूहों को वृक्ष प्रबंधन का अधिकार प्रदान किया जाएगा, जिससे वे वन क्षेत्रों के वृक्षों से वनोपज संग्रहण कर आर्थिक लाभ ले सकें। वनोपज की खरीदी की व्यवस्था समूह के माध्यम से की जाएगी, जिससे वनोपज का सही मूल्य मिल सके। समूह के माध्यम से लोगों के लिए स्व-रोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे। वनोपजों की मार्केटिंग की व्यवस्था के साथ अनुसूचित क्षेत्रों के प्रत्येक विकासखण्ड में वनोपज प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी। एक यूनिट की अनुमानित लागत लगभग 10 लाख रूपए होगी। अनुसूचित क्षेत्रों के 85 विकासखण्ड में वनोपज प्रोसेसिंग यूनिट स्थापना के लिए 8 करोड़ 50 लाख रूपए की राशि प्राधिकरण मद से उपलब्ध कराई जाएगी। वनों में इमारती लकड़ी की बजाए फलदार और वनौषधियों के पौधे लगाए जाएंगे। जिससे वनवासियों की आय बढ़ सके।

    विश्व आदिवासी दिवस का गरिमामय कार्यक्रम मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, मंत्रीगणों, संसदीय सचिवों, विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों तथा आदिवासी समाज के गणमान्य लोगों की मौजूदगी में कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल सहित अतिथियों द्वारा आंगादेव, बूढ़ादेव एवं मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना से हुआ। इस अवसर पर आदिवासी नर्तक दल द्वारा  गौर नृत्य की प्रस्तुति दी गयी। इस मौके पर मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, कवासी लखमा, अमरजीत भगत, डॉ. शिव डहरिया, श्रीमती अनिला भेंड़िया तथा खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री गिरीश देवांगन भी नर्तक दलों के साथ मांदर की थाप पर थिरके और आदिवासी कला संस्कृति को आगे बढ़ाने और उसे जीवंत बनाए रखने की छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। आदिवासी गौर नृत्य में मंत्रीगणों की भागीदारी से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय का पूरा वातावरण उत्साह और उमंग से भर उठा।

        मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल अपने उद्बोधन में आगे कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति और  प्राकृतिक संसाधनों का सबसे बड़ा संरक्षक रहा है। प्रकृति से निकटता और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित दोहन भावी पीढ़ी के बेहतर जीवन के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर हमें आदिवासी समाज के हित के सभी पहलुओं पर समग्रता से विचार करना चाहिए। उन्होंने आदिवासी समाज के प्रत्येक सदस्य और संगठन से अपील की कि वे अपने अधिकारों और विकास के अवसरों के बारे में मुखर हो। छत्तीसगढ़ सरकार सदैव आपके साथ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के काम-काज, नीतियों और फैसलों से आदिवासी अंचलों की फिजा में तेजी से बदलाव आ रहा है। जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकार की नई ईबारत लिखी जा रही है।

        मुख्यमंत्री ने इस मौके पर वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि हमने राज्य के सभी पात्र वनवासियों को वन अधिकार पट्टा देने का अभियान शुरू किया है। छत्तीसगढ़ राज्य वनवासियों को व्यक्तिगत एवं सामुदायिक पट्टा देने के मामले में देश में अव्वल स्थान पर है। अभी तक राज्य में 4.50 लाख व्यक्तिगत तथा 43 हजार सामुदायिक पट्टे दिए जा चुकें है। वन अधिकार पट्टों के माध्यम से चार लाख 18 हजार हेक्टेयर भूमि आबंटित की गई है, जो देश में सर्वाधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि  वन अधिकार पट्टों को मनरेगा, सिंचाई, खेती-किसानी और खाद्य संरक्षण जैसे अनेक कार्यो से जोड़कर पट्टे की ंभूमि को हमने वनवासियों के खुशहाली और आमदनी का माध्यम बनाने का प्रयास कर रहें है। उन्होंने इस मौके पर राज्य के सभी वन भूमि पट्टाधारियों से अपने अधिकार और अवसर का भरपूर लाभ उठाने की अपील की।

        मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य में लघु वनोपज की खरीदी और उनके समर्थन मूल्य में वृद्धि सहित शहीद महेन्द्र कर्मा तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की यह तमाम कोशिशें आदिवासी भाई-बहनों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने तथा उन्हें विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में पहले सात लघु वनोपज की खरीदी होती थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 31 कर दिया है। उन्होंने कहा कि महुआ सहित अन्य लघु वनोपजों के मूल्य में वृद्धि किए जाने से इसका सीधा फायदा संग्राहक परिवारों को हुआ है।

        मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी अंचलों में विशेषकर बस्तर में सिंचाई का रकबा बहुत कम है। इसे बढ़ाने और बस्तर अंचल के लोगों की हर जरूरत के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने हेतु बोधघाट परियोजना की शुरूआत की है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के डूबान क्षेत्र में आने वाली भूमि का मुआवजा और पुनर्वास पैकेज आदिवासी समाज के लोग खुद तय करेंगे। उन्होंने कहा कि बोधघाट सिंचाई परियोजना की पुनर्वास नीति देश दुनिया की सबसे अच्छी नीति बने यह उनकी मंशा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी भाई-बहनों को सिर्फ जल, जंगल और जमीन की ताकत ही नही बल्कि शासन और प्रशासन की ताकत भी सौंपी है। उन्होंने इस मौके पर आदिवासी समाज के लोगों से पूरी सक्षमता के साथ आगे बढ़ने और राज्य के विकास में भागीदारी निभाने की अपील की।

        इस अवसर पर मंत्री श्री कवासी लखमा एवं मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने भी अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आदिवासियों के हितों का ध्यान रखा है, उनका मान-सम्मान बढ़ाया है। मंत्रीद्वय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति को संरक्षित एवं संवर्धित करने तथा उसे विश्व पटल पर लाने की सराहनीय पहल मुख्यमंत्री ने की है। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर वनांचल क्षेत्र के विकास के लिए मुख्यमंत्री द्वारा दी गई सौगातों के लिए उनका आभार जताया। कार्यक्रम को सर्वआदिवासी समाज के अध्यक्ष श्री बी.पी.एस. नेताम ने भी सम्बोधित किया और आदिवासी समाज से संबंधित मांगों का ज्ञापन सौंपा।

    कार्यक्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री अमरजीत भगत, कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे, गृह मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, राजस्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल और नगरीय विकास मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, संसदीय सचिव सुश्री शकुंतला साहू, श्री चिंतामणि महाराज और जशपुर विधायक विनय भगत, राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री गिरीश देवांगन अनेक जनप्रतिनिधि, मुख्य सचिव श्री आर.पी. मण्डल सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।


एसजीपीजीआई की कोविड रिपोर्ट का फर्जीवाड़ा

एसजीपीजीआई की कोविड रिपोर्ट का फर्जीवाड़ा

08-Aug-2020

लखनऊ-

एसजीपीजीआई की कोविड रिपोर्ट का फर्जीवाड़ा

मरीजों को नकली रिपोर्ट देकर पैसे वसूली का खुलासा

पीजीआई के जैसी दिखने वाली रिपोर्ट तैयार कर रहे जालसाज

एसजीपीजीआई ने कम पैसों का झांसा देकर की गई रिपोर्ट को नकारा

SGPGI की तरफ से पीजीआई थाने में दर्ज कराई गई FIR


निराश जनता  के पास काग्रेस एकमात्र विकल्प ?

निराश जनता के पास काग्रेस एकमात्र विकल्प ?

07-Aug-2020

              के डी सिंह.
        देश की सबसे  पुरानी राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आज भी एकमात्र पार्टी है जो  भाजपा और सत्ता के विरूद्ध अलग - अलग मोर्चे पर संघर्ष करती दिख रही है၊ जबकि अन्य विपक्षी दल व उसके नेता प्रधान मंत्री तथा गृह मंत्री की युगल जोड़ी के सामने घुटने टेक चुकी है ၊हलांकि काग्रेस एकजुट होने के बजाय  चार  अलग -अलग मोर्चा पर बटकर देश में विपक्ष की भूमिका में है ၊लेकिन पार्टी के नेताओं का पतक्षड़नुमा आचरण ने कई तरह के प्र१न चिन्ह  खड़ा कर दिया है ?बाबजूद इसके भाजपा से निराश  जनता के पास अब कांग्रेस के सिवा कोई और विकल्प नही दिख रहा है?परन्तु अभी सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही हैं कि यदि राजस्थान में भी कांग्रेस की सरकार अगर अंततः गिरा ही दी जाती है तो उसका ‘ठीकरा’ किसके माथे पर फूटना चाहिए ? मध्य प्रदेश को लेकर भी यही सवाल अभी हवा में ही लटका हुआ है।?
       राजस्थान के मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत  एक बड़े जादूगर हैं।उनकी सरकार अब किसी बड़े जादू से ही बच सकती है?राजस्थान में संकट की शुरुआत ‘सोने की छुरी पेट में नहीं घुसेड़ी जाती’ के प्रचलित राजस्थानी मुहावरे से हुई थी और उसका आंशिक समापन जनता राजभवन घेर ले तो फिर मुझे मत कहिएगा ,से हुआ है၊मुख्यमंत्री ने अब कहा है कि ज़रूरत पड़ी तो वे अपने विधायकों के साथ राष्ट्रपति से भी मिलेंगे या प्रधानमंत्री निवास के सामने धरना देंगे।मुख्यमंत्री को अभी अपनी उस चिट्ठी का जवाब प्रधानमंत्री से नहीं मिला है जिसमें उन्होंने राजस्थान में लोकतंत्र बचाने की अपील की थी।गहलोत सत्ता बचाने के उनके संघर्ष को जनता के अधिकारों की लड़ाई में बदलना चाहते हैं। लेकिन जनता अब अपना परिचय इसी प्रकार देने में ज़्यादा सुरक्षित महसूस करती है। वह जानती है कि भाजपा लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर चुनी हुई सरकारों को गिराने और कांग्रेस उन्हें बचाने के काम में लगी है।जनता के विवेक पर किसी का कोई भरोसा नहीं है। ऐसा नहीं होता तो विधायकों का समर्थन जुटाने के लिए करोड़ों की बोलियां नहीं लगतीं और जनता के चुने हुए प्रतिनिधि अपने आप को सितारा होटलों के कमरों में ‘दासों’ की तरह बंद नहीं कर लेते। और जनता मूक दर्शकों की तरह थिएटर के बाहर खड़ी है । मंच पर १ केवल  वे ही दिखाई देते हैं और प्रवेश द्वारों पर सख़्त पहरे हैं।
      मध्य प्रदेश में कोरोना काल का पूरा मार्च महीना एक चुनी हुई सरकार को गिराने में खर्च हो गया।जिसके बारे में मुख्यमंत्री ने ही  स्वीकार किया कि सब कुछ केंद्र के इशारे पर किया गया ।़शिवराज सिंह के शपथ लेने के तीन महीने बाद पूरे मंत्रिमंडल का गठन हुआ और अब ज़्यादातर नए मंत्री उप-चुनाव जीतने की तैयारी में लग गए हैं।मुख्यमंत्री को कोरोना हो गया है၊लोकतंत्र भी देश की तरह मध्य प्रदेश में भी पूरी तरह सुरक्षित है पर एक सरकार कोरना में बन गई၊देश एक ऐसी व्यवस्था की तरफ़ बढ़ रहा है जिसमें . धीरे-धीरे चुनी हुई सरकारों की ज़रूरत ही ख़त्म हो जाएगी।जनता की जान की क़ीमत घटती जाएगी?लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिस जनता की लड़ाई का दम भरा जा रहा है उसमें अस्सी करोड़ तो पाँच किलो गेहूं या चावल और एक किलो दाल लेने के लिए।। क़तारों में लगा दिए गए हैं और बाक़ी पचास करोड़ कोरोना से बचने के लिए बंटने वाली सरकारी वैक्सीन का अपने घरों में इंतज़ार कर रहे हैं। और यह भी कि इस ‘असहमति’ के लिए उस मतदाता की कोई ‘सहमति’ नहीं ली जाती जिसकी उम्मीदों को सरे आम धोखा दिया जा रहा है ?ऐसी हालत में कुछ प्रेक्षकों का मत है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लाख जतन कर लें, उनकी सरकार बचने वाली नहीं है और मुमकिन है कि अगस्त में उनकी सरकार गिरा दिया.जाये? राजस्थान की जनता के आदेश से खिलवाड़ चल रहा है၊भाजपा राजस्थान संकट के लिए कांग्रेस के आंतरिक कलह को वजह बताती है तो अशोक गहलोत भाजपा को और सचिन पायलट अशोक गहलोत को ၊ कहा जा रहा है कि.राज्यपाल और अदालत अपनी-अपनी जगह पर हैं ,उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है ,दोनों कायदे-क़ानून से बंधे हैं ?अब अशोक गहलोत सचिन और भाजपा के साथ-साथ राज्यपाल और अदालत के लपेटे में भी आ गए हैं ၊कांग्रेस का हाईकमान गहलोत सरकार के साथ खड़ा है ၊
      वर्ष 2014 की लोकसभा सभा चुनाव के वाद भारतीय राजनीति में भाजपा ने देश में नई राजनीतिक संस्कृति का इजाद किया है ၊ इस रणनीति के मामले में पिछले छह साल से सत्तारूढ़ भाजपा की मोदी और शाह की जोड़ी एक कामयाब जोड़ी साबित हुई है၊तमाम नाकामियों के बावजूद सरकारें हड़पने में इस जोड़ी का कोई सानी नहीं है၊ .चूंकि इस जोड़ी ने तय कर लिया है कि उसे काग्रेस की एक = एक करके. राज्य सरकारे गिराना है तो ये सरकार किसी भी कीमत पर गिराकर ही रहेगी ၊ इसीलिए.कांग्रेस मध्यप्रदेश की सरकार नहीं बचा सकी,कर्नाटक के नाटक में उसे नाकामी हाथ लगी और यही सब अब राजस्थान में होता दिखाई दे रहा है ၊.भाजपा का कमाल है कि उसे हर सूबे में कांग्रेस के भीतर बिभीषण मिल जाते हैं. मिलते जा रहे हैं .ईडी और सीबीआई से घबड़ाई बसपा सुप्रीमो भी अब बिभीषन बनने पर विवश हैं ၊
        ..भविष्यवाणी की जा रही है कि राजस्थान सरकार को अब कोई 'माई का लाल' बचाने  वाला नहीं है और इस सरकार के गिरते ही भाजपा का 'कुरसी अश्वमेघ यज्ञ ' का घोड़ा महाराष्ट्र की और मुड़ जाएगा .၊महाराष्ट्र के  मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भाजपा को सरकार गिराने के लिए न्यौता दे चुके हैं ၊भाजपा जनता को उलझाए रखने के लिए योजनाबद्ध तरीके की तैयारी किये बैठी है. 5  अगस्त को राममंदिर का भूमि पूजन,15  अगस्त को कोविड वैक्सीन की घोषणा,बाद में रफाल लड़ाकू विमान का भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाना तो जगजाहिर है .आगे बिहार है,बंगाल है भाजपा इन्हीं शिगूफों के सहारे अगले चुनाव यानि 2024  तक की यात्रा पूरी कर लेगी ? परन्तु सोनिया गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस संगठन के कर्णधार से लेकर तमाम सेनापति या तो बुढ़ा  हो.गए हैं या उनमें  समर जीतने की सू

 


सुशांत सिंह राजपूत और दिशा की हत्या की गई -वरिष्ठ नेता नारायण राणे

सुशांत सिंह राजपूत और दिशा की हत्या की गई -वरिष्ठ नेता नारायण राणे

06-Aug-2020

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और बीजेपी के वरिष्ठ नेता नारायण राणे ने दावा किया है कि सुशांत सिंह राजपूत और उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत आत्महत्या नहीं, जबकि हत्या का मामला है।

 सियासत की  खबर के अनुसार, नारायण राणे ने मुंबई पुलिस एवं महाराष्ट्र सरकार पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सुशांत और दिशा दोनों की हत्या हुई है और इन दोनों मामलों की जांच एक-दूसरे से जोड़कर ही की जानी चाहिए।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की मौत केम मामलेम में मुंबई पुलिस पहले से सवालों के घेरे में है। सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान ने सुशांत की मौत से सिर्फ 6 दिन पहले आत्महत्या कर ली थी, लेकिन इन दोनों मौत की सही जांच न करने के आरोप मुंबई पुलिस पर लग रहे हैं।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने मंगलवार को इन दोनों ही मामलों को हत्या का मामला बताते हुए राज्य सरकार एवं मुंबई पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
राणे ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार दिशा सालियान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या हुई है।

 उसकी ऑटोप्सी रिपोर्ट में उसके प्राइवेट पार्ट्स पर चोट के गहरे निशान पाए गए हैं। मुंबई पुलिस चुप्पी साथ कर उन लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है, जो दोषी हैं।
राणे ने आरोप लगाया कि दिशा सालियान का परिवार काफी दबाव में है। जब मुंबई महानगरपालिका एक IPS अधिकारी को क्वारंटाइन कर सकती है, तो दिशा का परिवार कैसे बोल सकता है।
राणे ने कहा कि जब जरूरत होगी, वह दिशा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट संबंधित अधिकारी के सामने पेश करेंगे, और उस मंत्री का नाम भी बताएंगे, जो आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहा है। जब वह गिरफ्तार होगा, तो उसका नाम उसकी तस्वीर के साथ अपने आप सामने आ जाएगा।


महानायक  अमिताभ  बच्चन  कोरोना से जंग जीतकर लौटे ,बच्चन बोले- शुक्रिया !

महानायक अमिताभ बच्चन कोरोना से जंग जीतकर लौटे ,बच्चन बोले- शुक्रिया !

04-Aug-2020

कोरोना से जंग जीतते ही अमिताभ का ...

बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने कोरोना से जंग जीत ली है. एक्टर होम क्वारनटीन में हैं और रेस्ट कर रहे हैं. अमिताभ के लिए दुनियाभर के तमाम प्रशंसकों की दुआएं और प्यार हमेशा से खास मायने रखते रहे हैं. अपने फैन्स को बिग बी एक्सटेंडेड फैमिली कह कर बुलाते हैं. अमिताभ का फैन तो हर कोई है. अब जब अमिताभ स्वस्थ हो चुके हैं तो अमूल ने भी उन्हें खास अंदाज में इसकी बधाई दी है.

अमूल हमेशा से अपने कॉमिक पोस्टर्स के जरिए लोगों के साथ जुड़ता है. लॉकडाउन में रामायण के रीटेलिकास्ट को दुनियाभर में पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला था. तब भी अमूल ने अपनी इस यूनिक स्टाइल में सीरियल को ट्रिब्यूट दिया था. अब जब करोड़ों लोगों के आइकन 78 वर्षीय अमिताभ बच्चन कोरोना जैसे खतरनाक वायरस को मात देकर पूरी तरह स्वस्थ होकर वापस लौटे हैं, तो अमूल ने भी बड़ी गर्मजोशी से एक्टर का स्वागत किया है. अमूल ने अमिताभ के सम्मान में एक पोस्टर जारी किया है जो वाकई में आकर्षक है.

पोस्टर खुद महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. कॉमिक फोटो में अमिताभ सोफे पर बैठे हैं और मोबाइल देख रहे हैं. अमिताभ के बगल में क्यूट लिटिल अमूल गर्ल भी बैठी हुई है. फोटो में सेंटर ऑफ अट्रैक्शन तो वो जगह है जहां लिखा हुआ है- AB बीट्स C. अमिताभ ने पोस्टर शेयर करते हुए लिखा- ”शुक्रिया अमूल, हमेशा अपने अद्भुत और जुदा पोस्टर कैंपेन्स में मेरे बारे में सोचने के लिए. वर्षों से ‘अमूल’ ने सम्मानित किया है मुझे, एक साधारण शख्सियत को ‘अमूल्य’ बना दिया तुमने!”

फैन्स ने बिग बी के लिए किए हवन

बता दें कि अमिताभ बच्चन कुछ हफ्तों पहले कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. उन्हें मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अब वे पूरी तरह से स्वस्थ होकर घर वापस पहुंच चुके हैं. एक्टर की सलामती के लिए फैन्स ने प्रार्थना की दुआएं मांगी और हवन तक कर डाले. अमिताभ ने भी सभी का शुक्रिया अदा किया.

मीडिया इन पुट 


राहुल को RSS की विचारधारा पर चलने वाले कांग्रेसी मंज़ूर नही यही बने है उनकी राह का रोड़ा

राहुल को RSS की विचारधारा पर चलने वाले कांग्रेसी मंज़ूर नही यही बने है उनकी राह का रोड़ा

03-Aug-2020

लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी

राज्य मुख्यालय लखनऊ।देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को बाहरी रूप में तो संकटों का सामना करना ही पड़ रहा था साथ ही पार्टी के अंदर भी संकट का दौर चल रहा है।कहते है जब बुरा दौर चल रहा होता है तो ऊँट पर बैठे हुए कुत्ता काट लेता है इस लिए बहुत ही फूंक-फूंक कर क़दम रखना पड़ता है और यह सही भी है रखना भी चाहिए।ख़ैर जब मोदी की भाजपा सरकार चारों ओर से घिरी हुई नज़र आ रही है हर तरफ़ चाहे विदेश नीति,अर्थव्यवस्था या बढ़ता कोरोना का प्रकोप देश में बढ़ती बेरोज़गारी भी विकराल रूप ले रही है जिस तरफ़ नज़र दौड़ाओ तरही-तरही है मची हुई है जनता कांग्रेस की वापसी पर विचार करने को विवश लग रही है इसमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा मोदी सरकार को हर मोर्चे पर घेरने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहे ऐसे में पूरी कांग्रेस को राहुल गाँधी के पीछे लामबंद होना चाहिए था लेकिन नही वहाँ तो एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ मची है वरिष्ठ कांग्रेसियों द्वारा जो टांग खिंचाई की जा रही है उसका जनता में ग़लत संदेश जा रहा है जो कांग्रेस के भविष्य के लिए ठीक नहीं है अब सवाल उठता है कि क्या हमेशा वरिष्ठों ने कांग्रेस को कमज़ोर करने का काम किया ? कांग्रेस की सबसे बड़ी कमज़ोरी उसके अंदर ही मौजूद साँप नही अजगरों ने कांग्रेस और उसकी की विचारधारा को निगल लिया।राजनीतिक विशेषज्ञ का मानना है कि उसके अंदर RSS की विचारधारा को पसंद करने एवं उस पर काम करने वाले मौजूद है जो हिन्दुस्तान के राजनीतिक भविष्य राहुल गाँधी को मंज़ूर नही यही वजह है कि उसकी राह में रोड़े डालने में कोई कमी नही छोड़ी जा रही है लगता है कि राहुल सच्चाई और झूटो के चक्रव्यूहों के बीच में फँस गए है जबकि राहुल गाँधी यह साफ़ कर चुके है किसी ओर पर निशाना साधते हुए कि मेरा राजनीतिक भविष्य चाहे ख़त्म हो जाए लेकिन मैं झूठ की राजनीति नही करूँगा और न ही झूठ बोलूँगा राहुल गाँधी के इस बयान के बाद जनता में एक अलग ही संदेश गया झूठ के इस दौर में अगर कोई सच की बात करे तो उसका सकारात्मक संदेश जाना ही है जनता इस पर चर्चा कर रही कि राहुल गाँधी सच की राजनीति करना चाहते है लेकिन कांग्रेस के बुजुर्ग हो चुके नेता उन्हें अपने पुराने ढर्रे पर चलाना चाहते और उन्हें यह मंज़ूर नही है।जिन्होंने कांग्रेस की भट्टी पर चढ़ी कढ़ाई से दूध नही मलाई खाकर अपने आपको पाला पोसा है बल्कि मृतक आश्रितों को भी आगे बढ़ाने का काम किया आज वहीं उसमे कमियाँ निकाल कांग्रेस को कमज़ोर करने का प्रयास कर रहे है अब देखना यह है कि क्या हिन्दुस्तान का राजनीतिक भविष्य इनकी महत्वकांक्षाओं के चलते हार मान लेगा या अपने सिद्धांतों पर चलते हुए उनको अपने ही सिद्धांतों पर चलने के लिए मजबूर कर देगा।वैसे तो राहुल गाँधी के सक्रिय होने बाद से ही कांग्रेस में उनकी टांग खिंचाई शुरू हो गई थी जो अब मंजरे आम पर आ गई लगता है अब या तो कांग्रेस इससे भी बुरा दौर आएगा या कांग्रेस और उसकी विचारधारा इन वरिष्ठों के मकड़जाल से बाहर निकल निखर कर सामने आएगी और ऐसा जब हो सकता है जब सोनिया , प्रियांका व राहुल गाँधी एक साथ मज़बूत और पक्का मन कर इस कांग्रेस को इन्हीं पुराने कांग्रेसियों को सौंपकर नई कांग्रेस का गठन करे अपनी दादी आर्यन लेडी पूर्व प्रधानमंत्री स्व श्रीमती इंदिरा गाँधी की तरह जब कुछ हो सकता है नहीं तो ये संघ विचारक कांग्रेसी पार्टी को अपने पैरों पर खड़ी नही होने देंगे।कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी द्वारा के राज्यसभा सांसदों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिए बैठक ले रही थी इसी बीच कुछ सांसदों जिसमें पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल , पीएल पुनिया, राजीव सातव रिपुन वोरा एवं छाया शर्मा जैसे सांसदों ने राहुल गाँधी को फिर से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की माँग की उनका तर्क था कि देश के मौजूदा सियासी हालात का सामना राहुल गाँधी जिस मज़बूती के साथ सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभा रहे है उससे साफ़ हो जाता है राहुल को पार्टी की कमान सौंप देनी चाहिए।वह मोदी सरकार की नकारात्मक नीतियों को जनता के बीच रख रहे है जबकि आज देश में मोदी सरकार के सामने खड़े होने की किसी भी पार्टी अथवा नेता की हिम्मत नही हो रही है लेकिन राहुल गाँधी सीना ठोंककर मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध कर और मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे है।इसके बाद बुज़ुर्ग कांग्रेसी राज्यसभा के सांसद पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल एवं आनन्द शर्मा आदि जैसे सरीखे नेताओं ने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते-लगाते उनका दर्द छलक गया उन्होंने कहा कि वेणुगोपाल और सातव को राज्यसभा में भेजने का फ़ैसला राहुल गाँधी ने किसकी सलाह पर लिया और किस हैसियत से लिया मामला यही नही रूका राहुल गाँधी द्वारा ट्विटर पर मोदी सरकार से सवाल पूछने को भी ग़लत क़रार दिया राहुल विरोधी कांग्रेस नेताओं का कहना था कि हमें नही पता राहुल गाँधी को सवाल पूछने की सलाह कौन देता है उसे विदेश नीति एवं रक्षा नीति का क्या ज्ञान है।इनका यह भी तर्क था कि इस तरह के सवालों से पार्टी को कोई फ़ायदा नही हो रहा है।वह यही नही रूके उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी के क़रीबी ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट जैसे ही पार्टी को कमज़ोर कर रहे है इन हालात में पार्टी की कमान यदि राहुल गाँधी के हाथ में दे भी दी तो वह पार्टी को कैसे सँभालेंगे इसकी क्या गारंटी है कि उनकी टीम के सदस्य आगे मोदी की भाजपा में नही जाएँगे यह सब सोनिया गाँधी की मौजूदगी में ही हो रहा था।राहुल विरोधियों के द्वारा पहली बार सार्वजनिक रूप से राहुल गाँधी का विरोध किया यह सब होता देख कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष त्याग की मूर्ति सोनिया गाँधी ख़ामोशी अख़्तियार किए रही लेकिन राहुल गाँधी के हामी सांसद ख़ामोश नही रहे उन्होंने बुजुर्गों पर यूपीए 2 में ख़राब प्रदर्शन को हथियार बनाते हुए पार्टी को इस हालत में लाने का ज़िम्मेदार बता दिया उन्होंने कहा कि यूपीए दो में आप सरकार में मंत्री थे इसके बाद भी पार्टी को नुक़सान हुआ जिसका ख़ामियाज़ा पार्टी अभी तक भुगत रही है।इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ग़ुलाम नबी आज़ाद, पार्टी के कोषाध्यक्ष रणनीतिकारों में शामिल अहमद पटेल पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी जिन्होंने पार्टी की 2014 में हुई हार के बाद बनी जाँच कमेटी की रिपोर्ट देते हुए कहा था कि पार्टी की हार मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से हुई है जबकि वह यह नही बता पाए थे कि क्या मुस्लिम तुष्टिकरण किया गया है मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप संघ एवं भाजपा के नेताओं का एक षड्यंत्र था बहुसंख्यकों को बहकाने का जिसमें वह कामयाब रहे और अब तक भी है जिसे एंटनी कमेटी ने मज़बूती दी थी उन्होंने भी संघ के दृष्टिकोण को सही क़रार दे दिया था जिसे किसी भी नज़रिये से सही नही कहा जा सकता था मुसलमान को कांग्रेस ने नुक़सान के सिवा कुछ नही दिया इसके बाद भी मुसलमान पूरी इमानदारी दयानत दारी से कांग्रेस के साथ खड़ा रहा एंटनी उन तथ्यों को उजागर नही कर पाए थे जिनकी वजह से यूपीए दो को नुक़सान हुआ जैसे केन्द्रीय गृह सचिव आर के सिंह मोदी की भाजपा के लिए काम कर रहे थे यूपीए दो ने उन्हें केन्द्रीय गृह सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर बिठा रखा था जो रिटायर होने पर मोदी की भाजपा में शामिल हुआ आज उसी साम्प्रदायिक पार्टी भाजपा से सांसद है।मुम्बई पुलिस कमिश्नर रहते RSS के मुख्यालय नागपुर में रोज़ हाजरी लगाने वाले सतपाल सिंह मुम्बई पुलिस कमिश्नर के पद पर विराजमान थे सरकार कांग्रेस की थी लेकिन लगता है उन्हें यह सब दिखाई नही दे रहा था इसी पुलिस कमिश्नर मुम्बई ने वीआरएस लेकर 2014 में अपनी जाति की राजधानी बागपत से लोकसभा का चुनाव लड़ा और उन्होंने जाटों के सर्वमान्य नेता की उपाधि लिए घूम रहे चौधरी अजित सिंह को सियासी पटकनीं देते हुए हरा दिया आज भी वही से सांसद है जब ऐसी विचारधारा के अफसरों को हॉट सीट पर बैठाया जाएगा तो परिणाम भी इसी तरह के आएँगे ऐसे और भी कई नाम है जो यूपीए दो में मोदी की भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे थे लेकिन संघ विचारधारा के हामी कहने को कांग्रेसी ख़ामोशी की चादर ओढ़े सत्ता का आनन्द ले रहे थे पार्टी को बर्बादी के कगार पर पहुँचा रहे थे एंटनी ने उनको निशाना नही बनाया था जो RSS चाहता था वही रिपोर्ट दी थी बैठक में एंटनी भी शामिल थे लेकिन यह ख़ामोश रहे दोनों की तरफ़ से नहीं बोले।अहमद पटेल ने 37 सालों बाद आई शिक्षा नीति पर अपने सुझाव रखे।पूर्व गृहमंत्री रहे पी चिदंबरम ने ज़मीनी स्तर पर पार्टी के कमज़ोर होते संगठन पर भी चिंता जताई लेकिन यूपीए के दस साल के शासनकाल में संगठन के लिए क्या किया इस पर कुछ नही बताया यूपीए एक और दो का यह हाल था कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की कोई हैसियत नही थी दोनों कार्यकाल में शामिल मंत्रियों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है ना यह था कि यह कमज़ोर क्यों और किस कारण से हुआ जिस राज्य में पार्टी का संगठन कमज़ोर था वहाँ के लोगों को बुलाकर कितनी बार चर्चा की गई यूपी की बात करे तो पिछले तीन दसको से पार्टी वेंटिलेटर पर चल रही है इसके बावजूद कहने को इन बड़े और सरीखे नेताओं ने क्या और क्यों प्रयास नहीं किए इसका कोई जवाब नहीं है जबकि यूपी ने यूपीए दो को इसी वेंटिलेटर पर पड़ी कांग्रेस ने 22 सांसद दिए थे उसके बाद भी यूपी पर कोई ध्यान नही दिया गया जबकि यूपी के नेता भी केन्द्र में मंत्री थे तब भी कुछ नही किया गया यूपी में अब आकर पार्टी महासचिव यूपी प्रभारी श्रीमती प्रियांका गाँधी मेहनत कर रही है जिसका असर साफ़ देखा जा सकता है।कपिल सिब्बल ने पार्टी में सभी को अपनी-अपनी समीक्षा करने की ओर इसारा किया।संगठन को मज़बूत बनाने के लिए ज़ोर आज़माइश करने की ज़रूरत है न कि पार्टी का अध्यक्ष बनाने की।राहुल गाँधी फिर से अध्यक्ष नही बनना चाहतें हैं।2019 के आमचुनाव में कांग्रेस को अपेक्षा से बहुत कम सीटें मिली थी बल्कि पार्टी की करारी हार हुई थी जिसकी ज़िम्मेदारी लेते हुए पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए कहा था कि गाँधी परिवार से पार्टी का कोई अध्यक्ष नही होगा कांग्रेसियों की लाख मान मनोव्वल के बाद भी राहुल गाँधी नही माने थे इनके अलावा भी अन्य कोई आगे नही आया था जिसके बाद सोनिया गाँधी को ही अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था जो अभी तक है।परमानेन्ट अध्यक्ष बनाने की माँग के चलते ही राहुल गाँधी का नाम फिर आगे किया जा रहा था जिसमें बुजुर्गों ने टांग मार दी है।सियासी जानकारों का कहना है राहुल गाँधी सिद्धांतवादी नेता है अब वह पार्टी का पुनः अध्यक्ष नही बनना चाहेंगे।इन वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का यह भी आरोप है कि राहुल प्रियांका गाँधी सोनिया गाँधी की भी बात नहीं सुनते है।मनीष तिवारी ने भी पार्टी से चार सवाल किए है पहला सवाल क्या 2014 के आमचुनाव में कांग्रेस के ख़राब प्रदर्शन लिए यूपीए दो की सरकार की नीतियाँ ज़िम्मेदार थी दूसरा क्या यूपीए के अंदर ही साज़िश रची गई थी तीसरा 2019 के आमचुनाव की भी समीक्षा होनी चाहिए चौथा सवाल पिछले छह साल में यूपीए पर किसी तरह का आरोप नही लगाया गया।पूर्व केन्द्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि यूपीए सरकार ने सूचना का अधिकार खाद्य सुरक्षा क़ानून और शिक्षा का अधिकार जैसे जनता के लिए अच्छे क़ानून बनाए।ऐसे में अगर मूल्यांकन करना है तो इसका भी होना चाहिए कि यूपीए सरकार पर जो ग़लत लांछनों की बारिश की गई उस सियासी षड्यंत्र में कौन-कौन वरिष्ठ या कनिष्ठ शामिल थे।उन्होंने तत्कालीन सीएजी विनोद राय की क्या मंशा थी इसकी भी समीक्षा होनी बेहद ज़रूरी है कि इतनी उपलब्धियों के बाद भी हम क्यों 2014 हार गए इसके बाद मोदी की झूट पर आधारित सरकार 2019 में भी क्यों जीत गई और हम क्यों हार गए।यूपीए ने बर्बाद कर दिया यह कहना ग़लत है।यूपीए पर जो कीचड़ उछाला गया था वह सब षड्यंत्रकारी की देन था।इन्हीं सब आरोप प्रत्यारोपों के चलते कांग्रेस को ऑक्सीजन दिया जा रहा है जबकि सामने झूठ का महल बनाने वाला है इसके बावजूद भी कांग्रेसी अपने पुराने ढर्रे से बाहर आने को तैयार नही है।सोनिया राहुल प्रियांका गाँधी कांग्रेस को खड़ी करने के चाहे जितने गंभीर प्रयास कर ले लेकिन कांग्रेस के ये बुज़ुर्ग और युवाओं की लड़ाई उन तीनों के संयुक्त प्रयास को पलीता लगा रही है इस आपसी खींच तान के क्या नतीजे निकल कर आएँगे यह तो आनेवाले दिनों में पता चलेगा जिसे हम भी देखेंगे और आप भी देखेंगे। 


कोरोना की दहसत - मालिक माकन ने किरायेदार को घर में आने से रोका !

कोरोना की दहसत - मालिक माकन ने किरायेदार को घर में आने से रोका !

31-Jul-2020

ना तेलंगाना के जगतियाल जिले से है जहाँ एक माकन के मालिक ने  किरायेदार में कोरोना सकारात्मक पाए जाने के बाद अपने घर में प्रवेश नहीं करने दिया।

सियासत डॉट कॉम की खबर के अनुसार  जब आदमी संक्रमित पाया गया, तो उसे अस्पताल ले जाया गया; चूंकि अस्पताल में कोई खाली बिस्तर नहीं थे, इसलिए उन्हें घर पर रहने के लिए कहा गया। जब वह अपने किराए के घर में पहुंचा, तो मालिक ने उसे अंदर नहीं जाने दिया।

पुलिस के हस्तक्षेप की मदद से शख्स को अस्पताल में भर्ती कराया जा सका। जबकि, उनका परिवार अस्पताल के दूसरे कमरे में भी रहता है।

हाल ही में एक अन्य हृदय विदारक घटना में, एक महिला जो कोरोनोवायरस को हराकर घर लौट आई थी, उसे सड़क पर रात बितानी थी। उसके बेटे ने महिला को घर में घुसने नहीं दिया। अपनी पत्नी के साथ, उसने घर को बंद कर दिया और पीछे के दरवाजे से भाग गया।

 

 


   आज ग्लोबल टाइगर  डे  भारत में कितने बचे है

आज ग्लोबल टाइगर डे भारत में कितने बचे है

29-Jul-2020

आज ग्लोबल टाइगर डे है। इस वक्त पूरी दुनिया में करीब 4,200 बाघ बचे हैं। सिर्फ 13 देश हैं जहां बाघ पाए जाते हैं। इनमें से भी 70% बाघ भारत में हैं।
भास्कर डॉटकॉम पपर छपी खबर के अनुसार, मंगलवार को पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 2018 की ‘बाघ जनगणना’ की एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की। ये जनगणना हर चार साल में होती है।
उन्होंने बताया कि 1973 में हमारे देश में सिर्फ 9 टाइगर रिजर्व थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 50 हो गई है। ये सभी टाइगर रिजर्व या तो अच्छे हैं या फिर बेस्ट हैं।
बाघों की घटती आबदी पर 2010 में रूस के पीटर्सबर्ग में ग्लोबल टाइगर समिट हुई थी, जिसमें 2022 तक टाइगर पॉपुलेशन को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया था।

 इस समिट में सभी 13 टाइगर रेंज नेशन ने हिस्सा लिया था। इसमें भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, रूस, थाईलैंड और वियतनाम शामिल थे।

2010 में तय किए लक्ष्य की ओर भारत तेजी से बढ़ रहा है। आठ साल में ही यहां बाघों की आबादी 74% बढ़ी। जिस तेजी से देश में बाघों की आबादी बढ़ रही है उससे उम्मीद है कि 2022 का लक्ष्य भारत हासिल कर लेगा।

2012 से लेकर 2017 तक भारत में 560 बाघों की जान गई, इनमें से 38% का अवैध शिकार हुआ
भा रत में 6 साल में 560 बाघों की मौत हुई, जिनमें से 152 की मौत का कारण पता नहीं चल सका। जिन 408 बाघों की मौत का कारण पता चला उनमें से 55% बाघ ऐसे थे जिनकी नेचुरल डेथ हुई। 38% का अवैध शिकार हुआ। 4% कार या ट्रेन एक्सीडेंट में मारे गए।

 देश के 20 राज्यों में कुल 2,967 बाघ हैं। इनमें से 1,492 बाघ मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड में हैं।

 यानी सिर्फ तीन राज्यों में ही देश में बाघों की कुल आबादी के 50% से ज्यादा बाघ रहते हैं। अगर दुनिया के लिहाज से देखें तो इन तीन राज्यों में बाघों की कुल आबादी का 35% बाघ रहते हैं।

 2010 से 2018 के बीच भारत में बाघों की आबादी 74% बढ़ी है। 2022 तक बाघों की आबादी को डबल करने के लिए किसी भी देश की टाइगर पॉपुलेशन ग्रोथ हर साल 9% से थोड़ी कम होनी चाहिए। भारत की ये ग्रोथ रेट 9% से ऊपर की है। इस ग्रोथ रेट से 2022 तक भारत में बाघों की आबादी आसानी से डबल हो जाएगी।