दिल्ली हिंसा के बाद हैदराबाद में प्रदर्शन के दौरान महिलाएं ज्यादा तादाद में निकल रही हैं!

दिल्ली हिंसा के बाद हैदराबाद में प्रदर्शन के दौरान महिलाएं ज्यादा तादाद में निकल रही हैं!

28-Feb-2020

दिल्ली में जारी साम्प्रदायिक हिंसा का असर हैदराबाद में देखने को मिल रहा है। दिल्ली की खबरों पर खासकर पुराने शहर हैदराबाद में लोग कान लगाए बैठें हैं।

हिन्दी डॉट साक्षी पर खबर के अनुसार, दिल्ली हिंसा के खिलाफ टोली चॉकी, सेवेन टॉम्ब्स रोड, किंग कोटी और याकुतपुरा में देर शाम लोग घरों से बाहर निकले और नारेबाजी की साथ ही कैंडल भी जलाए गए।
हैदराबाद में प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की तादाद अधिक देखने को मिली। लोगों ने एक सुर में दिल्ली हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों और घायलों के प्रति सहानुभूति जताई। प्रदर्शन के दौरान लोगों के हाथों में प्ले कार्ड्स भी नजर आए।

नेकलेस रोड से हुसैन सागर की तरफ जा रहे कैंडल मार्च पर पुलिस की तवज्जो रही। दिल्ली हिंसा के बाद मंगलवार को रात नौ बजे कैंडल मार्च का आह्वान किया गया। इस दौरान पुलिस के बड़े जाप्ते की तैनाती की गई थी।

इस बीच हैदराबाद पुलिस कमिश्नर अंजनी कुमार ने लोगों से सतर्क रहने और उपद्रवी तत्वों से सावधान रहने की हिदायत दी है। दिल्ली से आ रही खबरें लोगों को आक्रोशित कर रही हैं व सोशल मीडिया का इस्तेमाल इसके लिए खूब किया जा रहा है।
 ऐसे में लोगों के भड़कने की गुंजाइश देखते हुए छुटभैये नेताओं पर भी नजर रखी जा रही है।
हैदराबाद पुलिस की तरफ से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। किसी भी तरह की साम्प्रदायिक भावना भड़काने की शिकायत पर पुलिस त्वरित कार्रवाई कर रही है। सीपी अंजनी कुमार ने ट्वीट कर मीडिया से भी आग्रह किया है कि वे भड़काने वाले कंटेन्ट न चलाएं।


दिल्ली हिंसा में SIT ने शुरू की जांच, मीडिया और चश्मदीदों से मांगे सबूत !

दिल्ली हिंसा में SIT ने शुरू की जांच, मीडिया और चश्मदीदों से मांगे सबूत !

28-Feb-2020

उत्तर-पूर्वी दिल्ली क्यों और कैसे जला? यह हादसा था या फिर सोची समझी रणनीति के तहत फैलाया गया दंगा? इन सवालों के जवाब तलाश कर जवाबदेही तय करने के लिए गठित दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की एसआईटी ने जांच गुरुवार रात से ही शुरू कर दी. एसआईटी का गठन गुरुवार को दोपहर बाद ही किया गया. गुरुवार को एसआईटी गठित होने के तत्काल बाद दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने सबसे पहले एक अपील जारी की. आम-नागिरक और मीडिया के नाम जारी अपील में कहा गया है कि इस हिंसा की जांच में जिसके पास जो भी तस्वीरें, वीडियो फुटेज या फिर अन्य संबंधित सबूत हों, तो वो सात दिन के भीतर पुलिस को मुहैया कराके जांच में मदद करें.

तस्वीरें और वीडियो फुटेज उत्तर पूर्वी दिल्ली जिले के डीसीपी के सीलमपुर स्थित कार्यालय में जमा कराने होंगे. अपील में अनुरोध किया गया है कि 23 फरवरी 2020 को या फिर उसके बाद उत्तर पूर्वी दिल्ली जिले में जो भी हिंसात्मक घटनाएं हुई हैं, उनसे संबंधित सबूत पुलिस तक पहुंचाने में विशेषकर मीडिया भी मदद करे.
सबूत पुलिस के हवाले करने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी. अगर कोई इन हिंसक घटनाओं के बारे में गवाही देना चाहता हो तो उसे भी पुलिस गुप्त रखेगी


दिल्ली हिंसा पर आया अमेरिकी सांसदों का बयान, कहा- दुनिया देख रही है

दिल्ली हिंसा पर आया अमेरिकी सांसदों का बयान, कहा- दुनिया देख रही है

27-Feb-2020

वाशिंगटन:

 भारत की राजधानी दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून को ले कर हुई हिंसा पर अमेरिकी सांसदों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के साथ ही मीडिया इन घटनाओं की भी खबरें दे रहा है. अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने कहा कि भारत में धार्मिक असहिष्णुता में वृद्धि भयावह है. जयपाल ने ट्वीट किया, ‘लोकतांत्रिक देशों को विभाजन और भेदभाव बर्दाशत नहीं करना चाहिए या ऐसे कानून को बढ़ावा नहीं देना चाहिए जो धार्मिक स्वतंत्रता को कमजोर करता हो.' उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया देख रही है.' गौरतलब है कि सीएए को लेकर दिल्ली में हुई हिंसा में 20 लोगों की जान चली गई और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं.
सांसद एलन लोवेन्थाल ने भी हिंसा को ‘नैतिक नेतृत्व की दुखद विफलता' करार दिया. उन्होंने कहा, ‘‘हमें भारत में मानवाधिकार पर खतरे के बारे में बोलना चाहिए.'

राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की दावेदार एवं सांसद एलिजाबेथ वारेन ने कहा, ‘भारत जैसे लोकतांत्रिक साझेदारों के साथ संबंधों को मजबूत करना अहम है लेकिन हमें मूल्यों पर सच्चाई से बात करनी चाहिए जिनमें धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल है. शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा स्वीकार्य नहीं है.

agency

 


 सांसद आज़म खान,व बेटे अबदुल्ला पत्नी ताज़ीन फातिमा ने रामपुर जिला न्यायालय में किया आत्मसमर्पण, भेजे गए जेल

सांसद आज़म खान,व बेटे अबदुल्ला पत्नी ताज़ीन फातिमा ने रामपुर जिला न्यायालय में किया आत्मसमर्पण, भेजे गए जेल

26-Feb-2020

रामपुर बिग ब्रेकिंग 

2017 में योगी सरकार बनने के बाद से आज़म खान व उनके परिवार पर सैकड़ो मुकदमे लगाए गए,जिनमें कई मामलों में न्यायालय ने उनको हाजिर होने का आदेश दिया था जिस पर आज़म खान के कई बार से गैर हाजिर होते रहे ,उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत न मिलने के कारण उनको हाजिर होने पड़ेगा ।

रामपुर से सांसद आज़म खान व उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म अभी अभी  रामपुर जिला न्यायालय में आत्म समर्पण कर दिया,न्यायालय भेजे उनको जेल ।

न्यायालय ने आज़म खान उनकी पत्नी विधायक ताज़ीन फातिमा व बेटे अब्दुल्ला आज़म को कई मामलों में अरेस्ट  वारण्ट जारी कर रखा था

 अदालत ने कल एक मामले में उनके घर की कुर्की के आदेश भी दिए है।
यू पी ब्यूरो 


कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक जारी, प्रियंका गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रपति भवन तक मार्च

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक जारी, प्रियंका गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रपति भवन तक मार्च

26-Feb-2020

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में पार्टी के कार्यसमिति की बैठक जारी है। इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम, ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। 
राहुल गांधी विदेश में होने के कारण इस बैठक में शामिल नहीं हुए हैं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के नेतृत्व में हिंसा प्रभावित दिल्ली में हालात सामान्य करने और शांति की मांग के लिए राष्ट्रपति भवन तक मार्च करेंगे

सूत्रों के अनुसार, बैठक में दिल्ली के कई इलाकों में हुई हिंसा पर चर्चा हो सकती है और एक प्रस्ताव भी पारित किया जा सकता है।। बता दें कि सीडब्ल्यूसी कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई है।

गौरतलब है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में संशोधित नागरिकता कानून को लेकर हुई हिंसा में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी हैजबकि कई कई अन्य घायल भी हैं।

कांग्रेस के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की बैठक आज
सीडब्लूसी की बैठक के बाद कांग्रेस के राज्यसभा और लोकसभा सांसदों की बैठक भी प्रस्तावित है। इस बैठक के बारे में सभी सदस्यों को सूचित किया जा चुका है।


अमेरिकी राष्ट्राध्यक्ष भारत में हमारे ही खर्च पर दिनभर प्राइवेट पार्टी करते हैं।

अमेरिकी राष्ट्राध्यक्ष भारत में हमारे ही खर्च पर दिनभर प्राइवेट पार्टी करते हैं।

25-Feb-2020

 

अमेरिकी राष्ट्राध्यक्ष भारत में हमारे ही खर्च पर दिनभर प्राइवेट पार्टी करते हैं। 

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और दूसरे दिन की सरकारी यात्रा में अकेले प्रेस के सवालों के जवाब देते हैं। कश्मीर पर मध्यस्थता की बात करते हैं। दिल्ली में हिंसा के सवाल को चतुराई से मोदीजी के पाले में डाल देते हैं। CAA पर सवालों को टाल जातें हैं।

लेकिन भारतीय पक्ष की नुमाइंदगी करने वाला कोई नहीं। प्रेस के सवालों का जवाब देने वाला कोई नहीं। ट्रम्प के मित्र मोदीजी साथ में नहीं हैं। 

भारत की कोई संप्रभुता बची ही नहीं। ट्रम्प भारत के राष्ट्रपति नहीं, पर लगता है कि मोदीजी उनके प्रधानमंत्री हैं। 

प्रेस वार्ता के फुटेज देखिए। लगेगा जैसे वे भारत नहीं, मोदी सरकार को नसीहत दे रहे हों। मोदीजी को वहां होना था। 

लेकिन वे इस डर से नहीं आये कि दिल्ली में अशांति और CAA-NRC को लेकर फैलाए गए झूठ का पुलिंदा न खुल जाए। भारत का मीडिया तो उनकी गोदी में बैठा है। विदेशी मीडिया का क्या कीजियेगा, जो बिकता ही नहीं है। 

भारत की संप्रभुता को गिरवी रखने वाले मोदीजी भारत ही नहीं, शायद दुनिया के पहले पीएम हैं। 

आज का इतिहास लिखा जा चुका है। कल का इतिहास दुनिया के तमाम विदेशी अखबारों में लिखा जाएगा। दिल्ली में ट्रम्प की यात्रा के बाद 9 लोग हिंसा की चपेट में आकर मर चुके हैं। लेकिन मोदीजी ने एक शब्द नहीं कहा। 

प्रेस से नहीं मिले। भाग गए। दिल्ली को 2002 का गुजरात बना डाला। ग़रीबी को दीवार के नीचे दफ़न कर दिया। शायद कल और आने वाले समय का इतिहास यही हो। 

मोदीजी के पास इस काले इतिहास के एक आखिरी पन्ने पर सुनहरे अक्षरों में दर्ज़ होने का एक ही मौका है। वे ट्रम्प के लौटते ही अपनी पूरी कैबिनेट के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचें। 

वहां वे अपना त्याग पत्र सौंप दें। 

फिर 6 साल में आखिरी बार खुलकर, तनावमुक्त होकर प्रेस से बातचीत करें। खुले मन से मन की बात। 

देश को आज इस हालत तक पहुंचाने के लिए अवाम से माफी मांगें। मान लें कि देश उनसे नहीं चलने वाला है। फिर शायद इतिहास उन्हें सुबह का भूला के रूप में याद रखे। 

बहरहाल, दोपहर में खुली आँखों से देखे सपने भी कभी सच हुए हैं भला?
( सौमित्र रॉय) सौजन्य सै क़ासिम लखनऊ 

 


दिल्ली में कैसे   भड़की हिंसा, जिसने 7 लोगों की ले ली जान, दर्जनों लोग हो गए घायल

दिल्ली में कैसे भड़की हिंसा, जिसने 7 लोगों की ले ली जान, दर्जनों लोग हो गए घायल

25-Feb-2020

नई दिल्ली। देश की राजधानी में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में हेड कॉन्स्टेबल समेत 7 लोगों की मौत हो गई है, जबकि तकरीबन 50 लोग इसमे घायल हो चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों में आग लगा दी, गाड़ियों, पेट्रोल पंप को आग को आग के हवाले कर दिया और जमकर पत्थरबाजी की। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। यह हिंसा सोमवार को जाफराबाद, मौजपुर, चांदबाग, खुरेजी खास, भजनपुरा आदि इलाके में भड़की थी। इस हिंसा के बाद सुरक्षाकर्मियो ने फ्लैगमार्च किया और तमाम इलाकों में निषेधाज्ञा को लागू कर दिया गया ताकि स्थिति को काबू में लाया जा सके।

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7 की मौत, 50 घायल दिल्ली में सोमवार को स्थिति काफी बिगड़ गई थी,

हालांकि काफी मशक्कत के बाद स्थिति नियंत्रण में आ गई थी, लेकिन तबतक तकरीबन 50 लोग घायल हो चुके थे। रात में एक बार फिर से मौजपुर और अन्य इलाकों में पत्थरबाजी की खबर सामने आई थी। दरअसल यह पूरी वारदात उस वक्त शुरू हुई जब नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन कर रहे लोगों ने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। 22 फरवरी की रात तकरीबन 10.30 बजे इस पूरी घटना की शुरुआत हुई थी।
22 फरवरी को जाफराबाद में प्रदर्शन 22 फरवरी की रात 10.30 बजे कई प्रदर्शनकारी जिसमे महिलाएं भी शामिल थीं वह बड़ी संख्या में जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के करीब इकट्ठा इकट्ठा हो गईं। दरअसल भीम आर्मी द्वारा पूरे देश में भारत बंद का आह्वाहन किया गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वह चांद बाग से राज घाट तक पैदल मार्च करेंगे। 23 फरवरी की सुबह 9 बजे वरिष्ठ अधिकारियों ने इन प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वह इलाके को खाली कर दें क्योंकि इसकी वजह से ट्रैफिक बाधित हो रहा है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि राजघाट तक मार्च करने की अनुमति नहीं है।

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कपिल मिश्रा ने समर्थकों से इकट्ठा होने के लिए कहा

23 फरवरी की दोपहर 12 बजे सोशल मीडिया पर भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अपने प्रदर्शनकारियों को बड़ी संख्या में मौजपुर चौक पर दोपहर 3 बजे इकट्ठा होने के लिए कहा ताकि जाफराबाद में सड़क बंद करने वालों को जवाब दिया जा सके। जिसके बाद कपिल मिश्रा ने भड़काऊ भाषण दिया, उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने हमसे जाफराबाद की ओर नहीं जाने के लिए कहा है। इसके साथ ही कपिल मिश्रा ने तीन दिन का अल्टीमेटम दिया। लेकिन तभी तकरीबन 4 बजे के आसपास बाबरपुर में प्रदर्शनकारियों ने नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन कर रहे लोगों पर मौजपुर चौक में मंदिर के पास पत्थर फेंकने शुरू कर दिए।

पत्थरबाजी के बाद बिगड़े हालात पत्थर फेंकने के बाद मौजपुर, करावल नगर,

मौजपुर चौक, बाबरपुर और चांदबाग में हिंसा भड़क गई। जिसके बाद पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और पत्थरबाजी की और इन इलाकों में पैरामिलिट्री फोर्स को तैनात कर दिया गया। रात 8.30 बजे तक दोबारा हिंसा शुरू होने से पहले तक शांति थी। लेकिन तकरीबन 9 बजे करावल नगर, चांद बाग, बाबरपुर और मौजपुर में फिर से हिंसा भड़क गई, प्रदर्शनकारियों ने कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और दुकानों को फूंक दिया।

24 फरवरी को उग्र हो गए प्रदर्शनकारी अगले दिन 24 फरवरी को भी प्रदर्शनकारियों का उत्पात जारी था। सीएए का विरोध कर रहे और समर्थन करने वालों के बीच जमकर नारेबाजी शुरू हो गई और ये लोग जाफराबाद से हटने के लिए तैयार नहीं थे। दोपहर तकरीबन 12 बजे से 1.30 बजे के बीच बाबरपुर में फिर से पत्थरबाजी शुरू हो गई। प्रदर्शनकारी मास्क पहनकर हाथ में तलवार लेकर पुलिस से भिड़ गए। तमाम पैरामिलिट्री फोर्स को मौके पर बुला लिया गया। यही नहीं करावल नगर, खेरपुर चौक, गोकुलपुरी में भी इसी तरह की झड़प होने लगी। जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने जारी रखें। इस बीच करदमपुरी में दोपहर 1 बजे भारी पत्थरबाजी शुरू हो गई थी।

दिनभर चला उत्पात कई गाड़ियों, बसों और घरों में प्रदर्शनकारियों ने जमकर तोड़फोड़ की। एक पेट्रोल पंप को भी आग के हवाले कर दिया गया। इस दौरान हिंसा में हेड कॉन्स्टेबल की मौत हो गई, जबकि डीसीपी घायल हो गए। दिल्ली के तमाम इलाकों में हिंसा की खबरें आने लगीं। करदमपुरी में भी लोगों ने जमकर उत्पात मचाना शुरू कर दिया। शाम को 7 से 9 बजे के बीच गोकुलपुरी टायर मार्केट में लोगों ने आगजनी की और पास के स्कूल में भी तोड़फोड़ की गई। घोड़ा चौक और मौजपुर में भी दंगे भड़क गए। वहीं हिंसा के बीच गृहमंत्री अमित शाह ने उच्च स्तरीय बैठक की और हालात पर जल्द से जल्द नियंत्रण पाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।


शाहिन बाग पर हबीबुल्लाह की रिपोर्ट- ‘अफरा-तफरी के लिए दिल्ली पुलिस जिम्मेदार’ !

शाहिन बाग पर हबीबुल्लाह की रिपोर्ट- ‘अफरा-तफरी के लिए दिल्ली पुलिस जिम्मेदार’ !

24-Feb-2020

पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह ने करीब 70 दिन से राजधानी के शाहीन बाग इलाके में चल रहे धरना-प्रदर्शन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है।

एजेंसी  के अनुसार, उन्होंने धरनास्थल पर हुई अफरा-तफरी के लिए दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों से बातचीत को लेकर कोई पहल नहीं की गई। पुलिस ने कई गैरजरूरी जगहों को ब्लॉक कर दिया। इससे अव्यवस्था पैदा हो गई।
शाहीन बाग में लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों को वहां से जबरन हटाने के प्रयास से उनकी सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है।
इस मामले पर 24 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। सर्वोच्च न्यायालय ने संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को शाहीन बाग विरोध को दूसरी जगह स्थानांतरित कराने के लिए वार्ताकार नियुक्त किया है। साथ ही हबीबुल्लाह को उनका सहयोगी नियुक्त किया है।
गौरतलब है कि शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के खिलाफ महिलाएं दो महीने से भी ज्यादा समय से धरने पर बैठी हैं।
उनके हाईवे पर बैठने से दिल्ली को नोएडा से जोडऩे वाले रास्ते पर आवागमन ठप पड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में इस रूट को खुलवाने के लिए याचिका दायर की गई है।
वार्ताकारों ने लगातार तीन दिन शाहीन बाग जाकर प्रदर्शनकारियों से बात की, लेकिन रास्ता नहीं खुलवाया जा सका। हालांकि उन्होंने शनिवार शाम कालिंदी कुंज 9 नंबर की सडक़ खोल दी थी।
 

सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ आरक्षण व संविधान बचाने के लिए 23 फरवरी को भारत बंद

सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ आरक्षण व संविधान बचाने के लिए 23 फरवरी को भारत बंद

22-Feb-2020


बिहार-यूपी के संगठनों ने भारत बंद को सफल बनाने की साझा अपील की

रिहाई मंच के राजीव यादव, बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन (बिहार) और बिहार फुले-अंबेडकर युवा मंच के संरक्षक डॉ विलक्षण रविदास, अब-सब मोर्चा के संस्थापक हरिकेश्वर राम, सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के रिंकु यादव, गौतम कुमार प्रीतम, अंजनी और नवीन प्रजापति ने संयुक्त तौर पर तमाम बहुजन संगठनों और बहुजन समाज से सड़क पर उतरकर बहुजनों (एससी, एसटी, ओबीसी व माइनॉरिटी) की एकजुटता को बुलंद करने की अपील की है.

जारी अपील में कहा गया है कि सड़क पर उतरकर 

*सुप्रीम कोर्ट के संविधान व आरक्षण विरोधी फैसले के खिलाफ अविलंब अध्यादेश लाने

*सीएए-एनआरसी-एनपीआर को अविलंब वापस लेने

*कॉलेजियम सिस्टम खत्म करने और उच्च न्यायपालिका, निजी क्षेत्र सहित सभी क्षेत्रों में एससी-एसटी-ओबीसी को आबादी के अनुपात में आरक्षण देने व एससी-एसटी-ओबीसी को परमोशन में भी आरक्षण देने

*असंवैधानिक क्रीमीलेयर और सवर्ण आरक्षण रद्द करने

*जाति जनगणना कराने

*निजीकरण पर रोक लगाने व देश बेचना बंद करने

*सम्मानजनक रोजगार अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देने

*सबको नि:शुल्क, समान व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी करने

*लोकतांत्रिक आंदोलन का दमन बंद करने व तानाशाही रोकने की मांगों को जोरदार आवाज में बुलंद किया जाए.

जारी अपील में कहा गया है कि अभी जब पूरा मुल्क संविधान विरोधी-बहुजन विरोधी सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ सड़कों पर लड़ रहा है, तानाशाही व दमन का मुकाबला कर रहा है तो सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण के मसले पर सुनवाई करते हुए कहा है कि नियुक्ति से लेकर प्रमोशन तक में आरक्षण देना राज्य सरकारों की मर्जी का मसला है. मतलब आरक्षण एससी-एसटी-ओबीसी का संवैधानिक अधिकार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने संविधान विरोधी रवैया और भाजपा-आरएसएस का एजेंडा आगे बढ़ाते हुए आरक्षण पर अधिकतम हमला बोल दिया है. आरक्षण को खत्म करने का रास्ता खोल दिया है. यह संविधान के सामाजिक न्याय व समानता के बुनियाद पर जोरदार हमला है. सीएए भी संविधान के धर्मनिरपेक्षता व समानता के बुनियाद पर जोरदार हमला है. इससे पहले नरेन्द्र मोदी सरकार ने संविधान व सामाजिक न्याय पर हमला बोलते हुए ही सवर्ण आरक्षण लागू किया था.

जबकि अभी तक तो आरक्षण लागू करने में बेईमानी चल रही थी. सभी क्षेत्रों में आबादी के अनुपात में आरक्षण लागू भी नहीं किया गया है. आज भी शासन-सत्ता की संस्थाओं-शैक्षणिक संस्थाओं में एससी-एसटी-ओबीसी की भागीदारी आबादी के अनुपात में न्यून है. सवर्णों का ही वर्चस्व है. फिर भी सुप्रीम कोर्ट से लेकर केन्द्र सरकार तक एससी, एसटी व ओबीसी के आरक्षण को खत्म कर रही है. भाजपा-आरएसएस के हिंदू राष्ट्र की झांकी सामने आ रही है. मुसलमानों को निशाने पर रखकर संविधान को खत्म कर ब्रह्मणवादी गुलामी थोपने की साजिश आगे बढ़ायी जा रही है. एससी-एसटी-ओबीसी व माइनॉरिटी को एकजुट होकर मुकाबला करना होगा.
                                     
जारी अपील में कहा गया है कि नागिरकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का पूरा पैकेज हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए ही लाया गया है. यह इस देश की जनता के अधिकार पर अधिकतम हमला है. अपमानजनक है. इसकी भारी कीमत अशिक्षित, गरीब, दलित-आदिवासी-पिछड़े-अल्पसंख्यक ही चुकाएंगे. उनके लिए यह विपत्ति की तरह होगा. उनके लिए जरूरी दस्तावेज पेश करना मुश्किल होगा. वे अपने ही मुल्क में हासिल संवैधानिक-लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित कर गुलामी के भयानक अंधेरे में धकेल दिए जाएंगे. इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. असम में एनआरसी हुआ है. वहां हुए एनआरसी की हकीकत हमारे सामने है.19 लाख से अधिक लोग एनआरसी से बाहर हुए हैं. जिसमें अधिक हिंदू ही हैं. बहुसंख्यक एससी, एसटी और ओबीसी हैं. बिहार-यूपी से असम में जा बसे हजारों मजदूरों की नागरिकता पर सवाल खड़ा हो गया है.

विभिन्न संगठनों की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई ये सरकार सबको शिक्षा, चिकित्सा, भोजन, रोजगार, न्याय व मूलभूत नागरिक अधिकारों की गारंटी करने की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय उल्टी दिशा में चलते हुए जनता से अब नागरिकता साबित करने के लिए कह रही है. अन्नदाता किसानों की आत्महत्या की रफ्तार तेज हो गई है. बेरोजगारी से त्रस्त होकर 2 घंटे में 3 नौजवान आत्महत्या कर रहे हैं. बेरोजगारी 45 वर्षों में सबसे ऊंचाई पर है. लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार रोजगार के खात्मे, महंगाई, विषमता व जनता की बदहाली बढ़ाने के साथ सरकारी कंपनियों-उपक्रमों को देशी-विदेशी पूंजीपतियों को बेचने का अभियान आगे बढ़ा रही है. सार्वजनिक सेवाओं व सुविधाओं-शिक्षा, चिकित्सा, रेल परिवहन आदि को पूंजीपतियों के हवाले कर रही है. मुल्क को बेच रही है. आजादी को गिरवी रख रही है. आंदोलनों का बर्बर दमन किया जा रहा है. आंदोलनकारियों की पुलिस द्वारा हत्या की जा रही है. सरकार जनता की आवाज सुनने के बजाय लोकतंत्र की हत्या कर तानाशाही के रास्ते आगे बढ़ रही है.

अपीलकर्ताओं ने कहा है कि कुल मिलाकर ये सरकार मनुवादी सवर्ण वर्चस्व, पूंजीपतियों को लूट की चौतरफा छूट, तानाशाही व चौतरफा गुलामी थोप रही है. इसकी सबसे ज्यादा मार दलितों ,आदिवासियों, पिछड़ों-महिलाओं व मुसलमानों पर पड़ रही है. दलितों-महिलाओं पर बर्बरता चरम पर है, अभी राजस्थान से दलित उत्पीड़न की खौफनाक घटना सामने आयी है. भाजपा-आरएसएस हिंदू राष्ट्र बनाने की ओर बढ़ रही है और उसकी झांकी पेश की जा रही है.

जारी अपील में कहा गया है कि हमें हर हाल में यह लड़ाई लड़नी होगी, जीतनी होगी. इस लड़ाई को हमें जोड़-तोड़ के जरिए सत्ता बदलने और वोट बैंक बनाने-बिगाड़ने तक सीमित होकर नहीं देखना चाहिए. हमें बहुजनों की एकजुटता और सामाजिक-राजनीतिक दावेदारी को बुलंद करना होगा.
सै कासिम लखनऊ 

 

 

 


लखनऊ उजरियांव संघर्ष के एक माह, प्रदेश भर से पहुंची आवाम

लखनऊ उजरियांव संघर्ष के एक माह, प्रदेश भर से पहुंची आवाम

20-Feb-2020

एनपीआर का होगा पूर्णतया बहिष्कार, संविधान बचाने के लिए जेल भरो से लेकर, असहयोग आंदोलन तक के रास्ते अपनाएंगे 

 

उजरियांव लखनऊ: उजरियांव धरने के एक माह पूरा होने पर उजरियांव धरने पर संघर्ष कर रही महिलाओं ने नारा दिया कि "महिला संघर्ष के एक माह, आओ संघर्ष के साथ चलो"। इस आह्वान पर देश-प्रदेश के कोने-कोने से उजरियांव धरने पर बैठी हुई महिलाओं के समर्थन में भारी संख्या में लोग धरने पर पहुँचें।

उजरियांव धरने पर एक माह से बैठी हुई महिलाओं के संघर्ष. उजरियांव का धरना 19 जनवरी शाम 6 बजे करीब 50 महिलाओं से शुरू ही हुआ था कि धरने स्थल पर पुलिस आ गई और धरने पर बैठी हुई महिलाओं को धमकाते हुए कहा कि आप लोग यंहा धरना नहीं कर सकते है.यह कहते हुए धरने स्थल पर लगे टेंट, कम्बल, दरी, चेयर, पोस्टर को पुलिस थाने उठा ले गई।19 जनवरी के ठिठुरती सर्द रात में भी उजरियांव की महिलाओं ने हार न मानी वो धरने पर बैठी रही है।धरने के दूसरे दिन से महिलाओं की संख्या बढ़ने लगी और अब महिला संघर्ष के एक माह भी पूरे होने जा रहे है.
उजरियांव धरने में 102 साल की दादी नागरिकता संसोधन कानून के विरोध में धरने में शुरू से अब तक शामिल रही है।

वक्ताओं ने कहा कि नागिरकता संशोधन कानून संविधान विरोधी है। संविधान के तहत कोई भी कानून धर्म के आधार पर हमारी नागिरकता तय नहीं कर सकता। अगर करता है तो वह कानून संविधान विरोधी है। हम एनपीआर का पूर्णतया बहिष्कार करेंगे। अपना संविधान बचाने के लिए जेल भरो से लेकर, असहयोग आंदोलन तक के रास्ते अपनाएंगे और सरकार को यह असंवैधानिक कानून वापस लेने के लिए विवश करेंगे।

'महिला संघर्ष के एक माह, आओ संघर्ष के साथ चलो' के आह्वान ने भाजपा सरकार को बता दिया कि अघोषित आपातकाल और दमनकारी नीतियों को अवाम सिरे से खारिज करती है। घन्टाघर, उजरियावं में बैठी हुई महिलाओं समेत दूर-दराज से आयी महिलाओं ने काले कानून के खिलाफ जमकर हल्ला बोला और संकल्प लिया है कि वो भी अपने गांव, कस्बा, शहर में घंटाघर, शाहीन बाग़ बनाएंगी।

महिला के संघर्ष के एक माह पूरे होने पर उजरियांव पर कई वक्ताओं के संबोधन के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया. जिसमें संगीत, कला, मुशायरा और चर्चित वक्तागण ने अपनी बात रखी और महिलाओं ने अपना संघर्ष साझा किया। जिसमें जेएनयू पूर्व छात्र अध्यक्ष एन साई बालाजी, वरिष्ठ पत्रकार किरण सिंग, बाँसुरी वादक अशुकान्त सिन्हा, रणधीर सिंह सुमन, सृजन आदियोग, सुप्रिया ग्रुप, अजय सिंह, हरजीत सिंह, ओपी सिन्हा, मानवाधिकार कार्यकर्ता रविश आलम, मुजतबा छात्र अलीगढ़ विश्वविधालय, किन्नर समाज से कोमल (गुड्डन), कहानीकार फरज़ाना मेंहदी समेत घन्टाघर की बैठी हुयी महिलाओं आदि ने अपनी बात रखी

यू पी ब्यूरो 

 

 

 


क्या मायने हैं योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने के ?

क्या मायने हैं योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने के ?

19-Feb-2020

अनिता संजीव 
आदित्यनाथ कट्टर हिंदुत्व का चेहरा है। मतलब हिन्दूराष्ट्र का प्रतीक।
RSS का 90 साल पुराना एजेंडा, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना।
क्या है हिन्दू राष्ट्र ?
मनुस्मृति के अनुसार शासन का चलाना ही हिन्दू राज है। मतलब संविधान में बदलाव और उसे कमजोर करने की और पहला कदम है आदित्यनाथ।
आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे बहुत बड़ी योजना है। इससे हिंदुओं का ध्रुवीकरण होगा और मुस्लिमों और दलितों को कमजोर किया जायेगा। आदित्यनाथ का चेहरा कट्टर हिंदुओं को एक साथ लाएगा और जोड़े रखेगा। दूसरी तरफ मोदी उदारवाद का झूठा चोला ओढ़कर हर वर्ग को अपने साथ जोड़ने का नाटक जारी रखेगा। मौर्य को उपमुख्यमंत्री बनाया जाना इसी योजना का हिस्सा है।
मोदी का यह नाटक तब तक जारी रहेगा जब तक मुसलमान और दलित बिलकुल टूट नहीं जाते, बिलकुल कमजोर नहीं हो जाते। इसमें कई साल भी लग सकते हैं, कोई आजकल में नहीं होने वाला। दलित आंदोलन को ख़त्म किया जायेगा और विपक्ष को भी उभरने नहीं दिया जाएगा।
आदित्यनाथ कट्टर हिंदुओं को BJP के साथ जोड़े रखने के काम आएगा और मोदी विकास के नाम पर बचे लोगों को अपने साथ जोड़कर BJP को सबसे शक्तिशाली बनाने का काम जारी रखेगा।
वैसे यह सिर्फ एक दिखावा होगा, लोगों को मूर्ख बनाये रखने के लिए कि यहाँ लोकतंत्र चल रहा है, लोग अपने वोट से BJP को चुन रहे हैं। लेकिन असली काम करेगी EVM, जिसका उदाहरण अभी UP चुनाव में देखने को मिला। लोग सोचते रहेंगे की मुस्लिम ने BJP को वोट दिया, दलित BJP के साथ हैं और पूरे भारत का साथ BJP को है।
दरअसल BJP सत्ता में बने रहेगी लोगों को इसी तरह से उल्लू बनाकर ताकि कोई बगावत ना हो जाए, लोग विरोध में ना उतर आएं।
इधर दलितों को भगवान् और कर्मकांडों में उलझा कर ब्राह्मणवाद की नींव मजबूत की जाएगी, दलित भी अब जमकर जय श्री राम करेंगे और राम की रक्षा के लिए जान देंगे। दलितों का इस्तेमाल मुस्लिमों को कमजोर करने में किया जाएगा। जब तक मुस्लिम टूट नहीं जाते, ख़त्म नहीं हो जाते,वोट बैंक बिखर नहीं जाता, दलित काम के रहेंगे।
मुस्लिमों को कमजोर करने के बाद अगले नंबर दलितों का आएगा। दलितों को बहुत ही चालाकी से कमजोर किया जायेगा। इसके लिए OBC का सहारा लिया जाएगा और दलितों पर जुल्म होंगे ताकि वे अपने अधिकार भूलें।
दलितों को कमजोर करने के लिए कई
यू पी ब्यूरो 

 


शहर की दीवारों पे लिखे आज़ादी के नारे

शहर की दीवारों पे लिखे आज़ादी के नारे

18-Feb-2020


गाज़ियाबाद ।

तू डाल डाल तो मैं पात पात ।ये कहावत यूपी  में CAA और NRC का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारीयो पर सटीक बैठती है ।

प्रदर्शनकारी पुलिस को छकाने का कोई मौका हाथ से जाने नही देते प्रदर्शन का नया नया तरीका ढूंढ निकाल रहे हैं।

ऐसा ही एक मामला सामने आया दिल्ली से सटे गाजियाबाद में। जहां शहर मे रातों रात अज्ञात प्रदर्शनकारियों ने काले पेंट से जगह-जगह ‘आजादी’ के नारे लिख दिए।

 आजादी के ये नारे न सिर्फ शहर के प्रमुख चौराहों पर लिखे गए बल्कि गाजियाबाद कोर्ट के मेन गेट के साथ-साथ SSP दफ्तर के गेट पर भी लिख दिया गया।

 कुछ दिन पूर्व गाजियाबाद के DM के दफ्तर के कम्पाउंड के बाहर भी यही स्लोगन लिखा गया था। हालांकि इस स्लोगन को वहां से हटा दिया गया और इसकी जांच ADM सिटी को दी गई थी। मगर रविवार रात एक बार फिर शरारती तत्वों ने एक बार फिर से स्लोगन लिख डाला। हालांकि मामला मीडिया के संज्ञान में आने के बाद इन स्लोगन को SSP दफ्तर व कोर्ट के बाहर से हटवा दिया गया।

पुलिस के एक अफसर ने बताया कि इसके पीछे किसका हाथ है यह जांच के बाद ही पता चलेगा ।

 फिलहाल पुलिस दीवारों पर आज़ादी के नारे लिखने वाले की तलाश में जुटी हुई है।

यू पी ब्यूरो 

 

 


चार महीने की मासूम से रिश्तेदार ने किया दुष्कर्म, इलाज के दौरान मृत्यु

चार महीने की मासूम से रिश्तेदार ने किया दुष्कर्म, इलाज के दौरान मृत्यु

17-Feb-2020

लखनऊ में दिल दहला देने वाली वारदात
 
लखनऊ। 

राजधानी के मड़ियांव थाना क्षेत्र के फैजुल्लागंज में एक शर्मनाक घटना सामने आई है ।

4 महीने की मासूम से उसी के एक रिश्तेदार ने  दुष्कर्म किया । मासूम को सुनसान इलाके छोड़ कर भाग गया ।

घायल बच्ची को इलाज के लिये अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी मौत हो गई। 

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की छानबीन शुरू की ।

प्रारंभिक सूचना के मुताबिक शादी समारोह में साथ गए चचेरे भाई ने खिलाने के बहाने 4 माह की बच्ची को गोद में लिया और वहां से "लापता" हो गया। इसी के बाद मासूम का शव मिला ।पुलिस आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है ।
यू पी ब्यूरो 


शाहीनबाग  में जो हो रहा है उसमें असहमति के अधिकार की अभिव्यक्ति नहीं  थोपने का प्रयास है: आरिफ मोहम्मद खान

शाहीनबाग में जो हो रहा है उसमें असहमति के अधिकार की अभिव्यक्ति नहीं थोपने का प्रयास है: आरिफ मोहम्मद खान

17-Feb-2020

नवोदय टाइम्स पर छपी खबर के अनुसार, खान ने यहां एक सम्मेलन से इतर कहा कि कुछ लोगों ने कानून अपने हाथों में लेने और जनजीवन को प्रभावित करने का फैसला कर लिया है।

 

प्रदर्शनकारियों का समूह पिछले करीब दो महीने से संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के खिलाफ शाहीन बाग में धरने पर बैठा हुआ है जिसमें अधिकतर महिलाएं हैं।
दक्षिणी दिल्ली और नोएडा को जोडने वाले महत्त्वपूर्ण मार्ग पर धरने के कारण यातायात बाधित है।

 

राज्यपाल ने संवाददाताओं से कहा, यह असहमति का अधिकार नहीं है, यह दूसरों पर विचार थोपने का प्रयास है। आपके पास अपने विचार अभिव्यक्त करने का अधिकार है लेकिन आपके पास सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त करने का अधिकार नहीं है।’’

 

सीएए के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में जारी प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि 1986 में भी लाखों लोग थे जिन्होंने शाह बानो मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले को पलटे जाने का विरोध किया था।

 

इस मुद्दे के खिलाफ 1986 में राजीव गांधी कैबिनेट से हट जाने वाले खान ने कहा, लेकिन, मेरी तरफ से यह कहना क्या तर्कसंगत होता कि मैं कानून वापस लिए जाने तक धरने पर बैठूंगा।

 

खान गोवा अंतरराष्ट्रीय केंद्र में डिफिकल्ट डायलॉग्स सम्मेलन में वाक स्वतंत्रता, सेंसरशिप और मीडिया : क्या कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित करता है। विषय पर बोलने के लिए यहां मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि आप विचार रखने वाले किसी व्यक्ति के साथ संवाद कर सकते हैं लेकिन यह इस मामले में मुश्किल है जहां प्रदर्शनकारी हटने को तैयार नहीं हैं।

पाकिस्तान के एक गैर सरकारी संगठन के सर्वेक्षण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2019 में 1,000 से ज्यादा लड़कियों को अगवा किया गया और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए बाध्य किया गया।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता को ध्यान में रखते हुए कहा, हमें उदार, स्वच्छंद होना चाहिए, हमें विविधता को स्वीकार एवं उसका सम्मान करना चाहिए लेकिन साथ ही हम तथ्यों को नजरअंदाज नहीं कर सकते।
सीएए को चुनौती देने के लिए केरल सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय में अनुच्छेद 131 का हवाला देने पर उन्होंने कहा कि मामले में फैसला अदालत करेगी। media in put 

 

सहारा अस्पताल के प्रबंधन और स्टाफ पर FIR

सहारा अस्पताल के प्रबंधन और स्टाफ पर FIR

17-Feb-2020

सै क़ासिम लखनऊ

मृत महिलाओ के शव बदलने के मामले पर FIR

मृतक इशरत मिर्ज़ा के बेटे एजाज हैदर के बेटे ने दर्ज कराया मुकदमा 

अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ की लापरवाही के चलते इशरत मिर्ज़ा का शव लेकर किसी और ने कर दिया था अंतिम संस्कार 

बीते दिनों बुर्जुर्ग अर्चना गर्ग की जगह इशरत मिर्जा का शव लेकर कर दिया था गर्ग फैमिली ने अंतिम संस्कार 

विभूतिखण्ड थाने में सहारा अस्पताल की लापरवाही के खिलाफ मुकदमा ।

 

 


बदले की भावना के तहत डॉ कफील पर योगी सरकार ने लगवाया रासुका- रिहाई मंच

बदले की भावना के तहत डॉ कफील पर योगी सरकार ने लगवाया रासुका- रिहाई मंच

15-Feb-2020


लखनऊ, 15 फरवरी 2020। रिहाई मंच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शांति सद्भाव को बढ़ावा देने के प्रयासों को कुचलने और असहमति के स्वरों के दमन की कठोर शब्दों में निंदा करता है।

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार के इशारे पर उत्तर प्रदेश पुलिस संविधान और कानून की मर्यादाओं को कुचल रही है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों के प्रचार प्रसार के लिए चौरी चौरा से राजघाट तक की यात्रा पर निकले दस सत्याग्रहियों की ग़ाजीपुर में गिरफ्तारी और डॉ० कफील को सीएए, एनआरसी के खिलाफ अलीगढ़ में छात्रों के धरने को सम्बोधित करने के आरोप में गिरफ्तार करने और ज़मानत उपरान्त रासुका लगाए जाने की घटना इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के मुखिया द्वारा ‘ठोक दो’ और ‘बदला लेने’ जैसी असंसदीय भाषा से पुलिस बल को इस प्रकार की गैरकानूनी कार्यवाही की प्रेरणा मिलती है।

राजीव यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट तक ने ज़मानत दिए जाने के बाद रिहाई को बाधित करने के लिए रासुका लगाए जाने के खिलाफ कठोर टिप्पणी की थी उसके बावजूद उत्तर प्रदेश पुलिस सरकार की शह ऐसी कार्रवाइयां कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पुलिस उस समय गूंगी बहरी बन जाती है जब वंचित समाज के खिलाफ हिंसा या उत्पीड़न के मामले सामने आते हैं।

उन्होंने कहा कि कानूपुर में दलित समाज द्वारा पुलिस से अनुमति लेकर अंबेडकर कथा के आयोजन मात्र से सवर्ण समाज के लोगों ने पूरी दलित बस्ती को घेर कर हिंसक हमला किया, महिलाओं, बच्चों और बूढ़ों समेत कई लोगों के हाथ पैर तोड़ डाले लेकिन राज्य के मुखिया का कोई बयान तक नहीं आया और न ही पुलिस कार्रवाई में कोई तेज़ी देखने को मिली।

मंच महासचिव ने मांग किया कि चौरी चौरा से राजघाट तक जाने वाले सत्याग्रहियों पर से तुरंत मुकदमा वापस लिया जाए और बदले की भावना के तहत गिरफ्तार डॉ० कफील को अविलंब रिहा किया जाए। 

द्वारा-
राजीव यादव
9452800752
रिहाई मंच

 


रामजन्मभूमि के पास नमाज़ पढ़ रहे व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया

रामजन्मभूमि के पास नमाज़ पढ़ रहे व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया

15-Feb-2020

 

अयोध्या ।

रामजन्मभूमि के पास नमाज़ पढ़ रहे एक व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया है ।पुलिस के मुताबिक रामजन्मभूमि के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में सुरक्षा कर्मियों ने एक व्यक्ति को नमाज़ पढ़ते हुए देखा तो हड़कम्प मच गया ।तत्काल उस व्यक्ति को हिरासत में ले कर अधिकारियों को सूचना दी गई ।पूछताछ में पुलिस को पता चला कि पकड़े गए व्यक्ति का नाम रहमान है और वो बिहार का रहने वाला है ।पकड़े गए व्यक्ति को रामजन्मभूमि थाने में ले जाकर पुलिस और खुफिया एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं ।
यू पी बयूरो 

 

 


कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति को नॉर्थ कोरिया ने गाली मारी!

कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति को नॉर्थ कोरिया ने गाली मारी!

15-Feb-2020

उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन के तानाशाही तौर-तरीकों से हर कोई वाकिफ है। यहां एक छोटी सी गलती पर भी मौत की सजा दी जाती है।

पंंजाब केसरी पर छपी खबर के अनुसार रिपोर्ट अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण के शक में उत्तर कोरिया के एक अधिकारी को आइसोलेशन सैंटर में अलग रखा गया था लेकिन इस अधिकारी ने गलती से सार्वजनिक बाथरूम इस्तेमाल कर लिया जिसकी कीमत उसे अपनी जिंदगी देकर चुकानी पड़ी।
दक्षिण कोरिया के अखबार मुताबिक इस शख्स को चीन से लौटकर आने के बाद बिल्कुल अलग जगह पर रखा गया था।
अधिकारी के सार्वजनिक बाथरूम इस्तेमाल करने की वजह से उसे कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने और नियमों के उल्लंघन का दोषी करार दिया गया, बाद में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।
 

जावेद अख्तर ने  एक सभा में पीएम मोदी को फासीवादी कहा, महेश भट्ट रहे मौजूद!

जावेद अख्तर ने एक सभा में पीएम मोदी को फासीवादी कहा, महेश भट्ट रहे मौजूद!

15-Feb-2020

मशहूर गीतकार जावेद अख्तर अपने गानों के अलावा बेबाकी से अपनी राय और बयान देने की वजह से भी सुर्खियों में रहते हैं। वह सोशल मीडिया सहित कई प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी की कई मुद्दों पर आलोचना करते रहते हैं।

अमर उजाला पर छपी खबर के अनुसार, इस बार जावेद अख्तर ने पीएम मोदी को फासीवादी कहा दिया है। उन्होंने ये बात अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल के दिए एक इंटरव्यू में कही है। जावेद अख्तर के इस बयान की काफी चर्चा हो रही है।
दरअसल जावेद अख्तर ने मशहूर फिल्म निर्देशक महेश भट्ट के साथ हाल ही में अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल अल जजीरा को इंटरव्यू दिया। इस दौरान जावेद अख्तर से पूछा गया कि क्या भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फासीवादी है?

 

इस बात का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि, ‘बिल्कुल वो हैं, मेरा मतलब है कि फासीवादी लोगों के सिर पर सींग थोड़े न होते हैं।

फासीवाद एक विचार है, एक ऐसा विचार जिसमें लोग अपने आपको किसी समुदाय से बेहतर समझते हैं और अपनी सारी परेशानियों की जड़ उन दूसरे समुदाय के लोगों को मानते हैं। जब आप एक खास समुदाय के लोगों से नफरत करने लगते हैं, आप फासीवादी हो जाते हैं।’

 हीं निर्देशक महेश भट्ट से सवाल पूछा गया कि क्या भारत में वाकई इस्लामोफोबिक है जैसा कि दुनिया भर के मुस्लिमों की ओर ऐसा कहा जा रहा है ? उन्होंने इस सवाल के जवाब में कहा कि, ‘मुझे लगता है कि इस्लामोफोबिया 9/11 हमलों के बाद काफी तेज हुआ है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ये फोबिया कहीं ना कहीं निर्मित भी किया गया है क्योंकि ऐसा तो नहीं है कि देश में कोई आम इंसान मुस्लिमों से इतना डरता है। हम सभी लंबे समय से साथ रह रहे हैं।’


विधानसभा के बाहर युवक ने की आत्मदाह की कोशिश

विधानसभा के बाहर युवक ने की आत्मदाह की कोशिश

13-Feb-2020

लखनऊ 

सत्र के दौरान युवक पहुचा विधानसभा के गेट नम्बर दो

परिवार संघ युवक पहुचा था विधानसभा

युवक ने खुद पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगाने की कोशिश

पुलिस की तत्परता से युवक को आग लगाने से पहले गया रोका

मिट्टी का तेल डालने वाले युवक को भेजा गया सिविल अस्तपाल