अर्धनग्न हालत में होटल में खाना मांग रहे युवक की बच्चा चोर के शक लोगों ने कर दी पिटाई

अर्धनग्न हालत में होटल में खाना मांग रहे युवक की बच्चा चोर के शक लोगों ने कर दी पिटाई

20-Aug-2019

गया : जिले के डोभी इलाके में 35 वर्षीय एक युवक को बच्चा चोर के शक में ग्रामीणों द्वारा पिटाई की गयी है. हालांकि, सूचना मिलने पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंच कर आरोपित बच्चा चोर को ग्रामीणों से छुड़ा कर थाने ले आयी और पूछताछ में जुट गयी है.

प्रभात खबर के अनुसार गया जिले के डोभी थाना क्षेत्र के पोखरा पर स्थित एक लाइन होटल में अर्धनग्न अवस्था में 35 वर्षीय एक युवक होटल के नौकर से खाना मांगने लगा. उस युवक के हुलिया को देख कर आसपास के लोगों उसे बच्चा चोर समझ लिया और पूछताछ करने लगे. देखते ही देखते भीड़ जुट गयी और लोग उस युवक को बच्चा चोर समझ कर पिटाई करने लगे. इसी दौरान किसी ने डोभी पुलिस को इसकी सूचना दे दी. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटनास्थल पर पहुंच कर भीड़ के चंगुल से युवक को छुड़ाया और थाने ले आयी. पुलिस फिलहाल उस युवक से पुछताछ करने में जुटी है.

 


भय और आतंक के साए में जी रहे हैं लोग

भय और आतंक के साए में जी रहे हैं लोग

19-Aug-2019

सैय्यद एम अली तक़वी

आतंकवाद क्या है और आतंकवादी कौन है एक बार फिर अफगानिस्तान हादसे से इसे समझने की जरूरत है। आतंकवाद एक प्रकार की हिंसात्मक गतिविधि होती है। अगर कोई व्यक्ति या कोई संगठन अपने आर्थिक, राजनीतिक एवं विचारात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए देश के नागरिकों की सुरक्षा को निशाना बनाए, तो उसे आतंकवाद कहते हैं। राजनीतिक एवं वैचारिक हिंसा भी आतंकवाद की ही श्रेणी में आती है। अगर इसी प्रकार की गतिविधि आपराधिक संगठन चलाने या उसे बढ़ावा देने के लिए की जाती है तो वह भी आतंकवाद है। अफगानिस्तान में एक हमलावर द्वारा अपने को बारुद बांधकर उड़ा कर एक तबाही मचा दी। सवाल वही कि आखिर क्या मिला? अपने आप को मुसलमान कहने वाले इन जाहिलों को जन्नत की हूरें तो न मिली बल्कि इसके जिस्म का सूरमा  बन गया।

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काबुल अफगानिस्तान में एक शादी समारोह में बम विस्फोट करके 63 शिया मुसलमानो को शहीद कर दिया और 120 से अधिक घायल हो गए। किसी को अफसोस नहीं हुआ। आत्मा मर चुकी है। इंसान खोखला हो चुका है। शर्म, हया, इंसानियत सब खत्म हो चुका है। लोग सच्चाई की पहचान करना भूल गए हैं। पूरी दुनिया में खामोशी क्यूं है?  दुनिया में एक आदमी के मरने पर सारी दुनिया का मीडिया चीख चीख कर आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाता है मगर अफगानिस्तान में इन 63 से ज्यादा शिया मुसलमानों के कत्ल के खिलाफ कोई आवाज उठाने वाला नहीं! क्यूं?  क्या यह  आतंकवाद  पर दोगलापन नहीं है? मीडिया भी सो रहा है। इंसानियत की बात करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी सो रही हैं।

अफगानिस्तान सरकार ने देश के 100वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में होने वाले समारोह को भी स्थगित कर दिया है। यह प्रोग्राम ऐतिहासिक दर-उल-अमन पैलेस में सोमवार को होना था। खामा प्रेस के मुताबिक, राष्ट्रपति के प्रवक्ता सेदिक सेदिक्की ने कहा कि सचिवालय ने राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ गनी के निर्देश पर अफगानिस्तान के 100वें स्वतंत्रता समारोह के आयोजन को टाल दिया है। राष्ट्रपति ने काबुल में हुए विस्फोट में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति सम्मान व संवेदना व्यक्त करने के लिए यह फैसला लिया है।

लेकिन सवाल वही कैसे रोका जाए आतंकवाद? कैसे ख़त्म किये जायें आतंकवादी? हादसा होता है लोग निन्दा करते हैं संवेदना व्यक्त करते हैं फिर भूल जाते हैं। हकीकत में कोई भी देश आतंकवाद या आतंकवादी संगठन को खत्म करना नहीं चाहता एक दो अपवाद छोड़कर। शायद राजनीतिक फायदा हो! इच्छा शक्ति कमजोर हो! एक दूसरे देश से दुश्मनी हो! कोई न कोई कारण तो है। वरना दुनिया के मजबूत देश अमरीका, इंग्लैंड, रूस, चीन, भारत, जापान इत्यादि एक आतंकवाद खत्म नहीं कर पा रहे हैं। पूरी दुनिया में ज़ुल्म और अत्याचार हो रहे हैं। कहीं पर राजनीति की आड़ में ज़ुल्म और कहीं आतंकवाद के रूप में अत्याचार।
आतंकवाद की घटना निश्चित रूप से उन सभी चीजों से जुड़ी है, जो वास्तव में समाज में हो रहा है। समाज बिखर रहा है, खोखला हो रहा है। उसकी पुरानी व्यवस्था, अनुशासन, नैतिकता, धर्म , सत्य, सब कुछ गलत बुनियाद पर खड़ा है। लोगों की अंतरात्मा पर अब कोई पकड़ नहीं है।

आतंकवाद का मतलब वास्तव में इतना ही है कि कुछ लोग हैं जो मानते हैं कि मनुष्य को नष्ट करने से कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसा सोचने वालों के लिए मारना एक खेल हो जाता है।

लेकिन वास्तविकता यही है जो ओशो ने कहा कि जो व्यक्ति हर तरह की सुविधा में या ऐशो-आराम में जिंदगी गुजार रहा है, वह कभी आतंकवादी नहीं हो सकता। धनी आदमी कभी आतंकवादी नहीं हो सकता। वह तो सिर्फ संचालक हो सकता है। हमें ईमानदारी से समझना होगा कि आज लोग भय के वातावरण में जी रहे हैं, नफरत में जी रहे हैं, आनंद और खुशी में नहीं। हमें वैश्विक स्तर पर अपने मन को साफ रखने की जरूरत है। तभी इस घिनौने दलदल से बाहर निकल पायेंगे। बहरहाल मैं इस हमले की पुरजोर मज़म्मत और आलोचना करता हूं और शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना और हमदर्दी प्रकट करता हूं।


 


शख्स ने zomato से खाना ऑर्डर कर ली 'फ्री राइड', कंपनी भी कर रही अक्लमंदी की तारीफ

शख्स ने zomato से खाना ऑर्डर कर ली 'फ्री राइड', कंपनी भी कर रही अक्लमंदी की तारीफ

17-Aug-2019

नई दिल्ली : कहते हैं कि होशियार आदमी कभी और कहीं नहीं फंस सकता। वो कहीं न कहीं से अपनी मंजिल का रास्ता बना ही लेता है। कुछ ऐसा ही हैदराबाद के एक शख्स के साथ हुआ जिसने होशियारी दिखाते हुए Zomato से फूड डिलिवरी के साथ साथ फ्री राइड ली। अब इस शख्स की होशियारी वायरल Viral हो रही है। 

हैदराबाद में ऐसी ही उलझन में फंसे शख्स ने ऐसा उपाय निकाला जिसका हर कोई मुरीद हो गया। यहां तक कि अपने घर तक पहुंचने के लिए उसने जिस कंपनी को चूना लगाया वो भी उसकी अकलमंदी का कायल हो गया। 

फेसबुक यूजर ओबेश कोमिरसेट्टी ने जोमैटो के साथ लिए गए फ्री राइड का अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया है। ओबेश ने बताया कि वह एक मॉल में घूमने गए थे। वहां से निकलते हुए रात के 11:50 बजे गए थे। उन्होंने बताया कि वह रात में इनॉर्बिट मॉल रोड के पास खड़े होकर कैब का इंतजार कर रहे थे। काफी देर इंतजार करने के बाद भी उन्हें कोई कैब नहीं मिली। कुछ देर बाद एक कैब आई तो उसने काफी ज्यादा किराया मांगा। ओबेश ने बताया कि वह घर पहुंचने के लिए इतना किराया नहीं देना चाहते थे।

ओबेश ने बताया कि तभी उनके दिमाग में एक तीर से दो निशाने लगाने की सूझी। उन्होंने इनॉबिट मॉल रोड के पास के जोमैटो से खाने का ऑर्डर किया। उन्होंने खाने की डिलीवरी अपने घर पर मंगाई। जोमैटो का डिलीवरी ब्वॉय जब खाना लेकर निकला तो ओबेश ने उसे फोनकर कहा कि वह उन्हें घर छोड़ दे और खाने की डिलीवरी के साथ ही पैसे भी घर से ले ले। इस पर जोमैटो का डिलीवर ब्वॉय मान गया और ओबेश को घर तक छोड़कर आया और खाना पहुंचाने के साथ पैसे ले लिए।


स्वतंत्रता दिवस की बधाई वाले पोस्टर पर रेप आरोपी MLA कुलदीप सिंह सेंगर की फोटो

स्वतंत्रता दिवस की बधाई वाले पोस्टर पर रेप आरोपी MLA कुलदीप सिंह सेंगर की फोटो

16-Aug-2019

उत्तर प्रदेश: उन्नाव नगर पंचायत के अध्यक्ष अनुज कुमार दीक्षित ने स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन के मौके पर अखबार में बधाई संदेश छपवाया, जिसमें उन्नाव रेप केस के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की तस्वीर भी छपी है. इस मसले पर अनुज कुमार दीक्षित ने कहा, वह (कुलदीप सिंह सेंगर) हमारे क्षेत्र के विधायक हैं, इस वजह से यह तस्वीर वहां पर है. जब तक वह हमारे विधायक हैं, उनकी तस्वीर छापी जा सकती है.''

मालूम हो कि उन्नाव गैंगरेप मामले में दिल्ली एक अदालत ने बुधवार को बीजेपी से निष्कासित आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत आरोप तय किए. लोक सेवक रहते हुए यौन उत्पीड़न करने के मामले में 10 साल तक की सजा का प्रावधान है. इससे पहले, अदालत ने उन्हें पॉक्सो एक्ट की धारा 3 और 4 के तहत दोषी ठहराया था, जिसमें 7 साल तक जेल का प्रावधान है. वहीं रेप के मामले में शुक्रवार से गवाहों की जांच शुरू हो गई है और पूरी कार्यवाही की वीडियोग्राफी की जाएगी.

गौरतलब है कि मंगलवार को रेप पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में कथित मौत के मामले में कुलदीप सेंगर समेत 10 अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे. जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने पीड़िता के पिता को 2018 में सशस्त्र अधिनियम के तहत आरोपी बनाने और उन पर हमला करने के मामले में सेंगर और अन्य के खिलाफ आरोप तय किए. 

 


आर्टिकल 370 पर याचिका लगाने पर वकील को सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा, कहा- ‘बकवास याचिका कैसे.....

आर्टिकल 370 पर याचिका लगाने पर वकील को सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा, कहा- ‘बकवास याचिका कैसे.....

16-Aug-2019

कश्मीर: जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ 6 याचिका दायर की गई थीं, जिनपर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई की. सुनवाई के दौरान एमएल शर्मा नामक एक याचिकाकर्ता को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि ये किस तरह की याचिका है. क्या ऐसे याचिका दायर की जाती है. चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता से यह भी कहा कि याचिका में न तो कोई अनेक्सर है और न ही मेंशन के लायक है. मैंने ये याचिका करीब आधे घंटे तक पढ़ी फिर भी कुछ समझ नहीं आया कि आप कहना क्या चाहते हैं? चीफ जस्टिस की फटकार के बाद याचिकाकर्ता ने कहा कि मैं एडिशनल एफिडेविट फाइल कर दूंगा.

इसके बाद सीजेआई ने कहा कि आपने चार सूचनाएं ली और याचिका दायर कर दी. इसमें न कोई फैक्ट है और न किसी प्रकार की जानकारी. इतने गंभीर मामले पर ये बकवास याचिका आप कैसे दायर कर सकते हैं?

याचिकाकर्ता ने कहा कि मैं दो दिन में याचिका में संशोधन करके फाइल कर दूंगा. याचिकाकर्ता की बात सुनने के बाद सीजेआई ने कहा कि आपकी याचिका ऐसी नहीं है कि इस पर सुनवाई की जा सके. आपकी याचिका को हम खारिज कर देते लेकिन ऐसा करने से इस मामले में दायर अन्य याचिकाओं पर असर पड़ेगा.

इसके बाद सीजेआई ने रजिस्ट्रार से पूछा कि आर्टिकल 370 पर कुल कितनी याचिकाएं दायर की गई हैं? रजिस्ट्रार ने सीजेआई को बताया कि कुल 6 याचिका दायर हुई हैं, जिनमें 4 याचिका में कुछ न कुछ खामियां हैं. इसके बाद सीजेआई ने कहा कि याचिकाओं की कमियों को दूर करने के बाद मामले पर सुनवाई की जाएगी.

 


खबर अजब गजब ! मायके से पत्नी को लाने के लिए युवक ने चुरा ली हरियाणा रोडवेज की बस

खबर अजब गजब ! मायके से पत्नी को लाने के लिए युवक ने चुरा ली हरियाणा रोडवेज की बस

14-Aug-2019

मीडिया रिपोर्ट 

सोनीपत। हरियाणा पुलिस ने एक ऐसे चोर को गिरफ्तार किया है जिसने सोनीपत बस डिपो में ही सेध लगा दी और रोडवेज की बस चोरी कर ले गया। हालांकि बस की रफ्तार तेज थी और रोहतक के पास संतुलन बिगड़ गया। बस पेड़ से टकरा गई और पुलिस ने चोर को गिरफ्तार कर लिया। छानबीन में पता चला कि चोर ने बस की चोरी पत्‍नी को मायके लाने के लिए की थी। चोर की पहचान मनीष के रूप में हुई है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। वहीं बस को क्रेन से उठवाकर कर डिपो भेज दिया गया है। 

रोडवेज बस चालक नरेंद्र ने सोमवार रात को बस को जयपुर जाने के लिए काउंटर पर खड़ा कर दिया। बस को वहां खड़ी करके चालक नरेंद्र दूसरी बस लेने के लिए वर्कशॉप में चला गया। जब थोड़ी देर के बाद वह दूसरी बस को लेकर स्टैंड परिसर में आया तो वहां से बस गायब थी। उसने तत्काल मामले की सूचना यार्ड मास्टर रमेश कुमार और ड्यूटी क्लर्क रविद्र कुमार को दी। काउंटर से बस गायब होने की जानकारी मिलते ही कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। 

बस गायब होने की सूचना अधिकारियों व गीता भवन चौकी पुलिस को भी दी गई। युवक ने बताया कि उसकी ससुराल रोहतक में है और उसकी पत्नी वहीं गई हुई थी। पत्नी को मायके से लाने के लिए कोई साधन नहीं मिला तो उसने बस चुरा ली। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि युवक ने नशे में तो घटना को अंजाम नहीं दिया है। वही मीडिया रिपोर्ट में ये भी खबर आ रही है कि मनीष, निवासी तिहाड़ गांव को गिरफ्तार किया है जो कि बस को चुराकर मोटा मुनाफा कमाना चाहता था। लेकिन जब बस को रोहतक की तरफ जा रहा था तब का फरमाना के पास बस की रफ्तार तेज होने के कारण बस पेड़ से टकरा गई और यह मौके से फरार हो गया लेकिन अब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 


देश के मुखिया व  छग प्रदेश के मुखिया को  खुली चिट्ठी

देश के मुखिया व छग प्रदेश के मुखिया को खुली चिट्ठी

14-Aug-2019

मित्रों, हम कल 15 अगस्त को आजादी की जश्न मनाने वाले हैं। लेकिन हमें एक बार जरूर सोचनी चाहिए कि, आजादी के 72 वर्ष बाद भी क्या हमने सफाई कर्मचारी वर्ग के लिए ऐसा कोई कार्य किया है जिससे इन वर्ग को आजाद महसूस हो। समाज का एक हिस्सा यदि कमजोर है तो उसको उपर उठाकर सबके बराबरी में लाना राज्य का संवैधानिक कर्तव्य है। लेकिन आज भी इन वर्ग की स्थिति अति गंभीर है ।

आयिए कुछ बातो के उपर गौर करें -

सन 2013  से पहले तक छग में पूरे प्रदेश में सफाई कर्मचारी की नियमित पद पर नियुक्ति होती थी, उसके बाद सन् 2013 में ही एक कानून आया जो हमारे सफाई कर्मचारियों को समाज के मुख्य धारा में जोडने, उनके आर्थिक,सामाजिक, शैक्षणिक विकास करते हुए गरिमामय जीवन जीने के लायक बनाने, हाथ से मैंला उठाने वाला काम को प्रतिषेध करते हुए मानव गरिमा के अनुरूप हाथ में ग्लोब्स, गम बुट, मास्क, अन्य सुरक्षा उपकरण आदि के साथ सफाई की काम करवाने नई कानून "हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों का नियोजन का प्रतिषेध तथा उनका पुनर्वास अधिनियम 2013"( " The Prohibition of Employment as Manual Scavenger and Their Rehabilitation Act 2013 ")तत्कालीन कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने कानून बनाए जो सभी प्रदेशों के लिए कंपल्सरी रखा गया। जबकि सन 1993 में बनी कानून "हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों तथा शुष्क सौचालय निर्माण का प्रतिषेध अधिनियम. 1993 " "The Employment of Manual Scavengers and Constructions of Dry Latrines Prohibition Act 1993   जो सभी प्रदेशों के लिए कंपल्सरी नहीं था, Optional था जिस कारण  कुछ ही प्रदेशो के द्वारा उक्त 1993 का कानून को एडॉप्ट किया गया था, यहां तक कि छत्तीसगढ़  प्रदेश मै भी लागू नहीं किया गया था।

2013 की कानून आने के बाद तथा यह कनु  कंपल्सरी और mandatory होने के कारण छग प्रदेश उक्त कानून को अडॉप्ट किया ।जब पहली बार यह कानून 2013 में आया , तत्कालीन बीजेपी सरकार ने 2013 का कानून पालन करवाना छोड़ कर इसके विपरित सफाई कर्मचारी पद को ही समाप्त (dying cadre मृत घोषित)कर दिया और पूरे सफाई कर्मचारियों को निजी ठेकेदार के हवाले कर सफाई कर्मचारियों तथा श्रमिको के लिए बनी कानून का खुले आम उल्लंघन किया जा रहा है। यहां तक कि अंग्रेजों के समय बनी कानून तथा बाबासाहेब  के समय बनी कानून का भी पालन नहीं किया जा रहा है। संभवतः छत्तीसगढ़ राज्य पूरे भारत में एक मात्र प्रदेश हैं जहां सफाई कर्मचारी पद को समाप्त कर दिया गया है । 

यहां तक कि कोई सफाई कर्मचारी सेवाकाल के दौरान समय से पहले जिसका निधन हो गया, और परिवार का एक मात्र कमाने वाला के चले जाने के बाद मृतक के आश्रित को भी कोई अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जा रही है। सैकड़ों की संख्या में अनुकम्पा नियुक्ति प्रकरण लटकी हुई है।

श्रमिको के लिए बनी निम्न कानून का पालन नहीं हो रहा है  :-

(1)न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948

(2)EPF Act 1952

(3)Employee's State Insurance Act 1948

(4)Maternity Benefit Act 1961

(5)The Prohibition of Employment as Manual Scavenger and Their Rehabilitation Act 2013

15 August को किराना दुकान में काम करने वाला को भी छुट्टी मिलती है, लेकिन इन वर्गो के किस्मत में छुट्टी चीज का नाम नहीं है ।सुबह उठ कर सहर को चमकाने वाले लोगो के साथ कब तक होता रहेगा शोषण ......

हम सरकार से निवेदन करते है इन वर्गो के हितों के लिए बनी नियम व कानून व संवैधानिक उपवंधो का पालन करते हुए समाज के मुख्यधारा में जोड़ा जाए तब सहीं मायने में देश में आजादी की जश्न सार्थक होगा।

एडवोकेट जन्मेजय सोना, राष्ट्रीय महासचिव (भारतीय सफाई कर्मचारी महासंघ) मो. 8602200999, 8839092600


अब मलेशिया के मंत्री ने कहा - इस जाकिर नाइक को देश से बाहर भेजो

अब मलेशिया के मंत्री ने कहा - इस जाकिर नाइक को देश से बाहर भेजो

14-Aug-2019

मीडिया रिपोर्ट 

मलेशिया के मानव संसाधन मंत्री एम कुलसेगरन ने विवादास्पद इस्लामिक धर्मगुरु जाकिर नाइक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मलेशियन हिंदुओं की निष्ठा के खिलाफ जाकिर के बयान के बाद कुलसेगरन ने मंगलवार (13 अगस्त, 2019) को यह मांग की है। बता दें कि भारत में कथित आतंकी गतिविधियों और धनशोधन में वांछित विवादित जाकिर नाइक को मलेशिया में स्थाई नागरिकता मिली हुई है।

मलेशियाई गठबंधन सरकार में वरिष्ठ हिंदू राजनेताओं में से एक कुलसेगरन ने एक बयान में कहा, ‘भारत में भगोड़े विदेशी को मलेशिया छोड़ने, आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना करने का समय आ गया है।’ कुलसेगरन पूर्व में भी जाकिर नाइक की आलोचना करते हैं। अल्पसंख्यक समुदायों के दो अन्य मंत्रियों के साथ उन्होंने पिछले साल जुलाई में विवादास्पद उपदेशक का मुद्दा उठाया था।

मानव संसाधन मंत्री एम कुलसेगरन जाकिर नाइक द्वारा हाल में दिए उस बयान से खासे नाराज थे जिसमें उसने हिंदुओं की निष्ठा पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘मलेशियाई हिंदू अपने प्रधानमंत्री की तुलना में भारतीय प्रधानमंत्री के प्रति ज्यादा वफादार हैं।’

कुलसेगरन ने अपने बयान में कहा, ‘नाइक ने हाल में मलेशियाई हिंदुओं की तुलना भारत में मुसलमानों से की थी। उसने कहा था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लाभ के बावजूद मलेशिया में हिंदू, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अधिक निष्ठावान हैं।’ उन्होंने कहा कि मलेशियाई हिंदुओं की निष्ठा पर सवाल उठाने और हमारे बहु-जातीय समाज के प्राकृतिक तंत्र को छूने के बाद विवादास्पद धर्मगुरु के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई किया जाना जरुरी है।


नाइजीरिया में इस्लामी आंदोलन के प्रमुख शेख ज़कज़की के भारत आने पर खुशी

नाइजीरिया में इस्लामी आंदोलन के प्रमुख शेख ज़कज़की के भारत आने पर खुशी

13-Aug-2019

सैय्यद एम अली तक़वी, निदेशक- यूरिट एजुकेशन इंस्टीट्यूट

सबसे बड़े लोकतंत्र भारत देश में नाइजीरिया में इस्लामी आंदोलन के प्रमुख शेख ज़कज़की का उपचार प्रक्रिया के आंरभ होने और अपनी पत्नी के साथ उनकी भारत यात्रा पर तमाम भारतीय मुसलमान खास तौर से शिया समुदाय की खुशी का ठिकाना नहीं है। भारत के अलावा इस्लामी गणतंत्र ईरान ने भी भारत आने पर खुशी का इज़हार किया है।

इस्लामी आंदोलन के प्रमुख शेख ज़कज़की के बाहर निकलने से नाइजीरिया के इस्लामी आंदोलन और इस देश की सरकार के मध्य कई वर्षों से जारी समस्या के समाधान में सहायता होगी ताकि नाईजीरिया के शिया मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा हो सके, इस्लामी आंदोलन पर प्रतिबंध खत्म हों और जेल में बंद उसके सदस्य रिहा हों। अंजुमन हैदरी दिल्ली भारतीय शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद साहब की जेरे निगरानी इस संबंध में हर प्रकार की सहायता के लिए तैयार है तथा साथ ही साथ शेख़ जकजकी साहब के इलाज का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार है। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन को पत्र सौंप दिया गया है।

नाइजीरिया में इस्लामी आंदोलन के प्रमुख शेख ज़कज़की और उनकी पत्नी, इलाज के  लिए भारत आ चुके हैं। शेख ज़कज़की और उनकी पत्नी को को 13 दिसंबर सन 2015 में " ज़ारिया " नगर के इमामबाड़े पर सैनिकों के पाश्चिक हमले के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था । नाइजीरियाई सैनिकों के इस हमले में शेख ज़कज़की के कई बेटे और सैंकड़ों समर्थक शहीद हो गये थे। 

नाइजीरिया की सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर सन 2016 को शेख ज़कज़की की तत्काल रिहाई  और नाइजीरिया की सेना को 150 डालर हर्जाना शेख जक़ज़की को अदा करने का आदेश दिया था किंतु सेना और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को मानने से इन्कार कर दिया और शेख ज़कज़की को जेल में बंद रखा। हालिया महीनों में शेख ज़कज़की की सेहत बेहद खराब हो गयी थी और  ईरान व भारत सहित  कई देशों के डॅाक्टरों ने नाइजीरियाई सरकार को पत्र लिख कर  इस्लामी आंदोलन के प्रमुख शेख ज़कज़की के स्वास्थ्य की ओर से चिंता प्रकट की थी और उपचार न होने की दशा में उनकी मृत्यु की आशंका प्रकट की थी। 

पूरे दुनिया के शियो की यह अजीम कामयाबी है खासकर  हिंदुस्तान के ओलमा जिनकी आवाज़ पर सबने लब्बैक कहा और आज जकजकी साहब भारत में मौजूद हैं। भारत आने के बाद अब उम्मीद है कि एक बार फिर इस्लाम का अलम्बरदार ठीक होकर हुसैनियत का परचम बुलंद करेगा।

 


अकेले बैठा हुआ था बुजुर्ग पीछे से आए डकैतों ने कपड़े से दबाया गला तो पत्नी ने उठाई चप्पल और भिड़ी .... VIDEO

अकेले बैठा हुआ था बुजुर्ग पीछे से आए डकैतों ने कपड़े से दबाया गला तो पत्नी ने उठाई चप्पल और भिड़ी .... VIDEO

13-Aug-2019

मीडिया रिपोर्ट 

तमिलनाडु में ऐसी घटना हुई जिसने हर किसी को हैरान कर दिया. एक बुजुर्ग कपल ने चोरों को डटकर सामना किया और पीट-पीटकर उन्हें बाहर निकाल दिया. पिछले रविवार को चोर घर में घुसे और जमकर बुजुर्ग शख्स को पीटने लगे. वीडियो में देखा जा सकता है कि बुजुर्ग कपल चोरों से फाइट कर रहा है और उनको घर से भगा रहा है. इंटरनेट पर ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है और लोग बुजुर्ग कपल की खूब तारीफ कर रहे हैं.  CCTV फुटेज में देखा जा सकता है कि तिरुनेलवेली में 70 वर्षीय शानमकावेल  (Shanmugavel) अपने फार्महाउस के बरामदे में बैठे थे. वहीं पीछे से दो शख्स मुंह में कपड़ा बांधकर आए और कपड़े से उनका गला दबा दिया. उनके हाथ में हासिया था. बुजुर्ग शख्स जान बचाने के लिए चिल्लाने लगा और खुद को कैद से बाहर निकालने की कोशिश करता रहा. कुछ ही सेकंड बाद उनकी पत्नी बाहर आ गईं. 

https://twitter.com/i/status/1161128422829174789 इस लिंक पर क्लिक कर देखें 

65 वर्षीय सेंतथामराई ने चप्पल उठाई और चोरों को पीटने लगी. जिसके बाद उन्होंने कुर्सियां उठाकर फैंकी. पति ने भी लातें चलाना शुरू कर दिया और खुद को कैद से छुड़ा लिया. चोरों ने हासिए से महिला पर वार किए, लेकिन महिला ने हार नहीं मानी और चोरों को पीटती रही. पुलिस ने बताया कि महिला के दाहिने हाथ में चोट आई है. चोर उनके गले से 33 ग्राम की गोल्ड चेन चुराने में कामयाब रहे. बताया जा रहा है कि बुजुर्ग कपल यहां अकेला रहता है. ये घटना रविवार रात 9 बजे हुई. पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.


झारखंड हाईकोर्ट ने कहा - पत्थलगढ़ी आंदोलन का समर्थन करने वाले आदिवासियों के खिलाफ बनता है प्रथम दृष्टया दंगे का मामला

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा - पत्थलगढ़ी आंदोलन का समर्थन करने वाले आदिवासियों के खिलाफ बनता है प्रथम दृष्टया दंगे का मामला

12-Aug-2019

झारंखड हाईकोर्ट ने उस प्रथम सूचना रिपोर्ट यानि एफआईआर को रद्द करने या अमान्य घोषित करने से इंकार कर दिया है,जो जनजाती समुदाय के चार सदस्यों के खिलाफ दर्ज की गई थी। इन सभी पर कथित आरोप है कि इन्होंने मुंडा जनजाति समुदाय के 'पत्थलगड़ी' आंदोलन का समर्थन करने के लिए फेसबुक पर दंगे या विद्रोह वाली पोस्ट ड़ाली थी। जस्टिस रॉन्गोन मुखोपाध्याय की एक सदस्यीय पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया चारों याचिकाकर्ता-जे.विकास कोरा,धर्म किशोर कुल्लू,एमिल वाल्टर कंडुलना और घनश्याम बिरूली के खिलाफ दंगे या विद्रोह और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का मामला बनता है।

पत्थलगड़ी पत्थर की पटिया खड़ी करने की एक आदिवासी परंपरा है,जो उनके गांवों के अधिकार क्षेत्र का निर्धारण करती है। झारखंड के कई आदिवासी गांव जैसे खूंटी,अर्की और मुरहू आदि पिछले दो वर्षो से 'पत्थलगड़ी' की है। मुंडा समुदाय की पारंपरिक प्रथा के आधार पर,संविधान की पांचवी अनुसूची के तहत आदिवासियों को मिली कानूनी गारंटी,पंचायत अधिनियम के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) (पीईएसए) और ग्राम सभा द्वारा बनाए नियम(ग्राम परिषद्) से उत्कीर्ण पत्थर की पट्टियां गांवों के प्रवेश द्वार पर खड़ी कर दी गई थी।

याचिकाकर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने खूंटी गांव में 26 जून 2017 को मुंडा समुदाय के सदस्यों को उकसाया ताकि वह पुलिस पर हमला कर सके। खूंटी से भाजपा सांसद करिया मुंडा की सुरक्षा में तैनात चार पुलिसकर्मियों का कथित तौर पर गांव वालों ने अपहरण किया। यह अपहरण घाघरा में चल रही ग्राम सभा के दौरान पुलिस द्वारा किए गए हमले का बदला लेने के लिए किया गया था। एफआईआर में आरोप है कि यह घटना इसलिए हुई क्योंकि भोलेभाले आदिवासियों को भ्रमित किया गया और उनको 'आदिवासी महासभा' के नाम पर प्रभावित किया गया। ए.सी भारत सरकार कुटुंब परिवार ने सोशल मीडिया के जरिए संविधान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और देश-विरोधी भावना को फैलाया।

इतना ही नहीं अलग-अलग समुदायों व जातियों के बीच के आपसी समन्वय को भी अशांत किया, इसलिए भारतीय दंड संहिता की धारा 121 (भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ना),121ए (भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचना),124ए (दंगा या विद्रोह या देशद्रोह) और सूचना प्रोद्यौगिकी अधिनियम की धारा 66ए व 66 एफ के तहत एफ.आई.आर दर्ज की गई। परिणामस्वरूप आरोपियों ने दंड प्रकिया संहिता की धारा 482 के तहत याचिका दायर करते हुए उनके खिलाफ शुरू हुई कार्यवाही को रद्द करने की मांग की। याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश वकील प्रेम मार्दी ने दलील दी कि इनके खिलाफ देशद्रोह और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का मामला नहीं बनाया जा सकता है क्योंकि वह तो सिर्फ आदिवासी समुदायों की समस्याओं पर विचार और वाद-विवाद करने में संलिप्त थे।

केदारनाथ सिंह बनाम बिहार राज्य,अरूप भुयन बनाम असम राज्य आदि मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों का हवाला देते हुए मार्दी ने दलील दी कि किसी आसन्न हिंसा को भड़काए बिना सरकार के खिलाफ विचार प्रकट करने से देशद्रोह का मामला नहीं बनता है। इस याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन ने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं ने घृणा,हिंसा और सरकार के खिलाफ अवमानना को उकसाया। अभियोजन ने फेसबुक पर ड़ाली गई कुछ पोस्ट का भी हवाला दिया। जिसमें कहा गया था-''मुझे तुम्हारा आधार कार्ड नहीं चाहिए,मेरी पहचान पत्थलगड़ी है।

सभी संवैधानिक कदम उठाए जाने चाहिए ताकि इंग्लैंड,यूएसए और यूनाईटेड नेशनल आदिवासियों की आजादी के लिए एक्ट या काम करने के लिए मजबूर हो सके'',''खूंटी गांव सिर्फ प्रथागत या प्रचलित कानून,पीईएसए एक्ट व ग्राम सभा का पालन करना चाहता है।'',''ग्राम सभा के किनारे या तट को पूरे देश में फैला दो| सभी दलीलों पर विचार करने के बाद जस्टिस रॉन्गोन मुखोपाध्याय की एक सदस्यीय पीठ ने कहा कि जब कोई आलोचना सरकार के खिलाफ घृणा की हिंसा को जन्म देती है तो यह आईपीसी की धारा 124ए के तहत अपराध के समान है,जो संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत नहीं आता है।

कोर्ट ने कहा कि फेसबुक पोस्ट से साफ जाहिर है कि प्रथम दृष्टया मंशा देशद्रोह करने की ही थी। फेसबुक पोस्ट का पहले ही हवाला दिया जा चुका है और उनसे मंशा कुछ हद तक जाहिर हो रही है जो याचिकाकर्ताओं के देशद्रोह के काम को दर्शाती है।

ग्राम सभा के किनारे या तक को पूरे देश में फैलाना,आजादी के लिए यूनाईटेड नेशनस के समक्ष मुद्दे को उठाना आदि कुछ उचित आधार है जो याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने के लिए काफी है। इस तरह की देशद्रोही गतिविधियों ने उपद्रव को भड़काया और पुलिस पार्टी पर हमला करवाया। इन सभी तथ्यों को देखते हुए आईपीसी की धारा 121 व 121ए के तहत याचिकाकर्ताओं के खिलाफ प्रथम दृष्टया केस बनता है। पीठ ने इस मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया है। 

साभार : livelaw

यह खबर मूल रूप से livelaw पर प्रकाशित हुआ है 


भाजपा नेता शिवराज सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू को बताया ‘अपराधी’

भाजपा नेता शिवराज सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू को बताया ‘अपराधी’

11-Aug-2019

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को लेकर विवादित बयान दिया है. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद इसपर प्रतिक्रिया देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने जवाहरलाल नेहरू को अपराधी बता दिया.

शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा है?

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है, ‘’जवाहरलाल नेहरू एक अपराधी है. जब भारतीय सेना कश्मीर में पाकिस्तान आदिवासियों का पीछा कर रही थी तो जवाहरलाल नेहरू ने युद्ध विराम की घोषणा कर दी.’’ उन्होंने कहा, ‘’कश्मीर के एक तिहाई हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा था. अगर कुछ और दिनों के लिए युद्धविराम नहीं होता तो पूरा कश्मीर हमारा होता.’’
अनुच्छेद 370 नेहरू का दूसरा अपराध– शिवराज

शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा, ‘’जवाहरलाल नेहरू का दूसरा अपराध अनुच्छेद 370 था. एक देस में दो-दो निशान, दो विधान, दो प्रधान. यह देश के लिए अन्याय नहीं बल्कि इसके खिलाफ एक अपराध था.’’


शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल का हास्य पद बयान : ‘चरक ऋषि ने की थी परमाणु की खोज’

शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल का हास्य पद बयान : ‘चरक ऋषि ने की थी परमाणु की खोज’

11-Aug-2019

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने एक अजीबोगरीब दावा किया है. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा है कि अणु-परमाणु की खोज चरक ऋषि ने की थी. पोखरियाल ने ये दावा आईआईटी बॉम्बे के एक कार्यक्रम में किया. हालांकि चरक ऋषि को आयुर्वेदिक ग्रंथ चरक संहिता के लिए जाना जाता है.
रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, ‘’परमाणुओं और अणुओं पर शोध किसने किया था? जिसने परमाणुओं और अणुओं पर शोध किया और उनकी खोज की वह चरक ऋषि थे.’’ उन्होंने कहा, ‘’चरक ऋषि को आयुर्वेद की पारंपरिक प्रणाली के मुख्य योगदानकर्ताओं में से एक के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने परमाणुओं और अणुओं की खोज भी की है.’’
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बम्बई (आईआईटी बम्बई) के 57वें दीक्षांत समारोह में निशंक ने आगे कहा, ‘’नासा ने पुष्टि की है कि अगर चलने वाले कंप्यूटर एक वास्तविकता बने तो यह केवल संस्कृत की नींव पर आधारित होगा. संस्कृत एक वैज्ञानिक भाषा है. यह एकमात्र भाषा है जहां शब्दों को ठीक उसी तरह लिखा जाता है जिस तरह से वे बोली जाती है.’’

भारत को विश्व गुरु बनाने में IIT की भूमिका महत्वपूर्ण– पोखरियाल
रमेश पोखरियाल निशंक ने भारत को अगले पांच वर्षों में शिक्षा में क्षेत्र में विश्व गुरु के तौर पर स्थापित करने में आईआईटी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को 2024 तक शिक्षा में वैश्विक गुरु के तौर पर स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. इस लक्ष्य को साकार करने में आईआईटी को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है.
निशंक ने कहा कि संस्कृति को शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए ताकि व्यक्ति में विकास के लिए स्थायी और दृढ़ आधार हो. उन्होंने आईआईटी बम्बई को ‘क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग’ में 200 शीर्ष विश्वविद्यालय में स्थान बनाने के लिए बधाई दी और इससे अधिक ऊंचा लक्ष्य रखने का आह्वान किया.

भारत अब विश्व का सबसे पसंदीदा निवेश स्थल- पोखरियाल
पोखरियाल ने कहा, ‘‘आईआईटी बम्बई जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने जैसे विकास लक्ष्यों को पूरा करने में एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है.’’ उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘स्टैंडअप इंडिया’ जैसे कार्यक्रम परिवर्तनकारी योजनाएं हैं. उन्होंने कहा कि भारत अब विश्व का सबसे पसंदीदा निवेश स्थल बन गया है.
उन्होंने गणित, औषधि और परमाणु विज्ञान के क्षेत्र में प्राचीन भारत के योगदानों को याद करते हुए कहा, ‘‘भारत की ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में विश्व को एक नेतृत्व प्रदान करने की एक विरासत रही है. आईआईअी छात्रों को यह सुनिश्चित करने की जरुरत है कि भारत यह नेतृत्व की भूमिका निभाना जारी रखे.’’


YouTube, नेटफ्लिक्स जैसे ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म में कंटेंट रेगुलेट करने की याचिका कर्नाटक हाईकोर्ट ने खारिज की

YouTube, नेटफ्लिक्स जैसे ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म में कंटेंट रेगुलेट करने की याचिका कर्नाटक हाईकोर्ट ने खारिज की

10-Aug-2019

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बुधवार को सिनेमैटोग्राफी अधिनियम के तहत YouTube, अमेज़न प्राइम, नेटफ्लिक्स जैसे इंटरनेट प्लेटफार्मों पर प्रसारित होने वाली ऑनलाइन सामग्री को रेगुलेट (विनियमित) करने से इनकार कर दिया। लाइव लॉ की खबर के अनुसार  न्यायमूर्ति अभय ओका और न्यायमूर्ति मोहम्मद नवाज की एक खंडपीठ ने पद्मनाभ शंकर नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। खंड पीठ ने यह कहा, "इंटरनेट की अवधारणा और इसके संचालन के कारण, फिल्मों, धारावाहिकों, अन्य सामग्री की प्रदर्शनी और फाइलों का हस्तांतरण का कार्य संभवतः उपयोगकर्ताओं द्वारा अनुरोध के आधार पर होता है और इसलिए स्वीकार करना संभव नहीं है कि इंटरनेट के माध्यम से ये सामग्री सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के दायरे में आती हैं।

" याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम से प्रसारित अनियमित सामग्री के कारण बच्चे प्रभावित हो रहे थे। यह निर्देश देने के लिए प्रार्थना की गई कि फिल्मों, धारावाहिकों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रसारित अन्य मल्टीमीडिया सामग्री को सिनेमाटोग्राफ अधिनियम के तहत प्रमाणन की आवश्यकता है जब तक कि उन्हें विनियमित करने के लिए उपयुक्त कानून नहीं बनाया जाता है। पीठ ने हालांकि यह आशा व्यक्त की कि याचिकाकर्ता द्वारा व्यक्त की गई चिंता केंद्र सरकार द्वारा विचार योग्य है। 


पिता ने जगुआर की जगह गिफ्ट की BMW, नाराज बेटे ने नदी में डूबा दिया

पिता ने जगुआर की जगह गिफ्ट की BMW, नाराज बेटे ने नदी में डूबा दिया

10-Aug-2019

नई दिल्ली: हरियाणा के यमुनानगर में शुक्रवार को एक युवक ने नाराज होकर अपनी बीएमडब्ल्यू कार नदी में धकेल दी. युवक ने यह कदम इसलिए उठाया, क्योंकि उसके माता-पिता ने उसे जगुआर की जगह बीएमडब्ल्यू कार उपहार में दी, जिससे वह नाराज हो गया.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “जब युवक अपनी बीएमडब्ल्यू कार को नदी में बहा रहा था तब उसने इसका वीडियो बनाया और इसे सोशल मीडिया पर डाल दिया.”

कार नदी के बीच में जाकर बड़ी घासों के बीच में अटक गई. बाद में युवक स्थानीय गोताखोरों की मदद से कार को बाहर निकालता देखा गया. पुलिस ने इस घटना को लेकर एक मामला दर्ज किया है.

साभार : tv9bharatvarsh

 


नेपाल में अपने बेटे को बचाने एक माँ ने लिखी रक्षा मंत्री को खत, मांगी कानूनी मदद

नेपाल में अपने बेटे को बचाने एक माँ ने लिखी रक्षा मंत्री को खत, मांगी कानूनी मदद

09-Aug-2019

आदरणीय राजनाथ जी
माननीय रक्षा मंत्री
भारत सरकार

विषय: मेरे बेटे को नेपाल में कानूनी मदद एवं अपराधियों के खिलाफ कार्यवायी हेतु प्रार्थना पत्र 

महोदय, 

मेरा नाम नीलम पांडेय है । मेरे पति का नाम श्री मनोज कुमार पांडेय है । मैं डी-22, सफदरजंग स्टाफ क्वाटर, नई दिल्ली 110029 की निवासी हूँ । साथ ही मैं भारतीय जनता पार्टी  पूर्वांचल मोर्चा में दिल्ली प्रदेश मंत्री हूँ एवं नई दिल्ली जिला प्रभारी भी हूँ । महोदय, मैं आज बहुत दुःख में हूँ । मेरा एकमात्र पुत्र राहुल पांडेय  नेपाल निवासी भुवन केसी द्वारा एक फर्जी धोखाधड़ी मामले में फंसाया गया है । इससे सम्बंधित निम्नलिखित बिंदुओं से मैं आपको अवगत कराना चाहती हूँ । 

1. मेरे बेटे राहुल पांडेय की दोस्ती फेसबुक के माध्यम से नेपाल निवासी भुवन केसी, सीईओ, KC EMPLOYMENT PVT. LTD., Sukedhara-4, Kathmandu, Nepal, Phone: +977 (1)4441309, Email: info@kcemploymentgroup.com से हुई । इस व्यक्ति ने मेरे बेटे को बोला कि इसका काम नेपाल में बहुत अच्छा है और वो अपने इस काम को भारत में बढ़ाना चाहता है ।  उसने मेरे बेटे को फ्री में अपनी कंपनी में 50% का मालिक बनाने की बात भी कही । (सबूत संलग्न)

2. वह कुल दो बार भारत आया है । एक बार 11 मार्च, 2019 को तथा 3 दिन वह हमारे ही घर रहा । दूसरी बार 10 जुलाई, 2019 को आया । दो दिन द्वारका के एक होटल में रहा तथा तीन दिन हमारे घर रहा दोनों ही बार ये राहुल के लैपटॉप पर और अपने लैपटॉप पर एक साथ ही घंटो लगा रहता था । कुछ अपने लैपटॉप पर करता था और कुछ राहुल के लैपटॉप पर करता था अपने साथ वो कुछ कागज लेके आता था. राहुल से उसने उसका जीमेल का आईडी पासवर्ड ले रखा था उससे अलग अलग मेल भी करता था हमें सिर्फ यही बताता था कि राहुल के लिए 50% पार्टनरशिप से सम्बंधित कागजी कार्यवायी कर रहा हूँ । 

3.  यहाँ दिल्ली में भुवन केसी ने एक राजू (नेपाली लड़का) नाम के लड़के से राहुल (मेरा बेटा) को मिलवाया एवंम बोला कि ये तुम्हारी काम में मदद करेगा । भुवन ने कहा कि वह राजू को पैसे भेजेगा तुम्हे बस मुझे और मेरे कंपनी के अन्य पार्टनर को बस ओके करके लिखना है और कहना है कि मुझे पैसे मिल गए ।

4. भुवन मेरे बेटे को फ्री में एयर टिकट भेजता था और नेपाल बुलाता था. वहाँ पर रहना खाना भी फ्री करवाता था बेटे के साथ मेरे लिए प्रसाद और मेरी बेटी के लिए कपड़े भी भिजवाता था । मेरे लिए शॉल भी भिजवाई मुझे मम्मी कह कर बुलाता था मेरी बेटी को छोटी बहन कहता था उसके इतने अच्छे व्यवहार से वह कब हमारे घर का मेम्बर जैसा हो गया, हमे पता ही नहीं चला मैं उसे अपने बेटे की तरह माने लगी थी । हम सबका उस पर पूर्ण विशवास था । (संलग्न व्हाट्सप्प चैट के साथ फ्री टिकट आदि का स्क्रीन शॉट )

5. दिनांक 18 जुलाई, 2019 को एक बार उसने फिर नेपाल के लिए मेरे और मेरे बेटे के लिए फ्री एयरटिकट भेजी l उसने बोला की आप मम्मी जरूर आना आपको पशुपति नाथ का दर्शन कराना चाहता हूँ । 18 जुलाई, 2019 की व्हाट्सप्प चैट से साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि वो बहुत फाॅर्स भी कर रहा था कि मम्मी आप जरूर आना लेट मत होना । निकलने से पहले मुझे जरूर बोलना l मेरे बेटे की ताबियत ख़राब होने के बावजूद हम दोनों उसके पास गए क्यूंकि मैं उसे अपना बीटा मानती थी । (संलग्न फ्री टिकट, व्हाट्सप्प की चैट, बेटे के बीमारी के कागज)

6. हमारे नेपाल पहुँचते ही उसने हमें पशुपति नाथ मंदिर घुमाया, उसके बाद एक होटल में खाना खिलाया, फिर अपने ऑफिस ले गया l वहां पर उसके चार साथी पहले से थे उनमें से एक पुलिस कर्मी(जो की भुवन ने हमें बताया ) भी था । मुझे एक अलग कमरे में बैठाया गया और कहा कि मम्मी, हम कुछ जरूरी कागजी कार्यवाही कर लेते हैं भाई के साथ आप थोड़ा बहार बैठ जाओ । 

7. थोड़ी ही देर में कमरे से तेज तेज आवाज आई आवाज को समझने के लिए मैं वाशरूम भी गई, जो कि कमरे के पास ही था लेकिन मैं आवाज को समझ नहीं पायी । " भुवन भी मेरा बेटा है" ये बात मेरे दिमाग में थी. अतः में निश्चिंत थी ।

8. थोड़ी देर में भुवन मेरे पास आया और बोला, मम्मी अब पैसे का इंतज़ाम कर लो । वरना आपका राहुल अब जेल जाएगा मुझे समझ ही नहीं आया कि यह क्या हुआ ? मैंने भुवन से बोला कि कैसे पैसे? तो उसने कहा कि 40 लाख दो । तुम्हारे बेटे ने 40 लाख का घपला किया है  मैंने पूछा कि कब किया तो बोला जब नेपाल पिछली बार आया था तो ले गया था मैंने कहा कि तुम मुझे हर छोटी छोटी बताते हो, तो ये क्यों नहीं बताया? 

9. मैंने उसे बोला कि तुमने मेरा बेटा बनकर हमे धोखा दिया है मैं तुम्हारी कम्प्लेन करुँगी, सबूत क्या है कि मेरा बेटा 40 लाख लिया है तुमसे ? तो बोला सब है मेरे पास 

10. थोड़ी देर में मेरा बेटा उसके अन्य साथियों के साथ बाहर आया और आते ही मुझसे पूँछ कि मम्मी आप ठीक हो? मैंने कहा कि है । तो मेरा बेटा फूट फूट कर रोने लगा बोला, इन लोगों ने मुझे धमकी दी कि इन सब कागजों पर साइन कर और अंगूठा लगा वरना तेरी माँ को हम ख़त्म कर देंगें इन्होने कई कागजों पर मुझसे साइन और अंगूठा लगवाया

11. उसके बाद हम दोनों को वो अपनी गाड़ी से हम दोनों को टेक थाना ले गया । वहाँ पर भुवन और उसके एक दोस्त सोभा कांत अय्यर ने एक पुलिस वाले से हाथ मिलाया और गले मिले   पुलिस वाले ने बोला, "ले आये इन्हे?" मैं हैरान थी कि पुलिस वाले को हमारे बारे में ऐसा क्या पता ही  ये बात हमसे पूँछी? मैंने उन पुलिस वालों को सारी बात बतायी और निवेदन किया कि कृपया इस बात की जांच करवा लो कि पैसा कब लिया और कैसे लिया? साथ ही मैंने उनसे प्रार्थना की कि मेरे बेटे के हाथ में जो इंक लगी है, वो ताज़ी है इन्होने इससे अभी साइन करवाए हैं, कृपया जांच कर लो । लेकिन उन्होंने मेरी कोई बात नहीं सुनी 


12. मैं एक दम से कमजोर महसूस करने लगी थाने बाहर आकर भुवन ने बोला कि अगर मुझे 15 लाख भी अभी दे दो, तो मैं इसको छुड़वा दूंगा वरना तेरी राजनीति यहाँ नहीं चलेगी पूरे रास्ते चारों लोगों ने मुझे बहुत प्रताड़ित किया l उसके बाद उसने अपने ऑफिस के पास के होटल रीडर्स इन नामक होटल में मुझे रखवाया l मेरे साथ वो कमरे में आया और बोला एक ही लड़का है तेरा पैसे का इंतजाम कर ले 

13. मैंने नेपाल के भारतीय दूतावास से भी संपर्क किया, किन्तु मुझे कोई मदद नहीं मिली l मैंने नेपाल का 100 नंo  भी डायल किया, लेकिन पुलिस आयी, और किया कुछ भी नहीं जबकि इसके उलट भुवन केसी मेरे कमरे में गुस्से से आया और मुझे बहुत प्रताड़ित किया l जिसमें बार बार पैसे की मांग, मेरे बेटे को 10 साल की सजा और पुलिस वालो को खरीदना शामिल था साथ ही वीज़ा दिखाते हुए उसने बोला कि अब मैं कुवैत चला जाऊंगा तेरा बेटा यहाँ सड़ेगा मैंने फिर 100 नंo  डाइल किया तो वो भाग गया मैं कम्प्लेन लिखाने गौशाला थाना भी गयी, तो उन्होंने भी मेरी शिकायत नहीं सुनी 

15. मुझे भुवन केसी ने दिनांक को एक मैसेज भी व्हाट्सप्प से भेजा था जिसमें नेपाल के गृहमंत्री, इंडियन एम्बेसडर नेपाल की फोटो भेजी जबकि उस दिन भुवन दिल्ली में मेरे घर ही था मेरे पूंछने पर उसने कहा कि इन लोगों की जरूरत आपको जल्द पड़ने वाली है या फिर जो कंपनी मैं बता रहा हूँ, उसमें हमारी कंपनी का काम लगवाओ आज मुझे उसकी बात समझ में आयी, इस क्यों मुझे उसने ये मैसेज किया आज इन लोगों की मदद की मुहे बहुत जरूरत है ।

14. महोदय, आपसे निवेदन है कि जांच करवाई जाए कि पैसे का घपला कैसे हुआ, तो सारी चीजें सामने आ जाएगी। साथ ही मैं निवेदन करती हूँ की मेरे बेटे को नेपाल में कानूनी कार्यवाई हेतु एवं उसकी घर वापसी से संबधित हर संभव मदद की जाए ।


आपकी आभारी, 
नीलम पांडेय 
9871102308


‘अल्‍लाह के बाद सिर्फ आप हमारी आखिरी उम्‍मीद,’ सुषमा को कुछ ऐसे याद कर रहे पाकिस्‍तानी

‘अल्‍लाह के बाद सिर्फ आप हमारी आखिरी उम्‍मीद,’ सुषमा को कुछ ऐसे याद कर रहे पाकिस्‍तानी

08-Aug-2019

नई दिल्‍ली। 67 साल की उम्र में अलविदा कहने वाली पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज के जाने के बाद राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। सुषमा भारत की एक ऐसी मंत्री थीं जो ट्विटर पर एक अपील के बाद लोगों की मदद करने लगती। मदद में सुषमा ने कभी इस बात पर ध्‍यान दिया कि कोई सऊदी अरब से बैठा मदद मांग रहा है या फिर पड़ोस के पाकिस्‍तान से।

एक बार पाकिस्‍तान की एक नागरिक ने तो यहां तक कह डाला था कि अल्‍लाह के बाद वह उनकी आखिरी उम्‍मीद हैं। सुषमा ने भी हमेशा उनकी उम्‍मीदों पर खरा उतरने की कोशिश की। उनके जाने से एक ऐसी जगह खाली हो गई है जिसे शायद ही कभी भरा जा सकेगा। आपको बता दें कि मंगलवार को एम्‍स में सुषमा ने अंतिम सांस ली।
तुरंत मेडिकल वीजा सुषमा साल 2014 से 2019 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में विदेश मंत्री रहीं। मानवता के आधार पर वह लोगों की मदद करने में हमेशा आगे रहीं। सुषमा ने ट्विटर को एक ऐसी हेल्‍पलाइन के तौर पर प्रयोग किया जिससे मुसीबतों में पड़े लोगों की मदद की जा सकी। सुषमा ने हमेशा मंगल ग्रह तक फंसे लोगों की मदद करने की बात कही। पाकिस्‍तान के कई नागरिकों को उन्‍होंने ऐसे समय में वीजा मुहैया कराया जब उन्‍हें सबसे ज्‍यादा जरूरत थी। इसी तरह का एक वाकया अक्‍टूबर 2017 में हुआ जब एक बच्‍ची को ओपेन हार्ट सर्जरी की जरूरत थी। इस बच्‍ची की मां ने एक बार सुषमा से मदद मांगी और वह फौरन तैयार हो गईं।

हीरा शिराज की एक वर्ष की बच्‍ची शिरीन शिराज को जल्‍द से जल्‍द ओपेन हार्ट सर्जरी की जरूरत थी। उन्‍होंने सुषमा से अपील की। हीरा ने सुषमा को 10 अक्‍टूबर 2017 को रात 8 बजकर 26 मिनट पर ट्वीट किया। सुषमा ने करीब दो घंटे बाद उनकी ट्वीट जवाब दिया और उन्‍हें बताया कि भारत की ओर से उनकी बेटी को सर्जरी के लिए वीजा दिया जाता है।

इसी तरह से एक और पाक नागरिक शाहजेब इकबाल जो लाहौर के रहने वाले थे उन्‍हें अपने भाई के लिवर ट्रांसप्‍लांट के लिए भारत का वीजा चाहिए था। उन्‍होंने ट्विटर पर लिखा,’अल्‍लाह के बाद आपको हमारी आखिरी उम्‍मीद है। भारतीय दूतावास से अनुरोध करके हमें मेडिकल वीजा दिलाने की मदद करें।’
सुषमा ने कुछ ही मिनटों के अंदर जवाब दिया और कहा कि उन्‍हें तुरंत मेडिकल वीजा जारी किया जाता है। इसी तरह से एक पाक नागरिक साजिदा बीबी को लिवर ट्रांसप्‍लांट के बाद कई तरह की दिक्‍कतें आईं और सुषमा ने मेडिकल वीजा की अपील की गई। सुषमा ने भी कुछ घंटों के अंदर जवाब दिया और साजिदा बीबी को वीजा जारी किया।

मीडिया इन पुट 


कश्मीर अभी इम्तिहान आगे और भी है

कश्मीर अभी इम्तिहान आगे और भी है

07-Aug-2019

कश्मीर में "कुछ बड़ा होने वाला है" के सस्पेंस से आखिर पर्दा उठ ही गया। राष्ट्रपति के एक हस्ताक्षर ने उस ऐतिहासिक भूल को सुधार दिया जिसके बहाने पाक सालों से वहां आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने में सफल होता रहा  लेकिन यह समझ से परे है कि कश्मीर के राजनैतिक दलों के महबूबा मुफ्ती फ़ारूख़ अब्दुल्ला सरीखे नेता और कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष जो कल तक यह कहता था कि कश्मीर समस्या का हल सैन्य कार्यवाही नहीं है बल्कि राजनैतिक है, वो मोदी सरकार के इस राजनीतक हल को क्यों पचा पा रहे हैं। 

शायद इसलिए कि मोदी सरकार के इस कदम से कश्मीर में अब इनकी राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं बची है। लेकिन क्या यह सब इतना आसान था ? घरेलू मोर्चे पर भले ही मोदी सरकार ने इसके संवैधानिक कानूनी राजनैतिक आंतरिक सुरक्षा और विपक्ष समेत लागभग हर पक्ष को साधकर अपनी कूटनीतिक सफलता का परिचय दिया है लेकिन अभी इम्तिहान आगे और भी है। क्योंकि पाक की घरेलू राजनीति, उसके चुनाव सब कश्मीर के इर्दगिर्द ही घूमते हैं तो नापाक पाक इतनी आसानी से हार नहीं मानेगा। चूंकि भारत सरकार के इस कदम से अब कश्मीर पर स्थानीय राजनीति का अंत हो चुका है और प्रशासन की बागडोर पूर्ण रूप से केंद्र के पास होगी, पाक के लिए अब करो या मरो की स्थिति उत्पन्न हो गई है। शायद इसलिए उसने अपनी प्रतिक्रिया शुरू कर दी है और वो अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस ओर आकर्षित करने भी लगा है। हालांकि वैश्विक पटल पर भारत की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसकी संभावना कम ही है कि भारत के आंतरिक मामलों में कोई भी देश दखल दे और पाकिस्तान का साथ दे। बालाकोट स्ट्राइक पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया इसका प्रमाण है।

 इसलिए जो लोग इस समय घाटी में सुरक्षा के लिहाज से केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों जैसे अतिरिक्त सैन्य बल की तैनाती, कर्फ़्यू, धारा 144, क्षेत्रीय दलों के नेताओं की नज़रबंदी को लोकतंत्र की हत्या या तानाशाहपूर्ण रवैया कह रहे हैं उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि  पाक की कोशिश होगी कि किसी भी तरह से घाटी में कश्मीरियों के विद्रोह के नाम पर हिंसा की आग सुलगाई जाए ताकि वो अंतर्राष्ट्रीय मोर्च पर यह संदेश दे पाए कि भारत कश्मीरी आवाम की आवाज को दबा कर कश्मीर में अन्याय कर रहा है और मानवाधिकारों के नाम पर यू एन और अंर्तराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग जैसे संस्थानों को दखल देने के लिए बाध्य करे। इसलिए केंद्र सरकार के इन कदमों का विरोध करके ना सिर्फ वो पाकिस्तान की मदद कर रहे हैं बल्कि एक आम कश्मीरी के साथ भी अन्याय कर रहे हैं। 

क्योंकि विगत 70 सालों ने यह साबित किया है कि धारा 370 वो लौ थी जो कश्मीर के गिने चुने राजनैतिक रसूख़ वाले परिवारों के घरों के चिरागों को तो रोशन कर रही थी लेकिन आम कश्मीरी के घरों को आतंकवाद अशिक्षा और गरीबी की आग से जला रही थी। संविधान की धारा 370 और 35 ए ने कश्मीर में अलगाववाद की आग को कट्टरपंथ और जेहाद के उस दावानल में तब्दील कर दिया था कि पूरा कश्मीर हिंसा की आग से सुलग उठा और बुरहान वाणी जैसा आतंकी वहाँ के युवाओं का आदर्श बन गया । जब 21वीं सदी के भारत के युवा स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया के जरिए उद्यमी बनकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भविष्य के भारत की सफलता के किरदार बनने के लिए तैयार हो रहे थे तो कश्मीर के युवा 500 रूपए के लिए पत्थरबाज बन कर भविष्य के आतंकवादी बनकर तैयार हो रहे थे। 

जी हाँ सेना के एक सर्वे के हवाले से यह बात सामने आई थी कि आज का पत्थर फेंकने वाला युवक ही कल का आतंकवादी होता है। सरकार के इस कदम का विरोध करने वालों से देश जानना चाहता है कि 370 या 35ए से राज्य के दो चार राजनैतिक परिवारों के अलावा किसी आम कश्मीरी को क्या फायदा मिला? यही कि उनके बच्चों को पढ़ने के लिए अच्छे अवसर नहीं मिले? उन्हें अच्छी चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिलीं? हिंसा के कारण वहाँ का पर्यटन उद्योग पनप नहीं पाया? जो छोटा मोटा व्यापार था वो भी आए दिन के कर्फ़्यू की भेंट चढ़ जाता था? क्या हम एक आम कश्मीरी की तकलीफ का अंदाज़ा गृहमंत्री के राज्यसभा में इस बयान से लगा सकते हैं कि वो एक सीमेंट की बोरी की कीमत देश के किसी अन्य भाग के नागरिक से 100 रूपए ज्यादा चुकाता है सिर्फ इसलिए कि वहाँ केवल कुछ लोगों का रसूख़ चलता है?

 क्या हम इस बात से इंकार कर सकते हैं कि अब जब सरकार के इस कदम से राज्य में निवेश होगा, उद्योग लगेंगे पर्यटन बढ़ेगा तो रोज़गार के अवसर भी बढ़ेंगे खुशहाली बढ़ेगी इससे वो कश्मीर जो अबतक 370 के नाम पर अनेक राजनैतिक कारणों से अलग थलग किया जाता रहा अब देश की मुख्यधारा से आर्थिक रूप से जुड़ सकेगा। इसके अलावा अपने अलग संविधान और अलग झंडे के अस्तित्व के कारण जो कश्मीरी आवाम आजतक भारत से अपना भावनात्मक लगाव नहीं जोड़ पाई अब भारत के संविधान और तिरंगे को अपना कर उसमें निश्चित रूप से एक मनोवैज्ञानिक परिवर्तन का आगाज़ होगा जो धीरे धीरे उसे भारत के साथ भावनात्मक रूप से भी जोड़ेगा। बस जरूरत है आम कश्मीरी के उस नैरेटिव को बदलने की जो बड़ी चालाकी से सालों से उसे मीठे जहर के रूप में दिया जाता रहा है भारत के खिलाफ भड़का कर जो उसे भारत से जुड़ने नहीं देता। जरूरत है आम कश्मीरी के मन में इस फैसले के पार एक नई खुशहाल सुबह के होने का विश्वास जगाने की, उनका विश्वास जीतने की। कूटनीतिक और राजनैतिक लड़ाई तो मोदी सरकार जीत चुकी है लेकिन उसकी असली चुनौती कश्मीर में सालों से चल रहे इस रणनीतिक युद्ध को जीतने की है।

( डॉ नीलम महेंद्र लेखिका वरिष्ठ स्तंभकार है )


सुषमा स्वराज राजनीति का अमिट आलेख हैं

सुषमा स्वराज राजनीति का अमिट आलेख हैं

07-Aug-2019

लेख : ललित गर्ग 

पूर्व केन्द्रीय विदेश मंत्री एवं भारतीय राजनीति की संभावनाओं भरी उष्मा सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में निधन हो गया। मंगलवार की शाम दिल्ली के एम्स में उन्होंने दिल का दौरा पड़ने से अन्तिम सांस ली और अनन्त की यात्रा पर प्रस्थान कर गयी। उनका निधन न केवल भाजपा बल्कि भारतीय राजनीति के लिए दुखद एवं गहरा आघात है। उनका असमय देह से विदेह हो जाना सभी के लिए संसार की क्षणभंगुरता, नश्वरता, अनित्यता, अशाश्वता का बोधपाठ है। वे कुछ समय से अस्वस्थ्य चल रही थी।

उनका निधन एक युग की समाप्ति है। भाजपा के लिये एक बड़ा आघात है, अपूरणीय क्षति है। आज भाजपा जिस मुकाम पर है, उसे इस मुकाम पर पहुंचाने में जिन लोगों का योगदान है, उनमें सुषमाजी  अग्रणी हैं। वे भारतीय राजनीति की सतरंगी रेखाओं की सादी तस्वीर थी। उन्हें हम भारतीयता एवं भारतीय राजनीति का ज्ञानकोष कह सकते हैं, वे चित्रता में मित्रता की प्रतीक थी तो गहन मानवीय चेतना की चितेरी जुझारु, नीडर, साहसिक एवं प्रखर व्यक्तित्व थी।  

सुषमा स्वराज भारतीय राजनीति का एक आदर्श चेहरा थी। उन्होंने केन्द्रीय मंत्राी के अपने कार्यकाल के दौरान, कई नए अभिनव दृष्टिकोण, राजनैतिक सोच और कई योजनाओं की शुरुआत की तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन में सुधार किया, उनमें जीवन में आशा का संचार किया। पिछली बार वे नरेन्द्र मोदी सरकार में एक सशक्त एवं कद्दावर मंत्री थी। भाजपा में वे मूल्यों की राजनीति करने वाली नेता, कुशल प्रशासक, योजनाकार थी। दिल्ली की राजनीति में भी उनका महत्वपूर्ण स्थान था। यह महज संयोग ही है कि एक महीने से भी कम समय में दिल्ली ने अपने दो पूर्व महिला मुख्यमंत्रियों को खो दिया है। 20 जुलाई को दिल्ली की सबसे लंबे अंतराल तक मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित का निधन हुआ तो महज दो हफ्ते बाद दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज भी चल बसीं। 

14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला कैंट में जन्मी सुषमा स्वराज ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 के दशक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी। उनके पिता हरदेव शर्मा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख सदस्य थे। अम्बाला छावनी के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और राजनीतिक विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई करने के बाद सुषमाजी ने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से कानून की डिग्री ली। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1973 में सुषमाजी ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी वकालत की प्रैक्टिस शुरू की। जुलाई 1975 में उनका विवाह सुप्रीम कोर्ट के ही सहकर्मी स्वराज कौशल से हुआ।

आपातकाल के दौरान सुषमाजी ने जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। आपातकाल के बाद वह जनता पार्टी की सदस्य बन गयीं। इसके बाद 1977 में पहली बार सुषमाजी ने हरियाणा विधानसभा का चुनाव जीता और महज 25 वर्ष की आयु में चैधरी देवीलाल सरकार में राज्य की श्रम मंत्री बन कर सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बनने की उपलब्धि हासिल की।

दो साल बाद ही उन्हें राज्य जनता पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। 80 के दशक में भारतीय जनता पार्टी के गठन पर सुषमाजी भाजपा में शामिल हो गयीं। वह अंबाला से दोबारा विधायक चुनी गयीं और बीजेपी-लोकदल सरकार में शिक्षा मंत्री बनाई गयीं। वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी। हालांकि दिसंबर 1998 में उन्होंने राज्य विधानसभा सीट से इस्तीफा देते हुए राष्ट्रीय राजनीति में वापसी की और 1999 में कर्नाटक के बेल्लारी से कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरीं लेकिन वे हार गयीं। फिर साल 2000 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद के रूप में संसद में वापस लौट आयी। वाजपेयी की केंद्रीय मंत्रिमंडल में वे फिर से सूचना प्रसारण मंत्री बनाई गयीं। बाद में उन्हें स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और संसदीय मामलों का मंत्री बनाया गया।

2009 में जब सुषमा स्वराज मध्य प्रदेश के विदिशा से लोकसभा पहुंची तो अपने राजनीतिक गुरु लालकृष्ण आडवाणी की जगह 15वीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाई गयीं। 2014 तक वे इसी पद पर आसीन रहीं। 2014 में वे दोबारा विदिशा से जीतीं और मोदी मंत्रिमंडल में भारत की पहली पूर्णकालिक विदेश मंत्री बनाई गयीं। प्रखर और ओजस्वी वक्ता, प्रभावी सांसद और कुशल प्रशासक मानी जाने वाली सुषमा स्वराज अपने समय में वाजपेयीजी के बाद सबसे लोकप्रिय ओजस्वी वक्ता थीं। वे बीजेपी की एकमात्र नेता हैं, जिन्होंने उत्तर और दक्षिण भारत, दोनों क्षेत्र से चुनाव लड़ा है। वे भारतीय संसद की ऐसी अकेली महिला नेता हैं जिन्हें असाधारण सांसद चुना गया।

वह किसी भी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता भी थीं। सात बार सांसद और तीन बार विधायक रह चुकी सुषमा स्वराज दिल्ली की पांचवीं मुख्यमंत्री, 15वीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, संसदीय कार्य मंत्री, केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और विदेश मंत्री रह चुकी हैं। बतौर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ट्विटर पर भी काफी सक्रिय रहती थीं। विदेश में फँसे लोग बतौर विदेश मंत्री उनसे मदद मांगते और हजारों संकट में फंसे लोगों को सुरक्षित भारत लाने का काम उन्होंने किया। चाहे पासपोर्ट बनवाने का काम ही क्यों न हो वे किसी को निराश नहीं करतीं। ट्विटर पर सक्रिय रहते हुए लोगों की मदद करना उन दिनों काफी चर्चा में रहा।

29 सितंबर 2018 को संयुक्त राष्ट्र में दिया सुषमाजी का भाषण खूब चर्चा में रहा। इसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को परिवार के सिद्धांत पर चलाने की वकालत की। इस भाषण में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ कई मौकों पर बातचीत शुरू हुई लेकिन ये रुक गयी तो उसकी वजह पाकिस्तान का व्यवहार है। सुषमाजी ने 2015 में भी संयुक्त राष्ट्र की महासभा में हिन्दी में भाषण दिया था और उस दौरान भी जम कर पाकिस्तान पर गरजीं थीं। तब उन्होंने पाकिस्तान को ‘आतंकवाद की फैक्ट्री’ कहकर संबोधित किया था। विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान लगातार यह भी खबर आती रही कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। दो साल बाद नवंबर 2018 में सुषमा ने यह एलान कर दिया था कि वे 2019 का चुनाव नहीं लड़ेंगी। दो दिन पहले खुद सुषमा ने अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने पर ट्वीट किया था और मोदी को बधाई दी।  

सुषमा स्वराज की भाषण शैली और वाकपटुता का कोई जोर नहीं था। जब वह बोलती थीं तो विपक्ष भी सन्न रह जाता था। उनके जवाब ऐसे होते थे, कि उसके काट के लिए विरोधी को सोचना पड़ता था। जब वह मनमोहन सरकार में विपक्ष की नेता थीं, तब उनके लोकसभा में दिये गये भाषण काफी लोकप्रिय हुए थे। उन्होंने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह के लिए शायराना अंदाज में तंज कसा था और कहा था- ‘तू इधर-उधर की बात न कर, ये बता कि काफिला क्यों लुटा? मुझे रहजनों से गिला नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है।’ वे सरल एवं सादगी पसंद भी थी। मौलिक सोच एवं राजनीतिक जिजीविषा के कारण उन्होंने पार्टी के लिये संकटमोचन की भूमिका भी निभाई। वे राजनीति में उलझी चालों को सुलझाने के लिये कई दफा राजनीतिक जादू दिखाती रही हैं। उनकी जादुई चालों की ही देन है कि वे अनेक महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रही हैं।

सुषमा स्वराज का निधन एक आदर्श एवं बेबाक सोच की राजनीति का अंत है। वे सिद्धांतों एवं आदर्शों पर जीने वाले व्यक्तियों की शंृखला की प्रतीक थी। उनके निधन को राजनैतिक जीवन में शुद्धता की, मूल्यों की, राजनीति की, आदर्श के सामने राजसत्ता को छोटा गिनने की या सिद्धांतों पर अडिग रहकर न झुकने, न समझौता करने की समाप्ति समझा जा सकता है। उन्होंने पांच दशक तक सक्रिय राजनीति की, अनेक पदों पर रही, पर वे सदा दूसरों से भिन्न रही। घाल-मेल से दूर। भ्रष्ट राजनीति में बेदाग। विचारों में निडर। टूटते मूल्यों में अडिग। घेरे तोड़कर निकलती भीड़ में मर्यादित। उनके जीवन से जुड़ी विधायक धारणा और यथार्थपरक सोच ऐसे शक्तिशाली हथियार थे जिसका वार कभी खाली नहीं गया। वे जितनी राजनीतिक थी, उससे अधिक मानवीय एवं सामाजिक थी। 

भारतीय राजनीति की वास्तविकता है कि इसमें आने वाले लोग घुमावदार रास्ते से लोगों के जीवन में आते हैं वरना आसान रास्ता है- दिल तक पहुंचने का। हां, पर उस रास्ते पर नंगे पांव चलना पड़ता है। सुषमाजी इसी तरह नंगे पांव चलने वाली एवं लोगों के दिलों पर राज करने वाली राजनेता थे, उनके दिलो-दिमाग में दिल्ली ही नहीं समूचे देश की जनता हर समय बसी रहती थी। काश ! सत्ता के मद, करप्शन के कद, व अहंकार के जद्द में जकड़े-अकड़े रहने वाले राजनेता उनसे एवं उनके निधन से बोधपाठ लें। निराशा, अकर्मण्यता, असफलता और उदासीनता के अंधकार को उन्होंने अपने आत्मविश्वास, साहसिकता, कर्मठता और जीवन के आशा भरे दीपों से पराजित किया। 

सुषमा स्वराज भाजपा की एक नारीरत्न थी। वे भारतीय संस्कृति की प्रतीक आदर्श महिला थी और यह भारतीय संस्कृति उनमें बसी थी। उनका सम्पूर्ण जीवन अभ्यास की प्रयोगशाला थी। उनके मन में यह बात घर कर गयी थी कि अभ्यास, प्रयोग एवं संवेदना के बिना किसी भी काम में सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने अभ्यास किया, दृष्टि साफ होती गयी और विवेक जाग गया। उन्होंने हमेशा अच्छे मकसद के लिए काम किया, तारीफ पाने के लिए नहीं। खुद को जाहिर करने के लिए जीवन जीया, दूसरों को खुश करने के लिए नहीं। उनके जीवन की कोशिश रही कि लोग उनके होने को महसूस ना करें। बल्कि उन्होंने काम इस तरह किया कि लोग तब याद करें, जब वे उनके बीच में ना हों। इस तरह उन्होंने अपने जीवन को एक नया आयाम दिया और जनता के दिलों पर अमिट छाप छोडते हुए निरन्तर आगे बढ़ी। वे भारतीय राजनीति का एक अमिट आलेख हैं।  

सुषमा स्वराज एक ऐसा आदर्श राजनीतिक व्यक्तित्व हैं जिन्हें सेवा और सुधारवाद का अक्षय कोश कहा जा सकता है। उनका आम व्यक्ति से सीधा संपर्क रहा। यही कारण है कि आपके जीवन की दिशाएं विविध एवं बहुआयामी रही हैं। आपके जीवन की धारा एक दिशा में प्रवाहित नहीं हुई, बल्कि जीवन की विविध दिशाओं का स्पर्श किया। यही कारण है कि कोई भी महत्त्वपूर्ण क्षेत्र आपके जीवन से अछूता रहा हो, संभव नहीं लगता। आपके जीवन की खिड़कियाँ राष्ट्र एवं समाज को नई दृष्टि देने के लिए सदैव खुली रही। इन्हीं खुली खिड़कियों से आती ताजी हवा के झोंकों का अहसास भारत की जनता सुदीर्घ काल तक करती रहेगी। 

सुषमाजी को अलविदा नहीं कहा जा सकता, उन्हें खुदा हाफिज़ भी नहीं कहा जा सकता, उन्हें श्रद्धांजलि भी नहीं दी जा सकती क्योंकि ऐसे व्यक्ति मरते नहीं। वे हमंे अनेक मोड़ों पर राजनीति में नैतिकता का संदेश देते रहेंगे कि घाल-मेल से अलग रहकर भी जीवन जिया जा सकता है। निडरता से, शुद्धता से, स्वाभिमान से।


धारा 370 राज – नीति का मामला इसे मजहबी चश्मे से देखना बेमानी : सय्यद अशरफ

धारा 370 राज – नीति का मामला इसे मजहबी चश्मे से देखना बेमानी : सय्यद अशरफ

06-Aug-2019

नई दिल्ली : आल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष एवं वर्ल्ड सूफी फोरम के चेयरमैन हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने धारा 370 के मसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी तरह राज की नीति का मामला है इसे सांप्रदायिक चश्मे से देखना बेईमानी होगी।

उन्होंने कहा कि आम भारत के मुसलमानों का संविधान के इस प्रावधान से कोई सरोकार नहीं है ,हां यह कश्मीर में रहने वाले भारतीयों के लिए एक भावनात्मक मुद्दा ज़रूर बन गया है ,अब लोगों को धारा 370 पर भ्रम नहीं फैलाना चाहिए और न ही सोशल मीडिया के माध्यम से इसे सांप्रदायिक रूप से पेश किया जाना चाहिए।

हज़रत ने कहा कि इससे पहले भी धारा 370 में कई संशोधन किए गए हैं और अभी तक जितनी खबर आ रही है कि धारा 370 को पूरी तरह अभी भी खतम नहीं किया गया है बल्कि उसका एक हिस्सा अभी भी लागू है। हज़रत ने कहा कि हम दुआ करते हैं कि कश्मीर में शांति स्थापित हो ।खूबसूरत वादी जो बारूद की बू से खराब हो रही है वहां अमन कायम हो ,लोगों के दिलों से खौफ निकले और विकास हो। हालांकि इसे जिस तरह रहस्य बनाकर किया गया इसको लेकर लोगों के मन में संदेह है,यदि इसपर विचार किया जाता तो कश्मीर में रहने वाले भारतीयों के मध्य और भी बेहतर संदेश जाता।

कश्मीर में इस वक़्त जिस तरह का माहौल बना हुआ है जल्द ही वहां हालत सामान्य हों और लोग बहकावे में न आएं , मोहब्बत के परवानों ,सूफी संतों की सरजमीन को आतंकवाद के नासूर से आज़ादी मिले।अगर ऐसा होता है तो यह मुल्क के लिए बहुत अच्छा होगा।उन्होंने कश्मीर की आवाम से भी धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी के बहकावे में न आएं क्योंकि अब तक लोग सिर्फ इस्तेमाल करते आएं है।