जासूसी के आरोप में  पाकिस्तानी जनरल को आजीवन कारावास

जासूसी के आरोप में पाकिस्तानी जनरल को आजीवन कारावास

31-May-2019

इस्लामाबादः इस्लामाबाद के एक सैन्य बयान में गुरुवार को कहा गया है कि पाकिस्तान की सेना ने जासूसी के आरोप में एक जनरल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है और एक ब्रिगेडियर और एक नागरिक अधिकारी को मृत्युदंड का आदेश दिया है.

बयान में कहा गया है कि एक बंद दरवाजे में सैन्य ट्रायल के बाद, सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने ‘जासूसी (और) विदेशी एजेंसियों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा की संवेदनशील जानकारी लीक करने के लिए तीनों की सजा का समर्थन किया.

जानकारी के अनुसार सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल जावेद इकबाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जिसका मतलब है कि वह पाकिस्तानी कानून के तहत 14 साल जेल की सजा काटेंगे. एक सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर राजा रिज़वान के साथ सेना के संगठन द्वारा नियुक्त एक नागरिक चिकित्सक वसीम अकरम के साथ मौत की सजा सुनाई गई है.
सेना ने उन सूचनाओं के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी जो कथित रूप से तीनों द्वारा लीक की गई थीं या कहें कि इसका खुलासा किसने किया था. दो सैन्य अधिकारी जिनके खिलाफ मामला शुरू होने से पहले ही वे सेवानिवृत्त हो गये थे इस बारे में कुछ साफ नहीं है.


राहुल गांधी को इस्तीफा नहीं सख़्त फैसले लेने की जरूरत है।

राहुल गांधी को इस्तीफा नहीं सख़्त फैसले लेने की जरूरत है।

30-May-2019

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद परेशानी और संकट से जूझ रही कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी इस्तीफा देने पर अड़े हुए हैं। कई राज्यों में सत्ता पर काबिज कांग्रेस की सरकारों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

इसके बावजूद वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर का कहना है कि पार्टी अभी जिंदा और सक्रिय है। केरल और पंजाब में पार्टी का प्रदर्शन यही साबित करता है। एक न्यूज एजेंसी को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि अभी कांग्रस की श्रद्धांजलि लिखने का समय नहीं आया। सही कहा चुनाव परिणाम क्या रहा कैसे आया इसमें किसका योगदान है सबको मालूम है।

कांग्रेस के लिए यह समय अपने जख्म संभालने का नहीं, अपनी हार पर दुःखी होने का नहीं, बल्कि अगले 5-6 महीने में महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड सहित विभिन्न राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटने का है। 

थरूर ने राहुल गांधी को कांग्रेस का नेतृत्व करने के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति बताया। थरूर ने यह भी कहा कि इस समय केवल कांग्रेस ही भाजपा का विश्वसनीय विकल्प है। इस संदेश को नागरिकों तक ले जाया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसा राहुल गांधी के नेतृत्व में किया जाएगा। नेहरू-गांधी परिवार ने आजादी के बाद पार्टी को आकार और मार्गदर्शन देने में बड़ा योगदान दिया है। इसके चलते उन्हें पार्टी में गहरा सम्मान और ताकत प्राप्त है। वे अब भी पार्टी को काफी योगदान दे सकते हैं।

बुद्धिजीवी योगेंद्र यादव के ‘कांग्रेस को मर जाना चाहिए’ वाले बयान पर थरूर ने कहा कि कांग्रेस जिस दृष्टिकोण और मुद्दों पर खड़ी है, वह देश का भविष्य हैं। मतदाताओं ने कांग्रेस को वोट के लिए क्यों नहीं चुना, इसके लिए पार्टी को समझना होगा कि इसमें उनके कौन से आर्थिक व निजी हित थे। एक सवाल यह भी है कि जब जनता रैलियों में नहीं आई तो वोट कैसे दिया।

थरूर ने कहा कि निश्चित रूप से धार्मिक ध्रुवीकरण एक बड़ी वजह है, लेकिन यही एक वजह नहीं है। मोदी की छवि ने कुछ मतदाताओं को प्रभावित किया है। वे मानते हैं कि मोदी ही उन्हें दुश्मनों से बचा सकते हैं।

लेकिन सभी विपक्षी पार्टियों विशेष रूप से कांग्रेस को चुनाव परिणाम भूलकर आगे की रणनीति पर काम करना चाहिए। कांग्रेस को जरुरत है कि वह अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर नजर दौड़ाएं क्योंकि ज्यादातर जगह वरिष्ठ नेता इंसाफ से काम नहीं करते। वरिष्ठ नेताओं से ज्यादा नवजवानों को जोड़ने की जरूरत है। कांग्रेस को चाहिए कि वह क्षेत्रीय लोगों को आगे बढाये क्योंकि वरिष्ठ नेता नये लोगों को ज्यादा महत्व नहीं देते हैं। क्षेत्रीय स्तर पर नेता पैदा करने की जरूरत है। पार्टी हाईकमान को चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा शहरों में जाकर क्षेत्रीय नेताओं के साथ जनता के बीच संपर्क करें।

राहुल गांधी को चाहिए कि इस वक़्त इस्तीफे के बारे में ना सोचकर कांग्रेस के संगठन के बारे में विचार विमर्श करें। कांग्रेस के आगे आने के लिए संगठन का मजबूत होना बहुत जरूरी है।
 

सैय्यद एम अली तक़वी पत्रकार (हम्दे मुल्क उर्दू)
           (The Revolution News)


एक और बीजेपी विधायक ने गांधी के हत्यारे गोडसे को बताया राष्ट्रभक्त

एक और बीजेपी विधायक ने गांधी के हत्यारे गोडसे को बताया राष्ट्रभक्त

29-May-2019

मध्य प्रदेश के इंदौर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक उषा ठाकुर ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को ‘राष्ट्रभक्त’ बताया है। उन्होंने नाथूराम गोडसे की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रवादी हैं और उन्होंने जीवनभर देश की चिंता की है।

भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने कहा कि, ”नाथूराम गोडसे राष्ट्रवादी हैं, उन्होंने जीवनभर देश की चिंता की। उस समय क्या काल और परिस्थिति रही होगी जो उन्होने गांधी की हत्या का फैसला लिया। हमे इस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।” उषा ठाकुर के इस बयान का एक वीडियो भी सामने आया है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में दिख रहा है कि जब उनसे प्रज्ञा ठाकुर के गोडसे पर दिया बयान पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि संगठन भी स्पष्ट कर चुका कि वो उनका व्यक्तिगत बयान था। इस पर जब ऊषा ठाकुर से पूछा गया कि आप गोडसे के बारे में क्या मानती हैं तो इसका जवाब देते हुए उन्होंने हमें सोचना होगा कि एक व्यक्ति जीवनभर राष्ट्र की चिंता करता था तो वो कौन सी काल-परिस्थिति थी जिसकी वजह से उसने ऐसा कदम उठाया। विधायक ने आगे कहा कि हमें अब इस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

बता दें कि इससे पहले लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रज्ञा ठाकुर ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था। उन्होंने कहा था कि, ”नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, हैं और रहेंगे। गोडसे को आतंकी बोलने वाले खुद के गिरेबान में झांक कर देखें। अबकी बार चुनाव में ऐसा बोलने वालों को जवाब दे दिया जाएगा।”

साभार : jantakareporter से 


पानी का संकट हमारी पैदा की हुई समस्या है-तक़वी

पानी का संकट हमारी पैदा की हुई समस्या है-तक़वी

29-May-2019

आज देश में पानी का संकट खुल कर दिखाई देने लगा है। दुनिया के कई भागों में खासकर विकासशील देशों में भयंकर जलसंकट है और अनुमान है कि 2025 तक विश्व की आधी जनसंख्या इस जलसंकट से दो-चार होगी। जल विश्व अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आज पूरे विश्व में पेयजल की कमी का संकट मँडरा रहा है। कहीं यह गिरते भू-जल स्तर के रूप में है तो कहीं नदियों के प्रदूषित पानी के रूप में और कहीं तो सूखते, सिमटते तालाब और झील के रूप में। इसका कारण है, इन स्रोतों से पानी का भारी दोहन किया जाना। पानी के संरक्षित रखने की जरूरत को तो छोड़ ही दिया गया है। पूरे विश्व के यूरोप के प्रभाव में आने के बाद से एक ही दर्शन सामने आयी कि प्रकृति में जो भी चीजें उपलब्ध हैं उनका सिर्फ दोहन करो।

पेयजल का प्रत्यक्ष संकट अधिकतर तीसरी दुनिया के देशों में है, क्योंकि भारी कीमत देकर बाहर से जल मँगाने की इनकी आर्थिक स्थिति नहीं है। दूसरे विभिन्न औद्योगिक इकाइयों द्वारा भी भू-जल का जमकर दोहन किया गया और इनसे नदियाँ भी प्रदूषित हुईं। पिछली सदी में अफ्रीका को विश्व का फलोद्यान कहा जाता था। परन्तु आज 19 अफ्रीकी देश पेयजल से वंचित हैं। इंसान बिना पानी के तीन दिन भी जिन्दा नहीं रह सकता। पृथ्वी के कई भू-भाग पेय जल के संकट से गुजर रहे हैं।भूमण्डल की गर्मी बढ़ने के साथ-साथ पृथ्वी का जल तल 3 मीटर प्रतिवर्ष की दर से गिर रहा है और इस समय प्रतिवर्ष 160 अरब क्यूबिक मीटर की कमी दर्ज की गई है। बदलता पर्यावरण कई स्थानों को सूखे में तब्दील कर चुका है।

भारत में भी पेयजल का संकट कई तरह से उत्पन्न हो चुका है। दिल्ली में पानी की किल्लत के चलते पानी हरियाणा से मँगाया जाता है। यहाँ यमुना का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है, साथ ही भू-जल स्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है। जाड़े में ही यहाँ पानी का ऐसा संकट है कि दिल्ली में रहने वाले मध्यम वर्ग के लोग रोजाना पानी खरीद कर पी रहे हैं।

मुम्बई में तो खारे पानी का ही संकट उत्पन्न हो गया है। भूगर्भीय मीठा पानी लगभग समाप्त होने के कगार पर है। मुम्बई में जमीन की भीतरी बनावट कुछ ऐसी है कि बारिश का पानी एक निर्धारित सीमा तक ही जमीन के भीतर तैरता रहता है,जबकि ज्यादा गहराई में खारा पानी पाया जाता है। विश्व के सबसे अधिक वर्षा के क्षेत्र चेरापूँजी तक में भी पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया।

अधिकांश शहरों में ट्यूबवेल के माध्यम से ही पीने का पानी उपलब्ध कराया जाता है। इन ट्यूबवेलों के द्वारा भारी मात्रा में भूमिगत जल को बाहर निकाला जाता है और यह पानी पूरे शहर की पक्की नालियों के द्वारा शहर से बाहर चला जाता है। मतलब यह कि भूमिगत जल के केवल दोहन का ही ध्यान है, घटते जल स्तर की चिंता नहीं। शहरों में जो बड़े और छोटे तालाब थे उन्हें भी भरकर बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी कर दी गई हैं।

सरकार का ध्यान इस तरफ नहीं है। सिर्फ कागजी कार्यवाही कर लेने से ही समस्या हल नहीं होगी। आज हम पेड़ काटते जा रहे हैं। वातावरण में आक्सीजन कहां से आयेगी। ज़मीन पक्की करते जा रहे हैं। बरसात का पानी कहां जायेगा। पेड़ और इंसान का बहुत गहरा रिश्ता है और हम इसको तोड़ रहे हैं।

इंसान को पानी मिले या ना मिले मगर घर, गाड़ी, सड़क धोना जरूरी हो गया नतीजतन पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। भारत में जागरूकता की कमी है। सरकार को चाहिए कि वह नियम बनाए कि हर घर के बाहर दो पेड़ घर का मालिक जरूर लगाये अन्यथा उसके घर का असेसमेंट रद्द कर दिया जाये। सरकार को भी चाहिए कि हर शहर में सड़क के दोनों तरफ पेड़ लगाए इससे हमारी कई समस्याओं का समाधान होगा। तापमान कम होगा, खूबसूरती बढ़ेगी, बरसात में पानी जड़ों के सहारे ज़मीन में पहुंचेगा। जनता से भी निवेदन है कि इस काम के लिए आगे आयें सरकार की पहल का इंतेज़ार ना करें।

सैय्यद एम अली तक़वी, पत्रकार (हम्दे मुल्क उर्दू) (The Revolution News) 


सूरत में हुए हादसे के बहाने जानिए सीरत अपनी !

सूरत में हुए हादसे के बहाने जानिए सीरत अपनी !

27-May-2019

श्रुति अग्रवाल की कलम से .......

"कुछ विषय ऐसे होते हैं जिनपर लिखना खुद की आत्मा पर कुफ्र तोड़ने जैसा है, सूरत की बिल्डिंग में आग...21 बच्चों की मौत...आग और घुटन से घबराए बच्चों को इससे भयावह वीडियो आज तक नहीं देखा....इससे ज्यादा छलनी मन और आत्मा आज तक नहीं हुई....फिर भी लिखूंगी...क्योंकि हम सब गलत हैं, सारे कुएं में भांग पड़ी हुई है। हमने किताबी ज्ञान में ठूंस दिया बच्चों को नहीं सिखा पाए लाइफ स्किल। नहीं सिखा पाए डर पर काबू रख शांत मन से काम करना।"

मम्मा डर लग रहा है...एग्जाम के लिए सब याद किया था लेकिन एग्जाम हॉल में जाकर भूल गया...कुछ याद ही नहीं आ रहा था। पांव नम थे...हाथों में पसीना था...आप दो मिनिट उसे दुलारते हैं...बहलाने की नाकाम कोशिश करते हैं फिर पढ़ लो- पढ़ लो- पढ़ लो की रट लगाते हैं। सुबह 8 घंटे स्कूल में पढ़कर आए बच्चे को फिर 4-5 घंटे की कोचिंग भेज देते हैं। जिंदगी की दौड़ का घोड़ा बनाने के लिए, असलियत में हम उन्हें चूहादौड़ का एक चूहा बना रहे हैं। नहीं सिखा पा रहे जीने का तरीका- खुश रहने का मंत्र...साथ ही नहीं सिखा पा रहे लाइफ स्किल। विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और शांतचित्त होकर जीवन जीने की कला नहीं सिखा पा रहे हैं ना और इसके लिए सिर्फ और सिर्फ हम पालक और हमारा समाज जिम्मेदार है।

आयुष को पांच साल की उम्र में मैं न्यूजीलैंड ले गई थी...9 साल की उम्र में वापस इंडिया ले आई थी...वहां उसे नर्सरी क्लास से फस्टटेड से लेकर आग लगने पर कैसे खुद का बचाव करें...फीलिंग सेफ फीलिंग स्पेशल ( चाइल्ड एब्यूसमेंट), पानी में डूब रहे हो तो कैसे खुद को ज्यादा से ज्यादा देर तक जीवित और डूबने से बचाया जा सके.... जैसे विषय हर साल पढ़ाए जाते थे। फायरफाइटिंग से जुड़े कर्मचारी और अधिकारी हर माह स्कूल आते थे। बच्चों को सिखाया जाता था विपरीत परिस्थितियों में डर पर काबू रखते हुए कैसे एक्ट किया जाए। ह्यूमन चेन बनाकर कैसे एक-दूसरे की मदद की जाए.....हेल्पिंग हेंड से लेकर खुद पर काबू रखना ताकि मदद पहुंचने तक आप खुद को बचाए रखें....

हम नहीं सिखा पा रहे यह सब....नहीं दे पा रहे बच्चों को लाइफ स्किल का गिफ्ट...विपरीत परिस्थितियों से बचना....कल की ही घटना देखिए...हमारे बच्चे नहीं जानते थे कि भीषण आग लगने पर वे कैसे अपनी और अपने दोस्तों की जान बचाएं....नहीं सीखा हमारे बच्चों ने थ्री-G का रूल ( गेट डाउन, गेट क्राउल, गेट आऊट ) जो 3 साल की उम्र से न्यूजीलैंड में बच्चों को सिखाया जाता है, आग लगे तो सबसे पहले झुक जाएं...आग हमेशा ऊपर की ओर फैलती है। गेट क्राउल...घुटनों के बल चले...गेट आऊट...वो विंडों या दरवाजा दिमाग में खोजे जिससे बाहर जा सकते हैं, उसी तरफ आगे बढ़े, जैसा कुछ बच्चों ने किया, खिड़की देख कर कूद लगा दी... भले ही वे अभी हास्पिटल में हो  लेकिन जिंदा जलने से बच गए। लेकिन यहां भी वे नहीं समझ पा रहे थे कि वे जो जींस पहने हैं...वह दुनिया के सबसे मजबूत कपड़ों में गिनी जाती है...कुछ जींस को आपस में जोड़कर रस्सी बनाई जा सकती है। नहीं सिखा पाए हम उन्हें कि उनके हाथ में स्कूटर-बाइक की जो चाबी है उसके रिंग की मदद से वे दो जींस को एक रस्सी में बदल सकते हैं...काफी सारी नॉट्स हैं जिन्हें बांधकर पर्वतारोही हिमालय पार कर जाते हैं फिर चोटी से उतरते भी हैं...वही कुछ नाट्स तो हमें स्कूलों में घरों में अपने बच्चों को सिखानी चाहिए। सूरत हादसे में बच्चे घबराकर कूद रहे थे...शायद थोड़े शांत मन से कूदते तो इंज्युरी कम होती।

एक-एक कर वे बारी-बारी जंप कर सकते थे। उससे नीचे की भीड़ को भी बच्चों को कैच करने में आसानी होती। मल्टीपल इंज्युरी कम होती, हमारे अपने बच्चों को। आज आपको मेरी बातों से लगेगा...ज्ञान बांट रही हूं...लेकिन कल के हादसे के वीडियो को बार-बार देखेंगे तो समझ में आएगा एक शांतचित्त व्यक्ति ने बच्चों को बचाने की कोशिश की। वो दो बच्चों को बचा पाया लेकिन घबराई हुई लड़की खुद को संयत ना रख पाई और .... अच्छे से याद है, पापाजी कहते थे मोना कभी आग में फंस जाओ तो सबसे पहले अपने ऊपर के कपड़े उतार कर फेंक देना, मत सोचना कोई क्या कहेगा क्योंकि ऊपर के कपड़ों में आग जल्दी पकड़ती है। जलने के बाद वह जिस्म से चिपक कर भीषण तकलीफ देते हैं...वैसे ही यदि पानी में डूब रही हो तो खुद को संयत करना...सांस रोकना...फिर कमर से नीचे के कपड़े उतार देना क्योंकि ये पानी के साथ मिलकर भारी हो जाते हैं, तुम्हें सिंक (डुबाना) करेंगे। जब जान पर बन आए तो लोग क्या कहेंगे कि चिंता मत करना...तुम क्या कर सकती हो सिर्फ यह सोचना। 

जो बच्चे बच ना पाए, उनके माँ बाप का सोच कर दिल बैठा जा रहा है। मेरे एक सीनियर साथी ने बहुत पहले कहा था...बच्चा साइकिल लेकर स्कूल जाने लगा है, जब तक वह घर वापस नहीं लौट आता...मन घबराता है। उस समय मैं उनकी बात समझ नहीं पाई थी...जब आयुष हुए तब समझ आया आप दुनिया फतह करने का माद्दा रखते हो अपने बच्चे की खरोच भी आपको असहनीय तकलीफ देती है...इस लेख का मतलब सिर्फ इतना ही है कि हम सब याद करे हिंदी पाठ्यपुस्तक की एक कहानी...

जिसमें एक पंडित पोथियां लेकर नाव में चढ़ा था...वह नाविक को समझा रहा था 'अक्षर ज्ञान- ब्रह्म ज्ञान' ना होने के कारण वह भवसागर से तर नहीं सकता...उसके बाद जब बीच मझधार में उनकी नाव डूबने लगती है तो पंडित की पोथियां उन्हें बचा नहीं पाती। गरीब नाविक उन्हें डूबने से बचाता है, किनारे लगाता है। हम भी अपने बच्चों को सिर्फ पंडित बनाने में लगे हैं....उन्हें पंडित के साथ नाविक भी बनाइए जो अपनी नाव और खुद  का बचाव स्वयं कर सकें। सरकार से उम्मीद लगाना छोड़िए ... चार जांच बैठाकर, कुछ मुआवजे बांटकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। कुकुरमुत्ते की तरह उग आए कोचिंग संस्थान ना बदलेंगे। इस तरह के हादसे होते रहे हैं...आगे भी हो सकते हैं....बचाव एक ही है हमें


दो वर्ष पहले आदिवासियों के बीफ़ खाने के अधिकार पर लिखा था कथित पोस्ट, अब गिरफ्तार

दो वर्ष पहले आदिवासियों के बीफ़ खाने के अधिकार पर लिखा था कथित पोस्ट, अब गिरफ्तार

27-May-2019

हांसदा एक आदिवासी कार्यकर्ता और थियेटर कलाकार हैं. अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने आदिवासी समाज के लोगों द्वारा गोमांस खाने के अधिकार की बात की थी. हफिंगटन पोस्ट के अनुसार, जीतराई हांसदा के मामले को देखने वाली टीम के एक वकील ने बताया कि उनके द्वारा लिखे गए एक फेसबुक पोस्ट के लिए जून 2017 में उनके खिलाफ एक शिकायत दर्ज की गई थी.

अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर वकील ने कहा कि उन्हें शक है कि यह गिरफ्तारी जानबूझकर चुनावों के बाद की गई है क्योंकि चुनाव से पहले गिरफ्तारी करके भाजपा आदिवासियों को नाराज करके चुनावों में उनका वोट गंवाना नहीं चाहती थी. बता दें कि झारखंड में मुख्यमंत्री रघुबर दास के नेतृत्व में भाजपा की ही सरकार है. वहीं भाजपा ने राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से 12 में जीत दर्ज की है. 2017 में हांसदा के फेसबुक पोस्ट को लेकर की गई शिकायत की जांच करने के बाद इंस्पेक्टर अनिल सिंह ने उस पर एफआईआर दर्ज की थी.

जीतराई हांसदा के वकील का कहना है कि इससे पहले जब हांसदा को पुलिस स्टेशन बुलाया जाता था, तो पूछताछ के बाद छोड़ दिया जाता था, लेकिन शनिवार 25 मई को उनकी गिरफ़्तारी कर ली गई. उन्होंने कहा कि शनिवार से ही उन्हें हिरासत में रखा गया है. हांसदा ने अग्रिम जमानत याचिका भी दाखिल की थी लेकिन उसे खारिज कर दिया गया. जमशेदपुर के साकची पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि हांसदा ने एक फेसबुक पोस्ट लिखी है जिसमें कहा गया है कि भारत में आदिवासी समुदाय में गोमांस खाने और गाय के बलिदान की लंबी परंपरा रही है.

एफआईआर के अनुसार, उन्होंने कहा कि मांस का उपभोग करना उनका लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक अधिकार है. पोस्ट में यह भी कहा गया है कि वे गोमांस खाने पर भारत के कानूनों का विरोध करते हैं और उनका समुदाय देश के राष्ट्रीय पक्षी मोर भी खाता है. उन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करने की अनिच्छा भी व्यक्त की. हांसदा के खिलाफ धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने और लोगों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए आईपीसी की धारा 153 (ए), 295 (ए) और 505 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. इससे पहले 2017 में जीतराई हांसदा के खिलाफ दर्ज शिकायत का विरोध करते हुए आदिवासी परंपराओं के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था माझी परगना महल के प्रमुख दसमाथ हांसदा ने कॉलेज के वाइस चांसलर को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध किया था कि सांप्रदायिक संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की शिकायत के आधार पर उन्हें कॉलेज से न निकाला जाए.

 


जो लोकतंत्र जातिवाद मजहब समुदाय की बेड़ियों में कैद था उसे विकास ने आज़ाद करा लिया है

जो लोकतंत्र जातिवाद मजहब समुदाय की बेड़ियों में कैद था उसे विकास ने आज़ाद करा लिया है

26-May-2019

जातिवाद से आजाद होता देश का लोकतंत्र

2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम कई मायनों में ऐतिहासिक रहे।  इस बार के चुनावों की खास बात यह थी कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनाव परिणामों पर देश ही नहीं दुनिया भर की नज़रें टिकी थीं। और इन चुनावों के  परिणामों ने विश्व में जो आधुनिक भारत की नई छवि बन रही थी उस पर अपनी ठोस मोहर लगा दी है कि ये वो भारत है जिसका केवल नेतृत्व ही नहीं बदला बल्कि यहां का जनमानस भी बदला है उसकी सोच भी बदल रही है। ये वो भारत है जो केवल  बाहर से ही नहीं भीतर से भी बदल रहा है। इस भारत का  लोकतंत्र भी बदल रहा है। जो लोकतंत्र जातिवाद मजहब समुदाय की बेड़ियों में कैद था उसे विकास ने आज़ाद करा लिया है। इसकी बानगी दिखी नतीज़ों के बाद जब सेंसेक्स ने भी मोदी  सरकार की वापसी पर रिकॉर्ड  40000 की उछाल दर्ज की।

आज़ाद भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि किसी गैर कांग्रेस सरकार को दोबारा जनता ने सत्ता की बागडोर सौंप दी हो वो भी पिछली बार से ज्यादा बहुमत के साथ।  और आज़ाद भारत के इतिहास में कांग्रेस के साथ लगातार दूसरी बार ऐसा हुआ है कि  वो संसद में विपक्ष का प्रतिनिधित्व करने लायक संख्याबल भी नहीं जुटा पाई हो। कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन का विषय होना चाहिए कि उसका यह प्रदर्शन तो आपातकाल के बाद हुए चुनावों में भी नहीं था।1977 के  अपने उस सबसे बुरे दौर में भी कांग्रेस ने 152 सीटें जीती थीं। दरअसल इन पांच सालों में और खास तौर पर चुनावों के दौरान देश को अगर किसी ने निराश किया है तो कांग्रेस ने। क्योंकि इन पांच सालों में उसने अपने किसी भी काम से ना तो भाजपा को चुनौती दी और ना ही खुद को लोगों के सामने भाजपा अथवा मोदी के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए। वो अपनी परफॉर्मेंस सुधारने की कोशिश करने के बजाए भाजपा की खराब परफॉर्मेंस का इंतजार करती रही। शायद कांग्रेस ने राजनैतिक पंडितों के इस गणित पर भरोसा कर लिया था कि भाजपा 2014 में अपना सर्वश्रेष्ठ दे चुकी है और उसने हर राज्य में इतना अच्छा परफॉर्म कर लिया है कि वो अपने इस प्रदर्शन को किसी भी हालत में दोहरा नहीं सकती। और सत्ताविरोधी लहर के चलते उसकी सीटें हर राज्य में निश्चित ही कम होंगी। इसके अलावा  उत्तरप्रदेश में सपा बसपा का गठजोड़ उसे 15 - 20 सीटों तक समेट देगा। यह वाकई निराशाजनक है कि भाजपा की हार में से ही कांग्रेस अपनी जीत के रास्ते खोजती रही।   लेकिन वो भूल गई कि शॉर्टकटस से लंबे रास्ते तय नहीं होते और ना ही किसी की असफलता किसी की सफलता की वजह बन सकती है। सफलता तो नेक नियत और कठोर परिश्रम से हासिल होती है। इसलिए  देश की जनता खास तौर पर उत्तर प्रदेश की जनता को सलाम है कि उसने वोटबैंक की राजनीति करने वाले सभी राजनैतिक दलों को एक सकारात्मक संदेश दे दिया है।  उत्तरप्रदेश की जनता वाकई बधाई की पात्र है कि जिस राज्य में राजनैतिक दल दलितों यादवों मुसलमानों आदि के वोट प्रतिशत के हिसाब से अपना अपना वोट शेयर आंक कर अपनी सीटों का गणित लगाते थे उस प्रदेश में विकास और अपने काम के बल पर   अकेले भाजपा को 50% और कहीं कहीं तो 60% तक का वोट शेयर मिला। जबकि वोटबैंक की राजनीति करने वाले बुआ बबुआ का गठबंधन जो भाजपा को 20 सीटों के अंदर समेट रहा था वो खुद 15 पर सिमट गया। यह पहली बार हुआ कि वोटबैंक की राजनीति करने वाले हर दल को पूरे देश ने एक ही जवाब दिया। जो कांग्रेस एनआरसी के मुद्दे पर भाजपा को घेर रही थी उसे असम की जनता ने जवाब दे दिया। जो महबूबा मुफ्ती 370 हटाने पर कश्मीर में भारत के झंडे का अपमान करने की बात करती थीं उन्हें जम्मूकश्मीर की जनता ने जवाब दे दिया। जो ममता प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री मानने से ही इंकार कर रही थीं और उन्हें जेल में डालने की बात करती थीं उन्हें बंगाल की जनता ने जवाब दे दिया है। नोटबन्दी और जीएसटी पर सरकार को लगातार घेरने वाले विपक्ष को देश ने जवाब दिया। विश्व के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि जीएसटी लागू करने वाली किसी सरकार की सत्ता में वापसी हुई हो। इसलिए भाजपा की इस अभूतपूर्व विजय में मध्यम वर्ग का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। खुद प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि  देश के इतिहास में इतना मतदान पहली बार हुआ है। और आंकड़े बताते है कि जब जब मध्यम वर्ग ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है  मतदान का प्रतिशत बढ़ा है। दरअसल जो मध्यम वर्ग पहले वोटिंग के प्रति उदासीन रहता था उसने भी इस बार मतदान में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। जो राजनैतिक पंडित उज्ज्वला योजना आयुष्मान योजना प्रधानमंत्री आवास योजना शौचालय निर्माण जैसी योजनाओं के कारण केवल दलितों शोषितों वंचितों का जात और मजहब से ऊपर उठकर भाजपा के पक्ष में मतदान करने को ही भाजपा की जीत का एकमात्र कारण मान रहे हैं वो या तो नादानी वश कर रहे हैं या फिर स्वार्थवश ऐसा कह रहे है। 

लेकिन इस सब से परे इन नतीजों ने बहुत से पुराने मिथक तोड़े हैं तो कई नई उम्मीदें भी जगाई हैं। ये वो नतीजे हैं जिन्होंने चुनावों की परिभाषा ही बदल  दी। इन नतीजों ने बता  दिया कि चुनाव सीटों के अंकगणित का खेल नहीं बल्कि मतदाता का अपने नेता के ऊपर विश्वास के रसायन  से उपजे समीकरण हैं। इसलिए चुनावो में गणित की तर्ज पर दो और दो मिल चार कभी नहीं होते बल्कि दो और दो मिलकर बाईस होंगे या बैक फायर होकर शून्य बन जाएंगे यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है। जैसे जिस पिछले चुनावों में विपक्ष के लिए मोदी को चाय वाला और नीच कहना भारी पड़ गया तो इस बार चौकीदार चोर है के नारे लगवाना। झूठे नैरेटिव बना कर जो चोर न हो उसे चोर कहना जो भ्रष्ट ना हो उसे भृष्ट कहना जो ईमानदार है उसे बेईमान कहना विपक्ष को किस कदर  भारी पड़ने वाला है इसका अंदाज़ा शायद उन्हें भी नहीं था।

दरसअल स्वार्थ वंशवाद अवसरवाद की राजनीति को जनता अब समझने लगी है। इन चुनाव परिणामों से जनता ने जवाब दे दिया है कि जो काम करेगा वो ही राज करेगा। लेकिन विपक्ष की परेशानी यह है कि मोदी ने एक बहुत बड़ी रेखा खींच ली है और अफसोस की बात यह है कि उस रेखा की बराबरी करने की ताकत विपक्ष में हो ना हो लेकिन जज्बा नहीं है। शायद इसलिए वो लगातार मोदी की बनाई लकीर को छोटी करने में लगा है।
डॉ नीलम महेंद्र


ममता की पार्टी छोड़कर थामा था बीजेपी का दामन, कार्यकर्त्ता की गोली मारकर हत्या

ममता की पार्टी छोड़कर थामा था बीजेपी का दामन, कार्यकर्त्ता की गोली मारकर हत्या

25-May-2019

नादिया: पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के बाद भी हिंसा लगातार जारी है. जानकारी के अनुसार नादिया में भाजपा के एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गयी है. हत्या का आरोप टीएमसी कार्यकर्ताओं पर भाजपा ने लगाया है.

मामले की जानकारी के अनुसार यहां नादिया के चकदाह इलाके में शुक्रवार रात को  BJP कार्यकर्ता संतु घोष  की गोली मार दी गई जिसके बाद संतु घोष को घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वह हाल ही में TMC छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे।  BJP ने हत्या का आरोप TMC कार्यकर्ताओं पर लगाया है।


पुरी लोकसभा सीट से हारे संबित पात्रा

पुरी लोकसभा सीट से हारे संबित पात्रा

24-May-2019

ओडिशा की पुरी लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार संबित पात्रा को हार का सामना करना पड़ा। संबित पात्रा ने बिजू जनता दल (बीजेडी) के मौजूदा सांसद पिनाकी मिश्रा को कड़ी टक्कर दी, लेकिन अंत में उन्हें पराजय झेलनी पड़ी। पिनाकी मिश्रा ने 11,714 वोटों से जीत दर्ज की। 

पिनाकी मिश्रा को 5,38,321 वोट और संबित पात्रा को 5,26,607 वोट मिले। 2009 और 2014 लोकसभा चुनावों में इस सीट से पिनाकी मिश्रा ने आसानी से जीत दर्ज की थी, ऐसे में इस बार उन्हें भाजपा ने कड़ी टक्कर दी। 1998 से अभी तक इस सीट से बीजेडी ने ही जीत दर्ज की है। 1996 में इस सीट से पिनाकी मिश्रा ने कांग्रेस के टिकट से जीत दर्ज की थी।


दिल्ली के डिप्टी सीएम सिसोदिया ने चुनाव आयोग के खिलाफ दिया विवादित बयान !

दिल्ली के डिप्टी सीएम सिसोदिया ने चुनाव आयोग के खिलाफ दिया विवादित बयान !

21-May-2019

नई दिल्ली: दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर सोशल मीडिया पर आ रही कथित रिपोटरं पर चुनाव आयोग और मीडिया के खिलाफ मंगलवार को विवादित बयान दिया। सिसोदिया ने ट्विटर पर लिखा, झांसी, मेरठ, गाजीपुर, चंदौली और सारण हर जगह मतगणना केन्द्रों पर मशीनें बदली जा रही हैं लेकिन चुनाव आयोग और तथाकथित मीडिया मोदी के सामने नतमस्तक आंखों पर पट्टी बांधे घुटनों के बल बैठा है। 

जनता ने मोदी के खिलाफ वोट दिया है उसे मीडिया और चुनाव आयोग मिलकर बदल रहे हैं। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, फगवाड़ा में प्राइवेट कार में ईवीएम पहुंची मतगणना केन्द्र... चुनाव के दो दिन बाद चुनाव आयोग और मीडिया आज चुप है। इन मशीनों से मोदी चुनाव जीतेंगे और फिर हर बार की तरह खुद को पत्रकार कहने वाले लोग कहेंगे... हारे हुए लोग इवीएम का बहाना ले रहे हैं।


8 साल बाद अलग होंगे इमरान खान और अवंतिका !

8 साल बाद अलग होंगे इमरान खान और अवंतिका !

21-May-2019

सुपरस्टार आमिर खान के भांजे इमरान खान और उनकी पत्नी अवंतिका मलिक को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बता दें कि दोनो के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया और इसी कारण अवंतिका ने इमरान खान का घर छोड़ दिया है। जी हां इस समय वो अपने घर में आ चुकी हैं लेकिन दोनो के बीच विवाद का कारण किसी को भी नहीं पता चला है। बता दें कि अवंतिका और इमरान एक दूसरे के साथ करीब काफी सालों से हैं और 8 साल तो उनके शादी को ही हो चुके हैं। 

इमरान और अवंतिका ने 2011 में शादी की थी और उसके पहले काफी समय से एक दूसरे को डेट कर रहे थे। पता चला है कि इमरान और अवंतिका के दोस्त और परिवार इन दोनों के बीच विवाद को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि यह जोड़ी पहले की तरह नॉर्मल हो जाए। 


क्या पश्चिम बंगाल में इतनी सीटें जीत पायेगी बीजेपी जितना #एग्जिट पोल में दावा किया जा रहा है ?

क्या पश्चिम बंगाल में इतनी सीटें जीत पायेगी बीजेपी जितना #एग्जिट पोल में दावा किया जा रहा है ?

20-May-2019

लोकसभा चुनाव 2019 के आखिरी चरण का मतदान खत्म होते ही अब एग्जिट पोल का सिलसिला शुरू हो गया है। चुनाव सात चरणों में पूरा हुआ। 11 अप्रैल को पहले चरण का मतदान हुआ था और आखिरी दौर का मतदान 19 मई को समाप्त हुआ।।

अमर उजाला पर छपी खबर के अनुसार, तमाम न्यूज चैनलों और एजेंसियों की ओर से चुनाव नतीजे से पहले के अनुमान दिखाए जा रहे हैं। हम आपको बता रहे हैं विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल नतीजे, किस पार्टी कितनी सीटें मिलने का अनुमान है और कौन इस रेस में सबसे आगे दिख रहा है। भाजपा-सहयोगियों को 11 सीटें, कांग्रेस को दो और टीएमसी को 28 सीटें मिलने का अनुमान।
एबीपी-नीलसन
एबीपी-नीलसन एग्जिट पोल में भाजपा को 16, कांग्रेस को दो और टीएमसी को 24 सीटें मिलती दिख रही हैं।

रिपब्लिक भारत-जन की बात
रिपब्लिक भारत-जन की बात एग्जिट पोल में भाजपा को 18-26, कांग्रेस को 03 और टीएमसी को 13-21 सीटें मिलने का अनुमान है।

न्यूज 18
न्यूज 18 एग्जिट पोल में भाजपा को तीन से पांच, कांग्रेस को 0-1, टीएमसी को 36-38 सीटें मिल सकती हैं।

आजतक-एक्सिस
आजतक-एक्सिस एग्जिट पोल में भाजपा को 19-23, टीएमसी को 19-22 और कांग्रेस महज एक सीट मिलती दिख रही है।


चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे योगी सरकार के मंत्री मंच से भाजपा नेताओं को दी गाली

चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे योगी सरकार के मंत्री मंच से भाजपा नेताओं को दी गाली

18-May-2019

मऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सातवें चरण के चुनव प्रचार के अंतिम दिन मंच से खुलेआम भाजपा के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है। अब उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह भाजपा नेताओं को गाली देते और जूतों से मारने की बात कहते हुए नजर आ रहे हैं। ओमप्रकाश राजभर का आरोप है कि भाजपा नेता मतदाताओं में सुभासपा से गठबंधन को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। 

सातवें चरण के चुनव प्रचार के अंतिम दिन सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर मऊ की घोसी लोकसभा क्षेत्र के रतनपुरा में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मंच से कहा कि अभी एक चर्चा बड़ी तेजी से भारतीय जनता पार्टी के लोग फैला रहे हैं कि हम लोगों का (बीजेपी-एसबीएसपी का) गठबंधन है और महेंद्र (चुनाव) नहीं लड़ रहे हैं। उन्होंने सभा में उपस्थित लोगों से सवाल पूछते हुए कहा कि यहां जितने लोग हैं बताओ कि महेंद्र चुनाव लड़ रहे हैं कि नहीं लड़ रहे हैं? राजभर के इस सवाल का जवाब भीड़ 'लड़ रहे हैं' कहकर देती है। 

वीडियो में इसके बाद राजभर उग्र हो गए और कहा, 'अगर बीजेपी का नेता यह बोलते हुए मिल जाए तो जूता निकालकर उसको दस जूता मारो कि तुम नहीं लड़ रहे हो...।' इस दौरान राजभर बीजेपी नेताओं के लिए गाली का इस्तेमाल भी किया। राजभर ने आगे कहा, 'गाली निकलती है जबान से। इन बेईमानों (बीजेपी नेताओं) को शर्म नहीं लगती है।' बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन कर लड़ी सुभासपा ने प्रेदश की करीब तीन दर्जन सीटों पर प्रत्याशी उतारे है।  बता दें कि हाल ही में राजभर ने प्रदेश सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। उनकी पार्टी ने भी प्रदेश में बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ लिया है। 


कथित रेप के मामले फंसे टीवी ऐक्टर करण ओबेरॉय की जमानत अर्जी खारिज

कथित रेप के मामले फंसे टीवी ऐक्टर करण ओबेरॉय की जमानत अर्जी खारिज

17-May-2019

मुंबई : टीवी ऐक्टर करण ओबेरॉय के खिलाफ कथित रेप के मामले में मुंबई दिंडोशी सेशन कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्कों की लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। एक महिला की ओर से रेप की शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने ऐक्टर को अरेस्ट किया था। कहा जा रहा है कि ऐक्टर पर आरोप लगाने वाली महिला 2016 से ही उनका साथ रिलेशनशिप में थी।

यह मामला #MenToo मूवमेंट का भी हिस्सा बना है। ऐक्टर करण ओबेरॉय का दावा है कि वह निर्दोष हैं और महिला की ओर से उन्हें बेवजह फंसाया जा रहा है। कोर्ट में ओबेरॉय के वकील दिनेश तिवारी ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप बेतुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ था, वह सहमति से हुआ था। यही नहीं महिला और ऐक्टर के बीच किए गए टेक्स्ट मेसेज से भी यह बात साबित होती है। ओबेरॉय के वकील ने उनकी जमानत की मांग करते हुए कोर्ट से कहा था कि पीड़ित पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों से यह मामला रेप का नहीं बनता। 


प्रज्ञा सिंह ठाकुर अब महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को बताया देशभक्त

प्रज्ञा सिंह ठाकुर अब महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को बताया देशभक्त

16-May-2019

भोपाल : मालेगांव बम विस्फोट मामले में लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना कर चुकीं इस मामले में अभियुक्त और मध्य प्रदेश की भोपाल संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी की गोली मार कर हत्‍या करने वाले नाथूराम गोडसे को ‘देशभक्त’ बताकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया। बीजेपी उम्मीदवार ने कहा कि नाथूराम गोडसे देशभक्‍त थे, देशभक्‍त हैं और रहेंगे।

साध्वी प्रज्ञा का यह बयान मक्कल नीधि मैयम (एमएनएम) के संस्थापक और मशहूर अभिनेता कमल हासन के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि आजाद भारत का पहला ‘‘उग्रवादी हिंदू’’ था। वह महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे के संदर्भ में बात कर रहे थे। बीजेपी प्रत्‍याशी से कमल हासन के बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी।

पत्रकारों ने जब उनसे सवाल किया कि कमल हासन ने नाथूराम गोडसे को हिंदू आंतकवादी बताया था, इस बारे में वह क्या कहना चाहती हैं? इसके जवाब में प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, ‘नाथूराम गोडसे देशभक्त थे। देशभक्त हैं और देशभक्त रहेंगे। उन्हें हिंदू आतंकवादी बताने वाले लोग स्वयं के गिरेबान में झांककर देखें। अबकी बार चुनाव में ऐसे लोगों को जवाब दे दिया जाएगा।’

रविवार की रात एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए हासन ने कहा था कि वह एक ऐसे स्वाभिमानी भारतीय हैं जो समानता वाला भारत चाहते हैं और जहां तिरंगे के ‘‘तीन रंग’’ बरकरार रहें। विभिन्न धर्मों के संदर्भ में उन्होंने तिरंगे के तीन रंगों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं ऐसा इसलिए नहीं बोल रहा हूं कि यह मुस्लिम बहुल इलाका है, बल्कि मैं यह बात गांधी की प्रतिमा के सामने बोल रहा हूं। आजाद भारत का पहला उग्रवादी हिंदू था और उसका नाम नाथूराम गोडसे है। वहीं से इसकी (उग्रवाद) शुरुआत हुई।’’


ऑस्ट्रिया के प्राइमरी स्कूलों में हेडस्कार्फ बांध कर आने पर पाबंदी

ऑस्ट्रिया के प्राइमरी स्कूलों में हेडस्कार्फ बांध कर आने पर पाबंदी

16-May-2019

विएनाः ऑस्ट्रिया के सांसदों ने बुधवार को एक ऐसे कानून को मंजूरी दी जिसका मकसद प्राथमिक स्कूलों में हेडस्कार्फ (सिर ढकने वाला) को प्रतिबंधित करना है । हालांकि, इस कानून से सिखों का पटका और यहूदियों का किप्पा प्रभावित नहीं होगा ।

इस कदम का प्रस्ताव सत्तारूढ़ दक्षिण पंथी सरकार ने पेश किया था। मुसलमानों के प्रति भेद भाव पैदा करने के आरोपों से बचने के लिए इस कानून के मूलपाठ में लिखा हुआ है, ‘‘वैचारिक या धार्मिक रूप से प्रभावित कपड़े जो सिर ढंकने से जुड़े हैं।'' हालांकि गठबंधन सरकार के दोनों धड़ों मध्य-दक्षिणपंथी पीपुल्स पार्टी (ओईवीपी)तथा घोर-दक्षिणपंथी फ्रीडमपार्टी (एफपीओई) के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि यह कानून इस्लामिक पटके पर केन्द्रित है।

एफपीओई शिक्षा प्रवक्ता वेंडिलिन मोइल्जर ने बताया कि यह कानून ‘‘राजनीतिक इस्लाम के खिलाफ चेतावनी है'' वहीं ओईवीपी सांसद रुडोल्फ शच्नेर ने कहा कि लड़कियों को दमन से मुक्त करने के लिए यह कदम जरूरी था। सरकार का कहना है कि सिख लड़कों द्वारा सिर पर बांधा जाने वाला पटका अथवा यहूदियों का किप्पा इससे प्रभावित नहीं होगा।


रिश्वत कांड में फंसी हॉलीवुड एक्ट्रेस, हो सकती है 20 साल की जेल और करोड़ों का जुर्माना

रिश्वत कांड में फंसी हॉलीवुड एक्ट्रेस, हो सकती है 20 साल की जेल और करोड़ों का जुर्माना

15-May-2019

मीडिया रिपोर्ट से 

न्यूयॉर्क: अमेरिका में कॉलेजों में अपने बच्चों का दाखिला कराने के इच्छुक धनी अभिभावकों के रिश्वत कांड में ताजा नाम अमेरिकी अभिनेत्री फेलिसिटी हफमैन का है. अभिनेत्री ने एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में अपनी बेटी का दाखिला कराने के लिये रिश्वत देने का जुर्म को कबूल किया है.  कॉलेज रिश्वत कांड में ‘डेस्परेट हाउसवाइव्स' की पूर्व अभिनेत्री के साथ कई अमीर अमेरिकी अभिभावकों के नाम सामने आये हैं.

बोस्टन में संघीय न्यायाधीश इंदिरा तलवानी के सामने आंखों में आंसू भरकर हफमैन ने अपना गुनाह कबूल किया. उन्होंने अपनी बेटी के दाखिला की खातिर एसएटी कॉलेज की प्रवेश परीक्षा में उसके नंबर बढ़ाने के लिये 15,000 डॉलर (करीब 10 लाख 50 हज़ार से ज्यादा) देने की बात भी कबूली. इस अपराध के लिये 20 साल तक की जेल की सजा और 2,50,000 डॉलर के जुर्माने का प्रावधान है. हालांकि जुर्म कबूल करने के कारण अब हफमैन को दंड से छूट मिलने की संभावना है.

दाखिला कांड में करीब 50 लोगों पर आरोप है. सीईओ और प्रमुख विधि कंपनियों में सहयोगी समेत 10 लोग अब तक अपना जुर्म कबूल चुके हैं. इनमें पांच अभिभावक भी शामिल हैं. अधिकारियों ने बताया कि शिक्षकों और विश्वविद्यालय अधिकारियों को रिश्वत देने के लिये मामले में मास्टरमाइंड रहे विलियम ‘‘रिक'' सिंगर को 2.5 करोड़ डॉलर का भुगतान किया गया था. उसने भी अपना जुर्म कबूल कर लिया है और जांच में अधिकारियों का सहयोग कर रहा है.

 


गिरफ्तारी के डर से गठबधन का उम्मीदवार फरार !

गिरफ्तारी के डर से गठबधन का उम्मीदवार फरार !

15-May-2019

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण 19 मई को पूर्वांचल की घोसी संसदीय सीट पर वोटिंग होनी हैं। इस सीट पर मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सपा-बसपा गठबंधन के बीच है। भाजपा ने इस सीट के लिए हरिनारायण राजभर को टिकट दिया है जबकि गठबंधन ने इस सीट पर अतुल राय को अपना प्रत्याशी बनाया है। प्रत्याशी घोषित होने के बाद अतुल ने इस सीट पर कुछ दिनों तक अपना चुनाव-प्रचार किया लेकिन अब वह फरार चल रहे हैं। गठबंधन प्रत्याशी राय पर रेप का आरोप है और अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए वह फरार हैं जबकि पुलिस उन्हें दबोचने के लिए अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर रही है।

रेप मामले में अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए राय ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन उन्हें वहां से निराशा हाथ लगी क्योंकि कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी पर स्टे देने से इंकार कर दिया। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए राय भूमिगत हो गए हैं। इस सीट पर भाजपा जहां आक्रामक होकर अपना चुनाव प्रचार कर रही है, वहीं गठबंधन के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई है। गठबंधन को समझ में नहीं आ रहा है कि वह राय की कमी किस तरह से पूरी करे। गठबंधन के मतदाताओं के सामने भी उलझन है कि वे फरार चल रहे प्रत्याशी के पक्ष में वोट करें अथवा उन्हें किसी और विकल्प की तलाश करनी चाहिए।
यह है मामला
वाराणसी की एक पूर्व छात्रा ने अतुल राय पर रेप का आरोप लगाया है। छात्रा का आरोप है कि राय अपनी पत्नी से मिलाने के लिए उसे अपने घर ले गए जहां उन्होंने उसका यौन उत्पीड़न किया। राय ने अपने लगे आरोप से इंकार किया है लेकिन गत एक मई को उनके खिलाफ केस दर्ज हो गया।  मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। बताया जा रहा है कि पुलिस से बचने के लिए राय भूमिगत हो गए हैं। इधर पुलिस उन्हें दबोचने के लिए मऊ और आस-पास के जिलों में दबिश दे रही है।

गठबंधन को भरोसा राय की गैर-मौजूदगी का नहीं होगा असर
सपा-बसपा गठबंधन का मानना है कि राय की गैर-मौजूदगी का असर उसके वोट बैंक पर नहीं पड़ेगा। गठबंधन इस सीट पर अपनी जीत का दावा कर रहा है। बसपा के जिला प्रभारी ललित कुमार अकेला गांव-गांव जाकर अपने वोटरों को भरोसे में ले रहे हैं। अकेला का कहना है कि राय कहां पर इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी का वोटरों पर कोई असर नहीं पड़ने जा रहा है क्योंकि गठबंधन का वोट पक्का है वह कहीं और नहीं जाने वाला।

घोसी सीट का चुनावी गणित
घोसी सीट पर करीब 3.5 लाख जाटव (दलित), 2 लाख यादव (ओबीसी), 1.2 लाख राजभर (ओबीसी), एक लाख नूनिया (ओबीसी) और 80 हजार गैर-जाटव दलित वोट हैं। इस सीट पर करीब 4 लाख से ऊपर सवर्ण जातियों के वोट हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा के हरिनारायण राजभर ने बसपा के दारा सिंह चौहान को हराया था। राजभर को 3,79,797 वोट और चौहान को 2,33,782 वोट मिले थे।


राघव चड्ढा को फर्ज़ी अखबार क्लिप द्वारा जाट, गुज्जर और बिहारी विरोधी दर्शाया गया

राघव चड्ढा को फर्ज़ी अखबार क्लिप द्वारा जाट, गुज्जर और बिहारी विरोधी दर्शाया गया

14-May-2019

एक समाचार पत्र की क्लिप को सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स द्वारा साझा किया जा रहा है, जिसका शीर्षक है – “पंजाबी वोटर अगर मेरा साथ दें तो देहाती जाट गुज्जरों और बिहारियों को धूल चाटा दूंगा – राघव चड्ढा।”

इस पोस्ट के साथ साथ दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के आप नेताओं के नाम भी साझा किये जा रहे है। राघव चड्ढा ने अपने अधिकारिक फेसबुक पेज पर इस पोस्ट को फ़र्जी बताया और कहा कि यह फोटोशॉप का काम है।

ऑल्ट न्यूज की खबर के अनुसार यह ख़बर कई अन्य सबूतों के ज़रिये भी ख़ारिज की जा सकती है। इस ख़बर की गलत प्रस्तुति संदेह प्रकट करता है। इस पर मीडिया की रिपोर्टिंग की कमी की वज़ह से इसके झूठे होने पर शंका और बढ़ती है। इसे अख़बार के जैसे दिखाया गया है, हालांकि इसे ध्यान से देखने पर ही झूठ पकड़ा जा सकता है।

1. लेख में शब्दों की लेखनी और व्याकरण संबधी गलतियां है। लेख के शीर्षक में ही शब्द ‘चाटा’ को ‘चटा’ लिखा गया है। लेख
के दूसरे अनुच्छेद में शब्द ‘नहीं’ को ‘नही’ लिखा गया है। वाक्य, “एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए चड्डा ने कहा की “यदि पंजाबी समुदाय का शत प्रतिशत वोट…” में अल्पविराम की कमी है।

2. लेख में तारीख मौजूद नहीं है।

3. इस लेख में रिपोर्टर का नाम नहीं दिया गया है। किसी भी समाचारपत्र के रिपोर्ट में या तो उसे लिखने वाले रिपोर्टर का नाम या फ़िर समाचार पत्र के ब्यूरो का नाम होता है। अगर लेख़ किसी न्यूज़ एजेंसी द्वारा मिली है, तो उस एजेंसी का नाम छापा जाता है – जैसे PTI, ANI इत्यादी।

4. लेख में दिख रहे वाक्य और अनुच्छेद श्रेणीबद्ध नहीं है।

नकली अखबारों की क्लिप के जरिए सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाना आम बात है। अख़बार के रूप में किसी भी सूचना को पेश करने से वो विश्वासपात्र बन जाता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर भी झूठी अख़बार की क्लिप से निशाना साधा गया था।

 


कनाडा : अलास्का में दो सीप्लेन आपस में टकराए कई लोगों की मौत

कनाडा : अलास्का में दो सीप्लेन आपस में टकराए कई लोगों की मौत

14-May-2019

अलास्का। कनाडा के अलास्का शहर में दो पर्यटक विमानों के आपस में टकराने से बड़ा हादसा सामने आया है। इस हादसे में कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों विमान हवा में आपस में टकरा गए, जिसकी वजह से कई लोगों की जान चली गई। जानकारी के अनुसार कई लोगों की मौत हुई है, जबकि तीन लोग अभी भी लापता हैं। कोस्ट गार्ड लेफ्टिनेंट ब्रायन डाइकेन्स ने बताया कि यह हादसा केचिकन के पास हुआ है। दोनों विमान पानी पर भी लैंड कर सकते थे और हवा में भी उड़ सकते थे। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के प्रवक्ता एलन केनिट्जर ने बताया कि हादसा की वजह का अभी पता नहीं लग सका है।