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आदिवासियों की जमीन पर लगे वृक्षों की कटाई की अनुमति की प्रक्रिया होगी सरलीकृत: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

आदिवासियों की जमीन पर लगे वृक्षों की कटाई की अनुमति की प्रक्रिया होगी सरलीकृत: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

17-Jul-2021

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

आदिवासियों की जमीन पर लगे वृक्षों की कटाई की अनुमति की प्रक्रिया होगी सरलीकृत : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

अधिनियम में संशोधन की अनुशंसा : कलेक्टर के स्थान पर अनुविभागीय अधिकारी दो माह की समय-सीमा में दें अनुमति

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण अनुशंसाएं

अभियान चलाकर वन अधिकार मान्यता पत्र प्राप्त हितग्राहियों की भूमि में कराए जाएं सुधार कार्य: फलदार वृक्षों के रोपण के साथ अंतरवर्ती फसलों के लिए दिया जाए प्रशिक्षण 

प्रयास आवासीय विद्यालयों में अब प्रदेश के सम्पूर्ण अनुसूचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को प्रवेश देने की अनुशंसा  

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरगुजा में खुलेगा ‘‘परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्र‘‘

विशेष पिछड़ी जनजातियों के शिक्षित युवाओं की सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया होगी तेज

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित की गई छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में जनजाति हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन विचार-विमर्श कर अनेक महत्वपूर्ण अनुशंसाएं की गई। 

आदिवासियों की निजी भूमि पर वृक्षों को काटने के लिए अनुमति प्रदान करने की प्रक्रिया को सरलीकृत करने के प्रस्ताव पर सदस्यों के साथ चर्चा के बाद सर्वसम्मति से आदिम जनजातियों का संरक्षण (वृक्षों के हित में) अधिनियम 1999 एवं नियम 2000 में संशोधन की अनुशंसा की गई। जिसके अनुसार वृक्ष काटने की अनुमति कलेक्टर की जगह अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा दो माह की  समय-सीमा के भीतर प्रदान की जाए। हितग्राही वृक्ष काटने की अनुमति हेतु अपना आवेदन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को देंगे। स्थल पर मौके का मुआयना पटवारी और रेंजर द्वारा किया जाएगा। अनुमति मिलने के बाद वन विभाग द्वारा वृक्ष की कटाई और नीलामी की कार्यवाही की जाएगी तथा वनमण्डलाधिकारी द्वारा संबंधित  हितग्राही के बैंक खाते में राशि जमा की जाएगी। इससे अवैध कटाई पर अंकुश लगेगा और आदिवासियों को उनके वृक्ष का उचित दाम मिलेगा। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत जो हितग्राही वृक्ष लगाएंगे उन्हें काटने के लिए हितग्राहियों को केवल सूचना देनी होगी। 

बैठक में व्यक्तिगत वन अधिकार मान्यता पत्र प्राप्त हितग्राहियों की भूमि पर मनरेगा के माध्यम से भूमि समतलीकरण और सुधार का कार्य के लिए अभियान चलाने की अनुशंसा की गई। यह भी सुझाव दिया गया कि क्रेडा के माध्यम से हितग्राही की भूमि पर सिंचाई के लिए सोलर पम्प लगाया जाएगा और भूमि पर फलदार प्रजातियों जैसे हर्रा, बेहड़ा, आंवला, महुआ, बांस, आम, इमली, चिरौंजी, नींबू आदि के पौधों का रोपण किया जाए। हितग्राही को जिमीकंद, हल्दी, तिखुर जैसी अंतरवर्ती फसलों का प्रशिक्षण प्रदान करने का सुझाव भी दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजाति परिषद के सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में पात्र लोगों को वन अधिकार पट्टे दिलाने और उनकी भूमि पर सुधार कार्य, फलदार वृक्षों के रोपण, तालाब और डबरी निर्माण के लिए सक्रिय पहल करें। अपने भ्रमण के दौरान जिला मुख्यालयों में आयोजित बैठकों में भी इन कार्याें की प्रगति की जानकारी लें। उन्होंने बीजापुर और सुकमा जिले में इसके लिए विशेष प्रयास करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में गांवों का सर्वे कर ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए उनके प्रारंभिक अभिलेखों का प्रकाशन कर भुईंया पोर्टल में उनकी प्रविष्टि करने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओरछा विकासखण्ड को चार गांवों में जहां राजस्व सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो गया है, वहां पट्टा पात्र किसानों ने इस वर्ष पहली बार लैम्पस में समर्थन मूल्य पर धान बेचा। उन्होंने कहा कि ऐसे शहरी क्षेत्र जहां वन भूमि है, वहां पात्रताधारियों को वन मान्यता आधार पत्र दिए जाएं।

छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में प्रयास आवासीय विद्यालय में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के साथ सम्पूर्ण अनुसूचित क्षेत्र के बच्चों को प्रवेश देने की अनुशंसा की गई। प्रयास आवासीय विद्यालय में नक्सल प्रभावित जिलों से चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक अध्ययन एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। वर्तमान में नक्सल प्रभावित 9 जिलों के बच्चों को प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रवेश दिया जा रहा है। अब सम्पूर्ण अनुसूचित क्षेत्र के 25 जिलों के बच्चों को प्रवेश देने और नक्सल पीड़ित परिवारों के बच्चों को बिना प्रवेश परीक्षा के सीधे प्रयास आवासीय विद्यालय में दाखिला देने की अनुशंसा की गई। इसी तरह सरगुजा में विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‘‘परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्र‘‘ खोलने की अनुशंसा की गई। वर्तमान में रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, नारायणपुर और कबीरधाम जिले में परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्र संचालित हैं, जहां विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। 

छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में आज पहली बार पहाड़ी कोरवा विकास अभिकरण के अध्यक्ष श्री पीताम्बर राम और बैगा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री गिरधारी बैगा शामिल हुए और मुख्यमंत्री ने उनसे चर्चा भी की। परिषद की इससे पूर्व आयोजित बैठक में जनजाति सलाहकार परिषद में विशेष पिछड़ी जनजाति के प्रतिनिधियों को शामिल करने की अनुशंसा की गई थी। श्री गिरधारी बैगा ने मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान मरवाही के धनौली में कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए छात्रावास और एक कन्या छात्रावास की स्वीकृति तथा विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को बकरी पालन, मुर्गी पालन, सुअर पालन, गाय पालन के लिए शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि जनजाति के युवा समूह बनाकर गौठानों में इन गतिविधियों को प्रारंभ कर सकते हैं, इनके लिए सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कोदो, कुटकी के लिए हाॅलर मिल की व्यवस्था भी गौठान में की जाएगी। बैठक में विशेष पिछड़ी जनजातियों के शिक्षित युवाओं को सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की अनुशंसा की गई।  

     बैठक में आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति मंत्री एवं परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. प्रेमसाय सिंह, खाद्य मंत्री श्री अमरजीत भगत, राज्य जनजाति परिषद के उपाध्यक्ष श्री रामपुकार सिंह, संसदीय सचिव श्री शिशुपाल सोरी, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री बृहस्पति सिंह, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव श्री डी. डी. सिंह, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग की आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी मुख्यमंत्री निवास में उपस्थित थीं ।

विधानसभा के उपाध्यक्ष श्री मनोज मण्डावी, सांसद श्री दीपक बैज, संसदीय सचिव श्री इंदरशाह मंडावी,  श्री चिंतामणि महाराज, बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री लखेश्वर बघेल, उपाध्यक्ष सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण श्री गुलाब कमरो, मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी ध्रुव, विधायक श्रीमती देवती कर्मा, श्री विनय भगत, श्री अनूप नाग, श्री चक्रधर सिंह, श्री बोधराम कंवर, पहाड़ी कोरवा विकास अभिकरण अम्बिकापुर के अध्यक्ष श्री पीताम्बर राम और बैगा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री गिरधारी बैगा के साथ ही प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य श्री नरेन्द्र कुमार चन्द्रवंशी, वन विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, राजस्व विभाग की सचिव सुश्री रीता शांडिल्य, वित्त एवं नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव श्रीमती अलरमेलमंगई डी, बस्तर संभाग के आयुक्त श्री जी.आर चुरेन्द्र, बिलासपुर संभाग के आयुक्त श्री संजय कुमार अलंग तथा सरगुजा संभाग की आयुक्त सुश्री जिनेविवा किण्डो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा बैठक में शामिल हुईं ।

 


छत्तीसगढ़ ने कृषि क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से लहराया परचम : कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया देश के सर्वश्रेष्ठ कृषि विज्ञान केन्द्र के रूप में सम्मानित

छत्तीसगढ़ ने कृषि क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से लहराया परचम : कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया देश के सर्वश्रेष्ठ कृषि विज्ञान केन्द्र के रूप में सम्मानित

17-Jul-2021

'द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा' से साभार 

छत्तीसगढ़ ने कृषि क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से लहराया परचम : कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया देश के सर्वश्रेष्ठ कृषि विज्ञान केन्द्र के रूप में सम्मानित

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के स्थापना दिवस के अवसर पर केव्हीके कोरिया को मिला वर्ष 2020 पंडित दीनदयाल उपाध्याय कृषि विज्ञान राष्ट्रीय प्रोत्साहन पुरस्कार

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल एवं कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने दी बधाई

सुराजी गांव योजना के नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी विकास कार्यक्रम को मिली राष्ट्रीय पहचान

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रायपुर : छत्तीसगढ़ ने कृषि विकास के क्षेत्र में एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम फहराया है। छत्तीसगढ़ राज्य के कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया को भारत सरकार द्वारा देश के सर्वश्रेष्ठ कृषि विज्ञान केन्द्र के रूप में पुरस्कृत किया गया है।   कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया को छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी के प्रभावी क्रियान्वयन तथा कृषकों में उद्यमिता विकास हेतु सम्मानित किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के 93 वें स्थापना दिवस के अवसर पर आज कृषि भवन नई दिल्ली में आयोजित सम्मान समारोह में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया को देश भर में संचालित 722 कृषि विज्ञान केन्द्रों में सर्वश्रेष्ठ कृषि विज्ञान केन्द्र के रूप में कृषि विज्ञान राष्ट्रीय प्रोत्साहन पुरस्कार-2020 से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। कृषि मंत्री ने कहा है कि कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया की टीम ने अपने अथक परिश्रम एवं नवाचार से कोरिया जिले के किसानों को लाभकारी और उन्नत खेती की ओर प्रेरित किया है।

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सम्मान समारोह कार्यक्रम में केन्द्रीय पशुधन विकास मंत्री श्री पुरूषोत्तम रूपाला, कृषि राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी एवं सुश्री शोभा करंदलाजे तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा, उपमहानिदेशक डॉ. ए.के. सिंह उपस्थित थे। कृषि उत्पादन आयुक्त छत्तीसगढ़ डॉ. एम.गीता, कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान जबलपुर के निदेशक डॉ. एस.आर.के. सिंह, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटिल एवं निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस.सी. मुखर्जी कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल हुए। कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. रंजीत सिंह राजपूत ने यह पुरस्कार वर्चुअल माध्यम से ग्रहण किया। उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्रों को चौथी बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। इसके पूर्व कृषि विज्ञान केन्द्र बस्तर, कृषि विज्ञान केन्द्र दंतेवाड़ा तथा कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है।

     कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया को यह सम्मान छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी के प्रभावी क्रियान्वयन, कृषकों को संगठित कर किसान उत्पादक संगठन (कोरिया एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड) की स्थापना, जिले में 55 एकड़ में गौठान ग्रामों में चारागाह विकास कार्यक्रम, नवोन्मेषी कृषि, उद्यानिकी एवं संबंधित गतिविधियों में सिंदूर हर्बल पावडर, लेमनग्रास चायपत्ती, शकरकंद आटा, हल्दी, नीलगिरी एवं सौंफ की पत्तियों व टहनियों से सगंध तेल निष्कासन एवं गौठान ग्रामों में सौंफ की खेती का सफल प्रदर्शन, शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए आदिवासी कृषकों का समूह बनाकर मधुमक्खी पालन एवं दलहन तथा तिलहन फसलों की उन्नत प्रजातियों का कल्स्टर प्रदर्शन, छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने हेतु विभिन्न फसलों के प्रसंस्करण एवं विपणन आदि नवोन्मेषी कार्यों के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रदान किया गया है।  

उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन-कोरिया के सहयोग से कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया द्वारा 55 एकड़ में गौठान ग्रामों में चारागाह विकास कार्यक्रम के अंतर्गत चारा फसलों की उन्नत किस्मों जैसे-नेपियर, बहुवर्षीय ज्वार का प्रादर्श प्रक्षेत्र स्थापित किया गया। गौठान ग्रामों में नगदी फसलों को बढ़ावा देने के लिए 35 एकड़ में हल्दी की उन्नत प्रजातियाँ जैसे-रोमा, बी.एस.आर-2 एवं रश्मि का प्रदर्शन प्रक्षेत्र स्थापित किया गया है। कृषकों की सामूहिक बाड़ियों का चयन कर 75 एकड़ में ड्रिप पद्धति से फलदार मातृवाटिका तैयार कर अर्न्तवर्तीय खेती के रुप में सामूहिक बाड़ियों में फसल विविधकरण के अंतर्गत 40-50 एकड़ में पड़त भूमि विकास के अंतर्गत लेमनग्रास, खस, पामारोजा, सिट्रोनेला एवं शकरकन्द इत्यादि का रोपण कर पड़त भूमि की फसल सघनता को 300 प्रतिशत तक आंका गया। केन्द्र द्वारा बाड़ी विकास कार्यक्रम में सब्जियों की उन्नत प्रजाति सह फलदार पौध रोपण का तकनीकी प्रदर्शन 200 बाड़ियों में क्रियान्वित किया गया। घुरवा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए आदिवासी कृषक समूह द्वारा   कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया एवं मनरेगा से 100 केचुआ टांका की स्थापना कर केचुआ खाद, वर्मीवाष एवं केचुआ का विक्रय किया गया। वैज्ञानिकों द्वारा गौठान ग्रामों में महिला समूह को गुणवत्ता युक्त केचुआ एवं खाद उत्पादन, केचुआ उत्पादन का प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन निरंतर प्रदान किया जा रहा है।  

कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया द्वारा कृषकों को संगठित कर किसान उत्पादक संगठन ‘‘कोरिया एग्रोप्रोड्यूसर’’ नामक कम्पनी बनाई गई है, जो 22 कृषि आधारित उत्पादों का निर्माण, प्रसंस्करण एवं विपण कर रही है। 573 कृषक सदस्यों वाली इस कम्पनी ने इस वर्ष 42 लाख रूपये का व्यवसाय किया है। इस किसान उत्पादक संगठन में 72 प्रतिशत सदस्य आदिवासी कृषक हैं। जिला प्रशासन कोरिया के वित्तीय सहयोग से कृषि विज्ञान केन्द्र कोरिया के तकनीकी मार्गदर्शन में किसान उत्पादक संगठन के लिए प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन उत्पादों हेतु दुग्ध प्रसंस्करण, सगंध तेल निष्कासन हेतु भाप संयंत्र, दाल मिल, राईस मिल, खाद्य तेल मिल, सगंध अगरबत्ती निर्माण मशीन की स्थापना कर 20-25 उत्पाद मानक आधार पर तैयार कराकर विपणन के लिए खादी इंडिया, ट्राईफेड इंडिया, हस्त शिल्प विकास बोर्ड, खादी ग्रामोद्योग इत्यादि को उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला समूहों की आजीविका उन्नयन हेतु केन्द्र द्वारा हस्त निर्मित सगंध साबुन एवं सगंध अगरबत्ती निर्माण एवं विपण का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा जिले के किसानों को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना एवं मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत निरंतर व्यवसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नवोन्मेषी कृषि, उद्यानिकी एवं संबंधित गतिविधियों में सिंदूर हर्बल पावडर, लेमनग्रास चायपत्ती, शकरकंद आटा, हल्दी, नीलगिरी एवं सौंफ की पत्तियों व टहनियों से सगंध तेल निष्कासन एवं गौठान ग्रामों में सौंफ की खेती का प्रदर्शन किया जा रहा है।


साझा कम्युनिकेशन पर किसान सभा की प्रतिक्रिया

साझा कम्युनिकेशन पर किसान सभा की प्रतिक्रिया

12-Jul-2021

साझा कम्युनिकेशन पर किसान सभा की प्रतिक्रिया

*छत्तीसगढ़ किसान सभा (CGKS)*
*(अ. भा. किसान सभा - AIKS से संबद्ध)*
*नूरानी चौक, राजा तालाब, रायपुर, छग*

*'साझा कम्युनिकेशन' के जरिये वनाधिकार कानून को कमजोर करने की कोशिश, किसान सभा ने जताया विरोध*

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने केंद्र की मोदी सरकार पर आदिवासी मंत्रालय तथा वन व पर्यावरण मंत्रालय के 'साझा कम्युनिकेशन' के जरिये आदिवासी वनाधिकार कानून को कमजोर करने का आरोप लगाया है। किसान सभा ने इस कम्युनिकेशन को वापस लेने तथा वनाधिकार कानून के प्रावधानों के अनुसार इसके क्रियान्वयन के लिए पूर्व की तरह ही आदिवासी मंत्रालय को नोडल एजेंसी बनाने की मांग की है।

आज यहां जारी एक बयान में छग किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने कहा है कि सत्ता में आने के बाद से ही मोदी सरकार वनाधिकार कानून को कमजोर व निष्प्रभावी करने की कोशिश कर रही है। इसी कोशिश का नतीजा हाल ही में आदिवासी और वन व पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी 'साझा कम्युनिकेशन' है, जो पूरी तरह वनाधिकार कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है और आदिवासी मंत्रालय को शक्तिहीन बनाते हुए उसे वन व पर्यावरण मंत्रालय के मातहत करता है।

किसान सभा नेताओं ने कहा कि वनाधिकार कानून में 'आदिवासियों के साथ जारी ऐतिहासिक अन्याय' के लिए वन विभाग को जिम्मेदार ठहराया गया है और इस कानून को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी आदिवासी मंत्रालय को सौंपी है। इसके बावजूद यह कम्युनिकेशन सामुदायिक वन प्रबंधन में, गैर-इमारती वनोत्पादों के उपयोग में आदिवासी समुदायों की भागीदारी को सीमित करता है तथा नीति निर्धारण के क्षेत्र में वन मंत्रालय को महत्वपूर्ण स्थान देता है, जो पूरी तरह से वनाधिकार कानून की भावना के ही खिलाफ है।

किसान सभा नेताओं ने कहा कि वनाधिकार कानून बनने के बाद भी वन मंत्रालय वनों पर अपने आधिपत्य को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। यही कारण है कि उसने वन अधिनियम में आदिवासी विरोधी संशोधनों को प्रस्तावित किया था, वनों को निजी हाथों में सौंपने की वकालत करती है तथा विकास के नाम पर आदिवासियों को विस्थापित करने की योजना बनाती है। अपने आदिवासी विरोधी रूख के कारण इस मंत्रालय ने कभी भी न तो वनाधिकार कानून का सम्मान किया और न ही आदिवासी समुदायों की स्वीकृति और सहमति प्राप्त करने की कोशिश की।

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने इस आदिवासी विरोधी 'साझा कम्युनिकेशन' वापस लेने, वनाधिकार कानून के सही क्रियान्वयन के लिए आदिवासी मंत्रालय को सशक्त बनाने तथा वन भूमि पर काबिज आदिवासियों व कमजोर वर्गों की बेदखली पर रोक लगाकर उन्हें व्यक्तिगत व सामुदायिक उपभोग के लिए अधिकार पत्र देने तथा पेसा कानून के अनुसार विकास कार्यों के लिए आदिवासी समुदायों की सहमति व स्वीकृति को अनिवार्य बनाने की मांग की है।

*संजय पराते*, अध्यक्ष
(मो) 094242-31650
*ऋषि गुप्ता*, महासचिव
(मो) 094062-21661

 


राजनांदगांव: बीएमओ डॉ. विवेक बिसेन की कृपा से खैरागढ़ सरकारी अस्पताल में वाहन चालक कर रहा लेखापाल का काम!, अनुविभागीय अधिकारी को भी नहीं है जानकारी!

राजनांदगांव: बीएमओ डॉ. विवेक बिसेन की कृपा से खैरागढ़ सरकारी अस्पताल में वाहन चालक कर रहा लेखापाल का काम!, अनुविभागीय अधिकारी को भी नहीं है जानकारी!

08-Jul-2021

राजनांदगांव: बीएमओ डॉ. विवेक बिसेन की कृपा से खैरागढ़ सरकारी अस्पताल में वाहन चालक कर रहा लेखापाल का काम!, अनुविभागीय अधिकारी को भी नहीं है जानकारी!

नितिन कुमार भांडेकर

स्वास्थ्य मंत्री टी एस बाबा देखिए क्या हो रहा है आपके विभाग में?

राजनांदगांव/खैरागढ़ : खैरागढ़ के सरकारी अस्पताल में बीएमओ डॉ. विवेक बिसेन द्वारा सांठ गांठ करके एक ड्राइवर को दे दिया गया जीवनदीप समिति चलाने का जिम्मा।

खैरागढ़ विधायक और खैरागढ़ अनुविभागीय अधिकारी को भी नहीं है इसकी जानकारी।

खैरागढ़ के रहने वाले संजय श्रीवास्तव जीवनदीप समिति का लेखापाल का कार्य नियम विपरीत कई सालों से कर रहे हैं जबकि वर्तमान में सरकारी अस्पताल में चार चार बाबू खाली बैठे हैं।

दाऊ चौरा निवाशी एक व्यक्ति ने इस सबन्ध में जिला के उच्च अधिकारियों को इस सबन्ध में शिकायत भी की थी किंतु इस पर न जाने किसकी कृपा बरस रही है कि, अभी भी उक्त वाहन चालक बाबूगिरी का कार्य संभाल रहा है। कमलेश त्रिपाठी जो लेखापाल हैं उन्हें कुछ महीने ही हुवा है कुछ जिम्मेदारी दिए हुए जिनमें उनका काम सिर्फ वेतन सबंधी कार्य करना है। जबकि जीवन दीप समिति का संपूर्ण लेखा जोखा अस्पताल के ड्राइवर बाबू संजय श्रीवास्तव जी संभाल रहे हैं। कमलेश त्रिपाठी को लेखपाल का कार्य उच्च अधिकारियों से फटकार मिलने के बाद दिया गया है। पर आपको बता दें लेखपाल को अभी तक पूरा चार्ज नहीं दिया गया है।

खैरागढ़ के विधायक और अनुविभागिय अधिकारी अभी तक तो उक्त वाहन चालक को ही लेखापाल समझ रहे थे। चालक का ठाठ बाठ तो सातवें आसमान है। और होगा भी क्यों नहीं कई सालों से मलाई जो खा रहा है। 

बड़ा सवाल ―
नियमतः देखा जाए तो ऐसी क्या मजबूरी आन पड़ी थी कि एक चालक को जीवनदीप समिति के लेखा जोखा का कार्य चार-चार बाबू के रहते देना पड़ा। कहीं ये भ्रष्टाचार का लंबा खेल का मोहरा तो नहीं है? आखिर क्यों एक वाहन चालक को जीवनदीप समिती के लांखों के लेनदेन का हिसाब किताब का कार्य नियम विपरीत करवाया जा रहा है । जबकि चार-चार लेखा अधिकारी उक्त सरकारी अस्पताल में पदस्थ हैं। 

खबर लगने के बाद देखते हैं उक्त मामले पर स्वास्थ्य विभाग के मुखिया स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव जी क्या कार्यवाही करते हैं। या ऐसे ही भर्राशाही करने अभयदान दे देंगे। देखना होगा सबन्धित मामले पर कितनी गंभीरता दिखाती है प्रशासन।

 


सलौनी उपजेल- कैदियों के रिश्तेदारों से मिलवाने और कैदियों तक मादक वस्तु उपलब्ध करवाने के नाम पर चल रहा है गोरखधंधा

सलौनी उपजेल- कैदियों के रिश्तेदारों से मिलवाने और कैदियों तक मादक वस्तु उपलब्ध करवाने के नाम पर चल रहा है गोरखधंधा

07-Jul-2021

नितिन कुमार भांडेकर

सलौनी उपजेल- कैदियों के रिश्तेदारों से मिलवाने और कैदियों तक मादक वस्तु उपलब्ध करवाने के नाम पर चल रहा है गोरखधंधा 

सलौनी उपजेल में चल रहा है जोरों से गोरखधंधा 

कैदियों के रिश्तेदारों से मिलवाने और कैदियों तक मादक वस्तु उपलब्ध करवाने के नाम पर सलोनी उपजेल के प्रहरी चला रहे गोरख धन्धा।

उपजेल का एक हवलदार ले रहा था 1000 रुपये घूस, स्टिंग ऑपरेशन में खुली जेल की  पोल.....


राजनांदगांव/ खैरागढ़ : एक कैदी के परिजन ने नाम उजागर न करने के शर्त में सियासत राजनीति न्यूज़ को यह वीडियो उपलब्ध करवाई है। आपको बता दें सलोनी उपजेल के प्रहरि द्वारा जेल में बन्द कैदियों के परिजनों से लगातार रुपये मांगे जाने की शिकायत लंबे अर्शे से मिल रही थी। जिसकी आज एक परिजन ने स्टिंग वीडियो मीडिया को दी है। जिसमें जेल प्रहरी की पोल सबूत के साथ खुल गयी है। ईतना तो हमें भी पता है कि स्थानीय प्रशासन को पहले से ही इस तरह के गोरखधंधों की जानकारी मिल चुकी थी, लेकिन इस पर किसी ने भी संज्ञान नहीं लिया ।

परिजन ने स्टिंग कर बनाई वीडियो :― 

जिले के सलौनी उपजेल का जेल प्रहरी हवलदार श्री सिंह द्वारा जेल में बन्द एक कैदि तक नशीली वस्तु पहुंचाने तथा जब चाहे तब बिना रोक टोक के मुलाखात करवाने के एवज में परिजन से 1000 रुपये लेते और कुछ मादक समान जिसकी खनक की आवाज शराब के बोतल के टकराने से उतपन्न ध्वनि जैसे आ रही है। जिसमें शराब ही हो सकता है। साथ ही जेल प्रहरी को 1000 रुपया और कुछ समान देते हुए जेल में बन्द कैदी को समान दे देने हेतु परिजन कह रहा है। खाखी की वर्दी पहने बाजू में तीन फित्त्ती लगाए प्रहरी बहादुर सिंह जी काफी बाहुदूरिता के साथ नियम कानून को ताक में रखकर ये सब धड़ल्ले करते नजर आ रहे हैं।

मोबाइल छुपाकर कैसे स्टिंग ऑपरेशन किया:―

विचाराधीन कैदी के रिश्तेदार सलौनी उपजेल में कैदी से मिलने पहुंचे थे,  वहीं युवक उपजेल पहुंचने से पहले ही अपने मोबाइल का कैमरा ऑन कर लेता है। जेल के बाहर पहुंचते ही सामने सिंह हवलदार प्रहरी से परिजन बात करते हुए अपने मोबाइल का कैमरा उसके तरफ करते हुए  वीडियो बना लेता है। 

      जेल प्रहरी लाल बहादुर सिंह उपजेल के सामने कैदियों के मुलाखात वाली जगह पर जहाँ सरकारी एंबुलेंस भी खड़ी है। जहाँ पर रिश्तेदार का इंतेजार शराब और पैसे के लिए खड़ा हुआ था
अब देखना ये है कि इस खबर के बाद जेल विभाग तथा जिला प्रशासन के उच्च अधिकारी क्या कार्यवाही करते हैं।


छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचल दंतेवाड़ा में बच्चों के मसीहा बने डॉ.राजेश ध्रुव

छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचल दंतेवाड़ा में बच्चों के मसीहा बने डॉ.राजेश ध्रुव

01-Jul-2021

1 जुलाई राष्ट्रीय डॉक्टर डे पर विशेष

छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचल दंतेवाड़ा में बच्चों के मसीहा बने डॉ.राजेश ध्रुव

जिला अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना चुके डॉ.राजेश ध्रुव जब आज से 5 वर्ष पूर्व दंतेवाड़ा आए थे तब वहाँ उन्हे अनगिनत स्थानीय समस्याओं से दो चार होना होना पड़ा था जिसमें कुपोषण, जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई), सिकल सेल और मलेरिया जैसी बीमारियों शामिल थी।

शिशु रोग चिकित्सक के रूप में स्थापित होने की राह भी आसान न थी।दंतेवाड़ा सुदूर अंचलों तक फैला हुआ  है।जहाँ के कुछ क्षेत्र बरसाती मौसम में पहुंच विहीन भी हो जाते हैं और वहां तक शिशु स्वास्थ्य की सेवाओं को पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था।लेकिन परिस्थितियों के साथ संघर्ष ही किसी व्यक्ति को एक अलग पहचान दिलाता है ।

डॉ ध्रुव के प्रयासों से ही दंतेवाड़ा में धीरे-धीरे एसएनसीयू ( सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट) स्थापित किया गया जिसमें अब तक 1,500 बच्चों को लाभ मिला है, क्षेत्र में टीकाकरण को बढाया गया और साथ ही कुपोषण मुक्त करने के लिए राज्य में सबसे बड़ा 20 बिस्तरों वाला पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) जनवरी 2017 में  जिला अस्पताल में स्थापित किया गया।अब तक इस पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में 1,157 बच्चों को भर्ती किया गया और 1,145 बच्चों को कुपोषण से मुक्ति मिली है ।

शिशु रोग चिकित्सक उपलब्ध न होने के कारण पहले यहां से केस को जगदलपुर रेफर कर दिया जाता थे जो अब पिछले वर्षों से काफी कम हुआ है।डॉ.ध्रुव ने  कंगारू मदर केयर विधि के द्वारा कम वज़न के बच्चों को बचाया है।

वर्तमान में वह कोविड-19 के नोडल ऑफिसर बनाए गए है और चाइल्ड हेल्थ के नोडल ऑफिसर के रूप में बेहतर सेवाओं को देखते हुए कोविड-19  की तीसरी वेव से सुरक्षा देने की तैयारी का दायित्व भी दिया गया है । लोगों को जब भी जरूरत पड़ी डॉ.ध्रुव उनकी सेवा में हाजिर रहते है।आजकल वह  मरीजों को वर्चुअल माध्यम से भी परामर्श प्रदान कर रहे हैं।

डॉ. ध्रुव के इन्ही प्रयासों और प्रतिबद्धता के कारण ही उन्होंने  लंदन से प्रकाशित टाइम मैगजीन के पन्नों में स्थान पाया है जो किसी के लिए भी गर्व की बात हो सकती है।यह खबर तब छपी थी जब एक बच्ची के चेहरे पर कीटाणुओं का हमला हुआ था जिससे उसकी चमड़ी उखड़ गई थी लेकिन नियमित देखभाल और उपचार से वह बच्ची स्वस्थ  हो गई। ``तब मुझे लगा मै अपनी माटी के लोगों की  कुछ सेवा कर सका।’’

रायपुर में फरवरी 2019 में राज्य स्तरीय समारोह में दंतेवाड़ा में किए कार्यो के लिए सीएम भूपेश बघेल के द्वारा डॉ. ध्रुव को भी अवार्ड दिया गया । कोविड-19 संक्रमण के शुरुआती समय 2020 में छत्तीसगढ़ इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन द्वारा 2020 में देश के बेस्ट रुरल पीडियाट्रिशियन का अवार्ड वर्चुअल माध्यम से दिया गया ।

बाल संरक्षण समिति में मुख्य भूमिका के रूप में डॉ. ध्रुव महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ भी काम कर रहे हैं । डॉ ध्रुव कहते है,“दंतेवाड़ा के सुदूर अंचलों में अभी भी शिशु स्वास्थ्य को लेकर स्थानीय लोगों में उतनी जागरूकता नहीं है।कई बार कैंप करके लोगों को बच्चों के पालन पोषण के साथ-साथ उनको बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए स्थानीय मितानिन को समझाइश दी जाती है”।

क्रिकेट के शौकीन, डॉ ध्रुव ने कहते हैं,“डाक्टर बनने की प्रेरणा उन्हें बहन से मिली थी जब एक बार उन्होंने कहा था -- ``मेरा लाडला भाई कुछ बन पाएगा, या दिनभर क्रिकेट खेलता रहेगा।’’ बस इसी के बाद  स्टेट लेवल तक क्रिकेट खेलने के बाद भी क्रिकेट को त्यागा और पढ़ाई में दिल लगाकर मेहनत करी पीएमटी में सिलेक्ट हुआ डॉक्टर की डिग्री हासिल की”।

माटी की सेवा करने के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर के पद से त्याग-पत्र देकर 2013 में छत्तीसगढ़ में सेवा करने के लिए डॉक्टर ध्रुव वापस आए।रायपुर और भिलाई के प्राइवेट अस्पताल में नौकरी कर लोगों की सेवा की । लेकिन मन कुछ और ही करने को कह रहा था । एक  वर्ष जिला अस्पताल धमतरी में सेवा दी जिसके बाद 2016 में अपनी माटी की सेवा करने के लिए दंतेवाड़ा चले आए ।

डॉ.ध्रुव कहते हैं,“उन्हे डॉक्टरी करके तुरंत ही अपनी माटी की सेवा में आ जाना था । ``खैर, कोई बात नहीं देर आए, दुरुस्त आए।’’

बस्तर जिले में बीता था बचपन

शासकीय सेवा के दौरान डॉ राजेश ध्रुव के पिताजी की पोस्टिंग जगदलपुर में रही जिसके कारण  उनका जगदलपुर की माटी से एक अलग ही लगाव है । जगदलपुर के नेशनल इंग्लिश स्कूल से पढ़ाई की ।

स्थानीय बोली गोंडी भी अच्छे से सीख रहे है

आजकल डॉ ध्रुव स्थानीय बोली गोंडी को अच्छे से सीख रहे है  जिससे लोगों की परेशानी समझने में आसानी हो और सही रूप से उनका  का इलाज किया जा सके ।

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जशपुर के बगीचा में हिंदी फिल्म तेरे इश्क में दीवाने का किया मुहूर्त

जशपुर के बगीचा में हिंदी फिल्म तेरे इश्क में दीवाने का किया मुहूर्त

29-Jun-2021

 

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा से 

श्री यू.डी.मिंज ने फिल्म बनाने के लिए जशपुर के बगीचा क्षेत्र का चयन करने
पर फिल्म निर्देशक एवं निर्माता को दिया धन्यवाद
जशपुर में फिल्म बनने से स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मौका-विधायक जशपुर 
फिल्म निर्माण से  जशपुर   के पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा-कलेक्टर

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जशपुर नगर 28 जून 2021/जशपुर जिले के विकास खण्ड बगीचा के रामकृष्ण विद्या मंदिर आश्रम में संसदीय सचिव एवं विधायक कुनकुरी श्री यू.डी.मिंज, जशपुर विधायक श्री विनय भगत, कलेक्टर श्री महादेव कावरे की उपस्थिति में हिंदी फिल्म तेरे ईश्क में दीवाने का मुहूर्त किया गया। इस अवसर पर रामकृष्ण विद्या मंदिर आश्रम के स्वामी ज्योतिर्मयानंद , पुलिस अधीक्षक श्री बालाजी राव, वनमंडलाधिकारी जशपुर श्री कृष्ण जाधव, तहसीलदार श्री अविनाश चैहान, प्रमोद गुप्ता, रामेश्वर गुप्ता, सुरेश जैन, श्रीमती फुलकेरिया भगत, योगेश सिंह  अन्य जनप्रतिनिधिगण, सहित फिल्म के निर्माता निर्देशक एवं कलाकार उपस्थित थे। उपस्थित सभी लोगों ने फिल्म निर्माण के लिए अपनी शुभकामनाएं दी।
संसदीय सचिव एवं विधायक कुनकुरी श्री यू डी मिंज ने फिल्म के निर्माता निर्देशक को फिल्म निर्माण के लिए जशपुर के बगीचा के चयन के हेतु धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पूरा जशपुर जिले ही सुंदर सुंदर वादियों से भरा है। यहाँ पर्यटन के नाम पर जशपुर किसी स्वर्ग से कम नही । यहाँ अनेक जल प्रपात, सुंदर सुंदर स्थल, हरि भरी मनोरम दृश्य भरे हुए है। सिर्फ पर्यटन ही नही ऐतिहासिक, धार्मिक, स्थलों की भी यहाँ कमी नही है। आपने फिल्म के लिए जशपुर के बगीचा का चयन किया इसके लिए हम सभी आपको बहुत बहुत धन्यवाद देते है। आपके फिल्म के माध्यम से जशपुर कि सुंदरता को भी पूरे देश मे पहचान मिलेगी। साथ ही फिल्म में स्थानीय कलाकरों को भी कार्य करने का मौका दिया जा रहा है यह उनके लिए बड़ी खुशी की बात है। श्री मिंज ने फिल्म को जशपुर की खूबसूरत वादियों की तरह ही खूबसूरत और अच्छी बनने की कामना की और फिल्म की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रदान की।
विधायक श्री विनय भगत ने भी फिल्म के सभी कलाकारों को अपनी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए दी। उन्होंने कहा कि यह सभी के लिए बहुत गर्व की बात है कि यहां स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण किया जा रहा है। श्री भगत ने कहा कि जशपुर बहुत ही सुंदर है, जशपुर में पर्यटन को आगे बढ़ावा देने के लिए यह फिल्म निर्माण बहुत काम आएगा। इससे जशपुर का नाम भारत की क्षितिज में ऊपर होगा। फिल्म के माध्यम से अन्य लोगो को भी प्रेरणा मिलेगी। जशपुर के विकास के लिए नए नए द्वार खुलेंगे। जशपुर की सुन्दरता पर्यटको को अपनी ओर खींच लाएगी। लोग मनाली, कश्मीर की वादियों के साथ ही जशपुर की खूबसूरती से भी रूबरू हो पाएंगे। उन्होंने फिल्म निर्माता को फिल्म निर्माण में स्थानीय अधिकारियों को पूरा सहयोग सहयोग प्रदान करने की बात कही।
इस दौरान कलेक्टर श्री महादेव कावरे ने कहा कि जशपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। यहाँ चारो ओर देखने लायक स्थान है। उन्होंने कहा कि यहां दनगरी, राजपुरी, मकरभंजा, कैलाश गुफा, मधेश्वर, देश देखा,  जैसे अनेक पर्यटन स्थल है।
श्री कावरे ने कहा कि बगीचा में फिल्म निर्माण होने से यहाँ की सुन्दरता से सभी लोग अवगत होंगे। सभी को यहाँ की खूबसूरती की जानकारी मिलेगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही स्थानीय उद्योगों एवं कलाकारों को भी रोजगार प्राप्त होगा। उन्होंने फिल्म निर्माण के लिए बगीचा के चयन करने के लिए फिल्म के निर्माता निर्देशक को धन्यवाद देते हुए सभी कलाकारों को फिल्म के लिए अपनी शुभकामनाएं दी। इसी प्रकार पुलिस अधीक्षक श्री बालाजी एवं वनमंडलाधिकारी श्री कृष्ण जाधव ने भी सभी कलाकारों को फिल्म निर्माण के लिए अपनी बधाई एवं शुभकामनाएं दी।


नगर निगम के साथ हुई डेंगू पर वार के लिए बैठक  मिलकर करेंगे हर रविवार डेंगू पर वार

नगर निगम के साथ हुई डेंगू पर वार के लिए बैठक मिलकर करेंगे हर रविवार डेंगू पर वार

26-Jun-2021

नगर निगम के साथ हुई डेंगू पर वार के लिए बैठक

मिलकर करेंगे हर रविवार डेंगू पर वार

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ज़िला स्वास्थ्य विभाग एवं नगर निगम रायपुर द्वारा “हर रविवार, डेंगू पर वार’’ एवं “10 सप्ताह 10 बजे 10 मिनट” के कार्यक्रम को सफल करने के उद्देश्य से नगर निगम के साथ बैठक की गई । जिसकी अध्यक्षता एमआईसी की स्वास्थ्य समिति के चेयरपर्सन नागभूषण राव द्वारा की गई । इस बैठक का मूल उद्देश्य प्रत्येक वार्ड में डेंगू के लार्वा को पनपने से पहले ही खत्म करना और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना भी है । बैठक में ज़ोनल हेल्थ ऑफिसर नगर निगम केस्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम और सहायक स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम उपस्थित रहे ।

बैठक की जानकारी देते हुए जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विमल किशोर राय ने बताया “आगामी दिनों में मलेरिया विभाग की टीम और वार्ड में कार्यरत नगर निगम की टीम आपसी समन्वय स्थापित कर ‘’प्रत्येक रविवार डेंगू पर वार” को  रविवार के दिन मिलकर मनाने का निर्णय लिया है । जिसमें नगर निगम का सहयोग और क्षेत्र के नेतृत्वकारी लोगों को साथ लेकर प्रत्येक वार्ड को डेंगू मुक्त वार्ड बनाने का संकल्प लेना है ।“

डॉ. राय कहते है “लार्वा पर पूर्व से ही उचित कार्रवाई करना सुनिश्चित किया जाएगा। डेंगू नियंत्रण अभियान के दौरान लोगों को घर में रखे गमले की ट्रे, कूलर, फ्रिज, पानी की टंकी को खाली कर सुखाने के पश्चात उपयोग करने के बारे में जानकारी दी जाएगी ताकि मच्छर के अंडे, लार्वा को नष्ट किया जा सके। मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए पुराने टायर, मटके, कबाड़ आदि में बरसात का पानी एकत्रित ना होने दें । घर के बाहर छोटे गड्ढों में मिट्टी का भराव करें। जिससे मच्छरों के प्रजनन को न्यून किया जा सके।पानी के फैलाव को रोकने के लिए नियमित रूप से साफ-सफाई और दवाई का छिड़काव करते रहें। साथ ही नालियों की साफ-सफाई तथा घर के आस-पास पानी के टैंकों की नियमित रूप से साफ-सफाई रखें।“

डेंगू बीमारी के लक्षण तेज बुखार, उल्टी आना, शरीर पर लाल चकते पड़ना है। बुखार को कन्ट्रोल करने के लिए चिकित्सीय परामर्श लें। हर बुखार डेंगू का नही होता है, डेंगू के लक्षण होने पर समय से डॉक्टर की सलाह लें और डॉक्टर की सलाह पर ही दवा का सेवन करें।

इस बैठक में, विजय पाण्डेय निगम स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ.तृप्ति पाणिग्रही, परगनिया एपिडियोलॉजिस्ट आईडीएसपी, कुमार सिंह एंटोंमोलॉजिस्ट, जिला सलाहकार एनव्हीबीडीसीपी, रेवान्नद एमटीएस, उपस्थित थे ।


रोज करें योग का संदेश देते हुए मनाया गया “योग दिवस”

रोज करें योग का संदेश देते हुए मनाया गया “योग दिवस”

22-Jun-2021

रोज करें योग का संदेश देते हुए मनाया गया “योग दिवस”

नियमित योग करने से तनाव होता है कम, आती है सकारात्मकता तब मिलती है राहत

बलौदाबाजार, 21 जून 2021। कोविड-19 महामारी के इस दौर में सकारात्मक ऊर्जा और बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए सोमवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस नई थीम- “योग के साथ रहें, घर पर रहें” के तहत मनाया गया। बलौदाबाजार नवीन कोविड अस्पताल परिसर में विशेष योगाभ्यास का आयोजन किया गया। इस दौरान नर्सिंग स्टाफ, चिकित्सकों द्वारा योगाभ्यास और प्राणायाम किया गया। इसके साथ ही अस्पताल के भीतर ऑन ड्यूटी स्टाफ के मार्गदर्शन में कोविड संक्रमित मरीजों ने भी योगाभ्यास किया।

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इस दौरान लगभग 50 लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लेकर स्वस्थ जीवन जीने के लिए योग किया। वहीं सीएमएचओ डॉ. खेमराज सोनवानी भी ऑनलाइन इस कार्यक्रम में शामिल हुए। कोरोना संक्रमण के दौर में भी योगाभ्यास के कई फायदे सामने आए हैं। कोरोना संक्रमण के खतरे को लेकर एहतियात बरतते हुए योगाभ्यास विभिन्न कोविड सेंटरों एवं स्वास्थ्य केन्द्रों में भी किया जा रहा है। जिला नोडल अधिकारी गैर संचारी रोग प्रकोष्ठ डॉ. राकेश कुमार प्रेमी के मार्गदर्शन में योग सत्र का आयोजन जिला सलाहकार डॉ. सुजाता पांडेय द्वारा कराया गया। इस दौरान मानसिक तनाव, अवसाद, चिंता को दूर करने, फेफड़ों को मजबूती प्रदान करने, सकारात्मकता लाने एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने संबंधी योगासन और प्राणायाम करवाए गए। डॉ. राकेश कुमार प्रेमी ने बताया “कोविड महामारी के दौरान नियमित रूप से योगाभ्यास करने की सलाह कोविड सेंटर के मरीजों और अस्पताल पहुंचने वाले सभी लोगों को दी जा रही है क्योंकि नियमित योग करने से बहुत लाभ मिलता है और सकारात्मकता के साथ-साथ आंतरिक क्षमता भी विकसित होती है। योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है। यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक भी है।  इसलिए सभी को योग करने की सलाह दी जाती है।“ उल्लेखनीय है योग की महत्वता को लेकर भारत के प्रयासों के चलते दुनिया भर के देशों ने इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्वीकारा और 21 जून 2015 में पहली बार  विश्व स्तर पर योग दिवस मनाया गया। तब से लेकर हर वर्ष उक्त दिवस स्वस्थ्य तन और मन को रखने के लिए मनाया जाता है।

 

इनका नियमित करें अभ्यास- योगाभ्यास की विशेष ट्रेनर डॉ. सुजाता पांडेय ने  योगाभ्यास के दौरान शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने, तनावमुक्ति एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने के लिए कई तरह के आसन प्राणायाम करवाए। साथ ही लोगों को रोगों से लड़ने के लिए योग को इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में अपनाने और नियमित रूप से योगाभ्यास करने की सलाह भी दी। इस दौरान मुख्य रूप से दो आसन ताड़ासन और उत्तासन, प्राणायाम में ओंकार मंत्र, कपालभाती, भस्तिका, अनुलोम विलोम नाणीशोधन प्राणायाम, नादम अनुसंधानम यानि अपनी आवाज की खोज करें, मन बुद्धि को एकाग्र करना भी बताया। डॉ. सुजाता ने बताया “कोविड महामारी से ही मैंने नियमित योग करना शुरू किया है। योग करने से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है, मन प्रसन्न रहता है, नींद आती है, भूख भी लगती है। शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने से स्फूर्ति बनी रहती है और कामकाज में भी मन लगता है।“


नाबालिगों में नकारात्मकता को दूर करने का बताया गुर

नाबालिगों में नकारात्मकता को दूर करने का बताया गुर

19-Jun-2021

नाबालिगों में नकारात्मकता को दूर करने का बताया गुर

- बाल संप्रेक्षण गृह के नाबालिगों की मानसिक स्थिति की अधिकारियों ने की जांच

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बलौदाबाजार 18 जून, 2021, मानसिक तनाव, अवसाद एवं मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक परामर्श की व्यापकता की समझ समाज में आ गई है। बात चाहे नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य की ही क्यों न हो। इसी कड़ी में गुरूवार को बलौदाबाजार मानसिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने बाल संप्रेक्षण गृह का दौरा कर दो नाबालिगों के मानसिक स्थिति की जांच की। इन दोनों बच्चों को पुलिस द्वारा संप्रेक्षण गृह में लाया गया था। साथ ही बाल सम्प्रेक्षण गृह में पहले से रह रहे 13 नाबालिगों को तनाव अवसाद, घबराहट, चिंता से मुक्ति दिलाने के लिए माइंडफुलनेस का सत्र भी लिया, ताकि इनके मन को शांत कर उनमें सकारात्मकता का संचरण किया जा सके।

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जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. खेमराज सोनवानी के मार्गदर्शन में बाल संप्रेक्षण गृह में रह रहे बलौदाबाजार जिले के दो बच्चों की मानसिक स्थिति की जांच के लिए जिला नो़डल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार एवं जिला सलाहकार डॉ. सुजाता पांडे ने बाल सम्प्रेक्षण गृह, महासमुंद का दौरा किया। वहां रहने वाले सभी 13 नाबालिगों के लिए माइंडफुलनेस पर सत्र भी लिया गया। इस अवसर पर जिला नोडल अधिकारी डॉ राकेश कुमार ने बताया आज हर उम्र के लोग मानसिक तनाव के शिकार होते जा रहे हैं ,जिसको समझना अत्यंत आवश्यक है। शरीर को स्वस्थ भोजन के साथ साथ मन को सकारात्मक रखना ज़रूरी है जिससे नकारात्मक विचार हावी न हों। मेडिटेशन और माइंडफुलनेस जीवन में सकारात्मकता लाती है। योग ध्यान एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्रिया है , इसे बच्चों के जीवन में शामिल करने से वह मानसिक और शारिरिक रूप से स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सके। उल्लेखनीय है कि महासमुंद बाल सम्प्रेक्षण गृह में बलौदाबाजार के दो बच्चे भी रखे गए हैं। उन बच्चों की मानसिक स्थिति की जांच करने के लिए सीएमएचओ मार्गदर्शन में जिले के अधिकारियों द्वारा गुरूवार को बाल सम्प्रेक्षण गृह जाकर दोनों बच्चों की मानसिक स्थिति की जांच की गई। साथ ही अन्य बच्चों को माइंडफुलनेस के तरीके बताए गए।

माइंडफुलनेस सत्र में बताया गया - माइंडफुलनेस सत्र में बच्चों में तनाव, अवसाद, नकारात्मकता को दूर करने के तरीके बताये गये। वर्तमान समय में तनाव, अवसाद, नकारात्मकता और भय का माहौल है, ऐसे माहौल में आवश्यकता है सकारात्मकता की और वह माइंडफुलनेस से ही संभव है। जिला सलाहकार मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम डॉ सुजाता पांडे ने बताया “माइंडफुलनेस एक तकनीक या थेरेपी है, जिसमें व्यक्ति को वर्तमान में जीने की प्रेरणा दी जाती है। माइंडफुलनेस में हर परिस्थिति में कैसे सजग रहें, और ध्यान योग के माध्यम से उस परिस्थिति को महसूस करें इसे बताया जाता है। यह दिमाग को भविष्य की चिंता और भूतकाल के किसी कड़वे अनुभव, दोनों से दूर रखता है।“

माइंडफुलनेस के फायदे - नियमित 5 से 15 मिनट के माइंडफुलनेस अभ्यास से कई फायदे हैं जिनमें मुख्य रूप से भावनात्मक स्थिरता, तनाव मुक्त जीवन, क्रोध पर नियंत्रण, एकाग्रता का बढ़ना, मन में शांति और खुशी, आपसी समझ और सहयोग में बढ़ावा, अच्छी नींद आना तथा सही निर्णय लेने में आसानी होना आदि शामिल है।

 


जरा सा प्रोत्साहन बच्चों को प्रेरित करता है कुछ बेहतर करने के लिए - सीमा वर्मा

जरा सा प्रोत्साहन बच्चों को प्रेरित करता है कुछ बेहतर करने के लिए - सीमा वर्मा

17-Jun-2021

जरा सा प्रोत्साहन बच्चों को प्रेरित करता है कुछ बेहतर करने के लिए - सीमा वर्मा
कहते है बच्चों को जैसा महौल देंगे बच्चे वैसा ही जीवन शैली अपनाएगें इस कहावत को चरितार्थ किया है बिलासपुर की सीमा वर्मा ने 
बच्चों के बीच में लगातार प्रतियोगिता का आयोजन इनके द्वारा कराया जाता रहा है  बच्चों ने खुशी खुशी भाग भी लिया प्रतियोगिता में ,बच्चों को अलग अलग प्रकार की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना इतना अधिक पसंद आया कि सब बच्चे खुद से प्रतियोगिता आयोजित करने लगे 
इस बार बच्चों ने अपने मन से ,थर्माकोल,का प्रयोग कर घर ,गुलदस्ता ,आदि बनाए 
 लॉकडाउन कि वजह से बच्चे शिक्षा से दूर होते जा रहे, इन सब परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक रूपया मुहिम की संचालिका सीमा वर्मा बच्चों के लिए लगातार कार्यरत है, बच्चो को फ्री टयूशन क्लास के साथ अलग - अलग एक्टिविटी भी करवाती रही है , जैसे- फ्री योग क्लास,एनुअल फंक्शन के तर्ज पर- सपोर्ट एक्टिविटी,डांस प्रतियगिता, ड्रॉइंग प्रतियोगिता के साथ अलग अलग एक्टिविटी करवाती रही है,बच्चे भी उत्साह पूर्वक भाग लेते रहे,इस बार पुनः लॉकडाउन की स्थिति निर्मित हुई तो  एक बार फिर बच्चों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए सीमा वर्मा ने बच्चों को लगातार  उत्साहित करने के लिए ड्रॉइंग प्रतियोगिता,आर्ट एंड क्राफ्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया,जिसमे बच्चों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया,किसी ने संदेश देने वाले ड्रॉइंग बनाए,तो किसी ने मिट्टी से खूबसूरत घर,कुआ, शिवलिंग,कछुआ,बतख,किचन सेट,बैटरी से चलने वाली लैंप,पॉट के साथ सुंदर सुंदर क्राफ्ट बनाए, सीमा वर्मा ने बच्चों को  स्टेशनरी का समान कॉपी,पेन,पेंसिल,स्केल,रबर,कटर,के साथ चॉकलेट गिफ्ट में दिया
सीमा वर्मा लगातार बच्चो को कोरोनावायरस से बचने के उपाय भी लगातार बताती हैं जिसमे बच्चों को हाथ धोने के तरीके,मास्क लगाने , कोरोनागाइडलाइन का पालन करने के बारे में जागरूकता कार्यक्रम भी करती रहती है

 


कोविड अस्पताल से खुशी-खुशी घर लौटा नन्हा तौफ़ीक़

कोविड अस्पताल से खुशी-खुशी घर लौटा नन्हा तौफ़ीक़

14-Jun-2021

कोविड अस्पताल से खुशी-खुशी घर लौटा नन्हा तौफ़ीक़

-जिला कोविड अस्पताल टीम के प्रयास से अति गंभीर बच्चे ने जीती कोरोना से जंग

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बलौदाबाजार, 13 जून 2021, जिला कोविड अस्पताल बलौदाबाजार की टीम के साथ ही 13 वर्षीय तौफ़ीक़ अंसारी के परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं था। अति गंभीर स्थिति में तौफिक को 14 दिन पूर्व ही कोविड अस्पताल लाया गया था, अस्पताल की विशेष टीम के अथक प्रयास और सकुशल घर वापसी की कामना रंग लाई और रविवार को 13 वर्षीय तौफ़ीक़ अंसारी , सुहेला को सकुशल अस्पताल से छुट्टी दी गई।

30 मई को तौफ़ीक़ अंसारी को परिजन अस्पताल लेकर आए थे। बुखार, खांसी तथा सांस लेने में तकलीफ होने पर उसका कोविड एंटीजन टेस्ट किया गया। उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर तत्काल उसको भर्ती कर कोविड अस्पताल में डॉ शैलेंद्र साहू की टीम द्वारा पूरी मेहनत के साथ उपचार किया गया। भर्ती होने के दिन उसका आक्सीजन सेचुरेशन काफी कम था। उसे विशेष मास्क एन आर बी एम (Non Rebreather mask ) के द्वारा आक्सीजन दी गई। इसके अलावा सतत निगरानी में अन्य मरीज़ो से आइसोलेशन कर उपचार की की गई ताकि वह अधिक संक्रमित मरीजों से अलग रह सके। इस बारे में सीएमएचओ डॉ. खेमराज सोनवानी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा “बालक स्वस्थ होकर अपने परिजनों के साथ घर जा सका, इसमे परिवार जनों की तत्परता एवम चिकित्सकीय टीम के प्रति टीम के प्रति उनका विश्वास एवम सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डॉ. शैलेन्द्र एवं उनकी टीम द्वारा सतत निगरानी और मॉनिटरिंग का ही परिणाम है कि बालक सकुशल घर लौटा।“ बालक का उपचार की निःशुल्क व्यवस्था एवम मॉनिटरिंग की गई। बालक के स्वस्थ होकर घर लौटने पर टीम को बहुत खुशी एवम संतोष की अनुभूति हो रही है। जिला कलेक्टर महोदय ने पूरी कोविड टीम को बधाई दी”।

65 प्रतिशत ऑक्सीजन पर पहुंचा था अस्पताल- कोविड अस्पताल के इंचार्ज डॉ शैलेंद्र साहू ने बताया “जब बालक अस्पताल पहुंचा था तब बालक का आक्सीजन सेचुरेशन 65 प्रतिशत था। जो कि गम्भीर श्रेणी में आता है। हमारी टीम के लिए बालक को ठीक करना एक चुनौति से कम नहीं था क्योंकि बच्चे नियम और बताए गई चीजों को ठीक से फॉलो नहीं कर पाते हैं। मगर टीम के सदस्यों ने लगातार मॉनिटरिंग की और उसका ध्यान रखा और वह बालक स्वस्थ होकर 98 प्रतिशत आक्सीजन सेचुरेशन के साथ अपने परिजनों के साथ घर जा सका। डॉ. साहू ने बताया बालक के साथ उनकी मौसी रूखसाना भी केयर टेकर के रूप में साथ में मौजूद रहीं। वह पॉजिटिव भी थीं वह भी स्वस्थ्य होकर घर लौटी हैं।“

हल्की भी तबियत में खराबी लगे, पहुंचे अस्पताल- सीएमएचओ डॉ. सोनवानी ने लोगों से अपील करते हुए कहा “बच्चे हों या बड़े उनकी तबियत में थोड़ा सा भी परिवर्तन लगे उन्हें फौरन अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। छोटे बच्चों को लेकर तो खास सतर्कता जरूरी है, क्योंकि लापरवाही की वजह से ज्यादातर कोविड मरीजों की स्थिति गंभीर होती है। टेस्टिंग में देर नहीं करने और परिजनों द्वारा जागरूकता का परिचय देते हुए जल्द ही अस्पताल मरीज को लेकर पहुंचने पर काफी हद तक कोविड से होने वाली मृत्यु को टाला जा सकता है।“

 

 


घर-घर जाकर सर्वे दल करेगा 68,000 लोगों की मलेरिया जांच

घर-घर जाकर सर्वे दल करेगा 68,000 लोगों की मलेरिया जांच

12-Jun-2021

घर-घर जाकर सर्वे दल करेगा 68,000 लोगों की मलेरिया जांच

15 जून से 31 जुलाई तक चलाया जाएगा मलेरिया मुक्त अभियान

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रायपुर ,जिले को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए पांच ब्लॉकों के चिंहित ग्रामों में घर-घर जाकर मलेरिया के मरीजों की खोज की जाएगी। इस अभियान में 177 ग्रामों के 68,000 लोगों का सर्वे कर मलेरिया के संभावित मरीजों की जांच की जाएगी। यह अभियान मानसून के आगमन के साथ ही 15 जून से 31 जुलाई  तक चलाया जाएगा|

सीएमएचओ डॉ. जेएल उइके ने बताया पांच ब्लॉकों- भानूप्रतापपुर, कांकेर, दुर्गकोंदल, कोयलीबेड़ा व अंतागढ़ के 67 उपस्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत मलेरिया पॉजिटिविटी रेट 0.2 से अधिक वाले ग्रामों का चयन किया गया है। इस अभियान के द्वारा मलेरिया के कारणों को शुरुआत से पहले ही रोक कर जिले में मलेरिया धनात्मक दर को कम किया जाना है।

मानसून के आगमन के साथ जगह-जगह जल जमाव होने के अलावा  मच्छरों का प्रकोप बढ़ भी जाता है।ऐसे में मलेरिया  मच्छरों के  काटने से फैलने का खतरा बना रहता है जिसे देखते हुए बारिश के प्रारंभ में ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का चौथे चरण प्रारंभ किया जा रहा है।

इसके तहत् जिले में संचालित होने वाले सर्वे में ग्रामवार सर्वे दल का गठन किया गया है। इस दल में महिला-पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता तथा उस गांव अथवा पारा से संबंधित मितानिन को सम्मिलित किया जाएगा। सर्वे दल द्वारा गांव के प्रत्येक घरों में जाकर घर के सभी सदस्यों की सर्दी, खांसी, बुखार व मलेरिया की पहचान के लिए रक्त जांच की जाएगी। आरटीपीसीआर जांच में धनात्मक पाये जाने पर दल द्वारा अपने समक्ष मलेरिया दवा की प्रथम खुराक मरीज को खिलाई जाएगी। बची हुई खुराकों के लिए निर्धारित दिन में स्थानीय मितानिन के द्वारा मरीज के घर पहुंचकर दवा खिलायी जाएगी। इसके साथ ही सर्वे दल द्वारा मरीज की जानकारी के संबंध में सामान्य जानकारियों को दर्ज कर रजिस्टर संधारण किया जाएगा। उपचार के बाद मितानिन व स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा मरीज का फालोअप रिपोर्ट तैयार किया जाएगा।

सीएमएचओ डॉ. जेएल उइके ने बताया, सर्वे दल की मॉनिटरिंग के लिए सेक्टर सुपरवाइजर, बीएमओ द्वारा की जाएगी। जिला मलेरिया नियंत्रण नोडल अधिकारी डॉ डी.के. रामटेके द्वारा जिला स्तर पर सर्वे दल के लिए जरुरी संसाधन भी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि जिला को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए अभियान कारगार साबित हो सके।

डॉ. उइके ने बताया, सर्वे दल द्वारा सर्वे के साथ-साथ घर के आस-पास जल स्रोत नियंत्रण का कार्य किया जायेगा जिसके अंतर्गत घर के आस-पास ऐसे सभी स्थान जहां पर पानी का जमाव अथवा दलदली भूमि है, ऐसे स्थानों पर मच्छर पनपने की संभावना को देखते हुए जल जमाव वाले गढ्ढों को पाटने, खाली पड़ी मटकों, टायरों, बरतनों में जल जमाव न होने देने, नालियों की सफाई करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके साथ ही घर के सभी सदस्यों को मच्छरदानी का उपयोग करने, सायंकाल में ढके हुए कपड़े पहनने तथा मच्छरों के काटने से बचने की सलाह भी दी जायेगी। मच्छर से बचाव के साथ कोरोना से बचाव के लिए भी जागरूक किया जायेगा। हर गांव में मितानिन द्वारा गांव की दिवारों पर नारा लेखन के माध्यम से भी जागरुकता प्रसार का कार्य किया जायेगा।

 


कोरोना-काल में भी खूब काम आई मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना की मोबाइल मेडिकल यूनिटें

कोरोना-काल में भी खूब काम आई मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना की मोबाइल मेडिकल यूनिटें

10-Jun-2021

5 लाख से ज्यादा मरीजों को मिला नियमित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ
योग्य डाक्टर और प्रशिक्षित टीम घर-घर तक पहुंचा रही है जांच-उपचार-दवा की सुविधाएं
सभी 14 नगर निगमों की 1600 बस्तियों को मिल रही हैं सेवाएं
उपलब्धि को देखते हुए इस योजना के विस्तारीकरण
के लिए बनेगी शीघ्र कार्य योजना

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छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना की मोबाइल मेडिकल यूनिटों (एमएमयू) से झुग्गी बस्तियों में निवासरत लोगों को नियमित जांच-उपचार-दवा का लाभ तो मिल ही रहा है, कोरोना-काल में भी संक्रमण को नियंत्रित करने में ये बहुत काम की साबित हुई हैं। योजना की शुरुआत के बाद से अब तक इस योजना के तहत दस हजार शिविरों के आयोजन किए जा चुके हैं। करीब पांच लाख मरीजों तक मुफ्त जांच, उपचार और दवा की सुविधा पहुंचाई जा चुकी है।

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 राज्य स्थापना दिवस 01 नवंबर 2020 को मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना का शुभारंभ सांसद श्री राहुल गांधी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री श्री बघेल द्वारा किया गया था। राज्य के सभी 14 नगर पालिक निगमों में आधुनिक उपकरण से सुसज्जित 60 एमएमयू स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं। इन मोबाइल मेडिकल यूनिटों में एमबीबीएस डाक्टर द्वारा लगभग 1600 स्लम बस्तियों में कैम्प लगाकर मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। एमबीबीएस डाक्टर के साथ कैम्प में मुफ्त दवा वितरण हेतु फार्मासिस्ट, मुफ्त लैब टेस्ट करने हेतु लैब टेक्निशियन, मरीजों की सेवा के लिए एएनएम तथा एमएमयू चालक सेवाएं दे रहे हैं।

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   पारा-मोहल्ला में घर-घर पहुंच इलाज की सुविधा प्रदान करने वाली इस स्लम स्वास्थ्य योजना ने अब तक लगभग 05 लाख मरीजों का इलाज किया है। इन मरीजों में से लगभग एक लाख बीस हजार मरीजों का मुफ्त लैब टेस्ट किया गया है। एमएमयू में  41 प्रकार के विभिन्न लैब टेस्ट किये जाते हैं। इनमें खून, मल-मूत्र , थूक, टीबी, थायराइड, मलेरिया, टाईफाईड आदि की जांच कुशल लैब टेक्निशियन द्वारा अत्याधुनिक मशीनों से की जाती है। एमएमयू में मुफ्त दवा वितरण सेवा का लाभ लेते हुये लगभग चार लाख चालीस हजार मरीजों ने डाक्टर की पर्ची के आधार पर फार्मासिस्ट से सेवाएं प्राप्त की है। एमएमयू में पैरासेटामाल, ब्रुफेन, मेटफार्मिन, एटेनोलोल, बी-कामप्लेक्स, आयरन, फोलिकएसिड, सिफालेक्सिन, एमोक्सिसिलिन, लिमसी, ओआरएस, टिटेनस इंजेक्शन, रैबिज इंजेक्शन आदि दो सौ प्रकार की दवाईयों की उपलब्धता  सुनिश्चित की जा रही है। स्लम स्वास्थ्य  योजना की एमएमयू गाड़ियों में ब्लड-प्रेशर मापने की  मशीन, शुगर टेस्ट की मशीन, ईसीजी मशीन, आक्सीजन सिलेण्डर आदि की भी व्यवस्था है।  पांच लाख  मरीजों का ईलाज पूर्ण करने की उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, जिला कलेक्टर तथा  एमएमयू की टीम की प्रशंसा की है।

    रायपुर में 15 एमएमयू से लगभग 1.26 लाख, दुर्ग में 4 एमएमयू से लगभग 35 हजार, भिलाई में 3 एमएमयू से लगभग 34 हजार, राजनांदगांव में एमएमयू से लगभग 33 हजार, बिलासपुर में 4 एमएमयू से लगभग  51 हजार, कोरबा में 8 एमएमयू से लगभग 55 हजार, रायगढ़ में 4 एमएमयू से लगभग 33 हजार, अंबिकापुर में 4 एमएमयू से लगभग 26 हजार, जगदलपुर में 4 एमएमयू से लगभग 28 हजार, चिरमिरी में 2 एमएमयू से लगभग 11 हजार, रिसाली में 2 एमएमयू से लगभग 19 हजार, धमतरी में  2 एमएमयू से लगभग 18 हजार, भिलाई-चरोदा में 2 एमएमयू से लगभग 19 हजार एवं बीरगांव में 2 एमएमयू से लगभग 17 हजार मरीजों ने स्वास्थ्य सेवा का लाभ प्राप्त किया है।


महिलाओं के लिए दाई-दीदी क्लीनिक का संचालन

  मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की जयंती 19 नवंबर 2020 के दिन रायपुर, बिलासपुर, भिलाई, शहरों में महिला  स्पेशल ‘‘दाई-दीदी क्लीनिक भी ’प्रारंभ किए गए हैं। दाई-दीदी क्लीनिक के माध्यम से रायपुर शहर में 163 कैम्प के माध्यम से 7958 महिलाओं का ईलाज किया गया। इसी प्रकार भिलाई शहर में 165 कैम्प के माध्यम से 9802 महिलाओं का ईलाज और बिलासपुर शहर में 158 कैम्प के माध्यम से 11858 महिलाओं का ईलाज किया गया। दाई-दीदी क्लीनिक की एमएमय में महिला एम.बी.बी.एस. डाक्टर, महिला एनएमए, महिला फार्मासिस्ट अपनी सेवाएं प्रदान करती हैं, जिससे महिला मरीजों को अपना ईलाज कराने में संकोच नहीं होता है। यह देश की एकमात्र महिला स्पेशल एमएमयू परियोजना  है।

    कोरोना-काल में भी एमएमयू की टीम द्वारा सतत् सेवाएं प्रदान की गई। ईलाज के साथ-साथ विभिन्न शहरों में लगभग अड़तालीस हजार नागरिकों का  टीकाकरण भी एमएमयू में किया गया है।  
    इस  योजना का संचालन नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के द्वारा जिला स्तर पर गठित अर्बन पब्लिक सर्विस सोसायटी के माध्यम से किया जाता  है। योजना की सतत् दैनादिन मानिटरिंग हेतु चेहरा पढ़कर उपस्थिति दर्ज कराने वाली मोबाईल एप्प निष्ठा, रियल टाईम जीपीएस, सीसीटीवी कैमरा आदि की सुविधा उपलब्ध है। जन शिकायत निराकरण हेतु निदान 1100 टोल-फ्री नंबर की सुविधा के साथ-साथ फीडबैक मशीन की सुविधा भी नगारिकों हेतु एमएमयू में उपलब्ध है। इस योजना की मानिटरिंग हेतु विभाग द्वारा डेडिकेटेड एरिया प्रोजेक्ट मैनेजर की टीम शहर के नोडल अधिकारियों का  सहयोग करती है। इस योजना की निरंतर समीक्षा नगरीय प्रशासन मंत्री डा. शिव कुमार डहरिया द्वारा की जा रही है।

    एमएमयू में उपलब्ध सुविधाओं एवं कड़ी निगरानी एवं योजना की डिजाईन का ही परिणाम है कि, इस योजना को शहरों की जनता द्वारा अपनाया गया है एवं पांच लाख मरीजों का ईलाज का लक्ष्य योजना की टीम एवं राज्य शहरी विकास अभिकरण द्वारा पूर्ण किया गया है। इस अवसर पर नगरीय प्रशासन मंत्री डा. शिव कुमार डहरिया ने एमएमयू की टीम को बधाई दी है । उन्होंने विभागीय सचिव श्रीमती अलेरमल मंगई डी एवं मुख्य कार्य पालन अधिकारी श्री सौमिल रंजन चौबे को भी बधाई दी तथा योजना विस्तारीकरण हेतु शीघ्र कार्य योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं।


टीकाकरण को नियमित सत्र हुआ आयोजित  आंगनबाड़ी केंद्र पर हुआ नियमित टीकाकरण का आयोजन

टीकाकरण को नियमित सत्र हुआ आयोजित आंगनबाड़ी केंद्र पर हुआ नियमित टीकाकरण का आयोजन

09-Jun-2021

रायपुर कोरोना संकटकाल में भी बच्चों व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग और आईसीडीएस की ओर से कई कार्यक्रम चलाये जा रहें है। इसी क्रम में नियमित टीकाकरण सत्र का आयोजन बीरगॉव के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 24 पर किया गया। साथ ही इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर आई हुई गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को स्तनपान की आवश्यकता के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त कोविड-19 के विषय में जागरूक करते हुए उन्हें शारीरिक दूरी ,मास्क और  हाथ की धुलाई के बारे में बताया गया। नियमित टीकाकरण सत्र में कोविड-19 गाइडलाइन का भी पालन किया गया। केंद्र पर हो रहे टीकाकरण की मॉनिटरिंग सीपीएम सुश्री ज्योत्सना ग्वाल द्वारा भी की गई ।

मीडिया प्रभारी गजेंद्र डोंगरे ने नियमित टीकाकरण सत्र की जानकारी देते हुए बताया,“ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर बीरगांव के शिवाजी नगर वार्ड 31 में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र 24 पर नियमित टीकाकरण सत्र का आयोजन किया गया । जिसमें प्रसव पूर्व जांच के अंतर्गत 2 महिलाओं को टीडी(Tetanus and adult diphtheria)का टीका लगाया गया । साथ ही 5 महिलाओं का चेकअप और फॉलोअप किया गया वहीं केंद्र पर 10 बच्चों को ड्यू डोज के अनुसार टीके लगाए गए । बहुत दिनों बाद केंद्र को खुला देख कर बच्चे खुशी खुशी टीकाकरण कराने आए।”

बीरगांव सब सेंटर की एएनएम शशि कला ठाकरे ने बताया ‘’नियमित टीकाकरण के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने गर्भवती महिलाओं को कोरोना संक्रमण से बचाव और टीकाकरण की जरूरत तथा महत्व के बारे में जागरूक किया। जिसमें एएनएम और मितानिन ने भी सहयोग किया।आंगनबाड़ी केंद्र पर आये लाभार्थी और उसके अभिभावकों को बताया गया किअगर किसी को बुखार, सर्दी-खांसी के लक्षण आते है या हो तो वह तुरंत नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी जॉच करा कर नियमित इलाज करवायें । इसके साथ ही व्यक्तिगत दूरी, मुंह को ढककर रखने और कम से कम  40 सेकेंड तक साबुन से हाथ धोने की जानकारी भी दी गई है।

क्यों ज़रूरी है छह माह तक नियमित स्तनपान:

बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध ना हो इसलिए 0 से 6 माह के बच्चे को सिर्फ स्तनपान और 6 माह के बाद शिशुओं को स्तनपान के साथ ऊपरी पौष्टिक आहार भी देना चाहिए। 6 माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे से बचाया जा सकता है।

क्या है टीकाकरण:

टीका एक जीवन रक्षक कवच है जो बच्चे में कवच बनकर उसके जीवन की सुरक्षा करता है। टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है ताकि नवजात शिशु को कोई भी संक्रामक रोग छू न सकें। बच्चों को टीका लगवाना संक्रामक रोगों की रोकथाम में सबसे सस्ती और सबसे प्रभावी विधि है।

प्राथमिक टीकाकरण

नवजात शिशु संक्रामक रोगों से बचे रहें और उसके शरीर में रोगों से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत हो इसके लिए नवजात शिशु के जन्म के समय से ही प्राथमिक टीकाकरण किया जाता है। समय समय पर दिए जाने वाले टीके बच्चे को कई जान लेवा बीमारियों से बचाते है इसलिए समय पर बच्चों को टीकाकरण अवश्य लगवाएं।

बूस्टर टीकाकरण

बूस्टर खुराकें प्राथमिक टीकाकरण के प्रभाव को बढ़ाने के लिए दी जाती हैं। ताकि जिन शिशुओं में पहले टीके के बाद प्रतिरक्षण क्षमता विकसित नही हुई हो, उन्हें बूस्टर खुराक देकर रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित की जाए ताकि शिशु हमेशा रोगों से बचा रहें।

सार्वजनिक टीकाकरण

जब किसी जगह किसी विशेष बीमारी का भयावह रूप बच्चों पर दिखने लगता है तो उस बीमारी से सभी बच्चों की रक्षा के लिए और उस बीमारी को जड़ से अंत करने के लिए सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जाता है। जैसे पल्स पोलियों अभियान सरकार के द्वारा पोलियो को जड़ से अंत करने के लिए चलाया गया और जनता के सहयोग से यह अभियान सफल रहा जिससे आज भारत पोलियो मुक्त बन चुका है।

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किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ गांव-गांव में प्रदर्शन : भाजपा नेताओं के कार्यालयों, घरों के सामने जलाई प्रतियां

किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ गांव-गांव में प्रदर्शन : भाजपा नेताओं के कार्यालयों, घरों के सामने जलाई प्रतियां

07-Jun-2021

किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ गांव-गांव में प्रदर्शन : भाजपा नेताओं के कार्यालयों, घरों के सामने जलाई प्रतियां

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संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के विभिन्न घटक संगठनों ने आज गांव-गांव में किसान विरोधी काले कानूनों की प्रतियां जलाई। कई स्थानों पर ये प्रदर्शन भाजपाई नेताओं के घरों और कार्यालयों के आगे भी आयोजित किये गए। ये प्रदर्शन किसान आंदोलन के 20 से ज्यादा संगठनों की अगुआई में कोरबा, राजनांदगांव, सूरजपुर, सरगुजा, दुर्ग, कोरिया, बालोद, रायगढ़, कांकेर, चांपा, मरवाही, बिलासपुर, धमतरी, जशपुर, बलौदाबाजार व बस्तर सहित 20 से ज्यादा जिलों में आयोजित किये गए। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति व किसान सभा सहित कुछ संगठनों ने कोरबा व बिलासपुर में आज के इस प्रदर्शन को पर्यावरण दिवस के साथ भी जोड़कर मनाया। बिलासपुर में भाजपा सांसद अरुण साव के बंगले के सामने प्रदर्शन किया गया। किसान संघर्ष समन्वय समिति के कोर ग्रुप के सदस्य हन्नान मोल्ला, छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के संयोजक सुदेश टीकम और छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते ने इस सफल और प्रभावशाली आंदोलन के लिए प्रदेश के किसान समुदाय को बधाई दी है और कहा कि किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ पिछले एक साल से जारी यह आंदोलन इन काले कानूनों की वापसी तक जारी रहेगा।

आज यहां जारी एक बयान में छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के नेताओं ने बताया कि पिछले साल 5 जून को ही इन किसान विरोधी कानूनों को अध्यादेशों के रूप में देश की जनता पर थोपा गया था। इन कानूनों का असली मकसद न्यूनतम समर्थन मूल्य और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था से छुटकारा पाना है। उन्होंने कहा कि देश मे खाद्य तेलों की कीमतों में हुई दुगुनी वृद्धि का इन कानूनों से सीधा संबंध है। इन कानूनों के बनने के कुछ दिनों के अंदर ही कालाबाज़ारी और जमाखोरी बढ़ गई है और बाजार की महंगाई में आग लग है। इसलिए ये किसानों, ग्रामीण गरीबों और आम जनता की बर्बादी का कानून है। 

उन्हों कहा कि इस देश का किसान आंदोलन अपनी खेती-किसानी को बचाने के लिए इस देश के पर्यावरण और जैव-विविधता को बचाने तथा विस्थापन के खिलाफ भी लड़ रहा है। 5 जून 1974 को ही लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने तत्कालीन केंद्र सरकार के तानाशाहीपूर्ण रूख के खिलाफ 'संपूर्ण क्रांति' का बिगुल फूंका था। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संपूर्ण क्रांति के आंदोलन ने देश की आम जनता को आपातकाल से मुक्ति दिलाई थी, उसी प्रकार कृषि कानूनों के खिलाफ यह देशव्यापी किसान आंदोलन भी देश की जनता को मोदी सरकार की कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों से मुक्ति दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है। 

*(छत्तीसगढ़ किसान आन्दोलन की ओर से सुदेश टीकम, संजय पराते (मो : 094242-31650), आलोक शुक्ला, रमाकांत बंजारे, नंदकुमार कश्यप, आनंद मिश्रा, दीपक साहू, जिला किसान संघ (राजनांदगांव), छत्तीसगढ़ किसान सभा, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति (कोरबा, सरगुजा), किसान संघर्ष समिति (कुरूद), आदिवासी महासभा (बस्तर), दलित-आदिवासी मजदूर संगठन (रायगढ़), दलित-आदिवासी मंच (सोनाखान), भारत जन आन्दोलन, गाँव गणराज्य अभियान (सरगुजा), आदिवासी जन वन अधिकार मंच (कांकेर), पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति (बंगोली, रायपुर), उद्योग प्रभावित किसान संघ (बलौदाबाजार), रिछारिया केम्पेन, आदिवासी एकता महासभा (आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच), छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान सभा, छत्तीसगढ़ किसान महासभा, परलकोट किसान कल्याण संघ, अखिल भारतीय किसान-खेत मजदूर संगठन, वनाधिकार संघर्ष समिति (धमतरी), आंचलिक किसान संघ (सरिया) आदि संगठनों की ओर से जारी संयुक्त विज्ञप्ति)*


हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना हमारा  मुख्य ध्येय: मुख्यमंत्री श्री बघेल

हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना हमारा मुख्य ध्येय: मुख्यमंत्री श्री बघेल

04-Jun-2021

हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना हमारा  मुख्य ध्येय: मुख्यमंत्री श्री बघेल

मुख्यमंत्री ने किया स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश स्कूल मुंगेली का लोकार्पण
राज्य में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल की संख्या बढ़कर हुई 171

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 मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय से वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश स्कूल मुंगेली का लोकार्पण किया। इसका निर्माण लगभग 5 करोड़ रूपए की राशि से किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जिला प्रशासन मुंगेली द्वारा प्रकाशित कैरियर मार्गदर्शिका का विमोचन किया और स्कूली बच्चों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश स्कूल मुंगेली के छात्र-छात्राओं से बात-चीत कर उन्हें प्रोत्साहित भी किया। वर्चुअल कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष श्री धरमलाल कौशिक भी जुड़े। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू तथा प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला भी उपस्थित थे। 
    मुख्यमंत्री श्री बघेल ने वर्चुअल लोकार्पण समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए कृत-संकल्पित है। सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास भी कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के गरीब से गरीब बच्चे को निजी स्कूलों की तरह सुविधाएं मिले, वे भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर भावी प्रतियोगिताओं के लिए स्वयं को तैयार कर सकें, इसके लिए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की स्थापना की गई है। राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में अवसरों की असमानता को दूर करने के लिए हमारी सरकार ने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की श्रृंखला स्थापित करने का जो काम शुरू किया था, आज हमने उसी दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि पिछले साल हमने राज्य में 52 स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश स्कूल स्थापित किए थे। अब इस साल 119 और स्कूल शुरू किए जा रहे हैं। इस प्रकार राज्य में ऐसे विशेष स्कूलों की संख्या बढ़कर अब 171 हो चुकी है।
    मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस अवसर पर आगे कहा कि हमारा उद्देश्य बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा देने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व का निर्माण भी करना है। इसमें स्कूल के परिवेश को इस तरह विकसित किया जा रहा है, जिससे हर बच्चा अपने व्यक्तित्व का चहुंमुखी विकास कर सकें। उन्होंने बताया कि इसके तहत राज्य में सत्र 2020-21 में संचालित 52 स्कूलों में कक्षा पहली से 12वीं तक 20 हजार से अधिक बच्चों ने प्रवेश लिया था। नये खोले जा रहे 119 स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कोरोना-काल में सभी क्षेत्रों के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हुई। राज्य सरकार ने पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे व्यवस्था की कि बच्चों को सतत रूप से शिक्षा मिलती रहे। कोविड-काल में बहुत से बच्चों ने अपने अभिभावकों को खो दिया है। कोरोना ने उनकी शिक्षा और भविष्य को लेकर भी संकट खड़ा कर दिया है। राज्य सरकार ने ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उनके शिक्षा और भविष्य निर्माण की जिम्मेदारी उठाई है। इसके लिए ‘छत्तीसगढ़ महतारी दुलार योजना’ शुरु की गई है। इसके अंतर्गत बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने के साथ-साथ छात्रवृत्ति भी दी जाएगी। कोरोना से अपने अभिभावकों को खो देने वाले बच्चे यदि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें प्रवेश में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। 
    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि वर्तमान की आवश्यकता के अनुरूप बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने में स्वामी आत्मानंद स्कूल का अहम योगदान होगा। इसी तरह स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि हमारी सरकार बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सतत् प्रयासरत है। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने मुंगेली में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल के खुलने पर बधाई और शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को विधायक श्री धरमजीत सिंह, विधायक श्री पुन्नूलाल मोहले तथा सांसद श्री अरूण साव ने भी सम्बोधित किया। 


बांकीमोंगरा के 12 गांवों के लोग खेती-किसानी से होंगे वंचित, किसान सभा ने कहा : जिम्मेदार कोरबा सहकारी बैंक

बांकीमोंगरा के 12 गांवों के लोग खेती-किसानी से होंगे वंचित, किसान सभा ने कहा : जिम्मेदार कोरबा सहकारी बैंक

03-Jun-2021

GCN

कोरबा : कोरबा जिला सहकारी बैंक द्वारा ग्राम सुमेधा में नव स्थापित आदिवासी सेवा सहकारी समिति के पास रिकॉर्ड न भेजने के कारण बांकीमोंगरा क्षेत्र के 12 गांवों के किसान इस साल खेती-किसानी से वंचित होने जा रहे हैं। उन्हें न खाद-बीज मिल रहा है और न लोन। प्रभावित गांवों में सेमीपली, कुमग़री, नागिनभाठा, केन्दईखार, सुमेधा, लाटा, अगारखार, रोहिना, सलियाभाठा, मडवाढ़ोढा, पुरैना तथा गजरा आदि गांवों के किसान शामिल हैं। छत्तीसगढ़ किसान सभा ने इन गांवों के किसानों के साथ आज कलेक्टर का दरवाजा खटखटाकर किसानों को इस संकट से उबारने की मांग की है। किसान सभा नेताओं के साथ प्रतिनिधिमंडल में रामेश्वर सिंह कंवर, सुनेश्वर सिंह कंवर, अजीत सिंह, शिवरतन सिंह आदि ग्रामीण भी शामिल थे।

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छत्तीसगढ़ किसान सभा के कोरबा जिला अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर व सचिव प्रशांत झा ने बताया कि उक्त 12 गांवों के किसान पहले कनबेरी स्थित सहकारी समिति से संलग्न थे, लेकिन इस साल के अंत मे उन्हें सुमेधा में नव स्थापित सहकारी समिति से संबद्ध कर दिया गया। इसी नई समिति के पास उन्होंने पिछले इस वर्ष अपना धान बेचा व भुगतान भी पाया। लेकिन अब खेती-किसानी के लिए इस समिति द्वारा उन्हें इस आधार पर खाद-बीज-लोन देने से इंकार किया जा रहा है कि पुरानी समिति से इन गांवों के किसानों का कोई रिकॉर्ड उसके पास अभी तक नहीं आया है, जबकि पुरानी समिति का कहना है कि ये रिकॉर्ड उन्होंने कोरबा जिला सहकारी बैंक के पास भेज दिया है और अब बैंक ही संबंधित समिति के पास रिकॉर्ड भिजवाने के लिए जिम्मेदार है।

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किसान सभा नेताओं ने कहा है कि कोरोना काल में जबकि देश की अर्थव्यवस्था रसातल में चली गई है, इस देश के किसानों ने भुखमरी की मार झेलते हुए भी कृषि की विकास दर को थामे रखा है। इसके बावजूद बैंकों का रवैया खेती-किसानी को चौपट करने वाला है। 

किसान सभा के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज ही कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर किसानों की इस समस्या से अवगत कराया और आवश्यक कार्यवाही हेतु सहकारी बैंक को निर्देशित करने की मांग की है। किसानों ने कोरबा जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक से भी मिलकर छुरीकला सहकारी समिति के पास रिकॉर्ड शीघ्र भिजवाने की मांग की है, ताकि किसानों को सही समय पर खाद, बीज व लोन मिल सके।

जवाहर सिंह कंवर, अध्यक्ष
 (मो) 079993-17662
प्रशांत झा, सचिव
(मो) 076940-98022
छत्तीसगढ़ किसान सभा, जिला कोरबा


5 जून को भाजपा नेताओं के कार्यालयों, घरों के सामने जलाई जाएगी किसान विरोधी कानूनों की प्रतियां

5 जून को भाजपा नेताओं के कार्यालयों, घरों के सामने जलाई जाएगी किसान विरोधी कानूनों की प्रतियां

02-Jun-2021

5 जून को भाजपा नेताओं के कार्यालयों, घरों के सामने जलाई जाएगी किसान विरोधी कानूनों की प्रतियां

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संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर छत्तीसगढ़ किसान सभा व आदिवासी एकता महासभा सहित छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के विभिन्न घटक संगठन 5 जून को भाजपा सांसदों, विधायकों और अन्य भाजपाई जन प्रतिनिधियों के कार्यालयों और घरों के समक्ष किसान विरोधी तीनों कानूनों की प्रतियां जलाएंगे तथा इन कानूनों की वापसी की मांग करेंगे।

आज यहां जारी एक बयान में छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने कहा कि पिछले साल 5 जून को ही इन किसान विरोधी कानूनों को अध्यादेशों के रूप में देश की जनता पर थोपा गया था। तभी से इन अध्यादेशों और बाद में बने कानूनों के खिलाफ देश की आम जनता संघर्ष कर रही है और पिछले 6 महीनों से दिल्ली की सीमाओं पर देश के लाखों किसानों का ऐतिहासिक धरना जारी है।

उल्लेखनीय है कि 5 जून को ही लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 1974 में तत्कालीन केंद्र सरकार के तानाशाहीपूर्ण रूख के खिलाफ 'संपूर्ण क्रांति' का बिगुल फूंका था। यह जन आंदोलन देश में संवैधानिक मूल्यों पर आधारित शासन देने और गरीब मजदूर-किसानों को खुशहाल बनाने वाली नीतियों को लागू करने की अवधारणा पर आधरित थी। देश के किसान संगठन आज इसी अवधारणा पर आधारित जन आंदोलन का संचालन कर रहे हैं।

किसान सभा नेताओं ने कहा कि जिस प्रकार संपूर्ण क्रांति के आंदोलन ने देश की आम जनता को आपातकाल से मुक्ति दिलाई थी, उसी प्रकार कृषि कानूनों के खिलाफ यह देशव्यापी किसान आंदोलन भी देश की जनता को मोदी सरकार की कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों से मुक्ति दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने आम जनता के सभी तबकों से इस देशभक्तिपूर्ण संघर्ष को मजबूत करने के लिए अपना योगदान देने की अपील की है। उन्होंने बताया कि इस संघर्ष के क्रम में 5 जून को छत्तीसगढ़ और पूरे देश में देश की जनता पर इन किसान विरोधी कानूनों को थोपने वाली पार्टी भाजपा के जन प्रतिनिधियों के कार्यालयों व घरों के सामने इन कानूनों की प्रतियां जलाई जाएंगी।

*संजय पराते*, अध्यक्ष
(मो) 094242-31650
*ऋषि गुप्ता*, महासचिव
(मो) 094062-21661


यमराज निकलेंगे चित्रगुप्त के साथ पढ़ाएंगे तंबाकू निषेध का पाठ

यमराज निकलेंगे चित्रगुप्त के साथ पढ़ाएंगे तंबाकू निषेध का पाठ

31-May-2021

यमराज निकलेंगे चित्रगुप्त के साथ पढ़ाएंगे तंबाकू निषेध का पाठ

रायपुर 30 मई 2021 ।

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर ज़िला तंबाकू निषेध प्रकोष्ठ के द्वारा तंबाकू उत्पाद और उसके सेवन से होने वाले नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ तंबाकू मुक्ति का अभियान चलाया जाएगा । जिससे आने वाले समय में लोगों को तंबाकू से होने वाली हानिकारक बीमारियों से समय रहते सचेत किया जाए और बचाया जा सके ।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर आयोजित होने वाली गतिविधियों को जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मीरा बघेल के नेतृत्व में और जिला कार्यक्रम प्रबंधक मनीष मेजरवार के मार्गदर्शन में किया जाएगा । कार्यक्रम को सफल बनाने में सोशल वर्कर नेहा सोनी और अजय बैस का सहयोग रहेगा ।

ज़िला तंबाकू निषेध प्रकोष्ठ की ज़िला सलाहकार डॉ. सृष्टि यदु ने बताया ‘’तंबाकू निषेध दिवस पर इस बार की थीम 'commit to quit' है, जिसके माध्यम से लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। तंबाकू निषेध दिवस के मौके पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर इससे बचाव की जानकारी दी जाएगी। जनजागरुकता हेतु अस्पतालों और कोविड केयर सेंटर के बाहर प्रेरक बैनर-पोस्टर लगाए जाएंगे।‘’

‘’इस बार विशेष कैरेक्टर के रुप में यमराज चित्रगुप्त के साथ निकलेंगे और शहर के मुख्य चौराहों पर तंबाकू सेवन से होने वाले खतरे के पाठ को पढ़ाएंगे साथ ही नशा मुक्ति के संचालित केंद्र की जानकारी भी लोगों को बतायेगें ।“

“ई रिक्शा पर जागरुकता रथ निकाला जायेगा । रथ के माध्यम से लोगों में जन जागरूकता फैलाने के लिए तंबाकू निषेध से जुड़े संदेशों और नारों को प्रचारित किया जाएगा । जिसमें धूम्रपान,तंबाकू सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जाएगा । वेबीनार के माध्यम से नशा मुक्ति पर परिचर्चा आयोजित होगी । 18 जून तक नशा मुक्ति सहमति पत्र भरवाने वाले लोगों को पुरस्कृत भी किया जाएगा । मास्क और पंपलेट का वितरण भी चौक-चौराहों पर किया जाएगा । मुख्य स्थानों पर प्रेरक पोस्टर प्रदर्शित कर जागरूक करने का काम भी किया जायेगा । सीएमएचओ कार्यालय के बाहर भी तंबाकू निषेध और तंबाकू से होने वाली हानियां के बैनर को प्रदर्शित कर लोगों को जागरूक किया जाएगा ।“

डॉ. यदु ने कहा तंबाकू सेवन पर नियंत्रण के लिए जिले में विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर भी जिले के सभी विकासखंडों में कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए जनजागरूकता का प्रयास किया जाएगा। प्रेरक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लोगों को तंबाकू का सेवन करने तथा धूम्रपान से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। गतिविधियों की सार्थकता के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।‘’

क्या होता है तंबाकू सेवन से....

शरीर के विभिन्न अंग जैसे- मुंह, गला, आहार नली, फेफड़ा, आमाशय, लीवर, किडनी व मस्तिष्क आदि के खराब होने का खतरा रहता है। साथ ही तंबाकू के सेवन से कैंसर, मानसिक रोग व नपुंसकता जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।

क्या कहती है सर्वे रिपोर्ट...

ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2016-17 के अनुसार छत्तीसगढ़ में 39.1 प्रतिशत लोग किसी न किसी प्रकार से तंबाकू का सेवन करते हैं। यह देश की औसत 28.4 प्रतिशत से अधिक है। इसमें से 7 प्रतिशत लोग ऐसे थे जिन्होंने 15 वर्ष की उम्र से पहले ही तंबाकू का सेवन शुरू किया था। 29 प्रतिशत ने 15-17 वर्ष की उम्र से और 35.4 प्रतिशत ने 18-19 वर्ष में सेवन शुरू किया। यानी औसतन 18.5 वर्ष की आयु में तंबाकू का सेवन शुरू किया था।

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