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अंजलि जैन-इब्राहिम सिद्दीकी मामले में हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, साथ रहने की इज़ाज़त दी !

अंजलि जैन-इब्राहिम सिद्दीकी मामले में हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, साथ रहने की इज़ाज़त दी !

16-Nov-2019

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर के चर्चित इब्राहिम और अंजलि जैन मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अंजलि जैन को अपनी मर्ज़ी के व्यक्ति के साथ रहने का फ़ैसला सुनाया है.  बता दें की ये मामला कथित लव जिहाद के नाम से प्रचारित किया गया था. बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक अंजलि जैन पिछले आठ महीने से रायपुर के सखी सेंटिर में कैदियों की तरह रह रही थीं. उन्होंने अदालत के फैसले के बाद कहा है कि वे अपने पति इब्राहिम सिद्दीकी ऊर्फ आर्यन आर्य के साथ  ही रहेंगी .
अंजली ने हाईकोर्ट में एक चिट्ठी लिख कर विस्तार से अपनी पीड़ा दर्ज कराई थी. इसके अलावा अदालत ने इससे संबंधित मामलों की सुनवाई भी की और आठ नंवबर को इस मामले में फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.
अब शुक्रवार की देर शाम आये फ़ैसले में कहा गया कि अंजलि जैन अपनी मर्जी से, अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ कहीं भी रहने के लिये स्वतंत्र हैं. हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि अंजलि जैन की रिहाई के समय रायपुर के पुलिस अधीक्षक व्यक्तिगत रुप से वहां उपस्थित रहें.
छत्तीसगढ़ के धमतरी ज़िले के रहने वाले 33 वर्षीय मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीक़ी और 23 वर्षीय अंजलि जैन ने दो साल की जान-पहचान के बाद 25 फ़रवरी 2018 को रायपुर के आर्य मंदिर में शादी की थी. इससे पहले इब्राहिम ने अपना धर्म भी बदल लिया था और अपना नाम आर्यन आर्य रखा था.

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लेकिन अंजलि के घर वालों को जब इसकी खबर मिली तो उन्होंने अपनी बेटी को बहुत समझाने-बुझाने की कोशिश की. घरवालों का कहना था कि इब्राहिम पहले से ही एक शादी कर चुका है. इब्राहिम का सामाजिक रुप से तलाक भी हुआ है. उन्होंने बेटी को इब्राहिम से दूर रखने की कोशिश की.

इस दौरान अंजलि को इब्राहिम से मिलने नहीं दिया गया. इसके बाद इब्राहिम ऊर्फ आर्यन आर्य ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करते हुए न्यायालय से अपनी पत्नी अंजलि जैन को वापस किए जाने की गुहार लगाई.

लेकिन अदालत ने अंजलि जैन को सोच-विचार के लिए समय देते हुये छात्रावास में या माता-पिता के साथ रहने का आदेश पारित करते हुए मामले को ख़ारिज कर दिया. अंजलि जैन ने माता-पिता के साथ रहने के बजाय छात्रावास में रहना तय किया था. इसके बाद इब्राहिम ने हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

पिछले साल अगस्त में अंजलि को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया, जहां अंजलि ने अपने माता-पिता के साथ रहने की इच्छा जताई. इसके कुछ ही दिन बाद अंजलि ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को फोन कर के बताया कि उन्हें पिता के घर में कैद कर के रखा गया है.

जिसके बाद पुलिस ने उन्हें पिता के घर से छुड़ा कर रायपुर के सखी सेंटर में रखा था. अदालती कार्रवाइयों के बीच अंजलि पिछले आठ महीने से रायपुर के सखी सेंटर में ही रह रही थीं.

 


राजस्थान की उदयपुर में बैठकर फर्जी कॉल सेंटर से ठग रहे थे अमेरिकियों को, 23 युवक-युवती गिरफ्तार

राजस्थान की उदयपुर में बैठकर फर्जी कॉल सेंटर से ठग रहे थे अमेरिकियों को, 23 युवक-युवती गिरफ्तार

15-Nov-2019

उदयपुर। राजस्थान की उदयपुर पुलिस ने गुरुवार रात को अंबर आर्केड की बिल्डिंग में संचालित फर्जी कॉल सेंटर में छापा मारा। हिंदी वन इण्डिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक इस सेंटर से 23 युवक-युवतियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में पता चला कि ये लोग कॉल सेंटर की आड़ में अमेरिका समेत कई देशों के लोगों से ऑनलाइन ठगी करते थे।

उदयपुर के गोवर्धनविलास थानाधिकारी चेनाराम ने बताया कि शिकायत मिली थी कि बहुमंजिला इमारत अंबर आर्केड में फर्जी कॉल सेंटर संचालित है, जिसकी आड़ में लोगों को ठगा जा रहा है। गोवर्धनविलास थाना पुलिस मय टीम के यहां पर छापा मारा तो 23 युवक-युवतियां मिले, जो विदेशी लोगों को झांसे में लेकर ठगी करने में लगे हुए थे। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार करते हुए यहां दो लाख रुपए की नकदी और 37 कम्प्यूटर जब्त किए हैं।

गोवर्धनविलास थानाधिकारी चेनाराम के अनुसार युव​क युवतियों से शुरुआती पूछताछ में ठगी की बात सामने आई है। वहीं, जब्त कम्प्यूटरों की भी जांच की जाएगी और गिरफ्तार लोगों से विस्तृत पूछताछ होगी, जिसमें और भी कई खुलासे होने की उम्मीद है।


केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे को याद दिलाया वादा, तो चढ़ गया मंत्री का पारा, लोगों से बैनर छीनकर फाड़ डाला

केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे को याद दिलाया वादा, तो चढ़ गया मंत्री का पारा, लोगों से बैनर छीनकर फाड़ डाला

15-Nov-2019

 हमेशा अपने बयानों के लेकर मीडिया की सुर्खियों में रहने वाले केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री और बक्सर से भाजपा सांसद अश्विनी कुमार चौबे का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वह अपना आपा खोते दिख रहे हैं। वीडियो में एक सामाजिक कार्यकर्ता उनपर बदतमीजी करने का आरोप लगाता दिख रहा है। इसके अलावा वह अश्विनी चौबे पर गाली देने का भी आरोप लगाता हुआ दिख रहा है।

दरअसल, मामला बक्सर के सर्किट हाउस का है जहां सदर अस्पताल में सुविधाओं को बहाल करने का आश्वासन देने वाले केंद्रीय मंत्री को उनका वादा याद दिलाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता और कुछ दिव्यांग पहुंचे थे। चौबे ने बक्सर के सदर अस्पताल में डिजिटल एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा को बहाल करने का वादा किया था। जब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें यह वादा याद दिलाया तो अश्विनी चौबे भड़क गए और अपना आपा खो दिया। उन्होंने उनके हाथों से बैनर छीनकर फाड़ दिया और उन्हें भाग जाने को कह दिया।

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि मंत्री जी ने वादा किया था कि बक्सर जिला अस्पताल में खराब अल्ट्रासाउंड मशीन को एक महीने के भीतर ठीक करा दिया जाएगा। बावजूद इसके तीन महीने बाद भी अल्ट्रासाउंड मशीन ठीक नहीं कराया गया। नाराज लोगों को जैसे इस बात की खबर लगी की मंत्री जी गेस्ट हाउस में रुके हुए हैं वे मौके पर हुंच गए हैं और प्रदर्शन करने लगे।

इसके बाद मंत्री अपनी कार में बैठने लगते हैं और उनके समर्थक अश्‍विनी चौबे जिंदाबाद के नारे लगाते हैं तो इस पर मंत्री कहते हैं कि 100 जिंदाबाद पर एक मुर्दाबाद भारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले 10 महीनों से अल्ट्रासाउंड मशीन अस्पताल में खराब पड़ी हुई है। मंत्री जी ने इसे ठीक कराने का आश्वासन दिया था। अप्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब इसका विरोध किया गया तो मंत्री जी भड़क गए और धक्का देने लगे।

साभार : JANTA KA REPORTER

http://www.jantakareporter.com/hindi/argument-breaks-out-between-union-minister-ashwini-choubey/272617/


बिरसा मुंडा हैं आदिवासी तेजस्विता का सफरनामा

बिरसा मुंडा हैं आदिवासी तेजस्विता का सफरनामा

15-Nov-2019

- ललित गर्ग-

किसी महापुरुष के कार्यों, अवदानों एवं जीवन का मूल्यांकन इस बात से होता है कि उन्होंने राष्ट्रीय एवं सामाजिक समस्याओं का समाधान किस सीमा तक किया, कितने कठोर संघर्षों से लोहा लिया। बिरसा मुंडा भी ऐसे ही एक युगांतरकारी शख्सियत थे, जिन्होंने आदिवासी जनजीवन के मसीहा के रूप में केवल 25 सालों में बिहार, झारखंड और ओडिशा में जननायक की पहचान बनाई। आज भी आदिवासी जनता बिरसा मुंडा को भगवान की तरह याद करती है। देश 19वीं सदी के प्रमुख आदिवासी जननायक बिरसा मुंडा की 145 वीं जयंती मना रहा है। अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। उन्हांेंने आदिवासी जनजीवन अस्मिता एवं अस्तित्व को बचाने के लिये लम्बा एवं कड़ा संघर्ष किया। वे महान् धर्मनायक थे, तो प्रभावी समाज-सुधारक थे। वे राष्ट्रनायक थे तो जन-जन की आस्था के केन्द्र भी थे। सामाजिक न्याय, आदिवासी संस्कृति एवं राष्ट्रीय आन्दोलन में उनके अनूठे एवं विलक्षण योगदान के लिये न केवल आदिवासी जनजीवन बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति सदा उनकी ऋणी रहेगी।

आदिवासियों का संघर्ष अट्ठारहवीं शताब्दी से आज तक चला आ रहा है। 1766 के पहाड़िया-विद्रोह से लेकर 1857 के गदर के बाद भी आदिवासी संघर्षरत रहे। सन् 1895 से 1900 तक बिरसा मुंडा का महाविद्रोह ‘ऊलगुलान’ चला। आदिवासियों को लगातार जल-जंगल-जमीन और उनके प्राकृतिक संसाधनों से बेदखल किया जाता रहा और वे इसके खिलाफ आवाज उठाते रहे। 1895 में बिरसा ने अंग्रेजों की लागू की गयी जमींदारी प्रथा और राजस्व-व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई के साथ-साथ जंगल-जमीन की लड़ाई छेड़ी थी।

उन्होंने सूदखोर महाजनों के खिलाफ भी जंग का ऐलान किया। ये महाजन, जिन्हें वे दिकू कहते थे, कर्ज के बदले उनकी जमीन पर कब्जा कर लेते थे। यह मात्र विद्रोह नहीं था, बल्कि यह आदिवासी अस्मिता, स्वायतत्ता और संस्कृति को बचाने के लिए महासंग्राम था। हालात तो आज भी नहीं बदले हैं, आज भी आदिवासी गांवों से खदेड़े जा रहे हैं, दिकू अब भी हैं। जंगलों के संसाधन तब भी असली दावेदारों के नहीं थे और न ही अब हैं। आजादी के सात दशकों के बाद भी आदिवासियों की समस्याएं नहीं बल्कि वे ही खत्म होते जा रहे हैं। सब कुछ वही है। जो नहीं है तो आदिवासियों के ‘भगवान’ बिरसा मुंडा।

 बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को रांची जिले के उलिहतु गाँव में हुआ था। मुंडा रीति रिवाज के अनुसार उनका नाम बृहस्पतिवार के हिसाब से बिरसा रखा गया था। उनका परिवार रोजगार की तलाश में उनके जन्म के बाद उलिहतु से कुरुमब्दा आकर बस गया। जहां वो खेतो में काम करके अपना जीवन चलाते थे। उनके पिता, चाचा, ताऊ सभी ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था। बिरसा के पिता सुगना मुंडा जर्मन धर्म प्रचारकों के सहयोगी थे। बिरसा का बचपन अपने घर में, ननिहाल में और मौसी की ससुराल में बकरियों को चराते हुए बीता। बाद में उन्होंने कुछ दिन तक चाईबासा के जर्मन मिशन स्कूल में शिक्षा ग्रहण की। परन्तु स्कूलों में उनकी आदिवासी संस्कृति का जो उपहास किया जाता था, वह बिरसा को सहन नहीं हुआ। इस पर उन्होंने भी पादरियों का और उनके धर्म का भी मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। फिर क्या था। ईसाई धर्म प्रचारकों ने उन्हें स्कूल से निकाल दिया।

बिरसा के जीवन में एक नया मोड़ आया। उनका स्वामी आनन्द पाण्डे से सम्पर्क हो गया और उन्हें हिन्दू धर्म तथा महाभारत के पात्रों का परिचय मिला। यह कहा जाता है कि 1895 में कुछ ऐसी आलौकिक घटनाएँ घटीं, जिनके कारण लोग बिरसा को भगवान का अवतार मानने लगे। लोगों में यह विश्वास दृढ़ हो गया कि बिरसा के स्पर्श मात्र से ही रोग दूर हो जाते हैं। वर्तमान भारत में रांची और सिंहभूमि के आदिवासी बिरसा मुंडा को अब ‘बिरसा भगवान’ कहकर याद करते हैं। मुंडा आदिवासियों को अंग्रेजों के दमन के विरुद्ध खड़ा करके बिरसा मुंडा ने यह सम्मान अर्जित किया था। 19वीं सदी में बिरसा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक मुख्य कड़ी साबित हुए थे।

जन-सामान्य का बिरसा में काफी दृढ़ विश्वास हो चुका था, इससे बिरसा को अपने प्रभाव में वृद्धि करने में मदद मिली। लोग उनकी बातें सुनने के लिए बड़ी संख्या में एकत्र होने लगे। बिरसा ने पुराने अंधविश्वासों का खंडन किया। उन्होंने सबसे अधिक बल अपनी संस्कृति एवं संस्कारों पर दिया, वे समानता एवं नैतिक आचरण के हिमायती थे। लोगों को हिंसा और मादक पदार्थों से दूर रहने की सलाह दी। उनकी बातों का प्रभाव यह पड़ा कि ईसाई धर्म स्वीकार करने वालों की संख्या तेजी से घटने लगी और जो मुंडा ईसाई बन गये थे, वे फिर से अपने पुराने धर्म में लौटने लगे।

बिरसा मुंडा ने किसानों का शोषण करने वाले जमींदारों के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा भी लोगों को दी। उनका संघर्ष एक ऐसी व्यवस्था से था, जो किसानी समाज के मूल्यों और नैतिकताओं का विरोधी था। जो किसानी समाज को लूट कर अपने व्यापारिक और औद्योगिक पूंजी का विस्तार करना चाहता था। यह देखकर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें लोगों की भीड़ जमा करने से रोका। बिरसा का कहना था कि मैं तो अपनी जाति को अपना धर्म सिखा रहा हूँ। इस पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयत्न किया, लेकिन गांव वालों ने उन्हें छुड़ा लिया। शीघ्र ही वे फिर गिरफ्तार करके दो वर्ष के लिए हजारीबाग जेल में डाल दिये गये। बाद में उन्हें इस चेतावनी के साथ छोड़ा गया कि वे कोई प्रचार नहीं करेंगे।

परन्तु बिरसा कहाँ मानने वाले थे। छूटने के बाद उन्होंने अपने अनुयायियों के दो दल बनाए। एक दल मुंडा धर्म का प्रचार करने लगा और दूसरा राजनीतिक कार्य करने लगा। नए युवक भी भर्ती किये गए। इस पर सरकार ने फिर उनकी गिरफ्तारी का वारंट निकाला, किन्तु बिरसा मुंडा पकड़ में नहीं आये। इस बार का आन्दोलन बलपूर्वक सत्ता पर अधिकार के उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ा। यूरोपीय अधिकारियों और पादरियों को हटाकर उनके स्थान पर बिरसा के नेतृत्व में नये राज्य की स्थापना का निश्चय किया गया।

भारत के इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे आदिवासी नायक हैं जिन्होंने झारखंड में अपने क्रांतिकारी विचारों से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में आदिवासी समाज की दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया। अंग्रेजों द्वारा थोपे गए काले कानूनों को चुनौती देकर बर्बर ब्रिटिश साम्राज्य को सांसत में डाल दिया। बिरसा मुंडा ने महसूस किया कि आचरण के धरातल पर आदिवासी समाज अंधविश्वासों की आंधियों में तिनके-सा उड़ रहा है तथा आस्था के मामले में भटका हुआ है। यह भी अनुभव किया कि सामाजिक कुरीतियों के कोहरे ने आदिवासी समाज को ज्ञान के प्रकाश से वंचित कर दिया है। बिरसा जानते थे कि आदिवासी समाज में शिक्षा का अभाव है, गरीबी है, अंधविश्वास है। बलि प्रथा पर भरोसा है, हड़िया कमजोरी है, मांस-मछली पसंद करते हैं। समाज बंटा है, लोगों के झांसे में आ जाते हैं।

धर्म के बिंदु पर आदिवासी कभी मिशनरियों के प्रलोभन में आ जाते हैं, तो कभी ढकोसलों को ही ईश्वर मान लेते हैं। इन समस्याओं के समाधान के बिना आदिवासी समाज का भला नहीं हो सकता इसलिए उन्होंने एक बेहतर नायक और समाज सुधारक की भूमिका अदा की। अंग्रेजों और शोषकों के खिलाफ संघर्ष भी जारी रखा। उन्हें पता था कि बिना धर्म के सबको साथ लेकर चलना आसान नहीं होगा। इसलिए बिरसा ने सभी धर्मो की अच्छाइयों से कुछ न कुछ निकाला और अपने अनुयायियों को उसका पालन करने के लिए प्रेरित किया।

जनवरी 1900 डोमबाड़ी पहाड़ी पर एक और संघर्ष हुआ था जिसमें बहुत से औरतें और बच्चे मारे गये थे। उस जगह बिरसा अपनी जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। बाद में बिरसा के कुछ शिष्यों की गिरफ्तारियां भी हुईं। अन्त में स्वयं बिरसा भी 3 फरवरी 1900 को चक्रधरपुर में गिरफ्तार कर लिये गये। ब्रिटिश हुकूमत ने इसे खतरे का संकेत समझकर बिरसा मुंडा को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया। वहां अंग्रेजों ने उन्हें धीमा जहर दिया था। जिस कारण 9 जून 1900 को बिरसा की मृत्यु हो गई। लेकिन लोक गीतों और जातीय साहित्य में बिरसा मुंडा आज भी जीवित हैं।

आजादी के बाद हमने बिरसा मुंडा की शहादत को तो याद रखा, लेकिन हम उनके मूल्यों से दूर होते गये। हमारी सत्ताएं उसी व्यवस्था की पोषक होती गयीं, जिनके विरुद्ध उन्होंने लड़ाई लड़ी। उनकी जन्म जयन्ती मनाना तभी सार्थक होगा, जब हम उन्हें केवल पूजा का पात्र न बनाकर कर जीवन का हिस्सा बनाये एवं उनके बताये मार्ग पर चले। 


आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती देने वाले प्रख्यात गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन

आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती देने वाले प्रख्यात गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन

14-Nov-2019

पटना : महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का गुरुवार को बिहार की राजधानी पटना में निधन हो गया है। वे 77 साल के थे। सिंह करीब 40 साल से सिजोफ्रेनिया बीमारी से पीड़ित थे। उनके एक करीबी ने बताया कि फिलहाल पटना में रहने वाले सिंह की आज सुबह तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद परिजन उन्हें लेकर तत्काल पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बिहार के भोजपुर के बसंतपुर के रहने वाले सिंह की तबीयत पिछले महीने भी खराब हुई थी, जिनका इलाज पीएमसीएच में ही कराया गया था, बाद में इन्हें छुट्टी दे दी गई थी। कहा जाता है कि उन्होंने आंइस्टीन के सापेक्ष सिद्घांत को चुनौती दी थी। गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह अपने शैक्षणिक जीवनकाल से ही कुशाग्र रहे हैं।

भोजपुर के रहने वाले थे वशिष्ठ


आरा के बसंतपुर के रहने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह बचपन से होनहार थे। उन्होंने मैथ (गणित) से जुड़े कई फॉर्मूलों पर रिसर्च भी किया था। उन्हें पिछले कई वर्षों से सिज़ोफ्रेनिया की बीमारी थी। वशिष्ठ के निधन की खबर मिलते ही पूरे बिहार में शोक की लहर दौड़ गई है। भोजपुर के लोगों को जैसे ही अपने होनहार बेटे और अनमोल धरोहर के खोने की खबर मिली उनका दिल बैठ गया।


बीएचयू के साउथ कैंपस में आरएसएस का झंडा हटाने वाले डिप्टी चीफ प्रॉक्टर का इस्तीफा

बीएचयू के साउथ कैंपस में आरएसएस का झंडा हटाने वाले डिप्टी चीफ प्रॉक्टर का इस्तीफा

14-Nov-2019

नई दिल्ली : एजेंसी 

बरकछा स्थित बीएचयू के साउथ कैंपस में आरएसएस (संघ) का ध्वज हटाने के मामले में केस दर्ज होने से क्षुब्ध डिप्टी चीफ प्रॉक्टर प्रो. किरण दामले ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया। इस पर उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। इतना जरूर कहा कि मंगलवार को उनके खिलाफ धरने पर बैठे छात्रों ने इस्तीफे की मांग की थी। लिहाजा, साउथ कैंपस में पठन-पाठन का माहौल बनाए रखने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया। 

साउथ कैंपस में मंगलवार सुबह कुछ छात्र स्टेडियम में संघ का ध्वज लगा कर शाखा लगाए हुए थे। इस बीच, डिप्टी चीफ प्रॉक्टर प्रो. किरण दामले भ्रमण करते हुए वहां पहुंचीं। उन्होने शाखा लगाने वाले छात्रों को अन्यत्र जाने का निर्देश दिया। उन्होंने संघ का ध्वज हटाकर अपने कार्यालय में रखवा दिया। इससे नाराज छात्र धरने पर बैठ गए। जानकारी होते ही नगर विधायक रत्नाकर मिश्र व आरएसएस के जिला कार्यवाह चन्द्रमोहन भी मौके पर पहुंच गए। 

संघ का ध्वज हटाने पर जिला कार्यवाह चन्द्रमोहन ने देहात कोतवाली में मंगलवार देर शाम डिप्टी चीफ प्रॉक्टर के खिलाफ रपट दर्ज करा दी। बुधवार सुबह उन्हें इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने साउथ कैंपस की आचार्य प्रभारी प्रो. रमा देवी निम्नापल्ली को अपना इस्तीफा भेज दिया। उनका इस्तीफा चीफ प्रॉक्टर डा.ओपी राय के पास भेज दिया गया। इस संबंध में साउथ कैंपस की आचार्य प्रो. रमादेवी निम्नापल्ली ने कहा कि मामले को राजनीतिक तूल न दिया जाए। यह विश्वविद्यालय परिसर का मामला है। विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले से निबटने में सक्षम है।

उन्होंने कहा कि डिप्टी चीफ प्रॉक्टर को संघ का ध्वज उतारने से पहले छात्रों से बात करनी चाहिए थी। हालांकि उन्हें ध्वज के नियमों के संबंध में खास जानकारी नहीं थी। विश्वविद्यालय में हर धर्म, समुदाय एवं वर्ग के छात्र-छात्राओं को पूजा-इबादत करने की छूट है। कहा कि डिप्टी चीफ प्रॉक्टर ने उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्होंने उसे चीफ प्रॉक्टर के पास भेज दिया है।


पाकिस्तान ने अपने वायुसेना के म्यूजियम में विंग कमांडर अभिनंदन का पुतला लगाया

पाकिस्तान ने अपने वायुसेना के म्यूजियम में विंग कमांडर अभिनंदन का पुतला लगाया

13-Nov-2019

मीडिया रिपोर्ट 

पाकिस्तानी वायुसेना ने अपने एक म्यूजियम में एक पुतला लगाया है जो भारतीय वायुसेना के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान की तरह नजर आता है. पीटीआई के मुताबिक यह पुतला कराची स्थित म्यूजियम में लगाया गया है. इस साल फरवरी में भारत-पाकिस्तान के बीच एक हवाई टकराव हुआ था. विंग कमांडर अभिनंदन ने इस दौरान पाकिस्तानी वायुसेना के विमान को मार गिराया था. हालांकि उनका विमान पाकिस्तान में गिर गया था. इसके बाद वे लगभग तीन दिनों तक पाकिस्तानी सेना की हिरासत में भी रहे थे.

मीडिया में आयी खबरों के अनुसार एयर चीफ मार्शल मुजाहिद अनवर खान ने इस सप्ताह पाकिस्तानी वायुसेना के इस म्यूजियम के नये सेक्शन का उद्घाटन किया है. इसका नाम ‘ऑपरेशन स्विफ्ट रिटॉर्ट’ रखा गया है. इसी हिस्से में एक पुतला लगा है जो विंग कमांडर अभिनंदन की तरह दिखता है. पुतले के पास चाय का कप और उनके विमान मिग-21 का ढांचा भी रखा हुआ है.

 


अगर आपको सिर्फ मुसलमान होने के लिए याद किया जाए तो यह आपकी तौहीन है।

अगर आपको सिर्फ मुसलमान होने के लिए याद किया जाए तो यह आपकी तौहीन है।

12-Nov-2019

Hafeez Kidwai की वाल से

अगर आपको सिर्फ मुसलमान होने के लिए याद किया जाए तो यह आपकी तौहीन है। अगर आपको मुसलमान सिर्फ अपना समझकर याद करें तो यह आपपर ज़ुल्म है। आपकी सोच इतनी गहरी थी की उसमे सब समा जाएँ। आपका इल्म इतना गहरा था जिसके सामने जाहिलियत खुद बखुद दम तोड़ दे। आज जिस इल्म की इमारत पर हम इतराते नही फिरते उसकी नींव आपने रखी। आज ही 11 नवम्बर को जब ज़मीन पर आपके कदम पड़े तो किसने सोचा था की यह इंसान नही बल्कि अनमोल मोतियों को गूँथने वाला धागा है। जिसकी ज़िन्दगी लोगो को जोड़ने में खर्च होगी। किसने सोचा था जो बेटा अपनी माँ को 11 साल की उम्र में ही खो देगा,वह मदरसों के चबूतरों पर बैठ कर एक दिन दुनिया की सबसे बड़ी जम्हूरियत में इल्म का झण्डा बुलन्द करेगा। किसने सोचा था मदरसों की काई से लिपटी दीवारों में वोह अरबी,फ़ारसी,इंग्लिश,हिंदी,उर्दू का नायाब शरबत बनेगा।

भला किसने ख्वाब में भी यह सोचा होगा की बहारों से महरूम कोई लड़का पत्रकारिता,लेखन,एक्टिविज्म, पालिटिक्स,समाज सेवा,लीडरशिप में सबसे ऊँचा परचम थामेगा। कौन देख रहा था की मुल्क़ में सबसे पहले काँग्रेस का, सबसे कम उम्र का प्रेसिडेंट यह ही चुना जाएगा। किसी ने सोचा भी नही था की बंटवारे में अपनी ज़मीन को रोते हुए छोड़ते लोगो को किसी के लफ़्ज़ ऐसे बाँध लेंगे, की जो जहाँ रहा वही रुक गया। वह मौलाना अबुल कलाम आज़ाद थे ,जिनकी आज पैदाइश है। यह भारत जैसा महान देश है जिसने उन्हें अपना पहला शिक्षा मंत्री चुना। यह मौलाना आज़ाद की महानता थी की उन्होंने इस माटी में ही अपनी हर साँसों को जिया निखारा और खूबसूरती से रुखसत हो गए आज़ादी की लड़ाई का बहुत मज़बूत स्तम्भ मौलाना आज़ाद ही तो जो नेहरू के कंधे पर हाथ रखकर कह सके कि चलो अब बिना थके,बिना रुके,बिना देरी के देश की हर ज़रूरत को पूरा करते हुए निर्माण में लगा जाए ।

गाँधी के ख्वाबों के संस्थान खड़े किए जाएं,शिक्षा का सर्वोच्च छुआ जाए । आज जब लोग अपने छोटे छोटे घर बनाते हैं, उसपर फौरन अपने नाम अपने पूर्वजों के नाम के पत्थर टांक देते हैं कि दुनिया देखे उन्होंने कितना खूबसूरत घर बनाया है, वही लोग आज़ादी की लड़ाई और देश बनाने वाले नामों को सुनकर कान आंख बंद करके चुपके से सरक जाने का हुनर रखते हैं । यह सच्चाई रहती दुनिया तक नही बदलेगी की भारत की आज़ादी में किसने किसने अपना सब कुछ लुटा दिया,मिटा दिया । मौलाना आज़ाद तो वह शख्स थे,जो जेल में रहकर अपनी पत्नी की मौत की खबर सुनकर भी अंग्रेज़ों से यह गुज़ारिश भी नही करने गए कि आखरी बार उन्हें बीवी को देखना है । सब कहते रहे मगर उसूल का पाबंद यह शख्स अड़ गया कि नही,हरगिज़ नही,अपने निजी कार्यों के लिए हम अंग्रेज़ों से कोई छूट नही लेंगे और जेल की सलाखों के पीछे ही वह दर्दनाक वक़्त अकेले काटा । मौलाना आज़ाद आप हमारे मुल्क को बनाने वाले हाथों में से थे,आपके हाथ पकड़ कर अब बस रोने को दिल चाहता है, खूब रोने को,इकलौते आप हैं जिनका हाथ पकड़कर आज अपनी बेबसी और अकेलेपन को जकड़कर बहुत रोने का दिल करता है..

 


क्यों हटाई गई गांधी परिवार से एस पी जी सुरक्षा?

क्यों हटाई गई गांधी परिवार से एस पी जी सुरक्षा?

09-Nov-2019

केंद्र सरकार ने कल एक बड़ा मगर अटपटा फैसला लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की एसपीजी सुरक्षा हटाने का फैसला लिया है। इन तीनों की एसपीजी सुरक्षा को धीरे धीरे हटाया जाएगा। श्रीपेरंबुदूर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद पूरे गांधी परिवार को एसपीजी सुरक्षा देने का फैसला किया गया था।

मगर अब केंद्र सरकार ने फैसला पलट दिया है। गृह मंत्रालय की सुरक्षा समीक्षा कमेटी की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार अब गांधी परिवार को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इसके तहत सीआरपीएफ या एनएसजी के कमांडो तैनात होंगे। 

केंद्र सरकार के अनुसार  फिलहाल गांधी परिवार को कोई खतरा नहीं है और ऐसे में जेड प्लस की सुरक्षा पर्याप्त होगी। हैरत की बात है कि जिस गांधी परिवार में इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को मार दिया जाता है उस परिवार की सुरक्षा हटा ली जाए या कम कर लिया जाए। यह चिंता का विषय है।

गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटाने के बाद अब सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास ही एसपीजी सुरक्षा रहेगी। यह निर्णय राजनीतिक बदले की भावना से लिया गया है। सरकार का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। बदला लेने की राजनीति अच्छी नहीं लगती है।दिल बड़ा रखना चाहिए। 

देश के दो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या की गई। अटल बिहारी वाजपेयी ने ही कानून में बदलाव कर के गांधी परिवार को एसपीजी सुरक्षा प्रदान की थी। आज शायद उनकी भी आत्मा तड़प गई होगी। यह फैसला राजनीतिक बदले की भावना से हुआ प्रतीत हो रहा है। फैसला तो इसी तरफ इशारा कर रहा है।

बहरहाल देश सब देख रहा है। 8 तारीख को फैसला लेने की आदत पड़ गई है शायद। पहले नोटबंदी अब सुरक्षा हटाना। दोनों फैसलों में इंसान की जान से खेला गया है।
मेरी अपील है सरकार से कि इस फैसले पर पुनर्विचार करे।

सैय्यद एम अली तक़वी
निदेशक- यूरिट एजुकेशन इंस्टीट्यूट
ई मेल- syedtaqvi12@gmail.com


रेलवे ने निकाली ऐसी नौकरी की मच गया बवाल, विज्ञापन में लिखा सिर्फ अग्रवाल-वैश्य करें अप्लाई

रेलवे ने निकाली ऐसी नौकरी की मच गया बवाल, विज्ञापन में लिखा सिर्फ अग्रवाल-वैश्य करें अप्लाई

08-Nov-2019

नई दिल्ली

रेलवे से जुड़ी नौकरियों में जातिगत आधार पर प्राथमिकता देने का विज्ञापन छपा तो हंगामा हो गया। सोशल मीडिया पर काफी खिंचाई हुई तो रेलवे में खानपान का इंतजाम करने वाली कंपनी आईआरसीटीसी ने विज्ञापन जारी करने वाले कॉन्ट्रैक्टर को जमकर फटकार लगाई, जिसके बाद वेंडर ने अपने एचआर मैनेजर को नौकरी से निकाल दिया और माफी भी मांगी।

Indian Railway Agarwal Vaishya community Job, ‘सिर्फ अग्रवाल-वैश्य करें अप्लाई’, रेलवे कॉन्ट्रेक्टर ने नौकरी के लिए निकाला विज्ञापन तो मच गया बवाल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, IRCTC से जुड़े प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर आरके मील्स से संबंधित कंपनी वृंदावन फूड प्रॉडक्ट्स के विज्ञापन में ट्रेन कैटरिंग मैनेजर, बेस किचन मैनेजर और स्टोर मैनेजर के पदों पर 100 लोगों की नियुक्ति करने के लिए आवेदन मांगे गए थे। विज्ञापन में कहा गया था कि आवेदक अग्रवाल वैश्य समुदाय से होना चाहिए और कम से कम 12वीं तक पढ़ा लिखा होने के साथ-साथ अच्छी पारिवारिक पृष्ठभूमि से होना चाहिए।

वेंडर ने माफी मांगते हुए कहा कि दो अलग-अलग विज्ञापन दिए जाने थे- एक रेलवे में नौकरी देने के लिए था और दूसरा विज्ञापन अपने समाज की सेवा के लिए नौकरी देने का था। उस विज्ञापन में अग्रवाल समाज के लोगों को नौकरी देने की बात थी, लेकिन गलती से रेलवे की नौकरी वाला विज्ञापन अग्रवाल वैश्य समाज के लिए प्रकाशित हो गया।


बीएचयू के संस्कृत विभाग में मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति पर हंगामा, छात्र धरने पर

बीएचयू के संस्कृत विभाग में मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति पर हंगामा, छात्र धरने पर

08-Nov-2019

वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में कथित तौर पर एक मुस्लिम असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के विरोध में छात्र धरने पर हैं. छात्रों की मांग है कि इस नियुक्ति को निरस्त किया जाए.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए गुरुवार देर रात बीएचयू ने कहा कि उन्होंने वाइस चांसलर की अध्यक्षता में एक पारदर्शी स्क्रीनिंग प्रक्रिया के जरिए सर्वाधिक योग्य उम्मीदवार को सर्वसम्मति से नियुक्त किया है. विश्वविद्यालय ने कहा कि इस संस्थान की स्थापना धर्म, जाति, संप्रदाय और लिंग के आधार पर बिना किसी भेदभाव के राष्ट्रनिर्माण के उद्देश्य से सभी को समान अवसर दिए जाने से की गई थी.

विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर फिरोज खान की नियुक्ति का कुछ छात्र विरोध कर रहे हैं. इन छात्रों ने गुरुवार को वाइस चांसलर के आवास के बाहर होल्कर भवन पर धरना दिया. ये प्रदर्शनकारी छात्र प्रोफेसर खान की नियुक्ति को रद्द किए जाने की मांग कर रहे हैं. एक प्रदर्शनकारी छात्र पुनीत मिश्रा ने कहा कि बीएचयू के संस्थापक मदन मोहन मालवीय के मूल्यों की रक्षा करने के लिए धरना किया गया था.

उन्होंने कहा कि संस्कृत संकाय में लगे शिलापट्ट पर लिखा है कि जैन, बौद्ध और आर्य समाज से जुडे़ लोगों को छोड़कर कोई भी गैर हिंदू इस विभाग से नहीं जुड़ सकता. इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे पीएचडी स्कॉलर शुभम तिवारी ने खान की नियुक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि रिश्वत लेने के बाद संस्कृत फैकल्टी में एक अयोग्य व्यक्ति की नियुक्ति की गई. बीएचयू ने कहा कि छात्रों ने स्क्रीनिंग समिति की बैठक को बाधित करने की कोशिश की. प्रशासन ने स्वीकार किया कि संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर मुस्लिम उम्मीदवार की नियुक्ति को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया.

 


पश्चिम बंगाल:नगरीय निकाय चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा  बीजेपी के हाथ से निकला भांटपाड़ा नगर निगम !

पश्चिम बंगाल:नगरीय निकाय चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा बीजेपी के हाथ से निकला भांटपाड़ा नगर निगम !

07-Nov-2019

कोलकाता :पश्चिम बंगाल की भाटपाड़ा नगर पालिका में 12 पार्षद भाजपा का साथ छोड़कर दोबारा तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए।
इसी के साथ यहां फिर तृणमूल कांग्रेस बहुमत में आ गई है। लोकमत न्यूज़ डॉट इन पर छपी खबर के अनुसार, तृणमूल के भाटपाड़ा नगरपालिका में बहुमत हासिल करने के साथ ही भाजपा के हाथ से वे सभी सात नगरपालिकाएं निकल गई हैं, जिन पर उसने 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ कब्जा किया था।
लोकसभा चुनाव के बाद वे भाजपा में शामिल हुए थे.
भाटपाड़ा पहली नगरपालिका थी जिस पर स्वतंत्रता के बाद भाजपा ने कब्जा किया था। 34 सदस्यों वाली नगरपालिका में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के 19 पार्षदों ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद उसका दामन थाम लिया था। बाद में कुछ और तृणमूल पार्षद भाजपा में शामिल हुए थे।
तृणमूल से भाजपा में आए कुल 26 पार्षदों में से 12 ने तृणमूल भवन में वरिष्ठ नेताओं फिरहाद हाकिम और ज्योतिप्रियो मलिक की उपस्थिति में दोबारा तृणमूल की सदस्यता ग्रहण कर ली।
मलिक ने कहा, ”12 पार्षदों के वापस पार्टी में आने के बाद 34 सदस्यीय भाटपाड़ा नगरपालिका में हमारी संख्या 21 हो गई है। हम जल्दी ही अविश्वास प्रस्ताव लाकर नगरपालिका का नियंत्रण अपने हाथों में ले लेंगे।
वरिष्ठ भाजपा नेता मुकुल रॉय ने तृणमूल पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव डालकर पार्षदों को दोबारा पार्टी में शामिल करने का दावा किया। उन्होंने कहा कि पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के बाद से ही उन्हें पुलिस और गुंडों द्वारा धमकाया जा रहा था।

 


पीएम मोदी की एडिटेड फोटो डालना शख्स को पड़ा भारी, एक साल सोशल मीडिया से दूर रहने की 'सजा'

पीएम मोदी की एडिटेड फोटो डालना शख्स को पड़ा भारी, एक साल सोशल मीडिया से दूर रहने की 'सजा'

06-Nov-2019

कन्याकुमारी : पीएम मोदी की फोटो के साथ छेड़छाड़ कर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करना एक शख्स को भारी पड़ गया। उत्तम हिन्दू में प्रकाशित खबर के अनुसार इस पोस्ट के एक महीने बाद तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के निवासी जबीन चार्ल्स को एक साल के लिए सोशल मीडिया से दूर रहना पड़ेगा। जबीन ने इसके लिए बाकायदा मद्रास हाई कोर्ट में लिखित हलफनामा भी दिया है।

सोमवार को अग्रिम जमानत लेने के लिए जबीन ने मद्रास हाईकोर्ट को लिखित में दिया कि वह अगले एक साल तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करेंगे। जस्टिस जी आर स्वामीनाथन ने कहा कि अगर जबीन को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए पाया गया तो उनकी जमानत कैंसल कर दी जाएगी। जस्टिस स्वामीनाथन ने जबीन को कहा कि वह एक माफीनामा लिखकर भी कोर्ट को दें।

बता दें कि एक महीने पहले जबीन की इस पोस्ट के अगले ही दिन बीजेपी पदाधिकारी नांजिल राजा ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और मामला हाई कोर्ट पहुंच गया। जबीन चार्ल्स ने अपने बचाव में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कही गई बात याद दिलाई कि पब्लिक फोरम पर अपनी राय रखना कोई अपराध नहीं है। हालांकि, चार्ल्स ने अपनी इस पोस्ट पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस पोस्ट को तुरंत ब्लॉक कर दिया था क्योंकि उन्हें एहसास हो गया था कि प्रधानमंत्री का अपमान सही नहीं है।

उन्होंने कोर्ट के सामने यह भी कहा कि वह स्थानीय अखबार में भी माफीनामा छपवाने के लिए तैयार हैं। कन्याकुमारी की वाडसरी पुलिस ने चार्ल्स के खिलाफ 11 अक्टूबर को आईपीसी की धारा 505 (2) और आईटी ऐक्ट 2000 की धारा 67 बी के तहत मुकदमा दर्ज किया था।


सोशल मीडिया पर एके-47 खरीदना आसान

सोशल मीडिया पर एके-47 खरीदना आसान

05-Nov-2019

हेमेन्द्र क्षीरसागर, लेखक, पत्रकार व विचारक 

पहले रोटी, कपड़ा और मकान हमारी मूलभूत जरूरतें थी। फिर इसमें पढ़ाई, दवाई और कमाई जुड़ी। बाद में आर-पार, व्यापार, समाचार, संचार और दूरसंचार  शामिल हुआ। सिलसिले में कंप्यूटर, इंटरनेट और मोबाइल के मकड़जाल से कर लो दुनिया मुट्ठी में नामक सोशल मीडिया का जन्म हुआ। जो बड़े काम की और कमाल का तुंतुरा साबित हुआ। घंटों के काम मिनटों में निपटकर सोहलते और मोहलतें बढ़ने लगी। आंखों देखा हाल सात समुंदर पार दिखाई देने लगे। आभास हुआ कि सोशल मीडिया के जीवाश्म इंटरनेट, मोबाइल, व्हाट्सएप, फेसबुक टि्वटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, टिक टॉक और ईमेल आदि-इत्यादि के बिना जीवन अधूरा है। वाकई में इनमें ऐसी खूबियां भी बेशुमार है। जिससे जनजीवन में अनेकों आमूलचूल परिवर्तन आए, इसे कदापि नकारा नहीं जा सकता।  

लिहाजा सब कुछ बड़े आराम से बहुत अच्छे तरीके से चल रहा था, लेकिन इसमें भी बहुत जल्दी हर मीठी चीज की तरह कीड़े पड़ गए। जिन्होंने हमारे नजरों और दिमाग को दिनोंदिन खोखला करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। बेहतरतीब सामाजिक ताने-बाने, नाते-रिश्तों को तार-तार होते-होते देर नहीं लगी। आपाधापी में सोशल मीडिया के चमत्कार, हां-हां कार में बदल गए, और हमारे हाथ लगा हासिल का जीरो। इसके कारक केवल और केवल मात्र हम हैं ना कि सोशल मीडिया का तंत्र जाल। यह तो एक शिष्टाचारी शिष्य की भांति अपने काम को बड़ी शिद्दत से निभाता आ रहा है। वह तो हम जो सोशल मीडिया को कोई ऊल-जलूल कामों के लिए मजबूर करते हैं। और दोष देते फिर रहे हैं सोशल मीडिया के उपयोग को। ऊपर से मोबाइल टावरों के रेडिएशन से निकलने वाले विकरण कई रोगों के कारक है। बावजूद अमानक टावर बेधड़क गांव-गांव और गली-मोहल्ले में लगते ही जा रहे हैं।

यहां यह ना भूले की किसी चीज की आदत तो ठीक है लेकिन लत कदापि नहीं! हमने तो इसके उपयोग को दुरुपयोग में बदल दिया जिससे जिंदगियां बर्बाद होना लाज़मी है। भेड़ चाल, गोलमाल, लूट-खसोट, भद्दा मजाक, अनाप-शनाप गपशप, अश्लीलता और अनचाही जानकारी बेधड़क सोशल मीडिया के तंत्रों में परोसी जा रही है। अलमस्त कि हमारे आने वाली पीढ़ी और महिलाएं भी इससे अछूती नहीं है। विभीषिका आज बचपन खोते जा रहा है। खिलौनों की जगह हाथ में विडियो गेम, मोबाइल, लोरी बनी कार्टूनों की धून। बावजूद प्रसन्न मांये गर्व से कहती है कि मेरा बच्चा बड़ा होशियार है वह तो पूरा का पूरा मोबाइल अपने पापा से अच्छा चला लेता है वह भी ऑनलाइन! भलाई, वह बालमन मोबोफोबिया से व्यधि-आधि का शिकार क्यों ना हो गया हो। बेसुधी में पूरा का पूरा परिवार बड़े-बड़े मोबाइलों पर तसल्ली से चुना-कथा लगाता रहता है। मजाल है कोई किसी की कराहट भी सुन ले, सबको अपने अपने स्टेटस, लाइक और कमेंट की चिंता पड़ी रहतीं हैं। चाहे स्वास्थ और निजता पर कितना भी बुरा असर क्यों ना पड़े इससे कोई मतलब नहीं है।

वीभत्स, हालिया ही देश के सर्वोच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि यह बेहद खतरनाक है। सरकार को जल्द से जल्द इस समस्या से निपटने के लिए दिशा निर्देश बनाना चाहिए। यही नहीं उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने वैधानिक गाइडलाइन तैयार करने के लिए एक निश्चित समय सीमा बताकर हलफनामा दाखिल करने निर्देश दिया है। न्यायालय ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा कि लोगों के लिए सोशल मीडिया पर एके-47 तक खरीदना आसान हैं। बकौल, इससे विषम, चिंताजनक तथा बेलगामी बात और क्या हो सकती है? आगे शीर्ष अदालत ने कहा लगता है कि स्मार्टफोन छोड़कर फिर से फीचर फोन की ओर लौटना चाहिए। हालात ऐसे हैं कि हमारी मौलिकता तक सुरक्षित नहीं है।

वस्तुतः कमशकम न्याय के सर्वोच्च मंदिर के स-सम्मान मिडिया को सोशल रहने दिया जाए तो सबके लिए बेहतर होगा। इसको अव्यवहारिक, अमर्यादित और अपने लिए स्पेशल बनाएंगे तो हर हाल में बर्बादी का ही सबक बनेगा। अलबत्ता जरूरत के मुताबिक इस खूबसूरत साधन का सद्उपयोग करना ही वक्त की नजाकत और भलीमत हैं। अन्यथा कानून के फंडे और पुलिस के डंडे कितने भी पड़ें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। हम तोड़ने के आदि जो हो चुके हैं क्या करें! आदत से मजबूर जो हैं। शायद! बदल जाए तो जिंदगियां सवरते देर नहीं लगेगी। 


इंद्रावती टाइगर रिजर्व बना नक्सली रिजर्व फॉरेस्ट, टाइगर रिजर्व से टाइगर गायब हुए

इंद्रावती टाइगर रिजर्व बना नक्सली रिजर्व फॉरेस्ट, टाइगर रिजर्व से टाइगर गायब हुए

04-Nov-2019

नक्सलवाद से इंद्रावती नेशनल पार्क अप्रासंगिक हुआ

राकेश पांडे की रिपोर्ट 

जगदलपुर। इंद्रावती टाइगर रिजर्व बस्तर में बाघों का घर कहलाने वाला इंद्रावती टाइगर रिजर्व बाघों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रह गया है। 1983 में टाइगर रिजर्व बनने के बाद से यहां बाघों की संख्या लगातार घट रही है। प्राकृतिक रूप से टाइगर (बाघों) कीआश्रय स्थल के रूप में 1978 में इंद्रावती नेशनल पार्क की स्थापना की गई थी। अब यह टाइगर रिजर्व टाइगर (बाघों) का नहीं वरन नक्सलियों का सुरक्षित आश्रय स्थल बन चुका है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व का पूरा क्षेत्र करीब 2799.08 वर्ग किमी है। यह क्षेत्र बाघ व वन भैंसों के लिए बस्तर संभाग में एकमात्र संरक्षित क्षेत्र माना जाताहै। इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के बीजापुर जिले में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान है। यह इंद्रावती नदी के किनारे बसा हुआ है, जिससे इसको अपना नाम मिला है। यह दुर्लभ जंगली भैंसे, की अंतिम आबादी वाली जगहों में से एक है।     

    उल्लेखनीय है कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व संरक्षित वन क्षेत्र में बीजापुर जिले के अंतर्गत आने वाले सेण्डरा, पिल्लूर, सागमेटा आदि गांवों में पिछले दो दशक से नक्सलियों का सुरक्षित आश्रय स्थल बन चुका है और यहां पर जंगलों में विचरन करने वाले जीव जन्तु दूसरी जगह चले गये हैं या उन्हें शिकार कर हटा दिया गया है। इस प्रकार इस संरक्षित वन क्षेत्र में प्रवेश करना खतरे से खाली नहीं है। टाइगर (बाघों) सहित दूसरे वन्य जीवों की न केवल गणना प्रभावित हुई है वरन पार्क में पर्यटकों के साथ-साथ शोधार्थियों का पहुंच पाना भी मुश्किल हो गया है। 

इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र के फरसेगढ़ से सागमेट,सेण्डरा, पिल्लूर आदि गांवों के पड़ाव में नक्सलियों की तगड़ी दखल है। पूरे क्षेत्र के रास्ते में नक्सलियों ने बैरियर खड़े कर रखे हैं, वहीं माइल स्टोन,पेड़ के तने, घरों की दीवारों के अलावा गांव-गांव में स्मारक खड़े हैं। यहां जनताना अदालत और सभाओं के आयोजन नक्सली कर रहे हैं। विभागीय दस्तावेज के मुताबिक 1984 की गणना में यहां 34 से अधिक बाघ थे। 2014 की गणना में यहसंख्या घटकर 10 रह गई है। टाइगर रिजर्व के आठ रेंज में सौ से अधिक बीट गार्ड व फॉरेस्ट गार्ड की तैनाती है लेकिन हकीकत यह है कि अंदरूनी इलाकों में कभी-कभार ही विभाग को कोई अधिकारी या कर्मचारी पहुंचता होगा। नक्सलियों की वजह से कोर क्षेत्र में प्रवेश करने की हिमाकत आज भी कोई नहीं करता।

 टाइगर रिजर्व का यह इलाका पूरी तरह से नक्सलियों के कब्जे में है। इस इलाके में घुसने की हिमाकत विभाग कभी नहीं कर सका। यहां के बाघों पर न कभी कोई शोध हुआ और किसी प्राणी विज्ञानी ने इनके व्यवहार या फिर रहवास के बारे में जानने की कोशिश की। बाघों के संरक्षण के नाम पर केवल टाइगर रिजर्व का नाम बस दे दिया गया है। नक्सलवाद का दंश झेल रहा बीजापुर का इंद्रावती नेशनल पार्क,टाइगर रिजर्व को यदि जल्द ही इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया तो मात्र फाइलों में सिमटकर नेशनल पार्क, टाइगर रिजर्व रहेगा जहां ना तो टाइगर होगा और न ही नेशनल पार्क होगा यहां यह कहा जाना अप्रासंगिक नहीं होगा कि नक्सलवाद से इंद्रावती नेशनल पार्क अप्रासंगिक हुआ।


छात्रा के मोबाइल नंबर को तीन पोर्न साइटों पर अपलोड किया, केस दर्ज!

छात्रा के मोबाइल नंबर को तीन पोर्न साइटों पर अपलोड किया, केस दर्ज!

04-Nov-2019

 

चंडीगढ़ से एक चौंकाने वाली घटना सामने आया है। एक शख्स ने शनिवार को तीन अश्लील यानी पोर्न साइटों पर एक महिला का नंबर पोस्ट कर दिया।
पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपी और पीड़ित दोनों छात्र हैं। सूत्रों के अनुसार, इस साल सितंबर के महीने में तीन पोर्न वेबसाइटों पर पीड़िता का नंबर अपलोड किया गया था।

पीड़िता ने अज्ञात लोगों से वीडियो कॉल और टेक्स मैसेज आने लगे।
पीड़िता ने मैसेज मिलने के दो दिन बाद यानी 25 सितंबर को पुलिस से संपर्क किया। सेक्टर 9 पुलिस ने जांच के लिए जल्द ही मामले को चंडीगढ़ के साइबर सेल में भेज दिया।
महिला की शिकायत में कहा गया है, “मुझे व्हाट्सएप से लगभग 50-60 व्यक्तियों के वीडियो कॉल और टेक्स्ट संदेश मिल रहे हैं। आगे की जांच से, मुझे पता चला कि मेरा नंबर पोर्न साइट्स पर अपडेट किया गया है।”

इस मामले में कार्रवाई करने वाली पुलिस, पीड़ितों की संख्या को अश्लील वेबसाइटों से हटाने में सफल रही और इस मामले की जांच करने के बाद उन्होंने संदिग्ध पर शून्य कर दिया। आरोपी को गिरफ्तार किया जाना बाकी है।

 


दिल्ली : पोस्ट ऑफिस में 18 लाख की ठगी के मामले में एक क्लर्क गिरफ्तार

दिल्ली : पोस्ट ऑफिस में 18 लाख की ठगी के मामले में एक क्लर्क गिरफ्तार

02-Nov-2019

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने पोस्ट ऑफिस के एक क्लर्क के खिलाफ लाखों रुपये की सरकारी धनराशि के गबन का मामला दर्ज किया है। क्लर्क को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है। आरोपों की जांच जारी है। 

दिल्ली पुलिस आर्थिक अपराध शाखा के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने मामला दर्ज कर लिए जाने की पुष्टि शनिवार को की है। आरोपी क्लर्क का नाम सुरेंद्र बताया जाता है। आरोप है कि पोस्ट ऑफिस में धन जमा करने आए ग्राहकों की पासबुक पर मुहर लगाकर आरोपी पैसे अपनी जेब में रख लेता था। यह घोटाला फिलहाल 18 लाख के आसपास का पता चला है। जांच के बाद रकम बढ़ भी सकती है। डाक विभाग ने यह मामला आंतरिक विजिलेंस जांच में पकड़ा था। उसके बाद दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में केस दर्ज कराया।

आर्थिक अपराध शाखा सूत्रों के मुताबिक, यह मामला दक्षिणी दिल्ली स्थित लाजपत नगर डाकखाने का है। आर्थिक अपराध शाखा ने जांच के लिए तमाम दस्तावेज भी कब्जे में ले लिए हैं।


पाकिस्तान : कराची-रावलपिंडी एक्सप्रेस में धमाका, 65 लोगों की मौत, 3 बोगियां खाक

पाकिस्तान : कराची-रावलपिंडी एक्सप्रेस में धमाका, 65 लोगों की मौत, 3 बोगियां खाक

31-Oct-2019

पाकिस्तान में गुरुवार को कराची-रावलपिंडी तेजगाम एक्सप्रेस ट्रेन में धमाका हो गया. यह हादसा पंजाब प्रांत के दक्षिण में रहीम यार खान के पास हुआ. धमाके के बाद तीन बोगियों में लगी आग हादसे में 65 की मौत, 30 से ज्यादा घायल यह हादसा पंजाब प्रांत के दक्षिण में रहीम यार खान के पास हुआ. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किए गए गैस कनस्तर में धमाका हुआ धमाके के बाद तीन बोगियों में आग लग गई. इस हादसे में 65 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी हैं. घायलों को मुल्तान के बीवीएच बहावलपुर और पाकिस्तान-इटालियन मॉडर्न बर्न सेंटर में भर्ती कराया गया है.


Twitter पर बैन होंगे राजनेताओं और पार्टियों के विज्ञापन

Twitter पर बैन होंगे राजनेताओं और पार्टियों के विज्ञापन

31-Oct-2019

नई दिल्ली :  सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर के जरिए अब तक राजनितिक प्रचार करने वाले नेताओं और पार्टियों के लिए बुरी खबर है। ट्विटर अब किसी भी तरह का राजनीतिक विज्ञापन अपने प्लेफॉर्म पर बैन करने वाला है। यह पॉलिसी 22 नवंबर से लागू होगी। ट्विटर के सीईओ जैक पैट्रिक डॉर्सी ने खुद ट्वीट करके इसकी जानकारी दी है। साथ ही उन्होंने राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगाने के कुछ कारण भी बताए हैं। जैक ने ट्वीट में कहा, 'हमने वैश्विक स्तर पर ट्विटर पर सभी राजनीतिक विज्ञापनों को रोकने का निर्णय लिया है। हमारा मानना है कि राजनीतिक संदेश पहुंचना चाहिए, खरीदा नहीं जाना चाहिए। क्यों? कुछ कारण...'

जैक ने बताए ये मुख्य कारण

- एक पॉलिटिकल मेसेज को तब रीच (लोगों तक पहुंच) मिलती है, जब लोग किसी अकाउंट को फॉलो करते हैं या मेसेज को रिट्वीट करते हैं। विज्ञापन के चलते लोगों तक जबरन टारगेटेड पॉलिटिकल मेसेज पहुंचता है। हमारा मानना है कि इस निर्णय का पैसे से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

- कमर्शल विज्ञापनदाताओं के लिए इंटरनेट ऐडवर्टाइजिंग काफी पावरफुल और प्रभावी है, लेकिन यह पावर राजनीति में महत्वपूर्ण जोखिम लाती है। वहां इसका उपयोग वोटों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है, जो लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करता है।

- इंटरनेट राजनीतिक विज्ञापन आम लोगों के बीच तर्क के लिए पूरी तरह से नई चुनौतियों को पेश करते हैं। मशीन लर्निंग आधारित मेसेज का ऑप्टिमाइजेशन और माइक्रो-टारगेटिंग भ्रामक व फर्जी (फेक) सूचना को अनियंत्रित करता है।

- ये चुनौतियां सिर्फ राजनीतिक विज्ञापनों को नहीं, बल्कि सभी इंटरनेट संचार को प्रभावित करेंगी। बेहतर होगा कि पैसे लेकर आने वाले अतिरिक्त बोझ और जटिलता के बिना मूल समस्याओं पर अपने प्रयासों को केंद्रित किया जाए।

- उदाहरण के लिए यह कहना हमारे लिए विश्वसनीय नहीं है: 'हम भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए हमारे सिस्टम से खेल करने वाले लोगों को रोकने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन अगर कोई व्यक्ति हमें टारगेट करने के लिए भुगतान करता है और लोगों को उनका राजनीतिक विज्ञापन देखने के लिए मजबूर करता है, तो… वे जो चाहें कह सकते हैं!'
- पहले हमने सिर्फ कैंडिडेट्स के विज्ञापनों पर रोक लगाना तय किया था, लेकिन यह ठीक नहीं है कि कैंडिडेट उन मुद्दों से जुड़े विज्ञापन खरीदे लें जिन मुद्दों पर वह जोर देना चाहते हैं। इसलिए हम मुद्दों से जुड़े विज्ञापनों पर भी रोक लगा रहे हैं।

- हम यह अच्छी तरह जानते हैं हम राजनीतिक विज्ञापनों के ईकोसिस्टम का एक छोटा सा हिस्सा हैं। कुछ लोग हमारे इस काम पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन हमने ऐसे बहुत सामाजिक आंदोलन देखे हैं, जिन्होंने बिना राजनीतिक विज्ञापनों के बड़े स्तर पर अपनी पहुंच बनाई है। हमें विश्वास है कि आगे भी ऐसा होगा।

- इसके साथ हमें राजनीतिक विज्ञापनों से जुड़े ऐसे नियमों की जरूरत है, जो उन्नतिशील हों (ऐसा करना बहुत कठिन है)। विज्ञापनों की पारदर्शिता प्रोग्रेस है, लेकिन यह काफी नहीं है। इंटरनेट बिल्कुल नई क्षमताएं उपलब्ध कराता है और नियम बनाने वालों को वर्तमान से बढ़कर सोचना होगा।

- हम अपनी फाइनल पॉलिसी 15 नवंबर तक साझा कर देंगे, जिसमें कुछ अपवाद भी होंगे। उदाहरण के तौर पर वोटर रजिस्ट्रेशन के समर्थन में विज्ञापन दिए जा सकेंगे। हम अपनी नई पॉलिसी 22 नवंबर तक लागू करेंगे, जिससे मौजूदा विज्ञापन देने वालों को बदलाव के लिए नोटिस पीरियड मिल सके।

- आखिरी बात, यह मुफ्त अभिव्यक्ति की बात नहीं है। यह पैसे देकर पहुंच बढ़ाने के बारे में है और पैसे देकर किसी राजनीतिक भाषण की पहुंच बढ़ाने का काफी असर होता है, जिसके लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था अभी तैयार नहीं हैं। इसलिए इस संबंध में कदम पीछे हटाना ही सही तरीका है।


60 वर्षों से ऑल इंडिया रेडियो सरदार वल्लभभाई पटेल की मनाते आ रहा था जयंती लेकिन इस बार सरदार पटेल व्याख्यान में प्रसारित होंगे मोदी और शाह के भाषण

60 वर्षों से ऑल इंडिया रेडियो सरदार वल्लभभाई पटेल की मनाते आ रहा था जयंती लेकिन इस बार सरदार पटेल व्याख्यान में प्रसारित होंगे मोदी और शाह के भाषण

31-Oct-2019

नई दिल्ली: 60 वर्षों से ऑल इंडिया रेडियो सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाता आ रहा है. इस दिन यानी 31 अक्टूबर को उनके नाम पर एक घंटे का व्याख्यान प्रसारण किया जाता है. हालांकि, इस वर्ष ऑल इंडिया रेडियो ने अपनी योजनाओं को बदल दिया है. प्रख्यात व्यक्तित्व द्वारा दिए गए व्याख्यान के बजाय आकाशवाणी एक रेडियो रिपोर्ट प्रसारित करेगा, जिसमें गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के भाषणों के अंश होंगे. सरकार के सूत्रों ने कहा कि मन की बात के पीएम के एपिसोड के अंश और सरदार पटेल के कुछ उपलब्ध अभिलेखीय अंश भी प्रसारण का हिस्सा होंगे.

सरकार के एक सूत्र ने कहा, ‘वार्षिक सरदार पटेल मेमोरियल लेक्चर, जो कि एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व द्वारा दिया जाता है, उसे अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में रिकॉर्ड किया जाता है और फिर 31 अक्टूबर को रेडियो पर प्रसारित किया जाता है. इस साल यह कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया था. इसका कोई कारण नहीं बताया गया कि व्याख्यान क्यों नहीं हो रहा है.’ अन्य लोगों द्वारा दावा किया गया है कि यह अंतिम समय में निर्णय लिया गया था.

हालांकि, आकाशवाणी ने कार्यक्रम का नाम रखने का फैसला किया है – सरदार पटेल मेमोरियल लेक्चर – यह लेक्चर बदला नहीं जायेगा. केवल इसके कंटेंट को बदला जायेगा. कार्यक्रम रात 9.30 बजे प्रसारित किया जाएगा. देश भर के सभी आकाशवाणी केंद्रों को इसकी सूचना दी गई है.

इस कार्यक्रम के दौरान इन दोनों संबोधनों और माननीय पीएम ‘ के ‘मन की बात’ के एपिसोड में राष्ट्रीय एकता दिवस का उल्लेख किया गया है और साथ ही ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विषय से संबंधित ऑल इंडिया रेडियो द्वारा बनाया गया प्रतिष्ठित गीत भी होगा. अंग्रेजी में दिया जाने वाला वार्षिक सरदार पटेल मेमोरियल लेक्चर 1955 में पटेल की याद में शुरू किया गया था, जिन्होंने भारत के पहले सूचना और प्रसारण मंत्री के अलावा उप-प्रधानमंत्री और पहले गृह मंत्री के रूप में कार्य किया था. कई सालों से विभिन्न क्षेत्रों की प्रख्यात हस्तियों ने कई चयनित विषयों पर चुनिंदा श्रोताओं को लेक्चर दिया है.


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