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कार में हैंड सेनिटाइजर रखना हो सकता है खतरनाक, अमेरिका के दमकल विभाग ने दी चेतावनी

कार में हैंड सेनिटाइजर रखना हो सकता है खतरनाक, अमेरिका के दमकल विभाग ने दी चेतावनी

26-May-2020

नई दिल्ली: कोरोना से बचाने वाले हैंड सेनेटाइजर की बोतल क्या आपकी जान ले सकती है? क्या हैंडसेनेटाइजर की बोतल कार के भीतर बम बन सकती है? अमेरिका से एक हैरान करने वाली कहानी और चेतावनी आई है. दरअसल फेसबुक पर एक पोस्ट में जली हुई कार का दरवाजा दिखाया गया है और कहा गया है कि हैंड सेनेटाइजर कार में रखना खतरनाक हो सकता है. जानें पूरा मामला क्या है.

अमेरिका के वेस्टर्न लेक फायर डिस्ट्रिक्ट ने फेसबुक पर एक जली हुई कार की एक फोटो शेयर कर कहा है, ‘’ज्यादातर हैंड सेनिटाइजर अल्कोहल आधारित होते हैं जो ज्वलनशील है. गर्म मौसम में कार में रखे सेनिटाइजर पर सूर्य की रोशनी पड़ने से गर्म हो जाती है. खासकर छुट्टी मनाने के दौरान गाड़ी में धूम्रपान के वक्त ये बेहद खरनाक हो सकता है.’’

हालांकि अमेरिका के वेस्टर्न लेक फायर डिस्ट्रिक्ट ने जो तस्वीर फेसबुक पर शेयर की, बाद में उसको लेकर विवाद खड़ा हो गया. पोस्ट पर विवाद बढ़ा तो वेस्टर्न लेक फायर लेक ने सफाई दी कि पोस्ट में इस्तेमाल फोटो का इस जिले से कोई रिश्ता नहीं है. जिले में कोई हादसा भी नहीं हुआ है. ये पोस्ट लोगों को सतर्क करने के लिए किया गया था और कार में रखे हैंड सेनिटाइजर के खतरे को बताने के लिए किया गया था.

अमेरिका के नेशनल फायर प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने भी इस पर बयान देते हुए कहा कि हैंड सेनिटाइजर ज्वलनशील है और इसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए. गर्म तापमान में इससे आग लगने का खतरा रहता है.

साभार : ABP NEWS


#बौद्ध्स्थल_अयोध्या

#बौद्ध्स्थल_अयोध्या

22-May-2020

“अयोध्या में हिन्दू मंदिर का दावा मुख्य मुद्दों से ध्यान बटाने का हथकंडा”- दारापुरी 
ह बात एस आर दारापुरी आईपीएस (से.नि.) राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आज प्रेस को जारी बयान में कही है. उन्होंने कहा है कि जिस तरह से कल से अयोध्या में मिले अवशेषों का विडियो प्रसारित करके वहां पर हिन्दू मंदिर होने का दावा किया जा रहा है वह वास्तव में कोरोना संकट का सामने करने में मोदी सरकार की विफलताओं से लोगों का ध्यान बटाने का हथकंडा है. यह सर्वविदित है कि मोदी सरकार प्रवासी मजदूरों, कोरोना  मरीजों का टेस्ट, क्वारंनटाईन व्यवस्था, संक्रमित लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएँ, आर्थिक व्यवस्था एवं अन्य सभी मुद्दों पर बिलकुल असफल रही है जिससे जनता में सरकार के प्रति आक्रोश उभर रहा है. लगता है इस सब से ध्यान बटाने के लिए खुदाई/समतलीकारण से मिले अवशेषों को आधार बना कर वहां पर हिन्दू मंदिर होने का पुनः दावा किया जा रहा है जिस के बारे में सुप्रीम कोर्ट पहले ही बिना किसी सुबूत के राम मंदिर के पक्ष में फैसला दे चुकी है और इसे सभी पक्षों ने किसी तरह से स्वीकार भी कर लिया है. अब फिर इसकी बात उठाना यह दर्शाता है कि शायद राम मंदिर वाली पार्टी अभी भी अन्दर ही अन्दर अपने दावे को कमज़ोर समझ रही है और इसे अभी भी पुख्ता करने में लगी है. बिहार का चुनाव जिसे हिन्दू-मुस्लमान करने की ज़रुरत है, भी एक कारक हो सकता है क्योंकि भाजपा का मंदिर मुद्दा तो अब ख़त्म हो गया है पर उसे अभी भी चुनाव हित में जीवित रखने की ज़ुरूरत है. 
जहाँ तक अवशेषों के हिन्दू मंदिर के होने का दावा है वह भी सरासर गलत है क्योंकि अब विडियो में जो कुछ दर्शाया जा रहा है वह तो पूर्णतया बौद्ध मंदिर के अवशेषों को ही प्रमाणित करता है. उदाहरणार्थ इनमे एक धम्म चक्र है जिसके ऊपर बाहरी चक्र में 29, अन्दर के चक्र में 13 तथा सबसे छोटे चक्र में 7 कमल पत्तियां हैं. यह 29 वर्ष की आयु में बुद्ध के गृह त्याग, 10 पारमित्ताओं के साथ 3 त्रिशर्ण तथा बुद्ध के जन्म के तुरंत बाद पूर्व दिशा में चले 7 क़दमों के नीचे कमल के फूलों को इंगित करती हैं  इसी तरह जिसे शिवलिंग कहा जा रहा है वह वास्तव में छोटा बौद्ध स्तूप है क्योंकि शिवलिंग गोल होता हो चोकोर नहीं. एक द्वार पट्टिका पर कलश होने का दावा भी गलत है क्योंकि वह वास्तव में बुद्ध की तराशी हुयी मूर्ती है जिन्हें सलग्न चित्रों में देखा जा सकता है. 
अतः आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट सभी लोगों से आग्रह करता है कि वे आरएसएस/विश्व हिन्दू परिषद् के इन ध्यान बटायू हथकंडों से सावधान रहें और मोदी सरकार की कोरोना संकट को हल करने की विफलताओं को जोर शोर से उठायें और उस पर ज़रूरी कदम उठाने के लिए दबाव बनाये तथा राजनितिक परिवाद संगठित करें ताकि आने वाले समय में कोरोना की सुनामी से निबटा जा सके. 
एस आर दारापुरी आईपीएस (से.नि.) 
राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट
द्वारा सै क़ासिम 


दरिन्दगी - शर्मनाक :कब्र से निकाली बच्ची की लाश, करने लगा दरिंदगी की कोशिश, आरोपी गिरफ्तार

दरिन्दगी - शर्मनाक :कब्र से निकाली बच्ची की लाश, करने लगा दरिंदगी की कोशिश, आरोपी गिरफ्तार

22-May-2020

गुवाहाटी : 14 साल की एक लड़की की लाश को कब्र से निकाल कर उसका रेप करने की कोशिश का एक  रोंगटे खड़े कर देने वाला एक मामला सामने आया है। असम के देमाजी जिले के पुलिस अधीक्षक धनंजय गानावत के मुताबिक असम की 14 साल की लड़की की 17 मई को संदिग्ध स्थिति में मौत हुई थी और उसी रात परिजानों ने उसे गांव के किनारे साइमन नदी के तट पर दफना दिया। इस दौरान गांव के कुछ लोग भी मौजूद थे।

उसके एक दिन बाद (18 मई) को 51 वर्षीय अकान साइकिया नाम का एक व्यक्ति  कब्र से लड़की की लाश को बाहर निकाल कर उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास करने लगा। तभी वहां से गुजर रहे एक मछुआरे ने उसे देखा और तुरंत बाद इसकी सूचना पुलिस को दी। उसके कुछ ही देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी अकान के हाथ बांधकर उसे हिरासत में ले लिया गया। एसपी ने बताया कि लड़की की लाश के परीक्षण के लिए परिवार की अनुमति लेकर फिर से पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट का इंतजार है। पुलिस ने आरोपी अकान साइकिया के खिलाफ पोक्सो कानून सहित भारतीय दंड संहिता की धारा 306 और 377 के तहत मामले दर्ज किए हैं।

उधर, इससे पहले दो शादियां कर चुके आरोपी अकान साइकिया के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। अकान की पहली पत्नी ने 2018 में उसके खिलाफ घरेलू हिंसा के तहत शिकायत करने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर देमोजी जेल भेज दिया था। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के मद्देनजर जेल में कैद कैदियों में भी कोरोना फैलने की आशंका से कोरोना का कहर कम होने तक कुछ कैदियों को पैरोल पर रिहा करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया।

इसी के तहत मार्च महीने के आखिर में अकान को पैरोल मिलने पर जेल से रिहा हुआ था। परंतु जेल से बाहर आने के कुछ ही दिन बाद इस तरह की घिनौनी हरकत को अंजाम देने से डॉक्टरों ने उसकी मानसिक स्थिति की जांच की।  बताया जाता है कि अकान माहिलाओं के प्रति साइको (सनकी) की तरह बर्ताव करता था।  पुलिस अधीक्षक धनंजय गानावत ने बताया कि गांव के कई लोगों का कहना है कि अकान के लड़की का यौन शोषण करने के कारण ही उसने आत्महत्या कर ली है।


'राजीव गांधी का जाना..लेकिन क्यों' : वरिष्ठ पत्रकार राजीव मित्तल

'राजीव गांधी का जाना..लेकिन क्यों' : वरिष्ठ पत्रकार राजीव मित्तल

21-May-2020

नवभारत टाइम्स में रहते की तो याद नहीं कि राजीव गांधी को अक्षम मान लिया हो..हालांकि 1986 में वीपी सिंह ने वित्तमंत्री पद से हटा कर रक्षामंत्री बनाये जाने का बदला निकालना शुरू कर दिया था.. और राजीव गांधी के सबसे कमजोर पक्ष अमिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ को निशाना बनाते हुए बोफर्स में कमीशन खाने का मुद्दा उछाल दिया था..

वीपी सिंह के राजीव के खिलाफ उछाले गए इस मुद्दे को आरएसएस और रामनाथ गोयनका ने तेजी से अपनी मुट्ठी में दबाया और अभियान छेड़ दिया..वीपी ने कॉंग्रेस छोड़ दी और मसीहाई अंदाज़ में जनमोर्चा टाइप मंच पर बैठ भजन कीर्तन करने लगे (23 साल बाद अन्ना हजारे ने बिल्कुल वीपी सिंह के नक्शे कदम पर चलते हुए मनमोहन सरकार को निशाना बनाया था..तो समझ सकते हैं कि खेल के तरीके कितने पुराने हैं और कांग्रेस ने सबक लेना नहीं सीखा)..

नवभारत टाइम्स छोड़ कर जनसत्ता चंडीगढ़ जब पहुंचा तो देखा गोयनका के दोनों पालतू अरुण शौरी और प्रभाष जोशी की तोपें राजीव गांधी पर गोले दाग रही हैं और वीपी सिंह संघियों के साथ हय्या हो हय्या हो कर रहे हैं..कुछ दिन बाद वामपंथी भी शामिल हो गए और वीपी सिंह दोनों की गोद में खेलने लगे..

अब रुकिए..यहां से एक तार 1974 के जेपी के बिहार आंदोलन से भी जुड़ा है....तब भी उस आंदोलन का संचालन इंडियन एक्सप्रेस और रामनाथ गोयनका कर रहे थे और बम्बई का एक्सप्रेस टॉवर और दिल्ली का राजघाट ये दोनों जेपी और गोयनका की रणनीतिक स्थली बने हुए थे..बाद में जब जेपी के कीन्स के पूर्ण रोजगार के सिद्धांत टाइप वाले काल्पनिक सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन से जब राजनीतिक दल जुड़ने लगे तो गोयनका संघ और जनसंघ को पूरे उत्साह के साथ जेपी से जोड़ने में जुट गए..और फिर संघ जेपी के इतना नज़दीक पहुंच गया कि जेपी खुले आम अपने को संघी कहने में कतई नहीं हिचकते थे..

अब इस खेल को समझने को थोड़ा और पीछे चलिए..1971 के युद्ध में इंदिरा गांधी ने जिस तरह अमेरिकी राष्ट्र्पति निक्सन और उनके सलाहकार किसिंजर को उनकी औकात दिखाई और पाकिस्तान को तोड़ कर बांग्लादेश बनवाया, तो अमेरिका को इंदिरा गांधी को खत्म करने के लिए सीआईए को तो उतारना ही उतारना था..इधर किसिंजर चूंकि अमेरिका की हमेशा से सबसे मजबूत रही यहूदी लॉबी के नुमाइंदे थे तो उन्हें भारत में संघ का संगठन मिल गया और बरसों से दिल में नेहरू-गांधी परिवार को लेकर ज़हर का पोषण कर रहे रामनाथ गोयनका की मार्फत संत नेता जयप्रकाश नारायण को मैदान में उतारने लायक मुद्दे तलाश लिए गए..

कुल मिलाकर देवी दुर्गा की तरह पुजती आ रहीं इंदिरा गांधी 1975 के शुरुआती महीनों में भारत माता की सबसे बड़ी दुश्मन के रूप में स्थापित कर दी गयीं.. घटनाक्रम बहुत तेजी से बदला.. इंदिरा गांधी ने अपने छोटे बेटे के कहने पर कोर्ट के आदेश को किनारे कर उसी साल जून में  देश में इमरजेंसी लगा दी..अब यहां फिर देखिए कि एक महीने बाद ही बांग्लादेश के निर्माता शेख अब्दुल्ला, उनके परिवार और उनके मंत्रिमंडल के कई सारे सदस्यों का खून कर दिया और यह क़त्लेआम बांग्लादेश में कई महीनों चला..इसके पीछे सौ फीसदी सीआईए का हाथ था..शेख मुजीब की हत्या इंदिरा गांधी की बड़ी विफलताओं में गिनी जाती है..थी भी उन पर बहुत बड़ी चोट..

कुल मिलाकर गोयनका और संघ के कई खेलों में 1977 में कई  दलों की चर्बी से बनी जनता पार्टी की सरकार बनना भी एक बहुत खेल था..चूंकि संघ को अभी देश में वो मान्यता नहीं मिली थी, इसलिए गोयनका अटल को तो नहीं, लेकिन उनसे भी ज़्यादा घातक इंसान मोरार जी देसाई को संघ की मदद से जगजीवन राम को किनारे कर प्रधानमंत्री बनवाने में सफल हुए, जबकि पूरा संसदीय दल उनके विरोध में था..लेकिन धुर दक्षिणपंथी जेबी कृपलानी के जरिये जेपी को तैयार किया गया..और उस समय जेपी की बात काटने का सवाल ही नहीं उठता था..उस समय चौधरी चरण सिंह भी जगजीवन राम को न बनवाने के लिए अड़ गए..मतलब कि पूरी जनतापार्टी की मति मारी गई थी जो मोरार जो को प्रधानमंत्री बनवा दिया..

मधु दण्डवते और मधु लिमये जैसे कुछ समाजवादी नेताओं के अलावा पूरा मंत्रिमंडल सीआईए के इशारों पर काम कर रहा था..तभी विदेश मंत्रालय अटल को और सूचना मन्त्रालय आडवाणी को मिल गए..यानी संघ के हवाले हो गए दूर तक और देर तक असर डालने वाले दो विभाग. उसके बाद नौटंकियों का अंबार लग गया.. फिर तो जनतापार्टी की सरकार का चरमरा कर गिरना, इंदिरा गांधी का सत्ता में आना और फिर सीआईए का सक्रीय होना, पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा, और स्वर्णमंदिर में सैन्य कार्रवाई, फलस्वरूप इंदिरा गाँधी की हत्या वगैरह क्या मारियो पूजो के उपन्यास गॉड फादर की याद नहीं दिलाते!!जिसमें डॉन वीटो कारलोन के जमाई की मदद से डॉन के ही बड़े बेटे सोनी की हत्या करवाने का बृहद मंच तैयार किया जाता है मात्र एक वेश्या के फोन जरिये..

अब फिर 1987 के दिनों में लौटा जाए..अब तक सबसे बड़ा बहुमत पा कर सरकार बनाने वाले राजीव गांधी किस हश्र को प्राप्त हए और किस तरह यहां वीपी सिंह के अलावा राजीव गांधी को बरबाद किया गया खुद उनके कज़िन अरुण नेहरू के हाथों..वीपी के हटते ही राजीव गांधी का सारा विश्वास अरुण नेहरु पर था, लेकिन अरुण नेहरु खेल गए संघ के हाथों में, और उन्होंने ही राजीव गांधी से शाहबानो जैसे दो कौड़ी के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदलवा दिया और तब आरिफ मोहम्मद खान जैसे छुटभैये महान क्रांतिकारी बन गए.. और दूसरे गृहमंत्री रहते अरुण नेहरु ने राजीव को फंसा कर राम मंदिर का ताला खुलवा कर कब से बंद पड़ा संघ का और संघी पत्रकारों का कारोबार खड़ा कर दिया..यानी इस बार अरुण नेहरु ने वही खेल खेला गॉड फादर के जमाई वाला..

गोयनका और देवीलाल जैसे कद्दावर नेता की मेहनत से 1989 के चुनाव में वीपी सिंह मैदान में ताल ठोंकने लायक सीटें पा गए और फिर वीपी को मिल गयीं संघ और वामपंथियों की बैसाखी.. मुराद पूरी हुई राजा साहब की, बन गए एक वर्षीय प्रधानमंत्री..लेकिन प्रधानमंत्र

द्वारा : सैय्यद क़ासिम 


क्या कांग्रेस की गुगली में फंसी भाजपा!

क्या कांग्रेस की गुगली में फंसी भाजपा!

21-May-2020

राजनीति तो बहुत देखी भारत देश नें। लेकिन जनता को बलि का बकरा बना कर जो राजनीति इस वक्त हो रही है वह ग़लत है। जनता बेकसूर है। दोष उसका है जिसने नमस्ते ट्रंम्प कार्यक्रम किया, दोष उनका है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को जारी रखा। दोष उनका है जिन्होंने पूरी तरह टेस्टिंग की व्यवस्था नहीं की, दोष उनका है जिन्होंने बग़ैर किसी प्लान के लाकडाउन लगाया, दोष उनका है जिन्होंने मरीजों को पूरे भारत में फैलाने का काम किया।
लेकिन जनता तो मर रही है। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि आदमी सड़क पर मरे जानवर खा रहा है। मध्यवर्गीय और निम्नवर्गीय जनता भूखों मर रही है। लेकिन सरकार को बस-बस खेलने में मजा आ रहा है।
कांग्रेस द्वारा एक हज़ार बसों की व्यवस्था करने के बाद प्रदेश सरकार की कुर्सी हिलने लगी और तमाम कानूनी दांवपेंच लगाये जाने लगे। बसें बार्डर पर खड़ी हैं। जनता फंसी है। और सरकार नम्बर और फिटनेस चेक करने की बात कर रही है। आखिर मजदूरों को उनके घर पहुंचाने में सरकार क्यूं डर रही? क्या कांग्रेस की गुगली में फंस गई सरकार?
सवाल बहुत हैं कि क्या सरकार की फिटनेस सही है जो उसने प्राइवेट कर्मचारियों को उनके हाल पर छोड़ दिया! क्या वह वोट नहीं देते? क्या वह इंकमटैक्स नहीं देते? क्या अर्थव्यवस्था में उनका योगदान नहीं है? क्या वह इस देश के नागरिक नहीं है? 
अब बात प्रवासी मजदूरों की जो कुआं खोद के पानी पीते हैं। और सरकार इन्हीं प्रवासी मजदूरों को सड़क पर लावारिस छोड़ कर बातों में लोगों को उलझाने का प्रयास कर रही है।
जब सरकार को रैली करनी होती है तो नियम कानून कहां चले जाते हैं? फिटनेस की बात क्यूं नहीं होती? कभी परिवहन निगम की बसों को भी चेक करले सरकार! चार दिन से बसें खड़ी हैं । सोशल मीडिया पर साफ देखा जा सकता है और तो और ड्राइवर भी कहते नजर आ रहे हैं कि बसें ठीक हैं। इस वक्त मजदूरों का पहुंचना जरूरी है। कभी चुनाव से पहले या बाद ही सही नेताओं का फिटनेस टेस्ट हुआ! उसे भी कर लेते तो आज यह दिन ना देखने पड़ते।
बहरहाल सरकार हर मोर्चे पर विफल हो रही है। शायद उसने यह मान लिया है कि वह कुछ नहीं कर सकती है इसलिए जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया है। डब्लू एचओ को खुश करने के लिए लाकडाउन तो चल रहा है मगर धज्जियां ऐसे उड़ रही हैं जैसे कांटों में रेशमी कपड़ा। डब्लू एचओ से ईनाम तो मिल ही गया डॉ हर्षवर्धन को एक्जिक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन बना दिया गया।
जनता के जागने का वक़्त आ गया है। अब तो समझ जाओ कि एकता में ही बल है। वरना जो हाल अंग्रेजी राज में हुआ वही अब होगा या यूं कहूं कि हो रहा है। Divide and Rule.
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com

 

 


आखिरकार कांग्रेस बीजेपी को अपनी पिच पर खेलने के लिए ले ही आई....

आखिरकार कांग्रेस बीजेपी को अपनी पिच पर खेलने के लिए ले ही आई....

20-May-2020

(पवन सिंह)

प्रियंका के निजी सचिव व प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर कराना सरकार का मूर्खतापूर्ण निर्णय है। कांग्रेस ने बसों को लेकर जो खेल खेला है उसमें शासन के अफसरों ने सरकार की गर्दन फंसा दी है। दरअसल कांग्रेस अपनी बनाई हुई पिच पर प्रदेश भाजपा को टास जीतकर जिस तरह से खिलवाना चाहती थी...उसी तरह से सरकार खेल रही है। सरकार को सरकार के ही अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज करा कर कांग्रेस को अच्छा माइलेज दे दिया है। पहले यह तमाशा खड़ा किया गया कि बसों की सूची ही नहीं दी गई है। कांग्रेस   जानती थी कि सूची तो मांगी ही जाएगी, उसने झट से सूची जारी कर सरकार को तगड़ा झटका दिया। फिर कनफ्यूजियाई ब्यूरोक्रेसी इस मामले में घुसी और आदेश दिया कि सभी एक हजार बसें लखनऊ लाई जाएं यहां बसों की फिटनेस टेस्ट होगा। 

यानी बसे डीजल खर्च करके पहले 400-500 किलोमीटर चलकर लखनऊ आएं फिर एक-दो दिन बाद फिटनेस सार्टिफिकेट लेकर वापस जाएं .... यानी आने-जाने पर लाखों रूपए का डीजल फूंका जाए और तब तक लेबर आसमान टापता रहे। आज फिर कनफ्यूजियाई ब्यूरोक्रेसी को फिर ज्ञान प्राप्त हुआ कि बसें जहां हैं वहीं के राज्य के सटे हुए जिले का आरटीओ फिटनेस जारी कर देगा। फिर हड़बड़ाई  भाजपा के चंद पुरोधा प्रवक्ता पांच-सात ऐसे नंबर निकाल लाए जो बसों के नहीं थे....यानी नंबर गलत थे ....ठीक है जो नंबर गलत थे उन्हें किनारे करके बसें चलवा देनी चाहिए थीं। ... लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ...

इस बीच कांग्रेस ने लेटर-लेटर खेल खेल दिया और उसके कार्यकर्ता सड़क पर उतर गये। हमेशा की तरह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया व प्रिंट इस पूरी खबर को अंडरप्ले कर गया लेकिन सोशल मीडिया पर खबर गर्म हो गई। वैसे भी मेन स्ट्रीम मीडिया को अब लोगों ने हाशिए पर धकेल रखा है। इसी बीच आज शाम हड़बड़ाई ब्यूरोक्रेसी ने एफआईआर दर्ज करने का निर्णय लेकर कांग्रेस को खेलने का पूरा मौका मुहैय्या करा लिया। प्रदेश सरकार के लिए अब यह मामला गले की हड्डी बन चुका है। बस लें तो मुसीबत न लें तो मुसीबत.....ऊपर से प्रियंका गांधी ने एक इमोशनल गुगली फिर डाल दी कि भाजपा चाहे तो राजस्थान सरकार की बसों पर अपना झंडा फहरा दे लेकिन वह मजदूरों पर दया करे। फिलहाल उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी ने राज्य सरकार को फंसा दिया है

द्वारा : सैय्यद कासिम 


 अदृश्य युद्ध के दौर में......... जंग जारी है !

अदृश्य युद्ध के दौर में......... जंग जारी है !

15-May-2020

श्री तारन प्रकाश सिन्हा IAS  के फेसबुक वाल से

निश्चित ही यह एक अकल्पनीय समय है। वह घटित हो रहा है, जो किसी ने कभी सोचा तक नहीं था। आगे बढ़ती हुई एक सदी अचानक थम गई, बीती हुई सदी अपने तमाम जख्मों के साथ फिर प्रकट हो गई। फिर वही भूख, पलायन, गरीबी और बेबसी, बेबसों का वही रेला। कश्मीर से कन्याकुमारी तक दुख और दर्द का समुंदर ठाठे मार रहा है। हर कोई आवाक् है, बदहवास है। क्या मजदूर, क्या मालिक, क्या शासन, क्या प्रशासन...हर पल एक नयी चुनौती सामने आती है, रूप बदल बदल कर नयी नयी मुश्किलें नुमाया होती हैं...लेकिन जंग जारी है। इनसान लड़ रहा है। जीत रहा है। यह समय पूरी दुनिया पर कहर बनकर टूट रहा है। पूरी दुनिया में श्रम पर जिंदा रहने वाले लोग मुश्किल में हैं। भारत में भी। कोरोना से उपजी परिस्थितियों ने प्रवासी श्रमिकों को सड़क पर ला दिया है। घर लौट रहे हजारों-हजार मजदूरों का रेला हर रोज एक राज्य से दूसरे राज्य दाखिल हो रहा है।


छत्तीसगढ़ का भूगोल ही कुछ ऐसा है कि यह भारत का चौगड्डा है। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम जाने वाले रास्ते यहीं से होकर गुजरते हैं। इसीलिए घर लौट रहे पैदल मजदूरों के सबसे बडे़ जत्थे इस राज्य को लांघते हुए आगे बढ़ रहे हैं। किस दिन, किस पल, कितनी संख्या में मजदूर छत्तीसगढ़ की सीमा में दाखिल होंगे, कुछ पता नहीं होता। कोरोना की आहट मिलने के तुरत बाद से ही छत्तीसगढ़ सरकार और समाजसेवी पीडि़तों को राहत पहुंचाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। दूसरे प्रदेशों में कमाने-खाने गये मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी के लिए ट्रेनों-बसों का इंतजाम करने, उनसे संपर्क बनाए रखने, उन्हें क्वारंटाइन करने और क्वारांटाइन की अवधि में उनकी सेहत तथा सुविधाओं का खयाल रखने में बडा़ अमला जुटा हुआ है। साथ ही छत्तीसगढ़ से होकर गुजरने वाले अन्य राज्यों के अनगिनत मजदूरों को ठहराने, उनके भोजन आदि की व्यवस्था करने, उन्हें छत्तीसगढ़ की एक सीमा से दूसरी सीमा तक पहुंचाने के लिए वाहनों का प्रबंध करने में भी सैकडो़ लोग जिसमें ज़िला प्रशासन ,स्वास्थ्य , परिवहन आदि के साथ सामाजिक संगठन लगे हुए हैं। तपती हुई दोपहरियों में, संक्रमण के तमाम खतरों के बीच, वे भी मजदूरों के पसीनों में अपना पसीना मिला रहे हैं। अपने परिवार से दूर रहकर वे भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारियां पूरी कर रहे हैं।


कोरोना के विषाणुओं की तरह चुनौतियां भी अदृश्य हमले करती हैं। चौक-चौराहों पर अपनी संवेदनाओं की ढाल लेकर तैनात योद्धा इनसे पल-पल मुकाबिल है। इस कठिन लडा़ई में कभी कभी चुनौतियां भी भारी पड़ सकती हैं। असंख्य लोगों के भोजन और वाहनों के इंतजाम में समय की ऊंच-नीच हो सकती है। लेकिन यह समय कमी निकालने का नही बल्कि काम करने वालों को प्रोत्साहित करने और उनका हौसला बढ़ाने का है ।यह एक युद्ध है और युद्ध को युद्ध की तरह ही देखना और लड़ना होगा। चुनौतियां हौसलों से ही हारा करती हैं, हर हाल में हमें अपने योद्धाओं का हौसला बनाए रखना होगा।


सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ने आरोग्य सेतु एप के उपयोग पर उठाया सवाल

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ने आरोग्य सेतु एप के उपयोग पर उठाया सवाल

13-May-2020

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी एन श्रीकृष्ण ने कोरोना वायरस (कोविड-19) के मरीजों का पता लगाने में मदद के लिए लाए गए मोबाइल एप ‘आरोग्य सेतु’ के संबंध में डाटा के संभावित उल्लंघन को लेकर सवाल खड़ा किया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि यह (एप) इस प्रकार का पैबंदकारी है जो नागरिकों को फायदा पहुंचाने के बजाय उनकी चिंता बढ़ाएगी। न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा ने कहा कि यह बिल्कुल आपत्तिजनक है कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आये लोगों का पता लगाने वाले इस एप पर ऐसा आदेश कार्यकारी स्तर पर जारी किया गया।

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व न्यायाधशीश ने सोमवार (11 मई) को दक्ष द्वारा ‘डाटा शासन एवं लोकतांत्रिक मूल्य’ पर आयोजित वेबीनार में कहा, ‘‘ऐसे आदेश को संसदीय कानून से समर्थन प्राप्त होना चाहिए जो सरकार को ऐसा आदेश जारी करने के लिए अधिकृत करेगा।’’ उन्होंने कहा कि उपयुक्त कानून के अभाव में डाटा उल्लंघन की स्थिति में व्यवस्था में कोई जवाबदेही नहीं है।

उन्होंने कहा कि, “यदि यहां डेटा का उल्लंघन होता है, तो कौन जवाबदेह है? क्या कार्रवाई की जानी चाहिए? डेटा उल्लंघन के लिए कौन जिम्मेदार होगा?” बता दें कि, न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा उस विशेषज्ञ समिति के अगुवा थे जिसने निजी डाटा सुरक्षा विधेयक का प्रारूप तैयार किया था।

गौरतलब है कि, केंद्र सरकार ने 2 अप्रैल को मोबाइल ऐप (आरोग्य सेतु) लॉन्च किया था ताकि लोगों को कोरोना वायरस और सतर्क अधिकारियों से संक्रमित होने के जोखिम का आकलन करने में मदद मिल सके अगर वे किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ संपर्क में आए हैं। लगभग 9.8 करोड़ लोगों ने इस ऐप को डाउनलोड किया है और यह 12 भाषाओं में उपलब्ध है।


भारत में अच्छे दिन की तस्वीर।

भारत में अच्छे दिन की तस्वीर।

12-May-2020

अच्छे दिन आयेंगे! यही वह मंत्र था जिसे हिंदुस्तान के जहांपनाह ने अपने भाइयों और बहनों को दिया था। और ऐसे ज़ोरदार तरीके से दिया था कि आज तक प्रत्येक व्यक्ति इस मंत्र का उच्चारण कर रहा है। मंत्र की अपनी एक विशेषता होती है यदि ग़लत उच्चारण कर दिया जाये तो असर उल्टा या दूसरा हो जाता है। यहां भी यही हुआ।
जनता अपने अच्छे दिन समझने लगी जबकि यह सेवक के खुद के लिए था।
अच्छे दिन की शुरुआत नोटबंदी से शुरू होकर घरबंदी तक पहुंच गई। इस बीच विदेशों से कालाधन लाकर पंद्रह लाख खातों में डालने के वादों से जनता मंत्र मुग्ध हो गई वह भूल गई कि जहां टैक्स अदा की गई राशि पर भी टैक्स लिया जाता है और जहां बगैर रिश्वत के कोई काम नहीं होता वहां मुफ़्त में पंद्रह लाख क्यूं और कैसे मिलेगा! जनता से मांगने वाला समय, समय-समय पर बदलता रहा। कभी पचास दिन, कभी एक साल, कभी पांच साल । काम ना करने की स्थिति में कभी चौराहा, कभी सज़ा, कभी कुछ! समय बदलता रहा और स्थिति यहां तक आ पहुंची कि भाइयों और बहनों से ही कागजात मांगे जाने लगे। 
इसी बीच सेर पर सवा सेर कोरोनावायरस ने दस्तक दी। महोदय ने समझा जैसे दुनिया में सब नेताओं को गले लगा लगा के टोपी पहनाई इसे भी पहना दूंगा मगर मामला उल्टा पड़ गया वह इन्हीं के गले पड़ गया। अब लेने के देने पड़ गये। ताली और थाली बजवाई कि शायद डर कर भाग जाये, मोमबत्ती और दिया जलवाया कि शायद रौशनी से भाग जाये मगर बेकार। उल्टा जहांपनाह कोपचे में चले गए। वैसे भी राजा और मंत्री महलों में रहकर रामायण और महाभारत देखते हैं भले ही सीखते कुछ नहीं।
खैर आइये भारत के शहरों, अस्पतालों और सड़कों पर चलते हैं और देखते हैं कि अच्छे दिन की तस्वीरें कैसी हैं!
शहर के शहर बंद हैं। दुकान, आफिस, स्कूल, कोचिंग सब अपनी किस्मत को रो रहे हैं। अस्पतालों का नामकरण हो गया अब कोविड अस्पताल हो गये। जहां सामान्य रोगी की नहीं बल्कि सिर्फ करोना की जांच होगी। ऐसा लगता है कि मरीज़ या तो गायब हो गए या मर्ज सब खत्म हो गये या फिर अस्पताल जबरदस्ती मरीज़ बना देता था। खैर कोरोना के इलाज में लगे डाक्टर, नर्स सब अपनी जिंदगी दांव पर लगा कर सेवा कर रहे हैं। ये बात अलग है कि सुविधा के अभाव में प्रदर्शन भी कर रहे हैं। 
सड़कों की हालत देखिए लाकडाउन के बावजूद जनता सड़कों पर अपने घरों को पैदल जाने के लिए मजबूर हैं। सुविधा के नाम पर डंडे खा खाकर घर जा रही है जनता।
कोविड केयर के नाम पर हर जगह से धन‌ जमा करने के बावजूद रोज जनता से भीख मांगी जा रही है। ऐसा लग रहा है कि देश को सरकार नहीं जनता चला रही है। पचास दिन हो गए यही नहीं पता कि क्या किया जाए। बड़े सरकार को यह पता है कि जनता सड़कों पर आ रही है क्योंकि वह घर जाना चाहती है मगर यह नहीं पता कि उसे पैसे की भी जरूरत है। रोजगार ठप्प हैं मगर साहब कह रहे हैं कि जंग हम जीतेंगे।
जंग आप और आपकी सरकार जीत गई। बधाई।
देश की जनता जंग हार गई। अफसोस
आपने धन इकट्ठा कर लिया। बधाई।
जनता ने रोजगार खो दिया। अफसोस
कोई बात नहीं जनता का सेमीफाइनल 2022 और फाइनल 2024 में। शाट देखना।
जयहिंद

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com


"भूपेश के हौसले को सलाम "

08-May-2020

एम.एच.जकरीया 

एक तरफ जहाँ पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रहा है वही भारत देश भी इस कोरोना वायरस की चपेट में है अब तक कोरोना वायरस का संक्रमण 52,952 लोगों को लगभग अपनी चपेट में ले चुका है और इस वायरस से पूरे भारत में मरने वालो की तादाद लगभग चार  अंको को पार कर चुकी है, वही देश का छत्तीसगढ़ राज्य ऐसा राज्य बना हुआ है जहाँ कोरोना वायरस से अभी तक एक भी जनहानि नहीं हुई है, रिकॉर्ड बताते चले की छत्तीसगढ़ में कुल 59 कोरोना संक्रमित पाए गए जिनमे लगभग  36 संक्रमित ठीक हो कर अपने घर वापस चले गए  !

यह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दूरदर्शिता का ही परिणाम है जो उन्होंने राज्य का खज़ाना अपनी जनता के लिए इस संकट की घड़ी में खोल दिया राज्य में कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की रोकथाम के लिए सभी 28 जिलों को "मुख्यमंत्री सहायता कोष" से 25-25 लाख रूपए की राशि जारी करने वाला पहला ऐसा राज्य बना है जो राज्य की जनता को हर हाल में सुरक्षित देखना चाहते हैं और बिना किसी केन्द्रीय सरकार की मदद से  कुल 7 करोड़ रूपए की यह राशि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक संसाधन, सामग्री और राहत कार्यों के लिए खर्च कर  रही है ! 

जबकि केंद्र से अब तक कोई भी सहयोग नहीं मिल रहा है ! वही श्री भूपेश बघेल के मंशानुरूप राज्य के सभी जिलों में गरीबों, अन्य स्थानों के श्रमिकों एवं निराश्रित लोगों को निःशुल्क भोजन व खाद्यान्न पैकेट उपलब्ध कराए जाने का सिलसिला  लगातार जारी है। कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन के चलते जरूरतमंदों की मदद के लिए राज्य भर में जगह-जगह लगाए गए राहत शिविरों में 7 मई को एक लाख 14 हजार 762 जरूरतमंदों, श्रमिकों एवं निराश्रितों को निःशुल्क भोजन व खाद्यान्न पैकेट उपलब्ध कराया गया। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए मास्क, सेनेटाइजर एवं दैनिक जरूरत का सामान भी जिला प्रशासन, रेडक्रॉस तथा स्वयंसेवी संस्थाओं की सहयोग से जरूरतमंदों को लगातार मुहैया कराया जा रहा हैं। 

जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार 7 मई को स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से 37 हजार 944 मास्क एवं सेनेटाईजर, साबुन आदि का वितरण जरूरतमंदों को किया गया हैं।  लॉकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री राहत शिविर आजीविका का केन्द्र बन गया है। राहत शिविर में रूके श्रमिकों के लिए शासन द्वारा रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है जो की इस संकट के समय एक मिसाल बना हुआ है । जहाँ किसी तरह का कोई  भेदभाव नहीं हुआ स्वस्थ श्रमिक, फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए खाली समय में मेहनत कर अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर रहे हैं।

 मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी  की घोषणा के अनुरूप देशभर में फंसे मजदूरों के घर वापस जाने के लिए रेलयात्रा का खर्च देने की बात को तत्काल उसे अमल में लेते हुए हर जरूरतमंद श्रमिक व कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करने और उसे अमल में लाना भी प्रारम्भ कर दिया है जबकि केंद्र की सरकार केवल बयान बाज़ी में ही लगी हुई है !  जबकि  रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर उनसे छत्तीसगढ़ के प्रवासी श्रमिकों की वापसी के लिए देश के विभिन्न शहरों से 28 ट्रेनों के संचालन का अनुरोध किया है। श्री बघेल ने भारत सरकार द्वारा फंसे हुए मजदूरों की उनके घर तक वापसी के लिए ट्रेनों के संचालन के निर्णय का स्वागत करते हुए मानवीय आधार पर रेल्वे द्वारा ट्रेनों के संचालन करने और जल्द से जल्द तारीख और समय तय करने का आग्रह किया है।  

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल और निर्देशन पर राजस्थान के कोटा शहर में कोचिंग कर छत्तीसगढ़ के छात्र-छात्राओं की आज सुबह सकुशल अपने राज्य छत्तीसगढ़ वापसी संभव हो सकी है। क्वारंटाइन  में रहने के बाद सभी  छात्र-छात्राएं सकुशल  अपने माता पिता के घर पहुंच गए है । इन छात्रों की वापसी में प्रशासन, पुलिस, परिवहन, चिकित्सा अधिकारियों के साथ ही वाहन चालक और उनके परिचालकों की अहम भूमिका रही है। सकुशल अपने राज्य वापसी पर छात्र-छात्राएं जहां खुश है वहीं उनके अभिभावकों ने भी राहत की सांस ली है।


भारत अब सर्विलांस स्टेट बनने जा रहा है : गिरीश मालवीय

भारत अब सर्विलांस स्टेट बनने जा रहा है : गिरीश मालवीय

08-May-2020

गिरीश मालवीय

जहाँ आपकी हर गतिविधियों पर सरकार की नजर बनी रहेगी, आप कहा जा रहे है? क्या खा रहे है? क्या पी रहे हैं? क्या बोल रहे है? आपकी विचाधारा क्या है? सब बातों पर बिग बॉस की नजर है BIG BOSS WATCHING YOU !........

इस आरोग्य सेतु एप्प की सिक्योरिटी को लेकर रोज नए नए तथ्य सामने आ रहे हैं जिनसे यह खुलासा हो रहा है कि यह बिल्कुल भी सुरक्षित नही है हालांकि सरकार इसकी सुरक्षा का दावा कर रही हैं आज फ्रांस के एक हैकर और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट इलियट एल्डर्सन ने दावा किया था कि आरोग्य सेतु एप की सुरक्षा में खामियां हैं, इलियट एल्डर्सन ने आज आरोग्य सेतु एप को हैक करने का भी दावा किया है इलियट एल्डर्सन ने ट्वीट करके कहा है कि आरोग्य सेतु एप एक ओपन सोर्स एप है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि पीएमओ ऑफिस में पांच लोगों की तबीयत खराब है और यह जानकारी उन्हें आरोग्य सेतु एप से ही मिली है। यह वही है जिन्होंने पिछले साल आधार की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े किए थे

आरोग्य सेतु एप्प को दरअसल सर्विलांस स्टेट की तरफ ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है कोरोना के बहाने जिस तरह से हमारी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का आरहण किया जा रहा है उस पर तुरंत चेत जाने की आवश्यकता है, कल जो नोएडा में हुआ है वही पूरे देश मे होने वाला है, वहाँ के पुलिस उपायुक्त ने अपने एक आदेश में कहा है कि लॉकडाउन 3.0 के दौरान जो भी स्मार्टफोन यूज़र घर से बाहर निकलता है, तो उसके फोन में आरोग्य सेतु ऐप का होना जरूरी है. अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो व्यक्ति पर कानूनी एक्शन भी लिया जा सकता है.

यह तो बात हुई नोएडा की, लेकिन अब अन्य राज्यों ने भी एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वालों पर इस एप को अपने फोन में इंस्टॉल करने की बाध्यता लागू कर दी है, जिस तरह से निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के सभी कर्मियों के लिए भी इस एप को इंस्टॉल करना अनिवार्य कर दिया गया है। वह आश्चर्यजनक है इसमे सबसे बड़ी बात यह है कि संबंधित कंपनी के प्रमुख की जिम्मेदारी होगी कि वो सभी कर्मियों के फोन में इस ऐप का होना सुनिश्चित करें। अगर वो ऐसा नही करता है तो निदेशक, प्रबंधक, सचिव या किसी अन्य अधिकारी की ओर से कोई लापरवाही साबित होने पर उसे दंडित करने का भी प्रावधान है।

यानी एक तरफ तो आप बिना किसी कानूनी आधार के इस एप्प को अनिवार्य कर रहे हो और वही इंस्टाल नही कराने पर दंडात्मक प्रावधान कर रहे हो

डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 और एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1897 केंद्र और राज्य सरकारों को काफी ज्यादा अधिकार देते हैं. लेकिन इसका अर्थ यह नही है कि आप किसी की निजता का उसकी प्राइवेसी का अतिक्रमण करो.....एपिडेमिक डिसीजेज एक्ट, जिसका इस्तेमाल आदेशों को लागू करवाने के लिए अभी राज्य सरकारें कर रही हैं, तब भी सरकार को इस तरह के ऐप के जरिए लोकेशन डाटा इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देता. 
ये ऐप लोगों का डेटा और उनकी आवाजाही को रिकॉर्ड करता है तो निजता के अधिकार का मामला बनता है. केंद्र या राज्य सरकार या फिर डीएम अगर ऐसा आदेश देते हैं, तो साफ बताना पड़ेगा कि आदेश का लीगल आधार क्या है. ऐसा न करने पर आदेश सुप्रीम कोर्ट के निजता के अधिकार पर फैसले का उल्लंघन होगा.

अक्सर ऐसी सर्विलांस एप्प का बचाव करते हुए लोग ताइवान, साउथ कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों में मौजूद इसी तरह की ऐप का हवाला देते हैं लेकिन वो भूल जाते हैं कि वहाँ की सरकारें ऐसी आक्रामक निगरानी प्रक्रिया को अपनाने से पहले पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखती हैं. इन सभी देशों में निजी डाटा की सुरक्षा को लेकर एक ढांचा तैयार है, जो कि डाटा जमा करने की प्रक्रिया, उसके इस्तेमाल और गोपनीयता की सुविधाओं में कमी पर सरकार की जवाबदेही तय करता है. 

लेकिन भारत में ऐसा कोई फ्रेमवर्क तैयार नही है, सरकार ने 2019 में जो निजी डाटा संरक्षण विधेयक पेश किया था वो आज भी संयुक्त संसदीय समिति की जांच से गुजर रहा है .......इस निजी डाटा संरक्षण अधिनियम के पहले प्रारूप में बुनियादी तौर पर सहमति पर जोर था. लेकिन आज बिल का जो प्रारूप है उसके तहत खास परिस्थितियों में, जिसमें मेडिकल इमरजेंसी भी शामिल है, डाटा के इस्तेमाल के लिए सहमति को अपवाद के तौर पर रखा गया है. ..........

यानी साफ है कि ऐसे प्रावधानों का हवाला देकर जल्द ही सरकार एक अध्यादेश के जरिए इस आरोग्य सेतु एप्प को अनिवार्य करने का आदेश जारी भी कर सकती हैं......... इसी बात की सम्भावनाए सबसे अधिक लग रही है और मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर न्यायालय भी इसे सही ठहरा सकता है......

द्वारा सै क़ासिम 

 


सरकार की नाकामी मुसलमानों के सर फोड़ने की साजिश

सरकार की नाकामी मुसलमानों के सर फोड़ने की साजिश

05-May-2020

पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस छत्तीसगढ़ मोहम्मद वजीर अंसारी ने अपने एक टेलीफोनिक विशेष बीएड वार्ता में भारत के 85% दलित एकमजोरए पिछड़ी जाति, अति पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यक समुदाय में क्रिश्चियन, सिख, बुद्धिस्ट, और मुसलमानों को होशियार रहने की जरूरत पर बल देते हुए कहा है कि लॉकडाउन को 101% पालन करें क्योंकि हमारी एक गलती को केंद्र सरकार और राज्य सरकार अपने किए गए कामों की नाकामी का ठीकरा इन समुदाय के किसी एक पर फोड़ने की साजिश की जा चुकी है जिससे होशियार होने की जरूरत है.  

उन्होंने कहा कि गोदी मीडिया को केंद्र सरकार की विफलता को छुपाने के लिए एक समुदाय से दूसरे समुदाय में नफरत की बीज बोने का काम करा रही है. उन्होंने विशेष तौर पर पूरे भारत के मुसलमानों से अपील किया है कि माहे रमजान के अवसर पर तराबी की नमाज में, भारत के विभिन क्षेत्रों में 10 पारा 20 पारा खत्म हो जाने के बाद शिरनी (मिठाई) वगैरह तकसीम करते हैं ! इसका बिलकुल आयोजन ना की जाए ! मस्जिद के पास अपना बीमार आदमी भेज कर मुसलमानों के सर अपनी नाकामी फोड़ने की कोशिश की जाएगी ! और लॉकडाउन खत्म करके फिर हमारे ऊपर नाकामी की ठीकरा फोड़ने की कोशिश की जाएगी इसलिए लॉकडाउन के खत्म होने के बाद भी कुछ दिनों तक हम अपनी मर्जी से लॉकडाउन रखें

उन्होंने यह भी कहा कि टेस्ट किट किस तरह नाकाम हो गया है ? और यह कोई पूछने वाला नहीं ! 23 मार्च तक पार्लियामेंट चला नमस्ते ट्रम्प के आयोजन में हजारों विदेशी एयरपोर्ट पर उतरे ! भारत के विभिन्न राज्यों में गए क्या उनसे कोरोनावायरस नहीं फैला ? भारत के रेल मंत्रालय 39 लाख टिकट बेच देती है कि 15 अप्रैल से ट्रेन चलेगी स्टेशन के करीब मस्जिद होने पर मस्जिद नजर आती है सूरत शहर में भीड़ के पास मंदिर रहती है तो वहां मंदिर नजर नहीं आती पालघर में मॉब लिचिंग बच्चा चोर के नाम पर होती है यहाँ भी गोदी मीडिया और बीजेपी की आईटी सेल ने मुस्लिम रंग देने का खूब प्रयास किया मुसलामन नहीं मिले पर कम्युनिस्ट पार्टी के बाद कल से कांग्रेस पर ठीकरा फोड़ दिया गया है इस गोदी मीडिया और भाजपा के कुछ सांसदों की वजह से पूरी दुनिया में थू थू हो रहा है भारत के अंदर बुद्धिजीवी सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं थाली-ताली पीटने से और दिया जलाने से वायरस खत्म होगा या स्वास्थ्य इक्विपमेंट बढ़ाने से खत्म होगा ! यह कोई पूछने वाला नहीं उन्होंने सवाल खड़ा किया मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के तकरीबन 60 बड़े अफसर पॉजिटिव कैसे हो गया.

उन्होंने भारतीय मुसलमानों से अपील किया कि एक माह खामोशी के साथ अपने घरों में रहकर रोजा रखें और नमाज पढ़ें लॉकडाउन का 101% पालन करें मुसलमानों की एक गलती पर सिर्फ मुसलमानों का रैपिड टेस्ट करा कर पूरे भारत में प्रसिद्ध कर दिया जाएगा भारत में मुसलमान कोरोना पीड़ित है इसलिए अभी डाटा छुपा कर रखा जा रहा है लॉकडाउन खत्म करके मुसलमानों को मस्जिद के माध्यम से फंसाने की पूरी कोशिश की जाएगी मेरी अपील है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी और रमजान के अवसर पर भी बिलकुल भीड़भाड़ न करें धीरे धीरे मीडिया का मसाला खत्म हो रहा है इसलिए हमें होशियार रहने की जरूरत और पूर्ण रूप से लॉकडाउन का पालन करना है ।


क्या लाकडाउन का डोज़ फायदेमंद है?

क्या लाकडाउन का डोज़ फायदेमंद है?

04-May-2020

कहां से शुरू करूं कुछ समझ में नहीं आता है क्यूंकि जनवरी से शुरू हुआ खतरा जिससे सरकार मार्च में सचेत हुई और अब मई तक आ गये हमलोग। लेकिन हुआ क्या! कुछ नहीं। सिर्फ राजनीति हो रही है। मीडिया प्रचार हो रहा है। जनता भूखों मर रही है। यही सच्चाई है।
देश में कोरोनावायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। संक्रमितों की संख्या 40,000 के करीब पहुंच गई है। 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। सरकार क्या कर रही है? क्यूं नहीं टीवी के माध्यम से जनता को बताते! यह जो अरबों रुपए कोरोना के नाम पर जमा हुए हैं किस क्षेत्र में खर्च हो रहा जनता को बताना चाहिए।
सिर्फ लॉकडाउन के सहारे भारत कोरोना से नहीं जीत सकता है। पिछले 40 दिनों में स्थिति खराब ही हुई है लेकिन हम सच्चाई स्वीकारने को तैयार नहीं हैं। राहुल गांधी यह बात पहले ही कह चुके हैं। प्रत्येक दिन का आकलन करने के बाद यह स्पष्ट है कि सिर्फ लॉकडाउन से हम कोरोना से जीत नहीं सकते। हम जैसे भी आकलन करें, पिछले 40 दिनों में स्थिति खराब ही हुई है, लेकिन हम सच्चाई स्वीकारने और अपनी रणनीति बदलने को तैयार नहीं हैं। दुर्भाग्यवश, इस तरह से 17 मई के बाद भी स्थिति बिगड़ती दिखेगी। इसमें कोई सुधार आने वाला नहीं है। प्रतिदिन संख्या बढ़ती जा रही है।
आज हालात यह हैं कि लोग भूखे मर रहे हैं। लोग पैदल सड़कों पर चलने के लिए मजबूर हैं, फ्री यात्रा के नाम पर किराया लिया जा रहा है, लोगों तक राशन नहीं पहुंच रहा है। जो पहुंच रहा है वह सामाजिक संस्थाओं के द्वारा पहुंचाया जा रहा है। 
करोड़ों लोगों के व्यवसाय, दुकानें, प्रतिष्ठान, संस्थान इत्यादि बंद है। कहां से किराया देंगे? खर्च कैसे चलेगा? घर का क्या होगा? यह सब सवाल जनता को कष्ट पहुंचा रहे हैं। लेकिन सरकार खामोश है।
सच्चाई यही है कि यह मीठी सरकार है जिसकी तासीर कड़वी है। सिर्फ लफ़्फाज़ी और कुछ नहीं। एक भी वक्तव्य सरकार ने शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा, भूख, किसान, अनाज इत्यादि पर नहीं बोला। बस ताली और थाली बजवा कर चल दिए। देश में हत्यायें हो रही, धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है, मीडिया लड़ाने में लगी है।  कोई पैदल चला जा रहा है तो कोई साइकिल से, कहीं सब्जियां मुसलमान हो गई तो कहीं हिंदू। लोग धार्मिक बैनर लगा कर सब्जी बेच रहे। मोहल्लों से जाति देखकर भगाया जा रहा है। विधायक उन्मादी बयान दे रहे। लेकिन क्या मजाल जो बिग बॉस कोई बयान दें।
सब ख़ामोश हैं।
कोरोनावायरस की जिम्मेदारी सरकार की है आज भी मूर्खतापूर्ण कार्य हो रहे हैं। शहर के अंदर जगह जगह कोरोना संक्रमित को रखा जा रहा है इससे तो और फैलेगा। कई शहरों में जिन इलाकों में संक्रमण नहीं था वहां संक्रमितों को रखने से वह इलाका भी संक्रमित हो गया। बगैर किसी प्लान के कार्य किया जा रहा है।
बसें चलीं मगर जनता पैदल नज़र आई।
निःशुल्क ट्रेन चलाई मगर किराया ले लिया।
राशन बंटा मगर जनता भूखी और मांगती नजर आई।
ताली थाली से आभार व्यक्त करवाया लेकिन योद्धा बगैर मास्क और किट के।
दुकान खोलने का ऐलान मगर जनता का निकलना मना।
स्कूल फीस पर सरकार की रोक मगर स्कूल मांगने पर अड़ा।
मतलब सरकार है या क्या है समझ नहीं आता पूरी दुनिया में मज़ाक बन गया है। लोग ट्विटर पर अनफालो कर रहे हैं। शायद इसका एहसास हो गया कि टीवी पर से गायब हो गए और गृहमंत्रालय का सहारा लिया।
अभी भी वक़्त है जाग जाओ। वरना यह समय इतिहास के पन्नों में कटु शब्दों में लिखा जायेगा
देश निराश हैं, जनता निराश हैं।
ईश्वर का सहारा है।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com


विश्व हास्य दिवस- 3 मई 2020 पर विशेष

विश्व हास्य दिवस- 3 मई 2020 पर विशेष

02-May-2020

हास्य कोरोना मुक्ति का सशक्त माध्यम-  ललित गर्ग -


विश्व हास्य दिवस विश्व भर में मई महीने के पहले रविवार को मनाया जाता है और इस वर्ष कोरोना महामारी के बीच जन-जन में व्याप्त तनाव, परेशानी एवं मानसिक असंतुलन के बीच इस दिवस का विशेष महत्व है। हास्य सकारात्मक और शक्तिशाली भावना है जिसमें व्यक्ति को ऊर्जावान और संसार को शांतिपर्ण बनाने के सभी तत्व उपस्थित रहते हैं। विश्व हास्य दिवस का आरंभ संसार में इंसान को स्वस्थ एवं प्रसन्न रखने, शांति की स्थापना और मानवमात्र में भाईचारे और सद्भाव के उद्देश्य से हुई। आज पूरे विश्व में लगभग दस हजार से भी अधिक हास्य क्लब हैं।
इस समय जब अधिकांश विश्व कोरोना कहर के डर से सहमा हुआ है तब हास्य दिवस की अत्यधिक आवश्यकता महसूस होती है। इससे पहले इस दुनिया में इतनी चिन्ता, अनिश्चितता एवं महामारी का प्रकोन कभी नहीं देखा गया। हर व्यक्ति के अंतर आत्मद्वंद्व मचा हुआ है, भय एवं आशंकाएं परिव्याप्त है। ऐसे में हंसी दुनियाभर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकती है। हास्य व्यक्ति के विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित करता है और व्यक्ति में आत्म विश्वास,सकारात्मक ऊर्जा एवं आनन्दित जीवन जीने की इच्छा का संचार करता है। जब व्यक्ति समूह में हंसता है तो यह सकारात्मक ऊर्जा पूरे क्षेत्र में फैल जाता है और क्षेत्र से नकारात्मक ऊर्जा को हटाता है। हास-परिहास पीड़ा का दुश्मन है, निराशा और चिंता का अचूक इलाज और दुःख मुक्ति के लिए रामबाण औषधि है।
आज का जीवन मानव इतिहास का सबसे जटिल आपदा एवं महामारी के प्रकोप का  समय है, आम आदमी कोरोना कहर के तनाव एवं परेशानियों से घिरा हैं, ऐसे जीवन में व्यक्ति के चेहरे से मुस्कान ही गायब हो गयी है, हास्य एवं विनोद से वंचित जीवन मानव के लिये एक जटिल पहेली बनता जा रहा है। जबकि जीवन में विनोद का सर्वाधिक महत्त्व है। हास्य ही एक ऐसा माध्यम है, जो व्यक्ति के तनावपूर्ण जीवन में कुछ क्षणों के लिए खुशी लाता है। हास्य-रस एक बुझे हुए दीपक में तेल की नवऊर्जा का संचार करता है।
हास्य-व्यंग्य का इस महामारी के समय हमारे जीवन में इसलिये भी सर्वाधिक महत्त्व है क्योंकि यह जीवन को स्वस्थ बनाये रखने में यह अहम् भूमिका का निर्वाह करता है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हँसना भी उतना ही जरूरी है जितना श्वास लेना। हास्य जीवन का अनमोल तोहफा है, जो व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने के साथ-साथ समस्याओं से जूझने की ताकत देता है। हास्य जीवन का प्रभात है, शीतकाल की मधुर धूप है जो ग्रीष्म की तपती दुपहरी में सघन छाया का काम करती है। इससे आप तो आनंद पाते ही हैं दूसरों को भी आनंदित करते हैं।

हास्य के बिना न केवल जीवन अधूरा है बल्कि नीरस भी है। जीने की कला का यह सबसे बेहतर रास्ता है, जो हमारे थके हारे मन को ताजगी देता है, जीवन की विडम्बनाओं पर खुल कर हंसने का अवसर देता हैं और कोरोना की जटिल परिस्थितियों से जूझने का मनोबल भी देता है। हास्य बीमारी से लड़ने का सशक्त हथियार है जो हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है। केवल मनुष्य जाति को ही हास्य का आनन्द लेना आता है। यदि जीवन में हास्य न हो तो जीवन भारभूत बन जाता है। इसलिये जितने भी महापुरुष हुए है उन्होंने हास्य को अपने जीवन में महत्वपूर्ण बनाया। हास्य में किसी व्यक्ति, संस्था पर व्यंग्य नहीं होता। किसी का मजाक उड़ाने की भावना नहीं होती, इसलिये इसका आनन्द सभी ठहाका लगाकर उठाते हैं, लेकिन यही हास्य जब व्यंग्य के साथ सम्मिलित होकर निन्दा की घोषणा करने लगता है, तब उपहास बनकर महाभारत का युद्ध करा देता है, इसलिये उपहास किसी का भी करना एक बड़ा गंभीर मामला है। लोक में जिनका उपहास होता है, जरूरी नहीं कि वे उपहास का पात्र हो। आज तक अनुभव यह है कि लोक में जिसका उपहास किया जाता है, वह वास्तव में प्रतिभा-सम्पन्न व्यक्ति होते हंै। प्रभु यीशू से सुकरात तक जाने कितने उदाहरण हैं, जिनसे यह सिद्ध किया जा सकता है कि उपहास सहनेवालों ने विश्व को नये विचार दिये हैं और दुनिया को सुन्दर बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान किया है। दार्शनिक शिवानन्द का कहना है, ‘‘मजाक चतुराई से किया गया, अपमान है।’’ इसलिये भूलकर भी किसी का उपहास मत कीजिये। हमें यह अधिकार नहीं है कि हम किसी का उपहास करें।
दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति है ही नहीं, जो पूर्णतः निर्दोष हो। तब हममें ही अनेक अवगुण हैं, दोष हैं, विकार हैं, तब हम अन्य किसी के अवगुणों को लेकर उसका उपहास कैसे कर सकते हैं? हिन्दी में एक बड़ी अच्छी लोकोक्ति है, ‘सूप हंसे तो हंसे, चलनी भी हंसे जिसमें बहत्तर छेद’। अगर हमंे हंसना ही हो तो अपनी कमजोरियों पर ही हंसना चाहिये। जो व्यक्ति निर्मल हृदय होगा, वह किसी का उपहास कर ही नहीं सकता। उसमें तो अपार करुणा होती है। दुनिया में आज तक उपहास से किसी का सुधार नहीं हुआ है। इसके कारण खून-खराबा अवश्य हुआ है। सामाजिक और राजनीतिक जीवन में हम हर दिन एकदूसरे का उपहास करने सेे होने वाली असामान्य स्थितियों को देखते ही है। द्रोपदी के उपहास के कारण ही महाभारत जैसा भयावह युद्ध हम इतिहास में देखते हैं। हिन्दी में एक लोकोक्ति प्रचलित है, ‘रोग का घर खांसी, झगड़े का घर हांसी’, अर्थात् अनेक रोगों का मूल खांसी है और झगड़ों का मूल कारण किसी की हंसी उड़ाना है। खलील जिब्रान ने सटिक लिखा है, ‘‘उपहास मृत्यु से अधिक कटू है।’
शरीर में पेट और छाती के बीच में एक डायफ्राम होता है, जो हँसते समय धुकधुकी का कार्य करता है। फलस्वरूप पेट, फेफड़े और यकृत की मालिश हो जाती है। हँसने से ऑक्सीजन का संचार अधिक होता है व दूषित वायु बाहर निकलती है। नियमित रूप से खुलकर हँसना शरीर के सभी अवयवों को ताकतवर और पुष्ट करता है व शरीर में रक्त संचार की गति बढ़ जाती है तथा पाचन तंत्र अधिक कुशलता से कार्य करता है, इसलिये कोरोना को परास्त करने के लिये हास्य-योग बहुत उपयोगी है।

लखनऊ के रेलवे स्टेशन से आदमी बाहर निकलता है तो बड़े अक्षरों में लिखे बोर्ड पर नजर टिकती है- ‘मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में हैं।’ यह वाक्य पढ़ते ही यात्रियों के चेहरे पर मुस्कुराहट फैल जाती है। इस एक वाक्य में लखनऊ की जिंदादिली व खुशमिजाजी के दर्शन होते हैं। जीवन में निरोगी रहने के लिए हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए। खाना खाते समय मुस्कुराइए, आपको महसूस होगा कि खाना अब अधिक स्वादिष्ट लग रहा है। थैकर एवं शेक्सपियर जैसे विचारकों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि प्रसन्नचित व्यक्ति अधिक जीता है। मनुष्य की आत्मा की संतुष्टि, शारीरिक स्वस्थता व बुद्धि की स्थिरता को नापने का एक पैमाना है और वह है चेहरे पर खिली प्रसन्नता।
हास्य एक सार्वभौमिक भाषा है। इसमें जाति, धर्म, रंग, लिंग से परे रहकर मानवता को समन्वय करने की क्षमता है। हंसी विभिन्न समुदायों को जोड़कर नए विश्व का निर्माण कर सकता है। यह विचार भले ही काल्पनिक लगता हो, लेकिन लोगों में गहरा विश्वास है कि हंसी ही दुनिया को एकजुट कर सकती है। मनोवैज्ञानिक प्रयोगों से यह स्पष्ट हुआ है कि अधिक हँसने वाले बच्चे अधिक बुद्धिमान होते हैं। हँसना सभी के शारीरिक व मानसिक विकास में अत्यंत सहायक है। जापान के लोग अपने बच्चों को प्रारंभ से ही हँसते रहने की शिक्षा देते हैं।
प्रेषकः

 (ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
मो. 9811051133


टीबी के खिलाफ जंग में कोरोना नहीं बनेगा बाधक, गाइडलाइन्स की गयी जारी

टीबी के खिलाफ जंग में कोरोना नहीं बनेगा बाधक, गाइडलाइन्स की गयी जारी

01-May-2020
* प्रवासी मजदूरों को टीबी जांच एवं उपचार की बेहतर सुविधा मुहैया कराने के निर्देश
* कोविड-19 के ग्रीन, ऑरेंज एवं रेड जोन जिले के मुताबिक टीबी सेवा बहाल करने के निर्देश 
* टीबी मरीजों को 1 से 2 महीने की दी जाएगी दवा 
* टीबी संबंधित जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1800-11-6666 पर करें कॉल 
रायपुर 30 अप्रैल 2020 । कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच टीबी मरीजों को दी जाने वाली सुविधाएँ अब बाधित नहीं होगी. इसको लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से आरएनटीसीपी ( रिवाइज्ड नेशनल टीबी प्रोग्राम) के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. केएस सचदेवा ने राज्य के राज्य स्तरीय टीबी पदाधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखकर विस्तार से दिशानिर्देश दिया है. पत्र में बताया गया है कि कोविड-19 महामारी के बीच भी टीबी की रोकथाम एवं उपचार को लेकर प्रदान की जाने वाली सेवाओं को नियमित रखने की जरूरत है. इसके लिए राज्य एवं जिला स्तर पर कार्यरत संबंधित अधिकारीयों एवं कर्मियों को इस महामारी काल में भी अधिक सतर्क रहकर टीबी संबंधित सेवाओं को सुचारू रखने की जरूरत है. जिसमें टीबी की रोकथाम, डायग्नोसिस, उपचार एवं देखभाल संबंधित सेवाएं शामिल है. साथ ही इस दौरान टीबी के कारण होने वाली अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं पर भी ध्यान देने की जरूरत होगी. पत्र में यह भी बताया गया है कि टीबी प्रबंधकों की यह जिम्मेदारी है कि डायग्नोसिस के साथ टीबी मरीजों की पहचान करने का कार्य भी जारी रखना सुनिश्चित करें. 
हॉस्पिटल ट्रीटमेंट की जगह सामुदायिक आधारित देखभाल अधिक कारगर:
कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार को देखते हुए सामान्य टीबी मरीजों को हॉस्पिटल में उपचार देने की जगह सामुदायिक देखभाल पर अधिक जोर देने की बात कही गयी है. साथ ही टीबी अस्पतालों में ओपीडी भीड़ से कोरोना संक्रमण के बढ़ने की आशंका को देखते हुए टीबी मरीजों को 1 महीने की दवा एवं अत्यधिक गंभीर स्थिति में 2 महीने की एंटी-टीबी दवाएं देने के निर्देश दिए गए हैं. ताकि बेवजह लोगों की अधिक भीड़ अस्पतालों में न हो सके.
कोविड-19 के ग्रीन, ऑरेंज एवं रेड जोन के मुताबिक टीबी सेवा प्रदान करने के निर्देश: 
कोरोना संक्रमण के प्रसार को देखते हुए सभी राज्यों में में ग्रीन, ऑरेंज एवं रेड जोन जिले निर्धारित किये गए हैं. पत्र में बताया गया है कि ग्रीन जोन जिले में टीबी संबंधित सभी सेवाएं सामान्य तरीके से प्रदान की जाए. जिसमें दवाओं का वितरण, सैंपल का ट्रांसपोर्टेशन, मरीजों का आवागमन आदि सेवाएं शामिल हैं. ऑरेंज जोन जिले जिला प्रशासन द्वारा कोविड-19 के संक्रमित क्षेत्र में कुछ नामित अधिकारीयों को छोड़कर शेष कर्मी टीबी संबंधित सेवाओं को प्रदान करने में शामिल रहेंगे. जबकि रेड जोन जिले में जो कोविड-19 एवं राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम दोनों में शामिल हैं, वे यह प्रयास करेंगे कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम किसी भी तरह से कमजोर न हो.
प्रवासी मजदूरों को मिले बेहतर सुविधा:
पत्र में बताया गया हा कि प्रवासी मजदूरों में टीबी से ग्रसित होने की संभावना अधिक है. इसलिए संभावित लोगों जांच की जाए. कोरोना के मद्देनजर राज्य में उनके लिए बनाए गए आइसोलेशन सेंटर में यदि किसी प्रवासी मजदुर में टीबी के संभावित लक्षण हों तो भी उनकी टीबी की जांच की जानी चाहिए. इसके लिए राज्य/जिलों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि सभी प्रवासी मजदूरों में जो भी टीबी से ग्रसित हों, उन्हें समुचित देखभाल एवं दवा मिल सके. 
टोल फ्री नंबर से लें जानकारी: 
टीबी संबंधित जानकारी प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा जारी टोल फ्री नंबर(1800-11-6666) के विषय में आम जागरूकता बढ़ाने की बात कही गयी है.        
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीबी कर्मी बरतें सावधानी:कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार के मद्देनजर टीबी कर्मियों( हेल्थ केयर स्टाफ एवं लेबोरेटरी टेकनीशियन) को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है जो टीबी सैंपल कलेक्शन एवं उसके जांच संबंधित कार्यों में शामिल होते हैं: 
लेबोरेटरी में सेफ्टी मेजर का ऐसे करें अनुपालन: 
* टीबी के सैंपल एकत्रित करने के बाद साबुन एवं पानी से हाथों को अच्छी तरह साफ़ करें 
* लेबोरेटरी एरिया के आस-पास खाना खाने एवं पानी पीने से बचें 
* लेबोरेटरी प्रेमिसेस में अधिक व्यक्तियों के प्रवेश को वर्जित करें. यदि एक से अधिक टेकनीशियन हों तो आपस में पर्याप्त दूरी बनाकर रहें 
* लेबोरेटरी के सतहों को 1% सोडियम हाइपो-क्लोराइट से सैनिटाइज्ड करें
* बायोमेडिकल वेस्ट को राष्ट्रीय गाइडलाइन्स के मुताबिक ही डिस्पोज करें 
टीबी कर्मी व्यक्तिगत सुरक्षा का भी रखें ख्याल: 
* डिस्पोजेबल एन-95 मास्क का करें इस्तेमाल
* डिस्पोजेबल एप्रन/ सर्जिकल गाउन/ नार्मल एप्रन प्लास्टिक शीट के साथ का इस्तेमाल करें एवं इसे हाइपोक्लोराइट से डिसइन्फेक्ट भी करें 
* ग्लव्स एवं डिस्पोजेबल हेड कैप का प्रयोग करें 
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हाँ मैं कांग्रेसी हूँ ,पर क्यूँ हूँ     ?

हाँ मैं कांग्रेसी हूँ ,पर क्यूँ हूँ ?

29-Apr-2020

     कृब्ण देव (केडी) सिंह


 

आज जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद एक नया टकराव हर कांग्रेसी के हृदय और मस्तिष्क में मचा हुआ है .कुछ लोगों का धर्म संकट झ्सलिए है किं एकतरफ कांग्रेस की नीतियों सिद्धान्तों से दशकों का जुड़ाव दूसरा सिंधिया से व्यक्तिगत जुड़ाव निश्चित ही जो सिंधिया को अपना प्रेरक मानते रहे है उनका कठिन समय है ।लेकिन मैं उन पुरखों के विरासतों का उत्तराधिकारी हूँ जिन्होने आजादी की ध्युदध में निस्वार्थ योगदान दिया और कांग्रेस का क्षंड़ा  फहराते रहे।मैं उनका तीसरी पीड़ी हूँ।कांग्रेस से सैद्धांतिक नैतिक जुड़ाव से कांग्रेसी हूँ।।। भले परिस्थितियों वश कहो या अन्य दुकानदार टाइप नेताओ से विचार भिन्नता के चलते  राजनीति और पत्रकारिता मे सक्रिय हूँ। और  अभी तक रहा हूँ ब आगे भी रहुगा।
      मुझे याद है जब मैं रायपुर जो अब छत्तीसगढ़ की राजघानी है लेकिन .1977में मध्यप्रदे१ा का एक प्रमुख शहर था,के शासकीय अभियांत्रिक एंव प्रौद्योगिक महाविद्यालय में अभियांत्रिकी की शिक्षा ग्रहण कर रहा था ।तभी मेरी आजतक की सबसे अधिक प्रिय इंदिराजी की गिरफ्तारी हुई ।मेरे पिता बंगाल रेजीमेंड़ से सेवानिवृत होकर भिलाई इस्पात सयंत्र में कार्यरत थें।उनकी दुर्ग लोक सभा के संसद व पूर्व केन्दीय मंत्री स्व० श्री चन्दुलाल चन्द्राकर से सामाजिक निकटता थी ।उनके नेतृत्व में दुर्ग_ भिलाई में जबरदस्त आंदोलन हुआ ,गिरफ्तारी हुई ।मैं भी रायपुर के शास्त्री चौक में जिला कांग्रेस के द्वारा इन्दिरा जी की गिरफ्तारी के विरोघमें आयोजित घरना और सड़क जाम आन्दोलन में भाग लेने से अपने आपको नहीं रोक सका। इस तरह मेरा ग़ैर विधिवत तरीके से कांग्रेस में प्रवेश आप मान सकते है ।लेकिन विधीवत कांग्रेस की सदस्यता पूर्व मंत्री व रायपुर ग्रामीण के विघायक सत्यनारायण शर्मा जी की पहल  व हस्ताक्षर से1978में ग्रहण किया ।तब से लेकर आज दिनांक तक विधीवत कांग्रेस पार्टी का सक्रिय सदस्य हूँ।
       आज भी मप्र के पुराने कांग्रेसी याद करते है लेकिन कभी समझौता ना करने की जिद्द और सैद्धांतिक दृढ़ता का रक्त वही था ।तो मैं भी उसी राह पर चल बैठा ।अब इसे व्यक्तिगत दुर्भाग्य ना कहकर कांग्रेस का दुर्भाग्य कहूँगा की गुटबाजी,क्षेत्रवादी और जातिवादी राजनीति में उलझी कांग्रेस ने कभी मुक्षे अवसर नहीं दिया।पिछली वार मैने वैशालीनगर से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का टिकिट मांगा था ।मेरे लाख प्रयास के वाद मैं समक्ष गया गया कि  अज्ञात कारणों से मुक्षे टिकट नहीँ मिलेगा और वही हुआ। जिन्हें टिकट मिला वे रिकार्ड मतों से चुनाव हार गये ।जवकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की लहर भी । मराठी में एक कहावत है कि आचवल साहेब आपले सद्गुण कांग्रेस मधे अवगुण आहे यानि आपके सद्गुण कांग्रेस के लिए अवगुण है ।वह भी सभी राजनैतिक सामाजिक संगठनों नेताओ से व सम्बन्धो के बावजूद।
        मेरी सार्वजनिक जीवन यात्रा भी कुछ लोगों से मिलती जुलती है। विश्वविद्यालय में पढ़ने के दौरान एआईएसएफ फिर युवक कांग्रेस सभी मे सांकेतिक पदों पर रहा। तारिक अनवर जी के नेतृत्व में रायपुर व भिलाई में ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस में काम फिर कांग्रेस की सेवा की। राष्ट्रवाद राष्ट्रीयता के ऐतिहासिक परिवार में पैदा हुआ तो राष्ट्रवादी पार्टी तो केवल कांग्रेस ही थी ,तो कांग्रेसी था रहा ,अभी तक हूँ।पर कांग्रेस ने मुझे कभी अवसर  नही दिया ताकि अपनी योग्यता सिद्ध कर सकु ।खैर।मैंने टिकिटों के लिए लीलाएं निकट से देखी ।कांग्रेस का छ्त्तीसगढ़ में व्याप्त जातिगत व परिवार का एकाधिकार और क्षेत्रवाद देखा ।छोटे छोटे पंचों को विधायक बनते देखा पर मुझे कुछ नहीं मिला और न ही कोई चुनाव लड़ने काअवसर दिया गया और न ही किसी तरह की अशासकीय सदस्य के रन्प में किसी भी स्तर पर कोईं पद दिया गया।सभी ने मेहनत कराई। मैंने की भरपूर की पर किसी ने भी आजतक कुछ नहीं दिया और डंके की चोट पर कहता हूँ कि मैंने आजतक एक पैसे का व्यक्तिगत फायदा नहीं उठाया ।हाँ इस दौरान मैंने अपने पिता के सेवानिवृत होने पर जो घन मिला उसे बर्वाद जरूर कर दिया।क्योंकि उस पैसे के सहारे रायपुर में मेरा हाई स्टील एलो३ज कारिस्टग का प्रोजेक्ट को  अन्तिम समयः में  उद्योगमत्री स्व० क्षुमूकलाल भेडिया मे रायपुर के तत्कालिन प्रभावशाली नेता राधेश्याम शर्मा उर्फ राधेश्याम कलाभाटिया के कहने पर रद्द कर दिया ।जबकि मैं उन्ही के साथ राजनीति में था।श्री शर्मा का तर्क था कि चुकि मैं बिहारी हूँ और कालेज का छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुका हूँ ,इसलिए मैं गुण्डा हूँ।जबकि मैं जन्म से ही छ्त्तीसगढ़ी हूँ और मेरे पुरे जिवनकाल में भी कहीं भी किसी भी तरह के अपराघ में लिप्त होने सम्बन्धी किसी भी घारा में कोई अपराघ आज दिनांक तक पंजीबद्ध तक नहीं हआ है।
     सन्दर्भ बस युवा विचार मंच का गठन का भी उल्लेख कर दूँ।मैंने भोपाल में स्व० राजीव गॉधी जी की प्रथम उद्वोघन से प्रेरित होकर युवा विचार मंच,मध्यप्रदेश नामक सामाजिक संगठन का विधीवत पजीयन कराया था।इसका शपथ ग़हण समारोह भोपाल के पत्रकार भवन में रखा गया।३स समारोह के मुख्य अतिथि थे स्व० दाऊ साहव श्री अर्जुन सिंह और कार्यक्रम की अध्यक्ष थे   छत्तीसगढ़ के प्रथम मुरन्य मंत्री अजीत प्रमोदकुमार जोगी जी।कार्यक्रम अपेक्षा से अधिक सफल रहा ।समाचार पत्रों में खुब छपा क्योंकि मैं स्वंम पत्रकारिता से मिलने वाला वेतन से अपना पारिवार का पोषण कर रहा था झ्स कारण राष्ट्रीय समाचार पत्रों ने भी भरपुर स्थान दिया।।प्रदे१ा के युवाओं के जबरदस्त समर्थन तत्कालिन युवा हृदय सम्राट पूर्व केन्द्रीय मत्री सुरेश पचौरी व प्रदे१ा युवक काग्रेस अध्यक्ष तथा तत्कालिन मुरन्यमंत्री व कांग्रेस के महासचिव मोती लाल वोरा जी को
वर्दास्त नही हुआ।इसलिए युवा विचार मच को युवक काग्रेस के समानान्तर व वगावत करने वालों का फर्जी आरोप लगवाकर  तत्कालिन कांग्रेस अध्यक्ष स्व० राजीव गाँधी जी भ्रमित किया और मेरी सामाजिक संस्था को भंग करवाया।मैने संस्था को भंग करते हुए अपनी प्रातिवद्धता कांग्रेस पार्टी और राजीव जी पर सर्वजनिक रूप से तब भी जताया था और आज भी उसपर कायम हूँ।।
                 अक्सर मुक्षपर लोग जाति और बिहार की वात करने और कभी-कभी जातिवाद ब बिहारीवाद करने का आरोप लगा देते हैं। मुक्षे ऐसे लोगों को न तो कुछ कहना है और न ही ऐसे आरोपों का प्रातिवाद  करना है । क्योंकि मुक्षे गर्व है कि मेरा पूर्वजों का गाँव मगघ ( बिहार) के नालन्दा जिले में है और मेरा सम्बन्ध पूर्व कुर्मी जमींनदार पारिवार से ह्रै।मुक्षे इस वात का भी गर्व है कि मेरे दादा और पिता दोनों स्वतंत्रता संग्राम में भागीदार रहे और आजादी मिलने के वाद भी सरकार से किसी भी तरह का लाभ नहीं लिया।मेरा जन्म भिलाई में हुआ है तभा रायपुर के शासकीय अभियांत्रिक एंव प्राद्यौगिक महाविद्यालय से स्नातक अभियन्ता तक की शिक्षा प्राप्त किया व वर्ष 1979-80में महाविद्यालय का प्रथम छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर भारी मतों से पुरे पेनल के साथ विजयी रहा।चलते - चलते यह भी वताना आवथ्यक है कि मेरा सम्बन्ध सनातन कश्यप गोत्री सूर्य वंशी शाक्त क्षत्रिय कुर्मी कुल की धमैला( मराठो की विस्थापित) शाखा के बड़दमनियां प्रतिष्ठित किसान परिवार में हुआ है तथा मेरे पिता  आर्मी से सेवानिवृत होकर भिलाई ३स्पात संयत्र के संस्थापक कर्मचारी रहे
             मुक्षे इस वात का भी कतई अवसाद नही है कि मैं राजीव जी की सहमति के वाद भी मध्यप्रदेश युवक कांग्रेस का अध्यक्ष सिर्फ झ्स लिए नहीं बन पाया क्योकि मेरे विस्द्ध तत्कालिन कांग्रेस के लगभग सभी ब्राम्हण नेता एकजूट होकर विरोघ किया क्योंकि न केवल संयुक्त मध्यप्रदेशका बल्कि छत्तीसगढ़ से पहला कुर्मी जाति का प्रदेश यूवक कांग्रेस अध्यक्ष  होता।खैर। यहाँ यह भी बताता चलू कि मेरे अध्यक्ष नहीं बनने देने की जबरदस्त प्रतिक्रिया वाद में अन्य पिछड़ा वर्ग और विशेषकर मध्यप्रदेश की कुर्मी जाति में हुई। नतीजे में तीन वार के मुख्यमंत्री रहे पं. श्यामाचरण शुक्ल( महासमुन्द) तथा युवा ह्रदयसंम्राट पं सुरेश पचौरी ( भोपाल) से लोक सभा चुनाव भारी मतों से हार गये और रही सही सबक पं सत्य नारायण शर्मा को रायपुर ग्रामीण विघान सभा चुनाव में हार पाकर मिल गया।
        अब सोचता हूँ दुसरों पर जातिवाद और क्षेत्रवादी होने का आरोप लगाने वालों तथा राजनीतिक फायदे क्षुठ और फरेव का सहारा लेकर षडयंत्र करने वालों की असलियत वयान कर दूँ कि आदर्श और सिद्धान्त बघारने बालों में हमाम में कौन नंगा नही है?खैर फिर कभी क्योंकि तब आलेख बहुत लम्बा हो जावेगा ।
                 लेकिन अब मैं भी इस प्रश्न का जवाब ढूंढ रहा हूँ कांग्रेसी तो हूँ पर क्यूँ हूँ ???
*बुघवार बहुमाध्यम समुह 

 


*** साधारण से असाधारण होने की कहानी हैं तीजन बाई *** पत्रकार  विनोद वर्मा

*** साधारण से असाधारण होने की कहानी हैं तीजन बाई *** पत्रकार विनोद वर्मा

27-Apr-2020

यूरोपीय धरती से निकले ओपेरा, बैले, सिम्फ़नी और फ़्लेमिंको विशुद्ध शास्त्रीय हैं. पर बेहद लोकप्रिय हैं. और इनमें से कुछ भी देख रहे हों तो दर्शक सहज रूप से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं, अक्सर भावुक हो जाते हैं और आत्मविभोरता में रोंगटे खड़े हो जाते हैं. ठीक वही अनुभव होता है जब आप तीजन बाई से पंडवानी सुनते हैं. पंडवानी यानी महाभारत के अलग अलग प्रसंगों की संगीतमय प्रस्तुति. एकल नाट्य की तरह.

जिन्होंने अब तक तीजन बाई से आमने सामने बैठकर पंडवानी नहीं सुनी है वो नहीं समझ सकते कि इसका मतलब क्या है. जिन्होंने फ़िल्मों के अलावा ओपेरा, बैले, सिम्फ़नी और फ्लेमिंको का अनुभव नहीं किया है वे इस तुलना को भी नहीं समझ सकते.

तीजन बाई छत्तीसगढ़ की धरती से निकलती हैं और पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. बावजूद इसके कि लोग छत्तीसगढ़ी नहीं जानते लेकिन वे इस अनजान भाषा में गढ़े जा रहे आख्यान को ठीक तरह से समझते हैं. तीजन बाई के हाथ में रखा रंगबिरंगा तंबूरा (या तानपुरा) कभी अर्जुन के रथ में लगा ध्वज बन जाता है, कभी भीम की गदा तो कभी द्रोपदी के रौद्र रूप में उसके हाथ का कोई अदृश्य हथियार. वह दु:शासन के प्रहसन में अलग पात्र की तरह होता है तो दुर्योधन का ज़िक्र आते ही भूमिका बदल लेता है. तीजन बाई दहाड़ रही होती हैं और एकाएक इतनी मुलायमियत के साथ गाने लगती हैं कि सहज विश्वास नहीं होता. जब तीजन बाई मंच पर होती हैं तो भाषा गौण हो जाती है. भावभंगिमा या प्रहसन हावी हो जाता है. कभी कोई शिकायत नहीं करता कि जो तीजन बाई ने कहा वह समझ में नहीं आया.

तीजन बाई साधारण से असाधारण हो जाने की कहानी है. महिला होकर भी कापालिक शैली में पंडवानी करती हुईं वे विद्रोह की भी प्रतिनिधि हो जाती हैं और दुनिया भर में घूम-घूमकर पंडवानी गाने के बाद, अनगिनत पुरस्कारों और सम्मानों के बाद, लौटकर वे एक सरल साधारण छत्तीसगढ़ी स्त्री भी हो जाती हैं.

आज उनका जन्मदिन है. वे दीर्घायु हों, स्वस्थ रहें और हमारे आने वाली पीढ़ी के लिए भी पंडवानी गाती रहें. शुभकामनाएं. 


यूनिसेफ द्वारा प्रदेश में कोविड-19 की रोकथाम के उपायों और मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की सराहना

यूनिसेफ द्वारा प्रदेश में कोविड-19 की रोकथाम के उपायों और मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की सराहना

26-Apr-2020

 

कहा- छत्तीसगढ़ सरकार का आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए यह नवाचार माडल पूरे देश के लिए बनेगा उदाहरण

 

TNIS

यूनिसेफ की भारत की प्रमुख सुश्री यास्मिन अली हक ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रदेश में कोविड-19 से बचाव और रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों और मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में प्रदेश के विकास के लिए किए जा रहे कार्यो की सराहना की है। सुश्री हक ने छत्तीसगढ़ के आंगनबाड़ी के बच्चों के समग्र विकास के लिए महिला बाल विकास विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से तैयार किए गए ‘चकमक अभियान‘ और ‘सजग कार्यक्रम‘ के शुभारंभ के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के कार्यो की सराहना की। वे नई दिल्ली में अपने घर से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुई।
     सुश्री हक ने ’चकमक अभियान’ और ’सजग परवरिश कार्यक्रम’ की सराहना करते हुए कहा कि इन दोनों कार्यक्रमों से समाज को बच्चों के साथ घरों में ही व्यस्त रखने और बच्चों को रचनात्मक गतिविधियां सिखाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही साथ ’सजग परवरिश कार्यक्रम’ से घरों पर ही बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास की प्रक्रिया को पारिवारिक सदस्यों की देख-रेख में बढ़ावा मिलेगा। आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ का यह नवाचार माॅडल पूरे देश के लिए उदाहरण होगा।
    सुश्री हक ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से कोविड-19 के प्रसार को रोकने में सफलता हासिल हुई है। प्रदेश के 81 प्रतिशत जिले ग्रीन जोन में हैं। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा 24 लाख हितग्राहियों को घर-घर जाकर पोषण आहार वितरण, बच्चों के लिए रेडी-टू-ईट सामग्री और मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान में सूखा राशन के वितरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे महिलाओं एवं बच्चों को पोषण की पूर्ति में सहायता मिली है। सुश्री हक ने गरीब परिवारों को लाॅकडाउन के दौरान 3 माह का निःशुल्क राशन का वितरण, मनरेगा के माध्यम से 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार दिलाने, आश्रय शिविरों के माध्यम से जरूरतमंदों के रहने खाने की व्यवस्था जैसे राज्य सरकार के कार्याें की सराहना की। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ छत्तीसगढ़ सरकार के एक विश्वसनीय सहयोगी के रूप में साथ मिलकर काम करेगी।

 


कोरोना  की जंग जितने मे छत्तीसगढ़ राज्य अव्वल बना

कोरोना की जंग जितने मे छत्तीसगढ़ राज्य अव्वल बना

25-Apr-2020

एम् एच जकारिया एडिटर इन चीफ़

कोरोना की जंग जितने मे छत्तीसगढ़ राज्य अव्वल बना , और इसका पूरा श्रेय जाता है मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार को जिनके ढृढ़ संकल्प से ये सब कुछ सम्भव हो सका !, भारत सरकार के स्वास्थ मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में कोरोना संक्रमित जो कि 35 से अधिक पाए गए थे  उनमे से 3 को छोड़कर बाकि सरे स्वस्थ हो कर अपने-अपने  घर वापस चले गए है ! उसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में जिस प्रकार से सतर्कता और सावधानी शासन के द्वारा बरती जा रही है, उससे ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण नगण्य  है, और कोरोना  के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के रूप में मनरेगा को प्राथमिकता से पुरे छत्तीसगढ़  में नियमो के साथ  प्रारंभ कर  ग्रामीणों में रोजगार के अवसर पहले से और बेहतर बढे है  ये  रिजर्व  बैंक की रिपोर्ट  बता रही है

2020   कोरोना रोकथाम में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों को ना केवल देश भर में सराहना मिली, बल्कि आज रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि देश व्यापी लॉकडाउन के बावजूद छत्तीसगढ़ जेसे राज्य में आर्थिक क्षेत्र में तेज़ी से वृद्धि देखी गयी जो कि देश में सुखद वातावरण बनाता है।

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, पिछले तीन हफ्तों में, घरेलू विकास पर कुछ आंकड़े जारी किए गए हैं, लेकिन वे अर्थव्यवस्था की स्थिति का व्यापक मूल्यांकन करने के लिए बहुत निराश करते है। इन सबके बावजूद छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, ओडिशा, असम, कर्नाटक और जैसे राज्य तालाबंदी के बावजूद बुवाई गतिविधि में अग्रणी हैं। खाद्यान्न और बागवानी के उत्पादन में कृषि और संबद्ध गतिविधियों के सभी कार्य निरन्तर तेज़ी बनी रहने के कारण इन राज्यों में देश के अन्य विकसित राज्यों के मुक़ाबले आर्थिक विकास की दर काफ़ी अच्छी है।

छत्तीसगढ़ के बाहर अन्य राज्यों में 90 हजार 418 श्रमिकों की

समस्याओं का त्वरित समाधान

मुख्यमंत्री की पहल और निर्देश पर दो लाख से अधिक श्रमिकों को मिली राहत

आज पुरे देश में यूपी बिहार के मज़दूर महाराष्ट्र दिल्ली हरियाणा से भूखे पैदल अपने घर लौटने पर मज़बूर हुआ है वही लॉकडाउन से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण प्रदेश एवं प्रदेश से बाहर फंसे हुए दो लाख से अधिक जरूरतमंद श्रमिकों को मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल एवं निर्देश पर तत्काल राहत पहंुचायी गई है। उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण से बचाव के लिए देश भर में किये गये लॉकडाउन के दौरान मुख्यमंत्री श्री बघेल के निर्देशन पर श्रम विभाग द्वारा स्थापित हेल्पलाईन सहित अन्य स्त्रोतों से मिली सूचना के आधार पर राज्य में तथा राज्य के बाहर अब तक करीब दो लाख एक हजार 998 जरूरतमंद श्रमिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया गया है।

 छत्तीसगढ़ के 90 हजार 418 प्रवासी श्रमिक जो देश के 21 राज्यों और 4 केन्द्र शासित प्रदेशों में होने की सूचना मिली उनके द्वारा बताई गई समस्याओं का त्वरित निदान करते हुए उनके लिए  भोजन, राशन, नगद, नियोजकों से वेतन तथा रहने आदि की व्यवस्था जुटायी गई है। इसके साथ ही श्रम विभाग के अधिकारियों का दल गठित कर विभिन्न औद्योगिक संस्थाओं, नियोजकों एवं प्रबंधकों से समन्वय कर (राशन एवं नगद) आदि की व्यवस्था भी की जा रही है। लॉकडाउन के द्वितीय चरण में 21 अप्रैल से शासन द्वारा छूट प्रदत्त गतिविधियों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 13 हजार 907 श्रमिकों को पुनः कार्य उपलब्ध कराया गया है।

 

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर कोटा से छात्रों को लाने 75 बस रवाना

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर आज राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड से राजस्थान के कोटा में लॉकडाउन के दौरान फंसे छात्र-छात्राओं को लाने 75 बसों को रवाना किया गया। बसों के साथ एम्बुलेंस सहित डॉक्टरों का दल भी भेजा गया है, ताकि  कोटा से आने वाले छात्रों का स्वास्थ्य परीक्षण पश्चात उन्हें बसों से लाया जा सके। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा है कि रायपुर से कोटा की दूरी बहुत अधिक है। इसलिए छात्र-छात्राओं के भोजन व्यवस्था का भी ध्यान रखा गया है। साथ में एम्बुलेंस रहेगा तो रास्ते में अगर किसी की तबीयत खराब होती है तो तत्काल समुचित इलाज सहित देखरेख हो सकेगी। छात्रों को रास्ते में किसी तरह की परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया है।  

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गरीब परिवारों को जून माह का भी चावल मिलेगा निःशुल्क

राशनकार्डधारियों को जून माह के चावल के साथ प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तीन माह के अतिरिक्त चावल का होगा निःशुल्क वितरण

 

उचित मूल्य दुकानों से एक मई से प्रांरभ होगा वितरण

 

रायपुर : छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की रोकथाम के प्रबंधन के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के गरीब परिवारों को जून माह का भी चावल निःशुल्क प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अप्रैल और मई माह का चावल भी निःशुल्क प्रदान किया गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन कार्डधारियों को जून माह के चावल के साथ प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के हितग्राहियों को अप्रैल से जून तीन माह का अतिरिक्त चावल भी निःशुल्क वितरित किया जाएगा। खाद्यान्न का वितरण उचित मूल्य दुकानों से 01 मई से प्रारंभ किया जाएगा।

 

 छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अंत्योदय, प्राथमिकता, निःशक्तजन, एकल निराश्रित और अन्नपूर्णा राशन कार्डधारियों को जून माह का चावल निःशुल्क वितरित किया जाएगा। इसके साथ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत प्रचलित राशन कार्डधारियों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना तथा छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत प्रचलित अंत्योदय एवं प्राथमिकता श्रेणी के राशन कार्डधारियों को नियमित आबंटन के साथ अप्रैल से जून तीन माह के अतिरिक्त चावल का निःशुल्क वितरण एक मई से प्रारंभ किया जाएगा। सामान्य राशन कार्डाें में पूर्व से प्रचलित पात्रता एवं मूल्य के अनुसार चावल वितरित किया जाएगा।

 

 प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंत्योदय एवं प्राथमिकता श्रेणी के राशन कार्डधारियों को अप्रैल से जून 3 माह का अतिरिक्त चावल का वितरण 01 मई से प्रारंभ किया जाएगा। अन्नपूर्णा, एकल निराश्रित, निःशक्तजन राशन कार्ड में जून महीने के नियमित मासिक आबंटन का निःशुल्क वितरण किया जाएगा। राज्य सरकार के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण आयुक्त द्वारा इस संबंध में आदेश जारी करते हुए उचित मूल्य दुकानों में वितरण के समय राशन कार्डवार आबंटन की पात्रता की सूची का प्रदर्शन अनिवार्य रूप से करने तथा सभी राशन कार्डधारियों को उनकी पात्रता के बारे में सूचित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

 

आदेश के तहत् राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) अंत्योदय राशनकार्ड में प्रत्येक सदस्य को तीन माह की अतिरिक्त पात्रता 15 किलो प्रति सदस्य होगी (5 किलो प्रति सदस्य प्रति माह)। इस तरह से अंत्योदय राशनकार्डधारियों को जून महीने में चावल वितरण की मात्रा इस प्रकार होगी- एक सदस्य वाले कार्ड को जून महीने का नियमित आबंटन 35 किलो के साथ अप्रैल से जून तक अतिरिक्त चावल 15 किलो के साथ जून महीने में कुल 50 किलो चावल का निःशुल्क वितरण होगा। इसी तरह दो सदस्य वाले कार्ड को नियमित आबंटन 35 किलो के साथ तीन महीने का अतिरिक्त चावल 30 किलो के साथ कुल 65 किलो, तीन सदस्य वाले कार्ड को 35 किलो नियमित आबंटन के साथ 45 किलो अतिरिक्त आबंटन को मिला कर 80 किलो, चार सदस्य वाले कार्ड को 35 किलो नियमित आबंटन के साथ 60 किलो अतिरिक्त आबंटन को मिला कर 95 किलो और 5 सदस्य वाले कार्ड पर 35 किलो नियमित आबंटन के साथ 75 किलो अतिरिक्त आबंटन को मिला कर 110 किलो चावल निःशुल्क दिया जाएगा।

 

प्राथमिकता राशनकार्डधारियों को जून महीने में चावल वितरण की मात्रा के तहत् 5 से अधिक सदस्य वाले राशनकार्ड में तीन माह का अतिरिक्त आबंटन 9 किलो प्रति सदस्य होगा (3 किलो प्रति सदस्य प्रति माह) इस तरह से एक सदस्य वाले राशनकार्ड को जून महीने में 10 किलो, दो सदस्य वाले राशनकार्ड को 20 किलो, तीन सदस्य वाले राशनकार्ड को 35 किलो, चार सदस्य वाले राशनकार्ड को 35 किलो नियमित आबंटन के साथ 15 किलो अतिरिक्त आबंटन मिलाकर 50 किलो, पांच सदस्य वाले राशनकार्ड को 35 किलो नियमित आबंटन के साथ 45 किलो अतिरिक्त आबंटन मिकाकर 80 किलो और छह सदस्य वाले राशनकार्ड को 42 किलो नियमित आबंटन के साथ 54 किलो अतिरिक्त आबंटन मिलाकर 96 किलो चावल जून महीने में निःशुल्क दिया जाएगा। अन्नपूर्णा, एकल निराश्रित, निःशक्त जन राशनकार्ड में जून महीने के नियमित मासिक आबंटन का निःशुक्ल वितरण किया जाएगा। सामान्य राशनकार्डों में पूर्व से प्रचलित पात्रता एवं निर्धारित मूल्य के अनुसार वितरण किया जाएगा।

लॉकडाउन में मुख्यमंत्री ने कराई स्कूली बच्चों की घर पर ही पढने की व्यवस्था

पढ़ई तंुहर दुआर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने स्कूली बच्चों को घर पर ही रहकर पढ़ने के लिए देश के सबसे बड़े ऑनलाइन पोर्टल में से एक ’पढ़ई तंुहर दुआर’ का 7 अप्रैल को अपने निवास कार्यालय में शुभारंभ किया था। इस पोर्टल के जरिए लाखों छात्र बिना किसी शुल्क के ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे। लॉकडाउन के साथ ही आने वाले समय में बच्चों की निरंतर पढ़ाई में यह कार्यक्रम बहुत उपयोगी साबित होगा। इस ई-लर्निंग प्लेटफार्म में ऑनलाइन इंटरएक्टिव कक्षाओं के जरिए शिक्षक और बच्चे अपने-अपने घरों से ही वीडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। यह छत्तीसगढ़ राज्य के छात्रों सहित हिन्दी भाषा राज्यों के लिए भी बहुत लाभदायक होगा। स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट सीजीस्कूलडॉटइन ;बहेबीववसण्पदद्ध पर कक्षा पहलीं से 10वीं तक विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के संसाधनों को इसमें उपलब्ध कराया गया है। आगे और इसका विस्तार किया जा रहा है, जिसके तहत शीघ्र ही कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं को यह सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

कोरोना की जंग जितने मे छत्तीसगढ़ राज्य अव्वल बना , और इसका पूरा श्रेय जाता है मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार को जिनके ढृढ़ संकल्प से ये सब कुछ सम्भव हो सका !, भारत सरकार के स्वास्थ मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में कोरोना संक्रमित जो कि 35 से अधिक पाए गए थे  उनमे से 3 को छोड़कर बाकि सरे स्वस्थ हो कर अपने-अपने  घर वापस चले गए है ! उसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में जिस प्रकार से सतर्कता और सावधानी शासन के द्वारा बरती जा रही है, उससे ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण नगण्य  है, और कोरोना  के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के रूप में मनरेगा को प्राथमिकता से पुरे छत्तीसगढ़  में नियमो के साथ  प्रारंभ कर  ग्रामीणों में रोजगार के अवसर पहले से और बेहतर बढे है  ये  रिजर्व  बैंक की रिपोर्ट  बता रही है

2020। कोरोना रोकथाम में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों को ना केवल देश भर में सराहना मिली, बल्कि आज रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि देश व्यापी लॉकडाउन के बावजूद छत्तीसगढ़ जेसे राज्य में आर्थिक क्षेत्र में तेज़ी से वृद्धि देखी गयी जो कि देश में सुखद वातावरण बनाता है।

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, पिछले तीन हफ्तों में, घरेलू विकास पर कुछ आंकड़े जारी किए गए हैं, लेकिन वे अर्थव्यवस्था की स्थिति का व्यापक मूल्यांकन करने के लिए बहुत निराश करते है। इन सबके बावजूद छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, ओडिशा, असम, कर्नाटक और जैसे राज्य तालाबंदी के बावजूद बुवाई गतिविधि में अग्रणी हैं। खाद्यान्न और बागवानी के उत्पादन में कृषि और संबद्ध गतिविधियों के सभी कार्य निरन्तर तेज़ी बनी रहने के कारण इन राज्यों में देश के अन्य विकसित राज्यों के मुक़ाबले आर्थिक विकास की दर काफ़ी अच्छी है।

 


'हर्ड इम्यूनिटी यानी सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता' : गिरीश मालवीय

'हर्ड इम्यूनिटी यानी सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता' : गिरीश मालवीय

24-Apr-2020

हर्ड इम्यूनिटी एक ऐसा शब्द है जिसे आज से महीने भर पहले कही बोल दिया जाता तो पढ़े लिखे लोग तलवारें भांजते हुए निकल पड़ते थे कि कोरोना से लड़ने के लिए आपको इसके अलावा कुछ नही सूझा..... आज उसी शब्द चर्चा हो रही है बड़े बड़े लेख छप रहे हैं कुछ विशेषज्ञ भी अब स्वीकृति में सिर हिलाने लगे है........

कल एक बड़ी खबर आयी है अमेरिका स्थित सेंटर फॉर डिसीज, डायनामिक्स एंड इकोनॉमिक पॉलिसी (CDDEP) ने 20 अप्रैल को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि 'सितंबर तक भारत में कोविड -19 संक्रमण के कुल 111 करोड़ मामले हो सकते है, ये लगातार लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के बाद भी संभव है'

इसलिए हमें इस शब्द को सही तरह से समझने की आज जरूरत है आखिर क्या होती हैं हर्ड इम्युनिटी? लेख लंबा जरूर है लेकिन यह सब्जेक्ट ही इतना बड़ा है कि कम शब्दों में ठीक से समझ नही आ पाएगा

देखिए कोरोना से लड़ने के तीन ही उपाय है पहला है लॉक डाउन।........ आप जिसे लॉक डाउन कहते हैं वैज्ञानिक इसे अग्रेसिव सप्रेशन (Aggressive Suppression) कहते हैं, लोगो को अलग थलग कर देना लॉक डाउन का मूल तत्व है इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग की बात की जाती हैं  इस प्रक्रिया में संक्रमण की रफ्तार को धीमा कर दिया जाता है फिर इसके जरिए इस वायरस का संक्रमण रोका जाता है। साथ ही देश में स्वास्थ्य सुविधाओं की उचित व्यवस्था की जाती है, लेकिन अग्रेसिव सेपरेशन सफल जब होगा जब अग्रेसिव टेस्टिंग होगी  विदेशों में यही किया जा रहा है और भारत के हाल अग्रेसिव टेस्टिंग के विषय मे क्या है बताने की जरूरत नही है ओर हमे यह भी सोचना है कि अग्रेसिव टेस्टिंग नही हो रही है तो लॉक डाउन जैसे आर्थिक रूप से महंगे उपायों को कई महीनों तक कैसे जारी रखा जा सकता  है।......

दूसरा तरीका है टीका यानी वैक्सीन, एक कामयाब वैक्सीन को बनाना और उसे हर आदमी को लगाना यह अभी भविष्य की गर्त में है इसलिए अब जल्दी से तीसरे उपाय पर आते हैं.........

तीसरा उपाय है हर्ड इम्यूनिटी
यदि यह  वायरस फैलता रहता है, तो निश्चित ही है अंततः बहुत से लोग संक्रमित हो जाएंगे और वे अपने शरीर मे वायरस के विरुद्ध एंटीबॉडी विकसित कर लेंगे  जब बड़ी आबादी में कोरोना का संक्रमण होगा तो उनमे वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता का भी विकास होगा तो इसका प्रकोप अपने आप ही खत्म हो जाएगा क्योंकि वायरस के लिये एक अतिसंवेदनशील मेजबान को खोजना कठिन और कठिन हो जाता है। इस घटना को हर्ड इम्यूनिटी के रूप में जाना जाता है।

हर्ड इम्युनिटी एक प्रोसेस या एक प्रकिया है जिसे अपना कर किसी समाज या समूह में रोग के फैलने की शृंखला को तोड़ा जा सकता है और इस प्रकार रोग को उन लोगों तक पहुँचाने से रोका जा सकता है, जिन्हें इससे सबसे अधिक खतरा हो या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) कमजोर है।........

सबसे पहले ब्रिटिश सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने  COVID-19 से निपटने के लिये हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity) की बात करना शुरु की थी, ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता मैट हैनकॉक ने कहा भी है कि हर्ड इम्युनिटी किसी भी महामारी का स्वाभाविक बाय प्रोडक्ट है. यानी महामारी के फैलने के साथ ही अपने आप हर्ड इम्युनिटी विकसित हो जाती है.

यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है कुछ डॉक्टर मित्रों से चर्चा हुई तो उन्होंने कहा कि यह सम्भव है कि हम जानते भी नही हो और इस वायरस का अटैक हम पर हो भी चुका हो और जा भी चुका हो और हमारे शरीर मे इसके विरुद्ध ऐंटीबॉडी मौजूद हो,..............

दुनिया मे कुछ देशों ने इसे लागू करने का प्रयास भी किया है ब्रिटेन ने तो सिर्फ बात की लेकिन स्वीडन हर्ड इम्युनिटी पर काम कर रहा है. स्वीडन अपने देश में हर्ड इम्युनिटी लागू कर रहा है. इसका तरीका ये है कि लोगों को इन्फ़ेक्शन हो और उनका शरीर उसके ख़िलाफ़ इम्यूनिटी डेवलप कर ले..........

कोरोना संक्रमण से ग्रसित हर व्यक्ति दो से ज्यादा लोगों को इंफेक्शन फैलाता है। इसे वैज्ञानिक कोरोना वायरस का रिप्रोडक्शन नंबर यानी R0 कहते है  (इसे R-Naught पढ़ा जाता है)जो  2 और 2.5 के बीच है।

कोरोना वायरस अभी 1 से 2,....2 से 4,.....4 से 8 और 8 से 16 लोगों को संक्रमित कर रहा है। लेकिन अगर दुनिया की 50 प्रतिशत जनसंख्या इम्यून हो जाए तो यह इंफेक्शन एक व्यक्ति से एक में ही जाएगा।  स्थिति में कोरोना वायरस का रिप्रोडक्शन नंबर 2 से घटकर 1 रह जाएगा।......

अगर यह R0 एक से भी कम हो जाए तो कोरोना वायरस का आउटब्रेक खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा। इसी वजह से वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर दुनिया की 60 प्रतिशत आबादी इम्यून हो जाए तो यह वायरस धीरे-धीरे खुद ही खत्म हो जाएगा।........

अब बड़ा सवाल उठता है कि क्या ऐसा पहले किया जा चुका है?... यह स्ट्रेटेजी कितनी कामयाब रहेगी ?....

हर्ड इम्यूनिटी का सबसे बेहतरीन उदाहरण है पोलियो। दुनिया की लगभग पूरी आबादी पोलियो से इम्यून हो चुकी है। जब किसी जगह पर लोगों को किस भयानक बीमारी से लड़ने के लिए बड़ी संख्या में वैक्सीन दी जाती है तो इससे बाकी लोगों में उस महामारी के फैलने का खतरा कम हो जाता है. जिन्हें उस महामारी की वैक्सीन नहीं लगी है या फिर वैक्सीन नहीं दी जा सकती, उन्हें भी यह बीमारी अपनी चपेट में कम ले पाती है. खसरे की भी कुछ ऐसी ही कहानी है .......2015 में आया जीका वायरस जो  एक मच्छर जनित बीमारी थी जो जन्म संबंधी असामान्यताओं की कड़ी से उत्पन्न हुआ था, 2017 में उसका प्रकोप कम हो गया ब्राजील के अध्ययन में रक्त के नमूनों की जाँच करके पाया गया कि सल्वाडोर के उत्तरपूर्वी समुद्र तट शहर में 63% आबादी पहले से ही जीका के संपर्क में आ गयी थी शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि हर्ड इम्युनिटी ने उस जीका वायरस के प्रकोप को तोड़ दिया.......

भारत मे इसके सफल सिद्ध होने की संभावना इसलिए ज्यादा है क्योंकि भारत मे युवा आबादी ज्यादा है ज्यादातर को वायरस से संक्रमित होने के बावजूद अस्पताल नहीं ले जाना पड़ेगा और उनकी मौत नहीं होगी।

दूसरी बात यह कि यहाँ अधिकतर लोगों को बीसीजी के टीके लगे हुए है भारतीयों की इम्युनिटी पश्चिमी देशों के मुकाबले स्ट्रांग है. आंकड़े बताते हैं कि जिन देशों में मलेरिया फैल चुका है. वहां कोविड-19 का असर या तो नहीं है. या फिर बेहद कम है.

पीपल्स हेल्थ मूवमेंट के ग्लोबल को-ऑर्डिनेटर टी. सुंदररमण कहते है, 'एक तरह से आप यह कह रहे हैं कि हम (60 वर्ष से कम उम्र के) लोगों को संक्रमित होने और फिर बीमारी से खुद ही ठीक होने देंगे। हम सिर्फ बीमार लोगों का ही ध्यान रखेंगे।' हर्ड इम्यूनिटी की यही पॉलिसी है।' इस प्रोसेस में उन्हीं लोगों को शामिल किया जा सकता है जिनके अंदर इम्युनिटी का निरंतर विकास हो सकता है

लेकिन फिर भी भारत मे हर्ड इम्युनिटी जैसे कदम बहुत सोच समझ कर उठाने होंगे पर फिलहाल इसके अलावा कोई चारा भी नजर नही आ रहा........ 
द्वारा सै कासिम लखनऊ 


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