Report:Ibne Hasan Zaidi

Place:Kanpur

विजय दशमी के दिन पूरे देश में रावण दहन कर खुशियां मनायी जाती है। वहीं कुछ लाेग ऐसे भी हैं जाे इस दिन रावण के पूजा करते हैं। कानपुर में तकरीबन डेढ़ सौ साल पुराने रावण मंदिर में विशेष अराधना की जाती हैं। शिवाला में स्थित  दशानन मंदिर में दशहरा के दिन सुबह से ही भक्त रावण की पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं। मंदिर साल में एक बार विजयादशमी के दिन ही खुलता है। दशानन मंदिर में शक्ति के प्रतीक के रूप में रावण की पूजा होती है। श्रद्धालु तेल के दिए जलाकर मन्नतें मांगते हैं। परंपरा के अनुसार सुबह आठ बजे मंदिर के कपाट खोले दिए जाते हैं और रावण की प्रतिमा का साज श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद आरती की जाती है। शाम को मंदिर के दरवाजे एक साल के लिए फिर बंद कर दिए जाते हैं। इस मंदिर का निर्माण सौ साल पहले महाराज गुरू प्रसाद शुक्ल ने कराया था। रावण प्रकांड पंडित होने के साथ-साथ भगवान शिव का परम भक्त था। इसलिए शक्ति के प्रहरी के रूप में यहां कैलाश मंदिर परिसर में रावण का मंदिर बनाया गया। जहां रावण के प्रकांड पंडित और विद्वान होने की वजह से उसकी पूजा की जाती है। पुजारी केके तिवारी का कहना है कि रावण का जन्म भी दशहरे के दिन ही हुआ था।

 

25-Oct-2020

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