उबर के पूर्व सीईओ ट्रैविस कैलनिक के खिलाफ कंपनी के सबसे बड़ी इंवेस्टर फर्म द्वारा गुरुवार को धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया है। उबर में अपना 13 प्रतिशत शेयर देने वाली बेंचमार्क फर्म का आरोप है कि ट्रैविस ने धोखाधड़ी के साथ बोर्ड सदस्यों की सीट भरने का काम किया है। फर्म का आरोप है कि ट्रैविस ने ऐसा इसिलए किया था कि ताकि वे फिर से सीईओ के पद पर बने रह सकें। वहीं ट्रैविस के प्रवक्ता का कहना है कि यह मुकदमा बेबुनियाद है. बेंचमार्क फर्म के वकील का कहना है कि ट्रैविस ने बहुत ही चालाकी के साथ उबर के बोर्ड में अपनी जगह बनाई और इससे वह निजी फायदे के लिए उबर में अपनी पावर बढ़ाने का काम किया है।
वकील ने कहा कि ट्रैविस का इसके पीछे एक व्यापक उद्देश्य था। ट्रैविस बोर्ड में अपने सगे वालों को जगह देना चाहते थे ताकि फिर से उबर का सीईओ बनने की उनकी राह आसान हो जाए। इस स्कैम के सामने आने के बाद जून में कंपनी ने ट्रैविस से इस्तीफा ले लिया था और तब से कंपनी के लिए नई सीईओ की तलाश की जा रही है। इतना ही नहीं टैविस पर कंपनी में हो रही यौन उत्पीड़न की घटनाओं की अनदेखी करने का भी आरोप लगा है।

उबर अपने लिए अब केवल सीईओ की तलाश ही नहीं कर रहा है इसके साथ ही वे सीनियर एग्जिक्वीटिव की तलाश भी कर रहा है। उबर के को-फाउंडर और चेयरमैन गैर्रेट्ट कैंप ने लिखित में अपने कर्मचारियों को बता दिया है कि अब ट्रैविस फिर से सीईओ के पद के लिए नहीं आएंगे। 

यह बात कैंप ने उस समय कही जब मीडिया में यह बात आ रही थी कि ट्रैविस ने दावा किया है कि वे फिर से कंपनी के सीईओ पद पर तैनात होने वाले हैं। ट्रैविस ने 2009 में सबसे पहले ऐप आधारित टैक्सी सेवा शुरू की थी। देखते ही देखते अमेरिका के अलावा भारत सहित कई देशों में उबर की सर्विस काफी प्रसिद्ध हो गई है। भारत में इसे ओला से सीधी टक्कर मिल रही है।

26-Aug-2017

Related Posts

Leave a Comment