आधुनिक भारत की अब तक की सर्वश्रेष्ठ किताब ‘जाति का विनाश’

आधुनिक भारत की अब तक की सर्वश्रेष्ठ किताब ‘जाति का विनाश’ यानी Annihilation of Caste है इस किताब के दूसरे संस्करण की भूमिका में डॉ. आंबेडकर कहते हैं कि ‘ अगर मैं हिंदुओं को यह महसूस करा पाता हूं कि वे भारत के बीमार लोग हैं, और उनकी बीमारी अन्य भारतीयों के स्वास्थ्य और खुशी के लिए खतरे पैदा कर रही है, तो मेरी संतुष्टि के लिए इतना काफी होगा।’ 

आंबेडकर की नजर में यह बीमारी जाति की बीमारी है, जो सभी भारतीयों को ग्रसित किए हुए। वे बताते हैं कि इस बीमारी के शिकार भारत के मुसलमान और ईसाई भी हैं, भले ही उनका धर्म वर्ण-जाति को मान्यता न देता हो। जाति के खिलाफ संघर्ष को उन्होंने स्वराज के लिए संघर्ष से ज्यादा दुष्कर माना है। 

उन्होंने लिखा है कि “ जब आप स्वराज के लिए लड़ते हैं, तो सारा राष्ट्र आपके साथ होता है, किंतु जाति के विरुद्ध संग्राम को सारे राष्ट्र से संघर्ष करना होगा और वह राष्ट्र को दूसरा नहीं-स्वयं अपना ही है।”  

वे बार-बार इस बात पर जोर देते  हैं कि भारत में कोई भी व्यक्ति, समुदाय या वर्ग ऐसा नहीं है, जाति का शिकार न हो। जाति ने किसी ने किसी तरीके से सबको ग्रसित कर रखा है।

इस किताब में जाति व्यवस्था के पक्ष में दिए जाने वाले नस्ल की शुद्धता का सिद्धांत  को जीव वैज्ञानिक तर्कों के आधार पर एक-एक करके वैज्ञानिक शोधों के निष्कर्षों, तथ्यों, अनुभवसंगत ज्ञान और तर्क के आधार पर खारिज करते हैं। फिर वे एक-एक करके भारतीय समाज और देश को जाति से होने वाले बुनियादी दुष्परिणाओं की विस्तार से चर्चा करते हैं। 

पहला जाति हिंदुओं को वास्तविक समाज और राष्ट्र बनने से रोकती है, दूसरा समाज विरोधी भावना जाति व्यवस्था का सबसे निकृष्टतम लक्षण है, तीसरा जाति आदिम जनजातियों की उन्नति और समावेशीकरण को रोकती है, तीसरा उच्च जातियों ने निम्न जातियों को निम्न बनाए रखने के लिए साजिश रची, चौथा जाति ने हिंदू धर्म को मिशनरी धर्म बनने से रोका, पांचवा जाति ने हिंदुओं को परस्पर सहयोग, विश्वास और वंधुता की अनुभूति से वंचित किया, छठा हर प्रकार के सुधारों को रोकने के लिए जाति ताकतवर हथियार है, सातवां जाति लोकभावना, लोक विचार और लोक उदारता का विनाश करती है। 

जाति के उपरोक्त सातों दुर्गुणों की विस्तार से चर्चा करने के बाद आंबेडकर अपने आदर्श समाज की रूप रेखा प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि “ अगर आप जाति को नहीं चाहते हैं, तो आपका आदर्श समाज क्या है, यह प्रश्न आपके द्वारा पूछा जाना अश्वयंभावी है। अगर आप मुझसे पूछते हैं, तो मैं कहूंगा मेरा आदर्श एक ऐसा समाज होगा, जो स्वतंत्रता, समता और भातृत्व पर आधारित होगा और क्यों न हो?

आज भी भारत की सबसे बड़ी बीमारी जाति है

02-May-2022

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