लेख : एम.एच.जकरीया 

छत्तीसगढ़ की राजनीती में 2 ही विकल्प नज़र आ रहे हैं बीजेपी से मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह या अजित जोगी की जोगी कांग्रेस, क्योंकि भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रदर्शन का स्तर लगातार गिरता ही जा रहा है? समय रहते कांग्रेस आलाकमान अगर ध्यान नहीं देता है तो परिणाम निश्चित रूप से कांग्रेस का प्रदर्शन छत्तीसगढ़ में तीसरे स्थान में होने की संभावनाओ से इंकार नहीं किया जा सकता है! हमारे "खुलासा पोस्ट" और ''गरजा छत्तीसगढ़ न्यूज़'' की संयुक्त पड़ताल में जिस तरह से आम जनता की राय सामने आ रही है वह कांग्रेस के लिए चौंकाने वाले हो सकते है, इस सर्वे में कांग्रेस के कई दिग्गज कार्यकर्ताओ का भी अभि-मत शामिल किया गया है |

अभी छत्तीसगढ़ राज्य चुनावी रंग में नहीं रंगा है, लेकिन चुनावी धमक ज़रूर दिखाई देने लगा है, सत्ताधारी पार्टी के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के द्वारा लोक सुराज अभियान के माध्यम से जनता से सीधा संवाद और उनके समाधान का निराकरण करने का प्रयास किया गया है वहीँ दूसरी ओर अजित जोगी और उनकी पार्टी छत्तीसगढ़ में लगातार सभाओं और जनसंपर्क के माध्यम से जनता से रुबरू हो रहे है, ऐसे में छत्तीसगढ़ की राजनीति में 2 ही सितारे चमकते दिखाई दे रहे है, वर्तमान में ऐसा अभी दिखाई दे रहा है ? और वहीं मुख्य विपक्ष कही जाने वाले कांग्रेस के सभी नेता मुगालते में अभी कुछ दिखाई दे रहे हैं ! कांग्रेस के बड़े नेता भले ही कितने भी एक जुटता या यूँ कहें आपस में सगे भाईचारा दिखाने की कोशिश कर रहे हो लेकिन अन्दर खाने में आक्रोश है, यही कारण है की डॉ चरणदास महंत और सत्यनारायण शर्मा जैसे दिग्गज नेताओ को भी बैकफूट में डालने से गुरेज नहीं किया जा रहा है | 

कुल मिलाकर वर्तमान में कांग्रेस संगठन में बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष दिख रहा है और इसकी सबसे बड़ी वज़ह है कांग्रेस के मुखिया का अड़ियल रवैय्या ? वहीं कांग्रेस के एक दिग्गज प्रभारी कहते नज़र आ रहे है की जोगी जी के पास फंड ही नहीं है तो चुनाव क्या खाक लड़ायेंगे ? आइये हम आपको बताने जा रहे है, छत्तीसगढ़ में क्या चुनावी सम्भावना हो सकती है | 

कांग्रेस पार्टी ने जोगी जी पर हमेशा कांग्रेस में रहकर कांग्रेस को हराने का आरोप लगाती रही है ! और उसी कारण से कांग्रेस सत्ता से 15 साल से दूर रही है | वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अपनी स्वच्छ छवि और अपने कार्यशैली और अच्छे प्रशासनिक क्षमता के लिए जाने जाते रहे है और एक बेहतरीन राजनीतिक सूझबुझ से अपना तीसरा निर्विवादित कार्यकाल पूरा करने जा रहे है | जिसमे उनके विरोधियो के द्वारा कई आरोप ज़रूर लगाये गए, लेकिन अभी तक साबित कुछ भी नहीं कर सके | वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी जी ने अब खुद अपनी पार्टी जोगी कांग्रेस बना ली है और प्रमुख प्रतिद्वंदी बनकर बराबरी का टक्कर देने की तैय्यारी में है ! जिसमे नुकसान कांग्रेस को ही होने वाला है |

ऐसे में “क्या“ ?  छत्तीसगढ़ में टक्कर भाजपा और जोगी कांग्रेस के बीच ही होने वाला है ? अभी तक छत्तीसगढ़ में जितने भी सर्वे हुए है उसमे स्पष्ट संकेत मिल रहे है, की कांग्रेस के प्रदर्शन का ग्राफ छत्तीसगढ़ में लगातार गिरता ही चला जा रहा है और कांग्रेस के प्रदर्शन का ग्राफ 3 रे, स्थान पर होने की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता? इसका सबसे बड़ा कारण है वर्तमान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल की तोड़ने की नीति चाहे कार्यकर्ता हो या विधायक उन्होंने सिर्फ कांग्रेस में तोड़ फोड़ ज्यादा किया है, कांग्रेस की टिकट से जितने वाले जन प्रतिनिधियों को कांग्रेस से बाहर करने का कार्य इनके द्वारा किया गया है, वह चाहे देवरात सिंह हो, रेणु जोगी हो या आर.के. राय हो फेरहिस्त लम्बी है, कांग्रेस अध्यक्ष के निजी दुश्मनी भंजाने के चलते कांग्रेस पार्टी का सर्वनाश हो रहा है, जिसे कांग्रेस आलाकमान को समय रहते समझना होगा नहीं तो छत्तीसगढ़ में 2018 में वापसी की उम्मीद कांग्रेस को छोड़ देना चाहिए ?

वहीँ डॉ. रमन सिंह के लगभग 15 साल के कार्यकाल में सत्ता में रहने के बाद भी ना कोई गुरुर ना कोई घमण्ड आज भी वही चिर परिचित मुस्कुराता चेहरा नजर आता है, ठीक इसके उलट भूपेश बघेल हमेशा तनावग्रस्त और गुस्से में दिखाई देते है कार्यकर्ताओ से सीधे मुंह बात नहीं करते ऐसा कार्यकर्ताओं का कहना है वहीं अजित जोगी की जोगी कांग्रेस, कांग्रेस के उपेक्षा के शिकार कार्यकर्ताओ को गले लगा रहे है और अपनी पार्टी में सम्मान दे रहे है | कांग्रेस संगठन सभी वर्गों को सम्मान के साथ जोड़ने की बात ज़रूर करता है लेकिन छत्तीसगढ़ कांग्रेस में ठीक इसका उलटा हो रहा  है ! 

सब को मालूम है सच हमेशा कड़वा होता है और यही बातें कांग्रेस के साथियों को शायद बुरी लगती है जब की उन्हें इसमें सुधार की सम्भावना को तलाश करना चाहिए ! वही वर्तमान में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा कड़वा सच यही है की कई कांग्रेस के दिग्गज नेता और कार्यकर्ता घर बैठे हुए हैं क्योंकि उन्हें ना जिम्मेदारी दी जाती है ना उन्हें पूछा जाता है अगर वर्तमान में चुनाव हो जाये तो जोगी कांग्रेस, कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचा सकती है और कांग्रेस के कई बड़े नेता जिनकी टिकट हमेशा से तय रहती है वो निश्चित रूप से हार सकते है क्योंकि इस त्रिकोणीय मुकाबले में लाभ भाजपा और जोगी कांग्रेस का होने वाला है जिसे अध्यक्ष की मंडली को छोड़ कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता बड़े अच्छे से समझ रहे है, लेकिन इनके जिद्द के सामने विवश हो कर खामोश बैठे है !

अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है कांग्रेस हाई कमान चाहे तो प्रदेश में कोई नया नेतृत्व दे कर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार कर सकता है बशर्ते नया नेतृत्व सभी को जोड़कर नई सम्भावना के साथ विधानसभा का चुनाव लड़े ? क्योंकि वर्तमान अध्यक्ष महोदय जी जाति की राजनीति में कांग्रेस पार्टी को दाँव पर लगा रहे हैं और कांग्रेस आला कमान चुप्पी साधे हुए है और खामोश है, जिसका भयानक परिणाम कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता जिन्होंने कई उम्मीदे लगा रखीं है और सब की उम्मीद एक आदमी के झूठे अहंकार की वज़ह से फिर से मिट्टी में मिल जाने वाला है !

छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा क्षेत्र है, जिसमें अधिकतर विधानसभाओ में विधायकों के प्रदर्शन पर ही आने वाले विधानसभा चुनाव का परिणाम आएगा, भारतीय जनता पार्टी के लिए भी सीधे संकेत मिल रहे है की कई विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान विधायको का प्रदर्शन संतोषप्रद नहीं है, भारतीय जनता पार्टी के 60 % विधायकों को बदले जाने पर ही चुनावी समर में कुछ अच्छे परिणाम की उम्मीद की जा सकती है वहीं जोगी कांग्रेस अभी नये दल के रुप मे इस विधानसभा में चुनाव लड़ने जा रही है और उनकी सभाओं में अच्छी ख़ासी भीड़ जुट रही है, लेकिन भीड़ को देखकर परिणाम का आंकलन अभी करना बेमानी होगा लेकिन जोगी कांग्रेस के मुखिया पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी राजनीती के मंजे हुए खिलाडी है शह और मात का खेल बेहतर जानते है. अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में उनके राजनितिक भविष्य की अग्नि परीक्षा है जिसमे सभी की नज़रे टिकी हुई है अब आगे क्या होने वाला है ये तो आने वाले चुनाव के परिणाम ही बताएगा ?

कांग्रेस का हाथ छोड़ते जा रहे है दलित और मुस्लिम ? 

भारत का दलित और मुस्लिम वोट बैंक अब कांग्रेस का हाथ और साथ क्यों छोड़ता जा रहा है ? एक समय था जब इन्हे कांग्रेस का परम्परागत वोट बैंक समझा जाता था, समय समय पर दलित समाज के वोट तो अन्य दूसरे दलों के साथ जुड़ते रहे है जिस तरह की लीडरशीप उन्हें मिली, लेकिन मुस्लिम समाज नेतृत्व के आभाव में इधर-उधर भटकते रहे है ?  क्योंकि मुस्लिम लीडर शिप कांग्रेस परस्त रही है, मुस्लिम लीडर छोटे छोटे पदों में ही सिमट कर रह गए उन्होंने मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए सार्थक कोशिशे नहीं की जिसका नतीजा सच्चर कमेटी जैसी रिपोर्ट के रूप में सामने आया,  और इन समस्त दुर्दशा का कारण बनी कांग्रेस जिसने संघ और भा.ज.पा. के दंगो का भय और आतंक दिखा कर मुसलमानो से वोट तो लेते रही लेकिन उसने मुसलमानो का कभी भला नहीं सोंचा आज तक भा.ज.पा को मुस्लिम विरोधी बताया जाता है हम पूरे देश की बात तो नहीं करते लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य में भाजपा का चेहरा कुछ और ही है देश में बीजेपी को खलनायक के रूप में प्रदर्शित किया जाता है लेकिन छत्तीसगढ़ में यही बीजेपी एक नायक की तरह है ।

यह वर्ष चुनावी वर्ष है सभी पार्टियाँ अपने अपने जीत के दावे कर रही हो लेकिन जनता जनार्दन का समर्थन किसे जाता है यह भविष्य तय करेगा, हमने यह रिपोर्ट अपने निजी स्त्रोतों के द्वारा किए गए सर्वे और कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी के द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर कांग्रेस की दशा को प्रदर्शित किया है ।

अभी जंग का आगाज़ भी नही और तख़्त में बैठने का ख्वाब !

जी हाँ छत्तीसगढ़ काँग्रेस की राजनीतिक उथल पुथल में कुछ ऐसी ही बातें सामने निकल कर आ रही है , नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंह देव (बाबा) के बयान के बाद काँग्रेस में बवाल मचा है  । पूर्व प्रदेशकांग्रेस अध्यक्ष डॉ चरण दास महन्त ने भी मीडिया में बयान देते हुए यह कहा है की मैं क्यों मुख्यमंत्री नहीं बन सकता? बात में दम तो है लेकिन इसके लिए विधानसभा के चुनाव को जितना भी आवश्यक हैं ,अभी तो वर्तमान अध्यक्ष महोदय काँग्रेस को तोड़ने का काम कर रहे हैं , और चुनाव में जीत के लिए कार्यकर्ताओ का दिल  जितना पड़ता हैं जो वर्तमान में दूर - दूर तक कही दिखाई नहीं दे रहा है और  चाटुकारों के दम पर चुनाव नहीं जीता जाता , पिछले चुनाव में ऐसा ही कुछ देखा गया था उस चुनाव में नेतृत्व महन्त जी के हाथ में था और जितने की संभावना भी बनी लेकिन उनके इर्दगिर्द जो चाटुकारों का घेरा है उन्होंने उस जीत में पानी फेर दिया ,इसमें कोई संदेह नही है कि चरण दास महन्त वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं साफ सुथरी छवि भी है उनकी  लेकिन उनके मैनेजर उनके करीब  कार्यकर्ताओ को पहुँचने नहीं देते हैं ।

और पिछले विधानसभा चुनाव में यही देखा गया था , क्योंकि कांग्रेस में हार जीत के मंथन की परंपरा नही है और छोटे कद के नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुनी नहीं जाती वैसे महन्त जी के  प्रदेशकांग्रेस अध्यक्ष का कार्यकाल निर्विवादित रहा हैं । लेकिन उनके इर्दगिर्द के साथी जो कूट राजनीति में माहीर माने जाते हैं वो इनके तरक्की के लिये सबसे बड़े बाधक बने हुए है । वैसे कांग्रेस में दिग्गज नेताओं की कमी नहीं है लेकिन बिचौलियों के चलते कांग्रेस हमेशा  नुकसान में रहती हैं ,अब देखना ये हैं कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व समय रहते सही कदम उठता है या आँख मूंदकर संगठन का भट्टा बैठाने वालों पर ही भरोसा करता है ये तो आने वाला समय ही बता पायेगा ?

27-Apr-2018

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