के.डी.सिंह

अभिमत :उत्तर प्रदेश की विधान सभा  चुनाव में कुर्मीयों का महत्वपूर्ण भूमिका होगी

लखनऊ : जैसे जैसे उत्तर प्रदेश की विधान सभा चुनाव निकट आते जा रहे हैं वैसे वैसे राज्य में राजनैतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होने लगी है ।हलांकि वर्तमान राजनैतिक हालातों को देखते हुए ऐसा लगने लगा है कि प्रदेश में प्रमुख रूप से तीन कोणीय चुनावी मुकाबला भाजपा,सपा और कांग्रेस पार्टी के मध्य होगी और बसपा मुकावले में पिछड़ती नजर आ रही है लेकिन इतना तो स्पस्ट रूप से दिखने लगा है कि जिस तरफ भी कुर्मी जाति / समाज का क्षुकाब होगा उसकी स्थिति निश्चय ही मजबूत हो जावेगा क्योंकि उत्तर प्रदेश में कुर्मी जाति की जनसख्या लगभग 12% है /

भारत की आजादी के संधर्ष में कुर्मी और किसानों का योगदान किसी कम नही हैं लेकिन आजादी के शुरूयाती दौर सेही कुर्मियों के नेतृत्व को बौना बनाने का षडयंत्र शुरू हुआ जो सरदार पटेल के निघन के बाद और तेज हुआ '। हिन्दी पट्टी में कांग्रेस के इसी नीतिका.फायदा राष्ट्रीय स्वंमसेवक संघ के रणनीतिकारों ने उठाया जिसका खामियजा आज कांग्रेस भुगत  रहींहै। क्योंकि बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश के कुर्मियों की भी राजनीतिक चेतना जागृत होंने लगीहै. और अब वो भी राजनैतिक ,सामाजिक और संवेघानिक हकों के लिए उठ.खड़ा .होने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।यही कारण हों कि उत्तर प्रदेश के विघानसभा चुनाव दिलचस्प हो गया है क्योंकि गैर यादव,गैरमुसलमान,   ,गैर सामान्य एंव गैर दलित मत ही फैसला करेंगें कि चुनाव में किसकी जीत हार होगी । 

स्मरण रहें कि यादव +मुसलमान सपा,सामान्य वर्ग -भाजपा तथा दलित _बसपा  का कोर वोट बैंक माना जाता है । 

पूर्वी यूपी में सैंथवार समाज की उत्पत्ति के पीछे के यह भी कहा जाता है कि माहौली राज के माधव मल्ला बिसेन को निष्काषित करने के बाद वह और उनके साथी सैंथवार कहलाए । इस पहचान में कुछ राजपूत के साथ अधिकांश कुर्मी हैं , इस राजपूत पहचान में कुछ पुराने बिसेन और गहरवार राजपूत के वंशज भी आते हैं जो ना इधर के रहे ना उधर के, शायद इसलिए अब खुद को राजपूत/ठाकुर से जोड़ रहे । वैसे समय के साथ सब कुर्मी हो जाऐंगे ।

जहां तक अमीर और गरीब होने के कारण ।जातिय पहचान में अंदर और बाहर रहने की बात है तो वह बिल्कुल सही है लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि कोई जाति(या उपजाति) सिर्फ इसी कारण से खुद को किसी बड़े वर्ग के पहचान में आने से इंकार कर दे ।  हो सकता है कि इन उपजातियों का कभी खुद का स्वतंत्र अस्तित्व रहा हो जिस कारण से पुराने सोच के लोग ऐसा कहते हैं । वैसे श्रेष्ठताबोध में  अवधिया भारत में सबसे आगे हैं ये अपने आपको श्रेष्ठ समझते रहे हैं लेकिन अब स्थिति में परिवर्तन देखने को मिलने लगा बै। इसके बाद सर्वश्रेष्ठता में सैंथवार, पटनवार , चनउ  का नंबर आता है. उत्तर प्रदेश में भी गंगवार, कटियार, सचान, वर्मा प्रजातियों के कुछ  कुर्मी नौजवान अपने आपको विश्वपति समझते हैं. उत्तर प्रदेश के कुछ सैंथवार तो बेचारे राजपूत बनने के लिए मरे जा रहे हैं भले ही राजपूत इन्हें अपने जूते की नोंक पर रखते हों गौतमबुद्ध की गौरवशाली वंशज उत्तराधिकारी सैथवार मल्ल संथागार,संथागारिक,और संथवार (बुद्ध अनुयाई समाज )का तत्सम सैथवार है जिनकी सभ्यता कृषि थी जो स्वाभाविक कुर्मी थे । इतने गौरवशाली इतिहास के बाद भी कहीं से शब्दों या व्यक्तियों के साथ पहचान ढूंढ रहे हैं,आश्चर्यजनक है ।


जाति मत ढूंढिए कुल का गौरव ढूंढिए जो दुनिया में नेतृत्व देने की क्षमता रखता है। नेतृत्वकर्ता बनोगे तों जाती अपने आप महान हो जायेगी
उत्तर प्रदेश में कुर्मीओ की जनसंख्या लगभग 12% से 14 % के बीच में है और कुर्मीओ का जो प्रतिनिधित्व राजनीति में वर्तमान में है यूपी में उसको नीचे संक्षिप्त मे लिख रहा हूँ ।  पर  उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुर्मियों के बढ़ते प्रभाव व राजनैतिक चेतना चुनाव परिणाम को प्रभावित करने में सक्षम होने में मदद कर रहा है।जाति/ समाज के प्रत्यासियों को वोट करो चाहे जिस  राजनीतिक दल का कैंडिडेट हो उत्तर प्रदेश में ,की भावना अब कुर्मियों में भी आता जा रहा है / यहीं कारण है कि कुर्मी समाज में भी चर्चा है कि बाकी और जगह जहा-जहा अपना दल एस,जदयू यादि का कैंडिडेट ना हो मैदान में, वहा पर सिर्फ कुर्मी प्रत्याशी को वोट करो जो जीत सके, चाहे सपा से हो, या बसपा से या भाजपा  अथवा कांग्रेस से। समाजिक तौर पर =(प्लीज सब कुर्मी ऐसा ही करो , नही तो ये जो राजनीति का प्रतिनिधित्व है यूपी में कुर्मीओ का अपनी जनसंख्या के अनुपात से कम , धीरे-धीरे
और भी खतम हो जाएगा) का प्रचार प्रसार दिनोंदिन तेज होता जा रहा ह्रै। देखना दिलचस्प होगा कि इन हालातों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कितना राजनैतिक और सामाजिक कौशल दिखा पाते हैं?

मेरा प्रयास यही है कि किसी भी चीज मे राजनीति यों या शिक्षा हर चीज मे कुर्मी अपनी हिस्सेदारी यूपी में 15% से कम ना करे, ज्यादा ही करे 15 % से .

1=यूपी में 403 विधानसभा सीट है उसमे से 35 MLA वर्तमान कुर्मी है, मतलब सिर्फ 8.68% कुर्मी MLA है.
2= यूपी में 80 लोकसभा सांसद सीट है जिसमें से 8 कुर्मी सांसद वर्तमान में है, मतलब सिर्फ 10% कुर्मी सांसद है.
3=यूपी में जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट 75 है जिसमें से वर्तमान 8 कुर्मी जिला पंचायत अध्यक्ष है, मतलब सिर्फ 10.66% कुर्मी जिला पंचायत अध्यक्ष है.
4=यूपी में 825 ब्लॉक प्रमुख सीट है जिसमें से वर्तमान ब्लॉक प्रमुख कुर्मी 77 है, मतलब सिर्फ 9.33% है. 
5=वर्तमान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष =स्वतंत्र देव सिंह पटेल है.
6=वर्तमान समाजवादी पार्टी प्रदेश अध्यक्ष =नरेश उत्तम पटेल है 
7=अपना दल एस राष्ट्रीय अध्यक्ष  अनुप्रिया पटेल हैजो भाजपा की वर्तमान केन्द्र सरकार में मंत्री है और वहभाजपा के साथ ही चुनावी मैदान मे उतरेगी 1.
8 .अपना दल का दुसरा खेमा भी हैं जिसकी वागड़ोर अनुप्रिया पटेल की माता और बहन के पास है व वह भी चुनावी मैदान मेंउतरने की तैयारी में है।
9=वर्तमान में मंत्री पद पर 4 कुर्मी है उत्तर प्रदेश में. 
10.जदयू की उत्तरप्रदेश की राजनीति में दिलचस्पी बडी हें और समक्षा जा रहा है कि बिहार मुख्यमंत्री 7 बार विकास पुरुष नीतीश कुमार  उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में भाजपा से चुनावी समक्षौता करके चुनाव मैदान में उतरेगें ।
॥ . काग्रेस के पास कुर्मी जाति का उत्तरप्रदेश में कोई कद्दावर नेता नही है 'लेकिन वह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को प्रमुख पार्यवेक्षक नियुक्त कर दिया है तथा मान करके चल रही है कि श्री वघेल किसानों और कुर्मी जाति के मतादाताओं का वोट कांग्रेस पार्टी को दिलाने में मददगार होगें ।

20-Nov-2021

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