अक्सर अपनी क़यादत के पेरोकार कांशीराम जी और मुलायम सिंह यादव जी की मिसाल देकर कहते हैं कि जब मुट्ठी भर यादवों की और दलितों की अपनी पार्टी हो सकती है तो मुसलमानो की अपनी पार्टी होने में क्या दिक्कत है ?? मुसलमान तो तादाद में इनसे ज़्यादा है । मुलायम सिंह यादव ने तो 1992 में पार्टी स्थापना की थी तभी उनके मंच पर ब्राह्मण , ठाकुर , वैश्य , OBC , मुस्लिम और दलित एक साथ बैठे दिखाई दिए थे । कांशीराम जी ने कई संगठनों और पार्टियों को बनाने के बाद 1984 में बसपा का गठन किया । गठन के समय उनका नारा था , तिलक , तराज़ू और तलवार …. , उनका कहना था कि हम 85% देश की जनता जिसमें दलित , अल्पसंख्यक और OBC आते हैं , उनके हक़ के लिए पार्टी बना रहे हैं । 1989 में बसपा के पहली बार विधान सभा में 14 विधायक चुन कर पहुँचे , बसपा ने विधायक दल का नेता हमारे ज़िले की अफ़ज़लगढ़ सीट से विधायक शेख़ सुलेमान उर्फ़ पप्पू को बनाया । बसपा ने शुरुआती दिनो में सवर्ण समाज को टिकट नहीं दिया लेकिन अल्पसंख्यकों , दलित और OBC को भरपूर टिकट दिए और उन्हें विधान सभा , विधान परिषद , लोकसभा , राज्य सभा में भेजा । बाद में बसपा ने सर्व समाज की बात करना शुरू की और ब्राह्मण समाज को साथ लेकर पूर्ण बहुमत से उत्तर प्रदेश में सरकार बनायी । कभी फ़ुर्सत मिले तो बसपा के विधायकों और सांसदो की लिस्ट पर एक नज़र डालिएगा , आपको वहाँ हर जाति हर धर्म के लोग दिखाई देंगे । अगर इक्का दुक्का अपवाद छोड़ दे तो बसपा ने कभी भी आरक्षित सीट के अलावा किसी दलित को प्रतियाशी नहीं बनाया । बसपा ने दलितों को ट्रान्स्फ़रेबल वोट बनाया । उन्होंने अपने वोट को इतना मज़बूत बनाया कि उनके वोटर को इस बात से कभी मतलब नहीं रहा कि प्रत्याशी की जाति और धर्म क्या है , उन्हें केवल हाथी निशान से मतलब रहा । यही कारण है कि बसपा का विधायक या सांसद चाहे किसी बिरादरी का हो , किसी धर्म का हो , उसने दलित समाज के मुद्दे सदन के अंदर और सदन के बाहर प्रमुखता से उठाए हैं और दलित समाज की बात भी सुनी है । अगर कांशीराम जी की मिसाल देकर पार्टी बनाना चाहते हो तो पार्टी भी उनकी तर्ज़ पर ही बनाओ । उनके पास तो पार्टी बनाने के लिए पैसा नहीं था , आपके पास तो पैसा भी है । कांशीराम जी की तरह पार्टी में सर्व समाज को भागीदारी दो , सर्व समाज को टिकट दो , सर्व समाज से वोट माँगो , अपने समाज के लोगों का ट्रान्स्फ़रेबल वोट बनाओ और फिर आपकी पार्टी से जो लोग चुन कर जाए , उनसे अपने समाज के मुद्दे सदन के अंदर और बाहर उठवाओ । अगर आप ऐसा नहीं करते , अगर आप केवल अपने समाज को टिकट देकर , अपने ही समाज से वोट माँग रहे हो और रात दिन मुसलमान मुसलमान सिर्फ़ चिल्ला रहे हो तो भाई आपकी गिनती कभी कांशीराम या मुलायम सिंह के साथ नहीं हो पाएगी । आप ओम् प्रकाश राजभर, संजय निषाद , अनुप्रिया पटेल की तरह ब्लैक मेलर या वोट कटवा ही कहलाए जाओगे । इतना याद रखिए कि मुसलमान मुसलमान चिल्लाकर आप मुसलमानो को मज़बूत नहीं कर रहे हैं बल्कि उन्हें अलग थलग करने वाले संघ के अजेंडा को आगे बढ़ा रहे हैं । दलित समाज को एक ऐसा राजनीतिक मंच देने वाले कांशीराम जी को उनकी पुण्यतिथि पर ख़िराज ए अक़ीदत पेश करता हूँ जिस मंच पर बैठकर सर्व समाज के लोगों ने दलित समाज के लिए आवाज़ उठायी है । इब्न ए आदम
09-Oct-2021

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