लेख : एम.एच.जकरीया 

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सामन्तवादी सोंच और तानाशाही रवैये का ताज़ातरीन उदाहरण है कांग्रेस का मीडिया विभाग-काँग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष द्वय शिव डहरिया और रामदयाल उइके के साथ हुई अपमान जनक घटना से इसे देखा जा सकता हैं, नेता द्वय को दलित और आदिवासी के मामले में बोलने नही दिया गया और वे दोनों प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चले गए क्या ? ये अपमान जनक घटना नही है ! जिन  दलित और आदिवासियों के वोटों से ये सत्ता में बैठने का सपना देख रहे है उन्ही के साथ भेदभाव  का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा, यहाँ लगता तो ऐसे ही हैं | की छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस का संचार और  मीडिया विभाग जाती और धर्म के हिसाब से बोलने का अधिकार देता है ? 
और इनसे उम्मीद भी क्या की जा सकती हैं !

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छत्तीसगढ़ में दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समाज अपना वोट क्यों दे कांग्रेस को ?  वोट हमारा और राज तुम्हारा अब ये नहीं चलने वाला है | जब संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी इन्हें नहीं दिया गया तो इनसे सत्ता में भागीदारी की क्या उम्मीद की जा सकती है? आज का ये सबसे बड़ा सवाल है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है छत्तीसगढ़ की प्रदेश की वर्तमान कार्यकारिणी का प्रतिनिधित्व, जिसमे अंधा बांटे रेवड़ी अपने-अपनों को दे वाली कहावत चरितार्थ हो रही है, जिसमे 1 ही परिवार के 6 सदस्य बड़े ही आश्चर्य की बात है.
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन इन सभी वर्गों के पीठ में छुरा घोंपने का काम कर रही है और इन समाजों की अंधभक्ति और अशिक्षा का नाजायज फायदा उठा रही है, क्योकि कांग्रेस की परंपरा ही चरण छूने वालो की रही है, अगर किसी ने इनके खिलाफ बोलने या लिखने की कोशिश भी की तो इनके चंदा खोर चमचो की टीम लिखने वाले को गरियाने लग जाते है, शायद इसलिए की चंदा वसूली से इनका घर चलता है ?

संगठन की भलाई के लिए कहने वालो को कांग्रेस का दुश्मन समझते है ? अभी हाल ही में मेरे द्वारा एक समाचार प्रकाशित किया गया जिससे कुछ लोगों को काफी बुरा लग गया और वे सोशल मीडिया में मुझे ट्रोल करने लगे और जिस प्रकार के शब्द की उम्मीद नहीं की थी वे भी कमेन्ट बॉक्स में डाले गए. 

मै आपको बता दूँ कि मै किसी भी पार्टी या संगठन की तरफदारी नहीं कर रहा हूँ बल्कि वास्तविकता से वाकिफ करा रहा हूँ? अभिव्यक्ति की आजादी सभी को है कांग्रेस किसी के बाप की जागीर नहीं है कुछ ऐसे ही दो कौड़ी के चमचो के कारण कांग्रेस का ये हाल हुआ है !इन फूल छाप कांग्रेसी नेताओ की वज़ह से दलित आदिवासी और अल्पसंख्यक समाज के लोगो को संगठन की मुख्यधारा में कभी भी आगे आने नहीं दिया, बल्कि मोर्चा–प्रकोष्ठ जैसे पद या यूँ कहे तो टुकड़े फेक कर इनके जुबान को बंद करने की कोशिश हमेशा से करते आये हैं, लेकिन अब छत्तीसगढ़ में ये नहीं चलने वाला है, अब छत्तीसगढ़ की जनता समझ गई है की हमारा कौन भला चाहने वाला है ! अब दाऊ गिरी का जमाना लद गया समाज जागृत हो गया है पहले की तरह छत्तीसगढ़ की जनता दाऊ जी के दरबार में हाथ जोड़े अब नहीं खड़ी होने वाली है !

आज उत्तरप्रदेश,बिहार,आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, दिल्ली में अब ये समाज जागरूक हुआ तो पिछले 25 -30 सालों से कांग्रेस को सत्ता के लाले पड़ गए है और तब भी ये समझना नहीं चाहते, तो क्या कर सकते है ?  छत्तीसगढ़ की राजनीति में तीसरी ताकत बनकर उभर रहे अजित जोगी की पार्टी इन  समाज के लोगो का हाथ बड़े सम्मान के साथ थाम रही है और इन्हें जिम्मेदारी भी दे रही है और इनके अधिकारों को उन्हें बताने का काम भी कर रहे है ! 

कभी कांग्रेस के लिए समर्पित अजित जोगी और उनका परिवार इनके ही राजनीतिक साजिशों का शिकार हुए है, क्योंकि जोगी जी ने दलितों, पिछड़ो, अल्पसंख्यक और आदिवासियों के हितो की बात की, जिसे कांग्रेस के सामंतवादी विचारधारा रखने वाले नेता हज़म नहीं कर पाए और साजिशे कर के उनको और उनके परिवार को कांग्रेस छोड़ने के लिए मज़बूर किया, झूठा टेलीफोन टेप काण्ड का आरोप लगाया, जो की ये कांग्रेस के नेता साबित भी नहीं कर पाए और राहुल गाँधी जी को अँधेरे में रख कर इन्हें कांग्रेस छोड़ने विवश करते रहे और प्रदेश के एक कद्दावर मन्त्री की फ़र्ज़ी सेक्स सी.डी. को लेकर हो हल्ला मचाते रहे यह कांग्रेस की परम्परा को लज्जित करने जैसा है जिस सेक्स सीडी की बात कहकर नेता जी हो हल्ला मचा रहे थे वह अभी साबित भी नहीं हुआ और इस मामले में एक पत्रकार को जेल भी भुगतना पड़ा

इस सीडी को लेकर कांग्रेस जिस तरह हल्ला मचा रही थी यह सीडी फर्जी साबित होने के बाद कांग्रेस की छवि पर जो बुरा प्रभाव पड़ा है उसका जवाबदार कौन होगा ? छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मान सम्मान को कौन धूमिल कर रहा है? कौन जातपात के भेदभाव की राजनीति कर रहा है जनता और सच्चे कांग्रेस के कार्यकर्ता जानते समझते है, अगर कोई सच लिखता है और इन्हें आईना दिखाता है तो इन चंदाखोर चमचा बाबू लोगो को बुरा लगता है क्योकि इनकी निष्ठा संगठन के प्रति ना होकर अपना भला करने में अधिक है |

23-Apr-2018

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