महात्मा गांधी के जीवन रक्षक बत्तख मियां अंसारी की अनोखी कहानी...

लेख- एम. डब्ल्यु. अंसारी 

समीक्षाधीन पुस्तक स्वतंत्रता सेनानी बत्तख मियां अंसारी के व्यक्तित्व, स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान और बलिदान से संबंधित हैं | इस पुस्तक का उर्दू संस्करण भी छापा जा चूका हैं | इसके संकलनकर्ता श्री एम. डब्ल्यु. अंसारी हैं जिनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है | पुलिस महकमा जैसी व्यस्ततम सरकारी सेवा के दौरान भी अपनी सभी व्यस्तताओं के बावजूद अवसर के अनुसार सामाजिक कार्यों में भाग लेते रहे है | वह मौजा-उसिया, जिला-गाजीपुर उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं | उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अलीगढ़ से अपनी शिक्षा पूरी की और 1984 में भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुने गए एवं विभिन्न वरिष्ठ पदों पर कार्यत रहकर देश एवं समाज की उत्तम सेवा प्रदान करते हुए अंत में पुलिस महानिदेशक (वित्त) छत्तीसगढ़ के रूप में अपनी सर्वश्रेष्ठ सेवा का प्रदर्शन किया और 31 दिसंबर 2017 को सेवानिवृत्त हो गए उन्होंने इस से पहले भी बत्तख मियां अंसारी पर एक पुस्तिका प्रकाशित की थी और अब इस पुस्तक के माध्यम से बत्तख मियां के व्यक्तित्व और उनकी देशप्रेम की भावना को बड़े पैमाने पर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कर्तव्य निभाया है जिसका निश्चित रूप से स्वागत किया जाना चाहिए | 

समीक्षाधीन इस पुस्तक में 24 लेख और 9 कविताएं हैं | पुस्तक में पहला और सबसे महत्वपूर्ण लेख मो. आरिफ संसारी का है जिसमे चंपारण सत्याग्रह के कारणों और कारकों पर चर्चा करते हुए बत्तख मियां अंसारी को ‘मोहसिन-ए-कौम (देश उपकारक)’ घोषित किया गया है तथा उनके कर्म, बलिदान एवं अंजाम के बारे में दस्तावेजी संदर्भों के साथ विस्तृत प्रकाश डाला गया है | हालांकि लेख लंबा है और इसमें 15 पृष्ठ है | लेकिन अंतर्वस्तु के आधार पर लंबाई मायने नहीं रखती है बल्कि लेख की आवश्कता मालूम पडती है | लेख के अंतर्वस्तु प्रमाणपूर्वक प्रस्तुत किए गए हैं जिसके अध्यन से पाठकों के ज्ञान में अवश्य ही वृध्दि होगी | मो. आरिफ अंसारी बिहार के जाने माने लेखक और पत्रकार हैं | वह तहरीक-ए-उर्दू बिहार (पंजी) के प्रवक्ता और ऑल इंडिया मोमिन कॉन्फ्रेस की कार्यकारिणी समिति के सदस्य हैं | इसके अलावा वह बिहार स्टेट मोमिन कॉन्फ्रेस के महासचिव भी हैं | इसके अतिरिक्त सामाजिक कार्य में भी बहुत सरगर्म रहते हैं | दुसरे लेख में ई. स्लिम अंसारी ने बत्तख मियां अंसारी के व्यक्तित्व एवं स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला है जबकि नौशाद आलम आजाद ने अपने लेख में उन्हें एक मूल स्वतंत्रता सेनानी के रूप में वर्णित किया हैं | प्रो. अलादीन अंसारी अजीजी ने भी उनकी अमूल्य राष्ट्रिय सेवाओं के बारे में अपने विचार व्यक्त किए हैं | प्रो. सालेहा रशीद ने अपने लेख में उस घटना का विस्तार से वर्णन किया हैं जिस में बत्तख मियां अंसारी ने गांधीजी की जान बचाई थी | प्रसिध्द सोहेल अंजुम ने अपने लेख में हालांकि संक्षेप से काम लिया है लेकिन प्रभावी ढंग से बत्तख मियां अंसारी के हालात एवं योगदान पर प्रकाश डाला हैं | 

अन्य लेखक जिनके लेख इस पुस्तक में शामिल है, उनमे अब्दुल रशीद अंसारी, सरवर नगीनवी, शकील अस्थानवी, इफ्तिखार कुरैशी, मुबश्शिर आलम, हकीम रिशादुल इस्लाम, डॉ. एम. ए. हक, मुख़्तार हुसैन अंसारी, जावेद बिन अली, साजिद उबैद, शमीम इक़बाल खान, तनवीर अहमद, रिजवानुद्दीन अंसारी, फलाहुद्दीन फलाही, एम. डब्ल्यु. अंसारी (संकलनकर्ता), अंसारी सबीहा अतहर और अंसारी अतहर हुसैन शामिल हैं | जबकि सलीम अंसारी, सरवर नगीनवी, डॉ. बख्तियार नवाज, शादाँ सुलतानपुरी, प्रोफेसर ईरफान आसिफ, जखमी औरंगाबादी, डॉ. एजाज दाऊद नगरी तथा साहिर दाऊद के कलाम शामिल हैं जिन में बत्तख मियां अंसारी को बेहतरीन श्रध्दांजलि दी गई हैं | सरवर नगीनवी का कलाम ‘जान बचाई गांधी की’ में गांधीजी की जान बचाने का किस्सा कविता में कुछ इस तरह ढ़ाला गया हैं :- 

अंग्रेजो ने  उसके हाथों जहर का प्याला देके कहा 
गांधी को पिलाओं दूध में तुम ख़त्म करो आप उसका किस्सा 

इस जहर को अमृत कहकर, तुम आज पिलाओं गांधी को 
थाम लो आजादी को, रोक लो तुम इस आंधी को 

दूध का प्याला सामने रखा बेबाकी से उसने कहा 
इसको न पीना बाबू जी इस प्याले में जहर भरा 

पुस्तक के अंत में बत्तख मियां अंसारी और उनके उत्तराधिकारियों के चित्रों के अलावा, उनके दरगाह की तस्वीर और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों की छायाप्रति प्रस्तुत की गई हैं, जिनकी बदौलत इस पुस्तक को दस्तावेजी हैसियत प्राप्त को गई हैं | पुस्तक के लिए बेहतरीन कागज का प्रयोग किया गया हैं, और इसकी सजावट और एवं छपाई उत्तम हैं | यह पुस्तक हिंदी में जीवनी तथा इतिहासिक साहित्य के रूप में एक महत्वपूर्ण इज़ाफा है और सार्वजनिक और निजी पुस्तकालयों के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति साबित होगी | साथ ही जो लोग अपने पूर्वजों के कारनामों की जानकारी और इतिहास में रूचि रखते हैं, उनके लिए यह पुस्तक निश्चित रूप से एक उपहार है और छात्रों एवं शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी साबित होगी 

शकील अहमद अंसारी 

27-Aug-2021

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