सुनो मेरे गरीब भाई तुम,
मेरी एक- एक बात सुनो तुम|

तुम्हारे नाम का लेकर चन्दा,
वाह -वाही का करते है नाच नंगा|

दाल रोटी में तुमको उलझकर ,
ये करते है सब करोड़ों का धंधा|

दो रोटी का टुकड़ा देकर तुमको,
इनको  लेनी है बस सेल्फी  चार|

तुम्हारे सम्मान की उड़ा धज्जियां,
इन्हे पाना दौलत और प्रतिष्ठा अपार|

तुम्हारा लाल पढ़ आगे न बढ़ जाए,
इसलिए लगे है रोटी में तुम्हें उलझाए|

इनके तुम छलावा में ना आना,
भले तुम नुन और भात खाना|

पर अपने बेटा और बेटी को तुम,
शिक्षा से कभी न वंचित करना|

तुम मजदूर हो ना पढ़ पाए तो क्या,
अपने बच्चों को तुम शिक्षित करना|

हालात तुम्हारे भी बदल जायेंगे,
तुम्हारे बच्चें तुम्हारा स्वाभिमान कहलाएंगे|

सीमा सरू दर्शीनी
   छत्तीसगढ़

26-Jul-2021

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