ठाकुर राम बंजारे 
कोरोना महामारी से मीडिया जगत भी अछूता नही है छोटे छोटे  पत्र -पत्रिका न्यूज़ पोर्टल और उसमें काम करने वालों की हालत  इस कोरोना संकट से  खराब स्थिति में  है और दिन ब दिन और खराब होने की संभावना दिखाई दे रही है क्योकि यही एक बिरादरी ऐसी है जो अपने हालात कहीं बयाँ नहीं कर सकती और सभी के निशाने पर रहती हैं ?  बड़े न्यूज़ चैनल और न्यूज़ पेपर अपने बहुत से कर्मचारियों की छटनी कर दे रहे है और कई पत्रकार घर बैठ गए है।  क्योकि कोरोना के खतरे को देखते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग नही हो रही हैं खास कर के बंगाल चुनाव के बाद!
वैसे  कहने को लोकतंत्र का चौथा स्तंभों में से एक कहा जाता हैं  ,लेकिन सबसे ज्यादा उपेक्षित भी इसी से जुड़े  वर्ग के लोग रहते है  क्योकि इस बिरादरी पर भरोसा बहुत कम किया जाता है अब वो समय नही रह गया जब मीडिया और पत्रकार सम्मान के बा इस माने जाते थे यहाँ 
मेन स्ट्रीम कहा जाने वाला गोदी मीडिया तो मजे कर रहा है बाकी सब का हाल बे हाल है क्योकि तख्त पर बैठे सत्ताधिशो और अधिकारियों
को तो जैसे मौका मिल गया है इस कोरोना काल में कोई किसी से मिलना नही चाहता है क्योकि शोसल डिस्टनसिंग की दूरी का नियम  मारे दे रही हैं और सरकार कोरोना का हवाला देकर विज्ञापन नही देना चाहती है  और अगर देती भी है तो खैरात समझ कर देती है आखिर मुसीबत तो छोटे स्तर के पत्रकार और मीडिया झेल रहे है कोई इनका सुनने वाला नही है।
इस तराह से अगर हालात रहे तो छोटे पत्रकार और मीडिया पर इसका बुरा असर पड़   सकता  है और लोकतंत्र की आवाज उठाने वाले दब  कर रह जाएंगे  ?  

 

14-Jul-2021

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