जहेज़ की कुरीतियों को दूर करने के लिए जनता और सरकार दोनों को आगे आना होगा। सैय्यद तक़वी

अभी कुछ दिन पहले साबरमती नदी में एक हादसे की खबर आई। कई दिनों से इस घटना के बारे में सुन रहा था और पढ़ रहा था और सोच रहा था कि ऐसा क्यों हुआ? इस देश में क्या हो रहा है इंसान की सोच कहां तक पहुंच गई है? किसी की बेटी ने जिंदगी से तंग आकर अपनी जान दे दी और यह परेशानी और तंगी इस बात की थी कि उससे जहेज़ का बार-बार मुतालबा किया जा रहा था आज के जमाने में जहेज़ सिर्फ वह नहीं है जो शादी के वक्त मां बाप अपनी बेटी को देते हैं आज कुछ लालची लोग शादी के बाद भी समय-समय पर लड़की के बाप से चीजों के लिए डिमांड करते हैं उसके लिए वह अपनी बीवी का इस्तेमाल करते हैं जो बहुत ही ज्यादा चिंताजनक है।
यहां मैं किसी धर्म या मजहब की बात नहीं कर रहा हूं मैं इंसानियत की बात कर रहा हूं कम से कम जो हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति है उसमें चाहे हिंदू हो मुसलमान हो सिख हो या ईसाई हम सब को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि सिर्फ कोई लड़की किसी की बीवी ही नहीं होती बल्कि वह मां भी होती है बहन भी होती है और सबसे बड़ी बात कि किसी की बेटी भी होती है जिस के इतने रूप हों उसके साथ  इस तरह का बर्ताव कैसे किया जा सकता है।
आज हमारे देश का युवा और उसी युवक के अभिभावक या माता-पिता लड़की वालों से जहेज़ के नाम पर दौलत पैसा गाड़ी बंगले की डिमांड करते हैं वह अपने आप में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला है। जो इंसान अपनी पत्नी से प्यार नहीं कर सकता वह दुनिया में किस से प्यार कर सकता है उसको इंसान कहलाने का हक नहीं है। वह इंसानियत के नाम पर धब्बा है। उसको सिर्फ दौलत से प्यार होता है । 
इसके लिए हम को आगे आना होगा और यह फैसला लेना होगा कि हम जहेज़ जैसी कुरीतियों को बढ़ावा नहीं देंगे इसके लिए हर धर्म के जो गुरु हैं चाहे वह मौलाना हो पंडित हो पादरी हों या फादर हों कोई भी हो उनको भी इसमें खुलकर सामने आना होगा कि जहां इस तरह की चीजें होंगी वहां पर शादी की रस्में पूरी नहीं कराएंगे।
इसके अलावा सरकार को भी इस मामले में सजगता बरतनी होगी जिससे सरकार और सरकार के अंडर में काम करने वाले संस्थाएं समय-समय पर लोगों के यहां छापा मारती हैं चाहे फिल्म स्टार हों चाहे वह बिजनेसमैन हों आय को लेकर के छापा मारा जाता है। आप मकान बनवा रहे हैं तो सरकार उसको चेक करती है आपने अपने पैसों से गाड़ी खरीदी सड़क पर चल रहे हैं तो सरकार उसको चेक करती है आप कोई बिजनेस या व्यवसाय कर रहे हैं तो सरकार उसको भी चेक करती है हर चीज पर सरकार की नजर होती है तो आखिर इन शादियों में दिए जाने वाले दहेज पर सरकार की नजर क्यों नहीं होती। अगर आप मकान बनवा रहे हैं तो उसके लिए भी नियम कानून है। अगर आप गाड़ी खरीद रहे हैं अपना व्यवसाय खोल रहे हैं तो सब चीज में सरकार के कानून और नियम है ऐसे में शादी के लिए नियम और कानून क्यों नहीं है? हर चीज के लिए संसद में प्रस्ताव पारित करवाने के लिए सरकार तत्पर रहती है ऐसे में जहेज़ के खिलाफ प्रस्ताव क्यों नहीं पारित करवाती है। इस पर विचार करना चाहिए।
एक बाप मेहनत मजदूरी करके खुद तकलीफ उठा करके अपने बेटी को पालता पोसता है बड़ा करता है और उसकी ख्वाहिश होती है कि अपनी बेटी की जिंदगी के लिए किसी अच्छे के साथ की शादी की जाए लेकिन नतीजा क्या निकलता है नतीजा वही है जो अभी साबरमती नदी के किनारे दिखाई दिया।
एक बेटी की जान चली गई लेकिन मुजरिम के साथ क्या हुआ उसे सिर्फ गिरफ्तार किया गया और शायद आने वाले वक्त में उसे जमानत भी मिल जाए क्या यह सही है? बिल्कुल सही नहीं है। ऐसे लोगों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए।
जनता यानी आवाम को भी यह फैसला करना होगा कि जहां जहेज़ और इस तरह के लोक लुभावनी शादी हो वहां के दावत नामें को कुबूल ना करें और साथ ही साथ मौलाना पंडित वगैरह को भी इस बात का ध्यान रखना होगा कि ऐसी जगह पर शादी की रस्म पूरा कराने से इंकार कर दे। 
बेटी घर की रहमत होती है घर की लक्ष्मी होती है जिसे रहमत या लक्ष्मी की कद्र नहीं उसे पूरी तरह समाज द्वारा बहिष्कृत करना चाहिए।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
लखनऊ
syedtaqvi12@gmail.com
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06-Mar-2021

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