लेख- ठाकुर राम बंजारे 

किसी भी देश, प्रदेश समाज जाति का सबसे उच्चतम और सम्मानीय वर्ग अगर कोई है तो वो हैं हमारे किसान. हमारे देश को आजाद हुये करीब 70 साल हो गये. आजादी के इन 70 सालों में हमारा देश आज भी विकासशील देशों में गिना जाता है लेकिन ये कहना गलत होगा की हमारे देश तरक्की नहीं किया है औधोगिक हो या व्यापर, चाहे शिक्षा हो या टेक्नोलॉजी इस देश ने सभी क्षेत्रों में अपना परचम लहराया है इसके बावजूद आज सबसे ज्यादा सोचने और समझने की जरूरत है वो हैं अन्नदाता किसान, धुप-छाव की परवाह किये बगर किसान सुबह से लेकर शाम तक खेतों में कड़ी मेहनत करता है यहां पर हम येसे किसान की बात कर रहे है जो भूमि विहीन होता है और बड़े किसानों से अधिया रेघा में जमीन लेकर खेती करता है इस तरह के किसानों को ना तो सरकार के द्वारा कर्ज मिलता है ना बीज और खाद ये बिना सुविधा के सारे कष्ट झेलकर खेती करता है तथा खेती में आने वाले सभी प्रकार के व्यय को स्वयं ही वहन कर ये किसान अपना और अधिया रेघा देने वाले बड़े किसानों का पेट भरता है. आजादी के 70 साल बाद भी इन भूमि विहीन किसानों को समर्थन मूल्य ना मिलना शर्मनाक है |

राज्य की बात करे तो अधिया रेघा लेकर खेती करने वाले किसानों की संख्या छत्तीसगढ़ में लाखों में है मध्यप्रदेश से अलग हो ने के बाद राज्य में भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने सरकार बनाई लेकिन किसी भी सरकार ने अधिया रेघा वाले गरीब किसानों पर ध्यान नहीं दिया. सरकार किसी का भी रहा हो लेकिन अधिया रेघा वाले किसानों को कभी किसान नहीं माना गया और इन किसानों को ना उत्पादन का समर्थन मूल्य मिला ना ही खेती के लिए सुविधा इन्हें ना तो सरकार द्वारा बीज, खाद्य मिलाता है और ना ही खेती करने के लिए कर्ज मिलाता है. विडम्बना तो ये है कि राज्य सरकार के सबसे बड़ी योजना में से एक ‘किसान न्याय योजना’ का लाभ भी इन मजबूर किसानों को नहीं मिलता. क्योकि इनके पास धान खरीदी केन्द्रों में पंजीयन करने के लिए जमीन ही नहीं होता जिसके चलते ये किसान अपने उत्पादित धान को आधे कीमत पर बेचने को मजबूर होते है. ठीक इसके उल्टा बड़े किसानों द्वारा इन किसानों से रेघा प्राप्त कर अपने जमीनों का धान खरीदी देन्द्रों में पंजीयन करा ऊँचे दामों में बेचते है तथा इन्ही मजबूर किसनों की उत्पादन को आधे दामों में खरीद सरकार के योजना के द्वारा हजारों रूपये का बोनाश भी प्राप्त करता है 

कौन है अधिया रेघा वाले किसान-
येसे किसान जो भूमि विहीन होता है और बड़े किसानों से अधिया रेघा में जमीन लेकर किसानी करता है इस तरह के किसानों सरकार के द्वारा कोई लाभ नहीं मिलाता इन्हें खेती के लिए ना कर्ज मिलता है ना बीज और ना खाद ये बिना सुविधा के सारे कष्ट झेलकर खेती करता है तथा खेती में आने वाले सभी प्रकार के व्यय को स्वयं ही वहन कर ये किसान अपना और अधिया रेघा देने वाले बड़े किसानों का पेट भरता है.

ठोस नीति की जरूरत-
इन मजबूर किसानों पर आज सोचने की जरूरत है क्योकि अन्नदाता किसान को जो हक मिलना चाहिए, वह आजादी के 70 साल बाद भी नहीं मिला। सरकार ऐसी किसान नीति बनाए, जिसका इस तरह के किसानों को सीधा लाभ मिले। संसद सत्र बुलाने की आवश्यकता हो, तो बुलाया जाए। इन मजबूर किसानों से कल्याणकारी नीतियों के लिए सरकार सुझाव मांगे। ताकि इन किसानों को भी अन्य किसानों की तरह खेती के लिए सारी सुविधा मिल सके और अपने उत्पादन को समर्थन मूल्य में बेच कर अपनी जीवन स्तर को ऊँचा कर सके.

30-Nov-2020

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