एजाज ढेबर  का बढ़ता कद,, आगामी  दक्षिण विधान से  तैयारी  का  आगाज़ तो नही है ? 
हाल ही में एजाज़ ढेबर महापौर संघ के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए  ,जिससे आभास होता है की इतने कम उम्र और इतने  कम समय में एजाज़ ढेबर ने जिस तरह से पार्षद का चुनाव लड़कर कड़े संघर्ष करने के  बाद  राजधानी रायपुर का महापौर बने  वह भी विपरीत परिस्थितियों में यह  राजनैतिक  मायने में गौर करने वाली बात है  ! जहाँ बड़े - बड़े  राजनीति  के  दिग्गज  खिलाडी  महापौर पद के लिए अपना  दांव् लगा रहे  थे  विशेष रूप से रायपु  दक्षिण  के विधायक बृजमोहंन  अग्रवाल की प्रतिस्ठा रायपुर  नगरनिगम  महापौर  के लिए  लगी हुई थी, और अप्रत्याक्ष् रूप से भी  अन्तिम  क्षण  में  भी  कुछ कांग्रेस के नेता   भी  एजाज़ ढेबर को महापौर बनते नही देखना चाहते थे ऐसी विपरीत परिस्थितियों में  उनका महापौर  बनकर चुना जाना यह संकेत देता  है  की अगला दमदार और मजबूत रायपुर दक्षिण  विधान सभा का कांग्रेस प्रत्यासी  एजाज़ ढेबर के रूप में हो सकता है  !

पिछले तीन दशकों से रायपुर शहर विधान सभा से  स्वरूपचंद जैन, के चुनाव लड़ने से इंकार करने के बाद   राजकमल सिंघानिया,  पारस चोपड़ा,  गजराज पगारिया,  योगेश तिवारी, श्रीमती किरणमयी नायक कन्हैया  अग्रवाल  तक क्रमशः चुनाव हारते गए और जीत का अंतर बढ़ता गया है और कांग्रेस   का मनोबल लगातार गिरता ही जा रहा है ,क्योंकि कुछ फूल छाप कांग्रेसी जिनकी विचार धारा भाजपाई रही हैं जिन्होंने  अपना भला किया और  उन लोगों ने सदेव् कांग्रेस को नुक्सान पहुँचाने का काम किया है जिसके खुद शिकार वर्तमान मुख्यमंत्री भुपेश बघेल भी हुए थे ?  ,जब उन्होंने रायपुर लोकसभा का चुनाव लड़ा था  ,और तत्कालीन महापौर श्रीमति किरण मई नायक भी इन्के  साजिश का शिकार  हुई थी  ,लेकिन  अंतिम  क्षणो में   उन्होंने बृज मोहन अग्रवाल को नाको चने चबावा दिया था ? किसी समय का रायपुर शहर विधान सभा और वर्तमान में  दक्षिण विधानसभा का भाजपाई चक्र व्यूह   “क्या एजाज़ ढेबर “ तोड़ पायेंगे 
 क्योंकि रायपुर  दक्षिण  विधान सभा  क्षेत्र  मे  कांग्रेस के परंपरागत वोटर  है  जो कि मौदहापारा, नायपारा, छोटा पारा बैजनाथपारा, बैरॉनबाजार, नेहरूनगर, टीकरा पारा  , संजयनगर, संतोषीनगर, कांग्रेस के प्रभाव वाले  क्षेत्र  माने जाते है फिर ये वोट कांग्रेस के पक्ष् में क्यों नही जाते ये महत्व पूर्ण  और सोचने वाली बात है ,क्योकि कुछ फूल छाप कोंग्रेसी इन वोटो को भा  ज  पा  के पक्ष में मैनेज करते है ,  कमाल तो ये देखा गया है की बूथ में बैठने वाले नदारद हो जाते है  जहाँ
कांग्रेस के निर्णय लेने वाले निति निर्धारक  लोग ही कांग्रेस की जड़ो मे मठा डालने और गड्ढा करने का काम करते हो  वहाँ जित कैसे हो सकती है इस अनुभव को समय रहते श्री भूपेश बघेल ने बेहतर समझ लिया था   प्रदेश कांग्रेस अध्याक्ष् का  बनने के बाद  उन फूल छाप लोगो को  नेपथ्य भेज दिया, क्योंकि उनका  रायपुर  लोकसभा  का कड़वा अनुभव  ही विधान सभा चुनाव में जीत दिलाने में कारगर साबित हुआ  है !
हमने इस मुद्दे को लेकर पिछले चुनाव में कांग्रेस के  जुड़े  चुनाव विश्लेषकों  से भी उनका अनुभव जानना चाहा उनका इस विषय पर यह कहना है की , रायपुर दक्षिण से प्रत्याशी बदलना या हारने के बाद प्रत्याशी द्वारा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और जनता को भगवान भरोसे छोड़ना कांग्रेस की हार का बड़ा कारण बनते रहा है । विधान सभा हारने के बाद एक दिन भी कार्यकर्ताओं  साथ नहीं छोड़ा,  जाना चाहिए बल्कि निरंतर कार्यकर्ताओ से जिवंत सम्पर्क नहीं रहने के कारण और  अंतिम समय में प्रत्यासी का चयन ही हार का बड़ा कारण रायपुर दक्षिण विधानसभा में चुनाव हारने का  रहा है  !
रायपुर दक्षिण की पराजय के लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार बताने वाले तथाकथित नेता ही हार के लिए जिम्मेदार हैं । कार्यकर्ता का कभी सौदा नहीं होता, उनके ही दम पर घर-घर तक प्रत्याशी पहुंचता है और वोटर निकलता है किन्तु बहुत से ऐसे लोग जिनकी जमीनी हकीकत शून्य होती है, स्वयंभू नेता बनकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाते और कार्यकर्ताओं को बदनाम करते हैं ।
अभी विधान सभा चुनाव को समय है तब तक कई परिस्थितियाँ बदलेंगी बिगड़ेंगी क्योंकि राजनीति में परिवर्तन होते रहते हैं हमने वर्तमान  परिस्थितियाँ का आंकलन करते हुए अपने विचार रखे हैं,   

मो  शोएब जकारिया 

डयरेक्टर 

*खुलासपोस्ट न्यूज़ नेटवर्क 
*गरजा छत्तीसगढ़ न्यूज़ डॉट कॉम 
*द  न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा  हिन्दी / अंग्रेजी
संपर्क :- 9669667383 ​

 

 

19-Oct-2020

Leave a Comment