मो  शोएब जकारिया ....

बस्तर में पत्रकारो को खतरा किससे है, पुलिस से या माओवादियों से   !

छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर में  पत्रकारों की सुरक्षा को  हमेशा से एक बड़ा मुद्दा बना कर कुछ चन्द लोगो के ही द्वारा बार बार  सवाल क्यों उठाया जाता  रहा है ? "क्या" छत्तीसगढ़ के हालात कश्मीर से ज्यादा बद्तर है। "क्या" यहाँ अघोषित आपात काल लगा हुआ है ? "क्या" ये तथा कथित पत्रकारों के पैरोकार ये बताना चाहेंगे की बस्तर के पत्रकारों के लिए इन्होंने क्या किया है सिवाय आंदोलन की धमकी देने के, अगर  इनके बारे में  हक़ीकत लिखे तो सरकार के पैरोकार कहा जाता हैं, लेकिन सच तो सच ही है जिसे अब सामने लाना जरूरी हो गया है।
ये वही लोग है जो पिछली  भाजपा सरकार  को भी बस्तर मे पत्रकारों की सुरक्षा के नाम पर जी भर -भर  के गालियाँ दिया करते थे, तब डॉ रमन सिंह खलनायक थे अब भूपेश बघेल खलनायक बन गए है, अब समझना है की हक़ीकत में इनके पीछे कौन खलनायक है  ?
पिछली बार बस्तर के कथित एक  IPS  को खलनायक बनाने में  इन लोगों ने कोई कोर कसर् नही छोड़ रखा था  उस IPS अधिकारी को हटाने शोसल मीडिया में  दिन रात एक किये हुए थे, और उसको हटा कर ही दम लिया *ये वही तथाकथित पत्रकार लोग है*जिन्हे इसी तरह की हरकतो के लिए अवार्ड दिया जाता है । क्योंकि ये उस समय भी सरकार को दोषी ठहरकर शोसल मीडिया में  पोस्ट डाला करते थे ,अब कांकेर के IAS को हटाने की जिद में अड़ कर प्रतिष्ठा का सवाल बना कर  अब कांग्रेस की सरकार इनके लिए बुरी हो गई है। क्योकि इन पत्रकारों को कोई मीडिया भाव नहीं  देता , इनकी बहुत सी शिकायतों और आदतों के कारण ये वैसे भी पत्रकार जगत में बदनाम है   और अपना काला कारनामा छुपाने आये दिन पत्रकार सुरक्षा का आड़ लेकर अपने गुनाहो को छिपाते है  ? 
इन्ही के एक वरिष्ठ पत्रकार साथी का  डेरा एक समय में जेल रोड के पुराने अरण्य भवन में हुआ करता था, वह वरिष्ठ फॉरेस्ट अधिकारी  इनका सबसे बड़ा शिकार हुआ करता था ? इनके ब्लैकमेल के चलते बेचारा IFS इनके परिवार को नौकरी भी लगाया और ब्लैकमेल भी होता रहा याने जिस थाली में  इन लोगों खाया उसी में छेद कर दिया!बाद में वही और लोगों को नौकरी लगाने के नाम पर इन्ही लोगों ने उन बेरोजगार युवाओं से पैसे ऐंठे वो आज भी इनको ढूँढ रहे हैं, ये इतने गंदे है की बिलाईगढ़ की दुष्कर्म पीड़िता के मुवाएजे में मिले रकम हड़प लिए बेचारी रो रो कर शिकायत करती रही उसके लिखे आवेदन आज भी गवाही दे रहे हैं और ये शोसल मीडिया में अपने आपको रॉबिंनहूड दिखाने की  कोशिश में लगे रहते है वही ये पत्रकार सुरक्षा की माँग कर रहे हैं ।  ये वही लोग है जिन्होंने  छत्तीसगढ़ के एक वरिष्ठ  IAS  अधिकारी को ब्लैकमेल करने के जुर्म में जेल दाख़िल होना पड़ा अभी भी अदलतो के चक्कर लगा रहे है, और माँग रहे हैं पत्रकार सुरक्षा ?
मेरे खुद के भी कई IAS IFS राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी दोस्त है  इसका मतलब ये तो नही की उन्ही को ब्लैकमेल करने लग जाऊ लेकिन इनमें से एक ने मेरे निकट के सभी लोगों की RTI से जानकारी मांगी, कुछ ना मिलने पर बगले झांकने लगे ,इनकी सबसे गलत आदत है अधिकारीयो और राज नेताओ की ब्लैकमेलिंग करना है मैंने इसी लिए ऐसे लोगों को अपने संस्थान से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया जो संस्थान के नाम पर वसूली करते थे जिसके तथ्यात्मक सबूत है हमारे पास ।
लेकिन हर कोई इन जैसा नहीं है,
छत्तीसगढ़ में हज़ारो की तदात में पत्रकार ईमानदारि से मीडिया संस्थानों मे काम कर रहे है जिन्हे किसी संस्था या संगठन की जरूरत नहीं है । वैसे भी इनकी आदतों को खराब कुछ अवसर वादी भरष्ट् नेताओं ने किया है जो होली दिवाली में लाइफ़ाफ़े बाँट कर  इन्हे लालची बनाते रहे क्योंकि वे नेता भी भ्रष्ट थे और अपने साथ पत्रकारों को भी भ्रस्ट बना दिया।
पत्रकारिता एक सम्मान जनक कार्य है, जिसे सभी वर्ग सम्मान करता है, पत्रकार, एक शब्द नहीं है ? पत्रकारिता तपस्या है जिसे कुछ लोगों ने बदनाम किया हुआ है,
पत्रकार, एक शब्द नहीं है ? पत्रकार और पत्रकारिता एक साधना है, जिसे भारतीय सविधान ने लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना है, जिसका सम्मान देश का हर वर्ग करता है। पत्रकारिता के इतिहास पर नजर डाले तो स्वतंत्रता के पूर्व पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता प्राप्ति का लक्ष्य था। स्वतंत्रता के लिए चले आंदोलन और स्वाधीनता संग्राम में पत्रकारिता ने अहम और सार्थक भूमिका निभाई। उस दौर में पत्रकारिता ने पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोने के साथ-साथ पूरे समाज को स्वाधीनता की प्राप्ति के लक्ष्य से जोड़े रखा। तब तो पत्रकार सुरक्षा का कही नामों निशान नहीं था, लेकिन  अपने काले कारनामे पर पर्दा डालने चंद स्वार्थी  तत्वों ने पत्रकारो का हित चिंतक बनकर पत्रकारों के हितों का कम और पत्रकार संघ और संगठन का ज्यादा भला करने में लगे हुए हैं और कभी बस्तर के पत्रकारों कभी छत्तीसगढ़ के सभी पत्रकारों की दुहाई दे कर सुरक्षा की माँग करते हैं लेकिन आज इस बात को समझना जरूरी है की बस्तर में जिन से अपनी जान की हीफाज़त की दुहाई देते हैं हक़ीकत में उनकी विचारधारा उन्हीं से अधिक मिलती हैं, तभी तो पुलिस ने कडा कदम उठाने की कोशिश की और खलनायक बन गई!


 

05-Oct-2020

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