लेख : एम.एच.जकरीया 

वर्ष 2018 के लगते ही छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू हो गई है इस बार का चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय होने वाला है जहाँ कांग्रेस कह रही है की यह सीधे बीजेपी और कांग्रेस के बीच चुनावी मुकाबला है तो वहीँ जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस भी दावा कर रहा है की यह मुकाबला जोगी कांग्रेस और बीजेपी के बीच है. भले ही जनता कांग्रेस और कांग्रेस अपना पक्ष मजबूत बताए और जीत हासिल करने के दावे ठोके लेकिन सत्ताधारी पार्टी बीजेपी भी इनसे टकराने के लिए एक तरह से चट्टान की तरह खड़ा हुआ है, बीजेपी पिछले विधानसभा व लोकसभा चुनाव के परिणाम के आधार पर हर बूथ के लिए मंत्री, सांसद से लेकर वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की फौज तैयार कर चुकी है.

हालाँकि इस बार बीजेपी के लिए यह चुनाव आसान नहीं होगा क्योंकि कुछ मंत्रियो का विवादों में फंसा रहना भी एक कारण है, लेकिन बीजेपी के लिए राहत की बात यह है की अभी विपक्ष और विपक्ष की ‘तुकड़ी’ (अलग हुई पार्टी) दोनों आपस में एक दूसरे पर हमला बोलने में जुटे हुए हैं वहीँ सत्ताधीश बीजेपी धीरे-धीरे अपने काम में लगा है और  चौथी पारी के लिए कमर कस ली है। बीजेपी अपनी तमाम खामियों को दुरुस्त करने में जुट गया है।

खासतौर पर उन सीटों पर जोर आजमाइश ज्यादा है, जहां बीजेपी कमजोर हो रही है। बीजेपी ने इस बार 66 सीटो पर जीत दर्ज करने का लक्ष्य रखा है चूंकि लक्ष्य बड़ा है और उस लक्ष्य को साधने संगठन के सामने चुनौतियों की लंबी फेहरिस्त है, लिहाजा कवायद तेज हो गई है।  


कांग्रेस पार्टी में जहाँ गुटबाजी की खबरे आती रहती है वहीँ बीजेपी भी इसका कुछ-कुछ शिकार होते नजर आ रही है, ऐसा हम दावा नहीं करते परन्तु करीब 3-4 महीने पहले बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव सरोज पांडे ने यह कहकर माहौल गरमा दिया है कि अगले मुख्यमंत्री का चयन पार्टी आलाकमान तय करेगी. सरोज पांडे का यह बयान मुख्यमंत्री रमन सिंह को सीधे चुनौती देने वाला माना जा रहा है. सरोज पांडे ने बीजेपी कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री का राग छेड़कर बीजेपी नेताओं के बीच अच्छी-खासी बहस छेड़ दी.

इस बयान के पहले भी कोरबा में उन्होंने राज्य में बीजेपी नेतृत्व को लेकर ऐसा ही बयान दिया था. और वही बयान उन्होंने फिर दोहराया कि छत्तीसगढ़ में अगली सरकार बनने पर सीएम कौन बनेगा इसका फैसला चुनाव के बाद होगा. तो पार्टी महासचिव के सुर में सुर मिलाते हुए राज्य के गृह मंत्री राम सेवक पैकरा ने भी कहा कि चौथी बार मुख्यमंत्री कौन बनेगा इस पर फैसला राष्ट्रीय कार्यसमिति ही लेगी. 

दरअसल बीजेपी के भीतर नेताओं का एक दबाव समूह बन गया है. जो एन केन प्रकारेण मौजूदा मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने के लिए जोर आजमाइश में जुटा है. इसके लिए आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग पार्टी फोरम में उठाई जा रही है. इसके पीछे दलील दी जा रही है कि छत्तीसगढ़ का निर्माण ही आदिवासी राज्य के रूप में किया गया था. तत्कालीन समय इस वर्ग की भावनाओं का आदर करते हुए कांग्रेस आलाकमान ने बतौर आदिवासी मुख्यमंत्री अजित जोगी की ताजपोशी की थी. राज्य के आदिवासी नेता इसकी मिसाल देते हुए बीजेपी आलाकमान से भी आदिवासी को मुख्यमंत्री बनाये जाने की मांग कर रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने लगातार तीसरी बार कांग्रेस को धूल चटाई है. हालांकि 2003, 2008 और 2013 में वोटों का अंतर लगातार घटता गया है. 2013 के विधानसभा चुनाव में यह अंतर घटकर एक फीसदी से भी कम हो गया. जहां बीजेपी को 42.34 फीसदी वोट मिले, वहीं कांग्रेस को 41.57 फीसदी. इस तरह से वोटों का अंतर सिमटकर 0.7 फीसदी तक आकर रह गया है.
अंतु-परंतु के बीच कुछ राजनीतिक परिस्थितियां भाजपा के भी अनुकूल है. इसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण है पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के नेतृत्व में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ की मौजूदगी. यह कांग्रेस की ही बी पार्टी है जिसे मुख्यमंत्री रमन सिंह तीसरी शक्ति मानते हैं तथा चुनाव में त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति बताते हैं। यह स्थिति उनके लिए मुफीद है. चुनाव में इस पार्टी की उपस्थिति से भाजपा विरोधी वोटों का विभाजन होगा जिससे पार्टी की राह आसान हो जाएगी।

बिलकुल वैसे ही जैसे वर्ष 2003 में हुआ था एक प्रकार से 2003 फिर अपने आप को दुहराएगा. उस चुनावी वर्ष में जो नए राज्य के रुप में छत्तीसगढ़ का पहला विधानसभा चुनाव था, विद्याचरण शुक्ल के नेतृत्व में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने कांग्रेस के प्रतिबद्ध वोटों का ऐसा विभाजन किया कि भाजपा सत्ता में आ गई. एनसीपी प्रदेश में कांग्रेस की बी पार्टी थी जो भाजपा की जीत का कारण बनी. इस समय भी वही परिस्तिथियाँ है इस बार बी पार्टी का नेतृत्व अजीत जोगी कर रहे हैं. हो सकता है इसका लाभ फिर बीजेपी को मिले ऐसे में बीजेपी चाहेगी अगला चुनाव त्रिकोणीय हो ताकि उसकी संभावनाएं जीवंत रहे

15-Feb-2018

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