लेख : एम.एच. जकरीया 

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने छत्तीसगढ़ के वर्तमान मुख्यमंत्री और भाजपा का चेहरा डॉ रमन सिंह के विरुद्ध चुनाव लड़ने का फैसला किया है। जो की चौकाने वाला है, आज तक कांग्रेस के नेता अजित जोगी को डॉ रमन सिंह का साथ देने वाला सहयोगी बता कर आरोप लगाते रहे हैं,  अगर हकीकत में ऐसा होने वाला है तो राजनाँदगाँव का चुनाव पुरे भारत देश में कौतुहल का केन्द्र होगा !

वैसे भी कांग्रेस हमेशा से जोगी जी पर भाजपा को सहयोग देने का आरोप लगाते रहे हैं शायद उनका ये निर्णय अपने आप को राजनैतिक रूप से परखने का हो सकता है वैसे कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने इसे मिली जुली गीदड़ भबकी बता कर कटाक्ष किया है  | वैसे इस निर्णय पर जनता की मुहर लगाने और चुनावी शंखानंद करने, जोगी जी 11 फरवरी को रायपुर से राजनांदगांव जाने वाले है, ऐसा उनके द्वारा कहा जा रहा है की राजनांदगांव की जनता के बीच इस निर्णय की अधिकृत घोषणा करेंगे।

अजित जोगी ने फेसबुक लाइव में जनता को सम्बोधित करते हुए अपने बयान में उन्होंने कहा है की डॉ. रमन सिंह से छत्तीसगढ़ के दुखी किसानों का बदला, हताश, बेरोजगार युवाओं का बदला, पीड़ित महिलाओं का बदला और परेशान व्यापारियों का बदला लेने और इन वर्गों का भाग्य बदलने, अजीत जोगी ने, मुख्यमंत्री रमन सिंह के विरुद्ध चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। छत्तीसगढ़ को भ्रष्टाचार-मुक्त अत्याचार-मुक्त, बेरोजगारी-मुक्त और शराब-मुक्त बनाने के लिए, रमन-मुक्त करना आवश्यक है इसलिए अजीत जोगी  मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के विरुद्ध चुनाव लड़ेंगे और उन्हें पराजित कर छत्तीसगढ़ के नवनिर्माण की नींव रखेंगे ।

 वैसे चुनाव में हार जीत का फैसला तो जनता करती है लेकिन अचानक से इस तरह का ऐलान कई तरह से चौकाने वाला है | वैसे राजनैतिक हलको में ये भी चर्चा का विषय है की जोगी दबाव बनाने के लिए इस तरह की चौकाने वाली घोषणा करते रहते है, अब ये तो आने वाला समय ही बतायेगा की वहां किस तरह की राजनैतिक स्थिति बनती है, वैसे किसी भी तरह से डॉ. रमन सिंह को कमजोर समझना भी उनकी नादानी होगी क्योकि शुरुवात से ही राजनांदगांव उनका कर्म क्षेत्र रहा है छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने अपने विकास कार्यो के चलते राजनांदगांव का काया पलट कर दिया है अब वो 15 साल पहले वाला राजनांदगांव नहीं रहा और ना ही पहले वाली सोच वाली जनता, की इतनी आसानी से मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को टक्कर दे सके और उन्हें हरा सके ये निश्चित तौर पर जोगी के लिए आत्मघाती कदम माना जायेगा, क्योकि उनकी नव निर्मित राजनैतिक पार्टी जोगी कांग्रेस छत्तीसगढ़ में पहली बार चुनावी मैदान में उतरने वाली है ऐसे में जोगी जी एक ही विधानसभा चुनाव क्षेत्र में घिरना नहीं चाहेंगे, वो अपनी पूरी ताक़त से छत्तीसगढ़ में अपनी राजनैतिक स्थिति को मज़बूत करने एड़ी–चोटी का जोर लगा देंगे, ऐसे में राजनांदगांव विधान सभा से मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के विरुद्ध उनका चुनाव लड़ना उनकी अपनी ही पार्टी के लिए घातक साबित हो सकता है !

अभी विधानसभा चुनाव में समय है अभी कई तरह के फैसले और समीकरण बदलेंगे क्योंकि  राजनीति में कुछ भी स्थिर नहीं होता, राजनेता अपने राजनैतिक फायदे के लिये इस तरह की घोषणाएं करते रहते है, वैसे जिस तरह से वर्तमान में राजनैतिक माहौल दिखाई दे रहा है कुछ भी कहना मुनासिब नहीं होगा !

छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस से अलग हुए अजित जोगी राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते रहे है पिछले 15 वर्षो से छत्तीसगढ़ की राजनीति में जितनी कठिनाई और विरोध तरह-तरह के आरोपों को झेलने के बाद भी उन्होंने सभी प्रतिकूल परिस्थियों  का डटकर मुकाबला किया है इसमें कोई दो राय नहीं है | आने वाले  वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव अजित जोगी का राजनैतिक भविष्य तय करेगा क्योकि ये उनके लिए अब आर-पार की लड़ाई है |

सोशल इंजिनियरिंग में माहिर खिलाड़ी माने जाने वाले अजित जोगी को हल्का समझना कांग्रेस– भा जपा को फिर से भारी पड़ने वाला है, क्योकि पदयात्रा और रैली की भीड़ देख कर अति उत्साहित हो रहे कांग्रेस के बड़े नेता ये बेहतर समझते है की विधानसभा चुनाव आने पर टिकट बाँटने के बाद कई टिकट के दावेदार इधर से उधर होने वाले है क्योंकि उस समय संगठन की वफादारी नहीं वो अपना अस्तित्व बचाने में सारी निष्ठा भूल जायेंगे | वैसे भी कांग्रेस ने अपनी पुराने नेतृत्व पर भरोसा किया है, कई जिलाध्यक्ष और पदाधिकारियों के बदले जाने की सम्भावना है ऐसे में अभी बहुत कुछ अभी होना बाकि है, क्योकि राजनीती में कुछ भी नहीं कहा जा सकता |

वैसे देखा जाये तो कांग्रेसियों की नजर में यह बदलाव संभावनाओं से भरा नज़र आ रहा है और इसके कई सकारात्मक पक्ष भी हैं। वर्तमान में मैडम जोगी के कांग्रेस से जाने के बाद और जो बची खुची संभावनाएँ थी वो भी अब खतम हो गई है | पिछले 16 साल से चल रही कांग्रेस में नेतृत्व की लड़ाई का एक अध्याय तो निश्चित ही अब समाप्त हो गया है। वहीं अब दूसरी ओर जोगी के सामने खुद को  स्वतंत्र रूप से प्रदेश की राजनीति में अपनी ताक़त दिखाने का पूरा मौका मिला है ? अब देखना है की अजित जोगी अपनी पार्टी को स्थापित करने से लेकर एक-एक समर्थक जुटाने और उन्हें अपने मतदाता के रूप में तैयार करने और राजनैतिक चुनौती को सार्थक करने में कितना कामियाब हो पाते है ये तो आने वाला समय ही तय करेगा लेकिन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के लिए 2 की लड़ाई में फायेदा ज़रूर होने वाला है गुजरात की तरह छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस के पास मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं है जिस पर जनता भरोसा कर सके ।

लेकिन भाजपा के लिए जोगी जी की नई पार्टी से  सतनामी समाज के प्रभाव वाले सीटों को बचाने की चिंता है। वहीं, कुछ आदिवासी सीटों पर भी जोगी के प्रभाव से कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में कही ऐसा ना हो की जोगी जी की राजनीती का उदय हो और वो किंग मेकर की भूमिका में आ जाये और कांग्रेस और भाजपा को उनसे ही आस लगानी पड़ जाये क्योकि जनता का मूड कब किस करवट पलट जाये ये तो आने वाला समय ही बतायेगा लेकिन कांग्रेस और भाजपा की अब पहले जैसी स्थिति नहीं रह गई है और ना ही वो परम्परा गत वोट बैंक बचे है जो आँखे मूंदकर इन्हें वोट दे दिया करते थे ! इसका बहतर उदाहरण उत्तरप्रदेश -बिहार -गुजरात -मध्यप्रदेश – से समझ सकते है जहाँ इनकी गुटबाजी और  हठधर्मिता के कारण इनसे सत्ता इनके हाथ से चली गई ? राजनीतिक के प्रेक्षक अभी से इस आंकलन में जुट गए हैं कि जोगी छत्तीसगढ़ के चुनाव में कितने प्रभावी हो सकते हैं या रहेंगे । आंकलन की परीक्षा के लिए 2018 तक तो इंतजार करना ही होगा ?

14-Feb-2018

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