विशेष लेख: तेजबहादुर सिंह भुवाल 

छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी- नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी से आत्मनिर्भर बनते किसान

जैसा कि हम सभी जानते हैं गौमाता का हमारे जीवन में कितना महत्व है। कई युगों से गौवंशीय पशुओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उनके प्रति संवेदना एवं पर्याप्त सुविधा एवं सुरक्षा की व्यवस्था के लिए आमजन प्रगतिशील रहा। सदियों से गौमाता मनुष्यों की सेवा से उनके जीवन को सुखी, समृद्ध, निरोग एवं सौभाग्यशाली बनाती चली आ रही है। गौ माता की सेवा से हजारों पुण्य प्राप्त होते हैं। इसकी सत्यता का उल्लेख अनेक ग्रंथों, वेद, पुराणों में किया गया हैं। एक समय था जब मनुष्य अपने घरों में गाय पालते थे, उनकी सच्चे मन से सेवा करते थे। पर समय के परिवर्तन के साथ-साथ मनुष्यों ने गौ माता को घर के बाहर छोड़ कर विदेशी कुत्ते, बिल्ली पालना शुरू कर दिया है, जिस पर लाखों रूपए खर्च करते है। लोग अपने स्वार्थ के कारण गांव हो या शहर सड़कों पर गायों को बेसहारा छोड़ देते है। मोटर गाडी की चपेट में आने के कारण बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं हो जाती है, जिससे पशुओं और मनुष्यों की जान चली जाती है।

प्रायः देखने में आता था कि प्रदेश की विभिन्न गौ शालाओं में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उन्हें चारा, पानी की कमी, देखभाल के अभाव में सैकड़ों गाये दम तोड़ देती है। इसकी जिम्मेदारी लेना वाला कोई नहीं। राज्य में वर्षों से खुले में चराई की परंपरा रही है। इससे पशुओं के साथ-साथ किसानों की फसलों का भी नुकसान होता रहता है। गाय पालक दूध निकालने के बाद उन्हें खुले में छोड़ देते हैं। लेकिन अब राज्य में ऐसा नहीं होगा।

प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पशुपालकों को लाभ पहुंचाने के लिए ‘‘गोधन न्याय योजना‘ के माध्यम से गोबर खरीदने की नई योजना बनाई है। यह देश का पहला राज्य होगा जहां गौपालन को लाभप्रद बनाने, गोबर प्रबंधन और पर्यावरण सुरक्षा के लिए योजना शुरू होगी। छत्तीसगढ़ राज्य में गौ-पालन को आर्थिक रूप से लाभदायी बनाने तथा खुले में चराई की रोकथाम तथा सड़कों एवं शहरों में जगह-जगह आवारा घुमते पशुओं के प्रबंधन एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए गोधन न्याय योजना शुरू करने का ऐलान किया गया है। इस योजना की शुरूआत राज्य में 20 जुलाई को हरेली पर्व के दिन से की जाएगी।

‘‘गोधन न्याय योजना‘ से पशु पालक अपने पशुओं के चारे-पानी का प्रबंध करने के साथ-साथ उन्हें बांधकर रखेंगे, ताकि उन्हें, दूध एवं गोबर मिल सके, जिसे वह बेचकर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सके। शहरों में आवारा घूमते पशुओं की रोकथाम, गोबर क्रय से लेकर इसके जरिए वर्मी खाद के उत्पादन तक की पूरी व्यवस्था प्रशासन करेगा। वर्मी कम्पोस्ट के जरिए किसान जैविक खेती की ओर बढेंगे। गोधन न्याय योजना के माध्यम से तैयार होने वाले वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री सहकारी समितियों के माध्यम से होगी। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में गौपालन को बढ़ावा देने के साथ ही उनकी सुरक्षा और उसके माध्यम से पशुपालकों को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाना है। इससे बड़ी संख्या में ग्रामीण जनों को रोजगार प्राप्त होंगे। छत्तीसगढ़ में किसानों को उपज की सही कीमत दिलाने के लिए ‘‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’’ की भी शुरुआत की जा चुकी है। 

इसके तहत किसानों को 5750 करोड़ रुपए की आदान सहायता सीधे उनके खातों में अंतरित की जा रही है। इसकी पहली किस्त के 1500 करोड़ रुपए योजना के पहले ही दिन, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर जारी की जा चुकी है। दूसरी किस्त 20 अगस्त राजीव जयंती पर जारी की जाएगी। यह पूरी राशि चार किश्तों में जारी की जा रही है। पहली किस्त बारिश की शुरुआत के ऐन पहले मिल जाने पर किसान पूरे उत्साह के साथ खेती-किसानी में जुटे हुए हैं।

प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी ने सरकार में आने के बाद छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी के माध्यम से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने का प्रयास किया है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘‘सुराजी गांव योजना’’ अंतर्गत गांव का विकास एवं पुरानी कृषि परंपराओं को पुर्नजीवित किया जा रहा है। ‘‘नरवा, गरवा, घुरवा अउ बाड़ी’’ योजना इसी का एक हिस्सा है। गांवों में पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए गौठानों का निर्माण किया जा रहा है। राज्य के 2200 गांवों में गौठानों का निर्माण पूर्ण हो चुका है और 2800 गांवों में गौठानों का निर्माण किया जा रहा है। आने वाले दो-तीन महीनों में 5000 गोठानों का निर्माण करने का लक्ष्य है। शासन द्वारा सभी ग्राम पंचायतों में गौठानों के सुचारु संचालन के लिए 10 हजार रूपए प्रति माह प्रत्येक गोठान को दिए जाने की व्यवस्था की गई है।

शासन के कार्य योजना अनुसार गौठानों को बहुउद्देशीय केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें जरूरी उपकरण और मशीनरी उपलब्ध कराने के साथ पशुओं के लिए शेड निर्माण और स्वसहायता समूहों के लिए वर्क शेड के निर्माण, चारागाह और सामूहिक बाड़ियों में फेंसिंग, भण्डारण कक्ष, पशु चिकित्सा कक्ष, बायो गैस संयंत्र की स्थापना, पानी की व्यवस्था जैसे कार्य कराए जा रहे हैं। गौठानों में विभिन्न गतिविधियों के लिए महिला स्व-सहायता समूहों को दायित्व सौंपे गयें हैं। गौठानों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा जैविक खाद का निर्माण, फेंसिंग पोल का निर्माण, सब्जी उत्पादन इत्यादि गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

पर्यावरण के संरक्षण के लिए प्रदेश में वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है, जिसके लिए बड़ी संख्या में फल और छायादार पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत मनरेगा के तहत विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण सार्वजनिक स्थानों, सरकारी स्कूल, कॉलेज, भवनों, सड़क किनारे, गौठान, चारागाह सहित उन स्थानों पर भी किए जाएंगे जहां पर सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। आगामी वर्षों में इन फलदार वृक्षों से महिला स्व सहायता समूहों, ग्रामीणों की आजीविका भी निर्मित होगी। पौधों में नीम, शीशम, मुनगा, सीताफल, इमली, आम, नीबू, जामुन, अमलवास, कटहल, करंज, गुलमोहर, अमरूद, आंवला, कोसम, महुआ आदि छायादार एवं फलदार पौधे गौठान एवं चारागाह में रोपे जाएंगे। इससे पूरे प्रदेश में हरियाली आएगी वहीं मनरेगा के पंजीकृत मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिलेगा।

नरवा योजना अंतर्गत जमीन में जल का स्तर बनाए रखने के उद्देश्य से सभी मौसम में नदी, तालाब, डबरी में पर्याप्त मात्रा में पानी भरा रहे इसके लिए बंद पड़े नहर, नाले एवं छोटी नदियों को एक-दूसरे से जोड़कर पानी का भराव बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे किसान भाईयों को खेती, किसानी एवं अन्य उपयोग के लिए बारहमासी पानी मिल सकेगा। प्रदेश के सभी नदी, नलों एवं तालाबों के किनारे वृहद स्तर पर वृक्षारोपण भी किया जा रहा है। इसी प्रकार घुरवा और बाड़ी योजना अंतर्गत गौवंशी पशुओं के गोबर को एकत्रित कर जैविक खाद निर्माण कराया जा रहा है और गांव-गांव में बाड़ी बनवाकर सब्जियों की पैदावारी करने जागरूक किया जा रहा है, जिससे सभी किसान भाई अपने घरों, बाडियों से पर्याप्त मात्रा में सब्जी की खेती कर अतिरिक्त आमदानी प्राप्त कर सके। इसी प्रकार 19 जून से ग्रामीण अंचलों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों मे ’रोका-छेका’ अभियान भी चलाया जा रहा है। रोका-छेका अभियान से जहां फसलों और मवेशियों की सुरक्षा होगी, वहीं शहरी क्षेत्रों में खुले में घूमने वाले मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटना से भी निजात मिलेगी।

इन सभी योजनाओं से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ राज्य को पर्यावरण संरक्षण का बढ़ावा मिलेगा। चारों तरफ हरियाली का वातावरण निर्मित होगा और प्रदेश पूर्ण रूप से प्रदूषण मुक्त होगा। पर्यावरण को शुद्ध रखने एवं संतुलन बनाए रखने के लिए आमजनों को भी वृक्ष लगाने जागरूक किया जाएगा। प्रदेश में इन सभी प्रयासों से गौवंश पशुओं का संवर्धन एवं संरक्षण होगा, वही उनसे दूध, दही, घी, गोबर, गौमूत्र प्राप्त होगा और इन पदार्थों से बहुत सी उपयोगी सामग्रियों का निर्माण भी किया जा सकेगा। इस प्रयास से लोगों को शुद्ध और जैविक सामग्री प्राप्त होगी। इन प्रयासों से लोगों का स्वस्थ्य ठीक रहेगा और वे निरोगी रहेंगे।

29-Jun-2020

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