एम.एच. जकरीया  की कलम से 

कांग्रेस पार्टी में एक बड़ी बुरी परम्परा चली आ रही है, कुछ धनाड्य और कथित ऊँची पहुँच वाले जुगाडू सेटिंग बाज़ नेता अपनी सुविधाओ के हिसाब से चुनाव लड़ने के लिए अपनी सीट बदलते रहते है ! वर्ष 2018  में छत्तीसगढ़ राज्य में आगामी विधान सभा के चुनाव होने जा रहे है ऐसे में कांग्रेस पार्टी में उम्मीदवारों में चुनाव में अपनी टिकट को लेकर उथल - पुथल मची हुई है | कुछ ही कांग्रेस के नेताओ को छोड़ दिया जाये तो अधिकतर दिग्गज नेताओं की हालत इस चुनाव में पतली नज़र आ रही है ! और उनके जीत पाने की सम्भावना भी लगभग गौण है, ऐसे में कुछ कांग्रेस के हारे हुए पूर्व विधायक किसी और विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की जुगाड़ में लगे हुए है ! लेकिन कांग्रेस आला कमान के सूत्रों से सुनाई में आ रहा है की AICC के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गाँधी का स्पष्ट आदेश है की जो जहाँ से चुनाव लड़ा है उसे दूसरे विधानसभा से टिकट नहीं दिया जायेगा, तब से दूसरे के विधानसभा क्षेत्र में नज़र गड़ाए नेताओ के पसीने छूटने लगे है |

छत्तीसगढ़ में भी जैसे जैसे विधानसभा चुनाव 2018 निकट आते जा रहे हैं वैसे-वैसे राजनीतिक दलों की चुनावी तैयारियां तेज होते जा रही हैं. हालाँकि चुनाव वर्ष के अंतिम अक्टूबर-नवम्बर माह में होने को है लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों ने चौतरफा मोर्चा बंदी करना शुरू कर दिया  है । इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के प्रभारी कांग्रेस पार्टी के महासचिव पी.एल. पुनिया ने अपनी रणनीति पर राहुल गाँधी से मुहर लगवाकर चुनावी जंग के लिए कमर कसने की घोषणा कर दी है । 

लेकिन कांग्रेस का मुख्यमंत्री का चेहरा स्पष्ट नहीं हो रहा है। क्यों की कांग्रेस में टिकट बॅटवारे के बाद ही स्थिति साफ होगी की कांग्रेस कितनी मज़बूती के साथ चुनावी समर में कामियाबी का डंका बजाने वाली है, क्योकि चुनाव लड़ने की  मह्त्वकांक्षा पाले हुए कई नेताओ की कांग्रेस के प्रति वफादारी तब स्पष्ट हो जाएगी और इनमे से कई जोगी कांग्रेस और भाजपा में पलटी मार सकते है क्योकि आज भी कांग्रेस के बड़े पदों पर वही फूल छाप कांग्रेसी है जिन्हे संगठन की वफादारी से कोई लेना देना नहीं है उन्हें केवल सत्ता सुख चाहिए वैसे इस टाइप के एक दो नेताओ ने तो अभी से अपने हारे हुए क्षेत्र को छोड़ कर दूसरे विधानसभा क्षेत्र में दौरा करना शुरू भी कर दिया है ऐसे में उन विधानसभा क्षेत्र के ज़मींन से जुड़े कार्यकर्ताओ का मनोबल टूटना स्वाभाविक है और पार्टी से पलायन और बगावत होने की पूरी सम्भावना है और कांग्रेस की हार का एक बड़ा कारण यह भी है कि, कांग्रेस में फूल छाप कांग्रेसी ही सत्ता सुख का आनंद लेते है बाकि निष्ठावान कार्यकर्ता मनमसोस कर रह जाते है, क्योकि कथित पूंजीपति रण-छोड़ दास फूल छाप कांग्रेसी अपने पैसो से टिकट खरीदते है और उस क्षेत्र के कार्यकर्ताओ को चंद पैसो में खरीदकर अपना गुलाम समझने लगते है ,जिससे वफादार कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता घर बैठना पसंद करते है और यही कांग्रेस पार्टी के पतन का कारण बनता जा रहा है |

छत्तीसगढ़ राज्य में पिछले करीब 15 वर्षो से कांग्रेस सत्ता से बाहर है, और बहुत हद तक कांग्रेस का सत्ता से बाहर रहने की वजह है की कांग्रेस अपनी परम्परागत वोट खोती चली जा रही है, एक समय इन्ही पूंजीपतियों और सामंतवादी नेताओ को दलित,पिछड़े,अल्पसंख्यक और आदिवासी वोट आँख मूंदकर मिल जाते थे लेकिन अब ये समाज जागृत हो चूका है और अपने अधिकार अच्छे से समझता है और यही कांग्रेस की हार की वज़ह है अब वो समय लद गए की चंद पैसो से वोट खरीद लिये जाये ? 

आज का जागरूक मतदाता अब समझदार हो गया है वो अब किसी भावना में बहने वाला नहीं है ,इसलिए पूरी समझदारी से प्रत्याशियों का चयन ही जीता सकता है कांग्रेस को आने वाले चुनाव में, नहीं तो चंद पैसो के लिए जैसे पद बेचा जा रहा है वैसे विधानसभा चुनाव के टिकटो की बोली लगी तो सत्ता में वापसी की उम्मीद छोड़ दो 

03-Feb-2018

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